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क्षणिक लोकप्रियता की दौड़ में सिमटता साहित्यिक मूल्य

– डॉ. प्रियंका सौरभ डिजिटल युग ने अभिव्यक्ति के स्वरूप को अभूतपूर्व गति और विस्तार दिया है। आज हर व्यक्ति के हाथ में एक मंच है—एक ऐसा मंच, जहाँ वह अपनी बात तुरंत लाखों लोगों तक पहुँचा सकता है। यह लोकतंत्रीकरण अपने आप में एक बड़ी उपलब्धि है। परंतु हर शक्ति के साथ एक जिम्मेदारी भी जुड़ी होती है। दुर्भाग्यवश, इस जिम्मेदारी का संतुलन कई बार बिगड़ता हुआ दिखाई देता है, विशेषकर तब जब उद्देश्य अभिव्यक्ति नहीं, बल्कि केवल लोकप्रियता रह जाता है। रील संस्कृति इसी असंतुलन का एक प्रमुख उदाहरण है। कुछ सेकंड के वीडियो में प्रभाव पैदा करने की होड़ ने अभिव्यक्ति को त्वरित, संक्षिप्त और कई बार सतही बना दिया है। साहित्य, जो मूलतः धैर्य, गहराई और चिंतन की मांग करता है, वह इस त्वरित उपभोग की संस्कृति में स्वयं को असहज महसूस कर रहा है। अधूरी पंक्तियाँ, संदर्भहीन उद्धरण और बनावटी भाव—ये सब मिलकर साहित्य को एक “उत्पाद” में बदल रहे हैं, जिसका उद्देश्य केवल ध्यान आकर्षित करना है। आज “वायरल होना” ही सफलता का पैमाना बन गया है। इस मानसिकता ने सृजन की प्रक्रिया को प्रभावित किया है। लेखक अब यह सोचकर लिखता है कि क्या यह सामग्री लोगों को तुरंत आकर्षित करेगी, न कि यह कि क्या यह विचार समाज के लिए सार्थक है। परिणामस्वरूप, गहराई की जगह चटकपन और संवेदना की जगह प्रदर्शन ने ले ली है। यह प्रवृत्ति न केवल साहित्य के साथ अन्याय है, बल्कि समाज के बौद्धिक स्तर को भी प्रभावित करती है। साहित्य का मूल उद्देश्य केवल मनोरंजन नहीं है। वह समाज का दर्पण है, जो उसकी वास्तविकताओं को प्रतिबिंबित करता है और उसके अंतर्विरोधों को उजागर करता है। कबीर ने अपने दोहों के माध्यम से सामाजिक कुरीतियों पर प्रहार किया, तुलसीदास ने आस्था और मर्यादा का संदेश दिया, प्रेमचंद ने समाज के यथार्थ को उजागर किया और महादेवी वर्मा ने संवेदनाओं की सूक्ष्मता को शब्द दिए। इन सभी रचनाकारों की कृतियाँ समय की कसौटी पर इसलिए खरी उतरीं क्योंकि उनमें गहराई, ईमानदारी और सामाजिक प्रतिबद्धता थी। इसके विपरीत, आज का एक बड़ा वर्ग साहित्य को केवल प्रस्तुति का माध्यम मान बैठा है। शब्दों की सुंदरता से अधिक महत्व उनके प्रदर्शन को दिया जा रहा है। रील्स में प्रस्तुत की जाने वाली कविताएँ कई बार न तो मौलिक होती हैं और न ही उनमें कोई गहन भाव होता है। वे केवल इस उद्देश्य से बनाई जाती हैं कि दर्शक कुछ क्षणों के लिए आकर्षित हों और “लाइक” या “शेयर” कर दें। रील संस्कृति का एक और चिंताजनक पहलू है—अभिव्यक्ति की शालीनता में गिरावट। भाषा का स्तर, उच्चारण की स्पष्टता और प्रस्तुति की गरिमा—ये सभी तत्व किसी भी साहित्यिक अभिव्यक्ति के महत्वपूर्ण अंग होते हैं। लेकिन जब इनकी अनदेखी की जाती है, तो साहित्य का स्वरूप विकृत हो जाता है। कई बार तो स्थिति यह होती है कि मूल रचना का भाव ही पूरी तरह बदल जाता है। परिधान और दृश्यात्मक प्रस्तुति को लेकर भी बहस तेज हो गई है। यह स्वीकार करना होगा कि अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता प्रत्येक व्यक्ति का अधिकार है, लेकिन हर अधिकार के साथ मर्यादा और जिम्मेदारी भी जुड़ी होती है। जब साहित्य जैसे गंभीर विषय को प्रस्तुत किया जाता है, तो उसमें एक संतुलन और शालीनता अपेक्षित होती है। दुर्भाग्यवश, कई बार यह संतुलन केवल दर्शकों का ध्यान खींचने की कोशिश में खो जाता है, जिससे साहित्य की गंभीरता प्रभावित होती है। हालाँकि, यह भी उतना ही महत्वपूर्ण है कि हम इस पूरी स्थिति को एकांगी दृष्टिकोण से न देखें। सोशल मीडिया ने कई ऐसे प्रतिभाशाली रचनाकारों को मंच दिया है, जो पारंपरिक प्रकाशन व्यवस्था तक नहीं पहुँच पाते थे। आज छोटे-छोटे शहरों और गाँवों से भी लोग अपनी रचनाएँ साझा कर रहे हैं और पहचान बना रहे हैं। यह एक सकारात्मक परिवर्तन है, जिसे नकारा नहीं जा सकता। दरअसल, समस्या माध्यम में नहीं, बल्कि उसके उपयोग के तरीके में है। रील्स भी एक प्रभावी माध्यम हो सकती हैं, यदि उनका उपयोग सार्थक साहित्य प्रस्तुत करने के लिए किया जाए। कुछ रचनाकार इस दिशा में अच्छा कार्य भी कर रहे हैं—वे संक्षिप्तता में भी गहराई बनाए रखते हैं और दर्शकों को सोचने पर मजबूर करते हैं। यह दर्शाता है कि यदि नीयत सही हो, तो कोई भी माध्यम साहित्य के प्रसार का सशक्त उपकरण बन सकता है। आवश्यकता इस बात की है कि हम एक संतुलित दृष्टिकोण अपनाएँ। हमें न तो रील संस्कृति को पूरी तरह खारिज करना चाहिए और न ही उसे बिना किसी आलोचना के स्वीकार करना चाहिए। इसके बजाय, हमें यह समझने की जरूरत है कि किस प्रकार इस माध्यम का उपयोग साहित्य के उत्थान के लिए किया जा सकता है। शिक्षा संस्थानों की भूमिका इस संदर्भ में अत्यंत महत्वपूर्ण है। यदि छात्रों को प्रारंभ से ही साहित्य की गहराई और उसकी सामाजिक भूमिका के बारे में जागरूक किया जाए, तो वे केवल सतही सामग्री से प्रभावित नहीं होंगे। साहित्यिक संगठनों और मंचों को भी चाहिए कि वे डिजिटल माध्यमों का उपयोग करते हुए गुणवत्ता युक्त सामग्री को बढ़ावा दें और रचनाकारों को सही दिशा प्रदान करें। इसके साथ ही, दर्शकों और पाठकों की भूमिका भी कम महत्वपूर्ण नहीं है। जब तक दर्शक सतही सामग्री को बढ़ावा देते रहेंगे, तब तक उसका उत्पादन भी जारी रहेगा। यदि वे गुणवत्ता और गहराई को प्राथमिकता देंगे, तो स्वाभाविक रूप से रचनाकार भी उसी दिशा में प्रयास करेंगे। अंततः, यह एक सामूहिक जिम्मेदारी है—रचनाकारों, दर्शकों, शिक्षकों और समाज के प्रत्येक जागरूक व्यक्ति की। हमें यह तय करना होगा कि हम साहित्य को क्षणिक लोकप्रियता की भेंट चढ़ाना चाहते हैं या उसे उसकी गरिमा और गहराई के साथ आगे बढ़ाना चाहते हैं। रील संस्कृति को रोका नहीं जा सकता, लेकिन उसे दिशा दी जा सकती है। यदि हम सजग रहें और संतुलन बनाए रखें, तो यही माध्यम साहित्य के प्रसार का एक प्रभावी साधन भी बन सकता है। साहित्य केवल शब्दों का संयोजन नहीं है; यह समाज की चेतना, उसकी संवेदनाओं और उसके मूल्यों का प्रतिबिंब है। यदि यह प्रतिबिंब धुंधला पड़ जाएगा, तो समाज की सोच भी अस्पष्ट हो जाएगी। इसलिए यह समय है सजग होने का, साहित्य की गरिमा को पहचानने का और उसे डिजिटल युग में भी उसी सम्मान के साथ आगे

BHIND ROADS CONNECTIVITY : जिला पंचायत ने दी 310 किलोमीटर सड़कों को हरी झंडी, भिंड के 240 मजरा-टोले मुख्य रास्तों से जुड़ेंगे

BHIND ROAD CONNECTIVITY

HIGHLIGHTS: भिंड में 240 मजरा-टोले मुख्य सड़कों से जुड़ेंगे कुल 310 किलोमीटर सड़क निर्माण की स्वीकृति अटेर, भिंड, मेहगांव, गोहद और लहार में सड़कें बनेंगी छूटे क्षेत्रों का पुनः सर्वे कराया जाएगा सड़क संपर्क से कृषि, शिक्षा और रोजगार पर सकारात्मक प्रभाव BHIND ROADS CONNECTIVITY : भिंड। जिले के ग्रामीण विकास को गति देने के लिए जिला पंचायत अध्यक्ष कामना सिंह भदौरिया ने मुख्यमंत्री मजरा-टोला योजना और प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना (चतुर्थ चरण) के तहत 240 सड़कों को स्वीकृति दी है। इन सड़कों की कुल लंबाई लगभग 310 किलोमीटर होगी, जिससे ग्रामीण इलाकों में बसे मजरा-टोले सीधे मुख्य सड़कों से जुड़ जाएंगे। 94 वर्ष की आयु में वरिष्ठ कांग्रेस नेता मोहसिना किदवई का निधन, नोएडा स्थित आवास में अंतिम दर्शन। ग्रामीण जीवन में सुधार की उम्मीद जिला पंचायत अध्यक्ष के अनुसार यह पहल ग्रामीण इलाकों के लिए मील का पत्थर साबित होगी। सड़क संपर्क से आवागमन सुगम होगा, साथ ही शिक्षा, स्वास्थ्य और स्थानीय आर्थिक गतिविधियों को नई गति मिलेगी। जिलेवार सड़क वितरण स्वीकृत कार्यों के अनुसार: अटेर: 66 मजरा-टोले, लगभग 78 किमी भिंड: 37 मजरा-टोले, 43 किमी मेहगांव: 57 मजरा-टोले, 77 किमी गोहद: 65 मजरा-टोले, 86 किमी लहार: 15 मजरा-टोले, 26 किमी ऑटो सेक्टर में झटका: हुंडई ने 1% तक कीमत बढ़ाने का किया ऐलान! छूटे इलाकों का सर्वे फिर से जिला पंचायत अध्यक्ष ने कहा कि प्रथम चरण के सर्वे के आधार पर स्वीकृतियां जारी की गई हैं। जिन क्षेत्रों का नाम सूची में नहीं आया, उनका पुनः सर्वे कराकर शीघ्र प्रस्ताव प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए हैं, ताकि कोई क्षेत्र विकास से वंचित न रहे। स्वतंत्रता और राष्ट्रभक्ति के प्रेरक बंकिमचंद्र चट्टोपाध्याय को मुख्यमंत्री ने किया सम्मानित विशेषज्ञों की राय विशेषज्ञों का मानना है कि सड़क संपर्क मजबूत होने से कृषि उपज के परिवहन में सुविधा, बाजार तक आसान पहुंच और नए रोजगार के अवसर उत्पन्न होंगे। यह पहल भिंड जिले के ग्रामीण विकास को नई दिशा देने वाली साबित होगी।  

AC कोच में पर्स छीनकर भागा शातिर चोर, फिल्मी अंदाज में पुलिस से बचता रहा

जबलपुर। मध्य प्रदेश के जबलपुर में पुलिस और एक शातिर अंतरराज्यीय चोर के बीच मंगलवार शाम ऐसा घटनाक्रम देखने को मिला, मानो किसी फिल्म का सीन हो। एसी कोच में महिला का पर्स छीनकर भगा उत्तरदायी पुलिस से बचने के लिए खितौला रेलवे स्टेशन के पास एक काई से भरे तालाब में कूद गया और करीब 5 घंटे तक पानी के भीतर छिपा रहा। हैरानी की बात यह रही कि वह सांस लेने के लिए कमल की नाल का इस्तेमाल करता रहा। ट्रेन में वारदात, फिर कूदकर भागा आरोपीघटना Rewa-Itwari Express की है, जहां एसी कोच में एक महिला का पर्स छीनने की कोशिश के दौरान आरोपी आरपीएफ की नजर में आ गया। जैसे ही ट्रेन सिहोरा रोड स्टेशन के पास धीमी हुई, आरोपी चेन पुलिंग कर ट्रेन से कूद गया और मौके से भागने लगा। आरपीएफ जवानों ने पीछा किया तो वह खितौला क्षेत्र के एक गहरे तालाब में जा कूदा। तालाब में छिपकर बनाया अनोखा प्लानपुलिस और गोताखोरों की टीम ने जब तलाश शुरू की, तो आरोपी कहीं नजर नहीं आया। बाद में पता चला कि उसने खुद को पूरी तरह पानी में डुबो रखा था और केवल कमल की नाल के जरिए सांस ले रहा था। घनी काई और अंधेरे की वजह से उसे ढूंढना बेहद मुश्किल हो गया। करीब 5 घंटे की मशक्कत के बाद गोताखोरों ने उसे पकड़ लिया। ‘सनी’ नाम से खुली पहचान की गुत्थीगिरफ्तारी के बाद आरोपी लगातार पुलिस को गुमराह करता रहा। उसने अपना नाम बबलू और पता चंडीगढ़ बताया। लेकिन आरपीएफ थाना प्रभारी को शक हुआ और उन्होंने पुराने रिकॉर्ड खंगाले। जैसे ही उन्होंने उसे ‘सनी’ नाम से पुकारा, आरोपी घबरा गया और अपनी असली पहचान बता दी। 400 से ज्यादा चोरियों का मास्टरमाइंडपूछताछ में खुलासा हुआ कि आरोपी का असली नाम Harvinder Singh है, जिसकी उम्र 32 साल है और वह उत्तर प्रदेश के बिजनौर का रहने वाला है। वह देशभर में 400 से ज्यादा चोरी की वारदातों को अंजाम दे चुका है। चौंकाने वाली बात यह है कि वह 2017 में अपने इलाके में निर्दलीय पार्षद भी रह चुका है। ट्रेन में चोरी का मास्टर प्लानआरोपी का तरीका भी बेहद शातिर था। वह अक्सर एसी कोच को निशाना बनाता था और बिना टिकट सफर करता था। टीसी से बचने के लिए बाथरूम में छिप जाता और मौका मिलते ही यात्रियों के कीमती सामान पर हाथ साफ कर देता। 2018 में उसके पास से करीब 70 लाख रुपए के हीरे-जवाहरात भी बरामद किए गए थे। कई राज्यों की पुलिस को थी तलाशहरविंदर सिंह के खिलाफ मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, आंध्र प्रदेश सहित कई राज्यों में मामले दर्ज हैं। वह हर वारदात के बाद सिम बदल लेता था और पहचान छिपाने के लिए कोई आईडी अपने पास नहीं रखता था। फिलहाल पुलिस और आरपीएफ उससे अन्य मामलों में पूछताछ कर रही है।

94 वर्ष की आयु में वरिष्ठ कांग्रेस नेता मोहसिना किदवई का निधन, नोएडा स्थित आवास में अंतिम दर्शन।

नई दिल्ली। भारतीय राजनीति की वरिष्ठ और सम्मानित नेता, पूर्व केंद्रीय मंत्री मोहसिना किदवई का आज सुबह 4 बजे निधन हो गया। 94 वर्ष की आयु में उनकी यह विदाई स्वास्थ्य संबंधी जटिलताओं के कारण हुई। उन्हें 8 अप्रैल को दिल्ली के एक अस्पताल में भर्ती कराया गया था, जहां उनका इलाज चल रहा था। उनका पार्थिव शरीर नोएडा स्थित उनके आवास में अंतिम दर्शन के लिए रखा गया, जिसके बाद आज शाम 5 बजे उन्हें निजामुद्दीन स्थित शवदाह गृह में सुपर्द-ए-खाक किया जाएगा। मोहसिना किदवई का जन्म 1 जनवरी 1932 को उत्तर प्रदेश के बाराबंकी में हुआ था। उन्होंने कम उम्र में ही राजनीति में कदम रखा और राज्य स्तर से राष्ट्रीय राजनीति में अपनी पहचान बनाई। उन्होंने कई बार लोकसभा सदस्य के रूप में उत्तर प्रदेश के मेरठ संसदीय क्षेत्र का प्रतिनिधित्व किया और बाद में 2004 से 2016 तक छत्तीसगढ़ से राज्यसभा की सदस्य रहीं। अपने राजनीतिक करियर के दौरान उन्होंने संसद में कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर सक्रिय भूमिका निभाई और नीति निर्माण में योगदान दिया। मोहसिना किदवई ने प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी और राजीव गांधी की सरकारों में कई केंद्रीय मंत्रालयों की जिम्मेदारी संभाली। उनके मंत्रालयों में ग्रामीण विकास, स्वास्थ्य और परिवार कल्याण, परिवहन और शहरी विकास शामिल थे। उनके नेतृत्व में इन क्षेत्रों में कई महत्वपूर्ण योजनाओं और नीतियों का कार्यान्वयन हुआ। कांग्रेस पार्टी में उनका योगदान भी उल्लेखनीय रहा। वे कांग्रेस वर्किंग कमेटी की सदस्य रहीं और अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी की महासचिव के रूप में पार्टी संगठन और रणनीति में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उन्होंने युवा नेताओं को मार्गदर्शन दिया और पार्टी के निर्णयों एवं नीतियों के निर्माण में सक्रिय योगदान दिया। मोहसिना किदवई की राजनीतिक यात्रा लंबी और प्रभावशाली रही। उन्होंने हमेशा महिला और वंचित वर्गों के सशक्तिकरण, सामाजिक न्याय और विकास के मुद्दों को प्राथमिकता दी। उनकी नीति और नेतृत्व क्षमता ने उन्हें पार्टी और संसद में एक विशिष्ट स्थान दिलाया। उनकी अचानक विदाई से भारतीय राजनीति और कांग्रेस पार्टी एक सम्मानित नेता को खो चुकी है।

जबलपुर में एक साल बाद कब्र से निकाला गया शव, हाईकोर्ट ने जताई सख्ती

जबलपुर। मध्य प्रदेश के जबलपुर में एक साल पुराने मामले ने नया मोड़ ले लिया है। गयासुद्दीन कुरैशी का शव बुधवार को हाईकोर्ट के आदेश के बाद कब्र से निकाला गया। पूरी प्रक्रिया एसडीएम अधारताल की स्वीकृति में कराई गई और शव को गवाहों के लिए नेताजी सुभाष चंद्र बोस मेडिकल कॉलेज भेजा गया, जहां उसी दिन जांच कराई जानी है। हाईकोर्ट का सख्त रुख: “देरी बर्दाश्त नहीं होगी”मामले की सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच, जिसमें Justice Vivek Agarwal और Justice AK Singh शामिल थे, ने स्पष्ट कहा कि सच्चाई सामने लाने के लिए तुरंत कार्रवाई जरूरी है। कोर्ट ने आदेश दिया था कि बुधवार दोपहर 1 बजे तक शव को कब्र से निकालकर उसी दिन पोस्टमार्टम कराया जाए। साथ ही प्रशासन को निर्देश दिए गए कि पूरी प्रक्रिया मजिस्ट्रेट की निगरानी में हो। परिवार को भी दिए गए थे निर्देशकोर्ट ने मृतक के परिवार पत्नी, पुत्र और भाई को सुबह 11 बजे एसडीएम के समक्ष उपस्थित रहने के निर्देश दिए थे। कोर्ट ने यह भी कहा कि यदि याचिकाकर्ता कसीमुद्दीन कुरैशी समय पर उपस्थित नहीं होता है, तो उसके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। सड़क हादसे के बाद हुई थी मौत, भाई ने जताई हत्या की आशंकागयासुद्दीन कुरैशी 26 मार्च 2025 को सड़क हादसे में घायल हुए थे। पहले उनका इलाज जबलपुर में और बाद में नागपुर में कराया गया, जहां 27 मार्च को उनकी मौत हो गई। इसके बाद बिना विस्तृत जांच के शव को दफना दिया गया था।हालांकि, मृतक के भाई कसीमुद्दीन कुरैशी ने मौत को संदिग्ध बताते हुए हत्या की आशंका जताई। उनका कहना है कि डिस्चार्ज रिपोर्ट में सीने पर चोट के निशान थे, जिससे मामले में संदेह पैदा हुआ। पुलिस से शिकायत के बावजूद कार्रवाई न होने पर उन्होंने जनवरी 2026 में हाईकोर्ट में याचिका दायर की। सुनवाई में दोनों पक्षों ने रखे तर्कराज्य सरकार की ओर से उप महाधिवक्ता वीर विक्रांत सिंह ने कहा कि अपीलकर्ता जांच में सहयोग नहीं कर रहा है। वहीं, याचिकाकर्ता के वकील अभिनव उमाशंकर तिवारी ने मौत को संदिग्ध बताते हुए पोस्टमार्टम की मांग की। अन्य पक्षों की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता मनीष दत्त और अधिवक्ता मयंक शर्मा भी उपस्थित रहे। अब पोस्टमार्टम से खुलेगा राजइस पूरे मामले में अब सबसे अहम कड़ी पोस्टमार्टम रिपोर्ट होगी, जिससे यह साफ हो सकेगा कि गयासुद्दीन की मौत सामान्य दुर्घटना थी या इसके पीछे कोई साजिश थी। पुलिस जांच पर भी उठे सवालमृतक के भाई का आरोप है कि हादसे के बाद पुलिस ने बिना पोस्टमार्टम के शव को दफना दिया, जिससे कई सवाल खड़े होते हैं। उन्होंने पहले जबलपुर एसपी से जांच की मांग की थी, लेकिन कार्रवाई न होने पर कोर्ट का दरवाजा खटखटाया।

उज्जैन में भव्य भस्म आरती: सितारों ने नंदी हॉल में दर्शन कर अनुभव साझा किया

उज्जैन। बुधवार की सुबह विश्व प्रसिद्ध ज्योतिर्लिंग श्री महाकालेश्वर मंदिर में भव्य दृश्य देखने को मिला। मंदिर की तड़के सुबह होने वाली भस्म आरती में टीवी और फिल्म इंडस्ट्री की प्रसिद्ध अभिनेत्रियाँ उल्का गुप्ता और मोनाल गज्जर के साथ-साथ प्रसिद्ध गायिका किंजल दवे और पूर्व क्रिकेटर सुनील जोशी शामिल हुए। मंदिर प्रबंध समिति ने सभी का स्वागत किया और उन्हें नंदी हॉल में बैठने की व्यवस्था कर दर्शन का अनुभव कराया। महाकालेश्वर मंदिर में भस्म आरती का आयोजन हर दिन कई वीआईपी और वीवीआईपी के लिए आकर्षण का केंद्र रहता है। इस आरती में भक्त और दर्शक बाबा महाकाल के दर पर उपस्थित होकर आशीर्वाद प्राप्त करते हैं। आज इस अवसर पर आए सितारों ने न केवल आरती में भाग लिया बल्कि अपने अनुभव भी साझा किए। उल्का गुप्ता ने कहा कि महाकाल की भस्म आरती का अनुभव अवर्णनीय था। उन्होंने बताया कि शिवलिंग का श्रृंगार और जल अर्पित होते हुए देखकर उनके आंखों में आंसू निकल आए। उल्का ने कहा कि 2013 में जब वे मंदिर आई थीं, तब व्यवस्था अलग थी लेकिन 2026 में व्यवस्थाएं काफी सुधार गई हैं और मंदिर में दर्शन का अनुभव और भी प्रभावशाली हो गया है। गायिका किंजल दवे ने कहा कि भस्म आरती का अनुभव अद्भुत था और उन्होंने समस्त सृष्टि में शांति की कामना की। उन्होंने महाकालेश्वर मंदिर की भव्यता और आयोजन की व्यवस्था की सराहना की। फिल्म अभिनेत्री मोनाल गज्जर ने भी मंदिर व्यवस्थाओं की जमकर प्रशंसा की और साथ ही मध्य प्रदेश सरकार का आभार जताया। उन्होंने कहा कि मंदिर में आकर आस्था और श्रद्धा का अनुभव और भी प्रगाढ़ हो गया। पूर्व क्रिकेटर सुनील जोशी ने इस भव्य आरती में शामिल होकर अपने अनुभव साझा किए। उन्होंने कहा कि भस्म आरती में शामिल होना उनके लिए विशेष था। उन्होंने क्रिकेट की उपलब्धियों का भी जिक्र किया और कहा कि भारत ने पुरुष, महिला और अंडर 19 टीमों के साथ तीन विश्व कप जीतकर गौरवपूर्ण परंपरा कायम की है। उनके लिए आज का दिन, भक्ति और खेल दोनों के दृष्टिकोण से बहुत ही यादगार रहा। भस्म आरती में उपस्थित सभी सितारों ने नंदी हॉल में बैठकर श्रद्धालुओं के साथ आरती का आनंद लिया। मंदिर प्रबंधन ने सुरक्षा और व्यवस्थाओं का विशेष ध्यान रखा। दर्शन करने आए श्रद्धालुओं और मीडिया कर्मियों ने भी इस भव्य आयोजन का हिस्सा बनकर आस्था का अनुभव किया। उज्जैन महाकालेश्वर मंदिर की भस्म आरती न केवल धार्मिक दृष्टि से बल्कि पर्यटन और सांस्कृतिक दृष्टि से भी महत्वपूर्ण है। इस अवसर पर मंदिर आने वाले लोग शिवलिंग के दर्शन के साथ-साथ सितारों को भी देखने का अनुभव प्राप्त करते हैं। आज के इस भव्य आयोजन ने स्पष्ट कर दिया कि महाकालेश्वर मंदिर में आस्था, भक्ति और आधुनिक व्यवस्थाओं का समन्वय हर साल नए अनुभव और ऊर्जा से भर देता है।

आंधी-बारिश का दौर जारी, 9 अप्रैल तक मौसम रहेगा बदला-बदला

शिवपुरी। मध्य प्रदेश के शिवपुरी में मंगलवार रात मौसम ने अचानक करवट ली और तेज तूफान के साथ हुई बारिश ने जनजीवन को प्रभावित कर दिया। रात करीब 9 बजे शुरू हुई तेज आंधी करीब एक घंटे तक रुक-रुक कर बारिश होती रही, इसके बाद पूरी रात रुक-रुक कर बारिश होती रही। रविवार की सुबह शहर की कई सड़कों पर पानी भर गया, जिससे लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ा। तूफान-बारिश और बिजली की गड़गड़ाहट से तूफानी मौसमदिन में हुई वर्षा के बाद रात को मौसम और अधिक मात्रा में वर्षा हुई। तेज़ हवाओं के साथ शुरू हुई बारिश के दौरान आसमान में लगातार बिजली चमकती रही और बारिश के बीच आसमान में चमकती चमकती किरणें जारी रहीं। देर रात तक तेज हवा का असर बना रहा, जिससे कई जगहों पर झलकियां भी देखने को मिलीं। बोनस में गिरा होर्डिंग, बड़ा दोस्ती टालातेज़ तूफ़ान का असर इतना ज़्यादा था कि तेज़ तूफ़ान में एक बड़ा होर्डिंग गिर गया। हालाँकि, राहत की बात यह चल रही है कि इस घटना में किसी के हताहत होने या बड़े नुकसान की कोई सूचना नहीं मिली है। यह इवेंट सीज़न की झलक जरूर देखें। बारिश से मिली गर्मी से राहतरात भर हुई बारिश के मौसम में ठंड पड़ गई और लोगों को भीषण गर्मी से राहत मिली। रविवार की सुबह भी आकाश में बादल छाए रहे और समुद्र-तट पर धूप बहती रही। त्यौहार और सूरज के बीच आंख-मिचौली का यह गोदाम भंडार रहा। 9 अप्रैल तक जारी रहेगा मौसम का असरमौसम विभाग के अनुसार, राज्य में सक्रिय रिचार्जेबल सिस्टम के कारण 9 अप्रैल तक तूफान, बारिश और गार्जियन-चमक का दौर जारी रह सकता है। मध्य प्रदेश के कई आदर्श, विशेष रूप से ज्वालामुखी-चंबल कमांडर और आसपास के क्षेत्र में बारिश और बिजली गिरने की संभावना बनी हुई है। सावधानी बरतने की सलाहविशेषज्ञ ने लोगों को सलाह दी कि खराब मौसम के दौरान खुले में जगह पर जाने से बचें और आकाशीय बिजली के समय सुरक्षित जगह पर रहें। किसानों को भी मौसम को देखते हुए अपनी फसल की सुरक्षा के लिए जरूरी कदम उठाने की सलाह दी गई है।

शिवपुरी में छात्र से मारपीट और लूट, पार्षद ने पुलिस पर लगाए गंभीर आरोप

शिवपुरी। मध्य प्रदेश के शिवपुरी में एक छात्र के साथ मारपीट की घटना ने तूल पकड़ लिया। फिजिकल थाना क्षेत्र स्थित वन विहार कॉलोनी में 12वीं कक्षा के छात्र के साथ तीन युवकों द्वारा की गई मारपीट के विरोध में वार्ड क्रमांक 26 के पार्षद एमडी गुर्जर परिजनों के साथ थाने पहुंच गए और धरने पर बैठ गए। इस घटना ने इलाके में कानून-व्यवस्था को लेकर कई सवाल खड़े कर दिए हैं। ट्यूशन से लौटते वक्त छात्र पर हमलाजानकारी के मुताबिक, वन विहार कॉलोनी निवासी 12वीं का छात्र अनुज शर्मा जब मंगलवार शाम ट्यूशन से घर लौट रहा था, तभी रास्ते में तीन युवकों ने उसे रोक लिया। आरोप है कि एक युवक ने जलती हुई सिगरेट उसके चेहरे पर फेंकी, जिससे वह घबरा गया। इसके बाद आरोपियों ने उससे शराब के लिए पैसे मांगे और विरोध करने पर मारपीट की। युवकों ने छात्र से 440 रुपए भी छीन लिए और मौके से फरार हो गए। इलाके में सक्रिय गैंग पर पार्षद का आरोपघटना से नाराज पार्षद एमडी गुर्जर ने आरोप लगाया कि क्षेत्र में कुछ युवकों का गैंग सक्रिय है, जो दबदबा बनाने और शराब के लिए पैसे वसूलने के नाम पर लोगों से मारपीट करता है। उन्होंने कहा कि ये युवक पढ़ाई कर रहे छात्रों को भी अपने गिरोह में शामिल करने की कोशिश करते हैं, जिससे उनका भविष्य खराब हो रहा है। पार्षद के मुताबिक, इस गैंग के सदस्यों पर पहले से करीब 10 एफआईआर दर्ज हैं, लेकिन इसके बावजूद सख्त कार्रवाई नहीं हुई। पुलिस पर संरक्षण देने के आरोपपार्षद ने पुलिस पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि इन आरोपियों को संरक्षण मिल रहा है। उन्होंने दावा किया कि कुछ आरोपी पुलिस के लिए दलाली करते हैं, इसलिए उनके खिलाफ कार्रवाई नहीं होती। पार्षद ने एक वायरल वीडियो का भी जिक्र किया, जिसमें कुछ नाबालिग पुलिस के खिलाफ अभद्र भाषा का इस्तेमाल करते दिखे थे, लेकिन उस मामले में भी सिर्फ समझाइश देकर छोड़ दिया गया। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि एक पुलिसकर्मी द्वारा बच्चों के परिजनों से पैसे मांगने की बात सामने आई है, जिसके वीडियो साक्ष्य उनके पास मौजूद हैं। देर रात तक चला धरना, कार्रवाई के बाद खत्ममंगलवार रात करीब 8 बजे शुरू हुआ धरना देर रात साढ़े 11 बजे तक चलता रहा। पार्षद और परिजनों ने आरोपियों की गिरफ्तारी और सख्त कार्रवाई की मांग की। आखिरकार पुलिस ने एफआईआर दर्ज करने और जल्द गिरफ्तारी का आश्वासन दिया, जिसके बाद धरना समाप्त किया गया। पुलिस ने दर्ज की एफआईआर, आरोपों से किया इनकारइस मामले में थाना प्रभारी नम्रता भदोरिया ने बताया कि छात्र अनुज शर्मा की शिकायत पर पुलिस ने अन्नू गुर्जर, राजवीर गुर्जर और शेरा गुर्जर के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर ली है। उन्होंने कहा कि पुलिस हमेशा आरोपियों पर सख्त कार्रवाई करती है और पार्षद द्वारा लगाए गए आरोप पूरी तरह निराधार हैं। कानून-व्यवस्था पर उठे सवालइस घटना के बाद इलाके में सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ गई है। स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि समय रहते सख्त कार्रवाई नहीं की गई, तो ऐसे मामलों में और बढ़ोतरी हो सकती है।

महिला ने पुलिस को कहा कि पर्यटक स्थानीय रोज़ी‑रोटी का स्रोत हैं, लेकिन स्थिति प्रशासन द्वारा नियंत्रण में लाई गई।

नई दिल्ली। ऋषिकेश के गंगा किनारे एक हरियाणा की महिला पर्यटक और स्थानीय पुलिस के बीच तीखी बहस का वीडियो वायरल हो गया है। यह घटना 6 अप्रैल को नीलकंठ मार्ग के फूलचट्टी क्षेत्र के पास हुई, जहां महिला को सार्वजनिक और पवित्र क्षेत्र में शराब पीते हुए रोका गया। वीडियो में दिखाई देता है कि जब पुलिसकर्मियों ने महिला को स्थानीय नियमों और पवित्रता बनाए रखने के आधार पर टोका, तो महिला ने नाराजगी जताई और पुलिस पर चिल्लाते हुए कहा कि ‘तुम्हारी रोज़ी‑रोटी हम पर्यटकों से चलती है।’ महिला ने यह भी कहा कि वह अपने पैसों से शराब पी रही है और पर्यटकों को बेवजह निशाना बनाया जा रहा है। महिला का यह तर्क था कि पर्यटन स्थानीय अर्थव्यवस्था को सहारा देता है और इसलिए उन्हें ऐसा करने से रोका नहीं जाना चाहिए। मामला तब और बढ़ गया जब महिला का रवैया आक्रामक होता चला गया। इस दौरान उसके पति ने बीच‑बचाव किया और महिला को वहां से ले गए, जिससे स्थिति शांत हुई। इस घटना के वीडियो ने सोशल मीडिया पर व्यापक बहस छेड़ दी है। कई लोगों ने महिला के व्यवहार की आलोचना की और कहा कि पर्यटन से रोजगार मिलता है, लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि धार्मिक और पवित्र स्थलों पर मर्यादा का उल्लंघन किया जाए। ऋषिकेश एक आध्यात्मिक केंद्र है, जहां गंगा नदी की पवित्रता बनाए रखने के लिए कई इलाकों में शराब और मांसाहार पर सख्त पाबंदी है। घाटों और नदी किनारे प्रशासन और पुलिस द्वारा नियमित निगरानी की जाती है, ताकि धार्मिक और पर्यावरणीय मानकों का पालन सुनिश्चित किया जा सके। सोशल मीडिया पर इस घटना पर लोगों ने टिप्पणियों में कहा कि पर्यटक का पैसा स्वागत योग्य है, लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि गंगा जैसे पवित्र स्थल को बार काउंटर समझा जाए। कई ने यह भी लिखा कि यात्रा के दौरान वहां की संस्कृति और भावनाओं का सम्मान करना अनिवार्य है।

ऑटो सेक्टर में झटका: हुंडई ने 1% तक कीमत बढ़ाने का किया ऐलान!

नई दिल्ली। देश की प्रमुख ऑटोमोबाइल कंपनी Hyundai Motor India Limited (एचएमआईएल) ने अपने ग्राहकों को झटका देते हुए कारों की कीमतों में बढ़ोतरी का ऐलान किया है। कंपनी ने बताया कि 1 मई 2026 से उसकी गाड़ियों की कीमतों में अधिकतम 1 प्रतिशत तक की वृद्धि की जाएगी। यह बढ़ोतरी अलग-अलग मॉडल और वेरिएंट के आधार पर लागू होगी, यानी हर गाड़ी पर इसका असर अलग-अलग देखने को मिलेगा। लागत बढ़ने का असर, ग्राहकों पर डाला जाएगा आंशिक भारकंपनी ने एक्सचेंज फाइलिंग में साफ किया है कि इनपुट लागत में लगातार हो रही बढ़ोतरी के कारण यह फैसला लेना पड़ा है। Hyundai Motor India Limited ने कहा कि वह हमेशा लागत बढ़ने के बावजूद कीमतों को स्थिर रखने की कोशिश करती रही है, ताकि ग्राहकों पर ज्यादा बोझ न पड़े। लेकिन अब परिस्थितियां ऐसी हो गई हैं कि लागत का कुछ हिस्सा ग्राहकों तक पहुंचाना जरूरी हो गया है। बिक्री के मोर्चे पर मजबूत प्रदर्शनकीमतें बढ़ाने के बावजूद कंपनी की बिक्री के आंकड़े मजबूत बने हुए हैं। मार्च 2026 में एचएमआईएल ने कुल 69,004 यूनिट्स की बिक्री दर्ज की, जो पिछले साल के मुकाबले 2.5 प्रतिशत ज्यादा है। इसमें घरेलू बिक्री 55,064 यूनिट्स रही, जो मार्च महीने के लिए अब तक का सबसे बड़ा आंकड़ा है और इसमें सालाना आधार पर 6.3 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गई। तिमाही और तिमाही में भी रिकॉर्ड प्रदर्शनजनवरी से मार्च 2026 के बीच कंपनी की कुल बिक्री 2,08,275 यूनिट्स रही, जो पिछले साल की तुलना में 8.7 प्रतिशत ज्यादा है। चौथी तिमाही में घरेलू बिक्री 1,66,578 यूनिट्स तक पहुंच गई, जो कंपनी के इतिहास में किसी भी तिमाही का सबसे बड़ा आंकड़ा है। यह पिछले साल के मुकाबले 8.5 प्रतिशत की वृद्धि को दर्शाता है। निर्यात में भी दिखी तेजीघरेलू बाजार के साथ-साथ निर्यात के मोर्चे पर भी कंपनी ने बेहतर प्रदर्शन किया है। इस दौरान निर्यात 9.4 प्रतिशत बढ़कर 41,697 यूनिट्स तक पहुंच गया, जो अंतरराष्ट्रीय बाजारों में भी कंपनी की मजबूत पकड़ को दिखाता है। टाटा मोटर्स ने भी बढ़ाए दामऑटो सेक्टर में कीमतों में बढ़ोतरी का यह ट्रेंड सिर्फ हुंडई तक सीमित नहीं है। Tata Motors ने भी हाल ही में अपने पैसेंजर वाहनों की कीमतों में 0.5 प्रतिशत तक की वृद्धि की है, जो 1 अप्रैल 2026 से लागू हो चुकी है। इसके अलावा कंपनी ने अपने कमर्शियल वाहनों की कीमतों में 1.5 प्रतिशत तक बढ़ोतरी की है। कंपनी के एमडी और सीईओ Shailesh Chandra के मुताबिक, लगातार बढ़ती कमोडिटी और इनपुट लागत के कारण यह कदम उठाना जरूरी हो गया था। आगे क्या होगा असर?विशेषज्ञों का मानना है कि ऑटो सेक्टर में बढ़ती लागत और सप्लाई चेन से जुड़े दबाव के चलते आने वाले समय में अन्य कंपनियां भी कीमतों में बढ़ोतरी कर सकती हैं। इसका असर ग्राहकों की खरीदारी पर भी पड़ सकता है, खासकर एंट्री-लेवल सेगमेंट में।