अमेरिका के लिए स्पेन ने सैन्य विमानों के लिए बंद किया एयरस्पेस

वाशिंगटन। पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच स्पेन ने बड़ा फैसला लेते हुए अमेरिकी सैन्य विमानों के लिए अपना एयरस्पेस बंद कर दिया है। इस कदम के बाद अमेरिका अब अपने सैन्य अभियानों के लिए स्पेन के आसमान या वहां के सैन्य ठिकानों का उपयोग नहीं कर पाएगा। इसे ईरान से जुड़े हालात के बीच अमेरिका के लिए रणनीतिक झटका माना जा रहा है। स्पेन की रक्षा मंत्री ने स्पष्ट कहा कि उनका देश ईरान (Iran) के खिलाफ किसी भी सैन्य अभियान का हिस्सा नहीं बनेगा। उन्होंने यह भी बताया कि अमेरिकी विमानों को न तो एयरस्पेस मिलेगा और न ही सैन्य अड्डों के इस्तेमाल की अनुमति दी जाएगी। इस बयान से संकेत मिला है कि स्पेन इस पूरे संघर्ष से दूरी बनाए रखना चाहता है। इस फैसले का सीधा असर अमेरिकी सैन्य ऑपरेशन पर पड़ सकता है। विशेषज्ञों के मुताबिक, अब अमेरिकी विमानों को वैकल्पिक मार्ग अपनाने होंगे, जिससे उड़ान का समय बढ़ेगा और संसाधनों पर अतिरिक्त दबाव पड़ेगा। हालांकि स्पेन ने मानवीय और आपातकालीन उड़ानों को छूट दी है, लेकिन सैन्य मिशनों पर यह प्रतिबंध अहम माना जा रहा है। स्पेन सरकार का कहना है कि वह ऐसे किसी भी युद्ध का समर्थन नहीं करती जो अंतरराष्ट्रीय कानून के खिलाफ हो। इसी आधार पर उसने यह निर्णय लिया है। स्पेन के नेताओं का मानना है कि इस तरह के संघर्ष से वैश्विक तनाव बढ़ता है और शांति प्रयास प्रभावित होते हैं। विश्लेषकों का कहना है कि इस कदम से अमेरिका और स्पेन के संबंधों में तनाव बढ़ सकता है। दोनों देशों के बीच पहले भी इस मुद्दे पर मतभेद रहे हैं, और अब एयरस्पेस बंद करने के फैसले से यह दूरी और बढ़ने की संभावना जताई जा रही है।
युवाओं के लिए सुनहरा अवसर, BBMB भर्ती में आवेदन की आखिरी तारीख नजदीक

नई दिल्ली सरकारी नौकरी की तैयारी कर रहे युवाओं के लिए एक बेहतरीन अवसर सामने आया है। Bhakra Beas Management Board (बीबीएमबी) ने हिंदी ट्रांसलेटर के पदों पर भर्ती के लिए अधिसूचना जारी कर दी है। इस भर्ती के तहत कुल 6 पद भरे जाएंगे, जिसके लिए आवेदन प्रक्रिया शुरू हो चुकी है। इच्छुक और योग्य उम्मीदवार 19 अप्रैल तक ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं। आवेदन प्रक्रिया और महत्वपूर्ण तिथि बीबीएमबी की इस भर्ती के लिए आवेदन पूरी तरह ऑनलाइन मोड में स्वीकार किए जा रहे हैं। उम्मीदवारों को सलाह दी जाती है कि वे अंतिम तिथि का इंतजार न करें और समय रहते अपना आवेदन पूरा कर लें। आवेदन की अंतिम तिथि 19 अप्रैल तय की गई है, जिसके बाद कोई फॉर्म स्वीकार नहीं किया जाएगा। योग्यता और पात्रता मानदंड हिंदी ट्रांसलेटर पदों के लिए आवेदन करने वाले उम्मीदवारों के पास किसी मान्यता प्राप्त विश्वविद्यालय या संस्थान से संबंधित विषय में कम से कम ग्रेजुएशन की डिग्री होना अनिवार्य है। इसके साथ ही, अभ्यर्थियों के पास निर्धारित अनुभव और अन्य जरूरी पात्रता शर्तें भी पूरी होनी चाहिए। आयु सीमा में छूट का प्रावधान इस भर्ती के लिए उम्मीदवारों की न्यूनतम आयु 18 वर्ष और अधिकतम आयु 37 वर्ष निर्धारित की गई है। आयु की गणना 19 अप्रैल के आधार पर की जाएगी। वहीं, आरक्षित वर्ग के उम्मीदवारों को सरकारी नियमों के अनुसार अधिकतम आयु सीमा में छूट दी जाएगी। चयन प्रक्रिया कैसी होगी? उम्मीदवारों का चयन तीन चरणों में किया जाएगा—लिखित परीक्षा, ट्रेड टेस्ट और डॉक्यूमेंट वेरिफिकेशन। इन सभी चरणों में सफल होने वाले उम्मीदवारों को ही अंतिम रूप से नियुक्ति दी जाएगी। सैलरी और आवेदन शुल्क चयनित उम्मीदवारों को प्रति माह 35,400 रुपए से लेकर 1,12,400 रुपए तक का वेतन दिया जाएगा, जो सरकारी मानकों के अनुसार आकर्षक माना जा रहा है।वहीं, आवेदन शुल्क की बात करें तो सामान्य, ओबीसी और ईडब्ल्यूएस वर्ग के उम्मीदवारों को 1,000 रुपए फीस देनी होगी, जबकि एससी, एसटी और पीडब्ल्यूबीडी वर्ग के लिए यह शुल्क 500 रुपए निर्धारित किया गया है। ऐसे करें ऑनलाइन आवेदन आवेदन करने के लिए उम्मीदवार सबसे पहले Bhakra Beas Management Board की आधिकारिक वेबसाइट पर जाएं।इसके बाद होमपेज पर दिए गए भर्ती लिंक पर क्लिक करें और रजिस्ट्रेशन प्रक्रिया पूरी करें। लॉगिन करने के बाद आवेदन फॉर्म में मांगी गई सभी जानकारी सही-सही भरें। जरूरी दस्तावेज निर्धारित फॉर्मेट में अपलोड करें और ऑनलाइन शुल्क का भुगतान करें। अंत में फॉर्म सबमिट कर उसका प्रिंटआउट भविष्य के लिए सुरक्षित रख लें। युवाओं के लिए बेहतरीन अवसर यह भर्ती उन युवाओं के लिए खास मौका है, जो हिंदी भाषा में दक्षता रखते हैं और सरकारी क्षेत्र में करियर बनाना चाहते हैं। सीमित पदों के बावजूद अच्छी सैलरी और स्थिर नौकरी इसे और आकर्षक बनाती है।
एक्शन हीरो की असली कमजोरी सामने टाइगर श्रॉफ को उड़ान से डर नींद तक हो रही खराब

नई दिल्ली । बॉलीवुड के एक्शन स्टार टाइगर श्रॉफ जिन्हें बड़े पर्दे पर खतरनाक स्टंट और जबरदस्त फिटनेस के लिए जाना जाता है हाल ही में अपनी एक निजी समस्या को लेकर चर्चा में आ गए हैं। पर्दे पर हर मुश्किल को आसानी से पार करते नजर आने वाले टाइगर ने खुलासा किया है कि वह असल जिंदगी में एक ऐसे डर से जूझ रहे हैं जो उन्हें अंदर तक परेशान कर देता है। यह डर है एयरोफोबिया यानी हवाई जहाज में उड़ान भरने का डर। उन्होंने बताया कि इस समस्या से निजात पाने के लिए अब वह प्रोफेशनल थेरेपी लेने पर विचार कर रहे हैं। टाइगर ने एक बातचीत के दौरान बताया कि कुछ साल पहले उन्हें एक फ्लाइट में बेहद खराब टर्बुलेंस का सामना करना पड़ा था। उस अनुभव ने उनके मन पर गहरा असर डाला और तभी से उनके अंदर उड़ान को लेकर डर बैठ गया। उन्होंने कहा कि उस समय उन्हें पूरी तरह से असहाय महसूस हुआ क्योंकि स्थिति पर उनका कोई नियंत्रण नहीं था। यही वजह है कि अब जब भी उन्हें फ्लाइट से यात्रा करनी होती है तो दो दिन पहले से ही बेचैनी और घबराहट शुरू हो जाती है। उन्होंने यह भी बताया कि पायलट अक्सर उन्हें समझाते हैं कि टर्बुलेंस कोई बड़ी बात नहीं होती और यह सड़क पर लगने वाले हल्के झटकों की तरह ही होता है लेकिन उनके दिमाग को यह बात स्वीकार नहीं होती। टाइगर का कहना है कि उन्हें हर चीज पर नियंत्रण रखना पसंद है लेकिन फ्लाइट के दौरान वह खुद को पूरी तरह बेबस महसूस करते हैं और यही उनकी चिंता का सबसे बड़ा कारण है। सिर्फ एयरोफोबिया ही नहीं टाइगर ने अपनी एक और समस्या का जिक्र किया। उन्होंने माना कि वह कई बार छोटी छोटी बातों को लेकर जरूरत से ज्यादा सोचने लगते हैं और इससे वह काफी कंफ्यूजन में पड़ जाते हैं। उन्होंने बताया कि कई बार उन्हें अपने दिनभर के काम तय करने में भी काफी मुश्किल होती है क्योंकि वह हर चीज को लेकर ज्यादा सोचने लगते हैं। यह स्थिति उनके लिए मानसिक रूप से थकाने वाली हो जाती है। वर्क फ्रंट की बात करें तो टाइगर श्रॉफ ने हीरोपंती वॉर और बागी जैसी फिल्मों के जरिए खुद को एक सफल एक्शन हीरो के रूप में स्थापित किया है लेकिन उनकी हालिया फिल्म बागी 4 बॉक्स ऑफिस पर उम्मीद के मुताबिक प्रदर्शन नहीं कर पाई। भारी बजट में बनी इस फिल्म का कलेक्शन निराशाजनक रहा और इसे फ्लॉप माना गया। हालांकि टाइगर अपनी फिटनेस और एक्शन स्टाइल के कारण फैंस के बीच अब भी काफी लोकप्रिय हैं। टाइगर का यह खुलासा इस बात की ओर इशारा करता है कि चमक दमक से भरी फिल्मी दुनिया के सितारे भी मानसिक और भावनात्मक चुनौतियों से अछूते नहीं हैं। एयरोफोबिया एक आम लेकिन गंभीर समस्या हो सकती है जिसमें व्यक्ति को उड़ान के दौरान अत्यधिक डर और घबराहट महसूस होती है। विशेषज्ञों के अनुसार सही काउंसलिंग और थेरेपी से इस समस्या पर काबू पाया जा सकता है। टाइगर का अपने डर को खुले तौर पर स्वीकार करना कई लोगों के लिए प्रेरणा बन सकता है क्योंकि यह दिखाता है कि मदद लेना कमजोरी नहीं बल्कि समझदारी का कदम है। अब देखना दिलचस्प होगा कि वह इस डर पर कैसे काबू पाते हैं और आगे अपनी जिंदगी और करियर में किस तरह आगे बढ़ते हैं।
अमेरिका ने ईरान के इस्फहान पर बंकर बस्टर बम से किया हमला

वाशिंगटन। अमेरिका ने ईरान के इस्फहान शहर पर 2000 किलो के बंकर बस्टर बम से हमला किया है। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, यह हमला एक हथियार डिपो पर किया गया। इस हमले के चलते इस्फहान के आसमान में आग और धुएं का विशाल गुबार देखा गया। इस हमले का वीडियो भी सामने आया है, जिसमें धमाके के चलते खौफनाक मंजर दिखाई दिया। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भी सोशल मीडिया पर इस वीडियो को पोस्ट किया है। वाल स्ट्रीट जर्नल ने अमेरिकी अधिकारियों के हवाले से बताया कि हमले में बड़ी संख्या में विस्फोटक का इस्तेमाल किया गया। जिस जगह को निशाना बनाया गया, वह एक भूमिगत ढांचा था, जिसके लिए बंकर बस्टर बम का इस्तेमाल किया गया। इस्फहान ईरान का एक सैन्य सेंटर है और ईरान के परमाणु ठिकाने भी इस शहर के करीब ही स्थित हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भी सोशल मीडिया पर हमले की वीडियो साझा की है। हालांकि अभी तक इस हमले की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। इस्फहान की रणनीतिक अहमियत भी है और दावा किया जाता है कि ईरान के संवर्धित यूरेनियम का बड़ा हिस्सा, जो करीब 540 किलो है, इस्फहान के भूमिगत ठिकानों में ही रखा है।
नारलाई मंदिर में साथ दिखे मलाइका और हर्ष निजी पल बिताने पहुंचीं एक्ट्रेस फैंस की भीड़ ने घेरा

नई दिल्ली । बॉलीवुड एक्ट्रेस मलाइका अरोड़ा एक बार फिर अपनी पर्सनल लाइफ को लेकर चर्चा में आ गई हैं। हाल ही में उन्हें राजस्थान के मारवाड़ क्षेत्र के नारलाई गांव में स्थित आदिनाथ जैन मंदिर में कथित बॉयफ्रेंड हर्ष मेहता के साथ देखा गया। मलाइका यहां लाइमलाइट से दूर सुकून के कुछ पल बिताने पहुंची थीं लेकिन उनकी मौजूदगी की खबर फैलते ही वहां मौजूद लोगों की भीड़ उमड़ पड़ी और देखते ही देखते उनकी तस्वीरें सोशल मीडिया पर वायरल हो गईं। इस दौरान मलाइका बेहद सादगी भरे अंदाज में नजर आईं। उन्होंने सफेद कुर्ती और ट्राउजर पहन रखा था और पूरे विधि विधान के साथ मंदिर में पूजा अर्चना की। उनके साथ हर कदम पर हर्ष मेहता मौजूद रहे और दोनों के बीच की सहज बॉन्डिंग ने एक बार फिर लोगों का ध्यान खींच लिया। मंदिर परिसर में मौजूद फैंस मलाइका की एक झलक पाने के लिए उत्साहित नजर आए और कई लोगों ने उनके साथ सेल्फी लेने की कोशिश की। मलाइका ने भी अपने फैंस को निराश नहीं किया और मुस्कुराते हुए उनसे बातचीत की और तस्वीरें खिंचवाईं। भीड़ बढ़ती देख मंदिर प्रशासन को व्यवस्था संभालनी पड़ी ताकि किसी तरह की अव्यवस्था न हो। हालांकि पूरे घटनाक्रम के दौरान मलाइका काफी शांत और खुश नजर आईं। बताया जा रहा है कि वह इन दिनों राजस्थान की एक हेरिटेज प्रॉपर्टी में छुट्टियां मना रही हैं और इसी दौरान उन्होंने मंदिर दर्शन का कार्यक्रम बनाया। मलाइका और हर्ष मेहता के रिश्ते को लेकर पिछले कुछ समय से लगातार चर्चाएं हो रही हैं। दोनों को पहली बार तब साथ देखा गया था जब वे मुंबई में एनरिक इग्लेसियस के कॉन्सर्ट में पहुंचे थे। हालांकि दोनों ने उस समय साथ में एंट्री नहीं ली थी लेकिन उनकी मौजूदगी ने लोगों का ध्यान खींचा था। इसके बाद खबरें सामने आईं कि दोनों ने वेलेंटाइन वीक के दौरान इटली में साथ समय बिताया। इन खबरों ने उनके रिश्ते को लेकर अटकलों को और तेज कर दिया। हालांकि अब तक मलाइका या हर्ष की ओर से इस रिश्ते को लेकर कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है। मलाइका ने हाल ही में अपनी पर्सनल लाइफ पर हो रही चर्चाओं को लेकर प्रतिक्रिया भी दी थी। उन्होंने कहा था कि इस तरह की अफवाहें कभी कभी परेशान जरूर करती हैं लेकिन वह इन्हें ज्यादा गंभीरता से नहीं लेतीं। उन्होंने यह भी बताया कि वह अक्सर अपने बेटे अरहान खान के साथ इन खबरों को पढ़कर हंसती हैं और आगे बढ़ जाती हैं। मलाइका ने साफ शब्दों में कहा कि वह अपनी जिंदगी अपने तरीके से जीना चाहती हैं और पब्लिक की जिज्ञासा के अनुसार अपने फैसले नहीं लेंगी। बावजूद इसके उनकी हर सार्वजनिक उपस्थिति फैंस के बीच उत्सुकता पैदा कर देती है। राजस्थान के इस मंदिर दौरे ने एक बार फिर उनके रिश्ते को लेकर चर्चाओं को हवा दे दी है और फैंस अब भी इस बारे में सच्चाई जानने के लिए उत्साहित हैं।
भारत में AI स्टार्टअप्स के लिए गूगल का बड़ा मौका, 2026 एक्सेलेरेटर प्रोग्राम लॉन्च

नई दिल्ली टेक दिग्गज गूगल ने मंगलवार को भारत में अपने ‘स्टार्टअप्स एक्सेलेरेटर’ के 2026 बैच के लिए आवेदन प्रक्रिया शुरू कर दी है। यह तीन महीने का इक्विटी-फ्री प्रोग्राम है, जिसका उद्देश्य देश के एआई आधारित स्टार्टअप्स को सहयोग देना है। गूगल इंडिया के अनुसार, यह एक्सेलेरेटर खासतौर पर उन भारतीय स्टार्टअप्स को लक्षित कर रहा है जो एजेंटिक एआई, मल्टीमॉडल एआई, फिजिकल एआई और सॉवरेन एआई जैसे उभरते क्षेत्रों में काम कर रहे हैं। कंपनी के अनुसार, अब एआई का उपयोग केवल प्रयोग तक सीमित नहीं रहा, बल्कि बड़े स्तर पर काम करने वाले समाधानों की ओर बढ़ रहा है। गूगल ने बताया कि यह प्रोग्राम उन एआई-फर्स्ट स्टार्टअप्स के लिए खुला है जो सीड से लेकर सीरीज ए स्टेज तक हैं और भारत से जुड़ी समस्याओं का समाधान कर रहे हैं या वैश्विक इंडस्ट्री के लिए खास मॉडल विकसित कर रहे हैं। 2026 बैच के तहत स्टार्टअप्स को बिना इक्विटी दिए कई तरह की सुविधाएं मिलेंगी, जिसमें गूगल के एडवांस एआई मॉडल्स जैसे जेमिनी, जेम्मा, इमेजन, वीओ और लिरिया तक पहुंच और तकनीकी सहयोग शामिल है। इसके अलावा, स्टार्टअप्स को गूगल डीपमाइंड, क्लाउड, हेल्थ और एंड्रॉयड टीम्स के एक्सपर्ट्स से वन-ऑन-वन मेंटरशिप भी मिलेगी। साथ ही क्लाउड इंफ्रास्ट्रक्चर, टीपीयू और क्रेडिट्स का लाभ भी पात्रता के आधार पर दिया जाएगा। यह प्रोग्राम स्टार्टअप्स को साप्ताहिक ट्रैकिंग और समर्पित मैनेजर्स के जरिए प्रोडक्ट, टेक्नोलॉजी और ग्रोथ से जुड़े लक्ष्यों को हासिल करने में मदद करेगा। पिछले बैचों में इस प्रोग्राम के अच्छे परिणाम देखने को मिले हैं। डीव्यू जैसे स्टार्टअप्स ने राजस्व में चार गुना वृद्धि दर्ज की, जबकि सुपरजॉइन ने जेमिनी 3.0 की मदद से अपनी सटीकता और स्पीड में 50 प्रतिशत सुधार किया। वहीं, पल्स ने डेटा एनालिसिस के जरिए 30 लाख डॉलर के जोखिम वाले राजस्व की पहचान की। कई स्टार्टअप्स ने एआई के जरिए अलग-अलग क्षेत्रों की समस्याओं का समाधान भी किया है। एआईस्टेथ ने एक स्मार्ट स्टेथोस्कोप तैयार किया, जिससे 75,000 से ज्यादा मरीजों की जांच की गई। वानी एआई ने वॉइस प्रोसेसिंग को बेहतर बनाया, जबकि रेजिलिएंस एआई और वीडियोएसडीके ने भी अपने-अपने क्षेत्रों में दक्षता बढ़ाई। यह एक्सेलेरेटर प्रोग्राम जून के आखिर में बेंगलुरु में एक सप्ताह के बूटकैंप के साथ शुरू होगा और अक्टूबर में ‘डेमो डे’ के साथ समाप्त होगा। इसके अलावा, आवेदन 19 अप्रैल को बंद हो जाएंगे।
महंगाई से लेकर धीमी आर्थिक वृद्धि तक, पश्चिम एशिया संकट वैश्विक अर्थव्यवस्था को कई तरह से करेगा प्रभावित: आईएमएफ

नई दिल्ली अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) ने कहा है कि अमेरिका-इज़रायल और ईरान के बीच जारी युद्ध वैश्विक अर्थव्यवस्था को कई तरीकों से प्रभावित कर सकता है, लेकिन इसका नतीजा एक ही होगा—महंगाई बढ़ेगी और आर्थिक विकास धीमा पड़ेगा। आईएमएफ के अनुसार, मध्य पूर्व में चल रहा यह युद्ध न केवल वहां के लोगों की जिंदगी और आजीविका को प्रभावित कर रहा है, बल्कि दुनिया की कई अर्थव्यवस्थाओं के लिए भी चिंता का कारण बन गया है, जो पहले ही पिछली आर्थिक चुनौतियों से उबरने की कोशिश कर रही थीं। आईएमएफ ने कहा कि यह संकट पूरी दुनिया को प्रभावित कर रहा है, लेकिन इसका असर सभी देशों पर समान नहीं है। ऊर्जा आयात करने वाले देश ज्यादा प्रभावित हो रहे हैं, गरीब देशों पर ज्यादा दबाव है और जिन देशों के पास कम आर्थिक भंडार हैं, वे ज्यादा मुश्किल में हैं। एशिया और यूरोप के बड़े ऊर्जा आयातक देश ईंधन और अन्य इनपुट लागत बढ़ने से सबसे ज्यादा प्रभावित हो रहे हैं। दुनिया के करीब 25-30 प्रतिशत तेल और 20 प्रतिशत एलएनजी की सप्लाई होर्मुज जलडमरूमध्य से होती है, जो एशिया और यूरोप की जरूरतों को पूरा करती है। आईएमएफ ने बताया कि अफ्रीका और एशिया के कई देश, जो तेल आयात पर निर्भर हैं, अब बढ़ी हुई कीमतों के बावजूद भी पर्याप्त सप्लाई हासिल करने में कठिनाई महसूस कर रहे हैं। संस्था ने चेतावनी दी कि मध्य पूर्व, अफ्रीका, एशिया-प्रशांत और लैटिन अमेरिका के कई हिस्सों में खाद्य और उर्वरक की कीमतें बढ़ने से अतिरिक्त दबाव बन रहा है। खासतौर पर गरीब देशों में खाद्य संकट का खतरा बढ़ सकता है और उन्हें बाहरी मदद की जरूरत पड़ सकती है। आईएमएफ के मुताबिक, अगर यह युद्ध छोटा रहता है तो तेल और गैस की कीमतें अचानक बढ़ सकती हैं, लेकिन अगर यह लंबे समय तक चलता है तो ऊर्जा की कीमतें लगातार ऊंची बनी रहेंगी, जिससे आयात पर निर्भर देशों की हालत और खराब हो सकती है। एशिया के बड़े मैन्युफैक्चरिंग देशों में ईंधन और बिजली की बढ़ती कीमतों से उत्पादन लागत बढ़ रही है और लोगों की खरीद क्षमता पर असर पड़ रहा है। कुछ देशों में भुगतान संतुलन पर भी दबाव दिख रहा है, जिससे उनकी मुद्रा कमजोर हो रही है। यूरोप में यह संकट 2021-22 के गैस संकट जैसी स्थिति पैदा कर सकता है। इटली और यूनाइटेड किंगडम (यूके) जैसे देश ज्यादा प्रभावित हो सकते हैं, जबकि फ्रांस और स्पेन जैसे देश अपनी परमाणु और नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता के कारण अपेक्षाकृत सुरक्षित हैं। यह युद्ध केवल ऊर्जा क्षेत्र ही नहीं, बल्कि अन्य जरूरी सप्लाई चेन को भी प्रभावित कर रहा है। जहाजों के रूट बदलने से ट्रांसपोर्ट और बीमा लागत बढ़ रही है और सामान पहुंचने में देरी हो रही है। आईएमएफ ने यह भी बताया कि खाड़ी क्षेत्र दुनिया में हीलियम की बड़ी सप्लाई करता है, जो सेमीकंडक्टर और मेडिकल उपकरणों में इस्तेमाल होता है। वहीं, इंडोनेशिया को निकेल प्रोसेस करने के लिए जरूरी सल्फर की कमी का सामना करना पड़ सकता है। पूर्वी अफ्रीका के वे देश जो खाड़ी देशों पर व्यापार और रेमिटेंस के लिए निर्भर हैं, उन्हें भी कमजोर मांग, लॉजिस्टिक समस्याओं और कम पैसे भेजे जाने का असर झेलना पड़ सकता है। आईएमएफ ने चेतावनी दी कि अगर ऊर्जा और खाद्य कीमतें लंबे समय तक ऊंची रहती हैं, तो इससे पूरी दुनिया में महंगाई बढ़ेगी। इसके अलावा, इस युद्ध ने वित्तीय बाजारों को भी प्रभावित किया है। वैश्विक शेयर बाजारों में गिरावट आई है, बॉन्ड यील्ड बढ़ी है, और बाजार में उतार-चढ़ाव बढ़ गया है। हालांकि, अभी तक यह गिरावट पिछले बड़े वैश्विक संकटों की तुलना में सीमित है, लेकिन इससे वित्तीय परिस्थितियां सख्त हो गई हैं। आईएमएफ ने कहा कि इस स्थिति से निपटने के लिए देशों को सही नीतियां अपनानी होंगी। जिन देशों के पास कम संसाधन हैं, उन्हें खास तौर पर सतर्क रहने की जरूरत है। आईएमएफ की प्रबंध निदेशक क्रिस्टालिना जॉर्जीवा ने कहा, “अनिश्चित दुनिया में ज्यादा देशों को हमारे समर्थन की जरूरत है और हम उनके साथ हैं।”
अंतरिक्ष में खेती का कमाल: जानिए ‘वेजी’ सिस्टम कैसे उगाता है पौधे

नई दिल्ली जैसे-जैसे इंसान गहरे अंतरिक्ष मिशनों की ओर कदम बढ़ा रहा है, वहां लंबे समय तक रहने की चुनौतियां भी सामने आ रही हैं। इन्हीं चुनौतियों में एक बड़ी जरूरत है ताजा और पौष्टिक भोजन की। इसी को ध्यान में रखते हुए NASA ने अंतरिक्ष में खेती का अनोखा प्रयोग शुरू किया है, जिसे ‘वेजी’ (Veggie) सिस्टम कहा जाता है। यह सिस्टम International Space Station (आईएसएस) पर स्थापित है और अंतरिक्ष यात्रियों को ताजी सब्जियां उपलब्ध कराने के साथ-साथ पौधों की वृद्धि पर शोध करने में मदद कर रहा है। क्या है ‘वेजी’ सिस्टम?‘वेजी’ एक छोटे स्पेस गार्डन की तरह काम करता है, जिसका आकार लगभग एक कैरी-ऑन बैग जितना होता है। इसमें एक समय में करीब छह पौधे उगाए जा सकते हैं। इसका मुख्य उद्देश्य माइक्रोग्रैविटी यानी शून्य गुरुत्वाकर्षण में पौधों की वृद्धि को समझना और अंतरिक्ष यात्रियों के लिए ताजा भोजन उपलब्ध कराना है। यह सिस्टम अंतरिक्ष में आत्मनिर्भर जीवन की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है। कैसे काम करता है यह स्पेस गार्डन?वेजी सिस्टम में पौधों को मिट्टी के बजाय खास “प्लांट पिलो” (तकिए) में उगाया जाता है, जिनमें उर्वरक और जरूरी पोषक तत्व पहले से भरे होते हैं। ये पिलो जड़ों तक पानी, हवा और पोषण का संतुलन बनाए रखते हैं। अंतरिक्ष में गुरुत्वाकर्षण न होने के कारण पानी बूंदों या बुलबुलों के रूप में तैरता है, जिससे पौधों को पानी देना एक बड़ी चुनौती बन जाता है।इस समस्या से निपटने के लिए वेजी में विशेष तकनीक का इस्तेमाल किया जाता है। पौधों को ऊपर से एलईडी लाइट्स द्वारा रोशनी दी जाती है, जिसमें लाल और नीली किरणें प्रमुख होती हैं। यही कारण है कि वेजी चैंबर अक्सर गुलाबी या लाल रंग में चमकता दिखाई देता है। अंतरिक्ष में उगीं ये फसलेंअब तक इस सिस्टम में कई प्रकार की फसलें सफलतापूर्वक उगाई जा चुकी हैं। इनमें लेट्यूस की अलग-अलग किस्में, चाइनीज कैबेज, मिजुना सरसों, लाल रशियन केल और जिनिया जैसे फूल शामिल हैं। खास बात यह है कि कुछ फसलों को अंतरिक्ष यात्रियों ने वहीं खाया भी, जबकि कुछ नमूनों को पृथ्वी पर वैज्ञानिक अध्ययन के लिए भेजा गया। मानसिक स्वास्थ्य के लिए भी फायदेमंदअंतरिक्ष में लंबे समय तक रहना मानसिक रूप से चुनौतीपूर्ण हो सकता है। ऐसे में पौधों की देखभाल करना अंतरिक्ष यात्रियों के लिए तनाव कम करने का एक तरीका बनता है। NASA का मानना है कि पौधे उगाने से उन्हें पृथ्वी से जुड़ाव महसूस होता है, जिससे उनका मानसिक स्वास्थ्य बेहतर रहता है। ‘एडवांस प्लांट हैबिटेट’: अगली पीढ़ी की तकनीकवेजी के अलावा NASA ने ‘एडवांस प्लांट हैबिटेट’ (APH) नामक एक और उन्नत सिस्टम विकसित किया है। यह पूरी तरह स्वचालित है और इसमें 180 से अधिक सेंसर लगे हैं, जो लगातार डेटा पृथ्वी पर भेजते हैं। इस सिस्टम में बौनी गेहूं जैसी फसलों का परीक्षण किया जा चुका है। भविष्य में टमाटर, मिर्च और बेरी जैसे पौधे उगाने की योजना है, जो पोषण के साथ-साथ अंतरिक्ष विकिरण से भी कुछ हद तक सुरक्षा दे सकते हैं। भविष्य के अंतरिक्ष मिशनों की नींवस्पेस में खेती सिर्फ वैज्ञानिक प्रयोग नहीं, बल्कि भविष्य के मंगल और चंद्रमा मिशनों की तैयारी है। अगर इंसान को लंबे समय तक अंतरिक्ष में रहना है, तो उसे भोजन के लिए पृथ्वी पर निर्भरता कम करनी होगी। ‘वेजी’ सिस्टम इस दिशा में एक अहम कदम साबित हो रहा है।
ईरान में अलर्ट रहने का नया तरीका, हमलों और अपडेट के लिए ऐप बना सहारा

नई दिल्ली मध्य-पूर्व में जारी तनाव के बीच ईरान में एक गंभीर डिजिटल संकट उत्पन्न हो रहा है। पिछले 30 दिनों से अधिक समय से देश में इंटरनेट समुद्र तट पर मौजूद हैं, जिसमें शेष आम नागरिकों के सामने की जानकारी हासिल करना बड़ी चुनौती बन गई है। हालांकि इस मुश्किल दौर में लोगों ने खुद ही रास्ता निकाल लिया है। अब वे हवाई हमले और जरूरी अपडेट पाने के लिए वैकल्पिक प्लेटफॉर्म और ऐप्स का सहारा ले रहे हैं। इथियोपिया के अनुसार, हज़ारों ईरानी नागरिक टेलीग्राम जैसे इलेक्ट्रानिक मैसेजिंग ऐप का इस्तेमाल कर रहे हैं। इसके माध्यम से लोग एक-दूसरे को यह जानकारी दे रहे हैं कि किस स्थान पर हवाई हमला हुआ, किस स्थान पर बिजली गिरी और किस स्थान पर कितनी क्षति हुई। इंटरनेट की भारी पाबंदियों के बावजूद यह ऐप एक महत्वपूर्ण संचार माध्यम बना हुआ है, जहां लोग तेजी से अपडेट शेयर कर रहे हैं। इसके अलावा, एक खास ऐप महसा संभावित (महसा अलर्ट) भी इस समय लोगों के लिए लाइफलाइन साबित हो रहा है। यह ऐप ईरान के डिजिटल अधिकार और स्वयंसेवकों द्वारा तैयार किया गया है। महसा अलर्ट के माध्यम से लोग हवाई हमले, सैन्य हमले और खतरनाक क्षेत्र की जानकारी ट्रैक कर पा रहे हैं। खास बात यह है कि यह पूरी तरह से क्राउडसोर्स सिस्टम है, यानी आम लोग ही सूचना प्रौद्योगिकीकर और साझा करके इसे शुरू करते हैं। इस ऐप की सूची भी काफी दिलचस्प है। मिलने वाली जानकारी को सीधे प्रकाशित नहीं किया जाता है, बल्कि उसे कई स्तरों पर दर्ज किया जाता है। सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो, चित्र और अन्य तथ्यों के आधार पर भ्रूण की पुष्टि की जाती है, इसलिए फर्जी खबरों से बचा जा सके। हालाँकि यह कोई आधिकारिक वेबसाइट नहीं है और पूरी तरह से रीयल-टाइम भी नहीं है, लेकिन फिर भी यह लोगों के लिए स्वामित्व की जानकारी का ज़रिया बन गया है। महसा की एक और प्रकृति यह है कि इसके डेटा अपडेट में बेहद बच्चे होते हैं—औसतन सिर्फ 100KB। इसका फ़ायदा यह है कि अवैध या सीमित इंटरनेट कनेक्शन में भी लोग आवश्यक जानकारी प्राप्त कर सकते हैं। ऐप में मेडिकल लॉट, एसआईटी सुईट और स्कींट चेक प्वाइंट जैसी अतिरिक्त जानकारी भी उपलब्ध कराई गई है, जिससे लोगों को सुरक्षा के दावे से मदद मिलती है। वहीं नेटब्लॉक्स के अनुसार, ईरान में इंटरनेट सामान्य स्तर के केवल 1 प्रतिशत तक है। यह स्थिति 28 फरवरी 2026 को संयुक्त राज्य अमेरिका और इजराइल द्वारा संयुक्त सैन्य हमले के बाद बनी। इसके बाद देश से करीब-करीब डिजिटल ब्लैक आउट हो गया, जिससे करीब 9 करोड़ लोग ग्लोबल वर्ल्ड से कट गए। इन हालातों ने यह साबित कर दिया है कि संकट के समय में प्रौद्योगिकी और सामूहिक प्रयास कितने अहम हैं। जब सरकारी सिस्टम उपलब्ध नहीं होता है, तब आम नागरिक खुद आगे बढ़कर समाधान तैयार करते हैं—और ईरान में ‘महसा संभावना’ का सबसे बड़ा उदाहरण सामने आया है।
HANUMAN JAYANTI 2026: हनुमान जयंती पर करें ये चमत्कारी उपाय बजरंगबली की कृपा से हर संकट होगा दूर

HANUMAN JAYANTI 2026: नई दिल्ली। हनुमान जयंती का पावन पर्व हिंदू धर्म में अत्यंत श्रद्धा और आस्था के साथ मनाया जाता है। यह दिन भगवान हनुमान के जन्मोत्सव के रूप में विशेष महत्व रखता है और इसे संकटों को दूर करने वाला दिन माना जाता है। चैत्र माह की पूर्णिमा तिथि पर आने वाला यह पर्व भक्तों के लिए एक ऐसा अवसर होता है जब सच्चे मन से की गई पूजा और उपाय जीवन में सकारात्मक बदलाव ला सकते हैं। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार हनुमान जयंती के दिन बजरंगबली की आराधना करने से भय बाधाएं और नकारात्मक ऊर्जा दूर होती हैं। यह दिन विशेष रूप से उन लोगों के लिए महत्वपूर्ण होता है जो मानसिक तनाव आर्थिक परेशानी या किसी प्रकार की रुकावट का सामना कर रहे हैं। इस दिन किए गए सरल लेकिन प्रभावी उपाय व्यक्ति के जीवन में साहस ऊर्जा और आत्मविश्वास का संचार करते हैं। हनुमान जयंती के दिन प्रातःकाल स्नान कर स्वच्छ वस्त्र धारण करने के बाद भगवान हनुमान की पूजा करनी चाहिए। मंदिर जाकर या घर में ही उनकी प्रतिमा के सामने दीपक जलाकर सिंदूर और चमेली का तेल अर्पित करना अत्यंत शुभ माना जाता है। इसके साथ ही हनुमान चालीसा और बजरंग बाण का पाठ करने से मन की अशांति दूर होती है और मानसिक शक्ति बढ़ती है। इस दिन राम नाम का जप करना भी बेहद फलदायी माना जाता है क्योंकि भगवान हनुमान को भगवान राम का परम भक्त माना जाता है। श्रीराम के नाम का स्मरण करने से हनुमान जी की विशेष कृपा प्राप्त होती है। भक्त यदि संभव हो तो इस दिन व्रत रखकर पूरे दिन सात्विक आहार का पालन करें और शाम को विधिपूर्वक पूजा अर्चना करें। हनुमान जयंती पर जरूरतमंदों को भोजन कराना और दान करना भी अत्यंत पुण्यदायी माना गया है। खासकर बंदरों को गुड़ और चना खिलाना शुभ फल देता है और इसे संकटों से मुक्ति का एक सरल उपाय माना जाता है। इसके अलावा पीपल के पेड़ के नीचे दीपक जलाने और हनुमान मंदिर में जाकर प्रसाद चढ़ाने से भी जीवन में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है। धार्मिक ग्रंथों में बताया गया है कि हनुमान जी को प्रसन्न करना कठिन नहीं है बल्कि सच्ची श्रद्धा और विश्वास ही उनकी कृपा पाने का सबसे बड़ा माध्यम है। इसलिए इस दिन किए गए छोटे छोटे उपाय भी बड़े परिणाम दे सकते हैं। हनुमान जयंती केवल एक पर्व नहीं बल्कि आत्मबल और विश्वास को मजबूत करने का दिन है। यह हमें सिखाता है कि कठिन से कठिन परिस्थितियों में भी साहस और भक्ति के बल पर हर समस्या का समाधान संभव है। यदि इस दिन पूरे मन से बजरंगबली की आराधना की जाए तो जीवन में आने वाले संकटों से राहत मिल सकती है और सफलता के नए रास्ते खुल सकते हैं।