IPL 2026: GT का बड़ा फैसला, LSG पहले करेगी बल्लेबाजी, जीत का सिलसिला जारी रखने पर नजर

नई दिल्ली। इंडियन प्रीमियर लीग 2026 के 19वें मुकाबले में इकाना क्रिकेट स्टेडियम में गुजरात टाइटंस और लखनऊ सुपर जायंट्स आमने-सामने हैं। मुकाबले में जीटी के कप्तान शुभमन गिल ने टॉस जीतकर पहले गेंदबाजी करने का फैसला लिया है। गिल बोले- निरंतरता ही दिलाएगी खिताबटॉस के बाद शुभमन गिल ने कहा कि पिछले मैच में मिली जीत से टीम का आत्मविश्वास बढ़ा है और अब वे लगातार बेहतर प्रदर्शन करना चाहते हैं। उन्होंने यह भी कहा कि आईपीएल जैसे लंबे टूर्नामेंट में वही टीम सफल होती है जो पूरे सीजन में निरंतर प्रदर्शन करे। खास बात यह है कि गुजरात टाइटंस ने इस मैच में अपनी पिछली प्लेइंग इलेवन में कोई बदलाव नहीं किया है। पंत का भरोसा- हर मैच में देना है बेस्टवहीं एलएसजी के कप्तान ऋषभ पंत ने कहा कि मौजूदा समय में पिच ऐसी होती हैं जहां पहले बल्लेबाजी या गेंदबाजी का ज्यादा फर्क नहीं पड़ता। उन्होंने टीम के इंटेंट और जज्बे की तारीफ करते हुए कहा कि हर मैच को एक-एक करके खेलना है और अपना सर्वश्रेष्ठ देना है। एलएसजी की नजर लगातार तीसरी जीत परलखनऊ सुपर जायंट्स ने सीजन की शुरुआत हार से की थी, लेकिन उसके बाद टीम ने शानदार वापसी करते हुए लगातार दो मुकाबले जीते हैं। 4 अंकों के साथ टीम फिलहाल अंकतालिका में पांचवें स्थान पर है और इस मैच में जीत की हैट्रिक लगाने के इरादे से उतरी है। गुजरात टाइटंस भी लय बरकरार रखना चाहेगीदूसरी ओर गुजरात टाइटंस ने तीन मैचों में से दो गंवाए हैं और एक जीत के साथ 2 अंक लेकर सातवें स्थान पर है। हालांकि टीम ने अपने पिछले मुकाबले में दिल्ली कैपिटल्स के खिलाफ रोमांचक जीत दर्ज की थी और अब उसी लय को जारी रखना चाहेगी। दोनों टीमों की प्लेइंग इलेवनगुजरात टाइटंस:साई सुदर्शन, शुभमन गिल (कप्तान), जोस बटलर (विकेटकीपर), वाशिंगटन सुंदर, ग्लेन फिलिप्स, राहुल तेवतिया, राशिद खान, कगिसो रबाडा, मोहम्मद सिराज, अशोक शर्मा, प्रसिद्ध कृष्णा। लखनऊ सुपर जायंट्स:मिशेल मार्श, एडेन मार्कराम, ऋषभ पंत (कप्तान/विकेटकीपर), आयुष बडोनी, निकोलस पूरन, अब्दुल समद, मुकुल चौधरी, मोहम्मद शमी, आवेश खान, दिग्वेश सिंह राठी, प्रिंस यादव।
सुरों की 'मैदान' छोड़ गईं आशा भोसले: क्रिकेट की दुनिया ने कहा- "आपके जैसा 'ऑलराउंडर' फिर नहीं होगा"

नई दिल्ली। भारतीय संगीत जगत की दिग्गज और सदाबहार आवाज की मालकिन आशा भोसले के निधन से पूरे देश में शोक की लहर है। 92 वर्ष की आयु में मुंबई में उन्होंने अंतिम सांस ली। उनके जाने से न सिर्फ संगीत जगत बल्कि खेल जगत में भी गहरा दुख देखने को मिला। खासतौर पर भारतीय क्रिकेट जगत के कई बड़े खिलाड़ियों और दिग्गजों ने उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की और उनकी विरासत को याद किया। क्रिकेट सितारों ने दी भावभीनी श्रद्धांजलिभारतीय टीम के हेड कोच गौतम गंभीर ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर लिखा कि आशा भोसले की बेजोड़ प्रतिभा और शालीनता हमेशा याद रखी जाएगी। वहीं पूर्व कप्तान अनिल कुंबले ने उन्हें भारतीय संगीत की अमर आवाज बताते हुए उनके परिवार के प्रति संवेदना जताई। दिग्गज स्पिनर हरभजन सिंह ने कहा कि आशा जी की आवाज ने पीढ़ियों को गहराई से छुआ है और उनका संगीत समय से परे है। पूर्व ऑलराउंडर युवराज सिंह ने भावुक होते हुए कहा कि उनकी आवाज के साथ ही उनकी कई यादें जुड़ी हुई हैं और ऐसा लगता है जैसे बचपन का एक हिस्सा आज खामोश हो गया। “हमेशा सदाबहार रहेंगी आशा जी”पूर्व सलामी बल्लेबाज शिखर धवन ने कहा कि आशा भोसले की आवाज कभी पुरानी नहीं हुई और वह हमेशा सदाबहार रहेंगी। भारत की पूर्व तेज गेंदबाज झूलन गोस्वामी ने इसे भारतीय संगीत के लिए अपूरणीय क्षति बताया। तेज गेंदबाज भुवनेश्वर कुमार ने लिखा कि उनकी आवाज जीवन के हर पड़ाव पर साथ रही, जबकि पूर्व क्रिकेटर यूसुफ पठान ने उन्हें “सदाबहार विरासत” करार दिया। अंतिम संस्कार की तैयारीजानकारी के अनुसार, आशा भोसले का अंतिम संस्कार सोमवार शाम 4 बजे मुंबई के शिवाजी पार्क में किया जाएगा। शनिवार को तबीयत बिगड़ने के बाद उन्हें ब्रीच कैंडी अस्पताल में भर्ती कराया गया था, जहां उनकी हालत में सुधार नहीं हो सका। संगीत जगत की अमर आवाजआशा भोसले ने अपने करियर की शुरुआत 1940 के दशक में की थी और दशकों तक अपनी सुरीली आवाज से श्रोताओं के दिलों पर राज किया। उन्होंने मोहम्मद रफी जैसे दिग्गजों के साथ कई यादगार गीत गाए। उनके लोकप्रिय गीतों में ‘चुरा लिया है तुमने जो दिल को’, ‘दो लफ्जों की है दिल की कहानी’ और ‘ये लड़का है अल्लाह’ आज भी लोगों की जुबां पर हैं। करीब 20 भाषाओं में 12,000 से अधिक गीत गाने वाली आशा भोसले को दादा साहब फाल्के पुरस्कार और पद्म विभूषण जैसे देश के सर्वोच्च सम्मानों से नवाजा गया था।
मऊगंज में स्वास्थ्य व्यवस्था पर सवाल एक्सीडेंट मरीज को नहीं मिला बेड खाली पड़े रहे बिस्तर

मऊगंज । मध्य प्रदेश के मऊगंज स्थित सिविल अस्पताल से मानवता को झकझोर देने वाली एक गंभीर तस्वीर सामने आई है जहां एक सड़क हादसे में घायल मरीज दर्द से तड़पता रहा लेकिन उसे अस्पताल के बेड पर जगह नहीं दी गई बताया जा रहा है कि अस्पताल में बेड खाली होने के बावजूद मरीज को जमीन पर ही लेटे रहने दिया गया जिससे स्वास्थ्य व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं वायरल हो रहे वीडियो और प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार एक गंभीर रूप से घायल मरीज अस्पताल के फर्श पर पड़ा हुआ दिखाई दे रहा है जबकि पास ही कई बेड खाली थे इस दृश्य ने न केवल परिजनों को परेशान किया बल्कि पूरे सिस्टम की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए हैं सूत्रों के मुताबिक अस्पताल स्टाफ की ओर से यह तर्क दिया गया कि मरीज को बेड इसलिए नहीं दिया गया क्योंकि उसे आगे रीवा रेफर किया जाना था और इस दौरान बेडशीट खराब होने की आशंका थी आरोप है कि खून लगने के डर से मरीज को बिस्तर पर न लिटाकर फर्श पर ही छोड़ दिया गया इस घटना ने यह सवाल खड़ा कर दिया है कि क्या एक चादर की कीमत मानव जीवन और उसकी गरिमा से अधिक हो सकती है स्थानीय लोगों का कहना है कि यह कोई पहली घटना नहीं है बल्कि मऊगंज सिविल अस्पताल में लापरवाही और अव्यवस्था की शिकायतें लगातार सामने आती रही हैंकभी मरीजों के साथ दुर्व्यवहार तो कभी डॉक्टरों की अनुपस्थिति जैसी घटनाएं पहले भी चर्चा में रही हैं लेकिन हर बार जांच और कार्रवाई के आश्वासन के बाद मामला ठंडे बस्ते में चला जाता है घटना के बाद स्वास्थ्य विभाग एक बार फिर जांच और कार्रवाई की बात कह रहा है लेकिन स्थानीय लोगों में नाराजगी बढ़ती जा रही है और लोग सवाल उठा रहे हैं कि आखिर कब तक सरकारी अस्पतालों में ऐसी संवेदनहीनता देखने को मिलेगी यह मामला न केवल स्वास्थ्य व्यवस्था की खामियों को उजागर करता है बल्कि यह भी दिखाता है कि आपात स्थिति में मरीजों के साथ मानवीय व्यवहार को लेकर अभी भी गंभीर सुधार की जरूरत है
IPL 2026: केकेआर को बड़ा बूस्ट, पथिराना की एंट्री से गेंदबाजी होगी और मजबूत

नई दिल्ली। इंडियन प्रीमियर लीग 2026 में खराब प्रदर्शन से जूझ रही कोलकाता नाइट राइडर्स (केकेआर) के लिए राहत भरी खबर सामने आई है। टीम के तेज गेंदबाजी आक्रमण को जल्द ही मजबूती मिलने वाली है, क्योंकि श्रीलंका के स्टार पेसर मथीशा पथिराना को आखिरकार फिटनेस क्लियरेंस मिल गया है। श्रीलंका क्रिकेट बोर्ड की ओर से उन्हें नो-ऑब्जेक्शन सर्टिफिकेट (NOC) भी जारी कर दिया गया है, जिसके बाद वह जल्द ही टीम से जुड़ने वाले हैं। 17 अप्रैल से टीम के साथ, 19 अप्रैल को मैदान में उतरने की उम्मीदरिपोर्ट्स के मुताबिक, पथिराना 17 अप्रैल को गुजरात टाइटंस के खिलाफ मुकाबले से पहले टीम कैंप जॉइन कर सकते हैं। हालांकि, उनके 19 अप्रैल को राजस्थान रॉयल्स के खिलाफ मैच में खेलने की अधिक संभावना जताई जा रही है। इससे केकेआर के गेंदबाजी संयोजन को बड़ा फायदा मिलेगा। गेंदबाजी रही केकेआर की सबसे बड़ी कमजोरीइस सीजन में केकेआर का प्रदर्शन निराशाजनक रहा है। टीम ने शुरुआती चार मुकाबलों में से तीन गंवा दिए हैं। हार की सबसे बड़ी वजह कमजोर गेंदबाजी रही है। मुस्तफिजुर रहमान को टीम से रिलीज करना पड़ाहर्षित राणा और आकाश दीप चोट के चलते बाहर हो गएवरुण चक्रवर्ती खराब फॉर्म से जूझ रहे हैं मुंबई इंडियंस के खिलाफ 220 रन का स्कोर डिफेंड न कर पाना और लखनऊ सुपर जायंट्स के खिलाफ हार, टीम की गेंदबाजी की कमजोरी को साफ दर्शाता है। डेथ ओवरों के स्पेशलिस्ट हैं पथिरानामथीशा पथिराना अपनी यॉर्कर और स्लिंगिंग एक्शन के लिए जाने जाते हैं। खासकर डेथ ओवरों में उनकी गेंदबाजी बल्लेबाजों के लिए काफी मुश्किल साबित होती है। उन्होंने पहले चेन्नई सुपर किंग्स (CSK) के लिए खेलते हुए कई मैच जिताऊ प्रदर्शन किए हैं। 18 करोड़ में खरीदे गए थे पथिरानाआईपीएल 2026 की नीलामी में केकेआर ने पथिराना को 18 करोड़ रुपये में अपनी टीम में शामिल किया था। हालांकि, टी20 विश्व कप के दौरान लगी चोट के कारण वह शुरुआती मैचों में नहीं खेल सके। अब फिट होकर उनकी वापसी टीम के लिए गेम-चेंजर साबित हो सकती है। IPL करियर पर एक नजरपथिराना ने अब तक 32 आईपीएल मैचों में 47 विकेट चटकाए हैं। उनकी यह उपलब्धि दर्शाती है कि वह कितने प्रभावी गेंदबाज हैं, खासकर छोटे फॉर्मेट में।
बिहार की राजनीति में बड़ा सत्ता परिवर्तन तय, नए मुख्यमंत्री के चयन को लेकर तेज हुई हलचल और भाजपा की रणनीतिक भूमिका पर टिकी सबकी नजर
ग्वालियर रेल पुलिस की बड़ी कार्रवाई ट्रेनों में मंगलसूत्र चोरी करने वाले अंतरराज्यीय गिरोह का भंडाफोड़

ग्वालियर । मध्य प्रदेश के ग्वालियर में रेल यात्रियों को निशाना बनाने वाले एक अंतरराज्यीय चोरी गिरोह का पुलिस ने पर्दाफाश किया है ग्वालियर जीआरपी ने कार्रवाई करते हुए ऐसे गिरोह को गिरफ्तार किया है जो ट्रेनों में खासकर महिला यात्रियों को निशाना बनाकर उनके गले से मंगलसूत्र और अन्य जेवरात चोरी करता था पुलिस के अनुसार इस गिरोह की कई वारदातें सामने आने के बाद जांच शुरू की गई थी मामला 4 मार्च से शुरू हुआ जब विजयपुर निवासी निशा शाक्य का मंगलसूत्र मेमू ट्रेन में चढ़ते समय चोरी हो गया इसके बाद 17 मार्च को रामस्नेही धाकड़ के साथ भी इसी तरह की घटना हुई दोनों मामलों में समानता पाए जाने के बाद जीआरपी ने संगठित गिरोह की आशंका के आधार पर जांच तेज कर दी लगातार निगरानी और सूचना तंत्र की मदद से 9 अप्रैल को पुलिस को सफलता मिली और मुखबिर की सूचना पर चार आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया गया गिरफ्तार आरोपियों की पहचान रंजीत उर्फ रिंकू कोरी उम्र 44 वर्ष निवासी इटावा हाल निवासी फिरोजाबाद सचिन कुमार कोरी निवासी फिरोजाबाद सुनील राठौर निवासी फिरोजाबाद और विश्वदीप राठौर उम्र 20 वर्ष निवासी खेड़ा के रूप में हुई है पुलिस ने आरोपियों के पास से करीब 2 लाख 10 हजार रुपये मूल्य के सोने के मंगलसूत्र और मोती बरामद किए हैं पूछताछ में आरोपियों ने स्वीकार किया कि वे भीड़भाड़ वाली ट्रेनों में जनरल और स्लीपर कोच में यात्रा करते थे और महिलाओं के गले से कीमती आभूषण पार कर अगले स्टेशन पर उतरकर फरार हो जाते थे जीआरपी अधिकारियों के मुताबिक यह एक संगठित अंतरराज्यीय गिरोह है जो लंबे समय से इस तरह की घटनाओं को अंजाम दे रहा था फिलहाल पुलिस ने आरोपियों के खिलाफ चोरी सहित अन्य धाराओं में मामला दर्ज कर लिया है और उनसे अन्य वारदातों के बारे में भी पूछताछ की जा रही है इस कार्रवाई के बाद रेल यात्रियों की सुरक्षा को लेकर पुलिस ने सतर्कता और बढ़ा दी है ताकि भविष्य में इस तरह की घटनाओं पर रोक लगाई जा सके
डीजल और एटीएफ पर भारी एक्सपोर्ट ड्यूटी बढ़ोतरी से ऊर्जा बाजार में हलचल…

नई दिल्ली:देश में ऊर्जा नीति से जुड़े एक अहम फैसले के तहत सरकार ने डीजल और एविएशन टर्बाइन फ्यूल पर निर्यात शुल्क में महत्वपूर्ण बढ़ोतरी की है। इस कदम को वैश्विक ऊर्जा बाजार की अस्थिरता और घरेलू आपूर्ति को सुरक्षित रखने की रणनीति के रूप में देखा जा रहा है। नए बदलाव के बाद ईंधन निर्यात की लागत में उल्लेखनीय वृद्धि होने की संभावना है, जिससे रिफाइनिंग और एक्सपोर्ट सेक्टर पर सीधा प्रभाव पड़ेगा। नए प्रावधान के अनुसार डीजल पर निर्यात शुल्क 21.5 रुपये प्रति लीटर से बढ़ाकर 55.5 रुपये प्रति लीटर कर दिया गया है। वहीं एविएशन टर्बाइन फ्यूल यानी एटीएफ पर भी एक्सपोर्ट ड्यूटी में बढ़ोतरी की गई है, जिसके बाद यह 29.5 रुपये से बढ़कर 42 रुपये प्रति लीटर हो गया है। पेट्रोल पर किसी प्रकार का बदलाव नहीं किया गया है और उस पर निर्यात शुल्क शून्य ही रखा गया है, जिससे इस श्रेणी को फिलहाल राहत बनी हुई है। सरकारी सूत्रों के अनुसार इस निर्णय का मुख्य उद्देश्य घरेलू बाजार में ईंधन की उपलब्धता को सुनिश्चित करना और अंतरराष्ट्रीय कीमतों में उतार-चढ़ाव के बीच स्थिरता बनाए रखना है। माना जा रहा है कि कई बार वैश्विक बाजार में बढ़ती कीमतों का लाभ निर्यातक कंपनियों को अधिक मिलता है, जबकि घरेलू जरूरतें प्रभावित होती हैं, ऐसे में यह कदम संतुलन बनाने के लिए उठाया गया है। यह फैसला विंडफॉल टैक्स ढांचे का हिस्सा माना जा रहा है, जिसके तहत सरकार समय-समय पर ऊर्जा उत्पादों पर कर व्यवस्था में बदलाव करती रहती है। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना होता है कि रिफाइनरियों के लाभ और घरेलू आपूर्ति के बीच उचित संतुलन बना रहे, ताकि देश के भीतर ईंधन की कमी की स्थिति न उत्पन्न हो। इसके साथ ही सरकार विमानन क्षेत्र में लागत को नियंत्रित करने के लिए भी विकल्पों पर विचार कर रही है। एटीएफ पर राज्य स्तर पर लगने वाले करों में कमी को लेकर भी चर्चा चल रही है, ताकि एयरलाइंस और यात्रियों पर पड़ने वाले खर्च को कम किया जा सके। इस दिशा में विभिन्न विभागों और राज्य सरकारों के बीच संवाद जारी है। देश के कई प्रमुख हवाई अड्डों पर पहले से ही ईंधन की कीमतें अधिक बनी हुई हैं, जिसका कारण टैक्स संरचना और स्थानीय शुल्क माने जाते हैं। ऐसे में केंद्र सरकार एयरपोर्ट से जुड़े कुछ शुल्कों में भी राहत देने की संभावनाओं का आकलन कर रही है, ताकि विमानन क्षेत्र को कुछ राहत मिल सके और संचालन लागत में संतुलन आए। वैश्विक स्तर पर ऊर्जा बाजार में जारी अनिश्चितता और भू-राजनीतिक तनाव ने कच्चे तेल की कीमतों को प्रभावित किया है, जिससे कई देशों में ईंधन नीतियों में लगातार बदलाव देखने को मिल रहे हैं। भारत का यह कदम भी इसी व्यापक वैश्विक परिदृश्य का हिस्सा माना जा रहा है, जहां घरेलू हितों को प्राथमिकता देना मुख्य उद्देश्य है। आने वाले समय में इस फैसले के प्रभाव को ऊर्जा बाजार, रिफाइनरी सेक्टर और विमानन उद्योग पर बारीकी से देखा जाएगा। फिलहाल सरकार का फोकस घरेलू आपूर्ति को स्थिर बनाए रखने और बाजार में अनावश्यक उतार-चढ़ाव को रोकने पर केंद्रित है।
भाग्य बदलने वाली सूर्य रेखा का राज इस एक निशान से मिलती है दौलत शोहरत और ऊंचा मुकाम

नई दिल्ली । हस्तरेखा शास्त्र में हथेली की रेखाओं को व्यक्ति के जीवन का दर्पण माना गया है। कहा जाता है कि इन रेखाओं में छिपे संकेत इंसान के भविष्य उसके स्वभाव और उसकी सफलता की दिशा को दर्शाते हैं। इन्हीं रेखाओं में एक बेहद महत्वपूर्ण रेखा होती है सूर्य रेखा जिसे भाग्य प्रतिष्ठा और धन का प्रतीक माना जाता है। यह रेखा हर व्यक्ति की हथेली में अलग अलग रूप में दिखाई देती है और इसकी स्थिति गहराई और स्पष्टता जीवन के कई राज खोलती है। हथेली में अनामिका उंगली के नीचे के भाग को सूर्य पर्वत कहा जाता है और यहीं से ऊपर की ओर जाने वाली रेखा सूर्य रेखा कहलाती है। यदि यह रेखा साफ सीधी और बिना किसी रुकावट के दिखाई दे तो इसे अत्यंत शुभ माना जाता है। ऐसे लोग जीवन में कम प्रयासों के बावजूद बड़ी सफलता हासिल करते हैं। इन्हें समाज में मान सम्मान और पहचान आसानी से मिल जाती है और कई बार यह सफलता उन्हें विरासत या अचानक अवसरों के माध्यम से प्राप्त होती है। ज्योतिष मान्यताओं के अनुसार सूर्य को तेज यश और प्रतिष्ठा का कारक माना गया है। यदि किसी व्यक्ति की हथेली में सूर्य पर्वत उभरा हुआ हो और उस पर स्पष्ट रेखा हो तो यह संकेत देता है कि वह व्यक्ति समाज में उच्च स्थान प्राप्त करेगा। ऐसे लोग जहां भी जाते हैं अपनी अलग पहचान बनाते हैं और अपने व्यक्तित्व से लोगों को प्रभावित करते हैं। कुछ लोगों की हथेली में सूर्य रेखा दोहरी होती है यानी दो समानांतर रेखाएं दिखाई देती हैं। यह स्थिति बेहद शुभ मानी जाती है और इसे राजयोग के समान माना जाता है। ऐसे व्यक्ति नेतृत्व क्षमता में निपुण होते हैं और प्रशासनिक या सरकारी क्षेत्र में ऊंचे पद तक पहुंच सकते हैं। इनके अंदर निर्णय लेने की क्षमता मजबूत होती है और ये जीवन में बड़े लक्ष्य हासिल करने में सफल रहते हैं। वहीं यदि सूर्य रेखा से शाखाएं निकलकर मध्यमा और कनिष्ठा उंगली की ओर जाती हैं तो यह असाधारण बुद्धिमत्ता का संकेत माना जाता है। ऐसे लोग तर्क शक्ति और संवाद कला में माहिर होते हैं। उनकी बातों में ऐसा प्रभाव होता है कि लोग आसानी से उनकी ओर आकर्षित हो जाते हैं और उनकी बातों को गंभीरता से लेते हैं। सबसे खास और दुर्लभ स्थिति तब मानी जाती है जब सूर्य रेखा पर या उसके पास स्वास्तिक का चिह्न बना हो। यह चिन्ह अत्यंत शुभ और ईश्वरीय कृपा का प्रतीक माना जाता है। ऐसे व्यक्ति को जीवन में धन दौलत सुख सुविधा और सम्मान की कभी कमी नहीं होती। यह संकेत देता है कि व्यक्ति हर कठिनाई से उबरकर सफलता के शिखर तक पहुंचेगा और उसे जीवन में विशेष संरक्षण प्राप्त रहेगा। इस प्रकार सूर्य रेखा केवल एक साधारण रेखा नहीं बल्कि जीवन की दिशा और दशा को प्रभावित करने वाला एक महत्वपूर्ण संकेत मानी जाती है। हालांकि सफलता के लिए मेहनत और सही निर्णय भी उतने ही जरूरी हैं लेकिन यदि भाग्य का साथ मिल जाए तो जीवन की राह आसान हो जाती है।
वास्तु चेतावनी इन पेड़ों की छाया से दूर रखें अपना घर वरना सुख शांति हो सकती है खत्म

नई दिल्ली । सनातन परंपरा में प्रकृति को दिव्य शक्ति का स्वरूप माना गया है और पेड़ पौधों को विशेष महत्व दिया गया है। यही कारण है कि घर में तुलसी और शमी जैसे पौधों को शुभ माना जाता है और उन्हें लगाने से सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है। वास्तु शास्त्र के अनुसार पेड़ पौधे केवल वातावरण को ही नहीं बल्कि जीवन की दिशा को भी प्रभावित करते हैं। जहां कुछ वृक्ष घर में सुख समृद्धि और शांति लाते हैं वहीं कुछ ऐसे भी होते हैं जिनकी छाया तक को अशुभ माना गया है। वास्तु विशेषज्ञों के अनुसार यदि कुछ विशेष पेड़ों की छाया घर पर पड़ती है तो इससे नकारात्मक ऊर्जा का प्रभाव बढ़ सकता है और परिवार में तनाव आर्थिक परेशानी तथा मानसिक अशांति जैसी समस्याएं उत्पन्न हो सकती हैं। इसलिए इन पेड़ों को घर से उचित दूरी पर लगाना ही बेहतर माना जाता है। सबसे पहले बात करें पीपल के पेड़ की तो इसे धार्मिक दृष्टि से अत्यंत पवित्र माना गया है और इसमें देवताओं का वास बताया गया है। पूजा पाठ और धार्मिक कार्यों में इसका विशेष महत्व है लेकिन वास्तु के अनुसार इसकी छाया घर पर पड़ना अनुकूल नहीं माना जाता। इसकी ऊर्जा बहुत अधिक शक्तिशाली और आध्यात्मिक होती है जो गृहस्थ जीवन की स्थिरता को प्रभावित कर सकती है। यदि इसकी परछाई घर पर पड़ती है तो परिवार के सदस्यों के बीच संतुलन बिगड़ सकता है और मानसिक तनाव बढ़ सकता है। दूसरा पेड़ है इमली जिसका स्वाद भले ही लोगों को पसंद आता हो लेकिन वास्तु में इसकी छाया को नकारात्मक माना गया है। मान्यता है कि इमली के पेड़ की छाया जिस घर पर पड़ती है वहां रहने वाले लोगों के बीच मतभेद बढ़ने लगते हैं। खासतौर पर पति पत्नी के रिश्तों में तनाव और तकरार की स्थिति पैदा हो सकती है। धीरे धीरे यह स्थिति परिवार के अन्य संबंधों को भी प्रभावित कर सकती है और घर का माहौल अशांत हो जाता है। तीसरी श्रेणी में आते हैं कांटेदार और दूधिया रस वाले पेड़ जैसे बबूल या कैक्टस। इन पेड़ों की प्रकृति ही कठोर और रक्षात्मक होती है इसलिए वास्तु में इन्हें घर के पास रखना उचित नहीं माना गया है। इनकी छाया घर पर पड़ने से नकारात्मक विचार बढ़ सकते हैं और परिवार के सदस्यों के बीच कटुता पैदा हो सकती है। इससे आपसी विश्वास कमजोर होता है और जीवन में असंतुलन की स्थिति बन सकती है। यदि आपके घर के आसपास पहले से ऐसे पेड़ मौजूद हैं और उनकी छाया घर पर पड़ रही है तो घबराने की जरूरत नहीं है। कुछ सरल उपाय अपनाकर इसके प्रभाव को कम किया जा सकता है। सप्ताह में एक बार घर में गंगाजल का छिड़काव करने से वातावरण शुद्ध होता है और नकारात्मक ऊर्जा कम होती है। इसके साथ ही रोज शाम मुख्य द्वार पर दीपक जलाने से सकारात्मक ऊर्जा का प्रवेश होता है और घर सुरक्षित रहता है। इसके अलावा घर में तुलसी का पौधा लगाना बेहद लाभकारी माना गया है। ध्यान रखें कि तुलसी पर इन अशुभ पेड़ों की सीधी छाया न पड़े। तुलसी का पौधा घर के वातावरण को संतुलित करता है और वास्तु दोषों को कम करने में सहायक होता है। इस तरह थोड़ी सी सावधानी और सही जानकारी से आप अपने घर को नकारात्मक प्रभावों से बचाकर सुख शांति और समृद्धि बनाए रख सकते हैं।
मध्य प्रदेश में मौसम का मिजाज बदला दतिया में पारा चढ़ा अप्रैल में ही लू जैसे हालात

दतिया । मध्य प्रदेश के दतिया जिले में अप्रैल की शुरुआत में ही गर्मी ने अपने तेवर दिखाने शुरू कर दिए हैं तेज धूप और गर्म हवाओं के कारण हालात ऐसे बन गए हैं जैसे लू का असर पहले ही शुरू हो गया हो रविवार सुबह से ही लगातार तेज धूप निकलने के कारण लोगों को घर से बाहर निकलना मुश्किल हो रहा है मौसम में आए इस बदलाव के चलते दिन और रात दोनों के तापमान में लगातार बढ़ोतरी दर्ज की जा रही है मौसम विभाग के अनुसार न्यूनतम तापमान बढ़कर लगभग 20 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया है जो सामान्य से अधिक माना जा रहा है वहीं अधिकतम तापमान भी सामान्य से ऊपर बना हुआ है जिससे गर्मी का असर और ज्यादा महसूस किया जा रहा है विशेषज्ञों के अनुसार पिछले कुछ दिनों से सक्रिय पश्चिमी विक्षोभ और अन्य मौसमी सिस्टम अब कमजोर पड़ चुके हैं इसके कारण राजस्थान क्षेत्र में बने दबाव के चलते सूखी और गर्म हवाएं मध्य भारत की ओर बढ़ रही हैं जिसका सीधा असर दतिया और आसपास के क्षेत्रों में देखा जा रहा है इन गर्म हवाओं ने मौसम को तेजी से शुष्क और तपता हुआ बना दिया है मौसम वैज्ञानिकों का कहना है कि आने वाले दिनों में गर्मी से राहत मिलने की कोई संभावना फिलहाल नहीं है बल्कि 15 अप्रैल के बाद तापमान में और अधिक बढ़ोतरी हो सकती है जिससे लू जैसी स्थितियां भी बन सकती हैं यह स्थिति लोगों के स्वास्थ्य पर भी असर डाल सकती है इसी को देखते हुए प्रशासन और विशेषज्ञों ने लोगों को सलाह दी है कि वे दिन के समय विशेषकर दोपहर में अनावश्यक रूप से बाहर निकलने से बचें और पर्याप्त मात्रा में पानी का सेवन करें ताकि शरीर में डिहाइड्रेशन जैसी समस्या न हो इस बीच कुछ ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार भी इस वर्ष अप्रैल से ही गर्मी की तेज शुरुआत को संकेत माना जा रहा है और अनुमान जताया जा रहा है कि यह गर्मी का दौर लंबे समय तक यानी जुलाई तक बना रह सकता है जिससे आने वाले महीनों में भी भीषण गर्मी का सामना करना पड़ सकता है कुल मिलाकर दतिया में मौसम का बदलता मिजाज लोगों के लिए चिंता का विषय बन गया है और आने वाले दिनों में स्थिति और अधिक चुनौतीपूर्ण हो सकती है