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वैश्विक ईंधन संकट के बीच सरकार का बड़ा फैसला: घरेलू उड़ानों के फ्यूल पर आंशिक रोक

नई दिल्ली: वैश्विक ऊर्जा बाजार में उथल-पुथल के बीच केंद्र सरकार ने आम यात्रियों और घरेलू विमानन क्षेत्र को राहत देने के लिए बड़ा कदम उठाया है। सरकार ने घरेलू एयरलाइंस के लिए एविएशन टर्बाइन फ्यूल (ATF) की कीमतों में बढ़ोतरी को 25 प्रतिशत तक सीमित कर दिया है, जबकि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर इसकी कीमतों में 100 प्रतिशत से अधिक उछाल की आशंका जताई जा रही थी। तेजी से बढ़ते वैश्विक संकट के बीच हस्तक्षेपपेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय के अनुसार, यह निर्णय पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और Strait of Hormuz में आपूर्ति बाधित होने की आशंका के मद्देनजर लिया गया है। इस क्षेत्र में अस्थिरता के कारण वैश्विक कच्चे तेल की कीमतों में भारी उछाल देखने को मिल रहा है, जिससे जेट ईंधन महंगा होने का दबाव बढ़ गया था। घरेलू एयरलाइंस को राहत, किराए पर नियंत्रणसरकार ने सार्वजनिक क्षेत्र की तेल कंपनियों और नागरिक उड्डयन मंत्रालय के साथ मिलकर यह तय किया कि घरेलू उड़ानों के लिए ATF की कीमतों में केवल आंशिक और चरणबद्ध वृद्धि की जाएगी। इसके तहत कीमतों में करीब 25 प्रतिशत यानी लगभग 15 रुपए प्रति लीटर की बढ़ोतरी की गई है। इस कदम का उद्देश्य हवाई किराए में अचानक भारी वृद्धि को रोकना और यात्रियों को राहत देना है। अंतरराष्ट्रीय उड़ानों पर लागू नहीं होगी राहतसरकार ने स्पष्ट किया है कि यह राहत केवल घरेलू उड़ानों के लिए है। अंतरराष्ट्रीय रूट्स पर संचालित उड़ानों को वैश्विक बाजार के अनुसार पूरी कीमत चुकानी होगी। इससे एयरलाइंस के अंतरराष्ट्रीय संचालन पर लागत का दबाव बना रहेगा। नई दरें लागू, कीमतों में बढ़ोतरी दर्ज1 अप्रैल 2026 से लागू नई दरों के अनुसार, New Delhi में ATF की कीमत बढ़कर 1,04,927 रुपए प्रति किलोलीटर हो गई है, जो मार्च में 96,638.14 रुपए थी। हालांकि वास्तविक वृद्धि लगभग 8.5 प्रतिशत के आसपास रही है, जो संभावित भारी उछाल के मुकाबले काफी नियंत्रित है। सरकार और मंत्रालय की प्रतिक्रियानागर विमानन मंत्री Ram Mohan Naidu Kinjarapu ने इस फैसले को व्यावहारिक और दूरदर्शी बताया। उन्होंने प्रधानमंत्री Narendra Modi और पेट्रोलियम मंत्री Hardeep Singh Puri का आभार जताते हुए कहा कि यह कदम यात्रियों को महंगे हवाई किराए से बचाने, एयरलाइंस पर वित्तीय दबाव कम करने और विमानन क्षेत्र की स्थिरता बनाए रखने में मदद करेगा। व्यापक आर्थिक असर भी सकारात्मकविशेषज्ञों का मानना है कि इस फैसले से सिर्फ यात्रियों को ही राहत नहीं मिलेगी, बल्कि माल ढुलाई और व्यापार के लिए जरूरी हवाई संपर्क भी सुचारु बना रहेगा। इससे अर्थव्यवस्था पर पड़ने वाले नकारात्मक प्रभाव को भी काफी हद तक नियंत्रित किया जा सकेगा।

डॉ मोहन यादव का बड़ा फैसला किसानों को टोल छूट और प्रदेश में तेज होगा इंफ्रास्ट्रक्चर विकास

भोपाल । मध्यप्रदेश में किसान हित और आधारभूत संरचना विकास को लेकर सरकार ने एक साथ कई महत्वपूर्ण फैसले लिए हैं मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव की अध्यक्षता में मध्यप्रदेश सड़क विकास निगम के संचालक मंडल की बैठक में किसानों को राहत देने के साथ साथ सड़क नेटवर्क को मजबूत बनाने की दिशा में बड़े निर्णय लिए गए मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि राज्य सरकार किसान कल्याण के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है और वर्ष 2026 को किसान कल्याण वर्ष के रूप में सार्थक बनाने के लिए ठोस कदम उठाए जा रहे हैं इसी क्रम में कृषि कार्य में उपयोग होने वाले कंबाइन हार्वेस्टर को टोल प्लाजा पर शुल्क से छूट देने का निर्णय लिया गया है यह फैसला सीधे तौर पर किसानों की लागत को कम करेगा और खेती को अधिक लाभकारी बनाने में मदद करेगा मुख्यमंत्री ने कहा कि कंबाइन हार्वेस्टर फसल कटाई का एक महत्वपूर्ण उपकरण है और इसे एक स्थान से दूसरे स्थान तक ले जाने में किसानों को टोल शुल्क देना पड़ता था जिससे लागत बढ़ती थी अब टोल से छूट मिलने के बाद परिवहन खर्च में कमी आएगी और इसका सकारात्मक असर कृषि उत्पादन की लागत और अंततः बाजार कीमतों पर भी पड़ेगा यह निर्णय किसानों के लिए राहत और प्रोत्साहन दोनों के रूप में देखा जा रहा है बैठक में केवल किसान हित ही नहीं बल्कि प्रदेश के सड़क विकास को लेकर भी महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए संचालक मंडल ने इंदौर उज्जैन ग्रीन फील्ड मार्ग और उज्जैन जावरा ग्रीन फील्ड मार्ग के निर्माण को मंजूरी दी है इन परियोजनाओं को नॉन एक्सेस कंट्रोल के रूप में विकसित किया जाएगा जिससे क्षेत्रीय कनेक्टिविटी मजबूत होगी और यात्रा समय में कमी आएगी इसके अलावा पश्चिम भोपाल बायपास के परिवर्तित एलाइनमेंट को भी अनुमोदन प्रदान किया गया है इस परियोजना से राजधानी क्षेत्र में यातायात दबाव कम होगा और शहरी परिवहन व्यवस्था अधिक सुगम बनेगी यह निर्णय आने वाले समय में भोपाल के यातायात ढांचे को नई दिशा देगा बैठक में वार्षिक लेखों और अन्य प्रशासनिक विषयों पर भी विस्तार से चर्चा की गई और आवश्यक निर्णय लिए गए इस दौरान लोक निर्माण मंत्री राकेश सिंह मुख्य सचिव अनुराग जैन सहित कई वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे कुल मिलाकर यह बैठक किसानों और आम नागरिकों दोनों के लिए महत्वपूर्ण साबित हुई है एक ओर जहां किसानों को सीधी आर्थिक राहत दी गई है वहीं दूसरी ओर सड़क परियोजनाओं के जरिए प्रदेश के विकास को गति देने की मजबूत आधारशिला रखी गई है सरकार का यह कदम समृद्ध किसान और विकसित मध्यप्रदेश के लक्ष्य को आगे बढ़ाने वाला माना जा रहा है

प्रीमियम ईंधन महंगा, आम पेट्रोल-डीजल की कीमतों में राहत बरकरार

नई दिल्ली: वैश्विक बाजार में उथल-पुथल के बीच देश में ईंधन कीमतों को लेकर बड़ा अपडेट सामने आया है। सरकारी तेल कंपनी Indian Oil Corporation (आईओसी) ने प्रीमियम ईंधन की कीमतों में बढ़ोतरी कर दी है, जबकि आम पेट्रोल और डीजल की कीमतों को फिलहाल स्थिर रखा गया है। इससे आम उपभोक्ताओं को राहत जरूर मिली है, लेकिन लग्जरी और हाई-परफॉर्मेंस वाहनों के उपयोगकर्ताओं पर असर पड़ा है। एक्सपी100 पेट्रोल में बड़ा उछालआईओसी के मुताबिक, राजधानी दिल्ली में एक्सपी100 पेट्रोल की कीमत बढ़ाकर 160 रुपए प्रति लीटर कर दी गई है, जो पहले 149 रुपए थी। यह हाई-ऑक्टेन फ्यूल खासतौर पर लग्जरी कारों और हाई-परफॉर्मेंस मोटरसाइकिलों के लिए इस्तेमाल किया जाता है, जिससे इंजन की क्षमता और स्मूद परफॉर्मेंस बेहतर होती है। कीमतों में यह उछाल प्रीमियम फ्यूल सेगमेंट में बढ़ती लागत और वैश्विक बाजार के दबाव को दर्शाता है। प्रीमियम डीजल भी हुआ महंगासिर्फ पेट्रोल ही नहीं, बल्कि एक्स्ट्रा ग्रीन डीजल (प्रीमियम डीजल) की कीमतों में भी बढ़ोतरी की गई है। अब दिल्ली में इसकी कीमत 92.99 रुपए प्रति लीटर हो गई है, जो पहले 91.49 रुपए थी। यह डीजल बेहतर माइलेज और कम उत्सर्जन के लिए जाना जाता है और मुख्य रूप से कमर्शियल और प्रीमियम उपयोग के लिए अपनाया जाता है। आम पेट्रोल-डीजल की कीमतों में राहतहालांकि, आम उपभोक्ताओं के लिए राहत की बात यह है कि सामान्य पेट्रोल और डीजल की कीमतों में कोई बदलाव नहीं किया गया है। दिल्ली में पेट्रोल अभी भी 94.72 रुपए प्रति लीटर और डीजल 87.62 रुपए प्रति लीटर पर स्थिर है। वहीं Mumbai में पेट्रोल 103.44 रुपए और डीजल 89.97 रुपए प्रति लीटर पर बना हुआ है। एलपीजी और एटीएफ में भी भारी बढ़ोतरीइस बीच, अन्य पेट्रोलियम उत्पादों में तेजी देखने को मिली है। कमर्शियल एलपीजी सिलेंडर की कीमत में 195.50 रुपए की बढ़ोतरी की गई है। वहीं एविएशन टर्बाइन फ्यूल (ATF) की कीमतें दोगुने से अधिक बढ़कर 2 लाख रुपए प्रति किलोलीटर के पार पहुंच गई हैं, जिससे विमानन सेक्टर पर दबाव बढ़ सकता है। वैश्विक तनाव का असरईंधन कीमतों में यह बदलाव वैश्विक स्तर पर बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव से जुड़ा है। पश्चिम एशिया में हालात तनावपूर्ण बने हुए हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump ने संकेत दिया है कि अमेरिका आने वाले समय में सैन्य गतिविधियों को सीमित कर सकता है, जिससे हालात में कुछ नरमी की उम्मीद है। हालांकि, Iran ने चेतावनी दी है कि यदि उसके हितों पर हमला जारी रहा तो वह जवाबी कार्रवाई करेगा। ऐसे में होर्मुज जलडमरूमध्य के आसपास की स्थिति अभी भी अनिश्चित बनी हुई है, जो वैश्विक तेल आपूर्ति और कीमतों को प्रभावित कर सकती है। भारत में कीमतें क्यों स्थिर?वैश्विक बाजार में उतार-चढ़ाव के बावजूद भारत में पेट्रोल और डीजल की खुदरा कीमतें स्थिर रखी गई हैं। तेल कंपनियां फिलहाल आम उपभोक्ताओं को राहत देने की रणनीति पर काम कर रही हैं, जबकि प्रीमियम और अन्य उत्पादों में लागत का असर दिख रहा है।

Moradabad Man Arrested : 19 पेटी विदेशी शराब के साथ पोरसा में तस्कर धरा, कार भी पुलिस के कब्जे में

Moradabad Man Arrested

HIGHLIGHTS: रात्रि चेकिंग में 19 पेटी अंग्रेजी शराब बरामद 5 लाख रुपये कीमत की शराब जब्त कार चालक सुखबीर सिंह तोमर गिरफ्तार कार और शराब दोनों जब्त पुलिस पूछताछ में जुटी, अन्य साथियों की तलाश Moradabad Man Arrested : पोरसा। अवैध शराब तस्करी के खिलाफ पोरसा पुलिस की सतर्कता ने एक बार फिर सफलता दिलाई है। रात्रि गश्त के दौरान मिली सूचना पर लगाए गए चेकिंग प्वाइंट पर एक कार से 19 पेटियां अंग्रेजी शराब बरामद की गई। पुलिस ने कार, शराब और चालक को गिरफ्तार कर लिया। भारत के डिजिटल भविष्य के लिए बड़ी खबर: डेटा सेंटर क्षमता में 2026 तक 30% बढ़ोतरी नागाजी पेट्रोल पंप पर हुई कार्रवाई पोरसा पुलिस को रात में अवैध शराब तस्करी की सूचना मिली। इसके आधार पर जोटई रोड स्थित नागाजी पेट्रोल पंप पर चेकिंग प्वाइंट लगाया गया। जब एक संदिग्ध कार आती दिखी तो पुलिस ने उसे रोका और गहन तलाशी ली। कार के अंदर छिपाकर रखी गई 19 पेटियां अंग्रेजी शराब बरामद हुईं। बड़े पद पर सादगी की मिसाल बिहार के अफसरों की संपत्ति ने सबको किया हैरान दस्तावेज न होने पर गिरफ्तारी पुलिस ने चालक से शराब के वैध दस्तावेज मांगे, लेकिन चालक सुखबीर सिंह तोमर (निवासी ग्राम खेरली, थाना महुआ) कोई दस्तावेज नहीं दे सका। इसके बाद पुलिस ने तुरंत उसे गिरफ्तार कर लिया। बरामद शराब की अनुमानित कीमत 5 लाख रुपये बताई जा रही है। पुलिस ने शराब और कार दोनों जब्त कर ली है। इटली ने US फाइटर जेट को नहीं दी लैंडिंग परमिशन, ट्रंप हुए नाराज पूछताछ में जुटी पुलिस पोरसा थाना प्रभारी टीआई दिनेश कुशवाहा ने बताया कि अवैध शराब तस्करी की सूचना पर त्वरित कार्रवाई की गई। आरोपी चालक को थाने लाकर पूछताछ शुरू कर दी गई है। पुलिस उसके अन्य साथियों और शराब के स्रोत तक पहुंचने की कोशिश कर रही है। GWALIOR ATTACK NEWS : घर के सामने बाइक खड़ी करने पर पड़ोसियों का लाठी-डंडा और पत्थरों से हमला, सिर फोड़ दिया; ग्वालियर में रक्तरंजित विवाद अवैध शराब पर सख्त नजर पोरसा पुलिस लगातार अवैध शराब तस्करी पर नकेल कस रही है। ऐसे चेकिंग अभियान नियमित रूप से चलाए जा रहे हैं ताकि जिले में अवैध शराब का कारोबार पूरी तरह रोका जा सके।

रियलमी 16 5जी: मिड-रेंज स्मार्टफोन में परफॉर्मेंस और मजबूती का नया स्तर

नई दिल्ली। स्मार्टफोन इंडस्ट्री में पिछले कुछ वर्षों में डिजाइन, कैमरा और प्रोसेसर पर ज्यादा ध्यान दिया गया, लेकिन अब डिवाइस की मजबूती (ड्यूरेबिलिटी) भी उतनी ही महत्वपूर्ण होती जा रही है। आज स्मार्टफोन केवल परफॉर्मेंस का माध्यम नहीं रहे, बल्कि लंबे समय तक टिकाऊ और हर तरह के वातावरण में इस्तेमाल योग्य होना भी जरूरी है। आईपी69 सुरक्षा: प्रीमियम फीचर अब जरूरतपहले पानी और धूल से सुरक्षा (आईपी रेटिंग) प्रीमियम फोन तक सीमित थी। आईपी67 और आईपी68 जैसे रेटिंग्स पानी के छींटों या थोड़े समय के लिए डूबने से सुरक्षा देते थे, लेकिन असली जीवन के उपयोग में इससे अधिक सुरक्षा की आवश्यकता महसूस की जा रही थी। रियलमी ने इस दिशा में कदम बढ़ाते हुए रियलमी 16 5जी में आईपी69 प्रो-रेटेड सुरक्षा दी है, जो हाई प्रेशर और हाई टेम्परेचर वाले पानी से भी डिवाइस को सुरक्षित रखती है। यह फोन आईपी66, आईपी68 और आईपी69 तीनों स्तर की सुरक्षा के साथ आता है। इसमें ऑटोमोबाइल-ग्रेड डस्ट और वाटर रेसिस्टेंस है, जो 80 डिग्री सेल्सियस तक गर्म पानी और 8-10 एमपीए हाई प्रेशर वॉटर जेट को भी झेल सकता है। मजबूत लेकिन स्लिम डिजाइनइतनी मजबूती के बावजूद रियलमी 16 5जी का डिजाइन स्लिम और हल्का रखा गया है। इसमें कॉम्पैक्ट इंटरनल स्ट्रक्चर है, जो मजबूती और परफॉर्मेंस दोनों को बढ़ाता है। यह फोन रोजमर्रा के इस्तेमाल और कठिन परिस्थितियों दोनों में सुरक्षित रहता है। कैमरा और कंटेंट क्रिएशनरियलमी 16 5जी सिर्फ मजबूती में ही नहीं, बल्कि कैमरा और कंटेंट क्रिएशन के लिए भी तैयार है। इसमें 50MP का फ्रंट कैमरा और 50MP का रियर कैमरा है, जो सोनी सेंसर से लैस है और हर परिस्थिति में शानदार फोटो और वीडियो देता है। बड़ी बैटरी और स्मार्ट मैनेजमेंटमजबूती का मतलब सिर्फ बाहर से सुरक्षा नहीं, बल्कि लंबे समय तक बेहतर परफॉर्मेंस भी है। रियलमी 16 5जी में 7000mAh की बड़ी बैटरी और स्मार्ट बैटरी मैनेजमेंट सिस्टम दिया गया है। यह लगातार इस्तेमाल, गेमिंग और लंबे समय तक फोन चलाने के लिए पर्याप्त बैकअप देता है, जिससे बार-बार चार्जिंग की जरूरत नहीं पड़ती। 5जी कनेक्टिविटी और भविष्य के लिए तैयारयह नया 5जी स्मार्टफोन तेज कनेक्टिविटी प्रदान करता है और भविष्य के मोबाइल अनुभव के लिए तैयार है। गेमिंग, स्ट्रीमिंग और मल्टीटास्किंग में यह फोन उत्कृष्ट प्रदर्शन करता है।

मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव के नेतृत्व में शिक्षा व्यवस्था मजबूत शून्य ड्रॉप आउट की ओर बढ़ता मध्यप्रदेश

भोपाल । मध्यप्रदेश में शासकीय स्कूलों के प्रति अभिभावकों और बच्चों का भरोसा तेजी से बढ़ रहा है और यह बदलाव अब स्पष्ट रूप से दिखाई देने लगा है मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव ने भोपाल के मॉडल उच्चतर माध्यमिक विद्यालय टीटी नगर में राज्य स्तरीय प्रवेशोत्सव कार्यक्रम 2026 का शुभारंभ करते हुए इस सकारात्मक परिवर्तन को शिक्षा व्यवस्था की बड़ी उपलब्धि बताया उन्होंने कहा कि प्रदेश में एक से चार अप्रैल तक चलने वाला स्कूल चले हम अभियान बच्चों को शिक्षा से जोड़ने का अभिनव प्रयास है जिसका असर अब जमीन पर नजर आ रहा है मुख्यमंत्री ने बताया कि शासकीय विद्यालयों में नामांकन में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है और यह जनता के बढ़ते विश्वास का प्रमाण है वर्ष 2025 26 में कुल नामांकन में लगभग बीस प्रतिशत वृद्धि हुई है जबकि सरकारी स्कूलों में यह वृद्धि बत्तीस प्रतिशत से अधिक रही है राज्य सरकार ने इस शैक्षणिक सत्र में एक करोड़ पैंतालीस लाख विद्यार्थियों के नामांकन का लक्ष्य रखा है और इस दिशा में तेजी से कार्य किया जा रहा है कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री ने नव प्रवेशित बच्चों का पुष्प वर्षा कर स्वागत किया और उन्हें नि शुल्क साइकिलें तथा पाठ्य पुस्तकें वितरित की उन्होंने कहा कि बच्चों को स्कूल आने जाने में सुविधा मिले इसके लिए बड़े स्तर पर साइकिल वितरण किया जा रहा है आने वाले महीनों में लाखों विद्यार्थियों को इसका लाभ मिलेगा साथ ही गणवेश किताबें और मध्यान्ह भोजन जैसी सुविधाएं भी सुनिश्चित की जा रही हैं मुख्यमंत्री ने विशेष रूप से इस बात पर संतोष व्यक्त किया कि शासकीय स्कूलों में ड्रॉप आउट की संख्या शून्य करने की दिशा में शिक्षा विभाग ने महत्वपूर्ण कार्य किया है उन्होंने इसके लिए शिक्षकों अभिभावकों और समाज के सहयोग की सराहना की और कहा कि हर बच्चे को स्कूल तक लाना ही सरकार का लक्ष्य है उन्होंने यह भी बताया कि प्रदेश में सांदीपनि विद्यालयों और पीएमश्री स्कूलों के माध्यम से आधुनिक शिक्षा को बढ़ावा दिया जा रहा है इन संस्थानों में विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास के लिए बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री ने अटल टिंकरिंग लैब रोबोटिक लैब और आईसीटी लैब का अवलोकन भी किया जिससे यह स्पष्ट होता है कि शिक्षा अब तकनीक से जुड़ रही है मुख्यमंत्री ने विद्यार्थियों को प्रेरित करते हुए कहा कि वे पढ़ लिखकर डॉक्टर इंजीनियर और उद्यमी बनें और अपने भविष्य को मजबूत करें उन्होंने बताया कि प्रदेश में बड़ी संख्या में शिक्षकों की भर्ती की गई है ताकि शिक्षा की गुणवत्ता को और बेहतर बनाया जा सके मेधावी विद्यार्थियों को प्रोत्साहित करने के लिए सरकार द्वारा लैपटॉप और स्कूटी जैसी योजनाएं भी संचालित की जा रही हैं बोर्ड परीक्षाओं में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले हजारों विद्यार्थियों को इसका लाभ मिला है और आगामी बजट में भी इसके लिए पर्याप्त प्रावधान किया गया है कार्यक्रम में शिक्षा मंत्री उदय प्रताप सिंह ने कहा कि यह दिन शिक्षा विभाग के लिए उत्सव जैसा है उन्होंने बताया कि प्रदेश में पहले ही एक करोड़ से अधिक विद्यार्थियों का नामांकन हो चुका है और प्रयास है कि हर बच्चे तक शिक्षा पहुंचे साथ ही विकासखंड स्तर पर बुक फेयर आयोजित करने की योजना भी बनाई जा रही है जिससे निजी स्कूलों के विद्यार्थियों को भी सस्ती पुस्तकें उपलब्ध हो सकें इस अवसर पर जनप्रतिनिधियों अधिकारियों शिक्षकों और बड़ी संख्या में विद्यार्थियों की उपस्थिति ने यह स्पष्ट कर दिया कि मध्यप्रदेश अब शिक्षा के क्षेत्र में एक मजबूत और सकारात्मक परिवर्तन की ओर बढ़ रहा है

स्पेस नेटवर्क: कैसे काम करता है अंतरिक्ष का ‘सेल टावर’ और डेटा पहुंचाता है पृथ्वी तक

नई दिल्ली। अंतरिक्ष में रहने वाले एस्ट्रोनॉट्स और पृथ्वी पर मिशन कंट्रोल टीम के बीच लगातार संपर्क बनाए रखना बेहद जरूरी है। इसके लिए वैज्ञानिक ‘स्पेस नेटवर्क’ नामक एडवांस कम्युनिकेशन सिस्टम का उपयोग करते हैं। यह नेटवर्क अंतरिक्ष यात्रियों को इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन (ISS) और पृथ्वी से जुड़े रहने में मदद करता है, ताकि डेटा, वीडियो और आवाज तुरंत ट्रांसमिट हो सके। स्पेस नेटवर्क क्या है?स्पेस नेटवर्क में ट्रैकिंग और डेटा रिले सैटेलाइट्स (TDRS) का समूह शामिल है। ये सैटेलाइट्स पृथ्वी से लगभग 35,000 किलोमीटर ऊपर जियोसिंक्रोनस कक्षा में घूमते हैं और अंतरिक्ष में ‘सेल टावर’ की तरह काम करते हैं। इसका मतलब है कि स्पेस स्टेशन अपनी कक्षा में कहीं भी हो, टीडीआरएस सैटेलाइट से संपर्क बनाए रख सकता है। डेटा कैसे ट्रांसमिट होता है?जब स्पेस स्टेशन पर कोई अंतरिक्ष यात्री मिशन कंट्रोल को डेटा, वीडियो या आवाज भेजता है, तो स्टेशन का कंप्यूटर इसे रेडियो सिग्नल में बदल देता है। यह सिग्नल स्टेशन के एंटीना के जरिए टीडीआरएस सैटेलाइट तक पहुंचता है। फिर टीडीआरएस इसे न्यू मैक्सिको के व्हाइट सैंड्स कॉम्प्लेक्स तक रिले करता है, जहां से लैंडलाइन के जरिए ह्यूस्टन में मिशन कंट्रोल तक सिग्नल जाता है। पूरी प्रक्रिया मिलीसेकंड में पूरी होती है, इसलिए बातचीत में कोई noticeable देरी नहीं होती। वैज्ञानिक डेटा का पृथ्वी पर ट्रांसमिशनस्पेस स्टेशन पर एस्ट्रोनॉट्स भौतिकी, जीव विज्ञान, खगोल विज्ञान और मौसम विज्ञान जैसे कई प्रयोग करते हैं। इन प्रयोगों से मिलने वाला डेटा भी उसी स्पेस नेटवर्क के जरिए पृथ्वी पर भेजा जाता है। डेटा रेडियो सिग्नल में बदलकर टीडीआरएस सैटेलाइट तक भेजा जाता है, फिर व्हाइट सैंड्स और ह्यूस्टन होते हुए वैज्ञानिकों तक पहुंचाया जाता है। इस प्रक्रिया के कारण वैज्ञानिक लगभग रीयल टाइम में डेटा प्राप्त कर पाते हैं। शिक्षा और संपर्क में सुधारनासा इस नेटवर्क का इस्तेमाल शिक्षा कार्यक्रमों के लिए भी करता है। अंतरिक्ष यात्री वीडियो और वॉइस कॉल के जरिए स्कूलों के बच्चों के सवालों का जवाब देते हैं। पहले, जब यह नेटवर्क नहीं था, तो संपर्क सिर्फ 15 मिनट तक सीमित था। अब लगभग हर समय अंतरिक्ष यात्री और पृथ्वी की टीम के बीच सतत संपर्क रहता है। प्रबंधन और निगरानीस्पेस नेटवर्क का प्रबंधन नासा के गोडार्ड स्पेस फ्लाइट सेंटर (मैरीलैंड) द्वारा किया जाता है। इसके रणनीतिक संचालन की देखरेख स्कैन प्रोग्राम ऑफिस करता है। यह सुनिश्चित करता है कि अंतरिक्ष और पृथ्वी के बीच डेटा और आवाज का आदान-प्रदान लगातार और सुरक्षित रहे।

जीएसटी रेवेन्यू में उछाल, मार्च में भारत ने पार किया 2 लाख करोड़ का आंकड़ा

नई दिल्ली। सकल जीएसटी संग्रह मार्च 2026 में 2,00,064 करोड़ रुपए तक पहुँच गया, जो पिछले साल इसी महीने के 1,83,845 करोड़ रुपए के मुकाबले 8.8 प्रतिशत की बढ़त दर्शाता है। सरकार ने बुधवार को इसकी जानकारी दी। विशेषज्ञों का कहना है कि यह वृद्धि घरेलू अर्थव्यवस्था की मजबूती और आयात पर लगने वाले जीएसटी में तेज इजाफे के कारण हुई है। घरेलू सामान पर जीएसटी संग्रह में सालाना आधार पर 5.9 प्रतिशत और आयात पर जीएसटी में 17.8 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गई। रिफंड को हटाने पर शुद्ध संग्रहयदि 22,074 करोड़ रुपए के रिफंड को हटा दिया जाए, तो मार्च में शुद्ध जीएसटी संग्रह सालाना आधार पर 8.2 प्रतिशत बढ़कर 1,77,990 करोड़ रुपए हो गया। इससे पता चलता है कि कर राजस्व में निरंतर सुधार और बेहतर अनुपालन की स्थिति बनी हुई है। वित्त वर्ष 2025-26 के लिए सकल जीएसटी संग्रह 22.27 लाख करोड़ रुपए रहा, जो वित्त वर्ष 2024-25 के 20.55 लाख करोड़ रुपए से 8.3 प्रतिशत अधिक है। शुद्ध जीएसटी संग्रह (रिफंड हटाकर) 19.34 लाख करोड़ रुपए दर्ज किया गया, जो पिछले साल की तुलना में 7.1 प्रतिशत अधिक है। उपकर संग्रह में गिरावटहालांकि, उपकर संग्रह में मार्च में नकारात्मक प्रवृत्ति देखी गई और यह -177 करोड़ रुपए पर रहा। इसका मुख्य कारण अधिक रिफंड और समायोजन थे। विशेषज्ञों के अनुसार, जीएसटी संग्रह की यह वृद्धि भारत की अनुमानित जीडीपी वृद्धि (लगभग 7 प्रतिशत) के अनुरूप है, जो बढ़ती खपत, आयात और बेहतर कर अनुपालन का संकेत देती है। पिछले महीने का प्रदर्शनफरवरी 2026 में भी जीएसटी संग्रह में 9.1 प्रतिशत की सालाना वृद्धि दर्ज की गई थी। फरवरी में सकल संग्रह बढ़कर 1.84 लाख करोड़ रुपए तक पहुंचा। इसमें घरेलू जीएसटी राजस्व में 10.2 प्रतिशत और आयात से जीएसटी राजस्व में 5.4 प्रतिशत का योगदान रहा। यह प्रवृत्ति बताती है कि भारत में कर प्रणाली मजबूत होती जा रही है और कर अनुपालन में सुधार हो रहा है। विशेषज्ञों की राय और अर्थव्यवस्था पर प्रभावविशेषज्ञों का मानना है कि मार्च और फरवरी में जीएसटी संग्रह की लगातार वृद्धि यह दिखाती है कि भारत की अर्थव्यवस्था वैश्विक अनिश्चितताओं के बावजूद मजबूत बनी हुई है। घरेलू खपत में बढ़ोतरी, आयात में विस्तार और बेहतर अनुपालन ने कर संग्रह को बढ़ाने में अहम भूमिका निभाई है। यह संकेत है कि सरकारी राजस्व आधार मजबूत है और देश की वित्तीय स्थिरता बनाए रखने में मदद मिल रही है।।

डिजिटल इंडिया की रफ्तार तेज 5G यूजर्स में भारत बना नंबर 2 हर महीने रिकॉर्ड डेटा खपत

नई दिल्ली । भारत में डिजिटल क्रांति अब एक नए स्तर पर पहुंच चुकी है जहां मोबाइल डेटा का इस्तेमाल लगातार रिकॉर्ड बना रहा है। Nokia की हालिया रिपोर्ट Nokia Mobile Broadband Index 2026 के मुताबिक देश में हर मोबाइल यूजर एक महीने में औसतन 31GB से ज्यादा डेटा खर्च कर रहा है। यह आंकड़ा न सिर्फ भारत में इंटरनेट की बढ़ती पहुंच को दर्शाता है बल्कि यह भी बताता है कि लोग अब डिजिटल सेवाओं पर कितने ज्यादा निर्भर हो चुके हैं। रिपोर्ट के अनुसार भारत में 5G टेक्नोलॉजी का विस्तार बेहद तेजी से हो रहा है। साल दर साल 5G ट्रैफिक में 70 प्रतिशत से ज्यादा की वृद्धि दर्ज की गई है। इतना ही नहीं अब देश के कुल मोबाइल ब्रॉडबैंड ट्रैफिक का लगभग 47 प्रतिशत हिस्सा 5G से आ रहा है। यह बदलाव इस बात का संकेत है कि यूजर्स तेजी से नई और तेज नेटवर्क तकनीक को अपना रहे हैं। भारत अब दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा 5G सब्सक्राइबर बेस बन चुका है। इसका मतलब है कि केवल एक देश ही भारत से आगे है जबकि बाकी दुनिया भारत से पीछे है। यह उपलब्धि इसलिए भी खास है क्योंकि कुछ साल पहले तक 4G ही मुख्य नेटवर्क था और अब 5G तेजी से उसकी जगह ले रहा है। डेटा खपत में इस बढ़ोतरी के पीछे कई बड़े कारण हैं। आजकल लोग 4K वीडियो स्ट्रीमिंग का खूब इस्तेमाल कर रहे हैं जिससे डेटा की खपत तेजी से बढ़ती है। इसके अलावा AI आधारित एप्लिकेशन और क्लाउड गेमिंग जैसे नए ट्रेंड भी डेटा उपयोग को बढ़ा रहे हैं। मनोरंजन से लेकर कामकाज तक लगभग हर चीज अब इंटरनेट पर निर्भर हो गई है। रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि मेट्रो शहर 5G उपयोग में सबसे आगे हैं जहां कुल मोबाइल डेटा ट्रैफिक का 58 प्रतिशत हिस्सा 5G का है। इसका मतलब है कि बड़े शहरों में लोग तेजी से हाई स्पीड इंटरनेट अपना रहे हैं और उसका भरपूर उपयोग कर रहे हैं। अगर डिवाइस की बात करें तो 2025 तक देश में 892 मिलियन से ज्यादा 4G डिवाइस एक्टिव थे जिनमें से 383 मिलियन डिवाइस 5G सपोर्ट के साथ आ चुके हैं। खास बात यह है कि हाल ही में लॉन्च हुए 90 प्रतिशत से ज्यादा स्मार्टफोन 5G सपोर्ट के साथ आ रहे हैं जो इस टेक्नोलॉजी के भविष्य को और मजबूत बनाता है। आने वाले समय में यह आंकड़े और भी तेजी से बढ़ने वाले हैं। अनुमान है कि 2031 तक भारत में 5G यूजर्स की संख्या 1 अरब के पार पहुंच सकती है। इसका सीधा मतलब है कि देश की डिजिटल इकोनॉमी और भी मजबूत होगी और इंटरनेट का उपयोग जीवन के हर क्षेत्र में और गहराई से जुड़ जाएगा। यह पूरा परिदृश्य दिखाता है कि भारत अब सिर्फ इंटरनेट यूजर वाला देश नहीं रहा बल्कि वह एक डिजिटल पावरहाउस बनता जा रहा है जहां डेटा ही नई ताकत है और 5G उसकी सबसे बड़ी गति बनकर उभर रहा है

आठवें वेतन आयोग के सदस्य सरकारी कर्मचारियों से करेंगे अहम मुद्दों पर चर्चा

नई दिल्ली। आठवें वेतन आयोग प्रस्तावित वेतन वृद्धि और भत्तों से जुड़े प्रमुख मुद्दों पर सरकारी कर्मचारियों और पेंशनभोगियों से बातचीत करने के लिए तैयार है। आयोग के सदस्य 24 अप्रैल को देहरादून में एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित करेंगे, जिसमें कर्मचारी संघों, पेंशनभोगी संगठनों और अन्य पक्षकारों के प्रतिनिधि वेतन संरचना, भत्ते और पेंशन से जुड़े सुझाव साझा करेंगे। आयोग ने कहा है कि देश के विभिन्न हिस्सों में इसी तरह की बैठकें आयोजित की जाएंगी ताकि कर्मचारियों और पेंशनभोगियों की समस्याओं और अपेक्षाओं को व्यापक रूप से समझा जा सके। इन बैठकों से मिली प्रतिक्रियाओं के आधार पर आयोग यह तय करेगा कि वेतन, पेंशन और अन्य लाभों में कितना संशोधन किया जाना चाहिए। इच्छुक समूहों और व्यक्तियों को बैठक में भाग लेने के लिए 10 अप्रैल तक समय का अनुरोध करना अनिवार्य होगा। आयोग चयनित प्रतिभागियों को बैठक के सटीक स्थान और समय के बारे में सूचित करेगा। बयान में कहा गया है कि स्थान और कार्यक्रम की जानकारी बाद में दी जाएगी। कर्मचारी संघ, पेंशनभोगी संघ, संगठन और व्यक्तिगत कर्मचारी भी वेतन, भत्ते और पेंशन संबंधी मुद्दों पर अपने विचार ऑनलाइन पोर्टल के माध्यम से 30 अप्रैल तक ज्ञापन के रूप में भेज सकते हैं। आयोग इन सभी प्रस्तुतियों और बैठकों से प्राप्त प्रतिक्रियाओं की समीक्षा करने के बाद अपनी सिफारिशें तैयार करेगा। वर्तमान में लगभग 1.1 करोड़ केंद्रीय सरकारी कर्मचारी और पेंशनभोगी 8वें वेतन आयोग की त्वरित सिफारिशों का इंतजार कर रहे हैं। आयोग को अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत करने के लिए कुल 18 महीने का समय दिया गया है।