रैकी कर चोरी का प्लान, कबाड़ बीनने वाला बन गया हड़प का आरोपी

नई दिल्ली। नर्मदापुरम के जुमेराती क्षेत्र में 3 अप्रैल को एक सूने मकान का ताला तोड़कर 5 लाख रुपए कीमत के सोने-चांदी के जेवर और नकदी चोरी करने वाले 19 वर्षीय आरोपी को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है। चोरी की घटनापुलिस के अनुसार, फरियादी रामगोपाल पाण्डे अपने परिवार के साथ 3 अप्रैल को गांव गए थे। इसी दौरान 19 वर्षीय शेख शादाब (पिता शेख नौशाद), जो कबाड़ बीनने का काम करता है, मकान की रैकी कर चोरी को अंजाम दिया। उसने गोदरेज का ताला तोड़कर सोने-चांदी के आभूषण और 2,500 रुपए नकद चोरी किए। पुलिस की कार्रवाईकोतवाली टीआई कंचन सिंह ठाकुर के नेतृत्व में पुलिस ने घटना स्थल के आसपास लगे सीसीटीवी और तकनीकी साक्ष्यों की मदद से आरोपी की लोकेशन खंडवा के ग्राम सिहाड़ा में ट्रेस की। टीम ने शेख शादाब को गिरफ्तार कर लिया। माल बरामदपूछताछ में आरोपी ने चोरी स्वीकार की। पुलिस ने उसके कब्जे से चोरी की गई 5 लाख रुपए कीमत के सोने-चांदी के जेवर और भगवान की चांदी की मूर्ति बरामद की। कबाड़ बीनने वाला 19 वर्षीय शादाब नर्मदापुरम में सूने मकान की रैकी कर 5 लाख रुपए की चोरी कर गया था। पुलिस ने उसे खंडवा से गिरफ्तार कर चोरी का पूरा माल बरामद कर लिया है।
योजना में कटौती का असर, बैतूल में पात्र जोड़े वंचित, प्रशासन के सामने बढ़ी चुनौती

बैतूल । बैतूल मध्यप्रदेश की मुख्यमंत्री कन्यादान योजना में इस वर्ष की गई कटौती का असर अब जमीनी स्तर पर साफ नजर आने लगा है। जिले में सामूहिक विवाह कार्यक्रमों के लिए निर्धारित सीमित संख्या के चलते बड़ी संख्या में पात्र जोड़े योजना का लाभ लेने से वंचित हो रहे हैं, जिससे ग्रामीणों में नाराजगी और आक्रोश बढ़ता जा रहा है। हालात ऐसे बन गए हैं कि आवेदन करने पहुंचे कई जोड़ों को निराश होकर वापस लौटना पड़ा, जिससे मौके पर हंगामे जैसी स्थिति भी देखने को मिली। प्रशासन ने इस वर्ष जिले में चार स्थानों पर सामूहिक विवाह कार्यक्रम आयोजित करने की योजना बनाई है। प्रत्येक आयोजन में अधिकतम 200 जोड़ों को ही शामिल किए जाने की अनुमति दी गई है। इस प्रकार पूरे जिले में केवल 800 जोड़ों का ही विवाह इस योजना के तहत संपन्न हो सकेगा। जबकि पिछले वर्षों में यह संख्या कई गुना अधिक रही है और बड़ी संख्या में जरूरतमंद परिवारों को इसका लाभ मिलता रहा है। योजना में इस कटौती के कारण ग्रामीण क्षेत्रों में असंतोष का माहौल बन गया है। कई परिवारों ने पहले से ही अपनी बेटियों के विवाह के लिए इस योजना पर भरोसा किया था, लेकिन सीमित संख्या के कारण वे अब खुद को असहाय महसूस कर रहे हैं। आवेदकों का कहना है कि वे सभी जरूरी पात्रता पूरी करते हैं, इसके बावजूद उन्हें केवल संख्या सीमा के कारण योजना से बाहर कर दिया गया है, जो उनके लिए बेहद निराशाजनक है। मौके पर पहुंचे कई लोगों ने प्रशासन के इस फैसले पर सवाल उठाए और संख्या बढ़ाने की मांग की। उनका कहना है कि सरकार की इस महत्वपूर्ण योजना का उद्देश्य आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों की मदद करना है, लेकिन संख्या सीमित कर देने से इसका लाभ वास्तविक जरूरतमंदों तक नहीं पहुंच पा रहा है। कुछ स्थानों पर स्थिति इतनी तनावपूर्ण हो गई कि प्रशासन को लोगों को समझाइश देकर शांत करना पड़ा। प्रशासनिक अधिकारियों का कहना है कि यह निर्णय शासन स्तर पर तय दिशा-निर्देशों के अनुसार लिया गया है और उन्हें उसी के तहत कार्यक्रम आयोजित करना है। उन्होंने आश्वासन दिया कि भविष्य में स्थिति की समीक्षा कर आवश्यक कदम उठाए जा सकते हैं। मुख्यमंत्री कन्यादान योजना लंबे समय से गरीब और जरूरतमंद परिवारों के लिए एक महत्वपूर्ण सहारा रही है, जिसके तहत सामूहिक विवाह के माध्यम से आर्थिक सहायता प्रदान की जाती है। लेकिन इस वर्ष संख्या में की गई कटौती ने इस योजना की पहुंच को सीमित कर दिया है, जिससे इसकी प्रभावशीलता पर भी सवाल उठने लगे हैं। फिलहाल बैतूल में यह मुद्दा चर्चा का विषय बना हुआ है और ग्रामीणों की मांग है कि सरकार इस निर्णय पर पुनर्विचार करे, ताकि अधिक से अधिक पात्र जोड़ों को इस योजना का लाभ मिल सके और किसी को भी निराश होकर लौटना न पड़े।
नर्मदापुरम का ग्रामीण बाघ का शिकार, जंगल में हुई जानलेवा घटना!

नर्मदापुरम। नर्मदापुरम के सतपुड़ा टाइगर रिजर्व के चूरना क्षेत्र में गुरुवार को एक 49 वर्षीय आदिवासी ग्रामीण सुधराम पर बाघ ने हमला कर उसे अपना शिकार बना लिया। घटना के अनुसार, बाघ ने सुधराम के हाथ और पैर खा लिए और शव के पास बैठा रहा। घटना का विवरणपुलिस के अनुसार, मृतक सुधराम, पिता हजारी चौहान (निवासी चनागढ़ झुनकर), बुधवार दोपहर तवा नदी पार कर एसटीआर के कोर क्षेत्र में महुआ बीनने गया था। शाम तक घर न लौटने पर परिजन गुरुवार सुबह जंगल में खोजबीन के लिए निकले। जंगल में खोज के दौरान सुधराम का शव महुआ के पेड़ के पास मिला, जबकि बाघ उसके धड़ के पास बैठा था। परिजनों ने हिम्मत करके बाघ को वहां से भगाया और घटना की सूचना वन विभाग और पुलिस को दी। पुलिस और वन विभाग की कार्रवाईकेसला थाना प्रभारी मदन लाल पवार ने बताया कि शव के सिर और धड़ को सुखतवा लाया गया, जबकि हाथ-पैर बाघ ने खा लिए थे। मर्ग कायम कर जांच शुरू कर दी गई है। एसटीआर की फील्ड डायरेक्टर राखी नंदा ने पुष्टि की कि यह घटना बैक वॉटर क्षेत्र में हुई, जो एसटीआर के अंतर्गत आता है। घटना से प्रभावित परिजनशव के पास बाघ को देखकर परिजन और ग्रामीण बुरी तरह सहम गए, लेकिन कुछ देर बाद उन्होंने हिम्मत करके बाघ को भगाया और शव को सुरक्षित निकाला।
11 हजार लीटर दूध से मां नर्मदा का अभिषेक, सीहोर में 21 दिवसीय महायज्ञ का भव्य समापन

सीहोर । मध्यप्रदेश के सीहोर जिले से आस्था और भक्ति का एक अद्भुत दृश्य सामने आया है जहां भेरूंदा क्षेत्र के सातदेव स्थित प्राचीन पातालेश्वर महादेव मंदिर में 21 दिवसीय महायज्ञ का भव्य समापन हुआ। इस अवसर पर मां नर्मदा का 11 हजार लीटर दूध से अभिषेक किया गया जिसका दृश्य देखने वालों के लिए श्रद्धा और आश्चर्य का संगम बन गया। इस अनोखे आयोजन का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है और लोग इसे भक्ति का विराट रूप बता रहे हैं। यह आयोजन संत शिवानंद महाराज के सानिध्य में संपन्न हुआ जिसमें दूर-दूर से आए हजारों श्रद्धालुओं ने भाग लिया। महायज्ञ की शुरुआत 18 मार्च से हुई थी और 21 दिनों तक लगातार धार्मिक अनुष्ठान पूजा-पाठ और हवन का क्रम चलता रहा। प्रतिदिन करीब 21 क्विंटल हवन सामग्री से महाहवन किया गया जिसमें विभिन्न प्रकार की जड़ी-बूटियों के साथ विशेष सामग्रियों का उपयोग किया गया। पूरे आयोजन के दौरान लगभग 41 टन हवन सामग्री की आहुति दी गई जिसमें सोने और चांदी की आहुति भी शामिल रही। समापन के दिन सबसे खास क्षण वह रहा जब टैंकरों के माध्यम से 11 हजार लीटर दूध लाकर मां नर्मदा का अभिषेक किया गया। यह दृश्य बेहद भव्य और भावुक करने वाला था। श्रद्धालु भक्ति में डूबे नजर आए और पूरे क्षेत्र में मंत्रोच्चार और घंटियों की गूंज सुनाई देती रही। दीपों की रोशनी और धार्मिक माहौल ने पूरे क्षेत्र को आध्यात्मिक ऊर्जा से भर दिया। महायज्ञ के दौरान श्रद्धालुओं ने बड़ी संख्या में नारियल अर्पित किए और पुण्य लाभ अर्जित किया। समापन अवसर पर विशाल भंडारे का आयोजन भी किया गया जिसमें हजारों लोगों ने प्रसादी ग्रहण की। आयोजन के लिए करीब 5 एकड़ क्षेत्र में विशाल पंडाल तैयार किया गया था जहां व्यवस्थाएं सुव्यवस्थित तरीके से की गई थीं। सातदेव क्षेत्र को प्राचीन काल से सप्त ऋषियों की तपोभूमि माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार ब्रह्माजी के मानस पुत्र सप्त ऋषियों ने यहां कठोर तपस्या की थी जिससे प्रसन्न होकर भगवान शिव पातालेश्वर महादेव के रूप में प्रकट हुए थे। यही कारण है कि यह स्थान आज भी श्रद्धालुओं के लिए अत्यंत पवित्र और आस्था का केंद्र बना हुआ है। इतिहास के अनुसार यह क्षेत्र गोंड शासकों के अधीन रहा और बाद में मराठा साम्राज्य की महान शासक अहिल्याबाई होल्कर ने यहां कई धार्मिक निर्माण कराए जिससे इसकी महत्ता और बढ़ गई। आज भी यह स्थान धार्मिक और सांस्कृतिक दृष्टि से विशेष महत्व रखता है। इस तरह सीहोर का यह आयोजन न केवल धार्मिक आस्था का प्रतीक बना बल्कि सामूहिक सहभागिता और परंपरा के संरक्षण का भी एक जीवंत उदाहरण बनकर सामने आया है।
अंबेडकर जयंती कार्यक्रम प्रतिमा स्थल पर कराने की मांग, अहिरवार समाज ने दिया ज्ञापन!

नरसिंहपुर । मध्य प्रदेश के नरसिंहपुर में 14 अप्रैल को मनाई जाने वाली अंबेडकर जयंती के आयोजन स्थल को लेकर विवाद की स्थिति बनती दिख रही है। अहिरवार समाज संघ ने प्रशासन से मांग की है कि मुख्य कार्यक्रम शहर के प्रतिमा स्थल पर ही आयोजित किया जाए, ताकि अनुयायियों की भावनाओं का सम्मान बना रहे। प्रशासन को सौंपा गया ज्ञापनगुरुवार को समाज के प्रतिनिधियों ने जिला पंचायत सीईओ गजेंद्र नागेश को कलेक्टर के नाम ज्ञापन सौंपा। इस दौरान समाज के जिलाध्यक्ष रंजीत कुमार चौधरी ने कहा कि डॉ. भीमराव अंबेडकर के अनुयायियों की यह स्पष्ट इच्छा है कि शासन का मुख्य आयोजन डॉ. भीमराव अंबेडकर पार्क स्थित प्रतिमा स्थल पर ही हो। प्रतिमा स्थल से जुड़ी हैं भावनाएंसमाज का कहना है कि अंबेडकर पार्क न सिर्फ एक सार्वजनिक स्थल है, बल्कि यह बाबा साहब की स्मृतियों से भी जुड़ा हुआ है। ऐसे में यहां कार्यक्रम आयोजित करने से लोगों को भावनात्मक जुड़ाव महसूस होता है और वे बड़ी संख्या में शामिल हो सकते हैं। अन्य स्थान पर आयोजन से नाराजगी की आशंकाज्ञापन में यह भी उल्लेख किया गया है कि यदि कार्यक्रम किसी अन्य स्थान पर किया गया, तो इससे समाज के लोगों में नाराजगी फैल सकती है। कार्यकर्ताओं का तर्क है कि शहर के केंद्र में स्थित यह पार्क सभी वर्गों के लोगों के लिए आसानी से पहुंचने योग्य है, जिससे अधिक से अधिक लोग जयंती में भाग ले सकते हैं। कई संगठनों का मिला समर्थनइस मांग को लेकर विभिन्न सामाजिक संगठनों ने भी समर्थन जताया। ज्ञापन सौंपने के दौरान मुस्लिम समाज, जामा मस्जिद कमेटी, बहुजन सोशल फ्रंट, बंसकार समाज, वंशी समाज सहित कई संगठनों के प्रतिनिधि और जनप्रतिनिधि मौजूद रहे। सभी ने एक स्वर में प्रशासन से प्रतिमा स्थल पर ही आयोजन कराने की अपील की। प्रशासन के फैसले पर टिकी नजरेंअब देखना होगा कि प्रशासन इस मांग पर क्या निर्णय लेता है। फिलहाल, समाज की ओर से यह स्पष्ट कर दिया गया है कि आयोजन स्थल को लेकर उनकी भावना प्रतिमा स्थल से जुड़ी हुई है और वे इसी पर कार्यक्रम चाहते हैं।
दतिया बस हादसे पर हाईकोर्ट सख्त, पीड़ितों को मिलेगा मुआवजा

ग्वालियर। ग्वालियर हाईकोर्ट ने दतिया बस हादसे से जुड़े अहम मामले में बीमा कंपनी की दलीलों को खारिज करते हुए साफ संदेश दिया है कि न्याय केवल ठोस साक्ष्यों के आधार पर ही किया जाएगा, न कि अनुमान या अप्रमाणित सामग्री पर। कोर्ट ने पीड़ितों के पक्ष में फैसला सुनाते हुए मुआवजा देने के आदेश को बरकरार रखा। क्या है पूरा मामलायह मामला 8 नवंबर 2022 को दतिया जिले के भांहेर-दतिया रोड पर हुए दर्दनाक बस हादसे से जुड़ा है। इस दुर्घटना में बस पलटने से एक व्यक्ति की मौत हो गई थी, जबकि कई अन्य यात्री गंभीर रूप से घायल हो गए थे। पहले ही मिल चुका था मुआवजे का आदेशमामले की सुनवाई के बाद मोटर दुर्घटना दावा अधिकरण (MACT) दतिया ने बस चालक की लापरवाही मानते हुए मृतक के परिजनों और घायलों को मुआवजा देने का आदेश दिया था। लेकिन बीमा कंपनी ने इस फैसले को हाईकोर्ट में चुनौती दी। बीमा कंपनी की दलील पर कोर्ट का सख्त रुखबीमा कंपनी का कहना था कि दुर्घटना जिस बस से हुई, वह बीमित बस नहीं थी। कंपनी ने दावा किया कि किसी अन्य बिना बीमा वाली बस को बचाने के लिए इस बस को फर्जी तरीके से मामले में शामिल किया गया है। यूट्यूब वीडियो और गवाह दोनों खारिजसुनवाई के दौरान बीमा कंपनी ने अपने पक्ष में एक यूट्यूब वीडियो पेश किया, लेकिन कोर्ट ने इसकी प्रमाणिकता और स्रोत स्पष्ट न होने के कारण इसे सिरे से खारिज कर दिया। साथ ही, कंपनी द्वारा पेश किए गए गवाह को ‘तैयार किया हुआ’ मानते हुए उसकी गवाही को भी अविश्वसनीय करार दिया गया। पुलिस जांच पर सवाल उठाना पड़ा भारीबीमा कंपनी ने पुलिस जांच पर भी सवाल उठाए थे, लेकिन कोर्ट ने इस पर कड़ी टिप्पणी करते हुए कहा कि अगर जांच गलत थी, तो संबंधित पुलिस अधिकारियों को गवाह के रूप में पेश क्यों नहीं किया गया। यह तर्क भी कंपनी के खिलाफ गया। जांच रिपोर्ट को नहीं माना ठोस साक्ष्यन्यायालय ने स्पष्ट किया कि जांच अधिकारी की रिपोर्ट केवल एक राय हो सकती है, उसे पुख्ता साक्ष्य नहीं माना जा सकता। ऐसे में केवल रिपोर्ट के आधार पर फैसले को प्रभावित नहीं किया जा सकता। कोर्ट का अंतिम फैसलासभी पक्षों को सुनने के बाद हाईकोर्ट ने निष्कर्ष निकाला कि हादसा बस क्रमांक MP32 P 0184 से ही हुआ था। इसके साथ ही बीमा कंपनी की अपील खारिज कर दी गई और पीड़ितों को मुआवजा देने के अधिकरण के आदेश को बरकरार रखा गया।
ईरान बोला, बिना अनुमति स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में घुसा जहाज ‘नष्ट’ होगा

तेहरान। ईरान ने अमेरिका के साथ दो सप्ताह के युद्धविराम की घोषणा के कुछ घंटों बाद ही कड़ा रुख अपनाते हुए स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में जहाजों को सख्त चेतावनी जारी की है। ईरानी नौसेना ने कहा है कि तेहरान की अनुमति के बिना इस अहम समुद्री मार्ग में प्रवेश करने वाले किसी भी पोत को नष्ट कर दिया जाएगा। रिपोर्ट के अनुसार, ईरानी नौसेना ने समुद्री मार्ग के आसपास मौजूद जहाजों को रेडियो संदेश भेजकर स्पष्ट किया कि होर्मुज पार करने के लिए इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (सेपाह) की नौसेना से अनुमति लेना अनिवार्य होगा। चेतावनी में कहा गया कि बिना अनुमति गुजरने की कोशिश करने वाले जहाज को “उड़ा दिया जाएगा।” The Wall Street Journal की रिपोर्ट में चालक दल द्वारा साझा किए गए ऑडियो का हवाला देते हुए बताया गया कि इस चेतावनी के बाद कई जहाज फिलहाल होर्मुज के आसपास रुके हुए हैं। फारस की खाड़ी के ऊपर युद्धक विमानों की तैनाती भी जारी बताई गई है। वैश्विक तेल आपूर्ति के लिए अहम मार्गईरान और ओमान के बीच स्थित यह समुद्री मार्ग करीब 34 किलोमीटर चौड़ा है और खाड़ी को हिंद महासागर से जोड़ता है। दुनिया की लगभग एक-पांचवीं तेल आपूर्ति इसी रास्ते से गुजरती है, इसलिए यहां तनाव बढ़ने से वैश्विक ऊर्जा बाजार पर असर पड़ सकता है। दो सप्ताह के युद्धविराम की घोषणाडोनाल्ड ट्रंप ने मंगलवार को कहा था कि वे ईरान पर हमले दो सप्ताह के लिए निलंबित करने पर सहमत हुए हैं, बशर्ते होर्मुज मार्ग “पूर्ण, तत्काल और सुरक्षित” तरीके से खुला रहे। उन्होंने बताया कि यह फैसला शहबाज शरीफ और आसिम मुनीर के प्रस्ताव के बाद लिया गया। ईरान का संदेश—यह युद्ध का अंत नहीं दूसरी ओर, ईरान की सर्वोच्च राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद ने युद्धविराम को स्वीकार करते हुए कहा कि यह संघर्ष का अंत नहीं है। तेहरान ने चेतावनी दी कि यदि विरोधी पक्ष कोई गलती करता है तो “पूर्ण शक्ति” से जवाब दिया जाएगा। बताया जा रहा है कि दोनों पक्षों के बीच आगे की बातचीत पाकिस्तान में हो सकती है। हालांकि, होर्मुज में बढ़ी सख्ती ने यह संकेत दे दिया है कि युद्धविराम के बावजूद क्षेत्र में तनाव कम होने के बजाय और संवेदनशील बना हुआ है।
धार भोजशाला मामला फिर गरमाया, पूजा अधिकार को लेकर हिन्दू पक्ष ने पेश किए अहम कानूनी तर्क

धार । मध्यप्रदेश के धार स्थित भोजशाला कमाल मौला मस्जिद परिसर विवाद एक बार फिर सुर्खियों में आ गया है। इस मामले में हिन्दू पक्ष ने मध्यप्रदेश हाई कोर्ट में सुनवाई के दौरान बड़ा दावा पेश किया है। हिन्दू फ्रंट फॉर जस्टिस ने अदालत में कहा कि जिस स्थान पर एक बार मंदिर स्थापित हो जाता है, वह हमेशा मंदिर ही रहता है और इसी आधार पर उन्हें वहां पूजा करने का अधिकार मिलना चाहिए। हिन्दू पक्ष की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता विष्णु शंकर जैन ने अदालत में अपने तर्क रखते हुए कहा कि उनका दावा केवल इस आधार पर नहीं है कि वे लंबे समय से वहां पूजा करते आ रहे हैं, बल्कि उनका मुख्य तर्क यह है कि मौजूदा ढांचे के निर्माण से पहले वहां एक मंदिर मौजूद था। उन्होंने कहा कि जब किसी स्थान का मूल स्वरूप मंदिर का रहा हो, तो वह धार्मिक पहचान समाप्त नहीं होती। वकील ने अपने पक्ष को मजबूत करने के लिए दो महत्वपूर्ण मामलों का हवाला भी दिया। उन्होंने राम जन्मभूमि बाबरी मस्जिद विवाद और श्रीकृष्ण जन्मभूमि शाही ईदगाह मामले में दिए गए न्यायालय के फैसलों का उल्लेख करते हुए कहा कि किसी देवता की ज्यूरिस्टिक पर्सनैलिटी यानी कानूनी व्यक्तित्व की मान्यता तब भी बनी रहती है, जब उसकी मूर्ति या संरचना को नुकसान पहुंचाया गया हो या उसे बदल दिया गया हो। उन्होंने तर्क दिया कि यही सिद्धांत भोजशाला मामले में भी लागू होता है। हिन्दू पक्ष ने अदालत में यह भी स्पष्ट किया कि उनका उद्देश्य किसी विवाद को बढ़ाना नहीं, बल्कि अपने धार्मिक अधिकारों की वैधानिक मान्यता प्राप्त करना है। उन्होंने कहा कि इतिहास और परंपरा के आधार पर यह स्थान मां सरस्वती के मंदिर के रूप में जाना जाता रहा है, जिसे वाग्देवी मंदिर कहा जाता है। दूसरी ओर मुस्लिम पक्ष का कहना है कि यह परिसर कमाल मौला मस्जिद है और उन्हें यहां नमाज अदा करने का अधिकार मिलना चाहिए। इस विवाद के चलते दोनों पक्षों के बीच लंबे समय से कानूनी और सामाजिक तनाव बना हुआ है। भोजशाला का ऐतिहासिक महत्व भी इस विवाद को और संवेदनशील बना देता है। माना जाता है कि इस इमारत का निर्माण 11वीं शताब्दी में राजा भोज द्वारा कराया गया था और यह एक प्रमुख शैक्षणिक और सांस्कृतिक केंद्र हुआ करता था। समय के साथ इसके स्वरूप और उपयोग को लेकर अलग अलग दावे सामने आते रहे हैं, जिससे यह विवाद गहराता गया है। हाई कोर्ट में इस मामले की सुनवाई अभी जारी है और गुरुवार को भी इस पर बहस होने की संभावना है। इस केस का फैसला न केवल स्थानीय स्तर पर बल्कि राष्ट्रीय स्तर पर भी प्रभाव डाल सकता है, क्योंकि यह धार्मिक स्थलों के स्वामित्व और उपयोग से जुड़े बड़े कानूनी सवालों को छूता है। फिलहाल सभी की नजरें अदालत की आगामी सुनवाई पर टिकी हैं, जहां यह तय होगा कि इस ऐतिहासिक स्थल पर पूजा और नमाज के अधिकार को लेकर किस पक्ष के तर्कों को कानूनी मान्यता मिलती है।
फेसबुक फ्रेंड ने शादी का झांसा देकर किया रेप, ग्वालियर में आरोपी गिरफ्तार

ग्वालियर। मध्य प्रदेश के ग्वालियर से एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जहां फेसबुक पर हुई दोस्ती ने एक विवाहित महिला की जिंदगी को झकझोर कर रख दिया। आरोपी युवक ने पहले दोस्ती बढ़ाई, फिर शादी का झांसा देकर महिला के साथ दुष्कर्म किया और बाद में धमकाने लगा। पुलिस ने मामले में कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया है। फेसबुक से शुरू हुई बातचीत, बढ़ा संपर्कपुलिस के अनुसार 37 वर्षीय महिला की करीब एक साल पहले विक्की जाटव से फेसबुक के जरिए पहचान हुई थी। आरोपी मुरैना जिले के उत्तमपुर का निवासी है। धीरे-धीरे दोनों के बीच बातचीत बढ़ी और फोन पर नियमित संपर्क होने लगा। इसी दौरान आरोपी ने महिला को अपने झांसे में ले लिया। होटल में ले जाकर किया दुष्कर्मबताया जा रहा है कि 7 जुलाई 2025 को आरोपी ग्वालियर पहुंचा और महिला को मिलने के लिए बुलाया। इसके बाद वह उसे शहर के एक होटल में ले गया, जहां शादी का झांसा देकर उसके साथ दुष्कर्म किया। जब महिला ने विरोध किया तो आरोपी ने जल्द शादी का वादा कर उसे शांत करा दिया। एक साल तक बनाता रहा संबंध, फिर मुकराआरोप है कि इसके बाद आरोपी महिला को अलग-अलग जगहों पर ले जाकर लगातार शारीरिक संबंध बनाता रहा। जब महिला ने शादी के लिए दबाव बनाना शुरू किया, तो आरोपी अपने वादे से मुकर गया और उसे जान से मारने की धमकी देने लगा। इससे परेशान होकर महिला ने आखिरकार पुलिस की शरण ली। शिकायत के बाद पुलिस ने की कार्रवाईपीड़िता की शिकायत पर पुलिस ने आरोपी के खिलाफ दुष्कर्म सहित विभिन्न धाराओं में मामला दर्ज किया। पुलिस टीम ने कार्रवाई करते हुए मुरैना पहुंचकर आरोपी को गिरफ्तार कर लिया और उसे ग्वालियर लाया गया है। पुलिस कर रही पूछताछमामले में थाना प्रभारी ने बताया कि आरोपी से पूछताछ की जा रही है और आगे की कानूनी कार्रवाई जारी है। पुलिस यह भी जांच कर रही है कि आरोपी ने इस तरह की घटना कहीं और तो नहीं की। सावधानी भी जरूरी: सोशल मीडिया पर सतर्क रहेंयह मामला एक बार फिर यह सोचने पर मजबूर करता है कि सोशल मीडिया पर अनजान लोगों से दोस्ती करते समय सतर्क रहना कितना जरूरी है। किसी भी तरह के रिश्ते में जल्दबाजी या बिना जांच-पड़ताल के भरोसा करना गंभीर परिणाम दे सकता है।
भोपाल में अभिमुखीकरण प्रशिक्षण का समापन, मंत्री पटेल ने अधिकारियों को दिए प्रभावी प्रशासन के मंत्र

भोपाल । मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल स्थित मध्यप्रदेश जल एवं भूमि प्रबन्ध संस्थान में नवागत मुख्य कार्यपालन अधिकारी जनपद पंचायत और विकास खंड अधिकारियों के अभिमुखीकरण प्रशिक्षण कार्यक्रम का समापन समारोह आयोजित किया गया। इस अवसर पर पंचायत एवं ग्रामीण विकास और श्रम मंत्री श्री प्रहलाद सिंह पटेल मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए और नवनियुक्त अधिकारियों से सीधा संवाद किया। कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मंत्री श्री पटेल ने अधिकारियों को लक्ष्य आधारित कार्यशैली अपनाने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि आगामी तीन वर्षों में ऐसा कार्य करें जिससे उन्हें स्वयं संतुष्टि प्राप्त हो सके। उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा कि आपकी आत्मसंतुष्टि ही इस बात का प्रमाण होगी कि आपने आमजन के जीवन में कितना सकारात्मक बदलाव लाया है। उन्होंने अधिकारियों को अपने कार्यों के प्रति जिम्मेदारी और समर्पण का भाव रखने की प्रेरणा दी। मंत्री पटेल ने अधिकारियों से उनके कार्यक्षेत्र भविष्य की योजनाओं और संभावित चुनौतियों को लेकर चर्चा की। उन्होंने कहा कि प्रशासन में निरंतर संवाद अत्यंत आवश्यक है क्योंकि संवाद ही बेहतर कार्य करने की प्रेरणा देता है और इससे पारदर्शिता और प्रभावशीलता बढ़ती है। उन्होंने अधिकारियों को यह भी सलाह दी कि वे अपने अधीनस्थ कर्मचारियों और आम जनता के साथ सतत संवाद बनाए रखें ताकि योजनाओं का बेहतर क्रियान्वयन सुनिश्चित हो सके। उन्होंने आगे कहा कि कई बार व्यक्ति यह सोचता है कि वह सभी कार्य कर सकता है जो एक सकारात्मक सोच है लेकिन बेहतर परिणाम तब मिलते हैं जब व्यक्ति अपनी रुचि और क्षमता के अनुसार कार्य करता है। उन्होंने जोर देकर कहा कि हर कार्य को स्पष्ट लक्ष्य मजबूत योजना और टीम वर्क के साथ किया जाए तो सफलता निश्चित होती है। इस दौरान नव नियुक्त अधिकारियों ने प्रशिक्षण अवधि के अपने अनुभव भी साझा किए। उन्होंने बताया कि पिछले 45 दिनों में आयोजित इस प्रशिक्षण कार्यक्रम ने उन्हें प्रशासनिक कार्यप्रणाली को समझने और जमीनी स्तर पर काम करने के व्यावहारिक पहलुओं को सीखने का अवसर दिया। प्रशिक्षण के दौरान विभिन्न क्षेत्रों का भ्रमण कराया गया जिससे उन्हें वास्तविक परिस्थितियों और चुनौतियों को समझने में मदद मिली। अधिकारियों ने कहा कि इस प्रशिक्षण से उन्हें अपने कार्य की रूपरेखा तैयार करने और भविष्य में बेहतर तरीके से जिम्मेदारी निभाने की दिशा में मार्गदर्शन मिला है। उन्होंने यह भी बताया कि इस तरह के प्रशिक्षण कार्यक्रम प्रशासनिक दक्षता को बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। कार्यक्रम के समापन अवसर पर मंत्री श्री पटेल ने सभी नवनियुक्त अधिकारियों को सम्मानित किया और उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की। इस मौके पर पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग की अपर मुख्य सचिव श्रीमती दीपाली रस्तोगी सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारी भी उपस्थित रहे। यह प्रशिक्षण कार्यक्रम न केवल प्रशासनिक दक्षता को मजबूत करने का माध्यम बना बल्कि अधिकारियों को जनहित में कार्य करने की नई दृष्टि और ऊर्जा भी प्रदान कर गया।