Chambalkichugli.com

देशवासियों को पीएम मोदी का संदेश, संकट में संयम, सतर्कता और एकजुटता बनाए रखें

नई दिल्ली:प्रधानमंत्री मोदी ने देशवासियों से बार-बार अपील की है कि वह जागरूक रहें और अफवाहों के बहकावे में ना आएं। नई दिल्ली में पश्चिम एशिया में जारी युद्ध के कारण भारत के सामने उत्पन्न चुनौतियों के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देशवासियों को संदेश दिया कि कठिन परिस्थितियों में भी संयम और सतर्कता बनाए रखना आवश्यक है। उन्होंने अपने संबोधन में कहा कि हम सब मिलकर इन संकटों से अच्छी तरह बाहर निकलेंगे। प्रधानमंत्री मोदी ने रविवार को रेडियो कार्यक्रम “मन की बात” के 132वें एपिसोड के जरिए राष्ट्र से संवाद किया। इस दौरान उन्होंने कहा कि देशवासियों को चाहिए कि वह सरकारी स्रोतों से मिलने वाली जानकारी पर भरोसा करें और उसी के आधार पर किसी भी कदम को आगे बढ़ाएं। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि अफवाहों और झूठी खबरों के कारण समाज में अस्थिरता पैदा हो सकती है। उन्होंने अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए कहा कि जैसा कि देश ने पहले भी कठिन परिस्थितियों में अपनी 140 करोड़ जनता की सामर्थ्य से संकटों का सामना किया है, वैसे ही इस बार भी हम सब मिलकर इस कठिनाई से बाहर निकलेंगे। प्रधानमंत्री ने मार्च महीने की वैश्विक घटनाओं का जिक्र करते हुए कहा कि पूरी दुनिया कोविड के कारण लंबी समस्याओं से गुजर रही थी और सभी को उम्मीद थी कि महामारी के बाद दुनिया नई प्रगति की ओर बढ़ेगी। लेकिन दुर्भाग्य से अलग-अलग क्षेत्रों में युद्ध और संघर्ष की परिस्थितियां लगातार बनी रहीं, जिससे वैश्विक स्थिरता प्रभावित हुई। प्रधानमंत्री मोदी ने विशेष रूप से खाड़ी देशों का आभार व्यक्त किया, जहां भारतीय नागरिक बड़ी संख्या में कार्यरत हैं। उन्होंने बताया कि पड़ोसी देशों में वर्तमान में भीषण युद्ध चल रहा है, और हमारे लाखों परिवारों के सदस्य वहां रहकर रोज़मर्रा की चुनौतियों का सामना कर रहे हैं। खाड़ी देशों ने भारतीय नागरिकों को हर प्रकार की मदद मुहैया कराई है और उनके प्रयासों के लिए प्रधानमंत्री मोदी ने उन्हें धन्यवाद दिया। प्रधानमंत्री ने यह भी कहा कि हमें इस समय संयम और धैर्य के साथ काम करने की आवश्यकता है। उन्होंने देशवासियों से यह अपील की कि वे किसी भी अफवाह या सोशल मीडिया की झूठी खबर पर विश्वास न करें और हमेशा सत्यापित जानकारी ही स्वीकार करें। उनका संदेश स्पष्ट था कि संकट चाहे जितना बड़ा क्यों न हो, जब देशवासियों का सामूहिक सामर्थ्य और एकता सामने आती है तो हर मुश्किल परिस्थिति का सामना किया जा सकता है। प्रधानमंत्री मोदी ने अपने संदेश में आशा और विश्वास के भाव व्यक्त किए और कहा कि भारत की जनता हर चुनौती का सामना करने में सक्षम है। उन्होंने नागरिकों से यह भी आग्रह किया कि वे अपने पड़ोसियों, परिवार और समाज के लोगों को भी सतर्क रहने और अफवाहों से बचने की सीख दें। उनका यह संदेश न केवल सतर्कता का था बल्कि यह लोगों में एकजुटता और देशभक्ति की भावना को भी प्रोत्साहित करता है।

अगले हफ्ते कैसी रहेगी शेयर बाजार की चाल? ऑटो सेल्स, GST और कच्चा तेल तय करेंगे दिशा

नई दिल्ली भारतीय शेयर बाजार के लिए आने वाला हफ्ता बेहद अहम रहने वाला है। नए वित्त वर्ष 2026-27 की शुरुआत के साथ कई ऐसे बड़े फैक्टर सामने आएंगे, जो बाजार की दिशा तय करेंगे। कंपनियों की नजर दूसरी कंपनियों पर ऑटो सेल्स डेटा, GST कलेक्शन, कच्चे तेल की कीमतें और वैश्विक तनाव पर टिकी रहेगी। 1 अप्रैल के आंकड़े दिखाएंगे अर्थव्यवस्था की सेहत1 अप्रैल को ऑटो कंपनियां अपनी बिक्री के आंकड़े जारी करेंगी, वहीं सरकार गुड्स एंड सर्विसेज टैक्स (GST) कलेक्शन डेटा पेश करेगी। ये आंकड़े देश में मांग (डिमांड) की स्थिति का साफ संकेत देंगे। अगर आंकड़े मजबूत रहे, तो बाजार में पॉजिटिव माहौल बन सकता है। कच्चे तेल की कीमतें बढ़ना बना चिंता का कारणवैश्विक स्तर पर तनाव के चलते कच्चे तेल की कीमतों में भारी उछाल देखने को मिला है। ब्रेंट क्रूड ऑयल की कीमत करीब 105 डॉलर प्रति बैरल के आसपास पहुंच चुकी है। भारत अपनी जरूरत का लगभग 80% तेल आयात करता है, इसलिए कीमतों में बढ़ोतरी से महंगाई और बाजार दोनों पर दबाव बढ़ सकता है। मध्य पूर्व तनाव से बढ़ते अनिश्चिततायूनाइटेड स्टेट्स, इज़राइल और ईरान के बीच जारी तनाव और संघर्ष का असर भी बाजार पर साफ दिख रहा है। इस जियोपॉलिटिकल अनिश्चितता के चलते निवेशक सतर्क रुख अपना रहे हैं। FII का रुख बना रहेगा निवेशकविदेशी निवेशक (FII) पिछले कई हफ्तों से लगातार बिकवाली कर रहे हैं। अगर यह ट्रेंड जारी रहता है, तो बाजार पर दबाव बना रह सकता है। वहीं, अगर FII खरीदारी शुरू करते हैं, तो बाजार में तेजी से देखने को मिल सकती है। पिछले हफ्ते बाजार में रही गिरावट23 से 27 मार्च के बीच बाजार में कमजोरी देखी गई: निफ्टी 50 करीब 1.28% गिरकर 22,819 पर बंद हुआBSE सेंसेक्स 1.27% गिरकर 73,583 पर पहुंच गया मिडकैप और स्मॉलकैप रिकवरी में भी गिरावट दर्ज की गई, जिससे बाजार का सेंटिमेंट कमजोर रहा। किन सेक्टर्स पर रहा दबाव, कौन चमका?पिछले हफ़्ते: डिफेंस, PSU बैंक, रियल्टी और मेटल सेक्टर में बड़ी गिरावटIT, हेल्थकेयर और फार्मा सेक्टर में तेज़ी से गिरावट इससे साफ़ है कि इन्वेस्टर डिफेंसिव सेक्टर की ओर झुक रहे हैं। इन्वेस्टर के लिए क्या है स्ट्रैटेजी?आने वाला हफ़्ता डेटा और ग्लोबल लेवल पर आधारित रहेगा। ऐसे में: जल्दबाजी में निवेश से बचेंबड़े इवेंट्स पर नज़र रखेंसेक्टर-बेस्ड स्ट्रैटेजी अपनाएं

पीएम मोदी ने मन की बात में जल संरक्षण का संकल्प दोहराने की अपील की, त्रिपुरा-तेलंगाना-छत्तीसगढ़ के गांवों को सराहा

नई दिल्ली: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने रेडियो कार्यक्रम ‘मन की बात’ की ताज़ा कड़ी में देशवासियों से जल संरक्षण के अपने संकल्प को दोहराने की अपील की। उन्होंने कहा कि पिछले 11 वर्षों में ‘जल संचय अभियान’ ने लोगों में जागरूकता पैदा की है और अब गांव-गांव में सामुदायिक स्तर पर जल संरक्षण के प्रयास शुरू हो गए हैं। पीएम मोदी ने विशेष रूप से बताया कि अमृत सरोवर अभियान के तहत देशभर में लगभग 70 हजार सरोवर बनाए गए हैं और बारिश से पहले उनकी साफ-सफाई भी हो रही है। प्रधानमंत्री मोदी ने त्रिपुरा, तेलंगाना और छत्तीसगढ़ के गांवों में हुए प्रेरक प्रयासों का जिक्र करते हुए बताया कि कैसे छोटे प्रयास बड़े बदलाव की ओर ले जा सकते हैं। उन्होंने कहा कि त्रिपुरा की जंपुई पहाड़ियों में वांगमुन गांव 3000 फीट की ऊंचाई पर बसा है और वहां पहले पानी की कमी गंभीर समस्या थी। गर्मियों में गांव के लोग पानी के लिए लंबी दूरी तय करते थे। लेकिन गांववासियों ने मिलकर बारिश का पानी सहेजने का संकल्प लिया और अब लगभग हर घर में ‘रूफटॉप रेनवाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम’ स्थापित है। यह गांव जल संरक्षण की प्रेरक मिसाल बन गया है। छत्तीसगढ़ के कोरिया जिले में भी किसानों ने छोटे-छोटे रिचार्ज तालाब और सोखता गड्ढे बनाकर बारिश के पानी को खेतों में रोकने और धीरे-धीरे जमीन में जाने का असर सुनिश्चित किया। प्रधानमंत्री ने बताया कि अब 1200 से अधिक किसान इस मॉडल को अपनाकर अपने क्षेत्र में भूजल स्तर सुधारने में सफल रहे हैं। इसी तरह तेलंगाना के मंचेरियाल जिले के मुधिगुंटा गांव के लोगों ने मिलकर अपने घरों में सोख गड्ढे बनाए और जल संरक्षण का एक जन-आंदोलन खड़ा किया। इससे गांव का भूजल स्तर सुधरा है और प्रदूषित पानी से होने वाली बीमारियों में भी कमी आई है। पीएम मोदी ने कहा कि जल संकट से निपटना सिर्फ सरकार की जिम्मेदारी नहीं बल्कि सामूहिक प्रयास की जरूरत है। उन्होंने जोर देकर कहा कि हमें जल संरक्षण के प्रति अपनी जिम्मेदारी को गंभीरता से लेना होगा और गांव-गांव में इस दिशा में किए गए छोटे प्रयासों को पूरे देश में प्रेरणा के रूप में देखना चाहिए। उन्होंने लोगों से अपील की कि वे अपने घरों और आसपास के इलाकों में जल संचयन के उपाय अपनाएं और जल को बचाने के लिए अपनी आदतों में बदलाव लाएं। प्रधानमंत्री ने यह भी बताया कि पिछले 11 साल में जल संचय अभियान और अमृत सरोवर जैसी पहलें देशभर में व्यापक रूप से फैल चुकी हैं। अब हर क्षेत्र में जल संरक्षण की नई मिसालें बन रही हैं और ये अनुभव अन्य गांवों के लिए प्रेरणा बन रहे हैं। पीएम मोदी ने देशवासियों से कहा कि जल हमारी जीवनधारा है और इसे बचाना हर नागरिक की जिम्मेदारी है। उन्होंने यह सुनिश्चित करने की बात कही कि जल संरक्षण के प्रयास केवल योजनाओं तक सीमित न रहें बल्कि रोजमर्रा की जीवनशैली में भी इसका पालन किया जाए।

हनुमान जयंती 2 अप्रैल को, बजरंगबली को प्रसन्न करने करें ये आसान और अचूक उपाय

नई दिल्ली। हर साल चैत्र माह की पूर्णिमा के दिन हनुमान जयंती मनाई जाती है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन संकटमोचन हनुमान जी का जन्म हुआ था। इस वर्ष हनुमान जन्मोत्सव 2 अप्रैल 2026 को मनाया जाएगा। इस दिन पूरे विधि-विधान से हनुमान जी की पूजा और उपासना की जाती है। मंगलवार का विशेष महत्व हनुमान जी का जन्म मंगलवार को हुआ था, इसलिए हर मंगलवार उनकी विशेष पूजा होती है। इसके अलावा शनिवार भी हनुमान जी को प्रिय माना गया है। त्रेता युग में चैत्र पूर्णिमा की सुबह हनुमान जी का जन्म हुआ था, उनके माता-पिता अंजनी और केसरी थे। भगवान शिव के अवतार हिंदू ग्रंथों के अनुसार हनुमान जी महादेव के 11वें अवतार माने जाते हैं। वे बल, बुद्धि और विद्या के दाता हैं और अष्ट सिद्धि एवं नवनिधि के स्वामी हैं। हनुमान जी को संकटमोचन कहा जाता है, क्योंकि उनकी पूजा और व्रत रखने से जीवन के संकट दूर होते हैं। अष्ट चिरंजीवी में शामिल धर्मग्रंथों में हनुमान जी को आठ अमर पात्रों में से एक माना गया है। अन्य सात हैं अश्वत्थामा, बलि, महर्षि वेद व्यास, विभीषण, कृपाचार्य, परशुराम और मार्कण्डेय। इनका रोज स्मरण करने से लंबी आयु और निरोगी जीवन मिलता है। पूजा विधि हनुमान जयंती के दिन ब्रह्म मुहूर्त में उठकर पूजा करनी चाहिए।घर की सफाई और गंगाजल से पवित्रता करें।मंदिर या घर पर हनुमान जी की पूजा करते समय सिंदूर और चोला अर्पित करें।चमेली का तेल चढ़ाने से भगवान प्रसन्न होते हैं।जल, पंचामृत, अबीर, गुलाल, अक्षत, फूल, धूप-दीप और भोग अर्पित करें।सरसों के तेल का दीपक जलाएं।पान का बीड़ा जिसमें गुलकंद और बादाम हो, अर्पित करें।हनुमान चालीसा, सुंदरकांड और हनुमान आरती का पाठ करें। हनुमान जी के 12 नाम ॐ हनुमान, ॐ अंजनी सुत, ॐ वायु पुत्र, ॐ महाबल, ॐ रामेष्ठ,ॐ फाल्गुण सखा, ॐ पिंगाक्ष, ॐ अमित विक्रम, ॐ उदधिक्रमण,ॐ सीता शोक विनाशन, ॐ लक्ष्मण प्राण दाता, ॐ दशग्रीव दर्पहा। राशि अनुसार मंत्र मेष: ॐ सर्वदुखहराय नमःवृषभ: ॐ कपिसेनानायक नमःमिथुन: ॐ मनोजवाय नमःकर्क: ॐ लक्ष्मणप्राणदात्रे नमःसिंह: ॐ परशौर्य विनाशन नमःकन्या: ॐ पंचवक्त्र नमःतुला: ॐ सर्वग्रह विनाशिने नमःवृश्चिक: ॐ सर्वबन्धविमोक्त्रे नमःधनु: ॐ चिरंजीविते नमःमकर: ॐ सुरार्चिते नमःकुंभ: ॐ वज्रकाय नमःमीन: ॐ कामरूपिणे नमः

पीएम मोदी ने 'मन की बात' में सराहा मछुआरों का महत्व, बंदरगाह और नवाचार से बढ़े आत्मनिर्भर प्रयास

नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने रेडियो कार्यक्रम ‘मन की बात’ की 132वीं कड़ी में देश के मछुआरों के योगदान को सराहा और उन्हें केवल समुद्र के योद्धा नहीं बल्कि आत्मनिर्भर भारत की मजबूत नींव बताया। पीएम मोदी ने कहा कि हमारे मछुआरे भाई-बहन हर दिन सुबह होने से पहले समुद्र की लहरों से जूझते हैं और अपने परिवार के साथ-साथ देश की अर्थव्यवस्था को मजबूती देने में जुट जाते हैं। उन्होंने बताया कि आज उनके जीवन को आसान बनाने के लिए कई प्रयास किए जा रहे हैं। बंदरगाहों का विकास, मछुआरों के लिए बीमा और तकनीक के उपयोग से उनकी मेहनत का फल अब अधिक सुरक्षित और बेहतर ढंग से मिल रहा है। प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि समुद्र में मछुआरों की गतिविधियों पर मौसम का बड़ा प्रभाव पड़ता है। इसे ध्यान में रखते हुए तकनीक का इस्तेमाल करके उन्हें पूरी मदद दी जा रही है। इससे मत्स्य पालन क्षेत्र में न केवल समृद्धि आई है बल्कि नवाचार के नए द्वार भी खुले हैं। समुद्री शैवाल और मछली पालन के क्षेत्र में नए तरीके अपनाकर मछुआरे आत्मनिर्भर बन रहे हैं। पीएम मोदी ने ओडिशा की सुजाता भूयान की कहानी साझा की। सुजाता जी एक गृहणी थीं लेकिन उन्होंने कुछ नया करके अपने परिवार की मदद करना चाहा। उन्होंने हीराकुंड जलाशय में मछली पालन शुरू किया। शुरुआती दिनों में मौसम, मछलियों का खाना और घर की जिम्मेदारियों के संतुलन जैसी कई चुनौतियां थीं, लेकिन उनका हौसला अडिग था। केवल दो-तीन वर्षों में उनका प्रयास फलता-फूलता उद्योग बन गया। उनकी सफलता अब समुदाय की महिलाओं के लिए प्रेरणा बन चुकी है। लक्षद्वीप के मिनीकॉय की हाव्वा गुलजार ने भी मछली उद्योग में अपनी अद्भुत संकल्प-शक्ति दिखाई। वह पहले एक फिश प्रोसेसिंग यूनिट चलाती थीं, लेकिन उन्होंने बेहतर प्रबंधन और बिक्री के लिए कोल्ड स्टोरेज यूनिट लगाने का निर्णय लिया। आज इसी योजना से उनका कारोबार और मजबूत हुआ और वे बेहतर प्लानिंग के साथ मछली उद्योग चला पा रही हैं। पीएम मोदी ने बेलगावी के शिवलिंग सतप्पा हुद्दार के प्रयास का भी उल्लेख किया। उन्होंने पारंपरिक खेती से अलग तालाब-खेत का निर्माण किया और प्रशिक्षण प्राप्त कर मछलियों की बिक्री से अच्छा लाभ कमाया। वहीं समुद्री शैवाल की खेती करने वाले कई लोग इस क्षेत्र में अच्छा व्यवसाय कर रहे हैं और इससे लाभ कमा रहे हैं। प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि देश में इस तरह के कई प्रेरक प्रयास हो रहे हैं। मछुआरों के इन प्रयासों से न केवल उनके जीवन में बदलाव आया है बल्कि देश की अर्थव्यवस्था भी मजबूत हुई है। उन्होंने मत्स्य पालन क्षेत्र में कार्यरत सभी लोगों की सराहना की और कहा कि उनका योगदान आत्मनिर्भर भारत की नींव को मजबूत करने में अहम भूमिका निभा रहा है।

अंतरिक्ष का अनोखा तरीका: बिना गुरुत्वाकर्षण के ऐसे पानी पीते हैं अंतरिक्ष यात्री

नई दिल्ली अंतरिक्ष में, विशेष रूप से अंतर्राष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन (आईएसएस) पर, माइक्रोग्रेविटी होती है। अर्थात गुरूत्व बहुत काम होता है। ऐसे तूफ़ान में पानी नीचे गिरा की जगह छोटे-छोटे सोने के पत्तों में तूफ़ान जैसा दिखता है। यही कारण है कि सामान्य कप के रूप में पृथ्वी वहां लाभदायक साबित होती है पानी कप में टिकट ही नहीं। पहले कैसे थे पानी?शुरुआत में एस्ट्रोनॉट्स प्लास्टिक प्लास्टिक और स्ट्रो जैसे टुकड़े का प्रयोग किया जाता था। यह तरीका निश्चित रूप से सुरक्षित था, लेकिन इसमें “घूंट लेकर पीने” जैसा अनुभव नहीं था। फूला या चाय की चटनी और स्वाद भी ठीक नहीं लगता। ‘जीरो-जी कप’ क्या है?इस समस्या का समाधान नासा के एस्ट्रोनॉट डॉन पेटिट ने आउट किया। उन्होंने एक सामान्य खास डिजाइन वाला जीरो-जी कप तैयार किया, जिससे अंतरिक्ष में भी कप की तरह का सिप लेकर पानी या फुला पी जा सकता है। यह कप कैसे काम करता है? (सरल विज्ञान)जीरो-जी कप का जादू दो वैज्ञानिक सिद्धांतों पर रुका है: सतही तनाव (सतह तनाव)केपिलरी एक्शन (केपिलरी एक्शन) कप का डिज़ाइन टियर-ड्रॉप (आंसू) जैसा होता है और इसमें एक चिप गिल्ली (चैनल) बनी होती है। जब भी पानी डाला जाता है, तो वह कप की दीवारों से चिपक जाता हैसैन्सरी नाली का पानी ऊपर की ओर खींचा जाता हैधीरे-धीरे पानी कप के किनारे तक पहुँच जाता है जैसे ही एस्ट्रोनॉट कप को स्टॉक तक बेचा जाता है, पानी खुद ही किनारे पर आ जाता है और वे सामान्य तरीकों से सिप ले सकते हैं। ये खास क्यों है?बिना स्ट्रॉ के पीने का अनुभवफुलाए/चाय की अनुभूति संभव हैतरल पदार्थ का टूटना नहीं होताछलकने का ख़तरा कम मानसिक आराम भी देता हैअंतरिक्ष में लंबे समय तक जीवित रहना मानसिक रूप से परिवर्तनशील होता है। ऐसे में “घर का अनुभव जैसा” – जैसे कप से चाय फ़्रैंक – एस्ट्रोनॉट्स को आराम और सामान्य अनुभव मिलता है। जीरो-जी कप सिर्फ एक पॉश्चर नहीं, बल्कि विज्ञान और जरूरत का सबसे अच्छा मेल है। इसमें दिखाया गया है कि नासा कैसे छोटे-छोटे आवेदकों के लिए भी बड़े-बड़े इनोवेशन करती है-ताकीस्पेस में जीवन आसान और इंसान बनाया जा सके।

गर्मी में क्यों जरूरी है सौंफ का सेवन? जानिए इसके जबरदस्त फायदे

नई दिल्ली गर्मी के मौसम में पेट से जुड़ी चुनौतियां जैसे गैस, अपच, एसिडिटी और सूजन तेजी से बढ़ रही हैं। ऐसे में हर छोटी परेशानी के लिए दवा लेना जरूरी नहीं है। आपके नुस्खे में मौजूद है एक ऐसा आसान और असरदार घरेलू उपाय, जो शरीर को ठंडक पहुंचाने के साथ-साथ पाचन को भी ठीक करता है। आयुर्वेद में सौंफ का खास महत्वआयुर्वेद के अनुसार सौंफ पित्त दोष को स्नातक करने में मदद मिलती है। गर्मियों में शरीर में गर्माहट को शांत करने के लिए रोजाना सौंफ का सेवन बेहद माना जाता है। यह शरीर को अंदर से ठंडी बना देता है और पेट से जुड़ी समस्याओं को जड़ से कम कर देता है। पाचन तंत्र को मजबूत बनाता हैखाने के बाद एक खाद्य पदार्थ सौंफ चबाने से पाचन क्रिया बेहतर होती है। यह पेट में बनने वाली गैस और ब्लोटिंग को कम करती है। अगर भारीपन या अपच की समस्या बनी हुई है, तो आपको तुरंत राहत का काम करना है। विशेष रूप से समरलैण्ड में जब एनीमेशन का प्रदर्शन होता है, तब सौंफ अत्यंत घटिया साबित होता है। सौंफ की चाय से सरकारी राहतसौंफ की चाय समुद्र तट में एक बेहतरीन स्वास्थ्य पेय है। यह सिर्फ पेट की गर्मी को कम नहीं करता है, बल्कि शरीर को रिलेक्स भी करता है। ऑफिस की थकान या होटल के दौरान होने वाली संकट में भी सौंफ की चाय काफी मजेदार होती है। इसका प्रभाव मीठा स्वाद और भी खास है। एंटीऑक्सीडेंट और एंटी-एकांत गुणधर्म से परिपूर्णतासौंफ में मौजूद एंटीऑक्सिडेंट और एंटी-सटीक गुण शरीर को संक्रमण से बचाने में मदद करते हैं। यह कोष्ठबद्धता, पेट दर्द और ज़ाहिलों की समस्याओं को दूर करने में सहायक है। साथ ही यह इंटरनेट सिस्टम को भी मजबूत बनाता है।सौंफ का सेवन कैसे करें?सौंफ़ का सेवन कई लाभार्थियों से किया जा सकता है- भोजन के बाद सौंफ चौबएंसौंफ का पानी पीएंसौंफ की चाय छोड़ेंसौंफ और मिश्री के साथ लें की चाय बनाने के लिए एक कप पानी में एक परिमाण सौंफ वाल्व 5-10 मिनट के लिए और फिर गुडकर पी लें। सावधानी भी जरूरी हैहालाँकि सौंफ स्वादिष्ट है, लेकिन इसके अधिक मात्रा में सेवन से नुकसान भी हो सकता है। विशेष रूप से गर्भवती महिलाओं को इसका सेवन डॉक्टर की सलाह से ही करना चाहिए। गर्मियों में रोजमर्रा की जिंदगी में थोड़ी-सी सौंफ का सेवन करने से आप पेट की समस्याओं से बचकर शरीर को ठंडा और स्वस्थ बना सकते हैं। यह एक सस्ता, आसान और असरदार घरेलू उपाय है, जिसे अपने में शामिल करना जरूरी है।

युद्ध का सीधा असर इंदौर के उद्योगों पर 30 फीसदी तक महंगा कच्चा माल शटडाउन की आशंका

इंदौर । मध्यप्रदेश के औद्योगिक क्षेत्रों पर इज़राइल ईरान संघर्ष का असर अब साफ तौर पर दिखाई देने लगा है जहां कच्चे माल की कीमतों में भारी बढ़ोतरी और सप्लाई में बाधा ने उद्योगों के सामने गंभीर संकट खड़ा कर दिया है। खासतौर पर इंदौर जैसे बड़े औद्योगिक केंद्रों में हालात तेजी से बदल रहे हैं और कई यूनिट्स अब उत्पादन घटाने या सीमित करने को मजबूर हो गई हैं। उद्योग जगत के मुताबिक कच्चे माल की कीमतों में 20 से 30 प्रतिशत तक की बढ़ोतरी दर्ज की गई है जबकि लॉजिस्टिक लागत 4 से 5 गुना तक बढ़ चुकी है। इसका सीधा असर उत्पादन लागत पर पड़ रहा है जिससे तैयार उत्पाद महंगे हो रहे हैं और बाजार में प्रतिस्पर्धा बनाए रखना मुश्किल होता जा रहा है। स्थिति यह है कि 10 से 15 प्रतिशत उद्योग अब दो शिफ्ट की बजाय केवल एक शिफ्ट में ही काम कर रहे हैं जबकि कुछ जगहों पर शटडाउन की नौबत बनती दिख रही है। सबसे ज्यादा असर फार्मा इंडस्ट्री पर देखा जा रहा है जहां दवाइयों के निर्माण में उपयोग होने वाले कच्चे माल के दाम तेजी से बढ़े हैं। पैरासिटामॉल जैसे सामान्य उत्पाद के कच्चे पाउडर की कीमत एक ही दिन में 290 रुपए से बढ़कर 360 रुपए प्रति किलो तक पहुंच गई। इसके अलावा प्लास्टिक दाना और अन्य पैकेजिंग सामग्री भी महंगी हो चुकी है जिससे उत्पादन लागत और बढ़ गई है। इंदौर के पीथमपुर सांवेर रोड और पालदा जैसे औद्योगिक क्षेत्रों में स्थित हजारों उद्योगों की लगभग 60 प्रतिशत निर्भरता मिडिल ईस्ट से आने वाले कच्चे माल पर है। बहरीन कतर और सऊदी अरब जैसे देशों से बल्क ड्रग्स और पेट्रोकेमिकल्स की सप्लाई प्रभावित होने के कारण उत्पादन पर सीधा असर पड़ा है। वहीं स्ट्रेट ऑफ होर्मुज क्षेत्र में तनाव के चलते अंतरराष्ट्रीय शिपिंग भी प्रभावित हुई है जिससे चीन और यूरोप से आने वाला माल भी समय पर नहीं पहुंच पा रहा। एक तरफ जहां कच्चे माल की कमी है वहीं दूसरी ओर उसकी कीमतें लगातार बढ़ रही हैं। इससे उद्योगों को दोहरी मार झेलनी पड़ रही है। फुटवियर और प्लास्टिक उद्योगों में लागत 20 से 30 प्रतिशत तक बढ़ गई है जबकि मुनाफा सीमित होने के कारण कारोबारी नुकसान की स्थिति में पहुंच रहे हैं। एलपीजी की कमी ने स्थिति को और गंभीर बना दिया है। उद्योगों को अब पीएनजी पर निर्भर होना पड़ रहा है और गैस कंपनियों ने उधार की सुविधा भी बंद कर दी है जिससे तत्काल भुगतान का दबाव बढ़ गया है। इसके अलावा कंटेनर भाड़ा 5 गुना तक बढ़ने और बीमा मिलने में दिक्कतों के कारण एक्सपोर्ट भी प्रभावित हो रहा है। उद्योग संगठनों का कहना है कि यदि हालात अगले 10 से 15 दिनों तक नहीं सुधरे तो कई फैक्ट्रियों को अस्थायी रूप से बंद करना पड़ सकता है। खासकर फार्मा और केमिकल सेक्टर में स्थिति ज्यादा संवेदनशील है क्योंकि इनकी निर्भरता आयातित कच्चे माल पर अधिक है। कुल मिलाकर वैश्विक तनाव का यह असर अब स्थानीय उद्योगों तक पहुंच चुका है और यदि जल्द समाधान नहीं निकला तो इसका प्रभाव न केवल उत्पादन बल्कि रोजगार और बाजार पर भी गहराई से पड़ सकता है।

बॉक्स ऑफिस क्वीन्स: टॉप 10 एक्ट्रेसेस जिनकी फिल्मों ने की सबसे ज्यादा कमाई, नंबर 1 चौंकाएगी

नई दिल्ली।भारतीय सिनेमा में कई ऐसी एक्ट्रेसेस हैं, जिन्होंने अपने दम पर फिल्मों को सुपरहिट बनाया और बॉक्स ऑफिस पर रिकॉर्डतोड़ कमाई की। खास बात यह है कि इन फिल्मों ने सिर्फ भारत में ही नहीं, बल्कि वर्ल्डवाइड भी शानदार कलेक्शन किया। आइए जानते हैं उन टॉप 10 एक्ट्रेसेस के बारे में, जिनकी फिल्मों ने सबसे ज्यादा कमाई की है। 1. Anushka Shetty – ‘Baahubali 2: The Conclusion’ (1788.06 करोड़)इस लिस्ट में पहला स्थान अनुष्का शेट्टी का है। उनकी फिल्म ‘बाहुबली 2’ भारतीय सिनेमा की सबसे बड़ी ब्लॉकबस्टर फिल्मों में से एक रही, जिसने दुनियाभर में रिकॉर्डतोड़ कमाई की। 2. Rashmika Mandanna – ‘Pushpa 2: The Rule’ (1742.10 करोड़)रश्मिका मंदाना की फिल्म ‘पुष्पा 2’ ने बॉक्स ऑफिस पर तूफान ला दिया। इस फिल्म ने उन्हें पैन इंडिया स्टार बना दिया। 3. Nayanthara – ‘Jawan’ (1160 करोड़)नयनतारा की पहली हिंदी फिल्म ‘जवान’ ने जबरदस्त सफलता हासिल की और उन्हें बॉलीवुड में भी मजबूत पहचान दिलाई। 4. Deepika Padukone – ‘Pathaan’ (1055 करोड़)दीपिका पादुकोण की फिल्म ‘पठान’ ने बॉक्स ऑफिस पर इतिहास रचा और 1000 करोड़ क्लब में शामिल हुई। 5. Kareena Kapoor Khan – ‘Bajrangi Bhaijaan’ (911.8 करोड़)करीना कपूर की ‘बजरंगी भाईजान’ आज भी सबसे ज्यादा पसंद की जाने वाली फिल्मों में शामिल है। 6. Shraddha Kapoor – ‘Stree 2’ (857.15 करोड़)श्रद्धा कपूर की ‘स्त्री 2’ ने बॉक्स ऑफिस पर शानदार प्रदर्शन करते हुए रिकॉर्ड बनाए। 7. Anushka Sharma – ‘PK’ (792 करोड़)अनुष्का शर्मा की ‘पीके’ ने अपने अनोखे कॉन्सेप्ट के दम पर जबरदस्त कमाई की। 8. Aneet Padda – ‘Saiyaara’ (570.33 करोड़)अनीत पड्डा की फिल्म ‘सैयारा’ ने भी बॉक्स ऑफिस पर अच्छा प्रदर्शन किया और उन्हें इस लिस्ट में जगह दिलाई। 9. Katrina Kaif – ‘Tiger Zinda Hai’ (558 करोड़)कटरीना कैफ की ‘टाइगर जिंदा है’ एक्शन और कमाई दोनों में सफल रही। 10. Alia Bhatt – ‘Brahmāstra: Part One – Shiva’ (431 करोड़)आलिया भट्ट की ‘ब्रह्मास्त्र’ ने भी बॉक्स ऑफिस पर शानदार कमाई करते हुए इस लिस्ट में जगह बनाई। बदल रहा है सिनेमा का चेहरायह लिस्ट दिखाती है कि अब सिर्फ हीरो नहीं, बल्कि एक्ट्रेसेस भी फिल्मों की सफलता में बड़ी भूमिका निभा रही हैं। पैन इंडिया फिल्मों के दौर में इन अभिनेत्रियों ने अपनी दमदार मौजूदगी दर्ज कराई है।

पानी और विकास की डबल डोज इंदौर दौरे पर सीएम मोहन यादव देंगे हजारों करोड़ की योजनाओं की सौगात

इंदौर । मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री सीएम मोहन आज इंदौर दौरे पर रहेंगे जहां वे शहर को विकास की कई बड़ी सौगात देने जा रहे हैं। संकल्प से समाधान अभियान के तहत दशहरा मैदान में आयोजित कार्यक्रम में शामिल होकर वे विभिन्न योजनाओं के हितग्राहियों को लाभ वितरित करेंगे और साथ ही शहर की जल आपूर्ति व्यवस्था को मजबूत करने वाली महत्वपूर्ण परियोजनाओं का भूमिपूजन भी करेंगे। इस दौरे का सबसे अहम हिस्सा नर्मदा पेयजल परियोजना के चौथे चरण का भूमिपूजन है जिसे शहर के भविष्य के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। तेजी से बढ़ती आबादी और पानी की बढ़ती मांग को देखते हुए यह परियोजना इंदौर के लिए राहत का बड़ा माध्यम बनेगी। वर्तमान में शहर की जलापूर्ति नर्मदा नदी पर आधारित है जहां से लगभग 70 किलोमीटर दूर से पानी पंप कर शहर तक पहुंचाया जाता है। अब अमृत 2.0 योजना के तहत जल आपूर्ति को और अधिक सुदृढ़ और आधुनिक बनाने की दिशा में बड़े कदम उठाए जा रहे हैं। इस योजना के तहत शहर की जल क्षमता को वर्तमान स्तर से बढ़ाकर आने वाले वर्षों की जरूरतों के अनुरूप विकसित किया जाएगा। अनुमान है कि 2040 तक इंदौर की आबादी करीब 58 लाख से अधिक हो जाएगी जिसके लिए 1200 एमएलडी से ज्यादा पानी की आवश्यकता होगी। ऐसे में यह परियोजना भविष्य की जरूरतों को ध्यान में रखकर तैयार की जा रही है। भूमिपूजन के तहत कई बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर कार्य शुरू किए जाएंगे जिनमें लंबी पाइपलाइन बिछाना, आधुनिक टनल निर्माण और पानी की गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए क्लोरिनेशन सिस्टम की स्थापना शामिल है। इसके अलावा शहर में नए ओवरहेड टैंक बनाए जाएंगे और पुराने टैंकों का सुदृढ़ीकरण किया जाएगा जिससे पानी का वितरण अधिक प्रभावी और सुचारू हो सके। इस परियोजना के जरिए लाखों घरों तक नए जल कनेक्शन दिए जाएंगे और स्मार्ट वाटर मीटर लगाए जाएंगे जिससे 24 घंटे दबावयुक्त जलापूर्ति सुनिश्चित करने का लक्ष्य रखा गया है। खास बात यह है कि शहर में शामिल नए गांवों तक भी पहली बार नियमित जलापूर्ति पहुंचाई जाएगी जिससे वहां के लोगों को बड़ी राहत मिलेगी। इसके साथ ही मुख्यमंत्री सिरपुर तालाब के संरक्षण से जुड़ी एक महत्वपूर्ण परियोजना का लोकार्पण भी करेंगे। इस पहल के तहत सीवेज को सीधे तालाब में जाने से रोका जाएगा और आधुनिक तकनीक से उसका शोधन किया जाएगा। इससे न सिर्फ तालाब का पानी साफ होगा बल्कि उपचारित जल का उपयोग शहर के बगीचों और अन्य कार्यों में भी किया जा सकेगा। संकल्प से समाधान अभियान के तहत भी इंदौर जिले में बड़ी सफलता मिली है जहां लाखों आवेदनों का निराकरण कर हितग्राहियों तक योजनाओं का लाभ पहुंचाया गया है। इस अभियान के जरिए सरकार ने यह सुनिश्चित करने की कोशिश की है कि हर पात्र व्यक्ति तक योजनाओं का लाभ समय पर पहुंचे। कुल मिलाकर यह दौरा इंदौर के लिए विकास की दिशा में एक बड़ा कदम साबित हो सकता है जिसमें बुनियादी सुविधाओं से लेकर जल प्रबंधन तक कई अहम क्षेत्रों में सुधार की उम्मीद जताई जा रही है।