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डीएनटी, एनटी, एसएनटी समुदाय है अदृश्य भारत की पहचान और उम्मीदों का नया द्वार

– कैलाश चन्द्रभारत की स्वाधीनता को 77 वर्ष हो चुके हैं, लेकिन देश का एक बड़ा हिस्सा आज भी अपनी स्वतंत्र पहचान के लिए संघर्ष कर रहा है—ये हैं डिनोटिफाइड, घुमंतू और अर्ध-घुमंतू समुदाय, जिन्हें हम डीएनटी, एनटी, एसएनटी समुदाय के नाम से जानते हैं। अनुमान लगाया जाता है कि इनकी जनसंख्या आठ से ग्‍यारह करोड़ के बीच है, पर विडंबना यह है कि भारत की किसी भी राष्ट्रीय जनगणना ने इन्हें कभी अलग श्रेणी में नहीं गिना। इसी कारण 2027 की प्रस्तावित जनगणना को लेकर इन समुदायों में नई आशा जन्मी है, क्योंकि पहली बार उनकी पहचान साफ़-साफ़ दर्ज होने की संभावना बन रही है। इन समुदायों की पीड़ा इतिहास की धूल में दबी पड़ी है। 1871 के क्रिमिनल ट्राइब्स एक्ट ने लगभग 150–200 समुदायों को “जन्मजात अपराधी” घोषित कर दिया था। 1952 में यह कानून भले ही खत्म हुआ, लेकिन समाज की नज़रों में अपराधीकरण का दाग अब तक नहीं मिटा। आज भी कई जगह पुलिस निगरानी, सामाजिक भेदभाव और अविश्वास का सामना उन्हें करना पड़ता है। स्वतंत्र भारत की जनगणनाओं में इन समुदायों के लिए अलग जगह न होना भी एक और बड़ी कमी रही है। सरकार का तर्क यह रहा कि इनकी पहचान राज्य-वार सूचियों में पहले से मौजूद है, लेकिन विशेषज्ञ इसे नीति की अस्पष्टता और प्रशासनिक सुस्ती बताते हैं। स्थिति इतनी जटिल है कि एक ही समुदाय एक राज्य में अनुसूचति जाति (एससी), दूसरे में अनुसूचित जनजाति (एसटी), तीसरे में ओबीसी और कहीं-कहीं किसी भी सूची में नहीं मिलता। नतीजतन योजनाओं, छात्रवृत्तियों, आरक्षण और पुनर्वास में भारी असमानताएँ पैदा होती हैं। वस्‍तुत: कई आयोगों ने तो यहाँ तक उल्लेख किया है कि इन समुदायों के नाम पर आने वाला फंड अक्सर उनसे पहले ही किसी और द्वारा खपा लिया जाता है। स्थायी पते की कमी ने इन्हें पहचान-पत्रों, राशन कार्डों, बैंकिंग सुविधाओं और स्वास्थ्य योजनाओं से भी दूर रखा है। ‘रेन्के कमीशन’ ने कहा था कि सरकारी संसाधन इन समुदायों तक शायद ही पहुँच पाते हैं। दो बड़े आयोग, रेनके (2008) और इदाते (2018) ने विस्तृत अध्ययन कर कई महत्वपूर्ण सिफारिशें कीं, पर उनका क्रियान्वयन आज भी बेहद सीमित है। सुप्रीम कोर्ट भी इस विषय को सरकार की नीति का हिस्सा मानकर हस्तक्षेप से पीछे हट गया है, जिससे इन समुदायों की निगाहें अब पूरी तरह केंद्र सरकार के निर्णय पर टिकी हैं। दुखद यह है कि भारत के मीडिया और राष्ट्रीय विमर्श में भी ये समुदाय लगभग अदृश्य बने हुए हैं। जहाँ सामाजिक न्याय की बहसें अक्सर एससी/एसटी/ओबीसी के इर्द-गिर्द घूमती हैं, वहीं डीएनटी, एनटी, एसएनटी समुदायों का उल्लेख मुश्किल से देखने को मिलता है। विशेषज्ञ इसे “भारत का अदृश्य सामाजिक वर्ग” कहते हैं, लेकिन इस अँधेरे में भी आशा की किरण है। 2027 की जनगणना यदि इन्हें अलग पहचान दे दे, तो पहली बार देश को इनके वास्तविक आँकड़े मिलेंगे, नीतियाँ सटीक बनेंगी, फंडिंग का लक्ष्यीकरण बेहतर होगा और सदियों पुरानी उपेक्षा को दूर करने की दिशा में निर्णायक कदम उठाया जा सकेगा। यही कारण है कि इन समुदायों का कहना है, “पहचान ही अधिकार का पहला कदम है।” इन सबके बीच एक सकारात्मक पहलू यह भी है कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ ने पिछले कुछ वर्षों में महाराष्ट्र, राजस्थान, मध्यप्रदेश और छत्तीसगढ़ के घुमंतू–अर्धघुमंतू समुदायों के बीच गहरा और निरंतर काम किया है। संघ के स्वयंसेवकों ने प्रशासन के साथ मिलकर 50,000 से अधिक परिवारों को आधार कार्ड, राशन कार्ड और पहचान-पत्र उपलब्ध कराए, जिससे वे पहली बार सरकारी योजनाओं और जनकल्याण व्यवस्था से जुड़ सके। संघ द्वारा संचालित कौशल विकास कार्यक्रमों, जैसे सिलाई, बढ़ईगीरी, हस्तशिल्प, कृषि तकनीक, मोबाइल रिपेयरिंग और लोककला प्रशिक्षण ने अनेक परिवारों में आत्मनिर्भरता का नया भाव जगाया है। शिक्षा, स्वास्थ्य, नशामुक्ति और सामाजिक समरसता से जुड़े कार्यक्रमों ने समुदायों का आत्मविश्वास बढ़ाया है और उन्हें समाज की मुख्यधारा से जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। इस पूरे परिदृश्य में एक बात स्पष्ट है कि भारत का यह बड़ा और बहु-आयामी सामाजिक वर्ग अब भी मान्यता और सम्मान की प्रतीक्षा में है। 2027 की जनगणना उनके लिए सिर्फ आँकड़ों का सवाल नहीं है, यह तो उनकी पहचान और सम्मान की पहली सीढ़ी है। देश यह कदम कब और कैसे उठाता है, यही आने वाले समय में इन समुदायों के भविष्य का निर्धारण करेगा। (लेखक सामाजिक कार्यकर्ता एवं स्‍तम्‍भकार हैं)

गिल की कमी महसूस हुई! साई सुदर्शन ने टीम को संभाला, अश्विन का बड़ा बयान

नई दिल्ली।आईपीएल मुकाबले में शुभमन गिल की गैरमौजूदगी गुजरात टाइटंस के लिए बड़ा झटका साबित हुई, लेकिन युवा बल्लेबाज साई सुदर्शन ने शानदार जिम्मेदारी निभाते हुए टीम को मजबूत शुरुआत दिलाई। भारत के पूर्व स्पिनर रविचंद्रन अश्विन ने सुदर्शन की पारी की सराहना करते हुए कहा कि उन्होंने परिस्थितियों को समझते हुए परिपक्व बल्लेबाजी का प्रदर्शन किया। अश्विन ने बातचीत के दौरान कहा कि सुदर्शन को यह अच्छी तरह पता था कि गिल टीम में नहीं हैं, इसलिए उन्हें खुद आगे बढ़कर जिम्मेदारी उठानी होगी। उन्होंने जिस तरह पारी की शुरुआत की, उससे साफ दिखा कि वह अपनी ताकत और खेल के क्षेत्रों को बखूबी समझते हैं। अश्विन के मुताबिक, सुदर्शन ने गेंद की गति का शानदार इस्तेमाल किया, थर्ड मैन की दिशा में शॉट खेले और फ्रंट फुट पर बेहतरीन कवर ड्राइव लगाकर अपनी तकनीक का प्रदर्शन किया। स्पिन के खिलाफ भी दिखाया दमअश्विन ने खासतौर पर इस बात पर जोर दिया कि सुदर्शन ने स्पिन के खिलाफ भी आत्मविश्वास से खेल दिखाया। रविंद्र जडेजा जैसे अनुभवी गेंदबाज के अटैक में आने के बाद भी उन्होंने संयम नहीं खोया। पहले पेस का इस्तेमाल किया और फिर शानदार स्लॉग स्वीप लगाकर अपने इरादे जाहिर किए। अश्विन का मानना है कि यही सुदर्शन की ताकत है और उन्हें इसी अंदाज में आगे भी बल्लेबाजी करनी चाहिए। 73 रनों की शानदार पारी, फिर भी टीम को हारदरअसल, राजस्थान रॉयल्स के खिलाफ मुकाबले में साई सुदर्शन ने 44 गेंदों में 73 रनों की बेहतरीन पारी खेली। उन्होंने ओपनिंग करते हुए टीम को मजबूत शुरुआत दी, लेकिन इसके बावजूद गुजरात टाइटंस को 6 रन से करीबी हार का सामना करना पड़ा। राजस्थान ने पहले बल्लेबाजी करते हुए 210 रन बनाए थे, जिसके जवाब में गुजरात की टीम 204 रन ही बना सकी। गिल की वापसी से मजबूत होगी टीमअश्विन ने यह भी कहा कि गिल का टीम में न होना निश्चित रूप से बड़ा नुकसान है, क्योंकि वह टीम के कप्तान होने के साथ-साथ भरोसेमंद बल्लेबाज भी हैं। हालांकि, सुदर्शन ने जिस तरह जिम्मेदारी निभाई, वह टीम के लिए सकारात्मक संकेत है। उन्होंने उम्मीद जताई कि जब शुभमन गिल वापसी करेंगे, तो सुदर्शन के साथ उनकी ओपनिंग जोड़ी टीम को और मजबूती देगी। बता दें कि शुभमन गिल मांसपेशियों में ऐंठन के कारण इस मुकाबले में नहीं खेल पाए थे और उनकी गैरमौजूदगी में राशिद खान ने टीम की कप्तानी संभाली।

स्किन के जिद्दी दाग हटाना हुआ आसान! चेचक के निशानों के लिए ट्राय करें ये टिप्स

नई दिल्ली। आज के समय में हर कोई चाहता है कि उसका चेहरा काफी अच्छा रहे। लेकिन जब चेहरे में दाग धब्बे और चेचक के दाग काफी ज्यादा होते हैं तो हम काफी अनकंफर्टेबल महसूस करते हैं जहां भी जाते हैं हम अपने चेहरे को छुपाने की कोशिश करते हैं। ज्यादा लोगों से बात नहीं करते हैं कि वह हमारे और हमारे चेहरे के बारे में क्या सोचेंगे और अगर आप भी चेचक के दाग से काफी परेशान रहती हैं तो अब आप उन्हें घर पर ही ठीक कर सकते हैं। क्या सच में चेचक का दाग है सकता हैचेचक के दाग त्वचा के ‘कोलेजन’ (Collagen) को नुकसान पहुंचाने के कारण बनते हैं। हालांकि बहुत गहरे गड्ढों को भरने में समय लगता है, लेकिन सही देखभाल और प्राकृतिक उपचारों के नियमित इस्तेमाल से इन निशानों को 70% से 90% तक हल्का किया जा सकता है। नारियल तेलनारियल तेल में ‘लौरिक एसिड’ और विटामिन-E होता है जो नई कोशिकाओं के निर्माण में मदद करता है। हर रात सोने से पहले प्रभावित हिस्से पर गुनगुने नारियल तेल से मसाज करें। ऐसा करने से आपके चेहरे में निखार आता है और दाग धब्बे भी धीरे-धीरे दूर होने रखते हैं। एलोवेरा जेलआपके चेहरे के लिए काफी अच्छा है। ताजा एलोवेरा जेल न केवल त्वचा को ठंडक देता है, बल्कि इसमें मौजूद ‘एलोइसिन’ निशानों को हल्का करने और त्वचा को समतल बनाने में सहायक है। चेचक के निशान हटाने के लिए रोजाना चेहरे पर ताजे एलोवेरा का जेल लगाएं। एलोवेरा वैसे भी आपके चेहरे पर निखार लाता है। इसे अगर आप सही ढंग से उपयोग करेंगी तो जल्द ही आपके चेहरे से सारे दाग धब्बे दूर हो जाएंगे और आपका चेहरा खिला-खिला और अच्छा बन जाएगा। नींबू और शहदनींबू एक प्राकृतिक ब्लीचिंग एजेंट है जो दागों को हल्का करता है, जबकि शहद त्वचा को हाइड्रेटेड रखता है ताकि वह जल्दी रिकवर हो सके। आप हफ्ते में तीन दिन दोनों को मिलाकर चेहरे पर लगा सकते हैं। इसे लगाने से आपके चेहरे में रंगत आएगी। और दाग धब्बे भी धीरे-धीरे दूर होने लगेंगे।

सनातन धर्म: चेतना, परंपरा और लोकसंस्कार

  दीपक कुमार द्विवेदी सनातन धर्म केवल एक आस्था का विषय नहीं बल्कि जीवन की सबसे सूक्ष्म अनुभूति है। यह धर्म न तो किसी एक किताब में समाया है न ही किसी एक व्यक्ति की वाणी में न ही किसी एक विचारधारा तक सीमित है। यह तो एक प्रवाह है जो अनादि काल से बहता आ रहा है और अनंत काल तक बहता रहेगा। यह किसी समय विशेष की रचना नहीं बल्कि स्वयं समय से परे एक सनातन सत्य है। भारत में धर्म केवल किसी देवता की मूर्ति तक सीमित नहीं है। यहाँ ईश्वर न केवल मंदिरों में बल्कि कण-कण में समाया हुआ है। वह लोक में भी है शास्त्र में भी मूर्ति में भी निराकार में भी पीपल के वृक्ष में भी बहती नदी में भी खेतों की हरियाली में भी और आकाश में उड़ते पंछियों में भी। यही कारण है कि भारत में केवल ग्रंथों की पूजा नहीं होती बल्कि लोक-परंपराएँ भी उतनी ही महत्वपूर्ण हैं। गाँव-गाँव में अलग-अलग लोकदेवता पूजे जाते हैं डीह बाबा डीह चौरा माई संन्यासी बाबा बरम बाबा कुल देवता स्थान देवता ग्राम देवता। यहाँ हर नदी माँ है हर पर्वत देवता है हर वृक्ष में ईश्वर का वास है।  और यही सनातन धर्म की सबसे बड़ी विशेषता है वह हर जगह है वह हर किसी के लिए है और वह हर किसी के भीतर है। ऊपर वाला या सर्वव्याप्त परमात्मा? हमने अक्सर सुना होगा ऊपर वाला सब देख रहा है। लेकिन क्या कभी यह विचार आया कि ईश्वर केवल ऊपर ही क्यों? क्या वह केवल आसमान में बैठा कोई शासक है जो वहाँ से हमें नियंत्रित कर रहा है? क्या वह केवल किसी सिंहासन पर बैठा न्यायाधीश है जो हमें आदेश देता है और हमारे कर्मों का लेखा-जोखा रखता है? नहीं। यह अवधारणा हमारे धर्म की नहीं है। यह धारणा उन अब्राहमिक विचारधारा की है जो ईश्वर को केवल एक राजा के रूप में देखती हैं जो सातवें आसमान में बैठा शासन कर रहा है। लेकिन सनातन धर्म में ईश्वर केवल ऊपर वाला नहीं बल्कि भीतर वाला भी है बाहर वाला भी है आगे वाला भी है पीछे वाला भी है। वह दिशाओं से परे है वह स्थान से परे है वह समय से परे है। गीता में श्रीकृष्ण ने कहा अहमात्मा गुडाकेश सर्वभूताशयस्थितः। अर्थात् मैं प्रत्येक जीव के हृदय में स्थित हूँ। तो फिर यह ऊपर वाला वाली मानसिकता कहाँ से आई? यह हमारी परंपरा में नहीं थी। यह धीरे-धीरे उन अब्राहमिक मतों के प्रभाव से आई जो ईश्वर को केवल एक सत्ताधारी के रूप में देखते हैं। यदि हमारे चित्त में यह बात नहीं उभरती कि ईश्वर केवल ऊपर नहीं बल्कि हर कण-कण में है तो इसका अर्थ यही है कि हिन्दू चित्त पर अहिन्दू प्रभाव पड़ चुका है। लोकपरंपरा: धर्म की आत्मा यह भूमि केवल शास्त्रों की भूमि नहीं यह केवल वेदों और उपनिषदों की भूमि नहीं यह केवल दर्शन और तर्क की भूमि नहीं। यह लोक की भूमि है यह आस्था की भूमि है यह श्रद्धा की भूमि है। यहाँ धर्म केवल गूढ़ ग्रंथों तक सीमित नहीं बल्कि लोकगीतों में गूंजता है नृत्य में थिरकता है मेले-ठेलों में उमड़ता है खेतों-खलिहानों में महकता है। यही कारण है कि लोकपरंपरा में धर्म केवल पूजा तक सीमित नहीं वह जीवन का उत्सव है। गाँवों में देवी-देवताओं की पूजा किसी एक विशेष विधि से नहीं होती। कहीं पीपल के नीचे दीप जलते हैं कहीं नदी किनारे मन्नतें मांगी जाती हैं कहीं किसी वृक्ष को रक्षा सूत्र बांधा जाता है कहीं अनाज की पहली गठरी देवता को अर्पित की जाती है। छठ पूजा हो कांवड़ यात्रा हो गणेशोत्सव हो दुर्गा पूजा हो रामलीला हो ये सब केवल त्योहार नहीं बल्कि धर्म की जीवंत धारा हैं जो पीढ़ी दर पीढ़ी बहती आ रही हैं। विविधता में एकता ही सनातन की पहचानसनातन धर्म किसी एक किताब किसी एक व्यक्ति किसी एक विचारधारा पर निर्भर नहीं। यह विविधताओं का संगम है। यहाँ कोई मूर्ति पूजता है कोई निराकार ब्रह्म की उपासना करता है कोई ध्यान करता है कोई कीर्तन करता है कोई वेदों का अध्ययन करता है कोई लोकदेवताओं की पूजा करता है लेकिन सबका मार्ग एक ही सत्य की ओर जाता है। यही सनातन की सबसे बड़ी विशेषता है कि यहाँ हर मार्ग स्वीकृत है हर साधना मान्य है हर भक्ति स्वीकार्य है। यहाँ कोई यह नहीं कहता कि यही एकमात्र सत्य है और बाकी सब असत्य। यहाँ हर कोई अपनी प्रकृति के अनुसार अपने मार्ग पर चल सकता है। कोई कर्मयोग से कोई ज्ञानयोग से कोई भक्तियोग से कोई ध्यान से कोई मंत्र से कोई साधना से लेकिन अंततः सबका गंतव्य वही है। अपनी जड़ों की ओर लौटना होगा आज आवश्यकता इस बात की है कि हम अपनी जड़ों को पहचानें। हमें यह समझना होगा कि हिन्दू धर्म केवल कर्मकांडों तक सीमित नहीं बल्कि वह एक जीवंत चेतना है जो हर व्यक्ति के भीतर है। हमें अपने लोकदेवताओं को पुनः स्मरण करना होगा हमें अपनी परंपराओं को पुनः जागृत करना होगा हमें यह समझना होगा कि ईश्वर केवल सातवें आसमान में नहीं बैठा बल्कि वह हमारे चारों ओर है हमारे भीतर है हमारी साँसों में है हमारी चेतना में है। यदि हम अपनी परंपराओं को भूलते गए यदि हमने अपनी लोकपरंपराओं को छोड़ दिया यदि हमने अपने कुलदेवताओं को विस्मृत कर दिया यदि हमने अपने ग्रामदेवताओं का आदर करना बंद कर दिया यदि हमने यह मान लिया कि ईश्वर केवल ऊपर वाला है तो यह हमारी सबसे बड़ी हार होगी। हमें अपनी चेतना को जागृत करना होगा हमें अपनी परंपराओं को पुनः स्थापित करना होगा हमें यह समझना होगा कि हिन्दू धर्म केवल ग्रंथों में नहीं बल्कि जीवन के हर क्षण में है। ईश्वर हर जगह है हर किसी के लिए हैसनातन धर्म की यह व्यापकता ही उसकी महानता है। यह केवल पूजा-पद्धति नहीं यह केवल दर्शन नहीं यह केवल कर्मकांड नहीं यह संपूर्ण जीवन का सत्य है। यह हमें यह नहीं कहता कि ईश्वर केवल ऊपर है यह हमें यह नहीं कहता कि केवल एक ही मार्ग सत्य है यह हमें यह नहीं कहता कि केवल एक ही ग्रंथ अंतिम सत्य है। यह हमें यह सिखाता है कि ईश्वर हर कण में

Ravivar Mantra: सूर्य देव को प्रसन्न करने के लिए अपनाएं ये आसान पूजा विधि

नई दिल्ली। सूर्य भगवान की पूजा अर्चना करने से आपके जीवन में चल रही सभी परे दिन सूर्य भगवान की पूजा अर्चना करके उनकी कृपा प्राप्त कर लें। ज्योतिष शास्त्र में भी बताया गया है कि जो जातक सूर्य देव की पूजा अर्चना करेंगे उनका व्रत रहेंगे उनके घर परिवार में हमेशा सुख समृद्धि बनी रहेगी। सूर्य भगवान की कृपा से रुका हुआ काम भी बनने लगता है आपकी कई परेशानियां खत्म हो जाती है। आज के दिन आपको उनके कुछ चमत्कारी मंत्रों का भी जाप करना चाहिए। पूजा विधिआपको सूर्योदय से पहले उठकर स्नान कर लेना चाहिए। इसके बाद तांबे के लोटे में सिंदूर अक्षत और लाल फूल डालकर आप सूर्य भगवान को जल अर्पित करें। इसके बाद पूजा के चौकी में लाल रंग का कपड़ा रखकर सूर्य देव की तस्वीर स्थापित करें। भगवान को रोली, अक्षत, सुपारी, फूल आदि चढ़ाएं। फल व मिष्ठान का भोग लगाएं और फिर धूप दिखाएं।अब रविवार की व्रत कथा पढ़े या सुने। अंत में सूर्य देव की आरती जरूर करें। इन मंत्रों का करें जापॐ ह्रां भानवे नम: ॐ हृों खगाय नम: ॐ हृां मित्राय नम: ॐ हृीं रवये नम: ॐ ह्रीं ह्रीं सूर्याय नमः। ॐ ह्रां हिरण्यगर्भाय नमः ॐ ह्रीं ह्रीं सूर्याय सहस्रकिरणराय मनोवांछित फलम् देहि देहि स्वाहा।। ॐ ऐहि सूर्य सहस्त्रांशों तेजो राशे जगत्पते, अनुकंपयेमां भक्त्या, गृहाणार्घय दिवाकर:। ॐ ह्रीं घृणिः सूर्य आदित्यः क्लीं ॐ। ऊं घृ‍णिं सूर्य्य: आदित्य:। इस प्रकार करें सूर्य भगवान को प्रसन्नसूर्य भगवान को प्रसन्न करने के लिए आज के दिन आपको लाल कपड़ा पहनना चाहिए ऐसा माना जाता है कि सूर्य भगवान को लाल कपड़ा अधिक प्रिय है। इससे उनकी कृपा आपके ऊपर बनी रहती है। वहीं अगर आपका कोई भी काम नहीं बन रहा है तो आप सूर्य देव को अर्घ्य देते समय गुलहड़ का एक फूल लेकर सूर्य भगवान का मंत्र उच्चारण करके जल में डालकर अर्घ्य दें। इससे भगवान की कृपा पर बनी रहती है। इसके अलावा आज के दिन जरूरतमंदों को दान भी देना चाहिए।

6 अप्रैल का पंचांग : बैशाख कृष्ण की चतुर्थी पर सर्वार्थ सिद्धि योग व विजय मुहूर्त, नोट कर लें राहुकाल

नई दिल्ली। सनातन धर्म में दिन की शुरुआत हो या शुभ-अशुभ समय की जानकारी पंचांग के पांचों अंग तिथि, वार, नक्षत्र, योग और करण का विचार महत्वपूर्ण है। मान्यता है कि शुभ समय में किया गया कार्य फलदायी वहीं, अशुभ समय में किए कार्य में बाधा आती है और सफलता भी नहीं मिलती। 6 अप्रैल को सोमवार कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि दोपहर 2 बजकर 10 मिनट तक रहेगी। इसके बाद कृष्ण पक्ष की पंचमी तिथि शुरू हो जाएगी। उदयातिथि के अनुसार, पूरे दिन चतुर्थी तिथि का ही मान होगा। नक्षत्र की बात करें तो अनुराधा नक्षत्र 6 अप्रैल की रात 2 बजकर 57 मिनट तक रहेगा, जिसके बाद ज्येष्ठा नक्षत्र लगेगा। सूर्योदय 6 अप्रैल को 6 बजकर 6 मिनट पर होगा जबकि सूर्यास्त शाम 6 बजकर 42 मिनट पर होगा। चंद्रोदय रात 10 बजकर 55 मिनट पर और चंद्रास्त अगली सुबह 8 बजकर 12 मिनट पर होगा। दृक पंचांग के अनुसार 6 अप्रैल को सिद्धि योग दोपहर 3 बजकर 25 मिनट तक रहेगा। बालव करण दोपहर 2 बजकर 10 मिनट तक रहेगा, जिसके बाद कौलव करण लगेगा। इस दिन सर्वार्थ सिद्धि योग सुबह 6 बजकर 6 मिनट से अगली रात 2 बजकर 57 मिनट तक रहेगा, जो शुभ कार्यों के लिए विशेष रूप से अच्छा माना जाता है। विजय मुहूर्त दोपहर 2 बजकर 30 मिनट से 3 बजकर 20 मिनट तक रहेगा। ब्रह्म मुहूर्त सुबह 4 बजकर 34 मिनट से 5 बजकर 20 मिनट तक रहेगा। अभिजित मुहूर्त दोपहर 11 बजकर 59 मिनट से 12 बजकर 49 मिनट तक रहेगा। गोधूलि मुहूर्त शाम 6 बजकर 40 मिनट से 7 बजकर 3 मिनट तक रहेगा। सायाह्न सन्ध्या शाम 6 बजकर 42 मिनट से 7 बजकर 50 मिनट तक होगी। अमृत काल दोपहर 3 बजकर 19 मिनट से 5 बजकर 7 मिनट तक रहेगा। निशिता मुहूर्त 7 अप्रैल की रात 12 बजे से 12 बजकर 46 मिनट तक रहेगा। अशुभ समय की बात करें तो राहुकाल सुबह 7 बजकर 40 मिनट से 9 बजकर 15 मिनट तक रहेगा, इसलिए इस दौरान कोई महत्वपूर्ण काम शुरू न करें। यमगण्ड दोपहर 10 बजकर 49 मिनट से 12 बजकर 24 मिनट तक होगा। गुलिक काल दोपहर 1 बजकर 58 मिनट से 3 बजकर 33 मिनट तक रहेगा। दुर्मुहूर्त दोपहर 12 बजकर 49 मिनट से 1 बजकर 39 मिनट तक और दोपहर 3 बजकर 20 मिनट से 4 बजकर 11 मिनट तक होगा। गण्ड मूल 7 अप्रैल की सुबह 2 बजकर 57 मिनट से 6 बजकर 5 मिनट तक रहेगा। बाण रज सुबह 6 बजकर 9 मिनट से पूर्ण रात्रि तक रहेगा और विंछुड़ो पूरे दिन प्रभावी रहेगा।

डोनाल्ड ट्रंप की चेतावनी पर ईरान का तीखा जवाब, ‘मिडिल ईस्ट को बना देंगे नरक’

तेहरान। डोनाल्ड ट्रंप की सख्त चेतावनी के बाद ईरान ने कड़ा पलटवार किया है। ट्रंप ने कहा था कि यदि ईरान समझौता नहीं करता तो उस पर “कहर” बरसेगा। इसके जवाब में ईरान के रिवोल्यूशनरी गार्ड्स ने मिडिल ईस्ट में हालात और बिगड़ने की चेतावनी दी है।  खातम अल-अनबिया सेंट्रल हेडक्वार्टर के प्रवक्ता इब्राहिम जोल्फाघारी ने कहा कि अगर तनाव इसी तरह बढ़ता रहा तो पूरा क्षेत्र अमेरिका और इजरायल के लिए “नरक” बन सकता है। उन्होंने यह भी कहा कि ईरान को हराने का भ्रम विरोधियों को दलदल में फंसा देगा। ड्रोन और मिसाइल हमलों का दावा इब्राहिम जोल्फाघारी ने दावा किया कि ईरान ने अपने ड्रोन और मिसाइलों से इजरायल और अमेरिका से जुड़े कई ठिकानों को निशाना बनाया है। उनका यह बयान ऐसे समय में आया है जब अमेरिका और इजरायल, ईरान पर रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को खोलने का दबाव बना रहे हैं। ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रुथ सोशल पर पोस्ट करते हुए कहा कि ईरान के पास समझौते या होर्मुज खोलने के लिए बहुत कम समय बचा है। उन्होंने लिखा कि पहले 10 दिन का समय दिया गया था और अब 48 घंटे बाद कड़ी कार्रवाई हो सकती है। लगातार बदलते बयान, बढ़ता तनाव 28 फरवरी को अमेरिका और इजरायल के संयुक्त हमलों के बाद शुरू हुए इस संघर्ष में ट्रंप के बयान लगातार बदलते रहे हैं। एक ओर वे कूटनीतिक समाधान की बात करते हैं, तो दूसरी ओर ईरान को “स्टोन एज” में भेजने जैसी कड़ी चेतावनी भी देते हैं। युद्ध को एक महीने से ज्यादा समय हो चुका है, लेकिन होर्मुज अब भी पूरी तरह नहीं खुला है। दुनिया की करीब 20 प्रतिशत तेल और गैस आपूर्ति इसी समुद्री मार्ग से गुजरती है, जिससे इसकी अहमियत और बढ़ जाती है। ऊर्जा संकट और बढ़ती कीमतें होर्मुज के बंद रहने से वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति प्रभावित हुई है और ईंधन की कीमतों में तेज उछाल आया है। पहले जहां ब्रेंट क्रूड की कीमत 73 डॉलर प्रति बैरल थी, अब यह 100 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच चुकी है। हालांकि, कुछ देशों के जहाजों को सीमित रूप से होर्मुज से गुजरने की अनुमति दी गई है, जिनमें भारत भी शामिल है। हाल ही में एक फ्रांसीसी कंपनी का जहाज इस मार्ग से गुजरने वाला पहला बड़ा पश्चिमी यूरोपीय जहाज बना। इसके बावजूद, क्षेत्र में लगातार हो रहे ड्रोन और मिसाइल हमलों के चलते सामान्य समुद्री आवाजाही अब भी प्रभावित बनी हुई है।

ईस्टर के मौके पर देश के शीर्ष नेताओं का संदेश, पीएम मोदी समेत कई नेताओं ने दी बधाई

नई दिल्ली।ईस्टर के पावन अवसर पर देशभर में उत्साह और श्रद्धा का माहौल देखने को मिला। इस खास दिन पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु और लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने देशवासियों को शुभकामनाएं दीं और इस पर्व के आध्यात्मिक महत्व को साझा किया। नेताओं ने अपने संदेशों में शांति, प्रेम और भाईचारे की भावना को मजबूत करने पर जोर दिया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने संदेश में कहा कि ईस्टर आशा, नए जीवन और सकारात्मकता का प्रतीक है। उन्होंने कामना की कि यह पर्व सभी के जीवन में सुख, शांति और समृद्धि लेकर आए। साथ ही उन्होंने यीशु मसीह की शिक्षाओं को याद करते हुए कहा कि उनका जीवन हमें दया, करुणा और एकता का मार्ग दिखाता है। प्रधानमंत्री ने लोगों से इन मूल्यों को अपनाकर समाज में सद्भाव बढ़ाने की अपील की। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने भी ईस्टर की शुभकामनाएं देते हुए कहा कि यह दिन यीशु मसीह के पुनरुत्थान की याद दिलाता है, जो सत्य और प्रेम की जीत का प्रतीक है। उन्होंने कहा कि यह पर्व हमें त्याग, क्षमा और करुणा जैसे मूल्यों को अपने जीवन में अपनाने के लिए प्रेरित करता है। राष्ट्रपति ने देशवासियों से शांति और भाईचारे को बढ़ावा देने का संकल्प लेने का आह्वान किया। लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने भी अपने संदेश में कहा कि ईस्टर का पर्व नए आरंभ, आस्था और उम्मीद का संदेश देता है। उन्होंने उम्मीद जताई कि यह दिन सभी के जीवन में खुशियां, शांति और सकारात्मक ऊर्जा लेकर आएगा। क्या है ईस्टर का महत्व?ईसाई धर्म में ईस्टर सबसे महत्वपूर्ण पर्व माना जाता है, जिसे यीशु मसीह के पुनर्जीवित होने की स्मृति में मनाया जाता है। मान्यता के अनुसार, रोमन शासन द्वारा सूली पर चढ़ाए जाने के तीन दिन बाद यीशु मसीह मृतकों में से जीवित हो उठे थे। यह घटना पाप और मृत्यु पर विजय का प्रतीक मानी जाती है। ईस्टर ‘होली वीक’ का अंतिम और सबसे प्रमुख दिन होता है। इस सप्ताह में पाम संडे, मौंडी थर्सडे और गुड फ्राइडे जैसे महत्वपूर्ण दिन शामिल होते हैं, जो यीशु मसीह के जीवन की अहम घटनाओं को दर्शाते हैं। ईस्टर एग्स की परंपराइस पर्व का एक खास आकर्षण ‘ईस्टर एग्स’ भी होते हैं। अंडों को नए जीवन और आशा का प्रतीक माना जाता है। परंपरागत रूप से इन्हें रंग-बिरंगे या लाल रंग में सजाया जाता है, जो त्याग और पुनर्जन्म का संकेत देते हैं।

बैंकिंग सेक्टर में नौकरियों का सुनहरा अवसर, 1000 पदों पर निकली भर्ती, आवेदन प्रक्रिया शुरू

नई दिल्ली। सरकारी बैंक में नौकरी की तैयारी कर रहे युवाओं के लिए पंजाब एंड सिंध बैंक ने लोकल बैंक ऑफिसर के पदों पर भर्ती का नोटिफिकेशन जारी किया है। यह बैंक भारत सरकार के स्वामित्व वाला संस्थान है, जिसका मुख्यालय नई दिल्ली में स्थित है। जारी अधिसूचना के अनुसार, इस भर्ती के तहत कुल 1,000 पद भरे जाएंगे। इन पदों के लिए देश के अलग-अलग राज्यों में वैकेंसी निर्धारित की गई है। सबसे ज्यादा 200 पद उत्तर प्रदेश में हैं, जबकि गुजरात में 125 और पंजाब में 100 पदों पर भर्ती होगी। इसके अलावा छत्तीसगढ़ और ओडिशा में 80-80, तमिलनाडु में 65, कर्नाटक, मध्य प्रदेश और महाराष्ट्र में 60-60 पद, असम में 50, तेलंगाना में 30, पश्चिम बंगाल में 30, हिमाचल प्रदेश में 20, अरुणाचल प्रदेश में 15, झारखंड और केरल में 10-10 और नागालैंड में 5 पद शामिल हैं। इस भर्ती के लिए आवेदन करने वाले उम्मीदवारों की आयु 18 से 30 वर्ष के बीच होनी चाहिए। हालांकि, आरक्षित वर्ग के उम्मीदवारों को सरकारी नियमों के अनुसार आयु में छूट दी जाएगी। शैक्षणिक योग्यता की बात करें तो किसी मान्यता प्राप्त संस्थान से ग्रेजुएशन करने वाले उम्मीदवार इन पदों के लिए आवेदन कर सकते हैं। चयन प्रक्रिया दो चरणों में होगी। पहले लिखित परीक्षा और उसके बाद इंटरव्यू। अंतिम चयन मेरिट के आधार पर किया जाएगा। चयनित उम्मीदवारों को आकर्षक वेतन दिया जाएगा। इस पद पर नियुक्ति मिलने के बाद उम्मीदवारों को 48,480 रुपए से लेकर 85,920 रुपए तक का मासिक वेतन मिलेगा। आवेदन शुल्क भी निर्धारित किया गया है। सामान्य, ईडब्ल्यूएस और ओबीसी वर्ग के उम्मीदवारों को 850 रुपए के साथ लागू टैक्स और पेमेंट गेटवे शुल्क देना होगा। वहीं, एससी, एसटी और पीडब्ल्यूडी वर्ग के उम्मीदवारों के लिए शुल्क 100 रुपए रखा गया है, जिस पर अतिरिक्त टैक्स और चार्ज लागू होंगे। इच्छुक और योग्य उम्मीदवार ऑनलाइन माध्यम से आवेदन कर सकते हैं। आवेदन करने की अंतिम तिथि 20 अप्रैल 2026 तय की गई है। उम्मीदवारों को सलाह दी गई है कि वे आवेदन फॉर्म भरने के बाद उसका प्रिंटआउट भविष्य के लिए सुरक्षित रख लें। यह भर्ती उन युवाओं के लिए शानदार अवसर है, जो बैंकिंग सेक्टर में अपना करियर बनाना चाहते हैं।

केरल में सियासी हलचल तेज! अमित शाह के रोड शो से पहले बेपोर में बढ़ी हलचल

नई दिल्ली।केरल के बेपोर में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के प्रस्तावित रोड शो से पहले सियासी माहौल पूरी तरह गरमा गया है। रविवार को होने वाले इस बड़े राजनीतिक कार्यक्रम को लेकर तैयारियां जोरों पर हैं और स्थानीय स्तर पर खासा उत्साह देखने को मिल रहा है। सड़कें सजाई जा रही हैं, कार्यकर्ताओं की भीड़ जुट रही है और जगह-जगह स्वागत की तैयारियां अंतिम चरण में हैं। ऐसे में बेपोर एक तरह से राजनीतिक गतिविधियों का केंद्र बन गया है। स्थानीय लोगों में भी इस कार्यक्रम को लेकर जबरदस्त उत्सुकता है। कई लोगों ने मीडिया से बातचीत में कहा कि वे अमित शाह के स्वागत के लिए बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं। एक स्थानीय नागरिक ने कहा कि “हमारे नेता अमित शाह यहां आ रहे हैं, यह हमारे लिए गर्व की बात है। बड़ी संख्या में लोग उनके रोड शो में शामिल होने के लिए तैयार हैं।” वहीं, कुछ भाजपा समर्थकों ने उम्मीद जताई कि अगर भारतीय जनता पार्टी को राज्य में मौका मिलता है तो विकास की रफ्तार तेज होगी और राजनीतिक बदलाव देखने को मिलेगा। दिनभर रहेंगे व्यस्त, कई कार्यक्रमों में लेंगे हिस्साअमित शाह का कार्यक्रम केवल बेपोर तक सीमित नहीं रहेगा। रोड शो के बाद वे एर्नाकुलम के कुन्नाथुनाद क्षेत्र में एक जनसभा को संबोधित करेंगे, जहां पार्टी कार्यकर्ताओं और आम जनता से संवाद करेंगे। इसके बाद शाम को तिरुवनंतपुरम के कट्टकड़ा इलाके में उनकी एक और बड़ी जनसभा प्रस्तावित है। दिन के अंत में वे थंपानूर में प्रवासी कार्यकर्ताओं के साथ बैठक भी करेंगे। इस तरह उनका पूरा दिन राजनीतिक गतिविधियों और जनसंपर्क कार्यक्रमों से भरा रहेगा। भाजपा का चुनावी अभियान तेजइसी बीच भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष और केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा भी केरल में चुनावी अभियान को धार देने पहुंचे हैं। उन्होंने तिरुवनंतपुरम में आयोजित एक कार्यक्रम में केंद्र सरकार की उपलब्धियों को गिनाते हुए कहा कि प्रधानमंत्री के नेतृत्व में देश में पिछले 11 वर्षों में शासन व्यवस्था और राजनीतिक संस्कृति में बड़ा बदलाव आया है। उन्होंने दावा किया कि भाजपा सरकारें जनहित, जवाबदेही और विकास के मुद्दों पर काम करती हैं, जिससे अन्य दलों को भी अपनी कार्यशैली बदलनी पड़ी है। नड्डा ने यह भी कहा कि पहले की राजनीति में विभाजन और तुष्टीकरण का बोलबाला था, लेकिन अब विकास-केन्द्रित राजनीति का दौर है। उन्होंने कार्यकर्ताओं से आह्वान किया कि वे इस संदेश को आम जनता तक पहुंचाएं और राज्य में पार्टी को मजबूत करें। बदलाव की उम्मीद या सियासी रणनीति?केरल में पारंपरिक रूप से मजबूत राजनीतिक दलों के बीच भाजपा अपनी जगह बनाने की कोशिश कर रही है। ऐसे में अमित शाह और जेपी नड्डा के दौरे को पार्टी की रणनीतिक पहल के तौर पर देखा जा रहा है। बेपोर में उमड़ा उत्साह यह संकेत जरूर देता है कि भाजपा राज्य में अपनी पकड़ मजबूत करने के लिए पूरी ताकत झोंक रही है।