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आत्मविश्वास बढ़ाने वाली 9 मेडिटेशन मुद्राएं, तनाव और चिंता से तुरंत राहत

नई दिल्ली। आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में फिट और एनर्जेटिक बने रहना हर किसी की प्राथमिकता बन गई है और इसकी शुरुआत होती है सुबह के नाश्ते से। हेल्दी और संतुलित नाश्ता न केवल शरीर को जरूरी पोषण देता है बल्कि पूरे दिन की ऊर्जा का आधार भी बनता है। विशेषज्ञों के अनुसार यदि सुबह के भोजन में प्रोटीन की पर्याप्त मात्रा शामिल की जाए तो यह शरीर को लंबे समय तक एक्टिव बनाए रखने में बेहद मददगार साबित होता है। प्रोटीन हमारे शरीर की मूलभूत जरूरतों में से एक है। यह मांसपेशियों के निर्माण और उनकी मजबूती के लिए जरूरी होता है साथ ही यह भूख को नियंत्रित करने में भी अहम भूमिका निभाता है। सुबह प्रोटीन से भरपूर नाश्ता करने से दिनभर बार बार भूख लगने की समस्या कम हो जाती है और अनहेल्दी स्नैकिंग से बचाव होता है। इसके अलावा यह मेटाबॉलिज्म को बेहतर बनाकर वजन नियंत्रित रखने में भी सहायक होता है। अगर बात करें देसी और स्वादिष्ट विकल्पों की तो भारतीय रसोई में ऐसे कई नाश्ते मौजूद हैं जो प्रोटीन से भरपूर होने के साथ साथ स्वाद में भी लाजवाब होते हैं। इनमें सबसे लोकप्रिय विकल्प है पनीर पराठा जो न केवल स्वादिष्ट होता है बल्कि शरीर को भरपूर प्रोटीन भी देता है। इसी तरह पनीर भुर्जी भी एक बेहतरीन विकल्प है जिसे जल्दी तैयार किया जा सकता है। इसके अलावा मूंग दाल चीला और बेसन चीला जैसे व्यंजन भी प्रोटीन के अच्छे स्रोत हैं। ये हल्के होते हैं और पाचन में भी आसान होते हैं जिससे सुबह के समय शरीर को सही ऊर्जा मिलती है। डेयरी प्रोडक्ट्स भी नाश्ते में शामिल किए जा सकते हैं। दही के साथ ताजे फल और मूंगफली का सेवन शरीर को जरूरी पोषक तत्व प्रदान करता है। वहीं ओट्स या दलिया को दूध के साथ लेना एक संतुलित और सुपाच्य विकल्प माना जाता है खासकर उन लोगों के लिए जिन्हें पाचन संबंधी समस्याएं होती हैं। स्प्राउट्स और छाछ का संयोजन भी काफी फायदेमंद होता है। यह न केवल पाचन को दुरुस्त रखता है बल्कि शरीर को हल्का और ऊर्जावान बनाए रखता है। खासतौर पर जो लोग जिम जाते हैं या शारीरिक रूप से सक्रिय रहते हैं उनके लिए यह नाश्ता काफी लाभकारी होता है। विशेषज्ञों का मानना है कि सुबह का नाश्ता छोड़ना स्वास्थ्य के लिए नुकसानदायक हो सकता है। कई लोग समय की कमी के कारण नाश्ता नहीं करते लेकिन यह आदत शरीर की कार्यक्षमता को प्रभावित कर सकती है। ऐसे में यदि विस्तृत नाश्ता संभव न हो तो भी एक गिलास दूध या दही के साथ थोड़ी मूंगफली या ड्राई फ्रूट्स का सेवन जरूर करना चाहिए। कुल मिलाकर यदि दिन की शुरुआत सही खानपान से की जाए तो न केवल शरीर स्वस्थ रहता है बल्कि मानसिक रूप से भी आप अधिक सक्रिय और सकारात्मक महसूस करते हैं। प्रोटीन से भरपूर देसी नाश्ता एक आसान और प्रभावी तरीका है खुद को दिनभर फिट और ऊर्जावान बनाए रखने का।नई दिल्ली। आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में तनाव और आत्मविश्वास की कमी आम समस्या बनती जा रही है। ऐसे में मेडिटेशन सिर्फ आंखें बंद करके बैठने का अभ्यास नहीं बल्कि शरीर और मन के बीच संतुलन बनाने की एक गहरी प्रक्रिया बन गया है। ध्यान के दौरान हाथों की खास स्थितियां जिन्हें मुद्रा कहा जाता है अभ्यास को अधिक प्रभावशाली बनाती हैं और एकाग्रता बढ़ाने में मदद करती हैं। संस्कृत में मुद्रा शब्द का अर्थ है “आनंद उत्पन्न करना” — “मुद” यानी आनंद और “रा” यानी उत्पन्न करना। ये मुद्राएं शरीर के भीतर ऊर्जा के प्रवाह को निर्देशित करती हैं और शारीरिक मानसिक और आध्यात्मिक स्वास्थ्य को बढ़ावा देती हैं। विशेषज्ञों के अनुसार इन मुद्राओं के नियमित अभ्यास से तनाव और चिंता कम होती है मन और शरीर का संबंध मजबूत होता है और आंतरिक ऊर्जा का संचार बेहतर होता है। आइए जानते हैं ध्यान और आत्मविश्वास बढ़ाने वाली 9 प्रमुख मुद्राओं के बारे में: ज्ञान मुद्रा – अंगूठे के सिरे को तर्जनी के सिरे से छुएं। यह एकाग्रता और स्मृति बढ़ाने में मदद करती है। वायु मुद्रा – तर्जनी को अंगूठे के आधार पर रखें। घबराहट और बेचैनी को दूर करने के लिए बेहद प्रभावी।अपान मुद्रा – अंगूठा मध्यमा और अनामिका को आपस में मिलाएं। यह विषाक्त पदार्थों को बाहर निकालने और पाचन सुधारने में सहायक है। बुद्धि मुद्रा – अंगूठे और कनिष्ठा को मिलाकर बनती है। मानसिक स्पष्टता और संचार कौशल को बढ़ाती है। प्राण मुद्रा – अंगूठा अनामिका और कनिष्ठा को एक साथ स्पर्श करें। शरीर में जीवन शक्ति और ऊर्जा बढ़ाती है। भैरव मुद्रा – एक हाथ को दूसरी हथेली पर रखें। सुरक्षा स्थिरता और आंतरिक संतुलन की भावना देती है। गणेश मुद्रा – हृदय के सामने दोनों हाथों को आपस में फंसाएं। आत्मविश्वास बढ़ाने और बाधाओं को दूर करने में मदद करती है। हथेलियां नीचे – घुटनों पर हथेलियों को नीचे रखें। यह ग्राउंडिंग का प्रतीक है और ऊर्जा को स्थिर करता है। समाधि मुद्रा – एक हथेली को ऊपर रखें और दूसरी को उसके नीचे। यह पूर्ण एकाग्रता और परमानंद की स्थिति दर्शाती है। इन मुद्राओं का अभ्यास करने का तरीका भी सरल है। शुरुआत में सरल मुद्राओं से करें और धीरे-धीरे अपने अनुभव के अनुसार बदलाव करें। ध्यान से पहले स्पष्ट उद्देश्य निर्धारित करना लाभदायक होता है। यदि किसी मुद्रा में असुविधा महसूस हो तो तुरंत उसे बदल दें क्योंकि ध्यान का उद्देश्य शरीर को आराम देना और मन को शांत करना है कष्ट देना नहीं। नियमित अभ्यास से न केवल आपका आत्मविश्वास बढ़ता है बल्कि मन की स्थिरता एकाग्रता और मानसिक शक्ति भी सुधारती है। ये मुद्राएं तनाव और चिंता को कम करने के साथ ही जीवन में सकारात्मक ऊर्जा लाने में भी मदद करती हैं।

इश्क साजिश और कत्ल: 1 लाख की सुपारी देकर पति को मरवाने वाली पत्नी गिरफ्तार

धार। मध्यप्रदेश के धार जिले से एक दिल दहला देने वाला मामला सामने आया है जहां पति-पत्नी के रिश्ते को तार-तार करते हुए एक महिला ने अपने प्रेम संबंधों के चलते पति की हत्या की साजिश रच डाली। इस सनसनीखेज मामले में पुलिस ने खुलासा किया कि मिर्च व्यापारी देवकृष्ण पुरोहित की हत्या किसी लूटपाट का परिणाम नहीं बल्कि एक सुनियोजित साजिश थी जिसकी मास्टरमाइंड उसकी पत्नी प्रियंका ही निकली। घटना सरदारपुर थाना क्षेत्र की है जहां सोमवार रात व्यापारी की बेरहमी से हत्या कर दी गई थी। शुरुआती जांच में इसे लूट की वारदात बताया जा रहा था लेकिन पुलिस को घटनास्थल और परिस्थितियों में कई ऐसे सुराग मिले जिन्होंने पूरे मामले को संदिग्ध बना दिया। जब पुलिस ने गहराई से जांच शुरू की और मृतक की पत्नी प्रियंका से पूछताछ की तो कहानी का चौंकाने वाला सच सामने आया। पूछताछ में खुलासा हुआ कि प्रियंका ने अपने प्रेमी कमलेश के साथ मिलकर इस हत्या की पूरी साजिश रची थी। दोनों के बीच लंबे समय से संबंध थे और इसी रिश्ते को आगे बढ़ाने के लिए प्रियंका अपने पति को रास्ते से हटाना चाहती थी। इसके लिए उसने करीब 1 लाख रुपये की सुपारी देकर अपने परिचितों के जरिए हत्या करवाने का प्लान बनाया। घटना की रात प्रियंका ने आरोपियों को घर की पूरी जानकारी दी और यह भी बताया कि उस समय घर में सिर्फ वही और उसका पति मौजूद हैं। योजना के मुताबिक आरोपी घर में घुसे पहले पत्नी को अलग करने का नाटक किया और फिर व्यापारी पर हमला कर उसकी हत्या कर दी। हत्या के बाद पूरे घर का सामान अस्त-व्यस्त कर दिया गया ताकि यह मामला डकैती जैसा लगे। इतना ही नहीं खुद को निर्दोष साबित करने के लिए प्रियंका ने अपने हाथ-पैर बंधवाकर एक झूठी कहानी भी गढ़ी। आरोपियों ने उसे शोर मचाने के लिए कहा ताकि घटना वास्तविक लगे। लेकिन पुलिस की सख्त जांच और तकनीकी साक्ष्यों ने इस झूठ की परतें खोल दीं। आरोपी कमलेश ने पूछताछ में बताया कि प्रियंका अपने पति से परेशान थी और इसी वजह से उसने उसे खत्म करने की योजना बनाई। हत्या के बाद प्रियंका ने आरोपियों को कुछ जेवर और 30 से 40 हजार रुपये नकद भी दिए थे। धार पुलिस अधीक्षक मयंक अवस्थी ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में पूरे मामले का खुलासा करते हुए बताया कि यह एक सुनियोजित हत्या थी जिसे लूट का रूप देने की कोशिश की गई थी। पुलिस ने 12 घंटे के भीतर मामले का खुलासा कर आरोपी पत्नी और उसके प्रेमी को गिरफ्तार कर लिया है। यह घटना न केवल एक जघन्य अपराध को उजागर करती है बल्कि यह भी दिखाती है कि अवैध संबंध किस तरह एक परिवार को तबाह कर सकते हैं। रिश्तों में विश्वास की जगह जब साजिश ले लेती है तो परिणाम कितना भयावह हो सकता है इसका यह मामला एक कड़ा उदाहरण बनकर सामने आया है।

भगवान विष्णु को प्रसन्न करने के गुरुवार व्रत में जरूर करें ये काम, काम होंगे सफल

नई दिल्ली।गुरुवार का दिन भगवान श्रीहरि विष्णु और बृहस्पति देव को समर्पित होता है। इस दिन लोग पीले रंग के कपड़े पहनते हैं, बेसन से बनी चीज़ों का भोग लगाते हैं और व्रत रखते हैं। धर्म-शास्त्रों में कहा गया है कि सात consecutive गुरुवार व्रत करने से बृहस्पति ग्रह से जुड़े अशुभ फल दूर होते हैं और गुरु शुभ फल देने लगते हैं। कथाएक नगर में एक समृद्ध व्यापारी रहता था। वह जहाजों में माल भेजकर बहुत धन कमाता था और दान-पुण्य भी करता था। लेकिन उसकी पत्नी अत्यंत कंजूस थी। एक बार व्यापारी जब व्यापार के लिए बाहर गया, तब बृहस्पति देव साधु वेश में उसकी पत्नी के पास आए और भिक्षा मांगी। पत्नी ने उन्हें अपमानित किया और कहा कि वह अपने धन को दान में नहीं देना चाहती। बृहस्पति देव ने उसे कई पुण्य उपाय सुझाए, लेकिन पत्नी ने उन्हें नहीं माना। बृहस्पति देव ने सलाह दी कि सात गुरुवार विशेष विधि से क्रियाएं करनी होंगी, जिससे उसका धन नष्ट हो जाएगा। पत्नी ने यही किया। केवल तीन गुरुवार बीतने पर सम्पूर्ण संपत्ति नष्ट हो गई और वह परलोक सिधार गई। व्यापारी जब वापस आया, तो उसने देखा कि सब कुछ नष्ट हो चुका है। उसने जंगल से लकड़ी काटकर बेचने का काम शुरू किया, ताकि अपनी पुत्री को जीवित रख सके। बृहस्पति देव का वरदानएक दिन व्यापारी बृहस्पतिवार को दुखी बैठा था, तभी बृहस्पति देव साधु रूप में प्रकट हुए। उन्होंने व्यापारी को गुरुवार के दिन दो पैसे के चने और गुड़ लेकर कथा पढ़ने और प्रसाद वितरित करने का निर्देश दिया। व्यापारी ने ऐसा किया और उसकी कठिनाइयाँ दूर होने लगीं। अगले गुरुवार को उसने कथा नहीं पढ़ी, और परिणामस्वरूप कुछ समस्याएँ फिर सामने आईं। राजा के यज्ञ के समय व्यापारी और उसकी पुत्री को गलत आरोप में कैद कर दिया गया। व्यापारी ने फिर गुरुवार की कथा पढ़कर प्रसाद वितरित किया, जिससे बृहस्पति देव प्रकट हुए और उनकी सभी परेशानियाँ दूर कर दीं। व्यापारी और उसकी पुत्री को मुक्त कर दिया गया और उन्हें आधा राज्य, विवाह हेतु उच्च कुल में दहेज़ और सम्मान मिला। बृहस्पतिवार व्रत का महत्वगुरुवार व्रत से बृहस्पति ग्रह के अशुभ प्रभाव दूर होते हैं।सात गुरुवार व्रत करने से धन, स्वास्थ्य और पारिवारिक सुख में वृद्धि होती है।व्रत के दौरान कथा पढ़ना और प्रसाद बांटना अत्यंत फलदायक है।पीले कपड़े पहनना और बेसन के व्यंजन चढ़ाना शुभ माना गया है। इस कथा से हमें यह संदेश मिलता है कि गुरु और भगवान का सम्मान करना चाहिए। व्रत और कथा से जीवन की कठिनाइयाँ दूर होती हैं और सुख-समृद्धि आती है।

दो नावों पर सवार पाकिस्तान, चीन के हथियार और अमेरिका की कृपा के बीच फंसी कूटनीति

नई दिल्ली। पश्चिम एशिया में जारी तनाव के बीच जब ईरान अमेरिका और इजरायल के बीच टकराव ने वैश्विक चिंता बढ़ा दी तब अचानक सीजफायर की घोषणा ने दुनिया को राहत दी। लेकिन इस युद्धविराम के पीछे जिस देश का नाम सामने आया उसने सभी को चौंका दिया। यह देश था पाकिस्तान जो खुद आर्थिक और सुरक्षा चुनौतियों से जूझ रहा है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ और सेना प्रमुख आसिम मुनीर का नाम लेकर सीजफायर का श्रेय दिए जाने के बाद इस्लामाबाद ने इसे अपनी बड़ी कूटनीतिक जीत के रूप में पेश करना शुरू कर दिया। हालांकि वैश्विक विश्लेषकों का मानना है कि यह कहानी इतनी सीधी नहीं है बल्कि इसके पीछे बड़ी शक्तियों का जटिल खेल छिपा है। असल में चीन लंबे समय से पाकिस्तान का आर्थिक और सैन्य सहयोगी रहा है। भारी कर्ज और हथियारों के सहारे पाकिस्तान की रणनीतिक स्थिति बनी हुई है। लेकिन हाल के वर्षों में आर्थिक दबाव और कर्ज वापसी की सख्ती ने पाकिस्तान को नई राह तलाशने पर मजबूर कर दिया है। ऐसे में अमेरिका के साथ रिश्तों को फिर से मजबूत करना उसके लिए एक जरूरी विकल्प बन गया। विशेषज्ञ मानते हैं कि सीजफायर के पूरे घटनाक्रम में पाकिस्तान की भूमिका एक स्वतंत्र मध्यस्थ की कम और एक संदेशवाहक की अधिक रही। चीन जो ईरान से तेल आपूर्ति पर काफी निर्भर है इस संघर्ष के लंबा खिंचने से खुद आर्थिक दबाव में आ सकता था। ऐसे में उसने पाकिस्तान के माध्यम से दबाव बनाकर स्थिति को नियंत्रित करने की कोशिश की। दूसरी ओर अमेरिका के लिए भी यह युद्ध लंबे समय तक जारी रखना आसान नहीं था। घरेलू दबाव और अंतरराष्ट्रीय आलोचना के बीच उसे एक ऐसे चेहरे की जरूरत थी जो मध्यस्थ के रूप में सामने आ सके। पाकिस्तान इस भूमिका के लिए उपयुक्त था क्योंकि वह पहले से ही दोनों खेमों से संवाद बनाए हुए था। यह भी साफ है कि पाकिस्तान की यह सक्रियता केवल शांति स्थापित करने की मंशा से नहीं थी। उसके सामने कई मोर्चों पर संकट खड़े हैं। अफगानिस्तान सीमा पर अस्थिरता आंतरिक आर्थिक संकट और बढ़ता कर्ज उसे लगातार दबाव में रखे हुए हैं। इसके अलावा भारत के साथ तनाव और सैन्य चुनौतियां भी उसकी स्थिति को कमजोर करती हैं। इसी कारण पाकिस्तान ने एक संतुलन साधने की रणनीति अपनाई है जिसमें वह एक तरफ चीन को नाराज नहीं करना चाहता और दूसरी ओर अमेरिका की कृपा भी हासिल करना चाहता है। यही वजह है कि वह दोनों देशों के बीच अपनी उपयोगिता साबित करने में जुटा है। कुल मिलाकर यह घटनाक्रम पाकिस्तान की कूटनीति से ज्यादा उसकी मजबूरी को उजागर करता है। चीन के कर्ज और अमेरिका के भरोसे के बीच फंसा पाकिस्तान अब हर उस मौके को भुनाने की कोशिश कर रहा है जिससे उसकी वैश्विक छवि सुधरे और आर्थिक राहत मिल सके। लेकिन यह संतुलन कितने समय तक टिकेगा यह आने वाले समय में ही साफ हो पाएगा।

एससी विद्यार्थियों के लिए बड़ी सौगात, छात्रगृह योजना में अब हर महीने मिलेंगे 10 हजार रुपये

भोपाल। मध्यप्रदेश सरकार ने अनुसूचित जाति वर्ग के विद्यार्थियों के लिए एक महत्वपूर्ण और राहत भरा फैसला लिया है, जिससे उनकी उच्च शिक्षा का रास्ता और आसान हो सकेगा। अनुसूचित जाति कल्याण मंत्री नागर सिंह चौहान ने जानकारी देते हुए बताया कि छात्रगृह योजना में संशोधन कर अब पात्र विद्यार्थियों को प्रतिमाह 10 हजार रुपये की आर्थिक सहायता प्रदान की जाएगी। यह निर्णय विशेष रूप से उन विद्यार्थियों के लिए महत्वपूर्ण है जो दिल्ली स्थित प्रतिष्ठित उच्च शिक्षण संस्थानों में अध्ययन कर रहे हैं या वहां प्रवेश लेने की तैयारी कर रहे हैं। महंगे शहरों में रहने और पढ़ाई के खर्च को देखते हुए यह सहायता उनके लिए काफी मददगार साबित होगी। मंत्री नागर सिंह चौहान ने बताया कि इस योजना के तहत हर साल कुल 100 विद्यार्थियों को लाभ दिया जाएगा। इसमें 50 विद्यार्थी स्नातक स्तर के होंगे और 50 विद्यार्थी स्नातकोत्तर स्तर के होंगे। इसके अलावा जो विद्यार्थी पहले से इस योजना के अंतर्गत अध्ययन कर रहे हैं, उन्हें भी इसका लाभ मिलता रहेगा। इस पहल का उद्देश्य केवल आर्थिक सहायता देना नहीं, बल्कि अनुसूचित जाति वर्ग के विद्यार्थियों को देश के प्रमुख शिक्षण संस्थानों तक पहुंच दिलाना भी है। अक्सर देखा जाता है कि प्रतिभाशाली विद्यार्थी आर्थिक तंगी के कारण बड़े शहरों में जाकर पढ़ाई नहीं कर पाते, जिससे उनके करियर की संभावनाएं सीमित हो जाती हैं। ऐसे में यह योजना उनके लिए नई उम्मीद लेकर आई है। सरकार का मानना है कि जब विद्यार्थियों को बेहतर संसाधन और अवसर मिलेंगे, तो वे न केवल अपनी पढ़ाई में बेहतर प्रदर्शन करेंगे, बल्कि प्रतियोगी परीक्षाओं में भी सफलता हासिल कर सकेंगे। इससे उनका आत्मविश्वास बढ़ेगा और वे समाज में अपनी एक मजबूत पहचान बना पाएंगे। मंत्री नागर सिंह चौहान ने कहा कि यह कदम सामाजिक न्याय की दिशा में एक महत्वपूर्ण प्रयास है। समाज के कमजोर वर्गों को मुख्यधारा में लाने और उन्हें समान अवसर उपलब्ध कराने के लिए ऐसी योजनाएं बेहद जरूरी हैं। इससे शिक्षा के क्षेत्र में असमानता को कम करने में मदद मिलेगी। विशेषज्ञों का भी मानना है कि इस तरह की योजनाएं न केवल व्यक्तिगत स्तर पर बदलाव लाती हैं, बल्कि समाज के समग्र विकास में भी योगदान देती हैं। जब अधिक से अधिक विद्यार्थी उच्च शिक्षा प्राप्त करेंगे, तो इससे प्रदेश की मानव संसाधन क्षमता मजबूत होगी और आर्थिक विकास को भी गति मिलेगी। कुल मिलाकर, यह निर्णय अनुसूचित जाति वर्ग के विद्यार्थियों के लिए एक बड़ी राहत और अवसर के रूप में देखा जा रहा है। इससे उन्हें न केवल बेहतर शिक्षा मिलेगी, बल्कि अपने सपनों को साकार करने के लिए एक मजबूत आधार भी मिलेगा।

सुपरफूड बीज: खरबूजे के बीज से बढ़ाएं स्वास्थ्य और रखें ब्लड प्रेशर कंट्रोल में!

नई दिल्ली।स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि रोजाना के आहार में छोटे बदलाव भी शरीर को बेहतर बनाने में बड़ा योगदान देते हैं। ऐसे में खरबूजे के बीज एक ऐसा सुपरफूड हैं, जो स्वाद के साथ-साथ कई स्वास्थ्य लाभ भी देते हैं। पोषक तत्वों का खजानानेशनल हेल्थ मिशन के मुताबिक, खरबूजे के बीज प्रोटीन, फाइबर, विटामिन और मिनरल्स से भरपूर होते हैं। ये बीज शरीर की इम्युनिटी बढ़ाने, हाई ब्लड प्रेशर को नियंत्रित करने और कब्ज जैसी समस्याओं को दूर करने में बेहद मददगार हैं। आयुर्वेद में भी इन्हें सेहत का प्राकृतिक खजाना माना जाता है। इम्युनिटी और पाचन तंत्र को मजबूतखरबूजे के बीजों में मौजूद विटामिन और खनिज शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता को मजबूत करते हैं। नियमित सेवन से सर्दी-जुकाम जैसी बीमारियों से बचाव होता है। फाइबर की उपस्थिति पाचन तंत्र को सुधारती है और कब्ज की समस्या को कम करती है। हाई ब्लड प्रेशर और हृदय स्वास्थ्यये बीज सोडियम के स्तर को संतुलित रखते हैं और ब्लड प्रेशर को नियंत्रित करने में मदद करते हैं। इसके नियमित सेवन से हृदय स्वास्थ्य भी बेहतर रहता है और शरीर में ऊर्जा का स्तर बना रहता है। दिमाग, बाल और नाखूनों के लिए फायदेमंदखरबूजे के बीज मस्तिष्क की कार्यक्षमता बढ़ाने और स्मरण शक्ति सुधारने में भी सहायक हैं। इसके अलावा इनमें मौजूद पोषक तत्व बालों को मजबूत और नाखूनों की सेहत बेहतर बनाते हैं। आसानी से अपने आहार में शामिल करेंखरबूजे के बीज को खाने का तरीका बेहद सरल है। इन्हें हल्का भूनकर नमक या मसालों के साथ स्नैक्स के रूप में खाया जा सकता है। इसके अलावा सलाद, दही, नाश्ता, दूध या चाय में भी इन्हें मिलाया जा सकता है। छोटे-छोटे बदलाव से स्वास्थ्य में बड़ा फर्क दिखाई देता है।  खरबूजे के बीज प्रोटीन, फाइबर, विटामिन और मिनरल्स से भरपूर सुपरफूड हैं। ये इम्युनिटी बढ़ाते हैं, ब्लड प्रेशर नियंत्रित करते हैं, पाचन सुधारते हैं और बाल-नाखून की सेहत को मजबूत बनाते हैं। इन्हें स्नैक्स, सलाद, नाश्ते या दूध में मिलाकर आसानी से रोजाना आहार में शामिल किया जा सकता है।

Allu Arjun के जन्मदिन पर रिलीज हुआ ‘Raaka’ का पोस्टर, नए अवतार में दिखे एक्टर

नई दिल्ली।अल्लू अर्जुन (Allu Arjun) ने अपने जन्मदिन पर फैंस को खास तोहफा दिया। उनकी नई फिल्म का नाम Raaka घोषित किया गया और साथ ही फिल्म का पहला लुक पोस्टर भी जारी किया गया। इससे पहले इस फिल्म को ‘AA22xA6’ के नाम से जाना जा रहा था। फिल्म को मिला नया नाम और पोस्टरपोस्टर में अल्लू अर्जुन का अवतार बेहद चौंकाने वाला और अलग है। इस किरदार में उनके हाथ भेड़िए जैसी फर से ढके हुए हैं और बड़े नुकीले पंजे नजर आ रहे हैं। उनके चेहरे पर तीखी, काजल वाली आंखें, आधे गंजे और रफ हेयरस्टाइल ने इस लुक को और भी रहस्यमयी बना दिया है। दीपिका पादुकोण का सोशल मीडिया अपडेटफिल्म का पोस्टर दीपिका पादुकोण (Deepika Padukone) ने भी अपने इंस्टाग्राम अकाउंट से शेयर किया। इससे साफ हो गया कि इस फिल्म में अल्लू अर्जुन के साथ दीपिका पादुकोण भी नजर आएंगी। फिल्म का बजट 700-800 करोड़ रुपये से अधिक बताया जा रहा है और इसे सन पिक्चर्स प्रोड्यूस कर रही है। टीम जल्द ही मुंबई के स्टूडियो में नया शूटिंग शेड्यूल शुरू करेगी और प्रोडक्शन पूरे साल जारी रहने की उम्मीद है। आलू अर्जुन का करियर और नई फिल्म की उम्मीदअल्लू अर्जुन ने 2003 में फिल्म गंगोत्री से करियर की शुरुआत की थी। इसके बाद उन्होंने कई हिट फिल्मों में काम किया, जैसे आर्या, बनी, देशमुदुरु, सरैनोडु और अला वैकुंठपुरमुलु। पुष्पा: द राइज फिल्म में उनके किरदार और स्टाइल को दर्शकों ने खूब सराहा। इस फिल्म ने उन्हें पूरे भारत में सुपरस्टार बना दिया। अब उनकी नई फिल्म Raaka भी लोगों का ध्यान खींच रही है और उनके अनोखे अवतार ने फैंस के उत्साह को और बढ़ा दिया है।

9 से 23 अप्रैल तक प्रदेश में 8वां पोषण पखवाड़ा, बच्चों के मस्तिष्क विकास पर खास जोर

भोपाल। मध्यप्रदेश में 9 अप्रैल से 23 अप्रैल 2026 तक 8वां पोषण पखवाड़ा मनाया जाएगा जिसमें इस वर्ष बच्चों के मस्तिष्क विकास को केंद्र में रखते हुए व्यापक जागरूकता अभियान चलाया जाएगा। इस बार पखवाड़े की थीम जीवन के पहले छह वर्षों में मस्तिष्क का अधिकतम विकास निर्धारित की गई है जो बाल विकास के सबसे महत्वपूर्ण चरण को रेखांकित करती है। पोषण पखवाड़े का शुभारंभ 9 अप्रैल को प्रदेशभर के आंगनवाड़ी केन्द्रों और समुदाय स्तर पर स्थानीय जनप्रतिनिधियों की उपस्थिति में किया जाएगा। इस दौरान “पोषण पर चर्चा” कार्यक्रम आयोजित कर आम लोगों को मातृ एवं शिशु पोषण से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारी दी जाएगी। अभियान का उद्देश्य परिवार और समाज को बच्चों के शारीरिक और मानसिक विकास के प्रति जागरूक बनाना है। इस पखवाड़े में गर्भवती महिलाओं और छोटे बच्चों के स्वास्थ्य पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। जन्म से तीन वर्ष तक के बच्चों के मस्तिष्क विकास के लिए प्रारंभिक प्रोत्साहन गतिविधियों को बढ़ावा दिया जाएगा जबकि तीन से छह वर्ष तक के बच्चों के लिए खेल आधारित शिक्षा को प्रोत्साहित किया जाएगा। साथ ही परिवारों को बच्चों का स्क्रीन टाइम कम करने और उनके समग्र विकास में सक्रिय भूमिका निभाने के लिए प्रेरित किया जाएगा। विशेषज्ञों के अनुसार मानव मस्तिष्क का लगभग 85 प्रतिशत विकास जीवन के पहले छह वर्षों में ही हो जाता है। इसी तथ्य को ध्यान में रखते हुए इस अभियान में ऐसे व्यवहारों और गतिविधियों को बढ़ावा दिया जाएगा जो बच्चों के मानसिक और शारीरिक विकास को मजबूत बनाते हैं। पोषण पखवाड़े के दौरान विभिन्न कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे जिनमें स्वास्थ्य शिविर पोषण संबंधी कहानी वाचन दादी-नानी के अनुभव साझा कार्यक्रम स्थानीय खाद्य सामग्री से पौष्टिक व्यंजन प्रतियोगिता और जंक फूड के दुष्प्रभावों पर जागरूकता रैली शामिल हैं। इसके अलावा बच्चों के विकासात्मक मील के पत्थरों की पहचान माता-पिता के लिए प्रारंभिक बाल्यावस्था देखभाल सत्र और आंगनवाड़ी केन्द्रों को सशक्त बनाने के प्रयास भी किए जाएंगे। 22 अप्रैल को पंखुड़ी पोर्टल के माध्यम से आंगनवाड़ी केन्द्रों के लिए सामुदायिक सहयोग और दान अभियान चलाया जाएगा जबकि 23 अप्रैल को पोषण मेला आयोजित कर जनप्रतिनिधियों और समाज के विभिन्न वर्गों की भागीदारी सुनिश्चित की जाएगी। प्रदेश के सभी जिलों में इस अभियान के तहत रैलियां पोषण वाटिका निर्माण प्रश्नोत्तरी पोस्टर और नारा लेखन प्रतियोगिता तथा सोशल मीडिया अभियान चलाए जाएंगे। साथ ही इन गतिविधियों की जानकारी पोषण अभियान के जन-आंदोलन डैशबोर्ड पर दर्ज की जाएगी जिससे इसकी निगरानी और प्रभाव का आकलन किया जा सके। इस अभियान को सफल बनाने के लिए महिला एवं बाल विकास विभाग के साथ-साथ स्वास्थ्य पंचायत जनजातीय कार्य नगरीय प्रशासन और स्कूल शिक्षा विभाग मिलकर काम करेंगे। यह समन्वित प्रयास सुनिश्चित करेगा कि पोषण पखवाड़ा केवल एक कार्यक्रम न होकर एक जन-आंदोलन के रूप में सामने आए। कुल मिलाकर यह पहल प्रदेश में बच्चों के उज्ज्वल भविष्य और स्वस्थ समाज की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है जिसमें परिवार समाज और प्रशासन की संयुक्त भागीदारी से सकारात्मक बदलाव लाने का प्रयास किया जाएगा।

एमपी में भ्रष्टाचार पर लोकायुक्त का बड़ा एक्शन, इंदौर में 2 इंजीनियर और नरसिंहपुर में बाबू गिरफ्तार

नरसिंहपुर इंदौर। मध्यप्रदेश में भ्रष्टाचार के मामलों पर लगाम लगती नजर नहीं आ रही है। आए दिन सरकारी अधिकारी और कर्मचारी रिश्वत लेते हुए रंगे हाथों पकड़े जा रहे हैं जिससे शासन-प्रशासन की छवि पर सवाल उठ रहे हैं। ताजा मामले इंदौर और नरसिंहपुर से सामने आए हैं जहां लोकायुक्त पुलिस ने बड़ी कार्रवाई करते हुए तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया है। इंदौर में लोकायुक्त टीम ने लोक निर्माण विभाग के दो इंजीनियरों को रिश्वत लेते हुए रंगे हाथों पकड़ा है। जानकारी के अनुसार बालकुमार जैन और धीरेंद्र नीमा नामक इंजीनियरों ने एक भुगतान के बदले 6 प्रतिशत कमीशन की मांग की थी। शिकायत मिलने के बाद लोकायुक्त ने योजना बनाकर दोनों को 90 हजार रुपये की रिश्वत लेते हुए ट्रैप किया। कार्रवाई के बाद दोनों आरोपियों के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत मामला दर्ज कर लिया गया है और आगे की जांच शुरू कर दी गई है। वहीं नरसिंहपुर में भी जबलपुर लोकायुक्त पुलिस ने बड़ी कार्रवाई करते हुए नगर पालिका में पदस्थ बाबू संजय तिवारी को 25 हजार रुपये की रिश्वत लेते हुए गिरफ्तार किया है। बताया जा रहा है कि बाबू ने पेवर ब्लॉक लगाने वाले एक ठेकेदार से बिल भुगतान के एवज में 38 हजार रुपये की मांग की थी। शिकायत के आधार पर लोकायुक्त टीम ने जाल बिछाया और आरोपी को रंगे हाथों पकड़ लिया। दोनों मामलों में लोकायुक्त पुलिस ने तत्परता दिखाते हुए कार्रवाई की है और आरोपियों के खिलाफ कानूनी प्रक्रिया शुरू कर दी है। अधिकारियों का कहना है कि भ्रष्टाचार के खिलाफ इस तरह की कार्रवाई आगे भी जारी रहेगी और दोषियों को किसी भी सूरत में बख्शा नहीं जाएगा। प्रदेश में लगातार सामने आ रहे ऐसे मामलों से यह साफ होता है कि भ्रष्टाचार की समस्या अभी भी गंभीर बनी हुई है। आम नागरिकों और ठेकेदारों को अपने काम के लिए रिश्वत देने पर मजबूर होना पड़ता है जिससे सरकारी व्यवस्था पर सवाल उठते हैं। हालांकि लोकायुक्त की सक्रियता से ऐसे मामलों का खुलासा हो रहा है लेकिन इन घटनाओं की पुनरावृत्ति प्रशासन के लिए चिंता का विषय बनी हुई है। विशेषज्ञों का मानना है कि भ्रष्टाचार पर अंकुश लगाने के लिए केवल कार्रवाई ही नहीं बल्कि सिस्टम में पारदर्शिता और जवाबदेही भी जरूरी है। डिजिटल प्रक्रियाओं को बढ़ावा देकर और भुगतान व्यवस्था को पूरी तरह ऑनलाइन बनाकर इस समस्या को काफी हद तक कम किया जा सकता है। फिलहाल इंदौर और नरसिंहपुर में हुई इन कार्रवाइयों ने एक बार फिर यह संदेश दिया है कि भ्रष्टाचार के खिलाफ सख्ती जारी है लेकिन इसे जड़ से खत्म करने के लिए लगातार निगरानी और सख्त कदम उठाने की जरूरत है। लोकायुक्त की यह कार्रवाई आम लोगों के लिए राहत की खबर जरूर है लेकिन साथ ही यह भी दर्शाती है कि अभी इस दिशा में लंबा रास्ता तय करना बाकी है।

एमपी बोर्ड का बड़ा फैसला, अब फेल ही नहीं पास छात्र भी सुधार सकेंगे अंक, ‘द्वितीय परीक्षा’ से मिलेगा दूसरा मौका

नई दिल्ली/भोपाल। माध्यमिक शिक्षा मंडल म.प्र. भोपाल ने इस वर्ष से परीक्षा प्रणाली में अहम बदलाव करते हुए पारंपरिक पूरक परीक्षा व्यवस्था को समाप्त कर दिया है। इसके स्थान पर अब द्वितीय परीक्षा शुरू की जा रही है जिसमें फेल और पास दोनों ही प्रकार के छात्र शामिल हो सकेंगे। यह परीक्षा 7 मई 2026 से आयोजित होगी। नई व्यवस्था के तहत छात्र केवल अनुत्तीर्ण विषयों के लिए ही नहीं बल्कि अपने अंक सुधारने के उद्देश्य से भी किसी विषय में दोबारा परीक्षा दे सकेंगे। बोर्ड का मानना है कि इस पहल से विद्यार्थियों को अपने परिणाम बेहतर करने का अधिक अवसर मिलेगा। पहले की व्यवस्था में हाईस्कूल 10वीं में अधिकतम दो विषय और हायर सेकेंडरी 12वीं में एक विषय में फेल छात्र ही पूरक परीक्षा दे सकते थे। लेकिन अब इस नई द्वितीय परीक्षा प्रणाली में सभी छात्रों को समान अवसर प्रदान किया गया है। नियमों के अनुसार जो छात्र किसी विषय में फेल हैं उनके लिए उस विषय की परीक्षा देना अनिवार्य होगा। वहीं पास छात्र अपनी इच्छा से किसी भी विषय में शामिल होकर अपने अंक सुधार सकते हैं। इसे छात्रों के लिए राहतभरा कदम माना जा रहा है। जारी टाइमटेबल के मुताबिक 12वीं की द्वितीय परीक्षा 7 मई से 25 मई 2026 तक आयोजित होगी जबकि 10वीं की परीक्षा 7 मई से 19 मई 2026 के बीच होगी। सभी परीक्षाएं निर्धारित केंद्रों पर कराई जाएंगी। बोर्ड ने यह भी स्पष्ट किया है कि द्वितीय परीक्षा के बाद जारी अंकसूची मुख्य परीक्षा के समान ही होगी। छात्र के दोनों परिणामों में से जो बेहतर होगा वही अंतिम रूप से मान्य किया जाएगा जिससे उन्हें सीधे तौर पर फायदा मिलेगा। द्वितीय परीक्षा में शामिल होने के लिए छात्रों को मुख्य परीक्षा का परिणाम घोषित होने के सात दिनों के भीतर आवेदन करना होगा। आवेदन प्रक्रिया एमपी ऑनलाइन कियोस्क के माध्यम से पूरी की जाएगी। इसके लिए छात्र बोर्ड की आधिकारिक वेबसाइट www.mpbse.nic.in पर जाकर जानकारी प्राप्त कर सकते हैं।