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थाने में जहर से मौत पर बवाल पीड़ित परिवार से मिले पटवारी निष्पक्ष जांच की मांग तेज

छतरपुर । मध्य प्रदेश के छतरपुर जिले में थाने के अंदर जहर खाकर हुई सुरेंद्र सिंह की मौत का मामला अब राजनीतिक और कानूनी दोनों स्तर पर तूल पकड़ता जा रहा है। इस संवेदनशील मामले में अब जीतू पटवारी ने हस्तक्षेप करते हुए इसकी जांच CBI से कराने की मांग उठाई है जिससे पूरे घटनाक्रम ने नया मोड़ ले लिया है। पटवारी आज छतरपुर जिले के सरानी गांव पहुंचे जहां उन्होंने मृतक सुरेंद्र सिंह के परिजनों से मुलाकात की और उन्हें न्याय दिलाने का भरोसा दिया। परिवार से बातचीत के बाद उन्होंने साफ कहा कि इस मामले की निष्पक्ष और गहन जांच जरूरी है क्योंकि इसमें गंभीर आरोप सामने आए हैं और स्थानीय स्तर पर जांच को लेकर सवाल खड़े हो रहे हैं। इस मामले में सबसे बड़ा आरोप छतरपुर की भाजपा विधायक ललिता यादव के पुत्र मोनू यादव पर लगा है। आरोप है कि मोनू यादव ने सुरेंद्र सिंह के साथ मारपीट की थी जिसके बाद यह पूरा घटनाक्रम सामने आया। इस आरोप ने मामले को और अधिक संवेदनशील बना दिया है क्योंकि इसमें राजनीतिक प्रभाव की आशंका भी जताई जा रही है। मृतक की पत्नी ने भी इस मामले में गंभीर खुलासा करते हुए बताया कि अस्पताल में भर्ती होने के दौरान सुरेंद्र सिंह ने खुद उसे बताया था कि मोनू यादव ने उसके साथ बुरी तरह मारपीट की थी। इस बयान के बाद परिजनों का आक्रोश और बढ़ गया है और वे लगातार निष्पक्ष जांच की मांग कर रहे हैं। जीतू पटवारी ने पुलिस प्रशासन को चेतावनी देते हुए कहा कि यदि इस मामले में सही तरीके से कार्रवाई नहीं की गई तो वे न्यायालय में पीड़ित परिवार के साथ मजबूती से खड़े होंगे। उन्होंने यह भी कहा कि इस मुद्दे को विधानसभा में उठाया जाएगा ताकि सच्चाई सामने आ सके और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई हो। यह मामला अब केवल एक व्यक्ति की मौत तक सीमित नहीं रहा बल्कि यह कानून व्यवस्था और प्रशासनिक पारदर्शिता पर भी सवाल खड़े कर रहा है। थाने के भीतर हुई इस घटना ने पुलिस कार्यप्रणाली पर भी गंभीर सवाल उठाए हैं और पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की मांग लगातार तेज हो रही है। फिलहाल पुलिस इस मामले की जांच में जुटी हुई है लेकिन बढ़ते राजनीतिक दबाव और परिजनों के आरोपों के बीच अब यह देखना अहम होगा कि क्या इस केस की जांच सीबीआई को सौंपी जाती है या फिर स्थानीय स्तर पर ही इसका निपटारा किया जाता है।

CAG ऑडिट रिपोर्ट के आधार पर विभागों को तय समय में कार्रवाई रिपोर्ट जमा करने का आदेश

नई दिल्ली :दिल्ली की सरकारी स्वास्थ्य सेवाओं को लेकर लंबे समय से उठ रहे सवालों के बीच अब सुधार की दिशा में बड़ा कदम उठाया गया है। सार्वजनिक अस्पतालों की स्थिति, बुनियादी ढांचे और स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता को बेहतर बनाने के उद्देश्य से विधानसभा ने सख्त रुख अपनाते हुए सभी संबंधित विभागों को स्पष्ट निर्देश जारी किए हैं। यह कार्रवाई हाल ही में सामने आई ऑडिट रिपोर्ट और उसके आधार पर बनी सिफारिशों के बाद की गई है, जिसमें स्वास्थ्य व्यवस्था की कई कमियों को उजागर किया गया था। स्वास्थ्य व्यवस्था में सुधार के लिए कड़ा प्रशासनिक कदमविधानसभा ने स्वास्थ्य विभाग और संबंधित एजेंसियों को निर्देश दिया है कि वे ऑडिट रिपोर्ट में दर्ज सभी बिंदुओं पर तुरंत कार्रवाई शुरू करें। इसके साथ ही यह भी स्पष्ट किया गया है कि केवल कागजी रिपोर्ट से काम नहीं चलेगा, बल्कि वास्तविक सुधार जमीन पर दिखाई देना चाहिए। विभागों को तय समय सीमा के भीतर अपनी प्रगति रिपोर्ट प्रस्तुत करने के आदेश दिए गए हैं, जिसमें यह बताना होगा कि किस सिफारिश पर कितना काम हुआ है और आगे की योजना क्या है। निर्धारित समय सीमा में रिपोर्ट अनिवार्यस्वास्थ्य व्यवस्था में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए सभी विभागों को निर्धारित समय सीमा के भीतर विस्तृत रिपोर्ट जमा करने का निर्देश दिया गया है। इस रिपोर्ट में हर सुझाव पर हुई प्रगति और उसे लागू करने की समय योजना का स्पष्ट विवरण देना आवश्यक होगा। विधानसभा ने यह भी संकेत दिया है कि समय पर अनुपालन न करने पर संबंधित विभागों से जवाब तलब किया जाएगा। ऑडिट रिपोर्ट में सामने आई कमियों पर फोकसयह पूरा मामला सार्वजनिक स्वास्थ्य व्यवस्था की समीक्षा पर आधारित है, जिसमें अस्पतालों की स्थिति, संसाधनों की उपलब्धता और प्रबंधन प्रणाली से जुड़ी कई खामियां सामने आई थीं। रिपोर्ट में यह संकेत दिया गया था कि कई अस्पतालों में बुनियादी सुविधाओं की कमी है और मरीजों को पर्याप्त सेवाएं नहीं मिल पा रही हैं। इन निष्कर्षों के बाद अब सरकार ने सुधार प्रक्रिया को तेज करने का निर्णय लिया है। जवाबदेही तय करने की नई व्यवस्थाविधानसभा का यह कदम केवल सुधार तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका उद्देश्य प्रशासनिक जवाबदेही को मजबूत करना भी है। अधिकारियों को यह सुनिश्चित करना होगा कि ऑडिट की सिफारिशें केवल दस्तावेजों में न रह जाएं, बल्कि उन पर ठोस कार्रवाई भी हो। इस नई व्यवस्था के तहत हर स्तर पर निगरानी बढ़ाई जाएगी ताकि सुधार कार्य समय पर पूरे हो सकें। दिल्ली की स्वास्थ्य नीति में व्यापक बदलाव की दिशास्वास्थ्य व्यवस्था को मजबूत करने के लिए सरकार की प्राथमिकताओं में सरकारी अस्पतालों का आधुनिकीकरण, स्वास्थ्य बीमा का विस्तार और निवारक स्वास्थ्य सेवाओं को बढ़ावा देना शामिल है। इसके साथ ही यह भी प्रयास किया जा रहा है कि दिल्ली में आने वाले सभी नागरिकों को समान और गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएं मिल सकें। फोकस बेहतर सेवा और पारदर्शिता परइस पहल के तहत स्वास्थ्य सेवाओं को अधिक पारदर्शी, प्रभावी और जवाबदेह बनाने की दिशा में कदम बढ़ाया गया है। प्रशासन का मानना है कि समयबद्ध कार्रवाई और नियमित समीक्षा से ही स्वास्थ्य व्यवस्था में वास्तविक सुधार संभव है। आने वाले समय में इन सुधारों के परिणाम दिल्ली की सार्वजनिक स्वास्थ्य प्रणाली में बड़े बदलाव के रूप में देखने को मिल सकते हैं।

मिडिल ईस्ट तनाव से कच्चे तेल में उछाल, होर्मुज स्ट्रेट संकट का बड़ा असर!

नई दिल्ली। वैश्विक कच्चे तेल की कीमतों में शुक्रवार को 1% से ज्यादा की तेजी देखने को मिली। मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव और Strait of Hormuz में सप्लाई बाधित होने की आशंका ने निवेशकों की चिंता बढ़ा दी है। यह जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे अहम तेल सप्लाई रूट्स में से एक है, जहां किसी भी तरह की रुकावट का सीधा असर वैश्विक बाजार पर पड़ता है। ब्रेंट और WTI में तेजीअंतरराष्ट्रीय बाजार में ब्रेंट क्रूड करीब 1.13% बढ़कर 97.01 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गया। वहीं WTI क्रूड 1.39% की बढ़त के साथ 99.24 डॉलर प्रति बैरल पर ट्रेड करता नजर आया। गौरतलब है कि इससे पहले बुधवार को तेल की कीमतों में करीब 20% की गिरावट आई थी और यह 100 डॉलर के नीचे आ गया था। अब दोबारा तेजी ने बाजार में अनिश्चितता को और बढ़ा दिया है। Multi Commodity Exchange पर भी दिखा असरभारतीय बाजार में Multi Commodity Exchange (MCX) पर क्रूड ऑयल फ्यूचर्स (20 अप्रैल डिलीवरी) करीब 2.43% बढ़कर 9,150 रुपये प्रति बैरल तक पहुंच गया। यह तेजी घरेलू बाजार में भी वैश्विक संकेतों का असर दर्शाती है। सीजफायर के बावजूद तनाव बरकरारहालांकि अमेरिका और ईरान के बीच दो हफ्ते के सीजफायर की घोषणा हुई है, लेकिन जमीन पर हालात अभी भी पूरी तरह शांत नहीं हैं। Israel द्वारा Lebanon में जारी हमले और Iran की गतिविधियों ने स्थिति को जटिल बना रखा है। बताया जा रहा है कि Iran ने Strait of Hormuz को बंद कर दिया है, जिससे शिपिंग गतिविधियां सामान्य स्तर के 10% से भी कम रह गई हैं। शिपिंग कंपनियां भी स्थिति स्पष्ट होने तक इस मार्ग से जहाज भेजने में सतर्कता बरत रही हैं। Donald Trump की चेतावनीइस बीच, अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति Donald Trump ने चेतावनी दी है कि अगर सीजफायर का पालन नहीं हुआ तो बड़े स्तर पर सैन्य कार्रवाई की जा सकती है। हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि इसकी संभावना फिलहाल कम है। उन्होंने दोहराया कि Iran को परमाणु हथियार रखने की अनुमति नहीं दी जाएगी और Strait of Hormuz को खुला और सुरक्षित रखने के लिए अमेरिका तैयार है। आगे क्या संकेत?Asian Development Bank (ADB) के अनुसार, मौजूदा हालात को देखते हुए निकट भविष्य में तेल की कीमतें ऊंची बनी रह सकती हैं। हालांकि, यदि भू-राजनीतिक तनाव कम होता है, तो बाजार में धीरे-धीरे स्थिरता लौट सकती है।

आरबीआई की समयसीमा से पहले मजबूत हुआ रुपया, डॉलर के मुकाबले दिखाई मजबूती!

नई दिल्ली। शुक्रवार को भारतीय रुपया अमेरिकी डॉलर के मुकाबले मजबूती के साथ खुला। शुरुआती कारोबार में रुपया करीब 10 पैसे चढ़कर 92.57 प्रति डॉलर पर पहुंच गया, जबकि पिछले सत्र में यह 92.66 पर बंद हुआ था। बाजार में यह मजबूती मुख्य रूप से Reserve Bank of India (RBI) की ओर से तय की गई समयसीमा के चलते देखने को मिली। बैंकों की पोजीशन अनवाइंडिंग से मिला सपोर्ट10 अप्रैल बैंकों के लिए ऑफशोर नॉन-डिलिवरेबल फॉरवर्ड (NDF) मार्केट में अपनी अतिरिक्त पोजीशन खत्म करने की आखिरी तारीख है। इसी कारण बैंकों ने अपनी आर्बिट्रेज पोजीशन कम करनी शुरू कर दी, जिससे रुपए को सपोर्ट मिला। मार्च में RBI ने निर्देश दिया था कि बैंकों की रुपए में नेट ओपन पोजीशन हर दिन के अंत में 100 मिलियन डॉलर से अधिक नहीं होनी चाहिए। हालांकि बैंकों ने इस सीमा में ढील की मांग की थी, लेकिन केंद्रीय बैंक ने इसे सख्ती से लागू रखा। बाजार में ‘वेट एंड वॉच’ का माहौलविश्लेषकों का मानना है कि जब तक RBI की ओवरनाइट पोजीशन लिमिट को लेकर और स्पष्टता नहीं मिलती, तब तक बाजार सतर्क बना रहेगा। कुछ विशेषज्ञों का यह भी कहना है कि डेडलाइन के बाद रुपए में बड़ी गिरावट की आशंका फिलहाल उतनी मजबूत नहीं है, जितनी बताई जा रही है। कच्चे तेल की कीमतों पर भी नजरइस बीच, वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल की कीमतों में तेजी भी निवेशकों के रडार पर है। ब्रेंट क्रूड करीब 97 डॉलर प्रति बैरल और WTI क्रूड 99 डॉलर प्रति बैरल के आसपास ट्रेड कर रहा है। घरेलू बाजार में Multi Commodity Exchange (MCX) पर कच्चे तेल के वायदा भाव ने इंट्रा-डे में 9,222 रुपये का स्तर छुआ, जो 3% से ज्यादा की बढ़त दर्शाता है। तेल की कीमतों में तेजी आमतौर पर रुपए पर दबाव डालती है, क्योंकि भारत अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा आयात करता है। RBI गवर्नर का बयानइस हफ्ते की शुरुआत में RBI गवर्नर Sanjay Malhotra ने कहा था कि विदेशी मुद्रा बाजार में लगाए गए कुछ प्रतिबंध अस्थायी हैं। इनका उद्देश्य बाजार में बढ़ती अस्थिरता को नियंत्रित करना है। उन्होंने यह भी बताया कि हाल के समय में विदेशी मुद्रा बाजार में उतार-चढ़ाव बढ़ा है, जिसका एक कारण बैंकों द्वारा किए गए आर्बिट्रेज ट्रेड्स भी रहे हैं। आगे क्या संकेत?रुपए की चाल आगे RBI की नीतियों, वैश्विक कच्चे तेल की कीमतों और भू-राजनीतिक हालात पर निर्भर करेगी। फिलहाल डेडलाइन से पहले रुपया मजबूत जरूर हुआ है, लेकिन आगे की दिशा को लेकर बाजार सतर्क बना हुआ है। RBI की डेडलाइन से पहले बैंकों की पोजीशन अनवाइंडिंग के चलते रुपया डॉलर के मुकाबले मजबूत हुआ, हालांकि आगे बाजार की दिशा अभी भी अनिश्चित बनी हुई है।

मुरैना हत्याकांड पर सुप्रीम कोर्ट सख्त 13 अप्रैल से होगी अहम सुनवाई

मुरैना । मध्य प्रदेश के मुरैना जिले में वन आरक्षक की निर्मम हत्या का मामला अब देश की सर्वोच्च अदालत तक पहुंच गया है। सुप्रीम कोर्ट ने इस गंभीर घटना पर स्वत: संज्ञान लेते हुए सुनवाई का फैसला किया है जिससे अवैध खनन के खिलाफ सख्त कार्रवाई की उम्मीदें बढ़ गई हैं। जानकारी के अनुसार 13 अप्रैल से इस मामले की सुनवाई शुरू होगी और यह सुनवाई जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की बेंच द्वारा की जाएगी। इस दौरान अदालत अवैध रेत खनन और उससे जुड़े अपराधों पर व्यापक और कड़े दिशा निर्देश जारी कर सकती है जो भविष्य में ऐसे मामलों को रोकने में अहम भूमिका निभा सकते हैं। यह मामला चंबल क्षेत्र में चल रहे अवैध खनन से जुड़ा है जहां लंबे समय से रेत माफिया सक्रिय हैं। इस पूरे मुद्दे को कोर्ट के सामने न्याय मित्र रूपाली सैमुअल ने उठाया और वन आरक्षक की हत्या का जिक्र करते हुए अदालत का ध्यान आकर्षित किया। इसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने मामले को गंभीरता से लेते हुए सुनवाई का निर्णय लिया। घटना के अनुसार मुरैना जिले में चंबल नदी के ऐसाह घाट पर अवैध रेत खनन और परिवहन की सूचना मिलने पर वन विभाग की टीम कार्रवाई के लिए निकली थी। अंबाह रेंज के गश्ती दल ने रथोल का पुरा और रानपुर के बीच रेत से भरे एक ट्रैक्टर ट्रॉली को रोकने की कोशिश की। इसी दौरान चालक ने वन आरक्षक हरिकेश गुर्जर को बेरहमी से ट्रैक्टर से कुचल दिया जिससे उनकी मौके पर ही मौत हो गई। मृतक हरिकेश गुर्जर मुरैना जिले के जनकपुर गांव के निवासी थे और हाल ही में उनका स्थानांतरण अंबाह रेंज में हुआ था। इस दुखद घटना के बाद वन विभाग की टीम ने शव को जिला अस्पताल पहुंचाया जबकि सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और पूरे मामले की जांच शुरू कर दी गई। यह घटना केवल एक हत्या नहीं बल्कि अवैध खनन माफिया के बढ़ते हौसलों का संकेत भी मानी जा रही है। चंबल क्षेत्र में लंबे समय से अवैध रेत खनन एक गंभीर समस्या बना हुआ है और कई बार प्रशासनिक कार्रवाई के बावजूद इस पर पूरी तरह रोक नहीं लग पाई है। अब सुप्रीम कोर्ट के हस्तक्षेप से इस मुद्दे पर बड़ा फैसला आने की उम्मीद है। यदि अदालत सख्त दिशा निर्देश जारी करती है तो इससे न केवल मुरैना बल्कि पूरे देश में अवैध खनन के खिलाफ कड़ी कार्रवाई का रास्ता साफ हो सकता है। फिलहाल पूरे मामले पर देशभर की नजरें टिकी हुई हैं और 13 अप्रैल से शुरू होने वाली सुनवाई को बेहद अहम माना जा रहा है।

यूपी में 12 आईपीएस और 35 पीपीएस अधिकारियों के तबादले से प्रशासनिक ढांचे में बड़ा बदलाव

नई दिल्ली।उत्तर प्रदेश में प्रशासनिक स्तर पर बड़ा फेरबदल करते हुए पुलिस विभाग में व्यापक तबादले किए गए हैं। शासन ने एक साथ 12 आईपीएस और 35 पीपीएस अधिकारियों की नई तैनाती के आदेश जारी किए हैं। इस कदम को पुलिस व्यवस्था को अधिक प्रभावी बनाने, फील्ड में कार्यक्षमता बढ़ाने और कानून व्यवस्था को और मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है। खास बात यह है कि इस सूची में युवा अधिकारियों को प्रमुख जिम्मेदारियां दी गई हैं, जिससे सिस्टम में नई ऊर्जा लाने का प्रयास दिखाई देता है। आईपीएस अधिकारियों की नई तैनाती में बड़ा बदलावतबादला सूची में कई 2022 बैच के युवा आईपीएस अधिकारियों को महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां सौंपी गई हैं। उन्हें कमिश्नरेट व्यवस्था वाले बड़े शहरों और संवेदनशील क्षेत्रों में तैनात किया गया है। इनमें कुछ अधिकारियों को नक्सल प्रभावित जिलों में भेजा गया है, जहां कानून व्यवस्था बनाए रखना एक बड़ी चुनौती मानी जाती है।लखनऊ, वाराणसी और प्रयागराज जैसे प्रमुख कमिश्नरेट क्षेत्रों में भी नए अधिकारियों की तैनाती की गई है, जिससे शहरी पुलिसिंग को और मजबूत करने की कोशिश की गई है। कई महिला अधिकारियों को भी अहम पदों पर जिम्मेदारी दी गई है, जो प्रशासन में बढ़ते संतुलन और भागीदारी को दर्शाता है। प्रमुख आईपीएस तबादलों में नई जिम्मेदारियांसूची के अनुसार कई अधिकारियों को उनके पूर्व पदों से हटाकर नई जगहों पर तैनात किया गया है। कुछ को नगर इकाइयों में भेजा गया है, जबकि कुछ को ग्रामीण और नक्सल क्षेत्रों में जिम्मेदारी दी गई है। इस बदलाव में पुलिस उपायुक्त, अपर पुलिस अधीक्षक और सहायक पुलिस आयुक्त जैसे पदों पर बड़े स्तर पर अदला बदली की गई है।लखनऊ, मेरठ, गाजियाबाद, बहराइच, बुलंदशहर, सोनभद्र और मिर्जापुर जैसे जिलों में नई तैनातियां की गई हैं। इससे स्पष्ट है कि सरकार का ध्यान संवेदनशील और रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण क्षेत्रों पर विशेष रूप से केंद्रित है। पीपीएस अधिकारियों के स्तर पर भी व्यापक फेरबदलआईपीएस के साथ साथ पीपीएस अधिकारियों के स्तर पर भी बड़े पैमाने पर बदलाव किए गए हैं। कुल 35 अधिकारियों को नई जिम्मेदारियां दी गई हैं। इनमें कई अधिकारियों को पीएसी, एसडीआरएफ, पुलिस मुख्यालय और विशेष जांच इकाइयों में भेजा गया है। लखनऊ, मेरठ, प्रयागराज और गाजियाबाद जैसे बड़े कमिश्नरेट क्षेत्रों में भी नई तैनातियां की गई हैं। कुछ अधिकारियों को फील्ड पोस्टिंग से हटाकर प्रशिक्षण संस्थानों और तकनीकी शाखाओं में जिम्मेदारी दी गई है, जिससे प्रशासनिक संतुलन बनाए रखने का प्रयास किया गया है। युवा अधिकारियों को फील्ड में उतारने पर जोरइस तबादला सूची की एक महत्वपूर्ण विशेषता यह है कि युवा आईपीएस और पीपीएस अधिकारियों को सीधे फील्ड पोस्टिंग में भेजा गया है। नक्सल प्रभावित क्षेत्रों और कानून व्यवस्था की दृष्टि से चुनौतीपूर्ण जिलों में इन अधिकारियों की तैनाती को भविष्य की रणनीति के रूप में देखा जा रहा है।इसके साथ ही कमिश्नरेट सिस्टम वाले शहरों में भी नई टीम तैयार की गई है ताकि आधुनिक पुलिसिंग मॉडल को और प्रभावी बनाया जा सके।प्रशासनिक सुधार और कानून व्यवस्था पर फोकसइन तबादलों को नियमित प्रशासनिक प्रक्रिया का हिस्सा माना जा रहा है, लेकिन इसका उद्देश्य केवल स्थानांतरण नहीं बल्कि पुलिस व्यवस्था को अधिक सक्रिय और जवाबदेह बनाना भी है। सरकार का फोकस कानून व्यवस्था को मजबूत करने, अपराध नियंत्रण को बेहतर बनाने और फील्ड में त्वरित निर्णय क्षमता बढ़ाने पर है। अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि वे अपनी नई तैनाती पर जल्द से जल्द कार्यभार संभालें और विभागीय कार्यों को प्राथमिकता दें। आने वाले समय में और भी प्रशासनिक बदलाव की संभावना जताई जा रही है।

मुनाफावसूली के चलते सोना-चांदी में बड़ी गिरावट, कीमतें करीब 1% तक लुढ़कीं!

नई दिल्ली।सप्ताह के आखिरी कारोबारी दिन शुक्रवार को Multi Commodity Exchange (MCX) पर सोने और चांदी की कीमतों में करीब 1% तक की गिरावट दर्ज की गई। बाजार में निवेशकों द्वारा मुनाफावसूली (प्रॉफिट बुकिंग) और सुरक्षित निवेश (सेफ-हेवन) की मांग में कमी आने से कीमती धातुओं पर दबाव बना हुआ है। सोने में हल्की कमजोरी, लेकिन सपोर्ट कायमएमसीएक्स पर सोने का जून वायदा करीब 0.55% गिरकर 1,52,585 रुपये प्रति 10 ग्राम पर ट्रेड करता दिखा। कारोबार के दौरान यह 1,52,419 रुपये के निचले स्तर तक गया, जबकि ऊपरी स्तर 1,52,990 रुपये रहा। विश्लेषकों का मानना है कि सोना फिलहाल 1,52,500 रुपये के आसपास सपोर्ट ले रहा है। निचले स्तरों पर खरीदारी जरूर देखने को मिल रही है, लेकिन मजबूत तेजी के संकेत अभी नहीं हैं। अगर कीमत 1,53,000 रुपये के ऊपर टिकती है, तो यह 1,55,000 रुपये तक जा सकती है। वहीं, अगर सोना 1,52,000 रुपये के नीचे फिसलता है, तो इसमें और गिरावट आकर यह 1,50,000 से 1,48,000 रुपये तक जा सकता है। चांदी भी दबाव में, लेकिन इंडस्ट्रियल डिमांड से सहाराचांदी का मई वायदा भी करीब 0.96% गिरकर 2,41,435 रुपये प्रति किलोग्राम पर कारोबार करता नजर आया। दिन के दौरान यह 2,41,510 रुपये के निचले स्तर तक पहुंचा, जबकि ऊपरी स्तर 2,43,704 रुपये रहा। विशेषज्ञों के अनुसार, चांदी को 2,42,000 रुपये के आसपास सपोर्ट मिल रहा है, जहां सेफ-हेवन और इंडस्ट्रियल डिमांड दोनों का सहारा बना हुआ है। हालांकि, इसकी चाल फिलहाल सतर्क बनी हुई है। आगे क्या रहेगा रुख?चांदी के लिए 2,45,000 से 2,47,000 रुपये के बीच मजबूत रेजिस्टेंस माना जा रहा है। अगर यह स्तर टूटता है, तो कीमत 2,50,000 से 2,52,000 रुपये तक जा सकती है। वहीं नीचे की ओर 2,40,000 रुपये का स्तर अहम है, जिसके टूटने पर यह 2,36,000 से 2,35,000 रुपये तक गिर सकती है। बाजार का मूड बदल रहा हैहाल के दिनों में निवेशक सोना-चांदी जैसे सुरक्षित विकल्पों से हटकर शेयर बाजार जैसे जोखिम वाले निवेश विकल्पों की ओर रुख कर रहे हैं। वैश्विक स्तर पर भू-राजनीतिक तनाव में कुछ नरमी के संकेत भी सेफ-हेवन डिमांड को कमजोर कर रहे हैं। हालांकि, अमेरिका-ईरान के बीच जारी अनिश्चितता के कारण सोना-चांदी में बड़ी गिरावट फिलहाल सीमित रह सकती है।

Ashoknagar Mandi Plot Scam : अशोकनगर मंडी में 18 करोड़ का भूखंड घोटाला, दो सचिव निलंबित

Ashoknagar Mandi Plot Scam

HIGHLIGHTS: अशोकनगर मंडी में 18 करोड़ का भूखंड घोटाला 176 भूखंडों का नियमों के खिलाफ आवंटन दो सचिव तत्काल प्रभाव से निलंबित 60 नए व्यापारियों को गलत तरीके से भूखंड 26 भूखंडों का फर्जी हस्तांतरण उजागर Ashoknagar Mandi Plot Scam : ग्वालियर। अशोकनगर की नवीन कृषि उपज मंडी में 18 करोड़ रुपये के भूखंड आवंटन घोटाले का बड़ा मामला सामने आया है। बता दें कि जांच में पाया गया है कि कुल 176 भूखंडों का नियमों के खिलाफ जाकर अनियमित आवंटन किया गया, जिससे शासन को भारी वित्तीय नुकसान हुआ है। Ashoknagar NH 346 Inspection : घटिया निर्माण से जर्जर हुआ 262 करोड़ का नेशनल हाईवे, कलेक्टर और विधायक ने किया निरीक्षण दो सचिव निलंबित, प्रशासन की बड़ी कार्रवाई मामले में तत्कालीन मंडी सचिव भागीरथ प्रसाद अहिरवार और पूर्व सचिव मनोज शर्मा को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है। बताया जा रहा है कि प्रशासन की इस कार्रवाई के बाद मंडी विभाग में हड़कंप मच गया है और आगे कार्रवाई के संकेत भी दिए गए हैं। मंदिर से बहिष्कार समाज को बांटेगा, हिंदू धर्म पर पड़ेगा असर: सुप्रीम कोर्ट की अहम टिप्पणी नियमों की अनदेखी कर हुआ आवंटन जांच में सामने आया कि वर्ष 2020 से 2025 के बीच अधिकारियों ने नियमों की अनदेखी कर भूखंड आवंटित किए। नियम के अनुसार व्यापारी का कम से कम पांच वर्ष का अनुभव जरूरी था, लेकिन 60 ऐसे नए व्यापारियों को भूखंड दे दिए गए जिनका अनुभव एक वर्ष से भी कम था। पहली बार भारत दौरे पर आएंगे ऑस्ट्रिया के चांसलर, पीएम मोदी से करेंगे मुलाकात फर्जी हस्तांतरण और मिलीभगत के आरोप रिपोर्ट में यह भी सामने आया कि इन 60 आवंटियों में से 26 लोगों ने भूखंडों को फर्जी तरीके से अन्य व्यक्तियों को हस्तांतरित कर दिया। इस पूरे मामले में अधिकारियों की मिलीभगत और लापरवाही के गंभीर आरोप लगे हैं, जिस पर आगे जांच जारी है।

अमरनाथ यात्रा 2026 के लिए 15 अप्रैल से शुरू होगा पंजीकरण अभियान…

नई दिल्ली। अमरनाथ यात्रा 2026 को लेकर श्रद्धालुओं में उत्साह लगातार बढ़ता जा रहा है। बाबा बर्फानी के पवित्र दर्शन के लिए हर वर्ष लाखों भक्त कठिन लेकिन आस्था से भरी इस यात्रा का हिस्सा बनते हैं। आगामी यात्रा के लिए प्रशासनिक तैयारियां तेज हो चुकी हैं और पंजीकरण प्रक्रिया से जुड़े महत्वपूर्ण दिशा निर्देश सामने आ गए हैं। इस बार भी यात्रा को अधिक सुरक्षित, व्यवस्थित और तकनीकी रूप से उन्नत बनाने पर विशेष जोर दिया गया है। पंजीकरण प्रक्रिया की शुरुआत और व्यवस्थाअमरनाथ यात्रा 2026 के लिए पंजीकरण 15 अप्रैल 2026 से शुरू होकर 20 मई 2026 तक चलेगा। देशभर में निर्धारित बैंक शाखाओं के माध्यम से श्रद्धालु अपना एडवांस रजिस्ट्रेशन करा सकेंगे। इसके लिए बड़ी संख्या में बैंक शाखाओं को अधिकृत किया गया है ताकि देश के अलग अलग हिस्सों से आने वाले श्रद्धालुओं को आसानी से सुविधा मिल सके। इसके साथ ही जम्मू कश्मीर के कई जिलों में भी पंजीकरण केंद्र स्थापित किए जाएंगे। इस बार पंजीकरण प्रक्रिया को आधार आधारित बायोमैट्रिक प्रणाली से जोड़ा गया है ताकि पहचान और सुरक्षा व्यवस्था को और मजबूत किया जा सके। व्यक्तिगत और समूह दोनों प्रकार के पंजीकरण की सुविधा उपलब्ध कराई गई है। समूह पंजीकरण में निर्धारित संख्या के अनुसार श्रद्धालु एक साथ आवेदन कर सकते हैं और इसके लिए एक जिम्मेदार समूह लीडर की नियुक्ति अनिवार्य होगी जो सभी औपचारिकताओं को पूरा करेगा। आयु सीमा और स्वास्थ्य संबंधी सख्त नियम यात्रा को सुरक्षित बनाने के लिए इस बार भी आयु सीमा से जुड़े नियम लागू किए गए हैं। 13 वर्ष से कम आयु के बच्चों को यात्रा की अनुमति नहीं दी जाएगी जबकि 70 वर्ष से अधिक आयु के श्रद्धालु भी इस यात्रा में शामिल नहीं हो सकेंगे। यह निर्णय यात्रियों की सुरक्षा और स्वास्थ्य को ध्यान में रखते हुए लिया गया है। हर श्रद्धालु के लिए स्वास्थ्य प्रमाणपत्र अनिवार्य किया गया है। यह प्रमाणपत्र केवल अधिकृत चिकित्सक या मान्यता प्राप्त स्वास्थ्य संस्थान से ही जारी होना चाहिए। बिना वैध स्वास्थ्य प्रमाणपत्र के किसी भी प्रकार का पंजीकरण स्वीकार नहीं किया जाएगा। इस कदम का उद्देश्य ऊंचाई वाले क्षेत्रों में यात्रा के दौरान संभावित स्वास्थ्य जोखिमों को कम करना है। यात्रा परमिट और मार्ग व्यवस्थापंजीकरण पूरा होने के बाद श्रद्धालुओं को यात्रा परमिट जारी किया जाएगा जिसमें उनके यात्रा मार्ग और तारीख की पूरी जानकारी होगी। अमरनाथ यात्रा दो प्रमुख मार्गों से संचालित होती है जिनमें पहलगाम मार्ग और बालटाल मार्ग शामिल हैं। श्रद्धालु अपनी सुविधा और शारीरिक क्षमता के अनुसार किसी भी मार्ग का चयन कर सकते हैं। इस बार RFID आधारित पहचान प्रणाली को अनिवार्य किया गया है। बिना RFID कार्ड के किसी भी श्रद्धालु को यात्रा की अनुमति नहीं दी जाएगी। यह प्रणाली यात्रा के दौरान सुरक्षा और निगरानी को और अधिक प्रभावी बनाने में मदद करेगी। विदेशी श्रद्धालुओं के लिए विशेष प्रावधानविदेशी श्रद्धालुओं के लिए अलग पंजीकरण व्यवस्था लागू की गई है। उन्हें निर्धारित बैंकिंग और प्रशासनिक माध्यमों के जरिए आवेदन करना होगा और आवश्यक दस्तावेज जमा करने होंगे। इनमें पासपोर्ट और स्वास्थ्य प्रमाणपत्र प्रमुख रूप से शामिल हैं। विदेशी श्रद्धालुओं के लिए अलग शुल्क निर्धारित किया गया है और समूह में आवेदन करने की सुविधा भी उपलब्ध कराई गई है। यह प्रक्रिया भी पहले आओ पहले पाओ के आधार पर लागू होगी ताकि पारदर्शिता बनी रहे।यात्रा अवधि और प्रशासनिक तैयारीपरंपरागत रूप से यह यात्रा जून के अंत में प्रारंभ होकर अगस्त में रक्षा बंधन के आसपास समाप्त होती है। इस दौरान प्रशासन की ओर से सुरक्षा, चिकित्सा और आपातकालीन सेवाओं को और मजबूत किया जा रहा है ताकि श्रद्धालुओं को किसी प्रकार की परेशानी का सामना न करना पड़े। श्रद्धालुओं को सलाह दी गई है कि वे यात्रा से पहले अपनी स्वास्थ्य स्थिति की पूरी जांच अवश्य कराएं और ऊंचाई वाले क्षेत्रों की जलवायु को ध्यान में रखते हुए उचित तैयारी के साथ यात्रा पर निकलें। समय पर पंजीकरण, सही दस्तावेज और नियमों का पालन इस पवित्र यात्रा को सुरक्षित और सुगम बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।

कैलाश खेर के नाम पर संगीत सहयोग का झांसा देकर लाखों की ठगी का आरोप..

नई दिल्ली।मनोरंजन जगत से जुड़ा एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जिसमें प्रसिद्ध गायक कैलाश खेर के नाम का गलत इस्तेमाल कर एक गीतकार से लाखों रुपये की ठगी किए जाने का आरोप लगाया गया है। यह मामला न केवल डिजिटल भरोसे की कमजोरी को उजागर करता है, बल्कि यह भी दिखाता है कि किस तरह पहचान और प्रसिद्ध हस्तियों के नाम का इस्तेमाल कर लोगों को आसानी से निशाना बनाया जा रहा है। संगीत सहयोग के नाम पर रची गई ठगी की योजनापीड़ित गीतकार चैतन्य गोविंद कन्हैया, जो मूल रूप से उत्तर प्रदेश के रहने वाले हैं और वर्तमान में मुंबई में रहते हैं, एक परिचित के माध्यम से आरोपी से जुड़े थे। आरोपी ने खुद को ऐसे व्यक्ति के रूप में प्रस्तुत किया जो कैलाश खेर से उनका गाना रिकॉर्ड करवा सकता है। शुरुआती बातचीत के दौरान कुछ ऐसी स्थितियां बनाई गईं जिससे पीड़ित का विश्वास धीरे धीरे मजबूत होता गया और उन्हें यह विश्वास दिलाया गया कि यह अवसर पूरी तरह वास्तविक है। ऑनलाइन बातचीत और मुलाकात से बढ़ा भरोसाआरोपी ने कथित रूप से पीड़ित की ऑनलाइन बातचीत एक ऐसे व्यक्ति से करवाई, जिसे कैलाश खेर बताया गया। बातचीत के दौरान यह आश्वासन दिया गया कि आगे की प्रक्रिया उनके मैनेजर के माध्यम से पूरी की जाएगी। इसके बाद दोनों के बीच व्यक्तिगत मुलाकात भी हुई, जहां रिकॉर्डिंग और कॉन्ट्रैक्ट को अंतिम रूप देने के नाम पर वित्तीय मांग की गई। इस दौरान पीड़ित को भरोसा दिलाया गया कि यह एक पेशेवर संगीत प्रोजेक्ट का हिस्सा है। एडवांस भुगतान के बाद टूटा भरोसाविश्वास में आकर पीड़ित ने आरोपी द्वारा बताए गए खाते में बड़ी रकम ट्रांसफर कर दी। भुगतान के बाद आरोपी ने संपर्क बनाए रखना बंद कर दिया। जब पीड़ित ने दबाव बनाना शुरू किया, तो उन्हें एक चेक दिया गया जो बाद में बाउंस हो गया। इस घटना के बाद उन्हें संदेह हुआ और जब उन्होंने वास्तविक मैनेजमेंट टीम से संपर्क किया, तो सामने आया कि इस तरह की किसी भी परियोजना या बातचीत की कोई पुष्टि नहीं थी। पुलिस में शिकायत और जांच शुरूसच्चाई सामने आने के बाद पीड़ित ने संबंधित पुलिस थाने में शिकायत दर्ज कराई, जिसके आधार पर आरोपी के खिलाफ धोखाधड़ी का मामला दर्ज कर लिया गया है। पुलिस मामले की जांच कर रही है और यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि इस तरह की ठगी में और कौन कौन शामिल हो सकता है। डिजिटल युग में बढ़ते फ्रॉड पर चेतावनीयह मामला एक बार फिर इस बात की चेतावनी देता है कि डिजिटल और पेशेवर संपर्कों में बिना पूरी पुष्टि के किसी भी वित्तीय लेनदेन से बचना चाहिए। खासकर जब मामला किसी प्रसिद्ध व्यक्ति या बड़े प्रोजेक्ट से जुड़ा हो, तो अतिरिक्त सावधानी जरूरी हो जाती है।