हर हर महादेव के जयकारों से गूंजा महाकाल मंदिर भस्म आरती में दिव्य श्रृंगार के दर्शन

उज्जैन । उज्जैन स्थित विश्व प्रसिद्ध श्री महाकालेश्वर मंदिर में वैशाख माह के कृष्ण पक्ष की तृतीया तिथि रविवार तड़के भक्ति और आस्था का अद्भुत संगम देखने को मिला जब प्रातः लगभग 4 बजे मंदिर के कपाट खोले गए और परंपरानुसार भस्म आरती का आयोजन किया गया। इस विशेष अवसर पर भगवान महाकालेश्वर का दिव्य और मनमोहक श्रृंगार किया गया जिसने उपस्थित श्रद्धालुओं को आध्यात्मिक ऊर्जा से भर दिया। मंदिर के पट खुलते ही पुजारियों ने गर्भगृह में विराजमान सभी देवी देवताओं का विधिवत पूजन किया और इसके बाद भगवान महाकाल का पवित्र जलाभिषेक आरंभ हुआ। श्रद्धा और वैदिक मंत्रोच्चार के बीच जल के साथ दूध दही घी शहद और फलों के रस से बने पंचामृत से अभिषेक किया गया जिससे पूरा वातावरण भक्तिमय हो उठा। इसके पश्चात भगवान के मस्तक पर चांदी का बेलपत्र चंद्र और आकर्षक आभूषण अर्पित कर उन्हें राजा स्वरूप में सजाया गया जो अत्यंत दिव्य प्रतीत हो रहा था। भस्म आरती की प्रक्रिया अत्यंत विधिपूर्वक संपन्न हुई जिसमें भस्म अर्पण से पहले प्रथम घंटाल बजाकर हरिओम का जल अर्पित किया गया और मंत्रोच्चार के बीच भगवान का ध्यान किया गया। कपूर आरती के बाद ज्योतिर्लिंग को वस्त्र से ढांककर पवित्र भस्म अर्पित की गई जो इस आरती की सबसे महत्वपूर्ण और विशिष्ट परंपरा मानी जाती है। इसके बाद भगवान को शेषनाग का रजत मुकुट रजत की मुण्डमाल रुद्राक्ष की माला और सुगंधित पुष्पों की मालाओं से अलंकृत किया गया जिससे उनका स्वरूप और भी आकर्षक और दिव्य हो गया। असुबह आयोजित इस भस्म आरती में सैकड़ों श्रद्धालु उपस्थित रहे जिन्होंने बाबा महाकाल के दर्शन कर पुण्य लाभ प्राप्त किया। मंदिर परिसर हर हर महादेव के जयकारों से गूंज उठा और वातावरण पूरी तरह भक्तिमय हो गया। श्रद्धालुओं ने नंदी महाराज के दर्शन कर उनके कान में अपनी मनोकामनाएं कही और जीवन में सुख समृद्धि की कामना की। महाकाल की यह भस्म आरती केवल एक धार्मिक अनुष्ठान नहीं बल्कि आस्था विश्वास और सनातन परंपरा की जीवंत झलक है जो हर दिन हजारों भक्तों को अपनी ओर आकर्षित करती है। बाबा महाकाल का यह दिव्य श्रृंगार और भस्म आरती का दृश्य श्रद्धालुओं के मन में अद्भुत शांति और ऊर्जा का संचार करता है और उन्हें आध्यात्मिक रूप से समृद्ध बनाता है।
उज्जैन के डोंगला से उठी ब्रह्मांड की नई दृष्टि महाकाल सम्मेलन में विज्ञान और परंपरा का संगम

उज्जैन । उज्जैन जिले के महिदपुर तहसील स्थित डोंगला गांव में आयोजित तीन दिवसीय अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन महाकाल द मास्टर ऑफ टाइम के दूसरे दिन विज्ञान और अंतरिक्ष अनुसंधान को लेकर विशेष उत्साह देखने को मिला। इस महत्वपूर्ण आयोजन में मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव ने सहभागिता की और खगोल विज्ञान तथा अंतरिक्ष अनुसंधान पर आयोजित सत्र में शामिल होकर वैज्ञानिकों और विद्यार्थियों को संबोधित किया। उन्होंने अपने संबोधन में कहा कि भारत की अंतरिक्ष उपलब्धियां केवल तकनीकी सफलता नहीं हैं बल्कि यह देश की वैज्ञानिक क्षमता और आत्मनिर्भरता का सशक्त प्रतीक हैं जो विश्व पटल पर भारत की बढ़ती ताकत को दर्शाती हैं। मुख्यमंत्री के डोंगला पहुंचने पर प्रभारी मंत्री गौतम टेटवाल सहित जनप्रतिनिधियों और वरिष्ठ अधिकारियों ने उनका स्वागत किया। सम्मेलन के दौरान आयोजित गतिविधियों ने इसे केवल एक औपचारिक कार्यक्रम नहीं बल्कि ज्ञान और नवाचार के उत्सव में बदल दिया। दूसरे दिन विद्यार्थियों के लिए आरसी प्लेन कार्यशाला आयोजित की गई जिसमें उन्हें एयरोमॉडलिंग और उड़ान तकनीक की बारीकियों से परिचित कराया गया। इसके साथ ही ग्रहों और डीप स्काई ऑब्जर्वेशन कार्यक्रम ने प्रतिभागियों को ब्रह्मांड के रहस्यों को करीब से देखने का अवसर दिया। कार्यक्रम स्थल पर लगी प्रदर्शनी विशेष आकर्षण का केंद्र बनी हुई है जिसमें आमजन और विद्यार्थियों को काल गणना अंतरिक्ष विज्ञान और ब्रह्मांड से जुड़ी भारतीय ज्ञान परंपरा के साथ आधुनिक वैज्ञानिक उपलब्धियों की जानकारी दी जा रही है। इस प्रदर्शनी में शिक्षा मंत्रालय के भारतीय ज्ञान परंपरा प्रकोष्ठ सीएसआईआर इसरो टीआईएफआर एमपीसीएसटी आईआईटी इंदौर डीआरडीओ और ब्रह्मोस एयरोस्पेस जैसे प्रतिष्ठित संस्थान अपनी उपलब्धियों और शोध कार्यों को प्रदर्शित कर रहे हैं। इसके अलावा कालगणना और प्राचीन भारतीय विज्ञान से संबंधित पुस्तकों की अंतरराष्ट्रीय प्रदर्शनी भी लोगों को आकर्षित कर रही है। तीन दिवसीय इस सम्मेलन में मुख्य वक्तव्य उच्च स्तरीय पैनल चर्चा तकनीकी सत्र ओपन सेशन टेक्नोलॉजी एक्सपो और स्टार्टअप कॉन्फ्रेंस जैसी विविध गतिविधियां आयोजित की जा रही हैं। प्रतिभागियों को डोंगला स्थित वराहमिहिर खगोलीय वेधशाला का भ्रमण भी कराया जा रहा है जहां वे खगोलीय उपकरणों और अनुसंधान प्रक्रियाओं को समझ रहे हैं। साथ ही यूएवी ड्रोन आरसी और सैटेलाइट निर्माण से जुड़ी कार्यशालाएं युवाओं के बीच विज्ञान और तकनीक के प्रति रुचि बढ़ाने का माध्यम बन रही हैं। कर्क रेखा पर स्थित डोंगला गांव खगोल विज्ञान के दृष्टिकोण से अत्यंत महत्वपूर्ण स्थान माना जाता है। इसी महत्व को ध्यान में रखते हुए वर्ष 2013 में यहां आधुनिक खगोलीय वेधशाला की स्थापना की गई थी जो आज वैज्ञानिक अध्ययन और अनुसंधान का प्रमुख केंद्र बन चुकी है। यह सम्मेलन न केवल भारत की प्राचीन ज्ञान परंपरा को पुनर्जीवित करने का प्रयास है बल्कि इसे आधुनिक विज्ञान के साथ जोड़कर वैश्विक मंच पर प्रस्तुत करने की दिशा में भी एक महत्वपूर्ण कदम है। साथ ही उज्जैन और डोंगला को वैश्विक मेरिडियन के रूप में स्थापित करने की पहल भी इस आयोजन के माध्यम से मजबूत होती दिखाई दे रही है। गौरतलब है कि इससे पहले अंतरराष्ट्रीय योग दिवस 21 जून 2025 को भी मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव डोंगला पहुंचे थे जहां शून्य छाया जैसी दुर्लभ खगोलीय घटना का अवलोकन किया गया था। उनके नेतृत्व में आयोजित राष्ट्रीय कार्यशाला में देशभर के सैकड़ों प्रतिभागियों ने भाग लिया था। इस बार के सम्मेलन में भी देश के प्रमुख वैज्ञानिकों और विशेषज्ञों की उपस्थिति ने इसे और अधिक महत्वपूर्ण बना दिया है। यह आयोजन न केवल विज्ञान के क्षेत्र में नई संभावनाओं को उजागर कर रहा है बल्कि युवाओं को नवाचार और अनुसंधान के लिए प्रेरित करने का सशक्त मंच भी प्रदान कर रहा है।
अक्षय तृतीया के दिन भूलकर भी न करें ये गलतियां वरना समृद्धि की जगह आ सकती है परेशानी

नई दिल्ली। अक्षय तृतीया सनातन परंपरा का एक अत्यंत शुभ और पवित्र पर्व माना जाता है जो हर वर्ष वैशाख शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को मनाया जाता है। वर्ष 2026 में यह पर्व 19 अप्रैल को मनाया जाएगा। धार्मिक मान्यता के अनुसार यह दिन इतना शुभ होता है कि किसी भी मांगलिक कार्य के लिए अलग से मुहूर्त देखने की आवश्यकता नहीं होती इसलिए इसे अबूझ मुहूर्त भी कहा जाता है। इस दिन भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की पूजा का विशेष महत्व होता है और माना जाता है कि इस दिन किए गए शुभ कार्य अक्षय फल प्रदान करते हैं यानी उनका पुण्य कभी समाप्त नहीं होता। दृक पंचांग के अनुसार तृतीया तिथि की शुरुआत 19 अप्रैल को सुबह 10 बजकर 49 मिनट से होगी और इसका समापन 20 अप्रैल को सुबह 7 बजकर 27 मिनट पर होगा। उदया तिथि के आधार पर 19 अप्रैल को ही अक्षय तृतीया मनाई जाएगी। पूजा और खरीदारी के लिए विशेष शुभ समय सुबह 10 बजकर 49 मिनट से दोपहर 12 बजकर 45 मिनट तक रहेगा। इस अवधि में सोना चांदी या अन्य शुभ वस्तुओं की खरीद विशेष फलदायी मानी जाती है। अक्षय तृतीया पर जहां एक ओर सोना चांदी तांबा और पीतल जैसी धातुएं खरीदना शुभ माना जाता है वहीं कुछ ऐसी चीजें भी हैं जिन्हें इस दिन खरीदने से बचना चाहिए। मान्यता है कि इन वस्तुओं की खरीदारी से घर में नकारात्मक ऊर्जा का प्रवेश हो सकता है और आर्थिक स्थिति पर भी असर पड़ सकता है। सबसे पहले बात करें धारदार और नुकीली वस्तुओं की तो इस दिन चाकू कैंची सुई या किसी भी प्रकार की काटने वाली चीज खरीदना अशुभ माना गया है। यह प्रतीकात्मक रूप से रिश्तों में कटुता और तनाव को बढ़ा सकता है जिससे परिवार में कलह की स्थिति बन सकती है। इसी तरह काले रंग की वस्तुओं से भी इस दिन दूरी बनाकर रखने की सलाह दी जाती है। शास्त्रों में काले रंग को शनि और राहु से जोड़कर देखा गया है और इसे शुभ कार्यों में वर्जित माना गया है। ऐसे में काले कपड़े जूते या अन्य सामान खरीदने के बजाय पीले लाल और सफेद जैसे शुभ रंगों को अपनाना बेहतर होता है। धातुओं की बात करें तो अक्षय तृतीया पर धातु खरीदना शुभ जरूर है लेकिन सही धातु का चयन बेहद जरूरी है। सोना चांदी तांबा और पीतल जहां समृद्धि के प्रतीक हैं वहीं एल्यूमीनियम और स्टील को राहु से संबंधित माना जाता है। इनकी खरीदारी इस दिन करने से घर की बरकत पर असर पड़ सकता है इसलिए इनसे बचना चाहिए। इसके अलावा घर की सजावट के लिए पौधे खरीदने का विचार कर रहे हैं तो इस दिन कांटेदार पौधों जैसे कैक्टस से दूर रहें। वास्तु शास्त्र के अनुसार ऐसे पौधे नकारात्मक ऊर्जा को बढ़ाते हैं और जीवन में बाधाएं उत्पन्न कर सकते हैं। इसके बजाय तुलसी मनी प्लांट या सुगंधित फूलों के पौधे लाना शुभ माना जाता है जो सकारात्मकता और समृद्धि को बढ़ाते हैं। अक्षय तृतीया केवल खरीदारी का पर्व नहीं बल्कि श्रद्धा विश्वास और सकारात्मक ऊर्जा का प्रतीक है। इस दिन सही नियमों का पालन करके और गलतियों से बचकर आप अपने जीवन में सुख समृद्धि और शांति को स्थायी बना सकते हैं।
नीतीश कुमार 12 अप्रैल को मुख्यमंत्री पद से दे सकते हैं इस्तीफा, 14 को नई सरकार बनने की संभावना

नई दिल्ली। बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने हाल ही में MLC पद से इस्तीफा दे दिया है। इसके बाद बिहार में नए मुख्यमंत्री की खोज शुरू हो गई है। बीजेपी की ओर से नए सीएम के लिए सम्राट चौधरी, विजय सिन्हा, नित्यानंद राय और दिलीप जायसवाल के नाम चर्चा में हैं। जेडीयू से निशांत कुमार और विजय चौधरी के नाम सामने आ रहे हैं। मीडिया और राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि नीतीश कुमार 12 अप्रैल को CM पद से इस्तीफा दे सकते हैं। इसके बाद 14 अप्रैल तक नए मुख्यमंत्री की शपथ समारोह होने की संभावना जताई जा रही है। फिलहाल कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। राजनीतिक गतिविधियां और दिल्ली यात्रा सियासी हलचल के बीच बताया जा रहा है कि नीतीश कुमार अगले सप्ताह 9 अप्रैल को दिल्ली जाएंगे और राज्यसभा सदस्य के रूप में शपथ ले सकते हैं। इसके बाद वे पटना लौटकर राज्यपाल रिटायर्ड लेफ्टिनेंट जनरल सैयद अता हसनैन से मिलकर अपना इस्तीफा सौंपेंगे। सुरक्षा और आवास में बदलाव मुख्यमंत्री पद छोड़ने के बाद भी नीतीश कुमार को जेड प्लस श्रेणी की सुरक्षा जारी रहेगी। गृह विभाग की विशेष शाखा ने आदेश में कहा है कि उन्हें बिहार स्पेशल सिक्योरिटी एक्ट-2000 के तहत सुरक्षा प्रदान की जाएगी। सीएम पद छोड़ने के बाद नीतीश कुमार को वर्तमान में 1 अणे मार्ग स्थित मुख्यमंत्री आवास छोड़कर 7 सर्कुलर रोड स्थित बंगले में रहने के लिए जाना होगा।
जामुन में सेहत का खजाना, डायबिटीज में फायदेमंद और करता है इम्युनिटी बूस्ट

नई दिल्ली। गर्मी का मौसम शुरू होते ही बाजार में खट्टे-मीठे जामुन दिखने लगते हैं। यह स्वादिष्ट फल न सिर्फ गर्मियों में प्राकृतिक शीतलता देता है, बल्कि सेहत के लिए भी वरदान साबित होता है। आयुर्वेद और आधुनिक विज्ञान दोनों ही जामुन को गर्मियों का सुपरफूड मानते हैं। आयुर्वेद में जामुन को डायबिटीज और पेट की बीमारी का शत्रु भी कहा जाता है। इसके फल हों या पत्तियां दोनों का उपयोग औषधि बनाने में किया जाता है। साथ ही जामुन की डाली बेहतरीन दातून है, जो मुंह के रोगों का खात्मा कर उन्हें सेहतमंद रखता है। आयुर्वेद में जामुन को ठंडा और पित्त शामक माना गया है। गर्मी में यह शरीर की अतिरिक्त गर्मी को कम करता है और पेट को ठंडक पहुंचाता है। इसे ताजा खाकर, जूस बनाकर या सलाद में शामिल करके रोजाना सेवन किया जा सकता है। आयुर्वेद के अनुसार, गर्मियों में जामुन का सेवन न सिर्फ स्वास्थ्य के लिए फायदेमंद है, बल्कि यह सस्ता और आसानी से उपलब्ध फल भी है, जो शरीर को स्वस्थ और हाइड्रेटेड, एनर्जी से भरपूर रखने में कारगर होता है। जामुन के सेवन से एक-दो नहीं कई फायदे मिलते हैं। यह ब्लड शुगर कंट्रोल करता है। जामुन डायबिटीज के मरीजों के लिए बहुत फायदेमंद है। इसमें कम ग्लाइसेमिक इंडेक्स होता है, जो ब्लड शुगर को स्थिर रखने में मदद करता है। गर्मी में जब ब्लड शुगर बढ़ने की संभावना ज्यादा होती है, तब जामुन का सेवन इसे नियंत्रित रखता है। जामुन में फाइबर की अच्छी मात्रा होती है। यह पाचन क्रिया को सुधारता है, कब्ज दूर करता है और पेट को स्वस्थ रखता है। गर्मी में भारी खाने से जो पाचन बिगड़ता है, जामुन उसे ठीक करने में सहायक और पाचन तंत्र को मजबूत बनाता है। विटामिन सी और एंटीऑक्सीडेंट्स से भरपूर जामुन रोग प्रतिरोधक क्षमता को मजबूत बनाता है। इससे गर्मियों में होने वाली बीमारियों से बचाव होता है। साथ ही कम कैलोरी वाला यह फल वजन नियंत्रित रखने में सहायक है। फाइबर से भरा होने के कारण भूख कम लगती है और बार-बार खाने की आदत पर लगाम लगती है। दिल की सेहत के लिए यह फल बहुत अच्छा माना जाता है। जामुन में पोटैशियम होता है जो ब्लड प्रेशर को नियंत्रित रखता है। यह कोलेस्ट्रॉल कम करने में भी मदद करता है और हृदय को स्वस्थ रखता है। कम ही लोग जानते हैं कि जामुन त्वचा की चमक भी बढ़ाने में कारगर है। एंटीऑक्सीडेंट्स त्वचा को स्वस्थ और चमकदार बनाते हैं। गर्मी में धूप और पसीने से जो त्वचा प्रभावित होती है, जामुन उसे निखारने में मदद करता है।
Eye Care Tips: तेज धूप में आंखों को रखें सुरक्षित, दूर करें ड्रायनेस और जलन

नई दिल्ली। मौसम में बदलाव के साथ आंखों की देखभाल करना भी जरूरी हो जाता है। बदलते मौसम की वजह से आंखों में चिपचिपापन हमेशा बना रहता है और आंखों में पानी आने की समस्या भी परेशान करने लगती है। इसके साथ ही आज के डिजिटल दौर में आंखों की कमजोरी एक आम समस्या बन गई है, लेकिन हम आपके लिए कुछ आसान और प्राकृतिक तरीके लेकर आए हैं, जिनके उपयोग से आंखों की देखभाल और घटते नंबर को भी नियंत्रित किया जा सकता है। आज के डिजिटल दौर में आंखें स्क्रीन की वजह से बहुत थक जाती हैं। ऐसे में आंखों के व्यायाम और सनगैजिंग जरूरी हो जाता है। इसके लिए रोजाना 10 मिनट आंखों को चारों दिशाओं में घुमाएं और कुछ देर के लिए बंद कर आराम दें। इस व्यायाम को 5 बार दोहराएं। इसके साथ ही सनगैजिंग यानी सूरज को निहारे। इसके लिए सूर्योदय और सूर्यास्त से 1 घंटे पहले नंगी आंखों से सूरज की तरह देखने की कोशिश करें। इसके बाद दोनों हथेलियों को रगड़कर आंखों पर लगाएं। इससे आंखों को आराम मिलेगा। दूसरा, गर्मियों में आंखों का रुखापन बढ़ जाता है। ऐसे में रोजाना आंखों पर खीरा या ककड़ी का आईपैक लगाएं। इसके लिए खीरे या ककड़ी की दो स्लाइस को आंखों पर रखें और कुछ देर खुद को शांत करने की कोशिश करें। इससे आंखों की थकावट दूर होती है और रक्त संचार भी बढ़ता है। स्क्रीन टाइमिंग को कम करें। नियम बना लें कि रात को 9 बजे के बाद फोन का इस्तेमाल नहीं करेंगे और टीवी भी नहीं देखेंगे। इससे आंखों की मांसपेशियां मजबूत होंगी और स्क्रीन की वजह से पड़ने वाला दबाव भी कम होगा। इससे सिर दर्द में भी राहत मिलेगी। इसके अलावा, त्राटक क्रिया को रोजाना करें। इसके लिए अंधेरे कमरे में एक मोमबत्ती या दीया जला लें और फिर उसे लगातार देखते रहें। इससे आंखों की सफाई होती है और आंखों से खूब सारा पानी भी बहता है। यह प्रक्रिया एकाग्रता को बढ़ाने में भी मदद करती है। इन अभ्यासों को रोज करने से कुछ ही महीनों में आंखों की स्थिति में खुद-ब-खुद सुधार देखने को मिलेगा और आंखों का तेजी से घटता नंबर भी स्थिर हो जाएगा।
गर्मियों का सुपरफूड पुदीना! ऊर्जा बढ़ाए और पाचन दुरुस्त रखे, जानें फायदे

नई दिल्ली। देश के कई हिस्सों में गर्मी तेजी से बढ़ रही है। चिलचिलाती धूप और तपती गर्मी में ठंडक का अहसास देने के लिए पुदीना सबसे अच्छा और आसान प्राकृतिक उपाय है। हरी और सुगंधित पुदीना की छोटी-छोटी पत्तियां न सिर्फ ताजगी भरी खुशबू देती हैं, बल्कि तन और मन दोनों को शीतलता प्रदान करती हैं। गर्मियों में पुदीना का सेवन कई बीमारियों से बचाव में भी बेहद कारगर साबित होता है। पुदीना पोषक तत्वों से भरपूर होता है। इसमें मौजूद मेंथॉल शरीर को प्राकृतिक ठंडक देता है। गर्मी के दिनों में पुदीना चटनी, रायता, जूस, पन्ना, सलाद या पानी में मिलाकर पीने से गर्मी का असर काफी कम हो जाता है। विशेषज्ञों का कहना है कि पुदीना गर्मियों में शरीर का तापमान नियंत्रित रखने का सबसे सरल तरीका है। आयुर्वेद में पुदीना का खासा स्थान है और इसके सेवन से शरीर को कई लाभ मिलते हैं। पुदीना पाचन तंत्र को मजबूत बनाता है। यह अपच, गैस, एसिडिटी और कब्ज जैसी समस्याओं से राहत दिलाता है, पेट को हल्का रखता है और भूख बढ़ाने में भी मदद करता है। पुदीना डिहाइड्रेशन से बचाव में भी कारगर है। गर्मियों में पसीना ज्यादा आने से शरीर में पानी की कमी हो जाती है। पुदीने का पानी पीने से डिहाइड्रेशन की समस्या नहीं होती और दिनभर ताजगी बनी रहती है। सिरदर्द और तनाव कम करता है, पुदीने की चाय सिरदर्द और मानसिक तनाव को दूर करने में बहुत फायदेमंद है। सुबह खाली पेट पुदीने वाला पानी पीने से पूरे दिन एनर्जी और ताजगी बनी रहती है। पुदीना एंटीऑक्सीडेंट्स से भरपूर होता है। यह शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता को मजबूत करता है और मौसमी बीमारियों से बचाव में मदद करता है। इसके सेवन से पसीने की दुर्गंध कम या खत्म होती है। मोटापा घटाने में सहायक है। सूजन कम करने और रोगाणुरोधी गुण रखता है। साथ ही हृदय स्वास्थ्य के लिए भी फायदेमंद है। आयुर्वेद में पुदीने को गर्मियों के लिए विशेष रूप से उपयोगी माना गया है। अमेरिका की नेशनल लाइब्रेरी ऑफ मेडिसिन के अध्ययनों में भी पुदीने के कई स्वास्थ्य लाभ बताए गए हैं, जिनमें सूजन-रोधी और एंटीऑक्सीडेंट गुण शामिल हैं। गर्मियों में पुदीने की मांग काफी बढ़ जाती है। पुदीना सस्ता, आसानी से उपलब्ध और बिना किसी साइड इफेक्ट वाला प्राकृतिक उपाय है। एक्सपर्ट इसे रोजाना अपने आहार में दही का रायता, पुदीने की चटनी, निंबू-पुदीना पानी या सलाद के रूप में शामिल करने की सलाह देते हैं।
फार्मा सेक्टर को मिलेगी नई ताकत! सरकार बढ़ाएगी निर्यात और सप्लाई चेन क्षमता

नई दिल्ली। तेलंगाना की राजधानी में फार्मास्यूटिकल्स सेक्टर पर ‘चिंतन शिविर’ का आयोजन किया गया, जिसको लेकर वाणिज्य सचिव राजेश अग्रवाल ने मीडिया से बात की। इस दौरान राजेश अग्रवाल ने कहा कि ‘चिंतन शिविर’ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सोच का हिस्सा है, जिसका उद्देश्य सरकार, उद्योग और अन्य हितधारकों को एक मंच पर लाकर गहन मंथन करना है। इस पहल के तहत सेक्टर से जुड़ी चुनौतियों को समझते हुए उनके समाधान और भविष्य की स्पष्ट दिशा तय की जा रही है। वाणिज्य सचिव राजेश अग्रवाल ने बताया कि यह मंच केवल चर्चा तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें सरकार, उद्योग और अन्य संबंधित पक्षों की भूमिकाओं को स्पष्ट करते हुए ठोस रणनीति तैयार की जाती है। खासतौर पर फार्मा सेक्टर के लिए यह अहम है, क्योंकि यह भारत की अर्थव्यवस्था का एक बड़ा और तेजी से विकसित होता क्षेत्र है। अमेरिका द्वारा फार्मास्युटिकल सेक्टर पर लगाए गए संभावित टैरिफ को लेकर अग्रवाल ने कहा कि शुरुआती समझ के मुताबिक भारतीय जेनेरिक दवाएं इन टैरिफ से बाहर हैं। ऐसे में भारत के फार्मा निर्यात पर बड़ा असर पड़ने की संभावना कम है। हालांकि, कुछ इनोवेटिव या पेटेंटेड दवाओं पर सीमित प्रभाव पड़ सकता है। उन्होंने यह भी बताया कि भारत और अमेरिका के बीच ट्रेड फ्रेमवर्क एग्रीमेंट पर बातचीत जारी है। यदि किसी भी सेगमेंट में भारतीय उद्योग को दिक्कत आती है, तो उसे इस समझौते के तहत उठाया जाएगा और समाधान खोजा जाएगा। अग्रवाल ने आगे कहा कि भारत का फार्मा सेक्टर मजबूत स्थिति में है, और केंद्र सरकार इसके निर्यात को बढ़ाने के लिए लगातार नए बाजारों और उत्पादों पर ध्यान दे रही है। पिछले 5-6 वर्षों में भारत ने 9 फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (एफटीए) किए हैं, जो करीब 38 अर्थव्यवस्थाओं को कवर करते हैं। इनका कुल आर्थिक आकार 30 ट्रिलियन डॉलर से अधिक है। अग्रवाल के मुताबिक, ये समझौते भारतीय निर्यातकों के लिए नए अवसर खोलेंगे, बाजारों में विविधता लाएंगे और घरेलू उद्योग को मजबूत करेंगे। इससे रोजगार के नए अवसर भी पैदा होंगे। मिडिल ईस्ट में जारी तनाव को लेकर उन्होंने कहा कि मौजूदा संकट अभी कुछ ही हफ्तों पुराना है, इसलिए इसके दीर्घकालिक प्रभाव का अनुमान लगाना मुश्किल है। हालांकि, सरकार इन चुनौतियों को ध्यान में रखते हुए लंबी अवधि की रणनीति तैयार कर रही है। वाणिज्य सचिव ने कोविड-19 महामारी का उदाहरण देते हुए कहा कि ऐसी बाहरी चुनौतियां समय-समय पर आती रहती हैं, लेकिन भारत ने हर बार इनसे निपटते हुए आगे बढ़ने की क्षमता दिखाई है। अग्रवाल के अनुसार, करीब 60 अरब डॉलर के आकार वाला भारत का फार्मा उद्योग अब पहले से कहीं ज्यादा मजबूत, आधुनिक और वैश्विक प्रतिस्पर्धा के लिए तैयार है। सरकार का लक्ष्य है कि बायोसिमिलर, बायोलॉजिक्स और इनोवेटिव दवाओं जैसे उभरते क्षेत्रों में भारत नेतृत्वकारी भूमिका निभाए। अग्रवाल ने कहा कि फिलहाल दवाओं की कीमतों पर किसी बड़े असर के संकेत नहीं हैं। लेकिन अगर भविष्य में कोई समस्या आती है, तो सरकार और उद्योग मिलकर उसका समाधान निकालेंगे। वाणिज्य सचिव ने जोर देकर कहा कि वर्तमान समय में सबसे बड़ी प्राथमिकता यह है कि दवाओं की सप्लाई किसी भी हाल में बाधित न हो। सरकार और उद्योग मिलकर यह सुनिश्चित कर रहे हैं कि घरेलू और वैश्विक स्तर पर दवाओं की उपलब्धता बनी रहे और भारत का फार्मा सेक्टर अपनी विकास की राह पर आगे बढ़ता रहे।
टॉमी पॉल का शानदार प्रदर्शन! टियाफो को हराकर पहुंचे ATP टूर के क्ले फाइनल में

नई दिल्ली। टॉमी पॉल ने 5 अप्रैल को ह्यूस्टन में यूएस मेन्स क्ले कोर्ट चैंपियनशिप के सेमीफाइनल में फ्रांसिस टियाफो को हराकर अपने पहले एटीपी टूर क्ले फाइनल में जगह बनाई। अमेरिकी खिलाड़ी ने तीन सेट तक चले रोमांचक मुकाबले में 7-5, 4-6, 7-6(7) से जीत हासिल की। इस जीत के साथ, पॉल ने ह्यूस्टन में एटीपी 250 इवेंट में लगातार चौथे चैंपियनशिप मैच में पहुंचने की उम्मीदों को समाप्त कर दिया। मैच लगभग दो घंटे और 45 मिनट तक चला। मैच की शुरुआत पॉल ने बेहतरीन खेल से की और पहला सेट 7-5 से जीत लिया। टियाफो ने दूसरे सेट में जल्दी ब्रेक लेकर मुकाबले में वापसी की और सेट 6-4 से अपने नाम किया। मैच के दौरान 90 मिनट की बारिश की देरी ने पॉल के मोमेंटम को थोड़ा बाधित किया, लेकिन उन्होंने फिर भी मजबूती दिखाते हुए ब्रेक पॉइंट बचाया और सेट को अपने पक्ष में किया। तीसरे सेट में दोनों खिलाड़ियों ने कड़ा संघर्ष किया। टियाफो ने शुरुआती ब्रेक लिया, लेकिन पॉल ने वापसी की और 4-2 से बढ़त बनाई। टियाफो ने फिर 4-4 से बराबरी कर ली, जिससे मुकाबला टाई-ब्रेक में चला गया। टाई-ब्रेक में पॉल 6/4 से आगे थे, लेकिन टियाफो ने दो मैच पॉइंट बचाए। अंततः चौथे सीड वाले पॉल ने अंतिम गेम में दबाव में रहते हुए रोमांचक मुकाबला अपने नाम किया। पॉल ने मैच के बाद कहा, “जब मुझे जरूरत थी, मैंने अच्छा खेला। यह टियाफो के साथ एक शानदार मुकाबला था। वह हमेशा देखने में सबसे एंटरटेनिंग खिलाड़ियों में से रहे हैं। मुझे खुशी है कि हमें यह मैच यहां खेलने का मौका मिला।” अब पॉल फाइनल में रोमन एंड्रेस बुरुचागा का सामना करेंगे। बुरुचागा ने सेमीफाइनल में अपने ही देश के खिलाड़ी थियागो अगस्टिन तिरांटे को 6-1, 6-1 से हराकर पहले एटीरी टूर फाइनल में प्रवेश किया। इस मैच के साथ ही पॉल और बुरुचागा, दोनों ही खिलाड़ियों ने अपने प्रदर्शन से दर्शकों को रोमांचित किया और फाइनल में अपने पहले एटीपी खिताब के लिए कड़ा मुकाबला तैयार किया।
मेसी-सुआरेज की जोड़ी का जलवा! इंटर मियामी ने ऑस्टिन एफसी के खिलाफ 2-2 से मुकाबला किया बराबर

नई दिल्ली। इंटर मियामी सीएफ ने 5 अप्रैल को मियामी के बीचों-बीच बने अपने नए और आधुनिक स्टेडियम में ऐतिहासिक होम ओपनर खेला। इंटर मियामी का मुकाबला ऑस्टिन एफसी से था। मैच 2-2 की बराबरी पर समाप्त हुआ। मैच की शुरुआत में ऑस्टिन एफसी ने आक्रामक रुख अपनाते हुए छठे मिनट में बढ़त हासिल कर ली। गुइलहर्मे बिरो ने शानदार गोल दागकर मेहमान टीम को 1-0 से आगे कर दिया। हालांकि, इंटर मियामी ने जल्द ही वापसी की। टीम के कप्तान लियोनल मेसी ने बॉक्स के अंदर से बेहतरीन हेडर लगाकर क्लब का पहला ऐतिहासिक गोल किया और स्कोर 1-1 कर दिया। यह इस एमएलएस सीजन में मेसी का पहला गोल भी रहा। पहले हाफ के अंत तक दोनों टीमें बराबरी पर रहीं, लेकिन दूसरे हाफ में ऑस्टिन ने 53वें मिनट में एक और गोल कर बढ़त बना ली। इससे इंटर मियामी पर दबाव बढ़ गया, लेकिन टीम ने हार नहीं मानी। मैच के अंतिम चरण में कोच जेवियर माशेरानो ने रणनीतिक बदलाव करते हुए लुइस सुआरेज को मैदान पर उतारा। सुआरेज ने कोच के भरोसे को सही साबित करते हुए 82वें मिनट में कॉर्नर के बाद शानदार गोल कर स्कोर 2-2 से बराबर कर दिया। यह इस सीजन में उनका पहला गोल था और इसी के साथ इंटर मियामी ने अपने नए स्टेडियम में कम से कम एक अंक सुनिश्चित कर लिया। मैच के बाद माशेरानो ने स्वीकार किया कि टीम ने आखिरी 20-25 मिनट में काफी जोखिम उठाए, लेकिन घरेलू मैदान पर आक्रामक खेल दिखाना जरूरी था। उन्होंने यह भी कहा कि टीम अपने चैंपियन होने का दर्जा बनाए रखना चाहती है। पहला मैच ड्रॉ रहने के बावजूद इंटर मियामी के लिए यह एक सकारात्मक शुरुआत रही। क्लब पहले ही एमएलएस कप 2025, 2024 सपोर्टर्स शील्ड, और लीग्स कप 2023 जैसे बड़े खिताब जीत चुका है, और अब वह इस नई शुरुआत को और भी यादगार बनाने के इरादे से आगे बढ़ रहा है।