नए गठबंधन के मोह से अखिलेश ने मोड़ा मुख, 'पीडीए' के दम पर भाजपा के शुद्धिकरण का किया शंखनाद

नई दिल्ली। उत्तर प्रदेश की राजनीति के फलक पर आगामी विधानसभा चुनाव को लेकर समाजवादी पार्टी (सपा) ने अपनी रणनीतिक बिसात बिछा दी है। राजस्थान की राजधानी जयपुर में आयोजित एक कार्यक्रम में शिरकत करने पहुंचे सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने स्पष्ट कर दिया है कि आगामी यूपी विधानसभा चुनाव में उनकी पार्टी किसी भी नए राजनीतिक दल के साथ गठबंधन का प्रयोग नहीं करेगी। उन्होंने दोटूक शब्दों में कहा कि वर्तमान में जो गठबंधन (इंडिया अलायंस) अस्तित्व में है, वही 2027 की चुनावी जंग में भी पार्टी का आधार बनेगा। अखिलेश के इस बयान ने उन तमाम अटकलों पर विराम लगा दिया है, जिनमें छोटे दलों के साथ नए तालमेल की संभावना जताई जा रही थी। अनुभवों से ली सीख, पुराने साथियों पर भरोसाअखिलेश यादव ने गठबंधन के अपने पुराने और खट्टे-मीठे अनुभवों को साझा करते हुए कहा कि समाजवादी पार्टी ने अलग-अलग समय में कई प्रयोग किए हैं। हमारे पास गठबंधन का लंबा अनुभव है और इसी आधार पर हमने तय किया है कि जो साथी वर्तमान में हमारे साथ खड़े हैं, हम उन्हीं के साथ मजबूती से आगे बढ़ेंगे। उन्होंने जोर देकर कहा कि इस बार भाजपा का मुकाबला केवल किसी राजनीतिक गठबंधन से नहीं, बल्कि एक ‘समुदाय’ से होगा। यह समुदाय ‘पीडीए’ (पिछड़ा, दलित और अल्पसंख्यक) है, जो भाजपा की जनविरोधी नीतियों के खिलाफ एकजुट होकर मतदान करेगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि सपा की नजर फिलहाल केवल उत्तर प्रदेश पर है और राजस्थान में चुनाव लड़ने का उनका कोई इरादा नहीं है। वोटर लिस्ट में ‘शुद्धिकरण’ पर छिड़ा वाकयुद्धमतदाता सूची में धांधली के मुद्दे पर अखिलेश यादव ने सरकार को आड़े हाथों लिया। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा ने ग्रामीण क्षेत्रों के बजाय शहरी इलाकों में बड़े पैमाने पर वोट काटने की साजिश रची थी, क्योंकि वहां उसे हार का डर सता रहा था। सपा प्रमुख ने दावा किया कि उनके ‘पीडीए प्रहरियों’ ने हर बूथ पर पैनी नजर रखी, जिससे सत्ता पक्ष की गणित फेल हो गई। उन्होंने तंज कसते हुए कहा, “भाजपा मतदाता सूची के शुद्धिकरण का दावा कर रही है, लेकिन उन्हें यह नहीं पता कि प्रदेश की जनता आने वाले चुनाव में उनकी सरकार का ही पूर्ण शुद्धिकरण कर देगी।” उन्होंने कार्यकर्ताओं को निर्देश दिया है कि वे जिला स्तर पर मतदाता सूची का सूक्ष्म विश्लेषण जारी रखें। ‘नकली संतों’ की राजनीति पर प्रहारस्वामी अविमुक्तेश्वरानंद के समर्थन में उतरते हुए अखिलेश यादव ने उत्तर प्रदेश की सत्ता के शीर्ष पर बैठे लोगों पर तीखा प्रहार किया। उन्होंने कहा कि अविमुक्तेश्वरानंद उन ‘नकली संतों’ से संघर्ष कर रहे हैं जिन्होंने धर्म का चोला पहनकर राजनीति को दूषित किया है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का नाम लिए बिना उन्होंने कहा कि जो लोग दूसरों से प्रमाण मांग रहे हैं, उनके पास खुद कोई प्रामाणिक आधार नहीं है। समाजवादी पार्टी वास्तविक संतों का सम्मान करती है और स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद का आशीर्वाद पार्टी के साथ हमेशा रहेगा। उन्होंने यह भी कहा कि जल्द ही इन ‘नकली संतों’ की वास्तविकता पर भी कोई वेब सीरीज सामने आ सकती है। सिनेमाई एजेंडे और पड़ोसी राज्यों पर कटाक्षहालिया रिलीज फिल्म ‘धुरंधर’ का जिक्र करते हुए अखिलेश यादव ने कहा कि भाजपा अपनी विफलताओं को छिपाने के लिए काल्पनिक बातों को फिल्मों के जरिए वास्तविकता बनाकर पेश कर रही है। हालांकि, जनता ने ‘धुरंधर’ का जवाब ‘धुआंधार’ तरीके से देकर यह बता दिया है कि वह अब बहकावे में आने वाली नहीं है। पड़ोसी राज्य बिहार की राजनीति पर टिप्पणी करते हुए उन्होंने कहा कि भाजपा ने मुख्यमंत्री नीतीश कुमार का ‘डिमोशन’ करते हुए उन्हें धीरे-धीरे रिटायरमेंट की राह दिखा दी है। अखिलेश के इन तेवरों से साफ है कि वे आने वाले समय में केवल चुनावी मैदान में ही नहीं, बल्कि वैचारिक और सामाजिक मोर्चे पर भी भाजपा की घेराबंदी करने के लिए तैयार हैं।
एनसीपी मंत्री वीडियो कांड: आरोपी पहुँचा हाईकोर्ट, ट्रांसजेंडर के खिलाफ वसूली और साजिश का लगाया आरोप

नई दिल्ली। राजनैतिक गलियारों में हलचल मचाने वाले एनसीपी मंत्री नरहरी जिरवाल से जुड़े कथित आपत्तिजनक वीडियो मामले ने अब कानूनी मोड़ ले लिया है। इस मामले में मुख्य आरोपी ने बॉम्बे हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाते हुए अपने खिलाफ दर्ज एफआईआर (FIR) को रद्द करने की गुहार लगाई है। यह याचिका मुंबई के कफ परेड पुलिस स्टेशन में दर्ज उस मामले के विरोध में दायर की गई है, जिसमें आरोपी पर वीडियो लीक करने और छेड़छाड़ करने के गंभीर आरोप लगे हैं। आरोपी और ट्रांसजेंडर के बीच ‘वसूली’ की जंगइस पूरे विवाद की जड़ में एक ट्रांसजेंडर व्यक्ति की शिकायत है, जिसने आरोपी को अपना भाई बताते हुए आरोप लगाया था कि उसने वीडियो के साथ छेड़छाड़ कर उसे धमकाने की कोशिश की। दूसरी ओर, आरोपी ने इन आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए ट्रांसजेंडर पर ही पलटवार किया है। आरोपी ने अपनी याचिका में दावा किया है कि उसे झूठे मामले में फंसाया जा रहा है और वास्तव में उसे ब्लैकमेल कर वसूली की कोशिश की जा रही थी। उसने अदालत से मांग की है कि ट्रांसजेंडर के खिलाफ आपराधिक साजिश और धमकी देने के आरोप में मामला दर्ज किया जाना चाहिए। वीडियो लीक कांड और मंत्री की भूमिकामामले की गंभीरता तब बढ़ी जब एक ऐसा वीडियो सार्वजनिक हुआ जिसमें कथित तौर पर एनसीपी मंत्री एक ट्रांसजेंडर व्यक्ति के साथ आपत्तिजनक स्थिति में दिखाई दे रहे हैं। इस वीडियो के सामने आने के बाद महाराष्ट्र की राजनीति में भूचाल आ गया था। पुलिस अब इस बात की जांच कर रही है कि क्या यह वीडियो वास्तविक है या इसके साथ तकनीकी रूप से छेड़छाड़ की गई है। आरोपी का कहना है कि उसे निशाना बनाया जा रहा है, जबकि शिकायतकर्ता का तर्क है कि उसकी निजता और सुरक्षा के साथ खिलवाड़ हुआ है। अदालती सुनवाई पर टिकी निगाहेंफिलहाल बॉम्बे हाईकोर्ट में इस याचिका पर सुनवाई का इंतजार है, जिसके बाद ही स्थिति स्पष्ट हो पाएगी कि एफआईआर रद्द होगी या जांच का दायरा और बढ़ेगा। पुलिस ने दोनों पक्षों के बयानों और साक्ष्यों के आधार पर अपनी प्रक्रिया जारी रखी है। यह मामला न केवल एक मंत्री की छवि से जुड़ा है, बल्कि इसमें साइबर अपराध, ब्लैकमेलिंग और आपसी रंजिश के कई पेचीदा पहलू शामिल हो गए हैं। आने वाले दिनों में अदालत का फैसला इस विवाद की दिशा तय करेगा।
कूनो से आयी खुशखबरी: मादा चीता ‘गामिनी’ ने दिया 4 शावकों को जन्म, देश में चीतों की संख्या बढ़कर 57 हुई

श्योपुर। मध्य प्रदेश के कूनो राष्ट्रीय उद्यान से वन्यजीव संरक्षण को लेकर बड़ी खुशखबरी सामने आई है। यहां मादा चीता गामिनी ने चार शावकों को जन्म दिया है जिससे देश में चीतों की कुल संख्या बढ़कर 57 हो गई है। सीएम ने दी जानकारी जताई खुशी मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने सोशल मीडिया के जरिए इस उपलब्धि की जानकारी साझा की। मुख्यमंत्री ने लिखा है कि मध्य प्रदेश अब चीतों के पुनरुद्धार के प्रमुख केंद्र के रूप में उभर रहा है। कूनो के खुले जंगलों में गामिनी चीते से जन्मी 25 महीने की भारतीय मूल की मादा चीते द्वारा चार शावकों का जन्म इस बात का प्रमाण है कि मध्य प्रदेश की भूमि चीतों के वंश विस्तार के लिए पूरी तरह से अनुकूल है। प्रकृति और वन्यजीव संरक्षण के प्रति हमारी प्रतिबद्धता सफल हो रही है। उन्होंने इस उपलब्धि के लिए कूनो के प्रबंधकों और वन्यजीव पशु चिकित्सकों को बधाई दी है। केंद्र ने भी बताया बड़ी सफलता केंद्रीय वन एवं पर्यावरण मंत्री भूपेंद्र यादव ने भी इस उपलब्धि पर खुशी जताई। उन्होंने कहा कि 2022 में शुरू हुए चीता पुनर्स्थापन कार्यक्रम के बाद यह एक महत्वपूर्ण सफलता है जब प्राकृतिक जंगल में शावकों का जन्म हुआ है।प्राकृतिक वातावरण में सफल प्रजनन अब मध्यप्रदेश चीतों के ‘पुनरुद्धार’ का भी मुख्य केंद्र बन रहा है। ‘गामिनी’ से जन्मी भारतीय मूल की 25 माह आयु की मादा चीता द्वारा खुले जंगलों में 4 शावकों को जन्म देना इस बात का प्रमाण है कि मध्यप्रदेश की धरती चीतों के वंश विस्तार के लिए पूरी तरह अनुकूल है। प्रकृति और वन्यजीव… pic.twitter.com/EZsJobzmsG — Dr Mohan Yadav (@DrMohanYadav51) April 11, 2026 वन विभाग के अनुसार मादा चीता गामिनी पिछले एक साल से खुले जंगल में रह रही थी और वहां की परिस्थितियों के अनुसार खुद को ढाल चुकी थी। जंगल में शावकों का जन्म इस बात का संकेत है कि कूनो का इकोसिस्टम चीतों के लिए सुरक्षित और अनुकूल बन चुका है। परियोजना के लक्ष्य की ओर बड़ा कदम मुख्य वन संरक्षक उत्तम कुमार शर्मा ने बताया कि यह घटना चीता परियोजना के उद्देश्य को आगे बढ़ाने वाला अहम पड़ाव है। गामिनी खुद भी एक शावक के रूप में यहां लाई गई थी और अब उसका सफल प्रजनन दीर्घकालिक सफलता का संकेत है।मां और शावक सभी स्वस्थ निगरानी जारी अधिकारियों के अनुसार गामिनी और उसके चारों शावक पूरी तरह स्वस्थ हैं। उनकी लगातार निगरानी की जा रही है ताकि किसी तरह की परेशानी न हो। इन चार नए शावकों के जन्म के बाद कूनो राष्ट्रीय उद्यान में चीतों की संख्या और बढ़ गई है। वर्तमान में देश के अधिकांश चीते यहीं मौजूद हैं जबकि कुछ चीतों को मंदसौर के गांधी सागर अभयारण्य में भी बसाया गया है।
उज्जैन पहुंचीं यालीना जमाली: सारा अर्जुन ने महाकाल दरबार में टेका मत्था, 'हेल्थ, वेल्थ और सक्सेस' के लिए मांगी दुआ।

नई दिल्ली। उज्जैन की पावन नगरी में आज भक्ति और श्रद्धा का अनूठा संगम देखने को मिला, जब हालिया रिलीज फिल्म ‘धुरंधर’ से देशभर में शोहरत बटोरने वाली अभिनेत्री सारा अर्जुन बाबा महाकाल के दरबार में नतमस्तक हुईं। सारा अपनी मां सान्या अर्जुन के जन्मदिन के विशेष अवसर पर अपने पिता और प्रसिद्ध अभिनेता राज अर्जुन के साथ विश्व प्रसिद्ध श्री महाकालेश्वर मंदिर पहुंचीं। तड़के होने वाली अलौकिक भस्म आरती में शामिल होकर उन्होंने न केवल बाबा का आशीर्वाद लिया, बल्कि अपनी सफलता के लिए कृतज्ञता भी प्रकट की। भस्म आरती के दौरान अभिनेत्री पूरी तरह शिव की भक्ति में लीन नजर आईं और मंदिर परिसर में करीब दो घंटे तक प्रार्थना में डूबी रहीं। मां के जन्मदिन पर लिया महाकाल का आशीर्वादअपनी मां सान्या अर्जुन के जन्मदिवस को यादगार बनाने के लिए सारा अर्जुन ने उज्जैन की यात्रा को चुना। नंदी हॉल में बैठकर उन्होंने विधिवत पूजन-अर्चन किया और नंदी देव को जल अर्पित कर सुख-समृद्धि की कामना की। दर्शन के उपरांत मंदिर प्रबंध समिति द्वारा अभिनेत्री और उनके परिवार का आत्मीय स्वागत किया गया। इस दौरान सारा ने अपने अनुभव साझा करते हुए कहा कि भगवान महाकाल की भस्म आरती की दिव्यता को शब्दों में बयां कर पाना असंभव है। उन्होंने बाबा महाकाल से अच्छी सेहत, सुख-संपदा और अपने करियर में निरंतर सफलता (हेल्थ, वेल्थ और सक्सेस) की मंगल कामना की। विज्ञापनों से लेकर ‘धुरंधर’ तक का सफरसारा अर्जुन ने अपने अभिनय करियर की शुरुआत बचपन में ही विज्ञापनों से कर दी थी और अब तक वे 100 से अधिक विज्ञापनों का हिस्सा रह चुकी हैं। तमिल और हिंदी फिल्मों में अपनी पहचान बनाने वाली सारा ने ‘देइवा थिरुमगल’ और ‘सैवम’ जैसी फिल्मों में अपने अभिनय का लोहा मनवाया है। वे प्रसिद्ध अभिनेता राज अर्जुन और कथक नृत्यांगना सान्या अर्जुन की सुपुत्री हैं। सारा ने ‘एक थी डायन’, ‘जय हो’, ‘जज्बा’ और ‘सांड की आंख’ जैसी चर्चित हिंदी फिल्मों में काम किया है, लेकिन हाल ही में वर्ष 2025 में आई फिल्म ‘धुरंधर’ और फिर 2026 में इसके सीक्वल ‘धुरंधर: द रिवेंज’ ने उन्हें नई ऊंचाइयों पर पहुंचा दिया है। ‘यालीना जमाली’ के किरदार से मिली नई पहचानफिल्म ‘धुरंधर: द रिवेंज’ में सारा अर्जुन ने ‘यालीना जमाली’ की मुख्य भूमिका निभाई है, जिसे दर्शकों और आलोचकों द्वारा काफी सराहा जा रहा है। इस एक्शन थ्रिलर फिल्म में उनके दमदार प्रदर्शन ने उन्हें युवा पीढ़ी की पसंदीदा अभिनेत्रियों की कतार में खड़ा कर दिया है। अपनी फिल्म की सफलता के बीच उज्जैन पहुंचकर बाबा महाकाल की शरण में जाना उनके धार्मिक और सरल स्वभाव को दर्शाता है। उज्जैन की गलियों से लेकर सोशल मीडिया तक सारा की इस यात्रा और भस्म आरती में शामिल होने की तस्वीरें तेजी से वायरल हो रही हैं, जिसे उनके प्रशंसक खूब पसंद कर रहे हैं। धार्मिक पर्यटन और भक्ति का संदेशउज्जैन हमेशा से ही फिल्मी सितारों की आस्था का केंद्र रहा है, लेकिन सारा अर्जुन की यह यात्रा पारिवारिक मूल्यों और श्रद्धा का सुंदर उदाहरण है। महाकाल के दर्शन के बाद सारा ने बताया कि इस पावन भूमि की ऊर्जा उन्हें मानसिक शांति और नई प्रेरणा देती है। अपनी मां के विशेष दिन पर भगवान का आशीर्वाद लेना उनके लिए सौभाग्य की बात रही। फिलहाल अभिनेत्री अपनी फिल्म की सफलता का आनंद ले रही हैं और जल्द ही कुछ नए बड़े प्रोजेक्ट्स में नजर आने वाली हैं, लेकिन उससे पहले उन्होंने बाबा महाकाल के चरणों में शीश नवाकर अपने नए मिशन के लिए शक्ति अर्जित की है।
सीहोर में तिरंगे के अपमान का मामला: सड़क पर बिछाकर कुचलने का आरोप, तीन आरोपी गिरफ्तार

सीहोर। मध्य प्रदेश के सीहोर जिले के दोराहा थाना क्षेत्र के ग्राम सिराड़ी में राष्ट्रीय ध्वज के अपमान का गंभीर मामला सामने आया है। आरोप है कि कुछ लोगों ने तिरंगे को सड़क पर बिछाकर उसके साथ अभद्र व्यवहार किया। पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए तीन आरोपियों को हिरासत में ले लिया है। घटना शुक्रवार की बताई जा रही है। शिकायत के अनुसार आरोपियों ने तिरंगे को सड़क के बीचों-बीच बिछाया और उसके चारों कोनों पर पत्थर रख दिए। इसके बाद झंडे को पैरों से कुचलने का आरोप है जिससे ग्रामीणों में आक्रोश फैल गया। ग्राम निवासी राहुल दांगी की शिकायत पर कार्रवाई शुरू हुई। प्रत्यक्षदर्शियों ने घटना की जानकारी डायल 112 पर दी जिसके बाद पुलिस तुरंत मौके पर पहुंची और तिरंगे को सम्मानपूर्वक हटाया। तीन आरोपी हिरासत में केस दर्ज दोराहा थाना प्रभारी राजेश सिन्हा के अनुसार पुलिस ने सलीम खान जलील खान उर्फ गुड्डू और समीर खान को हिरासत में लिया है। तीनों के खिलाफ राष्ट्रीय गौरव अपमान निवारण अधिनियम 1971 की धारा 2 और 3 के तहत मामला दर्ज किया गया है। पुलिस अब इस मामले की गहराई से जांच कर रही है। यह भी देखा जा रहा है कि इस घटना के पीछे कोई साजिश या बाहरी संगठन की भूमिका तो नहीं है। घटना से इलाके में आक्रोश इस घटना के बाद गांव में लोगों के बीच नाराजगी का माहौल है। प्रशासन ने स्थिति को नियंत्रण में रखते हुए शांति बनाए रखने की अपील की है। मध्य प्रदेश के सीहोर जिले के दोराहा थाना क्षेत्र के ग्राम सिराड़ी में राष्ट्रीय ध्वज के अपमान का गंभीर मामला सामने आया है। आरोप है कि कुछ लोगों ने तिरंगे को सड़क पर बिछाकर उसके साथ अभद्र व्यवहार किया। पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए तीन आरोपियों को हिरासत में ले लिया है। घटना शुक्रवार की बताई जा रही है। शिकायत के अनुसार आरोपियों ने तिरंगे को सड़क के बीचों-बीच बिछाया और उसके चारों कोनों पर पत्थर रख दिए। इसके बाद झंडे को पैरों से कुचलने का आरोप है जिससे ग्रामीणों में आक्रोश फैल गया। ग्राम निवासी राहुल दांगी की शिकायत पर कार्रवाई शुरू हुई। प्रत्यक्षदर्शियों ने घटना की जानकारी डायल 112 पर दी जिसके बाद पुलिस तुरंत मौके पर पहुंची और तिरंगे को सम्मानपूर्वक हटाया।तीन आरोपी हिरासत में केस दर्ज दोराहा थाना प्रभारी राजेश सिन्हा के अनुसार पुलिस ने सलीम खान जलील खान उर्फ गुड्डू और समीर खान को हिरासत में लिया है। तीनों के खिलाफ राष्ट्रीय गौरव अपमान निवारण अधिनियम 1971 की धारा 2 और 3 के तहत मामला दर्ज किया गया है। पुलिस अब इस मामले की गहराई से जांच कर रही है। यह भी देखा जा रहा है कि इस घटना के पीछे कोई साजिश या बाहरी संगठन की भूमिका तो नहीं है। घटना से इलाके में आक्रोश इस घटना के बाद गांव में लोगों के बीच नाराजगी का माहौल है। प्रशासन ने स्थिति को नियंत्रण में रखते हुए शांति बनाए रखने की अपील की है।
मुरैना में बड़ी कार्रवाई, कैलारस पुलिस ने हथियारों के साथ दो शातिर बदमाश दबोचे

मुरैना । मध्यप्रदेश के मुरैना जिले में पुलिस ने सतर्कता और त्वरित कार्रवाई का परिचय देते हुए एक बड़ी वारदात को होने से पहले ही नाकाम कर दिया कैलारस थाना पुलिस ने दो शातिर बदमाशों को गिरफ्तार किया है जिनके पास से अवैध हथियार बरामद किए गए हैं यह कार्रवाई क्षेत्र में सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में एक अहम कदम मानी जा रही है पुलिस सूत्रों के अनुसार शुक्रवार को थाना पुलिस को एक विश्वसनीय मुखबिर से सूचना प्राप्त हुई थी कि दो अज्ञात व्यक्ति कैलारस रेलवे स्टेशन के अंडर ब्रिज के पास संदिग्ध स्थिति में छिपे हुए हैं और उनके पास अवैध हथियार मौजूद हैं सूचना में यह भी संकेत मिला था कि दोनों बदमाश किसी गंभीर आपराधिक घटना को अंजाम देने की फिराक में हैं सूचना मिलते ही पुलिस ने बिना समय गंवाए एक विशेष टीम का गठन किया और बताए गए स्थान की घेराबंदी की पुलिस टीम ने योजनाबद्ध तरीके से मौके पर दबिश दी जहां दो संदिग्ध युवक पुलिस को देखकर भागने की कोशिश करने लगे हालांकि पुलिस की मुस्तैदी के आगे उनकी एक न चली और दोनों को मौके पर ही पकड़ लिया गया तलाशी के दौरान पुलिस को आरोपियों के कब्जे से दो पिस्टल और एक देशी कट्टा बरामद हुआ साथ ही कुछ जिंदा कारतूस भी मिलने की संभावना जताई जा रही है पुलिस ने सभी हथियारों को जब्त कर लिया है और आरोपियों से पूछताछ शुरू कर दी है प्रारंभिक पूछताछ में यह सामने आया है कि दोनों आरोपी किसी बड़ी वारदात को अंजाम देने की योजना बना रहे थे हालांकि पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि उनके निशाने पर कौन था और इसके पीछे कोई गिरोह या नेटवर्क तो सक्रिय नहीं है पुलिस अधिकारियों का कहना है कि समय रहते की गई इस कार्रवाई से एक बड़ी घटना को टाला जा सका है साथ ही क्षेत्र में अपराधियों के खिलाफ सख्त संदेश भी गया है कि अवैध गतिविधियों में शामिल लोगों को किसी भी कीमत पर बख्शा नहीं जाएगा फिलहाल दोनों आरोपियों के खिलाफ आर्म्स एक्ट के तहत मामला दर्ज कर आगे की कानूनी कार्रवाई की जा रही है पुलिस उनके आपराधिक रिकॉर्ड की भी जांच कर रही है और यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि वे पहले भी किसी वारदात में शामिल रहे हैं या नहीं इस पूरी कार्रवाई के बाद स्थानीय लोगों में राहत का माहौल है वहीं पुलिस की सक्रियता की सराहना भी की जा रही है पुलिस का कहना है कि क्षेत्र में लगातार निगरानी और गश्त बढ़ाई जाएगी ताकि किसी भी प्रकार की आपराधिक गतिविधि को समय रहते रोका जा सके
'उस्ताद' का डिजिटल धमाका: 16 अप्रैल को ओटीटी पर दहाड़ेंगे पवन कल्याण, पांच भाषाओं में फिल्म देखने को तैयार फैंस।

नई दिल्ली। दक्षिण भारतीय सिनेमा के ‘पावर स्टार’ पवन कल्याण के प्रशंसकों के लिए एक बड़ी और उत्साहजनक खबर सामने आई है। लंबे समय से प्रतीक्षित एक्शन ड्रामा ‘उस्ताद भगत सिंह’ अब सिनेमाघरों में अपना जौहर दिखाने के बाद ओटीटी प्लेटफॉर्म पर धमाका करने के लिए तैयार है। फिल्म की रिलीज को अभी एक महीना भी पूरा नहीं हुआ है, लेकिन दर्शकों की भारी मांग और डिजिटल राइट्स की डील के बाद मेकर्स ने इसके प्रीमियर की आधिकारिक तारीख 16 अप्रैल तय कर दी है। सबसे खास बात यह है कि यह फिल्म केवल अपनी मूल भाषा तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि इसे हिंदी, तेलुगू, कन्नड़, मलयालम और तमिल सहित पांच प्रमुख भाषाओं में स्ट्रीम किया जाएगा। बॉक्स ऑफिस पर ‘धमाकेदार’ शुरुआत और ‘धीमी’ रफ्तार‘उस्ताद भगत सिंह’ का सिनेमाई सफर किसी रोलर कोस्टर राइड से कम नहीं रहा है। 19 मार्च को जब यह फिल्म बड़े पर्दे पर उतरी, तो इसने बॉक्स ऑफिस पर सुनामी ला दी थी। पहले ही दिन 34.75 करोड़ रुपये का ऐतिहासिक कलेक्शन कर पवन कल्याण ने अपनी लोकप्रियता का लोहा मनवाया। हालांकि, जैसे-जैसे दिन बीतते गए, फिल्म की कमाई की रफ्तार उम्मीद के मुताबिक नहीं रही। 150 करोड़ रुपये के भारी-भरकम बजट में बनी इस फिल्म ने वैश्विक स्तर पर अब तक लगभग 96.36 करोड़ रुपये का ही कारोबार किया है। लागत वसूलने में मिली चुनौतियों के बीच, मेकर्स ने अब डिजिटल माध्यम के जरिए दुनिया भर के उन दर्शकों तक पहुंचने का फैसला किया है जो थिएटर तक नहीं पहुंच सके थे। साहसी पुलिसिया तेवर और हैरतअंगेज एक्शनफिल्म की कहानी एक ऐसे निडर और जांबाज पुलिस अधिकारी के इर्द-गिर्द बुनी गई है, जो अपनी वर्दी की गरिमा और समाज के प्रति अपने उत्तरदायित्व के लिए किसी भी हद तक जाने को तैयार है। 54 वर्ष की आयु में भी पवन कल्याण ने जिस ऊर्जा और फुर्ती के साथ एक्शन दृश्यों को अंजाम दिया है, वह युवाओं के लिए भी प्रेरणादायी है। निर्देशक हरीश शंकर ने फिल्म में केवल मारधाड़ ही नहीं, बल्कि एक गहरे सामाजिक संदेश और भावनात्मक संबंधों को भी पिरोया है। पवन कल्याण का रौद्र रूप और उनके डायलॉग डिलीवरी का अंदाज प्रशंसकों के बीच पहले ही चर्चा का विषय बना हुआ है, जिसे अब घर बैठे मोबाइल और टीवी स्क्रीन पर देखा जा सकेगा। निर्देशक का विजन: सिनेमा प्रतियोगिता नहीं, उत्सव हैफिल्म की कमाई और दूसरी फिल्मों से प्रतिस्पर्धा को लेकर निर्देशक हरीश शंकर का नजरिया बेहद स्पष्ट और सराहनीय रहा है। उन्होंने हाल ही में एक बयान में कहा था कि उनके लिए फिल्म बनाना या उसे रिलीज करना किसी दूसरी फिल्म से मुकाबला करना नहीं है, बल्कि यह सिनेमा का एक उत्सव है। उन्होंने ‘धुरंधर-2’ जैसी फिल्मों के साथ क्लैश पर टिप्पणी करते हुए कहा कि त्योहारों के मौके पर कई फिल्में रिलीज होती हैं और हर फिल्म की अपनी जगह होती है। उनके अनुसार, ‘उस्ताद भगत सिंह’ का उद्देश्य दर्शकों को एक उच्च स्तर का मनोरंजन प्रदान करना है, और ओटीटी रिलीज इसी कड़ी का अगला विस्तार है।डिजिटल प्रीमियर से नई उम्मीदेंमनोरंजन जगत के विशेषज्ञों का मानना है कि ‘उस्ताद भगत सिंह’ जैसी बड़ी फिल्म का इतनी जल्दी ओटीटी पर आना डिजिटल मार्केट की बढ़ती ताकत को दर्शाता है। नेटफ्लिक्स जैसे वैश्विक प्लेटफॉर्म पर बहुभाषी रिलीज से फिल्म को न केवल दक्षिण भारत में, बल्कि उत्तर भारत और विदेशी बाजारों में भी नई जान मिलने की उम्मीद है। फिल्म की टीम को विश्वास है कि जो जादू थिएटर में अधूरा रह गया था, वह डिजिटल स्क्रीन पर जरूर पूरा होगा। अब 16 अप्रैल का बेसब्री से इंतजार किया जा रहा है, जब पवन कल्याण का ‘उस्ताद’ अवतार एक बार फिर दर्शकों के दिलों की धड़कनें तेज करने आ रहा है।
रचनात्मकता और मर्यादा की सीख: बादशाह ने बदला 'तातीरी' गीत का स्वरूप, कहा- किसी की भावनाओं को ठेस पहुंचाना मेरा उद्देश्य नहीं।

नई दिल्ली। मनोरंजन जगत में अक्सर रचनात्मक स्वतंत्रता और धार्मिक संवेदनाओं के बीच टकराव की स्थिति पैदा हो जाती है। ताजा मामला मशहूर रैपर और गायक बादशाह के हालिया गीत ‘तातीरी’ से जुड़ा है, जिसे लेकर पिछले कुछ दिनों से सोशल मीडिया पर भारी आक्रोश देखा जा रहा था। गीत के कुछ शब्दों को भगवान शिव और हिंदू धर्म की मान्यताओं के प्रति अपमानजनक मानते हुए विभिन्न धार्मिक संगठनों और प्रशंसकों ने कड़ा विरोध दर्ज कराया था। जनभावनाओं के बढ़ते दबाव और आस्था के सम्मान को सर्वोपरि रखते हुए बादशाह ने अब इस पूरे विवाद पर विराम लगाने का साहसी निर्णय लिया है। उन्होंने आधिकारिक तौर पर घोषणा की है कि वे इस गीत का एक नया और संशोधित संस्करण जारी करेंगे, जिसमें से सभी विवादित और आपत्तिजनक हिस्सों को पूरी तरह हटा दिया गया है। अनजाने में हुई चूक पर मांगी माफीविवाद की शुरुआत तब हुई जब संगीत प्रेमियों ने गीत के बोलों में धार्मिक प्रतीकों के अनुचित उपयोग को रेखांकित किया। देखते ही देखते इंटरनेट पर ‘बायकोट बादशाह’ जैसे रुझान देखने को मिले। स्थिति की गंभीरता को भांपते हुए गायक ने परिपक्वता का परिचय दिया और सार्वजनिक रूप से माफी मांगते हुए स्पष्ट किया कि उनका उद्देश्य कभी भी किसी की धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाना नहीं था। बादशाह ने स्वीकार किया कि एक कलाकार के रूप में उनकी प्राथमिक जिम्मेदारी मनोरंजन करना है, न कि समाज के किसी भी वर्ग को आहत करना। उन्होंने अपनी टीम को निर्देश देकर सभी डिजिटल प्लेटफॉर्म्स से पुराने वर्जन को हटाने और उसे नए बोलों के साथ बदलने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। धार्मिक मर्यादा और कला का संतुलनबादशाह ने अपनी प्रतिक्रिया में साझा किया कि वे स्वयं धार्मिक मूल्यों का गहरा सम्मान करते हैं और अनजाने में हुई इस चूक से उन्होंने भविष्य के लिए बड़ी सीख ली है। उन्होंने कहा कि संगीत दिलों को जोड़ने का माध्यम होना चाहिए। इस विवाद ने एक बार फिर मनोरंजन उद्योग में ‘कंटेंट’ की समीक्षा और सेंसरशिप पर नई बहस छेड़ दी है। विशेषज्ञों का मानना है कि आज के जागरूक दौर में कलाकारों को धार्मिक और सांस्कृतिक संदर्भों का उपयोग करते समय अत्यधिक सावधानी बरतने की आवश्यकता है। बादशाह द्वारा अपनी गलती स्वीकार कर उसमें सुधार करना एक सकारात्मक मिसाल के रूप में देखा जा रहा है, जिससे अन्य कलाकारों को भी जनभावनाओं के प्रति संवेदनशील रहने का संदेश मिलेगा। नया संस्करण और प्रशंसकों की उम्मीदेंअब ‘तातीरी’ का संशोधित संस्करण एक नई पहचान और शुद्धता के साथ दोबारा रिलीज किया जा रहा है। गायक की तकनीकी टीम वर्तमान में विभिन्न म्यूजिक स्ट्रीमिंग ऐप्स और वीडियो प्लेटफॉर्म्स पर पुराने ट्रैक को अपडेट करने में जुटी है। बादशाह ने अपने प्रशंसकों को आश्वस्त किया है कि नया वर्जन संगीत की गुणवत्ता से समझौता किए बिना पूरी तरह से सुरक्षित और मर्यादित होगा। इस निर्णय का सोशल मीडिया पर स्वागत किया जा रहा है और लोगों का मानना है कि अपनी गलती मान लेना ही एक सच्चे कलाकार की पहचान है। यह घटनाक्रम दर्शाता है कि डिजिटल युग में जनता की आवाज कितनी प्रभावी है और बड़े से बड़ा सितारा भी जनभावनाओं को नजरअंदाज नहीं कर सकता। भविष्य की तैयारी और मर्यादा का संकल्पविवाद शांत होने के बाद अब बादशाह अपने अगले प्रोजेक्ट्स पर ध्यान केंद्रित कर रहे हैं, लेकिन उन्होंने यह संकल्प दोहराया है कि वे भविष्य में अपनी कला को हमेशा मर्यादा के भीतर रखेंगे। उन्होंने स्पष्ट किया कि वे अपनी रचनात्मकता का उपयोग समाज में सकारात्मकता फैलाने के लिए करेंगे। यह पूरा मामला उन रचनाकारों के लिए एक चेतावनी भी है जो चर्चा में आने के लिए विवादित रास्तों का चयन करते हैं। बादशाह ने अंत में अपने प्रशंसकों का आभार व्यक्त किया जिन्होंने उन्हें उनकी गलती का एहसास कराया और समर्थन बनाए रखा। अब सभी की निगाहें ‘तातीरी’ के नए वर्जन पर टिकी हैं, जिसे लेकर उत्साह बरकरार है।
सुहाग का सौदा , धार में पत्नी ने प्रेमी संग मिलकर करवाई पति की हत्या ,सच्चाई ने किया हैरान

धार । मध्य प्रदेश के धार जिले में सामने आए एक सनसनीखेज हत्याकांड ने रिश्तों की बुनियाद को झकझोर कर रख दिया है इस पूरे मामले में एक पत्नी का ऐसा खौफनाक चेहरा सामने आया है जिसने हर किसी को हैरान कर दिया है प्रियंका नाम की महिला ने अपने ही पति की हत्या की साजिश रचकर उसे अंजाम दिलाया और इसके बाद खुद को बेगुनाह साबित करने के लिए लूट और डकैती की कहानी गढ़ दी जानकारी के अनुसार प्रियंका और उसके पति देव कृष्ण पुरोहित के बीच लंबे समय से विवाद चल रहा था दोनों के रिश्तों में दरार इतनी गहरी हो चुकी थी कि आए दिन झगड़े होते थे हाल ही में सामने आए कुछ वीडियो में यह साफ दिखाई दे रहा है कि दोनों के बीच फोन पर बात करने को लेकर तीखी बहस होती थी प्रियंका किसी से फोन पर बात कर रही थी और जब उसके पति ने इस बारे में पूछा तो उसने जवाब देने से इनकार कर दिया जिससे विवाद और बढ़ गया एक वीडियो में दोनों के बीच झगड़ा इतना बढ़ जाता है कि प्रियंका अपने पति के साथ मारपीट पर उतर आती है बताया जा रहा है कि झगड़े के दौरान उसने अपने पति के हाथ पर काट लिया था और उसकी कॉलर पकड़कर जोरदार बहस की थी इन घटनाओं से यह साफ संकेत मिलते हैं कि दोनों के रिश्ते सामान्य नहीं थे इसके बावजूद पति अपने रिश्ते को बचाने की कोशिश करता रहा बताया जा रहा है कि प्रियंका का किसी अन्य व्यक्ति कमलेश के साथ प्रेम संबंध था और वही उसके दिमाग में बसा हुआ था कुछ समय पहले वह घर छोड़कर भी चली गई थी लेकिन उसका पति उसे वापस घर ले आया उसे इस बात का अंदाजा नहीं था कि यही फैसला उसकी जिंदगी का सबसे बड़ा खतरा बन जाएगा पुलिस जांच में खुलासा हुआ है कि प्रियंका ने अपने प्रेमी कमलेश और एक सुपारी किलर सुरेंद्र के साथ मिलकर अपने पति की हत्या की साजिश रची उसने एक लाख रुपए देकर हत्या की सुपारी दी और घर के दरवाजे खुले छोड़ दिए ताकि आरोपी आसानी से अंदर आ सकें और वारदात को अंजाम दे सकें हत्या के बाद प्रियंका ने ऐसा नाटक किया मानो घर में लूटपाट हुई हो ताकि किसी को उस पर शक न हो लेकिन पुलिस ने मामले की गंभीरता से जांच की और महज बारह घंटे के भीतर पूरे घटनाक्रम का खुलासा कर दिया पुलिस ने प्रियंका और उसके प्रेमी को गिरफ्तार कर लिया और उनसे पूछताछ की जा रही है इस मामले को और भी चौंकाने वाला बनाने वाली बात यह है कि बताया जा रहा है कि पति की हत्या के बाद प्रियंका ने उसके शव के पास ही अपने प्रेमी के साथ संबंध बनाए यह जानकारी सामने आने के बाद पूरे इलाके में सनसनी फैल गई है और लोग इस घटना को लेकर स्तब्ध हैं यह घटना न केवल एक आपराधिक साजिश की कहानी है बल्कि यह भी दर्शाती है कि जब रिश्तों में विश्वास खत्म हो जाता है तो परिणाम कितने भयावह हो सकते हैं फिलहाल पुलिस मामले की जांच में जुटी हुई है और आरोपियों को अदालत में पेश करने की तैयारी कर रही है
टीआरपी का बेताज बादशाह: 'जस्सी जैसी कोई नहीं' ने तोड़े थे सालों पुराने रिकॉर्ड, 9.2 रेटिंग से मचाया था तहलका

नई दिल्ली। भारतीय टेलीविजन के इतिहास में कुछ शोज ऐसे होते हैं जो न केवल मनोरंजन करते हैं, बल्कि एक नए युग की शुरुआत भी करते हैं। सोनी टीवी पर साल 2003 में शुरू हुआ धारावाहिक ‘जस्सी जैसी कोई नहीं’ इसी श्रेणी का एक क्रांतिकारी शो था। अभिनेत्री मोना सिंह ने इस शो में जसमीत वालिया उर्फ जस्सी का किरदार निभाकर घर-घर में अपनी पहचान बनाई। बड़े चश्मे, दांतों में ब्रेसेस और सादगी भरे अंदाज वाली जस्सी ने उस दौर में छोटे पर्दे पर हावी ग्लैमरस और भारी साज-श्रृंगार वाली ‘सास-बहू’ कहानियों के चलन को पूरी तरह बदल दिया था। यह शो कोलंबियाई ड्रामा ‘यो सोय बेटी, ला फिया’ पर आधारित था और इसकी लोकप्रियता का आलम यह था कि इसने टीआरपी के कई पुराने रिकॉर्ड ध्वस्त कर दिए थे। मनोरंजन जगत की खबरों के अनुसार, ‘जस्सी जैसी कोई नहीं’ ने अपनी जबरदस्त सफलता के दौरान 9.2 की टीआरपी रेटिंग हासिल की थी। यह आंकड़ा उस समय के लिहाज से इतना बड़ा था कि इसकी तुलना कई प्रतिष्ठित पौराणिक और पारिवारिक शोज के रिकॉर्ड्स से की गई। इस शो ने यह साबित कर दिया कि दर्शकों को लुभाने के लिए केवल खूबसूरती या ग्लैमर की जरूरत नहीं है, बल्कि एक मजबूत कहानी और प्रभावशाली अभिनय कहीं अधिक महत्वपूर्ण है। जस्सी का किरदार हर उस आम लड़की की आवाज बन गया जो अपने लुक्स के कारण असुरक्षा महसूस करती थी लेकिन अपने आत्मविश्वास और बुद्धिमानी के बल पर करियर में ऊंचाइयों को छूना चाहती थी। मोना सिंह के लिए जस्सी का सफर इतना आसान नहीं था। हाल ही में उन्होंने साझा किया कि इस ऐतिहासिक भूमिका को पाने के लिए उन्हें लगभग 50 ऑडिशन देने पड़े थे। वह रोजाना पुणे से मुंबई बस से सफर करती थीं और कड़ी मेहनत के बाद उन्हें यह मौका मिला। शो के मेकर्स ने जस्सी की असल पहचान को काफी समय तक जनता से छिपाकर रखा था ताकि दर्शकों के बीच उत्सुकता बनी रहे। जब पहली बार जस्सी का मेकओवर दिखाया गया, तो वह टीवी जगत की सबसे बड़ी घटनाओं में से एक बन गई थी। मोना सिंह के शानदार अभिनय ने न केवल आम जनता बल्कि अमिताभ बच्चन और शाहरुख खान जैसे दिग्गज सितारों का भी दिल जीत लिया था। आज करीब 23 साल बीत जाने के बाद भी ‘जस्सी जैसी कोई नहीं’ की यादें दर्शकों के जहन में ताजी हैं। 550 एपिसोड वाले इस शो ने अपनी अनूठी कहानी और भावनात्मक गहराई के कारण टेलीविजन पर एक अमिट छाप छोड़ी है। इस धारावाहिक ने मोना सिंह के लिए बॉलीवुड और ओटीटी के रास्ते भी खोले, जहाँ उन्होंने ‘3 इडियट्स’ और ‘कहर’ जैसी परियोजनाओं के माध्यम से अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाया। यह शो आज भी उन लोगों के लिए एक मिसाल है जो यह मानते हैं कि टीवी पर केवल पारंपरिक फॉर्मूले ही सफल होते हैं।