कूटनीतिक सफलता…. ईरान युद्ध के बीच होर्मुज से अब तक निकले तेल-गैस से भरे भारत के 9 जहाज

नई दिल्ली। पश्चिम एशिया में चल रहे संघर्ष (West Asia Crisis) के बीच ईरान (Iran) ने समुद्री मार्ग होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) को लगभग बंद कर दिया है। इससे खाड़ी देशों से गैस और तेल की आपूर्ति बाधित हो गई है। इसके परिणामस्वरूप अंतरराष्ट्रीय बाजार (International Market) में तेल की कीमतों में आग लगी है। लेकिन, भारत उन चुनिंदा देशों में शामिल है, जिन्होंने इस जोखिम भरे रास्ते से तेल और गैस से भरे सबसे अधिक जहाज सुरक्षित निकाले हैं। होर्मुज फारस और ओमान की खाड़ी के बीच एक संकरा समुद्री मार्ग है। ओमान और ईरान के बीच स्थित होर्मुज जलमार्ग एक जगह मात्र 33 किलोमीटर चौड़ा है। यह फारस की खाड़ी को शेष दुनिया से जोड़ता है। इस रास्ते से दुनिया का लगभग 20 फीसदी कच्चे तेल का नौवहन होता है। 28 फरवरी को अमेरिका-इस्राइल की ओर से हमला किए जाने के बाद ईरान ने इस मार्ग की नाकेबंदी कर दी है। कुछ तेल टैंकरों को ईरान ने निशाना भी बनाया है। लेकिन ईरान से अपने ऐतिहासिक संबंधों और मजबूत कूटनीति के जरिये भारत होर्मुज के रास्ते अब तक तेल और गैस से भरे 9 जहाज सुरक्षित निकाल लाने में सफल रहा है। इनमें से 8 जहाज भारतीय तट पर पहुंच गए हैं, जबकि एक पहुंचने वाला है। सबसे पहले जहाज पार कराया थापश्चिम एशिया में संघर्ष के बीच भारत ने सबसे पहले घरेलू लिक्विफाइड पेट्रोलिमय गैस (एलपीजी) से भरे दो जहाजों को होर्मुज पार कराया था। शिवालिक और नंदा देवी नामक इन दोनों टैंकरों को ईरान की नौसेना ने ही अपनी सुरक्षा में होर्मुज को पार कराा था। हालांकि, भारत ने भी अपने जहाजों की सुरक्षा के लिए क्षेत्र में पोत तैनात कर रखे हैं। शिवालिक और एमटी नंदा देवी 92,712 टन एलपीजी लेकर आए थे। शिवालिक 16 मार्च को गुजरात के मुंद्रा बंदरगाह और नंदा देवी उसके अगले दिन 17 मार्च को गुजरात के ही कांडला बंदरगाह पहुंचा था। जग लाडकी से जगत वसंत तक, भारत पहुंचे कई जहाजजग लाडकी संयुक्त अरब अमीरात से 80,886 टन कच्चा तेल लेकर 18 मार्च को मुंद्रा बंदरगाह पहुंचा था। इसके बाद पाइन गैस और जग वसंत 92,612 टन एलपीजी लेकर 26 और 28 मार्च को भारत पहुंचे थे। 94,000 टन एलपीजी लेकर बीडब्ल्यू टीवाईआर और बीडब्ल्यू ईएलएम भी आए हैं। बीडब्ल्यू टीवाई 31 मार्च को मुंबई और बीडब्ल्यू ईएलएम 1 अप्रैल को मंगलोर बंदरगाह पहुंचा था। पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने एक सोशल मीडिया पोस्ट में बताया कि लगभग 44,000 टन एलपीजी लेकर सी बर्ड 2 अप्रैल को मंगलोर बंदरगाह पहुंचा था। यह ईरान से एलपीजी लेकर आया है। सात साल में पहली बार भारत ने ईरान से गैस खरीदा है। ईरान के साथ भुगतान की समस्या नहीं कच्चे तेल की आपूर्ति पूरी तरह सुरक्षित केंद्र सरकार ने शनिवार को कहा कि ईरान से कच्चे तेल के आयात के लिए भुगतान संबंधी कोई समस्या नहीं है और रिफाइनरियां तेहरान के साथ दुनियाभर के विभिन्न आपूर्तिकर्ताओं से तेल हासिल कर रही हैं। पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने एक सोशल मीडिया पोस्ट में उन खबरों को खारिज किया, जिनमें दावा किया गया था कि ईरानी कच्चा तेल ले जा रहा एक तेल टैंकर अपने पहले से संकेतित गंतव्य भारत के बजाय चीन की ओर मुड़ गया है। मंत्रालय ने कहा कि ये दावे उद्योग के उस सामान्य अभ्यास की अनदेखी करते हैं, जहां परिचालन लचीलेपन के आधार पर यात्रा के दौरान कार्गो अपना गंतव्य बदल सकते हैं। यदि यह खेप भारत आती, तो लगभग सात वर्षों में ऐसी पहली खेप होती। मंत्रालय ने इन दावों को तथ्यात्मक रूप से गलत बताया कि भुगतान बाधाओं के कारण कार्गो को गुजरात के वाडिनार के बजाय चीन की ओर मोड़ा गया था। मंत्रालय ने कहा कि ईरानी कच्चे तेल के आयात के लिए भुगतान की कोई बाधा नहीं है। मंत्रालय ने स्पष्ट किया, भारत 40 से अधिक देशों से कच्चे तेल का आयात करता है, और कंपनियों के पास विभिन्न स्रोतों और भौगोलिक क्षेत्रों से तेल प्राप्त करने का पूर्ण लचीलापन है। मंत्रालय के अनुसार, भारतीय रिफाइनरियों ने ईरान सहित अपनी कच्चे तेल की आवश्यकताओं को सुरक्षित कर लिया है। जहाजों पर नजर रखने वाली फर्म केपलर ने शुक्रवार को कहा था कि 2002 में निर्मित और 2025 में अमेरिका द्वारा प्रतिबंधित टैंकर पिंग शुन अब गुजरात के वाडिनार के बजाय चीन के डोंगयिंग को अपना गंतव्य बता रहा है।
RR कप्तान का बड़ा बयान! रियान पराग बोले- ध्रुव जुरैल की टैलेंट के साथ नहीं हुआ इंसाफ

नई दिल्ली। आईपीएल 2026 में शनिवार को शाम का मुकाबला नरेंद्र मोदी स्टेडियम में गुजरात टाइटंस (जीटी) और राजस्थान रॉयल्स (आरआर) के बीच खेला गया। आरआर ने जीटी पर 6 रन से जीत दर्ज की। जीत के बाद आरआर के कप्तान रियान पराग ने विकेटकीपर बल्लेबाज ध्रुव जुरैल की जमकर तारीफ की। रियान पराग ने मैच के बाद जुरैल की बल्लेबाजी पर कहा, “मुझे लगता है कि हमने उसकी प्रतिभा के साथ अब तक न्याय नहीं किया है। उसने मुश्किल काम किया है। उसने छह और सात नंबर बैटिंग की है। अब जब हमारे पास मौका है तो मैं सबसे पहले कहने वाला था कि उसे नंबर तीन पर बैटिंग करनी चाहिए और उसने हमें दिखा दिया कि वह क्या कर सकता है। यह उसके लिए शुरुआत है। उम्मीद है वह आगे चलकर 700, 800 रन बनाएगा और हमें चैंपियनशिप जिताएगा।” पिछले सीजन तक निचले क्रम में बल्लेबाजी करने वाली ध्रुव जुरैल को आईपीएल 2026 में तीसरे नंबर पर बल्लेबाजी के लिए भेजा जा रहा है। सीएसके के खिलाफ सीजन के पहले मैच में 9 गेंदों पर 18 रन बनाने वाले जुरैल ने जीटी के खिलाफ अपने आईपीएल करियर की श्रेष्ठ पारी खेली। जुरैल ने 42 गेंदों पर 5 चौकों और 5 छक्कों की मदद से 75 रन बनाए। जुरैल की पारी की वजह से ही टॉस जीतने के बाद पहले बल्लेबाजी करने उतरी आरआर 6 विकेट पर 210 रन बना सकी। 211 रन के लक्ष्य का पीछा करने उतरी जीटी 20 ओवर में 8 विकेट के नुकसान पर 204 रन बना सकी और 6 रन से मैच हार गई। आरआर ने आखिरी 2 ओवरों में बेहतरीन गेंदबाजी की और मैच अपनी तरफ मोड़ लिया। जीटी को आखिरी दो ओवरों में जीत के लिए मात्र 15 रन चाहिए थे। 19वां ओवर फेंकने वाले जोफ्रा आर्चर और 20वां ओवर फेंकने वाले तुषार देशपांडे ने मात्र 4-4 रन दिए और जीटी को 204 रन पर रोक दिया। आरआर के लिए 4 ओवर में 41 रन देकर 4 विकेट लिए रवि बिश्नोई प्लेयर ऑफ द मैच रहे।
सबरीमाला में महिलाओं की एंट्री विवाद पर SC की 9 जजों की पीठ करेगी सुनवाई… अन्य धर्मों पर भी होगा असर….

नई दिल्ली। सबरीमाला मंदिर (Sabarimala Temple) में महिलाओं के प्रवेश (Women’s entry) से शुरू हुआ विवाद अब एक ऐतिहासिक संवैधानिक मोड़ पर खड़ा है। 7 अप्रैल 2026 से भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्य कांत की अध्यक्षता वाली 9 जजों की संविधान पीठ उन व्यापक कानूनी सवालों पर सुनवाई शुरू करने जा रही है। यह न केवल हिंदू धर्म, बल्कि मुस्लिम, पारसी और दाऊदी बोहरा समुदायों की धार्मिक प्रथाओं को भी प्रभावित करेंगे। सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) की यह पीठ केवल सबरीमाला मंदिर में महिलाओं के प्रवेश पर विचार नहीं कर रही है। अदालत के सामने असल चुनौती यह तय करना है कि क्या व्यक्तिगत मौलिक अधिकार किसी समुदाय के धार्मिक अधिकारों से ऊपर हैं। इस फैसले का असर मस्जिदों में महिलाओं के प्रवेश, पारसी महिलाओं के अधिकारों और दाऊदी बोहरा समुदाय में प्रचलित प्रथाओं पर भी पड़ेगा। 2018 में तत्कालीन सीजेआई दीपक मिश्रा की बेंच ने 4:1 के बहुमत से सबरीमाला में सभी आयु वर्ग की महिलाओं के प्रवेश की अनुमति दी थी। कोर्ट ने कहा था कि भक्ति को लैंगिक भेदभाव का शिकार नहीं बनाया जा सकता। एकमात्र महिला जज, जस्टिस इंदु मल्होत्रा ने तब असहमति जताते हुए कहा था कि धार्मिक प्रथाओं की तर्कसंगतता की जांच करना अदालतों का काम नहीं है। नवंबर 2019 में पुनर्विचार याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए कोर्ट ने पाया कि यह मुद्दा बहुत व्यापक है और इसे बड़ी बेंच (9 जजों) को भेज दिया गया। सुप्रीम कोर्ट के सामने कई सवालसंविधान पीठ कुछ मुद्दों पर स्पष्टता लाने की कोशिश कर सकती है। धार्मिक स्वतंत्रता के अधिकार का दायरा और सीमा क्या है? अनुच्छेद 25 (व्यक्तिगत अधिकार) और अनुच्छेद 26 (धार्मिक संप्रदाय के अधिकार) के बीच तालमेल कैसे बैठेगा? क्या धार्मिक संप्रदाय के अधिकार संविधान के ‘भाग-III’ (मौलिक अधिकार) के अधीन हैं? अनुच्छेद 25 और 26 में प्रयुक्त ‘नैतिकता’ शब्द का अर्थ क्या है? क्या इसमें संवैधानिक नैतिकता शामिल है? क्या अदालतें यह तय कर सकती हैं कि कोई धार्मिक प्रथा उस धर्म का अनिवार्य हिस्सा है या नहीं? अनुच्छेद 25(2)(b) में हिंदुओं के वर्गों का वास्तविक अर्थ क्या है? क्या कोई व्यक्ति जो उस विशेष धार्मिक संप्रदाय का हिस्सा नहीं है, उसकी प्रथाओं को कोर्ट में चुनौती दे सकता है? अन्य धर्मों पर भी होगा असरयह सुनवाई इसलिए भी ऐतिहासिक है क्योंकि इसमें कई अन्य विवादों को जोड़ दिया गया है। मुस्लिम महिलाओं के मस्जिदों में प्रवेश का अधिकार। दाऊदी बोहरा समुदाय में प्रचलित ‘बहिष्कार’ और अन्य प्रथाओं की वैधता। गैर-पारसी से शादी करने वाली पारसी महिलाओं के ‘अग्नि मंदिर’ में प्रवेश का अधिकार। आपको बता दें कि अखिल भारतीय मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड और कई जैन संगठनों ने भी इस मामले में हस्तक्षेप किया है, क्योंकि कोर्ट का फैसला उनके व्यक्तिगत कानूनों को प्रभावित कर सकता है। नई बेंच का गठनCJI सूर्य कांत के नेतृत्व वाली इस बेंच में विविधता का ध्यान रखा गया है। इसमें जस्टिस बीवी नागरत्ना सहित देश के विभिन्न उच्च न्यायालयों से आए अनुभवी जज शामिल हैं। 7 अप्रैल से होने वाली यह दैनिक सुनवाई भारतीय न्यायपालिका के इतिहास में सबसे महत्वपूर्ण संवैधानिक व्याख्याओं में से एक साबित होगी। अदालत के सामने सबसे बड़ी दुविधा यह है कि संविधान का अनुच्छेद 25 धर्म मानने की आजादी देता है, लेकिन साथ ही यह सार्वजनिक व्यवस्था, नैतिकता और स्वास्थ्य के अधीन है। याचिकाकर्ताओं का तर्क है कि कोई भी प्रथा जो महिलाओं की गरिमा के खिलाफ है, वह धर्म का अनिवार्य हिस्सा नहीं हो सकती। धार्मिक संस्थाओं का तर्क है कि धर्म की अपनी आंतरिक स्वायत्तता होती है और अदालतों को सदियों पुरानी परंपराओं में हस्तक्षेप नहीं करना चाहिए।
साउथेम्प्टन का शानदार खेल! आर्सेनल को हराकर FA कप के सेमीफाइनल में बनाई जगह

नई दिल्ली। इंग्लैंड के प्रतिष्ठित एफए कप का रोमांच चरम पर है। टूर्नामेंट में बड़े उलटफेर देखने को मिल रहे हैं। सबसे बड़े उलटफेर का शिकार आर्सेनल हुए है। आर्सेनल जैसी दिग्गज टीम को साउथेम्प्टन ने हराते हुए सेमीफाइनल में जगह बना ली। सेंट मैरी स्टेडियम में खेले गए एफए कप क्वार्टर फाइनल में साउथेम्प्टन ने आर्सेनल को 2-1 से हराया। मैच की शुरुआत में साउथेम्प्टन ने आक्रामक खेल दिखाया और हाफ टाइम से पहले रॉस स्टीवर्ट ने पहला गोल दागकर टीम को बढ़त दिलाई। इसके बाद लियो सेनेजा ने भी बेहतरीन मौके बनाए, लेकिन उन्हें गोल में तब्दील करने में देर कर दी। दूसरे हाफ में साउथेम्प्टन का दबदबा जारी रहा, हालांकि आर्सेनल ने वापसी करते हुए सब्स्टीट्यूट विक्टर ग्योकेरेस के गोल से बराबरी हासिल कर ली। जब मैच ड्रॉ की ओर बढ़ता दिख रहा था, तभी सब्स्टीट्यूट शिया चार्ल्स ने मैच खत्म होने से पांच मिनट पहले शानदार गोल कर साउथेम्प्टन को ऐतिहासिक जीत दिला दी। दूसरी ओर, मैनचेस्टर सिटी ने अपना दबदबा कायम रखते हुए लिवरपूल को 4-0 से हराकर लगातार आठवीं बार सेमीफाइनल में जगह बनाई। इस मैच के हीरो रहे एर्लिंग हालैंड, जिन्होंने शानदार हैट्रिक लगाई। उनके साथ एंटोनी सेमेन्यो ने भी गोल कर टीम की जीत को और मजबूत किया। इस जीत के साथ मैनचेस्टर सिटी ने एफए कप में घरेलू मैदान पर लगातार 18वीं जीत दर्ज की और पुराने रिकॉर्ड्स को पीछे छोड़ दिया। कोच पेप गार्डियोला के नेतृत्व में टीम लगातार बेहतरीन प्रदर्शन कर रही है और अब तक कई बड़े खिताब अपने नाम कर चुकी है। वहीं, चेल्सी ने भी शानदार खेल दिखाते हुए सेमीफाइनल में जगह पक्की की। स्टैमफोर्ड ब्रिज में खेले गए मुकाबले में उन्होंने पोर्ट वेले को 7-0 से हराया और क्लीन शीट भी बनाए रखी। कुल मिलाकर, इस बार का एफए कप का सेमीफाइनल बेहद रोमांचक होने वाला है, जहां बड़े क्लब्स के बीच कड़ी टक्कर देखने को मिलेगी।
रणबीर की ‘रामायण’ में अमिताभ बच्चन के दामाद नजर आएंगे, निभा रहे खास रोल

नई दिल्ली।बॉलीवुड में जब बड़े बजट की फिल्में बनती हैं, तो स्टार कास्ट और कहानी दोनों ही दर्शकों की उत्सुकता बढ़ा देते हैं। इसी कड़ी में रणबीर कपूर की आने वाली फिल्म ‘रामायण’ चर्चा में है। इसका पहला टीजर सामने आ चुका है और इसमें रणबीर के किरदार भगवान राम के रूप में पहली झलक देखने को मिली। डायरेक्टर नितेश तिवारी द्वारा निर्देशित इस फिल्म को लेकर फैन्स काफी उत्साहित हैं। फिल्म में बॉलीवुड से लेकर साउथ सिनेमा तक के जाने-माने कलाकार शामिल हैं। खास बात यह है कि इसमें बॉलीवुड के शहंशाह अमिताभ बच्चन के दामाद भी अहम भूमिका में नजर आएंगे। फिल्म का बजट और स्टार कास्ट‘रामायण’ का प्रोडक्शन ग्लोबल विजुअल इफेक्ट्स और एनीमेशन स्टूडियो DNEG के फाउंडर नमित मल्होत्रा कर रहे हैं। इस पिक्चर का बजट लगभग 4000 करोड़ रुपये बताया जा रहा है, जो इसे भारतीय सिनेमा की अब तक की सबसे महंगी फिल्मों में शामिल करता है। लीड रोल में रणबीर कपूर के साथ साई पल्लवी, यश, रवि दुबे, सनी देओल शामिल हैं। इसके अलावा सपोर्टिंग कास्ट भी बेहद शानदार है-अरुण गोविल, काजल अग्रवाल, लारा दत्ता, रकुल प्रीत सिंह, इंदिरा कृष्णन और शीबा चड्ढा जैसे कलाकार फिल्म का हिस्सा हैं। इस बीच, अमिताभ बच्चन के दामाद कुणाल कपूर भी एक महत्वपूर्ण रोल निभाते नजर आएंगे। कुणाल कपूर निभा रहे हैं भगवान इंद्र का रोलफिल्म में कुणाल कपूर भगवान इंद्र का किरदार निभा रहे हैं। भले ही यह छोटा सा रोल है, लेकिन रामायण की कहानी में इसका महत्व अत्यधिक है। भगवान इंद्र के कारण ऋषि गौतम ने अपनी पत्नी अहिल्या को पत्थर में बदल दिया था। बाद में भगवान राम ने उन्हें मोक्ष दिलाया। ऐसे में कुणाल का यह रोल कहानी के अहम हिस्से से जुड़ा हुआ है। कुणाल कपूर ने इस फिल्म को लेकर कहा था,“ये फिल्म हमारी संस्कृति के इतिहास में बहुत जरूरी है। इसे इतने बड़े स्केल पर बनाना जरूरी था, जितनी पहले कभी नहीं बनी। ये बहुत स्पेशल होने वाली है। ऑडियंस इसे देखकर सरप्राइज हो जाएगी।” अमिताभ बच्चन संग व्यक्तिगत रिश्ताकुणाल कपूर, अमिताभ बच्चन के छोटे भाई अजिताभ बच्चन की बेटी नैना बच्चन के पति हैं। अजिताभ और उनकी पत्नी रमोला बच्चन की बेटी नैना से कुणाल ने फरवरी 2015 में शादी की थी। इस तरह से वह बॉलीवुड के प्रतिष्ठित परिवार का हिस्सा भी बन चुके हैं। कुणाल कपूर का करियरकुणाल कपूर को फिल्म इंडस्ट्री में कई चर्चित फिल्मों में देखा जा चुका है। उनकी फिल्में ‘रंग दे बसंती’, ‘आजा नचले’, ‘लव शव ते चिकन खुराना’, ‘डॉन 2’ और ‘ज्वेल थीफ’ दर्शकों को याद हैं। उनकी एक्टिंग और स्क्रीन प्रजेंस ने उन्हें इस बड़े प्रोजेक्ट के लिए उपयुक्त बनाया है। दर्शकों की उत्सुकताफिल्म का बड़ा बजट, स्टार कास्ट और ऐतिहासिक महत्व इसे बेहद खास बनाते हैं। रणबीर कपूर के भगवान राम के रूप में स्क्रीन पर आने के साथ-साथ, कुणाल कपूर का छोटा लेकिन अहम रोल फिल्म की कहानी में नई जान डालने वाला है।
बॉलीवुड की चौंकाने वाली कहानी: स्टार एक्ट्रेस और बेटे के जन्मदिन पर हुई दर्दनाक घटना

नई दिल्ली।बॉलीवुड में कई कलाकारों की जिंदगी पर्दे के पीछे संघर्ष और दर्द से भरी होती है। इनमें से कुछ को अपने करियर के साथ-साथ पर्सनल लाइफ में भी बहुत कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है। ऐसी ही एक दर्दनाक कहानी है अभिनेत्री सईदा खान की, जिनकी जिंदगी का सबसे बड़ा दर्द उनके बेटे के जन्मदिन पर हुआ। फिल्म इंडस्ट्री में कदम और शुरुआती सफलतासईदा खान का जन्म एक मुस्लिम परिवार में हुआ। उन्होंने फिल्म इंडस्ट्री में कदम रखा फिल्ममेकर एचएच रवैल की मदद से। उन्हें पहली बार पहचान मिली फिल्म “अपना हाथ जगन्नाथ” से, जिसमें उनके साथ किशोर कुमार थे। इसके अलावा, उन्होंने “कांच की गुड़िया” जैसी फिल्मों में भी काम किया, जिसमें उनके साथ मनोज कुमार नजर आए। हालांकि शुरुआती सफलता के बावजूद सईदा का करियर बड़े पैमाने पर नहीं चला और उन्होंने धीरे-धीरे बी और सी ग्रेड फिल्मों में काम करना शुरू किया। प्यार और परिवार की स्थापनाइस दौरान सईदा का प्यार डायरेक्टर बृज सदनाह से हुआ। दोनों ने शादी की और दो बच्चे हुए—एक बेटा कमल और एक बेटी नम्रता। कमल ने बाद में कुछ फिल्मों में काम किया। सईदा अपने परिवार के प्रति बेहद समर्पित थीं और बच्चों की परवरिश में पूरा ध्यान देती थीं। बेटा के बर्थडे पर हुई दर्दनाक घटना21 अक्टूबर 1990 का दिन सईदा खान के लिए और उनके परिवार के लिए भयानक रात में बदल गया। उनके बेटे कमल का 20वां जन्मदिन था और सईदा इस दिन के जश्न की तैयारी कर रही थीं। इसी दौरान उनके पति, शराब के नशे में, सईदा और बेटी पर गोली चला दी। उन्होंने बेटे कमल को भी गोली मारने की कोशिश की और इसके बाद उन्होंने अपनी जान ले ली। इस हमले में सईदा की मौत हो गई, जबकि उनके बेटे कमल ने चमत्कारिक रूप से बचने में सफलता पाई। बेटे कमल ने साझा की कहानी कमल ने बाद में इस घटना का दर्दनाक सच साझा किया। उन्होंने बताया, “मुझे भी गोली लगी थी और बुलेट मेरी गर्दन के पास से निकली। मुझे बचने का कोई लॉजिकल कारण नहीं था। मेरी एकमात्र उम्मीद थी कि मुझे आगे बढ़ने दो और जीवन जीने दो।” कमल ने बताया कि उन्होंने अपनी माँ और बहन को अस्पताल पहुंचाया, लेकिन अस्पताल में पर्याप्त बेड नहीं थे। उन्होंने डॉक्टर से कहा कि अपनी माँ और बहन को जिंदा करने की कोशिश करें। अंततः कमल का जीवन बच गया, लेकिन उन्होंने अपना पूरा परिवार खो दिया। 40 की उम्र में हुई सईदा की मौत और उनकी यादेंसईदा खान की मौत उनके 40वें साल में हुई और यह बॉलीवुड की सबसे दुखद घटनाओं में से एक मानी जाती है। उनके बेटे और परिवार ने इस त्रासदी का सामना किया, लेकिन सईदा की कहानी आज भी हर किसी के रोंगटे खड़े कर देती है। उनकी जिंदगी और करियर ने यह दिखाया कि स्टारडम की चमक के पीछे कई बार दर्द और संघर्ष छिपा होता है। सईदा की कहानी बॉलीवुड के उन दुखद किस्सों में शामिल है, जो हमेशा याद रखी जाएंगी।
रवि बिश्नोई को 78 मैचों बाद मिली वो चीज, IPL में पहली बार किया कमाल

नई दिल्ली।आईपीएल में राजस्थान रॉयल्स के युवा स्पिनर रवि बिश्नोई ने शनिवार, 4 अप्रैल 2026 को गुजरात टाइटंस के खिलाफ अपनी टीम की जीत में निर्णायक भूमिका निभाई। 210 रन के लक्ष्य का पीछा करने उतरी गुजरात टाइटंस के खिलाफ बिश्नोई ने अपने 4 ओवर में मात्र 41 रन देकर 4 महत्वपूर्ण विकेट चटकाए। उन्होंने साई सुदर्शन (73 रन पर), ग्लेन फिलिप्स, वॉशिंगटन सुंदर और राहुल तेवतिया का शिकार किया। उनकी इस शानदार गेंदबाजी के दम पर गुजरात टाइटंस 6 विकेट पर ही ऑल आउट हो गई। इस प्रदर्शन के लिए बिश्नोई को प्लेयर ऑफ द मैच का पुरस्कार मिला, जो उनके आईपीएल करियर का पहला POTM अवॉर्ड है। लंबा इंतजार और नया कीर्तिमानबिश्नोई ने अब तक आईपीएल में 78 मैचों में अपना पहला प्लेयर ऑफ द मैच का अवॉर्ड जीता। यह उनके लिए बड़ी राहत की बात रही होगी क्योंकि आईपीएल के इतिहास में कई खिलाड़ी इतने मैच खेलते हुए भी POTM नहीं जीत पाए। उदाहरण के लिए, स्टुअर्ट बिन्नी ने 95, सौरभ तिवारी ने 93 और धवल कुलकर्णी ने 92 मैच खेलने के बावजूद यह सम्मान हासिल नहीं किया। रवि बिश्नोई ने अपने 79वें मैच में यह उपलब्धि दर्ज करके अपने नाम कर ली। आईपीएल 2026 में पर्पल कैप का दावाइस शानदार प्रदर्शन के साथ बिश्नोई ने आईपीएल 2026 की पर्पल कैप भी अपने नाम की। इस सीजन अब तक उन्होंने कुल 5 विकेट चटकाए हैं। उनके प्रदर्शन ने राजस्थान रॉयल्स को अहम मैच में जीत दिलाई और टीम को अंक तालिका में मजबूत स्थिति में रखा। बिश्नोई का मनोबल और तैयारी प्लेयर ऑफ द मैच मिलने के बाद रवि बिश्नोई ने कहा, “पिछला सीजन मेरे लिए मुश्किल था। मैंने हमेशा अपने प्रोसेस पर भरोसा रखा और अपनी लेंथ पर काम किया। अगर गेंद मेरी लेंथ से चूकती, तो छक्के लगते, यही मेरी एकमात्र कमजोरी थी। मैंने लगातार फिजिकल, मेंटल और टेक्निकल एडजस्टमेंट किए। मैदान पर फुल भरोसे के साथ गेंदबाजी करना मेरी रणनीति थी। उन्होंने कहा कि प्रत्येक विकेट उनके लिए खास था, लेकिन राहुल तेवतिया का विकेट सबसे महत्वपूर्ण रहा क्योंकि वह टीम के लिए एक मजबूत फिनिशर हैं। टीम वर्क और यंग टीम का योगदानरवि बिश्नोई ने टीम की जीत को केवल अपने प्रदर्शन से नहीं जोड़ा। उन्होंने कहा टीम के सभी खिलाड़ियों का योगदान अहम था। तुषार, जोफ्रा और अन्य खिलाड़ियों ने अंत तक शानदार बॉलिंग की। यह पूरी टीम की मेहनत का नतीजा है कि हम जीत सके। हम एक यंग टीम हैं और भविष्य में भी इसी तरह एंटरटेन करने की कोशिश करेंगे। बिश्नोई ने यह भी बताया कि टीम में खिलाड़ियों की रणनीति और निरंतरता ने उन्हें आत्मविश्वास दिया। इस जीत ने उन्हें मानसिक और तकनीकी रूप से और मजबूत बनाया। रवि बिश्नोई ने अपने 79वें आईपीएल मैच में पहला प्लेयर ऑफ द मैच अवॉर्ड जीतकर करियर में मील का पत्थर स्थापित किया। उनकी यह उपलब्धि केवल व्यक्तिगत सफलता नहीं, बल्कि राजस्थान रॉयल्स की यंग टीम की मेहनत और टीम वर्क का भी परिणाम है। पर्पल कैप जीतने और निर्णायक विकेट लेने के साथ बिश्नोई ने यह साबित कर दिया कि मेहनत, धैर्य और निरंतर प्रयास सफलता की कुंजी हैं।
एमपी में आंधी-बारिश का मजबूत सिस्टम सक्रिय, आज भी 27 जिलों में अलर्ट, 8 अप्रैल तक रहेगा ऐसा ही मौसम

भोपाल। मध्य प्रदेश में ओले, बारिश और तेज आंधी का मजबूत सिस्टम सक्रिय हो गया है। शनिवार को बैतूल, श्योपुर और मुरैना सहित 8 से 10 जिलों में ओलावृष्टि हुई, जिससे कई इलाकों में कश्मीर जैसा नजारा दिखा। वहीं, 20 से अधिक जिलों में तेज आंधी और बारिश दर्ज की गई। रविवार को भी मौसम का यही रुख बने रहने की संभावना है। मौसम विभाग ने ग्वालियर सहित 27 जिलों में आंधी और बारिश का अलर्ट जारी किया है। अगले 24 घंटों में जिन जिलों में मौसम प्रभावित रहेगा, उनमें ग्वालियर, भिंड, मुरैना, दतिया, निवाड़ी, छतरपुर, पन्ना, सतना, रीवा, मऊगंज, सीधी, सिंगरौली, मैहर, उमरिया, शहडोल, अनूपपुर, डिंडौरी, मंडला, बालाघाट, सिवनी, छिंदवाड़ा, नर्मदापुरम, बैतूल, हरदा, खंडवा, बुरहानपुर और पांढुर्णा शामिल हैं। इन क्षेत्रों में दोपहर के बाद मौसम बदल सकता है और 30 से 60 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से आंधी चलने का अनुमान है। सुबह से सक्रिय रहा मौसम सिस्टमशनिवार को प्रदेश में चक्रवाती परिसंचरण (साइक्लोनिक सर्कुलेशन) के चलते सुबह से ही कई जिलों में बारिश शुरू हो गई थी। दोपहर बाद इसका असर और बढ़ा। बैतूल, श्योपुर और मुरैना में भारी ओलावृष्टि से सड़कों पर सफेद परत जम गई। वहीं, भोपाल में रात के समय मौसम बदला। सीहोर, विदिशा, रतलाम और रायसेन सहित करीब 20 जिलों में बारिश और कहीं-कहीं तेज आंधी भी चली। तेज आंधी का अलर्टमौसम विभाग के अनुसार, अगले चार दिन यानी 8 अप्रैल तक प्रदेश में तेज हवाएं चलेंगी। कुछ जिलों में हवा की गति 50 से 60 किलोमीटर प्रति घंटे तक पहुंच सकती है, जबकि अन्य इलाकों में 30 से 40 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार रहने की संभावना है। 10-11 अप्रैल तक असर रहेगाप्रदेश में फिलहाल सक्रिय मौसम सिस्टम के साथ 7 अप्रैल से एक नया पश्चिमी विक्षोभ भी प्रभाव डालेगा। इसके चलते 10-11 अप्रैल तक कहीं आंधी तो कहीं बारिश की स्थिति बनी रह सकती है। इसके बाद यह सिस्टम कमजोर होगा और तापमान में तेजी से वृद्धि शुरू होगी। अप्रैल के दूसरे सप्ताह से ही गर्मी तेज होने लगेगी। महीने के अंतिम सप्ताह में ग्वालियर, धार, खरगोन, बड़वानी और नौगांव-खजुराहो में अधिकतम तापमान 44 से 45 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच सकता है। दतिया, मुरैना, श्योपुर, बड़वानी, खरगोन और धार जैसे जिलों में तापमान में और बढ़ोतरी होगी। दरअसल, अप्रैल में प्रदेश के दक्षिणी और पश्चिमी हिस्सों में गर्म हवाएं चलती हैं, जिससे इन इलाकों में भीषण गर्मी का असर देखने को मिलता है।
रोज खाएं जामुन, पाएं सेहत, इम्यूनिटी और दिल की सुरक्षा

नई दिल्ली । गर्मियों का मौसम आते ही बाजार में कई तरह के मौसमी फल दिखाई देने लगते हैं, जिनमें जामुन एक खास स्थान रखता है। खट्टे-मीठे स्वाद वाला यह फल न केवल शरीर को ठंडक पहुंचाता है, बल्कि कई औषधीय गुणों से भरपूर भी होता है। आयुर्वेद और आधुनिक विज्ञान दोनों ही जामुन को एक बेहतरीन सुपरफूड मानते हैं, जो संपूर्ण स्वास्थ्य को बेहतर बनाने में मदद करता है। आयुर्वेद में जामुन को विशेष रूप से डायबिटीज और पेट संबंधी बीमारियों के लिए लाभकारी बताया गया है। जामुन के फल के साथ-साथ इसकी पत्तियां और डाली भी औषधीय रूप में उपयोग की जाती हैं। इसकी डाली से दातून करने पर मुंह के रोगों से बचाव होता है और दांत मजबूत रहते हैं। जामुन की तासीर ठंडी मानी जाती है, जिससे यह शरीर की अतिरिक्त गर्मी को कम करता है और पेट को ठंडक प्रदान करता है। जामुन का सबसे बड़ा लाभ ब्लड शुगर को नियंत्रित करना है। इसमें ग्लाइसेमिक इंडेक्स कम होता है, जिससे यह डायबिटीज के मरीजों के लिए बेहद फायदेमंद साबित होता है। नियमित सेवन से ब्लड शुगर स्तर को संतुलित रखने में मदद मिलती है। इसके अलावा जामुन पाचन तंत्र के लिए भी काफी उपयोगी है। इसमें मौजूद फाइबर पाचन क्रिया को बेहतर बनाता है, कब्ज की समस्या को दूर करता है और पेट को स्वस्थ रखता है। गर्मियों में अक्सर भारी भोजन के कारण पाचन बिगड़ जाता है, ऐसे में जामुन इस समस्या को दूर करने में सहायक होता है। जामुन इम्यूनिटी बढ़ाने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। इसमें विटामिन C और एंटीऑक्सीडेंट्स की भरपूर मात्रा होती है, जो शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता को मजबूत बनाते हैं। इससे मौसमी बीमारियों से बचाव होता है और शरीर ऊर्जा से भरपूर रहता है। दिल की सेहत के लिए भी जामुन काफी फायदेमंद है। इसमें मौजूद पोटैशियम ब्लड प्रेशर को नियंत्रित रखने में मदद करता है, जबकि इसके एंटीऑक्सीडेंट्स कोलेस्ट्रॉल के स्तर को कम करने में सहायक होते हैं। इससे हृदय स्वस्थ बना रहता है और हृदय रोगों का खतरा कम होता है। कम कैलोरी वाला यह फल वजन नियंत्रित रखने में भी मदद करता है। इसमें मौजूद फाइबर भूख को नियंत्रित करता है, जिससे बार-बार खाने की आदत कम होती है। इतना ही नहीं, जामुन त्वचा के लिए भी लाभकारी है। इसमें मौजूद एंटीऑक्सीडेंट्स त्वचा को स्वस्थ और चमकदार बनाते हैं। गर्मियों में धूप और पसीने से प्रभावित त्वचा को यह निखारने में मदद करता है और प्राकृतिक ग्लो प्रदान करता है। इस प्रकार जामुन सिर्फ स्वाद ही नहीं बल्कि सेहत का खजाना है। अगर आप गर्मियों में खुद को स्वस्थ, ऊर्जावान और फिट रखना चाहते हैं, तो इस मौसमी फल को अपनी डाइट में जरूर शामिल करें।
MP: ग्वालियर में दोपहर बाद जमकर गिरे ओले…सड़कों पर बिछी सफेद चादर… कारों के शीशे टूटे

ग्वालियर। मध्य प्रदेश (Madhya Pradesh) के ग्वालियर (Gwalior) में शनिवार का सूरज तीखे तेवर लेकर निकला था, लेकिन दोपहर होते-होते कुदरत ने अपना रौद्र रूप दिखा दिया. अचानक आए घने बादलों के बाद ऐसी भयानक ओलावृष्टि (Terrible Hailstorm) हुई कि शहर के पॉश इलाके सिटी सेंटर की सड़कें सफेद चादर (Roads Covered White sheets) से ढक गईं. यह नजारा देखने में जितना सुंदर था, शहर के लिए उतना ही नुकसानदेह साबित हुआ. ओलों का आकार इतना बड़ा था कि ग्वालियर की शान महाराजा बाड़ा स्थित म्यूजियम के ऊपर लगी ऐतिहासिक घड़ी ओलों की चोट से टूट गई है. शहर के एक निजी अस्पताल की बाउंड्री वॉल गिरने से उसके नीचे खड़ी कई कारें दब गईं. यही नहीं, ओलों के सीधे प्रहार से सड़कों के किनारे और पार्किंग में खड़े बाइक और कारों के शीशे तक चकनाचूर हो गए। हालात कुछ ऐसे हो गए कि शहर के मुरार, आनंद नगर, बहोड़ापुर, विनय नगर समेत सिटी सेंटर इलाकों में इतनी अधिक ओलावृष्टि हुई कि वहां सफेद चादर पसर गई. कश्मीर जैसा मंजर दिखाई देने लगा। एक तरफ शहरवासियों को गर्मी से राहत मिली, तो दूसरी तरफ अन्नदाता के माथे पर चिंता की लकीरें गहरी हो गईं. खेतों में गेहूं की फसल पककर तैयार खड़ी थी, जिसे इस ओलावृष्टि ने जमीन पर बिछा दिया है. फसल खराब होने से किसानों को भारी आर्थिक नुकसान की आशंका है। सटीक निकली IMD की चेतावनीभारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने शुक्रवार को ही पश्चिमी विक्षोभ के सक्रिय होने की चेतावनी दी थी. मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार, भूमध्य सागर से उठी इन हवाओं ने जेट स्ट्रीम के सहारे भारत पहुंचकर मध्य प्रदेश और राजस्थान में असर दिखाना शुरू कर दिया है। विभाग ने अलर्ट जारी किया है कि 7 अप्रैल तक गरज-चमक और ओलावृष्टि का यह सिलसिला जारी रह सकता है. इस साल मार्च में सामान्य से कहीं अधिक पश्चिमी विक्षोभ सक्रिय रहे, जिसका असर अब अप्रैल की शुरुआत में भी दिख रहा है. पश्चिमी विक्षोभ आमतौर पर सर्दियों के महीनों यानी दिसंबर से मार्च के दौरान सबसे ज्यादा सक्रिय होते हैं।