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घड़े का पानी देता है नेचुरल ठंडक, खरीदते समय इन बातों का रखें खास ध्यान!

नई दिल्ली। गर्मियों में फ्रिज का बर्फ जैसा ठंडा पानी भले ही तुरंत राहत दे, लेकिन यह शरीर के लिए हमेशा फायदेमंद नहीं होता। बहुत ठंडा पानी पीने से शरीर को अचानक तापमान का झटका लगता है, जिससे गले की नसें सिकुड़ सकती हैं और पाचन तंत्र भी प्रभावित हो सकता है। कई बार इससे खांसी, गले में खराश और एसिडिटी जैसी समस्याएं भी बढ़ जाती हैं। इसके विपरीत, मिट्टी के घड़े का पानी शरीर को प्राकृतिक और संतुलित तरीके से ठंडक देता है, जो सेहत के लिए ज्यादा सुरक्षित माना जाता है। कैसे ठंडा होता है घड़े का पानी?घड़े में पानी ठंडा होने के पीछे एक प्राकृतिक प्रक्रिया होती है, जिसे वाष्पीकरण (Evaporation) कहते हैं। घड़े की मिट्टी में मौजूद सूक्ष्म छिद्रों से पानी की थोड़ी मात्रा बाहर आकर हवा के संपर्क में वाष्पित होती है, जिससे अंदर का पानी धीरे-धीरे ठंडा हो जाता है। यह ठंडक शरीर के तापमान के अनुकूल होती है, जिससे शरीर को कोई झटका नहीं लगता। आयुर्वेद भी मानता है फायदेमंदAyurveda के अनुसार, बहुत ठंडा पानी पाचन अग्नि को कमजोर करता है, जिससे खाना सही तरीके से नहीं पचता। वहीं घड़े का पानी पाचन को बेहतर बनाता है और पेट को ठंडा रखता है। माना जाता है कि मिट्टी में ऐसे प्राकृतिक गुण होते हैं जो पानी के pH स्तर को संतुलित रखने में मदद करते हैं, जिससे एसिडिटी और जलन जैसी समस्याएं कम होती हैं। शरीर को करता है हाइड्रेट और डिटॉक्सघड़े का पानी शरीर को हाइड्रेट रखने के साथ-साथ प्राकृतिक रूप से डिटॉक्स करने में भी मदद करता है। यह शरीर से अनचाहे तत्वों को बाहर निकालने में सहायक होता है।संतुलित ठंडक के कारण ब्लड सर्कुलेशन बेहतर रहता है और त्वचा पर भी इसका सकारात्मक असर देखने को मिलता है। घड़ा खरीदते समय इन बातों का रखें ध्यान- 1. शुद्ध मिट्टी का बना होघड़ा खरीदते समय यह जरूर देखें कि वह पूरी तरह प्राकृतिक मिट्टी से बना हो। उसमें किसी तरह का केमिकल या आर्टिफिशियल रंग नहीं मिला होना चाहिए। 2. गंध और रंग की जांच करेंअगर घड़े से अजीब गंध आती है या उसका रंग हाथ में लगने लगे, तो उसे न खरीदें। अच्छी क्वालिटी का घड़ा हल्की मिट्टी की खुशबू देता है। 3. अंदरूनी सतह पर ध्यान देंघड़े का अंदरूनी हिस्सा थोड़ा खुरदुरा होना चाहिए। इससे पानी प्राकृतिक रूप से ठंडा होता है। 4. मोटाई हो सहीमोटा घड़ा पानी को ज्यादा देर तक ठंडा रखता है और जल्दी टूटता भी नहीं। पतले घड़े जल्दी खराब हो सकते हैं। 5. रिसाव जरूर जांचेंखरीदने से पहले उसमें पानी भरकर देख लें कि कहीं से लीकेज तो नहीं हो रहा। 6. सही साइज चुनेंअपने परिवार की जरूरत और घर की जगह के हिसाब से घड़े का साइज चुनें, ताकि उसका इस्तेमाल आसान रहे। घड़े का पानी न सिर्फ शरीर को प्राकृतिक ठंडक देता है, बल्कि पाचन, हाइड्रेशन और समग्र स्वास्थ्य के लिए भी फायदेमंद है। सही घड़ा चुनकर आप गर्मियों में एक हेल्दी और देसी विकल्प अपना सकते हैं।

जिंदगी की जंग लड़ रहा भागीरथ बोरवेल से सुरक्षित निकालने की कोशिशें तेज

उज्जैन । मध्य प्रदेश के उज्जैन जिले के बड़नगर तहसील अंतर्गत ग्राम झालरिया में एक दर्दनाक हादसा सामने आया है जहां 3 साल का मासूम बच्चा बोरवेल में गिर गया। घटना के बाद से ही एनडीआरएफ और एसडीआरएफ की टीमें लगातार रेस्क्यू ऑपरेशन में जुटी हुई हैं और बच्चे को सुरक्षित बाहर निकालने के प्रयास तेजी से जारी हैं। जानकारी के अनुसार बच्चा भागीरथ अपने परिवार के साथ भेड़ चराने के लिए क्षेत्र में आया था। खेलते-खेलते वह खुले पड़े बोरवेल के पास पहुंच गया जहां पहले ढक्कन लगा हुआ था लेकिन बताया जा रहा है कि जानवरों के चरने के दौरान वह ढक्कन हट गया और इसी कारण यह हादसा हो गया। हादसा गुरुवार रात करीब 8 से 9 बजे के बीच हुआ जिसके बाद तुरंत प्रशासन, पुलिस और रेस्क्यू टीमों को सूचना दी गई। घटना के बाद से रातभर लगातार राहत और बचाव कार्य चलता रहा और मशीनों की मदद से ऑपरेशन को तेज किया गया। पुलिस अधीक्षक प्रदीप शर्मा ने जानकारी देते हुए बताया कि बच्चे को करीब 75 फीट की गहराई पर लोकेट कर लिया गया है। बोरवेल के अंदर कैमरे और विशेष उपकरण डालकर बच्चे की स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है ताकि हर पल की जानकारी मिल सके और उसे सुरक्षित बाहर निकाला जा सके। रेस्क्यू ऑपरेशन को तेज करने के लिए मौके पर 5 पोकलेन और जेसीबी मशीनें लगाई गई हैं। इसके साथ ही बोरवेल के पास समानांतर गड्ढा खोदकर टनल बनाने का काम भी तेजी से किया जा रहा है ताकि वैकल्पिक रास्ते से बच्चे तक पहुंचा जा सके। प्रशासन ने पूरे इलाके को घेराबंदी कर दिया है और किसी भी तरह की भीड़ को रोकने के निर्देश दिए हैं ताकि बचाव कार्य में कोई बाधा न आए। अधिकारियों ने ग्रामीणों से अपील की है कि वे मौके पर न जुटें और राहत कार्य में सहयोग करें। मासूम भागीरथ, जो राजस्थान के पाली जिले के निवासी बताए जा रहे हैं, अपने परिवार के साथ कुछ दिनों से इस क्षेत्र में रुके हुए थे। फिलहाल पूरे प्रशासन का ध्यान केवल एक ही लक्ष्य पर है किसी भी तरह बच्चे को सुरक्षित बाहर निकालना। यह हादसा एक बार फिर खुले बोरवेल की खतरनाक स्थिति और सुरक्षा इंतजामों पर गंभीर सवाल खड़े करता है। राहत टीमों का ऑपरेशन लगातार जारी है और सभी की नजर अब सिर्फ इस बात पर है कि मासूम को कब तक सुरक्षित बाहर निकाला जा सकेगा।

कोयला उत्पादन में बड़ी शुरुआत, महाजेनको ने शुरू किया पहला डिस्पैच!

नई दिल्ली। छत्तीसगढ़ में Maharashtra State Power Generation Company Limited (महाजेनको) की गारे पेलमा सेक्टर–2 कोल खदान से कोयले का पहला डिस्पैच औपचारिक रूप से शुरू हो गया है। इस कोयले का उपयोग महाराष्ट्र में बिजली उत्पादन के लिए किया जाएगा, जिससे राज्य की ऊर्जा जरूरतों को स्थिर और भरोसेमंद सप्लाई मिल सकेगी। ऊर्जा सुरक्षा की दिशा में अहम कदमयह परियोजना देश की दीर्घकालिक ऊर्जा सुरक्षा और आत्मनिर्भरता की दिशा में एक बड़ा कदम मानी जा रही है। गारे पेलमा सेक्टर–2 कोल ब्लॉक का विकास महाजेनको द्वारा किया जा रहा है, जो महाराष्ट्र की प्रमुख बिजली उत्पादन कंपनी है। इस खदान से मिलने वाली कोयले की आपूर्ति से राज्य की ताप विद्युत परियोजनाओं को नियमित ईंधन मिलेगा, जिससे बिजली उत्पादन में निरंतरता और विश्वसनीयता सुनिश्चित होगी। विशाल कोयला भंडार और उत्पादन क्षमतागारे पेलमा सेक्टर-2 खदान में लगभग 655.15 मिलियन टन कोयले का विशाल भंडार मौजूद है। इसकी अधिकतम वार्षिक उत्पादन क्षमता 23.6 मिलियन टन निर्धारित की गई है। परियोजना के पूर्ण संचालन से छत्तीसगढ़ सरकार को रॉयल्टी, जिला खनिज निधि (DMF), जीएसटी और अन्य मदों के जरिए करीब 29,000 करोड़ रुपये का प्रत्यक्ष राजस्व मिलने का अनुमान है। रोजगार और स्थानीय अर्थव्यवस्था को मिलेगा बढ़ावाखनन गतिविधियों से क्षेत्र में रोजगार के बड़े अवसर पैदा होंगे। इस परियोजना के तहत 3,400 से अधिक प्रत्यक्ष नौकरियां उपलब्ध कराई जाएंगी। इसके अलावा परिवहन, निर्माण, खानपान और अन्य सेवाओं के जरिए हजारों अप्रत्यक्ष रोजगार भी सृजित होंगे। इससे स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलने की उम्मीद है और क्षेत्रीय विकास को नई गति मिलेगी। CSR और पुनर्वास योजनाओं पर फोकसमहाजेनको ने परियोजना के तहत सामाजिक उत्तरदायित्व (CSR) को प्राथमिकता दी है। शुरुआती चरण में करीब 35 करोड़ रुपये की CSR योजना लागू की गई है, जिसके तहत स्वास्थ्य, शिक्षा, स्वच्छता, इंफ्रास्ट्रक्चर और कौशल विकास से जुड़े कार्य किए जा रहे हैं। इसके साथ ही परियोजना से प्रभावित 14 गांवों के 1,679 परिवारों के लिए पुनर्वास और पुनर्स्थापन योजना भी लागू की जा रही है, जिससे प्रभावित लोगों को बेहतर सुविधाएं मिल सकें। पर्यावरण संरक्षण के लिए विशेष उपायपरियोजना में पर्यावरण संतुलन बनाए रखने के लिए व्यापक कदम उठाए गए हैं। इसमें हरित पट्टी का विकास, बड़े स्तर पर वृक्षारोपण, प्रदूषण नियंत्रण, जल संरक्षण और खनन के बाद भूमि सुधार जैसे उपाय शामिल हैं। गारे पेलमा सेक्टर–2 खदान से कोयले का पहला डिस्पैच न सिर्फ महाराष्ट्र की ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने में मदद करेगा, बल्कि छत्तीसगढ़ में आर्थिक विकास, रोजगार सृजन और पर्यावरणीय संतुलन को भी नई दिशा देगा।

भारत और यूरोपीय संघ के बीच बढ़ते सहयोग के बीच महत्वपूर्ण कूटनीतिक कदम….

नई दिल्ली:भारत ने अपनी विदेश नीति को और मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए वरिष्ठ राजनयिक प्रणय वर्मा को बेल्जियम में देश का अगला राजदूत नियुक्त किया है। इसके साथ ही उन्हें यूरोपीय यूनियन में भी भारत का प्रतिनिधित्व करने की जिम्मेदारी सौंपी गई है। यह नियुक्ति ऐसे समय में हुई है जब भारत और यूरोपीय देशों के बीच आर्थिक, रणनीतिक और राजनीतिक सहयोग लगातार विस्तार ले रहा है।अनुभवी राजनयिक को मिली अहम जिम्मेदारीविदेश सेवा के 1994 बैच के अधिकारी प्रणय वर्मा वर्तमान में बांग्लादेश में भारत के उच्चायुक्त के रूप में कार्यरत हैं। अपने लंबे कूटनीतिक करियर में उन्होंने विभिन्न देशों में भारत का प्रतिनिधित्व किया है और अंतरराष्ट्रीय संबंधों के कई महत्वपूर्ण क्षेत्रों में काम किया है। अब उन्हें यूरोप जैसे रणनीतिक क्षेत्र में भारत की कूटनीतिक जिम्मेदारी दी गई है, जिसे एक महत्वपूर्ण पदोन्नति के रूप में देखा जा रहा है।यूरोपीय संघ के साथ बढ़ते संबंधों के बीच नियुक्तियह नियुक्ति ऐसे समय में हुई है जब भारत और यूरोपीय संघ के बीच संबंधों में नई गति आई है। हाल ही में दोनों पक्षों के बीच मुक्त व्यापार समझौते को लेकर प्रगति हुई है, जिससे आने वाले वर्षों में व्यापारिक संबंधों में बड़े विस्तार की उम्मीद जताई जा रही है। इस समझौते के बाद भारत के निर्यात को नई मजबूती मिलने और यूरोपीय बाजार में भारतीय उत्पादों की पहुंच बढ़ने की संभावना है।ब्रसेल्स में रणनीतिक भूमिका का विस्तारब्रसेल्स में स्थित भारतीय दूतावास को यूरोपीय यूनियन के साथ संबंधों का प्रमुख केंद्र माना जाता है। यहां नियुक्त होने वाले राजदूत की भूमिका न केवल द्विपक्षीय संबंधों तक सीमित रहती है, बल्कि पूरे यूरोपीय ढांचे के साथ भारत की रणनीतिक साझेदारी को भी प्रभावित करती है। प्रणय वर्मा की नियुक्ति से भारत की इस क्षेत्र में कूटनीतिक सक्रियता और मजबूत होने की उम्मीद है। लंबा कूटनीतिक अनुभव बना ताकतप्रणय वर्मा का कूटनीतिक अनुभव तीन दशकों से अधिक का रहा है। उन्होंने विभिन्न देशों में भारत की विदेश नीति को आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। वियतनाम में राजदूत के रूप में उनका कार्यकाल विशेष रूप से उल्लेखनीय रहा है, जहां उन्होंने द्विपक्षीय संबंधों को नई दिशा दी थी। पश्चिम एशिया और दक्षिण एशिया में उनकी विशेषज्ञता को भी भारत की विदेश नीति के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है। बांग्लादेश में वर्तमान भूमिका और अनुभववर्तमान में वे बांग्लादेश में भारत के उच्चायुक्त के रूप में कार्यरत हैं, जहां उन्होंने द्विपक्षीय संबंधों को स्थिर और मजबूत बनाने में भूमिका निभाई है। हाल के समय में दोनों देशों के बीच राजनीतिक और कूटनीतिक संवाद को आगे बढ़ाने में उनकी सक्रियता महत्वपूर्ण रही है। अब उनके यूरोप में स्थानांतरण के साथ भारत की कूटनीतिक प्राथमिकताओं में नया संतुलन देखने को मिलेगा। भारत-यूरोप संबंधों में नई दिशा की उम्मीदविशेषज्ञ मानते हैं कि इस नियुक्ति से भारत और यूरोपीय यूनियन के बीच राजनीतिक और आर्थिक सहयोग को नई ऊर्जा मिलेगी। व्यापार, तकनीक, निवेश और वैश्विक नीति मुद्दों पर सहयोग बढ़ाने में यह कदम अहम भूमिका निभा सकता है। आने वाले समय में यह नियुक्ति भारत की वैश्विक रणनीति को और अधिक मजबूत आधार देने वाली साबित हो सकती है।

GUNA FARMERS PROTEST : जयवर्धन सिंह का केंद्र सरकार पर तंज, बोले– क्षेत्रीय सांसद मंत्री बनकर भी किसान मुद्दों पर चुप

FARMERS PROTEST

HIGHLIGHTS: किसानों की समस्याओं को लेकर कांग्रेस का प्रदर्शन जयवर्धन सिंह ने सरकार पर लगाए आरोप क्षेत्रीय सांसद और केंद्र सरकार पर तंज गेहूं खरीदी और भुगतान को लेकर मांगें किसानों के हित में कलेक्ट्रेट में ज्ञापन सौंपा गया GUNA FARMERS PROTEST : गुना। प्रदेश कांग्रेस के आह्वान पर किसानों की समस्याओं को लेकर जिले में विरोध प्रदर्शन किया गया। राघौगढ़ विधायक एवं कांग्रेस जिलाध्यक्ष जयवर्धन सिंह के नेतृत्व में कार्यकर्ताओं ने हनुमान चौराहे पर आमसभा की और उसके बाद कलेक्ट्रेट पहुंचकर मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपा। चीन समेत कई अर्थव्यवस्थाओं को पीछे छोड़ सकता है भारत, एडीबी रिपोर्ट में दावा! सरकार पर गंभीर आरोप आमसभा को संबोधित करते हुए जयवर्धन सिंह ने आरोप लगाया कि प्रदेश में किसानों की स्थिति लगातार खराब हो रही है। उन्होंने कहा कि अभी तक समर्थन मूल्य पर खरीदी शुरू नहीं हुई है, जबकि पड़ोसी जिलों में प्रक्रिया प्रारंभ हो चुकी है। गुना में न तो स्लॉट बुकिंग शुरू हुई है और न ही खरीदी प्रक्रिया आगे बढ़ पाई है। आरबीआई की समयसीमा से पहले मजबूत हुआ रुपया, डॉलर के मुकाबले दिखाई मजबूती! सांसद और केंद्र सरकार पर तंज जयवर्धन सिंह ने क्षेत्रीय सांसद पर तंज कसते हुए कहा कि वे केंद्र में मंत्री हैं, लेकिन किसानों के मुद्दों पर कोई ध्यान नहीं देते। उन्होंने आरोप लगाया कि अन्य विषयों पर तो वीडियो जारी किए जाते हैं, लेकिन किसानों की समस्याओं पर अब तक कोई बयान नहीं दिया गया है।   मांगों को लेकर कलेक्टर को ज्ञापन प्रदर्शन के बाद कांग्रेस कार्यकर्ता रैली के रूप में कलेक्ट्रेट पहुंचे और कलेक्टर को ज्ञापन सौंपा। इसमें मांग की गई कि किसानों के ऋण भुगतान की तिथि उपज खरीदी और भुगतान पूरा होने तक बढ़ाई जाए, गेहूं खरीदी तुरंत शुरू हो और स्लॉट बुकिंग की प्रक्रिया तत्काल प्रारंभ की जाए। अमरनाथ यात्रा 2026 के लिए 15 अप्रैल से शुरू होगा पंजीकरण अभियान… किसानों के हित में कई मांगें ज्ञापन में ई-उपार्जन प्रक्रिया को सरल करने, ऑफलाइन विकल्प जोड़ने, सभी किसानों की खरीदी सुनिश्चित करने, सात दिन में भुगतान की गारंटी देने और देरी पर दंडात्मक कार्रवाई करने की मांग की गई। साथ ही मंडियों में मूलभूत सुविधाएं और ओलावृष्टि प्रभावित किसानों को मुआवजा देने की मांग भी शामिल रही।

फ्लाइट कैंसिल पड़ी भारी पूर्व कुलपति ने एयरलाइन पर ठोका 50 लाख का दावा

भोपाल । भोपाल में एयरलाइन सेवाओं को लेकर एक बड़ा मामला सामने आया है जहां फ्लाई ओला एयरलाइंस पर सेवा में कमी और यात्रियों को परेशान करने के आरोप में 50 लाख रुपये का दावा ठोका गया है। यह दावा कमलाकर सिंह द्वारा उपभोक्ता आयोग में दायर किया गया है जिससे एयरलाइन सेक्टर में हलचल मच गई है। पूर्व कुलपति कमलाकर सिंह ने एयरलाइन पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि उनकी यात्रा के दौरान न केवल लापरवाही बरती गई बल्कि उन्हें मानसिक रूप से भी काफी परेशान किया गया। इस मामले की सुनवाई अब 21 अप्रैल को उपभोक्ता आयोग में तय की गई है जहां दोनों पक्षों की दलीलें सुनी जाएंगी। शिकायत के अनुसार कमलाकर सिंह ने 22 मार्च को रीवा से भोपाल के लिए टिकट बुक कराया था और 26 मार्च की उड़ान के लिए उनका टिकट कन्फर्म था। तय समय पर वे रीवा एयरपोर्ट पहुंच गए लेकिन उन्हें लंबे समय तक इंतजार कराया गया। बाद में एयरलाइन की ओर से तकनीकी कारणों का हवाला देते हुए फ्लाइट रद्द कर दी गई। सबसे गंभीर बात यह रही कि एयरलाइन ने यात्रियों को समय रहते कोई आधिकारिक सूचना नहीं दी और न ही कोई वैकल्पिक व्यवस्था उपलब्ध कराई। इससे यात्रियों को भारी असुविधा का सामना करना पड़ा। कमलाकर सिंह को मजबूरी में निजी वाहन से करीब 10 से 12 घंटे का लंबा और थकाऊ सफर तय कर भोपाल पहुंचना पड़ा। इस दौरान उन्हें न केवल शारीरिक कष्ट झेलना पड़ा बल्कि आर्थिक नुकसान भी उठाना पड़ा। उन्होंने आरोप लगाया कि एयरलाइन ने नागरिक उड्डयन महानिदेशालय के दिशा निर्देशों का भी पालन नहीं किया जो यात्रियों के अधिकारों की सुरक्षा के लिए बनाए गए हैं। उपभोक्ता आयोग में दायर इस मामले में सेवा में कमी के साथ साथ मानसिक उत्पीड़न को भी आधार बनाया गया है। यदि आयोग इस मामले में शिकायतकर्ता के पक्ष में फैसला देता है तो यह एयरलाइंस कंपनियों के लिए एक बड़ा संदेश होगा कि यात्रियों की सुविधाओं और अधिकारों की अनदेखी करना महंगा पड़ सकता है। यह मामला एक बार फिर यह सवाल खड़ा करता है कि क्या एयरलाइंस कंपनियां यात्रियों के प्रति अपनी जिम्मेदारियों को गंभीरता से निभा रही हैं या नहीं। अब सभी की नजर 21 अप्रैल को होने वाली सुनवाई पर टिकी हुई है जहां इस पूरे विवाद पर महत्वपूर्ण फैसला आ सकता है।

नीतीश कुमार ने राज्यसभा सदस्य के रूप में शपथ लेकर शुरू की नई राजनीतिक पारी..

नई दिल्ली:बिहार की राजनीति में एक बड़ा और ऐतिहासिक मोड़ सामने आया है, जहां लंबे समय तक मुख्यमंत्री पद पर रहे नीतीश कुमार ने राज्यसभा सदस्य के रूप में शपथ लेकर अपनी राजनीतिक यात्रा के एक नए अध्याय की शुरुआत कर दी है। संसद भवन में आयोजित एक औपचारिक कार्यक्रम में उन्होंने राज्यसभा सांसद के रूप में शपथ ग्रहण की, जिसके साथ ही उनके राजनीतिक सफर में केंद्र की भूमिका को लेकर नई चर्चाओं ने जोर पकड़ लिया है। शपथ ग्रहण के साथ राजनीतिक यात्रा का नया चरणनीतीश कुमार ने शुक्रवार दोपहर राज्यसभा सदस्य के रूप में हिंदी में शपथ ली। इस अवसर पर संसद परिसर में कई वरिष्ठ नेता उपस्थित रहे, जिससे यह कार्यक्रम राजनीतिक दृष्टि से और भी महत्वपूर्ण बन गया। लंबे समय तक बिहार की राजनीति के केंद्र में रहने के बाद उनका यह कदम राज्य की राजनीति और राष्ट्रीय राजनीति दोनों के लिए एक अहम संकेत माना जा रहा है।दो दशक की नेतृत्व यात्रा का नया मोड़नीतीश कुमार पिछले लगभग दो दशकों से बिहार के मुख्यमंत्री पद पर अपनी मजबूत उपस्थिति दर्ज कराते रहे हैं। इस दौरान उन्होंने कई बार सत्ता संभाली और राज्य की राजनीति में निर्णायक भूमिका निभाई। अब राज्यसभा में प्रवेश के साथ उनकी सक्रियता केंद्र की राजनीति की ओर बढ़ने की संभावना को और मजबूत कर रही है।विधान परिषद से इस्तीफा और नई राजनीतिक दिशाराज्यसभा के लिए निर्वाचित होने के बाद उन्होंने विधान परिषद की सदस्यता से इस्तीफा दे दिया था। यह कदम उनके राजनीतिक बदलाव का औपचारिक संकेत माना जा रहा है। माना जा रहा है कि यह बदलाव केवल एक पद परिवर्तन नहीं बल्कि राजनीतिक रणनीति का हिस्सा है, जिसके तहत वे अब राष्ट्रीय स्तर पर अधिक सक्रिय भूमिका निभा सकते हैं।बिहार की सत्ता समीकरणों पर असर की संभावनानीतीश कुमार के इस कदम के बाद बिहार की राजनीति में संभावित बदलाव को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं। राजनीतिक हलकों में यह भी अनुमान लगाया जा रहा है कि आने वाले समय में राज्य में नेतृत्व परिवर्तन देखने को मिल सकता है। हालांकि इस पर आधिकारिक स्थिति स्पष्ट नहीं है, लेकिन सियासी गतिविधियों ने संभावनाओं को और मजबूत कर दिया है।केंद्र की राजनीति में बढ़ती भूमिकाराज्यसभा सांसद बनने के बाद नीतीश कुमार की भूमिका अब केंद्र की राजनीति में अधिक प्रभावी हो सकती है। उनके अनुभव और लंबे प्रशासनिक कार्यकाल को देखते हुए यह माना जा रहा है कि वे राष्ट्रीय नीतिगत चर्चाओं में महत्वपूर्ण योगदान दे सकते हैं। संसदीय लोकतंत्र में व्यापक अनुभवनीतीश कुमार का राजनीतिक सफर अत्यंत व्यापक रहा है। वे लोकसभा और राज्यसभा दोनों के सदस्य रह चुके हैं, इसके अलावा उन्होंने विधानसभा और विधान परिषद दोनों में भी काम किया है। यह उन्हें देश के उन चुनिंदा नेताओं में शामिल करता है जिन्होंने संसदीय लोकतंत्र के सभी मंचों पर कार्य किया है। राजनीतिक भविष्य पर निगाहेंउनके इस नए कदम के बाद अब सभी की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि वे केंद्र में किस प्रकार की भूमिका निभाते हैं और बिहार की राजनीति में आगे क्या परिवर्तन देखने को मिलता है। उनके अनुभव और राजनीतिक समझ को देखते हुए यह बदलाव आने वाले समय में कई महत्वपूर्ण निर्णयों को प्रभावित कर सकता है।

LPG कालाबाजारी पर बड़ा प्रहार 2840 जगह छापे हजारों सिलेंडर जब्त

भोपाल । मध्य प्रदेश में एलपीजी गैस सिलेंडरों की कालाबाजारी पर रोक लगाने के लिए सरकार ने बड़ा और सख्त अभियान चलाया है। खाद्य नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण विभाग की अगुवाई में पूरे प्रदेश में व्यापक जांच अभियान चलाया गया जिसमें बड़े स्तर पर अनियमितताएं सामने आईं। अभियान के तहत प्रदेशभर में कुल 2840 स्थानों पर जांच की गई जहां से 3691 एलपीजी गैस सिलेंडर जब्त किए गए। यह कार्रवाई आवश्यक वस्तु अधिनियम के तहत की गई है जिसका उद्देश्य जरूरी वस्तुओं की जमाखोरी और कालाबाजारी को रोकना है। इस दौरान 11 मामलों में एफआईआर दर्ज की गई जबकि पेट्रोल पंपों पर भी सख्ती दिखाई गई और 734 रिटेल आउटलेट की जांच में एक मामला दर्ज किया गया। सरकार ने केवल कार्रवाई तक ही खुद को सीमित नहीं रखा बल्कि आगे की व्यवस्था को भी मजबूत करने के लिए महत्वपूर्ण निर्देश जारी किए हैं। जिन इलाकों में पाइप्ड नेचुरल गैस यानी PNG की पाइपलाइन पहुंच चुकी है वहां के घरेलू और व्यावसायिक उपभोक्ताओं को जल्द से जल्द पीएनजी कनेक्शन लेने के निर्देश दिए गए हैं। स्पष्ट चेतावनी दी गई है कि यदि उपभोक्ता आगामी तीन महीनों में पीएनजी कनेक्शन नहीं लेते हैं तो उन्हें एलपीजी गैस की सप्लाई बंद की जा सकती है। यह कदम गैस वितरण प्रणाली को अधिक पारदर्शी और सुरक्षित बनाने की दिशा में उठाया गया है ताकि कालाबाजारी पर पूरी तरह लगाम लगाई जा सके। सरकार ने सीजीडी संस्थाओं को भी निर्देशित किया है कि वे पीएनजी कनेक्शन के लिए आवेदन मिलने के 24 घंटे के भीतर पाइपलाइन बिछाने की स्वीकृति जारी करें। इसके साथ ही पुलिस, रक्षा प्रतिष्ठान, सरकारी कॉलोनियों और सुधार गृहों जैसे संवेदनशील क्षेत्रों में प्राथमिकता के आधार पर पीएनजी कनेक्शन देने को कहा गया है। औद्योगिक क्षेत्रों को भी इस बदलाव में शामिल किया जा रहा है। जहां जहां पाइपलाइन उपलब्ध है वहां की औद्योगिक इकाइयों को चिन्हित कर उन्हें पीएनजी पर शिफ्ट करने के निर्देश दिए गए हैं जिससे गैस आपूर्ति प्रणाली अधिक नियंत्रित और प्रभावी बन सके। इस अभियान के तहत विभिन्न गैस कंपनियों जैसे GAIL Gas Limited Indian Oil Corporation Bharat Petroleum और Gujarat Gas को कंट्रोल रूम नंबर जारी कर उपभोक्ताओं को पीएनजी कनेक्शन के लिए आवेदन करने की सुविधा दी गई है। सरकार का यह कदम साफ संकेत देता है कि अब गैस वितरण में पारदर्शिता और सख्ती दोनों साथ साथ लागू की जाएंगी। एलपीजी की कालाबाजारी पर लगाम कसने के साथ साथ पीएनजी को बढ़ावा देकर एक स्थायी और सुरक्षित विकल्प की ओर बढ़ने की रणनीति पर काम किया जा रहा है।

सेंसेक्स-निफ्टी ने दिखाई मजबूती, कमजोर संकेतों के बावजूद शानदार शुरुआत!

नई दिल्ली। पश्चिम एशिया में जारी तनाव और कमजोर वैश्विक संकेतों के बावजूद शुक्रवार को भारतीय शेयर बाजार मजबूती के साथ खुला। शुरुआती कारोबार में BSE Sensex करीब 500 अंकों की बढ़त के साथ 77,121 के स्तर पर खुला, जबकि Nifty 50 भी 23,880 के पार पहुंच गया। खबर लिखे जाने तक सेंसेक्स 497 अंकों से ज्यादा की तेजी के साथ 77,129 के आसपास ट्रेड कर रहा था, वहीं निफ्टी 159 अंकों की बढ़त के साथ 23,934 के स्तर पर बना हुआ था। मिडकैप और स्मॉलकैप में ज्यादा तेजीमुख्य सूचकांकों के मुकाबले व्यापक बाजारों में ज्यादा मजबूती देखने को मिली। निफ्टी मिडकैप 100 और निफ्टी स्मॉलकैप 100 इंडेक्स में 1% से ज्यादा की तेजी दर्ज की गई, जो बाजार में सकारात्मक सेंटीमेंट को दर्शाता है। किन सेक्टर्स में रही बढ़त?सेक्टोरल इंडेक्स की बात करें तो निफ्टी मेटल, ऑटो, प्राइवेट बैंक, मीडिया, पीएसयू बैंक, रियल्टी और ऑयल एंड गैस सेक्टर्स में 1% से ज्यादा की तेजी देखने को मिली। वहीं आईटी सेक्टर दबाव में रहा, जहां निफ्टी आईटी इंडेक्स में 1% से अधिक की गिरावट दर्ज की गई। फार्मा सेक्टर में हल्की बढ़त देखने को मिली। इन शेयरों में सबसे ज्यादा हलचलनिफ्टी 50 में श्रीराम फाइनेंस, एशियन पेंट्स, एक्सिस बैंक, आयशर मोटर्स, आईसीआईसीआई बैंक, महिंद्रा एंड महिंद्रा, बजाज ऑटो, बजाज फिनसर्व और एसबीआई के शेयर तेजी के साथ कारोबार करते दिखे। दूसरी ओर, Infosys, TCS, सन फार्मा, एचसीएल टेक और टेक महिंद्रा जैसे आईटी और फार्मा शेयरों में गिरावट देखी गई। बाजार एक्सपर्ट की रायविशेषज्ञों का मानना है कि हालिया गिरावट के बावजूद बाजार में मजबूती बनी हुई है। ऊर्जा कीमतों में संभावित गिरावट और आने वाला मजबूत अर्निंग सीजन बाजार के लिए सकारात्मक संकेत दे रहा है। हालांकि, उन्होंने यह भी कहा कि महंगाई में हल्की बढ़ोतरी और ग्रोथ पर थोड़ा दबाव आ सकता है, लेकिन कुल मिलाकर इक्विटी बाजार का रुख सकारात्मक बना रह सकता है। निफ्टी के लिए अहम स्तरतकनीकी विश्लेषण के अनुसार, Nifty 50 के लिए 23,660 का स्तर मजबूत सपोर्ट बना हुआ है। जब तक इंडेक्स इसके ऊपर बना रहता है, तब तक तेजी जारी रह सकती है और 24,250 तक का स्तर देखने को मिल सकता है।वहीं, अगर यह स्तर टूटता है, तो गिरावट बढ़कर 23,200 तक जा सकती है। वैश्विक अनिश्चितताओं के बावजूद भारतीय बाजार की मजबूती यह दिखाती है कि घरेलू फैक्टर्स और निवेशकों का भरोसा अभी भी मजबूत बना हुआ है।

चीन समेत कई अर्थव्यवस्थाओं को पीछे छोड़ सकता है भारत, एडीबी रिपोर्ट में दावा!

नई दिल्ली। भू-राजनीतिक चुनौतियों और वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच Asian Development Bank (ADB) की ताजा रिपोर्ट में भारत की अर्थव्यवस्था को लेकर सकारात्मक तस्वीर सामने आई है। रिपोर्ट के मुताबिक, एशिया-प्रशांत क्षेत्र में ग्रोथ की रफ्तार भले ही धीमी पड़ रही हो, लेकिन भारत इस क्षेत्र में सबसे तेज़ी से बढ़ने वाली प्रमुख अर्थव्यवस्था बना रहेगा। एशिया-प्रशांत में सुस्ती के संकेतADB के अनुसार, विकासशील एशिया और प्रशांत क्षेत्र की आर्थिक वृद्धि दर 2025 के 5.4% से घटकर 2026 और 2027 में 5.1% रहने का अनुमान है। इसके पीछे भू-राजनीतिक तनाव, वैश्विक व्यापार में अनिश्चितता और सप्लाई चेन से जुड़े जोखिम प्रमुख कारण बताए गए हैं। हालांकि, रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि मजबूत घरेलू मांग, स्थिर श्रम बाजार और इंफ्रास्ट्रक्चर पर बढ़ता खर्च इस क्षेत्र को कुछ हद तक सहारा देता रहेगा। भारत की मजबूत ग्रोथ बनी रहेगीADB के मुताबिक, India की अर्थव्यवस्था 2026 में 6.9% की दर से बढ़ सकती है, जो 2027 में बढ़कर 7.3% तक पहुंचने का अनुमान है। यह तेजी मुख्य रूप से मजबूत घरेलू खपत, सरकारी निवेश और इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट के चलते बनी रहेगी। रिपोर्ट में कहा गया है कि क्षेत्र की अन्य अर्थव्यवस्थाओं की तुलना में भारत की स्थिति अधिक स्थिर और मजबूत नजर आ रही है। China की ग्रोथ में गिरावटADB ने China (पीपुल्स रिपब्लिक ऑफ चाइना) की आर्थिक वृद्धि को लेकर सतर्क अनुमान जताया है। रिपोर्ट के अनुसार, चीन की ग्रोथ 2026 में घटकर 4.6% और 2027 में 4.5% रहने की संभावना है, जो पिछले साल 5% थी। इस गिरावट के पीछे प्रॉपर्टी सेक्टर की कमजोरी और निर्यात में सुस्ती को मुख्य कारण माना गया है। जोखिम अभी भी बरकरारADB के चीफ इकोनॉमिस्ट Albert Park ने चेतावनी दी है कि मिडिल ईस्ट में लंबे समय तक चलने वाला संघर्ष ऊर्जा और खाद्य कीमतों को बढ़ा सकता है। इससे वित्तीय स्थितियां और कमजोर हो सकती हैं, जो पूरे क्षेत्र के लिए बड़ा जोखिम है। इसके अलावा, वैश्विक व्यापार नीतियों में उतार-चढ़ाव भी ग्रोथ पर नकारात्मक असर डाल सकता है। AI और घरेलू मांग से मिलेगा सहारारिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) से जुड़े उत्पादों की बढ़ती मांग और मजबूत निजी खपत क्षेत्र की अर्थव्यवस्थाओं को कुछ हद तक सपोर्ट दे सकती है। वहीं, कच्चे तेल की कीमतें फिलहाल ऊंची बनी रह सकती हैं, लेकिन अगर भू-राजनीतिक तनाव कम होता है, तो आने वाले समय में स्थिरता देखने को मिल सकती है। कुल मिलाकर, वैश्विक चुनौतियों के बावजूद भारत की अर्थव्यवस्था मजबूत स्थिति में है और आने वाले वर्षों में यह एशिया-प्रशांत क्षेत्र की सबसे तेज़ी से बढ़ने वाली प्रमुख अर्थव्यवस्था बनी रह सकती है।