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सीएम मोहन यादव ने बताया असली धुरंधर का दौर, भाजपा विचारधारा को अमर कर संगठन विस्तार

भोपाल । आज भाजपा का 47वां स्थापना दिवस प्रदेशभर में उत्साह और जोश के साथ मनाया गया भोपाल के प्रदेश कार्यालय में प्राथमिक और सक्रिय सदस्यों का सम्मेलन आयोजित किया गया और इसी स्थान से 17 जिलों में नए जिला कार्यालयों के भूमिपूजन कार्यक्रम में मुख्यमंत्री मोहन यादव और प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल वर्चुअली जुड़े मुख्यमंत्री मोहन यादव ने कहा कि भारत अब तीसरा ऐसा देश बन गया है जो अपने दुश्मनों को उनके देश में जाकर न केवल रोकता बल्कि ठिकाने भी लगाता है उन्होंने मोदी जी के नेतृत्व में धुरंधर-2 का दौर चल रहा बताया और याद दिलाया कि पहले भी असली धुरंधर का जमाना था जब नकली नोटों के जरिए पाकिस्तान परेशान करता था उस समय भी भारत ने अपने सुरक्षा और सामर्थ्य से उनका मुकाबला किया । सीएम ने भाजपा की विचारधारा की अमरता की ओर इशारा करते हुए कहा कि फीनिक्स पक्षी तो राख बनकर फिर जीवित होता है लेकिन उन्होंने भाजपा को देखा जिसकी विचारधारा अटल और अमर हो गई है उन्होंने कहा कि अटल बिहारी वाजपेयी के नेतृत्व में गठबंधन के दौर को पार करते हुए सरकार ने अपने वादों को पूरा किया और 24 दलों के साथ सफलतापूर्वक शासन चलाया । प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल ने कहा कि पार्टी की सबसे बड़ी पूंजी उसका कार्यकर्ता है और संगठन को मजबूत करने के लिए 17 जिलों में कार्यालयों का निर्माण कार्य शुरू किया गया है उनका लक्ष्य अगले स्थापना दिवस तक प्रदेश के सभी 62 जिलों में पार्टी कार्यालय बनाना है प्रत्येक कार्यालय में वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग रूम और पुस्तकालय की सुविधा होगी ताकि संगठन और विचारधारा से जुड़ी सामग्री आसानी से उपलब्ध हो सके कार्यक्रम में दिवंगत नेताओं और कार्यकर्ताओं के परिजनों का सम्मान भी किया गया मुख्यमंत्री स्वयं मंच से नीचे उतरकर पूर्व विधायक स्वर्गीय रमेश शर्मा के परिजनों को सम्मानित किया इस मौके पर क्षेत्रीय संगठन मंत्री अजय जामवाल सांसद विधायक और अन्य पदाधिकारी मौजूद रहे । सीएम ने प्रदेश में सरकार की उपलब्धियों का भी उल्लेख किया उन्होंने कहा कि गेहूं खरीदी में किसानों को प्राथमिकता दी जा रही है और दर 2625 रुपये प्रति क्विंटल तय की गई है सिंचाई का क्षेत्र अब 55 लाख हेक्टेयर तक बढ़ा दिया गया है बिजली आपूर्ति में सुधार किया गया है और किसानों को पर्याप्त सुविधा उपलब्ध कराई जा रही है उन्होंने कहा कि सरकार अंत्योदय के सिद्धांत के तहत गरीब से गरीब व्यक्ति के जीवन में खुशहाली लाने के लिए कार्यरत है । सीएम ने कहा कि सबका साथ सबका विकास सबका विश्वास सबका प्रयास के मंत्र के साथ सरकार आगे बढ़ रही है और 17 नए कार्यालयों के भूमिपूजन के साथ संगठन विस्तार का कार्य तेज हो गया है उन्होंने सभी कार्यकर्ताओं को बधाई दी और संगठन की सक्रियता बढ़ाने पर जोर दिया बीजेपी के क्षेत्रीय संगठन मंत्री अजय जामवाल ने कहा कि 1980 से 2026 तक 47 वर्षों में पार्टी की विकास यात्रा देश और दुनिया के लिए प्रेरणा बनी है अब पंच परिवर्तन के रूप में पर्यावरण समरसता स्वदेशी कुटुंब प्रबोधन और नागरिकता भाव जैसी चुनौतियों का सामना करना है प्रदेश अध्यक्ष ने जोर दिया कि बूथ स्तर तक संगठन को मजबूत करना जरूरी है और पार्टी का हर कार्यकर्ता इसकी सबसे बड़ी ताकत है इस मौके पर भाजपा कार्यालय में ध्वज फहराया गया और 17 जिलों में भूमि पूजन औपचारिक रूप से किया गया मुख्यमंत्री और प्रदेश अध्यक्ष वर्चुअली जुड़कर इस कार्यक्रम का हिस्सा बने इस तरह भाजपा का स्थापना दिवस पार्टी विचारधारा और संगठन विस्तार दोनों के संदेश के साथ मनाया गया जिसमें राजनीतिक प्रशासनिक और सामाजिक दिशा को बल मिला

स्टील सेक्टर में बड़ा निवेश! मेसाबी मेटालिक्स ने जुटाए 150 मिलियन डॉलर

नई दिल्ली।एस्सार समूह द्वारा समर्थित मेसाबी मेटालिक्स ने अमेरिकी औद्योगिक क्षेत्र में एक बड़ी वित्तीय उपलब्धि हासिल की है। कंपनी ने घोषणा की है कि उसे मैक्वेरी ग्रुप से 150 मिलियन डॉलर की फंडिंग मिली है। यह निवेश मिनेसोटा के नैशवॉक में बन रही उसकी डायरेक्ट रिडक्शन (डीआर) ग्रेड लौह अयस्क खदान और पेलेट संयंत्र परियोजना को गति देगा, जिसके 2026 की तीसरी तिमाही में शुरू होने की उम्मीद है। यह फंडिंग ऐसे समय आई है जब अमेरिका अपनी औद्योगिक आपूर्ति श्रृंखलाओं को मजबूत करने और आयात पर निर्भरता घटाने की दिशा में तेजी से काम कर रहा है। पहले से मिल रही पूंजी को मिला और बलयह नई फंडिंग मेसाबी मेटालिक्स के लिए पहले से जारी निवेश प्रवाह को और मजबूत करती है। इससे पहले कंपनी ने Breakwall Capital के साथ 520 मिलियन डॉलर की सीनियर सिक्योर्ड क्रेडिट फैसिलिटी की घोषणा की थी। इसके अलावा, कंपनी को Export-Import Bank of the United States से भी समर्थन मिल चुका है, जो इस परियोजना के बढ़ते रणनीतिक महत्व को दर्शाता है। इन निवेशों से साफ है कि वैश्विक निवेशक इस प्रोजेक्ट की संभावनाओं पर भरोसा जता रहे हैं। अमेरिकी इस्पात सेक्टर के लिए गेमचेंजर प्रोजेक्टमेसाबी मेटालिक्स की यह परियोजना अमेरिका के लिए बेहद महत्वपूर्ण मानी जा रही है। देश में उच्च गुणवत्ता वाले डीआर-ग्रेड लौह अयस्क का घरेलू स्रोत तैयार करने की दिशा में यह एक बड़ा कदम है। इससे न केवल इस्पात उद्योग को मजबूती मिलेगी, बल्कि ऑटोमोबाइल, इंफ्रास्ट्रक्चर, शिपबिल्डिंग और रक्षा जैसे क्षेत्रों को भी फायदा होगा। खासकर ऐसे समय में, जब अमेरिका वैश्विक सप्लाई चेन पर निर्भरता कम करने की रणनीति पर काम कर रहा है। 2.5 बिलियन डॉलर का मेगा प्रोजेक्ट, हजारों को रोजगारउत्तरी मिनेसोटा में 16,000 एकड़ से ज्यादा क्षेत्र में फैली यह परियोजना करीब 2.5 बिलियन डॉलर की लागत से तैयार की जा रही है। वर्तमान में 800 से अधिक श्रमिक इस साइट पर काम कर रहे हैं, जिससे यह मिनेसोटा के इतिहास में निजी क्षेत्र के सबसे बड़े औद्योगिक निवेशों में शामिल हो गई है। एस्सार समूह पहले ही इस प्रोजेक्ट में 2 बिलियन डॉलर से ज्यादा का इक्विटी निवेश कर चुका है, जो इसकी दीर्घकालिक रणनीतिक अहमियत को दर्शाता है। कंपनी और निवेशकों ने जताया भरोसामेसाबी मेटालिक्स के सीईओ जो ब्रोकिंग ने इस फंडिंग को कंपनी के लिए एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर बताया। उन्होंने कहा कि लगातार मिल रही वित्तीय साझेदारियां इस प्रोजेक्ट की गुणवत्ता और संभावनाओं पर बढ़ते विश्वास को दिखाती हैं। वहीं मैक्वेरी ग्रुप के वरिष्ठ प्रबंध निदेशक माइक बर्न्स ने कहा कि उनकी कंपनी का एस्सार समूह के साथ पुराना संबंध रहा है और वे अमेरिका में इस परियोजना के साथ जुड़कर इसे आगे बढ़ाने के लिए प्रतिबद्ध हैं।

नई उम्मीद वाली ‘आप पार्टी’ अपनों के हाशिये पर क्यों ?

– सौरभ वार्ष्णेयआम आदमी पार्टी ने भारतीय राजनीति में एक नई उम्मीद जगाई थी। भ्रष्टाचार के खिलाफ आंदोलन से उपजी पार्टी पारदर्शिता, ईमानदारी और जनभागीदारी के वादों के साथ आजादी वाले तेवर के साथ नायक अरविंद केजरीवाल के नेतृत्व में आप ने दिल्ली में शिक्षा, स्वास्थ्य और बिजली-पानी जैसे मुख्य मुद्दों पर उल्लेखनीय काम कर लोगों का विश्वास जीता। लेकिन समय के साथ कई ऐसे कारण सामने आए हैं, जिनसे जनता के एक वर्ग में आप पार्टी मोहभंग की स्थिति बनी है। शुरुआत में ‘आप’ ने ‘नई राजनीति’ का दावा किया था, लेकिन समय के साथ वही परंपरागत राजनीतिक रणनीतियां अपनाने के आरोप लगे। दल-बदल, राजनीतिक समझौते और सत्ता बनाए रखने की प्राथमिकता ने इसके मूल आदर्शों पर सवाल खड़े किए। जिस पार्टी ने भ्रष्टाचार के खिलाफ लड़ाई से शुरुआत की, उसी पर अब विभिन्न घोटालों के आरोप लगे हैं। खासकर दिल्ली की शराब नीति को लेकर उठे विवाद ने पार्टी की छवि को नुकसान पहुंचाया। इससे जनता के बीच भरोसे में कमी आई है। समय-समय पर पार्टी के वरिष्ठ नेताओं का बाहर होना या निष्कासन, जैसे कि योगेंद्र यादव और प्रशांत भूषण का अलग होना, संगठन के भीतर असहमति और केंद्रीकरण की ओर इशारा करता है। धीरे -धीरे यह नई उम्मीद वाली पार्टी अपनों के हाशिये पर क्यों हैं यह चिंतन का विषय है। दिल्ली की राजनीति में आम आदमी पार्टी और उसके युवा चेहरे राज्यसभा राघव चड्ढा के बीच उभरे विवाद ने फिर एक बार पुरानी बोतल में नई शराब वाली स्थिति व इसको लेकर आम आदमी पार्टी पर कई सवाल खड़े कर दिए हैं। यह मामला केवल एक व्यक्ति और पार्टी के बीच मतभेद का नहीं, बल्कि राजनीतिक दलों में अनुशासन, पारदर्शिता और नेतृत्व शैली की भी परीक्षा है। इसका जीता जागता उदाहरण पहले भी सामने आए हैं जिनमें प्रसिद्व कवि कुमार विश्वास सहित अन्य चेहरे अलग हो गए। कुमार आप पार्टी के वह नेता थे जो अरविंद केजरीवाल के साथ उस दौर से थे जब उन्होंने अपनी नौकरी सहित सब कुछ दांव पर लगाकर साथ दिया था। उनके बाद आम आदमी पार्टी में कई दौर ऐसे आ चुके हैं जिनमें अन्य कद्दावर नेतागण योगेंद्र यादव, प्रशांत भूषण, शाजिया इल्मी, आशुतोष, कपिल मिश्रा, अलका लांबा, कैलाश गहलोत, मयंक गांधी, अंजलि दमानिया, सुभाष वारे, आनंद कुमार सहित अन्य नाम भी साथ छोड़ चुके हैं व स्वाति मालीवाल आम आमदी पार्टी को छोड़ चुके हैं। अब एक नाम और शामिल हो रहा है वह हैं राघव चड्ढा, जो कि प्रमुख युवा नेताओं में गिने जाते हैं, कम समय में राष्ट्रीय राजनीति में अपनी अलग पहचान बनाई है। लेकिन हाल के घटनाक्रमों ने उनके और पार्टी नेतृत्व के बीच खिंचाव की स्थिति को उजागर मनभेद को उजागर किया है। आरोप-प्रत्यारोप, निर्णय प्रक्रिया में मतभेद और व्यक्तिगत महत्वाकांक्षा—ये सभी तत्व इस विवाद को जटिल बनाते हैं। राजनीतिक दल किसी एक व्यक्ति से बड़े होते हैं। आप ने हमेशा सामूहिक नेतृत्व और पारदर्शिता की बात की है। ऐसे में यदि पार्टी का कोई वरिष्ठ नेता सार्वजनिक रूप से अलग रुख अपनाता है, तो यह संगठनात्मक अनुशासन पर प्रश्नचिह्न लगाता है। दूसरी ओर, लोकतंत्र में व्यक्तिगत विचारों की अभिव्यक्ति भी उतनी ही महत्वपूर्ण है।आप ने खुद को एक वैकल्पिक और स्वच्छ राजनीति के प्रतीक के रूप में स्थापित किया था। इस तरह के विवाद पार्टी की उस छवि को धक्का पहुंचा सकते हैं। विपक्ष के लिए यह एक अवसर बन जाता है कि वह पार्टी की आंतरिक एकता और विश्वसनीयता पर सवाल उठाए। यह विवाद आप नेतृत्व के सामने एक बड़ी चुनौती भी है—कैसे वे असहमति को संभालते हैं। क्या पार्टी संवाद के जरिए समाधान निकालती है या अनुशासनात्मक कार्रवाई का रास्ता अपनाती है, इससे भविष्य की राजनीति तय होगी। आम आदमी पार्टी और राघव चड्ढा के बीच का यह टकराव भारतीय राजनीति के उस व्यापक सच को सामने लाता है, जहां व्यक्तिगत महत्वाकांक्षा और संगठनात्मक अनुशासन के बीच संतुलन बनाना आसान नहीं होता। यदि इसे समझदारी और संवाद से सुलझाया गया, तो यह पार्टी को और मजबूत बना सकता है; लेकिन अगर विवाद बढ़ता है, तो इसका असर न केवल पार्टी बल्कि उसकी विश्वसनीयता पर भी पड़ेगा। आप पर यह आरोप भी लगता रहा है कि पार्टी में निर्णय लेने की शक्ति कुछ लोगों तक सीमित होती जा रही है। इससे ‘सामूहिक नेतृत्व’ की अवधारणा कमजोर पड़ी है। हालांकि दिल्ली में कुछ क्षेत्रों में प्रगति हुई है, लेकिन अन्य राज्यों में विस्तार के दौरान आप को अपेक्षित सफलता नहीं मिली। पंजाब में सत्ता मिलने के बावजूद चुनौतियां बरकरार हैं, जिससे पार्टी की राष्ट्रीय महत्वाकांक्षाओं पर असर पड़ा है। आम आदमी पार्टी का उदय भारतीय लोकतंत्र में एक सकारात्मक प्रयोग था, जिसने राजनीति में नई सोच और उम्मीद पैदा की। लेकिन यदि पार्टी को जनता का विश्वास बनाए रखना है, तो उसे अपने मूल सिद्धांतों पर लौटना होगा, पारदर्शिता बढ़ानी होगी और आंतरिक लोकतंत्र को मजबूत करना होगा। अन्यथा, ‘आम आदमीÓ की उम्मीदों पर खरा उतरने का दावा धीरे-धीरे कमजोर पड़ता जाएगा। अगर हम आम आदमी पार्टी राज्यसभा सांसदों पर नजर डाले तो अप्रैल 2026 तक, आम आदमी पार्टी के पास राज्यसभा में 10 सांसद हैं, जो मुख्य रूप से पंजाब और दिल्ली से हैं। हाल ही में हुए बदलावों में, अशोक मित्तल को राघव चड्ढा की जगह राज्यसभा में पार्टी का नया उपनेता नियुक्त किया गया है। अब ऐसे में अगर अरविंद केजरीवाल के पुराने साथियों की बात करें तो अब कुछ ही साथी शेष बचे हैं। ऐसे में क्या पार्टी इस अंतकलह को बचायेगी ? क्या राघव चढ्डा से सुलह हो जायेगा ? आदि ऐसे विषय हैं जिनका हल सिर्फ सिर्फ अरविंद केजरीवाल के पास है।

खंडवा में विवादित पोस्टिंग घोटाला असिस्टेंट कमिश्नर की योजना नाकाम

खंडवा । खंडवा जनजातीय कार्य विभाग के असिस्टेंट कमिश्नर संतोष शुक्ला अब विवादों के घेरे में हैं क्योंकि रिटायरमेंट के आखिरी सप्ताह में उन्होंने अपने चहेते टीचर को असिस्टेंट कमिश्नर का चार्ज दिलाने के लिए नोटशीट चलायी जो प्रशासनिक सुरक्षा तंत्र से टकरा गयी शुक्ला ने जिस तरह से थोकबंद ट्रांसफर पोस्टिंग आर्डर निकालकर अपनी पसंद की सिफारिश कलेक्टर स्तर तक पहुंचाने का प्रयास किया वह मामला अब बड़े स्तर पर उभर गया है जब यह खबर दैनिक भास्कर के खुलासे के बाद सार्वजनिक हुई तो प्रभारी मंत्री ने शुक्ला के जारी किये गये आदेशों को निरस्त करवा दिया सूत्र बताते हैं कि रिटायर होने से पहले शुक्ला ने सिर्फ अपने विभागीय आदेश जारी नहीं किये बल्कि उन्होंने यह भी तय कर लिया कि रिटायरमेंट के बाद कौन अधिकारी उनके स्थान पर कार्यभार संभालेगा इस कड़ी में एक नोटशीट तैयार की गयी जिसमें उन्होंने अपने चहेते टीचर का नाम असिस्टेंट कमिश्नर के पद के लिए आगे बढ़ाया यह फाइल जिला पंचायत से होते हुए कलेक्टर कार्यालय तक आयी कलेक्टर ऋषव गुप्ता ने नोटशीट में दर्ज नाम के स्थान पर विभाग में सेकंड पोजीशन पर पदस्थ नीरज पाराशर का नाम दर्ज कराया और उन्हीं को असिस्टेंट कमिश्नर का चार्ज देने की अनुशंसा की इस कदम ने शुक्ला की योजना पर त्वरित विराम लगा दिया क्योंकि पाराशर और शुक्ला के बीच पहले से आपसी खींचतान चल रही थी कलेक्टर के हस्तक्षेप के बाद जब मामला मंत्री स्तर तक पहुंचा तो प्रभारी मंत्री ने शुक्ला के जारी किये गये ट्रांसफर पोस्टिंग आर्डर को निरस्त करने का आदेश दिया और साथ ही शुक्ला के कार्यकाल में हुई पोस्टिंग ट्रांसफर गतिविधियों की जांच के लिए एक आईएएस अधिकारी के नेतृत्व में कमेटी भी बना दी गयी जिला प्रशासन के सूत्रों के अनुसार शुक्ला ने अपने रिटायरमेंट के अंतिम दिनों में बड़े पैमाने पर ट्रांसफर पोस्टिंग आदेश जारी किये जिनमें उनके चहेते कर्मचारी को लाभ देने की कोशिश स्पष्ट रूप से दर्ज है यह बात प्रशासनिक दायरे में तथा कर्मचारियों की प्रतिक्रियाओं में भी चर्चा का विषय बनी हुई है कलेक्टर ने जो निर्णय लिया वह विभागीय नियमों के अनुरूप बताया जा रहा है अधिकारियों का कहना है कि जब किसी अधिकारी का रिटायरमेंट निश्चित हो तो उनके अधिकार सीमित हो जाते हैं और ऐसे मामलों में उच्च प्रशासनिक स्तर के दिशा निर्देशों का पालन करना अनिवार्य होता है शुक्ला द्वारा नोटशीट में नाम आगे बढ़ाये जाने की प्रक्रिया पर सवाल उठाये जा रहे हैं मंत्री ने स्पष्ट निर्देश दिये कि विभागीय आदेशों को तत्काल प्रभाव से निरस्त किया जाये और मामले की गहन जांच करायी जाये ताकि इस प्रकार के अनुचित हस्तक्षेप और पॉलिटिकल दबाव की सच्चाई सामने आये जांच कमेटी जल्द ही अपना कार्य प्रारम्भ करेगी और इस पूरे घटनाक्रम से जुड़े अधिकारियों कर्मचारियों से पूछताछ करेगी प्रशासनिक सूत्रों की मानें तो यह मामला सिर्फ एक अधिकारी की पोस्टिंग सिफारिश का मामला नहीं रह गया है बल्कि यह जांच का विषय बन गया है कि क्या रिटायर हो रहे अधिकारी ने पद के दुरुपयोग के अलावा अन्य किस तरह से अपनी पसंद की नियुक्ति कराने का प्रयास किया इस विवाद ने स्थानीय प्रशासनिक माहौल को भी प्रभावित किया है कर्मचारियों के बीच इस प्रकार की सिफारिश और हस्तक्षेप को गलत माना जा रहा है और यह भी चर्चा में है कि यदि ऐसी कोशिशें छूट गयीं तो भविष्य में ऐसी घटनाओं की बानगी और अधिक बढ़ सकती है अब देखना यह है कि जांच कमेटी क्या निष्कर्ष निकालती है और किन अधिकारियों कर्मचारियों की भूमिका प्रकाश में आती है इस पूरे प्रकरण से यह स्पष्ट हो गया है कि प्रशासनिक प्रक्रिया में पारदर्शिता और नियमों का पालन किस हद तक महत्वपूर्ण है और किस प्रकार गलत प्रयासों को रोकने वाले संस्थागत उपाय प्रभावी भूमिका निभा सकते हैं इस प्रकार संतोष शुक्ला की अंतिम सिफारिश ने प्रशासनिक नियमों की परीक्षा ली और कलेक्टर द्वारा उचित कदम उठाये जाने से यह मामला नियंत्रण में आ गया है जबकि जांच के परिणाम से भविष्य में ऐसे मामलों की रोकथाम और भी सशक्त होगी 

ओलंपिक पदक विजेता ब्लैंका व्लासिक को मिली बड़ी जिम्मेदारी, वर्ल्ड 10K बेंगलुरु की ब्रांड एंबेसडर नियुक्त

नई दिल्ली भारत के प्रतिष्ठित रनिंग इवेंट ‘वर्ल्ड 10के बेंगलुरु 2026’ को इस साल एक बड़ा इंटरनेशनल फेस मिला है। दो बार के ओलंपिक पदक विजेता और विश्व चैंपियन ब्लैंका व्लासिक को इस मेगा इवेंट का अंतर्राष्ट्रीय राजदूत नियुक्त किया गया है। वर्ल्ड 10K बेंगलुरु का आयोजन 26 अप्रैल को होगा, जो विश्व एथलेटिक्स का गोल्ड लेबल इवेंट है और हर साल हजारों प्रतिभागियों को आकर्षित करता है। हाई जंप की दिग्गज, रिकार्ड से भरा इतिहासक्रोएशिया के स्टार एथलीट ब्लैंका व्लासिक को दुनिया की महानतम हाई जंपर्स में जाना जाता है। उन्होंने बीजिंग 2008 ओलंपिक में रजत और रियो 2016 ओलंपिक में कांस्य पदक, अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाया। इसके अलावा, उनके नाम कई विश्व चैंपियनशिप और विश्व इंदौर खिताब भी हैं। वर्ष 2009 में उनका 2.08 मीटर का निजी सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन आज भी क्रोएशियाई राष्ट्रीय रिकॉर्ड है और महिला हाई जंप के इतिहास में तीसरा सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन माना जाता है। दौड़ को फिटनेस और एकता का प्रतीक बताया गयाएम्बेसडर बनने पर व्लासिक ने खुशी जाहिर करते हुए कहा कि यह इवेंट सिर्फ एक दौड़ नहीं है, बल्कि लोगों को जोड़ने का एक जरिया है। उन्होंने कहा, “दौड़ना हमें शारीरिक रूप से सक्रिय और मानसिक रूप से मजबूत बनाती है। यह एथलेटिक्स संतुलन को मजबूत करने में अहम भूमिका निभाती है।” उन्होंने ऑफिस को संदेश दिया कि वे पूरी तैयारी के साथ भाग लें, अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करें और इस अनुभव का आनंद लें। खेल से लेकर बेडरूम के बाहरी हिस्से तकमैदान के बाहर भी व्लासिक खेल सक्रिय रूप से जुड़े हुए हैं। वह चैंपियंस फॉर पीस पहल का हिस्सा हैं और क्रोएशियाई ओलंपिक समिति के उपाध्यक्ष के रूप में काम कर रहे हैं। इस भूमिका में वह समुदाय को मजबूत करने और युवा खिलाड़ियों को प्रेरित करने में अहम योगदान दे रही हैं। आयोजकों ने भव्यता की झलक, भव्यता की चमक-दमकरेस के प्रमोटर प्रोकैम इंटरनेशनल के संयुक्त प्रबंध निदेशक विवेक सिंह ने व्लासिक का स्वागत करते हुए कहा कि उनकी उपलब्धियां और खेल जगत में उनका योगदान एक प्रेरणादायक व्यक्तित्व है। उनकी भागीदारी से इस इवेंट की वैश्विक पहचान और मजबूत होगी और साथियों के अनुभव में भी खास निखार आएगा।

ASHOKNAGAR LPG PROTEST : डिलीवरी मैसेज मिलने के बाद भी गैस नहीं, लोगों ने कलेक्ट्रेट पर खाली सिलेंडर रखकर किया विरोध

Gas Cylinder Issue

HIGHLIGHTS : अशोकनगर में सिलेंडर डिलीवरी में गड़बड़ी उपभोक्ताओं ने चक्का जाम कर सड़क रोकी कलेक्ट्रेट पर गेट पर खाली सिलेंडर रखकर विरोध कई महीनों से घर तक सिलेंडर नहीं पहुंच रहा पुलिस ने समझा-बुझाकर जाम खुलवाया ASHOKNAGAR LPG PROTEST : ग्वालियर। अशोकनगर जिले में सोमवार को कई उपभोक्ताओं ने गैस सिलेंडर न मिलने पर विरोध प्रदर्शन किया। कई लोगों को मोबाइल पर डिलीवरी का मैसेज तो मिल गया था, लेकिन असल में सिलेंडर उनके घर तक नहीं पहुंचे। बता दें कि नाराज उपभोक्ताओं ने पहले कोलूआ रोड स्थित जय बाबा इंडियन गैस एजेंसी के बाहर सड़क पर उतरकर चक्का जाम किया, जिससे यातायात बाधित हो गया। भीषण गर्मी में राहत का दूसरा नाम सूती कपड़े, हल्के रंगों का चुनाव भी जरूरी कलेक्ट्रेट पर खाली सिलेंडर रखकर विरोध डीसी गैस गोदाम के उपभोक्ताओं ने भी सिलेंडर न मिलने पर कलेक्ट्रेट कार्यालय पहुंचकर अपना विरोध जताया। उन्होंने कार्यालय के गेट पर खाली सिलेंडर रखकर प्रदर्शन किया। उपभोक्ताओं का कहना था कि उन्हें मोबाइल पर डिलीवरी मैसेज तो आया, लेकिन सिलेंडर घर तक नहीं पहुंचा। इस मामले से कलेक्ट्रेट परिसर में हंगामा मच गया और प्रशासन को तुरंत हस्तक्षेप करना पड़ा। SEMAI LIQUOR FLOOD : मुरैना में बारिश के बाद शराब की बौछार, ग्रामीणों ने लुटे क्वार्टर! घर तक डिलीवरी में लगातार परेशानी दुर्गा कॉलोनी निवासी प्राण सिंह कुशवाह ने बताया कि उन्होंने लगभग एक महीने पहले डीसी गैस गोदाम पर सिलेंडर बुक कराया था। उन्हें मोबाइल पर डिलीवरी का मैसेज भी मिल गया, लेकिन सिलेंडर अभी तक नहीं मिला। कई बार एजेंसी ने कहा कि रिक्शा के माध्यम से टंकी घर पहुंचा दी जाएगी, लेकिन उपभोक्ताओं तक सिलेंडर नहीं पहुंचा। MP BJP DOUNDATION DAY : MP में BJP का मेगा प्लान; स्थापना दिवस पर BJP का विस्तार, 17 जिलों में कार्यालयों का शुभारंभ पुलिस ने समझा-बुझाकर जाम खुलवाया इस दौरान देहात थाना पुलिस मौके पर पहुंची और लोगों को समझा-बुझाकर सड़क से हटाया। प्रदर्शनकारियों ने बाद में अपनी शिकायतें कलेक्ट्रेट में दर्ज कराई।

भीषण गर्मी में राहत का दूसरा नाम सूती कपड़े, हल्के रंगों का चुनाव भी जरूरी

नई दिल्ली। देशभर में तापमान तेजी से बढ़ रहा है और कई जगहों पर पारा 45 डिग्री के पार पहुंच रहा है। ऐसे में चिलचिलाती धूप, उमस और लू से बचाव के लिए सही कपड़ों का चुनाव बेहद जरूरी हो जाता है। एक्सपर्ट्स मानते हैं कि इस मौसम में अगर आप राहत चाहते हैं, तो सूती कपड़े यानी Cotton Fabric सबसे बेहतर विकल्प हैं। ये न केवल शरीर को ठंडा रखते हैं, बल्कि पूरे दिन आपको आरामदायक महसूस कराते हैं। क्यों खास है सूती कपड़ा? जानिए इसके फायदेसूती कपड़ा पूरी तरह प्राकृतिक होता है और इसमें किसी तरह के सिंथेटिक फाइबर नहीं होते। इसकी सबसे बड़ी खासियत यह है कि यह ‘सांस लेने योग्य’ यानी ब्रीदेबल फैब्रिक होता है। इससे हवा आसानी से आर-पार हो सकती है, जिससे त्वचा ठंडी बनी रहती है। साथ ही, यह पसीने को जल्दी सोख लेता है और उसे हवा के संपर्क में लाकर जल्दी सुखा देता है। इससे शरीर में चिपचिपाहट नहीं होती और आप तरोताजा महसूस करते हैं। इसके विपरीत, Polyester और नायलॉन जैसे सिंथेटिक कपड़े पसीना सोख नहीं पाते। इससे पसीना त्वचा पर जमा रहता है, जिससे घमौरियां, खुजली और बदबू जैसी समस्याएं हो सकती हैं। इसलिए गर्मियों में प्राकृतिक फैब्रिक का चुनाव ही समझदारी है। आराम के साथ स्टाइल भी, हर मौके के लिए परफेक्टसूती कपड़े न सिर्फ आरामदायक होते हैं, बल्कि स्टाइलिश भी होते हैं। आजकल कॉटन में कई तरह के डिजाइन जैसे स्ट्राइप्स, चेक्स और सॉलिड पैटर्न मिलते हैं, जिन्हें आप कैजुअल और फॉर्मल दोनों लुक में आसानी से कैरी कर सकते हैं। यह फैब्रिक हल्का, मुलायम और त्वचा के अनुकूल होता है, जिससे दिनभर पहनने पर भी कोई परेशानी नहीं होती। रंगों का चुनाव भी है उतना ही जरूरीगर्मी में सिर्फ कपड़ा ही नहीं, बल्कि उसके रंग का चुनाव भी अहम भूमिका निभाता है। हल्के रंग जैसे सफेद, क्रीम, हल्का गुलाबी, आसमानी और पीला सूरज की किरणों को परावर्तित (रिफ्लेक्ट) करते हैं, जिससे शरीर कम गर्म होता है। वहीं, काला, नेवी ब्लू या गहरा लाल जैसे रंग गर्मी को ज्यादा सोखते हैं, जिससे शरीर का तापमान बढ़ जाता है। इसलिए इस मौसम में हल्के रंगों के सूती कपड़े पहनना सबसे अच्छा विकल्प माना जाता है। मन और शरीर दोनों को दे सुकूनसही कपड़े न सिर्फ शरीर को ठंडा रखते हैं, बल्कि मानसिक रूप से भी सुकून देते हैं। जब शरीर ठंडा और सूखा रहता है, तो चिड़चिड़ापन कम होता है और मन शांत रहता है। यही कारण है कि पुराने समय से दादी-नानी गर्मियों में सूती कपड़े पहनने की सलाह देती आई हैं। गर्मी से बचाव का आसान फॉर्मूलाअगर आप भीषण गर्मी में खुद को कूल और कंफर्टेबल रखना चाहते हैं, तो सूती कपड़े और हल्के रंगों का चुनाव जरूर करें। यह न केवल आपको गर्मी से राहत देंगे, बल्कि आपकी सेहत और स्टाइल दोनों को बेहतर बनाएंगे।

‘ॐ’ के उच्चारण का असर: आध्यात्म के साथ जानें इसके पीछे छिपा साइंस

नई दिल्ली। सनातन परंपरा में ‘ओम’ को केवल एक ध्वनि नहीं, बल्कि सृष्टि की मूल ऊर्जा माना गया है। हर मंत्र और ध्यान की शुरुआत इसी से होती है, लेकिन अब यह केवल आध्यात्मिक आस्था तक सीमित नहीं रहा। आधुनिक विज्ञान भी मानने लगा है कि ‘ओम’ का उच्चारण शरीर और मन दोनों पर गहरा सकारात्मक प्रभाव डालता है। विशेषज्ञों के अनुसार, यह ध्वनि कंपन (वाइब्रेशन) शरीर के सातों चक्रों को सक्रिय करने के साथ-साथ मस्तिष्क के न्यूरॉन्स को भी जागृत करता है, जिससे मानसिक शांति और संतुलन बढ़ता है। ‘ओम’ की ध्वनि में छिपा है कंपन का विज्ञान‘ओम’ दरअसल ‘अ+उ+म’ का संयोग है, जिसे Om (mantra) या प्रणव भी कहा जाता है। जब इसका लंबा और गहरा उच्चारण किया जाता है, तो शरीर में सूक्ष्म कंपन उत्पन्न होते हैं। ये कंपन सीधे Nervous System पर असर डालते हैं। इससे दिमाग शांत होता है, तनाव कम होता है और एकाग्रता बढ़ती है। यही कारण है कि ध्यान और योग में ‘ओम’ को विशेष महत्व दिया गया है। सात चक्रों पर पड़ता है गहरा प्रभावमानव शरीर में सात प्रमुख ऊर्जा केंद्र यानी चक्र माने जाते हैं—मूलाधार, स्वाधिष्ठान, मणिपुर, अनाहत, विशुद्ध, आज्ञा और सहस्रार। ‘ओम’ के उच्चारण से उत्पन्न कंपन इन चक्रों को सक्रिय करने में मदद करते हैं। इससे शरीर में ऊर्जा का प्रवाह संतुलित होता है और व्यक्ति मानसिक व शारीरिक रूप से स्थिर महसूस करता है। नियमित अभ्यास से यह संतुलन लंबे समय तक बना रहता है। वैज्ञानिक शोध भी करते हैं पुष्टिNational Library of Medicine में प्रकाशित एक अध्ययन के अनुसार, ‘ओम’ का जाप ऑटोनॉमिक नर्वस सिस्टम पर सकारात्मक प्रभाव डालता है। इस शोध में पाया गया कि सिर्फ 5 मिनट के जाप से ही हार्ट रेट वेरिएबिलिटी में सुधार हुआ और तनाव के स्तर में कमी आई। यह तंत्र शरीर की अनैच्छिक क्रियाओं जैसे दिल की धड़कन और सांस को नियंत्रित करता है, इसलिए इसका संतुलन बेहद जरूरी है। वेगस नर्व को करता है मजबूतविशेषज्ञों के अनुसार, ‘ओम’ का उच्चारण Vagus Nerve को सक्रिय करता है। यह नर्व दिल, फेफड़ों और पाचन तंत्र को नियंत्रित करने में अहम भूमिका निभाती है। जब ‘ओम’ का जाप गहरी सांस के साथ किया जाता है, तो यह नर्व उत्तेजित होती है, जिससे तनाव कम होता है, सांस लेने की क्षमता बेहतर होती है और शरीर में शांति का अनुभव होता है। मानसिक स्वास्थ्य और याददाश्त में सुधार‘ओम’ की ध्वनि न केवल चक्रों को सक्रिय करती है, बल्कि मस्तिष्क के न्यूरॉन्स को भी उत्तेजित करती है। इससे एकाग्रता, याददाश्त और मानसिक स्पष्टता बढ़ती है। नियमित अभ्यास से चिंता, तनाव और नींद से जुड़ी समस्याएं भी कम हो सकती हैं। यही वजह है कि आजकल मानसिक स्वास्थ्य सुधारने के लिए भी इसे एक आसान और प्रभावी तकनीक माना जा रहा है। कैसे करें सही तरीके से ‘ओम’ का जाप?‘ओम’ का सही लाभ पाने के लिए इसे सुबह खाली पेट या ध्यान के समय करना सबसे अच्छा माना जाता है। इसके लिए आराम से बैठकर गहरी सांस लें और धीरे-धीरे लंबा ‘ओम’ उच्चारित करें। फिर सांस को धीरे-धीरे छोड़ें। ध्यान रखें कि उच्चारण जितना लंबा और गहरा होगा, उतना ही अधिक कंपन पैदा होगा और लाभ भी बढ़ेगा। आध्यात्म और विज्ञान का अनोखा संगम‘ओम’ केवल धार्मिक प्रतीक नहीं, बल्कि वैज्ञानिक दृष्टि से भी शरीर और मन को संतुलित करने का प्रभावी माध्यम है। नियमित अभ्यास से न केवल चक्र सक्रिय होते हैं, बल्कि न्यूरॉन्स भी जागृत होते हैं, जिससे जीवन में शांति, स्थिरता और सकारात्मकता आती है।

एक नो बॉल ने पलट दी पूरी बाजी टिम डेविड की तूफानी पारी से सीएसके की हार तय

नई दिल्ली । आईपीएल 2026 के एक हाई स्कोरिंग मुकाबले में चेन्नई सुपर किंग्स को रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु के खिलाफ हार का सामना करना पड़ा लेकिन इस मैच की असली कहानी एक छोटी सी गलती से जुड़ी रही जिसने पूरे मुकाबले की दिशा ही बदल दी। यह गलती थी एक नो बॉल जिसने टिम डेविड को नया जीवन दिया और फिर उन्होंने उसी मौके को मैच विनिंग पारी में बदल दिया। मैच के शुरुआती चरण में चेन्नई सुपर किंग्स मुकाबले में बनी हुई थी। 13 से 14 ओवर तक स्थिति ऐसी थी कि टीम वापसी कर सकती थी और आरसीबी को एक काबू में रहने वाले स्कोर तक रोक सकती थी। हालांकि फील्डिंग में ढिलाई और पावरप्ले में विकेट न मिलना पहले ही टीम पर दबाव बना चुका था लेकिन असली झटका बाद में लगा। जब टिम डेविड क्रीज पर आए तो शुरुआत में वह संघर्ष करते नजर आए। उनकी पहली कुछ गेंदों पर रन नहीं बन रहे थे और ऐसा लग रहा था कि सीएसके उन्हें जल्दी पवेलियन भेज देगी। इसी दौरान 18वें ओवर में तेज गेंदबाज अंशुल कंबोज ने एक शानदार गेंद डाली जिस पर टिम डेविड बोल्ड हो गए। उस पल ऐसा लगा कि चेन्नई ने मैच में बड़ी सफलता हासिल कर ली है। लेकिन किस्मत को कुछ और ही मंजूर था। थर्ड अंपायर ने जांच के बाद पाया कि यह गेंद नो बॉल थी क्योंकि गेंदबाज का पैर क्रीज से बाहर था। यह फैसला मैच का टर्निंग पॉइंट साबित हुआ। टिम डेविड को न सिर्फ जीवनदान मिला बल्कि उन्हें फ्री हिट का फायदा भी मिला जिसे उन्होंने छक्के में बदल दिया। इसके बाद मैच पूरी तरह बदल गया। आत्मविश्वास से भर चुके टिम डेविड ने अगले ओवर में आक्रामक रुख अपनाया और गेंदबाजों पर हमला बोल दिया। खासकर 19वें ओवर में उन्होंने जिमी ओवरटन के खिलाफ जबरदस्त बल्लेबाजी करते हुए 30 रन बटोर लिए। यह ओवर ही सीएसके की उम्मीदों पर भारी पड़ गया और आरसीबी का स्कोर तेजी से 250 के पार पहुंच गया। अगर उस समय नो बॉल नहीं होती तो संभव था कि आरसीबी 220 से 230 रन के आसपास सिमट जाती। ऐसे में चेन्नई के बल्लेबाजों पर दबाव कम होता और मैच का नतीजा कुछ अलग हो सकता था। लेकिन क्रिकेट में छोटे-छोटे पल ही बड़े नतीजों को तय करते हैं और इस मैच में भी ऐसा ही देखने को मिला। मैच के बाद कप्तान ऋतुराज गायकवाड़ ने भी इस बात को स्वीकार किया कि वह नो बॉल टीम के लिए भारी पड़ी। उन्होंने माना कि टिम डेविड का विकेट लगभग मिल चुका था लेकिन उस एक गलती के बाद उन्होंने पूरे मैदान पर दबदबा बना लिया। आखिरकार यह मुकाबला इस बात का उदाहरण बन गया कि क्रिकेट में एक छोटी सी चूक किस तरह पूरे मैच की कहानी बदल सकती है। टिम डेविड ने मिले मौके को भुनाया और सीएसके को ऐसी हार दी जो लंबे समय तक याद रखी जाएगी।

ओटीटी पर इस हफ्ते एंटरटेनमेंट का महाब्लास्ट क्राइम रोमांस और कॉमेडी का तगड़ा डोज तैयार

नई दिल्ली । ओटीटी प्लेटफॉर्म पर हर हफ्ते नए कंटेंट की भरमार रहती है लेकिन इस बार का हफ्ता खास तौर पर हिंदी दर्शकों के लिए बेहद दिलचस्प साबित होने वाला है। क्राइम रोमांस थ्रिलर और कॉमेडी से भरपूर कई बड़ी फिल्में और वेब सीरीज इस हफ्ते रिलीज हो रही हैं जो दर्शकों को घर बैठे शानदार एंटरटेनमेंट देने के लिए तैयार हैं। अगर आप भी कुछ नया और मजेदार देखने की तलाश में हैं तो यह लिस्ट आपके लिए परफेक्ट गाइड बन सकती है। इस हफ्ते की सबसे चर्चित रिलीज ओ रोमियो है जिसमें शाहिद कपूर और तृप्ति डिमरी की फ्रेश जोड़ी देखने को मिलेगी। यह फिल्म रोमांस और अंडरवर्ल्ड के खतरनाक खेल को एक साथ जोड़ती है। कहानी प्यार और अपराध के बीच फंसी एक ऐसी दुनिया को दिखाती है जहां हर फैसला जिंदगी बदल सकता है। शाहिद कपूर का इंटेंस अंदाज और तृप्ति डिमरी की मौजूदगी फिल्म को खास बनाती है। यह फिल्म 10 अप्रैल से ओटीटी पर स्ट्रीम होगी और उन दर्शकों के लिए खास है जो इमोशनल ड्रामा के साथ थ्रिल पसंद करते हैं। इसके अलावा तू या मैं भी इस हफ्ते की एक अनोखी फिल्म है जो सर्वाइवल थ्रिलर और रोमांस का अलग मिश्रण पेश करती है। कहानी एक अमीर सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर और एक छोटे शहर के रैपर के इर्द गिर्द घूमती है जो एक वीडियो प्रोजेक्ट के दौरान करीब आते हैं। उनकी जिंदगी में अचानक मोड़ तब आता है जब वे गोवा में एक खतरनाक स्थिति में फंस जाते हैं जहां उन्हें अपनी जान बचाने के लिए संघर्ष करना पड़ता है। यह फिल्म रिश्तों और हालातों की परीक्षा को बेहद अलग अंदाज में दिखाती है। वेब सीरीज के शौकीनों के लिए द बॉयज का नया सीजन भी इस हफ्ते आ रहा है जो अपने डार्क और सटायर भरे अंदाज के लिए दुनियाभर में मशहूर है। इस बार कहानी और भी ज्यादा तीखी और टकराव से भरी होने वाली है जहां अच्छाई और बुराई की रेखा और धुंधली नजर आएगी। इसके अलावा साइंस फिक्शन पसंद करने वालों के लिए स्टार वार्स मॉल शैडो लॉर्ड एक शानदार विकल्प है जो एक लोकप्रिय किरदार की नई कहानी को सामने लाता है। कॉमेडी और फैमिली ड्रामा पसंद करने वालों के लिए द बिग मिस्टेक एक हल्की फुल्की लेकिन दिलचस्प कहानी लेकर आई है जिसमें गलतियों से पैदा हुए हालात दर्शकों को हंसाने के साथ सोचने पर भी मजबूर करते हैं। वहीं क्राइम ड्रामा पसंद करने वालों के लिए कप्तान एक दमदार वेब सीरीज है जो एक सख्त पुलिस अधिकारी की कहानी को दिखाती है जो अपराध के खिलाफ अपनी जंग में किसी भी हद तक जाने को तैयार है। इसके साथ ही मामला लीगल है का नया सीजन भी दर्शकों को कोर्टरूम ड्रामा के एक नए अंदाज से रूबरू कराएगा जहां एक वकील के जज बनने के बाद की चुनौतियां और दिलचस्प स्थितियां कहानी को और ज्यादा मजेदार बनाती हैं। कुल मिलाकर यह हफ्ता ओटीटी दर्शकों के लिए हर तरह का कंटेंट लेकर आया है चाहे आप रोमांस के मूड में हों या थ्रिलर के या फिर हल्की फुल्की कॉमेडी देखना चाहते हों आपको हर जॉनर में कुछ न कुछ नया और दिलचस्प जरूर मिलेगा।