सिंधु जल संधि पर हेग कोर्ट का रुख, पाकिस्तान के पक्ष में फैसला होने की आशंका

नई दिल्ली भारत और पाकिस्तान के बीच जल संकट को लेकर दशकों पुरानी सिंधु जल संधि एक बार फिर अंतरराष्ट्रीय मंच पर विवाद का केंद्र बन गई है। नीदरलैंड के हेग में स्थित स्थायी मध्यस्थता न्यायालय (पीसीए) में चल रही कार्यवाही को लेकर भारत की चिंता बढ़ गई है, क्योंकि संकेत मिल रहे हैं कि अदालत पाकिस्तान के पक्ष में स्थायी अंतरिम निर्णय दे सकती है। भारत में पहले ही इन कार्यवाहियों को “अवैध” से निष्कासित कर दिया गया है और इसमें भाग लेने से इंकार किया जा रहा है। भारत का साफ रुख: पीसीए की प्रक्रिया ठीक भारत का कहना है कि पीसीए के तहत हो रही अयोध्या सिंधु जल संधि के उद्यमियों के लिए कोई आधार नहीं है। भारत ने बार-बार यह प्रमाणित किया है कि उसके लिए केवल वास्तुशिल्प दस्तावेजों की प्रक्रिया ही वैध है। इसके बावजूद पीसीए ने 12 मार्च और 21 मार्च को आदेश जारी करते हुए आगे की सुनवाई रद्द कर दी। भारत को 30 मार्च तक अपना रुख स्पष्ट करने का मौका मिला था, लेकिन भारत ने अपनी स्थिति में कोई बदलाव नहीं किया। पाकिस्तान की अपील पर अस्थायी राहत संभव पीसीए अब पाकिस्तान की ओर से धार्मिक स्थलों पर तीर्थयात्रा राहत देने पर विचार कर सकता है। जम्मू-कश्मीर में चल रहे रैटल और किशन जैसे प्रोजेक्ट्स पर रोक की मांग शामिल है। यदि अदालत ने फैसला रद्द कर दिया है, तो इससे दोनों देशों के बीच तनाव और वृद्धि हो सकती है, खासकर तब जब भारत पहले ही संधि को निलंबित करने की बात कह चुका है। अप्रैल अंत में अहम् सुनवाई पीसीए ने संकेत दिया है कि 26 अप्रैल से 28 अप्रैल तक हेग के पीस पैलेस के बीच इस मामले की सुनवाई हो सकती है। यदि भारत इसमें शामिल नहीं है, तो पाकिस्तान अपने पिछलग्गुओं को असामान्य तरीकों से पेश करेगा, जिससे निर्णय का संतुलन प्रभावित हो सकता है। यही कारण है कि यह मामला भारत के लिए पत्रकारिता और पुरातत्व विभाग के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण बन गया है। सिंधु जल संधि क्या है? 1960 में जवाहरलाल नेहरू और अयूब खान के बीच इस एक्ट में छह नदियों के जल का बंटवारा तय किया गया था। भारत को: रावी, व्यास और सतलुज (पूर्वी नदियाँ)पाकिस्तान को: सिंधु, झेलम और चिनाब (पश्चिमी नदियाँ) भारत में पश्चिमी नदियों के पानी का सीमित उपयोग (लगभग 20%), सीच, बिजली और घरेलू समुद्र तट के लिए किया जाता है। इस संधि के तहत एक स्थायी सिंधु आयोग भी बनाया गया था, जो देशों के बीच डेटा साझा करने और विवाद का काम करता है। क्या? यदि पीसीए पाकिस्तान के पक्ष में अंतरिम निर्णय देता है, तो भारत के लिए यह नामांकित चुनौती बन सकता है। हालाँकि, भारत पहले ही इस प्रक्रिया को मान्य नहीं करता है, इसलिए किसी भी निर्णय का वास्तविक प्रभाव सीमित भी रह सकता है। फिर भी, अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर यह मामला भारत-पाक समझौते और क्षेत्रीय स्थिरता पर प्रभाव डाल सकता है।
IPL 2026: चहल-वैशाक की धार और कोनोली का तूफान, पंजाब ने गुजरात को हराया

नई दिल्ली।आईपीएल 2026 के रोमांचक मुकाबले में Punjab Kings ने शानदार प्रदर्शन करते हुए Gujarat Titans को 3 विकेट से हराकर टूर्नामेंट में जीत के साथ धमाकेदार आगाज किया। न्यू चंडीगढ़ (मुल्लांपुर) में खेले गए इस मैच में आखिरी ओवर तक सस्पेंस बना रहा, लेकिन अंततः कूपर कोनोली की नाबाद पारी ने पंजाब को जीत दिला दी। पहले गेंदबाजी करते हुए पंजाब ने अनुशासित प्रदर्शन के दम पर गुजरात को 20 ओवर में 162/6 के स्कोर पर रोक दिया। जवाब में लक्ष्य का पीछा करने उतरी पंजाब की टीम ने 19.1 ओवर में 165/7 बनाकर मैच अपने नाम कर लिया। इस मुकाबले में गेंद और बल्ले दोनों से पंजाब का संतुलित प्रदर्शन देखने को मिला, जिसने जीत की नींव रखी। चहल और वैशाक ने पलटा मैच का रुख पंजाब की जीत में Yuzvendra Chahal और Vijaykumar Vyshak की गेंदबाजी अहम रही। चहल ने अपने अनुभव का इस्तेमाल करते हुए मिडिल ओवर्स में 4 ओवर में 28 रन देकर 2 विकेट झटके, जबकि वैशाक ने 3/34 का शानदार प्रदर्शन किया। शुरुआत में गुजरात ने तेज रन बनाए और पावरप्ले में 54/1 तक पहुंच गई थी, लेकिन मिडिल ओवर्स में चहल की चालाकी और वैशाक की सटीक गेंदबाजी ने रनगति पर ब्रेक लगा दिया। कप्तान Shubman Gill (39) और Jos Buttler (38) ने अच्छी शुरुआत दी, लेकिन टीम इसे बड़े स्कोर में नहीं बदल सकी। अंत में गुजरात की पारी 162/6 पर सिमट गई, जो इस पिच पर एक चुनौतीपूर्ण लेकिन हासिल किया जा सकने वाला लक्ष्य था। कोनोली बने जीत के हीरो लक्ष्य का पीछा करते हुए पंजाब की शुरुआत अच्छी रही, लेकिन एक समय स्कोर 83/1 से गिरकर 118/6 हो गया और मैच गुजरात की तरफ झुकता नजर आया। ऐसे मुश्किल समय में Cooper Connolly ने जिम्मेदारी संभाली और अंत तक टिके रहे। उन्होंने 44 गेंदों में नाबाद 72 रन बनाए, जिसमें 5 चौके और 5 छक्के शामिल थे। उनकी यह पारी पंजाब के लिए गेम-चेंजर साबित हुई। आखिरी ओवरों में Marco Jansen और जेवियर बार्टलेट ने भी छोटे लेकिन अहम योगदान दिए, जिससे टीम लक्ष्य तक पहुंच सकी।गुजरात की कोशिश रही अधूरीगुजरात की ओर से Prasidh Krishna ने 3 विकेट लेकर मैच को रोमांचक बनाया, जबकि Rashid Khan और वॉशिंगटन सुंदर ने भी विकेट हासिल किए। हालांकि, गेंदबाजों के प्रयास के बावजूद टीम जीत हासिल नहीं कर सकी। खासकर मिडिल ऑर्डर का दबाव में बिखरना और अंत में रन रोकने में असफलता हार का कारण बना। मैच का टर्निंग पॉइंटइस मुकाबले का सबसे बड़ा टर्निंग पॉइंट मिडिल ओवर्स में चहल की गेंदबाजी और कोनोली की संयमित पारी रही। जहां एक तरफ चहल ने गुजरात को बड़े स्कोर से रोका, वहीं दूसरी तरफ कोनोली ने दबाव में शानदार बल्लेबाजी करते हुए मैच को पंजाब की झोली में डाल दिया। यह मुकाबला आईपीएल 2026 के शुरुआती चरण का सबसे रोमांचक मैच साबित हुआ।
राकेश बेदी को पाकिस्तान से मिला प्यार, पॉलिटिशियन का खास मैसेज वायरल

नई दिल्ली।आदित्य धर की धुरंधर में राकेश बेदी के रोल को पसंद किया जा रहा है। एक्टर ने एक पाकिस्तानी पॉलिटिशियन जमील जमाली का किरदार निभाया है। दोनों ही फिल्म में उनके काम को पसंद किया गया। कुछ के मुताबिक वो फिल्म की जान थे। अब राकेश बेदी के इस किरदार पर पाकिस्तानी पॉलिटिशियन नबील गबोल का रिएक्शन सामने आया है। नबील के मुताबिक राकेश बेदी का किरदार जमील जमाली उन्हीं से इंस्पायर्ड है। उन्होंने राकेश बेदी के लिए मैसेज दिया है। राकेश बेदी के लिए पाकिस्तान से मैसेजएक नए इंटरव्यू में नबील ने माना कि वो धुरंधर को मिले रिएक्शन को देखकर हैरान हैं। उन्होंने ये भी वीकार किया कि भारत के लोगों ने फिल्म देखने के बाद वीडियोज बनाए और उन्हें एजेंट कहा। आगे नबील से राकेश बेदी के लिए मैसेज देने के लिए कहा गया तो उन्होंने कहा, ‘राकेश बेदी एक एक्टर हैं। मैं उनसे कहना चाहता हूं कि हम दिखने में एक जैसे हो सकते हैं। हमारा दिल, खून, चेहरा सबका एक जैसा है। मैं उनके साथ पर्सनल नहीं होना चाहता हूं।’ उन्होंने आगे कहा, राकेश बेदी को मेरा मैसेज देना कि सीनियर एक्टर के तौर पर मैं उनकी इज्जत और उनसे प्यार करता हूं। किरदार से नहीं है खुशपिछले साल दिसंबर में जब धुरंधर रिलीज हुई थी तब नबील गबोल ने अपनी नाखुशी जाहिर की थी। उन्होंने मीडिया में बात करते हुए कहा था कि जो उनका रोल दिखाया गया है वो सही नहीं है। उन्होंने कहा था कि उनका किरदार असल में बहुत दबंग किस्म का है। मेकर्स ने उनका रोल सही तरीके से नहीं दिखाया। धुरंधर 2 का बॉक्स ऑफिसबता दें, धुरंधर के बाद दूसरा पार्ट भी बॉक्स ऑफिस पर धमाका कर रहा है। 19 मार्च को रिलीज ही धुरंधर 2 सिर्फ 13 दिनों में शानदार कमाई कर चुकी है। फिल्म ने इंडियन बॉक्स ऑफिस पर 900 करोड़ और वर्ल्डवाइड 1300 करोड़ से ज्यादा का कलेक्शन कर लिया है। फिल्म ने अपने दूसरे ही हफ्ते में कल्कि, KGF 2, धुरंधर जैसी फिल्मों के रिकॉर्ड तोड़ दिए। पुष्पा 2 का हिंदी कलेक्शन भी पीछे रह गया है। अब बाहुबली 2 के कलेक्शन पर नजर टिकी हुई है।
OBC Reservation State Rule : आरक्षण पर हाईकोर्ट सख्त; दूसरे राज्य का OBC सर्टिफिकेट MP में मान्य नहीं!

HIGHLIGHS: दूसरे राज्य का OBC सर्टिफिकेट MP में अमान्य शादी के आधार पर नहीं मिलेगा आरक्षण जाति जन्म से तय, कोर्ट ने दोहराया सिद्धांत शिक्षक भर्ती मामले में याचिका खारिज सुप्रीम कोर्ट के पुराने फैसलों का हवाला OBC Reservation State Rule : ग्वालियर। मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने एक अहम फैसले में स्पष्ट किया है कि किसी भी व्यक्ति को दूसरे राज्य से जारी ओबीसी प्रमाण पत्र के आधार पर मध्यप्रदेश में आरक्षण का लाभ नहीं मिल सकता। कोर्ट ने यह भी कहा कि विवाह के बाद महिला को पति की जाति के आधार पर आरक्षण नहीं दिया जा सकता। जनगणना 2027: आज से शुरू होगा पहला चरण….पहली बार पूरी प्रक्रिया होगी डिजिटल क्या है पूरा मामला यह मामला उत्तर प्रदेश के जालौन की रहने वाली अर्चना दांगी से जुड़ा है। उन्होंने उच्च माध्यमिक शिक्षक पात्रता परीक्षा-2018 पास की थी, लेकिन दस्तावेज सत्यापन के दौरान उनका चयन रद्द कर दिया गया। कारण यह था कि उनका ओबीसी प्रमाण पत्र उत्तर प्रदेश से जारी हुआ था, जिसे मध्यप्रदेश में मान्य नहीं माना गया। देश में ईंधन का मौजूदा भंडार 20 से 40 दिनों की जरूरतों को पूरा करने के लिए पर्याप्त याचिकाकर्ता की दलील याचिकाकर्ता ने कोर्ट में तर्क दिया कि दांगी जाति उत्तर प्रदेश और मध्यप्रदेश दोनों में ओबीसी श्रेणी में शामिल है। साथ ही, विवाह के बाद वे मध्यप्रदेश की निवासी बन चुकी हैं, इसलिए उन्हें आरक्षण का लाभ मिलना चाहिए। MP HEAT WAVE : मध्यप्रदेश में मौसम का यू-टर्न; पहले बारिश-आंधी, फिर 45°C की तपिश, 15 अप्रैल से भीषण गर्मी शुरू! कोर्ट की टिप्पणी कोर्ट ने साफ कहा कि जाति का निर्धारण जन्म से होता है, न कि विवाह या निवास बदलने से। यह भी स्पष्ट किया गया कि दूसरे राज्य का जाति प्रमाण पत्र संबंधित राज्य में मान्य नहीं होता, भले ही जाति दोनों राज्यों की सूची में शामिल हो। मप्रः मुख्यमंत्री डॉ. यादव की घोषणा का 24 घंटे में हुआ पालन शादी से नहीं बदलता आरक्षण अदालत ने कहा कि विवाह के बाद महिला की सामाजिक पहचान बदल सकती है, लेकिन आरक्षण का लाभ नहीं मिल सकता। आरक्षण सामाजिक और शैक्षणिक पिछड़ेपन पर आधारित होता है, जो जन्म से निर्धारित होता है।
Ranbir Kapoor ने क्यों किया था ‘रामायण’ का किरदार रिजेक्ट, जानिए पूरी कहानी

नई दिल्ली।बॉलीवुड की बहुप्रतीक्षित फिल्म Ramayana को लेकर फैंस में जबरदस्त उत्साह है। फिल्म की घोषणा के बाद से ही दर्शक इसकी पहली झलक का इंतजार कर रहे हैं। इसी बीच एक्टर Ranbir Kapoor ने एक बड़ा खुलासा करते हुए बताया कि उन्होंने शुरुआत में भगवान राम का किरदार निभाने से साफ इनकार कर दिया था, लेकिन बाद में उनकी सोच पूरी तरह बदल गई। पहले क्यों ठुकराया भगवान राम का रोल?हाल ही में न्यूयॉर्क में फिल्म की पहली झलक लॉन्च के दौरान Ranbir Kapoor ने बताया कि जब उन्हें करीब चार साल पहले यह रोल ऑफर हुआ, तो उन्होंने तुरंत मना कर दिया था। उनका मानना था कि वह इस महान किरदार के साथ न्याय नहीं कर पाएंगे। उन्होंने कहा कि भगवान राम जैसा पवित्र और आदर्श चरित्र निभाना बहुत बड़ी जिम्मेदारी है और उस समय उन्हें खुद पर पूरा भरोसा नहीं था। किरदार के लिए ऐसे की खास तैयारीजब उन्होंने इस रोल को स्वीकार किया, तो खुद को तैयार करने के लिए उन्होंने गहन तैयारी की। Ranbir Kapoor ने सबसे पहले Ramayan (निर्देशक Ramanand Sagar) को देखा, ताकि भगवान राम की यात्रा और व्यक्तित्व को गहराई से समझ सकें। उन्होंने बताया कि इस भूमिका के लिए उन्हें सिर्फ शारीरिक ही नहीं, बल्कि भावनात्मक और आध्यात्मिक स्तर पर भी खुद को तैयार करना पड़ा। उनका लक्ष्य था कि वह इस किरदार को पूरी सच्चाई और ईमानदारी के साथ निभा सकें। पिता बनने के बाद बदली जिंदगी और फैसला Ranbir Kapoor ने खुलासा किया कि उनकी सोच में बदलाव तब आया जब वह पिता बने। उसी समय उन्हें यह फिल्म ऑफर हुई, जिसे उन्होंने एक खास संयोग बताया। उनके मुताबिक, पिता बनने के बाद उनकी सोच और जीवनशैली में बड़ा बदलाव आया। डर की जगह एक जिम्मेदारी और कृतज्ञता का भाव आया, जिसने उन्हें इस किरदार को स्वीकार करने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने इसे अपनी जिंदगी का महत्वपूर्ण मोड़ बताया। स्टार कास्ट और रिलीज डेटफिल्म Ramayana का निर्देशन Nitesh Tiwari कर रहे हैं। इसमें: Ranbir Kapoor भगवान रामSai Pallavi माता सीताSunny Deol हनुमानRavi Dubey लक्ष्मणYash रावण फिल्म की पहली झलक Hanuman Jayanti (2 अप्रैल) के मौके पर रिलीज की जाएगी, जबकि फिल्म दिवाली पर सिनेमाघरों में दस्तक देगी। फैंस में जबरदस्त उत्साहफिल्म की स्टारकास्ट और भव्य पैमाने को देखते हुए फैंस की उम्मीदें काफी बढ़ गई हैं। Ranbir Kapoor का यह ट्रांसफॉर्मेशन और उनके किरदार को लेकर समर्पण फिल्म को और खास बना रहा है।
जनगणना 2027: आज से शुरू होगा पहला चरण….पहली बार पूरी प्रक्रिया होगी डिजिटल

नई दिल्ली। भारत (India) की 16वीं और स्वतंत्रता के बाद आठवीं जनगणना (Census-2027) का पहला चरण (First Phase) आज यानी एक अप्रैल 2027 से शुरू हो रहा है। यह दुनिया का अब तक का सबसे बड़ा जनगणना अभियान होगा, जो पहली बार पूरी तरह से डिजिटल माध्यमों (Digital-Process) से संचालित किया जाएगा। इस बार नागरिकों के लिए ‘सेल्फ-एन्यूमरेशन’ (Self-Enumeration) यानी स्व-गणना भरने का विकल्प भी उपलब्ध होगा। नागरिक डिजिटल माध्यम से खुद अपनी जानकारी दर्ज कर सकेंगे। दो चरणों में होगी जनगणनापहले चरण में भवन सूचीकरण और आवास जनगणना: यह चरण अप्रैल से सितंबर 2026 तक छह महीने की अवधि में संपन्न होगा। इसमें घरों की स्थिति, उपलब्ध सुविधाओं और घरेलू संपत्तियों से संबंधित जानकारी एकत्र की जाएगी। भवन सूचीकरण कार्य के 30 दिनों की अवधि से ठीक पहले 15 दिनों के लिए स्व-गणना का विकल्प भी उपलब्ध होगा। दूसरे चरण में जनसंख्या गणना: यह चरण फरवरी 2027 में आयोजित किया जाएगा। इसमें प्रत्येक व्यक्ति से जनसांख्यिकीय, सामाजिक-आर्थिक, शिक्षा, प्रवासन, प्रजनन क्षमता आदि से संबंधित जानकारी एकत्र की जाएगी। इस चरण में जातियों की गणना भी की जाएगी, जैसा कि सीसीपीए द्वारा निर्णय लिया गया है। जनसंख्या गणना की सटीक तारीखें और इस चरण में शामिल किए जाने वाले प्रश्न जल्द ही अधिसूचित किए जाएंगे। जनगणना में डिजिटल क्रांतिजनगणना 2027 के लिए केंद्र सरकार ने 11,718.24 करोड़ रुपये के परिव्यय को मंजूरी दी है। इस बार जनगणना के लिए कागजी फॉर्मों का उपयोग नहीं किया जाएगा। इसके बजाय, गणनाकर्ता स्मार्ट फोन पर मोबाइल ऐप के माध्यम से सीधे डेटा एकत्र और जमा करेंगे। इसके अतिरिक्त, दोनों चरणों में सेल्फ-एन्यूमरेशन के लिए एक ऑनलाइन सुविधा भी उपलब्ध होगी। मोबाइल ऐप और स्व-गणना पोर्टल हिंदी और अंग्रेजी सहित 16 भाषाओं में उपलब्ध होंगे। विभिन्न राज्यों के लिए अनुसूचीदेश के विभिन्न राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के लिए भवन सूचीकरण और आवास जनगणना की अलग-अलग तारीखें तय की गई हैं। उदाहरण के लिए, अंडमान और निकोबार द्वीप समूह, दिल्ली, गोवा, कर्नाटक, लक्षद्वीप, मिजोरम, ओडिशा और सिक्किम में 16 अप्रैल से 15 मई तक भवन सूचीकरण और आवास जनगणना होगी, जिसमें एक अप्रैल से 15 अप्रैल तक सेल्फ-एन्यूमरेशन की अवधि शामिल होगी। वहीं, मध्य प्रदेश, आंध्र प्रदेश, अरुणाचल प्रदेश, चंडीगढ़, छत्तीसगढ़ और हरियाणा में 1 मई से 30 मई तक भवन सूचीकरण जनगणना शुरू होगी, जिसमें 16 अप्रैल से 30 अप्रैल तक सेल्फ-एन्यूमरेशन की अवधि होगी। इन राज्यों में अलग है संदर्भ तिथिजनगणना 2027 के लिए संदर्भ तिथि 1 मार्च, 2027 की आधी रात 00:00 बजे है। हालांकि, जम्मू और कश्मीर के बर्फीले गैर-सिंक्रोनस क्षेत्रों और उत्तराखंड और हिमाचल प्रदेश राज्यों के लिए यह संदर्भ तिथि 1 अक्टूबर, 2026 की आधी रात 00:00 बजे होगी। इस डिजिटल जनगणना से डेटा संग्रह की प्रक्रिया अधिक तेज, पारदर्शी और कुशल होने की उम्मीद है, जो भविष्य की नीतियों के निर्माण के लिए महत्वपूर्ण जानकारी प्रदान करेगी।
देश में ईंधन का मौजूदा भंडार 20 से 40 दिनों की जरूरतों को पूरा करने के लिए पर्याप्त

नई दिल्ली। पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस नियामक बोर्ड (Petroleum and Natural Gas Regulatory Board- PNGRB) के सचिव अंजन कुमार मिश्रा (Anjan Kumar Mishra) ने कहा है कि भारत का तरल ईंधन का मौजूदा भंडार देश की 20 से 40 दिनों की जरूरतों को पूरा करने के लिए पर्याप्त है। हालांकि, इसे इस तरह से नहीं बढ़ाया जा सकता कि यह कई महीनों तक चल सके। नई दिल्ली में आयोजित ‘पीएचडीसीसीआई हाइड्रोकार्बन समिट 2026’ के दौरान उन्होंने मौजूदा ऊर्जा स्थिति और वैश्विक संकट पर विस्तार से चर्चा की। ईंधन भंडार और पश्चिम एशिया संकट का प्रभावमिश्रा ने कहा कि हमारे पास पहले से ही तरल ईंधन का रिजर्व मौजूद है, लेकिन ऐसा भंडार नहीं बनाया जा सकता जो छह महीने तक चले। यह 20 से 40 दिनों की मांग को पूरा कर सकता है, लेकिन उससे लंबी अवधि के लिए नहीं। पश्चिम एशिया में चल रहे संकट पर बात करते हुए उन्होंने स्वीकार किया कि इसका असर भारत पर पड़ रहा है। उन्होंने कहा, ‘मैं यह झूठ नहीं बोलूंगा कि इसका असर भारत पर हो रहा है, लेकिन निश्चित रूप से सरकार ने पूरी योजना बना ली है और हम स्थिति पर बहुत करीब से नजर रख रहे हैं।’ देश में कोई संकट नहीं, पड़ोसियों की भी हो रही मददवैश्विक तनाव के कारण पैदा हुई चिंताओं को खारिज करते हुए पीएनजीआरबी अधिकारी ने स्पष्ट किया कि देश में जीवाश्म ईंधन की कोई कमी नहीं है। उन्होंने कहा कि देश में तरल ईंधन का कोई संकट नहीं है और पैनिक करने की कोई आवश्यकता नहीं है। मिश्रा ने बताया कि भारत इस संकट की घड़ी में केवल अपनी जरूरतें पूरी नहीं कर रहा, बल्कि बांग्लादेश और श्रीलंका जैसे पड़ोसी देशों की भी मदद कर रहा है। आयात निर्भरता और तेल खरीद के नए विकल्पआयात पर निर्भरता कम करने के सवाल पर मिश्रा ने कहा कि घरेलू कच्चे तेल के उत्पादन को बढ़ाना एक क्रमिक प्रक्रिया है। सरकार के हालिया प्रयासों और नई खोजों के बावजूद इसे रातों-रात हासिल नहीं किया जा सकता। उन्होंने बताया कि भारत ने हाल के वर्षों में कच्चे तेल की खरीद का दायरा काफी बढ़ाया है। अब आपूर्ति केवल पश्चिम एशिया तक सीमित नहीं है, बल्कि रूस और वेनेजुएला जैसे देशों से भी तेल आ रहा है। इसके अलावा मोजाम्बिक और अंगोला में भी नए विकल्प तलाशे जा रहे हैं। कीमतों में उछाल अस्थायी होगाअगर वैश्विक संघर्ष लंबा खिंचता है और कच्चे तेल की कीमतों में भारी बढ़ोतरी होती है, तो इस चिंता पर मिश्रा ने कहा कि इसका असर केवल कुछ समय के लिए होगा। उन्होंने भरोसा जताते हुए कहा कि अगर कीमतें बढ़ती हैं, तो हम स्थिति को संभालने में सक्षम होंगे… जो भी मूल्य वृद्धि होगी, वह बहुत ही अस्थायी होगी।” उन्होंने उम्मीद जताई कि कीमतें अंततः संकट से पहले के स्तर पर लौट आएंगी।
देश में तेजी से बढ़ रही पाचन संबंधी बीमारियां… आंत के कैंसर को लेकर जागरूक नहीं भारतीय

नई दिल्ली। देश में पाचन संबंधी बीमारियां (Digestive diseases) तेजी से बढ़ रही हैं, लेकिन लोग गंभीर बीमारियों को लेकर अब भी जागरूकता नहीं हैं। हाल ही में हुए एक राष्ट्रीय सर्वे परसेप्शन ऑडिट (National Survey Perception Audit) में पता चला कि दिल्ली (Delhi) के 80% लोग नहीं जानते कि मल में खून आना कोलोरेक्टल कैंसर (Colorectal cancer) (आंत का कैंसर) का शुरुआती संकेत हो सकता है। मर्क स्पेशियलिटीज प्राइवेट लिमिटेड ने यह सर्वे 14 बड़े भारतीय शहरों में किया। इसमें 25 से 65 वर्ष के 10 हजार से अधिक लोग शामिल हुए। सर्वे के नतीजे दिल्ली में एक कार्यक्रम में साझा किए गए। दिल्ली से जुड़े आंकड़े काफी चिंताजनक हैं। दिल्ली से 679 प्रतिभागी शामिल हुए, जिसमें 341 पुरुष और 337 महिलाएं रहीं। डॉक्टर के पास न जाने के पीछे समय की कमी, डर, झिझक और बीमारी को गंभीरता से न लेना है। सर्वे में शामिल शहर सर्वे कोलकाता, अहमदाबाद, बेंगलुरु, चंडीगढ़, चेन्नई, हैदराबाद, इंदौर, जयपुर, कोच्चि, लखनऊ, मुबंई, पुणे और दिल्ली के लोगों पर किया गया। 20 दिन तक ईमेल, व्हाट्सएप और सोशल मीडिया के जरिये से सर्वे किया गया। सर्वे का परिणाम – करीब 89.5 फीसदी लोग मल त्याग में बदलाव होने पर डॉक्टर के पास जाने के बजाय खुद दवा लेने या खान-पान बदलने का रास्ता अपनाते हैं। – 86 फीसदी लोग नियमित रूप से बाहर या पैकेज्ड भोजन करते हैं, जो पाचन समस्याओं को बढ़ा सकता है। – 80% फीसदी से ज्यादा लोग मल में खून आने को चेतावनी नहीं मानते। – 65 फीसदी से अधिक लोगों ने अनियमित मल त्याग की समस्या बताई। 35.5% लोग नियमित व्यायाम करते हैं। डॉक्टर की सलाह – बचाव के लिए स्वस्थ जीवनशैली, फाइबर युक्त आहार, नियमित व्यायाम और तंबाकू से दूरी जरूरी। डॉक्टरों ने दी चेतावनीऑन्कोलॉजिस्ट डॉ. मनीष सिंघल के अनुसार, यह कैंसर बड़ी आंत या मलाशय में छोटे पॉलिप्स के रूप में शुरू होता है। मल में खून आना, अचानक वजन कम होना, पेट दर्द और थकान मुख्य लक्षण हैं, जिन्हें अनदेखा करना भारी पड़ सकता है। डॉ. शेफाली सरदाना ने दिल्ली के आंकड़ों का हवाला देते हुए कहा कि लोग अक्सर डॉक्टरी सलाह के बजाय खुद दवा लेने की गलती करते हैं, जिससे बीमारी गंभीर हो जाती है। विशेषज्ञों का मानना है कि समय पर जांच और सही आदतों से इस कैंसर के जोखिम कम कर सकते हैं।
ईरान युद्ध का असर… ATF के दामों में 115% से ज्यादा की वृद्धि… महंगा हो सकता है हवाई सफर

नई दिल्ली। ईरान-इजराल-अमेरिका युद्ध (Iran-Israel-America War) का असर हवाई उड़ानों (Air flights) पर तो दिख ही रहा है अब यात्रियों की जेब पर भी पड़ सकता है। पश्चिम एशिया संकट (West Asia crisis.) के बीच भारत में एविएशन टरबाइन फ्यूल (Aviation Turbine Fuel- ATF) की कीमतों में 115% से ज्यादा की बड़ी बढ़ोतरी कर दी गई है। नई दिल्ली में अब ATF की कीमत 1 अप्रैल यानी आज से बढ़कर लगभग 2.07 लाख रुपये प्रति किलोलीटर हो गई है, जबकि पिछले महीने यह करीब 96,638 रुपये प्रति किलोलीटर थी। इस तेजी का असर आज एविएशन इंडस्ट्री से जुड़ीं कंपनियों के शेयरों पर देखने को मिल सकता है। आज इंडिगो, स्पाइसजेट जैसी कंपनियों के शेयरों में बड़ी हलचल रहने के आसार हैं। क्यों बढ़े एटीएफ के दामएटीएफ के रेट्स में इस बढ़ोतरी की बड़ी वजह ईरान-अमेरिका-इजराइल के बीच जारी युद्ध के कारण वैश्विक तेल बाजार में आई उथल-पुथल है, जिससे ईंधन की कीमतें तेजी से बढ़ी हैं। आज भी क्रूड ऑयल की कीमतें 100 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर हैं। ब्लूमबर्ग के मुाबिक ब्रेंट क्रूड की कीमत सुबह साढ़े सात बजे के करीब 105.68 डॉलर प्रति बैरल थी और WTI की 102.82 डॉलर पर थी। बड़े शहरों में नई कीमतेंदेश के अन्य बड़े शहरों में भी ATF की कीमतों में जबरदस्त उछाल देखा गया है। कोलकाता में एटीएफ की कीमत अब करीब 2.05 लाख रुपये प्रति किलोलीटर हो गई है, जो मार्च में लगभग 99,587 रुपये थी। चेन्नई में यह बढ़कर करीब 2.14 लाख रुपये प्रति किलोलीटर पहुंच गई है, जबकि पहले यह करीब 1 रुपये लाख थी। वहीं, मुंबई की बात करें तो यहां ATF की कीमत करीब 1.94 लाख रुपये प्रति किलोलीटर हो गई है, जो पिछले महीने लगभग ₹90,451 थी और बड़े शहरों में यह सबसे कम है। एयरलाइन कंपनियों पर असरइस भारी बढ़ोतरी का सीधा असर एयरलाइन कंपनियों पर पड़ेगा। ईंधन खर्च बढ़ने से उनकी लागत बढ़ेगी, जिसके कारण शेयर बाजार में एयरलाइन कंपनियों के स्टॉक्स पर निवेशकों की नजर बनी हुई है। यात्रियों की जेब पर पड़ेगा बोझATF की कीमत बढ़ने का असर आम लोगों पर भी साफ दिखाई देगा। एयरलाइंस अपनी बढ़ी हुई लागत को संतुलित करने के लिए हवाई किराए में बढ़ोतरी कर सकती हैं, जिससे यात्रियों को ज्यादा पैसा खर्च करना पड़ सकता है।
महंगाई की मार… आज से बुखार से लेकर शुगर-BP तक…900 से अधिक जरूरी दवाओं के दाम बढ़े

नई दिल्ली। आवश्यक दवाओं की कीमतों (Essential Medicines Prices.) में आज से वृद्धि लागू होने जा रही है। राष्ट्रीय औषधि मूल्य निर्धारण प्राधिकरण (एनपीपीए) (National Pharmaceutical Pricing Authority (NPPA)) के आदेश के तहत 900 से अधिक दवाओं के अधिकतम खुदरा मूल्य में संशोधन किया जाएगा। बुखार, दर्द, संक्रमण, एनीमिया और पोषण संबंधी आवश्यकताओं में उपयोग होने वाली दवाएं शामिल हैं। जीएसटी कटौती के बाद एक अप्रैल से मरीजों व तीमारदारों को 10 फीसदी और मंहगी दरों पर दवा खरीदनी होगी। 60 फीसदी फार्मा कंपनियों ने जनवरी में ही नई मैन्युफैक्चरिंग पर रेट बढ़ा दिए थे। बाजार में जनवरी 2026 से आने वाले दवाओं के नए बैच पर नई एमआरपी पड़ी है। थोक से लेकर रिटेल दवा मार्केट में आज बुधवार से दवा खरीदना मंहगा हो जाएगा। नियमित रूप से हम जिन दवाओं का इस्तेमाल करते हैं उसकी कीमतों में 10 से 12 फीसदी इजाफा होगा। थोक दवा दुकानदारों की मानें तो यह मुनाफा फार्मा कंपनियां सालाना अपने नियमों के तहत कर रही हैं। ईरान, इराक व अमेरिका के युद्ध से इन रेटों का कोई लेना देना नहीं है। थोक दवा फफाला मार्केट में दवाओं के नए स्टॉक भी आ रहे हैं, जिसमें नई एमआरपी पड़ी है। मार्केट में 80 फीसदी नया स्टॉकजिस दवा पर एमआरपी 80 रुपये थी उसकी 90 से 95 रुपये हो गई है। जिसकी कीमत 100 रुपये थी वह 110 से 115 रुपये हो गया है। थोक दवा कारोबारी भी नई एमआरपी के हिसाब से ही दवाओं की सेल कर रहे हैं। जो पुराना स्टॉक है उसकी एमआरपी कम करके दे रहे हैं। लेकिन बाजार में 80 फीसदी नया स्टॉक आ चुका है। फरवरी व मार्च से फार्मा कंपनियां नए स्टॉक को निकालने लगती हैं। दवा बाजार में कुल 900 से अधिक दवाओं की कीमतों में इजाफा होने वाला है। नए स्टॉक के अनुसार होगी बिक्रीथोक दवा कारोबारी राजीव सिंह ने बताया कि युद्ध के कारण दवाओं के दाम नहीं बढ़े हैं। दवा कंपनियां रुटीन में अप्रैल से जो रेट बढ़ाती हैं उसी के दाम बढ़ेंगे। अप्रैल से अधिकांश दवाओं पर नई एमआरपी आती है। वहीं दूसरे थोक कारोबारी सुनील राणा का कहना है कि कुछ दवा कंपनियों ने पहले ही एमआरपी बढ़ा दी है और नया स्टॉक बाजार में आ गया है। नए स्टॉक के अनुसार ही बिक्री की जा रही है। कई फार्मा कंपनियों का नया स्टॉक अप्रैल के पहले सप्ताह में आ जाएगा। महंगी होने वाली दवाएं– पैरासिटामोल, एंटीबायोटिक्स, विटामिन और मिनरल सप्लीमेंट्स, एनीमिया की दवाएं, दर्द निवारक दवाएं, शुगर, ब्लडप्रेशर, लिवर, पेट, त्वचा संबंधित।