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MP के 126 अस्पतालों की आयुष्मान मान्यता खत्म: मुफ्त इलाज पर रोक, मरीजों की परेशानी बढ़ी

भोपाल। मध्यप्रदेश में आयुष्मान योजना के तहत मुफ्त इलाज कराने वाले लोगों के लिए महत्वपूर्ण खबर सामने आई है। प्रदेश के 126 अस्पतालों की आयुष्मान मान्यता खत्म हो गई है। इसमें राजधानी भोपाल के 51, इंदौर के 30, ग्वालियर के 33 और जबलपुर के 12 अस्पताल शामिल हैं। कुल मिलाकर चार प्रमुख शहरों में 398 में से 126 अस्पताल प्रभावित हुए हैं। जानकारी के अनुसार, NABH सर्टिफिकेट न मिलने के कारण इन अस्पतालों में अब मुफ्त इलाज उपलब्ध नहीं होगा। वहीं, फुल NABH प्रमाणित अस्पताल “डीम्ड इंपैनलमेंट” का लाभ प्राप्त करेंगे और अस्पतालों को उनकी गुणवत्ता के आधार पर भुगतान किया जाएगा। एंट्री लेवल NABH अस्पतालों को 10 प्रतिशत अतिरिक्त भुगतान मिलेगा। साथ ही मरीजों के फीडबैक से अस्पतालों की निगरानी भी की जाएगी। NABH सर्टिफिकेट अस्पतालों की गुणवत्ता और सुरक्षा का प्रमाण होता है। इसमें 600 से अधिक मानकों पर अस्पतालों की जांच की जाती है। ये मानक मरीजों की सुरक्षा, साफ-सफाई, दवाओं की उपलब्धता, नर्सिंग स्टाफ, इमरजेंसी सेवाएं और सर्जरी प्रक्रियाओं से जुड़े होते हैं। सरकार का मानना है कि NABH प्रमाणपत्र मरीजों को सुरक्षित और भरोसेमंद इलाज की गारंटी देता है। इस फैसले के बाद प्रभावित अस्पतालों के मरीजों को अब मुफ्त इलाज के विकल्प सीमित होंगे। मरीजों को अब अपने नजदीकी फुल NABH प्रमाणित अस्पतालों में इलाज कराने की आवश्यकता होगी। विशेषज्ञों का कहना है कि इस कदम से मरीजों की सुरक्षा बढ़ेगी, लेकिन अल्पकाल में लोग असुविधा और परेशानियों का सामना कर सकते हैं। मंत्रालय ने बताया कि आगामी दिनों में अस्पतालों को NABH मानकों के अनुरूप तैयार करने के लिए मार्गदर्शन दिया जाएगा। वहीं, मरीजों से फीडबैक लेकर अस्पतालों की सेवाओं की निगरानी की जाएगी ताकि स्वास्थ्य सुविधाओं की गुणवत्ता सुनिश्चित की जा सके। इस बदलाव से मध्यप्रदेश के स्वास्थ्य सेवा क्षेत्र में गुणवत्ता सुधार और मरीजों की सुरक्षा पर ध्यान केंद्रित करने की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है, हालांकि फिलहाल लोगों को अस्पतालों के चयन में अतिरिक्त सावधानी बरतनी होगी।

समुद्री जीवन की लाइफलाइन ‘कोरल रीफ’ पर संकट, समझिए कोरल ब्लीचिंग का असर

नई दिल्ली।समुद्र की गहराइयों में मौजूद कोरल रीफ यानी मूंगा चट्टानें प्रकृति की सबसे अद्भुत और जीवंत संरचनाओं में गिनी जाती हैं। इन्हें ‘समुद्र का वर्षावन’ भी कहा जाता है, क्योंकि ये बेहद कम क्षेत्र में फैली होने के बावजूद समुद्री जैव-विविधता का बड़ा आधार हैं। वैज्ञानिकों के अनुसार, दुनिया के महासागरों के सिर्फ 1 प्रतिशत हिस्से में मौजूद ये रीफ करीब 25 प्रतिशत समुद्री जीवों को आश्रय, भोजन और सुरक्षा प्रदान करती हैं। छोटे-छोटे जीवों यानी पॉलिप्स द्वारा हजारों साल में बनने वाली ये संरचनाएं समुद्र की पारिस्थितिकी को संतुलित रखने में अहम भूमिका निभाती हैं। कोरल रीफ केवल जैव-विविधता तक सीमित नहीं हैं, बल्कि ये तटीय क्षेत्रों की सुरक्षा में भी महत्वपूर्ण योगदान देती हैं। ये चट्टानें समुद्री तूफानों और चक्रवातों की तीव्रता को कम कर तटों को क्षरण से बचाती हैं। इसके अलावा, मत्स्य पालन, पर्यटन और शोध गतिविधियों के जरिए ये वैश्विक अर्थव्यवस्था को भी मजबूती देती हैं। ऑस्ट्रेलिया में स्थित ग्रेट बैरियर रीफ दुनिया की सबसे बड़ी कोरल रीफ है, जो हजारों समुद्री प्रजातियों का घर है और लाखों लोगों की आजीविका का आधार बनी हुई है। क्या है कोरल और रीफ में अंतर?वैज्ञानिक दृष्टि से देखें तो ‘रीफ’ समुद्र तल से ऊपर उठी किसी भी संरचना को कहा जाता है, जबकि ‘कोरल’ सूक्ष्म जीव होते हैं जो कैल्शियम कार्बोनेट का ढांचा बनाते हैं। इन कोरल के समूह को ‘कोरल कॉलोनी’ कहा जाता है और जब ये बड़े पैमाने पर संरचना बनाते हैं, तो उसे कोरल रीफ कहा जाता है। कोरल मुख्यतः दो प्रकार के होते हैं—कठोर और कोमल। कठोर कोरल ही रीफ का मजबूत ढांचा तैयार करते हैं। क्यों खतरनाक है ‘कोरल ब्लीचिंग’?आज इन खूबसूरत संरचनाओं पर सबसे बड़ा खतरा कोरल ब्लीचिंग का मंडरा रहा है। यह एक ऐसी प्रक्रिया है, जिसमें समुद्र का तापमान बढ़ने पर कोरल अपने अंदर मौजूद ‘जूक्सैन्थेली’ नामक शैवाल को बाहर निकाल देते हैं। यही शैवाल कोरल को रंग और पोषण देता है। इसके निकलने से कोरल का रंग सफेद हो जाता है और वह कमजोर पड़ जाता है। यदि तापमान लंबे समय तक अधिक बना रहे, तो कोरल की मृत्यु भी हो सकती है। हाल के वर्षों में यह समस्या तेजी से बढ़ी है। 2023 से 2025 के बीच हुई वैश्विक ब्लीचिंग घटना ने दुनिया के लगभग 84 प्रतिशत कोरल रीफ को प्रभावित किया, जो अब तक की सबसे गंभीर स्थिति मानी जा रही है। इसके अलावा प्रदूषण, समुद्री गाद और जलवायु परिवर्तन भी इस संकट को और गहरा कर रहे हैं। क्यों जरूरी है संरक्षण?विशेषज्ञों का मानना है कि यदि कोरल रीफ खत्म होते हैं, तो इसका असर सिर्फ समुद्री जीवन तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि तटीय आबादी, खाद्य सुरक्षा और वैश्विक अर्थव्यवस्था पर भी गहरा प्रभाव पड़ेगा। इसलिए इनका संरक्षण बेहद जरूरी है। समुद्र के इस ‘जीवंत खजाने’ को बचाने के लिए जलवायु परिवर्तन पर नियंत्रण, प्रदूषण कम करना और सतत विकास के उपाय अपनाना समय की मांग है।

विदेशी निधि से धर्मांतरण : बदल रही है भारत की नीति

– डॉ. मयंक चतुर्वेदीभारत जैसे विविधतापूर्ण और लोकतांत्रिक देश में गैर-सरकारी संगठन सामाजिक परिवर्तन के महत्वपूर्ण वाहक रहे हैं। शिक्षा, स्वास्थ्य, महिला सशक्तिकरण, पर्यावरण संरक्षण और ग्रामीण विकास जैसे क्षेत्रों में इन संस्थाओं ने उल्लेखनीय योगदान दिया है, किंतु पिछले कई वर्षों में विदेशी निधि के दुरुपयोग तथा उससे जुड़े धर्मांतरण और सुरक्षा संबंधी मुद्दों ने एक गंभीर बहस को भी जन्म दिया है। यही कारण है कि केंद्र सरकार ने विदेशी अनुदान नियमन कानून (एफसीआइए) को अधिक सख्त और पारदर्शी बनाने की दिशा में निर्णायक कदम आगे बढ़ा दिए हैं। कहना होगा कि इसमें कानूनी संशोधन वास्‍तव में राष्ट्रीय सुरक्षा, सामाजिक संतुलन और जवाबदेही सुनिश्चित करने का व्यापक प्रयास है। दरअसल, भारत में विदेशी धन के प्रवाह को लेकर यह देखा जा रहा था कि कई गैर-सरकारी संगठन विदेशी अनुदान प्राप्त कर रहे थे, परंतु उनके उपयोग और उद्देश्य को लेकर गंभीर अनियमितताएं सामने आ रही थीं। यही वह पृष्ठभूमि है, जिसने “एफसीआइए” में सख्ती को आवश्यक बना दिया। आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, केंद्र में मोदी (भाजपा) सरकार आने के बाद से अब तक 20 हजार से अधिक गैर-सरकारी संगठनों के पंजीकरण रद्द या समाप्त किए जा चुके हैं। वर्तमान में लगभग 16 हजार गैर-सरकारी संगठन ही ऐसे हैं, जिन्हें विदेशी निधि प्राप्त करने की अनुमति है और उन्हें हर वर्ष लगभग 22 हजार करोड़ रुपये की विदेशी सहायता मिलती है। यह आंकड़ा अपने आप में इस बात का संकेत देता है कि विदेशी निधि का दायरा कितना व्यापक है। जब इतनी बड़ी मात्रा में धन देश के भीतर आ रहा हो, तो उसके पारदर्शी और वैध उपयोग को सुनिश्चित करना सरकार की जिम्मेदारी बन जाती है। कई मामलों में यह पाया गया कि संस्थाओं ने निर्धारित उद्देश्यों से हटकर धन का उपयोग किया, लेखा-जोखा प्रस्तुत नहीं किया या फिर धन को अन्य गतिविधियों में स्थानांतरित कर दिया। धर्मांतरण के आरोप और सामाजिक संवेदनशीलतागैर-सरकारी संगठनों से जुड़े सबसे संवेदनशील मुद्दों में धर्मांतरण का विषय प्रमुख रहा है। कुछ मामलों में आरोप ही नहीं लगे, प्रमाणों के साथ साक्ष्‍य रूप में सामने आ गया कि कैसे विदेशी निधि का उपयोग गरीब, आदिवासी और वंचित वर्गों को प्रलोभन देकर धर्म परिवर्तन कराने में किया गया। सामाजिक सेवा; जैसे शिक्षा और स्वास्थ्य की आड़ में धार्मिक प्रभाव बढ़ाने के प्रयासों की शिकायतें विशेष रूप से जनजाति क्षेत्र से लगातार सामने आईं और अब भी आ रही हैं। कुछ संगठनों पर यह आरोप लगे कि उन्होंने सामाजिक कार्यों के माध्यम से धार्मिक उद्देश्य को आगे बढ़ाया। हालांकि, यह भी ध्यान देने योग्य है कि हर मामले में ये आरोप न्यायिक रूप से सिद्ध नहीं हुए हैं, लेकिन इन शिकायतों ने सरकार को सतर्क जरूर किया है। धर्मांतरण का मुद्दा भारत जैसे बहु-धार्मिक समाज में अत्यंत संवेदनशील है, और इससे सामाजिक संतुलन प्रभावित हो सकता है। विवादों में घिरे प्रमुख संगठन पिछले वर्षों में कई राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय गैर-सरकारी संगठन जांच के दायरे में आए। कुछ संगठनों पर विदेशी निधि के दुरुपयोग के आरोप लगे, तो कुछ पर नीति-निर्माण को प्रभावित करने या विकास परियोजनाओं का विरोध करने के आरोप सामने आए। उदाहरण के तौर पर, ‘ग्रीनपीस इंडिया’ पर यह आरोप लगा कि उसने विदेशी निधि के माध्यम से भारत की विकास परियोजनाओं के खिलाफ अभियान चलाए, जिससे आर्थिक गतिविधियों पर असर पड़ा। इसी प्रकार, ‘एमनेस्टी इंटरनेशनल इंडिया’ को वित्तीय अनियमितताओं के कारण अपने संचालन को सीमित करना पड़ा। नीतिगत संस्थानों में ‘सेंटर फॉर पॉलिसी रिसर्च’ और ‘ऑक्सफैम इंडिया’ जैसे अनेक संगठनों पर अब तक कार्रवाई हुई, जहां विदेशी निधि के उपयोग को लेकर सवाल उठे हैं। राजनीतिक रूप से संवेदनशील मामलों में राजीव गांधी फाउंडेशन और राजीव गांधी चैरिटेबल ट्रस्ट के विदेशी अंशदान विनियमन पंजीकरण रद्द किए गए। वस्‍तुत: सुरक्षा एजेंसियों की नजर में कुछ संगठनों की गतिविधियां अधिक गंभीर पाई गईं। पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया और उससे जुड़े रिहैब इंडिया फाउंडेशन पर कट्टरपंथ और विदेशी निधि के दुरुपयोग के आरोप सिद्ध हुए। वहीं इस्लामिक रिसर्च फाउंडेशन, जिसकी स्थापना जाकिर नाइक ने की थी, पर वैचारिक कट्टरता फैलाने के आरोप सामने आते रहे हैं। सख्ती और पारदर्शिता की दिशा में कदमइन परिस्थितियों को देखते हुए केंद्र सरकार ‘विदेशी अंशदान विनियमन अधिनियम में संशोधन का प्रस्ताव लेकर सामने आई है। इस संशोधन का मुख्य उद्देश्य विदेशी निधि के उपयोग को अधिक पारदर्शी, जवाबदेह और नियंत्रित बनाना है। प्रस्तावित संशोधन के तहत यदि किसी गैर-सरकारी संगठन का पंजीकरण रद्द हो जाता है, तो उसके द्वारा विदेशी धन से निर्मित संपत्तियों को जब्त करने का प्रावधान किया गया है। इसके अलावा, इन संपत्तियों के प्रबंधन के लिए केंद्र और राज्य स्तर पर एक विशेष प्राधिकरण स्थापित करने की योजना है। साथ ही, पंजीकरण के नवीनीकरण और विदेशी अनुदान के उपयोग के लिए समय-सीमा निर्धारित करने का भी प्रावधान किया गया है। यदि कोई संस्था समय पर नवीनीकरण नहीं कराती या उसका आवेदन अस्वीकार हो जाता है, तो वह स्वतः विदेशी निधि प्राप्त करने के अधिकार से वंचित हो जाएगी। सरकार का पक्ष और तर्कवस्‍तुत: गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय ने संसद में इस विधेयक का समर्थन करते हुए स्पष्ट किया कि यह कानून उन तत्वों के खिलाफ सख्त कदम है, जो विदेशी निधि का उपयोग व्यक्तिगत लाभ, जबरन धर्मांतरण या राष्ट्रविरोधी गतिविधियों के लिए करते हैं। सरकार का मानना है कि 2010 के विदेशी अंशदान विनियमन अधिनियम में कई प्रावधान अस्पष्ट थे, जिनका लाभ उठाकर कुछ संस्थाएं नियमों का उल्लंघन कर रही थीं। नए संशोधन के माध्यम से इन कमियों को दूर करने का प्रयास किया गया है, ताकि पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित की जा सके। समग्र रूप से देखा जाए तो विदेशी अंशदान विनियमन संशोधन शासन व्यवस्था में पारदर्शिता और राष्ट्रीय हितों की रक्षा का महत्वपूर्ण प्रयास है। निश्‍चित ही विदेशी निधि के दुरुपयोग, धर्मांतरण और सुरक्षा से जुड़े मुद्दों ने सरकार को सख्त कदम उठाने के लिए प्रेरित किया है। यदि यह कानून लागू किया जाता है, तो यह देश में चल रहीं अनियमितताओं पर अंकुश लगाने के साथ ही देश में कार्यरत विश्वसनीय और ईमानदार गैर-सरकारी संगठनों के लिए एक स्वच्छ, जवाबदेह और विश्वासपूर्ण वातावरण भी सुनिश्चित करेगा। अंततः, यही किसी भी लोकतांत्रिक समाज की मजबूती का आधार है और इसी पर आज केंद्र की मोदी सरकार प्रखरता के साथ चलती दिखाई

मंदिर में चक्कर लगाने का विज्ञान! क्लॉकवाइज प्रदक्षिणा के पीछे छिपा रहस्य

नई दिल्ली।मंदिरों में घड़ी की सुई की दिशा में यानी क्लॉकवाइज प्रदक्षिणा (परिक्रमा) करने की परंपरा सदियों पुरानी है। यह सिर्फ एक धार्मिक रिवाज नहीं, बल्कि आध्यात्मिक और वैज्ञानिक दृष्टि से भी बेहद महत्वपूर्ण मानी जाती है। माना जाता है कि मंदिर का गर्भगृह एक शक्तिशाली ऊर्जा केंद्र होता है, जहां से सकारात्मक ऊर्जा निरंतर प्रवाहित होती रहती है। आध्यात्मिक कारण: ऊर्जा से जुड़ने का माध्यमहिंदू धर्म में प्रदक्षिणा का अर्थ होता है-ईश्वर को अपने जीवन का केंद्र मानकर उनके चारों ओर घूमना। क्लॉकवाइज दिशा में चलने से देवता हमेशा आपकी दाईं ओर रहते हैं, जिसे शुभ और पवित्र माना गया है। इससे मन में श्रद्धा, शांति और सकारात्मकता का संचार होता है। मान्यता है कि इस प्रक्रिया से व्यक्ति की नकारात्मक ऊर्जा कम होती है और वह आध्यात्मिक रूप से मजबूत बनता है। वैज्ञानिक कारण: ऊर्जा प्रवाह के साथ तालमेलक्लॉकवाइज प्रदक्षिणा के पीछे एक वैज्ञानिक सोच भी जुड़ी है। Sadhguru Jaggi Vasudev के अनुसार, उत्तरी गोलार्ध में ऊर्जा का प्रवाह घड़ी की दिशा में होता है। इसी कारण मंदिरों में उसी दिशा में परिक्रमा करने से शरीर उस ऊर्जा के साथ तालमेल बैठाता है। इससे मानसिक शांति, शारीरिक स्फूर्ति और बेहतर एकाग्रता प्राप्त होती है। यह भी कहा जाता है कि इस दिशा में चलने से शरीर ब्रह्मांडीय ऊर्जा को अधिक प्रभावी तरीके से अवशोषित कर पाता है। गीले कपड़ों में प्रदक्षिणा का महत्वधर्मशास्त्रों में बताया गया है कि गीले कपड़ों में परिक्रमा करने से ऊर्जा ग्रहण करने की क्षमता बढ़ जाती है। पुराने समय में मंदिरों के पास कुंड या कुएं होते थे, जहां स्नान कर भक्त गीले वस्त्रों में ही प्रदक्षिणा करते थे। गीलापन शरीर को ऊर्जा के प्रति अधिक संवेदनशील बनाता है, जिससे सकारात्मक ऊर्जा का प्रभाव बढ़ जाता है। अलग-अलग देवताओं की परिक्रमा संख्याशास्त्रों में विभिन्न देवताओं के लिए प्रदक्षिणा की संख्या भी निर्धारित है- भगवान गणेश: 3 बारभगवान विष्णु: 4 बारमां दुर्गा: 1 बारभगवान शिव: आधी परिक्रमा (जलधारी तक)यह नियम ऊर्जा संतुलन और धार्मिक मान्यताओं के आधार पर बनाए गए हैं। मंदिर में क्लॉकवाइज प्रदक्षिणा करना केवल परंपरा नहीं, बल्कि एक ऐसा अभ्यास है जो शरीर, मन और आत्मा को संतुलित करता है। यह हमें प्राकृतिक ऊर्जा के साथ जोड़कर मानसिक शांति और सकारात्मकता प्रदान करता है।

अनूपपुर बिल्डिंग हादसा: तीन की मौत, CM डॉ मोहन यादव ने दुख जताया और पीड़ितों को मुआवजे का ऐलान किया

भोपाल। अनूपपुर के कोतमा बस स्टैंड के पास शनिवार को अग्रवाल लॉज की तीन मंजिला इमारत भरभराकर गिर गई, जिससे तीन लोगों की मौत हो गई और कई लोग घायल हो गए। हादसे के समय इमारत के बगल में निर्माण कार्य भी चल रहा था, जिससे यह घटना होने का अनुमान लगाया जा रहा है। मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव ने इस घटना पर गहरा दुख व्यक्त किया है और प्रभावित परिवारों को मुआवजा देने का ऐलान किया। मृतकों के परिजनों को मुख्यमंत्री स्वेच्छा अनुदान और संबल योजना के तहत चार-चार लाख रुपये दिए जाएंगे। इसके अलावा, रेड क्रॉस से एक-एक लाख रुपये की आर्थिक सहायता प्रदान की जाएगी। घायलों को मुख्यमंत्री स्वेच्छा अनुदान से दो-दो लाख और रेड क्रॉस से पचास-पचास हजार रुपये की राशि दी जाएगी। सीएम डॉ मोहन यादव ने लिखा कि राज्य सरकार प्रभावित परिवारों के साथ खड़ी है और ईश्वर से दिवंगतों की आत्मा की शांति एवं घायलों के शीघ्र स्वास्थ्य लाभ की कामना करता है। उन्होंने कहा कि प्रभावित परिजनों को तत्काल आर्थिक सहायता दी जा रही है ताकि उन्हें राहत मिले और स्थिति संभाली जा सके। हादसे की सूचना मिलते ही रेस्क्यू टीम, कोतमा पुलिस, नगर पालिका और एसईसीएल की टीम तुरंत मौके पर पहुंची और बचाव कार्य शुरू किया। मलबे के नीचे दबे हुए लोगों को सुरक्षित बाहर निकाला गया और अस्पताल में भर्ती कराया गया। वहीं प्रशासन ने घटना की जांच शुरू कर दी है। इस घटना ने शहर और राज्य में इमारतों की सुरक्षा और निर्माण मानकों के पालन की आवश्यकता को फिर से उजागर किया है। सरकार ने प्रभावित परिवारों और घायलों के साथ खड़े रहने का भरोसा दिया है और कहा है कि पूरे मामले की गंभीरता से जांच की जाएगी ताकि भविष्य में ऐसी त्रासदी से बचा जा सके।

बेंगलुरु में एनएच 44 का डिजाइन खराब, रखरखाव पर भी नहीं दिया जाता ध्यान: किरण मजूमदार-शॉ

नई दिल्ली। फार्मा कंपनी बायोकॉन लिमिटेड की एग्जीक्यूटिव चेयरमैन किरण मजूमदार-शॉ ने रविवार को एनएच 44 की डिजाइन और रखरखाव को लेकर सोशल मीडिया पर नाराजगी जताई और कहा कि कई बार शिकायत करने के बाद भी इस मुद्दे का समाधान नहीं किया जा रहा है। एनएच 44, बेंगलुरु को होसुर से जोड़ने वाला प्रमुख आईटी कॉरिडोर है। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर कहा, “पूरे देश में एनएचएआई अपने सड़क बुनियादी ढांचे की प्रशंसा करता है, फिर भी देश का प्रमुख आईटी कॉरिडोर एनएच44 (पूर्व में एनएच7) यानी होसुर रोड इतनी घटिया ढंग से डिजाइन किया गया और इसका रखरखाव खराब क्यों है?” उन्होंने पोस्ट में आगे लिखा, “ये देखने में बेहद खराब है – डिवाइडर और बैरिकेड्स की हालत बिल्कुल भी ठीक नहीं है और फुटपाथ पर डामर नहीं बिछा है।” आगे उन्होंने केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी को टैग करते हुए लिखा कि सालों से कई शिकायतें करने के बावजूद, यहां कोई कार्रवाई नहीं हुई है। इसके साथ ही उन्होंने एनएचएआई को टैग करते हुए लिखा, “क्या यही वह रिकॉर्ड है जिसे एनएचएआई गौरवशाली मानता है?” इस पहले भी, देश की प्रमुख महिला उद्योगपति में शामिल शॉ ने पिछले साल देश में, विशेषकर दिल्ली, मुंबई, बेंगलुरु जैसे बड़े महानगरों में, कचरे की बढ़ती समस्या पर गंभीर चिंता जताई थी। पिछले साल अक्टूबर में एक एक्स पोस्ट में, उन्होंने इन शहरों की नगरपालिकाओं और राज्य सरकारों की इस मुद्दे के प्रति घोर अज्ञानता और लापरवाही की कड़ी आलोचना की थी। यह समस्या हाल ही में चिंताजनक स्तर पर पहुंच गई है और नागरिकों के स्वास्थ्य के लिए गंभीर खतरा बन गई है। भारत की सबसे धनी महिलाओं में शामिल शॉ पहली पीढ़ी की कारोबारी है और उन्होंने 1978 में बायोफार्मास्युटिकल फर्म बायोकॉन की स्थापना की थी। फोर्ब्स के मुताबिक, उनकी नेटवर्थ करीब 3.2 अरब डॉलर है।

IPL 2026: CSK की बड़ी गलती? छोड़ा हुआ खिलाड़ी अब दूसरी टीम के लिए बन रहा हीरो

नई दिल्ली।चेन्नई सुपर किंग्स (सीएसके) ने आईपीएल 2024 के लिए हुए मेगा ऑक्शन में उत्तर प्रदेश के मेरठ के एक विकेटकीपर बल्लेबाज को 8.40 करोड़ में खरीदा था। अनकैप्ड खिलाड़ी के लिए सीएसके जैसी बड़ी फ्रेंचाइजी द्वारा इतनी बड़ी राशि खर्च करना सभी को हैरान कर गया था। ये खिलाड़ी थे समीर रिजवी, जो आईपीएल 2026 में डीसी के लिए सबसे बड़े मैच विनर बनकर उभरे हैं। सीएसके के बारे में कहा जाता है कि फ्रेंचाइजी जिन खिलाड़ियों पर निवेश करती है, उन्हें उभरने और अपनी क्षमता का प्रदर्शन करने का पूरा समय देती है। समीर रिजवी के मामले में ऐसा नहीं था। पहली ही गेंद पर छक्का लगाकर सीएसके की तरफ से अपने आईपीएल करियर की शुरुआत करने वाले रिजवी के लिए आईपीएल 2024 उम्मीदों के मुताबिक नहीं रहा। रिजवी सीजन के 8 मैचों की 5 पारियों में 12.75 के साधारण औसत से महज 51 रन बना सके। सीएसके का भरोसा रिजवी से उठ गया और आईपीएल 2025 से पहले टीम ने उन्हें रिलीज कर दिया। रिजवी घरेलू क्रिकेट खेल रहे थे और लगातार रन बनाते रहे।आईपीएल 2025 के लिए हुए मेगा ऑक्शन में दिल्ली कैपिटल्स (डीसी) ने समीर पर भरोसा जताया और 95 लाख रुपये में अपने साथ जोड़ा। रिजवी को आईपीएल 2025 में डीसी की तरफ से 5 मैच खेलने को मिले। प्रदर्शन करिश्माई तो नहीं रहा, लेकिन साधारण से बेहतर रहा। रिजवी ने 4 पारियों में 1 अर्धशतक लगाते हुए 121 रन बनाए। नाबाद 58 उनका श्रेष्ठ स्कोर रहा। इस प्रदर्शन के बाद डीसी का भरोसा रिजवी पर और बढ़ा, और आईपीएल 2026 के लिए भी वह टीम का हिस्सा बने रहे। आईपीएल 2026 में समीर रिजवी टीम के भरोसे पर खरे उतरे हैं और टीम के लिए सबसे बड़े मैच विनर बनकर उभरे हैं। आईपीएल 2026 में समीर ने डीसी को मुश्किल परिस्थितियों से निकालते हुए लगातार 2 मैच अपने दम पर जिताए हैं और टीम के सबसे बड़े मैच विनर बनकर उभरे हैं। लखनऊ सुपर जायंट्स के खिलाफ 26 रन पर 4 विकेट गंवा चुकी डीसी को चौथे नंबर पर बल्लेबाजी के लिए आए रिजवी ने नाबाद 70 रन की पारी खेल जीत दिलायी और प्लेयर ऑफ द मैच रहे। मुंबई के खिलाफ मैच में भी रिजवी ने 51 गेंदों पर 7 छक्कों और 7 चौकों की मदद से 90 रन बनाए। वह अपने पहले आईपीएल शतक से चूक गए लेकिन अपना विकेट खोने से पहले टीम के लिए जीत की पटकथा लिख चुके थे। मुंबई के खिलाफ भी रिजवी प्लेयर ऑफ द मैच रहे। आईपीएल 2026 की नीलामी में कार्तिक शर्मा, प्रशांत वीर जैसे युवाओं पर 28.40 (प्रत्येक पर 14.20 करोड़) खर्च करने वाली सीएसके 22 साल के रिजवी के प्रदर्शन को देखते हुए उन्हें रिलीज करने के फैसले पर पछता रही होगी। बता दें कि कार्तिक शर्मा और प्रशांत वीर का प्रदर्शन अब तक बेहद साधारण रहा है।

विधायक बनाम न्यायपालिका: एमपी में 5 मामले जहां सजा और सदस्यता बनी मुद्दा

भोपाल । मध्य प्रदेश में विधायकों को आपराधिक मामलों में सजा मिलने और सदस्यता समाप्त होने के पांच प्रमुख मामले हाल ही में सुर्खियों में रहे। इनमें न्यायालय ने कुछ मामलों में सजा सुनाई, विधानसभा सचिवालय ने सीट रिक्त घोषित की, लेकिन उच्च अदालतों ने कुछ विधायकों को राहत दी जिससे उनकी विधायकी बच गई। सबसे पहला मामला बिजावर सीट की भाजपा विधायक आशा रानी सिंह का है। वर्ष 2011 में छतरपुर जिले की बिजावर सीट से विधायक आशा रानी सिंह को अपनी नौकरानी तिजिया बाई को आत्महत्या के लिए उकसाने के जुर्म में दस साल की सजा सुनाई गई। उनके पति पर भी इसी मामले में आरोप था। सजा के बाद विधानसभा सचिवालय ने उनकी सदस्यता समाप्त कर दी और सीट को रिक्त घोषित कर चुनाव आयोग को सूचना भेजी। हाई कोर्ट में अपील करने के बावजूद उन्हें राहत नहीं मिली और 31 अक्टूबर 2013 को उनकी विधायकी समाप्त हो गई। दूसरा मामला पवई सीट के भाजपा विधायक प्रहलाद लोधी का है। 2014 में अवैध रेत उत्खनन के दौरान तहसीलदार के साथ मारपीट के मामले में 31 अक्टूबर 2019 को भोपाल की विशेष अदालत ने उन्हें दो साल की सजा सुनाई। विधानसभा सचिवालय ने सदस्यता रद्द की अधिसूचना जारी की, लेकिन प्रहलाद लोधी ने हाई कोर्ट में अपील की और सात नवंबर 2019 को कोर्ट ने उनकी सजा पर स्टे दे दी। सुप्रीम कोर्ट और हाई कोर्ट के आदेशों के बाद उनकी सदस्यता बहाल हुई और वे विधायक बने रहे। तीसरा मामला खरगापुर विधानसभा सीट के राहुल सिंह लोधी का है। 2018 में उनके खिलाफ कांग्रेस प्रत्याशी ने चुनाव याचिका दायर की। हाई कोर्ट ने नामांकन पत्र में महत्वपूर्ण जानकारी छिपाने के आधार पर उनके निर्वाचन को शून्य घोषित कर दिया। विधानसभा सचिवालय ने सदस्यता समाप्त कर दी और सीट रिक्त घोषित की। राहुल सिंह लोधी ने सुप्रीम कोर्ट में अपील की और दिसंबर 2022 में सुप्रीम कोर्ट ने अंतरिम स्टे दे कर सदस्यता बहाल की। लेकिन उन्हें वोटिंग और कुछ भत्तों का अधिकार नहीं मिला। चौथा मामला विजयपुर विधायक मुकेश मल्होत्रा का है। उन्हें नामांकन पत्र में आपराधिक मामलों की जानकारी छिपाने का आरोप लगा और मार्च 2026 में हाई कोर्ट ने उनके चुनाव को शून्य घोषित कर दिया। सुप्रीम कोर्ट ने उन्हें विधायक के तौर पर काम करने की अनुमति दी लेकिन वे वेतन, भत्तों और वोटिंग में हिस्सा नहीं ले पाएंगे। उनकी सुनवाई 23 जुलाई को होगी। पांचवां और वर्तमान में चर्चित मामला दतिया सीट के कांग्रेस विधायक राजेंद्र भारती का है। 2 अप्रैल 2026 को दिल्ली की विशेष अदालत ने उन्हें साल 1998 के बैंक धोखाधड़ी मामले में दोषी पाया और तीन साल की जेल की सजा सुनाई। सदस्यता समाप्त करने और सीट रिक्त घोषित करने की अधिसूचना विधानसभा सचिवालय ने चुनाव आयोग को भेज दी। राजेंद्र भारती ने जमानत तो पा ली है लेकिन सजा पर कनविक्शन स्टे नहीं मिला है। वे सुप्रीम कोर्ट में अपील करने जा रहे हैं। राजेन्द्र कुमार सिंह ने इस घटनाक्रम पर कहा कि न्यायालय का काम अलग है, लेकिन रात में विधानसभा खोलकर गजट नोटिफिकेशन जारी करना संसदीय प्रक्रिया में पहले कभी नहीं हुआ। कई मामलों में हाई कोर्ट या सुप्रीम कोर्ट से राहत मिलने के बाद सदस्यता बहाल की जाती है। इन घटनाओं ने मध्य प्रदेश विधानसभा की राजनीति और न्यायिक प्रक्रिया के बीच संवेदनशील संतुलन को उजागर किया है।

शेयर बाजार पर नजर! RBI पॉलिसी, ग्लोबल टेंशन और क्रूड ऑयल की चाल से तय होगी दिशा

नई दिल्ली। भारतीय शेयर बाजार के लिए अगला हफ्ता काफी अहम होगा। आरबीआई मौद्रिक नीति, अमेरिका-ईरान तनाव और कच्चे तेल की चाल से शेयर बाजार की दिशा तय होगी। ब्याज दरों की समीक्षा के लिए भारतीय रिजर्व बैंक मौद्रिक नीति समिति (आरबीआई-एमपीसी) की बैठक 6-8 अप्रैल के बीच प्रस्तावित है। यह बैठक ऐसे समय पर हो रही है जब वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल के दाम उच्चतम स्तर पर बने हुए हैं, जिससे महंगाई को लेकर दुनियाभर में चिंताएं बढ़ रही हैं। अमेरिका-ईरान के बीच युद्ध भी शेयर बाजार के लिए अगले हफ्ते एक अहम फैक्टर होगा, क्योंकि युद्ध का प्रभाव अब दुनिया की आपूर्ति श्रृंख्लाओं पर दिखाई देने लगा है। ऐसे में इस युद्ध से जुड़े अपटेड आने वाले हफ्ते में शेयर बाजार के लिए अहम होंगे। मौजूदा समय में कच्चा तेल 109 डॉलर प्रति बैरल के आसपास बना हुआ है। बीते एक महीने में इसमें 34 प्रतिशत से ज्यादा की बढ़ोतरी हुई है। ऐसे में आने वाले हफ्ते में कच्चे तेल की चाल पर निवेशकों की निगाहें बनी रहेंगी। बीते हफ्ते शेयर बाजार लाल निशान में बंद हुआ था। इस दौरान सेंसेक्स 1,953.90 अंक या 2.60 प्रतिशत की गिरावट के साथ 73,319.55 और निफ्टी 593.35 अंक या 2.55 प्रतिशत की कमजोरी के साथ 22,713 पर बंद हुआ। यह लगातार छठवां हफ्ता था, जब शेयर बाजार में गिरावट देखी गई। सूचकांकों में निफ्टी पीएसयू बैंक (5.21 प्रतिशत), निफ्टी कंज्यूमर ड्यूरेबल्स (4.06 प्रतिशत), निफ्टी हेल्थकेयर (4.04 प्रतिशत), निफ्टी ऑटो (3.87 प्रतिशत), निफ्टी फार्मा (3.84 प्रतिशत), निफ्टी प्राइवेट बैंक (3.27 प्रतिशत), निफ्टी इन्फ्रा (2.90 प्रतिशत) और निफ्टी रियल्टी (2.89 प्रतिशत) की कमजोरी के साथ टॉप लूजर्स थे। इस दौरान केवल निफ्टी आईटी (2.60 प्रतिशत) और निफ्टी मेटल (1.01 प्रतिशत) ही हरे निशान में बंद हुए। लार्जकैप के साथ मिडकैप और स्मॉलकैप भी लाल निशान में बंद हुए। निफ्टी स्मॉलकैप 100 इंडेक्स 246.05 अंक या 1.55 प्रतिशत की कमजोरी के साथ 15,650.50 और निफ्टी मिडकैप 100 इंडेक्स 1,654 अंक या 2.99 प्रतिशत की गिरावट के साथ 53,677.05 पर बंद हुआ।

जबलपुर: साइबर ठगी का पर्दाफाश 3 करोड़ की ठगी में एक और आरोपी पुलिस के हत्थे

जबलपुर । जबलपुर में शेयर बाजार में मुनाफे के झांसे में फंसाकर डॉक्टर से तीन करोड़ रुपये की ठगी करने वाले आरोपी मोहित पटेल को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है। इस गिरफ्तारी के बाद अब तक कुल तीन आरोपियों को पकड़ने में सफलता मिली है। साइबर सेल और क्राइम ब्रांच की संयुक्त कार्रवाई ने इस मामले को उजागर किया है और आरोपी के खिलाफ कड़ी कार्रवाई शुरू कर दी गई है। पूर्व में गिरफ्तार आरोपियों संस्कार केशरवानी और सौरभ विश्वकर्मा की पूछताछ में मोहित पटेल का नाम सामने आया था। जांच में पता चला कि आरोपियों ने शेयर बाजार में निवेश के नाम पर 500 प्रतिशत तक मुनाफे का झांसा दिया और डॉक्टर के साथ 3 करोड़ रुपये की ठगी की। आरोपी ने यस बैंक में करेंट अकाउंट खोलकर साइबर ठगों को मोटे कमीशन पर पैसे ट्रांसफर किए। मोहित पटेल पेशे से गुमास्ता और एमएसएमई के दस्तावेज तैयार करने का काम करता है। इसके साथ ही वह इनकम टैक्स के दस्तावेज बनाने में भी संलिप्त रहा है। पुलिस के अनुसार आरोपी पर पहले भी धोखाधड़ी का मामला दर्ज है। वर्तमान में क्राइम ब्रांच और साइबर सेल आरोपी से पूछताछ कर मामले की गहनता से जांच कर रही है। इस मामले ने यह साफ कर दिया है कि शेयर बाजार में अवास्तविक मुनाफे का लालच लोगों को गंभीर वित्तीय नुकसान पहुंचा सकता है। पुलिस का कहना है कि इस प्रकार की ठगी की घटनाओं में निवेशकों को सतर्क रहना चाहिए और किसी भी अनजान या संदिग्ध व्यक्ति पर तुरंत कार्रवाई करनी चाहिए। इस गिरफ्तारी से अन्य संभावित आरोपियों तक पुलिस की पकड़ मजबूत हुई है और मामले की जांच जारी है।