ल्ली ईवी पॉलिसी 2026-2030 से परिवहन प्रणाली में बड़ा बदलाव और हरित भविष्य की ओर कदम

नई दिल्ली।राष्ट्रीय राजधानी में बढ़ते वायु प्रदूषण को नियंत्रित करने और पारंपरिक ईंधन पर निर्भरता कम करने के उद्देश्य से सरकार ने इलेक्ट्रिक वाहनों को बढ़ावा देने के लिए एक व्यापक नीति का मसौदा तैयार किया है। Delhi Electric Vehicle Policy 2026-2030 के तहत तैयार यह प्रस्ताव राजधानी के परिवहन ढांचे को अधिक स्वच्छ, आधुनिक और टिकाऊ बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। इस मसौदे पर हितधारकों से सुझाव मांगे गए हैं ताकि इसे अधिक प्रभावी और व्यावहारिक बनाया जा सके। इस प्रस्तावित नीति का मुख्य उद्देश्य इलेक्ट्रिक वाहनों को तेजी से अपनाने के साथ-साथ चार्जिंग नेटवर्क का विस्तार करना और बैटरी रीसाइक्लिंग सिस्टम को मजबूत करना है। सरकार का मानना है कि दिल्ली में बढ़ते प्रदूषण का एक बड़ा हिस्सा वाहनों से निकलने वाले उत्सर्जन के कारण होता है, इसलिए परिवहन क्षेत्र में बदलाव बेहद जरूरी है। इसी दृष्टिकोण से नीति में सभी प्रकार के वाहनों को इलेक्ट्रिक तकनीक की ओर ले जाने की रूपरेखा तैयार की गई है। मसौदे में यह भी प्रावधान किया गया है कि नागरिक और संबंधित हितधारक निर्धारित समय सीमा के भीतर अपने सुझाव और आपत्तियां दर्ज करा सकते हैं, जिसके बाद अंतिम नीति को लागू किया जाएगा। इस प्रक्रिया का उद्देश्य नीति निर्माण को अधिक पारदर्शी और सहभागी बनाना है ताकि विभिन्न वर्गों की जरूरतों और सुझावों को शामिल किया जा सके। नीति में इलेक्ट्रिक वाहनों को बढ़ावा देने के लिए वित्तीय प्रोत्साहन का विस्तृत ढांचा शामिल किया गया है। इसमें दोपहिया, तिपहिया और हल्के वाणिज्यिक वाहनों के लिए चरणबद्ध सब्सिडी देने का प्रस्ताव है, जिससे शुरुआती वर्षों में ईवी अपनाने की गति तेज हो सके। साथ ही पुराने और प्रदूषण फैलाने वाले वाहनों को स्क्रैप करने पर अतिरिक्त आर्थिक लाभ देने की भी योजना है, ताकि स्वच्छ परिवहन को बढ़ावा मिल सके। इसके अलावा इलेक्ट्रिक वाहनों पर रोड टैक्स और रजिस्ट्रेशन शुल्क में पूरी या आंशिक छूट देने का प्रस्ताव भी शामिल है, जिससे उपभोक्ताओं पर शुरुआती आर्थिक बोझ कम हो सके। इस कदम से इलेक्ट्रिक वाहनों की मांग बढ़ने और बाजार में उनकी पहुंच आसान होने की उम्मीद जताई जा रही है। चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर के विस्तार के लिए एक विशेष एजेंसी को नोडल जिम्मेदारी दी गई है, जो पूरे शहर में चार्जिंग स्टेशन की योजना, स्थापना और संचालन को व्यवस्थित करेगी। इसके साथ ही एक डिजिटल प्लेटफॉर्म आधारित सिंगल विंडो सिस्टम विकसित करने की योजना भी है, जिससे चार्जिंग स्टेशन स्थापित करने की प्रक्रिया सरल और तेज हो सके। नीति में यह भी स्पष्ट किया गया है कि वाहन निर्माता कंपनियों और डीलरशिप को चार्जिंग सुविधा उपलब्ध कराने की दिशा में सक्रिय भूमिका निभानी होगी। इससे उपयोगकर्ताओं को अधिक सुविधाजनक और व्यापक चार्जिंग नेटवर्क उपलब्ध हो सकेगा। बैटरी प्रबंधन और पर्यावरण सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए रीसाइक्लिंग और सुरक्षित निपटान प्रणाली विकसित करने पर भी जोर दिया गया है। इसके लिए बैटरी ट्रैकिंग और संग्रहण प्रणाली लागू करने की योजना है, जिससे पर्यावरणीय नुकसान को कम किया जा सके। सरकार ने सार्वजनिक परिवहन और सरकारी वाहनों को भी चरणबद्ध तरीके से इलेक्ट्रिक बनाने का लक्ष्य रखा है। इसके तहत आने वाले वर्षों में बसों, सरकारी गाड़ियों और अन्य सार्वजनिक वाहनों को ईवी में बदलने की दिशा में काम किया जाएगा, जिससे बड़े स्तर पर उत्सर्जन में कमी लाई जा सके। विशेषज्ञों का मानना है कि यह नीति राजधानी में परिवहन व्यवस्था को नए दौर में ले जाने की क्षमता रखती है। यदि इसे प्रभावी ढंग से लागू किया गया तो यह न केवल प्रदूषण को कम करेगी बल्कि इलेक्ट्रिक मोबिलिटी सेक्टर में निवेश और रोजगार के नए अवसर भी पैदा कर सकती है।
पुलिस की बर्बरता का वायरल चेहरा नशे में युवक पर थर्ड डिग्री का खुला खेल

शहडोल । शहडोल जिले के बुढार थाना क्षेत्र से सामने आया एक वीडियो पुलिस की कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े कर रहा है जहां कानून व्यवस्था संभालने वाली खाकी वर्दी खुद ही अमानवीय व्यवहार करती नजर आ रही है मामला जैतपुर तिराहे का है जहां एक युवक के नशे में हंगामा करने की सूचना पर पहुंची पुलिस ने उसे काबू तो किया लेकिन जिस तरीके से कार्रवाई की गई उसने पूरे घटनाक्रम को विवादों में ला दिया जानकारी के अनुसार विक्की गुप्ता की इलेक्ट्रॉनिक दुकान में सुनील शुक्ला नाम का युवक नशे की हालत में घुस गया और वहां हंगामा करने लगा युवक की हरकतों से परेशान होकर आसपास के लोगों ने डायल 112 पर सूचना दी जिसके बाद पुलिस मौके पर पहुंची पुलिस ने स्थिति को नियंत्रित करने की कोशिश की लेकिन इसी दौरान एक पुलिसकर्मी ने अपनी सीमा लांघते हुए युवक के साथ बेहद कठोर और अपमानजनक व्यवहार किया प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार पुलिसकर्मी ने युवक को पकड़कर जबरन उठाया और उसे वाहन में फेंक दिया इतना ही नहीं उसने भीड़ के सामने युवक को लातों से मारना भी शुरू कर दिया यह पूरा घटनाक्रम सार्वजनिक रूप से हुआ जहां कई लोग मौजूद थे लेकिन किसी ने भी इस दौरान हस्तक्षेप नहीं किया वहीं मौके पर मौजूद एक व्यक्ति ने इस घटना का वीडियो बना लिया जो अब सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है वीडियो के सामने आते ही पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवाल उठने लगे हैं लोगों का कहना है कि यदि युवक ने नशे में गलत व्यवहार किया था तो उसके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जानी चाहिए थी लेकिन इस तरह का सार्वजनिक अपमान और मारपीट किसी भी हालत में उचित नहीं ठहराया जा सकता यह घटना न केवल मानवाधिकारों के उल्लंघन की ओर इशारा करती है बल्कि पुलिस की छवि को भी नुकसान पहुंचाती है हालांकि पुलिस ने इस मामले में अपनी ओर से कार्रवाई करते हुए दुकानदार विक्की गुप्ता की शिकायत पर आरोपी सुनील कुमार के खिलाफ गाली गलौज मारपीट और जान से मारने की धमकी सहित विभिन्न धाराओं में मामला दर्ज कर लिया है लेकिन वीडियो वायरल होने के बाद अब यह सवाल उठ रहा है कि क्या पुलिसकर्मियों के खिलाफ भी कोई कार्रवाई की जाएगी या नहीं यह घटना एक बार फिर इस बात को उजागर करती है कि कानून लागू करने वाली एजेंसियों को भी अपने आचरण में संयम और संवेदनशीलता बनाए रखने की जरूरत है क्योंकि कानून का पालन करवाने के नाम पर कानून को ही तोड़ना किसी भी स्थिति में स्वीकार्य नहीं हो सकता अब देखना होगा कि इस मामले में प्रशासन क्या कदम उठाता है और क्या दोषी पुलिसकर्मियों पर भी कार्रवाई होती है या यह मामला भी समय के साथ ठंडा पड़ जाएगा
एक ही वकील ने दायर कर दीं 25 PIL, भड़के CJI बोले- अपने ….

नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने विभिन्न मुद्दों पर 25 अलग-अलग जनहित याचिकाएं दायर करने वाले एक एडवोकेट से शुक्रवार को कहा कि उन्हें अदालत का रुख करने से पहले संबंधित प्राधिकरणों के पास जाना चाहिए। साथ ही, भड़के सीजेआई सूर्यकांत ने दो टूक कहा कि आप अपने प्रोफेशन पर ध्यान दें। जैसे ही मामले की सुनवाई शुरू हुई, याचिकाकर्ता के रूप में स्वयं पेश हुए अधिवक्ता सचिन गुप्ता ने भारत के प्रधान न्यायाधीश (सीजेआई) सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ से कहा कि वह अपनी सभी जनहित याचिकाएं वापस लेना चाहते हैं। इस पर सीजेआई सूर्यकांत ने साफ-साफ शब्दों में गुप्ता से कहा, ”आप अपने प्रोफेशन पर ध्यान दें। आपको सीधे अदालत का दरवाजा खटखटाने के बजाय संबंधित प्राधिकरणों के पास जाना चाहिए और उन्हें विभिन्न मुद्दों पर जानकारी देनी चाहिए।” पीठ ने कहा कि उचित समय आने पर यदि आवश्यकता हुई, तो न्यायालय उनकी याचिकाओं पर विचार भी करेगा। सीजेआई ने कहा कि बार के सदस्य और कानून की जानकारी रखने वाले व्यक्ति होने के नाते याचिकाकर्ता को विश्लेषणात्मक दृष्टिकोण अपनाते हुए मुद्दों की पहचान करनी चाहिए और संबंधित अधिकारियों को जागरूक बनाने का प्रयास करना चाहिए। पीठ ने यह भी कहा कि यदि कोई कार्रवाई नहीं होती है, तब याचिकाकर्ता अदालत का रुख कर सकता है। सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई के लिए सूचीबद्ध 25 जनहित याचिकाओं को वापस लेने की अनुमति दे दी। याचिकाकर्ता द्वारा दायर इन जनहित याचिकाओं में कई तरह के निर्देश देने का अनुरोध किया गया था, जिनमें देश में आधिकारिक कार्यों के लिए एक सामान्य संपर्क भाषा विकसित करने की नीति बनाने और आम जनता में कानूनी जागरूकता फैलाने के लिए टेलीविजन पर कानूनी कार्यक्रम शुरू करने की नीति तैयार करने की मांग शामिल थी। इन याचिकाओं में यह भी अनुरोध किया गया था कि साबुन में इस्तेमाल होने वाले रसायनों के उपयोग को लेकर दिशा-निर्देश तय किए जाएं, ताकि केवल वे रसायन इस्तेमाल हों जो हानिकारक बैक्टीरिया को खत्म करें, न कि त्वचा के लिए जरूरी बैक्टीरिया को। एक अन्य जनहित याचिका में भिखारियों, ट्रांसजेंडर जैसे वंचित वर्गों के उत्थान के लिए नीति बनाने के निर्देश देने का अनुरोध किया गया था। ‘आधी रात को ये सब याचिकाएं तैयार करते हो क्या?’ सुप्रीम कोर्ट ने नौ मार्च को गुप्ता द्वारा दायर पांच ”निरर्थक” जनहित याचिकाओं को खारिज कर दिया था। इनमें एक याचिका ऐसी भी थी, जिसमें यह जानने के लिए वैज्ञानिक अध्ययन कराने की मांग की गई थी कि क्या प्याज और लहसुन में ‘तामसिक’ (नकारात्मक) ऊर्जा होती है। सीजेआई ने गुप्ता से नाराजगी जताते हुए कहा था, ”आधी रात को ये सब याचिकाएं तैयार करते हो क्या?” प्रधान न्यायाधीश ने इन जनहित याचिकाओं को “अस्पष्ट, निरर्थक और निराधार” करार दिया था। पीठ ने गुप्ता की चार अन्य जनहित याचिकाएं भी खारिज कर दी थीं, जिनमें से एक याचिका में शराब और तंबाकू उत्पादों में कथित रूप से मौजूद हानिकारक सामग्री को नियंत्रित करने का निर्देश जारी करने का अनुरोध किया गया था।
पूर्वी बर्धमान में चुनावी माहौल चरम पर बड़ी रैली ने बढ़ाई राजनीतिक हलचल और जनउत्साह..

नई दिल्ली। पश्चिम बंगाल के चुनावी परिदृश्य में इन दिनों राजनीतिक गतिविधियां लगातार तेज होती जा रही हैं और इसी क्रम में पूर्वी बर्धमान जिले के कालना धात्रीग्राम स्थित शिमलन मैदान में होने वाली एक विशाल जनसभा को लेकर स्थानीय स्तर पर जबरदस्त उत्साह देखा जा रहा है। प्रधानमंत्री Narendra Modi के आगमन की सूचना के बाद पूरे क्षेत्र में माहौल पूरी तरह चुनावी रंग में बदल गया है और बड़ी संख्या में लोग कार्यक्रम स्थल की ओर पहुंचने लगे हैं। रैली को लेकर सुबह से ही तैयारियों का सिलसिला तेज दिखाई दिया। स्थानीय स्तर पर कार्यकर्ता और समर्थक व्यवस्था को अंतिम रूप देने में जुटे रहे, वहीं सुरक्षा और भीड़ नियंत्रण के लिए भी विशेष इंतजाम किए गए हैं। पूरे इलाके में राजनीतिक चर्चा का केंद्र यह जनसभा बन गई है और लोग अपने अपने स्तर पर कार्यक्रम को लेकर उत्सुकता जाहिर कर रहे हैं। स्थानीय लोगों के बीच खासकर महिलाओं में इस कार्यक्रम को लेकर उल्लेखनीय उत्साह देखा जा रहा है। कई महिलाओं ने कहा कि ऐसे बड़े राजनीतिक कार्यक्रमों में शामिल होना उनके लिए एक अलग अनुभव होता है और वे प्रधानमंत्री को सुनने के लिए लंबे समय से प्रतीक्षा कर रही थीं। युवाओं में भी इस रैली को लेकर उत्साह साफ दिखाई दे रहा है और वे इसे राजनीतिक जागरूकता और बदलाव की संभावनाओं से जोड़कर देख रहे हैं। इस बीच राज्य का राजनीतिक माहौल और अधिक सक्रिय हो गया है क्योंकि विभिन्न दलों के बीच चुनावी प्रतिस्पर्धा तेज हो चुकी है। सत्तारूढ़ पक्ष Mamata Banerjee के नेतृत्व वाली सरकार और विपक्षी दलों के बीच लगातार बयानबाजी और रणनीतिक गतिविधियां जारी हैं। ऐसे में प्रधानमंत्री की यह जनसभा राजनीतिक दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण मानी जा रही है क्योंकि इससे चुनावी समीकरणों पर प्रभाव पड़ने की संभावना जताई जा रही है। प्रधानमंत्री का यह चुनावी दौरा राज्य भर में व्यापक जनसंपर्क अभियान का हिस्सा माना जा रहा है, जिसके तहत वे अलग अलग जिलों में जाकर लोगों से सीधे संवाद स्थापित कर रहे हैं। इससे पहले भी उन्होंने राज्य के अन्य हिस्सों में जनसभाएं की थीं, जहां भारी भीड़ और राजनीतिक गर्माहट देखने को मिली थी। अब पूर्वी बर्धमान की यह सभा भी उसी चुनावी अभियान की एक महत्वपूर्ण कड़ी बन गई है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि पश्चिम बंगाल का चुनावी मुकाबला इस समय काफी रोचक स्थिति में पहुंच चुका है, जहां हर बड़ी जनसभा और रैली मतदाताओं की सोच को प्रभावित करने की क्षमता रखती है। पूर्वी बर्धमान की यह रैली भी इसी संदर्भ में महत्वपूर्ण मानी जा रही है, जहां विभिन्न वर्गों तक पहुंच बनाने का प्रयास किया जा रहा है और राजनीतिक संदेश को सीधे जनता तक पहुंचाने की रणनीति अपनाई जा रही है। चुनाव कार्यक्रम के अनुसार राज्य में मतदान चरणबद्ध तरीके से संपन्न होगा और इसके बाद परिणाम घोषित किए जाएंगे। इस पूरे चुनावी माहौल में राजनीतिक दल लगातार अपनी पकड़ मजबूत करने में लगे हुए हैं और जनता के बीच सक्रियता बढ़ा रहे हैं। पूर्वी बर्धमान की यह जनसभा इसी व्यापक राजनीतिक अभियान का हिस्सा बनकर क्षेत्र में नई ऊर्जा और चर्चा का केंद्र बन गई है।
महाभियोग से पहले इस्तीफा देकर बची कार्रवाई, जस्टिस वर्मा समेत तीन मामलों में ऐसा हुआ, मिलता है ये फायदा

नई दिल्ली। इलाहाबाद हाईकोर्ट के जस्टिस यशवंत वर्मा ने महाभियोग प्रक्रिया शुरू होने से पहले ही पद से इस्तीफा दे दिया। 9 अप्रैल को उन्होंने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू को इस्तीफा सौंपा, जिसके साथ ही संसद में प्रस्तावित कार्रवाई स्वतः समाप्त हो गई। भारतीय न्यायिक इतिहास में यह तीसरा मामला है, जब किसी मौजूदा जज ने महाभियोग पूरा होने से पहले पद छोड़ दिया। पहले भी आखिरी वक्त पर रुकी कार्रवाईदेश में किसी जज को पद से हटाने की प्रक्रिया काफी कठिन मानी जाती है। इसके लिए संसद के दोनों सदनों में दो-तिहाई बहुमत जरूरी होता है। अब तक किसी भी जज को महाभियोग के जरिए हटाया नहीं जा सका है। इससे पहले भी दो मामलों में प्रक्रिया अंतिम चरण तक पहुंची, लेकिन इस्तीफे के कारण आगे नहीं बढ़ पाई। दो जजों ने इसी तरह छोड़ा पद2011 में कलकत्ता हाईकोर्ट के जस्टिस सौमित्र सेन पर वित्तीय गड़बड़ी के आरोप लगे थे। राज्यसभा ने उनके खिलाफ प्रस्ताव पारित कर दिया था, लेकिन लोकसभा में मतदान से पहले उन्होंने इस्तीफा दे दिया। उसी साल सिक्किम हाईकोर्ट के जस्टिस पी.डी. दिनाकरन पर भी गंभीर आरोप लगे थे। जांच समिति गठित हुई, लेकिन कार्रवाई आगे बढ़ने से पहले ही उन्होंने प्रक्रिया पर सवाल उठाते हुए पद छोड़ दिया। इस्तीफे से नहीं रुकते रिटायरमेंट लाभमहाभियोग से पहले इस्तीफा देने का सबसे बड़ा असर यह होता है कि पूरी संसदीय प्रक्रिया खत्म हो जाती है। मौजूदा नियमों में ऐसा कोई प्रावधान नहीं है, जिससे इस्तीफा देने वाले जज की पेंशन या अन्य रिटायरमेंट सुविधाएं रोकी जा सकें। इसलिए उन्हें सभी लाभ मिलते रहते हैं। कैसे शुरू हुआ जस्टिस वर्मा का विवादयह मामला मार्च 2025 में सामने आया, जब जस्टिस वर्मा दिल्ली हाईकोर्ट में पदस्थ थे। उनके सरकारी आवास के एक स्टोररूम में आग लगने के बाद वहां से करीब 15 करोड़ रुपये का जला हुआ नकद मिला था। हालांकि, उन्होंने इस रकम से अपना कोई संबंध होने से इनकार किया और कहा कि घटना के समय वे शहर से बाहर थे। जांच, ट्रांसफर और महाभियोग की तैयारीमामले की गंभीरता को देखते हुए सुप्रीम कोर्ट की इन-हाउस कमेटी ने जांच शुरू की। इसके बाद उन्हें दिल्ली से इलाहाबाद हाईकोर्ट ट्रांसफर किया गया और उनके न्यायिक अधिकार भी सीमित कर दिए गए। जुलाई 2025 में 100 से अधिक सांसदों ने उनके खिलाफ महाभियोग प्रस्ताव पेश किया, जिसके बाद लोकसभा स्पीकर ने तीन सदस्यीय जांच समिति बनाई। रिपोर्ट आने से पहले ही जस्टिस वर्मा ने 13 पन्नों का पत्र लिखकर जांच प्रक्रिया को पक्षपातपूर्ण बताते हुए खुद को अलग कर लिया। अब क्या रहेगा आगे का रास्तासंवैधानिक प्रावधानों के अनुसार, यदि कोई जज महाभियोग पूरा होने से पहले इस्तीफा दे देता है, तो पूरी प्रक्रिया स्वतः समाप्त हो जाती है। ऐसे में जज को रिटायरमेंट के सभी लाभ मिलते रहते हैं। जस्टिस वर्मा के मामले में भी अब यही स्थिति मानी जा रही है।
यूपी में SIR के बाद बड़ा सियासी असर, BJP बहुल बड़े शहरों में ज्यादा वोट कटे, मुस्लिम बहुल जिलों में कम

लखनऊ। उत्तर प्रदेश में मतदाता पुनरीक्षण के बाद एसआईआर की फाइनल वोटर लिस्ट जारी होने से राजनीतिक हलचल तेज हो गई है। इस प्रक्रिया में प्रदेश से करीब दो करोड़ नाम हटाए गए हैं, जिसके बाद सभी दलों के सामने नई चुनावी रणनीति तैयार करने की चुनौती खड़ी हो गई है। खास बात यह है कि भाजपा के प्रभाव वाले बड़े शहरों में वोटरों की संख्या में अपेक्षाकृत अधिक कमी दर्ज की गई है, जबकि मुस्लिम बहुल जिलों में यह गिरावट कम रही है। बड़े शहरों में वोटर सूची में बड़ी कटौतीराज्य के प्रमुख शहरी क्षेत्रों में वोट कटने का प्रतिशत ज्यादा रहा है। लखनऊ में 22.89%, गौतमबुद्ध नगर में 19.33%, कानपुर नगर में 19.42% और मेरठ में 18.75% वोट घटे हैं। गाजियाबाद में करीब 20% वोटरों के नाम सूची से हटे हैं, जबकि आगरा में 17.71% और शाहजहांपुर में 17.90% की गिरावट दर्ज की गई है। इन क्षेत्रों में पिछले चुनावों में भाजपा का दबदबा रहा था, ऐसे में यह बदलाव राजनीतिक समीकरणों पर असर डाल सकता है। मुस्लिम बहुल जिलों में अपेक्षाकृत कम गिरावटइसके विपरीत सहारनपुर, मुजफ्फरनगर, शामली, मुरादाबाद, अमरोहा, आजमगढ़, मऊ और गाजीपुर जैसे मुस्लिम बहुल जिलों में वोट कटने का प्रतिशत कम रहा है। यहां गिरावट लगभग 8.92% से 11.53% के बीच दर्ज की गई है। ये वे क्षेत्र हैं जहां 2022 के विधानसभा चुनाव में ध्रुवीकरण का प्रभाव साफ तौर पर देखने को मिला था। वीआईपी सीटों पर बदलते समीकरणकई वीआईपी और बेहद करीबी मुकाबले वाली सीटों पर भी वोटर संख्या में उल्लेखनीय गिरावट दर्ज की गई है। प्रयागराज में लगभग 8.26 लाख वोट कम हुए हैं, जबकि मंत्री नंद गोपाल गुप्ता नंदी की इलाहाबाद दक्षिणी सीट पर करीब 99,059 मतदाता घटे हैं। इसी तरह कुंडा विधानसभा में 53,539 और देवरिया की पथरदेवा सीट पर 28,637 वोट कम हुए हैं, जहां पिछला चुनाव बेहद करीबी अंतर से तय हुआ था। राजनीतिक विश्लेषकों की रायराजनीतिक जानकारों का कहना है कि अभी यह स्पष्ट नहीं है कि हटाए गए वोटरों में किस दल के समर्थक अधिक प्रभावित हुए हैं। न ही यह साफ है कि नए मतदाता जोड़ने की प्रक्रिया में किस पक्ष को ज्यादा लाभ मिला है। ऐसे में मिशन 2027 की चुनावी रणनीति में सभी दलों को नए सिरे से मंथन करना होगा। विशेषज्ञों का मानना है कि मतदाता सूची से नाम कटने के पीछे मुख्य कारण विस्थापन, मृत्यु या दस्तावेजों की कमी हो सकते हैं। राजनीतिक विश्लेषकों का यह भी कहना है कि 2003 के बाद हुए इस बड़े सघन पुनरीक्षण में मतदाता संख्या में गिरावट सामान्य प्रक्रिया का हिस्सा है, लेकिन इसका असर आने वाले चुनावी समीकरणों पर जरूर देखने को मिलेगा।
एमपी में गर्मी ने पकड़ी रफ्तार, 5 डिग्री तक उछला पारा, नर्मदापुरम सबसे गर्म शहर दर्ज

भोपाल। मध्यप्रदेश में आंधी-बारिश का दौर खत्म होते ही गर्मी ने तेजी से असर दिखाना शुरू कर दिया है। शुक्रवार को प्रदेश के अधिकांश शहरों में दिन के तापमान में 1 से 5.4 डिग्री तक बढ़ोतरी दर्ज की गई। इंदौर, उज्जैन और ग्वालियर में पारा ज्यादा चढ़ा, वहीं भोपाल और रतलाम में भी तापमान बढ़ा। सबसे अधिक 5.4 डिग्री की बढ़ोतरी रतलाम में दर्ज की गई। शनिवार को भी तापमान में और इजाफा होने की संभावना है। मौसम विभाग के अनुसार 15 अप्रैल से एक नया सिस्टम सक्रिय होगा, लेकिन इसका असर कमजोर रहने की संभावना है। ऐसे में प्रदेश में अब तेज गर्मी का दौर जारी रहेगा। तापमान बढ़ने के साथ ही लोग गर्मी से राहत पाने के उपाय अपनाने लगे हैं। कोई चेहरे को कपड़े से ढंककर बाहर निकल रहा है, तो कोई गन्ने का रस, कोल्ड्रिंक और आइसक्रीम का सहारा ले रहा है। गर्मी बढ़ने के चलते मौसम विभाग ने एडवाइजरी जारी की है। लोगों को दिनभर पर्याप्त पानी पीने, शरीर को हाइड्रेट रखने और दोपहर में तेज धूप से बचने की सलाह दी गई है। साथ ही हल्के रंग और सूती कपड़े पहनने की सलाह दी गई है। बच्चों और बुजुर्गों को विशेष सावधानी बरतने के लिए कहा गया है। तापमान की बात करें तो शुक्रवार को नर्मदापुरम प्रदेश का सबसे गर्म शहर रहा, जहां अधिकतम तापमान 39.3 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। रतलाम में 38.6 डिग्री और खरगोन में 38 डिग्री तापमान रहा। इसके अलावा धार, खंडवा, नरसिंहपुर और खजुराहो में पारा 36 डिग्री या उससे अधिक दर्ज किया गया। प्रदेश के पांच बड़े शहरों में उज्जैन सबसे गर्म रहा, जहां तापमान 35.5 डिग्री दर्ज हुआ। भोपाल और जबलपुर में 34.6 डिग्री, इंदौर में 35 डिग्री और ग्वालियर में 33.4 डिग्री सेल्सियस तापमान रिकॉर्ड किया गया। गौरतलब है कि इस बार अप्रैल की शुरुआत में भीषण गर्मी की बजाय आंधी, बारिश और ओलावृष्टि का असर रहा। 1 से 9 अप्रैल के बीच प्रदेश के कई हिस्सों में मौसम बदला रहा। इस दौरान ग्वालियर में सबसे ज्यादा बारिश दर्ज की गई। 15 से अधिक जिलों में ओलावृष्टि हुई, जबकि करीब 45 जिलों में बारिश दर्ज की गई। मौसम विभाग के अनुसार, जैसे सर्दी के लिए दिसंबर-जनवरी और बारिश के लिए जुलाई-अगस्त प्रमुख महीने होते हैं, वैसे ही गर्मी के लिए अप्रैल और मई अहम माने जाते हैं। खासकर अप्रैल के दूसरे पखवाड़े से तेज गर्मी का असर अधिक देखने को मिलता है।
अमेरिका की मध्यस्थता में इजरायल-लेबनान वार्ता तय, 14 अप्रैल को वॉशिंगटन में होगी बैठक

तेहरान। पश्चिम एशिया में जारी तनाव के बीच Israel और Lebanon बातचीत की मेज पर आने को तैयार हो गए हैं। दोनों देशों ने 14 अप्रैल को Washington, D.C. में औपचारिक बैठक करने पर सहमति जताई है, जिसमें United States मध्यस्थ की भूमिका निभाएगा। लेबनान के राष्ट्रपति कार्यालय की ओर से जारी बयान में कहा गया कि यह पहल अमेरिकी मध्यस्थता से हुई है और इसमें लेबनान में अमेरिकी राजदूत भी शामिल थे। दोनों देशों के बीच प्रत्यक्ष संपर्क बेहद दुर्लभ माना जाता है, क्योंकि उनके बीच औपचारिक राजनयिक संबंध नहीं हैं और लंबे समय से तनाव बना हुआ है। रिपोर्टों के अनुसार, यह संपर्क अमेरिकी नेतृत्व में हुआ, जिसका उद्देश्य संघर्षविराम लागू करना और दोनों पक्षों को वार्ता की मेज तक लाना था। सहमति के मुताबिक 14 अप्रैल को वॉशिंगटन स्थित अमेरिकी विदेश विभाग में आमने-सामने बैठक होगी, जहां तनाव कम करने के उपायों पर चर्चा की जाएगी। लेबनानी अधिकारियों का दावा है कि Hezbollah के खिलाफ इजरायली कार्रवाई में करीब 2000 लोगों की मौत हो चुकी है और 6300 से अधिक घायल हुए हैं। इनमें हाल के हमलों में हुई सैकड़ों मौतें भी शामिल बताई जा रही हैं। 1948 से जारी है टकराव इजरायल और लेबनान के बीच संघर्ष का इतिहास 1948 से जुड़ा है। दोनों देशों के बीच समय-समय पर झड़पें होती रही हैं। विशेष रूप से 2006 Lebanon War में हजार से अधिक लोगों की जान गई थी और लेबनान में भारी तबाही हुई थी। दक्षिणी लेबनान क्षेत्र में तनाव लगातार बना रहता है, जहां ईरान समर्थित समूह हिजबुल्लाह सक्रिय है और यह इलाका इजरायल की सीमा से लगा हुआ है। ऐसे में 14 अप्रैल की प्रस्तावित वार्ता को क्षेत्रीय शांति की दिशा में अहम कदम माना जा रहा है।
पाकिस्तान पर भरोसा नहीं, ईरान ने इस्लामाबाद भेजे कई नकली विमान?

इस्लामाबाद। पाकिस्तान आतंकवाद का प्रयाय बन चुका है। यही कारण है कि ईरान जैसे मुस्लिम देश को भी भरोसा नहीं है। पाकिस्तान भले ही अमेरिका के साथ ईरान की शांति वार्ता का केंद्र होने का दावा कर रहा है, लेकिन हकीकत कुछ और ही सामने आ रही है। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, ईरान को पाकिस्तान में हवाई हमले का डर सता रहा था। इसलिए ईरान ने अपने वार्ताकारों की सुरक्षा के लिए इस्लामाबाद के लिए कई नकली विमान भेजे, जिनमें से केवल एक में ही प्रतिनिधिमंडल सवार था। आपको बता दें कि ईरानी प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व ईरानी संसद के अध्यक्ष मोहम्मद बगेर गालिबफ कर रहे हैं जो हाल ही में ईरानी सरकार में एक प्रमुख व्यक्ति बनकर उभरे हैं। इस प्रतिनिधिमंडल में ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची भी शामिल हैं। इस्लामाबाद जाते समय गालिबफ ने अपने विमान की अगली कतारों को खाली रखा। इन खाली सीटों पर मीनाब स्कूल स्ट्राइक (Minab school strike) में मारे गए बच्चों और पीड़ितों की तस्वीरें और उनका सामान (स्कूल बैग, जूते, कपड़े) रखे गए थे। यह हमला हाल ही में ईरान के मीनाब क्षेत्र में हुआ था, जिसे तेहरान अमेरिकी-इजरायली हमला बताता है। इसमें कई स्कूली बच्चों की जान गई थी। इस विजुअल स्टेटमेंट के जरिए ईरान यह संदेश देना चाहता है कि वह बातचीत की मेज पर केवल एक देश के रूप में नहीं, बल्कि अपने उन निर्दोष नागरिकों के दर्द के साथ जा रहा है जिन्होंने इस युद्ध की कीमत चुकाई है। वहीं, अमेरिकी उपराष्ट्रपति जे.डी. वेंस के नेतृत्व में एक प्रतिनिधिमंडल पाकिस्तान जा रहा है, जिसमें ट्रंप के विशेष दूत स्टीव विटकॉफ और उनके दामाद जेरेड कुशनर भी शामिल हैं। अमेरिकी वार्ताकारों के साथ अमेरिकी राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद, विदेश विभाग और पेंटागन के विशेषज्ञ भी हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने आठ अप्रैल की रात को घोषणा की थी कि ईरान के साथ दो सप्ताह के युद्धविराम पर समझौता हो गया है। बाद में खबर आई कि क्षेत्र में स्थायी शांति के लिए वार्ता शनिवार को पाकिस्तान में होगी। लेबनान पर जारी है तकरार यह प्रतिनिधिमंडल ऐसे समय में इस्लामाबाद पहुंचा है जब लेबनान में इजराइल के हमलों के कारण ईरानी प्रतिनिधिमंडल की यात्रा को लेकर अनिश्चितता जताई जा रही थी और सोशल मीडिया पर कई तरह के कयास लगाए जा रहे थे। कुछ खबरों में ईरानी मीडिया के हवाले से कहा गया था कि प्रतिनिधिमंडल तभी वार्ता में हिस्सा लेगा, जब युद्धविराम समझौते में तय शर्तें पूरी होंगी। ईरान की अर्ध-सरकारी ‘तसनीम’ समाचार एजेंसी ने खबर दी थी कि ”पहले रखी गई शर्तें” पूरी होने तक बातचीत शुरू नहीं होगी। यह बात इस्लामाबाद रवाना होने से पहले गालिबफ द्वारा ‘एक्स’ पर दिए गए संदेश से भी मेल खाती है। गालिबफ ने ‘एक्स’ पर कहा था, ”दोनों पक्षों के बीच आपसी सहमति से तय किए गए दो कदम अभी लागू नहीं हुए हैं- लेबनान में युद्धविराम और वार्ता शुरू होने से पहले ईरान की संपत्तियों पर लगी रोक हटाना।”
बुध आज मीन राशि में करेंगे प्रवेश, 4 राशियों के लिए शुभ संकेत, अप्रैल अंत तक रहेगा असर

नई दिल्ली। आज बुध ग्रह ने अपनी चाल बदलते हुए मीन राशि में प्रवेश कर लिया है। इस गोचर का प्रभाव सभी 12 राशियों पर देखने को मिलेगा। बुध लगभग 23 से 25 दिनों तक मीन राशि में रहेंगे और इसके बाद अगली राशि में प्रवेश करेंगे। इसका असर अप्रैल के अंत तक बना रहेगा। इस दौरान लोगों की सोच, बातचीत करने का तरीका, निर्णय लेने की क्षमता और कार्यशैली में बदलाव देखने को मिल सकता है। विशेष रूप से कम्युनिकेशन, बिजनेस और रिश्तों से जुड़े मामलों पर इसका प्रभाव अधिक रहेगा। मीन राशि में बुध का मिश्रित प्रभावमीन राशि को भावनात्मक और कल्पनाशील राशि माना जाता है। जब बुध इस राशि में आते हैं तो व्यक्ति अधिक संवेदनशील और रचनात्मक हो सकता है, लेकिन यह स्थिति बुध के लिए कमजोर मानी जाती है। ऐसे में कई लोगों को निर्णय लेने में भ्रम या असमंजस की स्थिति का सामना भी करना पड़ सकता है। इन राशियों के लिए खुलेंगे भाग्य के द्वार-इस गोचर का सबसे अधिक सकारात्मक असर वृषभ, मिथुन, कन्या और मीन राशि पर देखने को मिल सकता है।वृषभ राशि: आय के नए स्रोत बन सकते हैं और रुका हुआ पैसा मिलने के संकेत हैं। आर्थिक स्थिति मजबूत हो सकती है।मिथुन राशि: करियर में आगे बढ़ने के अवसर मिल सकते हैं। काम की सराहना होगी और नई जिम्मेदारियां मिल सकती हैं।कन्या राशि: रिश्तों में सुधार और पार्टनरशिप में मजबूती आने की संभावना है। सहयोग बढ़ेगा।मीन राशि: आत्मविश्वास में वृद्धि होगी और नए विचारों के साथ काम में बेहतर परिणाम मिल सकते हैं। इन राशियों को रहना होगा सावधानमेष राशि के जातकों को खर्चों पर नियंत्रण रखने की सलाह दी गई है, क्योंकि जल्दबाजी में लिए गए फैसले नुकसान पहुंचा सकते हैं। वहीं कर्क राशि के लोगों को मानसिक तनाव और भ्रम की स्थिति का सामना करना पड़ सकता है, इसलिए किसी भी निर्णय में सावधानी जरूरी है। कामकाज और कारोबार पर असरयह गोचर विशेष रूप से उन लोगों के लिए लाभकारी हो सकता है जो मीडिया, लेखन, संचार और व्यापार से जुड़े हैं। इस दौरान नए आइडिया और बेहतर संवाद के चलते काम में सफलता मिलने की संभावना बढ़ सकती है। क्या रखें ध्यानइस अवधि में जल्दबाजी से बचना जरूरी होगा। हर निर्णय सोच-समझकर लेने की सलाह दी गई है। सही दिशा में किया गया प्रयास इस गोचर को तरक्की और सफलता में बदल सकता है। आज बुध ग्रह ने अपनी चाल बदलते हुए मीन राशि में प्रवेश कर लिया है। इस गोचर का प्रभाव सभी 12 राशियों पर देखने को मिलेगा। बुध लगभग 23 से 25 दिनों तक मीन राशि में रहेंगे और इसके बाद अगली राशि में प्रवेश करेंगे। इसका असर अप्रैल के अंत तक बना रहेगा। इस दौरान लोगों की सोच, बातचीत करने का तरीका, निर्णय लेने की क्षमता और कार्यशैली में बदलाव देखने को मिल सकता है। विशेष रूप से कम्युनिकेशन, बिजनेस और रिश्तों से जुड़े मामलों पर इसका प्रभाव अधिक रहेगा। मीन राशि में बुध का मिश्रित प्रभाव मीन राशि को भावनात्मक और कल्पनाशील राशि माना जाता है। जब बुध इस राशि में आते हैं तो व्यक्ति अधिक संवेदनशील और रचनात्मक हो सकता है, लेकिन यह स्थिति बुध के लिए कमजोर मानी जाती है। ऐसे में कई लोगों को निर्णय लेने में भ्रम या असमंजस की स्थिति का सामना भी करना पड़ सकता है। इन राशियों के लिए खुलेंगे भाग्य के द्वार -इस गोचर का सबसे अधिक सकारात्मक असर वृषभ, मिथुन, कन्या और मीन राशि पर देखने को मिल सकता है। वृषभ राशि: आय के नए स्रोत बन सकते हैं और रुका हुआ पैसा मिलने के संकेत हैं। आर्थिक स्थिति मजबूत हो सकती है। मिथुन राशि: करियर में आगे बढ़ने के अवसर मिल सकते हैं। काम की सराहना होगी और नई जिम्मेदारियां मिल सकती हैं। कन्या राशि: रिश्तों में सुधार और पार्टनरशिप में मजबूती आने की संभावना है। सहयोग बढ़ेगा। मीन राशि: आत्मविश्वास में वृद्धि होगी और नए विचारों के साथ काम में बेहतर परिणाम मिल सकते हैं। इन राशियों को रहना होगा सावधान मेष राशि के जातकों को खर्चों पर नियंत्रण रखने की सलाह दी गई है, क्योंकि जल्दबाजी में लिए गए फैसले नुकसान पहुंचा सकते हैं। वहीं कर्क राशि के लोगों को मानसिक तनाव और भ्रम की स्थिति का सामना करना पड़ सकता है, इसलिए किसी भी निर्णय में सावधानी जरूरी है। कामकाज और कारोबार पर असर यह गोचर विशेष रूप से उन लोगों के लिए लाभकारी हो सकता है जो मीडिया, लेखन, संचार और व्यापार से जुड़े हैं। इस दौरान नए आइडिया और बेहतर संवाद के चलते काम में सफलता मिलने की संभावना बढ़ सकती है। क्या रखें ध्यान इस अवधि में जल्दबाजी से बचना जरूरी होगा। हर निर्णय सोच-समझकर लेने की सलाह दी गई है। सही दिशा में किया गया प्रयास इस गोचर को तरक्की और सफलता में बदल सकता है।