2026 के लिए बेस्ट इलेक्ट्रिक स्कूटर: लंबी रेंज और दमदार परफॉर्मेंस वाले ये 5 विकल्प

नई दिल्ली।भारत में पेट्रोल के बढ़ते दामों और पर्यावरण के प्रति जागरूकता के चलते इलेक्ट्रिक स्कूटर तेजी से लोकप्रिय हो रहे हैं। रोजाना सफर और लंबी रेंज के हिसाब से इन पांच स्कूटर्स को सबसे बेहतर माना जा रहा है। 1. TVS iQube – भरोसेमंद और लंबी रेंजनिर्माता: TVS Motor Companyरेंज: 94 किमी – 212 किमीकीमत: ₹94,999 – ₹1.61 लाखTVS iQube विश्वसनीयता और लंबी रेंज के लिए जाना जाता है। अलग-अलग वेरिएंट्स में यह स्कूटर शहर और लंबी दूरी दोनों के लिए उपयुक्त है। 2. Ather Rizta – फैमिली फ्रेंडली विकल्पनिर्माता: Ather Energyरेंज: 123 किमी – 159 किमीकीमत: ₹1.04 लाख – ₹1.30 लाखAther Rizta खासतौर पर फैमिली यूज के लिए डिजाइन किया गया है। इसमें आरामदायक सीट, आधुनिक फीचर्स और स्मार्ट कनेक्टिविटी शामिल हैं। 3. Bajaj Chetak EV – मजबूत और प्रीमियमनिर्माता: Bajaj Autoरेंज: 113 किमी – 151 किमीकीमत: ₹89,500 – ₹1.22 लाखBajaj Chetak EV ऑल-मेटल बॉडी के साथ आता है और प्रीमियम फील देता है। यह रोजाना इस्तेमाल और लंबी दूरी के लिए सुरक्षित विकल्प है। 4. Vida V2 / VX2 – बजट में दमदारनिर्माता: Hero MotoCorpरेंज: 92 किमी – 165 किमीकीमत: ₹73,850 – ₹1.40 लाखVida V2 और VX2 बजट में उपलब्ध होते हुए भी फीचर्स में कम नहीं हैं। यह स्कूटर शहर और मध्यम दूरी के सफर के लिए बढ़िया विकल्प है। 5. Suzuki e-Access – नया और प्रीमियमनिर्माता: Suzuki Motor Corporationरेंज: लगभग 95 किमीकीमत: ₹1.88 लाखSuzuki e-Access हाल ही में भारतीय बाजार में लॉन्च हुआ है। यह प्रीमियम विकल्प है और शहर में दैनिक उपयोग के लिए सुविधाजनक है। यदि आप रोजाना इस्तेमाल के लिए इलेक्ट्रिक स्कूटर खरीदना चाहते हैं, तो TVS iQube, Ather Rizta, Bajaj Chetak EV, Vida V2/VX2 और Suzuki e-Access जैसे विकल्प भरोसेमंद साबित हो सकते हैं। सही स्कूटर चुनते समय रेंज, बजट और फीचर्स पर ध्यान देना जरूरी है।
वैशाख मास के दिव्य उपाय जो बदल दें आपकी किस्मत और भर दें जीवन में सुख समृद्धि

नई दिल्ली । वैशाख मास सनातन परंपरा में अत्यंत पवित्र और पुण्यदायी माना जाता है। वर्ष 2026 में इस शुभ महीने की शुरुआत 3 अप्रैल से हो चुकी है और यह 1 मई तक चलेगा। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस महीने में भगवान विष्णु की पूजा जप और दान करने से अनेक गुना फल प्राप्त होता है। कहा जाता है कि इस दौरान किया गया साधना और सेवा का कार्य हजारों वर्षों की तपस्या के बराबर पुण्य देता है। यही कारण है कि इस माह को आध्यात्मिक उन्नति और जीवन में सकारात्मक बदलाव लाने का श्रेष्ठ अवसर माना जाता है। ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार वैशाख मास में कुछ विशेष उपाय अपनाने से जीवन के कई क्षेत्रों में सुधार संभव है। यदि कोई व्यक्ति अपने घर में सुख समृद्धि बढ़ाना चाहता है तो उसे प्रतिदिन भगवान विष्णु को तुलसी पत्र के साथ शहद अर्पित करना चाहिए और उनके माधव अनंत और अच्युत स्वरूप का ध्यान करना चाहिए। ऐसा करने से घर का वातावरण शांत और समृद्ध बनता है और परिवार में खुशहाली बनी रहती है। अगर जीवन में शत्रुओं या विरोधियों की समस्या अधिक है तो इस मास में भगवान विष्णु के माधव के साथ केशव और दामोदर स्वरूप का ध्यान करना लाभकारी माना गया है। तुलसी दल से विधिपूर्वक पूजा करने से नकारात्मक ऊर्जा कम होती है और शत्रु स्वतः ही दूर होने लगते हैं। इसके साथ ही जीवन में सच्चे मित्रों का साथ भी मिलने लगता है। जो लोग प्रतियोगी परीक्षाओं या किसी भी प्रकार की प्रतिस्पर्धा में सफलता पाना चाहते हैं उन्हें वैशाख मास में भगवान विष्णु के माधव पद्मनाभ और हृषिकेष स्वरूप का ध्यान करना चाहिए। भगवान को गंध और तुलसी पत्र अर्पित करने से मन एकाग्र होता है और सफलता के मार्ग खुलते हैं। यह उपाय आत्मविश्वास बढ़ाने में भी सहायक माना जाता है। दाम्पत्य जीवन को सुखद और मधुर बनाने के लिए इस पवित्र महीने में माधव श्रीधर और पद्मनाभ स्वरूप का ध्यान करना चाहिए। तुलसी पत्र के साथ मिठाई या मिश्री अर्पित करने से पति पत्नी के बीच प्रेम और समझ मजबूत होती है और संबंधों में मधुरता आती है। आर्थिक स्थिति को बेहतर बनाने के लिए वैशाख मास में माधव गोविंद और नारायण स्वरूप की उपासना विशेष फलदायी मानी जाती है। भगवान को आटे की पंजीरी में तुलसी दल मिलाकर भोग लगाने से धीरे धीरे धन लाभ के योग बनते हैं और आर्थिक स्थिरता आती है। इस प्रकार वैशाख मास केवल धार्मिक दृष्टि से ही नहीं बल्कि जीवन को संतुलित और सफल बनाने के लिए भी अत्यंत महत्वपूर्ण माना गया है। श्रद्धा और विश्वास के साथ किए गए ये छोटे छोटे उपाय जीवन में बड़े परिवर्तन ला सकते हैं और भगवान विष्णु की कृपा से हर क्षेत्र में उन्नति का मार्ग प्रशस्त कर सकते हैं।
दिव्या भारती और श्रीदेवी की जिंदगी में छुपा है चौंकाने वाला कनेक्शन, मौत और फिल्म ‘लाडला’ तक का राज

नई दिल्ली।80 और 90 के दशक में श्रीदेवी हिंदी सिनेमा की सुपरस्टार थीं। उनकी खूबसूरती और अदाकारी के दीवाने पूरे देश में थे। 1992 में जब दिव्या भारती ने बॉलीवुड में कदम रखा, तो दर्शकों और इंडस्ट्री में उनकी तुलना श्रीदेवी से होने लगी। दोनों की शक्ल, बड़ी आंखें और कर्ली बाल इतने मिलते-जुलते थे कि दिव्या को ‘मिनी श्रीदेवी’ कहा जाने लगा। पहली मुलाकात और हॉलीवुड जैसी तारीखेंदिव्या और श्रीदेवी की पहली मुलाकात केवल एयरपोर्ट पर हुई थी, जहां उन्होंने सिर्फ ‘हाय’ कहा। लेकिन उनके जीवन में संयोग और भी दिलचस्प थे। दिव्या का जन्म 25 फरवरी को हुआ और श्रीदेवी की मौत 24 फरवरी को, यानी दिव्या के जन्मदिन से ठीक एक दिन पहले। दुखद मौतें और रहस्यदिव्या भारती की मौत चौथी मंजिल से गिरने से हुई, लेकिन इसे लेकर आज तक रहस्य बना हुआ है कि यह हादसा था या हत्या। उनके पति और निर्माता साजिद नाडियाडवाला भी शक के घेरे में रहे। श्रीदेवी की अचानक बाथटब में डूबने और कार्डियक अरेस्ट से हुई मौत ने भी देश को हिला दिया। उनके पति और निर्माता बोनी कपूर पर भी शक जताया गया, लेकिन कोई ठोस सबूत नहीं मिला। ‘लाडला’ फिल्म का कनेक्शनफिल्म ‘लाडला’ भी दोनों की जिंदगी से जुड़ी है। शुरुआत में इसे दिव्या भारती अनिल कपूर के साथ करने वाली थीं और शूटिंग का आधा हिस्सा पूरा हो चुका था। दिव्या की मौत के बाद यह फिल्म श्रीदेवी के हाथ में चली गई। दोनों का लुक, डायलॉग और अंदाज इतना समान था कि सेट पर लोग दंग रह जाते थे। करियर और निजी जिंदगी में समानताएंदोनों ने दक्षिण भारतीय फिल्मों से करियर की शुरुआत की और बाद में बॉलीवुड पर राज किया। इसके अलावा, दोनों ने फिल्म निर्माता से शादी की थी। इस तरह उनके जीवन और करियर में कई अनजाने और रहस्यमय संयोग देखने को मिलते हैं। दिव्या भारती और श्रीदेवी के जीवन में संयोग और समानताएं लगातार नजर आती हैं—जन्म और मौत की तारीख, फिल्म ‘लाडला’, करियर की शुरुआत और निजी जीवन। हालांकि दोनों की मौत ने बॉलीवुड को हिला दिया, उनके योगदान और यादें आज भी जीवंत हैं।
सफर से सिनेमा तक! दिल्ली-मुंबई यात्रा में मनोज कुमार ने जन्म दी ‘उपकार’ की कहानी

नई दिल्ली।आज हम याद कर रहे हैं मनोज कुमार को, जिनकी पुण्यतिथि है। उन्हें देशभक्ति और किसान-जवान-कहानी कहने की अद्भुत क्षमता के लिए जाना जाता था। फिल्म इंडस्ट्री में उन्हें ‘भारत कुमार’ के नाम से भी जाना गया। बचपन से संघर्ष और अभिनय की राहमनोज कुमार का जन्म 24 जुलाई 1937 को ऐबटाबाद में हुआ था। असली नाम हरिकृष्ण गोस्वामी था। 1947 के बंटवारे के समय उनका परिवार दिल्ली आ गया और शरणार्थी कैंप में रहने लगा। बचपन से ही वे दिलीप कुमार के बड़े प्रशंसक थे और उनकी नकल किया करते थे। कॉलेज के दिनों में उन्होंने सिलाई मशीन का काम भी किया। मुंबई की शुरुआत और पहले सफलताअभिनय का सपना लेकर मनोज कुमार मुंबई पहुंचे। साल 1957 में फिल्म ‘फैशन’ से उन्होंने शुरुआत की। पांच साल बाद विजय भट्ट की ‘हरियाली और रास्ता’ से उन्हें पहली बड़ी सफलता मिली। 1965 में आई ‘हिमालय की गोद में’ ने उन्हें और मजबूती दी। उसी साल उन्होंने भगत सिंह पर फिल्म ‘शहीद’ बनाने का फैसला किया। प्रेम चोपड़ा और गीतकार प्रेम धवन के साथ यह फिल्म भगत सिंह के जीवन पर सबसे प्रामाणिक मानी गई। ‘उपकार’ की रचना: दिल्ली से मुंबई की ट्रेन मेंमनोज कुमार के करियर में दो पहलू थे रूमानी नायक और देशभक्ति से ओत-प्रोत ‘भारत कुमार’। पूर्व प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री ने उनसे कहा था, “क्या मेरे नारे ‘जय जवान जय किसान’ पर फिल्म नहीं बन सकती?” दिल्ली से मुंबई लौटते समय मनोज कुमार ने रजिस्टर और नए पेन खरीदे और ट्रेन की यात्रा में कहानी लिख डाली। दिल्ली से मुंबई पहुंचते-पहुंचते फिल्म ‘उपकार’ की पूरी कहानी तैयार हो गई। गाने की पृष्ठभूमि: ‘मेरे देश की धरती सोना उगले’‘उपकार’ के गानों में सबसे खास है ‘मेरे देश की धरती सोना उगले’। गीतकार गुलशन बावरा रेलवे में क्लर्क थे और पंजाब से आने वाली गेहूं की बोरियां उतारते समय उनकी डायरी में यह पंक्ति दर्ज हुई। बाद में मनोज कुमार ने इसे फिल्म में शामिल किया। महेंद्र कपूर की आवाज ने इस गीत को अमर बना दिया। बाद की उपलब्धियां1970 में मनोज कुमार ने ‘पूरब और पश्चिम’ बनाई, जो भारतीय परंपरा और पश्चिमी संस्कृति के टकराव पर आधारित थी। यह फिल्म भी खूब सराही गई। मनोज कुमार ने देशभक्ति और आम आदमी की कहानियों को पर्दे पर जीवंत किया। ट्रेन में लिखी ‘उपकार’ की कहानी और ‘मेरे देश की धरती सोना उगले’ जैसे गाने आज भी उनके योगदान की याद दिलाते हैं।
डिजिटलीकरण की रफ्तार और ‘डिजिटल जहर’ का खतरा

-सुनील कुमार महला आज हमारा देश भारत तेजी से डिजिटाइजेशन की ओर अग्रसर है, और कहना ग़लत नहीं होगा कि इसमें स्मार्टफोन विशेषकर एंड्रॉयड का सबसे बड़ा योगदान है। यहां पाठकों को जानकारी देना चाहूंगा कि वैश्विक स्तर पर जहां एंड्रॉयड उपयोगकर्ताओं की संख्या लगभग 3.9 अरब (390 करोड़) है, वहीं भारत में वर्ष 2025–2026 के अनुमान के अनुसार कुल स्मार्टफोन उपयोगकर्ताओं की संख्या लगभग 75 करोड़ (750 मिलियन) तक पहुंच चुकी है। इनमें से लगभग 89%-90% स्मार्टफोन एंड्रॉयड आधारित हैं। अर्थात सरल शब्दों में कहें तो भारत में करीब 65-70 करोड़ लोग एंड्रॉयड फोन का उपयोग कर रहे हैं।यह भी कहा जा सकता है कि आज हर 10 में से लगभग 9 लोग एंड्रॉयड फोन का इस्तेमाल कर रहे हैं। वास्तव में, हमारे देश में सस्ते डेटा प्लान, किफायती स्मार्टफोन और डिजिटल सेवाओं का विस्तार इस तेज़ी के प्रमुख कारण हैं। हालांकि, इस डिजिटल क्रांति का एक चिंताजनक पहलू भी सामने आ रहा है-‘डिजिटल जहर’ अर्थात मोबाइल और स्क्रीन की बढ़ती लत, जो विशेष रूप से बच्चों और किशोरों के लिए गंभीर सामाजिक और स्वास्थ्य संकट बनती जा रही है। आंकड़े इस समस्या की भयावहता को स्पष्ट करते हैं। क्या यह चिंताजनक बात नहीं है कि हमारे देश में 0-5 वर्ष के बच्चे प्रतिदिन औसतन 2.2 घंटे स्क्रीन पर बिताते हैं, जो विश्व स्वास्थ्य संगठन द्वारा निर्धारित सुरक्षित सीमा से लगभग दोगुना है। वहीं, 2 वर्ष से कम उम्र के बच्चे भी औसतन 1.2 घंटे स्क्रीन देखते हैं, जबकि उनके लिए स्क्रीन टाइम शून्य होना चाहिए। इतना ही नहीं, यदि हम यहां पर स्कूल जाने वाले बच्चों की बात करें, तो एक अध्ययन के अनुसार 62.5% बच्चों में मध्यम से उच्च स्तर की स्क्रीन लत पाई गई है, और उनका औसत स्क्रीन टाइम लगभग 4 घंटे प्रतिदिन है। एक अन्य रिपोर्ट बताती है कि भारत के 74% छात्र रोजाना 2 घंटे से अधिक स्क्रीन का उपयोग करते हैं, जिनमें से 21% बच्चे 4 घंटे से भी अधिक समय मोबाइल, गेमिंग या सोशल मीडिया पर बिताते हैं। लगभग 70% माता-पिता का मानना है कि उनके बच्चे वीडियो और ओटीटी प्लेटफॉर्म्स के आदी हो चुके हैं। और भी चिंता की बात यह है कि 64% बच्चे सोशल मीडिया और गेमिंग के आदी हैं, जबकि केवल 20% बच्चों में किसी प्रकार की डिजिटल लत नहीं पाई गई है।एक उपलब्ध जानकारी के अनुसार आज के समय में भारत में लगभग 90% किशोरों के पास स्मार्टफोन की पहुंच है और 76% बच्चे मनोरंजन के लिए सोशल मीडिया का उपयोग करते हैं। आर्थिक सर्वेक्षण 2025-26 ने भी डिजिटल लत को बच्चों और युवाओं के मानसिक स्वास्थ्य के लिए एक गंभीर खतरा बताया है, क्योंकि यह उनकी पढ़ाई, एकाग्रता और व्यवहार पर नकारात्मक प्रभाव डाल रही है। इस डिजिटल लत के दुष्परिणाम भी स्पष्ट रूप से सामने आ रहे हैं। मसलन, ध्यान में कमी, चिड़चिड़ापन, नींद की समस्या, पढ़ाई में गिरावट, सामाजिक दूरी, अकेलापन, मानसिक तनाव और अवसाद जैसी समस्याएं तेजी से बढ़ रही हैं। यहां पाठकों को बताता चलूं कि हाल ही में राज्यसभा में भी इस मुद्दे को गंभीरता से उठाया गया, जहां यह बताया गया कि कई बच्चे प्रतिदिन 7-8 घंटे मोबाइल स्क्रीन पर बिता रहे हैं। इससे उनकी शिक्षा, सामाजिक जीवन और नींद पर गहरा नकारात्मक प्रभाव पड़ रहा है।विशेषज्ञों ने इस स्थिति को ‘डिजिटल गुलामी’ तक करार दिया है, क्योंकि बच्चे मोबाइल के बिना स्वयं को असहज महसूस करते हैं। कहना ग़लत नहीं होगा कि आज के समय में सोशल मीडिया पर लाइक्स और कमेंट्स की होड़ बच्चों में हीन भावना, तनाव और अवसाद को बढ़ा रही है, वहीं ऑनलाइन बुलिंग जैसी समस्याएं भी उनके मानसिक स्वास्थ्य को प्रभावित कर रही हैं। हाल ही में एक अमेरिकी अदालत ने भी यह माना है कि सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स का डिजाइन इस प्रकार बनाया जाता है कि उपयोगकर्ता बार-बार उन्हें इस्तेमाल करें, जिससे लत की प्रवृत्ति बढ़ती है। इस बढ़ती समस्या के समाधान के लिए कई महत्वपूर्ण सुझाव सामने आए हैं। राज्यसभा में राष्ट्रीय स्तर पर नीति बनाने, स्कूलों में ‘डिजिटल हेल्थ’ को पाठ्यक्रम में शामिल करने और सोशल मीडिया तथा गेमिंग कंपनियों पर सख्त नियम लागू करने की मांग की गई है। साथ ही, अभिभावकों को यह सलाह दी गई है कि वे बच्चों पर केवल प्रतिबंध लगाने के बजाय उनसे खुलकर संवाद करें, उनके साथ समय बिताएं और उन्हें खेल-कूद तथा रचनात्मक गतिविधियों की ओर प्रेरित करें। अंततः, यह स्पष्ट है कि डिजिटल लत अब केवल एक आदत नहीं, बल्कि समाज के सामने खड़ी एक गंभीर चुनौती बन चुकी है। सोशल मीडिया और डिजिटल माध्यमों ने जहां अभिव्यक्ति और सूचना के नए द्वार खोले हैं, वहीं उनका अत्यधिक उपयोग बच्चों और किशोरों के मानसिक, शारीरिक और सामाजिक विकास को प्रभावित कर रहा है। यदि समय रहते प्रभावी और संतुलित कदम नहीं उठाए गए, तो इसका असर आने वाली पीढ़ियों पर गहरा और दीर्घकालिक होगा। इसलिए सरकार, शैक्षणिक संस्थान, अभिभावक और समाज-सभी को मिलकर जागरूकता, संतुलित उपयोग और सकारात्मक संवाद के माध्यम से इस ‘डिजिटल जहर’ से बच्चों और युवाओं को बचाने की दिशा में ठोस प्रयास करने होंगे।
राज कपूर के एक बयान से टूटा सपना लता ने छोड़ी फिल्म जो बाद में बनी ब्लॉकबस्टर

नई दिल्ली । भारतीय सिनेमा और संगीत की दुनिया में कुछ कहानियां ऐसी होती हैं जो समय के साथ और भी दिलचस्प हो जाती हैं। ऐसी ही एक कहानी जुड़ी है सुरों की मलिका लता मंगेशकर और शोमैन राज कपूर की महत्वाकांक्षी फिल्म सत्यम शिवम सुंदरम से। यह फिल्म साल 1978 में रिलीज हुई और अपने अनोखे विषय और प्रस्तुति के कारण सुपरहिट साबित हुई लेकिन बहुत कम लोग जानते हैं कि इस फिल्म के लिए पहली पसंद जीनत अमान नहीं बल्कि खुद लता मंगेशकर थीं। फिल्म की कहानी रूपा नाम की एक ऐसी लड़की के इर्दगिर्द घूमती है जिसका चेहरा बचपन में जल जाता है लेकिन उसकी आवाज इतनी मधुर होती है कि हर कोई उसका दीवाना बन जाता है। राज कपूर ने इस किरदार की कल्पना एक साधारण चेहरे और दिव्य आवाज वाली महिला के रूप में की थी और उनके मन में इस छवि के लिए लता मंगेशकर बिल्कुल फिट बैठती थीं। यही वजह थी कि वह उन्हें इस फिल्म में कास्ट करना चाहते थे और यह किरदार उनके इर्दगिर्द ही गढ़ा गया था। लेकिन कहानी में मोड़ तब आया जब राज कपूर का एक बयान गलत तरीके से लिया गया। उन्होंने सुंदरता को लेकर एक दार्शनिक बात कही थी जिसमें उन्होंने यह समझाने की कोशिश की थी कि असली सुंदरता बाहरी रूप में नहीं बल्कि दृष्टिकोण में होती है। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि कभी कभी बेहद खूबसूरत आवाज सुनने के बाद जब हम उस व्यक्ति को देखते हैं तो वह हमारी कल्पना से अलग हो सकता है। इस बात को लता मंगेशकर से जोड़कर देखा गया और यह उन्हें बेहद चुभ गया। इस टिप्पणी ने उन्हें इतना आहत किया कि उन्होंने फिल्म में काम करने से साफ इनकार कर दिया। बात यहीं नहीं रुकी उन्होंने फिल्म के लिए गाना गाने से भी मना कर दिया जो अपने आप में एक बड़ा झटका था क्योंकि उनकी आवाज इस कहानी की आत्मा मानी जा रही थी। राज कपूर और संगीतकार लक्ष्मीकांत प्यारेलाल के लिए यह स्थिति बेहद मुश्किल थी क्योंकि फिल्म की परिकल्पना ही लता की आवाज के इर्दगिर्द बनी थी। हालांकि बाद में काफी मनाने और समझाने के बाद लता मंगेशकर इस बात के लिए राजी हुईं कि वह फिल्म का टाइटल ट्रैक गाएंगी। उनके गाए इस गीत ने फिल्म को एक अलग ही ऊंचाई दी और आज भी वह गाना लोगों के दिलों में खास जगह रखता है। दूसरी ओर फिल्म में रूपा का किरदार जीनत अमान को मिला और उन्होंने अपने अभिनय और स्क्रीन प्रेजेंस से इस भूमिका को यादगार बना दिया। उनके साथ शशि कपूर की जोड़ी ने भी दर्शकों का दिल जीत लिया और फिल्म बॉक्स ऑफिस पर बड़ी सफलता बनकर उभरी। यह घटना न केवल फिल्म इतिहास का एक दिलचस्प अध्याय है बल्कि यह भी दिखाती है कि कभी कभी एक छोटी सी बात किस तरह बड़े फैसलों को प्रभावित कर देती है। अगर उस वक्त हालात अलग होते तो शायद यह फिल्म और इसकी पहचान कुछ और ही होती लेकिन यही अनिश्चितता सिनेमा को इतना खास बनाती है।
Dhurandhar के ‘रहमान डकैत’ रोल पर हुआ ड्रामा! तीन स्टार्स ने कहा ‘ना’, कास्टिंग डायरेक्टर ने सब बताया
नई दिल्ली। फिल्म जगत में अक्सर देखा जाता है कि कई ऐसी फिल्में होती हैं जो बड़े-बड़े सेलेब्स को ऑफर की जाती है।लेकिन उनमें से कई उसे ठुकरा देते हैं। बीते साल 2025 के दिसंबर में रिलीज हुई फिल्म Dhurandhar ने काफी तबाही मचाई थी इस फिल्म ने काफी अच्छा खासा कलेक्शन किया था। इस फिल्म में Ranveer Singh और Akshaye Khanna की बेहतरीन एक्टिंग देखने को मिला था। आज भी इसका दूसरा पार्ट लगातार सिनेमाघरों में तूफान लेकर आया है और जबरदस्त कलेक्शन करता जा रहा है। रहमान डकैत के किरदार में छाए थे अक्षय खन्ना (Akshaye Khanna)आपको बता दें, इसके पहले पार्ट में अक्षय खन्ना (Akshaye Khanna) ने रहमान डकैत का किरदार निभाया था इसलिए उनकी काफी तारीफ हुई लोगों ने उन्हें काफी पसंद किया। अक्षय खन्ना ने अब तक कई बेहतरीन फिल्में की है लेकिन इस फिर मैं उनके करियर में चार चांद लगा दिया है। लेकिन क्या आप जानते हैं इस फिल्म में इस किरदार को उनसे पहले कई बड़े एक्टर्स को ऑफर किया गया था लेकिन उन्होंने इस किरदार को करने से मना कर दिया था अब इसका खुलासा फिल्म के कास्टिंग डायरेक्टर ने खुद किया है। तीन कलाकारों ने ठुकराया था यह किरदारहाल ही में फिल्म के कास्टिंग डायरेक्टर ने इस बारे में दिलचस्प खुलासा किया है, जिसने फैंस को हैरान कर दिया है। रिपोर्ट्स के अनुसार, बॉलीवुड हंगामा के साथ एक इंटरव्यू में कास्टिंग डायरेक्टर मुकेश छाबड़ा ने बताया कि रहमान डकैत का रोल पहले तीन अलग-अलग एक्टर्स को ऑफर किया गया था, लेकिन सभी ने इसे करने से मना कर दिया। इनमें से एक एक्टर साउथ इंडस्ट्री से थे और दो बॉलीवुड के थे. हालांकि उन्होंने किसी का नाम नहीं लिया। उन्होंने बताया कि सब ने यह कहकर मना कर दिया कि यह फिल्म रणवीर सिंह की है तो इसमें उनका किरदार उतना खास नहीं दिखेगा। डायरेक्टर ने अक्षय खन्ना की तारीफ कीइसके बाद उन्होंने अक्षय खन्ना के बारे में सोचा। खास बात ये रही कि अक्षय ने तुरंत स्क्रिप्ट सुनी और एक ही दिन में फिल्म के लिए हां कर दी। मुकेश ने उनकी तारीफ करते हुए कहा कि अक्षय उन कलाकारों में से हैं, जो दिल से फैसले लेते हैं। फिल्म की कहानी किरदारधुरंधर’ की कहानी कराची के लयारी इलाके पर है, जो अपराध के लिए जाना जाता है. फिल्म में अक्षय खन्ना ने रहमान डकैत का किरदार निभाया, जिसे दर्शकों ने खूब पसंद किया. वहीं रणवीर सिंह एक स्पाई एजेंट के रोल में दिखे, जो पाकिस्तान में घुसकर मिशन को अंजाम देता है। फिल्म में अर्जुन रामपाल, आर. माधवन, सारा अर्जुन और राकेश बेदी भी नजर आए हैं। ‘धुरंधर’ के पहले पार्ट को दर्शकों का जबरदस्त रिस्पॉन्स मिला था।
दिल दहला देने वाला अनुभव यह फिल्म आपके दिमाग और आत्मा दोनों को झकझोर देगी

नई दिल्ली । वीकेंड की शुरुआत अक्सर आराम और एंटरटेनमेंट के साथ होती है लेकिन कुछ लोग ऐसे भी होते हैं जिन्हें सुकून नहीं बल्कि सिहरन चाहिए होती है अगर आप भी उन्हीं में से हैं और ऐसी हॉरर फिल्म की तलाश में हैं जो सिर्फ डराए नहीं बल्कि आपके अंदर तक उतर जाए तो यह फिल्म आपके लिए एक बेहतरीन अनुभव साबित हो सकती है साल 2023 में रिलीज हुई यह फिल्म आज भी लोगों के बीच चर्चा में बनी हुई है और इसे देखने के बाद लोग अपने दोस्तों को इसे जरूर सुझाते हैं इस फिल्म की कहानी पारंपरिक भूतिया घरों या पुराने खंडहरों से हटकर एक बेहद अनोखे कॉन्सेप्ट पर आधारित है जो इसे बाकी हॉरर फिल्मों से अलग बनाता है कहानी एक रहस्यमयी हाथ के इर्द गिर्द घूमती है जो ममीफाइड है यानी उस पर प्लास्टर चढ़ा हुआ है जब कोई व्यक्ति इस हाथ को पकड़कर एक खास वाक्य बोलता है तो उसके सामने एक मृत आत्मा प्रकट हो जाती है यह सिर्फ शुरुआत होती है असली डर तब शुरू होता है जब उस आत्मा को अपने शरीर में आने की अनुमति दी जाती है इसके बाद जो होता है वह दर्शकों को भीतर तक हिला देता है फिल्म का सबसे मजबूत पक्ष इसका रियलिस्टिक ट्रीटमेंट है इसमें जरूरत से ज्यादा वीएफएक्स का इस्तेमाल नहीं किया गया है बल्कि मेकअप साउंड डिजाइन और माहौल के जरिए डर को इस तरह रचा गया है कि हर सीन असली लगता है यही वजह है कि फिल्म देखते समय दर्शक खुद को उस स्थिति में महसूस करने लगते हैं और डर कई गुना बढ़ जाता है कई ऐसे दृश्य हैं जो अचानक आते हैं और दर्शक को चौंका देते हैं यह फिल्म धीरे धीरे आपको अपने जाल में फंसाती है और फिर एक ऐसा अनुभव देती है जिससे निकलना आसान नहीं होता खास बात यह है कि यह सिर्फ डराने तक सीमित नहीं रहती बल्कि इंसानी जिज्ञासा और उसके खतरनाक परिणामों को भी दिखाती है फिल्म को दर्शकों और क्रिटिक्स दोनों से शानदार प्रतिक्रिया मिली है इसकी कहानी निर्देशन और एक्टिंग की खूब तारीफ हुई है यह फिल्म इस बात का उदाहरण है कि अगर कॉन्सेप्ट मजबूत हो और उसे सही तरीके से पेश किया जाए तो बिना भारी तकनीक के भी गहरा असर छोड़ा जा सकता है दिलचस्प बात यह है कि इस फिल्म को बनाने वाले निर्देशक पहले यूट्यूब पर डरावने वीडियो बनाया करते थे उन्होंने अपने अनुभव का इस्तेमाल करते हुए फिल्म के सेट पर ऐसा माहौल तैयार किया कि कलाकारों का डर पूरी तरह असली लगे यही वजह है कि फिल्म के कई सीन बेहद नैचुरल और प्रभावशाली महसूस होते हैं अगर आप इस वीकेंड कुछ ऐसा देखना चाहते हैं जो आपके दिमाग में लंबे समय तक बना रहे और आपको अंधेरे से डराने लगे तो यह फिल्म जरूर देखनी चाहिए लेकिन इसे देखने से पहले खुद को तैयार कर लें क्योंकि यह अनुभव हल्का नहीं होने वाला है
HDFC बैंक का वित्तीय अलर्ट! जमा और लोन के बीच बढ़ा अंतर, 18 अप्रैल को बोर्ड बैठक

नई दिल्ली।एचडीएफसी बैंक ने मार्च तिमाही में अपने कर्ज और जमा के बीच अंतर और बढ़ने की जानकारी दी है। बैंक के अनुसार, लोन की ग्रोथ जमा से तेज रही, जिससे क्रेडिट-डिपॉजिट (C-D) रेशियो 106-108 प्रतिशत के ऊंचे स्तर पर बना हुआ है। लोन की ग्रोथ: रिटेल और SME का योगदान31 मार्च तक बैंक के कुल लोन (ग्रॉस एडवांस) सालाना आधार पर लगभग 17 प्रतिशत बढ़कर 25 लाख करोड़ रुपए हो गए, जबकि एक साल पहले यह 21.4 लाख करोड़ रुपए थे। तिमाही आधार पर लोन की ग्रोथ मध्यम रही, जिसमें मुख्य रूप से रिटेल और SME सेगमेंट ने योगदान दिया। कॉरपोरेट लोनिंग सीमित और संतुलित रही। जमा की धीमी बढ़त और सीएएसए पर दबावबैंक की कुल जमा राशि लगभग 23.5 लाख करोड़ रुपए रही, जो एक साल पहले 20.5 लाख करोड़ रुपए थी। हालांकि, डिपॉजिट की ग्रोथ लोन के मुकाबले धीमी रही, जिससे C-D रेशियो ऊंचा बना रहा। कम लागत वाले डिपॉजिट (CASA) की ग्रोथ भी धीमी रही, जिससे CASA रेशियो 37-38 प्रतिशत पर आ गया। इससे स्पष्ट होता है कि कड़े लिक्विडिटी माहौल में सस्ते फंड जुटाना चुनौतीपूर्ण बना हुआ है। बोर्ड बैठक और डिविडेंडएचडीएफसी बैंक का बोर्ड 18 अप्रैल को बैठक करेगा, जिसमें मार्च तिमाही और पूरे वित्त वर्ष के ऑडिटेड नतीजों को मंजूरी दी जाएगी। इस बैठक में FY 2026 के लिए डिविडेंड पर भी विचार किया जाएगा और इसके लिए रिकॉर्ड डेट तय की जाएगी। आगे की रणनीतिविश्लेषकों का मानना है कि बैंक के लिए डिपॉजिट ग्रोथ बढ़ाना, CASA बढ़ाना और मार्जिन को स्थिर बनाए रखना सबसे अहम होगा। बैंक वर्तमान में कुछ गवर्नेंस मामलों को भी संभाल रहा है और आंतरिक सिस्टम को मजबूत करने पर ध्यान दे रहा है, खासकर थर्ड-पार्टी प्रोडक्ट्स की बिक्री प्रक्रिया में। कानूनी और आंतरिक कार्रवाईपूर्व नॉन-एग्जीक्यूटिव चेयरमैन अतानु चक्रवर्ती के खिलाफ कोई कानूनी कार्रवाई फिलहाल शुरू नहीं की गई है। इसके अलावा, 2018-19 में एटी-1 बॉन्ड की मिस-सेलिंग मामले में बैंक ने तीन वरिष्ठ अधिकारियों को सस्पेंड किया और 12 अन्य कर्मचारियों पर जुर्माना लगाया। एचडीएफसी बैंक में मार्च तिमाही में लोन की ग्रोथ जमा से तेज रही, जिससे C-D रेशियो ऊंचा बना। बोर्ड बैठक 18 अप्रैल को होगी, जिसमें ऑडिटेड नतीजे और डिविडेंड पर निर्णय लिया जाएगा। बैंक CASA बढ़ाने और आंतरिक सिस्टम मजबूत करने पर ध्यान दे रहा है।
FTL सिलेंडर योजना: बिना स्थायी पते के भी घर लाएं 5 किलो का LPG, आसान प्रक्रिया

नई दिल्ली।केंद्र सरकार की एलपीजी उपलब्धता बढ़ाने की पहल के तहत, सरकारी तेल वितरण कंपनियां अब 5 किलोग्राम के एफटीएल (फ्री-ट्रेड) एलपीजी सिलेंडर को आसानी से उपलब्ध करा रही हैं। खास बात यह है कि इस सिलेंडर को पाने के लिए अब स्थायी पते की आवश्यकता नहीं है; केवल एक सरकारी आईडी दिखाकर आप इसे अपने नजदीकी एलपीजी एजेंसी या वितरक से ले सकते हैं। छात्रों और प्रवासी कामगारों के लिए सुविधासरकार की यह सुविधा विशेषकर उन लोगों के लिए है जो अपने शहरों से दूर रहते हैं और उनके पास स्थायी पता नहीं है। छात्र और प्रवासी कामगार अब बिना किसी पते की बाधा के घर से दूर भी एलपीजी सिलेंडर आसानी से प्राप्त कर सकते हैं। इंडियन ऑयल ने पोस्ट करते हुए बताया, “अगर आप घर से दूर रहते हैं, आपके पास स्थायी पता नहीं है, और एलपीजी कनेक्शन लेने में कठिनाई हो रही है, तो अब इसका आसान समाधान है।” ‘छोटू’ – छोटा, सुविधाजनक और भरोसेमंदइंडियन ऑयल ने इस सिलेंडर को ‘छोटू’ नाम दिया है। पोस्ट के अनुसार, यह छोटा और सुविधाजनक सिलेंडर खासकर छात्रों और प्रवासी कामगारों के लिए तैयार किया गया है, जिन्हें तुरंत और भरोसेमंद खाना पकाने का समाधान चाहिए। एलपीजी आपूर्ति सामान्य, डिजिटल प्लेटफॉर्म से बुकिंगकंपनी ने कहा कि देश में एलपीजी की आपूर्ति सामान्य है और प्रतिदिन लगभग 28 लाख सिलेंडर वितरित किए जा रहे हैं। वैश्विक चुनौतियों के बावजूद परिचालन सामान्य रूप से चल रहा है। 87 प्रतिशत एलपीजी बुकिंग अब डिजिटल प्लेटफॉर्म जैसे एसएमएस और IVRS के माध्यम से हो रही हैं। सिलेंडर की डिलीवरी को डीएसी ओटीपी से प्रमाणित किया जाता है, जिससे ग्राहकों को सुरक्षित और भरोसेमंद सेवा मिलती है। ग्राहकों को आश्वासनइंडियन ऑयल ने उपभोक्ताओं को आश्वस्त किया कि किसी भी कमी की संभावना नहीं है और घबराहट में बुकिंग या जमाखोरी करने की जरूरत नहीं है। कंपनी ने यह भी कहा कि आधिकारिक सहायता चैनलों के जरिए ग्राहकों की चिंताओं का सक्रिय समाधान किया जा रहा है।