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भारत के डिजिटल भविष्य के लिए बड़ी खबर: डेटा सेंटर क्षमता में 2026 तक 30% बढ़ोतरी

नई दिल्ली।  भारत की डेटा सेंटर इंडस्ट्री अगले सालों में तेजी से बढ़ने की ओर बढ़ रही है। नई रिपोर्ट के अनुसार, 2026 में देश की डेटा सेंटर क्षमता सालाना आधार पर लगभग 30 प्रतिशत बढ़ सकती है। इसके पीछे मजबूत मांग और निवेशकों की लगातार रुचि मुख्य कारण माने जा रहे हैं। सीबीआरई के विश्लेषण के अनुसार, इस वर्ष लगभग 500 मेगावाट की नई डेटा सेंटर क्षमता जोड़ी जाएगी, जो 2025 में जोड़ी गई रिकॉर्ड 440 मेगावाट से अधिक है। 2025 के अंत तक घरेलू डेटा सेंटर की कुल क्षमता लगभग 1,700 मेगावाट तक पहुँच चुकी थी। निवेश में तेजी और विदेशी पूंजी का योगदानडेटा सेंटर सेक्टर में नई पूंजी निवेश भी लगातार आकर्षित हो रही है। 2025 में इस क्षेत्र में 56.4 अरब डॉलर की निवेश प्रतिबद्धताएँ हुईं, जिससे कुल निवेश प्रतिबद्धताएँ 126 अरब डॉलर तक पहुँच गईं। इस वर्ष निवेश में लगभग 45 प्रतिशत की वृद्धि होने की संभावना है, जिससे यह राशि संभावित रूप से 180 अरब डॉलर से अधिक हो सकती है। सीबीआरई के अध्यक्ष और सीईओ Anshuman Magazine ने कहा, “भारत में डेटा सेंटर की कहानी अब संभावनाओं के बारे में नहीं, बल्कि बड़े पैमाने पर क्रियान्वयन के बारे में है।” उन्होंने कहा कि विदेशी पूंजी इस विकास को गति देने में अहम भूमिका निभा रही है। राज्यों और शहरों की भूमिकारिपोर्ट में बताया गया है कि महाराष्ट्र, तेलंगाना, आंध्र प्रदेश, तमिलनाडु और उत्तर प्रदेश जैसे प्रमुख राज्य डेटा सेंटर निवेश में आगे रहेंगे। वहीं, कम लेटेंसी, 5G रोलआउट और डेटा स्थानीयकरण की बढ़ती मांग के कारण टियर-II शहर जैसे अहमदाबाद, विशाखापत्तनम, पटना और भोपाल में भी तेजी से विकास हो रहा है। मुंबई का दबदबा, एआई और क्लाउड की बढ़ती मांगभारत में वर्तमान में कुल डेटा सेंटर क्षमता का 50 प्रतिशत से अधिक मुंबई में स्थित है। मुंबई, चेन्नई, दिल्ली-एनसीआर और बेंगलुरु मिलकर कुल क्षमता का लगभग 90 प्रतिशत योगदान देते हैं। एआई और क्लाउड कंप्यूटिंग से बढ़ती मांग बिजली के बुनियादी ढांचे पर दबाव बढ़ा रही है, जिससे ऑपरेटर नवीकरणीय ऊर्जा स्रोतों पर ध्यान दे रहे हैं। भारत ने 2025 में रिकॉर्ड 44.5 गीगावॉट नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता जोड़ी। सरकारी नीतियों का समर्थनरिपोर्ट के अनुसार कर प्रोत्साहन, हरित पूंजीगत व्यय समर्थन और नियामकीय सरलीकरण जैसी सरकारी नीतियां निवेश में और तेजी लाने और भारत को एशिया-प्रशांत क्षेत्र में प्रमुख डेटा सेंटर केंद्र बनाने में मदद करेंगी।

बड़े पद पर सादगी की मिसाल बिहार के अफसरों की संपत्ति ने सबको किया हैरान

नई दिल्ली । बिहार में प्रशासनिक पारदर्शिता की दिशा में उठाए गए एक कदम ने सबका ध्यान अपनी ओर खींच लिया है। राज्य के कई वरिष्ठ IAS और IPS अधिकारियों द्वारा अपनी संपत्ति सार्वजनिक करने के बाद जो तस्वीर सामने आई है वह चौंकाने वाली भी है और कहीं न कहीं सादगी की मिसाल भी पेश करती है। ऊंचे पदों पर बैठे इन अधिकारियों के पास न तो भारी भरकम संपत्ति है और न ही आलीशान जीवनशैली के संकेत हर जगह नजर आते हैं। बिहार के मुख्य सचिव प्रत्यय अमृत के मामले में यह सामने आया कि उनकी पत्नी के पास उनसे अधिक संपत्ति है। उनके पास नकद राशि मात्र 15400 रुपये है जबकि बैंक खातों में सीमित जमा और थोड़े से निवेश हैं। उनके पास एक पुरानी कार और बहुत कम मात्रा में सोना है। इससे यह साफ होता है कि उच्च पद पर होने के बावजूद उनकी जीवनशैली बेहद साधारण है। वहीं बिहार के पुलिस महानिदेशक विनय कुमार का मामला भी चर्चा में है क्योंकि उनके पास नकद राशि बिल्कुल नहीं है। हालांकि उनके बैंक खातों में अच्छी खासी रकम जमा है और आभूषण के रूप में भी निवेश है। यह दर्शाता है कि आज के दौर में कई अधिकारी नकद रखने की बजाय डिजिटल और सुरक्षित निवेश को प्राथमिकता दे रहे हैं। कई अधिकारियों की संपत्ति में और भी दिलचस्प पहलू सामने आए हैं। जैसे अरविंद कुमार चौधरी के पास खुद की कोई कार नहीं है जबकि नर्मदेश्वर लाल के पास न तो जमीन है और न ही वाहन। यह ऐसे उदाहरण हैं जो आम धारणा को चुनौती देते हैं कि बड़े पदों पर बैठे लोगों के पास अपार संपत्ति होती ही है। इसी तरह मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के सचिव कुमार अनुपम के पास मात्र 5000 रुपये नकद हैं जबकि उनकी कुल बचत बैंक और अन्य योजनाओं में जमा है। यह भी एक संकेत है कि अब वित्तीय प्रबंधन का तरीका बदल रहा है और लोग नकद की बजाय निवेश को प्राथमिकता दे रहे हैं। कुछ अधिकारियों ने निवेश के अलग अलग तरीके अपनाए हैं। धर्मेंद्र सिंह के पास जहां बैंक बैलेंस और बॉन्ड निवेश है वहीं उनके पास दो गाय और दो बछड़े भी हैं जो पारंपरिक और ग्रामीण निवेश का उदाहरण पेश करते हैं। वहीं कुंदन कृष्णन ने शेयर बाजार और म्यूचुअल फंड में निवेश कर आधुनिक वित्तीय योजना को अपनाया है। इस पूरी सूची में एक बात साफ तौर पर उभरकर सामने आती है कि बिहार के कई अधिकारी सादगी भरा जीवन जी रहे हैं और अपनी आय को सोच समझकर अलग अलग क्षेत्रों में निवेश कर रहे हैं। कहीं परंपरागत साधन हैं तो कहीं आधुनिक वित्तीय उपकरणों का इस्तेमाल किया जा रहा है। यह खुलासा न सिर्फ पारदर्शिता को बढ़ावा देता है बल्कि आम लोगों के बीच यह संदेश भी देता है कि जिम्मेदार पदों पर बैठे लोग भी सादगी और संतुलित जीवनशैली को अपनाते हैं। यह तस्वीर उस सोच को बदलने का काम करती है जिसमें अक्सर यह मान लिया जाता है कि ऊंचे पद का मतलब अत्यधिक संपत्ति और विलासिता ही होता है।

बॉक्स ऑफिस से आगे बढ़ा क्रेज हांगकांग में धुरंधर मैराथन ने रचा नया इतिहास

नई दिल्ली । धुरंधर 2 का जलवा अब सिर्फ भारत तक सीमित नहीं रहा बल्कि दुनियाभर में इस फिल्म ने अपनी धाक जमा दी है। खासकर हांगकांग में इस फिल्म को लेकर जो दीवानगी देखने को मिल रही है वह अपने आप में एक नया रिकॉर्ड बनाती नजर आ रही है। रणवीर सिंह की इस स्पाई थ्रिलर ने विदेशी बाजारों में भी ऐसा असर छोड़ा है कि दर्शक इसे बार बार देखने के लिए तैयार हैं। हांगकांग में फिल्म के इसी जबरदस्त क्रेज को देखते हुए एक अनोखा इवेंट आयोजित किया जा रहा है जिसे धुरंधर मैराथन नाम दिया गया है। इस खास आयोजन में धुरंधर और धुरंधर 2 को बैक टू बैक दिखाया जाएगा। दोनों फिल्मों का कुल रनटाइम करीब 8 घंटे का है जो किसी भी दर्शक के लिए एक लंबा लेकिन रोमांचक सिनेमाई अनुभव साबित होने वाला है। दर्शकों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए इस मैराथन स्क्रीनिंग के दौरान तीन ब्रेक भी रखे गए हैं ताकि लोग आराम से इस सफर का आनंद ले सकें। इस मैराथन को हांगकांग में फिल्म के डिस्ट्रीब्यूटर्स द्वारा प्लान किया गया है। सोशल मीडिया पर इसकी घोषणा करते हुए बताया गया कि यह फैसला वहां मिल रहे जबरदस्त रिस्पॉन्स के कारण लिया गया है। यह साफ दिखाता है कि फिल्म ने दर्शकों के दिलों में कितनी गहरी जगह बना ली है। अगर बॉक्स ऑफिस की बात करें तो धुरंधर 2 ने हांगकांग में भी शानदार प्रदर्शन किया है। खास बात यह है कि बिना चीनी सबटाइटल्स के ही इस फिल्म ने वहां 1 मिलियन डॉलर का आंकड़ा पार कर लिया जो अपने आप में बड़ी उपलब्धि है। यह पहली भारतीय फिल्म बन गई है जिसने इस तरह का रिकॉर्ड बनाया। इतना ही नहीं महज 12 दिनों के अंदर फिल्म 2 मिलियन डॉलर के करीब पहुंच गई है और यह पूरी कमाई सिर्फ दो थिएटर्स से हुई है। यह आंकड़ा बताता है कि दर्शकों में फिल्म को लेकर कितना उत्साह है। अब जब फिल्म के लिए चीनी सबटाइटल्स भी उपलब्ध हो गए हैं तो उम्मीद की जा रही है कि इसका कलेक्शन और तेजी से बढ़ेगा। वैश्विक स्तर पर भी धुरंधर 2 का प्रदर्शन शानदार रहा है। ओवरसीज मार्केट में फिल्म 37 मिलियन डॉलर यानी करीब 350 करोड़ रुपये से ज्यादा की कमाई कर चुकी है। यह इसे दुनिया की सबसे सफल भारतीय फिल्मों में शामिल करता है। इस पूरी सफलता से यह साफ हो जाता है कि अब भारतीय सिनेमा की पहुंच और प्रभाव पहले से कहीं ज्यादा बढ़ चुका है। धुरंधर 2 जैसी फिल्में न सिर्फ भारत में बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी दर्शकों को आकर्षित कर रही हैं। हांगकांग में आयोजित हो रही यह 8 घंटे की मैराथन स्क्रीनिंग सिर्फ एक इवेंट नहीं बल्कि इस बात का प्रमाण है कि जब कंटेंट दमदार हो तो भाषा और देश की सीमाएं मायने नहीं रखतीं। रणवीर सिंह की यह फिल्म अब एक ग्लोबल फेनोमेनन बन चुकी है और आने वाले समय में इसके और भी बड़े रिकॉर्ड देखने को मिल सकते हैं

“महिंद्रा की मार्च में धमाकेदार बिक्री: 99,969 गाड़ियों के साथ 21% उछाल!”

नई दिल्ली। देश की प्रमुख ऑटो कंपनी Mahindra & Mahindra ने मार्च 2026 में शानदार प्रदर्शन करते हुए बिक्री के नए आंकड़े छू लिए हैं। कंपनी ने कुल 99,969 वाहनों की बिक्री दर्ज की, जो सालाना आधार पर 21 प्रतिशत की मजबूत बढ़त दर्शाती है। यह आंकड़ा घरेलू और निर्यात दोनों को मिलाकर है, जो कंपनी की मजबूत बाजार पकड़ और बढ़ती मांग का संकेत देता है। SUV सेगमेंट बना ग्रोथ का इंजनमहिंद्रा की इस तेज रफ्तार का सबसे बड़ा कारण उसका यूटिलिटी व्हीकल (SUV) सेगमेंट रहा। मार्च में घरेलू बाजार में कंपनी ने 60,272 यूनिट SUV बेचीं, जो 25 प्रतिशत की बढ़ोतरी है। वहीं निर्यात को मिलाकर कुल SUV बिक्री 62,109 यूनिट तक पहुंच गई। पूरे वित्त वर्ष में कंपनी ने SUV सेगमेंट में 6,60,276 यूनिट की बिक्री की, जो 20 प्रतिशत की सालाना वृद्धि को दर्शाती है। कमर्शियल व्हीकल में भी दमदार प्रदर्शनकमर्शियल व्हीकल (CV) सेगमेंट में भी कंपनी ने संतुलित और मजबूत प्रदर्शन किया। मार्च में घरेलू CV बिक्री 24,928 यूनिट रही, जो 11 प्रतिशत की बढ़त है। खासतौर पर 2 से 3.5 टन वाले लाइट कमर्शियल व्हीकल सेगमेंट में 13 प्रतिशत की वृद्धि के साथ 21,402 यूनिट की बिक्री हुई। वहीं 3.5 टन से कम वाले वाहनों की सालाना बिक्री 2,89,597 यूनिट रही, जो 13 प्रतिशत की वृद्धि को दिखाती है। थ्री-व्हीलर सेगमेंट में जबरदस्त उछालकंपनी के थ्री-व्हीलर सेगमेंट में भी तेज रफ्तार देखने को मिली। मार्च में 39 प्रतिशत की बढ़त के साथ 10,801 यूनिट की बिक्री हुई। इस सेगमेंट में इलेक्ट्रिक थ्री-व्हीलर की बढ़ती मांग भी एक बड़ा कारण रही। पूरे वित्त वर्ष में इस श्रेणी में 1,12,003 यूनिट की बिक्री हुई, जो 30 प्रतिशत की प्रभावशाली वृद्धि है। निर्यात में सालाना बढ़त, लेकिन मार्च में हल्की गिरावट निर्यात के मोर्चे पर कंपनी ने वित्त वर्ष के दौरान 18 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज करते हुए 40,990 यूनिट का आंकड़ा पार किया। हालांकि मार्च महीने में निर्यात 4 प्रतिशत घटकर 3,968 यूनिट रहा, जो वैश्विक बाजार की चुनौतियों की ओर इशारा करता है। सीईओ का बयान: मांग बनी हुई मजबूतकंपनी के ऑटोमोटिव डिवीजन के सीईओ Nalinikanth Gollagunta ने कहा कि मार्च में SUV की 60,272 यूनिट बिक्री और LCV सेगमेंट में 24,928 यूनिट की बिक्री कंपनी की मजबूत मांग को दर्शाती है। उन्होंने भरोसा जताया कि आने वाले समय में भी यह ग्रोथ जारी रहेगी। शेयर बाजार में भी दिखा असरकंपनी के इस शानदार प्रदर्शन का असर शेयर बाजार में भी देखने को मिला। NSE पर महिंद्रा एंड महिंद्रा का शेयर करीब 3 प्रतिशत चढ़कर 3,051 रुपये के स्तर पर ट्रेड करता नजर आया, जो निवेशकों के भरोसे को दर्शाता है। लगातार बेहतर प्रदर्शन का सिलसिलागौरतलब है कि कंपनी ने फरवरी 2026 में भी 18 प्रतिशत की बढ़त के साथ 97,177 यूनिट की बिक्री दर्ज की थी। लगातार दूसरे महीने मजबूत प्रदर्शन से साफ है कि महिंद्रा की रणनीति और प्रोडक्ट पोर्टफोलियो बाजार में अच्छी पकड़ बनाए हुए है।

इलीगल बैट पर सख्त नजर आईपीएल में तेवतिया को मैदान पर ही बदलना पड़ा बल्ला

नई दिल्ली । आईपीएल 2026 के एक मुकाबले में उस समय दिलचस्प और थोड़ा विवादित माहौल बन गया जब राहुल तेवतिया बल्लेबाजी करने उतरे और मैदानी अंपायर की नजर उनके बल्ले पर टिक गई। गुजरात टाइटन्स के इस फिनिशर को पंजाब किंग्स के खिलाफ खेलते हुए अंपायर ने रोक लिया और उनके बैट की जांच की गई। जांच में पाया गया कि उनका बल्ला तय मानकों के अनुरूप नहीं है जिसे क्रिकेट की भाषा में इलीगल बैट कहा जाता है। मैदान पर मौजूद अंपायर ने तुरंत बैट गेज की मदद से बल्ले को परखा। यह एक खास उपकरण होता है जिससे यह जांचा जाता है कि बल्ला निर्धारित मोटाई और चौड़ाई के नियमों में फिट बैठता है या नहीं। जब बल्ला इस गेज से पास नहीं हो पाया तो अंपायर ने बिना देर किए राहुल तेवतिया को बल्ला बदलने का निर्देश दिया। तेवतिया ने भी इस फैसले का सम्मान करते हुए तुरंत नया बल्ला मंगवाया और खेल जारी रखा। हालांकि इस दौरान तेवतिया ने यह समझाने की कोशिश की कि उनके बल्ले पर लगे स्टीकर की वजह से वह गेज से पार नहीं हो पा रहा है लेकिन अंपायरों ने नियमों के तहत कोई ढील नहीं दी। आईपीएल में अब तकनीकी जांच काफी सख्त हो गई है और किसी भी तरह की अनियमितता को तुरंत रोका जाता है। दरअसल आईपीएल 2025 से ही बल्लों की जांच को और कड़ा कर दिया गया है। अब बल्लेबाज के मैदान पर उतरने से पहले और यहां तक कि मैच के बीच में भी बल्ला चेक किया जा सकता है। फोर्थ अंपायर या ऑन फील्ड अंपायर कभी भी यह जांच कर सकते हैं जिससे खेल में निष्पक्षता बनी रहे। अगर नियमों की बात करें तो मैरीलेबोन क्रिकेट क्लब यानी एमसीसी के अनुसार बल्ले की मोटाई 67 मिलीमीटर से ज्यादा नहीं होनी चाहिए और किनारों की मोटाई 40 मिलीमीटर के अंदर रहनी जरूरी है। यही मानक अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट और आईपीएल जैसे बड़े टूर्नामेंट्स में लागू होते हैं। अब सबसे बड़ा सवाल यह उठता है कि क्या इलीगल बैट इस्तेमाल करने पर कोई सजा मिलती है। इसका जवाब थोड़ा दिलचस्प है। पहली बार अगर किसी खिलाड़ी का बल्ला नियमों के खिलाफ पाया जाता है तो उसे सिर्फ बदलने के लिए कहा जाता है और खेल जारी रहता है। इसमें न तो रन की पेनल्टी दी जाती है और न ही खिलाड़ी को तुरंत बैन किया जाता है। लेकिन अगर कोई खिलाड़ी बार बार ऐसे नियमों का उल्लंघन करता है तो आईपीएल के कोड ऑफ कंडक्ट के तहत उस पर कार्रवाई हो सकती है। इसमें खिलाड़ी की मैच फीस का 50 प्रतिशत तक जुर्माना लगाया जा सकता है। यानी पहली गलती पर चेतावनी और सुधार का मौका मिलता है लेकिन बार बार गलती करने पर आर्थिक दंड झेलना पड़ सकता है। इस घटना के बाद एक बार फिर यह साफ हो गया है कि आधुनिक क्रिकेट में तकनीक और नियमों की भूमिका कितनी अहम हो गई है। अब खिलाड़ियों को न सिर्फ अपने प्रदर्शन पर ध्यान देना होता है बल्कि उपकरणों के नियमों का भी पूरी तरह पालन करना पड़ता है ताकि खेल की निष्पक्षता बनी रहे और किसी भी तरह का अनुचित लाभ न लिया जा सके

मुंबई एयरपोर्ट पर शुरू हुई इन-टर्मिनल क्विक कॉमर्स सर्विस, अदाणी एयरपोर्ट और Blinkit की पहल

नई दिल्ली हवाई यात्रा को आसान और स्मार्ट बनाने की दिशा में एक बड़ी पहल हुई है। अदाणी एयरपोर्ट होल्डिंग्स लिमिटेड (एएएचएल) ने क्विक कॉमर्स प्लेटफॉर्म ब्लिंकिट के साथ साझेदारी कर देश की पहली “इन-टर्मिनल क्विक बिजनेस सर्विस” शुरू की है। इस नई सुविधा की शुरुआत छत्रपति शिवाजी महाराज अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डे के टर्मिनल -2 से की गई है, जहां घरेलू विमान यात्रियों को अब हवाई अड्डे के भीतर ही कुछ मिनटों में आवश्यक सामान मिल जाएगा। एक मिनट में यात्रा: यात्रा के दौरान नई सुविधाइस सेवा के लिए यात्री अब ब्लिंकिट ऐप पर ऑर्डर करके चार्जर, दुकान, किताबें, पर्सनल केयर उत्पाद जैसी जरूरी चीजें तुरंत मंगा सकते हैं। खास बात यह है कि यह बोर्डिंग गेट, टॉक, फूड कोर्ट और आईसीआईसीआई बैंक के अंदर ही है। ऐसे यात्रियों को आखरी की तलाश में समय बर्बाद नहीं करना चाहिए। सुरक्षा के साथ स्मार्ट सेवाएयरपोर्ट जैसे संकेतक स्थान पर इस सेवा को पूरी सुरक्षा के साथ संचालित किया जा रहा है। प्रशिक्षण ऑन-बोर्ड स्टाफ यह सुनिश्चित कर रहा है कि हवाई अड्डे के संचालन या यात्रियों के समय पर कोई असर न पड़े। सुरक्षा मानकों के तहत पैक्ड पानी, साबुत और ठंडे पेय पदार्थ जैसे तरल पदार्थ भी टर्मिनल के गैसोलीन स्टॉक के माध्यम से उपलब्ध हैं। यात्रियों के अनुभव को बेहतर बनाने का प्रयासएचएएल के प्रवक्ता का कहना है, इसका पहला उद्देश्य टर्मिनल के साथ-साथ डिजिटल सुविधा में यात्रियों के अनुभव को बेहतर बनाना है। ऐप-आधारित इस सेवा यात्रियों को अपने समय का बेहतर उपयोग करने का अवसर मिलता है और एयरपोर्ट पर अधिक “यात्री-दर्शक” बनाना एक महत्वपूर्ण कदम है। नए अवसर के लिए ब्लिंकिट, नई कमाई के लिए एयरपोर्टब्लिंक के लिए इसने एक नए और हाई-डिमांड सेक्टर में शामिल होने का मौका दिया है, जहां समय की कमी के साथ त्वरित सेवा की जरूरत सबसे ज्यादा है। वहीं एचएएल के लिए यह पहले केवल यात्रियों की सुविधा को बढ़ावा देता है, बल्कि डिजिटल पैमाने के माध्यम से गैर-विमान राजस्व को भी बढ़ावा देता है। यात्रियों की आम समस्या का समाधानअक्सर देखा जाता है कि यात्री जरूरी सामान भूल जाते हैं या बोर्डिंग से पहले खरीदारी के लिए उनके पास नहीं जाते। टर्मिनल-2 जैसे संयुक्त हवाई अड्डे पर यह सेवा इस समस्या का प्रभावी समाधान साबित हो सकती है। अब बिना समय गंवाए, यात्री अपनी जरूरत की चीजें तुरंत हासिल कर सकता है। प्रौद्योगिकी से परिवर्तन यात्रा अनुभवसबसे पहले इस बात का संकेत है कि कैसे तकनीक और डिजिटल हवाई यात्रा के अनुभव को तेजी से बदला जा रहा है। आने वाले समय में इस तरह के अन्य हवाई अड्डों पर भी दर्शन मिल सकते हैं, जिससे यात्रियों को अधिक सुविधा और विकल्प मिलेंगे।

बॉर्डर पार की हकीकत सामने पाकिस्तान से ही मिल रही खुफिया जानकारी कर्नल भूपिंदर शाही का दावा

नई दिल्ली । हाल ही में रिलीज हुई फिल्म धुरंधर 2 के बाद भारत में जासूसी और खुफिया एजेंसियों को लेकर चर्चा तेज हो गई है। फिल्म में रणवीर सिंह द्वारा निभाया गया हमजा का किरदार लोगों को काफी आकर्षित कर रहा है और इसी के साथ असली जासूसी दुनिया को लेकर भी जिज्ञासा बढ़ी है। इसी बीच फिल्म से जुड़े मिलिट्री कंसल्टेंट कर्नल भूपिंदर शाही ने कई चौंकाने वाले खुलासे किए हैं जो पारंपरिक सोच को पूरी तरह बदल देते हैं। कर्नल भूपिंदर शाही के अनुसार आज के दौर में हमजा जैसे जासूसों को दुश्मन देश में भेजने की जरूरत पहले जैसी नहीं रह गई है। उन्होंने एक बातचीत में बताया कि अब हालात ऐसे बन गए हैं जहां पाकिस्तान के अंदर से ही भारत को अहम जानकारियां मिल जाती हैं। उनके मुताबिक पाकिस्तान के कई लोग अपने सिस्टम से परेशान हैं और यही वजह है कि वे खुद आगे आकर जानकारी साझा करने के लिए तैयार हो जाते हैं। उन्होंने यह भी बताया कि भारत के विभिन्न बॉर्डर क्षेत्रों जैसे पंजाब जम्मू कश्मीर गुजरात और राजस्थान से खुफिया इनपुट लगातार मिलते रहते हैं। जरूरत पड़ने पर संपर्क में आए लोगों को बॉर्डर के पास बुलाकर उनसे जानकारी ली जाती है और फिर उन्हें सुरक्षित वापस भेज दिया जाता है। इस पूरी प्रक्रिया में स्थानीय नेटवर्क और भरोसे का बड़ा रोल होता है। जब उनसे पूछा गया कि आखिर कोई पाकिस्तानी नागरिक भारत के लिए जासूसी क्यों करेगा तो उन्होंने साफ कहा कि इसके पीछे कई कारण होते हैं। सबसे बड़ा कारण आर्थिक तंगी है। जिन लोगों के पास रोजगार नहीं है और परिवार की जिम्मेदारी है वे पैसों के लिए यह जोखिम उठाने को तैयार हो जाते हैं। इसके अलावा कुछ लोग व्यक्तिगत कारणों बदले या असंतोष के चलते भी ऐसा कदम उठाते हैं। कर्नल शाही ने यह भी संकेत दिया कि एक बार नेटवर्क बन जाने के बाद वही लोग आगे और संपर्क तैयार करते हैं जिससे खुफिया तंत्र मजबूत होता जाता है। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि सीमावर्ती इलाकों में काम करने वाले सामान्य पेशे के लोग जैसे मजदूर मोची नाई आदि भी इस नेटवर्क का हिस्सा बन सकते हैं क्योंकि उनकी पहुंच और स्थानीय जानकारी बेहद उपयोगी होती है।हालांकि उन्होंने कुछ दावे ऐसे भी किए जिन्हें लेकर सावधानी बरतना जरूरी है । जैसे कि प्रसिद्ध लोगों के शामिल होने या अंडरवर्ल्ड से जुड़े नामों के बारे में उन्होंने केवल संभावना जताई न कि पुष्टि की। कर्नल शाही के अनुसार पाकिस्तान में आंतरिक अस्थिरता और लोगों में असंतोष भी एक बड़ा कारण है जिससे वहां के कुछ लोग भारत के साथ सहयोग करने को तैयार हो जाते हैं। उन्होंने कहा कि अलग अलग कारणों से लोग जासूसी करते हैं कोई पैसों के लिए कोई विचारधारा के लिए तो कोई निजी कारणों से। यह पूरा परिदृश्य दिखाता है कि आधुनिक समय में जासूसी का स्वरूप तेजी से बदल रहा है। अब यह केवल गुप्त एजेंट भेजने तक सीमित नहीं रहा बल्कि यह नेटवर्क और मानव संपर्कों पर आधारित एक जटिल प्रणाली बन चुका है। कर्नल भूपिंदर शाही की बातों से यह साफ होता है कि खुफिया दुनिया में असली ताकत जानकारी के स्रोत और भरोसेमंद नेटवर्क में छिपी होती है न कि सिर्फ किसी एक जासूस में

इटली ने US फाइटर जेट को नहीं दी लैंडिंग परमिशन, ट्रंप हुए नाराज

नई दिल्ली! ईरान जंग के बीच इटली ने अमेरिका को बड़ा झटका दिया है. मध्य पूर्व की ओर जा रहे एक विमान को इटली की सरकार ने सिसली में उतरने नहीं दिया है. यह खबर स्थानीय अखबार कोरिएरे डेला सेरा ने दी है. रिपोर्ट के मुताबिक इटली की सरकार ने ईरान जंग से खुद को दूर रखने के लिए यह कदम उठाया है. यह पहली बार है, जब जॉर्जिया मेलोनी की सरकार ने डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन के खिलाफ कोई फैसला लिया है. रिपोर्ट के मुताबिक सिसली में अमेरिकी विमानों को लैंडिंग की अनुमति न मिलने से इस क्षेत्र में अमेरिकी सैन्य अभियानों पर असर पड़ सकता है, क्योंकि सिसिली मध्य पूर्व में मिशनों के लिए रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण स्थान रखता है. स्पेन के बाद इटली का एक्शन एक दिन पहले स्पेन ने अमेरिकी विमानों के लिए अपने एयर स्पेस को बंद कर दिया था. अब इटली ने लैंडिंग की मंजूरी नहीं दी है. हालांकि, इटली का मामला इसलिए भी अहम है, क्योंकि इटली नाटो मेंबर है. यूरोप में इटली की अहम दखलअंदाजी है. साथ ही वहां की प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी को अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का काफी करीबी माना जाता है. मेलोनी एकमात्र यूरोप की प्रमुख नेत्री थीं, जिन्हें ट्रंप ने अपने शपथ ग्रहण के दौरान व्हाइट हाउस में आमंत्रित किया था. कई मौकों पर मेलोनी ने ट्रंप के लिए कवच का काम किया है. ऐसे में अब ईरान जंग के दौरान इटली के इस रूख से अमेरिका को बड़ा झटका लगा है. इटली ने यह फैसला क्यों लिया है? आधिकारिक तौर पर इटली ने इस पर कोई भी बयान नहीं दिया है, लेकिन इस फैसले को हाल ही में इटली में कराए गए जनमत संग्रह से जोड़ा जा रहा है. इटली में जनमत संग्रह में मेलोनी की पार्टी को जबरदस्त हार मिली थी. इस हार की एक वजह ईरान जंग को भी बताया गया. जनमत संग्रह को लेकर कराए गए कई सर्वे में यह खुलासा हुआ कि ट्रंप से मेलोनी की दोस्ती की वजह से अधिकांश इटली के लोग नाराज हैं. उन्हें ईरान जंग से आर्थिक परेशानियों का डर सता रहा है. इटली में अगले साल आम चुनाव प्रस्तावित है, जिसमें मेलोनी दूसरी बार प्रधानमंत्री बनने के लिए मैदान में उतरेंगी.

संघर्ष से सफलता तक आची मनोरमा की कहानी जिसने नौकरानी से बनकर रचा गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड

नई दिल्ली । भारतीय सिनेमा की दुनिया में कई कलाकार आए और गए लेकिन कुछ नाम ऐसे होते हैं जो अपने संघर्ष और उपलब्धियों की वजह से हमेशा याद किए जाते हैं। ऐसी ही एक प्रेरणादायक कहानी है आची मनोरमा की जिन्होंने जीवन की बेहद कठिन परिस्थितियों से निकलकर सफलता का ऐसा मुकाम हासिल किया जिसे सुनकर हर कोई हैरान रह जाता है। एक समय था जब उनके परिवार की आर्थिक स्थिति इतनी खराब थी कि दो वक्त का खाना जुटाना भी मुश्किल हो जाता था। हालात इतने बिगड़ गए कि उन्हें अपनी पढ़ाई तक छोड़नी पड़ी और कम उम्र में ही दूसरों के घरों में नौकरानी का काम करना पड़ा। यह दौर उनके जीवन का सबसे कठिन समय था लेकिन उन्होंने कभी हार नहीं मानी और परिस्थितियों से लड़ते रहने का हौसला बनाए रखा। कहते हैं किस्मत भी उसी का साथ देती है जो कोशिश करता है और यही बात मनोरमा के जीवन में भी सच साबित हुई। एक दिन उनके गांव में एक ड्रामा मंडली आई और अचानक एक कलाकार की तबीयत खराब हो गई। इस मौके पर मनोरमा को मंच पर आने का अवसर मिला और यहीं से उनके जीवन ने नया मोड़ ले लिया। महज 12 साल की उम्र में उन्होंने अभिनय की दुनिया में कदम रखा और फिर कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा। शुरुआती दौर में उन्हें कई मुश्किलों का सामना करना पड़ा। फिल्मों में मौके मिले लेकिन कुछ प्रोजेक्ट पूरे नहीं हो सके। इसी दौरान उन्हें एक ड्रामा कंपनी के मैनेजर से प्यार हुआ और दोनों ने शादी भी कर ली लेकिन यह रिश्ता ज्यादा समय तक नहीं टिक सका और पति ने उन्हें छोड़ दिया। इस व्यक्तिगत आघात ने उन्हें तोड़ा जरूर लेकिन खत्म नहीं किया। उन्होंने खुद को संभाला और फिर से थिएटर की दुनिया में लौट आईं। धीरे धीरे उनका करियर आगे बढ़ा और साल 1958 में फिल्म मलयित्ता मंगाई से उन्होंने सिनेमा में डेब्यू किया। इसके बाद उन्होंने कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा और लगातार काम करती रहीं। आची मनोरमा ने अपने लंबे करियर में न सिर्फ हजारों किरदार निभाए बल्कि राजनीति और सिनेमा दोनों क्षेत्रों के बड़े नामों के साथ भी काम किया। उन्होंने सी एन अन्नादुरई एम करुणानिधि एम जी रामाचंद्रन जे जयललिता और एन टी रामाराव जैसे पांच मुख्यमंत्रियों के साथ काम कर एक अनोखा रिकॉर्ड बनाया। उनकी सबसे बड़ी उपलब्धियों में से एक है गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड में दर्ज होना। आची मनोरमा ने 1500 से ज्यादा फिल्मों में काम किया और लगभग 5000 स्टेज शो का हिस्सा रहीं। यह उपलब्धि उन्हें भारतीय सिनेमा की सबसे मेहनती और समर्पित अभिनेत्रियों में शामिल करती है। हालांकि जीवन के अंतिम वर्षों में उनकी सेहत कमजोर होने लगी और 2013 के बाद उन्होंने सार्वजनिक जीवन से दूरी बना ली। अंततः 2015 में उनका निधन हो गया लेकिन उनकी विरासत आज भी जिंदा है। आची मनोरमा की कहानी सिर्फ एक अभिनेत्री की सफलता की कहानी नहीं है बल्कि यह संघर्ष धैर्य और आत्मविश्वास की मिसाल है जो यह सिखाती है कि चाहे हालात कितने भी कठिन क्यों न हों अगर इरादे मजबूत हों तो इंसान किसी भी ऊंचाई को छू सकता है

महिला और एससी-एसटी उद्यमियों को मिला सबसे ज्यादा लाभ, मुद्रा योजना बनी सहारा

नई दिल्ली। देश में छोटे उद्यमों को मजबूत बनाने के उद्देश्य से शुरू की गई Pradhan Mantri Mudra Yojana (पीएमएमवाई) ने एक बड़ा मुकाम हासिल कर लिया है। अप्रैल 2015 में लॉन्च हुई इस योजना के तहत अब तक 52.37 करोड़ से अधिक लोन मंजूर किए जा चुके हैं। एक आधिकारिक फैक्ट-शीट के अनुसार, इन लोन के जरिए कुल 33.65 लाख करोड़ रुपये की राशि वितरित की गई है, जो भारत में स्वरोजगार और छोटे व्यवसायों को नई गति देने का संकेत है। महिला उद्यमियों को सबसे बड़ा लाभइस योजना की सबसे खास बात यह है कि इसका सबसे अधिक फायदा महिलाओं को मिला है। कुल स्वीकृत लोन में करीब 70 प्रतिशत हिस्सेदारी महिला उद्यमियों की है। यह आंकड़ा न केवल महिलाओं की आर्थिक भागीदारी को दर्शाता है, बल्कि उनके आत्मनिर्भर बनने की दिशा में बढ़ते कदमों को भी उजागर करता है। इसके साथ ही, लगभग 50 प्रतिशत लोन अनुसूचित जाति (एससी), अनुसूचित जनजाति (एसटी) और अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) के लाभार्थियों को दिए गए हैं, जिससे सामाजिक समावेशन को भी बढ़ावा मिला है। तीन श्रेणियों में बंटा लोन ढांचापीएम मुद्रा योजना के तहत लोन को तीन मुख्य श्रेणियों—शिशु, किशोर और तरुण—में बांटा गया है। ‘शिशु’ श्रेणी के अंतर्गत 50,000 रुपये तक के लोन दिए जाते हैं और यही सबसे लोकप्रिय कैटेगरी है, जिसमें करीब 78 प्रतिशत लोन आते हैं। हालांकि राशि के हिसाब से इसकी हिस्सेदारी 36 प्रतिशत है। ‘किशोर’ श्रेणी में 50,000 से 5 लाख रुपये तक के लोन शामिल हैं, जिनकी संख्या 20 प्रतिशत है, लेकिन कुल राशि में इनकी हिस्सेदारी 40 प्रतिशत तक पहुंचती है। वहीं ‘तरुण’ श्रेणी के अंतर्गत 5 लाख से 10 लाख रुपये तक के लोन दिए जाते हैं। इस श्रेणी में लोन की संख्या भले ही सिर्फ 2 प्रतिशत है, लेकिन राशि के हिसाब से इसकी हिस्सेदारी 24 प्रतिशत है, जो बड़े स्तर पर कारोबार बढ़ाने वालों के लिए अहम साबित हो रही है। ‘तरुण प्लस’ से बढ़ा दायरासरकार ने उद्यमियों को और आगे बढ़ाने के लिए ‘तरुण प्लस’ कैटेगरी भी शुरू की है। इसके तहत वे लोग, जो पहले ‘तरुण’ श्रेणी का लोन सफलतापूर्वक चुका चुके हैं, अब 10 लाख से 20 लाख रुपये तक का लोन ले सकते हैं। इसके साथ ही Credit Guarantee Fund for Micro Units (सीजीएफएमयू) के माध्यम से गारंटी कवरेज भी दिया जाता है, जिससे उद्यमियों का जोखिम कम होता है। हर क्षेत्र को मिल रहा फायदायह योजना मैन्युफैक्चरिंग, ट्रेडिंग और सर्विस सेक्टर के साथ-साथ कृषि आधारित गतिविधियों—जैसे डेयरी, पोल्ट्री और मधुमक्खी पालन—को भी कवर करती है। इसमें टर्म लोन और वर्किंग कैपिटल दोनों की सुविधा मिलती है, जिससे छोटे कारोबारी अपने व्यवसाय को आसानी से शुरू और विस्तार कर सकते हैं। बजट में बढ़ाई गई सीमावित्त मंत्री Nirmala Sitharaman ने 23 जुलाई 2024 को पेश किए गए बजट में इस योजना की लोन सीमा बढ़ाकर 20 लाख रुपये करने की घोषणा की थी, जो 24 अक्टूबर 2024 से लागू हो चुकी है। इससे छोटे उद्यमियों को अपने कारोबार को और बड़े स्तर पर ले जाने में मदद मिल रही है। बैंकिंग नेटवर्क से आसान पहुंचपीएम मुद्रा योजना के तहत लोन बैंक, एनबीएफसी और माइक्रो फाइनेंस संस्थानों के जरिए उपलब्ध कराए जाते हैं। इससे देश के दूरदराज इलाकों तक भी वित्तीय सहायता पहुंच रही है और लाखों लोग स्वरोजगार की ओर बढ़ रहे हैं।