MP: ओबेदुल्लागंज के वेयर हाउस में सड़ गया 35 करोड़ रुपये कीमत का हजारों टन गेहूं!

रायसेन। मध्य प्रदेश (Madhya Pradesh) के रायसेन (Raisen) से चौंकाने वाला मामला सामने आया है. यहां ओबेदुल्लागंज (Obedullaganj) के वेयर हाउस (Warehouses) में रखे हजारों टन गेहूं (Thousands Tons Wheat) के खराब होने की बात कही जा रही है. करीब 35 करोड़ रुपये कीमत का गेहूं सड़ गया, जबकि इसे बचाने के नाम पर भारी खर्च भी किया गया. वेयर हाउस में करीब 22 हजार टन गेहूं लंबे समय तक रखा रहा. इसे सुरक्षित रखने के लिए 30 से ज्यादा बार कीटनाशक छिड़काव किया गया, लेकिन हालत इतनी खराब हो गई कि यह अनाज अब उपयोग के लायक भी नहीं बचा. गेहूं से दुर्गंध आने की बात कही जा रही है. वह पशुओं के चारे के लिए भी अनुपयोगी हो चुका है। इस मामले में सबसे बड़ा सवाल यह है कि आखिर इतना बड़ा स्टॉक वेयर हाउस में सालों तक क्यों रखा गया और समय रहते इसकी निकासी या उपयोग क्यों नहीं किया गया? जानकारी सामने आई है कि यह गेहूं मूल रूप से सीहोर जिले के बख्तरा से साल 2022 में यहां शिफ्ट किया गया था, जबकि उससे पहले भी इसके खराब होने की आशंका जताई जा चुकी थी। किसान नेता राहुल गौर ने कहा कि नूरगंज और देववटिया वेयर हाउस का मामला संज्ञान में आया. मैंने जानकारी ली तो पता चला कि गेहूं 16-17 में बख्तरा में तुला था. साल 2022 में इसे नूरगंज और देववटिया शिफ्ट किया गया. ये गेहूं शिफ्ट होते समय अधिकारियों के द्वारा बता दिया गया था कि ये गेहूं खराब हो चुका है. गेहूं की आज ये स्थिति है कि आप उस क्षेत्र में अगर खड़े होते हैं तो वो गेहूं वेयर हाउस के बाहर स्मेल कर रहा है. 35 करोड़ के गेहूं पर 150 करोड़ शासन खर्च कर चुका है। वेयर हाउस कॉरपोरेशन औबेदुल्लागंज के प्रबंधक सीएस डूडवे ने कहा कि 2022 में 22,900 मीट्रिक टन गेहूं आया था. उसके बाद डिलिवरी भी हो गई. अभी 12,300 मीट्रिक टन बचा हुआ है. बखतरा से ही खराब आया था. इस गेहूं को लेकर शासन स्तर से कार्यवाही होगी। शाखा प्रबंधक होने के नाते रेगुलर पत्राचार कर रहे हैं और शासन के संज्ञान में ला रहे हैं. जितना जल्दी हो सके, इसका निराकरण कराने का प्रयास कर रहे हैं. ये है कि जल्दी निराकरण हो जाए तो अच्छा है. स्पेस मिल जाए और नए उपार्जन का भंडारण भी हो जाए. यहां से रेगुलर पत्राचार किया जा रहा है। पूरे मामले को लेकर तहसीलदार ने क्या कहा?तहसीलदार नीलेश सरवटे ने कहा कि अभी ये बात संज्ञान में आई है. वरिष्ठों को भी इसकी जानकारी है. इस पूरे मामले की जांच होगी और विस्तृत जांच के बाद जो भी निर्णय होगा, वो वरिष्ठ अधिकारियों द्वारा किया जाएगा। कलेक्टर के निर्देश पर गोरगंज तहसील के सभी वेयर हाउस एक-एक कर चेक किए जा रहे हैं. कल कई गोदाम चेक कर लिए हैं. विस्तृत रिपोर्ट के बाद ही जो वरिष्ठ अधिकारियों द्वारा निर्णय लिया जाएगा, जैसे निर्देश होंगे, वैसे कार्य किया जाएगा. अभी जांच रिपोर्ट नहीं आई है, रिपोर्ट आने के बाद जो भी निर्णय होगा, उसके आधार पर कार्रवाई की जाएगी। प्रशासन की ओर से फिलहाल मामले की जांच शुरू कर दी गई है. सवाल यह है कि अगर गेहूं पहले से खराब था, तो उसे बार-बार शिफ्ट करने और लंबे समय तक स्टोर रखने की अनुमति किसने दी? और अगर यह स्टॉक समय रहते उपयोग में नहीं लाया गया, तो इसके लिए जिम्मेदार कौन है? फिलहाल प्रशासन जांच रिपोर्ट का इंतजार कर रहा है. रिपोर्ट आने के बाद ही यह तय होगा कि खराब गेहूं को नीलाम किया जाएगा या नष्ट किया जाएगा।
केदारनाथ के लिए इस दिन शुरू होगी हेली सेवा बुकिंग… जानिए फुल डिटेल

देहरादून। उत्तराखंड नागरिक उड्डयन विकास प्राधिकरण (Uttarakhand Civil Aviation Development Authority- यूकाडा) ने बताया कि केदारनाथ (Kedarnath) के लिए हेली सेवा बुकिंग ( Heli Service Booking) 10 से 12 अप्रैल के बीच शुरू होगी। यूकाडा के मुख्य कार्यकारी अधिकारी डॉ.आशीष चौहान ने बताया कि इस बार यात्रा व्यवस्थाओं को अधिक पारदर्शी और सुगम बनाने को कई महत्वपूर्ण बदलाव किए गए हैं। टिकटों की कालाबाजारी रोकने पर जोरचौहान ने रविवार को बताया, हेली सेवा के टिकटों की कालाबाजारी रोकने और व्यवस्था को प्रभावी बनाने के लिए 100% ऑनलाइन टिकटिंग की जाएगी। बुकिंग का जिम्मा इस बार भी आईआरसीटीसी के पास ही रहेगा। शुरू में टिकट लगभग 20-20 दिनों के स्लॉट (चरणबद्ध तरीके) में खोले जाएंगे। इस के बाद मौसम की स्थिति और यात्रियों की भीड़ का आकलन करते हुए आगे के चरणों की बुकिंग खोली जाएगी। भुगतान प्रक्रिया में सुधारयूकाडा व आईआरसीटीसी की हालिया बैठक में स्पष्ट किया जा चुका है कि कुल आठ रूटों पर हेली सेवाओं के लिए अलग-अलग ऑपरेटरों का चयन किया गया है। इनमें चिप्सन एविएशन, राजस एयरो स्पोर्ट्स एंड एडवेंचर, थम्बी एविएशन, पिलग्रिमेज एविएशन, यूनाइटेड हेली चार्टर्स प्राइवेट लिमिटेड,हिमालयन हेली सर्विसेज, ट्रांसभारत एविएशन और एरो एयरक्राफ्ट शामिल हैं। इनमें से तीन, चारधाम रूट पर पहली बार सेवाएं देंगी। इधर, चौहान ने निर्देश दिए हैं कि ऑपरेटरों के भुगतान में देरी न की जाए ताकि हेली सेवाओं के संचालन में कोई बाधा न आए। रिफंड और शिकायतों पर सख्त रुखपिछली बार यात्रा के दौरान कुछ मामलों में यात्रियों को हेली सेवा का रिफंड मिलने में देरी को यूकाडा ने गंभीरता से लिया है। इसके चलते यूकाडा ने इस बार क्लेम व्यवस्था को आसान बनाने का निर्णय लिया है। चौहान ने आश्वस्त किया कि ऐसे मामलों में अब से जिन ऑपरेटरों के खिलाफ शिकायतें मिलेंगी, उन्हें नोटिस जारी कर नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। यात्रियों की सुविधा के लिए एडवाइजरी भी जारी करेंगे, जिससे उन्हें नियमों के साथ अपने अधिकारों की पूर्व जानकारी रहे। किरायायूकाडा द्वारा तय नई दरों के अनुसार इस वर्ष केदारनाथ हेली सेवा के किराए में मिश्रित बदलाव देखने को मिल रहा है। गुप्तकाशी से आने-जाने का किराया 12,154 रुपये प्रति यात्री तय किया गया है, जो पिछले साल के 12,444 रुपये के मुकाबले 290 रुपये कम है। वहीं, फाटा से किराया बढ़ाकर 9,680 रुपये कर दिया गया है, जो पिछले वर्ष के 8,842 रुपये से 838 रुपये अधिक है। दूसरी ओर, सिरसी रूट पर यात्रियों को बड़ी राहत मिली है—इस बार किराया 6,086 रुपये रखा गया है, जो पिछले साल के 8,839 रुपये से 2,753 रुपये कम है। इन सभी किरायों पर जीएसटी और आईआरसीटीसी पोर्टल का ऑनलाइन बुकिंग शुल्क अलग से देना होगा।
अप्रैल 2026 में विवाह और मांगलिक कार्य के शुभ मुहूर्त: जानें कौन से दिन करें शादी और गृह प्रवेश

नई दिल्ली। अप्रैल 2026 में विवाह और अन्य मांगलिक कार्यों की तैयारी कर रहे लोगों के लिए शुभ समाचार है। सनातन धर्म में खरमास को विशेष रूप से शुभ कार्यों के लिए अनुकूल नहीं माना जाता। खरमास साल में दो बार आता है और जब सूर्य धनु या मीन राशि में प्रवेश करते हैं, तब यह अवधि शुरू होती है। यह पूरे एक महीने तक चलता है और इस दौरान विवाह, गृह प्रवेश, नामकरण, सगाई, मुंडन और नए व्यापार या संपत्ति की खरीद जैसी मांगलिक गतिविधियों से बचने की सलाह दी जाती है। ज्योतिष के अनुसार, सूर्य ग्रह को पिता पक्ष का प्रतिनिधि और ग्रहों का राजा माना गया है। जब सूर्य मीन या धनु राशि में होते हैं, तो उनका तेज कम हो जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, सूर्य का तेज मांगलिक कार्यों के लिए शुभ फल देने के लिए आवश्यक है। इसलिए खरमास के दौरान कोई भी शुभ कार्य करने से उसका परिणाम अनिश्चित या अशुभ माना जाता है। इस बार अप्रैल 2026 में खरमास 14 अप्रैल को समाप्त हो जाएगा। इस दिन सूर्य देव मेष राशि में प्रवेश करेंगे। सूर्य का राशि परिवर्तन होते ही खरमास का प्रभाव समाप्त हो जाएगा और 15 अप्रैल से विवाह, मुंडन, नामकरण, गृह प्रवेश और नए कार्य जैसे मांगलिक कार्य फिर से शुभ और फलदायक हो जाएंगे। विवाह के लिए अप्रैल में कुल 8 शुभ मुहूर्त उपलब्ध हैं। ये तिथियां हैं: 15, 20, 21, 25, 26, 27, 28 और 29 अप्रैल 2026। वहीं गृह प्रवेश के लिए अप्रैल में केवल एक मुहूर्त उपलब्ध है, जो 21 अप्रैल 2026 को पड़ रहा है। इस दिन गृह प्रवेश करने से घर में सुख, समृद्धि और खुशहाली बनी रहती है। इस प्रकार, अप्रैल के दूसरे भाग से मांगलिक कार्यों की योजना बनाने वालों के लिए समय अत्यंत अनुकूल है। विवाह, गृह प्रवेश या अन्य मांगलिक कार्यक्रमों की तैयारी करने वाले परिवारों को इस अवधि का लाभ उठाना चाहिए। इस समय सूर्य का तेज पूर्ण रूप से प्रभावी होने के कारण सभी शुभ कार्य सफलता और मंगल की प्राप्ति के साथ संपन्न होंगे। अप्रैल 2026 के शुभ मुहूर्तों का पालन कर योजना बनाना न केवल धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है बल्कि यह आपके कार्यक्रम को सफल और सौभाग्यपूर्ण बनाने में भी मदद करेगा।
राज्य सरकार हर घड़ी किसानों के साथ, तय वक्त पर प्रारंभ होगी गेहूं खरीदी: मुख्यमंत्री डॉ. यादव

भोपाल। मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि प्रदेश के किसानों का हर तरह से कल्याण हमारी प्रतिबद्धता है। हमारी सरकार हर घड़ी किसानों के साथ है। प्रदेश में तय वक्त पर न्यूनतम समर्थन मूल्य पर गेहूं की खरीदी प्रारंभ कर दी जाएगी। उपार्जन पोर्टल पर पंजीयन कराने वाले सभी किसानों का गेहूं खरीदा जाएगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव रविवार देर शाम अपने निवास स्थित समत्व भवन में गेहूं उपार्जन कार्य के संबंध में सरकार द्वारा गठित मंत्री समूह के सदस्य एवं कृषक प्रतिनिधियों के साथ हुई बैठक को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि उपार्जन प्रक्रिया में पहले छोटे किसानों का गेहूं खरीदा जाएगा। इसके बाद मध्यम एवं बड़े किसानों के गेहूं की खरीदी की जाएगी। स्लॉट बुकिंग वाले सभी किसानों का गेहूं चरणबद्ध रूप से खरीदा जाएगा। उन्होंने कहा कि प्रदेश में बारदाने की कोई कमी नहीं है। सरकार सभी व्यवस्थाएं कर रही हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि राज्य सरकार किसानों के हितों की सुरक्षा के लिए विशेष रूप से संवेदनशील है। गेहूं उपार्जन में बारदान की उपलब्धता निरंतर बनाए रखने के लिए हरसंभव प्रयास किए जा रहे हैं। प्रदेश में गेहूं खरीदी में किसानों को किसी भी प्रकार से बारदाने की समस्या नहीं आने दी जाएगी। केन्द्र सरकार, जूट कमिश्नर सहित अन्य बारदान प्रदाय एजेंसियों से बारदान आपूर्ति के लिए राज्य सरकार लगातार सम्पर्क बनाए हुए है। उपार्जन शुरू होने से पहले कराएं तौल केन्द्रों का निरीक्षणमुख्यमंत्री ने कहा कि गेहूं उपार्जन व्यवस्था को सरल, सहज और सुविधाजनक बनाया जाये। किसानों को उपार्जन केन्द्र तक आने और गेहूं बेचने में किसी भी तरह की कठिनाई न होने पाये। उन्होंने उपार्जन व्यवस्था पर नियमित रूप से निगरानी के लिए एक राज्य स्तरीय एवं कृषि उपज मंडियों में भी कंट्रोल रूम बनाने के निर्देश खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों को दिए। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि गेहूं उपार्जन के दृष्टिगत प्रदेश के सभी तौल केंद्रों का 10 अप्रैल से पहले गहन निरीक्षण करा लिया जाए, जिससे किसानों में किसी भी तरह का संशय न रहे। उन्होंने कहा कि प्रदेश की सभी कृषि उपज मंडियों के वर्तमान ढांचे में क्रमबद्ध सुधार किया जाये। सभी मंडियों को वैश्विक जरुरतों के मुताबिक अपग्रेड कर इन्हें वर्ल्ड क्लास मंडी की तरह तैयार किया जाये। मुख्यमंत्री ने कहा कि गेहूं उपार्जन केंद्रों में आने वाले किसानों को सभी प्रकार की बुनियादी सुविधाएं जैसे बिजली, पीने का पानी, बैठक, छाया, प्रसाधन एवं पार्किंग सुविधा उपलब्ध कराई जाये। किसी को भी किसी भी प्रकार की प्रक्रियागत या व्यवस्थागत असुविधा का सामना न करना पड़े। किसी भी केन्द्र में किसानों/ट्रेक्टर-ट्राली की लंबी-लंबी कतारें न लगें, सभी किसानों का सहजता से गेहूं तुल जाये, ऐसी व्यवस्थाएं की जाएं। जिन किसानों से गेहूं खरीदा जाये, कम से कम समय में उनके खातों में भुगतान कर देने की व्यवस्थाएं भी सुनिश्चित की जाएं। 10 अप्रैल से प्रारंभ हो जाएगी गेहूं खरीदीखाद्य एवं नागरिक आपूर्ति विभाग की अपर मुख्य सचिव रश्मि अरुण शमी ने बताया कि राज्य सरकार द्वारा प्रदेश में न्यूनतम समर्थन मूल्य पर गेहूं खरीदी के लिए सभी तैयारियां पूरी कर ली गई हैं। प्रदेश में इंदौर, उज्जैन, भोपाल एवं नर्मदापुरम संभाग में 10 अप्रैल से एवं अन्य सभी संभागों में 15 अप्रैल से न्यूनतम समर्थन मूल्य पर गेहूं का उपार्जन प्रारंभ होने जा रहा है। उन्होंने बताया कि जिन संभागों में 10 अप्रैल से गेहूं खरीदी शुरू होनी है, उनके लिए आगामी मंगलवार, 7 अप्रैल से पंजीकृत किसानों की स्लॉट बुकिंग प्रारंभ हो जायेगी। शुक्रवार, 10 अप्रैल से न्यूनतम समर्थन मूल्य पर गेहूं खरीदी प्रारंभ कर दी जाएगी। उपार्जन वर्ष 2026-27 में गेहूं उपार्जन के लिए प्रदेश के 19 लाख 4 हजार 644 किसानों ने अपना पंजीयन कराया है। गेहूं उपार्जन के लिए इस वर्ष प्रदेश में कुल 3627 उपार्जन केंद्र बनाये गये हैं। बीते उपार्जन वर्ष 2025-26 में 15 लाख 44 हजार 55 किसानों ने गेहूं उपार्जन के लिए पंजीयन कराया था। इस उपार्जन वर्ष के लिए गेहूं का न्यूनतम समर्थन मूल्य 2,625 रुपये प्रति क्विंटल तय किया गया है। राज्य सरकार प्रदेश के किसानों को गेहूं के न्यूनतम समर्थन मूल्य के अतिरिक्त 40 रूपए प्रति क्विंटल बोनस का लाभ भी इस वर्ष देने जा रही है। अपर मुख्य सचिव ने बताया कि प्रदेश में 78 लाख मीट्रिक टन गेहूं का उपार्जन होना अनुमानित है। इसके लिए 3 लाख 12 हजार गठान बारदानों की आवश्यकता होगी। प्रदेश में गेहूं खरीदी आरंभ करने के लिए आवश्यक बारदान का पर्याप्त स्टॉक उपलब्ध है। केन्द्र सरकार की ओर से लिमिट भी तय कर दी गई है। राज्य सरकार को केन्द्र से हर जरूरी सहयोग भी मिल रहा है। जूट कमिश्नर कार्यालय सहित अन्य बारदाना प्रदायकर्ताओं से भी बारदान सामग्री प्राप्त की जा रही है। इसके साथ ही गेहूं उपार्जन के लिए गठित मंत्री-मंडलीय समिति के निर्देश पर अतिरिक्त बारदान खरीदने की प्रक्रिया भी तेजी से जारी है। बैठक में राजस्व मंत्री करण सिंह वर्मा, कृषि मंत्री एदल सिंह कंषाना, खाद्य मंत्री गोविन्द सिंह राजपूत, पशुपालन राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) लखन पटेल, भाजपा प्रदेशाध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल सहित कृषक प्रतिनिधि और खाद्य, सहकारिता एवं अन्य विभागीय अधिकारी भी उपस्थित थे।
काशी की पावन धरा पर सम्राट विक्रमादित्य महानाट्य का हुआ भव्य समापन

भोपाल। धर्म, संस्कृति और ज्ञान की अविनाशी नगरी काशी के बीएलडब्ल्यू मैदान में पिछले तीन दिनों से चल रहे सांस्कृतिक महाकुंभ (सम्राट विक्रमादित्य महानाट्य) का रविवार की शाम गौरवमयी समापन हुआ। महानाट्य सम्राट विक्रमादित्य के मंचन के अंतिम दिन बाबा विश्वनाथ के हजारों भक्तों, कला रसिकों, कला प्रेमियों और स्थानीय नागरिकों ने भरपूर आनंद लिया। मध्य प्रदेश शासन के संस्कृति विभाग द्वारा उत्तर प्रदेश सरकार के विशेष सहयोग से आयोजित महानाट्य ‘सम्राट विक्रमादित्य’ के अंतिम दिन वाराणसी की जनता का उत्साह अपने चरम पर रहा। समापन समारोह में उत्तर प्रदेश के वित्त एवं संसदीय कार्य मंत्री सुरेश कुमार मुख्य अतिथि के रूप में सम्मिलित हुए। विक्रमादित्य नायक जन-जन के हृदय में लोकमान्यउत्तर प्रदेश के मंत्री सुरेश कुमार ने कहा कि भारत की माटी में भगवान श्रीराम और युगावतार श्रीकृष्ण के बाद यदि कोई नायक जन-जन के हृदय में लोकमान्य हुआ है, तो वे उज्जैन के अधिपति सम्राट विक्रमादित्य ही थे। उन्होंने कहा कि “इतिहास के पन्नों में सम्राट विक्रमादित्य ने दुर्दांत विदेशी आक्रांताओं को भारत की सीमाओं से खदेड़कर निर्णायक विजय प्राप्त की थी, जिसके उपलक्ष्य में गौरवशाली ‘विक्रम सम्वत्’ का प्रवर्तन हुआ।” उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के दूरदर्शी नेतृत्व में उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश की सरकारें मिलकर अपनी गौरवशाली विरासत को विकास की मुख्यधारा से जोड़ रही हैं। काशी विश्वनाथ मंदिर परिसर में स्थापित उज्जैन की ‘विक्रमादित्य वैदिक घड़ी’ इसी सांस्कृतिक सेतु का जीवंत प्रमाण है। महानाट्य का सजीव मंचन: आँखों के सामने जीवंत हुआ इतिहाससमापन की संध्या पर ‘विशाला’ संस्था उज्जैन के कलाकारों द्वारा प्रस्तुत महानाट्य ‘सम्राट विक्रमादित्य’ ने दर्शकों को भाव-विभोर कर दिया। भव्य त्रि-आयामी मंच पर जब सैकड़ों कलाकारों ने एक साथ सम्राट के पराक्रम और उनके सुशासन को जीवंत किया, तो पूरा मैदान ‘जय श्री महाकाल’ के जयघोष से गूँज उठा। नाटक के निर्देशक संजीव मालवीय के कुशल निर्देशन में सम्राट की न्यायप्रियता, ‘सिंहासन बत्तीसी’ के प्रसंग और विदेशी शत्रुओं के दमन के दृश्यों को जिस भव्यता के साथ प्रस्तुत किया गया, उसने दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। पार्श्व संगीत, युद्ध के सजीव दृश्य और प्रभावशाली संवादों ने यह सिद्ध कर दिया कि हमारी गौरवशाली संस्कृति आज भी जन-मानस के हृदय में धड़कती है। अभूतपूर्व प्रदर्शनी: सम्राट विक्रमादित्य और अयोध्या का अटूट संबंधमंचन के साथ-साथ आयोजन स्थल पर मध्य प्रदेश संस्कृति विभाग द्वारा ‘भारतीय ज्ञान परंपरा’ पर केंद्रित एक विशेष प्रदर्शनी भी लगाई गई। इस प्रदर्शनी ने वाराणसी के विद्वानों और आमजन को एक चौंकाने वाले ऐतिहासिक तथ्य से परिचित कराया कि अयोध्या में प्रभु श्रीराम के मंदिर का प्राचीन निर्माण सम्राट विक्रमादित्य द्वारा ही संपन्न कराया गया था। प्रदर्शनी में भारतीय ऋषि और विज्ञान, शिव पुराण और मध्य प्रदेश के पवित्र स्थलों की विस्तृत जानकारी दी गई। प्रदर्शनी देखने आए विद्यार्थियों और शोधार्थियों ने इसे ‘ज्ञान का खजाना’ बताया। कक्षा दसवीं की छात्रा रोहिणी यादव ने साझा किया कि उसे पहली बार अपनी समृद्ध वैज्ञानिक परंपरा और विक्रमादित्य के अयोध्या दर्शन के बारे में इतनी गहराई से पता चला। ‘माँ गंगा से नर्मदा तक’: पर्यटन और संस्कृति का ऐतिहासिक एमओयूइस आयोजन का एक महत्वपूर्ण पड़ाव मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश के बीच हुआ एमओयू रहा, जिसकी थीम माँ गंगा से नर्मदा तक” रखी गई। इसके माध्यम से काशी विश्वनाथ (वाराणसी) और महाकालेश्वर (उज्जैन) के बीच धार्मिक और सांस्कृतिक पर्यटन को बढ़ावा देने की योजना बनाई गई है। मध्य प्रदेश पर्यटन बोर्ड के स्टॉल्स पर काशीवासियों को ‘लघु मध्य प्रदेश’ का अनुभव हुआ। व्हीआर बॉक्स के माध्यम से लोगों ने काशी में बैठे-बैठे ही ओरछा, सांची और खजुराहो की गलियों की यात्रा की। वहीं ‘माँ की रसोई’ में परोसे गए मालवा की प्रसिद्ध थाली, इंदौरी पोहा-जलेबी और कुल्हड़ चाय का स्वाद चखने के लिए लोगों का तांता लगा रहा। लोक कलाओं का मनोहारी संगममहानाट्य के मुख्य मंचन से पूर्व मध्य प्रदेश के लोक कलाकारों ने अपनी अद्भुत कला से काशी को सराबोर कर दिया। मालवा का मटकी नृत्य, निमाड़ का गणगौर, डिंडोरी का गुदम्बबाजा और उज्जैन के डमरू दल की गूँज ने दोनों राज्यों के साझा सांस्कृतिक डीएनए को प्रदर्शित किया। कार्यक्रम के अंत में अतिथियों का सम्मान विक्रम पंचांग और अंगवस्त्र भेंट कर किया गया। इस अवसर पर पंडित नरेश शर्मा, डॉ. राजेश कुशवाहा और राजा भोज शोध प्रभाग के निदेशक संजय यादव ने इस आयोजन को भारतीय गौरव को विश्व पटल पर लाने का एक ‘सांस्कृतिक अनुष्ठान’ बताया। जय महाकाल और जय बाबा विश्वनाथ के नारों के साथ इस ऐतिहासिक त्रिवार्षिक उत्सव का समापन हुआ, जिसने काशी और उज्जैन के बीच के सदियों पुराने आध्यात्मिक संबंधों को और भी प्रगाढ़ कर दिया।
MP: उज्जैन में महाकाल : द मास्टर ऑफ टाइम अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन का समापन

भोपाल। मध्य प्रदेश के उज्जैन जिले में स्थित तारामंडल में तीन दिवसीय अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन ‘महाकाल : द मास्टर ऑफ टाइम’ का रविवार देर शाम आयोजित पैनल चर्चा ‘वे फॉरवर्ड’ सत्र के साथ समापन हुआ। इस सत्र में देश के प्रमुख वैज्ञानिकों और शिक्षाविदों ने अंतरिक्ष अनुसंधान, खगोल विज्ञान, स्वदेशी तकनीक, स्टार्टअप्स और भारतीय ज्ञान परंपरा की भूमिका पर अपने विचार रखे। मानव संसाधन और स्टार्टअप की भूमिका रही महत्वपूर्णपीआरएल, डीओएस अहमदाबाद के निदेशक प्रो. अनिल भारद्वाज ने सत्र को संबोधित करते हुए कहा कि भारत के अंतरिक्ष कार्यक्रमों की सफलता के लिए कुशल मानव संसाधन सबसे महत्वपूर्ण आधार है। चंद्रमा पर मानव मिशन जैसे लक्ष्यों को प्राप्त करने के लिए भौतिकी, रसायन विज्ञान, गणित, जीव विज्ञान, चिकित्सा और इंजीनियरिंग जैसे विभिन्न क्षेत्रों के विशेषज्ञों की आवश्यकता होगी। उन्होंने अंतरिक्ष चिकित्सा, जैव विज्ञान और खाद्य प्रौद्योगिकी जैसे उभरते क्षेत्रों के महत्व को भी रेखांकित किया। उन्होंने शिक्षा संस्थानों और अनुसंधान संगठनों के बीच बेहतर समन्वय और सूचना के आदान-प्रदान को आवश्यक बताते हुए कहा कि देश में विकसित हो रहे स्टार्टअप अंतरिक्ष क्षेत्र की जटिल चुनौतियों के समाधान में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे। स्वदेशी तकनीक और उद्योग सहभागिता पर जोरएनसीआरए-टीआईएफआर, एसपीपी परिसर पुणे के निदेशक प्रो. यशवंत गुप्ता ने खगोल विज्ञान की बड़ी परियोजनाओं में तकनीकी आत्मनिर्भरता और उद्योगों की भागीदारी को जरूरी बताया। उन्होंने कहा कि पहले कई तकनीकों के लिए भारत को विदेशों पर निर्भर रहना पड़ता था, लेकिन जीएमआरटी जैसे प्रोजेक्ट्स ने देश की तकनीकी क्षमता को साबित किया है। उन्होंने कहा कि वैज्ञानिक परियोजनाओं में विकसित तकनीकों का साझा उपयोग किया जा सकता है, जिससे लागत कम होगी और नवाचार को बढ़ावा मिलेगा। उन्होंने अनुसंधान संस्थानों और उद्योगों के बीच मजबूत तकनीकी पारिस्थितिकी तंत्र विकसित करने की आवश्यकता बताई। स्पेस साइंस की शिक्षा का विस्तार आवश्यकआईआईएसटी के कुलपति प्रो. दीपांकर बनर्जी ने बतायाकि पिछले कुछ वर्षों में स्पेस साइंस क्षेत्र में 300 से अधिक स्टार्टअप सामने आए हैं, जो इस क्षेत्र की बढ़ती संभावनाओं को दर्शाता है। उन्होंने कहा कि वर्तमान में एस्ट्रोनॉमी और एस्ट्रोफिजिक्स की शिक्षा सीमित संस्थानों तक ही केंद्रित है, इसलिए इस ज्ञान को व्यापक स्तर पर पहुंचाने की आवश्यकता है। उन्होंने सुझाव दिया कि स्पेस साइंस और एस्ट्रोनॉमी जैसे विषयों को मुख्यधारा की शिक्षा से जोड़ा जाना चाहिए, जिससे विद्यार्थी प्रारंभ से ही इस क्षेत्र के प्रति प्रेरित हो सकें। प्रो. बनर्जी शिक्षा, उद्योग, तकनीक और अनुसंधान संस्थानों के संयुक्त प्रयासों को भविष्य के लिए आवश्यक बताया। भारतीय ज्ञान परंपरा और इतिहास के पुनर्पाठ पर बलइंडोलॉजिस्ट एवं चिंतक, पद्मश्री डॉ. भगवती लाल राजपुरोहित ने भारतीय इतिहास और ज्ञान परंपरा के प्रमाण आधारित अध्ययन की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने उज्जैन और मालवा क्षेत्र की कालगणना एवं खगोल विज्ञान की समृद्ध परंपरा का उल्लेख करते हुए कहा कि इतिहास को तथ्यों और साक्ष्यों के आधार पर पुनः समझने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि उज्जैन प्राचीन काल से समय गणना और खगोल अध्ययन का महत्वपूर्ण केंद्र रहा है और इस विरासत को वैज्ञानिक दृष्टिकोण से पुनः स्थापित करने की आवश्यकता है। युवाओं के लिए अंतरिक्ष अनुसंधान के क्षेत्र में अपार अवसरपैनल विशेषज्ञों ने कहा कि भारत का अंतरिक्ष और खगोल विज्ञान क्षेत्र तेजी से विकसित हो रहा है और इसमें युवाओं के लिए रोजगार और अनुसंधान की व्यापक संभावनाएं मौजूद हैं। यदि शिक्षा, अनुसंधान संस्थानों और उद्योगों के बीच समन्वित प्रयास किए जाएं, तो भारत इस क्षेत्र में वैश्विक नेतृत्व की दिशा में आगे बढ़ सकता है। सम्मेलन ने उज्जैन की प्राचीन कालगणना परंपरा को आधुनिक अंतरिक्ष विज्ञान से जोड़ते हुए विज्ञान, इतिहास और भारतीय ज्ञान प्रणाली के समन्वय का एक महत्वपूर्ण मंच प्रदान किया।
MP: ग्वालियर के गांधी उद्यान में सफेद बाघिन मीरा ने दिए 3 शावकों को जन्म

ग्वालियर। मध्य प्रदेश के ग्वालियर स्थित गांधी प्राणी उद्यान (चिड़ियाघर) में रविवार को सफेद बाघिन मीरा ने तीन शावकों को जन्म दिया है। इनमें दो रॉयल बंगाल और एक सफेद टाइगर शावक शामिल हैं। इस जन्म के साथ ही चिड़ियाघर में बाघों की कुल संख्या 10 हो गई है। चिड़ियाघर के प्रभारी डॉ. उपेंद्र यादव ने बताया कि रविवार दोपहर करीब दो बजे बाघिन मीरा ने तीन शावकों को जन्म दिया। सभी शावक स्वस्थ हैं और उनकी मां मीरा भी सुरक्षित है। उन्होंने पुष्टि की कि जन्मे शावकों में दो रॉयल बंगाल (पीले) और एक सफेद टाइगर है। प्रसव के बाद से मीरा और उसके शावकों की लगातार निगरानी की जा रही है। गांधी उद्यान के क्यूरेटर गौरव परिहार ने बताया कि नवजात शावकों को सुरक्षा और स्वास्थ्य कारणों से आइसोलेशन में रखा गया है। उन्हें बाहरी संपर्क से दूर रखा जाएगा और विशेषज्ञ डॉक्टरों की टीम नियमित रूप से उनके स्वास्थ्य की जांच कर रही है। मीरा को भी बेहतर रिकवरी के लिए हल्का और पौष्टिक आहार दिया जा रहा है। तीन नए शावकों के जन्म के बाद गांधी प्राणी उद्यान में बाघों की कुल संख्या 10 हो गई है। इनमें चार सफेद और छह रॉयल बंगाल टाइगर शामिल हैं। कुल संख्या में 4 नर, 3 मादा और 3 नवजात शावक हैं। ग्वालियर नगर निगम आयुक्त संघ प्रिय के निर्देश पर चिड़ियाघर प्रशासन को विशेष सतर्कता बरतने के लिए कहा गया है। नवजात शावकों की देखभाल के लिए अतिरिक्त व्यवस्थाएं की गई हैं और सभी आवश्यक संसाधन उपलब्ध कराए गए हैं। केंद्रीय चिड़ियाघर प्राधिकरण द्वारा निर्धारित स्वास्थ्य और सुरक्षा मानकों का भी कड़ाई से पालन किया जा रहा है।