MP firing incident : प्रॉपर्टी विवाद में खूनी हमला, महिला ने मिर्ची झोंकी, साथी ने मारी गोली!

MP firing incident : जबलपुर। मध्य प्रदेश के जबलपुर में गुरुवार देर रात एक सनसनीखेज घटना सामने आई, जहां हाई कोर्ट में मुंशी का काम करने वाले व्यक्ति पर जानलेवा हमला कर दिया गया। हमलावरों ने पहले उनकी आंखों में मिर्च पाउडर डाला और फिर गोली मार दी। गंभीर रूप से घायल होने के बावजूद पीड़ित खुद पुलिस चौकी पहुंचा, जिसके बाद उसे अस्पताल में भर्ती कराया गया। महिला ने रोका, फिर शुरू हुआ हमला घटना पाटन थाना क्षेत्र के बेनीखेड़ा इलाके की है। जानकारी के अनुसार, आगाशोद निवासी 52 वर्षीय ठाकुर दास पटेल बाइक से अपने घर लौट रहे थे। इसी दौरान एक महिला ने चेहरा ढंककर उन्हें रास्ते में रोका और अचानक उनकी आंखों में मिर्च पाउडर झोंक दिया। मिर्च लगते ही उनका संतुलन बिगड़ गया और वे बाइक सहित सड़क पर गिर पड़े। घात लगाए बैठे आरोपियों ने घेरकर की मारपीट जैसे ही ठाकुर दास नीचे गिरे, पहले से घात लगाए बैठे 6 अन्य आरोपी वहां पहुंच गए और उन्हें घेरकर मारपीट करने लगे। पीड़ित ने किसी तरह खुद को बचाने की कोशिश की, लेकिन हमलावरों ने कट्टे से उन पर फायर कर दिया। गोली उनके पेट के किनारे जा फंसी, जबकि छर्रे गले में लगे, जिससे वे गंभीर रूप से घायल हो गए। लहूलुहान हालत में खुद पहुंचे पुलिस चौकी हैरानी की बात यह रही कि इतनी गंभीर हालत में भी ठाकुर दास ने हिम्मत नहीं हारी और खुद नुनसर पुलिस चौकी पहुंचे। वहां पहुंचकर उन्होंने पूरी घटना की जानकारी दी, जिसके बाद पुलिस ने उन्हें तत्काल अस्पताल भिजवाया। जमीन विवाद बना हमले की वजह घायल ने पुलिस को बताया कि यह हमला प्रॉपर्टी विवाद का नतीजा है। उन्होंने ‘सूखा’ क्षेत्र में एक जमीन खरीदने के लिए करीब 22 लाख रुपए दिए थे, लेकिन आरोपी रजिस्ट्री नहीं कर रहे थे। पीड़ित ने दीपक काक्षी, गोपाल काक्षी, वंदना सिंह, बृजलाल पटेल, अर्जुन और सिद्धार्थ दुबे समेत कुल 7 लोगों पर हमले का आरोप लगाया है। हत्या के प्रयास का मामला दर्ज नुनसर पुलिस चौकी प्रभारी विपिन तिवारी के अनुसार, पीड़ित के बयान के आधार पर आरोपियों के खिलाफ धारा 307 (हत्या का प्रयास) के तहत केस दर्ज कर लिया गया है। पुलिस आरोपियों की तलाश में दबिश दे रही है और घटनास्थल के आसपास के लोगों से पूछताछ कर रही है। जबलपुर में हुई यह घटना प्रॉपर्टी विवादों के खतरनाक रूप को उजागर करती है, जहां मामूली विवाद भी जानलेवा हमले में बदल सकता है। पुलिस अब आरोपियों की गिरफ्तारी के प्रयास में जुटी है।
ITI Shivpuri alcohol shop : आईटीआई के सामने खुली शराब दुकान पर एक्शन, 10 दिन में हटाने के निर्देश!

ITI Shivpuri alcohol shop : शिवपुरी। मध्य प्रदेश के शिवपुरी शहर के महल सराय इलाके में एक शराब दुकान को लेकर विवाद खड़ा हो गया है। आरोप है कि ठेकेदार ने निर्धारित स्थान के बजाय आईटीआई परिसर के सामने ही दुकान खोल दी, जिससे स्थानीय लोगों में नाराजगी बढ़ गई है। नियमों की अनदेखी पर आबकारी विभाग सख्त मामले की शिकायत मिलने के बाद आबकारी विभाग ने जांच की और नियमों के उल्लंघन की पुष्टि होने पर ठेकेदार को नोटिस जारी कर दिया। विभाग ने स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि 10 दिनों के भीतर दुकान को हटाया जाए, अन्यथा नियमानुसार सख्त कार्रवाई की जाएगी। वृत्त प्रभारी तीर्थराज भारद्वाज ने बताया कि निरीक्षण के दौरान दुकान का स्थान नियमों के विपरीत पाया गया। शैक्षणिक संस्थानों के पास होने से बढ़ा विरोध इस पूरे विवाद की सबसे बड़ी वजह दुकान का लोकेशन है। शराब दुकान के पास ही आईटीआई, बीटीआई और एसबीआई ट्रेनिंग सेंटर जैसे शैक्षणिक संस्थान मौजूद हैं। इन संस्थानों में रोजाना बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं आते-जाते हैं, जिससे स्थानीय निवासियों ने इसे अनुचित बताते हुए पहले भी विरोध जताया था। स्थानीय लोगों ने की थी शिकायत क्षेत्र के निवासियों ने आबकारी विभाग में शिकायत दर्ज कराते हुए कहा कि दुकान को तय स्थान से हटाकर गलत जगह संचालित किया जा रहा है। उनका कहना है कि यह नियमों का उल्लंघन है और इससे सामाजिक माहौल भी प्रभावित हो सकता है। कार्रवाई नहीं हुई तो बढ़ सकती है सख्ती आबकारी विभाग ने साफ किया है कि यदि 10 दिन के भीतर दुकान नहीं हटाई जाती, तो कानूनी कार्रवाई की जाएगी। ऐसे में अब सबकी नजर इस बात पर है कि ठेकेदार विभाग के निर्देशों का पालन करता है या नहीं। शिवपुरी में आईटीआई के सामने खुली शराब दुकान का मामला नियमों की अनदेखी और स्थानीय विरोध के कारण तूल पकड़ चुका है। प्रशासन ने सख्ती दिखाते हुए नोटिस जारी किया है, जिससे जल्द समाधान की उम्मीद है।
Randeep Hooda BABY : 49 साल की उम्र में पिता बने रणदीप हुड्डा के जीवन में नया अध्याय शुरू..

Randeep Hooda BABY : नई दिल्ली:बॉलीवुड अभिनेता और फिल्म निर्माता रणदीप हुड्डा ने अपने निजी जीवन से जुड़ी एक बड़ी और भावनात्मक खुशी फैंस के साथ साझा की है। 49 वर्ष की उम्र में पिता बने रणदीप हुड्डा ने अपनी पत्नी लिन लैशराम के साथ मिलकर अपनी नवजात बेटी का नाम और पहली झलक सामने लाई है, जिसके बाद यह खबर सोशल मीडिया पर तेजी से चर्चा का विषय बन गई है। परिवार ने इस खास मौके को बेहद सादगी और भावनात्मक अंदाज में मनाया। बेटी के नाम की पहली झलक ने बढ़ाया उत्साह रणदीप हुड्डा और लिन लैशराम ने अपनी बेटी का नाम ‘न्योमिका’ रखा है। इस नाम के सामने आते ही फैंस में उत्सुकता और खुशी दोनों देखने को मिली। कपल ने बताया कि यह नाम उन्हें पहली बार सुनते ही बेहद खास और सही महसूस हुआ। बेटी के एक महीने पूरे होने के अवसर पर इस नाम की घोषणा ने इस पल को और भी यादगार बना दिया। नाम का अर्थ और पारिवारिक जुड़ाव न्योमिका नाम का अर्थ ईश्वरीय कृपा, स्वतंत्रता और असीम आकाश जैसी विशालता से जुड़ा हुआ बताया गया है। यह नाम केवल सुंदर अर्थ ही नहीं रखता बल्कि इसके पीछे एक भावनात्मक पारिवारिक जुड़ाव भी है। बताया गया है कि यह नाम रणदीप हुड्डा की बहन ने चुना है, जिससे इस निर्णय में परिवार की भूमिका और भी खास बन गई है। माता पिता बनने का अनुभव रणदीप और लिन ने इस अनुभव को जीवन का सबसे भावनात्मक और परिवर्तनकारी समय बताया है। दोनों ने कहा कि बेटी के जन्म के बाद उनकी जिंदगी में एक नई खुशी और जिम्मेदारी जुड़ गई है। यह एक महीना उनके लिए बेहद खास रहा है, जिसमें उन्होंने हर पल को पूरी तरह जीने की कोशिश की है। फिल्मी करियर और निजी जीवन का संतुलन रणदीप हुड्डा अपने दमदार अभिनय और अलग तरह के किरदारों के लिए जाने जाते हैं। उन्होंने अपने करियर में हाईवे, सरबजीत, जिस्म 2, किक और लाल रंग जैसी फिल्मों में काम कर अपनी अलग पहचान बनाई है। अभिनय के साथ उन्होंने फिल्म निर्माण में भी कदम रखा है और इंडस्ट्री में एक गंभीर और समर्पित कलाकार के रूप में पहचाने जाते हैं। 2023 में हुई थी शादी रणदीप हुड्डा ने 2023 में मॉडल और अभिनेत्री लिन लैशराम के साथ विवाह किया था। दोनों की जोड़ी को फिल्म इंडस्ट्री में एक संतुलित और समझदार रिश्ते के रूप में देखा जाता है। शादी के बाद अब बेटी के आगमन ने उनके जीवन को और भी पूर्णता प्रदान की है। फैंस की प्रतिक्रिया और बढ़ती लोकप्रियता बेटी के नाम और पहली झलक सामने आने के बाद फैंस ने सोशल मीडिया पर शुभकामनाओं की बौछार कर दी है। लोगों ने इस नए अध्याय के लिए कपल को ढेरों बधाइयां दी हैं और इस पल को बेहद प्यारा बताया है। यह खबर लगातार चर्चा में बनी हुई है और मनोरंजन जगत में भी इसे लेकर सकारात्मक प्रतिक्रिया देखने को मिल रही है।
UK claims Russia : रूस पर ब्रिटेन का बड़ा दावा, यूरोप की केबल-पाइपलाइनों को निशाना बनाने की कोशिश का लगाया आरोप

UK claims Russia : नई दिल्ली। पश्चिम एशिया में चल रहे संघर्ष के बीच अब यूरोप में रूस को लेकर बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। ब्रिटेन ने आरोप लगाया है कि रूसी पनडुब्बियों ने समुद्र के नीचे बिछी महत्वपूर्ण केबल्स और पाइपलाइनों को निशाना बनाने की कोशिश की जिसे ब्रिटिश और नॉर्वेजियन सेनाओं ने संयुक्त अभियान के जरिए विफल कर दिया। रूस की कथित गतिविधियों पर ब्रिटेन की नजर ब्रिटेन के रक्षा मंत्री जॉन हीली ने दावा किया कि रूस की यह गतिविधि लंबे समय से चल रही थी और इसमें युद्धपोत सैन्य विमान और कई पनडुब्बियां शामिल थीं। उनके अनुसार यह अभियान करीब दो महीने तक चला जिसे निगरानी और रणनीतिक जवाबी कार्रवाई के जरिए रोका गया। समुद्री सुरक्षा को लेकर बड़ा अभियान ब्रिटिश रॉयल नेवी ने नॉर्वे के साथ मिलकर एक संयुक्त सैन्य अभियान चलाया जिसमें रूसी अटैक और जासूसी पनडुब्बियों की गतिविधियों पर नजर रखी गई। ब्रिटेन का कहना है कि जैसे ही उनकी निगरानी बढ़ाई गई रूसी इकाइयां पीछे हट गईं और मिशन छोड़ दिया। Datia Farmers Distress : दतिया में ओलावृष्टि का कहर, 42 गांवों में जलभराव से गेहूं की फसल सड़कर नष्ट कठोर परिणाम की चेतावनी ब्रिटिश रक्षा मंत्री ने रूस को सख्त चेतावनी देते हुए कहा कि समुद्र के नीचे मौजूद महत्वपूर्ण इंफ्रास्ट्रक्चर को नुकसान पहुंचाने की किसी भी कोशिश के गंभीर परिणाम होंगे। उन्होंने यह भी कहा कि ब्रिटेन लगातार इस क्षेत्र में रूस की हर गतिविधि पर नजर बनाए हुए है। रणनीतिक महत्व की केबल्स और पाइपलाइन ब्रिटेन के अनुसार जिन समुद्री केबल्स और पाइपलाइनों की सुरक्षा की जा रही है वे वैश्विक संचार और ऊर्जा आपूर्ति के लिए बेहद महत्वपूर्ण हैं। दावा किया गया है कि दुनिया का बड़ा डेटा ट्रैफिक इन्हीं केबल्स से होकर गुजरता है जिससे इनकी सुरक्षा रणनीतिक रूप से अत्यंत संवेदनशील बन जाती है। रूस-नाटो तनाव के बीच बढ़ती टकराहट यह पूरा घटनाक्रम ऐसे समय सामने आया है जब रूस और पश्चिमी देशों के बीच तनाव पहले से ही चरम पर है। दूसरी ओर अमेरिका में राजनीतिक हलकों में भी नाटो की भूमिका और यूरोपीय देशों की सुरक्षा जिम्मेदारी को लेकर बहस तेज है जिससे वैश्विक भू-राजनीतिक तनाव और बढ़ता दिख रहा है।
Shivpuri tractor accident : शिवपुरी में बिना ड्राइवर दौड़ा ट्रैक्टर, पेड़ से टकराकर रुका-बड़ा हादसा टला!

Shivpuri tractor accident :शिवपुरी। मध्य प्रदेश के शिवपुरी जिले के कोलारस कस्बे में गुरुवार देर शाम एक बड़ा हादसा होते-होते टल गया। जगतपुर तिराहा पर खड़ा एक ट्रैक्टर अचानक बिना ड्राइवर के ही दौड़ पड़ा, जिससे मौके पर अफरा-तफरी मच गई। हालांकि गनीमत रही कि इस दौरान कोई राहगीर या वाहन उसकी चपेट में नहीं आया। कैसे हुआ हादसा? जानकारी के मुताबिक, कुमरौआ गांव के किसान राजेंद्र धाकड़ अपनी फसल बेचकर कोलारस अनाज मंडी से वापस लौट रहे थे। उन्होंने जगतपुर तिराहा पर अपना ट्रैक्टर-ट्रॉली सड़क किनारे खड़ा किया और पास की दुकान पर सामान लेने चले गए। इसी दौरान खोंकर गांव के उत्तम चंदेल अपने ट्रैक्टर-ट्रॉली से वहां पहुंचे और पीछे से खड़े ट्रैक्टर में टक्कर मार दी। गियर में खड़ा था ट्रैक्टर, अचानक हो गया स्टार्ट बताया जा रहा है कि खड़ा ट्रैक्टर गियर में था। जैसे ही पीछे से टक्कर लगी, ट्रैक्टर स्टार्ट होकर आगे बढ़ गया और बिना ड्राइवर के ही अनियंत्रित होकर सड़क पर दौड़ने लगा। पेड़ से टकराकर थमा रफ्तार का कहर बेकाबू ट्रैक्टर कुछ दूरी तक सड़क पर चलता रहा और फिर सड़क से उतरकर एक पेड़ से टकरा गया। इसी के साथ उसकी रफ्तार थम गई और एक बड़ा हादसा टल गया। बड़ा हादसा टलने से लोगों ने ली राहत की सांस घटना के समय आसपास कोई राहगीर या अन्य वाहन मौजूद नहीं था। अगर ट्रैक्टर किसी की चपेट में आ जाता, तो गंभीर हादसा हो सकता था। स्थानीय लोगों ने इसे बड़ी राहत बताया। लापरवाही बन सकती थी जानलेवा यह घटना एक बार फिर सड़क पर वाहन खड़ा करते समय सावधानी बरतने की जरूरत को दर्शाती है। गाड़ी को गियर में छोड़ना या सुरक्षा उपायों को नजरअंदाज करना कभी भी खतरनाक साबित हो सकता है। कोलारस के जगतपुर तिराहा पर हुई यह घटना भले ही बिना किसी नुकसान के खत्म हो गई, लेकिन यह एक गंभीर चेतावनी है कि छोटी सी लापरवाही भी बड़ी दुर्घटना का कारण बन सकती है।
MP MSME policy : आत्मनिर्भर भारत की ओर कदम मध्यप्रदेश में 48% स्टार्टअप महिलाओं के नाम

MP MSME policy : भोपाल । मध्यप्रदेश सरकार ने महिला सशक्तिकरण और उद्यमिता को नई दिशा देने के लिए एमएसएमई विकास नीति 2025 और स्टार्टअप नीति 2025 के जरिए बड़ा कदम उठाया है। इन नीतियों का उद्देश्य महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाना और उन्हें उद्यमिता के क्षेत्र में मजबूत आधार प्रदान करना है। राज्य सरकार का दावा है कि इन पहलों ने महिलाओं के लिए नए अवसरों के द्वार खोल दिए हैं और “वोकल फॉर लोकल” के विजन को भी मजबूती दी है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के महिला सशक्तिकरण के संकल्प और मुख्यमंत्री मोहन यादव के नेतृत्व में प्रदेश में उद्योग और स्टार्टअप क्षेत्र में महिलाओं की भागीदारी तेजी से बढ़ी है। आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार प्रदेश में कुल 24.34 लाख सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमों में से लगभग 4.11 लाख इकाइयों का संचालन महिलाओं द्वारा किया जा रहा है, जो करीब 17 प्रतिशत हिस्सेदारी को दर्शाता है। स्टार्टअप क्षेत्र में भी मध्यप्रदेश ने उल्लेखनीय उपलब्धि हासिल की है। कुल 7264 मान्यता प्राप्त स्टार्टअप्स में से 3476 स्टार्टअप महिलाओं द्वारा संचालित हैं, जो लगभग 48 प्रतिशत हिस्सेदारी है। यह आंकड़ा देश में महिला उद्यमिता की मजबूत स्थिति को दर्शाता है और प्रदेश को स्टार्टअप इकोसिस्टम में एक उभरते केंद्र के रूप में स्थापित करता है। एमएसएमई विकास नीति 2025 के तहत महिला उद्यमियों को विशेष प्रोत्साहन दिया जा रहा है। जिन महिला उद्यमियों द्वारा संयंत्र और मशीनरी में निवेश किया जाता है, उन्हें ₹10 करोड़ तक के निवेश पर अधिकतम 48 प्रतिशत तक पूंजी अनुदान का प्रावधान किया गया है। अनुसूचित जाति और जनजाति वर्ग की महिलाओं के लिए यह सहायता बढ़ाकर 50 प्रतिशत तक की गई है, जबकि सामान्य वर्ग के लिए यह 40 प्रतिशत निर्धारित है। यह प्रावधान महिलाओं को बड़े स्तर पर उद्योग स्थापित करने के लिए प्रेरित कर रहा है। इसी तरह स्टार्टअप नीति 2025 में भी महिलाओं के लिए विशेष वित्तीय सहायता का प्रावधान किया गया है। महिला उद्यमियों को 18 प्रतिशत तक की वित्तीय सहायता दी जाती है, जिसमें प्रति ट्रॉंच ₹18 लाख तक और कुल मिलाकर ₹72 लाख तक की सहायता शामिल है। वहीं अन्य स्टार्टअप्स के लिए यह सीमा 15 प्रतिशत या ₹15 लाख तक सीमित है। इन नीतियों के चलते मध्यप्रदेश में महिला उद्यमिता को नई गति मिली है और राज्य सरकार इसे आत्मनिर्भर भारत की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम के रूप में देख रही है। सरकार का मानना है कि इन प्रयासों से आने वाले समय में महिलाओं की आर्थिक भागीदारी और भी मजबूत होगी और राज्य की अर्थव्यवस्था को नई ऊर्जा मिलेगी।
भारतीयता में समाहित है वैश्विक कल्याण का मार्ग

– प्रो. एस. के. सिंहवर्तमान में अविश्वास की परतों से घिरी हुई विश्व व्यवस्था अनेक प्रकार के संघर्षों एवं अस्थिरताओं से जूझ रही है। ईरान बनाम अमेरिका-इजराइल युद्ध, अमेरिका द्वारा वेनेजुएला में की गई असंगत कार्यवाही, लंबे समय से चल रहे रूस-यूक्रेन युद्ध, पर्यावरण संकट, मानसिक तनाव एवं बढ़ती असहिष्णुता इस बात का प्रमाण है कि आज विश्व गहरे संकट से गुजर रहा है। वस्तुत: पिछले कुछ समय की सैन्य गतिविधियों को देखकर तो ऐसा लग रहा है कि विश्व-व्यवस्था पूरी तरह से लड़खड़ा गई है एवं धीरे-धीरे दुनिया ‘जंगलराज’ की ओर बढ़ रही है। टैरिफ को लेकर ट्रंप के अपरिपक्व एवं गैर-जिम्मेदार रवैये तथा पल-पल बदलते उनके बचकाने बयानों ने भूमंडलीकरण के मूल उद्देश्यों पर ही प्रश्नचिह्न खड़ा कर दिया है। जिस भूमंडलीकरण को परस्पर निर्भरता, वैश्विक सहयोग एवं साझा प्रगति का आधार माना गया था, आज वह कमजोर पड़ता हुआ दिखाई दे रहा है। इन विषम परिस्थितियों में भारतीय दर्शन, भारत की संस्कृति अर्थात् ‘भारतीयता’ एक ऐसा विकल्प है जो विश्व में स्थायी शांति, संतुलन, समन्वय एवं सहयोग का मार्ग प्रशस्त कर सकता है। हजारों सालों से पूरी पृथ्वी को एक मानने एवं मानवता के समग्र कल्याण पर आधारित ‘वसुधैव कुटुम्बकम’, ‘सर्वे भवन्तु सुखिनः’, ‘सर्वजन हिताय, सर्वजन सुखाय’ जैसे भारतीय सिद्धांतों में विकास और प्रगति का अर्थ किसी एक व्यक्ति या किसी एक राष्ट्र का हित नहीं बल्कि समग्र रूप में पूरी मानवता का कल्याण करना है, अर्थात् ‘स्व’ से ‘सर्व’ की यात्रा ही भारतीयता है। भारतीयता के इस मूल भाव को भारतीय जीवन दृष्टि के विभिन्न पहलुओं में स्पष्ट रूप से देखा जा सकता है। भारतीयता का एक महत्वपूर्ण आयाम प्रकृति के साथ निकटता, सामंजस्य एवं संतुलन रखना है। यही कारण है कि भारतीय परंपरा में वृक्षों, नदियों, पर्वतों एवं धरती को पूजनीय माना गया है, जिसमें यह मान्यता है कि प्रकृति के साथ समन्वय रखकर ही पृथ्वी को बचाकर जीवन को सुरक्षित रखा जा सकता है। सत्य, परोपकार, त्याग, दया, करुणा, अहिंसा, सहिष्णुता, नैतिकता, भक्ति, समर्पण, संयम और राष्ट्रप्रेम जैसे भारतीय जीवन मूल्य, मूल्य-आधारित भारतीयता की आत्मा हैं। कई तरह की विविधताओं के बावजूद ‘अनेकता में एकता’ भी भारतीयता का एक उत्कृष्ट उदाहरण है। ‘साईं इतना दीजिए जामें कुटुम्ब समाय’ अर्थात् हमें उतना ही संचय करना चाहिए, जितना आवश्यक है। भारतीय मूल्यों की यह गहन अभिव्यक्ति भारतीयता के उस पहलू को उजागर करती है जहां व्यक्तिगत और सामूहिक हित साथ-साथ चलते हैं। इसके विपरीत पाश्चात्य चिंतन के मूल में व्यक्ति, भौतिकता, बाहरी दुनिया एवं बाहरी उपलब्धियां हैं। इसलिए पश्चिम का मूल स्वभाव स्वार्थ है न कि सद्भाव। जिसके कारण कभी-कभी किसी एक व्यक्ति की अनैतिक एवं अनुचित महत्वाकांक्षाओं का खामियाजा पूरी दुनिया को भुगतना पड़ता है। ईरान, अमेरिका-इजराइल युद्ध के चलते पूरी दुनिया में इंटरनेट बंद होने का खतरा मंडरा रहा है। अनगिनत लाभ होने के बावजूद अनियंत्रित लालच तथा विज्ञान एवं तकनीक पर अत्यधिक निर्भरता हमारे विनाश का कारण भी बन सकती है। भारत का स्पष्ट मानना है कि विज्ञान का उपयोग मानवता एवं मानव कल्याण के लिए होना चाहिए न कि व्यक्तिगत लाभ तथा भौतिक सुख-सुविधाओं की अंधी दौड़ एवं प्रभुत्व स्थापित करने के लिए। यही कारण है कि 16 से 20 फरवरी, 2026 को दिल्ली में आयोजित ‘इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट 2026’ की थीम ‘सर्वजन हिताय, सर्वजन सुखाय’ रखी गई थी। इसके पूर्व नई दिल्ली में ही आयोजित जी-20 के शिखर सम्मेलन की मुख्य थीम ‘वसुधैव कुटुम्बकम’ थी, जिसमें वन अर्थ, वन फैमिली, वन फ्यूचर का नारा दिया गया था। स्पष्ट है कि भारत को जब भी दुनिया का नेतृत्व करने का अवसर मिला है, भारत ने सभी को साथ लेकर चलने की कोशिश की है। चूंकि विस्तारवादी सोच की शुरुआत हमेशा लालच से होती है, इसलिए भारतीय चिंतन में इस सोच को कभी भी प्रश्रय नहीं दिया गया। आध्यात्मिकता भारतीय चिंतन की मूल विशेषता है, इसलिए भारतीयता के हर पहलू में हमें इसकी झलक दिखाई देती है। सदियों से भारत में शिक्षा को विद्या, छात्र को विद्यार्थी एवं शिक्षक को गुरु कहा जाता था। शिक्षा हमें बाहरी ज्ञान एवं जीवनयापन सिखाती है, जबकि विद्या एक आंतरिक गुण है जो कि हमारे विवेक, संस्कारों एवं आचरण से जुड़ी होती है तथा हमें सही एवं गलत में भेद करना सिखाती है। शिक्षा सिर्फ सफलता तक सीमित रहती है जबकि विद्या हमें सार्थकता तक ले जाती है। श्री विष्णु पुराण में उल्लेख है कि ‘तत्कर्म यन्न बन्धाय, सा विद्या या विमुक्तये’ अर्थात् कर्म वही है जो बंधन में न बांधे और विद्या वही है जो मुक्त करे। यही कारण है कि भारतीयता में आत्म-बोध अर्थात् आत्म-साक्षात्कार पर विशेष बल दिया गया है। शिक्षा वह है जिसे प्राप्त करने के बाद विनम्रता आए एवं व्यक्ति, व्यक्तिगत लाभ की जगह सामूहिक हित को प्राथमिकता दे, इसलिए भारतीय ज्ञान परंपरा में कहा गया है कि ‘विद्या ददाति विनयं’ अर्थात् सच्ची विद्या से व्यक्ति में विनम्रता आती है। भारतीय ज्ञान परंपरा त्याग, परोपकार एवं आत्मबोध पर आधारित होने के कारण संयम, उत्तरदायित्व एवं कर्तव्यबोध की भावना उत्पन्न करती है, जबकि पाश्चात्य ज्ञान परंपरा तर्क, विज्ञान एवं भौतिकता पर आधारित होने के कारण प्रतिस्पर्धा, अहंकार, श्रेष्ठता-बोध एवं आत्मकेन्द्रित बनाती है। यहां स्पष्ट है कि दुनिया में यदि स्थायी शांति एवं सद्भाव स्थापित करना है तो हमें भारतीयता के मूल्यों का प्रचार-प्रसार करना होगा। यहां पर यह उल्लेख करना आवश्यक है कि अतीत की ओर लौटना ही भारतीयता नहीं है, बल्कि ‘नित्य नूतन, चिर पुरातन’ की सोच के साथ भविष्य के लिए एक संतुलित एवं मानवीय मार्ग का निर्माण करना भारतीयता का एक प्रमुख गुण है। यह केवल अतीत की धरोहर नहीं बल्कि भविष्य के लिए एक मार्गदर्शक सिद्धांत है। पर्यावरणीय असंतुलन, नैतिक पतन एवं सामाजिक विघटन के इस दौर में भारतीयता के मूल तत्वों से प्रेरित राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के ‘पंच परिवर्तन’ न केवल भारत बल्कि पूरी दुनिया के लिए प्रासंगिक हैं, क्योंकि भारतीयता का मूल आधार भौगोलिक सीमाएं नहीं बल्कि समस्त जड़-चेतन एवं मानवता है। संघ के पंच परिवर्तन का किसी भी राजनीतिक दल द्वारा विरोध न किया जाना इसकी व्यापक स्वीकार्यता एवं सहमति का सबसे बड़ा प्रमाण है। भारतीयता एवं संवैधानिक आदर्शों से प्रेरित सामाजिक समरसता, कुटुम्ब प्रबोधन, पर्यावरण संरक्षण, स्वदेशी चेतना एवं नागरिक कर्तव्य ऐसे आधारभूत मूल्य हैं जो न केवल भारत के उत्थान तक सीमित
प्यार और बदले की गहरी कहानी में भावनात्मक परतों का मजबूत चित्रण….

नई दिल्ली। निर्देशक शेनिल देव की फिल्म ‘डकैत: ए लव स्टोरी’ एक साधारण प्रेम कहानी की सीमाओं से बाहर निकलकर टूटे रिश्तों, बदले की आग और इंसानी भावनाओं की जटिल परतों को सामने लाती है। करीब 2 घंटे 35 मिनट की यह फिल्म एक ऐसी दुनिया रचती है जहां प्यार केवल सुकून नहीं देता, बल्कि दर्द, गुस्सा और हिंसा की एक लंबी यात्रा की शुरुआत बन जाता है। फिल्म का मूल स्वर गंभीर और भावनात्मक है, जिसमें किरदारों के फैसले कहानी को लगातार मोड़ते रहते हैं। आदिवी शेष का संयमित और प्रभावशाली अभिनयफिल्म का सबसे मजबूत पक्ष आदिवी शेष का अभिनय है, जिन्होंने अपने किरदार को बेहद संतुलित और गहराई से निभाया है। टूटे हुए दिल और भीतर से उबलते गुस्से को उन्होंने बिना किसी अतिशयोक्ति के दर्शाया है। उनका अभिनय अधिकतर सूक्ष्म भावों और शांत दृश्यों के जरिए सामने आता है, जो दर्शकों पर गहरा असर छोड़ता है। कई जगह उनकी आंखों और चेहरे के भाव ही कहानी का बोझ संभालते नजर आते हैं, जिससे किरदार और अधिक विश्वसनीय बन जाता है। मृणाल ठाकुर की मजबूत मौजूदगीमृणाल ठाकुर ने भी अपने किरदार को मजबूती और संवेदनशीलता के साथ निभाया है। उनका चरित्र केवल कहानी को आगे बढ़ाने का माध्यम नहीं है, बल्कि अपनी अलग पहचान और परतों के साथ खड़ा होता है। उनके भीतर छिपा रहस्य और भावनात्मक द्वंद्व फिल्म में एक अलग तनाव पैदा करता है। आदिवी शेष के साथ उनकी केमिस्ट्री कहानी को और अधिक जटिल और दिलचस्प बनाती है।तकनीकी पक्ष और सिनेमैटिक टोनफिल्म की सिनेमैटोग्राफी इसकी सबसे बड़ी ताकतों में से एक है, जो धूल भरे और सुनसान वातावरण को बेहद प्रभावी ढंग से दर्शाती है। दृश्य संयोजन और रंगों का उपयोग कहानी के उदास और गंभीर मूड को और गहराई देता है। कैमरा कई दृश्यों को लंबे समय तक पकड़कर रखता है, जिससे भावनाओं को खुलकर सामने आने का अवसर मिलता है। हालांकि, यही शैली कई बार फिल्म की गति को धीमा भी कर देती है। बैकग्राउंड स्कोर कहानी के भावनात्मक और तनावपूर्ण क्षणों को प्रभावी रूप से उभारता है, बिना दृश्य पर हावी हुए। कमजोर पड़ती पटकथा और धीमी शुरुआतफिल्म की कहानी का आधार मजबूत होने के बावजूद पटकथा में कुछ कमजोरियां नजर आती हैं। कई घटनाक्रम अनुमानित प्रतीत होते हैं, जिससे कुछ हिस्सों में रोमांच कम हो जाता है। पहले हिस्से में कहानी और किरदारों की स्थापना पर अधिक समय दिया गया है, जिससे गति धीमी महसूस होती है। हालांकि दूसरा भाग अधिक प्रभावशाली और भावनात्मक रूप से सशक्त है, जो पहले हिस्से की कमी को काफी हद तक पूरा कर देता है।किरदारों की जटिल दुनियाफिल्म की सबसे खास बात इसका यह दृष्टिकोण है कि इसमें किसी भी किरदार को पूरी तरह सही या गलत के रूप में नहीं दिखाया गया है। हर पात्र अपनी कमजोरियों और गलतियों के साथ सामने आता है। यही ग्रे शेड्स फिल्म को यथार्थ के करीब लाते हैं और दर्शकों को सोचने पर मजबूर करते हैं। यह कहानी आसान जवाब नहीं देती, बल्कि परिस्थितियों और भावनाओं की जटिलता को उजागर करती है।एक गंभीर और भावनात्मक सिनेमाई अनुभवडकैत: ए लव स्टोरी’ उन दर्शकों के लिए बनाई गई फिल्म है जो केवल मनोरंजन नहीं, बल्कि गहराई और भावनात्मक जुड़ाव की तलाश में होते हैं। यह फिल्म प्यार को एक सरल भावना के बजाय एक जटिल अनुभव के रूप में प्रस्तुत करती है, जिसमें दर्द और बदलाव भी शामिल हैं।
स्पेस मिशन में तकनीकी चुनौती, यूनिवर्सल वेस्ट मैनेजमेंट सिस्टम पर सवाल!

नई दिल्ली। NASA ने हाल ही में एक एक्सप्लेनर वीडियो जारी कर Artemis II मिशन के दौरान सामने आई एक अहम तकनीकी समस्या के बारे में जानकारी दी है। यह दिक्कत Orion spacecraft में लगे स्पेस टॉयलेट यानी ‘यूनिवर्सल वेस्ट मैनेजमेंट सिस्टम’ (UWMS) में आई थी। यह सिस्टम अंतरिक्ष में मानव अपशिष्ट (वेस्ट) को संभालने के लिए बेहद जरूरी होता है। इसमें यूरिन को एक टैंक में इकट्ठा किया जाता है और फिर उसे वैक्यूम के जरिए बाहर निकाला जाता है। चूंकि अंतरिक्ष में गुरुत्वाकर्षण नहीं होता, इसलिए यह पूरा सिस्टम हवा के तेज बहाव (एयर फ्लो) पर काम करता है। क्या आई थी समस्या?मिशन के दौरान अचानक इस सिस्टम में फ्लो बंद हो गया, जिससे एस्ट्रोनॉट्स टॉयलेट का इस्तेमाल नहीं कर पा रहे थे। वीडियो में एस्ट्रोनॉट्स ने बताया कि “जब फ्लो ही नहीं था, तो सिस्टम काम नहीं कर रहा था। इस स्थिति में क्रू को अस्थायी तौर पर ‘कॉन्टिगेंसी कलेक्शन यूनिट्स’ (CCUS) का उपयोग करने की सलाह दी गई, जो आपात स्थिति में इस्तेमाल होने वाला बैकअप सिस्टम होता है। तकनीकी चुनौती क्यों है यह?NASA के अनुसार, असली समस्या यूरिन को वैक्यूम में डिस्पोज करने के दौरान आई। शुद्ध पानी को वैक्यूम में भेजना अपेक्षाकृत आसान होता है, लेकिन यूरिन जैसे जटिल तरल पदार्थ में कई अतिरिक्त चुनौतियां सामने आती हैं। इस प्रक्रिया में तरल के अचानक उथल-पुथल करने और जमने (फ्रीजिंग) जैसी समस्याएं भी हो सकती हैं। एस्ट्रोनॉट्स ने इसे मजाकिया अंदाज में “बर्फ का तूफान” बताया। कैसे हुआ समाधान?इस तकनीकी खराबी को महिला एस्ट्रोनॉट Christina Hammock Koch ने ठीक किया। शुरुआत में लगा कि मोटर में कुछ फंस गया है, लेकिन बाद में यह ‘प्राइमिंग’ से जुड़ी छोटी तकनीकी गड़बड़ी निकली। क्रिस्टीना ने इसे ठीक कर दिया और मिशन को सुचारू रूप से आगे बढ़ाया। उन्होंने मजाक में खुद को “स्पेस प्लंबर” भी बताया। क्यों है यह इतना अहम?स्पेस मिशनों में टॉयलेट जैसी बुनियादी चीजें भी बेहद अहम होती हैं। छोटी सी तकनीकी गड़बड़ी भी बड़ी चुनौती बन सकती है। यही वजह है कि NASA ने इस घटना को गंभीरता से लेते हुए पूरी प्रक्रिया को सार्वजनिक किया, ताकि भविष्य के मिशनों में सुधार किया जा सके। आर्टेमिस III से पहले मिला बड़ा सबकArtemis II में आई यह समस्या Artemis III मिशन से पहले एक अहम सीख मानी जा रही है। नासा की योजना है कि आर्टेमिस III के जरिए इंसानों को फिर से चंद्रमा पर भेजा जाए। ऐसे में इस तरह की तकनीकी खामियों को समय रहते सुधारना बेहद जरूरी है। स्पेस मिशन में हर छोटी तकनीक बड़ी भूमिका निभाती है। आर्टेमिस II में आई टॉयलेट की समस्या ने यह साबित कर दिया कि अंतरिक्ष में जीवन को सुचारू बनाए रखने के लिए हर सिस्टम का सही तरीके से काम करना कितना जरूरी है।
CAPF सामान्य प्रशासन अधिनियम 2026 से अर्धसैनिक बलों की एकीकृत प्रशासनिक व्यवस्था लागू

नई दिल्ली:केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों की प्रशासनिक व्यवस्था में बड़ा बदलाव करते हुए केंद्र सरकार ने केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल सामान्य प्रशासन अधिनियम 2026 को लागू कर दिया है। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू की मंजूरी के बाद यह कानून आधिकारिक रूप से प्रभाव में आ गया है, जिसके तहत देश के प्रमुख अर्धसैनिक बलों की भर्ती, पदोन्नति, प्रतिनियुक्ति और सेवा शर्तों को एकीकृत ढांचे में लाया जाएगा। इस फैसले को सुरक्षा बलों की संरचना और नेतृत्व व्यवस्था में एक महत्वपूर्ण सुधार के रूप में देखा जा रहा है। एकीकृत प्रशासनिक ढांचे की शुरुआतनए कानून के तहत केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल, सीमा सुरक्षा बल, केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल, भारत तिब्बत सीमा पुलिस और सशस्त्र सीमा बल सहित सभी प्रमुख CAPF इकाइयों के लिए एक समान प्रशासनिक प्रणाली लागू की जाएगी। अब तक ये सभी बल अलग अलग अधिनियमों के तहत कार्य करते थे, जिससे सेवा शर्तों और पदोन्नति प्रक्रिया में असमानता की स्थिति बनी रहती थी। नए ढांचे का उद्देश्य इन सभी विसंगतियों को समाप्त कर एक समान व्यवस्था स्थापित करना है। प्रतिनियुक्ति प्रणाली में बड़ा बदलावनए कानून के तहत वरिष्ठ स्तर पर प्रतिनियुक्ति प्रणाली को भी स्पष्ट रूप से परिभाषित किया गया है। निरीक्षक सामान्य स्तर पर आधे पदों पर भारतीय पुलिस सेवा के अधिकारियों की प्रतिनियुक्ति जारी रहेगी, जबकि अतिरिक्त महानिदेशक स्तर पर भी बड़ी संख्या में पद प्रतिनियुक्ति के माध्यम से भरे जाएंगे। विशेष महानिदेशक और महानिदेशक स्तर के पदों को पूरी तरह प्रतिनियुक्ति आधारित रखा गया है। इस व्यवस्था का उद्देश्य नेतृत्व में अनुभव और प्रशासनिक दक्षता को बनाए रखना बताया जा रहा है।न्यायिक निर्देशों के बाद आया विधायी परिवर्तनयह कानून सर्वोच्च न्यायालय के हालिया निर्णय के बाद लाया गया है, जिसमें CAPF में वरिष्ठ स्तर पर IPS अधिकारियों की प्रतिनियुक्ति को चरणबद्ध तरीके से कम करने का निर्देश दिया गया था। अदालत ने सरकार से कैडर समीक्षा और संरचनात्मक सुधार पर भी जोर दिया था। इसी दिशा में यह नया अधिनियम तैयार किया गया है ताकि प्रशासनिक व्यवस्था को स्पष्ट और स्थायी ढांचे में बदला जा सके।प्रशासनिक चुनौतियों का समाधान करने की कोशिशपिछले कुछ वर्षों में CAPF व्यवस्था में सेवा शर्तों, पदोन्नति और अधिकार क्षेत्र को लेकर कई विवाद और कानूनी चुनौतियां सामने आई थीं। अलग अलग नियमों के कारण प्रशासनिक असंतुलन की स्थिति बन रही थी। नए कानून के माध्यम से सरकार का उद्देश्य इन सभी समस्याओं को दूर कर एक मजबूत और एकीकृत प्रणाली विकसित करना है, जिससे संचालन क्षमता और अनुशासन दोनों को बेहतर बनाया जा सके। सुरक्षा बलों की कार्यक्षमता पर संभावित प्रभावविशेषज्ञों का मानना है कि यह नया ढांचा CAPF के नेतृत्व और प्रबंधन प्रणाली को अधिक संगठित बना सकता है। हालांकि प्रतिनियुक्ति और आंतरिक पदोन्नति संतुलन को लेकर भविष्य में भी बहस जारी रह सकती है। फिर भी सरकार का मानना है कि यह कदम देश की आंतरिक सुरक्षा और सीमा प्रबंधन को अधिक प्रभावी बनाने में मदद करेगा। संस्थागत ढांचे और मनोबल पर ध्यानपूर्व अधिकारियों और सुरक्षा विशेषज्ञों का यह भी कहना है कि किसी भी संरचनात्मक बदलाव का प्रभाव बलों के मनोबल और कार्य संस्कृति पर पड़ता है। इसलिए इस नए अधिनियम को लागू करते समय यह सुनिश्चित करना आवश्यक होगा कि नेतृत्व अवसरों और सेवा शर्तों में संतुलन बना रहे, ताकि सुरक्षा बलों की कार्यक्षमता प्रभावित न हो।