Attorney General Controversy : ट्रंप ने पैम बॉन्डी से छीना अटॉर्नी जनरल का पद… क्या है पूरा मामला?

Attorney General Controversy : वॉशिंगटन। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अटॉर्नी जनरल पैम बॉन्डी की सराहना करते हुए उन्हें एक महान देशभक्त और वफादार सहयोगी बताया। ट्रंप ने बताया कि पैम बॉन्डी निजी क्षेत्र में नई जिम्मेदारी संभालने जा रही हैं। ट्रंप ने कहा कि अटॉर्नी जनरल के रूप में पैम ने देशभर में अपराध पर कड़ा प्रहार किया। वहीं, डिप्टी अटॉर्नी जनरल टॉड ब्लैंच को कार्यवाहक अटॉर्नी जनरल नियुक्त किया गया है। टॉड ब्लैंच संभालेंगे कार्यवाहक अटॉर्नी जनरल का जिम्मा राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘ट्रुथ सोशल’ पर पोस्ट कर कहा, ‘पैम बॉन्डी एक महान अमेरिकी देशभक्त और एक वफादार दोस्त हैं, जिन्होंने पिछले एक साल से मेरे अटॉर्नी जनरल के तौर पर पूरी निष्ठा से सेवा की है। पैम ने पूरे देश में अपराधों पर नकेल कसने का जबरदस्त काम किया है, जिसके चलते हत्याओं की दर 1900 के बाद से अब तक के सबसे निचले स्तर पर पहुंच गई है। हम पैम से बहुत प्यार करते हैं, और वह अब निजी क्षेत्र में एक बेहद जरूरी और अहम नई जिम्मेदारी संभालने जा रही हैं, जिसकी घोषणा जल्द ही की जाएगी। वहीं, हमारे डिप्टी अटॉर्नी जनरल जो कि एक बेहद प्रतिभाशाली और सम्मानित कानूनी विशेषज्ञ हैं, टॉड ब्लैंच, अब कार्यवाहक अटॉर्नी जनरल के तौर पर कार्यभार संभालेंगे।’ विवादों भरा पैम बॉन्डी का कार्यकाल पैम बॉन्डी के कार्यकाल में बड़ी संख्या में सरकारी कर्मचारियों को नौकरी से निकाला गया और कई अनुभवी अधिकारियों ने खुद इस्तीफा दे दिया। इससे विभाग के अंदर अस्थिरता और तनाव का माहौल बन गया। सबसे बड़ा विवाद जेफरी एपस्टीन केस से जुड़ा रहा। जेफरी एपस्टीन के ट्रैफिकिंग मामले की फाइलों को लेकर बॉन्डी पर भारी दबाव था। उन्होंने पहले दावा किया था कि उनके पास एपस्टीन की क्लाइंट लिस्ट मौजूद है, लेकिन बाद में विभाग ने माना कि ऐसा कोई दस्तावेज है ही नहीं। इस मामले को लेकर उन्हें अपने ही समर्थकों की आलोचना झेलनी पड़ी। पैम बॉन्डी पर लगे कई आरोप बॉन्डी पर यह भी आरोप लगा कि उन्होंने ट्रंप के राजनीतिक विरोधियों के खिलाफ जांच शुरू कराई। इनमें जेरोम पॉवेल, लेटिशिया जेम्स, जेम्स कोमी और जॉन ब्रेनन जैसे नाम शामिल थे। हालांकि इन मामलों में से कई को अदालतों ने खारिज कर दिया, जिससे उनकी कार्यशैली पर सवाल और बढ़ गए। डेमोक्रेट नेताओं ने बॉन्डी पर आरोप लगाया कि उन्होंने न्याय विभाग को बदले का हथियार बना दिया। वहीं खुद बॉन्डी का कहना था कि वह विभाग की विश्वसनीयता बहाल करने के लिए काम कर रही थीं और पिछली सरकार में हुई कथित गलतियों को सुधार रही थीं।ट्रंप के साथ उनका रिश्ता बेहद करीबी माना जाता था। वह खुले तौर पर ट्रंप का समर्थन करती थीं और कई बार सार्वजनिक मंचों पर उनकी तारीफ भी करती थीं। लेकिन समय के साथ ट्रंप खुद भी उनके काम से नाखुश दिखे, खासकर तब जब वह उनके राजनीतिक विरोधियों पर कार्रवाई नहीं कर पाईं। बॉन्डी के हटने के साथ ही ट्रंप के शासन में न्याय विभाग में लगातार हो रहे बदलाव की एक और कड़ी जुड़ गई है। उनके दोनों कार्यकाल में कई अटॉर्नी जनरल या तो हटाए गए या इस्तीफा देने पर मजबूर हुए, जिससे यह साफ होता है कि इस पद पर स्थिरता बनाए रखना ट्रंप प्रशासन के लिए चुनौती बना हुआ है। राष्ट्रीय धोखाधड़ी प्रवर्तन के लिए सहायक अटॉर्नी जनरल का शपथ बता दें एक दिन पहले बुधवार को उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने कोलिन मैकडॉनल्ड को राष्ट्रीय धोखाधड़ी प्रवर्तन के लिए सहायक अटॉर्नी जनरल के तौर पर शपथ दिलाई। उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने राष्ट्रीय धोखाधड़ी प्रवर्तन के लिए सहायक अटॉर्नी जनरल के तौर पर शपथ लेने से पहले कोलिन मैकडॉनल्ड का परिचय कराते हुए कहा, ‘कोलिन जिन कामों को करेंगे, उनमें से एक यह पक्का करना है कि कोई भी धोखाधड़ी इतनी छोटी या इतनी बड़ी न हो कि उसे नजरअंदाज किया जा सके।’ राष्ट्रीय धोखाधड़ी प्रवर्तन के लिए सहायक अटॉर्नी जनरल की शपथ लेने के बाद कोलिन मैकडॉनल्ड ने कहा, ‘मैं दिन-रात बिना थके काम करूंगा, ताकि यह पक्का कर सकूं कि अगर कोई आपके टैक्स के पैसे चुराने की हिम्मत करता है तो उस गलत फैसले के बाद उसे एक संघीय अभियोजक का सामना करना पड़े।’
Betul Crime News : नकाबपोश हमलावर का 24 घंटे में खुलासा, डिजिटल ट्रांजैक्शन ने खोल दिया पूरा राज

Betul Crime News : बैतूल । मध्यप्रदेश के बैतूल जिले के चोपना थाना क्षेत्र में हुए सनसनीखेज हमले के मामले में पुलिस ने तेजी से कार्रवाई करते हुए महज 24 घंटे के भीतर आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। शुरुआत में यह मामला एक अज्ञात नकाबपोश हमलावर द्वारा किए गए हमले का था, जिससे क्षेत्र में भय और दहशत का माहौल बन गया था। हालांकि पुलिस ने तकनीकी साक्ष्यों और गहन पूछताछ के आधार पर इस पूरे मामले का खुलासा कर दिया। पुलिस अधीक्षक कार्यालय से जारी जानकारी के अनुसार एक अप्रैल की दोपहर करीब तीन बजे ग्राम शिवसागर पुलिया के पास विप्लव विश्वास और उनकी पत्नी सुशांति विश्वास पर एक नकाबपोश व्यक्ति ने अचानक धारदार हथियार दाव से हमला कर दिया। इस हमले में विप्लव विश्वास गंभीर रूप से घायल हो गए और उनका बायां हाथ कलाई से लगभग अलग हो गया। घटना के बाद उन्हें तुरंत अस्पताल पहुंचाया गया, जहां उनका इलाज जारी है। घटना के बाद पुलिस ने मामले को गंभीरता से लेते हुए जांच शुरू की। शुरुआत में आरोपी की पहचान करना चुनौतीपूर्ण था क्योंकि वह नकाब पहनकर आया था और मौके से फरार हो गया था। लेकिन पुलिस ने हार नहीं मानी और तकनीकी जांच के साथ-साथ स्थानीय स्तर पर पूछताछ शुरू की। जांच के दौरान डिजिटल ट्रांजैक्शन पुलिस के लिए सबसे बड़ा सुराग बनकर सामने आया। पुलिस ने संदिग्ध गतिविधियों और लेनदेन के आधार पर आरोपी तक पहुंच बनाई। इसके बाद संदिग्ध से सख्ती से पूछताछ की गई, जिसमें उसने अपना जुर्म कबूल कर लिया। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि आधुनिक तकनीक और डिजिटल साक्ष्यों का उपयोग अपराधों को सुलझाने में बेहद महत्वपूर्ण साबित हो रहा है। इस मामले में भी डिजिटल ट्रांजैक्शन ने आरोपी की पहचान उजागर करने में अहम भूमिका निभाई। आरोपी की गिरफ्तारी के बाद पुलिस ने घटना से जुड़े अन्य पहलुओं की भी जांच शुरू कर दी है, ताकि यह पता लगाया जा सके कि इस हमले के पीछे की असली वजह क्या थी और क्या इसमें कोई अन्य व्यक्ति भी शामिल था। इस त्वरित कार्रवाई के लिए पुलिस की सराहना की जा रही है। स्थानीय लोगों ने राहत की सांस ली है और पुलिस प्रशासन के प्रति विश्वास भी मजबूत हुआ है। यह घटना यह भी दर्शाती है कि अपराधी चाहे कितनी भी चालाकी से अपराध को अंजाम दें, लेकिन कानून के हाथ लंबे होते हैं और वे अंततः पकड़ में आ ही जाते हैं।
Health in USA : अमेरिका में हेल्थकेयर घोटाले का खुलासा, 50 मिलियन डॉलर की धोखाधड़ी; 8 गिरफ्तार

Health in USA : जांच एजेंसियों के मुताबिक आरोपियों में नर्स, डॉक्टर, साइकोलॉजिस्ट और कायरोप्रैक्टर शामिल हैं। इन लोगों ने कथित तौर पर ऐसे मरीजों को होस्पिस केयर में दाखिल दिखाकर बिल बनाया, जिन्हें वास्तविक रूप से कोई गंभीर या अंतिम चरण की बीमारी नहीं थी। इससे स्वास्थ्य प्रणाली और टैक्सदाताओं को भारी नुकसान पहुंचा। Betul Crime News : नकाबपोश हमलावर का 24 घंटे में खुलासा, डिजिटल ट्रांजैक्शन ने खोल दिया पूरा राज यह कार्रवाई जेडी वेंस के नेतृत्व वाले टास्क फोर्स टू एलीमिनेट फ्रॉड के सहयोग से की गई। एफबीआई और अभियोजन पक्ष के अनुसार गिरफ्तार आरोपियों में तीन नर्सें, एक डॉक्टर, एक साइकोलॉजिस्ट और एक कायरोप्रैक्टर शामिल हैं।जांच में सामने आया कि आमतौर पर होस्पिस में जीवन के अंतिम चरण में मरीजों को रखा जाता है, लेकिन इन केंद्रों में मरीजों की जीवित रहने की दर राष्ट्रीय औसत 17 प्रतिशत से लगभग पांच गुना अधिक पाई गई। इससे संदेह हुआ कि मरीजों को गलत तरीके से दाखिल कर फर्जी बिलिंग की जा रही थी। अभिषेक शर्मा IPL कोड ऑफ कंडक्ट उल्लंघन के कारण फंसे, जुर्माना और डिमेरिट पॉइंट से मुसीबत में अधिकारियों का कहना है कि मामले की जांच जारी है और धोखाधड़ी के नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों की पहचान भी की जा रही है।
Min Aung Hlaing : म्यांमार में नया सत्ता समीकरण: सेना प्रमुख मिन आंग ह्लाइंग बने राष्ट्रपति, सैन्य पकड़ और मजबूत

Min Aung Hlaing : म्यांमार। म्यांमार की राजनीति में बड़ा बदलाव सामने आया है, जहां सेना के शीर्ष नेता Min Aung Hlaing ने राष्ट्रपति पद संभाल लिया है। संसद में हुए मतदान में उन्हें 584 में से 429 वोट मिले, जिससे उनकी सत्ता पर पकड़ अब औपचारिक रूप से और मजबूत हो गई है। यह घटनाक्रम 2021 में हुए सैन्य तख्तापलट के पांच साल बाद सामने आया है, जब मिन आंग ह्लाइंग ने निर्वाचित सरकार को हटाकर सत्ता अपने हाथ में ले ली थी। उस दौरान Aung San Suu Kyi की सरकार को बर्खास्त कर उन्हें नजरबंद कर दिया गया था, जिसके बाद देशभर में विरोध प्रदर्शन और सशस्त्र संघर्ष शुरू हो गया। हालिया चुनावों में सेना समर्थित यूनियन सॉलिडेरिटी एंड डेवलपमेंट पार्टी ने 80 प्रतिशत से अधिक सीटों पर जीत दर्ज की। इसके अलावा, संसद की लगभग एक-चौथाई सीटों पर सेना के सदस्य बिना चुनाव के ही काबिज हैं, जिससे सैन्य प्रभाव और अधिक स्पष्ट हो जाता है। विश्लेषकों के अनुसार, मिन आंग ह्लाइंग का राष्ट्रपति बनना एक रणनीतिक कदम है। इसका उद्देश्य सैन्य शासन को नागरिक सरकार के रूप में प्रस्तुत कर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर वैधता हासिल करना और सत्ता पर पकड़ बनाए रखना है। संविधान के प्रावधानों के चलते उन्होंने पहले ही सेना प्रमुख का पद छोड़ दिया था। इस पद की जिम्मेदारी उनके करीबी सहयोगी और पूर्व खुफिया प्रमुख को सौंप दी गई है, जिन्हें सेना में उनका विश्वस्त माना जाता है। म्यांमार में जारी राजनीतिक अस्थिरता और संघर्ष के बीच यह बदलाव देश के भविष्य के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है, जिस पर अंतरराष्ट्रीय समुदाय की भी नजरें टिकी हुई हैं।
Village Clean-Up : तालाबों की सफाई से जल बचाने की पहल, रौन की पंचायतों में दिखा जनसहभागिता का जज्बा

HIGHLIGHTS : शंकरपुरा और चांदोख में तालाबों की सफाई अभियान तालाबों से गाद हटाकर बढ़ाई जल संग्रहण क्षमता ग्रामीणों ने श्रमदान कर दिया सहयोग खेत तालाब और प्याऊ निर्माण पर जोर जल संरक्षण को जनआंदोलन बनाने की पहल Village Clean-Up : भिंड। जिले के रौन क्षेत्र की ग्राम पंचायत शंकरपुरा और चांदोख में गंगा संवर्धन अभियान के तहत विशेष सफाई अभियान चलाया गया। इस अभियान में तालाबों की सफाई कर उनमें जमी गाद को हटाया गया, जिससे जल संग्रहण क्षमता बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाया गया। मध्यप्रदेश शासन और पीएम मोदी के प्रयास से स्व. गुरकीरत सिंह मनोचा का पार्थिव शरीर भारत लाया गया, मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने पुष्प अर्पित किए ग्रामीणों ने किया श्रमदान, बढ़ी जागरूकता अभियान में जनपद पंचायत के अधिकारी-कर्मचारियों के साथ स्थानीय ग्रामीणों ने भी बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया। श्रमदान के माध्यम से तालाबों को स्वच्छ बनाने का कार्य किया गया। साथ ही ग्रामीणों को जल संरक्षण के महत्व और उसके सतत उपयोग के बारे में जागरूक किया गया। प्यार समय की बर्बादी एकता कपूर के बयान ने छेड़ी नई बहस खेत तालाब और प्याऊ निर्माण पर जोर अभियान के दौरान खेत तालाब निर्माण और प्याऊ निर्माण जैसे कार्यों पर विशेष फोकस किया गया। इसका उद्देश्य गर्मी के मौसम में जल की उपलब्धता सुनिश्चित करना और पारंपरिक जल स्रोतों को पुनर्जीवित करना है। MP Board Result: 15 अप्रैल से पहले आएंगे 10वीं-12वीं के नतीजे, 16 लाख छात्रों ने दी थी परीक्षा जनसहभागिता से बन रहा जनआंदोलन अधिकारियों के अनुसार, ‘जनसहभागिता से जल संरक्षण’ की भावना के साथ इस अभियान को जनआंदोलन का रूप दिया जा रहा है। समाज के सभी वर्गों को जोड़कर जल संकट से निपटने के लिए स्थायी समाधान विकसित किए जा रहे हैं। भारत ने रक्षा निर्यात में बनाया नया रिकॉर्ड, 80 से अधिक देश खरीद रहे हथियार भविष्य में जल स्तर सुधार की उम्मीद स्थानीय ग्रामीणों के सहयोग और उत्साह से यह अभियान तेजी से आगे बढ़ रहा है। उम्मीद है कि आने वाले समय में इस पहल से क्षेत्र के जल स्तर में सुधार देखने को मिलेगा।
defamation case on Kartikeya Chauhan : शिवराज सिंह के बेटे के खिलाफ हाईकोर्ट पहुंचे राहुल गांधी, अब कोर्ट में आमने-सामने होंगे राहुल-कार्तिकेय

defamation case on Kartikeya Chauhan : जबलपुर । मध्य प्रदेश हाईकोर्ट में मानहानि मामले को लेकर कांग्रेस नेता राहुल गांधी और शिवराज सिंह चौहान के बेटे कार्तिकेय चौहान के बीच कानूनी टकराव तेज हो गया है। राहुल गांधी ने भोपाल स्थित एमपी-एमएलए कोर्ट द्वारा जारी समन को हाईकोर्ट में चुनौती दी है। इस मामले में जस्टिस प्रमोद कुमार अग्रवाल की एकल पीठ अगले सप्ताह सुनवाई करेगी। 2018 के बयान से शुरू हुआ विवाद पूरा मामला 29 अक्टूबर 2018 का है, जब झाबुआ में एक चुनावी सभा के दौरान राहुल गांधी ने पनामा पेपर्स लीक का जिक्र करते हुए कार्तिकेय चौहान का नाम लिया था। हालांकि बाद में उन्होंने इसे भ्रम बताया, लेकिन यह बयान विवाद का कारण बन गया। कार्तिकेय ने दर्ज कराया मानहानि केस इस बयान को अपनी छवि खराब करने की साजिश बताते हुए कार्तिकेय चौहान ने भोपाल की एमपी-एमएलए कोर्ट में आपराधिक मानहानि का मामला दर्ज कराया। उन्होंने आरोप लगाया कि राहुल गांधी ने जानबूझकर उनके और उनके परिवार के खिलाफ गलत बयान दिया। इस मामले में भारतीय दंड संहिता की धारा 499 और 500 के तहत केस दर्ज किया गया। समन के खिलाफ हाईकोर्ट पहुंचे राहुल भोपाल एमपी-एमएलए कोर्ट की विशेष मजिस्ट्रेट द्वारा जारी समन को चुनौती देते हुए राहुल गांधी ने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। प्रारंभिक सुनवाई के बाद कोर्ट ने मामले को एक सप्ताह के लिए स्थगित कर दिया है। अब इस केस में हाईकोर्ट की अगली सुनवाई पर सबकी नजरें टिकी हैं, जहां दोनों पक्ष आमने-सामने होंगे।
Gurkeerat Singh Manocha : मध्यप्रदेश शासन और पीएम मोदी के प्रयास से स्व. गुरकीरत सिंह मनोचा का पार्थिव शरीर भारत लाया गया, मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने पुष्प अर्पित किए

Gurkeerat Singh Manocha : भोपाल । मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने उज्जैन प्रवास के दौरान स्व. श्री गुरकीरत सिंह मनोचा के पार्थिव शरीर पर पुष्प अर्पित कर उन्हें श्रद्धांजलि दी। गुरकीरत सिंह मनोचा की कनाडा में हुए दुखद दुर्घटना में मृत्यु ने पूरे प्रदेश और उनके परिवार को शोक में डुबो दिया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि शासन प्रदेशवासियों के सुख-दुख में हमेशा उनके साथ है और इस कठिन समय में मनोचा परिवार के साथ संवेदनाएँ साझा करता है। प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी की सरकार और मध्यप्रदेश शासन के संयुक्त प्रयासों से स्व. श्री गुरकीरत सिंह मनोचा का पार्थिव शरीर कनाडा से भारत लाया गया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने इस दौरान बाबा श्री महाकाल से प्रार्थना की कि परिवार को यह दुख सहने की शक्ति प्रदान करें। उन्होंने कहा कि यह समय परिवार और समाज के लिए बहुत कठिन है, लेकिन राज्य सरकार हर संभव मदद प्रदान करने के लिए तत्पर है। श्रद्धांजलि अर्पित करने के दौरान मुख्यमंत्री डॉ. यादव के साथ प्रभारी मंत्री श्री गौतम टेटवाल, सांसद श्री अनिल फिरोजिया और विधायक श्री अनिल जैन कालूहेड़ा भी उपस्थित थे। सभी ने स्व. श्री मनोचा को पुष्प अर्पित कर उन्हें भावपूर्ण श्रद्धांजलि दी और उनके परिवार के प्रति अपनी संवेदनाएँ व्यक्त कीं। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश और केंद्र सरकार के प्रयासों से इस दुखद समय में परिवार को उचित सहायता दी जाएगी और उनके अंतिम संस्कार की सभी व्यवस्थाएँ सुव्यवस्थित रूप से की जाएँगी। उन्होंने आगे कहा कि इस प्रकार के दुखद हादसे समाज और सरकार को यह याद दिलाते हैं कि जीवन अनिश्चित है और हमें आपसी सहयोग और संवेदनशीलता के साथ ऐसे समय में खड़ा होना चाहिए। स्व. श्री गुरकीरत सिंह मनोचा के निधन ने उनके परिवार, मित्र और प्रदेशवासियों को गहरे शोक में डाल दिया है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने उनके योगदान और यादों को सम्मानित करते हुए कहा कि उनके योगदान को हमेशा याद किया जाएगा और उनके परिवार के साथ शासन हर संभव मदद करेगा। इस श्रद्धांजलि कार्यक्रम में अधिकारियों और स्थानीय लोगों ने भी हिस्सा लिया और भावपूर्ण तरीके से अपने श्रद्धा और संवेदनाएँ व्यक्त कीं। यह कार्यक्रम उज्जैन में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक पल के रूप में याद रखा जाएगा।
Pakistan fuel crisis : पाकिस्तान में तेल संकट, पेट्रोल 458 और डीजल 520 रुपये प्रति लीटर, अमेरिका-ईरान युद्ध की मार

Pakistan fuel crisis : नई दिल्ली । पश्चिम एशिया में अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते युद्ध के प्रभाव से पाकिस्तान के आम उपभोक्ताओं की मुश्किलें बढ़ गई हैं। देश में पेट्रोल और डीजल की कीमतें रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गई हैं। पाकिस्तान के पेट्रोलियम मंत्री अली परवेज मलिक ने हाल ही में प्रेस कॉन्फ्रेंस में बताया कि अमेरिका और ईरान युद्ध के बाद अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें नियंत्रण से बाहर हो गई हैं। इसके कारण पाकिस्तान में पेट्रोल और डीजल की दरों में बेतहाशा इजाफा करना पड़ा। पाकिस्तान सरकार ने गुरुवार को डीजल की कीमत बढ़ाकर 520.35 रुपये प्रति लीटर और पेट्रोल की कीमत 458.40 रुपये प्रति लीटर कर दी। डीजल की कीमत में 54.9 प्रतिशत और पेट्रोल की दर में 42.7 प्रतिशत का इजाफा हुआ। पिछले महीने भी पाकिस्तान ने तेल उत्पादों की कीमतों में करीब 20 प्रतिशत की वृद्धि की थी। मंत्री ने साफ किया कि यह कदम अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों के कारण उठाना पड़ा। उद्योग और मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से एक जहाज कराची पोर्ट पर बुधवार को पहुंचा। इसके अलावा एक दूसरा जहाज भी दूसरे मार्ग से पोर्ट पर आया। ट्रस्ट के प्रवक्ता शारिक फारूकी ने कहा कि इस महीने खाड़ी देशों से जरूरी तेल की आपूर्ति के लिए और भी पाकिस्तानी जहाज आने की उम्मीद है। इससे पाकिस्तान अपने ऊर्जा संकट को कम करने की कोशिश कर रहा है। पिछले दिनों पाकिस्तान के विदेश मंत्री ने यह भी कहा था कि ईरान होर्मुज से 20 अतिरिक्त पाकिस्तानी जहाजों को गुजरने की अनुमति देने पर सहमत हो गया है। इसका उद्देश्य तेल की निर्बाध आपूर्ति सुनिश्चित करना और बढ़ती कीमतों पर काबू पाना है। पश्चिम एशिया संघर्ष के समाधान के लिए पाकिस्तान और चीन ने मिलकर पांच सूत्रीय प्रस्ताव रखा है। इन प्रस्तावों में शत्रुता तुरंत समाप्त करना शांति वार्ता शुरू करना गैर-सैन्य लक्ष्यों की सुरक्षा सुनिश्चित करना नौवहन की सुरक्षा और संयुक्त राष्ट्र चार्टर के पालन जैसे कदम शामिल हैं। युद्ध की वजह से अमेरिका में भी औसत उपभोक्ता के लिए गैस की कीमतों में 35 प्रतिशत से अधिक की बढ़ोतरी हुई है। होर्मुज के बंद होने से वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति प्रभावित हो रही है क्योंकि इस मार्ग से दुनिया के तेल का लगभग 20 प्रतिशत हिस्सा गुजरता है। विशेषज्ञों के अनुसार पाकिस्तान में तेल संकट जल्द ही खत्म होने की संभावना नहीं है और कीमतें ऊपर बनी रहेंगी। इस पूरी स्थिति ने यह साफ कर दिया है कि पाकिस्तान का मध्यस्थ बनने का प्रयास अब उसके आम नागरिकों पर भारी पड़ रहा है। बढ़ती तेल कीमतों के चलते देश में महंगाई और आर्थिक दबाव और अधिक बढ़ गया है।
पीएम मोदी को ईरान पर हमले की पहले से कोई जानकारी नहीं थी, इजरायल दौरे के दौरान सरकार ने दी सफाई

नई दिल्ली । प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के फरवरी में हुए इजरायल दौरे को लेकर संसद में बुधवार को अहम सवाल उठाए गए। सांसद अब्दुल वहाब ने विदेश मंत्रालय से पूछा कि क्या प्रधानमंत्री मोदी को उनके इजरायल दौरे के तुरंत बाद ईरान पर होने वाले अमेरिकी और इजरायली हमले की पहले से जानकारी थी। सवाल में यह भी पूछा गया कि भारत और इजरायल के बीच उस दौरे के दौरान हुए समझौते, समझौता ज्ञापन और अन्य संधियों की जानकारी क्या थी। सरकार ने इस सवाल के जवाब में स्पष्ट किया कि प्रधानमंत्री मोदी की 25-26 फरवरी की इजरायल यात्रा के दौरान ईरान पर हुए सैन्य हमले की कोई चर्चा नहीं हुई। विदेश राज्य मंत्री कीर्ति वर्धन सिंह ने लिखित जवाब में कहा, प्रधानमंत्री मोदी ने इजरायल के प्रधानमंत्री के निमंत्रण पर यह राजकीय दौरा किया। इस दौरान दोनों प्रधानमंत्रियों ने भारत-इजरायल साझेदारी के सभी पहलुओं और क्षेत्रीय तथा वैश्विक मुद्दों पर व्यापक चर्चा की। उन्होंने आगे बताया कि इस दौरे के दौरान कृत्रिम बुद्धिमत्ता, साइबर सुरक्षा, कृषि, मत्स्य पालन, जलीय कृषि, शिक्षा, वित्तीय सेवाएं, डिजिटल भुगतान और श्रमिकों की आवाजाही सहित कई क्षेत्रों में समझौते, समझौता ज्ञापन और आशय पत्रों पर हस्ताक्षर किए गए। लेकिन ईरान पर हुए सैन्य हमले से संबंधित कोई चर्चा इस दौरान नहीं हुई। प्रधानमंत्री मोदी के दौरे के एक दिन बाद यानी 28 फरवरी को इजरायल और अमेरिका ने ईरान पर बड़ा हमला किया, जिसके बाद पश्चिम एशिया में संघर्ष तेज हो गया। हमले में ईरान के शीर्ष नेतृत्व के कई नेताओं को निशाना बनाया गया। इसके जवाब में ईरान ने इजरायल और खाड़ी देशों पर ड्रोन और मिसाइल हमले किए। इजरायल ने भी अटकलों को खारिज किया है। इजरायली विदेश मंत्री गिदोन सार ने बताया कि प्रधानमंत्री मोदी को उनकी यात्रा के दौरान इन हमलों के बारे में कोई जानकारी नहीं दी गई थी क्योंकि यह निर्णय यात्रा के बाद लिया गया। उन्होंने कहा, प्रधानमंत्री मोदी और भारत के साथ हमारे संबंध बहुत अच्छे हैं और हमने इस यात्रा के दौरान 2026 के लिए व्यापक एजेंडा तय किया। अमेरिका और ईरान के बीच हुई वार्ता के विफल होने के बाद ही यह कार्रवाई की गई। इस तरह यह साफ हो गया कि प्रधानमंत्री मोदी के इजरायल दौरे और ईरान पर हमले के बीच कोई पूर्व जानकारी या संबंध नहीं था। भारत ने अपनी विदेश नीति में पारदर्शिता बनाए रखी और दोनों देशों के बीच संबंधों को और मजबूत करने पर ध्यान केंद्रित किया।
Mahakal The Master of Time : उज्जैन में ‘महाकाल: द मास्टर ऑफ टाइम’ पर वैश्विक मंथन शुरू, विज्ञान और सनातन का अनोखा संगम

Mahakal The Master of Time : भोपाल। मध्य प्रदेश के आध्यात्मिक शहर उज्जैन में ‘महाकाल: द मास्टर ऑफ टाइम’ विषय पर आधारित तीन दिवसीय अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन और प्रदर्शनी का शुक्रवार को भव्य शुभारंभ हुआ। इस आयोजन ने उज्जैन को एक बार फिर वैश्विक बौद्धिक विमर्श के केंद्र में स्थापित कर दिया है, जहां ‘समय’ की अवधारणा पर विज्ञान और सनातन दृष्टिकोण के समन्वय पर चर्चा हो रही है। कार्यक्रम का भव्य शुभारंभ वसंत विहार स्थित अत्याधुनिक तारामंडल परिसर में आयोजित इस कार्यक्रम का शुभारंभ मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव, केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान, केंद्रीय मंत्री गजेन्द्र सिंह शेखावत और वरिष्ठ विचारक सुरेश सोनी ने दीप प्रज्ज्वलित कर किया। यह आयोजन शासन, विज्ञान और संस्कृति के संगम का प्रतीक बनकर उभरा। इस अवसर पर नीति आयोग के सदस्य डॉ. वी.के. सारस्वत, सांसद अनिल फिरोजिया सहित देश-विदेश के वैज्ञानिक, खगोलविद और शिक्षाविद भी उपस्थित रहे। साइंस सेंटर से उज्जैन को नई पहचान करीब 15.20 करोड़ रुपये की लागत से बने इस आधुनिक साइंस सेंटर ने उज्जैन को विज्ञान और अनुसंधान के क्षेत्र में नई पहचान दी है। केंद्र और राज्य सरकार के सहयोग से तैयार यह केंद्र विद्यार्थियों और शोधार्थियों के लिए अत्याधुनिक सुविधाएं उपलब्ध कराएगा। विज्ञान और सनातन के बीच सेतु सम्मेलन का मुख्य उद्देश्य भारतीय ज्ञान परंपरा और आधुनिक अंतरिक्ष विज्ञान के बीच सेतु निर्माण करना है। ‘महाकाल’ यानी समय की अवधारणा को वैज्ञानिक नजरिए से समझने का प्रयास किया जा रहा है। इसरो के वैज्ञानिकों के साथ जापान सहित कई देशों के विशेषज्ञ इसमें भाग ले रहे हैं। युवाओं के लिए खास आकर्षण इस आयोजन में युवाओं और विद्यार्थियों के लिए कई गतिविधियां आयोजित की जा रही हैं। सैटेलाइट मेकिंग वर्कशॉप, यूएवी और आरसी प्लेन ट्रेनिंग, टेलीस्कोप से आकाश अवलोकन और सनस्पॉट स्टडी जैसी गतिविधियां उन्हें विज्ञान से जोड़ रही हैं। डोंगला में डीप स्काई ऑब्जर्वेशन भी विशेष आकर्षण का केंद्र है। विकास परियोजनाओं की भी शुरुआत सम्मेलन के साथ ही विकास कार्यों का भी शुभारंभ हुआ। सिंहस्थ को ध्यान में रखते हुए 701 करोड़ रुपये की लागत से 19 किलोमीटर लंबे फोर-लेन बायपास का भूमिपूजन किया गया। इसके अलावा 22 करोड़ रुपये की लागत से विक्रमादित्य हेरिटेज होटल के विस्तार की घोषणा की गई। आस्था और विज्ञान का अनोखा संगम वक्ताओं ने कहा कि उज्जैन में महाकाल की नगरी में ‘समय’ पर हो रहा यह मंथन आस्था और आधुनिक विज्ञान के संगम का प्रतीक है। यह आयोजन न केवल नई सोच को जन्म देगा, बल्कि युवाओं को वैज्ञानिक दृष्टिकोण और नवाचार की दिशा में आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करेगा।