होर्मुज के जल्द खुलने की उम्मीद…जहाजों के निकलने पर ईरान के साथ ओमान भी वसूलेगा टोल

तेहरान। स्ट्रेट ऑफ होर्मुज (Strait of Hormuz) जल्द ही खुलने के आसार हैं। सीजफायर (Ceasefire) के बाद ईरान (Iran) ने भी शर्तों पर सहमति जता दी है। अब यहां से तेल के जहाजों का गुजरना शुरू हो जाएगा। हालांकि, खबरें हैं कि इसके लिए मुल्कों को ईरान के साथ ओमान (Oman) को भी टोल टैक्स (Toll Tax) देना होगा। इसे लेकर आधिकारिक ऐलान नहीं हुआ है, लेकिन कहा जा रहा है कि टैक्स की बात सीजफायर की शर्तों में शामिल है। क्षेत्रीय अधिकारी ने बताया कि दो सप्ताह के सीजफायर प्लान में फीस की बात कही गई है। इसके तहत ईरान और ओमान दोनों ही मुल्क स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से निकलने वाले जहाजों से फीस वसूलेंगे। अधिकारी का कहना है कि ईरान इस रकम का इस्तेमाल मुल्क में दोबारा होने वाले निर्माण कार्यों के लिए करेगा। जबकि, यह साफ नहीं है कि ओमान राशि का किस तरह इस्तेमाल करेगा। अब तक फ्री थास्ट्रेट ऑफ होर्मुज ओमान और ईरान के जलक्षेत्र में आता है, लेकिन दुनिया इसे अंतरराष्ट्रीय जलमार्ग ही मानती थी। इसके चलते अब तक कोई भी देश जहाज निकलने के लिए टोल नहीं देता था। भारत भी दे रहा है फीस?बीते कुछ दिनों में शिवालिक, नंदा देवी, जग वसंद, पाइन गैस, ग्रीन सान्वी समेत कई जहाज भारत की ओर पहुंचे हैं। हालांकि, अब 16 भारतीय झंडे वाले जहाज स्ट्रेट पर अटके हुए हैं। अब तक यह साफ नहीं है कि भारत की तरफ से कोई फीस दी जा रही है या नहीं। वरिष्ठ अधिकारी ने इस स्ट्रेट को पार करने के लिए शुल्क लिए जाने की खबरों के बारे में पूछे जाने पर कहा, ‘हमें इस तरह के भुगतान की कोई जानकारी नहीं है।’ होर्मुज जलमार्ग ईरान की तरफ से बंद किए जाने के बाद यहां जहाजों का आवागमन करीब 95 प्रतिशत गिर गया था। बाद में ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची की तरफ से जारी बयान के अनुसार, चीन, रूस, भारत, इराक और पाकिस्तान को गुजरने की अनुमति दी गई थी। बाब-अल-मंदेब पर भी मंडराया था खतराएक दिन पहले ही ईरान ने चेतावनी दी थी कि मेरिका-इजरायल ने अगर सैन्य कार्रवाइयां जारी रखीं ,तो वह यमन में अपने हूती सहयोगियों के माध्यम से बाब-अल-मंदेब मार्ग को पूरी तरह बंद कर देगा। ईरान की यह धमकी अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की उस सख्त चेतावनी के तुरंत बाद आई थी, जिसमें उन्होंने कहा था कि ईरान शर्तों पर सहमत नहीं होता है तो ‘पूरी सभ्यता खत्म हो जाएगी’। ईरान ने कहा कि ‘अगर स्थिति नियंत्रण से बाहर हो जाती है’ तो तेहरान हूतियों से मदद मांगेगा, ‘जो बाब-अल-मंदेब जलमार्ग को भी बंद कर देंगे’। हूती विद्रोहियों का यमन के बड़े हिस्से पर नियंत्रण है। ये विद्रोही पहले भी इस बड़े जलमार्ग और उसके आसपास जहाजों पर अक्सर हमले करते रहे हैं, जो लाल सागर में समुद्री डकैती और उग्रवाद का प्रमुख कारण रहा है।
असम-केरल चुनाव में मुस्लिम वोटर निर्णायक, अजमल और मुस्लिम लीग के सामने सियासी परीक्षा

नई दिल्ली। असम, केरल और पुडुचेरी विधानसभा चुनाव के लिए प्रचार अभियान थम चुका है और अब 9 अप्रैल को मतदान होना है। इन चुनावों में जहां असम में कांग्रेस और बीजेपी के बीच सीधा मुकाबला है, वहीं केरल में लेफ्ट के नेतृत्व वाले एलडीएफ और कांग्रेस के यूडीएफ के बीच टक्कर है। दोनों ही राज्यों में मुस्लिम वोटर अहम भूमिका निभाते हैं, जिससे मुस्लिम आधारित राजनीतिक दलों की भी बड़ी परीक्षा मानी जा रही है। देश में मुस्लिम आबादी भले ही 14-15 फीसदी के बीच हो, लेकिन केरल में यह करीब 27 फीसदी और असम में 34-35 फीसदी तक है। ऐसे में इन राज्यों की राजनीति में मुस्लिम मतदाताओं का प्रभाव काफी ज्यादा है और यही वजह है कि इस वोट बैंक पर सभी दलों की नजर है। केरल में इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग (IUML) और असम में बदरुद्दीन अजमल की पार्टी ऑल इंडिया यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट (AIUDF) के लिए यह चुनाव बेहद अहम है। केरल में मुस्लिम लीग कांग्रेस के नेतृत्व वाले यूडीएफ के साथ मिलकर चुनाव लड़ रही है, जबकि असम में AIUDF और कांग्रेस अलग-अलग मैदान में हैं। असम में बदरुद्दीन अजमल की चुनौतीअसम की 126 सीटों पर 722 उम्मीदवार चुनाव लड़ रहे हैं, जिसमें बदरुद्दीन अजमल की पार्टी 27 सीटों पर किस्मत आजमा रही है। पार्टी का फोकस निचले असम के उन इलाकों पर है, जो बांग्लादेश सीमा से जुड़े हैं और जहां मुस्लिम मतदाता निर्णायक भूमिका में हैं। इस क्षेत्र की करीब 50 सीटों पर मुकाबला दिलचस्प है। 2021 में एनडीए ने 23 सीटें जीती थीं, जबकि कांग्रेस और एआईयूडीएफ गठबंधन को 27 सीटें मिली थीं। इस बार दोनों अलग-अलग चुनाव लड़ रहे हैं, जिससे अजमल को बीजेपी के साथ-साथ कांग्रेस से भी सीधी टक्कर मिल रही है। धुबरी, बारपेटा और गोलपाड़ा जैसे इलाकों में मुस्लिम वोटरों की संख्या अधिक है। पिछली बार एआईयूडीएफ ने 16 सीटें जीती थीं, लेकिन इस बार समीकरण बदले हुए हैं। मुस्लिम वोटों को साधने के लिए अजमल ने असदुद्दीन ओवैसी को भी चुनाव प्रचार में उतारा है। अजमल ने 2005 में एआईयूडीएफ की स्थापना की थी और मुस्लिम अल्पसंख्यकों, खासकर असमिया और बंगाली मूल के मुसलमानों के अधिकारों की राजनीति की। 2006 में पार्टी को 10 सीटें, 2011 में 18, 2016 में 13 और 2021 में 16 सीटें मिली थीं। हालांकि 2024 लोकसभा चुनाव में अजमल को अपनी सीट गंवानी पड़ी, जिससे उनकी सियासी स्थिति कमजोर हुई है। मुस्लिम वोटर किसके साथ?असम में करीब 34 फीसदी मुस्लिम आबादी है, जो पहले 32 सीटों पर निर्णायक थी, लेकिन परिसीमन के बाद अब यह प्रभाव करीब 22 सीटों तक सीमित हो गया है। कांग्रेस और एआईयूडीएफ दोनों ही इस वोट बैंक को अपने पक्ष में करने की कोशिश में हैं। 2021 में दोनों दल साथ थे, लेकिन इस बार अलग-अलग मैदान में हैं। ऐसे में यह बड़ा सवाल है कि मुस्लिम वोटर किसे प्राथमिकता देंगे, खासकर तब जब हालिया चुनावों में अजमल के प्रति समर्थन में कमी देखी गई है। केरल में मुस्लिम लीग की स्थितिकेरल में मुस्लिम आबादी करीब 27 फीसदी है और यहां मुस्लिम समुदाय सामाजिक और आर्थिक रूप से प्रभावशाली माना जाता है। मलप्पुरम, कोझिकोड और कन्नूर जैसे जिलों में इनका असर ज्यादा है। राज्य की राजनीति में इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग (IUML) की मजबूत पकड़ रही है। यह पार्टी कांग्रेस के नेतृत्व वाले यूडीएफ गठबंधन के साथ मिलकर चुनाव लड़ रही है और 140 में से 26 सीटों पर अपने उम्मीदवार उतारे हैं। बाकी सीटों पर सहयोगी दलों को समर्थन दिया गया है। मलप्पुरम, कोझिकोड और कासरगोड जैसे मुस्लिम बहुल इलाकों में मुस्लिम लीग पारंपरिक रूप से मजबूत रही है। 1962 से अब तक पार्टी का हर लोकसभा में प्रतिनिधित्व रहा है और विधानसभा में भी इसकी निरंतर मौजूदगी बनी रही है। केरल में 140 सीटों में से 32 मुस्लिम विधायक हैं, जिनमें से 15 मुस्लिम लीग से आते हैं। राज्य की करीब 43 सीटों पर मुस्लिम मतदाता चुनावी परिणामों को प्रभावित कर सकते हैं। पिछले कई दशकों से मुस्लिम लीग ने अपने वोट बैंक को संगठित रखा है और कांग्रेस के साथ गठबंधन के कारण वोटों का बिखराव भी नहीं होता। इस बार भी यूडीएफ और एलडीएफ के बीच मुकाबले में यूडीएफ का पलड़ा कुछ भारी माना जा रहा है, जो मुस्लिम लीग के लिए अनुकूल स्थिति बनाता है।
अडानी ने SEC के खिलाफ मुकदमे को खारिज करने के लिए US फेडरल कोर्ट में दायर की याचिका

वाशिंगटन। गौतम अडानी (Gautam Adani) और उनके भतीजे सागर अडानी (Sagar Adani) ने यूएस सिक्योरिटीज एंड एक्सचेंज कमिशन (US Securities and Exchange Commission-SEC) के खिलाफ चल रहे मुकदमे को खारिज करने के लिए न्यूयॉर्क की फेडरल कोर्ट (New York Federal Court) में याचिका दायर की है। अडानी की ओर से सबसे बड़ी दलील यह है कि इस मामले में अमेरिकी अदालत का अधिकार क्षेत्र ही नहीं बनता। वकीलों के मुताबिक, कथित लेन-देन अमेरिका के बाहर हुआ, बॉन्ड किसी अमेरिकी एक्सचेंज में लिस्डेट नहीं थे और दोनों आरोपी भारत में रहते हैं, इसलिए इस मामले को अमेरिकी कानून के तहत नहीं सुना जाना चाहिए। 750 मिलियन डॉलर के बॉन्ड पर उठे सवालअडानी ग्रुप की ओर से कहा गया है कि जिस 750 मिलियन डॉलर के बॉन्ड को लेकर मामला बनाया गया है, वह नियम 144A के तहत जारी किया गया था। यह बॉन्ड पहले गैर-अमेरिकी अंडरराइटर्स को बेचा गया और बाद में कुछ हिस्से को संस्थागत खरीदारों को रीसेल किया गया। रॉयटर्स के मुताबिक अडानी पक्ष का दावा है कि इस प्रक्रिया में अमेरिका की सीधी भागीदारी नहीं थी, इसलिए SEC का हस्तक्षेप उचित नहीं है। निवेशकों को नुकसान नहीं, केस कमजोरअडानी की याचिका में यह भी कहा गया है कि SEC अब तक यह साबित नहीं कर पाया है कि किसी भी निवेशक को इस सौदे से आर्थिक नुकसान हुआ हो। कंपनी के अनुसार, ये बॉन्ड 2024 में मैच्योर हो चुके हैं और निवेशकों को मूलधन के साथ ब्याज भी पूरा लौटाया जा चुका है। ऐसे में “नो लॉस” की स्थिति में मुकदमे की वैधता पर सवाल उठता है। रिश्वतखोरी के आरोपों को किया खारिजअडानी ने रिश्वतखोरी के आरोपों को भी निराधार बताया है। उनका कहना है कि SEC के पास इन आरोपों के समर्थन में कोई ठोस या विश्वसनीय सबूत नहीं है। साथ ही यह भी कहा गया कि न तो गौतम अडानी और न ही सागर अडानी का इस बॉन्ड इश्यू से कोई प्रत्यक्ष संबंध साबित किया गया है। ‘भ्रामक बयान’ नहीं, सामान्य कॉर्पोरेट भाषाSEC ने जिन बयानों को भ्रामक बताया है, जैसे ESG प्रतिबद्धताएं और कॉर्पोरेट गवर्नेंस, उन्हें अडानी पक्ष ने “पफरी” यानी सामान्य कॉर्पोरेट बयान करार दिया है। उनका तर्क है कि ऐसे सामान्य दावे निवेशकों को गुमराह करने की श्रेणी में नहीं आते और इन्हें कानूनी आधार नहीं बनाया जा सकता। अडानी ग्रुप ने इस पूरे मामले को कानूनी रूप से कमजोर बताते हुए कोर्ट से इसे खारिज करने की मांग की है। अब देखना होगा कि अमेरिकी अदालत इस पर क्या रुख अपनाती है, क्योंकि यह मामला अंतरराष्ट्रीय निवेश और नियामक अधिकार क्षेत्र से जुड़ा बड़ा उदाहरण बन सकता है।
11 अप्रैल से मंगल और बुध की युति से इन राशियों की होगी तरक्की, बढ़ेगी आय, जानिए क्या होंगे लाभ?

नई दिल्ली। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, जब मंगल और बुध एक ही राशि में स्थित होते हैं, तो यह युति बहुत खास मानी जाती है। मंगल ऊर्जा, साहस और आत्मविश्वास का कारक है, जबकि बुध बुद्धि, संवाद और रणनीति का ग्रह। इन दोनों का संगम व्यक्ति की सोचने-समझने और स्मार्ट तरीके से काम करने की क्षमता को बढ़ाता है। द्रिक पंचांग के अनुसार, इस बार यह युति 11 अप्रैल 2026 को मीन राशि में बनेगी। मंगल पहले ही 2 अप्रैल को मीन राशि में प्रवेश कर चुके हैं, और बुध भी 11 अप्रैल को मीन राशि में आ जाएंगे। यह युति 30 अप्रैल 2026 तक प्रभावी रहेगी। ज्योतिषियों के अनुसार, इस दौरान कुछ राशियों को विशेष लाभ मिलने के संकेत हैं। वृषभ राशिवृषभ राशि के जातकों के लिए यह समय पैसों और करियर के मामले में अनुकूल रहेगा। आय के नए स्रोत खुल सकते हैं और नौकरी में नई जिम्मेदारियां मिल सकती हैं, जिससे आपकी पहचान बढ़ेगी। व्यापारियों को अच्छा मुनाफा मिलने की संभावना है। निवेश करने का समय अनुकूल रहेगा। किसी पुराने मित्र से मुलाकात आपका दिन और बेहतर बना सकती है। मिथुन राशिमिथुन राशि वालों के लिए यह युति आर्थिक मजबूती और अवसर लेकर आएगी। धन में बढ़ोतरी के संकेत हैं और रुके हुए कार्य पूरे हो सकते हैं। नया काम शुरू करने के लिए यह समय अनुकूल है। व्यवसाय में विस्तार और पार्टनरशिप से लाभ होने की संभावना है। नौकरी में नई जिम्मेदारियां मिल सकती हैं। घर या वाहन खरीदने का विचार भी सफल हो सकता है। धनु राशिधनु राशि के जातकों के लिए यह समय करियर और वित्तीय मामलों में फायदेमंद रहेगा। नौकरी में प्रमोशन या तरक्की के योग हैं। निवेश से अच्छा रिटर्न मिलने की संभावना है। 11 अप्रैल से 30 अप्रैल के बीच का समय आपके लिए नए अवसर और मनचाही नौकरी या नई शुरुआत के संकेत लेकर आएगा।
तमिलनाडु चुनाव में PM मोदी का प्रचार जोरों पर, राहुल गांधी नदारद, DMK-कांग्रेस गठबंधन पर सवाल

नई दिल्ली। तमिलनाडु में चुनावी प्रचार तेज हो गया है। इस बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी लगातार राज्य के दौरे कर भाजपा और एनडीए उम्मीदवारों के समर्थन में जनता से संपर्क कर रहे हैं, जबकि कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी अभी तक राज्य में चुनाव प्रचार से दूरी बनाए हुए हैं। मोदी का सक्रिय अभियानपिछले दो महीनों में मोदी ने तीन बार तमिलनाडु का दौरा किया और 15 अप्रैल को फिर से राज्य का दौरा कर नागरकोइल में विशाल जनसभा को संबोधित करेंगे। उनका प्रचार अभियान भाजपा और उसके सहयोगी दलों के लिए माहौल बनाने पर केंद्रित है। राहुल गांधी की अनुपस्थिति और DMK के साथ दूरीराहुल गांधी ने अब तक तमिलनाडु में प्रचार अभियान नहीं चलाया। राजनीतिक विश्लेषक इसे कांग्रेस और DMK गठबंधन में चल रहे मनमुटाव से जोड़ रहे हैं। 2021 में राहुल गांधी चुनाव से पहले ही राज्य में तीन दिवसीय दौरे पर थे, लेकिन इस बार उनकी गैरमौजूदगी ने सवाल खड़े कर दिए हैं। पुडुचेरी में संकेत मिले दूरियों केहाल ही में पुडुचेरी में प्रचार के दौरान राहुल गांधी ने DMK अध्यक्ष एम.के. स्टालिन का नाम तक नहीं लिया। वहीं स्टालिन भी उसी दिन वहां मौजूद थे, लेकिन दोनों नेताओं के कार्यक्रम अलग समय पर निर्धारित किए गए थे। राजनीतिक जानकार इसे सीट बंटवारे और गठबंधन खींचतान का परिणाम मान रहे हैं। पार्टियों की सफाई और आगे की योजनाDMK के संगठनात्मक सचिव आर.एस. भारती ने कहा कि दोनों पार्टियों ने अपने प्रचार कार्यक्रम पहले से तय कर लिए थे और आखिरी समय में संयुक्त रैली संभव नहीं थी। उन्होंने आश्वस्त किया कि दोनों नेता जल्द ही एक साथ प्रचार करेंगे। कांग्रेस के वरिष्ठ पदाधिकारी ने बताया कि राहुल गांधी तमिलनाडु का दौरा 10 अप्रैल के बाद कर सकते हैं, जब पहले चरण का मतदान संपन्न हो जाएगा।DMK के संगठनात्मक सचिव आर.एस. भारती ने कहा कि दोनों पार्टियों ने अपने प्रचार कार्यक्रम पहले से तय कर लिए थे और आखिरी समय में संयुक्त रैली संभव नहीं थी। उन्होंने आश्वस्त किया कि दोनों नेता जल्द ही एक साथ प्रचार करेंगे। कांग्रेस के वरिष्ठ पदाधिकारी ने बताया कि राहुल गांधी तमिलनाडु का दौरा 10 अप्रैल के बाद कर सकते हैं, जब पहले चरण का मतदान संपन्न हो जाएगा।
सलमान खान पहुंचे नेशनल कंज्यूमर कमीशन, बोले- जिला कोर्ट ने मेरे साथ अन्याय किया

नई दिल्ली बॉलीवुड सुपरस्टार सलमान खान अब नेशनल कंज्यूमर डिस्प्यूट्स रिड्रेसल कमीशन (NCDRC) में पहुंच गए हैं। मामला राजश्री इलायची के विज्ञापन विवाद से जुड़ा है। सलमान खान का दावा है कि जयपुर जिला उपभोक्ता आयोग ने उनके साथ अनुचित और कठोर कदम उठाए। मामला क्या है?मामला जनवरी 2026 का है। अधिवक्ता योगेंद्र बडियाल ने जयपुर के जिला उपभोक्ता आयोग में शिकायत दर्ज कर राजश्री इलायची पर आरोप लगाया कि यह ब्रांड पान मसाला के नाम पर इलायची को प्रमोट कर रहा है। इसके बाद 6 जनवरी 2026 को जिला आयोग ने एकतरफा (Ex-parte) अंतरिम आदेश पारित किया। इस आदेश में सलमान खान और अन्य प्रतिवादियों को निर्देश दिया गया कि वे ऐसे विज्ञापन न चलाएं। क्या हुआ उसके बाद?बार एंड बेंच की रिपोर्ट के अनुसार, शिकायतकर्ता योगेंद्र बडियाल ने आरोप लगाया कि जिला आयोग के आदेश के बावजूद सलमान खान से जुड़े होर्डिंग विज्ञापन लगे रहे। इसके बाद 15 जनवरी 2026 को पहली पेशी में ही सलमान खान के खिलाफ जमानती वारंट जारी कर दिया गया। जिला आयोग ने आदेश की अवमानना (धारा 72) के तहत सलमान की मौजूदगी सुनिश्चित करने के लिए स्पेशल टास्क फोर्स (STF) भी गठित करने का निर्देश दिया। सलमान खान के वकील की दलीलसलमान खान के वकील वरिष्ठ अधिवक्ता रवि प्रकाश ने जिला आयोग को बताया कि उन्हें आदेश की कोई सर्टिफाइड कॉपी नहीं दी गई थी। उन्होंने कहा, “जब आदेश की आधिकारिक कॉपी ही नहीं मिली, तो इसके उल्लंघन का आरोप कैसे लगाया जा सकता है?” वकील ने यह भी उठाया कि आदेश की जानकारी पहले मीडिया रिपोर्ट्स के जरिए उन्हें मिली थी, जबकि उन्हें आधिकारिक नोटिस नहीं दिया गया। राजस्थान स्टेट कंज्यूमर कमीशन ने क्या किया?सलमान खान ने जिला आयोग के आदेश को राजस्थान स्टेट कंज्यूमर कमीशन में चुनौती दी। लेकिन 16 मार्च 2026 को राज्य आयोग ने उनकी अपील खारिज कर दी और जिला आयोग के आदेश को सही ठहराया। अब NCDRC में अपीलसलमान खान के वकील ने NCDRC में दावा किया कि जयपुर जिला उपभोक्ता आयोग ने उनके साथ अन्याय किया। उन्होंने कहा कि एक भ्रामक विज्ञापन की शिकायत से जुड़ी कार्यवाही में अनुचित व्यवहार हुआ। सलमान के खिलाफ कठोर दंडात्मक कदम उठाए गए और आदेश की प्रमाणित प्रतियां देने से इनकार किया गया। उनके अनुसार, यह पूरे मामले में न्याय और उचित प्रक्रिया का उल्लंघन है। सलमान खान अब अपने पक्ष में नेशनल कंज्यूमर कमीशन में लड़ाई लड़ रहे हैं। उनका कहना है कि जिला आयोग के आदेश और STF गठन में उनके साथ अनुचित और कठोर कदम उठाए गए। अब यह देखना दिलचस्प होगा कि NCDRC इस मामले में क्या निर्णय लेता है।
'धुरंधर 2' का पॉपुलर सीन ही बना गौरव गेरा के करियर का टर्निंग पॉइंट!

नई दिल्ली। फिल्म ‘धुरंधर: द रिवेंज’ में अभिनेता गौरव गेरा ने निभाया आलम का किरदार दर्शकों के बीच तेजी से लोकप्रिय हो गया है। फिल्म के सबसे महत्वपूर्ण मोड़ पर उनका सीन, जिसमें आलम रणवीर सिंह के किरदार हमजा को मनाता है कि वह दोस्त पिंडा की मौत का इल्जाम खुद पर ले ले, सोशल मीडिया पर खूब वायरल हुआ। इस सीन की लोकप्रियता ने गौरव को फिल्म इंडस्ट्री में एक अलग पहचान भी दिलाई। ऑडिशन का वही सीन बन गया हिटगौरव गेरा ने हाल ही में अपने इंटरव्यू में बताया कि यह सीन उनके लिए कोई सरप्राइज नहीं था। उन्होंने कहा, “मुझे वही भारी-भरकम सीन ऑडिशन में दिया गया था। मुझे मुकेश छाबड़ा के ऑफिस बुलाया गया और कहा गया कि इसे परफॉर्म करो। इसलिए जब फिल्म में यह सीन दिखा, मुझे पता था कि यह रोल दर्शकों को पसंद आएगा।” गौरव का मानना है कि उनका किरदार हमजा का एकमात्र सपोर्ट सिस्टम है और सब कुछ जानने वाला शख्स है। यही कारण है कि उन्होंने इस भूमिका को पूरी गंभीरता और इंटेंसिटी के साथ निभाया। डायलॉग ने मचाई इंटरनेट पर धूमफिल्म का मशहूर डायलॉग “डार्लिंग, डार्लिंग दिल क्यों तोड़ा, पीलो पीलो आलम दूध सोडा” इंटरनेट पर वायरल हो चुका है। गौरव ने बताया कि उनके दोस्तों और परिवार से सबसे ज्यादा यही प्रतिक्रिया आ रही है। उन्होंने कहा, “बहुत सारे मैसेज आ रहे हैं और यही सबसे कॉमन रिस्पॉन्स है।” गौरव गेरा की सफलता की कहानीगौरव गेरा की सफलता नई नहीं है। उन्होंने टीवी शो जैसे ‘जस्सी जैसी कोई नहीं’, ‘छुटकी-शॉपकीपर’, ‘वो’, और ‘मिसेज पम्मी प्यारेलाल’ में यादगार भूमिका निभाई है। खासकर उनके छुटकी और शॉपकीपर वाले डबल रोल्स आज भी फैंस के बीच लोकप्रिय हैं। अब ‘धुरंधर’ से उनका फैनबेस और बढ़ गया है, लेकिन गौरव ने स्पष्ट किया कि वे अपने पुराने वीडियो कैरेक्टर्स को रिवाइव करने का कोई प्लान फिलहाल नहीं बना रहे हैं। उन्होंने कहा, “पिछले 3 साल से मैंने बहुत कम वीडियो बनाए हैं। वीडियो कंटेंट बनाना काफी मेहनत वाला काम है—शूटिंग, एडिटिंग, सबकुछ। अब मैं वैरायटी करना पसंद करता हूँ और नई चीजें एक्सपीरियंस करना चाहता हूँ।” भविष्य की योजनाएँ और नए प्रोजेक्ट्सगौरव ने यह भी कहा कि ‘धुरंधर’ उनके लिए बेहद एंजॉय करने वाला अनुभव रहा। उन्होंने अपने फैंस को यह संदेश दिया कि वे आगे भी सिनेमा और अलग-अलग प्रोजेक्ट्स में अपना टैलेंट दिखाने की कोशिश करेंगे। वीडियो प्लेटफॉर्म उनके लिए अब ऑप्शनल है, लेकिन फिलहाल उनका ध्यान फिल्मों और नए रोल्स पर केंद्रित है। गौरव गेरा ने ‘धुरंधर 2’ के वायरल सीन से अपनी जगह इंडस्ट्री में पक्की कर ली है। उनका किरदार आलम न केवल दर्शकों का दिल जीत गया बल्कि उनका फैनबेस भी बढ़ाया। हालांकि वे अपने पुराने वीडियो कैरेक्टर्स में लौटने का प्लान नहीं बना रहे हैं और नई भूमिकाओं और प्रोजेक्ट्स की ओर बढ़ रहे हैं।
अक्षय तृतीया पर बनेगा खास संयोग, ‘अक्षय योग’ से इन राशियों पर होगी धन वर्षा

नई दिल्ली। ज्योतिष शास्त्र में ‘अक्षय योग’ को बेहद शुभ और फलदायी माना जाता है। ‘अक्षय’ का अर्थ होता है-जो कभी समाप्त न हो, यानी इस योग में किए गए कार्यों का शुभ फल लंबे समय तक मिलता है। यह योग तब बनता है, जब सूर्य और चंद्रमा अपनी-अपनी उच्च राशियों में स्थित होते हैं। द्रिक पंचांग के अनुसार, 19 अप्रैल को अक्षय तृतीया के दिन सूर्य अपनी उच्च राशि मेष में और चंद्रमा अपनी उच्च राशि वृषभ में रहेंगे, जिससे यह विशेष योग बनेगा। ज्योतिषियों का मानना है कि इस संयोग से कई राशियों के जीवन में धन, सफलता और समृद्धि का प्रवेश होगा। रुके हुए कार्य पूरे होंगे और आर्थिक स्थिति मजबूत बनेगी। आइए जानते हैं किन राशियों को मिलेगा इस शुभ योग का विशेष लाभ।मेष राशि (Aries)इस राशि के जातकों के लिए यह समय आत्मविश्वास बढ़ाने वाला रहेगा। कार्यक्षेत्र में नई जिम्मेदारियां मिल सकती हैं, जो भविष्य में लाभदायक साबित होंगी। नौकरीपेशा लोगों को प्रमोशन के संकेत हैं, जबकि व्यापारियों को नए अवसर मिल सकते हैं। सही निर्णय लेने की क्षमता बढ़ेगी और निवेश में फायदा होने की संभावना है। वृषभ राशि (Taurus)वृषभ राशि वालों के लिए यह योग सुख-सुविधाओं में वृद्धि का संकेत दे रहा है। आर्थिक स्थिति मजबूत होगी और आय के नए स्रोत खुल सकते हैं। घर, जमीन या वाहन खरीदने की इच्छा पूरी हो सकती है। परिवार का सहयोग मिलेगा और कार्यों में सफलता के योग बनेंगे। सिंह राशि (Leo)सिंह राशि के जातकों के लिए यह समय भाग्य का साथ लेकर आएगा। लंबे समय से अटके काम पूरे होंगे। व्यापार से जुड़े लोगों को विशेष लाभ मिल सकता है और कोई बड़ा अवसर हाथ लग सकता है, जो आगे चलकर लगातार फायदा देगा। वृश्चिक राशि (Scorpio)वृश्चिक राशि वालों के लिए यह अवधि आर्थिक दृष्टि से लाभकारी रहेगी। अचानक धन लाभ के संकेत हैं और पुराने निवेश से भी अच्छा रिटर्न मिल सकता है। विदेश यात्रा की योजना सफल हो सकती है। नौकरी करने वालों को प्रमोशन या नई उपलब्धि मिलने के योग हैं, जिससे करियर में उन्नति होगी।
सीजफायर के बाद कूटनीति तेज, ईरान के 10 सूत्रीय प्रस्ताव पर अमेरिका से होगी अहम वार्ता

नई दिल्ली। ईरान और अमेरिका के बीच दो हफ्ते के सीज़फायर के बाद अब दोनों देशों के बीच कूटनीतिक गतिविधियां तेज हो गई हैं। ईरान की सुप्रीम नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल ने पुष्टि की है कि दोनों पक्षों के बीच बातचीत शुक्रवार, 10 अप्रैल से इस्लामाबाद में शुरू होगी। ईरान ने पाकिस्तान के जरिए अमेरिका को एक विस्तृत 10 बिंदुओं वाला प्रस्ताव भेजा है, जिस पर अब बातचीत की जाएगी। ईरानी मीडिया के अनुसार, इस प्रस्ताव में कई अहम शर्तें शामिल हैं। ईरान के 10 प्रमुख प्रस्ताव इस प्रकार हैं: 1. अहिंसा के प्रति प्रतिबद्धता2. होर्मुज स्ट्रेट पर ईरान का नियंत्रण बरकरार रखना3. यूरेनियम संवर्धन की अनुमति4. सभी प्राथमिक प्रतिबंधों को समाप्त करना5. द्वितीयक प्रतिबंधों को भी हटाना6. संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के सभी प्रस्तावों को खत्म करना7. बोर्ड ऑफ गवर्नर्स के प्रस्तावों को समाप्त करना8. ईरान को मुआवजा देना9. क्षेत्र से अमेरिकी सैन्य बलों की वापसी10. लेबनान में हिज़्बुल्लाह के खिलाफ कार्रवाई सहित सभी मोर्चों पर युद्धविराम ईरानी सरकारी मीडिया के मुताबिक, प्रस्ताव में विशेष रूप से होर्मुज स्ट्रेट पर नियंत्रण, प्रतिबंधों में ढील और क्षेत्र से अमेरिकी सेनाओं की वापसी जैसे मुद्दों पर जोर दिया गया है। हालांकि, ईरान की सुप्रीम नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल ने साफ किया है कि इस पहल का मतलब जमीनी स्तर पर तनाव पूरी तरह खत्म होना नहीं है। उनका कहना है कि यह युद्ध का अंत नहीं है और किसी भी गलती का कड़ा जवाब दिया जाएगा। यह घटनाक्रम उस समय सामने आया है जब ईरान ने दो हफ्ते के सीज़फायर को स्वीकार किया है, जिसे उसने अपनी “जीत” बताया है। यह सीज़फायर पाकिस्तान की मध्यस्थता से संभव हुआ है। इस्लामाबाद में होने वाली यह वार्ता करीब 15 दिनों तक चल सकती है और जरूरत पड़ने पर इसे आगे बढ़ाया भी जा सकता है। इसका उद्देश्य एक व्यापक समझौते की दिशा में रूपरेखा तैयार करना है। ईरानी अधिकारियों ने संकेत दिया है कि इस दौरान समुद्री मार्गों पर सीमित सहयोग किया जाएगा और होर्मुज स्ट्रेट से सुरक्षित आवाजाही ईरानी सशस्त्र बलों के समन्वय से सुनिश्चित की जा सकती है।वहीं, व्हाइट हाउस के एक अधिकारी ने कहा है कि सीज़फायर औपचारिक रूप से तभी लागू माना जाएगा, जब ईरान वैश्विक तेल आपूर्ति के लिए महत्वपूर्ण होर्मुज स्ट्रेट को दोबारा खोल देगा। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की घोषणा के बाद आई एक रिपोर्ट में बताया गया कि तेहरान ने अमेरिका-इजराइल तनाव के बीच पाकिस्तान के प्रस्ताव को स्वीकार कर लिया है। रिपोर्ट के अनुसार, चीन ने भी अंतिम समय में हस्तक्षेप कर तनाव कम करने की अपील की थी। इसी बीच, ईरान के नए सर्वोच्च नेता मोजतबा खामेनेई ने सीज़फायर को मंजूरी दे दी है। ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराकची ने कहा कि यदि ईरान पर हमले रुकते हैं तो वे भी जवाबी कार्रवाई रोक देंगे और दो हफ्तों तक होर्मुज स्ट्रेट में सुरक्षित आवाजाही सुनिश्चित की जाएगी। उन्होंने सीज़फायर को लागू कराने में भूमिका निभाने के लिए पाकिस्तानी प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ और सेना प्रमुख आसिम मुनीर के प्रति आभार भी जताया।
एमपी में फिर बिगड़ा मौसम, 3 सिस्टम एक्टिव, 18 जिलों में बारिश और कई इलाकों में ओलावृष्टि का अलर्ट

भोपाल। मध्य प्रदेश के ऊपरी हिस्से में एक साथ तीन साइक्लोनिक सर्कुलेशन चक्रवाती सिस्टम सक्रिय होने से प्रदेश में मौसम ने फिर करवट ले ली है। इसके चलते आंधी और बारिश का सिलसिला दोबारा शुरू हो गया है। मंगलवार को ग्वालियर-चंबल और सागर संभाग में मौसम काफी बिगड़ा रहा। मौसम विभाग के अनुसार बुधवार को दतिया, निवाड़ी, छतरपुर और टीकमगढ़ जिलों में ओले गिरने की संभावना जताई गई है। इसके अलावा ग्वालियर, भिंड, मुरैना, पन्ना, सतना, रीवा, मऊगंज, सीधी, सिंगरौली, मैहर, कटनी, उमरिया, शहडोल और अनूपपुर सहित कुल 18 जिलों में अगले 24 घंटे के भीतर बारिश का अलर्ट जारी किया गया है। मंगलवार को भी प्रदेश के कई हिस्सों में मौसम बदला हुआ नजर आया। भिंड, श्योपुर, मुरैना, शिवपुरी, ग्वालियर, दतिया, निवाड़ी, गुना, अशोक नगर, टीकमगढ़, सतना के चित्रकूट और रीवा में कहीं तेज आंधी चली तो कहीं बारिश हुई। इसी दौरान शिवपुरी, दतिया, धार, पीथमपुर और झाबुआ में तेज बारिश दर्ज की गई, जबकि रतलाम में धूल भरी हवाएं चलीं। मौसम विभाग के मुताबिक 11 अप्रैल को उत्तर-पश्चिमी क्षेत्र में एक नया वेस्टर्न डिस्टरबेंस सक्रिय होने जा रहा है, जिसका असर मध्य प्रदेश में भी देखने को मिल सकता है। विभाग ने यह भी बताया कि प्रदेश में तेज आंधी चलने की संभावना है। कुछ जिलों में हवा की रफ्तार 40 से 60 किलोमीटर प्रति घंटा तक पहुंच सकती है, जबकि अन्य इलाकों में यह 30 से 40 किलोमीटर प्रति घंटा रह सकती है। आमतौर पर दोपहर बाद मौसम में बदलाव देखने को मिलेगा।