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उज्जैन वह स्थान है जहां अध्यात्म और विज्ञान के बीच की दूरी समाप्त हो जाती है : केंद्रीय मंत्री प्रधान

भोपाल । केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने कहा कि उज्जैन वह स्थान है जहाँ अध्यात्म और विज्ञान के बीच की दूरी समाप्त हो जाती है और एक नई दृष्टि का जन्म होता है। भारत के जितने भी प्रमुख आध्यात्मिक केंद्र हैं चाहे वह उज्जैन हो काशी हो कांची हो या पुरी धाम सभी भारतीय ज्ञान परंपरा पर आधारित ऐसी जीती-जागती प्रयोगशालाएं हैं जहाँ विज्ञान कला संस्कृति साहित्य और आध्यात्मिकता का अद्भुत समन्वय मिलता है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव शुक्रवार को उज्जैन में अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन महाकाल द मास्टर ऑफ टाइम के शुभारंभ सत्र को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने महाकाल द मास्टर ऑफ टाइम अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन में पधारे विद्वानों और विशेषज्ञों का स्वागत अभिनंदन किया। केंद्रीय मंत्री प्रधान ने विज्ञान और आध्यात्मिकता के अटूट संबंध पर विशेष बल दिया। उन्होंने कहा कि विज्ञान आध्यात्मिकता के बिना अधूरा है और इसका सबसे सटीक उदाहरण स्वयं उज्जैन नगरी और महाकाल मंदिर की व्यवस्थाओं में दिखाई देता है। केंद्रीय मंत्री प्रधान ने महाकाल मंदिर के एक वैज्ञानिक अनुष्ठान का उल्लेख करते हुए बताया कि वैशाख मास के पहले दिन से भगवान शिव के ऊपर मटके से निरंतर जल की धारा प्रवाहित करने की व्यवस्था केवल एक धार्मिक परंपरा नहीं बल्कि ग्रीष्मकाल की चुनौतियों का एक वैज्ञानिक समाधान और पर्यावरणीय प्रबंधन है। यह दर्शाता है कि हमारा समाज सदियों से काल गणना और प्रकृति के बदलावों के अनुसार अपनी जीवनशैली को ढालने की वैज्ञानिक समझ रखता था। भारतीय ज्ञान परंपरा में पर्यावरण के प्रति उत्तरदायित्व और संतुलित जीवन प्रवाह हमेशा से केंद्र में रहा है। केंद्रीय मंत्री प्रधान ने शिक्षा के क्षेत्र में हो रहे बड़े बदलावों का जिक्र करते हुए ‘राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के महत्व को रेखांकित किया। उन्होंने जोर दिया कि हमें अपनी शिक्षा पद्धति को केवल रटने की पुरानी परिपाटी से निकालकर सृजनशीलता डिजाइन थिंकिंग और क्रिटिकल थिंकिंग की ओर ले जाना होगा। आज का युग एआई और कंप्यूटेशनल थिंकिंग का है भारत के विद्यार्थी वैश्विक स्तर पर इस दौड़ में पीछे न रहें इसके लिए स्कूली स्तर पर ही एआई जैसे नए पाठ्यक्रम शुरू किए जा रहे हैं। केंद्रीय मंत्री प्रधान ने स्पष्ट किया कि ज्ञान पर किसी भाषा का एकाधिकार नहीं हो सकता इसलिए शिक्षा को भारतीय भाषाओं और लोक-संस्कृतियों के साथ जोड़ा जा रहा है जिससे हर विद्यार्थी अपनी मातृभाषा में जटिल वैज्ञानिक विषयों को सरलता से समझ सके। केंद्रीय मंत्री प्रधान ने कहा कि उज्जैन वह स्थान है जहाँ से कर्क रेखा गुजरती है और यहीं से प्राचीन काल में दुनिया की काल गणना होती थी इसलिए अब समय आ गया है कि हम ‘ग्रीनविच मीन टाइम के स्थान पर ‘महाकाल स्टैंडर्ड टाइम की तार्किक स्थापना करें। उन्होंने कहा कि आधुनिक एआई उपकरण भी यह स्वीकार करते हैं कि काल गणना का मूल केंद्र उज्जैन के आसपास का क्षेत्र है अतः हमें अपने वैज्ञानिक स्वाभिमान को वैश्विक स्तर पर पुनः स्थापित करना होगा और यह इस विमर्श का मुख्य उद्देश्य है। केंद्रीय मंत्री प्रधान ने कहा कि भारत आज अंतरिक्ष ड्रोन और सूचना प्रौद्योगिकी में तेजी से आगे बढ़ रहा है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि आने वाले दो दशकों में भारत न केवल अपनी आवश्यकताओं को पूरा करेगा बल्कि ‘वसुधैव कुटुंबकम की भावना के साथ पूरे विश्व की पर्यावरणीय और आर्थिक चुनौतियों का वैज्ञानिक समाधान भी प्रदान करेगा। उज्जैन में ‘विज्ञान केंद्र और ‘तारामंडल का सुदृढ़ीकरण इसी दिशा में एक बड़ा कदम है जिससे आने वाली पीढ़ी वैज्ञानिक दृष्टिकोण के साथ आगे बढ़ सके। प्रख्यात चिंतक एवं लेखक सुरेश सोनी ने कहा कि भारतीय संस्कृति में काल (समय) की अवधारणा अत्यंत गहन और वैज्ञानिक है। भारतीय कालगणना खगोलीय पिंडों की गति ऋतु चक्र और प्रकृति के नियमों से जुड़ी हुई है। उन्होंने कहा कि भविष्य की समग्र प्रगति के लिए विज्ञान एवं तकनीक कला अध्यात्म सामाजिकता और सामाजिक अर्थशास्त्र के बीच संतुलित समन्वय आवश्यक है। उज्जैन में स्थापित कालयंत्र इस प्राचीन वैज्ञानिक परंपरा और आधुनिक तकनीक के समन्वय का उत्कृष्ट उदाहरण है। उन्होंने युवाओं से भारतीय वैज्ञानिक विरासत को समझने प्रकृति के साथ संतुलन बनाकर जीवन जीने और विज्ञान को मानवीय मूल्यों से जोड़ने का आह्वान किया। नीति आयोग के सदस्य एवं प्रख्यात वैज्ञानिक डॉ. वी. के. सारस्वत ने कहा कि उज्जैन प्राचीन काल से कालगणना और खगोल विज्ञान का प्रमुख केंद्र रहा है। उन्होंने वैदिक ज्ञान और आधुनिक विज्ञान के समन्वय को विकसित भारत@2047 के लक्ष्य की दिशा में महत्वपूर्ण बताया। उन्होंने कहा कि जलवायु परिवर्तन स्वच्छ ऊर्जा और खाद्य सुरक्षा जैसी चुनौतियों का समाधान नवाचार और स्वदेशी अनुसंधान से ही संभव है। उन्होंने आत्मनिर्भर भारत की आवश्यकता पर बल देते हुए एआई क्वांटम तकनीक और सेमीकंडक्टर जैसे डीप टेक क्षेत्रों में अनुसंधान बढ़ाने R&D में निवेश विश्वविद्यालयों और उद्योगों के बेहतर समन्वय की आवश्यकता बताई। उन्होंने कहा कि भारतीय युवाओं की क्षमता से भारत 2047 तक तकनीकी रूप से सशक्त और आत्मनिर्भर राष्ट्र बनेगा। विज्ञान भारती के राष्ट्रीय संगठन मंत्री शिव कुमार शर्मा ने कहा कि यह आयोजन विज्ञान एवं तकनीकी शिक्षा में नए प्रतिमान स्थापित कर रहा है। शिक्षा केवल जानकारी का माध्यम नहीं बल्कि समाज को परिवर्तनकारी दृष्टि देने का साधन है। उन्होंने बताया कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के लर्निंग बाइ डूइंग सिद्धांत के तहत विद्यार्थी विज्ञान मंथन 2026-27 का शुभारंभ किया गया जिसका उद्देश्य विद्यार्थियों में भारतीय ज्ञान परंपरा के प्रति गौरव भाव जगाते हुए वैज्ञानिक दृष्टिकोण और नवाचार क्षमता का विकास करना है। राष्ट्रीय समन्वयक आईकेएस नई दिल्ली डॉ. गांती एस. मूर्ति ने कहा कि यह सम्मेलन अतीत के ज्ञान के संरक्षण नवाचार के सृजन और ज्ञान के निरंतर प्रवाह पर आधारित है। सम्मेलन में बच्चों के लिए भौतिकी प्रशिक्षण विशेष सत्र और प्रदर्शनी के माध्यम से खगोल विज्ञान एवं आधुनिक नवाचारों को प्रस्तुत किया गया है। महाकाल द मास्टर ऑफ टाइम अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन का मूल ध्येय भारत की उस समृद्ध वैज्ञानिक थाती को आधुनिक जगत के साथ एकाकार करना है जो सदियों से हमारी पहचान रही है। इस युगांतरकारी आयोजन का सबसे प्रमुख संकल्प उज्जैन को ‘विश्व के मेरिडियन शून्य रेखा के रूप में पुनः प्रतिष्ठित करना है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव के विजन के अनुरूप यह सम्मेलन ‘विकसित भारत के स्वप्न को साकार करने की दिशा में ‘स्पेस इकोनॉमी अंतरिक्ष अर्थव्यवस्था के नए द्वार खोलेगा। यहाँ खगोल

उज्जैन की माटी में विज्ञान, गणित, खगोल और ब्रह्मांड चिंतन सदियों से विद्यमान : मुख्यमंत्री डॉ. यादव

भोपाल । मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि उज्जैन धर्म की नगरी होने के साथ विज्ञान की भी नगरी है। उज्जैन की माटी में विज्ञान गणित खगोल और ब्रह्मांड चिंतन सदियों से विद्यमान है। उज्जैन काल गणना का केंद्र रहा है जहां प्राचीन काल में सूर्य की छाया से समय नापने की कला विकसित हुई। प्राचीन भारतीय भूगोल के अनुसार उज्जैन कर्क रेखा पर स्थित है और इसे पृथ्वी का मध्य बिंदु माना जाता था। ग्रीनविच के वैश्विक मानक के अस्तित्व में आने से सदियों पहले शून्य देशांतर रेखा पावन नगरी उज्जैन से होकर गुजरती थी। जब पश्चिम में खगोल शास्त्र का ज्ञान भी नहीं था तब उज्जैन के ज्योतिषी और विद्वान काल गणना कर नक्षत्रों की स्थिति बता रहे थे। जब दुनिया समय को परिभाषित करना सीख रही थी तब यहां महर्षियों ने खगोलीय गणनाओं का वैश्विक मानक स्थापित कर लिया था। मुख्यमंत्री डॉ. यादव शुक्रवार को उज्जैन में अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन महाकाल द मास्टर ऑफ टाइम के शुभारंभ सत्र को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने महाकाल द मास्टर ऑफ टाइम अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन में पधारे विद्वानों और विशेषज्ञों का स्वागत अभिनंदन किया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव और केंद्रीय मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने उज्जैन साइंस सेंटर का लोकार्पण और तारा मंडल में लगी विज्ञान प्रदर्शनी का शुभारंभ एवं अवलोकन भी किया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने सिंहस्थ-2028 की तैयारियों के लिए 4 लेन उज्जैन बायपास और सम्राट विक्रमादित्य – द हेरिटेज परियोजना का भूमि-पूजन किया। इस अवसर पर विचारक एवं समाजसेवी सुरेश सोनी विशेष रूप से उपस्थित रहे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि विज्ञान के अनुसार ब्रह्मांड की हर वस्तु समय के अधीन है लेकिन शिव उस अनंत का प्रतीक हैं जहां से समय जन्म लेता है और जहां समय का अंत होता है। इसीलिए वे काल के अधिष्ठाता अर्थात मास्टर ऑफ टाइम हैं। विज्ञान मानता है कि समय और अंतरिक्ष एक दूसरे से अविभाज्य हैं हमारे शास्त्रों में युगों पहले शिव को विश्व स्वरूप और महाकाल कहकर इसी वैज्ञानिक सत्य को प्रतिपादित किया था। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने अपने ग्रीनविच भ्रमण के अनुभव का उल्लेख करते हुए कहा कि उज्जैन और डोंगला के आधार पर होने वाली खगोलीय गणनाओं की सटीकता अद्भुत है। डोंगला को एस्ट्रोनोमिकल स्टडीज के लिए विकसित किया जा रहा है। इस दिशा में उज्जैन का यह अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन मील का पत्थर सिद्ध होगा। भूमध्य रेखा और कर्क रेखा का कटाव या केंद्र बिंदु पहले उज्जैन में था जो अब उज्जैन से 32 किलोमीटर दूर डोंगला में शिफ्ट हो गया है। यहां 21 जून को सूर्य की छाया शून्य हो जाती है। ग्रीनविच के मीन टाइम में रात को 10 बजे तक सूर्य के दर्शन होते हैं। यह केंद्र बिंदु कैसे हो सकता है। आज समय और स्पेस दोनों को एक दूसरे से समेकित रूप से समझने की आवश्यकता है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि यह हम सब के लिए गौरव का विषय है कि उज्जैन को साइंस सिटी के रूप में स्थापित किया जा रहा है। इसी उद्देश्य से आज 15 करोड़ रुपए से अधिक की लागत से विज्ञान केंद्र का उद्घाटन किया गया। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में हमें केंद्र सरकार का भी सहयोग निरंतर प्राप्त हो रहा है। वास्तव में यह अपनी वैज्ञानिक विरासत को पुनर्जीवित करने का सशक्त प्रयास है। उन्होंने केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के नेतृत्व में नई शिक्षा नीति के क्रियान्वयन के लिए हो रहे प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि राज्य सरकार इस नीति की भावना के अनुरूप युवाओं को भारतीय ज्ञान परंपरा से जोड़ने की दिशा में गंभीर प्रयास कर रही है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि आने वाला सिंहस्थ 2028 हमारे लिए उज्जैन की गरिमा को वैश्विक स्तर पर स्थापित करने का स्वर्णिम अवसर है। हमारा लक्ष्य है की सिंहस्थ 2028 में उज्जैन आने वाले श्रद्धालु महाकाल दर्शन का पुण्य प्राप्त करने के साथ काल गणना के इस केंद्र का वैज्ञानिक महत्व भी जाने। वर्ष 2028 के सिंहस्थ को व्यवस्थित रूप से संपन्न करना हमारा दायित्व है। इसी उद्देश्य से 700 करोड़ रुपए की लागत से बनने वाले बायपास रोड का भूमि-पूजन भी हुआ है। इस सौगात के लिए उज्जैनवासी बधाई के पात्र हैं। उज्जैन सिंहस्थ विश्व का सबसे बड़ा धार्मिक मेला है। इस विशाल आयोजन में श्रद्धालुओं के लिए सर्व-सुविधा संपन्न प्रबंधन के लिए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के मार्गदर्शन में राज्य सरकार हर संभव प्रयास कर रही है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने मंच से सभी को वर्ष 2028 के भव्य और दिव्य सिंहस्थ के लिए आमंत्रित किया। विद्यार्थी विज्ञान मंथन की वेबसाइट ब्रोशर एवं पुस्तिका का किया विमोचन मुख्यमंत्री डॉ. यादव और केंद्रीय शिक्षा मंत्री प्रधान ने विद्यार्थी विज्ञान मंथन की वेबसाइट ब्रोशर एवं पुस्तिका का विमोचन किया। कार्यक्रम में वैज्ञानिक नेतृत्व को तैयार करने की दिशा में विकसित बहु-स्तरीय मूल्यांकन प्रणाली पर आधारित एक वीडियो फिल्म भी प्रदर्शित की गयी।सिंहस्थ 2028 के लिए उज्जैन में 725 करोड़ के विकास कार्यों का किया भूमि-पूजन मुख्यमंत्री डॉ. यादव एवं केंद्रीय शिक्षा मंत्री प्रधान ने उज्जैन में मध्यप्रदेश पर्यटन की इकाई सम्राट विक्रमादित्य द हेरिटेज की विस्तार परियोजना का भूमि-पूजन किया। वर्तमान में इस हेरिटेज इकाई में 19 कक्ष रूफटॉप सहित 3 रेस्टोरेंट पंचकर्म केंद्र एवं पुस्तकालय संचालित हैं। धार्मिक पर्यटन में लगातार हो रही वृद्धि और आगामी सिंहस्थ 2028 को ध्यान में रखते हुए 22.52 करोड़ रुपये की लागत से इसका विस्तार किया जाएगा। इस विस्तार के तहत 14 नए कक्ष एक सुव्यवस्थित डॉर्मिटरी परिसर को जोड़ने वाले कनेक्टिंग पाथवे तथा आकर्षक गार्डन एवं लैंडस्केपिंग विकसित किए जाएंगे। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने 701.86 करोड़ रुपये की लागत से बनने वाले 19.80 किमी लंबे उज्जैन सिंहस्थ बायपास (4-लेन) सड़क निर्माण कार्य का भूमि-पूजन भी किया। इस परियोजना से लगभग 5 लाख लोगों एवं सिंहस्थ 2028 में आने वाले श्रद्धालुओं को लाभ होगा। साथ ही 4-लेन मार्ग बनने से आवागमन और यातायात प्रबंधन सुगम होगा। मार्ग के 14 कि.मी. का 4-लेन उन्नयन एवं 5.8 कि.मी. का 4-लेन विस्तारीकरण किया जाना है जो इंदौर-उज्जैन 6-लेन मार्ग के शांति पैलेस चौराहा से प्रारंभ होकर उज्जैन-इंदौर ग्रीनफील्ड मार्ग उज्जैन-जावरा मार्ग तथा उज्जैन-गरोठ मार्ग को जोड़ते हुए उज्जैन-झालावाड़ राष्ट्रीय राजमार्ग क्रमांक 552-जी ग्राम सुरासा के समीप समाप्त होगा। नव-निर्मित उज्जैन साइंस सेंटर का किया लोकार्पण मुख्यमंत्री

क्या आप भी खा रहे हैं स्टिकर वाला फल? सेहत के लिए खतरनाक हो सकता है यह छोटा सा लापरवाही

नई दिल्ली । बाजार से फल खरीदते समय अक्सर हम उनकी चमक और उन पर लगे आकर्षक स्टिकर्स को देखकर उनकी क्वालिटी का अंदाजा लगाते हैं। लेकिन यही छोटे-छोटे स्टिकर्स आपकी सेहत के लिए बड़ा खतरा बन सकते हैं। Food Safety and Standards Authority of India ने हाल ही में इसको लेकर चेतावनी जारी की है और लोगों को सतर्क रहने की सलाह दी है। विशेषज्ञों के अनुसार फलों पर लगे इन स्टिकर्स को चिपकाने के लिए जिस गोंद का इस्तेमाल किया जाता है वह खाने योग्य नहीं होता। जब हम फल खाते समय केवल स्टिकर हटाकर उसे सीधे खा लेते हैं तो कई बार उस गोंद का हिस्सा फल पर ही रह जाता है और अनजाने में हमारे शरीर के अंदर चला जाता है। यह धीरे-धीरे शरीर में केमिकल जमा कर सकता है और लंबे समय में स्वास्थ्य पर नकारात्मक असर डाल सकता है। स्टिकर के नीचे का हिस्सा और भी ज्यादा खतरनाक हो सकता है। इस जगह पर धूल मिट्टी और बैक्टीरिया जमा हो जाते हैं जो सामान्य पानी से धोने पर पूरी तरह साफ नहीं होते। इसके अलावा फलों पर छिड़के गए पेस्टिसाइड भी स्टिकर के नीचे फंस जाते हैं और वही हिस्सा सबसे ज्यादा जहरीला बन सकता है। कई लोग यह मानते हैं कि स्टिकर लगे फल बेहतर क्वालिटी या एक्सपोर्ट ग्रेड के होते हैं लेकिन यह धारणा पूरी तरह सही नहीं है। दरअसल इन स्टिकर्स का उपयोग केवल फल की पहचान और बिलिंग के लिए किया जाता है जिसे PLU कोड कहा जाता है। कई बार बाजार में साधारण फलों पर भी नकली स्टिकर्स लगाकर उन्हें महंगा और प्रीमियम दिखाया जाता है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि खासकर बच्चों के लिए यह ज्यादा खतरनाक हो सकता है क्योंकि उनका पाचन तंत्र संवेदनशील होता है। लगातार ऐसे केमिकल्स के संपर्क में आने से इम्युनिटी पर भी असर पड़ सकता है। इससे बचने के लिए कुछ आसान सावधानियां अपनाना बेहद जरूरी है। सबसे पहले केवल स्टिकर हटाना पर्याप्त नहीं है बल्कि जिस जगह स्टिकर लगा था उसे हल्का सा काटकर निकाल देना चाहिए। इसके अलावा फलों को हमेशा बहते पानी में अच्छी तरह रगड़कर धोना चाहिए ताकि उनकी सतह पर मौजूद गंदगी और केमिकल्स हट सकें। जहां तक संभव हो सेब या नाशपाती जैसे फलों का छिलका उतारकर खाना ज्यादा सुरक्षित माना जाता है। सख्त फलों को साफ करने के लिए मुलायम ब्रश का इस्तेमाल भी किया जा सकता है ताकि उनके कोनों में फंसी गंदगी बाहर निकल सके। हालांकि फलों को साफ करने के लिए साबुन या डिटर्जेंट का उपयोग नहीं करना चाहिए क्योंकि इससे और अधिक नुकसान हो सकता है। यह छोटी-सी सावधानी आपको और आपके परिवार को गंभीर स्वास्थ्य जोखिमों से बचा सकती है। इसलिए अगली बार जब भी फल खरीदें तो केवल उनकी चमक नहीं बल्कि उनकी सुरक्षा का भी ध्यान जरूर रखें।

अक्षय तृतीया 2026 पर ये छोटा सा वास्तु ट्रिक दिला सकता है अपार धन और समृद्धि

नई दिल्ली । हिंदू धर्म में अक्षय तृतीया का दिन अत्यंत शुभ और पवित्र माना जाता है। मान्यता है कि इस दिन किए गए हर शुभ कार्य का फल अक्षय होता है यानी वह कभी समाप्त नहीं होता। यही कारण है कि इस दिन दान, पूजा और निवेश को विशेष महत्व दिया जाता है। वर्ष 2026 में अक्षय तृतीया 19 अप्रैल रविवार को मनाई जाएगी और यह दिन धन, समृद्धि और खुशहाली को आकर्षित करने का एक विशेष अवसर माना जा रहा है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस दिन मां लक्ष्मी और भगवान विष्णु की पूजा करने से जीवन में सुख और समृद्धि आती है। हालांकि आमतौर पर लोग इस दिन सोना या चांदी खरीदते हैं, लेकिन वास्तु शास्त्र के कुछ छोटे-छोटे उपाय भी उतने ही प्रभावशाली माने जाते हैं। पूजा का शुभ मुहूर्त सुबह 10:49 बजे से दोपहर 12:20 बजे तक बताया गया है। इस समय विधिपूर्वक पूजा करने से घर में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है और परिवार में सुख-शांति बनी रहती है। वहीं सोना या चांदी खरीदने के लिए 19 अप्रैल सुबह 10:49 बजे से 20 अप्रैल सुबह 5:51 बजे तक का समय अत्यंत शुभ रहेगा। वास्तु शास्त्र के अनुसार यदि इस दिन सोना खरीदा जाए तो उसे घर की दक्षिण या पश्चिम दिशा में रखना चाहिए। ऐसा करने से धन में वृद्धि होती है और आर्थिक स्थिति मजबूत होती है। इसके अलावा घर की उत्तर दिशा को साफ और व्यवस्थित रखना भी बेहद जरूरी माना गया है, क्योंकि यह दिशा धन के देवता कुबेर से जुड़ी होती है। इस दिशा में तिजोरी या अलमारी रखना आर्थिक स्थिरता लाने में सहायक माना जाता है। मां लक्ष्मी को प्रसन्न करने के लिए इस दिन कुछ सरल उपाय भी किए जा सकते हैं। तिजोरी या अलमारी पर हल्दी या रोली से स्वास्तिक चिन्ह बनाना अत्यंत शुभ माना जाता है। यह उपाय घर में धन के आगमन के द्वार खोलता है और नकारात्मक ऊर्जा को दूर करता है। इसके अलावा इस दिन दान का भी विशेष महत्व है। जरूरतमंदों को अन्न, वस्त्र या धन का दान करने से पुण्य की प्राप्ति होती है और जीवन में कभी कमी नहीं आती। यह दिन हमें यह भी सिखाता है कि केवल धन अर्जित करना ही नहीं बल्कि उसे सही दिशा में उपयोग करना भी उतना ही जरूरी है। अक्षय तृतीया का यह पावन अवसर हर व्यक्ति को अपने जीवन में सकारात्मक बदलाव लाने का मौका देता है। यदि इस दिन सही विधि से पूजा और छोटे-छोटे वास्तु उपाय किए जाएं तो जीवन में स्थायी सुख और समृद्धि प्राप्त की जा सकती है।

वैशाख माह में इन चीजों का दान दिलाएगा अक्षय पुण्य, साल भर बनी रहेगी भगवान विष्णु की कृपा

नई दिल्ली । आज से हिंदू नववर्ष का दूसरा महीना वैशाख प्रारंभ हो गया है, जिसे सनातन धर्म में अत्यंत पवित्र और फलदायी माना जाता है। यह महीना भगवान विष्णु को समर्पित होता है और धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस दौरान किए गए स्नान, दान और पूजन का विशेष महत्व होता है। शास्त्रों में वैशाख को माधव मास भी कहा गया है, क्योंकि इसी अवधि में भगवान विष्णु ने मधु नामक राक्षस का वध किया था और मधुसूदन स्वरूप में उनकी पूजा की जाती है। स्कंद पुराण में उल्लेख मिलता है कि वैशाख माह में किया गया दान अन्य महीनों की तुलना में कई गुना अधिक फल प्रदान करता है। इस दौरान किए गए छोटे-छोटे पुण्य कार्य भी अक्षय फल देने वाले माने जाते हैं। मान्यता है कि इस महीने में भगवान विष्णु की कृपा विशेष रूप से प्राप्त होती है और व्यक्ति के जीवन में सुख-समृद्धि का आगमन होता है वैशाख महीने में जल दान को सबसे श्रेष्ठ माना गया है। गर्मी के इस मौसम में प्यासे लोगों को जल उपलब्ध कराना न केवल मानवता का कार्य है बल्कि धार्मिक दृष्टि से भी अत्यंत पुण्यदायी है। शास्त्रों के अनुसार इस माह में जल से भरा घड़ा दान करने या प्यासों को पानी पिलाने से कई तीर्थों के दर्शन के बराबर फल मिलता है। साथ ही सूर्य देव को जल अर्पित करने से भी विशेष पुण्य प्राप्त होता है।इसके अलावा पंखा दान का भी विशेष महत्व बताया गया है। तेज गर्मी में जरूरतमंद लोगों को शीतलता प्रदान करना पुण्य का कार्य माना गया है। ताड़ के पंखे का दान करने से व्यक्ति पापों से मुक्त होकर भगवान विष्णु का प्रिय बनता है। फलों का दान भी इस महीने में अत्यंत शुभ माना गया है। तरबूज, खरबूजा और बेल जैसे मौसमी फलों का दान करने से घर में सुख-समृद्धि और बरकत बनी रहती है। यह न केवल धार्मिक दृष्टि से लाभकारी है बल्कि स्वास्थ्य के लिए भी उपयोगी है। सत्तू का दान और सेवन भी वैशाख माह में विशेष महत्व रखता है। सत्तू शरीर को ठंडक देता है और गर्मी से बचाव करता है। इसलिए इस महीने में जरूरतमंदों को सत्तू का दान करना पुण्यकारी माना गया है। इसके साथ ही पादुका यानी जूते-चप्पल और चटाई का दान भी अत्यंत फलदायी बताया गया है। गर्मी के मौसम में यह वस्तुएं जरूरतमंदों के लिए राहत प्रदान करती हैं। शास्त्रों के अनुसार इनका दान करने से व्यक्ति के कष्ट दूर होते हैं और उसे उत्तम फल की प्राप्ति होती है। कुल मिलाकर वैशाख माह सेवा, दया और दान का महीना है। इस दौरान किए गए छोटे-छोटे दान भी जीवन में सकारात्मक परिवर्तन ला सकते हैं और भगवान विष्णु की कृपा से व्यक्ति का जीवन सुखमय बन सकता है।

शिवपुरी में दर्दनाक हादसा, हाईटेंशन लाइन से टकराई ट्रैक्टर-ट्रॉली, महिला और मासूम की जिंदा जलकर मौत

शिवपुरी। मध्य प्रदेश के शिवपुरी जिले के कोलारस क्षेत्र में शुक्रवार सुबह एक दर्दनाक हादसे में ट्रैक्टर-ट्रॉली हाईटेंशन बिजली लाइन की चपेट में आ गई। इस हादसे में एक महिला और 7 वर्षीय बच्चे की जिंदा जलकर मौत हो गई, जबकि दो अन्य लोग गंभीर रूप से झुलस गए हैं और उनका इलाज जारी है। भूसा लेने जा रहा था बंजारा परिवार पुलिस के अनुसार, राजस्थान के बारां जिले के खेड़ली गांव का बंजारा परिवार हर साल की तरह इस बार भी कोलारस क्षेत्र में भूसा खरीदने आया था। शुक्रवार सुबह टोल टैक्स के पास बने डेरे से दो ट्रैक्टर-ट्रॉली भूसा लेने के लिए निकले थे। लोहे के पाइप टकराए हाईटेंशन लाइन से आगे चल रही ट्रैक्टर-ट्रॉली देहरदा गांव से होते हुए डोडयाई की ओर बढ़ रही थी। ट्रॉली में ज्यादा भूसा भरने के लिए करीब 10 फीट ऊंचे लोहे के पाइप लगाए गए थे। रास्ते में पेड़ों के बीच झूल रही हाईटेंशन लाइन दिखाई नहीं दी और पाइप तारों से टकरा गए। टकराते ही पूरे वाहन में करंट फैल गया। महिला और बच्चे की मौके पर मौत हादसे के वक्त ट्रैक्टर पर विनोद बंजारा, उनकी पत्नी लीला बाई, केसर बाई और 7 वर्षीय अनिल सवार थे। करंट लगते ही लीला बाई की साड़ी में आग लग गई, जिससे मासूम अनिल भी चपेट में आ गया। दोनों की मौके पर ही दर्दनाक मौत हो गई। दो लोग गंभीर रूप से झुलसे विनोद बंजारा और केसर बाई करंट लगते ही ट्रैक्टर से दूर जा गिरे, लेकिन वे गंभीर रूप से झुलस गए। पीछे आ रहे लोगों ने उन्हें तुरंत अस्पताल पहुंचाया, जहां उनका इलाज जारी है। शुरुआती जांच में सामने आया है कि घटनास्थल पर हाईटेंशन लाइन के तार नीचे झूल रहे थे और पेड़ों के कारण स्पष्ट दिखाई नहीं दे रहे थे। इसी वजह से यह हादसा हुआ। घटना के बाद मृतकों के परिजनों में कोहराम मच गया है। डेरे में मातम पसरा हुआ है और पूरे इलाके में शोक का माहौल है।

गुड फ्राइडे का महत्व और यीशु मसीह के प्रेरणादायक विचार, तनाव से मुक्ति का रास्ता

नई दिल्ली । आज पूरा देश और दुनिया गुड फ्राइडे के पावन अवसर को श्रद्धा और आस्था के साथ मना रहा है। यह दिन यीशु मसीह के बलिदान की याद में मनाया जाता है और मानवता को प्रेम करुणा और क्षमा का संदेश देता है। ईसाई धर्म में इस दिन को केवल शोक के रूप में नहीं बल्कि ईश्वरीय प्रेम और निस्वार्थ सेवा की सर्वोच्च मिसाल के रूप में देखा जाता है। इतिहासकारों और धर्मगुरुओं के अनुसार जब यीशु को सूली पर चढ़ाया गया तब भी उन्होंने मानवता के लिए प्रेम और क्षमा का संदेश दिया। उनके विचार आज भी जीवन के हर पहलू में मार्गदर्शन करते हैं और हमें सिखाते हैं कि कठिन परिस्थितियों में भी सकारात्मकता बनाए रखनी चाहिए। प्रभु यीशु के उपदेशों में सबसे महत्वपूर्ण बात ईश्वर में अटूट आस्था रखना है। उनका मानना था कि सच्चे विश्वास से ही व्यक्ति अपने जीवन की कठिनाइयों को पार कर सकता है। इसके साथ ही उन्होंने हमेशा सत्य के मार्ग पर चलने की प्रेरणा दी क्योंकि सत्य ही जीवन को सही दिशा देता है। यीशु ने प्रेम और करुणा को जीवन का आधार बताया। उनके अनुसार हर व्यक्ति को दूसरों के साथ दया और सहानुभूति से पेश आना चाहिए क्योंकि यही रिश्तों को मजबूत बनाता है। उन्होंने यह भी सिखाया कि क्षमा करना सबसे बड़ा धर्म है। जो व्यक्ति दूसरों को माफ कर देता है वही वास्तव में महान होता है। उन्होंने आंतरिक शक्ति के महत्व को भी समझाया। उनका कहना था कि हर व्यक्ति के भीतर अपार मानसिक और आध्यात्मिक शक्ति होती है जिसे पहचानकर वह अपने जीवन को बेहतर बना सकता है। साथ ही उन्होंने यह भी बताया कि मनुष्य अपने भाग्य का स्वयं निर्माता होता है और आत्मविश्वास के बल पर वह हर लक्ष्य हासिल कर सकता है। जीवन में असफलताओं को लेकर भी यीशु का दृष्टिकोण बेहद सकारात्मक था। उन्होंने सिखाया कि असफलता से घबराने के बजाय उससे सीख लेकर आगे बढ़ना चाहिए क्योंकि यही सफलता की पहली सीढ़ी होती है। सेवा और समर्पण को उन्होंने सच्चा धर्म बताया। चाहे वह मनुष्य हो या प्रकृति हर किसी की सेवा करना जीवन का उद्देश्य होना चाहिए। इसके साथ ही उन्होंने सभी धर्मों के सम्मान का संदेश दिया और कहा कि हर धर्म प्रेम और शांति की राह दिखाता है। अंत में उन्होंने आत्मविश्वास को जीवन का सबसे बड़ा आधार बताया। उनके अनुसार हर व्यक्ति को खुद पर विश्वास रखना चाहिए क्योंकि हर इंसान के भीतर अपार संभावनाएं छिपी होती हैं। गुड फ्राइडे का यह अवसर हमें यही सिखाता है कि हम अपने जीवन में प्रेम शांति और क्षमा को अपनाएं और एक बेहतर इंसान बनने की दिशा में आगे बढ़ें।

तेहरान के पास पुल पर हमला, अमेरिका-ईरान टकराव गहराया, ट्रंप ने दी बड़ी चेतावनी

वाशिंगटन । अमेरिका और ईरान के बीच जारी तनाव अब और गहराता नजर आ रहा है। अमेरिकी सेना ने तेहरान के पास एक महत्वपूर्ण हाईवे पुल पर हमला किया है, जिससे क्षेत्रीय हालात और ज्यादा संवेदनशील हो गए हैं। यह हमला उस पुल पर किया गया जो तेहरान को करज शहर से जोड़ता है और जिसे रणनीतिक रूप से अहम माना जाता है। अमेरिकी अधिकारियों के अनुसार, यह पुल ईरान की मिसाइल और ड्रोन प्रणाली के लिए जरूरी आपूर्ति मार्ग के रूप में इस्तेमाल किया जा रहा था। इसी वजह से इसे निशाना बनाया गया। उनका कहना है कि यह कार्रवाई ईरान की सैन्य क्षमताओं को कमजोर करने की एक व्यापक रणनीति का हिस्सा है, जिसका उद्देश्य हथियारों और सैन्य उपकरणों की आवाजाही को रोकना है। हालांकि ईरान ने इस दावे को खारिज कर दिया है। सरकारी मीडिया के अनुसार, यह पुल अभी पूरी तरह चालू नहीं था और सेना द्वारा इसका इस्तेमाल नहीं किया जा रहा था। ईरानी अधिकारियों ने बताया कि इस हमले में कम से कम आठ लोगों की मौत हुई है और कई अन्य घायल हुए हैं। घायलों में आम नागरिक भी शामिल हैं, जो नवरोज के मौके पर बाहर मौजूद थे। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इस हमले के बाद कड़ी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने सोशल मीडिया पर इस कार्रवाई की सराहना करते हुए कहा कि ईरान का एक बड़ा पुल नष्ट कर दिया गया है और अब इसका उपयोग संभव नहीं होगा। उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि अभी बहुत कुछ होना बाकी है और ईरान को जल्द से जल्द समझौता कर लेना चाहिए, अन्यथा आगे और कड़ी कार्रवाई की जा सकती है। ईरान की ओर से भी तीखी प्रतिक्रिया सामने आई है। संसद अध्यक्ष मोहम्मद गालिबाफ ने कहा कि जब देश की सुरक्षा की बात आती है तो हर नागरिक सैनिक बन जाता है। उन्होंने साफ किया कि ईरान इस तरह के हमलों से डरने वाला नहीं है और पूरी मजबूती के साथ जवाब देगा। इस बीच, तेहरान ने अमेरिका के साथ किसी भी तरह की बातचीत से इनकार कर दिया है। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने कहा कि मौजूदा हालात में वार्ता संभव नहीं है। इससे यह साफ हो गया है कि कूटनीतिक स्तर पर भी हालात सामान्य होने के आसार फिलहाल नजर नहीं आ रहे हैं। स्थिति को और गंभीर बनाते हुए अन्य क्षेत्रों में भी तनाव बढ़ गया है। इजरायल ने दावा किया है कि उसने ईरान से दागी गई मिसाइलों को बीच में ही रोक दिया। वहीं यमन के हूती विद्रोहियों ने भी इजरायल की ओर मिसाइल दागी, जिससे संघर्ष का दायरा और फैलता नजर आ रहा है। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी इस मुद्दे पर मतभेद देखने को मिले हैं। रूस चीन और फ्रांस ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में होर्मुज जलडमरूमध्य को खोलने के लिए बल प्रयोग की अनुमति देने के प्रस्ताव को रोक दिया है।इस पूरे घटनाक्रम ने वैश्विक चिंता को बढ़ा दिया है और विशेषज्ञों का मानना है कि अगर जल्द ही कूटनीतिक समाधान नहीं निकाला गया तो यह संघर्ष और व्यापक रूप ले सकता है।

china nuclear : चीन के नए परमाणु केंद्र पर बढ़ीं आशंकाएं, उपग्रह तस्वीरों में दिखीं नई इमारतें और मशीनें

 china nuclear : बीजिंग। चीन ने अपने परमाणु कार्यक्रम को लेकर गतिविधियां तेज कर दी हैं। रिपोर्ट्स के मुताबिक भारत से करीब 1,400 किलोमीटर दूर सिचुआन प्रांत में बनाए जा रहे एक नए परमाणु केंद्र (new nuclear center) में कई नई इमारतों का निर्माण पूरा होने की जानकारी सामने आई है। ताजा उपग्रह तस्वीरों ने इस परियोजना को लेकर नई आशंकाएं पैदा कर दी हैं। बताया जा रहा है कि चीन ने कुछ गांवों को खाली कराकर इस विशाल परमाणु सुविधा का निर्माण किया है। उपग्रह चित्रों में रेडिएशन मॉनिटर, धमाका-रोधी दरवाजों और यूरेनियम व प्लूटोनियम से जुड़े उपकरणों की संभावित मौजूदगी के संकेत मिले हैं। साइट को ‘साइट-906’ नाम दिया गया है और यहां काम तेज गति से आगे बढ़ता दिख रहा है। रिपोर्ट के अनुसार बड़े ट्रालों में रखी मशीनें भी देखी गई हैं, जिन्हें यूरेनियम या प्लूटोनियम संवर्धन से जुड़ा माना जा रहा है। बताया गया है कि इस स्थल को तीन अन्य परमाणु ठिकानों से जोड़ा गया है, जिससे चीन की परमाणु क्षमताओं के विस्तार की अटकलें तेज हो गई हैं। सीएनएन की रिपोर्ट के मुताबिक 2022 में इस परियोजना के लिए स्थानीय ग्रामीणों की जमीन अधिग्रहित की गई थी। उस समय अधिकारियों ने इसे सरकार की गुप्त योजना बताया था। अब सामने आए उपग्रह चित्र संकेत देते हैं कि गांव खाली कराकर तेज गति से परमाणु ढांचे का विकास किया गया। भौगोलिक रूप से दुर्गम माने जाने वाले सिचुआन क्षेत्र में यह सुविधा विकसित की गई है। यहां यांग्जी नदी और उसकी सहायक नदियों—मिन नदी, तुओ नदी और जियालिंग नदी—के आसपास का इलाका शामिल है, जहां पहुंचना अपेक्षाकृत कठिन माना जाता है।उपग्रह तस्वीरों से यह भी संकेत मिला है कि गांवों की लगभग 600 इमारतें हटाकर नई संरचनाएं बनाई गई हैं और परियोजना का करीब 70 प्रतिशत काम पूरा हो चुका है। हाल के दिनों में कई उपकरण लगाए जाने से इस सुविधा के जल्द संचालन शुरू होने की संभावना जताई जा रही है।

ITI Infrastructure : मध्यप्रदेश में कौशल विकास को बढ़ावा, बैतूल आईटीआई के लिए 14 करोड़ से अधिक की मंजूरी

   ITI Infrastructure : बैतूल । मध्यप्रदेश में तकनीकी शिक्षा को मजबूत करने की दिशा में बैतूल जिले को एक बड़ी सौगात मिली है। राज्य शासन के तकनीकी शिक्षा कौशल विकास एवं रोजगार विभाग ने शासकीय आईटीआई बैतूल और शासकीय एकलव्य महिला आईटीआई कोसमी के लिए कुल 14 करोड़ 11 लाख 5 हजार रुपये के निर्माण कार्यों को स्वीकृति प्रदान की है। इस पहल से जिले में तकनीकी शिक्षा के बुनियादी ढांचे को सुदृढ़ करने में महत्वपूर्ण मदद मिलेगी और छात्रों को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध हो सकेंगी। इस महत्वपूर्ण उपलब्धि के पीछे बैतूल विधायक और भाजपा प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल के प्रयासों को प्रमुख माना जा रहा है। उनके निरंतर प्रयासों के चलते ही यह स्वीकृति मिली है, जिससे स्थानीय स्तर पर शिक्षा और कौशल विकास को नई गति मिलने की उम्मीद है। स्वीकृत राशि के तहत शासकीय आईटीआई बैतूल में 60 सीट क्षमता वाले बालक छात्रावास के निर्माण के लिए 3.41 करोड़ रुपये मंजूर किए गए हैं। इससे दूर-दराज के क्षेत्रों से आने वाले विद्यार्थियों को रहने की सुविधा मिलेगी और वे बेहतर तरीके से अपनी पढ़ाई पर ध्यान केंद्रित कर सकेंगे। वहीं कोसमी स्थित शासकीय एकलव्य महिला आईटीआई में 60 सीट क्षमता वाले बालिका छात्रावास के निर्माण के लिए 3.42 करोड़ रुपये स्वीकृत किए गए हैं। इसके अलावा यहां 6 ट्रेड शेड भवनों के निर्माण के लिए 7.26 करोड़ रुपये की राशि मंजूर की गई है। इन ट्रेड शेड्स के बनने से विभिन्न तकनीकी ट्रेड्स में प्रशिक्षण की बेहतर सुविधाएं उपलब्ध होंगी और छात्राओं को आधुनिक संसाधनों के साथ सीखने का अवसर मिलेगा। इस योजना का उद्देश्य केवल भवन निर्माण तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके माध्यम से प्रदेश में कौशल आधारित शिक्षा को बढ़ावा देना और युवाओं को रोजगार के बेहतर अवसर प्रदान करना भी है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह के निवेश से स्थानीय युवाओं की रोजगार क्षमता में वृद्धि होगी और वे तकनीकी क्षेत्रों में अधिक दक्ष बन सकेंगे। स्थानीय स्तर पर भी इस घोषणा का स्वागत किया जा रहा है। लोगों का मानना है कि इससे बैतूल जिले में शिक्षा का स्तर बेहतर होगा और विशेष रूप से छात्राओं को सुरक्षित और सुविधाजनक वातावरण में तकनीकी शिक्षा प्राप्त करने का अवसर मिलेगा। इस प्रकार बैतूल आईटीआई को मिली यह 14.11 करोड़ रुपये की सौगात न केवल शिक्षा के क्षेत्र में एक बड़ा कदम है, बल्कि यह जिले के समग्र विकास की दिशा में भी एक महत्वपूर्ण पहल साबित होगी। आने वाले समय में इसके सकारात्मक परिणाम देखने को मिल सकते हैं।