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Hyundai Price Hike: 1 मई से महंगी होंगी कारें, जानिए कितनी बढ़ेगी कीमत!

नई दिल्ली। Hyundai ने 1 मई 2026 से अपनी कारों की कीमतों में बढ़ोतरी का ऐलान किया है। जानें कितनी बढ़ेगी कीमत, इसके पीछे की वजह और अभी खरीदना क्यों फायदेमंद हो सकता है। Hyundai ने घोषणा की है कि 1 मई 2026 से उसकी सभी कारों की कीमतों में बढ़ोतरी की जाएगी। यह बढ़ोतरी अलग-अलग मॉडल और वेरिएंट के अनुसार होगी, लेकिन अनुमान है कि कीमतों में अधिकतम 1% तक का इजाफा हो सकता है। क्यों बढ़ रही हैं कीमतें?कंपनी के अनुसार, कारों की कीमत बढ़ाने की मुख्य वजह उत्पादन लागत में बढ़ोतरी है। पिछले कुछ समय से कच्चे माल, मैन्युफैक्चरिंग और अन्य खर्चों में लगातार वृद्धि हो रही है, जिसके चलते कंपनी को यह कदम उठाना पड़ा है। Hyundai का कहना है कि वह ग्राहकों पर अतिरिक्त बोझ डालने से बचने की कोशिश करती है, लेकिन लागत बढ़ने के कारण कीमतों में बदलाव जरूरी हो गया है। बिक्री में जारी है बढ़ोतरीकीमत बढ़ाने के बावजूद Hyundai की बिक्री में सुधार देखा जा रहा है। वित्त वर्ष 2026 की चौथी तिमाही में कंपनी ने 2 लाख से ज्यादा गाड़ियों की बिक्री की, जो पिछले साल की तुलना में करीब 8.7% अधिक है। घरेलू बाजार के साथ-साथ एक्सपोर्ट में भी कंपनी ने अच्छा प्रदर्शन किया है, जिससे उसकी मजबूत पकड़ का पता चलता है। अभी खरीदना हो सकता है फायदेमंदअगर आप Hyundai की कार खरीदने की योजना बना रहे हैं, तो अप्रैल 2026 तक खरीदारी करना आपके लिए बेहतर हो सकता है। कीमत बढ़ने से पहले खरीदने पर आप पैसे बचा सकते हैं। साथ ही, इस समय कई डीलर ऑफर और डिस्काउंट भी दे सकते हैं, जिससे अतिरिक्त लाभ मिल सकता है।

एमपी में गेहूं खरीदी पर गरमाई सियासत, देरी के खिलाफ कांग्रेस का प्रदर्शन, सरकार पर लगाए घोटाले के आरोप

भोपाल। मध्य प्रदेश में गेहूं खरीदी की देरी को लेकर सियासत गरमा गई है। गुरुवार से प्रदेश के चार संभागों में खरीदी शुरू हो गई, लेकिन देरी को लेकर कांग्रेस पार्टी ने प्रदेशभर में प्रदर्शन किया। सरकार जहां इस देरी के पीछे इजराइल-ईरान युद्ध का हवाला दे रही है, वहीं विपक्ष इसे किसानों के साथ अन्याय बता रहा है। प्रदेशभर में कांग्रेस का विरोध प्रदर्शन खंडवा में कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने बैरिकेडिंग तोड़कर कलेक्ट्रेट पहुंचकर जोरदार नारेबाजी की, जिसमें हजारों कार्यकर्ता शामिल हुए। रतलाम में जिला कांग्रेस कमेटी के नेतृत्व में कृषि उपज मंडी में धरना दिया गया, जहां बड़ी संख्या में किसान भी पहुंचे। भोपाल और श्योपुर में भी विरोध प्रदर्शन और नारेबाजी देखने को मिली। जीतू पटवारी के आरोप प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने सरकार पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि गेहूं खरीदी में देरी एक “रणनीतिक घोटाला” है। उन्होंने आरोप लगाया कि बारदाने की कमी का बहाना बनाकर खरीदी टाली गई और किसानों को नुकसान पहुंचाया गया। पटवारी ने कहा कि करीब 10 लाख क्विंटल गेहूं ओपन मार्केट में बिक चुका है और लगभग 25% गेहूं 1600 से 2000 रुपए प्रति क्विंटल के भाव पर बेचा गया। उन्होंने नरेंद्र मोदी, शिवराज सिंह चौहान और मोहन यादव पर किसान विरोधी होने का आरोप लगाया। उन्होंने यह भी कहा कि मुख्यमंत्री द्वारा घोषित 2700 रुपए प्रति क्विंटल गेहूं, 3100 रुपए धान और 6000 रुपए सोयाबीन के दाम अब तक लागू नहीं किए गए हैं। व्यवस्थाओं की कमी से किसान परेशान रायसेन जिले में कई खरीदी केंद्रों पर व्यवस्थाएं अधूरी रहीं। बम्होरी केंद्र पर न तो पर्याप्त बारदाना पहुंचा और न ही किसानों के लिए छाया की व्यवस्था थी। स्लॉट बुकिंग के बावजूद किसानों को असमंजस का सामना करना पड़ा। वहीं, सागर में मंडी बंद होने पर जीतू पटवारी ने कलेक्टर को फोन कर नाराजगी जताई और कहा कि तेज गर्मी में किसान कई दिनों से परेशान हैं। श्योपुर और भोपाल में भी प्रदर्शन श्योपुर में जिला कांग्रेस कमेटी ने रैली निकालकर कलेक्ट्रेट पहुंचकर ज्ञापन सौंपा, जिसमें विधायक बाबू जंडेल भी शामिल रहे। वहीं भोपाल में कलेक्टर कार्यालय के बाहर बड़ी संख्या में कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने घेराव कर खरीदी व्यवस्था पर सवाल उठाए।सरकार का पलटवार राजस्व मंत्री करण सिंह वर्मा ने कांग्रेस के आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि उनके कार्यकाल में एक दाना भी गेहूं नहीं खरीदा गया था, जबकि वर्तमान सरकार किसानों से खरीदी कर रही है। उन्होंने कहा कि खाड़ी क्षेत्र में चल रहे युद्ध के कारण थोड़ी देरी हुई, लेकिन अब व्यवस्थाएं पटरी पर आ रही हैं। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि कांग्रेस का काम केवल विरोध करना है, जबकि सरकार किसानों के हित में काम कर रही है।

DATIYA SANITATION NEWS : बड़ौनी में बारिश के बाद सफाई कर्मचारी निलंबित: लगातार लापरवाही के चलते हुई कार्रवाई

DATIYA NEWS

HIGHLIGHTS: बड़ौनी नगर में बारिश के बाद जलभराव से सफाई व्यवस्था की खामी उजागर चार सफाई कर्मचारियों को लापरवाही के आरोप में निलंबित किया गया विभागीय जांच में ड्यूटी में नियमित उपस्थिति नहीं और सफाई में लापरवाही सामने आई सीएमओ ने सख्त चेतावनी दी, भविष्य में दोबारा लापरवाही बर्दाश्त नहीं होगी नगर में लगातार मिल रही शिकायतों पर तुरंत कार्रवाई DATIYA SANITATION NEWS : दतिया। बीते दिन हुई तेज बारिश ने दतिया जिले के बड़ौनी नगर पालिका की सफाई व्यवस्था की असलियत उजागर करदी। नगर में कई जगह जलभराव की स्थिति बन गई, जिससे लोगों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ा। GUNA MAN MURDERED : प्रेमिका से मिलने गए युवक की बेरहमी से पिटाई, आम आदमी पार्टी से था कनेक्शन? चार कर्मचारियों को निलंबित किया गया नगर पालिका के मुख्य प्रशासनिक अधिकारी यशवंत सिंह राठौर ने इस मामले को गंभीरता से लेते हुए चार सफाई कर्मचारियों को निलंबित कर दिया। निलंबित कर्मचारियों में सुनील वाल्मीक, बिरजू वाल्मीक, संतोष वाल्मीक और एक अन्य सुनील वाल्मीक शामिल हैं। TET अनिवार्यता पर भड़के शिक्षक, बोले- 26 साल के अनुभवी से भी दोबारा परीक्षा लें जांच में सामने आई लापरवाही विभागीय जांच में पता चला कि ये कर्मचारी नियमित रूप से सफाई कार्य नहीं कर रहे थे और ड्यूटी पर आने में भी लापरवाही बरत रहे थे। नगर की सफाई व्यवस्था लगातार प्रभावित हो रही थी। TET अनिवार्यता पर भड़के शिक्षक, बोले- 26 साल के अनुभवी से भी दोबारा परीक्षा लें सीएमओ की चेतावनी सीएमओ राठौर ने बताया कि नगर में सफाई को लेकर लगातार शिकायतें मिल रही थीं। मौके के निरीक्षण में लापरवाही स्पष्ट पाई गई। उन्होंने सभी कर्मचारियों को दोषी मानते हुए तत्काल निलंबन की कार्रवाई की। साथ ही सख्त चेतावनी दी कि भविष्य में ऐसी लापरवाही दोबारा मिली तो कड़ी कार्रवाई की जाएगी।

बुरहानपुर का बोरसर गांव बना गाली गलौच मुक्त, जुर्माने और झाड़ू से सजा का अनोखा नियम

बुरहानपुर । मध्यप्रदेश के बुरहानपुर जिले का बोरसर गांव अब देश में गाली-गलौच मुक्त गांव के रूप में मशहूर हो गया है। यह गांव जिला मुख्यालय से 20 किलोमीटर दूर स्थित है और यहां करीब 6 हजार लोग रहते हैं। बोरसर गांव ने एक अनोखी पहल करते हुए पूरे गांव में गाली देने पर कड़ी सजा और जुर्माने का नियम लागू किया है। अगर कोई व्यक्ति यहां गाली देता है, तो उसे 500 रुपये का जुर्माना या एक घंटे तक गांव में झाड़ू मारकर सफाई करने की सजा भुगतनी पड़ती है। गांव में यह पहल ग्राम पंचायत बोरसर के सरपंच अंतरसिंह और उपसरपंच विनोद शिंदे के नेतृत्व में की गई। इस योजना में अभिनेता और समाजसेवी अश्विन पाटिल भी शामिल हुए, जिन्होंने गांव को सभ्य और गाली मुक्त बनाने का बीड़ा उठाया। उन्होंने बताया कि अमीर हो या गरीब, यह नियम सभी पर समान रूप से लागू होता है। उन्होंने कहा कि छोटे झगड़ों में अक्सर विवाद गालियों की वजह से बढ़ जाते थे। इस समस्या को देखते हुए पंचायत ने इसे रोकने का ठोस कदम उठाया। बोरसर गांव में लोगों को जागरूक और शिक्षित बनाने के लिए पुस्तकालय भी खोला गया है। यहां धर्म-कर्म, जनरल नॉलेज और स्कूली पाठ्यक्रम की किताबें उपलब्ध कराई गई हैं। बच्चों और युवाओं को इंटरनेट के माध्यम से ज्ञान और सूचना तक पहुंच सुनिश्चित करने के लिए गांव में चार जगहों पर फ्री वाईफाई की सुविधा भी दी गई है। इस पहल से हर व्यक्ति फ्री इंटरनेट का लाभ उठा रहा है और जानकारी तक आसान पहुंच सुनिश्चित हो रही है। गांव में गाली-गलौच रोकने के नियम के साथ-साथ हर घर हरियाली अभियान भी शुरू किया गया है। लोगों को पौधे वितरित किए गए हैं ताकि गांव हरित और साफ-सुथरा बने। इसके अलावा, सेवा भाव कक्ष की भी स्थापना की गई है। यहां जरूरतमंदों के लिए दानदाता और समाजसेवियों द्वारा विभिन्न सामग्री उपलब्ध कराई गई है। किसी भी धर्म और जाति का व्यक्ति इसका लाभ उठा सकता है। अभिनेता अश्विन पाटिल ने बताया कि जब वह मुंबई से गांव लौटे, तो देखा कि छोटी-छोटी बातों पर गाली-गलौच की वजह से विवाद बढ़ जाते थे। उन्होंने सरपंच अंतरसिंह और उपसरपंच विनोद शिंदे से संपर्क किया और पंचायत में बैठक बुलाई गई। सभी ग्रामीणों की मौजूदगी में निर्णय लिया गया और गांव को गाली मुक्त बनाने का आदेश जारी किया गया। अब गांव में जगह-जगह पोस्टर लगे हैं, जिसमें साफ शब्दों में लिखा है कि बोरसर मध्यप्रदेश का पहला गाली मुक्त गांव है। इस पहल ने पूरे गांव में एक सभ्यता और जागरूकता का माहौल पैदा किया है। छोटे विवाद भी अब शांति और समझदारी से सुलझाए जा रहे हैं। गाली-गलौच के बिना गांव में सामाजिक सामंजस्य और सहयोग की भावना मजबूत हो रही है। यह मॉडल अन्य ग्रामीण इलाकों के लिए भी प्रेरणास्त्रोत बन सकता है। बोरसर गांव ने दिखा दिया कि अनुशासन, शिक्षा और जागरूकता से समाज में सकारात्मक बदलाव लाया जा सकता है।

बारात लेकर पहुंचा दूल्हा, तभी आया रेप केस का फोन-उज्जैन में सनसनी!

नई दिल्ली। मध्य प्रदेश के उज्जैन और रतलाम के बीच एक शादी समारोह उस वक्त अचानक थम गया, जब दूल्हे पर नाबालिग से दुष्कर्म का मामला सामने आया। बारात दरवाजे तक पहुंच चुकी थी और दूल्हा मंडप में एंट्री लेने ही वाला था, लेकिन पुलिस के एक फोन कॉल ने पूरे माहौल को बदल दिया। बारात के बीच पुलिस का फोन, मच गया हड़कंपजानकारी के मुताबिक, उज्जैन के पास बड़नगर की शिक्षक कॉलोनी निवासी अभिषेक सेन की शादी रतलाम की युवती से तय थी। शादी के कार्यक्रम दो दिन से चल रहे थे और बुधवार रात करीब 8 बजे बारात धूमधाम से निकली। लेकिन जैसे ही बारात दुल्हन के घर पहुंचने वाली थी, पुलिस ने दुल्हन पक्ष को फोन कर बताया कि दूल्हे के खिलाफ गंभीर आपराधिक मामला दर्ज होने जा रहा है। यह सुनते ही शादी वाले घर में अफरा-तफरी मच गई और तुरंत बातचीत के बाद शादी रोक दी गई। नाबालिग ने दर्ज कराया केस, पॉक्सो एक्ट में कार्रवाईपुलिस ने 15 वर्षीय नाबालिग की शिकायत पर आरोपी अभिषेक सेन के खिलाफ पॉक्सो एक्ट और दुष्कर्म की धाराओं में मामला दर्ज किया है। केस दर्ज होते ही दूल्हा फरार हो गया। पुलिस उसकी तलाश में जुटी है और जल्द गिरफ्तारी का दावा कर रही है। चार महीने पहले हुई वारदात, शादी वाले दिन खुला सचपीड़िता के अनुसार, यह घटना 5 जनवरी की है, जब आरोपी उसके घर पहुंचा और उसे डरा-धमकाकर दुष्कर्म किया। उसने किसी को बताने पर धमकी भी दी। लंबे समय तक चुप रहने के बाद, जब आरोपी की शादी तय हुई तो पीड़िता मानसिक रूप से टूट गई। गर्भवती होने का खुलासा, आत्महत्या की कोशिशशादी से तीन दिन पहले, 6 अप्रैल को नाबालिग ने एसिड पीकर आत्महत्या की कोशिश की। इलाज के दौरान 8 अप्रैल को डॉक्टरों को उसके गर्भवती होने का पता चला। इसके बाद उसने परिजनों को पूरी घटना बताई और मामला पुलिस तक पहुंचा। स्थानीय मदद से रुकी शादी, पुलिस ने की तत्पर कार्रवाईथाना प्रभारी अशोक पाटीदार के अनुसार, पीड़िता और आरोपी एक ही कॉलोनी में रहते थे। मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने तुरंत दुल्हन पक्ष से संपर्क किया। एक स्थानीय पार्षद की मदद से समय रहते शादी रुकवाई गई, जिससे एक बड़ा सामाजिक और कानूनी विवाद टल गया। फरार आरोपी की तलाश जारीघटना के बाद आरोपी रतलाम पहुंचने से पहले ही फरार हो गया। पुलिस लगातार उसकी तलाश कर रही है और जल्द गिरफ्तारी की बात कही जा रही है।

कांग्रेस में वंदे मातरम विवाद ने पकड़ा राजनीतिक तूफ़ान, केके मिश्रा ने दी खुली चेतावनी

इंदौर । इंदौर में वंदे मातरम को लेकर शुरू हुआ विवाद अब कांग्रेस के अंदर ही बड़ा राजनीतिक तूफ़ान बन गया है। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता केके मिश्रा ने इस मामले पर अपनी पार्टी के भीतर खुले तौर पर विरोध दर्ज कराया है। उन्होंने अपने ट्वीट्स में न सिर्फ भाजपा पर हमला बोला बल्कि कांग्रेस की पार्षद रूबीना खान को भी आड़े हाथों लिया। मिश्रा ने बेहद सख्त शब्दों में कहा कि जो लोग राष्ट्रधर्म नहीं निभा सकते और वंदे मातरम नहीं बोल सकते वे भाड़ में जाएं और पाकिस्तान जाकर बसें। उनके इस बयान ने राजनीतिक माहौल को और गर्मा दिया है। रूबीना खान के बयान को मिश्रा ने राजनीतिक ब्लैकमेलिंग करार दिया। उन्होंने आरोप लगाया कि पूरा मामला भारतीय जनता पार्टी के साथ मिलकर खेला गया है। मिश्रा ने यह भी कहा कि रूबीना खान के बयान से उन मुस्लिम स्वतंत्रता सेनानियों और सैनिकों का अपमान हुआ है जिन्होंने अपने प्राणों की आहुति देश के लिए दी। उनके अनुसार यह केवल एक व्यक्तिगत विवाद नहीं बल्कि राष्ट्रभक्ति के मूल्यों को चुनौती देने वाला मामला है। केके मिश्रा ने भाजपा पर भी तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि भाजपा को इस मुद्दे पर राजनीति करने का कोई अधिकार नहीं है क्योंकि उसने अपने ही मंत्री विजय शाह के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की। मिश्रा ने भाजपा पर राष्ट्रधर्म के मुद्दे पर दोहरा चरित्र अपनाने का आरोप लगाया। उनके अनुसार केवल राजनीतिक लाभ के लिए मुद्दों को उछालना और अपने ही लोगों की अनदेखी करना लोकतंत्र और राष्ट्रीय भावना के लिए खतरनाक है। मिश्रा ने कांग्रेस नेतृत्व को भी खुली चुनौती दी। इंदौर कांग्रेस अध्यक्ष चिंटू चौकसे को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि सिर्फ नोटिस देने से काम नहीं चलेगा। उनके अनुसार रूबीना खान को पार्टी से बर्खास्त किया जाना चाहिए। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा जहां जाना चाहती हैं चली जाएं। मिश्रा ने पार्टी को चेतावनी दी कि ऐसे संदिग्ध निष्ठा वाले लोगों को शामिल करने से पहले गंभीरता से विचार करना चाहिए। उनके अनुसार यह केवल पार्टी का मामला नहीं बल्कि देश के प्रति प्रतिबद्धता का भी सवाल है। इस पूरे विवाद ने कांग्रेस के अंदरूनी मतभेद को खुलकर सामने ला दिया है। एक तरफ भाजपा इस मुद्दे को राजनीतिक लाभ उठाने के लिए भुनाने की कोशिश कर रही है तो वहीं कांग्रेस के भीतर नेताओं के बीच टकराव और तेज होता दिख रहा है। राजनीतिक विश्लेषक मानते हैं कि इस मामले में कांग्रेस की छवि और संगठनात्मक क्षमता दोनों चुनौतीपूर्ण स्थिति में हैं। इंदौर के यह विवाद केवल स्थानीय स्तर पर सीमित नहीं है बल्कि राष्ट्रीय राजनीति पर भी असर डाल सकता है। केके मिश्रा का यह कड़ा रुख और पार्टी नेतृत्व को खुली चुनौती देना इस बात का संकेत है कि कांग्रेस को अपने भीतर अनुशासन और संगठनात्मक मजबूती बनाए रखने की आवश्यकता है। इस विवाद का राजनीतिक भविष्य और असर आने वाले दिनों में साफ होगा लेकिन फिलहाल यह वंदे मातरम विवाद कांग्रेस के लिए सबसे बड़े अंदरूनी तूफानों में से एक बन चुका है।

GUNA MAN MURDERED : प्रेमिका से मिलने गए युवक की बेरहमी से पिटाई, आम आदमी पार्टी से था कनेक्शन?

GUNA ACCUSED ARRESTED

HIGHLIGHTS: गिरीश मीना की पीट-पीटकर हत्या, शादीशुदा प्रेमिका से मिलने के दौरान हुई घटना आरोपी महिला के ससुराल वाले और उनके रिश्तेदार दोस्त को धमकाकर भगा दिया गया दो सगे भाइयों को पुलिस ने गिरफ्तार कर रिमांड पर लिया फरार दो अन्य आरोपियों की तलाश जारी GUNA MAN MURDERED : गुना। जिले के चांचौड़ा इलाके के कोन्याकला गांव में शुक्रवार शाम एक दर्दनाक घटना हुई। शादीशुदा प्रेमिका से मिलने आए 32 वर्षीय गिरीश मीना (पूर्व जनपद अध्यक्ष और आप नेता के भांजे) की पीट-पीटकर हत्या कर दी गई। बता दें कि गिरीश अपने दोस्त कृष्णगोपाल मीना के साथ ऑल्टो कार से 35 किलोमीटर दूर कोन्याकला गांव पहुंचे थे। लिलिमा मिंज: साधारण आदिवासी परिवार से निकलकर ओलंपिक तक का शानदार सफर! मारपीट का मामला घटना के समय गिरीश प्रेमिका से मिलने स्कूल के पास गए, जबकि उनका दोस्त कार में बैठा रहा। इस दौरान महिला के ससुराल वालों ने उन्हें देख लिया। आरोपियों में चंदू मीना, रामविलास मीना, मनीष मीना और गोविंद मीना ने गिरीश को पकड़कर गालियां देते हुए मारपीट की। आखिर कब तक बचाव कर पाएंगी ममता दीदी ? इलाज के दौरान हुई मौत मारपीट के बाद गिरीश के दोस्त कृष्णगोपाल मीना को बहन से धमका कर भगा दिया। जिसके बाद गिरीश को गंभीर चोटें आईं और उन्हें अस्पताल ले जाया गया, इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई। शनिवार सुबह शव का पोस्टमार्टम किया गया। भोपाल में हाई प्रोफाइल केस, EOW में शिकायत दर्ज, 237 प्रोजेक्ट की मंजूरी पर सियासत गरम पुलिस की कार्रवाई फरियादी कृष्णगोपाल की शिकायत पर पुलिस ने चारों आरोपियों के खिलाफ हत्या और अन्य धाराओं में मामला दर्ज किया। पुलिस अधीक्षक हितिका वासल ने तुरंत कार्रवाई के निर्देश दिए। बीनागंज चौकी पुलिस ने मुखबिर की मदद से दो सगे भाइयों मनीष और रामविलास मीना को गिरफ्तार किया। रिमांड पर पूछताछ जारी है।

19वीं सदी की वास्तविक घटनाओं पर आधारित ‘राणाबाली’ की भव्य प्रस्तुति…

नई दिल्ली:साल की सबसे प्रतीक्षित फिल्मों में से एक, ‘राणाबाली’, 19वीं सदी की वास्तविक घटनाओं पर आधारित एक पैन-इंडिया पीरियड ड्रामा के रूप में तैयार हो रही है। माइथ्री मूवी मेकर्स के बैनर तले बनी इस फिल्म का निर्देशन राहुल सांकृत्यायन कर रहे हैं, जबकि प्रोडक्शन टी-सीरीज के साथ य. रविशंकर और नवीन यरनेनी ने मिलकर किया है। फिल्म में विजय देवरकोंडा और रश्मिका मंदाना मुख्य भूमिकाओं में हैं, और हॉलीवुड स्टार अर्नोल्ड वोस्लू भी महत्वपूर्ण किरदार निभा रहे हैं। राहुल सांकृत्यायन ने बताया कि फिल्म की कहानी पूरी तरह से ऐतिहासिक सच्चाइयों और भूले-बिसरे रायलसीमा की घटनाओं पर आधारित है। इसके लिए उन्होंने कई इतिहासकारों, कवियों और पुराने अभिलेखागारों से गहन शोध किया। उनका कहना है कि इतिहास केवल किताबों में ही नहीं, बल्कि गांवों, रीति-रिवाजों और अनकही कहानियों में भी मौजूद है। फिल्म के क्लाइमेक्स के कुछ दृश्यों को भी गांवों में लंबे समय तक भूले हुए रीति-रिवाजों और स्थानीय अनुभवों से प्रेरित किया गया है। फिल्म में विजय देवरकोंडा एक निडर विद्रोही के रूप में नजर आएंगे, जो उस काल और क्षेत्र की कठोर सच्चाइयों में जी रहे लोगों की आक्रामकता और दबदबे का प्रतीक हैं। इस किरदार की तैयारी के लिए उन्होंने रायलसीमा की स्थानीय बोली सीखी और घुड़सवारी की ट्रेनिंग भी ली। फिल्म के लिए महाराष्ट्र से विशेष रूप से घोड़े मंगवाए गए और उन्हें भी प्रशिक्षित किया गया। राहुल सांकृत्यायन ने बताया कि घोड़ा फिल्म में केवल एक प्रॉप नहीं बल्कि कहानी का अहम हिस्सा है। रश्मिका मंदाना फिल्म में फीमेल लीड हैं और विजय देवरकोंडा के साथ उनकी जोड़ी पहले ही दर्शकों के बीच उत्साह पैदा कर चुकी है। अर्नोल्ड वोस्लू ने फिल्म में ब्रिटिश अधिकारी सर थियोडोर हेक्टर का किरदार निभाया है। दक्षिण अफ्रीका से आने वाले वोस्लू ने फिल्म की भावनाओं और औपनिवेशिक बैकड्रॉप के लिए भाषाई ट्रेनिंग ली और स्क्रिप्ट के साथ गहराई से जुड़ गए। राहुल सांकृत्यायन ने कहा कि आज के दर्शक इतिहास और बड़े पैमाने की काल्पनिक महागाथाओं की ओर अधिक आकर्षित हो रहे हैं। इसलिए फिल्म में भव्य दृश्य, ऐतिहासिक सच्चाइयों और व्यक्तिगत संघर्षों को बड़े पैमाने पर पेश किया गया है। उन्होंने जोर दिया कि यह फिल्म सिर्फ मनोरंजन नहीं बल्कि भारतीय इतिहास और प्रतिरोध, परंपरा और औपनिवेशिक चुनौतियों की कहानियों को जीवंत करने का प्रयास है। ‘राणाबाली’ 11 सितंबर 2026 को सिनेमाघरों में रिलीज होने वाली है और इसे पैन-इंडिया स्तर पर बड़े पर्दे पर पेश किया जाएगा। फिल्म की स्टार कास्ट और ऐतिहासिक कथानक इसे एक बड़ा अनुभवात्मक और दर्शकप्रिय सिनेमाई अनुभव बनाने की दिशा में अग्रसर करता है।

जेसीबी का पंजा, फूटी पीएनजी लाइन, मुरैना में मची अफरातफरी

मुरैना । मुरैना में नेहरू पार्क के पास एक सप्ताह से फूटी पानी की पाइपलाइन को ठीक करने के लिए नगर निगम की जेसीबी मशीन ने खोदाई शुरू की थी तभी हादसा हुआ। पानी की लाइन के ऊपर से गुजर रही पीएनजी घरेलू गैस लाइन जेसीबी के पंजे से कट गई। गैस लाइन कटते ही आग की भयानक लपटें उठीं और 20 मीटर तक गुबार फैल गया। पास में नाश्ते की दुकान में जल रही भट्टी से आग और भड़क गई। आग इतनी तेजी से फैली कि दुकान के बाहर का छप्पर जलकर राख हो गया। कन्हैया मिष्ठान की दुकान के संचालक विमल गुप्ता और उनके बेटे पावश गुप्ता झुलस गए। आग की लपटें पास की मोटरवाइडिंग की दुकान तक पहुंचीं और अख्तर खान का पूरा चेहरा और बाल झुलस गए। सूचना मिलते ही पीएनजी लाइन के कर्मचारी और नगर निगम की फायर ब्रिगेड मौके पर पहुंचे। आग को तुरंत काबू किया गया। पीएनजी के कर्मचारियों ने बताया कि पाइपलाइन में फिलहाल सप्लाई बंद थी और केवल टेस्टिंग के लिए गैस रखी गई थी। अगर सप्लाई चालू होती तो बड़ा हादसा हो सकता था। यह घटना मुरैना में बिछाई गई पीएनजी लाइन की सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े कर रही है। नगर निगम और पीएनजी विभाग के कर्मचारी तुरंत फूटी गैस और पानी की लाइन को ठीक करने में लग गए। पानी की पाइपलाइन निकालने के लिए सड़क पर खुदाई की गई और नेहरू पार्क के सामने एमएस रोड का एक साइड बंद कर दिया गया। बैरिकेड लगने के कारण हनुमान चौराहा की तरफ जाने वाले वाहन शिक्षा नगर और जीवाजीगंज की सड़कों से मोड़ दिए गए। इसके चलते एमएस रोड पर लगभग एक किलोमीटर लंबा जाम लग गया। वाहनों की भारी भीड़ के कारण मिल एरिया रोड, गर्ल्स रोड और शिक्षा नगर रोड पर भी जाम बढ़ गया। हादसे ने यह स्पष्ट कर दिया कि पाइपलाइन सुरक्षा के मानक पर्याप्त नहीं हैं। प्रशासन और पीएनजी विभाग की सतर्कता ही भविष्य में ऐसे बड़े हादसों को रोक सकती है।

लिलिमा मिंज: साधारण आदिवासी परिवार से निकलकर ओलंपिक तक का शानदार सफर!

नई दिल्ली। लिलिमा मिंज भारतीय महिला हॉकी टीम के उन खिलाड़ियों में शामिल हैं, जिनमें शामिल हैं, सीमित सहयोगी के बावजूद अपनी मेहनत और प्रतिभा से देश का नाम रोशन किया। 10 अप्रैल 1994 को ओडिशा के सुंदरगढ़ जिले में एक सामान्य जनजातीय परिवार में जन्मे लिलिमा ने बचपन से ही बचपन का सामना किया था, लेकिन उनका सपना बड़ा था- भारत के लिए हॉकी खेलना। हॉकी की धरती से मिलापओडिशा को भारतीय हॉकी का गढ़ माना जाता है, जहां से कई दिग्गज खिलाड़ी निकले हैं। दिलीप टिर्की जैसे महान खिलाड़ी से प्रेरित होकर लीलिमा ने भी अपना करियर बनाने का फैसला लिया। गाँव और स्थानीय मैदानों में प्रतिस्पर्धा करते हुए उन्होंने अपने खेल को नया और धीरे-धीरे पहचान बनाना शुरू किया। जूनियर टीम से सीनियर टीम तक का सफरलिलिमा जूनियर की मेहनत रंग लाई और 2011 में उन्हें भारतीय टीम में जगह मिली। उसी वर्ष बैंकॉक में आयोजित अंडर-18 एशिया कप में उन्होंने टीम के साथ कांस्य पदक जीता। प्रदर्शन के दम पर उन्हें जल्द ही सीनियर टीम में मौका मिला और शानदार प्रदर्शन से उनके अंतरराष्ट्रीय बल्लेबाजों की असली शुरुआत हुई। टीम इंडिया की शानदार मिडफील्डर2011 से 2022 तक अपने करियर में लिलिमा ने भारतीय टीम के लिए 150 से ज्यादा मैच खेले। मिडफील्डर पर विशेष रूप से वह अपने तेज गेंदबाज, स्ट्राइकर पासिंग और डिफेंस डिफेंस को तोड़ने की क्षमता के लिए जेन जाइस्ट करता है। मैदान पर उनकी खेल टीम के लिए बैलेंस और प्लॉट का प्रतीक बना हुआ है। ओल और एशियाई खेलों में चमक प्रदर्शनलिलिमा मिंज ने कई खेलों में भारत का प्रतिनिधित्व किया। वह 2014 एशियाई खेलों में कांस्य पदक वाली टीम का हिस्सा बने। इसके अलावा 2016 के रियो ओलंपिक 2016 के लिए क्वालीफाई करने वाली भारतीय टीम में भी अपना अहम योगदान दे रही हैं। 2018 एशियन गेम्स में उन्होंने टीम के साथ सिल्वर मेडल जीता। कॉमनवेल्थ गेम्स, हॉकी वर्ल्ड लीग और एशिया कप जैसे बड़े मंचों पर भी उन्होंने अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाया। भारतीय महिला हॉकी को नई पहचानने वाली पीढ़ीलिलिमा उस पीढ़ी का हिस्सा है, जिसने भारतीय महिला हॉकी को नई पहचान दी है। उनके दौर में टीम ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी मजबूत टीम के रूप में पहचान बनाई। कम उम्र में संन्यास ले लिया, लेकिन प्रेरणा बनी रहीजनवरी 2022 में, मैक्सिम 27 साल की उम्र में लिलिमा मिंज ने अंतरराष्ट्रीय हॉकी से संन्यास ले लिया। हालाँकि उनकी यात्रा छोटी रही, लेकिन उनकी उपलब्धियाँ और संघर्ष आने वाली यात्रा के लिए प्रेरणा बन गए हैं।