'स्कूल चलें हम’,

– प्रो. मनोज कुमारशिक्षा की महती जवाबदारी समाज की है. सरकार शिक्षा के संसाधन उपलब्ध कराती है, अवसर देती है और अपने स्तर पर प्रयास करती है कि कोई बच्चा स्कूल जाने से ना छूटे. इसके बाद जवाबदारी आती है समाज की अर्थात हम-सब की कि बच्चों को स्कूल तक पहुँचायें. बच्चा का अर्थ केवल अपना बच्चा नहीं है बल्कि वह अपने आसपास का बच्चा भी है. आपके घर में सफाई करने वाली, बर्तन-कपड़ा धोने वाली दीदी होंगी, आपके घर में ड्रायवर भी होगा और अन्य सहायता करने वाले लोग भी आसपास होंगे और इनके बच्चे भी होंगे. कुछ अपने बच्चों को स्कूल भेजते होंगे और कुछ नहीं भेजते होंगे. ऐसे परिवारों को उनके बच्चों को स्कूल भेजने के लिए प्रोत्साहित करना हम-सब की सामाजिक एवं नैतिक जवाबदारी है. नवीन शिक्षा सत्र से चार दिनों का ‘स्कूल चलें हम’ उत्सव आरंभ हो गया है. यही चार दिन बच्चों का भविष्य तय करने के लिए अर्थवान है. शिक्षकों की भी जवाबदारी बढ़ गई है कि वे नौनिहालों को किताब की ओर आकर्षित करें. ध्यान रखना होगा कि स्कूल सीखने और समझने की जगह है और ऐसे में शिक्षकों को स्नेह के साथ बच्चों के मन को जीतना होगा. मध्यप्रदेश में अब सरकारी स्कूल सुविधाहीन नहीं हैं और ना ही निजी स्कूलों से कमतर. राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के तहत स्मार्ट क्लास, डिजिटल लाइब्रेरी और वोकेशनल कोर्स के साथ पीएमश्री योजना के तहत सरकारी स्कूलों को आधुनिक बनाया जा रहा है या यों कहें कि इस दिशा में काफी कुछ कार्य सरकार ने पूर्ण कर लिया है तो अतिशयोक्ति नहीं होगी. मिसाल के तौर पर पीएम श्री योजना के अंतर्गत 799 शासकीय विद्यालयों को स्मार्ट क्लास, प्रयोगशाला और लाइब्रेरी के साथ अपग्रेड किया गया है। साथ ही उच्च प्राथमिक कक्षाओं के लिए सक्रिय अभ्यास क्रियाविधि का उपयोग किया जा रहा है, जो विज्ञान और सामाजिक विज्ञान को इंटरैक्टिव बनाता है। स्कूलों में कौशल विकास के लिए व्यावसायिक कोर्स (जैसे ब्यूटीशियन, सिलाई) भी शुरू किए गए हैं। स्कूली शिक्षा का नया शैक्षणिक सत्र 2026-27, 1 अप्रैल से शुरू हो चुका है जिसमें ‘स्कूल चलें हम’ अभियान के तहत बच्चों का स्वागत, नि:शुल्क पुस्तकें वितरण और पहले दिन से ही पढ़ाई शुरू की गई है। ‘स्कूल चलें हम’ अभियान में नामांकन और पढ़ाई पर फोकस रहेगा। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में 92 हजार से अधिक सरकारी स्कूलों में 85 लाख से अधिक छात्रों का स्वागत किया जाएगा और मुफ्त किताबें वितरित की गई। ‘स्कूल चलें हम’ अभियान को इस तरह डिजाइन किया गया है कि हर बच्चे की रूचि स्कूल आने में हो. अभियान के दूसरे दिन ‘भविष्य से भेंट’ कार्यक्रम में अपने-अपने क्षेत्र के प्रतिष्ठित लोगों से नवागत विद्यार्थियों की भेंट होगी. विद्यार्थी उनकी सफलता के बारे में सवाल करेंगे. यह प्रयास विद्यार्थियों को भविष्य में क्या बनना है, के प्रति पे्ररित करेगा. विशिष्ट उपलब्धियां हासिल करने वाले खिलाड़ी, साहित्यकार, कलाकार, मीडिया, संचार मित्रों, पुलिस अधिकारी, राज्य शासन के अधिकारी बच्चों को पढ़ाई के महत्व और प्रेरणादायी कहानियां सुना कर उन्हें प्रेरित करेंगे। प्रत्येक जिले के प्रथम एवं द्वितीय श्रेणी के अधिकारियों को किसी एक शाला में जाकर एक कालखण्ड में बच्चों के साथ सुरूचिपूर्ण ढंग से संवाद करने के लिये भी कहा गया है अभियान का तीसरा तीन सांस्कृतिक एवं खेल गतिविधियों का होगा. पालकों को अपनापन लगे और वे बच्चों को स्कूल भेजने के लिए दूसरों को प्रेरित करें, इस ध्येय के साथ उत्कृृष्ट उपस्थिति वाले विद्यार्थियों के पालकों को सम्मानित किया जाएगा. यह अपने आप में अनोखी पहल होगी. अभियान के अंतर्गत 3 अप्रैल को शाला स्तर पर पालकों के साथ सांस्कृतिक एवं खेल-कूद की गतिविधियां आयोजित की जायेंगी। इसका उद्देश्य पालकों का विद्यालय से जोडऩा है। इसी दिन शाला में उपस्थित पालकों को शैक्षणिक स्टॉफ द्वारा राज्य सरकार की स्कूल शिक्षा से जुड़ी सरकारी योजनाओं की जानकारी दी जायेगी। अभियान के अंतिम दिन ड्रॉपआउट बच्चों को वापस स्कूल लाने के लिए विशेष पहल और विशेष शिक्षण सहायता की रूपरेखा से अवगत कराया जाएगा. अभियान के अंतिम दिन 4 अप्रैल को ऐसे छात्रों को चिन्हित किया जायेगा, जो किन्हीं वजहों से कक्षोन्नति प्राप्त करने में असफल हो गये हैं। पालकों को इन बच्चों की आगे की पढ़ाई के लिये समझाइश दी जायेगी। उन्हें बताया जायेगा कि असफल होने के बाद भी लगातार प्रयास से अच्छा भविष्य तैयार किया जा सकता है। इसमें हम-सब सहायता कर सकते हैं. शिक्षा पर सबका अधिकार है, यह बात अधिकतम लोगों तक पहुंचाने की जवाबदारी हमें ही लेना होगी. सरकार पर आश्रित रहने से कुछ खास बदलाव होने वाला नहीं है. सरकार अपने स्तर पर प्रयास करती है लेकिन इन प्रयासों को सफलता तक पहुँचाने की जवाबदारी समाज की होती है. सरकार ने एक कोशिश कर स्कूलों के ढाँचे को सुदृढ़ करने की कोशिश की है. शासकीय स्कूल नए साज-सज्जा के साथ निजी स्कूलों के टक्कर में खड़े हो गए हैं फिर वह पीएमश्री स्कूल हो या सांदीपनी स्कूल. एक बड़ी सोच के साथ कम बजट में बेहतर शिक्षा देने की पहल हो चुकी है और इस पहल को आगे बढ़ाने की जवाबदारी उठाने के लिए हम-सबको आगे आना होगा.
UPI ट्रांजैक्शन फेल होने की समस्या फैल रही, बैंक तत्पर हैं समाधान के लिए

नई दिल्ली। देशभर में बुधवार को डिजिटल भुगतान सेवाओं में बाधा उत्पन्न हुई, जिससे कई यूजर्स यूपीआई के माध्यम से ट्रांजैक्शन पूरा नहीं कर पाए। डाउनडिटेक्टर के आंकड़ों के अनुसार दिन भर में शिकायतों में तेजी से वृद्धि हुई, जो व्यापक तकनीकी समस्या का संकेत देती है। सबसे ज्यादा प्रभावित बैंक और शहर सबसे ज्यादा समस्या भारतीय स्टेट बैंक (एसबीआई) में देखी गई, जहां 500 से अधिक आउटेज रिपोर्ट दर्ज की गई। यूको बैंक में करीब 40 शिकायतें सामने आईं। यह समस्या किसी एक शहर तक सीमित नहीं थी-नई दिल्ली, मुंबई, बेंगलुरु, जयपुर और पुणे सहित कई शहरों से ट्रांजैक्शन फेल होने और पेमेंट एरर की रिपोर्ट मिली। एसबीआई के मामलों में कोलकाता, गुवाहाटी और चेन्नई से भी शिकायतें आईं। यूजर्स की प्रतिक्रिया और सोशल मीडिया पर हलचल कई यूजर्स ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर अपने अनुभव साझा किए। कुछ ने फेल ट्रांजैक्शन को लेकर नाराजगी जताई, जबकि कई ने यह समझने में कठिनाई जताई कि समस्या उनके बैंक में है या उनके फोन में। कई मामलों में ट्रांजैक्शन बीच में अटक गए और कुछ यूजर्स ने बताया कि उनके यूपीआई ऐप्स ठीक से लोड ही नहीं हो रहे थे। बैंकों का समाधान और सलाह एसबीआई ने सोशल मीडिया पर बताया कि निर्धारित मेंटेनेंस का समय बढ़ाकर 1 अप्रैल दोपहर 12:30 बजे तक कर दिया गया है। इस दौरान यूपीआई, आईएमपीएस, योनो, इंटरनेट बैंकिंग, एनईएफटी और आरटीजीएस जैसी सेवाएं प्रभावित हो सकती हैं। बैंक ने ग्राहकों को सलाह दी कि वे यूपीआई लाइट, ईरुपी (सीबीडीसी) ऐप और एटीएम सेवाओं का इस्तेमाल करें। एसबीआई ने कहा, “हमें हुई असुविधा के लिए खेद है और आपके सहयोग के लिए धन्यवाद। बाजार पर असर और शेयर प्रदर्शन उपभोक्ता असुविधा के बीच भी, बुधवार को भारतीय शेयर बाजार में तेजी रही। देश के सबसे बड़े सरकारी बैंक एसबीआई के शेयरों में 3.94 प्रतिशत की बढ़त दर्ज की गई, और एनएसई पर बैंक के शेयर 1,018 रुपए पर बंद हुए। हालांकि पिछले एक महीने में इसके शेयर 14 प्रतिशत से अधिक गिर चुके हैं।
टीम इंडिया ने 28 साल का इंतजार खत्म कर इतिहास रचा, दूसरी बार बनी विश्व चैंपियन

नई दिल्ली। भारतीय क्रिकेट के इतिहास में 2 अप्रैल का दिन हमेशा यादगार रहेगा। 2 अप्रैल 2011 को एमएस धोनी की कप्तानी वाली टीम इंडिया ने मुंबई के वानखेड़े स्टेडियम में श्रीलंका को 6 विकेट से हराकर अपना दूसरा वनडे विश्व कप जीता। इस जीत ने करोड़ों भारतीय क्रिकेट फैंस के 28 साल के इंतजार को समाप्त कर दिया और धोनी को भारतीय क्रिकेट का महानतम कप्तान साबित कर दिया। फाइनल में मैच का रोमांच और प्रमुख प्रदर्शनश्रीलंका ने टॉस जीतकर पहले बल्लेबाजी का फैसला किया और महेला जयवर्धने की नाबाद 103 रन की पारी तथा कुमार संगाकारा के 48 रनों की मदद से 6 विकेट पर 274 रन बनाए। भारत ने 48.2 ओवर में 4 विकेट खोकर 277 रन बनाकर मैच 6 विकेट से अपने नाम किया। गौतम गंभीर ने 97, धोनी ने नाबाद 91, विराट कोहली ने 35 और युवराज सिंह ने नाबाद 21 रन बनाए। खिलाड़ियों को मिले सम्मानइस फाइनल में शानदार खेल दिखाने वाले धोनी को प्लेयर ऑफ द मैच चुना गया। वहीं, टूर्नामेंट में 362 रन बनाने और 15 विकेट लेने वाले युवराज सिंह को प्लेयर ऑफ द सीरीज का सम्मान मिला। धोनी का विजयी छक्का भारतीय क्रिकेट इतिहास के सबसे यादगार पलों में शामिल हो गया है। टीम इंडिया के विश्व कप सफर की झलकभारत ने पहला वनडे विश्व कप 1983 में कपिल देव की कप्तानी में जीता था। इसके बाद सौरव गांगुली की टीम 2003 में फाइनल तक पहुँची, लेकिन ऑस्ट्रेलिया ने खिताब जीतने का सपना तोड़ दिया। 2011 की जीत ने भारत को फिर से विश्व क्रिकेट में अपनी मजबूती दिखाई। इसके बाद 2023 में रोहित शर्मा की कप्तानी वाली टीम को ऑस्ट्रेलिया ने फाइनल में हराकर खिताब का सपना रोक दिया। टीम इंडिया ने अब तक चार बार वनडे विश्व कप फाइनल खेला है और दो बार सफलता हासिल की है।
रूस भारत के लिए एक बार फिर मददगार साबित

– सौरभ वार्ष्णेयजब-जब भारत को जरूरत पड़ी, तब -तब रूस ने अपना मित्रता धर्म निभाया है। वैश्विक राजनीति के जटिल दौर में, जब विश्व शक्तियों के बीच तनाव और प्रतिस्पर्धा चरम पर है, ऐसे समय में भारत के लिए रूस का एक बार फिर भरोसेमंद साझेदार के रूप में सामने आना बेहद महत्वपूर्ण है। यह केवल कूटनीतिक संबंधों का मामला नहीं, बल्कि रणनीतिक, आर्थिक और ऊर्जा सुरक्षा से जुड़ा एक व्यापक सहयोग है। ऐसे समय में जब पूरी दुनिया गैस कच्चे तेल की कमी से त्रस्त है तब 9 मार्च तक भारत का रूसी तेल आयात 5.55 करोड़ बैरल तक पहुंच गया है जो कि खरीद नौ महीने में सबसे अधिक है। भारत की तेल खरीद में अंगोला भी पिक्चर में आया है। उसकी सप्लाई में 255 फीसदी का भारी इजाफा हुआ है। भारत दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा तेल आयातक है। उसके कच्चे तेल के आयात का लगभग 40-50 फीसदी हिस्सा होर्मुज स्ट्रेट से होकर गुजरता है। सऊदी अरब से होने वाले आयात में फरवरी के मुकाबले 38 फीसदी की कमी आई। वहीं दूसरी ओर अंगोला से होने वाली खरीद में महीने-दर-महीने के आधार पर जबरदस्त 255 फीसदी की बढ़ोतरी हुई। यह अपने अब तक के सबसे ऊंचे स्तर पर पहुंच गया। भारत की ओर से इराक से की जाने वाली खरीद में भी 73 फीसदी की कमी आई। यह घटकर 73 लाख बैरल रह गई। इसी तरह संयुक्त अरब अमीरात से होने वाली खरीद में भी 59 फीसदी की कमी आई। यह 64 लाख बैरल पर पहुंच गई। भारत और रूस के संबंध दशकों पुराने हैं, जो समय-समय पर परखे गए और हर बार मजबूत होकर उभरे। शीत युद्ध के दौर से लेकर आज के बहुध्रुवीय विश्व तक, रूस ने कई अहम मौकों पर भारत का साथ दिया है। आज जब पश्चिमी देशों और रूस के बीच टकराव बढ़ा है, तब भारत ने संतुलित विदेश नीति अपनाते हुए अपने राष्ट्रीय हितों को प्राथमिकता दी है। ऊर्जा के क्षेत्र में रूस की भूमिका विशेष रूप से उल्लेखनीय रही है। वैश्विक बाजार में तेल और गैस की कीमतों में अस्थिरता के बीच रूस ने भारत को रियायती दरों पर कच्चा तेल उपलब्ध कराया, जिससे देश की अर्थव्यवस्था को स्थिरता मिली और आम जनता पर महंगाई का बोझ कुछ हद तक कम हुआ। यह सहयोग भारत की ऊर्जा सुरक्षा के लिए एक मजबूत आधार बनकर उभरा है। रक्षा क्षेत्र में भी रूस भारत का प्रमुख सहयोगी रहा है। आधुनिक हथियारों, तकनीकी हस्तांतरण और संयुक्त उत्पादन के क्षेत्र में दोनों देशों के बीच गहरा सहयोग है। चाहे वह ब्रह्मोस मिसाइल परियोजना हो या एस-400 वायु रक्षा प्रणाली, रूस ने भारत की सैन्य क्षमता को सुदृढ़ करने में अहम योगदान दिया है। हालांकि, इस संबंध में चुनौतियां भी कम नहीं हैं। रूस पर पश्चिमी प्रतिबंधों के चलते भुगतान तंत्र, आपूर्ति श्रृंखला और अंतरराष्ट्रीय दबाव जैसे मुद्दे सामने आए हैं। इसके बावजूद भारत ने अपने रणनीतिक हितों को ध्यान में रखते हुए रूस के साथ सहयोग जारी रखा है। आज जरूरत इस बात की है कि भारत और रूस अपने संबंधों को और अधिक विविध और आधुनिक बनाएं। केवल रक्षा और ऊर्जा तक सीमित न रहकर, विज्ञान, तकनीक, अंतरिक्ष और व्यापार के नए क्षेत्रों में भी सहयोग बढ़ाया जाना चाहिए। इससे दोनों देशों के संबंध और अधिक मजबूत और टिकाऊ बन सकते हैं। यह कहा जा सकता है कि बदलते वैश्विक परिदृश्य में रूस का भारत के लिए मददगार बनकर उभरना न केवल द्विपक्षीय संबंधों की मजबूती का संकेत है, बल्कि यह भारत की स्वतंत्र और संतुलित विदेश नीति की सफलता का भी प्रमाण है। भारत-रूस मित्रता बहुत पुरानीभारत और रूस के बीच संबंध केवल कूटनीतिक नहीं, बल्कि ऐतिहासिक विश्वास, रणनीतिक सहयोग और परस्पर सम्मान पर आधारित हैं। यह मित्रता दशकों पुरानी है और बदलते वैश्विक परिदृश्य के बावजूद निरंतर मजबूत होती रही है। शीत युद्ध के दौर में, जब विश्व दो ध्रुवों में बंटा हुआ था, तब सोवियत संघ ने भारत का महत्वपूर्ण सहयोगी बनकर साथ दिया। चाहे 1971 के युद्ध का समय हो या औद्योगिक विकास की शुरुआत, सोवियत समर्थन ने भारत की आत्मनिर्भरता को मजबूती दी। यही कारण है कि दोनों देशों के संबंध केवल हितों तक सीमित नहीं, बल्कि भरोसे की नींव पर टिके हैं। आज के दौर में भी, रक्षा, ऊर्जा और तकनीक के क्षेत्रों में भारत-रूस सहयोग बेहद अहम है। भारत की रक्षा प्रणाली में रूस की महत्वपूर्ण भूमिका रही है, वहीं ऊर्जा क्षेत्र में भी रूस एक विश्वसनीय भागीदार बना हुआ है। वैश्विक तनावों और पश्चिमी प्रतिबंधों के बीच भी भारत ने अपने राष्ट्रीय हितों को प्राथमिकता देते हुए रूस के साथ संतुलित संबंध बनाए रखे हैं। हालांकि, बदलती वैश्विक राजनीति में नई चुनौतियां भी सामने हैं। अमेरिका और पश्चिमी देशों के साथ भारत के बढ़ते संबंध, और रूस का चीन के साथ समीकरण, इस मित्रता के लिए नई जटिलताएं पैदा कर रहे हैं। इसके बावजूद, भारत की विदेश नीति ‘रणनीतिक स्वायत्तता’ पर आधारित है, जो उसे सभी प्रमुख शक्तियों के साथ संतुलन बनाने में सक्षम बनाती है। वर्तमान समय में भारत-रूस संबंधों को नई दिशा देने की आवश्यकता है। केवल रक्षा तक सीमित न रहकर, व्यापार, निवेश, विज्ञान और प्रौद्योगिकी के क्षेत्रों में भी सहयोग बढ़ाना होगा। इससे यह मित्रता और अधिक व्यापक और टिकाऊ बन सकेगी। भारत-रूस मित्रता केवल अतीत की विरासत नहीं, बल्कि भविष्य की संभावनाओं का भी आधार है। यह संबंध समय की हर परीक्षा में खरा उतरा है और आने वाले वर्षों में भी वैश्विक स्थिरता और संतुलन में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।
मंत्रालय में गूंजा वंदे मातरम और जन गण मन सामूहिक गायन से देशभक्ति का माहौल

भोपाल । भोपाल स्थित मंत्रालय में अप्रैल माह के प्रथम शासकीय कार्य दिवस की शुरुआत राष्ट्रभक्ति के भाव से ओतप्रोत वातावरण में हुई सरदार वल्लभभाई पटेल पार्क में आयोजित कार्यक्रम में अधिकारियों कर्मचारियों और पुलिस कर्मियों ने एक साथ राष्ट्रगीत वंदे मातरम और राष्ट्रगान जन गण मन का सामूहिक गायन किया इस दौरान पूरे परिसर में देशभक्ति का उल्लासपूर्ण माहौल दिखाई दिया कार्यक्रम में पुलिस बैंड द्वारा प्रस्तुत की गई मधुर धुनों ने वातावरण को और भी भावपूर्ण बना दिया बैंड की स्वर लहरियों के साथ जब उपस्थित सभी लोगों ने एक स्वर में राष्ट्रगीत और राष्ट्रगान गाया तो पूरा परिसर देशभक्ति की भावना से गूंज उठा इस अवसर पर मुख्य सचिव अनुराग जैन अपर मुख्य सचिव डॉ राजेश राजौरा श्री अशोक बर्णवाल और श्री संजय कुमार शुक्ला सहित मंत्रालय वल्लभ भवन सतपुड़ा और विंध्याचल भवन के अनेक अधिकारी कर्मचारी मौजूद रहे सभी ने पूरे उत्साह और गरिमा के साथ इस आयोजन में भाग लिया हर माह के पहले कार्य दिवस पर आयोजित होने वाला यह सामूहिक गायन कार्यक्रम न केवल देशभक्ति की भावना को सुदृढ़ करता है बल्कि शासकीय कार्यों के प्रति समर्पण और जिम्मेदारी का भी संदेश देता है इस तरह के आयोजन कर्मचारियों में एकता अनुशासन और राष्ट्रीय चेतना को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैंकार्यक्रम ने एक बार फिर यह संदेश दिया कि राष्ट्र सर्वोपरि है और उसकी सेवा ही प्रत्येक नागरिक का सर्वोच्च कर्तव्य है
भारतीय टीम जुलाई में जिम्बाब्वे के खिलाफ खेलेगी 3 टी20 मैचों की रोमांचक सीरीज

नई दिल्ली। जिम्बाब्वे क्रिकेट ने बुधवार को घोषणा की कि टी20 विश्व कप 2026 के विजेता भारतीय क्रिकेट टीम जुलाई 2026 में तीन टी20 मैचों की द्विपक्षीय सीरीज खेलने जिम्बाब्वे का दौरा करेगी। यह सीरीज 23, 25 और 26 जुलाई को हरारे स्पोर्ट्स क्लब में आयोजित होगी। सभी मैच भारतीय समयानुसार शाम 4:30 बजे शुरू होंगे। सीरीज का महत्व और भारतीय टीम का सफरभारत, जो हाल ही में आयरलैंड और इंग्लैंड के खिलाफ टी20 सीरीज खेल चुका है, जिम्बाब्वे दौरे पर अपने प्रदर्शन को जारी रखना चाहेगा। यह भारतीय टीम के लिए टी20 विश्व कप में मिली सफलता के बाद निरंतर उच्च स्तर पर प्रदर्शन का मौका है। जिम्बाब्वे की तैयारी और उम्मीदेंजिम्बाब्वे क्रिकेट के प्रबंध निदेशक गिवमोर माकोनी ने कहा, “भारत के खिलाफ मैच हमेशा उत्साह और रोमांच पैदा करते हैं। यह हमारे खिलाड़ियों के लिए विश्व चैंपियन टीम के खिलाफ अपने घरेलू मैदान पर खुद को परखने का शानदार अवसर है।” उन्होंने आगे कहा कि टी20 विश्व कप 2026 में जिम्बाब्वे के शानदार प्रदर्शन के बाद यह सीरीज खिलाड़ियों के लिए अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में मजबूती दिखाने और मोमेंटम बनाए रखने का प्लेटफॉर्म होगी। माकोनी ने यह भी बताया कि लंबे समय के बाद जिम्बाब्वे का भारत दौरा द्विपक्षीय सीरीज के लिए ऐतिहासिक है। “भारत दुनिया के क्रिकेट के सबसे बेहतरीन डेस्टिनेशन में से एक है, और यह दौरा हमारे खिलाड़ियों के लिए सम्मान का मौका है। हम प्रतिस्पर्धात्मक और उच्च-गुणवत्ता वाले क्रिकेट का इंतजार कर रहे हैं, और विश्वास है कि दोनों देशों के बीच क्रिकेट संबंध और मजबूत होंगे।” भविष्य की योजनाएँ और वनडे सीरीजबीसीसीआई ने पहले ही जनवरी 2027 में जिम्बाब्वे के भारत दौरे की घोषणा की थी, जिसमें तीन वनडे मैच खेले जाएंगे। यह मार्च 2002 के बाद जिम्बाब्वे का भारत में पहला द्विपक्षीय वनडे दौरा होगा। तीनों वनडे मुकाबले कोलकाता, हैदराबाद और मुंबई में 3, 6 और 9 जनवरी को आयोजित होंगे।
डॉ कुंवर विजय शाह की अपील शिक्षा से ही बदलेगा जनजातीय समाज का भविष्य

भोपाल । मध्यप्रदेश में जनजातीय परिवारों की नई पीढ़ी को शिक्षित और सशक्त बनाने के लिए सरकार लगातार प्रयासरत है जनजातीय कार्य मंत्री डॉ कुंवर विजय शाह ने सभी अभिभावकों से अपने बच्चों को अनिवार्य रूप से स्कूल भेजने की अपील करते हुए कहा कि शिक्षा से अधिक मूल्यवान कुछ भी नहीं है और यही उज्जवल भविष्य की सबसे मजबूत नींव है उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव के नेतृत्व में राज्य सरकार जनजातीय समाज के शैक्षणिक विकास के लिए पूरी तरह संकल्पित है मंत्री ने कहा कि प्रदेश में केंद्र और राज्य सरकार के समन्वय से जनजातीय क्षेत्रों में शिक्षा व्यवस्था में व्यापक सुधार हुआ है अब न केवल शिक्षकों की उपलब्धता सुनिश्चित की गई है बल्कि स्कूलों की अधोसंरचना भी पहले से अधिक सुदृढ़ हुई है उन्होंने स्वयंसेवी संस्थाओं और शासकीय योजनाओं में कार्यरत कर्मचारियों से भी आग्रह किया कि वे स्कूल जाने योग्य प्रत्येक बच्चे का नामांकन सुनिश्चित कर अपनी सामाजिक जिम्मेदारी निभाएं जनजातीय क्षेत्रों में शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए अनेक योजनाएं संचालित की जा रही हैं प्रदेश में 63 एकलव्य आदर्श आवासीय विद्यालय संचालित हैं जहां लगभग 25 हजार विद्यार्थी आवासीय सुविधा के साथ अध्ययन कर रहे हैं इन विद्यालयों में विद्यार्थियों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के साथ बेहतर रहने और पढ़ने की सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं इसके साथ ही कक्षा 11 और 12 तथा महाविद्यालयीन विद्यार्थियों के लिए छात्रवृत्ति योजनाएं संचालित हैं वर्ष 2024 25 में लगभग एक लाख बानवे हजार विद्यार्थियों को 348 करोड़ रुपये की छात्रवृत्ति प्रदान की गई जिससे उच्च शिक्षा को प्रोत्साहन मिला है वहीं शिक्षकों की भर्ती प्रक्रिया भी जारी है और हजारों पदों पर नियुक्तियां की जा रही हैं जिससे शिक्षा की गुणवत्ता में और सुधार होगा प्रतिभावान विद्यार्थियों को राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगी परीक्षाओं जैसे जेईई और नीट की तैयारी के लिए विशेष कोचिंग की सुविधा भी दी जा रही है इंदौर और भोपाल जैसे प्रमुख केंद्रों पर विद्यार्थियों को विशेषज्ञ मार्गदर्शन उपलब्ध कराया जा रहा है ताकि वे प्रतिस्पर्धी परीक्षाओं में बेहतर प्रदर्शन कर सकें स्कूली अधोसंरचना के क्षेत्र में भी उल्लेखनीय विस्तार हुआ है बड़ी संख्या में आश्रम छात्रावास और विद्यालय संचालित किए जा रहे हैं जहां लाखों विद्यार्थी निवास कर शिक्षा प्राप्त कर रहे हैं इन संस्थानों में विद्यार्थियों को नि शुल्क आवास भोजन बिजली पानी और खेलकूद की सुविधाएं प्रदान की जा रही हैं सरकार ने उन विद्यार्थियों के लिए भी व्यवस्था की है जिन्हें छात्रावास में स्थान नहीं मिल पाता उनके लिए आवास भत्ता योजना लागू की गई है जिसके अंतर्गत विभिन्न शहरों और विकासखंड स्तर पर मासिक आर्थिक सहायता दी जा रही है इस योजना से बड़ी संख्या में छात्र लाभान्वित हो रहे हैं मंत्री डॉ शाह ने कहा कि शिक्षा की गुणवत्ता बढ़ाने के लिए आधुनिक संसाधनों से युक्त विद्यालय विकसित किए जा रहे हैं सांदीपनि विद्यालयों के माध्यम से विद्यार्थियों को आधुनिक वातावरण में शिक्षा दी जा रही है साथ ही खेलकूद और सांस्कृतिक गतिविधियों को भी प्रोत्साहित किया जा रहा है कुल मिलाकर मध्यप्रदेश में जनजातीय शिक्षा को लेकर एक व्यापक और मजबूत ढांचा तैयार किया जा रहा है जिसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि कोई भी बच्चा शिक्षा से वंचित न रहे और हर छात्र अपने सपनों को साकार कर सके
सलीम दुर्रानी: अफगान मूल के एकमात्र भारतीय क्रिकेटर जिन्हें मिला अर्जुन पुरस्कार

नई दिल्ली। भारतीय क्रिकेट में अपनी जगह बनाना किसी भी खिलाड़ी के लिए आसान नहीं रहा है, लेकिन अगर आप किसी दूसरे देश से हों और वहां क्रिकेट प्रमुख खेल न हो, तो यह और भी चुनौतीपूर्ण हो जाता है। सलीम दुर्रानी की कहानी इस कठिन रास्ते को पार करने वाले खिलाड़ियों में अद्वितीय है। अफगानिस्तान से जामनगर तक का सफरसलीम दुर्रानी का जन्म 11 दिसंबर 1934 को खैबर दर्रा, अफगानिस्तान में हुआ। उनके पिता अब्दुल अजीज दुर्रानी पेशेवर क्रिकेटर थे। 1935 में कराची के दौरे पर अब्दुल अजीज की बल्लेबाजी और विकेटकीपिंग से प्रभावित होकर नवानगर (आज का जामनगर) के जाम साहिब दिग्विजयसिंह रणजीतसिंह ने उन्हें सब-इंस्पेक्टर की नौकरी का ऑफर दिया। इसी अवसर पर दुर्रानी परिवार जामनगर में बस गया। सलीम केवल तीन साल के थे जब वह भारत आ गए। 1947 के बंटवारे के बाद उनके पिता पाकिस्तान चले गए, जबकि उनका परिवार जामनगर में रहा। ऑलराउंडर की भूमिका और टेस्ट करियरदुर्रानी एक ऑलराउंडर थे। वह धीमे बाएं हाथ के ऑर्थोडॉक्स गेंदबाज और बाएं हाथ के बल्लेबाज थे। उनके छक्के मारने की क्षमता उन्हें खास बनाती थी। अफगानिस्तान में जन्मे और भारतीय टीम के लिए खेलते हुए, दुर्रानी 1960 में टेस्ट डेब्यू करने के बाद 1973 तक 29 मैचों में भारत का प्रतिनिधित्व कर चुके थे। उन्होंने 50 पारियों में 1 शतक और 7 अर्धशतक बनाकर 1202 रन बनाए और 75 विकेट लिए। महत्वपूर्ण जीतों में अहम भूमिका1961-62 में इंग्लैंड के खिलाफ भारत की सीरीज जीत में दुर्रानी ने कोलकाता और चेन्नई में क्रमशः 8 और 10 विकेट लेकर भारत को जीत दिलाई। एक दशक बाद, 1970 में पोर्ट ऑफ स्पेन में वेस्टइंडीज के खिलाफ भारत की पहली जीत में भी उन्होंने क्लाइव लॉयड और गैरी सोबर्स जैसे दिग्गजों को आउट किया, जो भारतीय क्रिकेट के इतिहास में मील का पत्थर साबित हुआ। अर्जुन पुरस्कार और जीवन सम्मानसलीम दुर्रानी पहले क्रिकेटर थे जिन्होंने अर्जुन पुरस्कार जीता। 2011 में उन्हें सी.के. नायडू लाइफटाइम अचीवमेंट अवार्ड से भी सम्मानित किया गया, जो भारतीय क्रिकेट बोर्ड का सर्वोच्च पुरस्कार है। विदाई: 88 साल की उम्र मेंसलीम दुर्रानी ने 2 अप्रैल 2023 को 88 वर्ष की उम्र में कैंसर से अंतिम सांस ली। उनका क्रिकेट और भारतीय खेल जगत में योगदान आज भी याद किया जाता है।
GWALIOR BHIND HIGHWAY : ‘मौत का हाईवे’ अब बनेगा फोरलेन: सिंधिया ने गडकरी से फिर उठाया NH-719 चौड़ीकरण का मुद्दा

HIGHLIGHTS: NH-719 को फोरलेन बनाने की मांग फिर उठाई सैकड़ों मौतों के बाद भी काम लंबित सिंधिया ने गडकरी से की मुलाकात तीन साल से चल रहा स्थानीय आंदोलन क्षेत्रवासी ‘मौत का हाईवे’ कह रहे मार्ग GWALIOR BHIND HIGHWAY : भिंड। ग्वालियर-भिंड-इटावा नेशनल हाईवे-719 पर लगातार हो रहे घातक सड़क हादसों और सैकड़ों मौतों के बावजूद फोरलेन विस्तार का काम अभी तक शुरू नहीं हो पाया है। केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने एक बार फिर इस लंबित मुद्दे को दिल्ली में केंद्रीय सड़क परिवहन मंत्री नितिन गडकरी के समक्ष उठाया और तत्काल चौड़ीकरण की मांग दोहराई। डॉ मोहन यादव का बड़ा फैसला किसानों को टोल छूट और प्रदेश में तेज होगा इंफ्रास्ट्रक्चर विकास लंबित परियोजना बनी मौत का कारण NH-719 का चार लेन विस्तार वर्षों से लंबित पड़ा है। क्षेत्र के लोग इसे ‘मौत का हाईवे’ कहने लगे हैं। जर्जर सड़क, अपर्याप्त चौड़ाई और सुरक्षा की कमी के कारण यहां रोजाना हादसे हो रहे हैं। बढ़ते वाहनों के दबाव ने स्थिति को और खराब कर दिया है। हादसों के बाद स्थानीय स्तर पर चक्काजाम लगना आम बात हो गई है। Moradabad Man Arrested : 19 पेटी विदेशी शराब के साथ पोरसा में तस्कर धरा, कार भी पुलिस के कब्जे में तीन साल से चल रहा आंदोलन भिंड जिले में पिछले तीन वर्षों से संतों, सामाजिक संगठनों और स्थानीय लोगों द्वारा लगातार आंदोलन किया जा रहा है। 16 मार्च को बरैठा टोल प्लाजा पर हुए बड़े प्रदर्शन में भी शीघ्र चौड़ीकरण की मांग की गई थी। अधिकारियों ने आश्वासन दिए थे, लेकिन जमीनी स्तर पर कोई प्रगति नहीं हुई। जीएसटी रेवेन्यू में उछाल, मार्च में भारत ने पार किया 2 लाख करोड़ का आंकड़ा सिंधिया की सक्रिय पहल हाल ही में सिंधिया ने नितिन गडकरी से मुलाकात कर NH-719 को फोरलेन बनाने की मांग दोहराई। सूत्रों के अनुसार गडकरी ने सकारात्मक रुख दिखाया और प्रक्रिया को तेज करने का भरोसा दिया। भिंड प्रतिनिधिमंडल के साथ हुई इस बैठक में क्षेत्र की सुरक्षा और विकास पर जोर दिया गया। “महिंद्रा की मार्च में धमाकेदार बिक्री: 99,969 गाड़ियों के साथ 21% उछाल!” लोगों में बढ़ रही निराशा बार-बार बैठकों और आश्वासनों के बावजूद निर्माण कार्य शुरू न होने से क्षेत्रवासियों में गहरी निराशा है। उनका कहना है कि जब तक चौड़ीकरण का काम वास्तव में शुरू नहीं होता, हादसों का सिलसिला जारी रहेगा। DPR अंतिम चरण में होने की खबरें हैं, लेकिन लोग अब ठोस कार्रवाई की प्रतीक्षा कर रहे हैं।
समृद्धि और विकास का संतुलित खाका मध्यप्रदेश बजट 2026 27 में महिलाओं किसानों और गांवों पर बड़ा फोकस

भोपाल । मध्यप्रदेश सरकार ने वर्ष 2026 27 के बजट के माध्यम से समग्र और संतुलित विकास की स्पष्ट दिशा प्रस्तुत की है मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव के नेतृत्व में तैयार इस बजट को आर्थिक समृद्धि का रोडमैप माना जा रहा है जिसमें सामाजिक सुरक्षा महिला सशक्तिकरण कृषि विकास और आधारभूत संरचना को समान रूप से प्राथमिकता दी गई है यह बजट न केवल वर्तमान आवश्यकताओं को ध्यान में रखता है बल्कि भविष्य के विकास की मजबूत नींव भी तैयार करता है सरकार ने महिलाओं को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाने के उद्देश्य से लाड़ली बहना योजना के लिए 23883 करोड़ रुपये का बड़ा प्रावधान किया है इसके साथ ही लाड़ली लक्ष्मी योजना और पोषण कार्यक्रमों के लिए भी पर्याप्त बजट निर्धारित किया गया है यह कदम महिलाओं और बच्चों के स्वास्थ्य पोषण और सशक्तिकरण को मजबूती देने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है कृषि क्षेत्र को मजबूत बनाने के लिए भी बजट में कई अहम प्रावधान किए गए हैं अटल कृषि ज्योति योजना के तहत किसानों को बिजली सुविधा सुनिश्चित करने के लिए बड़ी राशि रखी गई है वहीं छोटे कृषि पंपों और घरेलू कनेक्शन के लिए मुफ्त बिजली की प्रतिपूर्ति का प्रावधान किसानों को सीधी राहत देगा मुख्यमंत्री किसान कल्याण योजना और फसल बीमा योजना के लिए भी पर्याप्त बजट निर्धारित कर किसानों की आय और सुरक्षा दोनों पर ध्यान दिया गया है ग्रामीण और शहरी अधोसंरचना के विकास को गति देने के लिए सरकार ने बड़े स्तर पर निवेश की योजना बनाई है प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत हजारों परिवारों को पक्के मकान उपलब्ध कराने का लक्ष्य रखा गया है वहीं ग्रामीण सड़कों और जिला मार्गों के उन्नयन के लिए भी महत्वपूर्ण राशि का प्रावधान किया गया है शहरी क्षेत्रों में मेट्रो परियोजनाओं को गति देने के लिए बजट में विशेष प्रावधान किए गए हैं जिससे यातायात व्यवस्था और बेहतर होगी जल जीवन मिशन के तहत हर घर नल से जल पहुंचाने के लिए हजारों करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है जो ग्रामीण जीवन स्तर को सुधारने में अहम भूमिका निभाएगा शिक्षा और स्वास्थ्य क्षेत्र को भी बजट में प्राथमिकता दी गई है प्राथमिक शिक्षा और समग्र शिक्षा अभियान के लिए बड़ी राशि निर्धारित की गई है ताकि बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा मिल सके वहीं स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने के लिए नेशनल हेल्थ मिशन और आयुष्मान भारत जैसी योजनाओं को सशक्त किया गया है प्रदेश की सांस्कृतिक पहचान और धार्मिक महत्व को ध्यान में रखते हुए सिंहस्थ 2028 की तैयारियों के लिए भी बड़ा बजट रखा गया है उज्जैन में आयोजित होने वाले इस महाकुंभ के लिए आधारभूत संरचना और व्यवस्थाओं को विकसित करने की दिशा में अभी से काम शुरू किया जा रहा है साथ ही वेदांत पीठ की स्थापना के लिए भी विशेष प्रावधान किया गया है रोजगार और निवेश को बढ़ावा देने के लिए सरकार ने निवेश प्रोत्साहन और एमएसएमई क्षेत्र के लिए बजट में पर्याप्त राशि निर्धारित की है विकसित भारत गारंटी फॉर रोजगार योजना के माध्यम से ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने का प्रयास किया जा रहा है कुल मिलाकर यह बजट सामाजिक कल्याण और आर्थिक विकास के बीच संतुलन स्थापित करता है और मध्यप्रदेश को आत्मनिर्भर तथा विकसित राज्य बनाने की दिशा में एक मजबूत कदम साबित होता नजर आ रहा है