RBI की पहल से मजबूत हुआ रुपया, डॉलर के मुकाबले 1% की बढ़त के साथ खुला

नई दिल्ली।सोमवार को भारतीय मुद्रा में बढ़ोतरी देखने को मिली, जब भारतीय रिजर्व बैंक की नई पहल के बाद रुपया अमेरिकी डॉलर के मुकाबले करीब 1.3 प्रतिशत बढ़कर 93.59 पर खुला। हाल के दिनों में लगातार दबाव झेल रहे रुपए के लिए यह एक बड़ी राहत मानी जा रही है। सट्टेबाजी पर लगाम के लिए RBI का बड़ा कदमरुपए में बढ़ोतरी का मुख्य कारण RBI का वह निर्देश है, जिसमें बैंकों को विदेशी मुद्रा बाजार में अपनी खुली स्थिति 100 मिलियन डॉलर तक सीमित रखने को कहा गया है। केंद्रीय बैंक ने अधिकृत डीलर बैंकों को साफ निर्देश दिया है कि वे दिन के अंत तक अपनी ऑनशोर स्थिति इसी सीमा के भीतर रखें। साथ ही, सभी चालू बैंकों को 10 अप्रैल तक इस नियम को लागू करने के निर्देश दिए गए हैं। माना जा रहा है कि इससे बाजार में डॉलर की अटकलों पर रोक गिल और रुपए को स्थिरता मिलेगी। पहले गिरावट में था रुपयागौरतलब है कि मार्च के दौरान वैश्विक तनाव के कारण रुपया 4 प्रतिशत से ज्यादा कमजोर हो गया था। पिछले हफ़्ते यह करीब 94.84 के स्तर तक गिर गया था, जिससे बाज़ार में चिंता बढ़ गई थी। ऐसे में RBI का यह कदम बाज़ार में भरोसा बहाल करने के लिए अहम माना जा रहा है। कच्चे तेल की महंगाई बना दबावहालांकि रुपए पर अभी भी दबाव पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है। ब्रेंट क्रूड की कीमतें 116 डॉलर प्रति बैरल के आसपास बनी हुई हैं, जिससे भारत जैसे आयातक देश की चिंता बढ़ गई है। महंगाई तेल महंगाई को बढ़ती है और इससे रुपए पर नेगेटिव असर पड़ता है। वैश्विक तनाव और डॉलर की मांगपश्चिम एशिया में जारी तनाव, हूती विद्रोहियों की सक्रियता और अमेरिका की सैन्य गतिविधियों के चलते वैश्विक अनिश्चितता बनी हुई है। ऐसे माहौल में डॉलर की मांग बढ़ती है, जिससे उभरती अर्थव्यवस्थाओं की मुद्राओं पर दबाव पड़ता है। आगे क्या कह रहे हैं विशेषज्ञविश्लेषकों का दबाव है कि RBI का यह कदम अल्पकाल में रुपए को सहारा देगा। डॉलर की बड़ी स्थिति कम होने से बाजार में संतुलन आएगा और रुपए में बढ़ोतरी बनी रह सकती है। हालांकि, अगर कच्चे तेल की कीमतें ऊंची बनी रहती हैं और वैश्विक तनाव जारी रहता है, तो रुपए पर फिर से दबाव आ सकता है।
ग्वालियर में फर्जी सिम का भंडाफोड़: एक ही फोटो से सैकड़ों सिम सक्रिय, 1,000 रुपए में बेचे गए कनेक्शन

ग्वालियर। शहर में फर्जी सिम कार्ड के एक बड़े नेटवर्क का भंडाफोड़ हुआ है। एक पीओएस (पॉइंट ऑफ सेल) शॉप संचालक ने एक ही व्यक्ति के आधार और फोटो का इस्तेमाल कर सैकड़ों लोगों के नाम पर सिम जारी किए। मामला तब उजागर हुआ जब जिस व्यक्ति की फोटो सिम फॉर्म में इस्तेमाल हो रही थी, वह खुद पुलिस के पास पहुंचा। पुलिस का अनुमान है कि इन फर्जी सिम कार्ड्स का इस्तेमाल ऑनलाइन ठगी और साइबर फ्रॉड में किया गया होगा। अधिकारियों का कहना है कि इस खुलासे से कई अन्य साइबर फ्रॉड मामलों की कड़ियां जुड़ सकती हैं। जांच में सामने आया कि आरोपी उमेश कुशवाह (गिरवाई, मूल निवासी भिंड) ने अपने साथी आशीष नागर को इस नेटवर्क में शामिल किया। आशीष ग्राहकों की जगह अपनी फोटो लगाकर सिम सक्रिय करता था। हर सिम पर उसे लगभग 500 रुपए मिलते थे, जबकि उमेश एक सिम के लिए 1,000 से 1,500 रुपए वसूलता था। जांच के दौरान पता चला कि आरोपी को पुलिस कार्रवाई की भनक लग गई थी। उसने इंस्टाग्राम मैसेंजर पर अपने साथी को अंडरग्राउंड होने की सलाह दी। इस तरह सैकड़ों सिम कार्ड्स एक ही फोटो और आधार से फर्जी दस्तावेज के जरिए सक्रिय कर दिए गए। ऑपरेशन ‘FACE’ में पहली बड़ी कार्रवाईभोपाल मुख्यालय द्वारा चलाए जा रहे ऑपरेशन ‘FACE’ (फेशियल ऑथेंटिकेशन कम्प्लायंस इंफोर्समेंट) के तहत यह ग्वालियर में पहली बड़ी कार्रवाई है। झांसी रोड थाना पुलिस ने दोनों आरोपियों के खिलाफ धोखाधड़ी का मामला दर्ज किया है। एक ही इलाके के नाम पर सिम जारीपुलिस ने अब तक 7 फर्जी सिम बरामद किए हैं। ये सभी सिम गुढ़ा-गुढ़ी नाका क्षेत्र की प्रीतमपुर कॉलोनी और कुम्हारों के मोहल्ले के लोगों के नाम पर जारी किए गए थे, जबकि उनमें आशीष की फोटो लगी थी। जांच में बड़े खुलासे होने की उम्मीदपुलिस का कहना है कि यह सिर्फ शुरुआत है। जांच आगे बढ़ने पर फर्जी सिम नेटवर्क से जुड़े और भी बड़े खुलासे हो सकते हैं। अधिकारियों के अनुसार, इस नेटवर्क के खुलासे के बाद कई ऑनलाइन फ्रॉड में इन सिम कार्ड्स के इस्तेमाल की पुष्टि हो सकती है।
सोना और ईंधन की कीमत आज: सप्ताह की शुरुआत में सोना- सस्ता, पेट्रोल- डीजल की नई बिक्री जारी

नई दिल्ली। सप्ताह के पहले दिन सोमवार को सोने की जिले में गिरावट देखने को मिली। राजधानी दिल्ली में 24 कैरेट सोना स्टॉक प्रति 10 ग्राम ₹1,48,210 है। वहीं 22 कैरेट सोने का भाव ₹1,35,890 प्रति 10 ग्राम दर्ज किया गया। हालाँकि, एक सप्ताह में सोने की झील में बढ़त का आकलन भी किया गया था। 24 कैरेट सोना करीब ₹2,100 तक महंगा हुआ था। अलग-अलग डिज़ाइन में सोने के रेटदिल्ली: ₹1,48,210 (24K), ₹1,35,890 (22K)मुंबई और कोलकाता: ₹1,48,080 (24K), ₹1,35,740 (22K)शहर: ₹1,49,010 (24K), ₹1,36,590 (22K)बैंगलोर और पुणे: ₹1,48,080 (24K), ₹1,35,740 (22K)भोपाल और फ़ाइल: ₹1,48,110 (24K), ₹1,35,790 (22K) चाँदी भी हुईसोने के साथ-साथ चांदी की कीमत में भी गिरावट आई है। सोमवार सुबह सिल्वर का भाव ₹2,44,900 प्रति टिकट हो गया। पिछले हफ्ते सिल्वर में जबरदस्त रिलीज- देखने को मिला था। शुक्रवार को इसकी कीमत करीब ₹11,250 तक गिर गई थी। सोने और चांदी के उत्पादों से सिर्फ देश के लाभ से नहीं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय बाजार, डॉलर के डॉलर के डॉलर की स्थिति और कच्चे तेल के उत्पादों से भी प्रभावित होते हैं। पेट्रोल-डीजल की नई फैक्ट्रीदेश में हर दिन सुबह 6 बजे पेट्रोल और डीजल की नई मार्केटिंग कंपनियां चलती हैं। आज भी कई होटलों में मामूली बदलाव देखने को मिलते हैं।मुंबई: पेट्रोल ₹104.21 | डीजल ₹92.15कोलकाता: पेट्रोल ₹103.94 | डीजल ₹90.76शहर: पेट्रोल ₹100.75 | डीजल ₹92.34मुफ़्त: पेट्रोल ₹94.49 | डीजल ₹90.17बेंगलुरु: पेट्रोल ₹102.92 | डीजल ₹89.02पेट्रोल: ₹107.46 | डीजल ₹95.70जयपुर: पेट्रोल ₹104.72 | डीजल ₹90.21लखनऊ: पेट्रोल ₹94.69 | डीजल ₹87.80पुणे: पेट्रोल ₹104.04 | डीजल ₹90.57चंडीगढ़: पेट्रोल ₹94.30 | डीजल ₹82.45 आम आदमी पर क्या असर होता है?पेट्रोल-डीजल की दुकानों का सीधा असर आम लोगों की जेब पर पड़ता है। महंगे होने से खाने-पीने की कीमत भी बढ़ सकती है। वहीं सोने-पुराने यूरोप में बदलाव निवेश और शादी-ब्याह के सीजन में भी शानदार प्रदर्शन देखने को मिल रहा है। सप्ताह की शुरुआत में जहां सोना और चांदी चढ़े हैं, वहीं पेट्रोल-डीजल के मसालों में ज्यादा बड़ा बदलाव नहीं है। ऐसे में डायनासोर पर नजर रखना जरूरी है ताकि आप अपने खर्च और निवेश को बेहतर कर सकें।
ऑयल मार्केट में हलचल: कीमतों में जोरदार उछाल, साल के उच्चतम स्तर के पास

नई दिल्ली पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव का असर अब वैश्विक ऊर्जा बाजार पर साफ नजर आने लगा है। सोमवार को अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की 3 प्रतिशत से अधिक की तेज बढ़त दर्ज की गई। ब्रेंट क्रूड 3.66 प्रतिशत पैमाना 116.70 डॉलर प्रति पाउंड इंट्रा-डे हाई रीच तक पहुंच गया, जो 52 सामान्य के करीब है। वहीं डब्ल्यूटीआई क्रूड भी 3 प्रतिशत से अधिक उछालकर 103 डॉलर प्रति शेयर के पार पहुंच गया।पश्चिम एशिया तनाव बना सबसे बड़ा कारणतेल की इस तेजी की मुख्य वजह पश्चिम एशिया में बढ़ता भू-राजनीतिक तनाव है। विशेष रूप से यमन के होती विद्रोहियों के इस संघर्ष में शामिल हैं और इजराइल पर हमले के बाद हमले और हमले हुए हैं। हूती ग्रुप ने स्पष्ट संकेत दिए हैं कि जब तक उनके सहयोगी आतंकवादी हमले जारी रखेंगे, तब तक वे भी कार्रवाई करेंगे। इससे वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति को लेकर चिंता बढ़ गई है। अक्रियाशील होने का खतराविशेषज्ञ का मानना है कि अगर यह तनाव लंबे समय तक जारी रहता है, तो कच्चे तेल की विषाक्तता प्रभावित हो सकती है। विशेष रूप से होर्मुज जलडमरूमध्य में अहम समुद्री मील का पत्थर पर प्रभाव का खतरा है, जहां से दुनिया की बड़ी मात्रा में तेल की आपूर्ति होती है।मार्च महीने में ही ब्रेंट क्रूड के बाजार में 50 प्रतिशत से ज्यादा की बढ़ोतरी हुई है, जो संकेत देता है कि अनिश्चितता और जोखिम लगातार बढ़ रहे हैं। 200 डॉलर तक पहुंच संभव हैकुछ वैश्विक अनुमानों के अनुसार, यदि दरें और विशेषताएं हैं तो कच्चे तेल की कीमत 200 डॉलर प्रति शेयर तक पहुंच सकती है। यह स्थिति ग्लोबल इंडस्ट्री के लिए बड़ा झटका साबित हो सकती है। भारत पर उत्खनन दबावभारत जैसे राष्ट्र के लिए यह स्थिति विशेष रूप से चिंता का विषय है, क्योंकि देश में 85 से 90 प्रतिशत तेल कोटा के लिए मान्यता पर प्रतिबंध है। सरकारी कच्चे तेल से शेयरों में बढ़ोतरी हो सकती है, कंपनी के शेयरों पर असर पड़ सकता है और चालू खाते में भी बढ़ोतरी हो सकती है। वैश्विक शेयर प्रभावकारीतेल के स्टॉक में तेजी का असर वैश्विक शेयर पर भी देखने को मिला। अमेरिकी उद्यमों में गिरावट दर्ज की गई, वहीं एशियाई बाजारों में भी गिरावट जारी है। इसका असर भारत के शेयर बाजार पर भी पड़ा है, जहां बीएसई सेंसेक्स और निफ्टी 50 दोनों ही शुरुआती कारोबार में गिरावट के साथ खुले हैं।
पोर्ट इंफ्रास्ट्रक्चर में बड़ा कदम: न्यू मैंगलोर में बर्थ का होगा आधुनिकीकरण

नई दिल्ली। केंद्र सरकार ने देश के समुद्री इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत करने की दिशा में बड़ा कदम उठाते हुए न्यू मैंगलोर पोर्ट मालिक के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है। इस योजना के तहत न्यू मैंगलोर पोर्ट पर बर्थ नंबर 9 का पुनर्विकास किया जाएगा। यह परियोजना पब्लिक प्राइवेट पार्टनरशिप मॉडल के तहत डीबीएफओटी आधार पर लागू होगी, जिससे निजी और सरकारी साझेदारी के जरिए आधुनिक सुविधाएं विकसित की जाएंगी। 438 करोड़ की परियोजना, 2 साल में पूरा होगा निर्माणकरीब 438.29 करोड़ रुपये की लागत वाली इस परियोजना को 25 मार्च 2026 को मंजूरी दी गई है। इसे ओपन टेंडर प्रक्रिया के जरिए चुनी गई निजी कंपनी द्वारा विकसित किया जाएगा। निर्माण कार्य को पूरा होने में लगभग दो साल का समय लगेगा, जबकि इस परियोजना की कुल अवधि 30 साल तय की गई है। जहां पोर्ट की क्षमता और दक्षताइस पुनर्विकास के बाद बर्थ नंबर 9 की कार्गो हैंडलिंग क्षमता 10.90 मिलियन टन प्रति वर्ष तक पहुंच जाएगी। साथ ही, ऑपरेटर कंपनी को पांचवें साल तक कम से कम 7.63 एमटीपीए कार्गो हैंडल करने की सप्लाई देनी होगी। यहां कच्चा तेल, पेट्रोलियम उत्पाद और एलपीजी जैसे जैविक बल्क कार्गो को संभालेगा, जिससे देश की ऊर्जा पैदावार को पूरा करने में मदद मिलेगी। बड़े जहाजों के लिए बनेगी नई सुविधाइस प्रोजेक्ट के तहत बर्थ की गहराई को 10.5 मीटर से बढ़ाकर 14 मीटर किया जाएगा और भविष्य में इसे 19.8 मीटर तक बढ़ाने की योजना भी रखी गई है। इससे 2 लाख डेडवेट टन तक के बड़े जहाज आसानी से यहां आ-जा सवार, जिनमें बहुत बड़े गैस कैरियर भी शामिल हैं। 50 साल पुराने आइडिया की जगह आधुनिक स्ट्रक्चरकरीब 50 साल पुराने आइडिया को यहां आधुनिक और टिकाऊ इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार किया जाएगा, जिसकी उम्र भी लगभग 50 साल तक होगी। इससे पोर्ट का ऑपरेशन लंबे समय तक स्थिर और प्रभावी बना रहेगा।वैश्विक व्यापार में भारत की स्थिति मजबूत होगीकेंद्रीय मंत्री सर्बानंद सोनवाल ने कहा कि यह परियोजना प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश के समुद्री क्षेत्र को आधुनिक बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। इससे लॉजिस्टिक्स लागत कम होगी, पोर्ट की प्रतिस्पर्धी क्षमता बढ़ेगी और भारत वैश्विक समुद्री व्यापार में अपनी मजबूत स्थिति बना सकेगी।
शेयर बाजार में मची हड़कंप: सेंसेक्स 1,200 अंक टूटा, जानिए गिरावट के बड़े कारण

नई दिल्ली सप्ताह के पहले दिन भारतीय शेयर बाजार में जबरदस्त गिरावट देखने को मिली। बीएसई सेंसेक्स करीब 1200 अंक टूटकर 72,326 के स्तर तक पहुंच गया, जबकि निफ्टी 50 भी 350 अंक के करीब 22,453 के स्तर पर पहुंच गया। इस गिरावट का असर सिर्फ बड़े स्टॉक तक ही सीमित नहीं रहा, बल्कि मिडकैप और स्मॉलकैप स्टॉक में भी 1 फीसदी से ज्यादा की गिरावट दर्ज की गई है। कुछ ही घंटों में 6 लाख करोड़ का नुकसानइस भारी गिरावट के साथ उद्यम की संपत्ति में बड़ी गिरावट आई। बीएसई में सूचीबद्ध कंपनियों का कुल बाजार पूंजीकरण कुछ ही घंटों में 422 लाख करोड़ रुपये से बढ़कर करीब 416 लाख करोड़ रुपये हो गया। यानी उद्यम को लगभग 6 लाख करोड़ रुपये का नुकसान हुआ, जिससे बाजार में अशांति का माहौल बन गया। अमेरिका-ईरान तनाव बना सबसे बड़ा कारणइस गिरावट के पीछे सबसे बड़ा कारण अमेरिका और ईरान के समुद्र तटों पर भारी तनाव है। यह भू-राजनीतिक संकट अब कई ऐतिहासिक से जारी है और इसके समाप्त होने को लेकर अस्तित्व में है। इस तनाव के कारण ग्लोबल मार्केट में भी दबाव देखा जा रहा है, जिसका सीधा असर भारतीय बाजार पर पड़ा है। कच्चे तेल की उथल-पुथलदूसरा बड़ा कारण कच्चे तेल की जिले में तेजी। ब्रेंट क्रूड 115 डॉलर प्रति शेयर के पार पहुंच गया है, जिससे भारत जैसे बड़े प्रतिष्ठित देश की चिंता बढ़ गई है। महंगे तेल देश की अर्थव्यवस्था पर दबाव है और इससे बाजार की धारणा खराब होती है। हल्दी उद्योग से व्यापारी डरेबाजार में डर और असमानता का मॉडल इंडिया VIX लगाया जा सकता है, जो 5 फीसदी से ज्यादा उछाल 28 के पार पहुंच गया। आम तौर पर 12-15 का स्तर सामान्य माना जाता है, लेकिन इससे ऊपर जाने का मतलब यह है कि बाजार में उतार-चढ़ाव काफी बढ़ गया है और निवेशक आकर्षित हो गए हैं। विदेशी व्यापारियों की लगातार बिक्रीविदेशी व्यापारियों की लगातार बिकवाली भी बाजार पर भारी पड़ रही है। विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों ने मार्च में बड़ी पूंजी बाजार में धूम मचा दी, जिससे बाजार में अस्थिरता कम हो गई और दबाव बढ़ गया। एफ एंड ओ एक्सपायरी से बढ़िया हलचलइसके अलावा फ्यूचर्स और ऑप्शंस क्लैन्सल की एक्सपायरी भी बाजार में उतार-चढ़ाव का बड़ा कारण बनी। एक्सपायरी के समय व्यापारी अपने पोर्टफोलियो को एडजस्ट करते हैं, जिससे बाजार में तेज गति से देखने को मिलता है।
FAKE SIM NETWORK : ग्वालियर में फर्जी सिम नेटवर्क का खुलासा, एक फोटो से सैकड़ों सिम एक्टिव, ऑपरेशन ‘FACE’ में बड़ी कार्रवाई

HIGHLIGHTS : ग्वालियर में फर्जी सिम नेटवर्क का बड़ा खुलासा ऑपरेशन FACE के तहत पहली बड़ी कार्रवाई एक ही फोटो और आधार से सैकड़ों सिम एक्टिव किए गए आरोपी ने सिम के लिए 1000-1500 रुपए वसूल किए पुलिस जांच में और बड़े ऑनलाइन फ्रॉड के खुलासे की संभावना FAKE SIM NETWORK : मध्यप्रदेश। ग्वालियर में फर्जी सिम कार्ड के बड़े नेटवर्क का पर्दाफाश हुआ है। पुलिस के अनुसार, एक पीओएस शॉप संचालक ने एक ही व्यक्ति की फोटो और आधार का इस्तेमाल कर सैकड़ों फर्जी सिम लोगों के नाम पर जारी किए। बता दें कि मामला तब सामने आया जब जिस व्यक्ति की फोटो का इस्तेमाल किया जा रहा था, वह खुद पुलिस के पास पहुंच गया। MI vs KKR: रोहित-रिकेल्टन की धुआंधार बल्लेबाजी, बुमराह-शार्दुल का कमाल-मुंबई की जीत के 5 कारण ऑपरेशन FACE की पहली बड़ी कार्रवाई पुलिस मुख्यालय भोपाल द्वारा चलाए जा रहे ऑपरेशन ‘FACE’ (Facial Authentication Compliance Enforcement) के तहत यह ग्वालियर में पहली बड़ी कार्रवाई है। झांसी रोड थाना पुलिस ने आरोपी उमेश कुशवाह और उनके साथी आशीष नागर के खिलाफ धोखाधड़ी का मामला दर्ज किया। स्कूलों, HC, सरकारी दफ्तरों को बम से उड़ाने की धमकी देने वाला गिरफ्तार… 1100 ईमेल भेजे, फैलाई दशहत एक ही फोटो, अलग-अलग नाम जांच में सामने आया कि आशीष नागर ग्राहकों की जगह अपनी फोटो लगाकर सिम एक्टिव करता था और उसे हर सिम पर करीब 500 रुपए मिलते थे। जबकि आरोपी उमेश कुशवाह एक सिम के लिए 1000 से 1500 रुपए वसूलता था। सैकड़ों सिम इसी तरीके से फर्जी दस्तावेज़ बनाकर सक्रिय किए गए। IPL कमेंट्री पर ट्रोल हुए Harbhajan Singh, ट्रोलर को दिया करारा जवाब- ‘एक को पापा चुन लो’ जांच में और खुलासे संभव अब तक पुलिस ने 7 फर्जी सिम बरामद किए हैं। ये सभी सिम गुढ़ा-गुढ़ी के प्रीतमपुर कॉलोनी और कुम्हारों के मोहल्ले के लोगों के नाम पर जारी किए गए थे, जबकि उनमें आशीष की फोटो लगी थी। अधिकारियों का कहना है कि आगे की जांच में फर्जी सिम नेटवर्क से जुड़े कई बड़े ऑनलाइन फ्रॉड खुल सकते हैं।
जलवायु परिवर्तन से मुकाबला: लद्दाख में समग्र और साइंटिफिक मॉडल लागू

नई दिल्ली। देश में बढ़ते जलवायु संकट के बीच लद्दाख ने पर्यावरण संरक्षण और सतत विकास की दिशा में एक बड़ा और सराहनीय कदम उठाया है। यहां पारंपरिक उपायों से आगे बढ़ते हुए एक समग्र और वैज्ञानिक मॉडल लागू किया गया है, जिसमें भूजल नियंत्रण, ग्लेशियर निगरानी, जल संरक्षण, टिकाऊ पर्यटन और जैविक खेती को एक साथ जोड़ा गया है। यह पहल केवल पर्यावरण बचाने तक सीमित नहीं, बल्कि जल, जमीन और आजीविका के बीच संतुलन बनाने की दीर्घकालिक योजना भी है। भूजल दोहन पर सख्ती, संकटग्रस्त क्षेत्रों में रोकलद्दाख प्रशासन ने जल संकट की जड़ पर प्रहार करते हुए लेह जिले के अर्ध-संकटग्रस्त क्षेत्रों में भूजल दोहन पर कड़ा नियंत्रण लागू किया है। 23 दिसंबर 2024 के आदेश के तहत इन इलाकों में नए बोरवेल खोदने पर प्रभावी रोक लगा दी गई है। यह कदम भूजल स्तर को गिरने से बचाने और जल संसाधनों के संरक्षण के लिए बेहद अहम माना जा रहा है।लद्दाख प्रशासन ने जल संकट की जड़ पर प्रहार करते हुए लेह जिले के अर्ध-संकटग्रस्त क्षेत्रों में भूजल दोहन पर कड़ा नियंत्रण लागू किया है। 23 दिसंबर 2024 के आदेश के तहत इन इलाकों में नए बोरवेल खोदने पर प्रभावी रोक लगा दी गई है। यह कदम भूजल स्तर को गिरने से बचाने और जल संसाधनों के संरक्षण के लिए बेहद अहम माना जा रहा है। ग्लेशियरों की सैटेलाइट निगरानी से बढ़ी सुरक्षाजलवायु परिवर्तन का सबसे बड़ा असर हिमालयी ग्लेशियरों पर पड़ रहा है। इसे ध्यान में रखते हुए इसरो की मदद से ‘जियो-स्पेशियल लद्दाख’ परियोजना शुरू की गई है। इस परियोजना के तहत रिमोट सेंसिंग तकनीक से ग्लेशियरों और ग्लेशियल झीलों की निगरानी की जा रही है। इससे ग्लेशियरों के पिघलने, झीलों के फैलाव और संभावित खतरों का समय रहते आकलन किया जा सकता है। ग्लेशियल लेक आउटबर्स्ट फ्लड यानी झील फटने के खतरे को देखते हुए संवेदनशील क्षेत्रों को इमरजेंसी ऑपरेशन सेंटर, लेह से जोड़ने की योजना बनाई गई है। इस प्रस्ताव को राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण को भेजा गया है, ताकि समय रहते चेतावनी जारी की जा सके। जल संरक्षण ढांचे का बड़े स्तर पर विस्तारजल संरक्षण के लिए लद्दाख में व्यापक स्तर पर संरचनाएं विकसित की गई हैं। मनरेगा और अन्य सरकारी योजनाओं के तहत 800 से अधिक जल संचयन संरचनाएं बनाई गई हैं। इसके अलावा वाटरशेड मैनेजमेंट कार्यक्रम के तहत जल टैंक, तालाब, नहरें और चेक डैम तैयार किए गए हैं। लेह शहर में ‘टी-ट्रेंच’ परियोजना को फिर से शुरू किया गया है, जिससे भूजल रिचार्ज बढ़ाने और प्राकृतिक जल स्रोतों को संरक्षित करने में मदद मिलेगी। इन प्रयासों का मकसद वर्षा जल को संचित करना और सूखे जैसी परिस्थितियों से निपटना है। टिकाऊ पर्यटन की दिशा में नई पहलपर्यटन से बढ़ते प्रदूषण को नियंत्रित करने के लिए लद्दाख प्रशासन ने नई नीतियां लागू की हैं। 2024 की सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट नीति के तहत होटल और गेस्ट हाउस में विकेंद्रीकृत एसटीपी लगाने को बढ़ावा दिया जा रहा है। साथ ही 2025 के लिए नई प्रोत्साहन योजना भी तैयार की जा रही है, जिससे पर्यावरण के अनुकूल पर्यटन को बढ़ावा मिल सके।
‘जिंदा भंडारा’: जीते-जी कर दी अपनी तेरहवीं, 1900 लोगों को दिया भोज-वजह भावुक कर देगी

नई दिल्ली। उत्तर प्रदेश के औरैया जिले से एक बेहद भावुक और सोचने पर मजबूर कर देने वाला मामला सामने आया है। यहां लक्ष्मणपुर गांव के 65 वर्षीय राकेश यादव ने जीते-जी अपनी ही तेरहवीं करने का फैसला लिया है। उन्होंने सोमवार को 1900 लोगों के लिए भंडारे का आयोजन किया है और गांव-गांव जाकर लोगों को न्योता भी दिया है। इस अनोखे फैसले के पीछे छिपी वजह किसी का भी दिल पिघला सकती है। अकेलेपन ने लिया बड़ा फैसलाराकेश यादव तीन भाइयों में सबसे बड़े हैं, लेकिन आज उनके साथ कोई नहीं है। उनके एक भाई चंद्रपाल यादव की बीमारी से मौत हो चुकी है, जबकि दूसरे भाई नरेश यादव की हत्या कर दी गई थी। तीनों भाइयों की शादी नहीं हुई थी। परिवार में लगातार हुए इन दुखद घटनाओं ने राकेश को पूरी तरह अकेला कर दिया। उनकी एक बहन है, लेकिन वह अपने परिवार में व्यस्त हैं। ऐसे में राकेश को यह डर सताने लगा कि उनके निधन के बाद उनका अंतिम संस्कार या तेरहवीं करने वाला कोई नहीं होगा। यही चिंता उनके इस फैसले की सबसे बड़ी वजह बनी। ‘मरने के बाद कौन करेगा संस्कार?’राकेश यादव का कहना है कि उम्र के इस पड़ाव पर उन्हें किसी पर भरोसा नहीं है। रिश्तेदार हैं, लेकिन उन्हें यकीन नहीं कि वे उनके जाने के बाद उनकी तेरहवीं या अंतिम संस्कार करेंगे। यही सोचकर उन्होंने जीते-जी यह आयोजन करने का निर्णय लिया, ताकि उनके जीवन में एक बार उनके नाम का भोज हो और गांव के लोग उसमें शामिल हों। 1900 लोगों को न्योता, खुद के लिए आखिरी भोजराकेश ने करीब 1900 लोगों को इस भंडारे में आमंत्रित किया है। खास बात यह है कि यह आयोजन सिर्फ भोज तक सीमित रहेगा, इसमें पिंडदान जैसे धार्मिक कर्मकांड नहीं किए जाएंगे। गांव में इस खबर के बाद चर्चा का माहौल है। कोई इसे उनकी मजबूरी बता रहा है तो कोई इसे उनके गहरे अकेलेपन का दर्द। मेहनत की कमाई से कर रहे आयोजनराकेश यादव फिलहाल एक साधारण मड़ैया में रहते हैं और उन्हें वृद्धावस्था पेंशन मिलती है। उन्होंने सालों की मेहनत-मजदूरी से जो पैसा जोड़ा, उसी से इस भंडारे का आयोजन कर रहे हैं। इतना ही नहीं, उन्होंने अपना पैतृक घर भी एक रिश्तेदार को दान कर दिया है। समाज के लिए एक सवालयह घटना सिर्फ एक व्यक्ति की कहानी नहीं, बल्कि समाज के सामने एक बड़ा सवाल भी खड़ा करती है कि आखिर क्यों एक इंसान को अपने जीते-जी अपनी तेरहवीं करनी पड़ रही है। यह कहानी अकेलेपन, असुरक्षा और रिश्तों में घटते भरोसे की सच्चाई को उजागर करती है।
PSL 2026 में बॉल टैंपरिंग का आरोप: फखर जमां की हरकत कैमरे में कैद, शाहीन पर भी सवाल

नई दिल्ली।पाकिस्तान सुपर लीग 2026 की शुरुआत के साथ ही एक बड़ा विवाद सामने आ गया है, जिसने क्रिकेट जगत में हलचल मचा दी है। फखर जमां, शाहीन शाह अफरीदी और हारिस राउफ से जुड़ा यह मामला कथित ‘बॉल टैंपरिंग’ का है, जिसकी तस्वीरें कैमरे में कैद होने का दावा किया जा रहा है। लाहौर बनाम कराची मैच में हुआ विवादयह घटना लाहौर कलंदर्स और कराची किंग्स के बीच खेले गए मुकाबले के दौरान सामने आई। लाहौर के गद्दाफी स्टेडियम में खेले गए इस लो-स्कोरिंग मैच के आखिरी ओवर में अचानक ऐसा कुछ हुआ, जिसने मैच का रुख ही बदल दिया और खेल की निष्पक्षता पर सवाल खड़े कर दिए। आखिरी ओवर में बना ‘प्लान’, बढ़ा शकलाहौर कलंदर्स को आखिरी ओवर में 13 रन बचाने थे। इसी दौरान कप्तान शाहीन शाह अफरीदी, गेंदबाज हारिस राउफ और फखर जमां आपस में रणनीति बनाते नजर आए। इसी बीच एक खिलाड़ी मैदान पर पानी लेकर आया। कैमरे में कैद हुई गतिविधियों के आधार पर आरोप लगा कि गेंद के साथ छेड़छाड़ की गई। अंपायरों ने तुरंत मामले को संज्ञान में लिया और लाहौर टीम पर 5 रन की पेनल्टी लगा दी। यह फैसला मैच के दौरान ही लिया गया, जिससे विवाद और गहरा गया। फखर जमां पर सीधे आरोपवीडियो फुटेज में फखर जमां को गेंद के साथ संदिग्ध गतिविधि करते हुए देखा गया, जिससे उन पर सीधे तौर पर बॉल टैंपरिंग का आरोप लगा। इस घटना ने न केवल टीम की छवि पर असर डाला, बल्कि कप्तान और अन्य खिलाड़ियों की भूमिका पर भी सवाल खड़े कर दिए। शाहीन अफरीदी का बयानमैच के बाद जब कप्तान शाहीन शाह अफरीदी से इस विवाद पर सवाल किया गया, तो उन्होंने अनभिज्ञता जताई। उन्होंने कहा कि उन्हें इस बारे में पूरी जानकारी नहीं है और वीडियो देखकर ही स्पष्ट हो पाएगा कि वास्तव में क्या हुआ। उन्होंने यह भी माना कि पेनल्टी के रूप में 5 रन दिए जा चुके हैं और अब उस पर कुछ नहीं किया जा सकता। आगे हो सकती है सख्त कार्रवाईइस घटना के बाद यह संभावना जताई जा रही है कि लीग प्रबंधन और मैच रेफरी इस मामले की गहराई से जांच कर सकते हैं। यदि आरोप सही पाए जाते हैं, तो खिलाड़ियों पर जुर्माना या प्रतिबंध जैसी कार्रवाई भी हो सकती है।