Chambalkichugli.com

इस्लामाबाद में अमेरिका-ईरान के बीच होगी अहम वार्ता, पाकिस्तान मेजबान, इजरायली हमलों ने बढ़ाई चिंता

नई दिल्ली। पश्चिम एशिया में तनाव कम करने के उद्देश्य से अमेरिका और ईरान के बीच उच्चस्तरीय वार्ता की मेजबानी पाकिस्तान करने जा रहा है। शुक्रवार को इस्लामाबाद में होने वाली इस अहम बैठक से पहले पाकिस्तान ने राजधानी में सुरक्षा व्यवस्था बेहद कड़ी कर दी है। हालांकि, क्षेत्रीय हालात और इजरायल के हालिया हमलों को लेकर तनाव लगातार बढ़ता जा रहा है। ईरान की कड़ी चेतावनी से बढ़ी चिंता वार्ता से ठीक पहले ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियन ने चेतावनी दी है कि लेबनान पर इजरायल के हमले शुरुआती युद्धविराम का उल्लंघन हैं और इससे बातचीत पर गंभीर असर पड़ सकता है। ईरानी नेतृत्व का कहना है कि ऐसे कदम शांति प्रक्रिया को “निरर्थक” बना सकते हैं। लेबनान में हुए हालिया हमलों में भारी जनहानि की रिपोर्ट के बाद तेहरान का रुख और सख्त हो गया है, और उसने संकेत दिया है कि वह अपने क्षेत्रीय सहयोगियों के साथ खड़ा रहेगा। इस्लामाबाद में हाई-लेवल डिप्लोमैसी की तैयारी पाकिस्तान इस पूरी वार्ता प्रक्रिया में मध्यस्थ की भूमिका निभा रहा है। प्रधानमंत्री कार्यालय के अनुसार प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ और सेना प्रमुख के बीच क्षेत्रीय शांति प्रयासों की समीक्षा भी की गई है। पाकिस्तान ने दोनों पक्षों को भरोसा दिलाया है कि सभी विदेशी प्रतिनिधिमंडलों को “पूर्ण सुरक्षा” प्रदान की जाएगी और बातचीत को सफल बनाने के लिए हर संभव सहयोग दिया जाएगा।ईरानी पक्ष में अब भी संशय बरकरार पाकिस्तान में ईरान के राजदूत रजा अमीरी मोघादम ने स्पष्ट किया है कि इजरायली हमलों के चलते शांति वार्ता को लेकर गंभीर संदेह बना हुआ है। इसके बावजूद ईरानी प्रतिनिधिमंडल इस्लामाबाद पहुंच रहा है और प्रस्तावित 10-बिंदु एजेंडे पर बातचीत करेगा। सुरक्षा की कड़ी व्यवस्था और अंतरराष्ट्रीय भागीदारी वार्ता में अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल के शामिल होने की संभावना जताई जा रही है, जिसमें वरिष्ठ अमेरिकी नेतृत्व के साथ प्रमुख रणनीतिक सलाहकार भी मौजूद हो सकते हैं। पाकिस्तान ने अमेरिकी पक्ष को आश्वासन दिया है कि उनकी यात्रा के दौरान अभेद्य सुरक्षा उपलब्ध कराई जाएगी। इस बीच सुरक्षा प्रबंधों की समीक्षा के लिए एक विशेष टीम पहले ही इस्लामाबाद पहुंच चुकी है।शांति समझौते पर वैश्विक नजरें इस वार्ता में मुख्य ध्यान दीर्घकालिक शांति ढांचे पर रहेगा, जिसमें प्रतिबंधों में राहत, क्षेत्रीय सुरक्षा गारंटी और ईरान के परमाणु व मिसाइल कार्यक्रम जैसे संवेदनशील मुद्दे शामिल हो सकते हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि यह बातचीत सफल होती है या असफल, इसका सीधा असर पश्चिम एशिया की सुरक्षा स्थिति और वैश्विक ऊर्जा बाजारों पर पड़ेगा।

जेन-Z पार्टी की अटकलें: AAP के राघव चड्ढा के इंस्टा पोस्ट से बढ़ी चर्चाएं

नई दिल्ली। आम आदमी पार्टी (AAP) में कथित मतभेदों के बीच राज्यसभा सांसद राघव चड्ढा को लेकर नई राजनीतिक संभावनाओं की चर्चा तेज हो गई है। खासकर उनके इंस्टाग्राम पर साझा किए गए एक वीडियो और उस पर की गई टिप्पणी ने यह अटकलें पैदा कर दी हैं कि वह युवाओं, खासकर जेन-Z को केंद्र में रखकर नई पार्टी बनाने पर विचार कर सकते हैं। दरअसल, राज्यसभा में AAP के उपनेता पद से हटाए जाने के बाद चड्ढा ने तीन वीडियो जारी किए हैं। इन वीडियो में उन्होंने संकेत दिया कि वह इस बदलाव को सहज रूप से स्वीकार करने वाले नहीं हैं और सार्वजनिक मुद्दों को उठाते रहेंगे। इसी बीच इंस्टाग्राम पर साझा की गई एक रील ने राजनीतिक हलकों में नई बहस छेड़ दी है। इंस्टाग्राम रील से शुरू हुई चर्चा चड्ढा ने “Seedhathok” नाम के एक क्रिएटर की रील शेयर की, जिसमें समर्थक ने सुझाव दिया कि उन्हें युवाओं के लिए “Gen-Z” आधारित नई राजनीतिक पार्टी बनानी चाहिए। इस रील पर चड्ढा ने “दिलचस्प विचार” लिखकर प्रतिक्रिया दी। बस इसी टिप्पणी के बाद नई पार्टी को लेकर अटकलें तेज हो गईं। समर्थक ने क्या कहा? रील में क्रिएटर रिहान ने कहा कि कई युवा चाहते हैं कि चड्ढा मौजूदा मतभेदों के बावजूद अपनी पार्टी बनाएं। उनका मानना है कि किसी दूसरी पार्टी में जाने की बजाय नई पार्टी बनाना उनके लिए बेहतर विकल्प हो सकता है, क्योंकि युवा वर्ग उन्हें व्यापक समर्थन दे सकता है। पद से हटाए जाने के बाद बढ़ी हलचल पिछले सप्ताह AAP ने चड्ढा को राज्यसभा में उपनेता पद से हटाकर उनकी जगह सांसद अशोक कुमार मित्तल को नियुक्त किया। यह फैसला कथित तौर पर चड्ढा और पार्टी संयोजक अरविंद केजरीवाल के बीच मतभेदों की खबरों के बीच लिया गया। ‘पिक्चर अभी बाकी है’ वाला संदेश AAP द्वारा लगाए गए आरोपों के जवाब में चड्ढा ने एक वीडियो साझा किया, जिसमें उन्होंने पंजाब से जुड़े मुद्दों—भूजल संकट, भगत सिंह से जुड़े संदर्भ और अन्य क्षेत्रीय विषय—उठाए। वीडियो को उन्होंने “छोटा सा ट्रेलर” बताते हुए कहा, “पिक्चर अभी बाकी है।” उन्होंने यह भी कहा कि पंजाब उनके लिए केवल राजनीतिक मुद्दा नहीं, बल्कि उनका घर और कर्तव्य है। फिलहाल, चड्ढा ने नई पार्टी बनाने की कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की है, लेकिन सोशल मीडिया संकेतों और हालिया घटनाक्रमों ने राजनीतिक गलियारों में चर्चाओं को जरूर हवा दे दी है।

आईपीएल सट्टेबाजी का भंडाफोड़: भाजपा मंडल उपाध्यक्ष समेत छह गिरफ्तार, नकदी व उपकरण बरामद

मथुरा। आईपीएल मैचों पर सट्टेबाजी के खिलाफ पुलिस ने बड़ी कार्रवाई करते हुए छह लोगों को गिरफ्तार किया है। पकड़े गए आरोपियों में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) का एक मंडल उपाध्यक्ष भी शामिल है। पुलिस ने मौके से नकदी, मोबाइल फोन और सट्टेबाजी से जुड़े दस्तावेज बरामद किए हैं। थाना सदर बाजार पुलिस और एसओजी टीम ने संयुक्त छापेमारी करते हुए शिवधाम कॉलोनी, औरंगाबाद स्थित एक मकान से आईपीएल सट्टेबाजी गिरोह का खुलासा किया। कार्रवाई के दौरान छह आरोपियों को गिरफ्तार किया गया। पुलिस ने उनके पास से 11 मोबाइल फोन, एक लैपटॉप, चार्जर, कैलकुलेटर, एक्सटेंशन बोर्ड, तीन नोटबुक (सट्टा डायरी), दो पेन, चेकबुक और 1,63,530 रुपये नकद बरामद किए। शिकायतों के बाद हुई कार्रवाई पुलिस को पिछले कुछ समय से शहर में आईपीएल सट्टेबाजी संचालित होने की शिकायतें मिल रही थीं। इसके बाद एसएसपी श्लोक कुमार ने क्राइम ब्रांच को कार्रवाई के निर्देश दिए। बुधवार रात सीओ सिटी आशना चौधरी के नेतृत्व में एसओजी और थाना सदर बाजार टीम ने संयुक्त रूप से छापा मारा। भाजपा नेता समेत ये आरोपी गिरफ्तार पुलिस के अनुसार आदिल, रिजवान, किशोर, मुकेश, बांके बिहारी और बॉबी को मौके से गिरफ्तार किया गया। इनमें बांके बिहारी भाजपा सदर मंडल के उपाध्यक्ष बताए जा रहे हैं। सभी आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई कर चालान किया गया है। राजनीतिक हलकों में चर्चा भाजपा महानगर अध्यक्ष हरिशंकर राजू यादव से संपर्क का प्रयास किया गया, लेकिन उनसे बात नहीं हो सकी। हाल ही में मंडल कार्यकारिणी के गठन के बाद इस गिरफ्तारी ने राजनीतिक गलियारों में हलचल बढ़ा दी है। कार्रवाई में शामिल टीम छापेमारी में प्रभारी निरीक्षक सुधीर कुमार, एसओजी प्रभारी संदीप कुमार सहित थाना सदर और एसओजी की संयुक्त टीम शामिल रही। पुलिस का कहना है कि आईपीएल सट्टेबाजी में शामिल अन्य लोगों की भी तलाश की जा रही है और जांच जारी है।

पाक मंत्री के बयान से बढ़ा विवाद, इजरायल ने दी कड़ी चेतावनी, कहा- ये टिप्पणियां बर्दाश्त नहीं करेंगे

नई दिल्ली। ईरान और अमेरिका के बीच मध्यस्थ बनने की कोशिश कर रहा पाकिस्तान अब अंतरराष्ट्रीय विवाद में घिर गया है। लेबनान में जारी तनाव के बीच पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ के बयान ने इजरायल को भड़का दिया है। इजरायल ने साफ चेतावनी दी है कि इस तरह की टिप्पणियां बर्दाश्त नहीं की जाएंगी।लेबनान हमलों पर बयान से बढ़ा तनाव ख्वाजा आसिफ ने लेबनान पर इजरायली हमलों को लेकर कड़ी प्रतिक्रिया देते हुए उसे नरसंहार बताया। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर इजरायल को मानवता के लिए खतरा और “कैंसर” तक कह दिया। अपने बयान में उन्होंने गाजा, ईरान और लेबनान में जारी हिंसा का हवाला देते हुए तीखी आलोचना की। इजरायल की तीखी प्रतिक्रिया इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के कार्यालय ने इस बयान को बेहद आपत्तिजनक बताया। उन्होंने कहा कि किसी भी देश के लिए इजरायल के विनाश की बात स्वीकार्य नहीं हो सकती, खासकर तब जब वह खुद को शांति प्रक्रिया में निष्पक्ष मध्यस्थ बताता हो। विदेश मंत्री ने बताया अनुचित बयान इजरायल के विदेश मंत्री गिदोन सार ने भी इस टिप्पणी की आलोचना करते हुए इसे यहूदी-विरोधी बताया। उन्होंने कहा कि इस तरह के बयान शांति वार्ता की भावना के खिलाफ हैं और ऐसे शब्द किसी जिम्मेदार राष्ट्र के अनुरूप नहीं हैं।शांति वार्ता के बीच बढ़ा सैन्य तनाव इस बीच बेंजामिन नेतन्याहू ने संकेत दिया है कि इजरायल लेबनान के साथ जल्द सीधी बातचीत शुरू करना चाहता है। हालांकि हाल के दिनों में इजरायल ने हिजबुल्लाह के ठिकानों पर बड़े हमले किए हैं, जिनमें भारी नुकसान की खबर है।ईरान की चेतावनी, बातचीत पर असर लेबनान पर हमलों के बाद ईरान ने भी कड़ी प्रतिक्रिया दी है। उसका कहना है कि इस तरह की सैन्य कार्रवाई से शांति वार्ता का महत्व कम हो जाता है और बातचीत की प्रक्रिया प्रभावित होती है।

Ashoknagar NH 346 Inspection : घटिया निर्माण से जर्जर हुआ 262 करोड़ का नेशनल हाईवे, कलेक्टर और विधायक ने किया निरीक्षण

NH 346 INSPECTION

HIGHLIGHTS: 262 करोड़ की हाईवे सड़क पर घटिया निर्माण का आरोप चंदेरी-मेंहलूआ मार्ग की हालत खराब बारिश से पुलियों में कटाव और जलभराव कलेक्टर और विधायक ने किया निरीक्षण दोषियों पर कार्रवाई की चेतावनी Ashoknagar NH 346 Inspection : अशोकनगर। जिले में राष्ट्रीय राजमार्ग संख्या 346 (चंदेरी से मेंहलूआ चौराहा) के निर्माण में लापरवाही और घटिया गुणवत्ता की शिकायतें सामने आने के बाद मामला केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया तक पहुंच गया है। इसके बाद प्रशासन ने संज्ञान लेते हुए सड़क का निरीक्षण कराया। Murena NH44 Accident : मुरैना NH-44 पर भीषण हादसा, इको-ट्रैक्टर भिड़ंत में 7 घायल 262 करोड़ की सड़क, लेकिन हालत खराब करीब 262 करोड़ रुपये की लागत से बन रहे इस नेशनल हाईवे की हालत निर्माण पूरा होने से पहले ही खराब होने लगी है। बता दें कि सड़क पर जगह-जगह डामर और गिट्टी उखड़ रही है, जिससे निर्माण कार्य की गुणवत्ता पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। ‘हर दिन 100 से 150 छक्के लगाने का अभ्यास’, मुकुल चौधरी ने ऐसे ही नहीं लगाई केकेआर गेंदबाजों की लंका कलेक्टर और विधायक का निरीक्षण शिकायतों के बाद कलेक्टर साकेत मालवीय और विधायक बृजेंद्र सिंह यादव ने मौके पर पहुंचकर सड़क का सघन निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान टीम ने निर्माण कार्य, पुलियों और जल निकासी व्यवस्था की बारीकी से जांच की और कई खामियां पाई गईं। MBBS Degree Scam : व्यापमं कांड में बड़ा खुलासा, बर्खास्त छात्रों को मिली एमबीबीएस डिग्री कार्रवाई के संकेत और निर्देश निरीक्षण के दौरान कलेक्टर ने सड़क की गुणवत्ता पर गहरी नाराजगी जताई और संबंधित विभाग व निर्माण एजेंसी को तुरंत सुधार कार्य करने के निर्देश दिए। साथ ही उन्होंने चेतावनी दी कि यदि सुधार नहीं हुआ तो जिम्मेदार अधिकारियों और ठेकेदारों पर कार्रवाई की जाएगी।

दिन में मशहूर आर्किटेक्ट, रात में सीरियल किलर: ‘गिलगो बीच’ केस में पिज्जा के टुकड़े से पकड़ा गया आरोपी

न्यूयॉर्क। करीब दो दशकों तक दहशत फैलाने वाले चर्चित ‘गिलगो बीच’ सीरियल किलर मामले में बड़ा मोड़ आया है। लॉन्ग आइलैंड के 62 वर्षीय आर्किटेक्ट रेक्स ह्युएरमैन ने अदालत में महिलाओं की हत्या करने की बात स्वीकार कर ली है। 1993 से 2010 के बीच कई महिलाओं की गला घोंटकर हत्या की गई थी और उनके शवों को समुद्र तटीय इलाके में फेंक दिया जाता था। इस सनसनीखेज मामले पर Netflix ने ‘Gone Girls: The Long Island Serial Killer’ नाम से डॉक्यूमेंट्री सीरीज भी बनाई है, जिसने इस केस को वैश्विक चर्चा में ला दिया। कैसे खुला राज? मामले की परतें 2010 में 23 वर्षीय शैनन गिल्बर्ट के लापता होने के बाद खुलनी शुरू हुईं। उसने 911 पर मदद मांगते हुए कॉल किया था। तलाश के दौरान ओशन पार्कवे के पास पुलिस को कई मानव अवशेष मिले, जिससे सीरियल किलर की आशंका पुख्ता हुई। शुरुआत में चार पीड़ितों—मेलिसा बार्थेलेमी, मौरीन ब्रेनार्ड-बार्न्स, एम्बर लिन कॉस्टेलो और मेगन वाटरमैन—को “गिलगो फोर” नाम दिया गया। दोहरी जिंदगी जी रहा था आरोपी रेक्स ह्युएरमैन मैनहट्टन में एक सफल आर्किटेक्ट था और ‘RH Consultants & Associates’ नाम की कंपनी चलाता था। पड़ोसियों के मुताबिक वह शांत स्वभाव का पारिवारिक व्यक्ति लगता था, लेकिन जांच में सामने आया कि वह दोहरी जिंदगी जी रहा था। पुलिस ने उसके घर की 12 दिन तक तलाशी ली, जिसमें बेसमेंट की तिजोरी से 279 हथियार और कंप्यूटर से हत्या की योजना से जुड़े दस्तावेज बरामद हुए। कैसे फंसा ‘पिज्जा’ से? जांच के दौरान पुलिस को एक फेंके गए पिज्जा बॉक्स से डीएनए सैंपल मिला, जिसे ह्युएरमैन से मैच किया गया। यही अहम सबूत उसे गिरफ्तारी तक ले आया। अदालत में कबूलनामा 8 अप्रैल को आरोपी ने माना कि उसने बर्नर फोन से महिलाओं को पैसों का लालच देकर बुलाया, घर में हत्या की और शवों को बोरियों में लपेटकर गिलगो बीच इलाके में फेंक दिया। अब क्या होगी सजा? आगामी 17 जून को उसे फर्स्ट-डिग्री मर्डर के लिए बिना पैरोल उम्रकैद और सेकंड-डिग्री मर्डर के मामलों में 25 साल से उम्रकैद तक की सजा सुनाई जा सकती है। सफोल्क काउंटी के डिस्ट्रिक्ट अटॉर्नी रे टियरनी ने कहा कि आरोपी आम पारिवारिक व्यक्ति होने का दिखावा करता रहा, जबकि वह महिलाओं को निशाना बनाकर उनकी हत्या करता था।

ज्योतिराव फुले ने शिक्षा को बनाया सामाजिक क्रांति का सबसे बड़ा हथियार..

नई दिल्ली। भारत के सामाजिक इतिहास में कुछ व्यक्तित्व ऐसे रहे हैं जिन्होंने परंपराओं और रूढ़ियों की जड़ों को चुनौती देकर एक नए युग की नींव रखी। ज्योतिराव गोविंदराव फुले ऐसे ही एक क्रांतिकारी विचारक और समाज सुधारक थे, जिन्होंने शिक्षा को हथियार बनाकर जातिगत भेदभाव और सामाजिक असमानता के खिलाफ निर्णायक लड़ाई छेड़ी। उनका जीवन इस बात का प्रमाण है कि परिवर्तन केवल विचारों से नहीं बल्कि साहसिक कदमों से भी आता है। एक घटना जिसने बदल दिया जीवन का उद्देश्यसाल 1848 के आसपास की एक घटना ने उनके जीवन की दिशा ही बदल दी। एक पारिवारिक विवाह समारोह में शामिल होने के दौरान उन्हें जातिगत भेदभाव का सामना करना पड़ा और अपमानजनक व्यवहार के कारण उन्हें वहां से बाहर कर दिया गया। यह अनुभव उनके लिए केवल व्यक्तिगत अपमान नहीं था बल्कि एक गहरी सामाजिक सच्चाई का सामना था। इसी क्षण उन्होंने तय किया कि उनका जीवन अब इस भेदभावपूर्ण व्यवस्था को चुनौती देने के लिए समर्पित होगा।शिक्षा को बनाया परिवर्तन का सबसे बड़ा साधनज्योतिराव फुले ने यह समझ लिया था कि समाज में फैली अज्ञानता ही असमानता की जड़ है। उन्होंने शिक्षा को सामाजिक मुक्ति का सबसे शक्तिशाली माध्यम माना और इसे तृतीय नेत्र की संज्ञा दी, जो व्यक्ति को सोचने और समझने की क्षमता प्रदान करता है। इसी सोच के तहत उन्होंने अपनी पत्नी सावित्रीबाई फुले को पढ़ाना शुरू किया और जल्द ही शिक्षा आंदोलन की शुरुआत की नींव रखी।भारत में पहली लड़कियों की शिक्षा की शुरुआतउस दौर में जब महिलाओं और निम्न वर्गों के लिए शिक्षा की कल्पना भी असंभव मानी जाती थी, फुले दंपति ने पुणे में लड़कियों के लिए पहला विद्यालय स्थापित किया। यह कदम सामाजिक परंपराओं के खिलाफ एक बड़ा विद्रोह था। सावित्रीबाई फुले जब स्कूल पढ़ाने जाती थीं, तो उन्हें सामाजिक विरोध और हिंसा का सामना करना पड़ता था, लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी और शिक्षा के मिशन को आगे बढ़ाया। सामाजिक सुधार की व्यापक पहलफुले का कार्य केवल शिक्षा तक सीमित नहीं था। उन्होंने बाल विवाह जैसी कुप्रथा का विरोध किया और विधवा महिलाओं की सुरक्षा के लिए अपने घर को एक आश्रय स्थल में बदल दिया। यहां उन्होंने परित्यक्त महिलाओं को सम्मान और सुरक्षा देने की पहल की, जो उस समय के समाज के लिए एक असाधारण कदम था। सत्यशोधक समाज और सामाजिक समानता का आंदोलनसाल 1873 में उन्होंने सत्यशोधक समाज की स्थापना की, जिसका उद्देश्य समाज में धार्मिक और सामाजिक बिचौलियों की भूमिका को समाप्त करना था। उनका मानना था कि मनुष्य और ईश्वर के बीच किसी मध्यस्थ की आवश्यकता नहीं है। इस आंदोलन ने विवाह और सामाजिक अनुष्ठानों को सरल और समानता आधारित बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।लेखन और वैचारिक क्रांतिफुले ने अपने लेखन के माध्यम से भी समाज को जागरूक किया। उनकी कृतियों में समाज की असमानता, किसानों की स्थिति और प्रशासनिक व्यवस्था की कमियों को उजागर किया गया। उन्होंने केवल समस्याएं नहीं बताईं बल्कि समाधान की दिशा भी दिखाई, जिसमें शिक्षा, कृषि सुधार और सामाजिक न्याय प्रमुख थे। जीवन का अंतिम पड़ाव और अमर विरासतउनके विचारों और योगदान को देखते हुए उन्हें समाज ने महात्मा की उपाधि दी। उनका जीवन संघर्ष, विचार और सेवा का प्रतीक बन गया। जीवन के अंतिम वर्षों में भी उनका उद्देश्य समाज में समानता और न्याय की स्थापना ही रहा। उनका योगदान आज भी सामाजिक सुधार आंदोलनों के लिए प्रेरणा स्रोत बना हुआ है।

‘अपने बयान पर कायम हूं’: कुणाल कामरा ने एकनाथ शिंदे पर टिप्पणी मामले में माफी से किया इनकार

महाराष्ट्र। मशहूर स्टैंड-अप कॉमेडियन कुणाल कामरा गुरुवार को महाराष्ट्र विधानसभा की एक कमेटी के सामने पेश हुए। यह मामला उनके द्वारा राज्य के उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे पर की गई टिप्पणी से जुड़ा है। पूछताछ के दौरान कामरा ने स्पष्ट कहा कि उन्हें अपने बयान पर कोई पछतावा नहीं है और वे माफी भी नहीं मांगेंगे। कमेटी के समक्ष पेशी के बाद कामरा ने सोशल मीडिया पर भी लिखा कि वे अपने बयान पर कायम हैं और झूठी या औपचारिक माफी नहीं देंगे। उनके खिलाफ विशेषाधिकार हनन का नोटिस जारी होने के बाद इस मामले की जांच के लिए विधानसभा की कमेटी गठित की गई थी। कमेटी में पूछे गए सवाल कमेटी के अध्यक्ष प्रसाद लाड ने बताया कि कामरा से करीब 24 सवाल पूछे गए। उनसे पूछा गया कि क्या उन्हें अपने बयान पर पछतावा है, जिस पर उन्होंने इनकार किया। माफी मांगने के सवाल पर भी उन्होंने साफ कहा कि यदि वे माफी मांगते हैं तो वह सच्ची नहीं होगी और इससे कलाकारों की अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर नकारात्मक असर पड़ेगा। माफी पर कमेटी का रुख कमेटी ने कामरा को बताया कि यदि वे बिना शर्त माफी मांगते हैं तो मामले पर अलग तरीके से विचार किया जा सकता है। इस पर उनके वकील ने कहा कि वे इस बारे में चर्चा कर लिखित जवाब ईमेल के जरिए देंगे। गौरतलब है कि इस मामले की शिकायत प्रवीण दरेकर ने दर्ज कराई थी, जो भारतीय जनता पार्टी के विधान परिषद सदस्य हैं।

यूरोपा लीग: फ्रीबर्ग ने सेल्टा विगो को 3-0 से हराया, क्वार्टरफाइनल में बढ़त

नई दिल्ली। यूईएफए यूरोपा लीग क्वार्टरफाइनल के पहले लेग में SC Freiburg ने दमदार प्रदर्शन करते हुए Celta Vigo को 3-0 से करारी शिकस्त दी। जर्मनी के फ्रीबर्ग इम ब्रेइसगाऊ में खेले गए इस मुकाबले में घरेलू टीम ने शुरुआत से अंत तक खेल पर अपना पूरा नियंत्रण बनाए रखा। कप्तान Vincenzo Grifo ने दिलाई शुरुआती बढ़तमैच की शुरुआत से ही SC Freiburg आक्रामक नजर आया। इसका फायदा उन्हें 10वें मिनट में मिला, जब टीम के कप्तान Vincenzo Grifo ने बॉक्स के बाहर से शानदार शॉट लगाकर टीम को 1-0 की बढ़त दिलाई। उनका शॉट डिफ्लेक्शन के साथ गोल में गया, जिससे गोलकीपर के पास कोई मौका नहीं बचा। काउंटर-प्रेसिंग से विगो पर बना दबावपहले गोल के बाद भी फ्रीबर्ग ने अपनी आक्रामक रणनीति जारी रखी। उनकी तेज काउंटर-प्रेसिंग के सामने Celta Vigo पूरी तरह असहज नजर आई। 32वें मिनट में Igor Matanović की शानदार पास पर Nicolas Beste ने आसान गोल करते हुए स्कोर 2-0 कर दिया। दूसरे हाफ में भी कायम रहा नियंत्रणदूसरे हाफ में भी SC Freiburg ने मैच की गति अपने हाथ में रखी। Celta Vigo ने कुछ बदलाव जरूर किए, लेकिन वे मैच का रुख बदलने में नाकाम रहे। 70वें मिनट में Borja Iglesias ने एक मौका बनाया, लेकिन उसे गोल में नहीं बदल सके। कॉर्नर से तीसरा गोल, जीत पक्कीफ्रीबर्ग ने तीसरा गोल कॉर्नर किक से किया। Nicolas Beste की सटीक गेंद पर Matthias Ginter ने शानदार हेडर लगाकर स्कोर 3-0 कर दिया। इसके बाद मुकाबला लगभग फ्रीबर्ग के नाम हो गया। कप्तान का बयान और आगे की राहमैच के बाद Vincenzo Grifo ने टीम के प्रदर्शन की सराहना करते हुए कहा कि खिलाड़ियों ने परिपक्व और निडर खेल दिखाया। उन्होंने यह भी माना कि 3-0 की बढ़त अहम है, लेकिन स्पेन में होने वाला दूसरा लेग आसान नहीं होगा। सेमीफाइनल की ओर मजबूत कदमइस जीत के साथ SC Freiburg ने सेमीफाइनल में जगह बनाने की दिशा में मजबूत कदम बढ़ा दिया है। वहीं Celta Vigo को अब अगले लेग में चमत्कारिक प्रदर्शन करना होगा। फ्रीबर्ग ने यूरोपा लीग क्वार्टरफाइनल के पहले लेग में सेल्टा विगो को 3-0 से हराकर सेमीफाइनल की ओर मजबूत बढ़त बना ली है।

मंदिर से बहिष्कार समाज को बांटेगा, हिंदू धर्म पर पड़ेगा असर: सुप्रीम कोर्ट की अहम टिप्पणी

नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने मंदिरों और मठों में प्रवेश को लेकर महत्वपूर्ण टिप्पणी करते हुए कहा है कि किसी वर्ग विशेष को बाहर रखना समाज को विभाजित कर सकता है और इसका नकारात्मक प्रभाव हिंदू धर्म पर पड़ सकता है। अदालत ने यह भी कहा कि प्रत्येक व्यक्ति को सभी मंदिरों और मठों में जाने का अधिकार होना चाहिए। यह टिप्पणी नौ न्यायाधीशों की संविधान पीठ ने शबरिमला मंदिर समेत अन्य धार्मिक स्थलों पर महिलाओं के प्रवेश से जुड़े मामलों की सुनवाई के दौरान की। पीठ धार्मिक स्वतंत्रता के दायरे और उसके विस्तार पर भी विचार कर रही है। पीठ में शामिल न्यायाधीश संविधान पीठ की अध्यक्षता प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत कर रहे हैं। उनके साथ न्यायमूर्ति बी.वी. नागरत्ना, एम.एम. सुंदरेश, अहसानुद्दीन अमानुल्लाह, अरविंद कुमार, ऑगस्टीन जॉर्ज मसीह, प्रसन्ना बी. वराले, आर. महादेवन और जॉयमाल्या बागची शामिल हैं। अदालत ने क्या कहा सुनवाई के दौरान न्यायमूर्ति नागरत्ना ने कहा कि यदि परंपरा के नाम पर किसी वर्ग को मंदिर प्रवेश से रोका जाता है, तो इससे हिंदू धर्म पर प्रतिकूल असर पड़ सकता है। उन्होंने कहा कि हर व्यक्ति को मंदिर और मठ में प्रवेश का अधिकार होना चाहिए। इससे सहमति जताते हुए न्यायमूर्ति अरविंद कुमार ने कहा कि इस तरह का निष्कासन समाज को बांट देगा। संगठनों की दलील सुनवाई के दौरान नायर सर्विस सोसाइटी, अयप्पा सेवा समाजम और क्षेत्र संरक्षण समिति की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता सी.एस. वैद्यनाथन ने दलील दी कि कुछ मंदिर विशेष वर्ग तक सीमित हो सकते हैं। ‘वेंकटरमण देवरू’ मामले का जिक्र अदालत ने वेंकटरमण देवरू मामला का हवाला देते हुए कहा कि प्रवेश पर रोक लगाने की परंपरा का व्यापक असर धर्म पर पड़ सकता है। शबरिमला विवाद की पृष्ठभूमि 2018 में सुप्रीम कोर्ट की पांच न्यायाधीशों की पीठ ने 10 से 50 वर्ष की महिलाओं के शबरिमला अयप्पा मंदिर में प्रवेश पर लगे प्रतिबंध को हटाया था। बाद में 2019 में इस मुद्दे को व्यापक विचार के लिए बड़ी पीठ को भेज दिया गया। अदालत फिलहाल धार्मिक स्वतंत्रता से जुड़े सात प्रमुख सवालों पर विचार कर रही है और सुनवाई जारी है।