गोल्ड-सिल्वर में उछाल जारी, कमजोर डॉलर ने बढ़ाई निवेशकों की दिलचस्पी

नई दिल्ली। वैश्विक बाजार में अनिश्चितता और डॉलर की कमजोरी के बीच सोने-चांदी की कीमतों में लगातार तीसरे हफ्ते तेजी देखने को मिली है। सुरक्षित निवेश (सेफ-हेवन) की बढ़ती मांग और भू-राजनीतिक हालात ने कीमती धातुओं को मजबूती दी है। सोने में 1.65% साप्ताहिक उछालइस हफ्ते सोने की कीमतों में 1.65 प्रतिशत की बढ़त दर्ज की गई। मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (MCX) पर शुक्रवार को सोने के जून फ्यूचर्स हल्की बढ़त के साथ करीब 1,52,690 रुपए प्रति 10 ग्राम पर कारोबार करते नजर आए। वहीं इंडिया बुलियन एंड ज्वैलर्स एसोसिएशन (IBJA) के अनुसार, 999 प्योरिटी वाले सोने का भाव बढ़कर 1,50,327 रुपए प्रति 10 ग्राम तक पहुंच गया, जो सप्ताह की शुरुआत से ऊंचा स्तर है। चांदी भी चमकी, कीमतों में मजबूतीचांदी की कीमतों में भी तेजी का रुख बना रहा। एमसीएक्स पर मई फ्यूचर्स 2,43,300 रुपए प्रति किलोग्राम के आसपास ट्रेड करते दिखे।आईबीजेए के मुताबिक, 999 प्योरिटी वाली चांदी 2,39,934 रुपए प्रति किलोग्राम तक पहुंच गई, जो पिछले सप्ताह की तुलना में मजबूत बढ़त दर्शाता है। अंतरराष्ट्रीय बाजार का असरअंतरराष्ट्रीय स्तर पर कॉमेक्स (COMEX) पर सोना लगभग 3% की साप्ताहिक बढ़त के साथ 4,787 डॉलर प्रति ट्रॉय औंस के करीब बंद हुआ। विश्लेषकों का मानना है कि 5,000 डॉलर का स्तर एक बड़ा रेजिस्टेंस है, जिसे पार करने पर तेजी और तेज हो सकती है। डॉलर की कमजोरी और फेड नीति बनी वजहअमेरिका-ईरान के बीच तनाव कम होने और सीजफायर बातचीत के चलते डॉलर पर दबाव बना है। इससे निवेशकों ने ब्याज दरों को लेकर नए सिरे से आकलन शुरू किया है।कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट से महंगाई कम होने की उम्मीद बढ़ी है, जिससे फेडरल रिजर्व द्वारा भविष्य में ब्याज दरों में कटौती की संभावना मजबूत हुई है। बाजार में संतुलन, लेकिन सतर्कता बरकरारकमोडिटी बाजार इस हफ्ते संतुलित लेकिन सतर्क माहौल में रहा। हालिया उतार-चढ़ाव के बाद अब कीमतों में स्थिरता के शुरुआती संकेत भी देखने को मिल रहे हैं, हालांकि वैश्विक अनिश्चितता अभी भी बनी हुई है। सपोर्ट और रेजिस्टेंस स्तरविशेषज्ञों के अनुसार: सोना: 1,48,000–1,46,000 रुपए मजबूत सपोर्ट, 1,54,000–1,55,000 रुपए रेजिस्टेंसचांदी: 2,30,000–2,25,000 रुपए सपोर्ट, गहरा सपोर्ट 2,05,000–2,00,000 रुपए साथ ही डॉलर-रुपया (USD/INR) की चाल आगे भी कीमतों की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभाएगी।
सोशल मीडिया नियंत्रण को लेकर बढ़ा राजनीतिक विवाद, केजरीवाल ने सरकार पर लगाए गंभीर आरोप

नई दिल्ली। देश में सोशल मीडिया के संभावित नियमन को लेकर एक नई राजनीतिक बहस शुरू हो गई है, जिसमें आम आदमी पार्टी के प्रमुख Arvind Kejriwal ने केंद्र सरकार और प्रधानमंत्री Narendra Modi पर गंभीर आरोप लगाए हैं। यह विवाद सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X के कम्युनिटी नोट्स फीचर को लेकर प्रस्तावित बदलावों के संदर्भ में सामने आया है। अरविंद केजरीवाल ने आरोप लगाया है कि सरकार सोशल मीडिया पर नियंत्रण स्थापित करने की दिशा में कदम बढ़ा रही है, जिससे आम जनता विशेषकर युवाओं की आवाज को दबाया जा सके। उनका कहना है कि देश में बढ़ती असंतुष्टि और आलोचना से निपटने के बजाय सरकार नियमों के जरिए अभिव्यक्ति को सीमित करने का प्रयास कर रही है। उन्होंने यह भी कहा कि वर्तमान परिस्थितियों में सोशल मीडिया एक ऐसा मंच बन गया है जहां युवा अपनी राय खुलकर व्यक्त करते हैं और सरकार की नीतियों पर सवाल उठाते हैं। ऐसे में यदि इस मंच पर नियंत्रण की कोशिश की जाती है तो यह लोकतांत्रिक मूल्यों के लिए चिंताजनक संकेत हो सकता है। इस पूरे विवाद की पृष्ठभूमि में सूचना प्रौद्योगिकी से जुड़े नियमों में संभावित संशोधन बताए जा रहे हैं। चर्चा है कि कम्युनिटी नोट्स जैसे यूजर आधारित तथ्य जांच तंत्र को सरकारी दायरे में लाने पर विचार किया जा रहा है। यदि ऐसा होता है तो उन टिप्पणियों या नोट्स को हटाने का अधिकार सरकार के पास हो सकता है जो आधिकारिक दावों या सूचनाओं को चुनौती देते हैं। विपक्षी दलों का आरोप है कि इस प्रकार के बदलाव अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर प्रत्यक्ष प्रभाव डाल सकते हैं। उनका मानना है कि इससे स्वतंत्र रूप से तथ्य प्रस्तुत करने और सरकारी नीतियों की आलोचना करने की क्षमता प्रभावित हो सकती है। वहीं सत्ता पक्ष की ओर से इस विषय पर औपचारिक स्थिति स्पष्ट किए जाने की प्रतीक्षा की जा रही है। राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि डिजिटल युग में सोशल मीडिया केवल संवाद का माध्यम नहीं रह गया है, बल्कि यह जनमत निर्माण का एक शक्तिशाली उपकरण बन चुका है। ऐसे में इसके नियमन और स्वतंत्रता के बीच संतुलन बनाना किसी भी सरकार के लिए चुनौतीपूर्ण कार्य होता है। इस मुद्दे ने एक बार फिर यह बहस छेड़ दी है कि सोशल मीडिया पर नियंत्रण की सीमाएं क्या होनी चाहिए और किस हद तक सरकार को हस्तक्षेप का अधिकार होना चाहिए। एक ओर जहां गलत सूचनाओं पर रोक लगाने की जरूरत बताई जाती है, वहीं दूसरी ओर अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता को सुरक्षित रखने की मांग भी उतनी ही मजबूत है। इस विषय पर राजनीतिक बयानबाजी तेज है और आने वाले समय में इस पर व्यापक चर्चा और स्पष्ट नीतिगत दिशा सामने आने की संभावना है, जिससे यह तय होगा कि देश में डिजिटल अभिव्यक्ति का भविष्य किस दिशा में आगे बढ़ेगा।
मैहर हाईवे पर हादसा: खड़ी ट्रैक्टर-ट्रॉली में ट्रेलर की जोरदार टक्कर, 15 घायल, 2 की हालत गंभीर

मैहर। मध्य प्रदेश के मैहर जिले में शनिवार तड़के एक दर्दनाक सड़क हादसा हुआ जहां तेज रफ्तार ट्रेलर ने खड़ी ट्रैक्टर ट्रॉली को टक्कर मार दी। इस हादसे में करीब 15 लोग घायल हो गए जिनमें दो की हालत गंभीर बताई जा रही है। जानकारी के अनुसार ट्रैक्टर ट्रॉली में सवार सभी लोग एक बरहों कार्यक्रम से लौट रहे थे और बेलदरा जा रहे थे। रास्ते में डीजल खत्म होने के कारण वाहन को राष्ट्रीय राजमार्ग 30 पर रिगरा ब्रिज के पास किनारे खड़ा कर दिया गया था। शनिवार सुबह करीब 5 बजे पीछे से आ रहे एक तेज रफ्तार ट्रेलर ने खड़े वाहन को जोरदार टक्कर मार दी। टक्कर इतनी तेज थी कि ट्रॉली में बैठे लोग घायल हो गए और मौके पर अफरा तफरी मच गई। हादसे की सूचना मिलते ही डायल 112 हाइवे पेट्रोलिंग और एंबुलेंस मौके पर पहुंचीं। सभी घायलों को तुरंत सिविल अस्पताल मैहर और अमरपाटन भेजा गया जहां उनका इलाज जारी है। पुलिस के मुताबिक घायलों में संखिबाई साकेत अजय बुंकर प्रदीप साकेत और संतोष साकेत सहित अन्य लोग शामिल हैं। प्राथमिक उपचार के बाद दो गंभीर घायलों को जिला अस्पताल सतना रेफर किया गया है। टक्कर के बाद हाईवे पर लंबा जाम लग गया था जिसे पुलिस ने मौके पर पहुंचकर नियंत्रित किया और यातायात बहाल कराया। नादन देहात थाना प्रभारी पंचराज सिंह ने बताया कि ट्रेलर को क्रेन की मदद से जब्त कर लिया गया है और चालक को हिरासत में लिया गया है। मामले में केस दर्ज कर आगे की जांच की जा रही है।
निवेशकों के लिए भारत सुरक्षित और खुला बाजार, SEBI प्रमुख ने जताया भरोसा

नई दिल्ली।भारत आज भी वैश्विक निवेशकों के लिए एक खुला, स्थिर और आकर्षक बाजार बना हुआ है। भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (SEBI) के चेयरमैन तुहिन कांत पांडे ने कहा कि मजबूत आर्थिक आधार, तेजी से बढ़ता निवेशक वर्ग और सुधार-आधारित नीतियां भारत को वैश्विक पूंजी के लिए खास बनाती हैं। 🇺🇸 सैन फ्रांसिस्को में निवेशकों से संवादयह बयान सैन फ्रांसिस्को में आयोजित एक इंटरएक्टिव सेशन के दौरान दिया गया, जिसे भारतीय उद्योग परिसंघ (CII) और भारतीय महावाणिज्य दूतावास ने संयुक्त रूप से आयोजित किया था। इस कार्यक्रम में वैश्विक निवेशकों, वेंचर कैपिटल फर्म्स और उद्योग जगत के दिग्गजों ने हिस्सा लिया। पारदर्शी और टेक्नोलॉजी-आधारित रेगुलेटरी सिस्टमसेबी प्रमुख ने कहा कि नियामकीय ढांचा पारदर्शी, परामर्श-आधारित और तकनीक-संचालित है। सेबी का फोकस ऐसी नीतियों पर है जो जोखिम को ध्यान में रखते हुए निवेश को आसान बनाएं और पूंजी बाजार की स्थिरता बनाए रखें। उन्होंने बताया कि विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (FPI) के रजिस्ट्रेशन और री-केवाईसी प्रक्रिया को आसान किया गया है। साथ ही डिजिटल प्लेटफॉर्म का बढ़ता उपयोग, मजबूत आईपीओ बाजार और वैकल्पिक निवेश फंड (AIF) की बढ़ती भूमिका बाजार को और गहराई दे रही है। घरेलू निवेशकों की बढ़ती भागीदारीभारत के पूंजी बाजार की एक बड़ी ताकत घरेलू निवेशकों की बढ़ती भागीदारी है। इससे बाजार को स्थिरता और मजबूती मिल रही है, जो वैश्विक निवेशकों के लिए भी भरोसे का संकेत है। मजबूत आर्थिक संकेतक दे रहे सहारातुहिन कांत पांडे ने कहा कि नियंत्रित महंगाई, मजबूत विदेशी मुद्रा भंडार और संतुलित बाहरी खाते भारतीय अर्थव्यवस्था को मजबूत आधार देते हैं। यही कारण है कि भारत दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्थाओं में शामिल है। भारत-अमेरिका व्यापार को 500 अरब डॉलर तक ले जाने का लक्ष्यइस मौके पर के. श्रीकर रेड्डी ने कहा कि भारत और अमेरिका के बीच व्यापार 240 अरब डॉलर से अधिक हो चुका है और इसे 2030 तक 500 अरब डॉलर तक ले जाने का लक्ष्य है। वहीं रामकृष्णन मुकुंदन ने सरकार, उद्योग और वैश्विक निवेशकों के बीच सहयोग को भारत की भविष्य की ग्रोथ के लिए अहम बताया। उन्होंने कहा कि भारत की प्रगति वैश्विक साझेदारी, खासकर अमेरिका के साथ, पर निर्भर करेगी। निवेश माहौल को और बेहतर बनाने पर जोरसत्र के दौरान निवेशकों और नीति-निर्माताओं के बीच खुली चर्चा हुई। इसमें नियामकीय प्रक्रियाओं को सरल बनाने, क्रॉस-बॉर्डर निवेश नियमों में स्पष्टता लाने, डीप-टेक सेक्टर में फंडिंग बढ़ाने और डिजिटल प्रक्रियाओं को तेज करने जैसे मुद्दों पर जोर दिया गया।
सागरमाला का बड़ा असर! पोर्ट और लॉजिस्टिक्स सेक्टर में रिकॉर्ड विकास

नई दिल्ली। देश के समुद्री क्षेत्र में पिछले एक दशक में ऐतिहासिक बदलाव देखने को मिला है और इसमें सागरमाला प्रोग्राम की अहम भूमिका रही है। बंदरगाहों के आधुनिकीकरण से लेकर जलमार्गों के विकास तक, इस महत्वाकांक्षी योजना ने भारत की लॉजिस्टिक्स और व्यापारिक क्षमता को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया है। 845 परियोजनाएं शुरू, 315 पूरीपत्तन, पोत परिवहन और जलमार्ग मंत्रालय के अनुसार, ‘सागरमाला’ के तहत अब तक करीब 845 परियोजनाएं शुरू की जा चुकी हैं, जिनकी कुल लागत लगभग 6.06 लाख करोड़ रुपए है। इनमें से 1.57 लाख करोड़ रुपए की लागत वाली 315 परियोजनाएं 24 मार्च 2026 तक पूरी हो चुकी हैं।इसके अलावा 210 परियोजनाएं निर्माणाधीन हैं, जबकि 320 परियोजनाएं अभी योजना चरण में हैं। ‘सागरमाला 2.0’ से निवेश को मिलेगा बड़ा बूस्टसरकार अब सागरमाला 2.0 के जरिए इस पहल को और आगे बढ़ा रही है। इसके तहत 85,482 करोड़ रुपए के निवेश से लगभग 3.6 लाख करोड़ रुपए के कुल निवेश को आकर्षित करने का लक्ष्य रखा गया है। इससे देश में पोर्ट-आधारित औद्योगिक विकास को नई गति मिलने की उम्मीद है। कार्गो हैंडलिंग और कनेक्टिविटी में बड़ा सुधार‘सागरमाला’ के प्रभाव से भारत के प्रमुख बंदरगाहों की क्षमता और दक्षता में उल्लेखनीय सुधार हुआ है। वित्त वर्ष 2025-26 में बंदरगाहों ने 915.17 मिलियन टन कार्गो हैंडल किया, जो तय लक्ष्य से अधिक है और सालाना आधार पर 7.06% की वृद्धि दर्शाता है। साथ ही, जहाजों का औसत टर्नअराउंड टाइम 2014 के 96 घंटे से घटकर 2025 में 49.5 घंटे रह गया है। इससे माल ढुलाई की गति बढ़ी है और लॉजिस्टिक्स लागत में कमी आई है। वैश्विक स्तर पर मजबूत हुई भारत की स्थितिभारतीय बंदरगाहों की वैश्विक रैंकिंग में भी सुधार हुआ है। देश के 9 बंदरगाह अब दुनिया के टॉप-100 बंदरगाहों में शामिल हो चुके हैं।विशाखापत्तनम बंदरगाह कंटेनर ट्रैफिक के मामले में दुनिया के शीर्ष 20 बंदरगाहों में अपनी जगह बना चुका है, जो भारत के लिए बड़ी उपलब्धि है। जलमार्गों से बढ़ी माल ढुलाई, 700% की छलांगअंतर्देशीय जलमार्गों के जरिए कार्गो परिवहन में भी जबरदस्त वृद्धि दर्ज की गई है। यह 2013-14 के 18.10 मिलियन टन से बढ़कर 2024-25 में 145.50 मिलियन टन हो गया है, यानी करीब 700% की बढ़ोतरी। इससे देश का लॉजिस्टिक्स नेटवर्क अधिक कुशल और विविधतापूर्ण बन गया है। मछुआरों और रोजगार पर सकारात्मक असर‘सागरमाला’ के तहत 1,057 करोड़ रुपए की लागत से 11 फिशिंग हार्बर परियोजनाएं पूरी की गई हैं, जिससे 30,000 से ज्यादा मछुआरों को सीधा लाभ मिला है।इसके अलावा, कौशल विकास कार्यक्रमों के जरिए तटीय क्षेत्रों में लोगों की आजीविका भी बेहतर हुई है। सरकार का अनुमान है कि इस कार्यक्रम से लगभग 1 करोड़ रोजगार सृजित होंगे, जिनमें 40 लाख प्रत्यक्ष और 60 लाख अप्रत्यक्ष नौकरियां शामिल हैं।
बिहार में नेतृत्व परिवर्तन को लेकर सियासी हलचल तेज, नया मुख्यमंत्री अभी भी सस्पेंस में

नई दिल्ली।बिहार की राजनीति इस समय बड़े राजनीतिक बदलाव और नेतृत्व को लेकर चल रही अटकलों के बीच एक निर्णायक मोड़ पर खड़ी है। मुख्यमंत्री पद को लेकर जारी चर्चाओं के बीच केंद्रीय मंत्री और लोक जनशक्ति पार्टी के प्रमुख Chirag Paswan ने स्थिति स्पष्ट करते हुए कहा है कि वे मुख्यमंत्री पद की दौड़ में शामिल नहीं हैं। उनके इस बयान के बाद राजनीतिक हलकों में चल रही कई अटकलों पर विराम लगने की बात कही जा रही है। राज्य में सत्ता परिवर्तन और नए नेतृत्व के गठन को लेकर लगातार मंथन जारी है। विभिन्न राजनीतिक दलों और गठबंधन सहयोगियों के बीच यह चर्चा तेज है कि आने वाली सरकार में नेतृत्व का चेहरा बदल सकता है, लेकिन गठबंधन की संरचना में बड़े बदलाव की संभावना कम है। इसी वजह से राजनीतिक समीकरणों पर सभी की नजरें टिकी हुई हैं। चिराग पासवान ने स्पष्ट किया कि मुख्यमंत्री पद के चयन का निर्णय किसी एक व्यक्ति के आधार पर नहीं बल्कि सभी सहयोगी दलों के विधायकों की सामूहिक सहमति से लिया जाना चाहिए। उन्होंने यह भी संकेत दिया कि नए नेतृत्व का चयन गठबंधन के भीतर आपसी सहमति और रणनीतिक संतुलन के आधार पर किया जाएगा। राजनीतिक गलियारों में यह भी चर्चा है कि नई सरकार के गठन के दौरान मंत्रिमंडल में बड़े स्तर पर बदलाव देखने को मिल सकते हैं। कुछ पुराने चेहरों को हटाकर नए और युवा नेताओं को जिम्मेदारी दिए जाने की संभावना जताई जा रही है, जिससे प्रशासनिक व्यवस्था में नई ऊर्जा लाई जा सके। इसके साथ ही यह भी माना जा रहा है कि सत्ता परिवर्तन की प्रक्रिया एक तय राजनीतिक कार्यक्रम के तहत आगे बढ़ रही है, जिसमें आने वाले दिनों में महत्वपूर्ण बैठकों और औपचारिक प्रक्रियाओं के जरिए स्थिति और स्पष्ट हो जाएगी। राजनीतिक विशेषज्ञों का कहना है कि यह पूरा घटनाक्रम राज्य की राजनीति में एक नए अध्याय की शुरुआत हो सकता है। विपक्षी दलों ने इस पूरे घटनाक्रम पर सरकार को घेरते हुए इसे राजनीतिक अस्थिरता से जोड़ने की कोशिश की है। उनका कहना है कि सत्ता पक्ष के भीतर चल रही यह हलचल जनता के मुद्दों से ध्यान भटकाने का प्रयास हो सकता है, जबकि सत्तापक्ष इसे लोकतांत्रिक प्रक्रिया का हिस्सा बता रहा है। इस बीच चिराग पासवान के बयान के बाद यह साफ हो गया है कि फिलहाल उनकी प्राथमिक भूमिका राष्ट्रीय राजनीति में बनी रहेगी और वे मुख्यमंत्री पद की दौड़ में सक्रिय नहीं हैं। इससे यह संकेत भी मिला है कि राज्य का अगला नेतृत्व किसी सर्वसम्मत और नए चेहरे पर केंद्रित हो सकता है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि आने वाले कुछ दिनों में होने वाली बैठकों और निर्णयों के बाद बिहार की राजनीतिक तस्वीर पूरी तरह स्पष्ट हो जाएगी। फिलहाल स्थिति सस्पेंस में है और सभी की नजरें गठबंधन के अंतिम फैसले पर टिकी हुई हैं।
भोपाल पहुंचकर रुकी आंगनवाड़ी न्याय पदयात्रा, 200 किमी पैदल आए कार्यकर्ताओं को पुलिस ने रोका

भोपाल। मध्य प्रदेश में आंगनवाड़ी और आशा कार्यकर्ताओं को सरकारी कर्मचारी का दर्जा देने की मांग को लेकर निकली आंगनवाड़ी न्याय पदयात्रा राजधानी पहुंचते ही थम गई। बैतूल से करीब 200 किलोमीटर का सफर तय कर आए आंदोलनकारियों को पुलिस ने बरकतुल्ला यूनिवर्सिटी के पास रोक दिया और मुख्यमंत्री निवास की ओर बढ़ने की अनुमति नहीं दी।11 दिन में तय किया लंबा सफर यह पदयात्रा 1 अप्रैल को बैतूल जिले के अंबेडकर चौक से शुरू हुई थी। लक्ष्य था 11 दिनों में भोपाल पहुंचकर मुख्यमंत्री को ज्ञापन सौंपना और आंगनवाड़ी व आशा कार्यकर्ताओं की समस्याओं को सीधे सरकार तक पहुंचाना। पूर्व छात्र नेता रामकुमार नागवंशी के नेतृत्व में निकली इस यात्रा को आंगनवाड़ी न्याय पदयात्रा नाम दिया गया। उनका कहना है कि गांव-गांव में सेवाएं देने वाली इन कार्यकर्ताओं को न तो उचित वेतन मिलता है और न ही सरकारी कर्मचारी का दर्जा, इसलिए यह आंदोलन उनके अधिकारों के लिए है। राजधानी में एंट्री पर पुलिस ने रोका रास्ता शनिवार सुबह करीब 8:45 बजे जब पदयात्रा बरकतुल्ला यूनिवर्सिटी के पास पहुंची, तब पुलिस ने आगे बढ़ने से रोक दिया। आंदोलनकारियों का आरोप है कि उन्हें मुख्यमंत्री निवास तक नहीं जाने दिया गया और पास ही बैठा दिया गया।व्यक्तिगत अनुभव से जुड़ा आंदोलन रामकुमार नागवंशी ने बताया कि उनके परिवार की महिलाएं भी आंगनवाड़ी कार्यकर्ता हैं। उनके संघर्ष को करीब से देखने के बाद ही उन्होंने इस पदयात्रा की शुरुआत की। उनके मुताबिक यह लाखों महिलाओं के अधिकारों की लड़ाई है। तेज गर्मी के बावजूद कार्यकर्ताओं ने लगातार पैदल यात्रा जारी रखी। रास्ते में गांव-गांव जाकर लोगों से संवाद किया और समर्थन जुटाया। मुख्य मांगें और आगे की रणनीति आंदोलनकारियों की प्रमुख मांग है कि आंगनवाड़ी और आशा कार्यकर्ताओं को सरकारी कर्मचारी का दर्जा दिया जाए, साथ ही उनके वेतन और सुविधाओं में सुधार किया जाए। उनका कहना है कि जब तक मांगें पूरी नहीं होतीं, आंदोलन जारी रहेगा।
डिजिटल पेमेंट में भारत का दबदबा, UPI ने दुनिया में बनाया रिकॉर्ड

नई दिल्ली। भारत का डिजिटल पेमेंट सिस्टम यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस (UPI) आज अपने 10 साल पूरे कर चुका है और इस दौरान उसने न सिर्फ देश में बल्कि वैश्विक स्तर पर भी अपनी मजबूत पहचान बनाई है। सरकार के आंकड़ों के अनुसार, भारत अब दुनिया के कुल रियल-टाइम डिजिटल पेमेंट्स में करीब 49 प्रतिशत हिस्सेदारी रखता है, जो देश की तेजी से बढ़ती डिजिटल ताकत का प्रमाण है। रिकॉर्ड तोड़ ग्रोथ, आंकड़े बताते हैं कहानीयूपीआई की सफलता का अंदाजा इसके लेनदेन के आंकड़ों से लगाया जा सकता है। जनवरी 2026 में ही यूपीआई के जरिए 21.70 अरब ट्रांजैक्शन हुए, जिनकी कुल वैल्यू 28.33 लाख करोड़ रुपये रही। आज देश के कुल रिटेल डिजिटल भुगतान में यूपीआई की हिस्सेदारी 81 प्रतिशत तक पहुंच चुकी है, जो इसकी लोकप्रियता को दर्शाता है। अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) ने भी यूपीआई को दुनिया का सबसे बड़ा रियल-टाइम पेमेंट सिस्टम बताया है। खास बात यह है कि महज एक दशक से भी कम समय में इस प्लेटफॉर्म ने 12,000 गुना से ज्यादा ट्रांजैक्शन वॉल्यूम और 4,000 गुना से अधिक वैल्यू की वृद्धि दर्ज की है। गांव से शहर तक पहुंचा डिजिटल क्रांति का असरयूपीआई की असली ताकत सिर्फ बड़े आंकड़ों में नहीं, बल्कि इसके व्यापक उपयोग में है। आज यह सिस्टम शहरों से लेकर गांवों तक पहुंच चुका है। ऑटो रिक्शा चालक, छोटे दुकानदार, सब्जी विक्रेता और मंडियों में भी यूपीआई का इस्तेमाल तेजी से बढ़ा है। सिर्फ एक स्मार्टफोन की मदद से लोग देश के किसी भी कोने में तुरंत पैसे भेज सकते हैं। इससे न केवल लेनदेन आसान हुआ है, बल्कि शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों के बीच की आर्थिक दूरी भी कम हुई है और वित्तीय समावेशन को मजबूती मिली है। वैश्विक स्तर पर बढ़ रहा यूपीआई का दायराभारत का यह डिजिटल मॉडल अब दुनिया के लिए उदाहरण बन चुका है। विश्व बैंक समेत कई अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं ने इसकी दक्षता और समावेशी मॉडल की सराहना की है। यूपीआई अब अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी विस्तार कर रहा है। यह सिस्टम संयुक्त अरब अमीरात, सिंगापुर, भूटान, नेपाल, श्रीलंका, फ्रांस, मॉरीशस और कतर जैसे देशों में पहुंच चुका है। इससे क्रॉस-बॉर्डर पेमेंट और रेमिटेंस पहले से कहीं ज्यादा आसान हो गए हैं। सिर्फ पेमेंट नहीं, बन रहा फाइनेंशियल प्लेटफॉर्मयूपीआई अब केवल पैसे भेजने का माध्यम नहीं रहा, बल्कि यह एक संपूर्ण फाइनेंशियल प्लेटफॉर्म बनता जा रहा है। यूपीआई लाइट छोटे और तेज भुगतान को आसान बना रहा है, वहीं यूपीआई ऑटोपे के जरिए बिल और सब्सक्रिप्शन जैसे नियमित भुगतान ऑटोमैटिक हो गए हैं। इसके अलावा, फिनटेक कंपनियां और एनबीएफसी यूपीआई के जरिए प्री-अप्रूव्ड लोन, आसान रीपेमेंट और कस्टमाइज्ड फाइनेंशियल सेवाएं भी उपलब्ध करा रही हैं, जिससे डिजिटल अर्थव्यवस्था को नई गति मिल रही है।
डिंडौरी में दशगात्र भोज करने के बाद 70 से ज्यादा ग्रामीण बीमार, फूड पॉइजनिंग की आशंका

डिंडौरी। मध्य प्रदेश के डिंडौरी जिले के मेहंदवानी जनपद के ग्राम झामझोला में दशगात्र भोज के बाद बड़ा स्वास्थ्य संकट खड़ा हो गया। शुक्रवार रात आयोजित इस कार्यक्रम में खाना खाने के बाद 70 से अधिक ग्रामीणों की तबीयत बिगड़ गई जिन्हें अलग-अलग अस्पतालों में भर्ती कराया गया है। भोज के बाद देर रात शुरू हुई परेशानी ग्रामीणों के मुताबिक सुखचैन धुर्वे के घर आयोजित दशगात्र कार्यक्रम में रात करीब 10 बजे लोगों ने पूड़ी सब्जी दाल और चावल का भोजन किया। इसके बाद सभी अपने घर लौट गए लेकिन देर रात करीब 12 बजे से लोगों को उल्टी-दस्त की शिकायत शुरू हो गई। देखते ही देखते कई ग्रामीण बीमार पड़ गए। अस्पतालों में बढ़ी मरीजों की संख्या शनिवार सुबह से ही मरीजों का मेहंदवानी सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पहुंचना शुरू हो गया। गंभीर स्थिति वाले कुछ मरीजों को मंडला जिले के मोहगांव अस्पताल रेफर किया गया है। डॉक्टरों के अनुसार सभी मरीज फिलहाल खतरे से बाहर हैं। घटना की सूचना मिलते ही स्वास्थ्य विभाग पुलिस और राजस्व विभाग की टीमें गांव पहुंच गईं। मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. मनोज पांडेय के निर्देश पर गांव में अस्थायी मेडिकल कैंप लगाकर इलाज शुरू किया गया। मरीजों को दवाइयां दी जा रही हैं और उनकी लगातार निगरानी की जा रही है। 50 से ज्यादा मरीज मोहगांव में भर्ती स्वास्थ्य विभाग के अनुसार मोहगांव अस्पताल में 50 से अधिक मरीज भर्ती हैं जबकि मेहंदवानी अस्पताल में 20 से ज्यादा लोगों का इलाज चल रहा है। सभी ने एक ही भोज का खाना खाने की बात कही है जिससे भोजन में गड़बड़ी की आशंका जताई जा रही है। जिला प्रशासन ने भोज में परोसे गए भोजन के नमूने जांच के लिए भेज दिए हैं। शुरुआती तौर पर फूड पॉइजनिंग की संभावना जताई जा रही है हालांकि वास्तविक कारण रिपोर्ट आने के बाद ही स्पष्ट होगा। प्रशासन ने ग्रामीणों से अपील की है कि तबीयत खराब होने पर तुरंत नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र में इलाज कराएं। साथ ही गांव में साफ-सफाई और स्वच्छ पेयजल व्यवस्था बनाए रखने के निर्देश भी दिए गए हैं।
फिल्म जाट के एक साल पूरे होने पर सीक्वल की घोषणा पुराने कलाकारों के साथ फिर जमेगी जोड़ी

नई दिल्ली। एक्शन सुपरस्टार सनी देओल के प्रशंसकों के लिए एक बड़ी खुशखबरी सामने आई है जहाँ अभिनेता ने अपनी हालिया सुपरहिट एक्शन फिल्म की पहली वर्षगांठ के अवसर पर इसके अगले भाग की आधिकारिक घोषणा कर दी है। गबरू और लाहौर 1947 जैसी बड़ी फिल्मों की व्यस्त तैयारियों के बीच अभिनेता ने अपनी फिल्म जाट के सीक्वल जाट 2 का ऐलान कर मनोरंजन जगत में हलचल पैदा कर दी है। अभिनेता ने इस खास मौके पर फिल्म के निर्माण से जुड़े सभी साथियों और सह-कलाकारों का आभार व्यक्त करते हुए पुरानी यादें साझा कीं। इस घोषणा के साथ ही यह साफ हो गया है कि दर्शकों को एक बार फिर पर्दे पर जबरदस्त एक्शन और धमाकेदार मुकाबले देखने को मिलने वाले हैं। सोशल मीडिया पर साझा की गई झलकियों में अभिनेता का वही पुराना रौद्र रूप नजर आ रहा है जो उनके चाहने वालों के बीच बेहद लोकप्रिय है। फिल्म के पहले भाग की यादें साझा करते हुए अभिनेता ने बताया कि शूटिंग के दौरान का सफर बेहद शानदार और ऊर्जा से भरा रहा। उन्होंने फिल्म के निर्देशन की सराहना करते हुए कहा कि जिस विजन के साथ इस कहानी को पर्दे पर उतारा गया वह काबिले तारीफ था। फिल्म में उनके साथ रणदीप हुड्डा और विनीत कुमार सिंह जैसे दमदार कलाकार भी नजर आए थे जिनके साथ काम करने के अनुभव को अभिनेता ने बेहद सुखद बताया। पहले भाग की कहानी में दिखाया गया था कि किस तरह एक नायक खलनायक के गुंडाराज और आतंक को खत्म करने के लिए मैदान में उतरता है। अब जाट 2 के जरिए इस संघर्ष और रोमांच को एक नए स्तर पर ले जाने की तैयारी है। व्यावसायिक दृष्टि से देखा जाए तो इस फिल्म के पहले भाग ने बॉक्स ऑफिस पर संतुलित प्रदर्शन किया था। करीब 100 करोड़ रुपये की लागत से बनी इस फिल्म ने अपनी लागत वसूलने के साथ ही मुनाफा भी कमाया था। सिनेमाघरों के बाद इसे डिजिटल प्लेटफॉर्म पर भी दर्शकों का भरपूर प्यार मिला जिससे निर्माताओं का उत्साह बढ़ा और उन्होंने इसके दूसरे भाग पर काम शुरू करने का फैसला लिया। वर्तमान में अभिनेता के पास कई बड़े प्रोजेक्ट्स हैं लेकिन जाट 2 के ऐलान ने यह साबित कर दिया है कि वे अपने एक्शन अवतार को लेकर कितने गंभीर हैं। अभिनेता के इस नए ऐलान के बाद फिल्म की पहली झलक और शूटिंग से जुड़ी अन्य जानकारियों का इंतजार बेसब्री से किया जा रहा है। साझा किए गए वीडियो में जिस तरह का जोश और एक्शन नजर आ रहा है उससे यह अनुमान लगाया जा रहा है कि जाट 2 पहले भाग के मुकाबले कहीं अधिक भव्य और प्रभावशाली होगी। मनोरंजन जगत में चर्चा है कि इस बार कहानी में नए मोड़ और अधिक खतरनाक स्टंट देखने को मिल सकते हैं। फिलहाल सनी देओल अपनी अन्य फिल्मों के काम में व्यस्त हैं लेकिन जल्द ही वे इस नए मिशन के लिए कमर कसते नजर आएंगे।