कॉर्पोरेट अपडेट: एयर इंडिया के सीईओ का इस्तीफा मंजूर, कंपनी ने दी आधिकारिक जानकारी

नई दिल्ली भारत के प्रमुख विमान एयर इंडिया में बड़ा नेतृत्व परिवर्तन सामने आया है। कंपनी ने पुष्टि की है कि उसके मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) और प्रबंध निदेशक कैंपबेल विल्सन ने अपना पद छोड़ दिया है। हालाँकि, वे तब तक अपनी जिम्मेदारियाँ मलेशिया गए, जब तक नए सीईओ की पेशकश नहीं हुई। इस कदम को लेकर एयर इंडिया के अगले विकास चरण की तैयारी आधिकारिक तौर पर देखी जा रही है। पहले ही कर दी थी पद छोड़ने की घोषणाकंपनी के मुताबिक, कैंपबेल विल्सन ने साल 2024 में ही एन. चंद्रशेखरन को 2026 में पद छोड़े की अपनी योजना के बारे में बताया था। इसके बाद वे संगठन को मजबूत बनाने और नेतृत्व टीम को स्थिर बनाने पर लगातार काम कर रहे थे, ताकि बदलाव की प्रक्रिया सहज और प्रभावशाली हो सके। चार साल में बदली एयर इंडिया की तस्वीरअपने फैसले को याद करते हुए कैंपबेल विल्सन ने कहा कि बोली के बाद पिछले चार वर्षों में एयर इंडिया में बड़े पैमाने पर बदलाव देखने को मिले हैं। इस दौरान कंपनी ने चार एयरलाइंस का अधिग्रहण और विलय किया, साथ ही सार्वजनिक क्षेत्र से निजी क्षेत्र की कार्यशैली में भी महत्वपूर्ण बदलाव किये गये। ज़ोर से आधुनिक सिस्टम और बेहतर सेवाएँविल्सन के नेतृत्व में एयर इंडिया ने अपने ऑपरेशन सिस्टम का आधुनिकीकरण किया और नई शुरुआत की। यूनिवर्स के अनुभव को बेहतर बनाने के लिए ग्राउंड सर्विस से लेकर इन-फ्लाइट होटल तक कई सुधार किए गए। इसके साथ ही, कंपनी ने अपने बेड़े में 100 नए विमान शामिल किए और पुराने मॉडलों के उद्यमों को भी शामिल किया। बड़ा निवेश पर दस्तावेज़ और प्रशिक्षणएयर इंडिया ने अपने विस्तार के तहत कई बड़े आर्किटेक्चर प्रोजेक्ट भी शुरू किए हैं।इनमें दक्षिण एशिया की सबसे बड़ी ट्रेनिंग अकादमी, फ़्लाइट सिम्युलेटर किड्स, फ़्लाइंग स्कूल और मेंटेनेंस, रिपेयर और ओवरहाल (एमआरओ) बेस शामिल हैं।ये सभी फर्स्ट फ्यूचर में एयरलाइंस की जगहें और विस्तार को नई दिशा देने वाले माने जा रहे हैं। आस्था ने की नेतृत्व की अभिनेत्रीएयर इंडिया के सानिध्य एन. चन्द्रशेखरन ने विल्सन के योगदान की पुष्टि की। उन्होंने कहा कि कोविड के बाद क्रिस्टोफर चेन की तस्वीरें सामने आईं, डॉक्यूमेंट्री में देरी हुई और ग्लोबल मिरर के सामने टीम ने शानदार काम किया। नए सीईओ की तलाश शुरूकंपनी के बोर्ड ने नए सीईओ के लिए एक विशेष समिति का गठन किया है। यह समिति आने वाले समय में उपयुक्त अभ्यर्थी का चयन करेगी। एयर इंडिया के अगले विकास चरण के लिए इस बदलाव पर बेहद अहम विचार किया जा रहा है, खासकर तब जब 2027 से बड़े पैमाने पर नए प्रोजेक्ट के दस्तावेज शुरू होने वाले हैं। ‘नया एयर इंडिया’ का भविष्यकैंपबेल विल्सन ने कहा कि कंपनी अब एक मजबूत प्रतिष्ठान है और आगे की यात्रा के लिए तैयार है। उनके अनुसार, यह सही समय है जब कंपनी के नए नेतृत्व को छोड़ दिया जाए, ताकि विकास की गति को और तेज किया जा सके। एयर इंडिया के सीईओ कैंपबेल विल्सन ने पद छोड़ दिया है, लेकिन नए सीईओ की नियुक्ति तक पद पर बने रहे-चार साल में उन्होंने विमान को मजबूत आधार देकर अगले विकास चरण के लिए तैयार किया है।
इकोनॉमी अपडेट: भारत की GDP ग्रोथ 6.2% रहने का अनुमान, Morgan Stanley की रिपोर्ट

नई दिल्ली। दुनियाभर में बढ़ती आर्थिक अनिश्चितता और भू-राजनीतिक तनाव के बावजूद भारतीय अर्थव्यवस्था मजबूती से आगे बढ़ रही है। Morgan Stanley की ताजा रिपोर्ट के मुताबिक, वित्त वर्ष 2027 में भारत की जीडीपी ग्रोथ 6.2 प्रतिशत रहने का अनुमान है। हालांकि, यह अनुमान पहले के 6.5 प्रतिशत से थोड़ा कम है, लेकिन इसके बावजूद भारत तेजी से बढ़ती प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं में शामिल बना हुआ है। कच्चे तेल की कीमतें बनीं बड़ी चुनौतीरिपोर्ट के अनुसार, वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए सबसे बड़ी चुनौती बनकर सामने आई हैं। अनुमान है कि तेल की औसत कीमत करीब 95 डॉलर प्रति बैरल रह सकती है, जिससे ऊर्जा आयात पर खर्च बढ़ेगा और इसका सीधा असर उद्योगों की लागत पर पड़ेगा।इसके चलते उत्पादन महंगा होगा और महंगाई पर भी दबाव बढ़ सकता है। अल्पकाल में ग्रोथ पर दिख सकता है असरMorgan Stanley की रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि निकट भविष्य में आर्थिक विकास की रफ्तार थोड़ी धीमी पड़ सकती है। जून 2026 तिमाही में जीडीपी ग्रोथ घटकर 5.9 प्रतिशत तक पहुंचने की आशंका जताई गई है। इसकी वजह औद्योगिक गतिविधियों में सुस्ती, वित्तीय स्थितियों में सख्ती और कंपनियों के मुनाफे में कमी को माना गया है। महंगाई और रुपए पर बढ़ेगा दबावऊर्जा कीमतों में उछाल का असर सिर्फ उत्पादन तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि यह महंगाई और मुद्रा पर भी असर डालेगा। रिपोर्ट के मुताबिक, वित्त वर्ष 2027 में खुदरा महंगाई दर औसतन 5.1 प्रतिशत रह सकती है। इसके अलावा, बढ़ते आयात बिल और कमजोर पूंजी प्रवाह के चलते भारतीय रुपए पर भी दबाव बढ़ने की संभावना है। चालू खाता घाटा बढ़ने की आशंकाबढ़ती तेल कीमतों का असर भारत के चालू खाता घाटे (CAD) पर भी पड़ सकता है।रिपोर्ट में अनुमान जताया गया है कि यह घाटा जीडीपी के 1 प्रतिशत से बढ़कर 2.5 प्रतिशत तक पहुंच सकता है। यह स्थिति देश के बाहरी आर्थिक संतुलन को प्रभावित कर सकती है और भुगतान संतुलन पर भी दबाव डाल सकती है। सरकार के उपायों से मिलेगी राहतहालांकि, रिपोर्ट में यह भी उम्मीद जताई गई है कि सरकारी नीतियों और आपूर्ति में सुधार से हालात धीरे-धीरे बेहतर हो सकते हैं। सरकार शुरुआती चरण में सब्सिडी और लागत नियंत्रण जैसे उपायों का सहारा ले सकती है, जिससे अर्थव्यवस्था को स्थिर बनाए रखने में मदद मिलेगी। लंबी अवधि में भारत की ग्रोथ बरकरार वैश्विक चुनौतियों के बावजूद भारत की आर्थिक स्थिति मजबूत बनी हुई है। विशेषज्ञों का मानना है कि सही नीतियों और स्थिर मांग के चलते देश की विकास दर मध्यम अवधि में फिर से गति पकड़ सकती है। वैश्विक अनिश्चितताओं और महंगे तेल के दबाव के बावजूद भारत की अर्थव्यवस्था मजबूत बनी हुई है, जहां 6.2% जीडीपी ग्रोथ का अनुमान है, हालांकि अल्पकाल में महंगाई और रुपए पर दबाव बढ़ सकता है।
समर सुपरफूड खसखस: शरीर को ठंडक के साथ देता है एनर्जी और जरूरी न्यूट्रिएंट्स

नई दिल्ली। गर्मियों की तेज धूप और लू से राहत पाने के लिए लोग कई उपाय अपनाते हैं, लेकिन पारंपरिक देसी नुस्खों की बात ही अलग होती है। ऐसा ही एक असरदार उपाय है खसखस, जो न सिर्फ शरीर को ठंडक देता है, बल्कि ताजगी और ऊर्जा भी प्रदान करता है। दादी-नानी के जमाने से खसखस का शरबत और दूध गर्मियों में खासतौर पर इस्तेमाल किया जाता रहा है, जिसे आयुर्वेद में बेहद गुणकारी माना गया है। आयुर्वेद में खास स्थान, पित्त दोष को करता है शांतखसखस को आयुर्वेद में पित्त दोष को शांत करने वाली जड़ी-बूटी माना जाता है। इसकी ठंडी तासीर शरीर की अतिरिक्त गर्मी को कम करती है और अंदर से राहत पहुंचाती है। गर्मियों में पेट की जलन, पैरों में जलन और त्वचा से जुड़ी समस्याओं में खसखस का सेवन काफी फायदेमंद साबित होता है। पोषक तत्वों का भंडारखसखस छोटे दानों में बड़ा पोषण छुपाए हुए है। इसमें प्रोटीन, फाइबर, कैल्शियम, मैग्नीशियम, जिंक और आयरन जैसे जरूरी पोषक तत्व भरपूर मात्रा में पाए जाते हैं। ये तत्व शरीर को मजबूत बनाने के साथ-साथ इम्युनिटी बढ़ाने और मौसमी बीमारियों से बचाव में भी मदद करते हैं। ठंडक के साथ बेहतर पाचनगर्मियों में डिहाइड्रेशन और एसिडिटी आम समस्या बन जाती है। ऐसे में खसखस का सेवन शरीर के तापमान को संतुलित बनाए रखता है और पेट के एसिड को नियंत्रित करता है। फाइबर से भरपूर होने के कारण यह पाचन तंत्र को बेहतर बनाता है और कब्ज की समस्या से भी राहत दिलाता है। अच्छी नींद और मानसिक शांतिखसखस का सेवन मानसिक शांति के लिए भी फायदेमंद माना जाता है। यह शरीर को रिलैक्स करता है और अच्छी नींद लाने में मदद करता है। आज के तनाव भरे जीवन में यह एक प्राकृतिक उपाय के रूप में बेहद उपयोगी साबित हो सकता है। त्वचा और जोड़ों के लिए भी लाभकारीखसखस का तेल जोड़ों के दर्द और सूजन को कम करने में मदद करता है। इसके एंटी-इंफ्लेमेटरी गुण शरीर को अंदर और बाहर दोनों तरह से फायदा पहुंचाते हैं। इसके अलावा, खसखस को दूध के साथ पीसकर लगाने से त्वचा की जलन, मुंहासे और सनबर्न में भी राहत मिलती है। सीमित मात्रा में करें सेवनहालांकि खसखस बेहद फायदेमंद है, लेकिन इसका सेवन सीमित मात्रा में ही करना चाहिए। अगर किसी को एलर्जी या अन्य स्वास्थ्य समस्या हो, तो सेवन से पहले डॉक्टर की सलाह जरूर लें। देसी नुस्खा, बड़ा फायदागर्मियों में रोजाना खसखस का शरबत या दूध लेने से शरीर ठंडा, स्वस्थ और ऊर्जावान बना रहता है। यह एक आसान और प्राकृतिक तरीका है, जिससे आप खुद को गर्मी के असर से बचा सकते हैं। खसखस गर्मियों में शरीर को ठंडक देने, पाचन सुधारने, नींद बेहतर करने और त्वचा व जोड़ों की समस्याओं से राहत दिलाने वाला एक प्राकृतिक और पोषक तत्वों से भरपूर देसी उपाय है।
GWALIOR MIST TOWER : 30 करोड़ फंड से ग्वालियर में मिस्ट टावर, धूल और धुएं पर होगा कंट्रोल

HIGHLIGHTS: ग्वालियर में मिस्ट टावर लगाने की योजना तैयार 30 करोड़ रुपए से अधिक एनकैप फंड से होंगे निर्माण कार्य ग्रीन पार्क और एयरपोर्ट क्षेत्र में भी होंगे विकास कार्य मिस्ट टावर हवा में पानी की बूंदें छोड़कर धूल कम करेंगे प्रमुख ट्रैफिक चौराहों और धूल प्रभावित इलाकों में लगाए जाएंगे GWALIOR MIST TOWER : ग्वालियर। नगर निगम ने शहर में धूल और वायु प्रदूषण कम करने के लिए मिस्ट टावर लगाने की योजना बनाई है। बता दें कि निगमायुक्त संघ प्रिय ने सोमवार को पीआईयू और एनकैप अधिकारियों की बैठक कर प्रस्ताव तैयार करने के निर्देश दिए। योजना जबलपुर मॉडल पर आधारित होगी और नोडल अधिकारी पवन सिंघल को इसका प्रस्ताव तैयार करने की जिम्मेदारी दी गई है। इंदौर-पीथमपुर उद्योगों पर युद्ध का असर, घटा उत्पादन, सरकार ने मांगी रिपोर्ट, राहत पैकेज की मांग तेज एनकैप फंड से निर्माण एनकैप फंड में 30 करोड़ रुपए से अधिक राशि उपलब्ध है। इस फंड से अब तक 5.5 करोड़ रुपए के कार्यों के टेंडर जारी किए जा चुके हैं। ग्रीन पार्क, एयरपोर्ट और अन्य धूल प्रभावित इलाकों में मिस्ट टावर के साथ लैंडस्केपिंग और विकास कार्य भी किए जाएंगे। मध्य पूर्व तनाव और ट्रंप की चेतावनी के चलते कच्चे तेल की कीमतों में 3 प्रतिशत से ज्यादा की उछाल मिस्ट टावर का कार्य और प्राथमिकता मिस्ट टावर में ऊंचाई पर लगे नोजल से पानी की महीन बूंदें हवा में छोड़ी जाएंगी, जो धूल के कणों को नीचे गिराकर वायु प्रदूषण कम करेंगी। प्राथमिकता के आधार पर ये टावर प्रमुख ट्रैफिक चौराहों, निर्माण स्थलों और अधिक धूल वाले क्षेत्रों में लगाए जाएंगे
हेल्थ टिप्स: सुबह उठते ही शरीर में जकड़न दूर करने के लिए अपनाएं ये आयुर्वेदिक उपाय

नई दिल्ली।आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में ज्यादातर लोग घंटों तक एक ही जगह बैठकर काम करते हैं। इसका सीधा असर शरीर पर पड़ता है। मांसपेशियां कमजोर होने लगती हैं, शरीर में अकड़न बढ़ती है और धीरे-धीरे जोड़ों में दर्द की समस्या आम हो जाती है। कई लोगों को सुबह उठते ही शरीर भारी लगना, जकड़न महसूस होना और जोड़ों में दर्द जैसी परेशानियों का सामना करना पड़ता है। ऐसे में आयुर्वेद में इसका प्राकृतिक समाधान बताया गया है। आमवातारि वटी: जोड़ों के दर्द में कारगर उपायआयुर्वेद के अनुसार जोड़ों के दर्द, सूजन और अकड़न का मुख्य कारण “वात” का बढ़ना और पाचन तंत्र का कमजोर होना है। इसी समस्या से राहत पाने के लिए आमवातारि वटी के सेवन की सलाह दी जाती है। यह आयुर्वेदिक औषधि शरीर में जमा “आम” (टॉक्सिन) को कम करने में मदद करती है और जोड़ों के दर्द से राहत दिलाती है। हालांकि, इसका सेवन हमेशा विशेषज्ञ या डॉक्टर की सलाह के अनुसार ही करना चाहिए। ‘आम’ बढ़ने से बढ़ती हैं बीमारियांजब पाचन तंत्र ठीक से काम नहीं करता, तो शरीर में “आम” यानी विषैले तत्व जमा होने लगते हैं।यह आम आंतों में संक्रमण पैदा करता है और धीरे-धीरे जोड़ों में सूजन, दर्द और रूमेटॉइड आर्थराइटिस जैसी समस्याओं को जन्म देता है। इस स्थिति में व्यक्ति के लिए चलना-फिरना भी मुश्किल हो जाता है और रोजमर्रा के काम प्रभावित होने लगते हैं। आयुर्वेदिक जड़ी-बूटियों का शक्तिशाली मिश्रणआमवातारि वटी कई प्रभावी जड़ी-बूटियों से मिलकर बनी होती है। इसमें शुद्ध गुग्गुलु, चित्रक मूल, त्रिफला (आंवला, हरड़, बहेड़ा), शुद्ध पारद और शुद्ध गंधक जैसे तत्व शामिल होते हैं। ये सभी मिलकर न सिर्फ जोड़ों के दर्द को कम करते हैं, बल्कि पाचन तंत्र को भी मजबूत बनाते हैं और शरीर से विषैले तत्व बाहर निकालने में मदद करते हैं। जीवनशैली में बदलाव भी जरूरीकेवल दवा लेने से ही पूरी राहत नहीं मिलती, बल्कि जीवनशैली में बदलाव भी बेहद जरूरी है। सुबह की शुरुआत गुनगुने पानी से करें। इसके साथ मेथी के दाने या लहसुन का सेवन करना फायदेमंद हो सकता है। लहसुन में मौजूद गुण जोड़ों के दर्द को कम करने में मदद करते हैं। नियमित व्यायाम से मिलेगा फायदालंबे समय तक एक ही जगह बैठने से मांसपेशियों में खिंचाव और सूजन बढ़ सकती है। इसलिए बीच-बीच में उठकर हल्की स्ट्रेचिंग या वॉक करना जरूरी है। नियमित व्यायाम न सिर्फ जोड़ों को मजबूत बनाता है, बल्कि शरीर को लचीला भी बनाए रखता है। सावधानी बरतना भी उतना ही जरूरीअगर जोड़ों का दर्द लगातार बना रहता है, तो इसे नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। समय रहते सही इलाज और दिनचर्या में बदलाव से इस समस्या को काफी हद तक नियंत्रित किया जा सकता है। लंबे समय तक बैठने से जोड़ों में दर्द और अकड़न बढ़ रही है। आयुर्वेदिक औषधि आमवातारि वटी और सही जीवनशैली अपनाकर इस समस्या से राहत पाई जा सकती है।
गर्मियों में त्वचा का खास ख्याल, आयुर्वेदिक जड़ी-बूटियों से पाएं नैचुरल ग्लो
नई दिल्ली। गर्मियों का मौसम आते ही त्वचा से जुड़ी समस्याएं बढ़ने लगती हैं। तेज धूप, पसीना और धूल-मिट्टी के कारण चेहरा बेजान नजर आने लगता है। ऐसे में त्वचा की देखभाल बेहद जरूरी हो जाती है। आयुर्वेद में कई ऐसी जड़ी-बूटियां बताई गई हैं, जिनका इस्तेमाल करके आप बिना किसी केमिकल के अपने चेहरे को निखार सकते हैं और दाग-धब्बों से छुटकारा पा सकते हैं। नीम: पिंपल्स और एक्ने का दुश्मनआयुर्वेद में नीम को बेहद गुणकारी माना जाता है। इसमें एंटी-बैक्टीरियल, एंटी-फंगल और एंटी-इंफ्लेमेटरी गुण पाए जाते हैं। गर्मियों में अगर पिंपल्स या एक्ने की समस्या हो रही है, तो नीम के पत्तों को पीसकर मुल्तानी मिट्टी के साथ मिलाकर फेस पैक के रूप में लगाया जा सकता है। इससे त्वचा साफ होती है और निखार बढ़ता है। मंजिष्ठा: स्किन टोन को बनाए संतुलितमंजिष्ठा को आयुर्वेद में रक्त शुद्ध करने वाली जड़ी-बूटी माना जाता है। यह त्वचा की रंगत को सुधारने में मदद करती है। मंजिष्ठा का सेवन करने के साथ-साथ इसका फेस पैक बनाकर भी इस्तेमाल किया जा सकता है, जिससे स्किन टोन में निखार आता है। हल्दी: दाग-धब्बों से छुटकाराहर घर में मौजूद हल्दी त्वचा के लिए किसी वरदान से कम नहीं है। इसमें एंटी-बैक्टीरियल गुण होते हैं, जो दाग-धब्बों को कम करने में मदद करते हैं। मुल्तानी मिट्टी और चंदन के साथ चुटकी भर हल्दी मिलाकर फेस पैक लगाने से त्वचा को ठंडक मिलती है और ग्लो बढ़ता है। चंदन: ठंडक और पोषण का खजानागर्मियों में चंदन का इस्तेमाल बेहद फायदेमंद होता है। इसमें शीतलता के गुण होते हैं, जो त्वचा को ठंडक देने के साथ-साथ उसे पोषण भी देते हैं। यह धूप के कारण होने वाले नुकसान को कम करता है और त्वचा को तरोताजा बनाए रखता है। मुलेठी: टैनिंग और डार्क स्पॉट से राहतमुलेठी का इस्तेमाल सिर्फ खांसी-जुकाम के लिए ही नहीं, बल्कि त्वचा के लिए भी किया जाता है।इसके लेप से डार्क स्पॉट और टैनिंग कम होती है, जिससे चेहरा साफ और चमकदार नजर आता है। नियमित इस्तेमाल से मिलेगा बेहतर रिजल्टइन सभी जड़ी-बूटियों का नियमित और सही तरीके से इस्तेमाल करने पर त्वचा से जुड़ी समस्याओं में काफी हद तक राहत मिल सकती है। हालांकि, किसी भी नई चीज को इस्तेमाल करने से पहले स्किन टेस्ट जरूर करें, ताकि किसी तरह की एलर्जी से बचा जा सके। गर्मियों में नीम, मंजिष्ठा, हल्दी, चंदन और मुलेठी जैसी आयुर्वेदिक जड़ी-बूटियां त्वचा को निखारने, दाग-धब्बे कम करने और नैचुरल ग्लो पाने में बेहद असरदार साबित होती हैं।
विश्व स्वास्थ्य दिवस 2026: स्वस्थ जीवन के लिए जागरूकता और इस बार की खास थीम

नई दिल्ली। हर साल 7 अप्रैल को दुनिया भर में विश्व स्वास्थ्य दिवस 2026 मनाया जाता है। यह दिन न सिर्फ स्वास्थ्य के महत्व को समझाने का अवसर है, बल्कि लोगों को एकजुट होकर बेहतर भविष्य बनाने के लिए प्रेरित भी करता है। साल 2026 में इस दिवस की थीम है -“स्वास्थ्य के लिए एकजुट, विज्ञान के साथ खड़े रहें”, जो आज के समय की सबसे बड़ी जरूरत को दर्शाती है। 1948 से शुरू हुई जागरूकता की परंपराविश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) की स्थापना 7 अप्रैल 1948 को हुई थी, और इसी के उपलक्ष्य में हर साल यह दिन मनाया जाता है। इस दिन दुनिया भर में स्वास्थ्य से जुड़े महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा होती है और लोगों को जागरूक किया जाता है कि वे अपने स्वास्थ्य के प्रति सजग रहें। इस साल की थीम: विज्ञान और सहयोग पर जोरसाल 2026 की थीम “स्वास्थ्य के लिए एकजुट, विज्ञान के साथ खड़े रहें” के जरिए विश्व स्वास्थ्य संगठन ने स्पष्ट संदेश दिया है कि बेहतर स्वास्थ्य के लिए विज्ञान और सहयोग दोनों जरूरी हैं। यह थीम “वन हेल्थ” सिद्धांत पर आधारित है, जिसमें इंसान, जानवर और पर्यावरण के स्वास्थ्य को एक-दूसरे से जुड़ा माना गया है। सालभर चलेगा वैश्विक अभियानइस बार यह अभियान सिर्फ एक दिन तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि पूरे साल चलेगा। इसका उद्देश्य वैज्ञानिक खोजों को वास्तविक जीवन में लागू करना और उन्हें आम लोगों तक पहुंचाना है। अभियान के तहत लोगों, सरकारों, वैज्ञानिकों और स्वास्थ्यकर्मियों को साथ मिलकर काम करने के लिए प्रेरित किया जा रहा है। दो बड़े अंतरराष्ट्रीय कार्यक्रमों से शुरुआतइस वैश्विक पहल की शुरुआत 7 अप्रैल को दो प्रमुख आयोजनों के साथ होगी। पहला कार्यक्रम फ्रांस की जी7 अध्यक्षता में आयोजित “वन हेल्थ शिखर सम्मेलन” है। दूसरा एक बड़ा वैश्विक मंच है, जिसमें विश्व स्वास्थ्य संगठन के सहयोगी केंद्रों से जुड़े 80 से अधिक देशों के लगभग 800 वैज्ञानिक संस्थान भाग ले रहे हैं। ये दोनों आयोजन मिलकर दुनिया का एक विशाल वैज्ञानिक नेटवर्क तैयार करेंगे। नई चुनौतियों से निपटने में विज्ञान की भूमिकाआज के दौर में महामारी, जलवायु परिवर्तन और एंटीमाइक्रोबियल रेसिस्टेंस जैसी चुनौतियां तेजी से बढ़ रही हैं। विश्व स्वास्थ्य संगठन का मानना है कि इन समस्याओं का समाधान केवल विज्ञान और शोध के जरिए ही संभव है। इसलिए लोगों से अपील की गई है कि वे विज्ञान पर भरोसा रखें और उसका समर्थन करें। सोशल मीडिया पर भी जुड़ने का आह्वानइस अभियान के तहत लोगों को अपनी कहानियां साझा करने के लिए प्रेरित किया जा रहा है कि कैसे विज्ञान ने उनके जीवन को बेहतर बनाया। सोशल मीडिया पर #StandWithScience और #WorldHealthDay जैसे हैशटैग के जरिए वैश्विक स्तर पर चर्चा को बढ़ावा दिया जा रहा है। एकजुटता से ही बनेगा स्वस्थ भविष्यइस साल का संदेश साफ है-स्वास्थ्य की रक्षा के लिए हमें एकजुट होना होगा और विज्ञान के साथ खड़ा रहना होगा। अगर दुनिया मिलकर प्रयास करे, तो एक स्वस्थ, सुरक्षित और समृद्ध भविष्य का निर्माण संभव है।
इंदौर-पीथमपुर उद्योगों पर युद्ध का असर, घटा उत्पादन, सरकार ने मांगी रिपोर्ट, राहत पैकेज की मांग तेज

इंदौर। अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच जारी तनाव का असर अब मध्यप्रदेश के औद्योगिक क्षेत्रों पर भी साफ दिखने लगा है। इंदौर-पीथमपुर इंडस्ट्रियल बेल्ट में उत्पादन घटने और रोजगार पर असर पड़ने के मामलों को सरकार ने गंभीरता से लिया है। इसी के तहत राज्य सरकार ने उद्योग संगठनों से विस्तृत रिपोर्ट मांगी जिसे अब प्रस्तुत कर दिया गया है। अधिकारियों ने उद्योग प्रतिनिधियों के साथ बैठक कर एमएसएमई और बड़ी इकाइयों की स्थिति पर लगातार निगरानी रखने की बात कही है। एमएसएमई पर सबसे ज्यादा मार पीथमपुर औद्योगिक संगठन ने अपनी रिपोर्ट में हालात को आर्थिक आपातकाल जैसे बताया है। कई छोटे और मध्यम उद्योग बंद होने की कगार पर हैं। भुगतान चक्र बिगड़ने से पूंजी संकट गहराता जा रहा है जिससे उद्योगों की कार्यशील पूंजी (वर्किंग कैपिटल) पर भारी दबाव पड़ रहा है। उद्योगों को कच्चे माल गैस और अन्य संसाधनों के लिए अग्रिम भुगतान करना पड़ रहा है जबकि तैयार माल का भुगतान देरी से मिल रहा है। इससे आर्थिक संतुलन बिगड़ रहा है। कच्चे माल की कमी लागत में बढ़ोतरी रिपोर्ट के अनुसार उद्योग करीब 70% कच्चे माल के लिए आयात पर निर्भर हैं। युद्ध के कारण सप्लाई प्रभावित हुई है जिससे कीमतें बढ़ गई हैं और उत्पादन लागत में इजाफा हुआ है। पीएनजी और एलपीजी की सप्लाई भी प्रभावित हुई है। एलपीजी की कमी बनी हुई है जबकि पीएनजी के दाम बढ़ गए हैं। पहले दी जा रही रियायतें भी वापस ले ली गई हैं जिससे उद्योगों की परेशानी और बढ़ गई है। निर्यात पर भी पड़ा असर पीथमपुर से होने वाला निर्यात भी प्रभावित हुआ है। बड़ी मात्रा में तैयार माल बंदरगाहों पर फंसा हुआ है जिससे उद्योगों की पूंजी अटक गई है और वित्तीय दबाव बढ़ गया है। रिपोर्ट में बताया गया है कि फ्रेट लागत बढ़कर करीब 2400 डॉलर तक पहुंच गई है जो पहले की तुलना में लगभग दोगुनी है। इसके अलावा युद्ध सरचार्ज भी अतिरिक्त रूप से देना पड़ रहा है। सरकार से राहत की मांग तेज विभिन्न औद्योगिक संगठनों फार्मा प्लास्टिक ऑटो एंसिलरी और पैकेजिंग सेक्टर ने सरकार से तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है। संगठनों ने एलपीजी और गैस की उपलब्धता सुनिश्चित करने बढ़ती कीमतों पर नियंत्रण और वैट घटाने की मांग उठाई है। वर्तमान में वैट 14% है जबकि अन्य राज्यों में यह करीब 5% है। इसके अलावा बिजली दरों में बढ़ोतरी रोकने और पावर टैरिफ पर सब्सिडी देने की भी मांग की गई है ताकि उत्पादन लागत कम हो सके। रोजगार बचाने पर जोर उद्योगों ने सरकार से वर्किंग कैपिटल के लिए ब्याज सहायता पूंजी समर्थन और रोजगार बनाए रखने के लिए इम्प्लॉयमेंट सब्सिडी देने की भी मांग की है जिससे उद्योग और श्रमिक दोनों को राहत मिल सके।
KKR की मुश्किलें बढ़ीं! एक नहीं कई समस्याएं, प्लेऑफ की राह हो सकती है कठिन

नई दिल्ली।तीन बार की चैंपियन कोलकाता नाइट राइडर्स के लिए आईपीएल 2026 की शुरुआत बेहद निराशाजनक रही है। तीन मुकाबलों के बाद भी टीम जीत का खाता नहीं खोल पाई है। ऐसे में टीम के सामने एक नहीं बल्कि कई बड़ी समस्याएं खड़ी हो गई हैं, जिनका समाधान जल्द नहीं निकला तो पूरा सीजन हाथ से निकल सकता है। ओपनिंग जोड़ी बनी चिंताकेकेआर की सलामी जोड़ी इस सीजन उम्मीदों पर खरी नहीं उतर रही। फिन एलन तेज शुरुआत तो दिला रहे हैं, लेकिन बड़ी पारी खेलने में नाकाम रहे हैं। वहीं कप्तान अजिंक्य रहाणे की धीमी बल्लेबाजी टीम के लिए परेशानी बनती जा रही है। पावरप्ले में रन गति बनाए रखना टीम के लिए चुनौती बन चुका है। महंगे खिलाड़ी कैमरून ग्रीन फ्लॉपकेकेआर ने ऑक्शन में कैमरून ग्रीन पर 25.20 करोड़ रुपये खर्च किए थे, लेकिन उनका प्रदर्शन अब तक निराशाजनक रहा है। ग्रीन न तो गेंदबाजी कर पा रहे हैं और न ही बल्ले से योगदान दे पा रहे हैं। तीन मैचों में उनके बल्ले से सिर्फ 24 रन निकले हैं, जिससे टीम का संतुलन बिगड़ गया है। मिडिल ऑर्डर में अनुभव की कमीकेकेआर का मध्यक्रम भी कमजोर कड़ी साबित हो रहा है। अंगकृष रघुवंशी ने जरूर कुछ अच्छी पारियां खेली हैं, लेकिन उन्हें बाकी बल्लेबाजों का साथ नहीं मिला। फिनिशर की भूमिका निभाने वाले रिंकू सिंह ने 68 रन बनाए हैं, लेकिन उनका आक्रामक अंदाज अभी तक नहीं दिखा। इसके अलावा रमनदीप सिंह, अनुकूल रॉय और सुनील नरेन पर लगातार निर्भर रहना टीम के लिए जोखिम भरा साबित हो रहा है। गेंदबाजी बनी सबसे बड़ी कमजोरीकेकेआर की तेज गेंदबाजी शुरुआत से ही सवालों के घेरे में रही है और यह चिंता अब हकीकत बन चुकी है। वैभव अरोड़ा और ब्लेसिंग मुजरबानी काफी महंगे साबित हुए हैं।वहीं कार्तिक त्यागी भी उम्मीदों पर खरे नहीं उतरे। स्पिन विभाग में भी वरुण चक्रवर्ती और सुनील नरेन की खराब फॉर्म ने टीम की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। आगे की राह मुश्किलपिछले कुछ सीजन में केकेआर की सफलता काफी हद तक वरुण-नरेन की जोड़ी पर निर्भर रही है। ऐसे में इनका खराब प्रदर्शन टीम के लिए बड़ा झटका है। अगर टीम ने जल्द ही अपनी कमजोरियों को दूर नहीं किया, तो प्लेऑफ की दौड़ में बने रहना मुश्किल हो सकता है। आईपीएल 2026 में केकेआर कई समस्याओं से जूझ रही है ओपनिंग, मिडिल ऑर्डर, महंगे खिलाड़ी का फ्लॉप होना और कमजोर गेंदबाजी। अगर जल्द सुधार नहीं हुआ, तो टीम का पूरा गणित बिगड़ सकता है।
Gwalior Police Shootout : ग्वालियर में बदमाशों और पुलिस के बीच गोलियों की ताबड़तोड़ फायरिंग, दो गिरफ्तार

HIGHLIGHTS: ग्वालियर में खेत में छुपे बदमाशों ने पुलिस पर फायरिंग की पुलिस की जवाबी कार्रवाई में दोनों ओर से 9 राउंड गोलियां चलीं दो बदमाशों को मौके से गिरफ्तार किया गया आरोपी पहले शराब दुकान के मैनेजर और उसके रिश्तेदार पर हमले कर चुके थे घायल हुए मोहर सिंह को अस्पताल में भर्ती कराया गया Gwalior Police Shootout : ग्वालियर। पनिहार नयागांव इलाके में पुलिस और बदमाशों के बीच फायरिंग हुई। बता दें कि खेत में छुपे बदमाशों ने पुलिस को देखते ही पिस्टल और अधिया से गोलियां चला दीं। जिसके बाद पुलिस ने भी जवाबी कार्रवाई की और दोनों ओर से कुल 9 राउंड गोलियां चलीं। क्या डिजिटल राजनैतिक प्रचार की कोई नैतिक सीमा है? पुलिस की जवाबी कार्रवाई और गिरफ्तारी पुलिस की जवाबी कार्रवाई से बदमाशों में भगदड़ मच गई। मौके से भागने की कोशिश कर रहे दो बदमाशों को पुलिस ने पकड़ लिया। पकड़े गए हमलावरों ने पिछले दिन ढाई घंटे में दो हमले किए थे। IPL 2026 अपडेट: पथिराना-हसरंगा की फिटनेस पर सवाल, SLC को रिपोर्ट नहीं सौंपी शराब दुकान के मैनेजर पर हमला एक दिन पहले पनिहार के नयागांव स्थित शराब दुकान के मैनेजर कुलदीप सिंह गुर्जर पर हमला और मारपीट की गई थी। पुलिस ने अमरीश गुर्जर, गजेंद्र गुर्जर, सतेंद्र गुर्जर, रामनिवास गुर्जर, भूपेंद्र गुर्जर, गिर्राज गुर्जर और शैलेंद्र गुर्जर के खिलाफ केस दर्ज किया था। IPL 2026 पॉइंट्स टेबल अपडेट: पंजाब किंग्स नंबर-1, केकेआर ने भी खोला जीत का खाता रिश्तेदार पर भी हमला मारपीट के अगले दिन, शाम को झांसी रोड थाना क्षेत्र के याराना ढाबे पर अमरीश और उसके साथी शराब दुकान के मैनेजर के रिश्तेदार मोहर सिंह गुर्जर को रोककर गाली-गलौज के साथ उनकी कार पर गोलीबारी कर दी। इस घटना में मोहर सिंह के हाथ में गोली लगी और उन्हें मुरार अस्पताल में भर्ती कराया गया। गैस संकट पर फूटा छात्रों का गुस्सा नर्मदापुरम में कलेक्ट्रेट के बाहर चूल्हा जलाकर किया विरोध पुलिस की जांच जारी पनिहार थाना प्रभारी हरेंद्र शर्मा ने बताया कि दोनों गिरफ्तार बदमाशों से पूछताछ की जा रही है और बाकी आरोपी की तलाश की जा रही है। पुलिस ने मामले की गंभीरता को देखते हुए इलाके में सुरक्षा बढ़ा दी है।