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हिन्दी का साउथ में भी दबदबा…. कर्नाटक में 93% छात्रों ने तीसरी भाषा के रूप में किया चयन

नई दिल्ली। हिंदी भाषा (Hindi Language) को लेकर अकसर ही देश में एक वर्ग नॉर्थ बनाम साउथ की डिबेट (North vs. South debate) चलाता रहा है। तमिलनाडु (Tamil Nadu) के मुख्यमंत्री एमके स्टालिन (Chief Minister MK Stalin) तो कई बार केंद्र सरकार पर आरोप लगा चुके हैं कि हिंदी थोपने का प्रयास किया जा रहा है। लेकिन यह भी सच है कि देश के अलग-अलग हिस्सों में हिंदी स्वाभाविक रूप से बड़ी आबादी द्वारा ना सिर्फ स्वीकार की जा रही है बल्कि उसके महत्व को समझते हुए सीखने के प्रयास भी हो रहे हैं। इसका उदाहरण कर्नाटक स्टेट बोर्ड के नतीजों ने भी प्रस्तुत किया है। कर्नाटक स्कूल बोर्ड के छात्रों में से कुल 93 फीसदी ऐसे रहे हैं, जिन्होंने तीसरी भाषा के रूप में हिंदी का चयन किया। नई शिक्षा नीति के तहत त्रिभाषा फॉर्मूला लागू किया है। इसके अनुसार छात्र अंग्रेजी सीखेंगे। इसके अलावा एक स्थानीय भाषा वे अपने अनुसार चुन सकते हैं। फिर वे तीसरी भाषा के तौर पर अन्य किसी भी भाषा को स्वीकार कर सकते हैं। कर्नाटक में 93 फीसदी छात्रों ने हिंदी को तीसरी भाषा के रूप में चुना है। कर्नाटक बोर्ड में कुल 8.1 लाख छात्रों ने तीसरी भाषा को चुना है और इनमें से 7.5 लाख लोगों ने हिंदी का ही विकल्प पसंद किया है। कोंकणी, मराठी, उर्दू, अरबी जैसी भाषाओं को भी कुछ छात्रों ने तीसरी भाषा के रूप में चुना है। इस आंकड़े ने हिंदी भाषा की लोकप्रियता को स्थापित किया है। हिंदी को लेकर अमित शाह ने जब कहा था कि यह देश की संपर्क भाषा है और इसका विस्तार जरूरी है तो तमिलनाडु के सीएम एमके स्टालिन ने विरोध किया था। उनका कहना था कि हिंदी को थोपा जा रहा है, जबकि देश में तमिल सबसे पुरानी भाषा है। तमिलनाडु के लोगों का मानना है कि उनकी भाषा दुनिया की सबसे प्राचीन भाषाओं में से एक है। त्रिभाषा नीति से विरोध खत्म करने की कोशिश, सबको मिलेगा महत्वत्रिभाषा नीति के जरिए सरकार ने इसी विरोधाभास को खत्म करने का प्रयास किया है। इसके अलावा भाषा के चलते पैदा होने वाले विवादों में भी इससे कमी आएगी। इस नीति के तहत सरकार ने हिंदी, अंग्रेजी के साथ ही स्थानीय भाषाओं को भी प्रोत्साहित करने का प्रयास किया है। ऐसे में यदि कर्नाटक में 93 फीसदी छात्रों ने हिंदी भाषा को तीसरे विकल्प के तौर पर चुना तो यह अच्छी खबर है। पहले जब होम मिनिस्टर अमित शाह ने हिंदी भाषा को लेकर बयान दिया था तो एमके स्टालिन ने आपत्ति जताई थी। हालांकि कुछ सर्वे दावा करते रहे हैं कि तमिलनाडु में भी हिंदी का तेजी से प्रसार हो रहा है।

राका के गहरे अर्थ और अत्याधुनिक तकनीक के प्रयोग से तैयार हो रही एक वैश्विक सिनेमाई पहचान..

नई दिल्ली:  भारतीय फिल्म जगत के दो सबसे प्रभावशाली सितारों के बीच बढ़ते आपसी तालमेल ने मनोरंजन की दुनिया में एक नई हलचल पैदा कर दी है। बॉलीवुड के शीर्ष अभिनेता ने दक्षिण भारतीय फिल्मों के सुपरस्टार की आगामी फिल्म के प्रति अपना विशेष समर्थन और उत्साह व्यक्त किया है। राका शीर्षक से बन रही इस फिल्म को लेकर जिस तरह की चर्चाएं गर्म हैं, उसने प्रशंसकों के बीच बेसब्री को चरम पर पहुंचा दिया है। एक प्रतिष्ठित मंच पर की गई इस सराहना ने यह स्पष्ट कर दिया है कि आने वाले समय में भारतीय सिनेमा की सीमाएं पूरी तरह समाप्त होने वाली हैं और कला का एक वैश्विक स्वरूप सामने आने वाला है। राका शब्द का अर्थ और इसके पीछे का रहस्य फिल्म की सबसे आकर्षक कड़ी माना जा रहा है। सामान्यतः इसे पूर्ण चंद्रमा की आभा से जोड़ा जाता है, लेकिन फिल्म की कहानी में इसके संकेत एक शक्तिशाली और रहस्यमयी नायक की ओर इशारा करते हैं। इस परियोजना का निर्देशन एक ऐसे फिल्मकार कर रहे हैं जिन्होंने हाल के वर्षों में अपनी अनूठी शैली और भव्य प्रस्तुति से बॉक्स ऑफिस के समीकरण बदल दिए हैं। फिल्म के बजट को लेकर जो जानकारी सामने आ रही है, वह इसे देश की सबसे महंगी और महत्वाकांक्षी फिल्मों की श्रेणी में खड़ा करती है। निर्माण कार्य में प्रयुक्त हो रही तकनीक और विशाल स्तर पर तैयार किए गए सेट इस बात का प्रमाण हैं कि दर्शकों को पर्दे पर एक अभूतपूर्व अनुभव मिलने वाला है। इस फिल्म के प्रति बॉलीवुड के दिग्गज कलाकार द्वारा दिखाया गया उत्साह न केवल उनके उदार व्यक्तित्व को दर्शाता है, बल्कि यह फिल्म उद्योग में बढ़ते भाईचारे का भी प्रतीक है। फिल्म जगत के विशेषज्ञों का मानना है कि जब उत्तर और दक्षिण की प्रतिभाएं इस स्तर पर एक-दूसरे का मनोबल बढ़ाती हैं, तो उसका सीधा लाभ फिल्म की पहुंच और उसकी सफलता को मिलता है। इस बड़े बजट की फिल्म की पटकथा को बहुत बारीकी से तैयार किया गया है, जिसमें उच्च स्तरीय एक्शन के साथ-साथ भावनाओं का भी गहरा पुट देखने को मिलेगा। फिल्म निर्माण में किसी भी प्रकार का समझौता नहीं किया जा रहा है और विजुअल इफेक्ट्स पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। सिनेमा के दीवानों के लिए यह फिल्म किसी बड़े उत्सव से कम नहीं होने वाली है। जिस तरह से प्रमुख कलाकारों ने इस प्रोजेक्ट को लेकर अपनी सकारात्मक राय रखी है, उससे फिल्म की साख में भारी इजाफा हुआ है। बड़े निवेश और बेहतरीन निर्देशन के संगम से तैयार हो रही यह फिल्म निश्चित रूप से आने वाले समय में बॉक्स ऑफिस पर सफलता के नए मानक स्थापित करेगी। फिलहाल सभी की निगाहें इस फिल्म की पहली झलक और इसकी रिलीज की तारीख पर टिकी हैं, क्योंकि यह भारतीय सिनेमा के इतिहास में एक मील का पत्थर साबित हो सकती है। भारतीय सिनेमा के दो बड़े सितारों के बीच बढ़ते सहयोग और निर्देशक की भव्य बजट वाली फिल्म राका के अर्थ एवं उसकी तकनीकी विशेषताओं पर केंद्रित एक विशेष लेख।

घबराहट और बेचैनी का असली कनेक्शन, दिल और पेट के बीच संबंध

नई दिल्ली।आजकल कई लोग अचानक बेचैनी, घबराहट और दिल की तेज़ धड़कन जैसी समस्याओं का सामना कर रहे हैं। आम धारणा यह है कि यह सब सिर्फ मानसिक तनाव या हृदय रोगों की वजह से होता है, लेकिन विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसा नहीं है। असल में, पेट और पाचन संबंधी गड़बड़ियां इस तरह के लक्षण पैदा कर सकती हैं। अगर पाचन ठीक नहीं है, तो गैस बनना, पेट में भारीपन महसूस होना या कब्ज जैसी समस्याएं सीधे दिल और मानसिक स्थिति पर असर डाल सकती हैं। पाचन की गड़बड़ी और हृदय की प्रतिक्रियाजब पेट में अपच या गैस बनती है, तो इसका दबाव सीने और हृदय पर पड़ता है। कई बार लोग इसे हार्ट अटैक का संकेत मानकर घबरा जाते हैं। आयुर्वेद में भी माना गया है कि मन और पेट का गहरा संबंध है। अगर पेट स्वस्थ नहीं है, तो मन अशांत रहता है और दिल की धड़कन असामान्य रूप से तेज़ हो सकती है। साथ ही, बार-बार घबराहट, अपच, पेट फूलना और खट्टी डकार जैसी समस्याएं शरीर में टॉक्सिन बनने का संकेत देती हैं। टॉक्सिन और कब्ज: स्वास्थ्य पर गहरा असरशरीर में टॉक्सिन बढ़ने से पाचन विकार तेजी से सामने आते हैं। इससे कब्ज, गैस और पेट फूलने की समस्या बार-बार होती रहती है। लोग इसे मामूली समझकर नजरअंदाज कर देते हैं, लेकिन लगातार यह समस्या रहने पर बेचैनी, चिंता और दिल की तेज़ धड़कन जैसी लक्षणों का सामना करना पड़ सकता है। विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि ऐसे मामलों में शुद्धिकरण और पाचन सुधार बेहद जरूरी है। गलत जीवनशैली और पाचन समस्याआम तौर पर यह समस्या उन लोगों में ज्यादा दिखाई देती है, जो: देर रात भारी भोजन करते हैं।खाने के तुरंत बाद टहलने के बजाय बैठ जाते हैं।ज्यादा तला-भुना, मसालेदार या भारी भोजन पसंद करते हैं।अधिक मानसिक तनाव या व्यस्त जीवनशैली अपनाते हैं।नियमित रूप से अपने पेट की सफाई पर ध्यान नहीं देते। ये सभी आदतें पाचन क्रिया को मंद करती हैं और शरीर में टॉक्सिन बढ़ाकर बेचैनी और घबराहट की समस्या को जन्म देती हैं। सरल उपाय: पेट स्वस्थ, मन शांतइस समस्या से बचने के लिए कुछ आसान उपाय अपनाए जा सकते हैं: समय पर खाना खाएं – नियमित भोजन से पाचन सही रहता है।खाने के बाद हल्की टहल – गैस और अपच कम होती है।देर रात भारी भोजन से बचें – रात का हल्का भोजन पाचन को आसान बनाता है।रात को सौंफ और मिश्री – पेट साफ रखने और कब्ज दूर करने में मदद मिलती है।पर्याप्त पानी पिएं – शरीर हाइड्रेट रहता है और टॉक्सिन बाहर निकलते हैं।हल्का और संतुलित भोजन – ज्यादा तला-भुना और मसालेदार खाने से बचें।इन उपायों से न केवल पेट स्वस्थ रहेगा, बल्कि घबराहट, बेचैनी और दिल की असामान्य धड़कन जैसी समस्याएं भी दूर होंगी। पेट और मानसिक स्वास्थ्य के बीच गहरा संबंध है। बार-बार बेचैनी और घबराहट महसूस होने पर सिर्फ तनाव या हृदय की समस्या मानना गलत है। पाचन की सही देखभाल और नियमित जीवनशैली अपनाकर आप इन लक्षणों को कम कर सकते हैं। याद रखें, स्वस्थ पेट = स्वस्थ मन = स्वस्थ दिल।

कलियुग की बाधाओं से मुक्त वह दिव्य स्थान जहां प्रकृति और भक्ति के अद्भुत संगम से जीवंत होती है प्राचीन ऋषि परंपरा

नई दिल्ली /वृंदावन। श्रीधाम वृंदावन की पावन धरा पर एक ऐसा दिव्य स्थान स्थित है जिसे बाहरी दुनिया के शोर और आधुनिकता की चकाचौंध स्पर्श तक नहीं कर पाई है। श्री टटिया स्थान के नाम से विख्यात यह क्षेत्र अध्यात्म का वह केंद्र है जिसके बारे में यह अटूट विश्वास है कि यहां आज तक कलियुग का प्रवेश नहीं हो सका है। यमुना तट के समीप स्थित इस स्थान की सीमा में प्रवेश करते ही श्रद्धालुओं को एक अलग ही लोक का अनुभव होता है जहां समय जैसे सदियों पहले ठहर गया हो। यहां की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि इस पूरे परिसर में कहीं भी सीमेंट या कंक्रीट का निर्माण नहीं है और आज के दौर में भी यहां की जमीन पूरी तरह कच्ची और प्राकृतिक है। इस स्थान का इतिहास और परंपरा संगीत शिरोमणि स्वामी हरिदास जी से जुड़ी है जिन्होंने बांके बिहारी जी को अपनी भक्ति से प्रकट किया था। यहां के परिवेश में आज भी वही प्राचीन सादगी देखने को मिलती है जो भारतीय ऋषि परंपरा का मूल आधार रही है। परिसर के भीतर ऊंचे ऊंचे वृक्षों की घनी छांव और चारों ओर फैली प्राकृतिक हरियाली मन को अपार शांति प्रदान करती है। आधुनिक सुख सुविधाओं और विद्युत उपकरणों का त्याग कर यहां रहने वाले संत और साधक पूरी तरह ईश्वर की भक्ति और भजन में लीन रहते हैं। यहां का वातावरण इतना शांत है कि केवल पक्षियों का कलरव और भक्तों के मधुर संकीर्तन की ध्वनियां ही कानों में गूंजती हैं। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस स्थान की मिट्टी और कण कण में दिव्य ऊर्जा का वास है। यहां आने वाले भक्त किसी भी प्रकार के दिखावे या आडंबर से दूर रहते हैं। टटिया स्थान में प्रकृति का संरक्षण और जीव सेवा सर्वोपरि है। यहां पेड़ों से गिरी सूखी लकड़ियों का ही उपयोग किया जाता है और किसी भी जीवित वृक्ष को क्षति पहुंचाना वर्जित है। सादगी का आलम यह है कि यहां के निवासी और साधु संत जमीन पर ही बैठकर अपनी साधना पूर्ण करते हैं। यह स्थान उन लोगों के लिए एक जीवंत उदाहरण है जो भौतिकता की दौड़ से थककर वास्तविक शांति और आत्मिक आनंद की खोज में भटक रहे हैं। अनुशासन और मर्यादा के मामले में यह स्थान अत्यंत कठोर नियमों का पालन करता है। परिसर के भीतर मोबाइल फोन का प्रयोग या शोर शराबा करना पूरी तरह वर्जित है ताकि साधकों की एकाग्रता में कोई बाधा न आए। यहां की स्वच्छता और सात्विकता को देखकर ऐसा प्रतीत होता है मानो भगवान श्री कृष्ण की लीलाएं आज भी अदृश्य रूप में यहां संचालित हो रही हों। वृंदावन के अन्य व्यावसायिक केंद्रों के विपरीत यह स्थान अपनी मौलिकता और प्राचीनता को संजोए हुए है जो न केवल श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र है बल्कि भारतीय संस्कृति के संरक्षण का एक सशक्त स्तंभ भी है।

ट्रंप ने खोली पाकिस्तान के दावे की पोल, शहबाज शरीफ के बयान पर उठे सवाल

नई दिल्ली। ईरान और अमेरिका के बीच हुए युद्धविराम को लेकर पाकिस्तान के दावों पर अब सवाल खड़े हो गए हैं। अमेरिका ने साफ कर दिया है कि इस समझौते में लेबनान शामिल नहीं था जिससे पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ के बयान की विश्वसनीयता पर असर पड़ा है। अमेरिका के उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने हंगरी की राजधानी बुडापेस्ट में कहा कि सीजफायर समझौते में लेबनान शामिल नहीं था। उन्होंने इसे गलतफहमी बताते हुए कहा कि संभवतः ईरान ने इसे अलग तरह से समझा। वेंस के मुताबिक यह युद्धविराम अमेरिका ईरान और उनके सहयोगियों जैसे इजरायल और अरब देशों पर केंद्रित है न कि लेबनान पर।ट्रंप ने भी किया इनकार अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भी स्पष्ट कहा कि लेबनान को समझौते में शामिल नहीं किया गया। उन्होंने बताया कि इसकी वजह हिज्बुल्लाह है और वहां की स्थिति अलग तरह की झड़प का हिस्सा है। शहबाज शरीफ के बयान से बढ़ा विवाद इससे पहले शहबाज शरीफ ने दावा किया था कि ईरान अमेरिका और उनके सहयोगी लेबनान समेत सभी क्षेत्रों में तत्काल युद्धविराम पर सहमत हो गए हैं। उन्होंने इस फैसले का स्वागत करते हुए दोनों पक्षों को इस्लामाबाद में आगे की वार्ता के लिए आमंत्रित भी किया था। उनके इस बयान के बाद अब अमेरिका के स्पष्ट रुख से पाकिस्तान की कूटनीतिक स्थिति पर सवाल उठ रहे हैं। इजरायल पहले ही कर चुका था साफ इनकार इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू पहले ही कह चुके थे कि यह युद्धविराम लेबनान में जारी सैन्य कार्रवाई पर लागू नहीं होगा। सीजफायर की घोषणा के कुछ ही घंटों बाद इजरायल ने लेबनान में हमले भी जारी रखे। लेबनान के स्वास्थ्य मंत्रालय के अनुसार इन हमलों में कम से कम 89 लोगों की मौत हुई और 700 से अधिक घायल हुए। इजरायल का कहना है कि यह कार्रवाई हिज्बुल्लाह के खिलाफ जारी रहेगी।होर्मुज जलडमरूमध्य बंद बढ़ा तनाव लेबनान में हमलों के बाद ईरान ने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को बंद कर दिया जिसे लेकर अमेरिका ने आपत्ति जताई है। इस घटनाक्रम ने क्षेत्र में तनाव और बढ़ा दिया है और यह आशंका पैदा हो गई है कि अमेरिका-ईरान के बीच हुआ नाजुक युद्धविराम आगे टिक पाएगा या नहीं।

हिट फिल्म धुरंधर 2 विवाद में क्यों फंसी जानिए गाने से जुड़ा पूरा मामला

नई दिल्ली । स्पाई एक्शन थ्रिलर धुरंधर 2 इन दिनों जहां बॉक्स ऑफिस पर शानदार प्रदर्शन कर रही है वहीं अब यह फिल्म एक बड़े कानूनी विवाद में भी घिर गई है फिल्म की सफलता के बीच अचानक उठे इस विवाद ने इंडस्ट्री में हलचल मचा दी है मामला फिल्म में इस्तेमाल किए गए एक पुराने सुपरहिट गाने को लेकर है जिस पर कॉपीराइट उल्लंघन का आरोप लगाया गया है रिपोर्ट्स के मुताबिक प्रोडक्शन कंपनी त्रिमूर्ति फिल्म्स ने निर्देशक आदित्य धर की कंपनी B62 स्टूडियोज के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया है आरोप है कि फिल्म में हम प्यार करने वाले गाने का इस्तेमाल बिना आधिकारिक अनुमति के किया गया है जिससे कॉपीराइट कानून का उल्लंघन हुआ है दरअसल हम प्यार करने वाले गाना 1989 में आई फिल्म त्रिदेव का लोकप्रिय ट्रैक है जिसे मशहूर संगीतकार जोड़ी आनंद मिलिंद ने तैयार किया था और इसके बोल समीर अनजान ने लिखे थे इस गाने को अनुराधा पौडवाल और उदित नारायण ने अपनी आवाज दी थी और यह अपने समय का बेहद लोकप्रिय गीत रहा है त्रिमूर्ति फिल्म्स का दावा है कि इस गाने के म्यूजिक और साउंड रिकॉर्डिंग से जुड़े सभी अधिकार उनके पास हैं और बिना अनुमति इसके इस्तेमाल से उनके अधिकारों का उल्लंघन हुआ है कंपनी ने अदालत से मांग की है कि फिल्म में इस गाने के उपयोग पर तुरंत रोक लगाई जाए साथ ही हर्जाने और अन्य कानूनी राहत भी मांगी गई है कंपनी ने यह भी चिंता जताई है कि फिल्म के थिएटर रिलीज ओटीटी स्ट्रीमिंग और प्रमोशनल कंटेंट के जरिए इस गाने का लगातार इस्तेमाल उनके अधिकारों को और नुकसान पहुंचा सकता है इसलिए उन्होंने इस मामले को गंभीरता से उठाया है वहीं दूसरी ओर धुरंधर द रिवेंज बॉक्स ऑफिस पर शानदार कमाई कर रही है फिल्म ने रिलीज के 21 दिनों में ही 1000 करोड़ रुपये से ज्यादा का आंकड़ा पार कर लिया है जिससे यह साल की बड़ी हिट फिल्मों में शामिल हो गई है फिल्म में रणवीर सिंह ने जसकीरत सिंह रंगी का किरदार निभाया है जो एक अंडरकवर एजेंट के रूप में पाकिस्तान में रहकर भारत के लिए काम करता है फिल्म में उनके अलावा अर्जुन रामपाल आर माधवन संजय दत्त राकेश बेदी और सारा अर्जुन जैसे कलाकार भी अहम भूमिकाओं में नजर आ रहे हैं अब देखना दिलचस्प होगा कि यह विवाद फिल्म की सफलता पर कितना असर डालता है और अदालत इस मामले में क्या फैसला सुनाती है फिलहाल धुरंधर 2 की चमक के साथ यह विवाद भी सुर्खियों में बना हुआ है

पुष्पा स्टार अल्लू अर्जुन की आवाज के पीछे छुपा है इस मलयालम डायरेक्टर का कमाल

नई दिल्ली । साउथ सिनेमा के आइकॉन स्टार अल्लू अर्जुन जब भी बड़े पर्दे पर नजर आते हैं तो उनका स्टाइल उनका स्वैग और उनके डायलॉग बोलने का अंदाज दर्शकों को दीवाना बना देता है लेकिन एक ऐसा सच भी है जिसे जानकर कई लोग चौंक जाते हैं दरअसल फिल्मों में सुनाई देने वाली उनकी आवाज उनकी खुद की नहीं होती बल्कि उसे डब किया जाता है हिंदी में जहां उनकी आवाज को श्रेयस तलपड़े देते हैं वहीं मलयालम में पिछले करीब 15 सालों से एक खास शख्स उनकी ऑफिशियल आवाज बने हुए हैं यह शख्स कोई आम डबिंग आर्टिस्ट नहीं बल्कि मलयालम सिनेमा के जाने माने निर्देशक जिस जॉय हैं जिस जॉय ने न सिर्फ कैमरे के पीछे शानदार फिल्में बनाई हैं बल्कि अपनी आवाज के जरिए अल्लू अर्जुन के किरदारों में जान डालने का काम भी किया है उनकी डबिंग इतनी सटीक और प्रभावशाली होती है कि दर्शकों को कभी यह एहसास ही नहीं होता कि यह आवाज किसी और की है इस अनोखी साझेदारी की शुरुआत लगभग 15 साल पहले हुई थी और तब से लेकर आज तक अल्लू अर्जुन की ज्यादातर बड़ी फिल्मों में जिस जॉय ही मलयालम वर्जन के लिए डबिंग करते आ रहे हैं समय के साथ यह तालमेल इतना मजबूत हो गया है कि अब मलयालम दर्शकों के लिए अल्लू अर्जुन की पहचान ही जिस जॉय की आवाज बन चुकी है दिलचस्प बात यह है कि जब कई दर्शक पहली बार अल्लू अर्जुन की असली आवाज सुनते हैं तो उन्हें थोड़ा अजीब महसूस होता है क्योंकि वे जिस जॉय की आवाज के इतने आदी हो चुके हैं कि वही उन्हें असली लगती है यही वजह है कि केरल में अल्लू अर्जुन को मल्लू अर्जुन के नाम से भी पुकारा जाता है और वहां उनकी लोकप्रियता बेहद खास है जिस जॉय का निर्देशन करियर भी उतना ही शानदार रहा है उन्होंने संडे हॉलिडे और विजय सुपरम और पौर्नामियुम जैसी फिल्मों का निर्देशन किया है जो दर्शकों के बीच काफी पसंद की गईं उनकी फिल्मों में कहानी कहने का तरीका और इमोशनल टच खास माना जाता है और यही समझ उन्हें एक बेहतरीन डबिंग आर्टिस्ट भी बनाती है एक निर्देशक होने के नाते जिस जॉय को यह अच्छी तरह पता होता है कि किसी सीन में किस तरह की भावनाएं चाहिए और डायलॉग को किस अंदाज में पेश करना है यही कारण है कि उनकी डबिंग में वही ताकत और गहराई नजर आती है जो अल्लू अर्जुन की एक्टिंग में दिखती है यह भी सच है कि जिस जॉय ने कई अन्य कलाकारों के लिए भी डबिंग की है लेकिन अल्लू अर्जुन के साथ उनकी जोड़ी सबसे ज्यादा सफल और चर्चित रही है यह साझेदारी सिर्फ आवाज देने तक सीमित नहीं है बल्कि यह दो कलाकारों के बीच एक गहरे रचनात्मक तालमेल का उदाहरण है जिसने सिनेमा को और भी प्रभावशाली बना दिया है

भारत-बांग्लादेश वार्ता में उठी शेख हसीना की वापसी की मांग, भारत ने नहीं दिया कोई जवाब

नई दिल्ली। भारत और बांग्लादेश के बीच पिछले साल बढ़े तनाव के बाद अब दोनों देश संबंधों को पटरी पर लाने की दिशा में आगे बढ़ते दिख रहे हैं। इसी कड़ी में बांग्लादेश के विदेश मंत्री खलीलुर रहमान अपने पहले आधिकारिक दौरे पर भारत पहुंचे और उन्होंने विदेश मंत्री एस जयशंकर तथा राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजित डोभाल सहित कई वरिष्ठ अधिकारियों से मुलाकात की। ढाका की ओर से जारी बयान के मुताबिक, रहमान ने बैठक के दौरान बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना और पूर्व गृह मंत्री असदुज्जमां खान कमाल के प्रत्यर्पण की मांग दोहराई। हालांकि, इस पर भारत की ओर से कोई औपचारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई। बांग्लादेशी पक्ष ने कहा कि प्रधानमंत्री तारिक रहमान के नेतृत्व में सरकार ‘बांग्लादेश फर्स्ट’ नीति पर चलते हुए पारस्परिक विश्वास और सम्मान के आधार पर विदेश नीति संचालित करेगी। साथ ही छात्र नेता शरीफ उस्मान हादी के हत्यारोपियों को पकड़ने में सहयोग के लिए भारत का आभार भी जताया गया। हालांकि भारत के विदेश मंत्रालय द्वारा जारी बयान में शेख हसीना या हादी से जुड़े मुद्दों का कोई जिक्र नहीं किया गया। बांग्लादेशी बयान में यह जरूर कहा गया कि दोनों देश प्रत्यर्पण संधि के तहत कानूनी प्रक्रिया का पालन करेंगे। गौरतलब है कि अगस्त 2024 में बांग्लादेश में हुए हिंसक प्रदर्शनों के बाद शेख हसीना को पद छोड़ना पड़ा और वे तब से नई दिल्ली में रह रही हैं। बांग्लादेश में उनके और पूर्व गृह मंत्री के खिलाफ अंतरराष्ट्रीय अपराध न्यायाधिकरण द्वारा मृत्युदंड का फैसला भी सुनाया जा चुका है। इससे पहले भी मोहम्मद यूनुस के नेतृत्व वाली अंतरिम सरकार भारत से उनके प्रत्यर्पण की मांग कर चुकी थी, जिसे भारत ने स्वीकार नहीं किया। अब दोनों देशों ने इस मुद्दे को द्विपक्षीय संबंधों में बाधा न बनने देने पर सहमति जताई है। अधिकारियों के अनुसार, एस जयशंकर और खलीलुर रहमान के बीच बातचीत में यह बात सामने आई कि शेख हसीना का भारत में रहना संबंधों पर असर नहीं डालना चाहिए। तीन दिवसीय दौरे पर आए रहमान ने अजित डोभाल के अलावा पेट्रोलियम मंत्री हरदीप पुरी से भी मुलाकात की। बांग्लादेश में हालिया चुनावों के बाद यह नई सरकार के किसी वरिष्ठ नेता की पहली भारत यात्रा है। बैठक के बाद एस जयशंकर ने कहा कि दोनों देशों ने द्विपक्षीय संबंधों को मजबूत करने और क्षेत्रीय व वैश्विक मुद्दों पर सहयोग बढ़ाने के उपायों पर चर्चा की। वहीं भारत ने बांग्लादेश के साथ रचनात्मक सहयोग जारी रखने की इच्छा जताते हुए वीजा प्रक्रिया खासकर चिकित्सा और व्यावसायिक वीजा को और सरल बनाने का आश्वासन दिया।

एमपी में 10 अप्रैल से बढ़ेगी गर्मी, 5-6 डिग्री तक चढ़ेगा पारा, आज 7 जिलों में आंधी-बारिश की चेतावनी

भोपाल। मध्यप्रदेश में 10 अप्रैल से गर्मी का असर तेज होने वाला है। मौसम विभाग, भोपाल के अनुसार आने वाले दिनों में दिन के तापमान में 5 से 6 डिग्री सेल्सियस तक की बढ़ोतरी दर्ज की जाएगी। हालांकि, गुरुवार को प्रदेश के कई हिस्सों में मौसम बदला हुआ रह सकता है और कुछ जगहों पर बारिश, आंधी व गरज-चमक की स्थिति बन सकती है। मौसम विभाग ने अगले 24 घंटों के लिए उमरिया, शहडोल, डिंडौरी, अनूपपुर, मंडला, सिवनी और बालाघाट जिलों में आंधी, बारिश और बिजली गिरने की संभावना को लेकर अलर्ट जारी किया है। इससे पहले बुधवार को भोपाल, जबलपुर, रायसेन, शिवपुरी, रतलाम, छतरपुर, नर्मदापुरम, उज्जैन, इंदौर और धार सहित 15 से अधिक जिलों में बारिश दर्ज की गई। बारिश के कारण दिन के तापमान में गिरावट भी देखने को मिली। दरअसल, प्रदेश के उत्तर, पूर्व और पश्चिमी हिस्सों में सक्रिय तीन साइक्लोनिक सर्कुलेशन सिस्टम के चलते यह मौसम बदलाव हुआ। राजधानी भोपाल में भी हल्की बारिश के साथ तेज हवाएं चलीं। मौसम विभाग के अनुसार, 11 अप्रैल को उत्तर-पश्चिमी क्षेत्र में एक नया वेस्टर्न डिस्टरबेंस सक्रिय होगा, लेकिन इसका असर मध्यप्रदेश में सीमित ही रहने की संभावना है। गुरुवार को प्रदेश में तेज हवाएं भी चलेंगी। कुछ जिलों में हवा की रफ्तार 40 से 60 किलोमीटर प्रति घंटा तक पहुंच सकती है, जबकि अन्य क्षेत्रों में यह 30 से 40 किलोमीटर प्रति घंटा रहने का अनुमान है। मौसम में बदलाव दोपहर के बाद अधिक स्पष्ट होगा।

TET Cancellation protest : 26 साल की सेवा के बाद भी परीक्षा क्यों? टीईटी अनिवार्यता के खिलाफ शिक्षकों का बड़ा विरोध

gwalior teachers protest

HIGHLIGHTS: टीईटी अनिवार्यता के खिलाफ शिक्षकों का प्रदर्शन 20-26 साल पुराने शिक्षकों को छूट की मांग 2 मार्च 2026 का आदेश रद्द करने की अपील 18 अप्रैल को भोपाल में बड़ा आंदोलन प्रस्तावित सुप्रीम कोर्ट में रिव्यू पिटीशन की तैयारी TET Cancellation protest : ग्वालियर। मध्यप्रदेश में शिक्षकों ने टीईटी अनिवार्यता के खिलाफ बड़ा प्रदर्शन किया। शिक्षक संयुक्त मोर्चा के बैनर तले सैकड़ों शिक्षक अलकापुरी तिराहे पर एकत्र हुए और रैली निकालते हुए कलेक्टर कार्यालय पहुंचे। यहां उन्होंने मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपा, जिसे एसडीएम नरेंद्र सिंह यादव ने प्राप्त किया। बता दें कि प्रदर्शन के दौरान शिक्षकों में भारी नाराजगी देखने को मिली और उन्होंने अपनी मांगों को लेकर जोरदार नारेबाजी की। MP: इंदौर में MYH के डॉक्टरों का कमाल….1 साल के बच्चे के गले में फंसी जिंदा मछली, सर्जरी कर बचाई जान टीईटी अनिवार्यता पर उठे सवाल प्रदर्शन का मुख्य मुद्दा शिक्षक पात्रता परीक्षा (टीईटी) को अनिवार्य बनाए जाने का विरोध था। शिक्षक संघ के अरविन्द दीक्षित ने कहा कि जो शिक्षक शिक्षा का अधिकार कानून 2009 से पहले नियुक्त हुए हैं और 20 से 26 साल की सेवा दे चुके हैं, उनसे अब टीईटी पास करने की मांग करना अन्यायपूर्ण है। उन्होंने इसे अनुभव और सेवा का अपमान बताया। युद्ध के माहौल में विश्व शांति का शंखनाद है विश्व णमोकार दिवस आदेश रद्द करने और सेवा गणना की मांग शिक्षकों ने लोक शिक्षण संचालनालय, भोपाल द्वारा 2 मार्च 2026 को जारी आदेश को तुरंत रद्द करने की मांग की। साथ ही उन्होंने प्रथम नियुक्ति तिथि से सेवा अवधि की गणना करने और लंबित मांगों को जल्द पूरा करने की अपील भी की। शिक्षकों का कहना है कि इससे उनके प्रमोशन और अन्य लाभ प्रभावित हो रहे हैं। कोलेस्ट्रॉल 2026: नई गाइडलाइन, LDL टारगेट और जरूरी लाइफस्टाइल बदलाव सुप्रीम कोर्ट में रिव्यू पिटीशन की तैयारी बताया जा रहा है कि मोर्चा ने यह भी मांग रखी है कि इस मुद्दे पर सुप्रीम कोर्ट में रिव्यू पिटीशन दायर की जाए। साथ ही उनका कहना है कि नीति में बदलाव करते समय लंबे समय से कार्यरत शिक्षकों के हितों को नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए। भगवान विष्णु को प्रसन्न करने के गुरुवार व्रत में जरूर करें ये काम, काम होंगे सफल आंदोलन तेज करने की चेतावनी शिक्षकों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द कोई सकारात्मक निर्णय नहीं लिया गया, तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा। 11 अप्रैल को ब्लॉक स्तर पर ज्ञापन सौंपे जाएंगे और 18 अप्रैल को भोपाल में बड़ा धरना-प्रदर्शन आयोजित किया जाएगा, जिसमें एक लाख से अधिक शिक्षकों के शामिल होने की संभावना है।