सरगुजा सड़क हादसा: अंबिकापुर की ओर जा रही कार पर ट्रक ने मारी टक्कर, परिवार को भारी नुकसान

सरगुजा । सरगुजा जिला छत्तीसगढ़ में सड़क हादसों का सिलसिला जारी है सोमवार सुबह गांधी नगर थाना क्षेत्र में एक भयानक दुर्घटना में ट्रक और कार की भिड़ंत हुई जिससे तीन लोगों की मौके पर ही मौत हो गयी और एक व्यक्ति घायल हो गया पुलिस सूत्रों के अनुसार यह हादसा ग्राम सकालो के पास जंगल वाले इलाके में हुआ था दुर्घटना के समय कार अंबिकापुर की ओर जा रही थी और ट्रक प्रतापपुर से अंबिकापुर की दिशा में आ रहा था सुबह लगभग छह बजे यह हादसा घटा मृतकों में दो लोग पिता-पुत्र थे जिनमें कईला राम (52), उनकी पत्नी मानमति (50) और पुत्र राहुल टोप्पो (25) शामिल हैं सभी मृतक ग्राम दुप्पी चौरा रजापुर जिला सरगुजा के निवासी थे घायल कार चालक सोनू केरकेट्टा भी इसी गांव के निवासी हैं उनका इलाज अस्पताल में जारी है पुलिस ने बताया कि दुर्घटना के कारण कार पर ट्रक ने सीधी टक्कर मारी जिससे कार पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो गयी और तीनों लोगों की घटनास्थल पर मौत हो गयी स्थानीय लोग और पुलिस मौके पर पहुंचकर राहत और बचाव कार्य में जुट गए हैं उन्होंने घायल की प्राथमिक उपचार व्यवस्था कर अस्पताल भेजा और मृतकों के परिजनों को घटना की जानकारी दी पुलिस अब दुर्घटना की जांच कर रही है और ट्रक चालक की गिरफ्तारी के प्रयास जारी हैं सरगुजा जिले में यह सड़क हादसा सड़क सुरक्षा की अनदेखी और तेज रफ्तार वाहनों के कारण होने वाले खतरों की याद दिलाता है प्रशासन ने लोगों से वाहन सावधानीपूर्वक चलाने की अपील की है और दुर्घटना की विस्तृत रिपोर्ट तैयार कर आवश्यक कदम उठाने का निर्देश दिया गया है स्थानीय प्रशासन का कहना है कि सड़क पर सुरक्षा उपाय बढ़ाए जा रहे हैं ताकि इस तरह की घटनाओं को रोका जा सके और जनता को सुरक्षित परिवहन सुनिश्चित किया जा सके
‘धुरंधर 2’ की सफलता पर ‘यालीना’ का सलाम! पर्दे के पीछे के असली हीरोज को दिया सम्मान

नई दिल्ली। अभिनेत्री सारा अर्जुन ने अपनी हालिया रिलीज फिल्म ‘धुरंधर 2’ की सफलता का श्रेय पर्दे के पीछे काम करने वाली पूरी टीम को देते हुए सोशल मीडिया पर एक भावुक पोस्ट किया है। उन्होंने लिखा कि फिल्म की भव्यता और सफलता सिर्फ कलाकारों की नहीं, बल्कि उन अनगिनत लोगों की मेहनत का नतीजा है जो फ्रेम के बाहर रहकर दिन-रात मेहनत करते हैं। सारा अर्जुन ने पोस्ट में बताया कि जब वह पहली बार निर्देशक आदित्य धर से मिलीं, तो उनकी आंखों में सिनेमा के लिए कुछ खास करने की चमक साफ नजर आ रही थी। उन्होंने कहा कि फिल्म के हर कदम पर यह एहसास मजबूत होता गया, लेकिन फिल्म पूरी होने के बाद जब उन्होंने पीछे मुड़कर देखा, तो उन्हें फ्रेम के बाहर खड़े उन लोगों की पूरी फौज नजर आई, जिन्होंने इस बड़े सपने को हकीकत बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। यह पोस्ट खासतौर पर ‘धुरंधर’ और ‘धुरंधर 2’ के उन गुमनाम नायकों को समर्पित है, जिनका योगदान अक्सर पर्दे के पीछे ही रह जाता है। सारा ने सबसे पहले निर्देशक आदित्य धर और उनकी पूरी डायरेक्शन टीम को धन्यवाद दिया। उन्होंने उन्हें जहाज का कप्तान बताया और कहा कि उन्होंने इस फिल्म को पर्दे पर उतारने के लिए दिन-रात एक कर दिया। प्रोड्यूसर्स लोकेश धर, ज्योति मैम, जियो स्टूडियोज और बी62 स्टूडियोज की टीम का भी उन्होंने विशेष रूप से आभार जताया। सारा ने लिखा कि इन लोगों ने तमाम मुश्किलों का सामना करते हुए फिल्म को पूरा किया। यालीना फेम सारा ने डायरेक्टर ऑफ फोटोग्राफी और कैमरा टीम की तारीफ की, जिन्होंने हर फ्रेम में फिल्म की भव्यता और आत्मा को कैद किया। कास्टिंग डायरेक्टर मुकेश छाबड़ा और उनकी टीम को धन्यवाद देते हुए सारा ने कहा कि उन्होंने सिर्फ सही चेहरे नहीं, बल्कि किरदारों की खासियत को चुनकर पर्दे पर पेश किया। कॉस्ट्यूम डिजाइनर स्मृति चौहान, मेकअप डिजाइनर प्रीति शील और उनकी टीमों को भी उन्होंने याद किया। सारा ने लिखा कि इन्होंने कपड़ों में इतिहास बुना और अभिनेताओं के साथ शानदार कहानियां उकेरीं। उन्होंने लिखा, “एक्टर्स को पोस्टर पर चेहरा बनने का मौका मिलता है, लेकिन आप ही सिनेमा की रीढ़ हैं।” संगीतकार और पूरी म्यूजिक टीम को धन्यवाद देते हुए उन्होंने कहा कि इन्होंने फिल्म में जान फूंक दी। एडिटर शिवकुमार पणिक्कर, वीएफएक्स टीम और ओजस गौतम की मेहनत की भी उन्होंने सराहना की। प्रोडक्शन डिजाइन टीम, सेफ्टी और स्टंट क्रू, लाइटिंग, साउंड और स्पॉट टीम को भी सारा ने याद किया। उन्होंने कहा कि ये लोग सेट पर सबसे पहले पहुंचते थे और सबसे आखिर में निकलते थे। अंत में सारा अर्जुन ने उन सभी अनगिनत लोगों को धन्यवाद दिया, जिनके नाम पोस्ट में नहीं मेंशन किए गए, लेकिन जिनकी मेहनत बिना यह फिल्म संभव नहीं थी।
ट्रंप के बयानों पर बहस तेज! राम गोपाल वर्मा ने जताई चिंता, एआई का जिक्र

नई दिल्ली। फिल्म निर्माता-निर्देशक राम गोपाल वर्मा एक बार फिर अपने बेबाक अंदाज को लेकर चर्चा में हैं। सोशल मीडिया पर किए गए अपने ताजा पोस्ट में उन्होंने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के लगातार बदलते बयानों पर सवाल उठाए हैं। वर्मा ने चिंता जताई कि ट्रंप की विदेश नीति और सार्वजनिक बयान इतने तेजी से बदल रहे हैं कि यह समझना मुश्किल हो रहा है कि इनके पीछे पारंपरिक सलाह है या कोई और सिस्टम काम कर रहा है। विरोधाभासी बयानों पर उठे सवालराम गोपाल वर्मा ने अपने पोस्ट में ट्रंप के बयानों में दिख रहे विरोधाभासों को रेखांकित किया। उन्होंने लिखा कि एक ओर ट्रंप कहते हैं कि “बड़ी लड़ाई खत्म हो गई है”, तो दूसरी ओर कुछ ही समय बाद “छोटी कार्रवाई जारी है” जैसी बातें करते हैं। कभी वे ईरान को सख्त चेतावनी देते नजर आते हैं, तो कभी अचानक बातचीत और समाधान की बात करने लगते हैं। इन तेजी से बदलते रुखों ने वर्मा को सोचने पर मजबूर किया कि आखिर इतने कम समय में इतनी अलग-अलग सूचनाएं कैसे आ रही हैं। क्या आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस है वजह?वर्मा ने सवाल उठाया कि क्या ट्रंप के फैसलों के पीछे Artificial Intelligence का प्रभाव हो सकता है। उनके मुताबिक, पारंपरिक सरकारी ब्रीफिंग, सैटेलाइट डेटा या कैबिनेट मीटिंग्स इतनी तेजी से निर्णय बदलने में सक्षम नहीं होतीं। इसके विपरीत, एआई रियल-टाइम डेटा का विश्लेषण कर तुरंत कई संभावित परिदृश्य (what-if scenarios) तैयार कर सकता है—जैसे युद्ध की स्थिति, तेल की कीमतें, वैश्विक प्रतिक्रिया और जनमत। एआई की ताकत और खतरे दोनोंराम गोपाल वर्मा ने कहा कि एआई बिना भावनाओं के, बिना देरी के और बिना विरोध के काम करता है, जिससे यह उपयोगकर्ता की सोच के अनुरूप कई विकल्प दे सकता है। हालांकि, उन्होंने चेतावनी भी दी कि अगर कोई व्यक्ति इन विकल्पों को सही तरीके से न समझे या जल्दबाजी में निर्णय ले, तो वह भ्रमित हो सकता है। यानी एआई जितना शक्तिशाली है, उतना ही सावधानी से इस्तेमाल करने की जरूरत भी है। सार्वजनिक भाषा पर भी जताई चिंताअपने पोस्ट के अंत में वर्मा ने एक सामाजिक मुद्दे को भी उठाया। उन्होंने कहा कि जब माता-पिता और शिक्षक बच्चों को शिष्ट भाषा सिखाने की कोशिश करते हैं, तो सार्वजनिक जीवन में उच्च पदों पर बैठे लोगों को भी जिम्मेदारी दिखानी चाहिए। उन्होंने सवाल किया कि अगर विश्व के बड़े नेता ही अपमानजनक भाषा का इस्तेमाल करें, तो समाज पर इसका क्या प्रभाव पड़ेगा। बहस का नया मुद्दाराम गोपाल वर्मा का यह बयान एक नई बहस को जन्म देता है—क्या आधुनिक राजनीति में एआई की भूमिका बढ़ रही है? और अगर हां, तो इसका उपयोग किस सीमा तक और किस जिम्मेदारी के साथ होना चाहिए?
भोपाल में NSG का दमदार प्रदर्शन: ड्रोन अटैक से VIP रेस्क्यू तक का दिया लाइव डेमो, CM ने किया बड़ा ऐलान

भोपाल । राजधानी के लाल परेड ग्राउंड में सोमवार को राष्ट्रीय सुरक्षा गार्ड कमांडो ने अपने कौशल और ताकत का शानदार प्रदर्शन किया। इस दौरान कमांडो ने हेलीकॉप्टर से उतरकर इमारत में प्रवेश आतंकियों से मुठभेड़ बम खोजने और निष्क्रिय करने डॉग स्क्वॉड के जरिए आईईडी पहचानने और नागरिकों को सुरक्षित निकालने जैसे ऑपरेशन का लाइव डेमो दिया। कार्यक्रम में मोहन यादव पुलिस महानिदेशक कैलाश मकवाणा और NSG के वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे। MP में बनेगा काउंटर टेररिज्म सेंटर कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री मोहन यादव ने बड़ा ऐलान करते हुए कहा कि राज्य में काउंटर टेररिज्म ग्रुप के गठन के लिए 200 करोड़ रुपये की DPR तैयार कर ली गई है। भोपाल के ग्राम तूमड़ा में इस सेंटर की स्थापना की जाएगी ताकि भविष्य में हर तरह के सुरक्षा खतरों से प्रभावी तरीके से निपटा जा सके। सुरक्षा बलों की ताकत पर जताया गर्व सीएम ने कहा कि देश की सुरक्षा में NSG और अन्य बलों की भूमिका बेहद अहम है। उन्होंने नरेंद्र मोदी के नेतृत्व का जिक्र करते हुए कहा कि भारत की वैश्विक पहचान मजबूत हुई है। साथ ही पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी की हत्या का उदाहरण देते हुए सुरक्षा व्यवस्था के महत्व को रेखांकित किया।कड़ा संदेश: छेड़ोगे तो जवाब मिलेगा मुख्यमंत्री ने स्पष्ट कहा कि भारत शांति में विश्वास रखता है लेकिन यदि कोई देश या ताकत उकसाएगी तो उसे कड़ा जवाब दिया जाएगा। उन्होंने इसे सिर्फ प्रदर्शन नहीं बल्कि सुरक्षा के प्रति संकल्प बताया और कहा कि हर तरह के खतरे से निपटने के लिए तैयार रहना जरूरी है। कमांडो का रोमांचक लाइव एक्शन प्रदर्शन के दौरान कमांडो ने Mi-17 हेलीकॉप्टर से स्लिथरिंग कर मल्टी-स्टोरी बिल्डिंग में एंट्री की और आतंकियों को निष्क्रिय करने की कार्रवाई दिखाई। K-9 डॉग स्क्वॉड ने आईईडी की पहचान की वहीं बम डिस्पोजल और एंटी-ड्रोन सिस्टम का भी प्रदर्शन किया गया। इसके अलावा VIP सुरक्षा हैंड-टू-हैंड कॉम्बैट क्राव मागा तकनीक अंडरवॉटर ऑपरेशन और लोगों को सुरक्षित बाहर निकालने की ड्रिल भी पेश की गई। पूरे प्रदर्शन ने दर्शकों को रोमांचित कर दिया और सुरक्षा बलों की क्षमता का प्रभावशाली संदेश दिया।
बीजेपी स्थापना दिवस पर खास: जब फिल्मी सितारों ने राजनीति में बढ़ाया पार्टी का कद

नई दिल्ली। भारतीय जनता पार्टी आज अपना स्थापना दिवस मना रही है। 6 अप्रैल 1980 को स्थापित हुई इस पार्टी ने पिछले चार दशकों में देश की राजनीति में मजबूत पकड़ बनाई है। इस सफर में फिल्म, टीवी, संगीत और खेल जगत की कई जानी-मानी हस्तियों ने भी पार्टी से जुड़कर इसकी लोकप्रियता और जनाधार को बढ़ाने में अहम भूमिका निभाई है। इन सेलेब्रिटीज की पहुंच और प्रभाव का इस्तेमाल पार्टी ने खासकर युवाओं और अलग-अलग वर्गों तक अपनी विचारधारा पहुंचाने में किया है। हेमा मालिनी और सनी देओल जैसे बड़े नामबॉलीवुड की ‘ड्रीम गर्ल’ Hema Malini ने साल 2004 में बीजेपी जॉइन की थी और वह उत्तर प्रदेश की मथुरा सीट से लगातार सांसद रही हैं। वहीं, ‘गदर’ और ‘बॉर्डर’ जैसी फिल्मों के स्टार Sunny Deol ने 2019 में राजनीति में कदम रखा और पंजाब के गुरदासपुर से सांसद बने। हालांकि, उन्होंने 2024 चुनाव नहीं लड़ने का फैसला किया था। नई पीढ़ी की एंट्री: कंगना रनौत और रवि किशननेशनल अवॉर्ड विजेता अभिनेत्री Kangana Ranaut ने 2024 में बीजेपी जॉइन कर हिमाचल प्रदेश की मंडी सीट से चुनाव जीता और सांसद बनीं। वहीं अभिनेता Ravi Kishan 2017 से पार्टी के सक्रिय सदस्य हैं और गोरखपुर से सांसद के रूप में अपनी भूमिका निभा रहे हैं। भोजपुरी और टीवी जगत से भी मजबूत समर्थनभोजपुरी गायक और अभिनेता Manoj Tiwari ने 2013 में बीजेपी जॉइन की और दिल्ली की नॉर्थ-ईस्ट सीट से तीन बार सांसद चुने गए। वहीं ‘रामायण’ फेम Arun Govil 2021 में पार्टी से जुड़े और 2024 में मेरठ से जीतकर संसद पहुंचे। टीवी इंडस्ट्री से Smriti Irani भी बीजेपी का बड़ा चेहरा रही हैं। ‘क्योंकि सास भी कभी बहू थी’ से लोकप्रियता हासिल करने के बाद उन्होंने राजनीति में कदम रखा और अमेठी से सांसद व केंद्र सरकार में मंत्री भी रहीं। धर्मेंद्र, मिथुन और अन्य सितारों का साथदिवंगत अभिनेता Dharmendra भी बीजेपी से जुड़े रहे और बीकानेर से सांसद बने। अभिनेत्री Jaya Prada ने भी 2019 में पार्टी का दामन थामा। वहीं Mithun Chakraborty 2021 में बीजेपी में शामिल हुए और पश्चिम बंगाल में पार्टी के प्रमुख प्रचारकों में गिने जाते हैं। इसके अलावा Anupam Kher, Akshay Kumar, Suniel Shetty और Paresh Rawal जैसे सितारे भले औपचारिक रूप से पार्टी में शामिल न हों, लेकिन समय-समय पर समर्थन करते नजर आते हैं। राजनीति और ग्लैमर का मजबूत मेलभाजपा ने इन चर्चित चेहरों के जरिए न केवल अपनी पहुंच बढ़ाई है, बल्कि जनसंपर्क को भी मजबूत किया है। इन सितारों की लोकप्रियता ने पार्टी को आम जनता, खासकर युवाओं के बीच और अधिक प्रभावशाली बनाने में मदद की है।
ग्लोबल तनाव का असर! CAIT ने सरकार से मांगी राहत, इनपुट लागत कंट्रोल करने की अपील

नई दिल्ली।मध्य पूर्व में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव के बीच देश के व्यापारिक संगठनों ने चिंता जतानी शुरू कर दी है। इसी कड़ी में कन्फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स (CAIT) ने केंद्र सरकार से अपील की है कि वह लघु एवं मध्यम उद्यमों (MSME) और छोटे व्यापारियों के लिए त्वरित राहत उपाय लागू करे। संगठन का कहना है कि पश्चिम एशिया में जारी संकट का सीधा असर भारत के व्यापार, आपूर्ति श्रृंखला और लागत संरचना पर पड़ रहा है। क्रेडिट और लिक्विडिटी बढ़ाने की मांगCAIT ने सरकार से विशेष क्रेडिट गारंटी लाइन स्कीम शुरू करने की मांग की है, जिससे छोटे व्यवसायों को लिक्विडिटी सपोर्ट मिल सके। इसके साथ ही MSME सेक्टर को राहत देने के लिए लोन चुकाने की समयसीमा बढ़ाने की भी अपील की गई है। संगठन का मानना है कि मौजूदा हालात में नकदी की उपलब्धता बनाए रखना बेहद जरूरी है, ताकि कारोबार प्रभावित न हो। इनपुट लागत और ईंधन कीमतों पर नजर जरूरीसंगठन ने ईंधन, कच्चे माल और माल ढुलाई की बढ़ती लागत पर भी चिंता जताई है। CAIT ने सरकार से इन लागतों की बारीकी से निगरानी और स्थिरीकरण के लिए ठोस कदम उठाने का आग्रह किया है। इसके अलावा प्रभावित क्षेत्रों के लिए ब्याज सब्सिडी, बीमा सहायता और निर्यातकों के लिए तेजी से रिफंड की सुविधा देने की भी मांग की गई है। सरकार को लिखा गया पत्र, त्वरित कार्रवाई की अपीलCAIT के महासचिव और सांसद Praveen Khandelwal ने वित्त मंत्री Nirmala Sitharaman को पत्र लिखकर इन मुद्दों को उठाया है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि समय रहते कदम नहीं उठाए गए, तो छोटे व्यापारियों और MSME सेक्टर पर गंभीर आर्थिक दबाव पड़ सकता है। ‘वेस्ट एशिया टास्क फोर्स’ बनाने का सुझावखंडेलवाल ने एक विशेष ‘पश्चिम एशिया प्रभाव आकलन एवं प्रतिक्रिया कार्य बल’ बनाने का सुझाव भी दिया है। इसमें प्रमुख मंत्रालयों, Reserve Bank of India, व्यापार संगठनों और क्षेत्रीय विशेषज्ञों को शामिल करने की बात कही गई है। इसका उद्देश्य बदलती वैश्विक परिस्थितियों का लगातार आकलन कर समय-समय पर नीतिगत सुझाव देना होगा। आपूर्ति श्रृंखला और लागत दबाव पर बढ़ती चिंतापत्र में कहा गया है कि मौजूदा तनाव के कारण इनपुट लागत बढ़ रही है, सप्लाई चेन बाधित हो रही है और कार्यशील पूंजी पर दबाव बढ़ रहा है। इसका सीधा असर कंपनियों के मुनाफे और संचालन पर पड़ सकता है, खासकर छोटे और मध्यम व्यवसायों के लिए स्थिति चुनौतीपूर्ण बन सकती है। सरकार के प्रयासों की सराहना भीहालांकि CAIT ने Narendra Modi के नेतृत्व में सरकार द्वारा उठाए गए कदमों की सराहना भी की। संगठन ने कहा कि सप्लाई सोर्स का विविधीकरण, लॉजिस्टिक्स इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत करना और जरूरी वस्तुओं की निगरानी जैसे कदमों से बाजार में स्थिरता बनी हुई है और व्यापार जगत का भरोसा कायम है। समय रहते कदम जरूरीकुल मिलाकर, CAIT का मानना है कि वैश्विक तनाव के इस दौर में सरकार को सक्रिय और सतर्क रहकर छोटे व्यवसायों के लिए राहत उपाय लागू करने चाहिए, ताकि अर्थव्यवस्था की गति बनी रहे।
धार में महिला से मारपीट और दुष्कर्म प्रयास का मामला, पांच आरोपियों पर FIR दर्ज

धार । धार जिले के धामनोद थाना क्षेत्र में एक गंभीर घटना सामने आई है जहां एक महिला को बंधक बनाकर बेरहमी से मारपीट की गई और सामूहिक दुष्कर्म का प्रयास किया गया पुलिस सूत्रों के अनुसार इस मामले में तीन महिलाएं और दो पुरुष आरोपी शामिल हैं और उनके खिलाफ FIR दर्ज की गई है पीड़ित महिला ने शिकायत में बताया कि ग्राम कुन्दा में उसके खेत के पास रहने वाले परिवार द्वारा जेसीबी से जमीन समतल की जा रही थी इस प्रक्रिया में उसकी बाउंड्री को नुकसान पहुंचा और जब महिला ने इसका विरोध किया तो आरोपियों ने उस पर हमला कर दिया और मारपीट शुरू कर दी पुलिस ने बताया कि घटना के समय पीड़िता को बंधक बनाया गया और आरोपियों ने मारपीट की कोशिश की इसके अलावा सामूहिक दुष्कर्म का प्रयास भी किया गया पुलिस ने तत्काल कार्रवाई करते हुए आरोपियों के खिलाफ मामला दर्ज किया है और मामले की जांच शुरू कर दी गई है स्थानीय प्रशासन ने महिला सुरक्षा और कानून व्यवस्था पर विशेष ध्यान देने का आश्वासन दिया है साथ ही जांच में सहयोग के लिए ग्रामीणों से भी अपील की गई है पुलिस आरोपी गिरफ्तार करने के प्रयास में लगी हुई है और इस मामले को प्राथमिकता से देख रही है यह मामला क्षेत्र में महिला सुरक्षा के मुद्दे पर चिंता बढ़ा रहा है और प्रशासन ने ग्रामीणों को सतर्क रहने तथा किसी भी आपराधिक गतिविधि की जानकारी तुरंत पुलिस को देने की सलाह दी हैसुरक्षा और कानून के प्रवर्तन के तहत पुलिस पीड़िता की सुरक्षा सुनिश्चित कर रही है और आरोपी के खिलाफ कानूनी कार्रवाई पूरी कठोरता से की जाएगी ताकि ऐसे मामलों पर स्पष्ट संदेश जा सके
भारतीय शेयर बाजार गिरावट के साथ खुला, फार्मा स्टॉक्स में भारी बिकवाली

नई दिल्ली। हफ्ते के पहले कारोबारी दिन भारतीय शेयर बाजार कमजोरी के साथ खुला। सुबह करीब 9:17 बजे BSE Sensex 241 अंक यानी 0.33% की गिरावट के साथ 73,078.49 पर और Nifty 50 84.70 अंक यानी 0.37% की कमजोरी के साथ 22,628.40 पर कारोबार करता नजर आया। शुरुआती कारोबार में निवेशकों का रुख सतर्क दिखा, जिससे बाजार पर दबाव बना रहा। फार्मा सेक्टर में सबसे ज्यादा दबावइस गिरावट की अगुवाई फार्मा शेयरों ने की। निफ्टी फार्मा इंडेक्स करीब 1% तक लुढ़क गया, जिससे यह टॉप लूजर सेक्टर बना। इसके अलावा ऑयल एंड गैस, हेल्थकेयर, मीडिया, प्राइवेट बैंक, रियल्टी, डिफेंस और इंफ्रा सेक्टरों में भी बिकवाली देखने को मिली। यह दर्शाता है कि बाजार में व्यापक स्तर पर दबाव बना हुआ है। आईटी और मेटल स्टॉक्स ने दी थोड़ी राहतहालांकि, पूरी तस्वीर नकारात्मक नहीं रही। आईटी, मेटल और पीएसयू बैंक सेक्टर में खरीदारी देखने को मिली, जिससे बाजार को कुछ सहारा मिला। सेंसेक्स के टॉप गेनर्स में ट्रेंट, टाइटन, पावर ग्रिड, टेक महिंद्रा, एचसीएल टेक, इन्फोसिस और टीसीएस जैसे दिग्गज शेयर शामिल रहे। वहीं कोटक महिंद्रा बैंक, सन फार्मा, आईसीआईसीआई बैंक और मारुति सुजुकी जैसे शेयरों में गिरावट दर्ज की गई। मिडकैप और स्मॉलकैप शेयर भी दबाव मेंलार्जकैप के साथ-साथ मिडकैप और स्मॉलकैप इंडेक्स भी कमजोरी के साथ कारोबार कर रहे थे। निफ्टी मिडकैप 100 इंडेक्स करीब 0.59% गिरकर 53,384 पर और निफ्टी स्मॉलकैप 100 इंडेक्स 0.64% गिरकर 15,549 पर पहुंच गया। इससे साफ है कि बाजार में व्यापक स्तर पर बिकवाली का माहौल बना हुआ है। वैश्विक तनाव का असर, निवेशकों में सतर्कता बाजार की इस गिरावट के पीछे प्रमुख वजह वैश्विक तनाव को माना जा रहा है। Iran, United States और Israel के बीच बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव का असर दुनियाभर के बाजारों पर दिख रहा है। निवेशक जोखिम से बचने के मूड में नजर आ रहे हैं, जिससे बिकवाली बढ़ रही है। एशियाई और अमेरिकी बाजारों का मिला-जुला संकेतएशियाई बाजारों में Tokyo और Seoul के बाजार हरे निशान में रहे, जबकि जकार्ता में गिरावट देखने को मिली। वहीं अमेरिकी बाजार पिछले सत्र में कमजोरी के साथ बंद हुए थे, जिसका असर भारतीय बाजार पर भी पड़ा। कमोडिटी मार्केट में उतार-चढ़ावकमोडिटी बाजार की बात करें तो कच्चे तेल में मिलाजुला रुख देखने को मिला। ब्रेंट क्रूड हल्की तेजी के साथ 109.70 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया, जबकि WTI क्रूड में गिरावट रही। वहीं सोने और चांदी की कीमतों में भी कमजोरी दर्ज की गई, जो निवेशकों के सतर्क रुख को दर्शाती है। दबाव में बाजार, आगे भी रह सकती है उतार-चढ़ाव की स्थितिकुल मिलाकर, भारतीय शेयर बाजार ने सप्ताह की शुरुआत कमजोर नोट पर की है। वैश्विक तनाव, महंगाई और निवेशकों की सतर्कता के चलते बाजार में उतार-चढ़ाव जारी रह सकता है।
वैश्विक भारत : उद्योगों की रफ्तार, अर्थव्यवस्था का विस्तार

– डॉ. मयंक चतुर्वेदी भारत आज वैश्विक अर्थव्यवस्था में एक ऐसी शक्ति के रूप में उभर रहा है, जिसकी गति, स्थिरता और विविधता ये तीनों ही उसे विशेष बनाती हैं। इस संबंध में सामने आए आर्थिक आंकड़े इस बात की पुष्टि कर रहे हैं कि देश विकास के नए आयाम स्थापित कर रहा है। विशेष रूप से औद्योगिक उत्पादन सूचकांक (आईआईपी) में दर्ज प्रगति इस व्यापक आर्थिक मजबूती का स्पष्ट संकेत है। फरवरी 2026 में भारत की औद्योगिक वृद्धि दर बढ़कर 5.2 प्रतिशत हो गई, जोकि जनवरी के 4.8 प्रतिशत से अधिक है। कहना होगा कि यह वृद्धि आर्थिक गतिविधियों में निरंतरता और विस्तार का प्रमाण है। इस वृद्धि के पीछे सबसे बड़ा योगदान मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर का रहा, जिसने छह प्रतिशत की प्रभावशाली वृद्धि दर्ज की। चूंकि औद्योगिक उत्पादन सूचकांक में इस क्षेत्र की हिस्सेदारी लगभग 75 प्रतिशत है, इसलिए इसका मजबूत प्रदर्शन पूरी औद्योगिक अर्थव्यवस्था को गति देता है। वस्तुत: मैन्युफैक्चरिंग क्षेत्र की यह प्रगति आज कई मायनों में महत्वपूर्ण है। यह उत्पादन क्षमता में वृद्धि को तो दर्शाती ही है, साथ में रोजगार सृजन की दृष्टि से भी अत्यंत महत्वपूर्ण है। भारत जैसे युवा देश में, जहां हर वर्ष लाखों छात्र इंजीनियरिंग और तकनीकी शिक्षा प्राप्त कर कार्यक्षेत्र में प्रवेश करते हैं, वहां यह क्षेत्र गुणवत्तापूर्ण रोजगार उपलब्ध कराने का प्रमुख माध्यम बनता जा रहा है। फरवरी 2026 में मैन्युफैक्चरिंग के 23 उद्योग समूहों में से 14 में सकारात्मक वृद्धि दर्ज होना इस क्षेत्र की व्यापक मजबूती को दर्शाता है। विशेष रूप से बुनियादी धातु, मोटर वाहन और मशीनरी एवं उपकरण जैसे क्षेत्रों में दोहरे अंकों की वृद्धि यह संकेत देती है कि भारत का औद्योगिक ढांचा अब अधिक परिपक्व और प्रतिस्पर्धी हो रहा है। बुनियादी धातु क्षेत्र में वृद्धि से निर्माण और अवसंरचना को बल मिलता है, जबकि ऑटोमोबाइल और मशीनरी क्षेत्र कृषि, परिवहन और उद्योगों की उत्पादकता को बढ़ाते हैं। खनन और बिजली क्षेत्र भी इस विकास यात्रा में पीछे नहीं हैं। फरवरी में खनन क्षेत्र में 3.1 प्रतिशत और बिजली उत्पादन में 2.3 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई। ये दोनों क्षेत्र औद्योगिक गतिविधियों की रीढ़ माने जाते हैं और इनमें वृद्धि का अर्थ है कि उत्पादन के लिए आवश्यक कच्चा माल और ऊर्जा की उपलब्धता सुनिश्चित हो रही है। इसके अलावा उपयोग-आधारित वर्गीकरण के आंकड़े भारत की अर्थव्यवस्था के भीतर हो रहे संरचनात्मक परिवर्तन को उजागर करते हैं। पूंजीगत वस्तुओं के उत्पादन में 12.5 प्रतिशत की वृद्धि यह दर्शाती है कि उद्योगों में निवेश बढ़ रहा है। मशीनों और उपकरणों का अधिक उत्पादन इस बात का संकेत है कि उद्योग विस्तार की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं, जिससे भविष्य में उत्पादन, आय और रोजगार में और वृद्धि होगी। इसी प्रकार उपभोक्ता वस्तुओं, विशेषकर इलेक्ट्रॉनिक सामान, रेफ्रिजरेटर और टीवी के उत्पादन में 7.3 प्रतिशत की वृद्धि यह स्पष्ट करती है कि देश में मांग का स्तर बढ़ रहा है। यह बढ़ती आय, मध्यम वर्ग के विस्तार और उपभोग आधारित अर्थव्यवस्था की मजबूती का संकेत है। जब उपभोक्ता खर्च बढ़ता है, तब यह पूरे आर्थिक चक्र को गति देता है, उत्पादन बढ़ता है, रोजगार सृजित होते हैं और निवेश को प्रोत्साहन मिलता है। यहां उल्लेखित है कि भारत की आर्थिक मजबूती का एक अन्य प्रमुख आधार सरकार द्वारा अवसंरचना क्षेत्र में किया जा रहा भारी निवेश है। राजमार्गों, बंदरगाहों और रेलवे परियोजनाओं में लगातार बढ़ते निवेश के कारण अवसंरचना और निर्माण सामग्री क्षेत्र में फरवरी में 11.5 प्रतिशत की उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई। निश्चित ही यह उस दीर्घकालिक दृष्टि का परिणाम है, जिसके तहत सरकार देश को एक मजबूत लॉजिस्टिक्स और कनेक्टिविटी नेटवर्क प्रदान कर रही है। इन परियोजनाओं का प्रभाव बहुआयामी है। एक ओर ये बड़े पैमाने पर रोजगार सृजित करती हैं, वहीं दूसरी ओर उद्योगों के लिए लागत कम करती हैं और प्रतिस्पर्धात्मकता बढ़ाती हैं। बेहतर सड़क और रेल नेटवर्क से माल परिवहन तेज और सस्ता होता है, जिससे निर्यात को भी बढ़ावा मिलता है। यदि व्यापक आर्थिक परिप्रेक्ष्य में देखें, तो भारत की अर्थव्यवस्था कई अन्य सकारात्मक संकेत भी दे रही है। देश की जीडीपी वृद्धि दर विश्व की प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं में सबसे अधिक बनी हुई है। अंतरराष्ट्रीय संस्थान जैसे अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) और विश्व बैंक भी भारत को आने वाले वर्षों में सबसे तेजी से बढ़ने वाली बड़ी अर्थव्यवस्था के रूप में देख रहे हैं। भारत में विदेशी प्रत्यक्ष निवेश (एफडीआई) का प्रवाह लगातार बना हुआ है, जो वैश्विक निवेशकों के भरोसे को दर्शाता है। ‘मेक इन इंडिया’, ‘आत्मनिर्भर भारत’ और ‘पीएलआई (उत्पादन-आधारित प्रोत्साहन)’ जैसी योजनाओं ने मैन्युफैक्चरिंग और निर्यात को नई दिशा दी है। इलेक्ट्रॉनिक्स, मोबाइल निर्माण, रक्षा उत्पादन और फार्मास्यूटिकल्स जैसे क्षेत्रों में भारत तेजी से आत्मनिर्भरता की ओर बढ़ रहा है। साथ में देखने में आ रहा है कि डिजिटल अर्थव्यवस्था भी भारत की ताकत का एक प्रमुख स्तंभ बनकर उभरी है। यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस (यूपीआई) जैसे प्लेटफॉर्म ने लेन-देन को सरल और पारदर्शी बनाया है। इससे न सिर्फ वित्तीय समावेशन बढ़ा है, बल्कि छोटे और मध्यम उद्यमों को भी नई ऊर्जा मिली है। महंगाई पर नियंत्रण और वित्तीय अनुशासन भी भारत की आर्थिक स्थिरता को मजबूत बनाते हैं। सरकार द्वारा संतुलित राजकोषीय नीति और भारतीय रिजर्व बैंक की मौद्रिक नीतियों ने अर्थव्यवस्था को स्थिर बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। हालांकि वैश्विक स्तर पर कई चुनौतियां मौजूद हैं, जैसे भू-राजनीतिक तनाव, आपूर्ति श्रृंखला में व्यवधान और ऊर्जा कीमतों में उतार-चढ़ाव फिर भी यहां अच्छी बात यह है कि भारत ने अपनी नीतिगत दृढ़ता और आंतरिक मांग के बल पर इनका प्रभाव सीमित रखा है। अंततः, फरवरी 2026 के भारत का औद्योगिक उत्पादन सूचकांक (आईआईपी) आंकड़े सिर्फ एक महीने की उपलब्धि न होकर यह उस निरंतर प्रयास और नीति-निर्माण का परिणाम हैं, जोकि भारत को एक मजबूत, आत्मनिर्भर और वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी अर्थव्यवस्था बनाने की दिशा में आगे बढ़ा रहे हैं। मैन्युफैक्चरिंग की गति, पूंजीगत निवेश में वृद्धि, उपभोक्ता मांग का विस्तार और अवसंरचना पर फोकस, कहना होगा कि ये सभी मिलकर आज एक ऐसे आर्थिक परिदृश्य का निर्माण कर रहे हैं, जोकि आने वाले वर्षों में भारत को विश्व की अग्रणी आर्थिक शक्तियों में स्थापित कर सकता है। इस प्रकार स्पष्ट है कि भारत वर्तमान में अच्छा प्रदर्शन कर रहा है और
सर्विस सेक्टर में उछाल! ग्लोबल डिमांड से मार्च में बढ़ी गतिविधियां

नई दिल्ली। भारत की सेवा अर्थव्यवस्था ने मार्च महीने में मजबूती के संकेत दिए हैं। वैश्विक मांग में सुधार के चलते सर्विस सेक्टर की गतिविधियों में इजाफा हुआ है, हालांकि घरेलू नए ऑर्डर्स की रफ्तार कुछ धीमी जरूर पड़ी है। S&P Global द्वारा जारी HSBC इंडिया सर्विसेज PMI रिपोर्ट के अनुसार, मार्च में सर्विसेज PMI 57.5 दर्ज किया गया, जो इसके दीर्घकालिक औसत 54.4 से काफी ऊपर है। यह संकेत देता है कि सेक्टर में विस्तार जारी है और आर्थिक गतिविधियां मजबूत बनी हुई हैं। विदेशी ऑर्डर्स ने बढ़ाया कारोबार, घरेलू मांग थोड़ी सुस्तरिपोर्ट के मुताबिक, अंतरराष्ट्रीय ऑर्डर्स में तेज वृद्धि ने सर्विस सेक्टर को मजबूत सपोर्ट दिया। हालांकि, घरेलू स्तर पर नए बिजनेस की ग्रोथ में नरमी देखी गई। इसके पीछे वैश्विक अनिश्चितताओं और बाजार की बदलती परिस्थितियों का असर माना जा रहा है। खासतौर पर मध्य पूर्व में चल रहे संघर्ष का असर मांग, पर्यटन और बिजनेस माहौल पर पड़ा है, जिससे उत्पादन की रफ्तार सीमित हुई। रोजगार में तेजी, कंपनियों का भरोसा मजबूतएक सकारात्मक पहलू यह रहा कि कंपनियों ने मार्च में रोजगार बढ़ाने की रफ्तार तेज की। रिपोर्ट के अनुसार, 2025 के मध्य के बाद से यह सबसे तेज भर्ती देखी गई है। इतना ही नहीं, करीब 12 वर्षों में उत्पादन को लेकर सबसे मजबूत आउटलुक भी सामने आया है। इससे साफ है कि कंपनियां भविष्य को लेकर आशावादी हैं और विस्तार की योजनाएं बना रही हैं। चार में से तीन प्रमुख सेक्टरों में धीमी बिक्रीसेवा क्षेत्र के चार प्रमुख हिस्सों—वित्त एवं बीमा, रियल एस्टेट एवं प्रोफेशनल सर्विसेज और ट्रांसपोर्ट, सूचना एवं संचार—में बिक्री की वृद्धि अपेक्षाकृत धीमी रही। इससे संकेत मिलता है कि सेक्टर में ग्रोथ तो है, लेकिन यह व्यापक रूप से समान नहीं है और कुछ हिस्सों में दबाव बना हुआ है। महंगाई का दबाव बढ़ा, कीमतों में उछालरिपोर्ट में यह भी सामने आया कि जून 2022 के बाद से इनपुट लागत में सबसे तेज वृद्धि दर्ज की गई है। इसके चलते सर्विसेज की कीमतों में भी बढ़ोतरी हुई और मार्च में चार्ज किए जाने वाले शुल्क सात महीनों के उच्चतम स्तर पर पहुंच गए। यानी, कंपनियां बढ़ती लागत का बोझ ग्राहकों पर डाल रही हैं, जिससे महंगाई का दबाव बढ़ सकता है। चुनौतियों के बीच मजबूती दिखा रहा सर्विस सेक्टरकुल मिलाकर, भारतीय सर्विस सेक्टर ने मार्च में वैश्विक मांग के दम पर अच्छी वृद्धि दर्ज की है, लेकिन घरेलू मांग और महंगाई जैसे कारक आगे की रफ्तार को प्रभावित कर सकते हैं। फिर भी कंपनियों का बढ़ता भरोसा और रोजगार में सुधार इस सेक्टर के लिए सकारात्मक संकेत हैं।