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‘सोने का कारखाना’ बना ज्वालामुखी द्वीप, वैज्ञानिकों की खोज से खुला पृथ्वी के खजाने का रहस्य

वाशिंगटन। वैज्ञानिकों ने पृथ्वी पर बड़े सोने के भंडार बनने की प्रक्रिया से जुड़ा अहम रहस्य उजागर किया है। जर्मनी के GOMAR हेल्महोल्ट्ज सेंटर फॉर ओशन रिसर्च के डॉ. क्रिश्चियन टिम्म (GEOMAR Helmholtz Centre for Ocean Research Kiel) के वैज्ञानिकों की टीम ने दक्षिण प्रशांत महासागर में स्थित Kermadec Islands को “सोने का कारखाना” करार दिया है। यह शोध कम्युनिकेशंस अर्थ एंड एनवायरनमेंट जर्नल (Communications Earth & Environment ) में प्रकाशित हुआ है। यहां प्रशांत महासागरीय प्लेट ऑस्ट्रेलियाई प्लेट के नीचे सबडक्शन प्रक्रिया से गुजर रही है। पानी से भरपूर तरल पदार्थ सबडक्टिंग प्लेट से निकलकर मेंटल में एंट्री करते हैं, जिससे मेंटल का पिघलने का तापमान कम हो जाता है। बार-बार पिघलने के कई चक्रों के बाद चाल्कोफाइल तत्वों जैसे सोना और तांबा मैग्मा में केंद्रित हो जाते हैं। वैज्ञानिकों ने समुद्र तल से एकत्रित ज्वालामुखी ग्लास के 66 सैंपल्स का विश्लेषण किया। इन नमूनों में सामान्य मिड-ओशन रिज की तुलना में सोने की मात्रा अधिक पाई गई, जो दर्शाता है कि गहरे मेंटल में ही सोना केंद्रित होता है। रिसर्च में क्या निकलकर आया सामने ज्वालामुखी ग्लास समुद्री पानी से लावा के तेजी से ठंडा होने पर बनता है, जो मैग्मा की मूल संरचना को बनाए रखता है। रिसर्च में पाया गया कि हाइड्रस यानी पानी-समृद्ध परिस्थितियों में ही कई चरणों वाले पिघलने से सोना पकता जाता है। यह प्रक्रिया बताती है कि टेक्टोनिक प्लेटों के पानी के प्रभाव से मेंटल में सोने का आगमन होता है और फिर यह समुद्र तल तक पहुंचकर हाइड्रोथर्मल वेंट्स में जमा होता है। इससे पहले वैज्ञानिक इस बात को नहीं समझ पाए थे कि कुछ क्षेत्रों में सोना इतना अधिक क्यों जमा होता है। यह खोज भविष्य में समुद्री खनिज संसाधनों की खोज के लिए नया ब्लूप्रिंट पेश करती है। अब भूवैज्ञानिक विशाल समुद्री सल्फाइड डिपॉजिट्स का पता लगाने में सक्षम होंगे, जहां सोना और अन्य कीमती धातुएं प्रचुर मात्रा में हो सकती हैं। इससे पृथ्वी पर नोबल मेटल्स के जीवन चक्र की समझ बढ़ेगी, गहरे मेंटल से लेकर समुद्री वेंट्स तक।

1000 करोड़ क्लब में शामिल इन डायरेक्टर्स की फिल्में, बॉलीवुड के सिर्फ 3 नामों ने रचा इतिहास

नई दिल्ली।भारतीय फिल्म इंडस्ट्री में 1000 करोड़ क्लब में शामिल होना किसी भी डायरेक्टर के लिए बड़ी उपलब्धि मानी जाती है। वर्ल्डवाइड बॉक्स ऑफिस पर इतनी कमाई करने वाली फिल्मों के पीछे कुछ चुनिंदा निर्देशक ही हैं, जिन्होंने अपने विजन और कहानी कहने के अंदाज से इतिहास रच दिया है। एस. एस. राजामौलीभारतीय सिनेमा को ग्लोबल पहचान दिलाने वाले निर्देशक एस. एस. राजामौली इस सूची में सबसे आगे हैं। उनकी ब्लॉकबस्टर फिल्में ‘बाहुबली 2’ (लगभग 1788 करोड़) और ‘RRR’ (लगभग 1230 करोड़) ने दुनियाभर में जबरदस्त कमाई की और भारतीय सिनेमा को नई ऊंचाइयों पर पहुंचाया। सुकुमारअल्लू अर्जुन स्टारर ‘पुष्पा 2’ के निर्देशक सुकुमार ने भी 1000 करोड़ क्लब में जगह बनाई। इस फिल्म ने लगभग 1742 करोड़ रुपए की वर्ल्डवाइड कमाई कर रिकॉर्ड बनाया। नितेश तिवारीबॉलीवुड के बेहतरीन निर्देशक नितेश तिवारी ने ‘दंगल’ जैसी ऐतिहासिक फिल्म बनाई, जिसने लगभग 2070 करोड़ रुपए की कमाई कर 2000 करोड़ क्लब में भी एंट्री कर ली। एटलीशाहरुख खान स्टारर ‘जवान’ के निर्देशक एटली ने भी धमाकेदार सफलता हासिल की। फिल्म ने लगभग 1160 करोड़ रुपए की वर्ल्डवाइड कमाई की। प्रशांत नील‘KGF Chapter 2’ जैसी पैन-इंडिया हिट देने वाले प्रशांत नील ने भी इस क्लब में जगह बनाई। उनकी फिल्म ने लगभग 1215 करोड़ रुपए का कलेक्शन किया।  सिद्धार्थ आनंद‘पठान’ जैसी ब्लॉकबस्टर फिल्म देने वाले सिद्धार्थ आनंद ने भी 1000 करोड़ क्लब में एंट्री की। फिल्म ने करीब 1055 करोड़ रुपए कमाए।  नाग अश्विनफ्यूचरिस्टिक फिल्म ‘कल्कि 2898 AD’ के निर्देशक नाग अश्विन की फिल्म ने भी लगभग 1042 करोड़ रुपए की वर्ल्डवाइड कमाई की। इस लिस्ट में सबसे खास बात यह है कि इसमें बॉलीवुड के सिर्फ कुछ ही नाम शामिल हैं, जबकि ज्यादातर सफलता साउथ और पैन-इंडिया फिल्मों के डायरेक्टर्स के हिस्से आई है। भारतीय सिनेमा के कुछ चुनिंदा डायरेक्टर्स ने 1000 करोड़ क्लब में जगह बनाकर इतिहास रचा है, जिसमें राजामौली सबसे आगे हैं। यह सफलता साउथ और पैन-इंडिया फिल्मों के बढ़ते ग्लोबल प्रभाव को दिखाती है।

सुनील ग्रोवर ने की रोहित शर्मा की मिमिक्री, लोग हैरान, बोले- अब विराट कोहली को भी करो कॉपी

नई दिल्ली। कॉमेडी और मिमिक्री के अपने खास अंदाज के लिए मशहूर सुनील ग्रोवर एक बार फिर सुर्खियों में हैं। हाल ही में उन्होंने कादर खान, जावेद अख्तर और आमिर खान जैसे दिग्गजों की हूबहू नकल उतारकर लोगों को हैरान कर दिया था। अब उन्होंने क्रिकेट की दुनिया के स्टार बल्लेबाज रोहित शर्मा की मिमिक्री कर सोशल मीडिया पर हलचल मचा दी है।रोहित शर्मा बने सुनील ग्रोवर, एड शूट का वीडियो वायरलएक एड शूट के दौरान सुनील ग्रोवर को रोहित शर्मा के अंदाज में देखा गया। वीडियो में वे मुंबई इंडियंस की जर्सी पहनकर रोहित शर्मा जैसी बॉडी लैंग्वेज और बोलने का अंदाज अपनाते नजर आते हैं। दिलचस्प बात यह है कि शूटिंग के दौरान डायरेक्टर भी कुछ देर के लिए कन्फ्यूज नजर आते हैं। वीडियो में अंत में असली रोहित शर्मा की एंट्री दिखाई जाती है, जो सीन को और मजेदार बना देती है। सोशल मीडिया पर मिली मिली-जुली प्रतिक्रियावीडियो वायरल होते ही यूजर्स ने जमकर रिएक्शन दिए। कुछ लोगों ने सुनील की मिमिक्री को शानदार बताया, तो कुछ ने मजेदार कमेंट किए। एक यूजर ने लिखा कि वे रोहित से ज्यादा जसप्रीत बुमराह जैसे लग रहे हैं। वहीं एक अन्य यूजर ने कहा कि सुनील ग्रोवर किसी की भी मिमिक्री कर सकते हैं। कई लोगों ने मजाक में लिखा कि अब उन्हें विराट कोहली की भी मिमिक्री करनी चाहिए। पहले भी कई सेलेब्स की उतार चुके हैं नकलसुनील ग्रोवर इससे पहले भी कई दिग्गजों की मिमिक्री कर चुके हैं। वे कपिल शर्मा शो में सलमान खान के किरदार में नजर आ चुके हैं। इसके अलावा उन्होंने आमिर खान, गीतकार गुलजार और कादर खान की भी शानदार नकल उतारी थी, जिसे काफी पसंद किया गया था।अवॉर्ड शो में भी बिखेरा था जलवाहाल ही में एक अवॉर्ड शो में जावेद अख्तर के सामने उनकी मिमिक्री का वीडियो भी वायरल हुआ था, जिसमें खुद जावेद अख्तर भी अपनी हंसी नहीं रोक पाए थे। फैंस अब सुनील ग्रोवर के अगले मिमिक्री एक्ट का इंतजार कर रहे हैं।

वैभव सूर्यवंशी के सिर सजी ऑरेंज कैप, IPL 2026 में ऐसा करने वाले बने पहले खिलाड़ी

 नई दिल्ली। आईपीएल 2026 के 16वें मुकाबले में राजस्थान रॉयल्स ने एक बार फिर शानदार प्रदर्शन करते हुए रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु (RCB) को 6 विकेट से हरा दिया। इस जीत के सबसे बड़े हीरो 15 वर्षीय वैभव सूर्यवंशी रहे, जिन्होंने मात्र 26 गेंदों में 78 रनों की विस्फोटक पारी खेलकर मैच का पूरा रुख बदल दिया। उनकी इस तूफानी बल्लेबाजी की बदौलत राजस्थान ने 201 रनों का लक्ष्य दो ओवर शेष रहते हासिल कर लिया। इसी प्रदर्शन के साथ वैभव ने आईपीएल 2026 की ऑरेंज कैप पर कब्जा जमा लिया और सीजन में ऐसा करने वाले पहले खिलाड़ी बन गए। वैभव सूर्यवंशी की ऐतिहासिक पारीRCB के मजबूत गेंदबाजी आक्रमण के सामने वैभव ने बेखौफ अंदाज में बल्लेबाजी की। उन्होंने अपनी पारी में 8 चौके और 7 छक्के लगाए और 300 के करीब स्ट्राइक रेट से रन बनाए। खास बात यह रही कि उन्होंने इस सीजन में मात्र चार मैचों में ही 200 रन पूरे कर लिए, और 50 की औसत तथा 266.67 के स्ट्राइक रेट के साथ लीग में सबसे आगे निकल गए। उनकी इस निरंतरता ने उन्हें ऑरेंज कैप की रेस में शीर्ष पर पहुंचा दिया है। ऑरेंज कैप की रेस में राजस्थान का दबदबाइस समय ऑरेंज कैप की दौड़ में राजस्थान रॉयल्स का दबदबा देखने को मिल रहा है। वैभव सूर्यवंशी (200 रन) पहले स्थान पर हैं, जबकि यशस्वी जायसवाल (183 रन) और ध्रुव जुरेल (176 रन) भी टॉप-3 में शामिल हैं। दिल्ली कैपिटल्स के समीर रिजवी (160 रन) और कोलकाता नाइट राइडर्स के अंगकृश रघुवंशी (155 रन) भी टॉप-5 में जगह बनाए हुए हैं। यह साफ संकेत है कि इस सीजन राजस्थान के बल्लेबाजों का प्रदर्शन बेहद शानदार रहा है। पर्पल कैप पर रवि बिश्नोई का कब्जाजहां बल्लेबाजों में राजस्थान का दबदबा है, वहीं गेंदबाजी में भी टीम के स्पिनर रवि बिश्नोई ने कमाल किया है। उन्होंने अब तक 4 मैचों में 9 विकेट लेकर पर्पल कैप अपने नाम की हुई है। उनके बाद प्रसिद्ध कृष्णा (6 विकेट), राशिद खान (5 विकेट), लुंगी एनगिडी (5 विकेट) और जोफ्रा आर्चर (5 विकेट) टॉप-5 में शामिल हैं। मैच का हालRCB ने पहले बल्लेबाजी करते हुए 201 रन बनाए थे, जिसमें कप्तान रजत पाटीदार ने 63 रनों की अहम पारी खेली। विराट कोहली ने भी 32 रन बनाए, लेकिन राजस्थान के गेंदबाजों के सामने टीम बड़ा स्कोर नहीं खड़ा कर सकी। जवाब में राजस्थान ने वैभव सूर्यवंशी और ध्रुव जुरेल की धमाकेदार पारियों की बदौलत लक्ष्य आसानी से हासिल कर लिया। वैभव सूर्यवंशी ने 78 रनों की विस्फोटक पारी के दम पर आईपीएल 2026 की ऑरेंज कैप हासिल कर ली, जबकि रवि बिश्नोई 9 विकेट के साथ पर्पल कैप पर काबिज हैं। राजस्थान रॉयल्स इस सीजन दोनों ही कैटेगरी में शानदार प्रदर्शन कर रही है।

मुकुल चौधरी की दर्दभरी दास्तां: सपनों के लिए बेच दिया घर, फिर भी नहीं मानी हार

 नई दिल्ली। आईपीएल 2026 में लखनऊ सुपर जायंट्स (LSG) के युवा बल्लेबाज मुकुल चौधरी ने अपनी विस्फोटक पारी से न सिर्फ टीम को जीत दिलाई, बल्कि अपनी जिंदगी की संघर्ष भरी कहानी से पूरे क्रिकेट जगत को भावुक कर दिया है। केकेआर के खिलाफ खेले गए मुकाबले में 27 गेंदों पर 54 रन (7 छक्के, 2 चौके) की नाबाद पारी खेलकर उन्होंने अकेले दम पर मैच पलट दिया और टीम को रोमांचक जीत दिलाई। इसके बाद उनकी संघर्ष यात्रा सुर्खियों में आ गई। आर्थिक तंगी से शुरू हुआ क्रिकेट का सफरराजस्थान के रहने वाले मुकुल चौधरी का क्रिकेट करियर आसान नहीं रहा। एक पुराने इंटरव्यू में उन्होंने खुलासा किया कि क्रिकेट में आगे बढ़ने के लिए उनके परिवार ने गंभीर आर्थिक संघर्ष झेले। मुकुल ने बताया कि उनके पिता ने उन्हें क्रिकेट में आगे बढ़ाने के लिए कर्ज लिया, होटल व्यवसाय शुरू किया और हालात इतने कठिन हो गए कि परिवार को अपना घर तक बेचना पड़ा। वर्तमान में उनका परिवार किराए के मकान में रह रहा है। कर्ज, निवेश और क्रिकेट की महंगाईमुकुल ने बताया कि भारत में प्रोफेशनल क्रिकेट खेलना बेहद महंगा है। महंगे बैट, ग्राउंड फीस, कोचिंग और ट्रेनिंग पर भारी खर्च आता है। उन्होंने कहा कि कई बार उनके परिवार के पास इतना पैसा नहीं था कि वह इन खर्चों को पूरा कर सके, इसलिए कर्ज लेना ही एकमात्र विकल्प बचा था। इसी वजह से परिवार पर आर्थिक बोझ बढ़ता गया। IPL ने बदली जिंदगी, मिला बड़ा मौका आईपीएल 2026 की नीलामी में लखनऊ सुपर जायंट्स ने मुकुल चौधरी को 2.60 करोड़ रुपये में अपनी टीम में शामिल किया। इस मौके ने उनके करियर को नई दिशा दी है। केकेआर के खिलाफ खेली गई उनकी धमाकेदार पारी ने उन्हें रातोंरात स्टार बना दिया। मैच के बाद उन्होंने कहा कि उनकी पहली प्राथमिकता अपने पिता का कर्ज चुकाना और परिवार के लिए अपना घर बनवाना है। भावुक हुए मुकुल, बोले-सबसे पहले परिवारमुकुल ने भावुक होकर कहा कि उनके पिता ने उन्हें क्रिकेटर बनाने के लिए बहुत त्याग किया है। उन्होंने कहा कि “सबसे पहले मैं अपने पिता का कर्ज चुकाऊंगा, जिन्होंने मेरे लिए सब कुछ किया।” उन्होंने यह भी बताया कि उनका सपना अब सिर्फ क्रिकेट खेलना ही नहीं, बल्कि परिवार को आर्थिक रूप से मजबूत बनाना है। संघर्ष से सफलता तक की प्रेरक कहानीमुकुल चौधरी की कहानी उन हजारों युवाओं के लिए प्रेरणा है, जो सीमित संसाधनों के बावजूद बड़े सपने देखते हैं। उनकी मेहनत, लगन और परिवार के त्याग ने उन्हें आईपीएल तक पहुंचाया है। अब उम्मीद है कि वह आने वाले समय में भारतीय क्रिकेट में भी बड़ा नाम बनेंगे।

महाकाल मंदिर पहुंचीं अभिनेत्री सारा अर्जुन, मां के जन्मदिन पर लिया आशीर्वाद, भस्म आरती में हुईं शामिल

उज्जैन। मध्य प्रदेश के उज्जैन स्थित विश्व प्रसिद्ध श्री महाकालेश्वर मंदिर में शनिवार तड़के फिल्म ‘धुरंधर’ की अभिनेत्री सारा अर्जुन अपने परिवार के साथ दर्शन करने पहुंचीं। इस अवसर पर उनके पिता राज अर्जुन और मां सान्या भी मौजूद रहीं। अभिनेत्री सारा ने सुबह करीब 4 बजे होने वाली प्रसिद्ध भस्म आरती में भाग लिया और करीब दो घंटे तक पूरे श्रद्धा भाव के साथ पूजा-अर्चना की। उन्होंने नंदी हॉल से भगवान महाकाल के दर्शन कर “जय महाकाल” के जयकारे लगाए। मां के जन्मदिन पर लिया आशीर्वादसारा अर्जुन पहली बार महाकाल मंदिर पहुंचीं। उन्होंने बताया कि वे अपनी मां के जन्मदिन के अवसर पर भगवान महाकाल का आशीर्वाद लेने आई हैं। दर्शन के दौरान उन्होंने सभी के अच्छे स्वास्थ्य और सुख-समृद्धि की कामना की। भस्म आरती के बाद सारा ने नंदी महाराज के कान में अपनी मनोकामना कही। इसके बाद गर्भगृह की देहरी से जल अर्पित कर भगवान महाकाल का आशीर्वाद लिया। मंदिर प्रबंध समिति द्वारा उनका स्वागत भी किया गया। दर्शन के बाद सारा ने कहा कि महाकाल के दरबार में आकर उन्हें बेहद शांति और सुकून का अनुभव हुआ। उन्होंने मंदिर की व्यवस्थाओं की भी सराहना की। सारा अर्जुन का करियरसारा अर्जुन ने बहुत कम उम्र में विज्ञापनों से अपने करियर की शुरुआत की थी। हाल ही में रिलीज फिल्म ‘धुरंधर’ से उन्हें खास पहचान मिली है। वे हिंदी के अलावा तमिल, तेलुगु और मलयालम फिल्मों में भी काम कर चुकी हैं। भस्म आरती में दिखा अलौकिक नजाराइधर शनिवार तड़के महाकाल मंदिर के कपाट खुलते ही विधि-विधान से पूजन शुरू हुआ। भस्म अर्पण से पहले प्रथम घंटाल बजाकर हरिओम का जल अर्पित किया गया और मंत्रोच्चार के बीच भगवान का ध्यान किया गया। भगवान महाकाल का जलाभिषेक कर पंचामृत (दूध, दही, घी, शक्कर और फलों के रस) से अभिषेक किया गया। कपूर आरती के बाद ज्योतिर्लिंग को कपड़े से ढांककर भस्म रमाई गई। इसके बाद भगवान का रजत मुकुट, रुद्राक्ष माला, बिल्वपत्र और सुगंधित पुष्पों से विशेष श्रृंगार किया गया। मस्तक पर त्रिपुण्ड, त्रिशूल और डमरू का अलंकरण किया गया, जिससे भगवान महाकाल का राजाधिराज स्वरूप प्रकट हुआ। कपूर आरती के पश्चात महानिर्वाणी अखाड़ा की ओर से भस्म अर्पित की गई। मान्यता है कि भस्म अर्पण के बाद भगवान महाकाल निराकार से साकार रूप में भक्तों को दर्शन देते हैं। भक्तिमय हुआ वातावरणभस्म आरती के दौरान सैकड़ों श्रद्धालु मंदिर पहुंचे। “जय श्री महाकाल” के जयकारों से पूरा मंदिर परिसर गूंज उठा। श्रद्धालुओं ने नंदी महाराज के कान में अपनी मनोकामनाएं भी व्यक्त कीं।

भोजशाला मामले में लगातार पांचवे दिन हाईकोर्ट में हुई सुनवाई, हिंदू पक्ष ने रखे ऐतिहासिक साक्ष्य

इंदौर। मध्य प्रदेश के धार जिले में स्थित ऐतिहासिक भोजशाला विवाद मामले में मप्र उच्च न्यायालय की इंदौर खंडपीठ में शुक्रवार को लगातार पांचवें दिन हुई सुनवाई के दौरान हिंदू पक्ष ने कोर्ट के समक्ष ऐतिहासिक, शिल्पकला एवं प्राचीन ग्रंथों के आधार पर विस्तृत तर्क प्रस्तुत किए। हिन्दू पक्षकारों ने दावा किया कि भोजशाला कोई साधारण ढांचा नहीं, बल्कि मां सरस्वती को समर्पित मंदिर एवं संस्कृत शिक्षण केंद्र था, जिसका उल्लेख विभिन्न प्राचीन ग्रंथों, ब्रिटिशकालीन गजेटियर और राजा भोज द्वारा रचित ग्रंथों में मिलता है। वहीं, वरिष्ठ वकील सलमान खुर्शीद ने अपनी व्यस्तता का हवाला देते हुए मामले को 28 अप्रैल तक टालने की मांग की, जिसे उच्च न्यायालय ने सख्ती से खारिज कर दिया और रोजाना (नियमित) सुनवाई जारी रखने का निर्देश दिया। हिंदू पक्ष की दूसरी याचिका पर सुनवाई के दौरान लखनऊ निवासी याचिकाकर्ता कुलदीप तिवारी की ओर से उच्चतम न्यायालय के अधिवक्ता मनीष गुप्ता ने उच्च न्यायालय को अवगत कराया कि राजा भोज द्वारा लिखित प्रसिद्ध ग्रंथ समरांग सूत्रधार में नगर नियोजन और मंदिर वास्तुकला का विस्तृत वर्णन है। इस ग्रंथ में मंदिरों की संरचना, आयाम, खंभों की बनावट, मूर्तियों की शैली और शिल्पकला के सिद्धांतों का उल्लेख मिलता है। अधिवक्ता मनीष गुप्ता ने तर्क दिया कि भोजशाला परिसर की संरचना, उसके आयाम, स्तंभों की बनावट एवं मूर्तिकला की शैली समरांग सूत्रधार में वर्णित सिद्धांतों से मेल खाती है, जिससे यह स्पष्ट होता है कि उक्त स्थल मूल रूप से मंदिर था। उन्होंने 1304 ईस्वी में लिखित चिंतामणि, 19वीं सदी के धार गजेटियर तथा अन्य ऐतिहासिक दस्तावेजों का हवाला देते हुए कहा कि प्राचीन काल में धार ज्ञान-विज्ञान का प्रमुख केंद्र रहा है और भोजशाला विद्या परंपरा का मुख्य स्थल थी। ब्रह्माजी की एक दुर्लभ मूर्ति समरांग सूत्रधार में वर्णितसुनवाई के दौरान यह भी बताया गया कि भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) की खुदाई में प्राप्त ब्रह्माजी की एक दुर्लभ मूर्ति समरांग सूत्रधार में वर्णित युवा ब्रह्मा के स्वरूप से साम्यता रखती है। साथ ही हिंगलाजगढ़, मंदसौर और रायसेन से प्राप्त मूर्तियों की शिल्प परंपरा भी उसी कालखंड से जुड़ी बताई गई। हिंदू पक्ष ने यह भी कहा कि परमार कालीन राजवंश द्वारा अपनाई गई निर्माण शैली तथा उज्जैन स्थित महाकालेश्वर मंदिर की वास्तुकला में भी समानताएं देखी जा सकती हैं। अगली सुनवाई 15 अप्रैल कोहिंदू पक्ष ने कोर्ट में प्रस्तुत तर्कों के आधार पर दावा किया कि भोजशाला स्थल प्राचीन सरस्वती मंदिर था, जहां विद्या, कला और शास्त्रों का अध्ययन किया जाता था। मामले की अगली सुनवाई 15 अप्रैल को नीयत की गई है। इसमें हिंदू पक्ष समरांग सूत्रधार के आयामों और भोजशाला की संरचना के बीच समानताओं को और विस्तार से न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत करेगा।

वैभव सूर्यवंशी की तूफानी पारी: 26 गेंदों में 78 रन, गेंदबाजों को दिया करारा जवाब

नई दिल्ली। आईपीएल 2026 में एक बार फिर 15 वर्षीय युवा बल्लेबाज वैभव सूर्यवंशी ने क्रिकेट जगत का ध्यान अपनी ओर खींच लिया। उन्होंने Rajasthan Royals की ओर से खेलते हुए रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु के खिलाफ मात्र 26 गेंदों में 78 रन ठोक दिए और टीम को आसान जीत दिलाने में अहम भूमिका निभाई। तूफानी पारी में 8 चौके और 7 छक्केइस मुकाबले में वैभव ने 300 के स्ट्राइक रेट से बल्लेबाजी की। उनकी पारी में शामिल रहे: 8 चौके7 छक्के उनकी विस्फोटक बल्लेबाजी ने विपक्षी गेंदबाजों को पूरी तरह दबाव में ला दिया और मैच का रुख राजस्थान के पक्ष में मोड़ दिया। बड़े गेंदबाजों से नहीं घबराते वैभव मैच के बाद वैभव ने कहा कि उनका ध्यान गेंदबाज के नाम पर नहीं, बल्कि सिर्फ गेंद पर होता है। उन्होंने बताया कि सामने चाहे Jasprit Bumrah हों या Josh Hazlewood, वे मानसिक रूप से सिर्फ गेंद को पढ़ने पर ध्यान देते हैं। हेजलवुड पर किया खास हमला इस मैच में वैभव ने विशेष रूप से जोश हेजलवुड की गेंदबाजी पर आक्रामक रुख अपनाया। उन्होंने एक ओवर में लगातार चार गेंदों पर तीन चौके और एक छक्का लगाकर मैच पूरी तरह पलट दिया। आउट होने पर भी जताया अफसोसइतनी शानदार पारी के बावजूद वैभव पूरी तरह संतुष्ट नहीं थे। उन्होंने कहा कि अगर वे अंत तक टिके रहते तो टीम के लिए 20 और रन जोड़ सकते थे, जो मैच को और आसान बना सकते थे। परिवार और कोच का अहम योगदानवैभव ने अपनी सफलता का श्रेय अपने पिता संजीव और सपोर्ट स्टाफ रोमी भिंडर को दिया। उनके अनुसार, दोनों लगातार उन्हें याद दिलाते हैं कि क्रिकेट एक लंबी यात्रा है और फोकस बनाए रखना सबसे जरूरी है। 15 साल की उम्र में ऐसी मैच विनिंग पारी खेलकर वैभव सूर्यवंशी ने साबित कर दिया है कि वह भविष्य के बड़े क्रिकेट सितारों में से एक हो सकते हैं।

चल पड़ीं वंदे भारत ट्रेनें….. अब तक 9.1 करोड़ लोग कर चुके हैं सफर…

नई दिल्ली। वंदे भारत एक्सप्रेस ट्रेनों (Vande Bharat Express Trains) से साल 2025-26 में लगभग 4 करोड़ यात्रियों ने आवाजाही की। यह पिछले वर्ष की तुलना में 34 प्रतिशत अधिक है। इस बढ़ोत्तरी के साथ कुल यात्रियों की संख्या अब 9.1 करोड़ हो चुकी है, जो लगभग 1 लाख ट्रिप्स में पूरी हुई है। शुरू से अब तक वंदे भारत ने भारतीय रेलवे (Indian Railways) की छवि को आधुनिक और तेज गति वाली यात्रा का प्रतीक बना दिया है। ये ट्रेनें सेमी-हाई स्पीड (Semi-High Speed Trains) वाली हैं, जो प्रमुख शहरों को जोड़ती हैं और यात्री अनुभव को बेहतर बनाती हैं। भारतीय रेलवे ने वंदे भारत सेवाओं का विस्तार तेजी से किया है। दिसंबर 2025 तक 164 वंदे भारत ट्रेनें 274 जिलों में चल रही थीं। इन ट्रेनों ने यात्री पसंद को बदल दिया है, क्योंकि ये साफ, आरामदायक और समय से चलने वाली हैं। वित्तीय वर्ष 2025-26 में इनकी औसत ऑक्यूपेंसी 105 प्रतिशत से अधिक रही, जो दर्शाता है कि यात्री इन आधुनिक ट्रेनों को प्राथमिकता दे रहे हैं। रेल मंत्रालय के अनुसार, ये ट्रेनें न केवल छोटी दूरी बल्कि मध्यम दूरी की यात्राओं को भी आसान बना रही हैं। इससे रेलवे की पैसेंजर आय में भी वृद्धि हुई है। बढ़ती लोकप्रियता की क्या है वजहवंदे भारत स्लीपर सेवा ने लंबी दूरी की रात की यात्राओं में नया आयाम जोड़ा है। सर्विस शुरू होने के पहले तीन महीनों में ही इसने 1.21 लाख यात्रियों को लेते हुए 100 प्रतिशत से अधिक ऑक्यूपेंसी हासिल की। ये ट्रेनें 16 कोच वाली हैं, जिनमें एसी फर्स्ट क्लास, टू-टियर और थ्री-टियर की व्यवस्था है। कुल क्षमता 823 यात्रियों की है। आधुनिक सुविधाएं जैसे बायो-वैक्यूम टॉयलेट, पर्सनल रोशनी, चार्जिंग पॉइंट और बेहतर बर्थ डिजाइन यात्री अनुभव को यादगार बनाते हैं। वंदे भारत एक्सप्रेस ट्रेन की पहली सर्विस गुवाहाटी-हावड़ा रूट पर शुरू हुई, जो 960 किलोमीटर की दूरी 14 घंटे में तय करती है। रेलवे भविष्य में और अधिक वंदे भारत स्लीपर ट्रेनें शुरू करने की योजना बना रहा है। कुल मिलाकर वंदे भारत प्रोजेक्ट भारतीय रेलवे के आधुनिकीकरण का अहम हिस्सा है। इससे न केवल यात्री सुविधा बढ़ी है बल्कि रोजगार और इंफ्रास्ट्रक्चर विकास को भी बढ़ावा मिला है। तेज गति, सुरक्षा और आराम के कारण ये ट्रेनें पारंपरिक सेवाओं से आगे निकल चुकी हैं।

US-ईरान आज युद्धविराम को लेकर इस्लाबाद में होंगे आमने-सामने, ट्रंप बोले- अपने आप खुल जाएगा होर्मुज

वाशिंगटन। दुनिया इस वक्त सांसें थामकर पाकिस्तान (Pakistan) की राजधानी इस्लामाबाद (Islamabad.) की ओर देख रही है, जहां अमेरिका और ईरान (America and Iran) के बीच युद्धविराम को एक स्थायी शांति समझौते (Ceasefire Permanent Peace Agreement) में बदलने की कोशिशें शुरू हो गई हैं। हालांकि, बातचीत की मेज सजने से पहले ही बयानों की तल्खी और जमीन पर जारी हिंसा ने इस मिशन को ‘करो या मरो’ की स्थिति में ला खड़ा किया है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (American President Donald Trump) ने जहां विश्वास जताया है कि स्ट्रेट ऑफ होर्मुज बहुत जल्द अपने आप खुल जाएगा, वहीं ईरान ने अपनी पूर्व शर्तों पर अड़कर कूटनीतिक पेच फंसा दिया है। वाशिंगटन में पत्रकारों से बातचीत के दौरान राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से जब पूछा गया कि उनके लिए एक अच्छा समझौता क्या होगा तो उन्होंने अपने चिर-परिचित अंदाज में जवाब दिया, “कोई परमाणु हथियार नहीं। बस, 99% समझौता यही है।” ट्रंप ने वैश्विक ऊर्जा संकट की सबसे बड़ी वजह बने स्ट्रेट हॉर्मुज पर बड़ा दावा किया। उन्होंने कहा, “स्ट्रेट ऑफ होर्मुज अपने आप खुल जाएगा। हम इसे बहुत जल्द खोल देंगे।” ट्रंप का यह बयान उन वैश्विक बाजारों के लिए राहत की उम्मीद लेकर आया है जो तेल की आपूर्ति रुकने से त्राहि-त्राहि कर रहे हैं। इस्लामाबाद में आमने-सामनेशुक्रवार को ईरानी संसदीय अध्यक्ष मोहम्मद बागेर गालिबफ के नेतृत्व में एक उच्चस्तरीय प्रतिनिधिमंडल इस्लामाबाद पहुंच गया। दूसरी ओर अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस भी अमेरिका का प्रतिनिधित्व करने के लिए पाकिस्तान के रास्ते में हैं। ईरान की शर्तें, अमेरिका की चेतावनीईरान ने स्पष्ट कर दिया है कि वार्ता तभी आगे बढ़ेगी जब अमेरिका लेबनान में इजराइली हमलों को रुकवाएगा और ईरान की फ्रीज की गई संपत्तियों को बहाल करेगा। जेडी वेंस ने इस्लामाबाद पहुंचने से पहले ही तेहरान को चेतावनी दी है कि वह वाशिंगटन के साथ खेलने की कोशिश न करे। पाकिस्तानी प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने इस स्थिति की गंभीरता को समझते हुए कहा, “अस्थायी युद्धविराम तो हो गया, लेकिन अब असली चुनौती इसे स्थायी शांति में बदलने की है। यह बातचीत का वह चरण है जिसे ‘मेक ऑर ब्रेक’ कहा जाता है।” शांति वार्ता के बीच 357 मौतेंएक तरफ इस्लामाबाद में शांति की बात हो रही है, तो दूसरी तरफ लेबनान में इजराइली हवाई हमले थमने का नाम नहीं ले रहे हैं। शुक्रवार को दक्षिणी शहर नबातीह में एक हमले में लेबनान के 13 सुरक्षाकर्मियों की मौत हो गई। लेबनान के स्वास्थ्य मंत्रालय के अनुसार, बुधवार से जारी बड़े हमलों में मरने वालों की संख्या 357 तक पहुंच गई है, जबकि 1,223 लोग घायल हुए हैं। हिंसा का यह दौर ईरान के लिए वार्ता की मेज पर सबसे बड़ा मुद्दा बना हुआ है। क्या ईरान वाकई खत्म हो चुका है?ट्रंप प्रशासन लगातार दावा कर रहा है कि हफ्तों तक चले युद्ध में ईरानी सैन्य क्षमता पूरी तरह तबाह हो चुकी है। ज्वाइंट चीफ्स ऑफ स्टाफ के अध्यक्ष जनरल डैन केन के अनुसार, अमेरिका ने ईरान के 13,000 से अधिक ठिकानों को निशाना बनाया है, जिसमें उसकी वायु सेना और हथियार फैक्ट्रियां शामिल हैं। हालांकि, स्वतंत्र डेटा और जमीनी हकीकत कुछ और ही बयां कर रही है। अमेरिकी ग्रुप ACLED के आंकड़ों के अनुसार, 28 फरवरी से शुरू हुए युद्ध के बाद से बुधवार तक ईरानी हमलों की रफ्तार में कोई बड़ी कमी नहीं आई है। सैन्य विशेषज्ञों का मानना है कि भले ही ईरान को भारी नुकसान हुआ है, लेकिन वह अब भी जवाबी हमला करने या अपना बचाव करने की क्षमता रखता है।