आखिर कब तक बचाव कर पाएंगी ममता दीदी ?

– मृत्युंजय दीक्षित वर्ष 2026 के पश्चिम बंगाल विधनासभा चुनाव घोषित हो चुके हैं। जैसे -जैसे चुनाव नजदीक आ रहा है वैसे वैसे राज्य की राजनीति का पारा चढ़ रहा है। बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी लगातार चौथी बार मुख्यमंत्री बनने के लिए अपने प्रचार को आक्रामक बना चुकी हैं। उनके लिए इस बार राह उतनी आसान नहीं है। भारतीय जनता पार्टी भी इस बार हर हाल में बंगाल में अपनी सरकार बनाने को संकल्पबद्ध है। बिहार विधानसभा चुनाव परिणामों के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एक सभा में कहा था कि गंगा नदी बिहार से ही बंगाल में जाती है और उसी दिन से बंगाल मे राजनीतिक तपिश का अनुभव होने लगा था। बंगाल में ममता दीदी के चौथी बार मुख्यमंत्री बनने की राह बहुत आसान नहीं है क्योकि कांग्रेस और वामपंथी दल भी पूरी ताकत से ममता दीदी को हराने के लिए काम कर रहे हैं। उनकी अपनी ही पार्टी के निष्कासित विधायक हुमायूं कबीर ने मुर्शिदाबाद में बाबरी मस्जिद के नाम पर मस्जिद की नींव रखने और फिर नयी पार्टी बनाकर विधानसभा चुनाव लड़ने का ऐलान कर राजनैतिक ध्रुवीकरण की समस्या पैदा कर दी है। मुर्शिदाबाद में हुमायूं कबीर के कदमों का ममता दीदी की सरकार ने कोई प्रतिवाद नहीं किया कि कहीं उनके मुस्लिम मतदाता नाराज न हो जाएं। बंगाल की कानून व्यवस्था भी ममता बनर्जी के लिए चौथी बार मुख्यमंत्री बनने के लिए समस्या पैदा कर सकती है। संदेशखाली में महिलाओं के साथ घटित वीभत्स घटना के आरोपी को बचाने से लेकर आर. जी कर में महिला डाक्टर के साथ बलात्कार और हत्या की भयंकर घटना में शामिल तृणमूल समर्थकों को बचाने के प्रयास चुनाव प्रचार के दौरान जमकर उछाले जायेंगे। इसके अलावा बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और उनकी सरकार अनेक घोटालों में बुरी तरह से फंसी हुई है और उन सभी घोटालो की जांच रही है। चुनाव आयोग की तरफ से मतदाता सूची के शुद्धीकरण के गहन अभियान को ममता बनर्जी ने जिस तरह बाधित करने का प्रयास किया उससे उनकी अपनी ही छवि ख़राब हुई है। मतदाता शुद्धीकरण अभियान के दौरान ममता बनर्जी व उनकी पार्टी ने पूरा दम लगा दिया कि किसी प्रकार इस कार्य को बाधित किया जाए या रोक दिया जाए। ममता की ओर से एसआईआर को लेकर भ्रम पैदा करने के पूरे प्रयास किए गए जिसमें उनकी ओर से पहले कहा गया कि वह एसआईआर फार्म नहीं भरेंगी और फिर उन्होंने भर भी दिया। आई पैक घोटाले में प्रवर्तन निदेशालय की छापेमारी के दौरान ममता जी जिस तरह पुलिस लेकर पहुँच गयीं वह हास्यास्पद था लेकिन अब उनके लिए अत्यंत गंभीर समस्या बनने जा रहा है। अब आई पैक का प्रकरण हाईकोर्ट से सुप्रीम कोर्ट तक पहुंच गया है। ममता दीदी ने कहा है कि बीजेपी ईडी के सहारे उनकी पार्टी की रणनीति चुराना चाहती है। आई- पैक प्रकरण को लेकर वह अत्यंत आक्रामक मुद्रा हैं। आई- पैक प्रकारण में ग्रीन फाइल को लेकर प्रश्न किया जा रहा है कि आखिर उन ग्रीन फाईल में ऐसा क्या था जिसे पाने के लिए ममता दीदी ने राज्य पुलिस की पूरी ताकत लगा दी। अब ईडी उन फाईल्स को तत्काल पाने के लिए हाईकोर्ट से लेकर सुप्रीम कोर्ट तक पहुँच गई है। अदालत में दोनों ही पक्षों ने अपनी-अपनी याचिकाएं लगा दी है। आई -पैक प्रकरण में ईडी की छापेमारी की खबर मीडिया में आग की तरह फैली और उसके बाद से ही कोलकाता से लेकर नई दिल्ली तक राजनीतिक हलचल तीव्र हो गई। टीवी चैनलों पर संविधान की किताब हाथ में लेकर घूमने वाले आ गए और कहा जाने लगा कि चुनाव से दो -तीन महीने पहले ही यह छापेमारी क्यों शुरू हो जाती है ? जबकि वास्तविकता यह है कि यह जांच काफी समय से चल रही है इस घोटाले की जांच रुकवाने के लिए तृणमूल नेता अभिषेक बनर्जी ने एक याचिका दायर की थी जो खारिज हो चुकी है। ईडी का यह छापा तृणमूल कांग्रेस आईटी सेल के हेड प्रतीक जैन के घर और कार्यालय पर पड़ा था और माना जा रहा है कि उनके रिश्ते चुनावी रणनीतिकार प्रशांत किशोर से भी हैं बिहार में अपनी सरकार बनने का सपना देखने वाले प्रशांत किशोर बंगाल में ममता दीदी के प्रमुख रणनीतिकारों में से एक हैं। यही कारण है कि जब ईडी का छापा पड़ा और ममता दीदी की पुलिस ने ईडी के कब्जे से ग्रीन फाइल अपने कब्जे में ली तभी से यह आरोप लगाया जाने लगा कि आखिर ममता दीदी की दाल में कुछ तो काला है । आखिर क्यों उन्हें ग्रीन फाइलों से इतना लगाव है? पहले ममता जी धमकी देते हुए कह रही थीं कि अगर वह बीजेपी के कार्यालाय में घुस गयीं तो क्या हो जाएगा और अब कह रही हैं कि जब बीजेपी को पता चला कि अबकी बार बीजेपी को पहले की तुलना में भी कम सीटें आ रही हैं तब उन्होंने हमारी रणनीति चुराने का प्रयास किया । जबकि प्रवर्तन निदेशालय ने अब सरकारी काम में बाधा डालने तथा कोयला घोटाले में ममता दीदी व तृणमूल सरकार को आरोपी बनाने का फैसला किया है। ममता दीदी के सामने अब वैसी गंभीर चुनौती है जैसी दिल्ली के मुख्यंमत्री अरविंद केजरीवाल और झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के समक्ष आ गई थी। अगर ममता दीदी को कोर्ट से राहत नहीं मिलती या वे ग्रीन फाइल्स को लेकर जांच एजेंसियों के साथ टकराव का रास्ता अपनाती हैं तो केंद्र सरकार पश्चिम बंगाल में राष्ट्रपति शासन लागू करने पर मजबूर हो सकती है। बंगाल में लंबे समय से कई अवसरों पर राष्ट्रपति शासन लागू करने की मांग भाजपा व अन्य संगठनों की ओर से लगातार की जा रही है किंतु अभी तक केंद्र की राजग सरकार ने ऐसा कोई कदम नहीं उठाया है जबकि राज्य में चुनावों के समय तृणमूल कांग्रेस के संगठित अपराधियों द्वारा चुनावी हिंसा का दौर प्रांरभ हो जाता है जिसके शिकार भाजपा व हिंदू संगठनो के कार्यकर्ता होते हैं। अभी आई -पैक प्रकरण के दौरान मची हलचल के बीच भाजपा नेता शुभेंदु अधिकारी की कार पर हमला बोला गया और वह आरोपियों पर कार्रवाई करने की मांग को लेकर धरने पर बैठ गए। ऐसा नहीं है कि ममता दीदी
राहुल की बल्लेबाजी नहीं, फैसलों पर उठे सवाल-रायुडू का तीखा विश्लेषण

नई दिल्ली। आईपीएल 2026 में अरुण जेटली स्टेडियम में खेले गए मुकाबले में दिल्ली कैपिटल्स के स्टार बल्लेबाज केएल राहुल ने गुजरात टाइटंस के खिलाफ शानदार बल्लेबाजी करते हुए 52 गेंदों पर 92 रन ठोक दिए। उनकी इस दमदार पारी में 11 चौके और 4 छक्के शामिल रहे। हालांकि टीम को 1 रन से हार का सामना करना पड़ा, लेकिन राहुल की बल्लेबाजी ने फैंस और क्रिकेट एक्सपर्ट्स को काफी प्रभावित किया। रायुडू ने की जमकर तारीफ, बताया ‘सोची-समझी पारी’पूर्व भारतीय क्रिकेटर अंबाती रायुडू ने राहुल की पारी की सराहना करते हुए कहा कि उनका अप्रोच पूरी तरह रणनीतिक था। उन्होंने ESPNcricinfo पर बातचीत में कहा कि राहुल ने शुरुआत में संयम बरता और फिर धीरे-धीरे अपनी पारी को गति दी। यह दिखाता है कि वह सिर्फ आक्रामक बल्लेबाज ही नहीं, बल्कि मैच की स्थिति को समझकर खेलने वाले खिलाड़ी भी हैं। एंकर रोल में दिखे राहुल, टीम को लक्ष्य के करीब पहुंचायारायुडू के मुताबिक, राहुल ने इस मैच में एंकर की भूमिका निभाई। दूसरे छोर से विकेट गिरते रहे, लेकिन उन्होंने धैर्य बनाए रखा और पारी को अंत तक लेकर जाने की कोशिश की। उनका मकसद साफ था आखिरी तक टिके रहकर मैच खत्म करना। इस दौरान उन्होंने शानदार शॉट्स लगाए और टीम को जीत के बेहद करीब पहुंचा दिया। ‘स्किल नहीं, माइंडसेट है असली चुनौती’रायुडू ने राहुल के खेल को लेकर अहम बात कही। उनका मानना है कि राहुल की सबसे बड़ी चुनौती उनकी बल्लेबाजी नहीं, बल्कि निर्णय लेने की क्षमता है। उन्होंने कहा कि राहुल के पास हर तरह की गेंदबाजी के खिलाफ खेलने की क्षमता है चाहे स्पिन हो या तेज गेंदबाजी। लेकिन असली सवाल यह है कि वह कब और कैसे आक्रामक खेल अपनाते हैं। यही उनका माइंडसेट उनके प्रदर्शन को तय करता है। खराब फॉर्म से दमदार वापसीइस मुकाबले से पहले राहुल लगातार दो मैचों में 0 और 1 रन पर आउट हुए थे। ऐसे में यह पारी उनके लिए आत्मविश्वास बढ़ाने वाली साबित हुई। उन्होंने न सिर्फ अपनी फॉर्म में वापसी की, बल्कि यह भी दिखाया कि वह दबाव में भी बड़ी पारी खेलने की क्षमता रखते हैं। सीजन की सबसे बड़ी पारी, लेकिन अधूरी रही कहानीकेएल राहुल की यह पारी दिल्ली कैपिटल्स के लिए इस सीजन की सबसे बड़ी व्यक्तिगत पारी रही, लेकिन टीम जीत हासिल करने से चूक गई। इसके बावजूद राहुल की बल्लेबाजी ने यह साबित कर दिया कि अगर वह सही निर्णय लें, तो किसी भी मैच का रुख पलट सकते हैं।
मोती सागर ने कहा, फिल्म और धारावाहिक की तुलना उचित नहीं, दोनों के प्रारूप अलग..

नई दिल्ली:90 के दशक के लोकप्रिय टीवी धारावाहिक “रामायण” और 4000 करोड़ की नितेश तिवारी निर्देशित फिल्म “रामायणम्” के बीच तुलना की चर्चाओं ने हाल ही में सुर्खियां बटोरी हैं। फिल्म का पहला टीज़र हनुमान जयंती पर जारी किया गया, जिसमें रणबीर कपूर भगवान राम की भूमिका में नजर आए। इस झलक ने दर्शकों के बीच उत्साह और सवालों का मिश्रण पैदा किया, खासकर जब 1987 में रामानंद सागर द्वारा बनाए गए टीवी धारावाहिक से तुलना की जाने लगी। रामानंद सागर के बेटे मोती सागर ने इस तुलना पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि दोनों प्रारूप अलग हैं और तुलना करना उचित नहीं है। उन्होंने कहा कि टीवी धारावाहिक में 78 एपिसोड थे, जिनकी लंबाई 30-40 मिनट प्रति एपिसोड थी, जबकि फिल्म सिर्फ तीन से चार घंटे की होगी। इसलिए कथानक और बारीकियों में अंतर स्वाभाविक है। मोती सागर ने कहा कि उनके पिता ने “रामायण” को पूरी भक्ति और ईमानदारी के साथ प्रस्तुत किया था, और फिल्म का उद्देश्य भी उसी भावना को आधुनिक रूप में पेश करना है। मोती सागर ने फिल्म के टीज़र के आधार पर ही नतीजा निकालने से इंकार किया और रणबीर कपूर की भूमिका की सराहना की। उन्होंने कहा कि रणबीर आज के समय के बेहतरीन अभिनेताओं में से एक हैं और उनके अभिनय में गहराई और परिपक्वता है। मोती सागर के मुताबिक, फिल्म और धारावाहिक के दृष्टिकोण अलग होने के कारण इसे किसी भी तरह की तुलना में सीमित नहीं किया जा सकता। “रामायणम्” में साई पल्लवी सीता के रूप में, यश रावण के रूप में, सनी देओल हनुमान के रूप में और रवि दुबे लक्ष्मण के रूप में नजर आएंगे। इसके अलावा, अरुण गोविल, कुणाल कपूर, आदिनाथ कोठारे और शीबा चड्ढा भी अहम भूमिका निभा रहे हैं। फिल्म का पहला भाग दिवाली 2026 में और दूसरा भाग दिवाली 2027 में रिलीज होगा। इस फिल्म का निर्माण नमित मल्होत्रा ने किया है और इसका उद्देश्य दर्शकों को आधुनिक तकनीक और विजुअल इफेक्ट्स के माध्यम से महाकाव्य की कहानी को प्रस्तुत करना है। टीज़र को लेकर मिली-जुली प्रतिक्रियाओं के बीच कुछ लोग दृश्यों और अभिनय की प्रशंसा कर रहे हैं, जबकि कुछ लोग विशेष प्रभावों पर सवाल उठा रहे हैं। KeywordsRamayan, Ramayanam, Nitesh Tiwari, Motii Sagar, Ranbir Kapoor संक्षिप्त विवरणरामानंद सागर की रामायण और नितेश तिवारी की रामायणम् को तुलना से अलग रखते हुए मोती सागर ने फिल्म की सराहना की। दोनों के प्रारूप और प्रस्तुतिकरण में भिन्नता है, और फिल्म आधुनिक तकनीक और बड़े बजट के साथ महाकाव्य को नई पीढ़ी के दर्शकों तक पहुंचाएगी।
TET अनिवार्यता पर भड़के शिक्षक, बोले- 26 साल के अनुभवी से भी दोबारा परीक्षा लें

भोपाल । मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में टीईटी (Teacher Eligibility Test) अनिवार्यता को लेकर शिक्षकों का गुस्सा खुलकर सामने आ गया है। 20 से 25 साल तक सेवा दे चुके शिक्षक इस फैसले को अपने अनुभव और सम्मान के खिलाफ बता रहे हैं। प्रदर्शन के दौरान शिक्षकों ने सरकार से इस आदेश को तत्काल वापस लेने की मांग की और चेतावनी दी कि यदि जल्द निर्णय नहीं लिया गया तो आंदोलन उग्र रूप ले सकता है। ‘अनुभव की अनदेखी, नियमों का अन्यायपूर्ण लागू होना’प्रदर्शन कर रहीं शिक्षिका शीबा खान ने कहा कि सरकार का यह फैसला पूरी तरह अव्यवहारिक है। उन्होंने सवाल उठाया कि क्या 26 साल के अनुभवी कलेक्टर से भी दोबारा परीक्षा देने को कहा जाएगा? वहीं शिक्षिका प्रियंका शर्मा ने इसे “तानाशाही निर्णय” बताते हुए कहा कि नियुक्ति के समय जो नियम लागू थे, उनका पालन किया गया था। अब पुराने शिक्षकों पर नए नियम लागू करना पूरी तरह गलत है। रिटायरमेंट के करीब शिक्षकों पर बढ़ा दबावशिक्षकों का कहना है कि जिनकी सेवा में केवल कुछ ही साल बचे हैं, उनसे दोबारा परीक्षा की मांग करना न केवल अनुचित है बल्कि मानसिक दबाव भी बढ़ा रहा है। उनका तर्क है कि इतने वर्षों का अनुभव किसी भी परीक्षा से अधिक महत्वपूर्ण होता है और इसे नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए। सरकार को रिव्यू पिटीशन दाखिल करने की मांगप्रदर्शन में शामिल शिक्षिका संगीता कुशवाहा ने सरकार से सुप्रीम कोर्ट में रिव्यू पिटीशन दाखिल करने की मांग की। उन्होंने कहा कि यह फैसला हजारों शिक्षकों के भविष्य को प्रभावित कर रहा है और इसे जल्द से जल्द संशोधित किया जाना चाहिए। 18 अप्रैल को परिवार सहित बड़ा प्रदर्शनअध्यापक-शिक्षक संयुक्त मोर्चा के पदाधिकारी उपेंद्र कौशल ने बताया कि 8 अप्रैल को जिला स्तर पर प्रदर्शन के बाद DPI भोपाल को ज्ञापन सौंपा गया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि यदि 11 अप्रैल तक सरकार ने कोई ठोस कदम नहीं उठाया, तो 18 अप्रैल को प्रदेशभर के शिक्षक परिवार सहित भोपाल में बड़ा प्रदर्शन करेंगे और मांगें पूरी होने तक डटे रहेंगे। DPI का आदेश और उसके प्रभावलोक शिक्षण संचालनालय (DPI) भोपाल के आदेश के अनुसार, जिन शिक्षकों की सेवानिवृत्ति में पांच वर्ष से अधिक समय शेष है, उन्हें दो साल के भीतर टीईटी पास करना अनिवार्य होगा, अन्यथा सेवा समाप्ति का खतरा रहेगा। विभाग का कहना है कि यह निर्णय सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के आधार पर लिया गया है। 1.5 लाख शिक्षक प्रभावित, 70 हजार सीधे दायरे मेंशिक्षक संगठनों के अनुसार इस आदेश से करीब 1.5 लाख शिक्षक प्रभावित होंगे, जिनमें से लगभग 70 हजार शिक्षक ऐसे हैं, जिनकी नियुक्ति 2011 से पहले हुई थी। उनका कहना है कि आरटीई एक्ट 2009 और टीईटी 2011 के बाद लागू हुआ था, इसलिए पुराने शिक्षकों पर यह नियम लागू करना “रेट्रोस्पेक्टिव” यानी पिछली तारीख से नियम लागू करने जैसा है। संयुक्त लड़ाई की तैयारी, आंदोलन होगा तेजशिक्षक संगठनों ने साफ कर दिया है कि अब वे एकजुट होकर इस फैसले के खिलाफ लड़ाई लड़ेंगे। 11 अप्रैल को ब्लॉक स्तर पर आंदोलन कर स्थानीय जनप्रतिनिधियों को ज्ञापन सौंपा जाएगा। इसके बाद भी मांगें नहीं मानी गईं तो राजधानी में बड़ा आंदोलन किया जाएगा।
‘सभ्यता खत्म’ के बयान पर घिरते अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प

-सुनील कुमार महलामध्य-पूर्व में जारी युद्ध को 40 दिन से अधिक समय हो चुका है तथा लगातार हमलों के बीच होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर दुनिया स्पष्ट रूप से दो धड़ों में बंटी हुई नजर आ रही है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में पेश एक महत्वपूर्ण प्रस्ताव रूस और चीन के वीटो के कारण पारित नहीं हो सका। बहरीन द्वारा लाए गए इस प्रस्ताव में होर्मुज जलडमरूमध्य में व्यापारिक जहाजों की सुरक्षित आवाजाही सुनिश्चित करने के लिए अंतरराष्ट्रीय सहयोग की अपील की गई थी। पाठकों को बताता चलूं कि 15 सदस्यीय परिषद में इस प्रस्ताव के पक्ष में 11 वोट पड़े, जबकि रूस और चीन ने विरोध में मतदान किया। वहीं पर पाकिस्तान और कोलंबिया इस मतदान से दूर रहे।आवश्यक 09 मत मिलने के बावजूद, वीटो के चलते प्रस्ताव असफल हो गया। इसी बीच, डोनाल्ड ट्रंप द्वारा ईरान को समझौते के लिए दी गई समय-सीमा समाप्त होने से एक दिन पहले, 7 अप्रैल 2026 (मंगलवार) को अमेरिकी सेना ने खर्ग द्वीप पर हमला किया। इसके समानांतर, इजरायल की सेना ने ईरान के भीतर रेल पटरियों और पुलों को निशाना बनाते हुए बमबारी की। जवाब में ईरान ने इजरायल पर बैलिस्टिक मिसाइलें और रॉकेट दागे। हालांकि, व्हाइट हाउस ने स्पष्ट किया कि वह ईरान के खिलाफ परमाणु हथियारों के उपयोग पर विचार नहीं कर रहा है। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए ईरान स्थित भारतीय दूतावास ने भारतीय नागरिकों के लिए नई एडवाइजरी जारी की, जिसमें अगले 48 घंटे तक अपने स्थान पर ही सुरक्षित रहने की सलाह दी गई। इस बीच डोनाल्ड ट्रंप ने कड़ी चेतावनी देते हुए कहा कि ‘आज रात एक पूरी सभ्यता समाप्त हो सकती है, जिसे फिर कभी वापस नहीं लाया जा सकेगा।’ दूसरी ओर, ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियान ने दावा किया कि 1 करोड़ 40 लाख से अधिक ईरानी देश की रक्षा के लिए अपने प्राणों की आहुति देने को तैयार हैं। कहना ग़लत नहीं होगा कि मध्य-पूर्व के इस युद्ध के प्रभाव लगातार गंभीर होते जा रहे हैं और इजरायली हमलों में ईरान के आठ पुल नष्ट हो चुके हैं तथा कच्चे तेल की कीमतें बढ़कर 108 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई हैं। जानकारी अनुसार इजरायल ने तेहरान, करज, काशान और कोम में सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया, जबकि ईरान ने इजरायल पर सात बैलिस्टिक मिसाइलें दागीं। इतना ही नहीं, कुवैत से दागे गए एक रॉकेट हमले में इराक में तीन लोगों की मृत्यु हुई। वहीं, ईरान द्वारा कतर पर दागी गई मिसाइलों को कतर ने नाकाम करने का दावा किया है। इस बीच ईरान की विशेष सैन्य इकाई इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स ने संभावित हमलों के लक्ष्यों की सूची भी जारी की है।सच तो यह है कि इस युद्ध का असर पूरे विश्व समेत भारत पर भी स्पष्ट रूप से दिखाई दे रहा है। दिल्ली-एनसीआर में इंद्रप्रस्थ गैस लिमिटेड ने पाइप्ड नैचुरल गैस (पीएनजी) के दामों में 1.70 रुपये प्रति एससीएम की वृद्धि की है, जो 1 अप्रैल से लागू हो चुकी है। इसके अलावा, एयर इंडिया ने घरेलू और अंतरराष्ट्रीय उड़ानों पर ईंधन शुल्क बढ़ा दिया है, जिसके तहत घरेलू उड़ानों में 299 रुपये से 899 रुपये तक की बढ़ोतरी की गई है। ईरान पर अमेरिका और इजरायल के हमलों के बाद शुरू हुआ यह युद्ध एक महीने से अधिक समय बीतने के बावजूद थमने का नाम नहीं ले रहा है। बीच-बीच में युद्धविराम की चर्चाएं जरूर होती हैं, लेकिन वे जल्द ही तीव्र हमलों के बीच दब जाती हैं। ताजा घटनाक्रम में जैसा कि ऊपर भी इस आलेख में चर्चा कर चुका हूं कि अमेरिका ने खर्ग द्वीप पर पुनः हमला किया, जबकि ईरान के अल्बोर्ज प्रांत में हुए हवाई हमले में कम से कम 18 लोगों की मौत हुई है। डोनाल्ड ट्रंप ने चेतावनी दी है कि यदि ईरान निर्धारित समय तक होर्मुज जलमार्ग में जहाजों की आवाजाही पूरी तरह बहाल नहीं करता, तो उसके बिजली संयंत्रों और पुलों पर व्यापक बमबारी की जाएगी। इस संदर्भ में यह प्रश्न भी उठता है कि क्या नागरिक ढांचे पर हमले अंतरराष्ट्रीय कानून के तहत युद्ध अपराध की श्रेणी में आते हैं। यहां यह गौरतलब है कि पहले ही एक स्कूल पर हुए हमले में बच्चियों की मौत को लेकर अमेरिका और इजरायल की आलोचना हो चुकी है। वास्तव में अब यह स्पष्ट होता जा रहा है कि इस युद्ध में मानवीय संवेदनाएं पीछे छूटती जा रही हैं। जहां अमेरिका और इजरायल ईरान पर लगातार हमले कर रहे हैं, वहीं ईरान भी इजरायल और मध्य-पूर्व में स्थित अमेरिकी सैन्य ठिकानों को निशाना बना रहा है। इसके परिणामस्वरूप पूरे क्षेत्र में कच्चे तेल के उत्पादन और आपूर्ति पर गंभीर प्रभाव पड़ा है, जिससे वैश्विक स्तर पर ऊर्जा और खाद्य संकट गहराता जा रहा है।इधर, युद्धविराम के प्रयास भी ठोस परिणाम नहीं दे पा रहे हैं। ईरान ने 45 दिनों के युद्धविराम प्रस्ताव को अस्वीकार करते हुए स्पष्ट किया है कि वह केवल स्थायी शांति और भविष्य में हमले न किए जाने की गारंटी चाहता है। यह मांग कूटनीतिक दृष्टि से तार्किक प्रतीत होती है, क्योंकि अस्थायी समाधान मूल समस्याओं का निवारण नहीं कर सकते। कहना ग़लत नहीं होगा कि वर्तमान स्थिति यह संकेत देती है कि सभी पक्ष अपनी-अपनी जिद पर अड़े हुए हैं, जिससे समाधान की संभावनाएं धूमिल होती जा रही हैं। ऐसे में यह बड़ा प्रश्न उभरता है कि जब व्यापक विनाश के बाद यह युद्ध समाप्त होगा, तब शांति की कीमत कितनी भारी होगी। इसी बीच, डोनाल्ड ट्रंप ने अप्रैल के पहले सप्ताह में ईरान के साथ दो सप्ताह के सीज़फायर की घोषणा की, जिसके तहत तत्काल बमबारी को टाल दिया गया। यह घोषणा संभावित हमले की तय समयसीमा से ठीक पहले की गई, जिससे क्षेत्र में बढ़ते तनाव को अस्थायी रूप से नियंत्रित करने का प्रयास हुआ। हालांकि, यह सीज़फायर कुछ शर्तों पर आधारित है, इसलिए हालात पूरी तरह सामान्य नहीं हुए हैं और मध्य-पूर्व में तनाव अभी भी बना हुआ है। अंत में यही कहूंगा कि , इस युद्ध को समाप्त करने के लिए सबसे पहले तत्काल और पूर्ण युद्धविराम आवश्यक है, जिसके लिए संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की सक्रिय भूमिका अनिवार्य होगी। इसके बाद संयुक्त राष्ट्र या ओमान जैसे निष्पक्ष मध्यस्थों के माध्यम
शुरुआती करियर में अमिताभ और जया के बीच असली प्यार और सम्मान का रिश्ता

नई दिल्ली/ महाराष्ट्र : कुछ रिश्ते फिल्मी कहानी की तरह होते हैं, जो संघर्ष और कठिनाइयों से शुरू होकर समय के साथ मजबूत और परिपक्व अंजाम तक पहुँचते हैं। ऐसा ही रिश्ता जया बच्चन और अमिताभ बच्चन के बीच देखने को मिला। जब अमिताभ बच्चन हिंदी सिनेमा में अभी पहचान बनाने की कोशिश कर रहे थे, तब जया बंगाली और हिंदी फिल्मों की उभरती हुई अभिनेत्री थीं। उनकी शांत और सुलझी छवि ने उन्हें इंडस्ट्री में एक अलग मुकाम दिलाया। 9 अप्रैल को जया बच्चन 78 वर्ष की हो गई हैं, और इसी मौके पर उनके जीवन और करियर की कुछ अनसुनी बातें याद की जा रही हैं। कहते हैं कि उगते सूरज को हर कोई सलाम करता है, लेकिन जया और अमिताभ का रिश्ता इसका अपवाद था। जया ने अमिताभ को उस समय अपना दिल दे दिया जब वे किसी बड़े नाम तक नहीं पहुंचे थे, जबकि जया बचपन से ही फिल्मों में काम कर रही थीं। बाल कलाकार के रूप में बंगाली और हिंदी फिल्मों में सक्रिय रहने के बावजूद जया का दिल उस सादगी और पर्सनैलिटी वाले अभिनेता पर आ गया था। जया ने अपनी सहेलियों से भी अमिताभ के बारे में अपने विचार साझा किए, लेकिन उनकी सहेलियों को वह अभिनेता बिल्कुल पसंद नहीं आया। उन्होंने अमिताभ को ‘लकड़ी’ कहा और केवल बड़ी-बड़ी आंखों वाला बताया। यह सुनकर जया भड़क गईं और उन्होंने कहा कि उन्हें पूरा भरोसा है कि अमिताभ हिंदी सिनेमा में कुछ बड़ा करेंगे। दूसरी ओर, अमिताभ बच्चन ने जया की खूबसूरती का अनुभव एक फोटोशूट के जरिए किया और उनकी संस्कारी yet आधुनिक छवि ने उन्हें आकर्षित किया। फिल्म ‘गुड्डी’ के सेट पर दोनों की नजदीकियां बढ़ीं, हालांकि उस समय जया का ज्यादा समय धर्मेंद्र के साथ शूटिंग में जाता था। उन्होंने अमिताभ के बारे में धर्मेंद्र से भी चर्चा की, जिससे दोनों के बीच संबंध और मजबूत हुए। अमिताभ के शुरुआती करियर में कई फ्लॉप फिल्में थीं और कई अभिनेत्रियों ने उनके साथ काम करने से मना कर दिया था। ऐसे समय में जया ने ‘जंजीर’ फिल्म में काम करने का निर्णय लिया। यह फिल्म सुपरहिट रही और अमिताभ को रातों-रात सुपरस्टार बना दिया। इसी फिल्म ने दोनों के रिश्ते और उनकी फिल्मी पहचान को स्थायीत्व दिया और हिंदी सिनेमा में अमिताभ का मुकाम तय किया।
सोमी अली और जेबा बख्तियार के बीच असली दोस्ती और सम्मान का रिश्ता रहा..

नई दिल्ली:90 के दशक का बॉलीवुड मीडिया और फैंस के लिए एक ऐसा दौर था, जब फिल्मी सितारों की जिंदगी के बारे में केवल मैगजीन और अखबार ही जानकारी देते थे। सोशल मीडिया के आज के दौर से बिल्कुल अलग उस समय, जो छपता वही सच माना जाता था और सितारों के रिश्तों को अक्सर अलग रंग देकर पेश किया जाता था। इसी समय की यादें साझा करते हुए अभिनेत्री सोमी अली ने हाल ही में एक थ्रोबैक पोस्ट के जरिए बताया कि कैसे उन्हें और जेबा बख्तियार को लेकर मीडिया ने झूठी कहानी गढ़ने की कोशिश की थी। सोमी अली ने बताया कि 1993 में उनकी पहली मुलाकात जेबा बख्तियार से हुई थी। दोनों ही पाकिस्तान में जन्मीं थीं, लेकिन सोमी का पालन-पोषण अमेरिका में हुआ। मीडिया ने इसी समानता को आधार बनाकर उनके बीच प्रतिस्पर्धा और टकराव की खबरें छापीं, लेकिन हकीकत इससे पूरी तरह अलग थी। असल जिंदगी में उनके बीच कभी कोई राइवलरी नहीं थी। बल्कि दोनों के बीच सम्मान और समझ का रिश्ता था। सोमी ने बताया कि वह उस पहली मुलाकात को आज भी सकारात्मक अनुभव के रूप में याद करती हैं और जेबा के लिए उनके मन में गहरी इज्जत है। सोमी अली ने जेबा बख्तियार की खूब तारीफ करते हुए कहा कि वह बेहद खूबसूरत और अच्छी इंसान हैं और हमेशा खुश रहें। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि मीडिया की बनाई कहानी कभी सफल नहीं हुई, क्योंकि असल जिंदगी में उनके बीच मित्रता और सहयोग का रिश्ता था। इस खुलासे ने 90 के दशक की फिल्मी दुनिया की मीडिया कल्चर और फैन्स तक पहुंचने वाली कहानियों की सच्चाई को उजागर किया। जेबा बख्तियार की फिल्मी पहचान की बात करें तो उन्होंने 1991 में रिलीज हुई फिल्म ‘हिना’ से लोकप्रियता हासिल की थी। इस फिल्म में उनके साथ ऋषि कपूर और अश्विनी भावे नजर आए थे और निर्देशन रणदीर कपूर ने किया था। भारत-पाकिस्तान की पृष्ठभूमि पर बनी इस प्रेम कहानी को दर्शकों ने काफी सराहा। इस किस्से ने यह साबित किया कि सोशल मीडिया से पहले मीडिया की बनाई अफवाहें और टैब्लॉइड कहानियां कितनी प्रभावशाली और कभी-कभी भ्रामक हो सकती थीं। आज के दौर में फैंस सीधे अपने पसंदीदा सितारों से जुड़ सकते हैं, लेकिन उस समय सच्चाई जानने का कोई दूसरा साधन उपलब्ध नहीं था।
शिक्षकों की पात्रता परीक्षा पर सरकार सुप्रीम कोर्ट में रखेगी पक्ष, शिक्षा मंत्री ने दिया भरोसा

भोपाल । भोपाल में मध्यप्रदेश राज्य कर्मचारी संघ और शिक्षक संघ के प्रतिनिधिमंडल ने स्कूल शिक्षा मंत्री उदय प्रताप सिंह से मुलाकात की और शिक्षकों की पात्रता परीक्षा को लेकर अपनी चिंताओं और सुझावों से अवगत कराया। प्रतिनिधि मंडल ने शिक्षा मंत्री से आग्रह किया कि सरकार सुप्रीम कोर्ट में प्रदेश के शिक्षकों का पक्ष मजबूती से रखे। इस पर शिक्षा मंत्री उदय प्रताप सिंह ने आश्वस्त किया कि सरकार शिक्षकों के हितों के प्रति पूरी तरह सजग है। उन्होंने कहा कि तकनीकी एवं विधि सम्मत कार्यवाही पूरी होने के उपरांत राज्य सरकार शीघ्र ही उच्चतम न्यायालय में शिक्षकों का पक्ष रखेगी और किसी भी प्रकार की जल्दबाजी में शिक्षकों के विपरीत निर्णय नहीं लिया जाएगा। प्रदेश कर्मचारी संघ के प्रवक्ता डॉ. अनिल भार्गव वायु ने मीडिया को जानकारी देते हुए बताया कि प्रतिनिधिमंडल की मांगों को गंभीरता से लिया गया है और सरकार का रुख शिक्षकों के हित में ही रहेगा। उन्होंने कहा कि शिक्षकों का अधिकार और उनके भविष्य की सुरक्षा सरकार की प्राथमिकता में शामिल है। प्रतिनिधिमंडल में भारतीय मजदूर संघ के प्रदेश महामंत्री कुलदीप सिंह गुर्जर मध्यप्रदेश शिक्षक संघ के प्रदेश अध्यक्ष क्षत्रवीर सिंह राठौड़ राज्य कर्मचारी संघ के प्रदेश अध्यक्ष हेमंत श्रीवास्तव और प्रदेश महामंत्री जितेंद्र सिंह उपस्थित थे। उन्होंने कहा कि यह बैठक शिक्षकों और सरकार के बीच संवाद का महत्वपूर्ण माध्यम साबित हुई। मध्यप्रदेश राज्य कर्मचारी संघ के प्रदेश अध्यक्ष हेमंत श्रीवास्तव ने कहा कि प्रदेश के समस्त शिक्षक एकजुट हैं और अपने अधिकारों के प्रति पूरी तरह सजग हैं। उन्होंने भरोसा जताया कि सरकार शिक्षकों के हितों की रक्षा करते हुए न्याय दिलाने में कोई कमी नहीं छोड़ेगी। शिक्षक संघ के प्रदेश अध्यक्ष क्षत्रवीर सिंह राठौड़ ने कहा कि शिक्षकों का पक्ष पूरी मजबूती से रखा जाएगा और हमें पूर्ण विश्वास है कि सकारात्मक परिणाम सामने आएंगे। प्रदेश महामंत्री जितेंद्र सिंह ने भी इस आश्वासन को दोहराया और कहा कि सरकार के सकारात्मक रुख ने प्रदेश के शिक्षकों में विश्वास को मजबूत किया है। शिक्षकों ने यह स्पष्ट किया कि वे एकजुट हैं और अपने अधिकारों की रक्षा के लिए हर संभव प्रयास करेंगे। प्रतिनिधि मंडल ने शिक्षा मंत्री से यह भी कहा कि पात्रता परीक्षा और उससे जुड़े अन्य मुद्दों में किसी भी प्रकार की जल्दबाजी न की जाए। शिक्षकों और सरकार के बीच यह संवाद प्रक्रिया यह संदेश देती है कि राज्य प्रशासन शिक्षकों के हितों के प्रति संवेदनशील है और उनकी समस्याओं का समाधान विधि सम्मत तरीके से सुनिश्चित किया जाएगा। इससे प्रदेश के शिक्षक अपने अधिकारों की रक्षा के प्रति आश्वस्त हैं और सुप्रीम कोर्ट में अपने पक्ष के न्यायपूर्ण निर्णय की पूरी उम्मीद रखते हैं।
पीथमपुर में नाबालिग अपहरण-रेप का आरोपी गिरफ्तार, बस स्टैंड से दबोचा गया!

पीथमपुर। पीथमपुर के सेक्टर-1 थाना पुलिस को बड़ी सफलता हाथ लगी है। नाबालिग के अपहरण और दुष्कर्म के मामले में फरार चल रहे आरोपी को पुलिस ने आखिरकार गिरफ्तार कर लिया है। आरोपी को Eicher Bus Stand के पास से घेराबंदी कर पकड़ा गया। पुलिस को मुखबिर से सूचना मिली थी कि आरोपी बस स्टैंड क्षेत्र में मौजूद है। सूचना मिलते ही टीम ने तुरंत कार्रवाई करते हुए मौके पर दबिश दी और आरोपी को हिरासत में ले लिया। फरवरी से चल रहा था फरारयह मामला फरवरी महीने का है, जब एक नाबालिग के अपहरण की शिकायत दर्ज कराई गई थी। घटना के बाद से ही आरोपी फरार हो गया था और पुलिस लगातार उसकी तलाश में जुटी थी। लंबे समय से फरार आरोपी की गिरफ्तारी पुलिस के लिए एक बड़ी उपलब्धि मानी जा रही है। बताया जा रहा है कि आरोपी मानपुर के पास सेजगढ़ का रहने वाला है। पीड़िता के बयान के आधार पर गंभीर धाराएंजांच अधिकारी चाँदनी सिंगार के अनुसार, नाबालिग पीड़िता के बयान के आधार पर आरोपी के खिलाफ अपहरण और दुष्कर्म सहित विभिन्न गंभीर धाराओं में मामला दर्ज किया गया है। पुलिस ने आरोपी को अभिरक्षा में लेकर उससे पूछताछ शुरू कर दी है, ताकि पूरे घटनाक्रम की जानकारी जुटाई जा सके और अन्य पहलुओं की भी जांच हो सके। कोर्ट में पेशी की तैयारीपुलिस ने बताया कि आवश्यक कागजी कार्रवाई पूरी करने के बाद आरोपी को आज न्यायालय में पेश किया जाएगा। इसके बाद आगे की कानूनी प्रक्रिया अपनाई जाएगी। कानून के शिकंजे में अपराधीइस कार्रवाई से साफ है कि पुलिस अपराधियों पर लगातार नजर बनाए हुए है और फरार आरोपियों को पकड़ने के लिए सक्रिय है। ऐसे मामलों में त्वरित कार्रवाई से पीड़ितों को न्याय मिलने की उम्मीद बढ़ती है।
भोपाल में हाई प्रोफाइल केस, EOW में शिकायत दर्ज, 237 प्रोजेक्ट की मंजूरी पर सियासत गरम

भोपाल । भोपाल में भ्रष्टाचार के मामले में हलचल मची हुई है। पूर्व आईएफएस आजाद सिंह डबास ने 4 आईएएस अधिकारियों के खिलाफ ईओडब्ल्यू में शिकायत दर्ज कराई है। शिकायत में आरोप लगाया गया है कि 23 मई 2025 को बिना सिया बैठक के 237 प्रोजेक्ट को मंजूरी दे दी गई थी। इस प्रक्रिया में करोड़ों के भ्रष्टाचार के संकेत मिलते हैं। शिकायत के अनुसार आरोपित अधिकारियों में आईएएस अशोक बर्णवाल नवनीत मोहन कोठारी उमा महेश्वरी आर और श्रीमन शुक्ला शामिल हैं। आजाद सिंह डबास का कहना है कि इन अधिकारियों ने पर्यावरण नियमों का उल्लंघन करते हुए परियोजनाओं को अनुमति दी। जबकि पर्यावरण मंजूरी से पहले सिया की बैठक बुलाना अनिवार्य होता है। पूर्व आईएफएस ने आरोप लगाया कि बिना बैठक के परियोजनाओं को अनुमति देना न केवल नियमों का उल्लंघन है बल्कि यह करोड़ों रुपए के भ्रष्टाचार को जन्म देता है। उन्होंने EOW से इन सभी अधिकारियों के खिलाफ FIR दर्ज करने और जांच करने की मांग की है। जानकारी के अनुसार आरोपित अधिकारियों में तत्कालीन एसीएस पर्यावरण अशोक बर्णवाल प्रमुख सचिव पर्यावरण नवनीत मोहन कोठारी सदस्य सचिव सिया उमा महेश्वरी आर और प्रभारी सदस्य सचिव सिया श्रीमन शुक्ला शामिल थे। शिकायत में स्पष्ट रूप से कहा गया है कि इस गैरकानूनी मंजूरी से पर्यावरण और सरकारी प्रक्रियाओं की विश्वसनीयता पर प्रश्नचिह्न लग गया है। विशेषज्ञों का कहना है कि यह मामला राज्य के प्रशासनिक तंत्र में पारदर्शिता और जवाबदेही की दृष्टि से महत्वपूर्ण है। ईओडब्ल्यू की जांच के बाद ही स्पष्ट होगा कि आरोप कितने प्रमाणिक हैं। इस मामले ने न केवल सरकारी अधिकारियों बल्कि बड़ी परियोजनाओं की प्रक्रिया पर भी ध्यान खींचा है। पूर्व IFS आजाद सिंह डबास ने मीडिया से बातचीत में कहा कि उन्हें यह कदम उठाने के लिए मजबूरी महसूस हुई। उन्होंने कहा कि नियमों का उल्लंघन करने वाले किसी भी स्तर के अधिकारी के खिलाफ कार्रवाई होना चाहिए। उनका यह कदम भ्रष्टाचार के खिलाफ सख्त संदेश के रूप में देखा जा रहा है। राज्य के प्रशासनिक माहौल में इस मामले ने हलचल मचा दी है और ईओडब्ल्यू द्वारा की जाने वाली कार्रवाई को लेकर जनता और मीडिया में उत्सुकता बढ़ गई है। विशेषज्ञ मानते हैं कि यदि FIR दर्ज होती है तो यह मामले की गंभीरता को दर्शाएगा और भविष्य में परियोजना मंजूरी प्रक्रियाओं में पारदर्शिता सुनिश्चित करने में मदद करेगा।