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बांसुरी स्वराज ने नारी शक्ति के सशक्तीकरण और प्रतिनिधित्व पर दिया जोर..

नई दिल्ली:लोकसभा में महिला आरक्षण से जुड़े विधेयकों पर चर्चा के दौरान राजनीतिक माहौल गरमा गया। इस बहस में भाजपा सांसद बांसुरी स्वराज ने विधेयक का समर्थन करते हुए महिलाओं के राजनीतिक प्रतिनिधित्व को बढ़ाने की आवश्यकता पर जोर दिया और विपक्ष पर तीखे सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि देश की नारी शक्ति अब पहले से अधिक जागरूक और सक्षम है तथा उसे निर्णय प्रक्रिया में उचित स्थान मिलना चाहिए। अपने संबोधन में बांसुरी स्वराज ने कहा कि भारत की महिलाएं हर क्षेत्र में उत्कृष्ट प्रदर्शन कर रही हैं, लेकिन राजनीति में उनका प्रतिनिधित्व अभी भी अपेक्षाकृत कम है। उन्होंने कहा कि संसद और विधानसभाओं में महिलाओं की भागीदारी बढ़ाना केवल एक नीति नहीं बल्कि लोकतांत्रिक संतुलन की आवश्यकता है। उन्होंने यह भी कहा कि लोकतंत्र में महिलाओं की भूमिका केवल मतदाता तक सीमित नहीं होनी चाहिए, बल्कि उन्हें नीति निर्माण की प्रक्रिया में भी समान अवसर मिलना चाहिए। उनके अनुसार जब महिलाएं समाज के हर क्षेत्र में अग्रणी भूमिका निभा रही हैं तो राजनीतिक क्षेत्र में भी उनकी भागीदारी को मजबूत करना समय की मांग है। बांसुरी स्वराज ने विपक्ष की आलोचना करते हुए कहा कि महिला आरक्षण को लेकर जो आपत्तियां सामने आ रही हैं, वे उचित नहीं हैं। उन्होंने सवाल उठाया कि जब इस दिशा में पहले सहमति बन चुकी थी तो अब इसके क्रियान्वयन में देरी क्यों की जा रही है। उनके अनुसार यह मुद्दा केवल राजनीतिक नहीं बल्कि सामाजिक न्याय और समान अधिकारों से जुड़ा है। उन्होंने परिसीमन की प्रक्रिया का उल्लेख करते हुए कहा कि यह एक लोकतांत्रिक प्रक्रिया है और इसे किसी राजनीतिक दृष्टिकोण से जोड़कर नहीं देखा जाना चाहिए। उनके अनुसार महिला आरक्षण को प्रभावी रूप से लागू करने के लिए परिसीमन एक आवश्यक कदम है, जिससे प्रतिनिधित्व का संतुलन बेहतर बनाया जा सकता है। अपने संबोधन में उन्होंने यह भी कहा कि देश की जनसंख्या संरचना में समय के साथ बड़ा बदलाव आया है और ऐसे में संसदीय व्यवस्था में भी सुधार की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र की मजबूती के लिए यह जरूरी है कि सभी वर्गों को उचित प्रतिनिधित्व मिले। बांसुरी स्वराज ने यह भी कहा कि महिला सशक्तीकरण को लेकर किसी प्रकार का भ्रम फैलाना उचित नहीं है और इस दिशा में उठाए गए कदमों को सकारात्मक रूप से देखा जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि यह केवल राजनीतिक निर्णय नहीं बल्कि समाज में समानता और न्याय की दिशा में एक महत्वपूर्ण प्रयास है।

धार्मिक आस्था का पावन पर्व अक्षय तृतीया पर मंदिरों में उमड़ा श्रद्धा का सैलाब और विशेष परंपराएं

नई दिल्ली । सनातन धर्म में अक्षय तृतीया को अत्यंत पवित्र और शुभ तिथि माना जाता है जिसे अक्षय यानी कभी समाप्त न होने वाले पुण्य का प्रतीक कहा गया है। यह तिथि वैशाख मास के शुक्ल पक्ष की तृतीया को आती है और मान्यता है कि इस दिन किए गए दान, पुण्य और शुभ कार्यों का फल अक्षय रूप से प्राप्त होता है। यही कारण है कि इस दिन पूरे 24 घंटे को शुभ मुहूर्त माना जाता है और किसी विशेष समय की आवश्यकता नहीं पड़ती। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार अक्षय तृतीया के दिन नए कार्यों की शुरुआत, विवाह, निवेश और व्यापारिक गतिविधियों को अत्यंत शुभ माना जाता है। इसी दिन से कई महत्वपूर्ण धार्मिक यात्राओं और परंपराओं की शुरुआत भी होती है, जिनमें चार धाम यात्रा का शुभारंभ प्रमुख है। गंगोत्री और यमुनोत्री मंदिरों के कपाट इसी दिन श्रद्धालुओं के लिए खोले जाते हैं, जबकि केदारनाथ और बद्रीनाथ धाम भी इसी शुभ अवसर पर भक्तों के लिए दर्शन हेतु खुलते हैं। पुरी में भगवान जगन्नाथ की प्रसिद्ध रथ यात्रा की तैयारियों की शुरुआत भी अक्षय तृतीया से ही मानी जाती है। इसी दिन भगवान जगन्नाथ, बलभद्र और सुभद्रा के तीन विशाल रथों का निर्माण कार्य विधिवत रूप से प्रारंभ होता है। मंदिर के पुजारी भगवान को माला अर्पित कर रथ निर्माण की परंपरा का शुभारंभ करते हैं, जो आगे चलकर विश्व प्रसिद्ध रथ यात्रा का स्वरूप लेती है। वृंदावन में अक्षय तृतीया का विशेष महत्व देखने को मिलता है। यहां बांके बिहारी मंदिर में भगवान के चरण कमलों के दर्शन वर्ष में केवल इसी दिन भक्तों को होते हैं। इसके अलावा मंदिरों में फूलों और चंदन से विशेष श्रृंगार किया जाता है, जिससे पूरे वातावरण में भक्ति और उल्लास का माहौल बन जाता है। दक्षिण भारत में भी इस पर्व की अनूठी परंपराएं देखने को मिलती हैं। आंध्र प्रदेश के सिंहाचलम मंदिर में इस दिन भगवान वराह नरसिंह पर लगी चंदन की परत हटाकर उनके वास्तविक स्वरूप के दर्शन भक्तों को कराए जाते हैं। वहीं तमिलनाडु के कई विष्णु मंदिरों में गरुड़ वाहन पर भव्य शोभा यात्राएं निकाली जाती हैं। ओडिशा के रेमुना मंदिर में भगवान क्षीरचोरा गोपीनाथ को चंदन का लेप लगाकर गर्मी से राहत देने की परंपरा निभाई जाती है। यह आयोजन भक्तों के लिए विशेष आकर्षण का केंद्र होता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार अक्षय तृतीया का संबंध कई पौराणिक घटनाओं से भी जोड़ा जाता है। कहा जाता है कि इसी दिन त्रेता युग का आरंभ हुआ था, गंगा का पृथ्वी पर अवतरण हुआ था, महाभारत की रचना शुरू हुई थी और भगवान परशुराम का अवतार भी इसी दिन माना जाता है। साथ ही माता अन्नपूर्णा का प्राकट्य और कुबेर को धन के देवता का स्थान भी इसी तिथि से जुड़ा हुआ बताया जाता है। इस दिन सोना, हल्दी, पीली सरसों, रूई और कौड़ी जैसी वस्तुओं की खरीद को शुभ माना जाता है। श्रद्धालु भगवान विष्णु की पूजा, दान और सत्कर्म कर जीवन में सुख, समृद्धि और अक्षय पुण्य की कामना करते हैं। अक्षय तृतीया केवल एक पर्व नहीं बल्कि आस्था, परंपरा और शुभता का अद्भुत संगम माना जाता है जो भारतीय संस्कृति की गहराई को दर्शाता है।

भारत-ऑस्ट्रिया के बीच बड़ी साझेदारी खाद्य सुरक्षा से लेकर रक्षा तक कई अहम समझौते पर मुहर

नई दिल्ली । भारत और ऑस्ट्रिया के बीच द्विपक्षीय संबंधों को नई दिशा देते हुए कई महत्वपूर्ण समझौतों पर सहमति बनी है। राजधानी नई दिल्ली में भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और ऑस्ट्रिया के फेडरल चांसलर क्रिश्चियन स्टॉकर के बीच हुई उच्च स्तरीय बैठक में दोनों देशों ने विभिन्न क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर जोर दिया। इस बैठक के दौरान कई डील्स पर हस्ताक्षर किए गए, जिससे भारत और ऑस्ट्रिया के रिश्तों में नई मजबूती देखने को मिली है। बैठक के दौरान सबसे अहम समझौता ऑडियो विजुअल को प्रोडक्शन से जुड़ा रहा, जिसका उद्देश्य दोनों देशों की फिल्म इंडस्ट्री के बीच सहयोग को बढ़ावा देना है। इस समझौते से संयुक्त फिल्म निर्माण को बढ़ावा मिलेगा, सांस्कृतिक और क्रिएटिव एक्सचेंज को मजबूती मिलेगी और भारतीय कलाकारों को अंतरराष्ट्रीय मंच पर नए अवसर प्राप्त होंगे। इससे भारतीय सिनेमा और देश की सांस्कृतिक सॉफ्ट पावर को भी वैश्विक स्तर पर विस्तार मिलेगा। इसके साथ ही दोनों देशों ने व्यापार और निवेश को आसान बनाने के लिए फास्ट ट्रैक मैकेनिज्म पर सहमति जताई है। इसका उद्देश्य भारतीय और ऑस्ट्रियाई कंपनियों को आने वाली अड़चनों की पहचान कर उनका समाधान करना है, जिससे दोनों देशों के बीच व्यापारिक संबंध और अधिक मजबूत होंगे। यह कदम निवेशकों के लिए बेहतर माहौल तैयार करेगा और बाजार पहुंच को भी आसान बनाएगा। रक्षा क्षेत्र में भी दोनों देशों ने सहयोग बढ़ाने पर सहमति जताई है। इसके तहत एक संस्थागत ढांचा तैयार किया जाएगा, जो डिफेंस इंडस्ट्रियल और टेक्नोलॉजी पार्टनरशिप को मजबूत करेगा। साथ ही रक्षा नीति पर संवाद, प्रशिक्षण और क्षमता निर्माण जैसे क्षेत्रों में भी सहयोग बढ़ेगा, जिससे भारत के रक्षा क्षेत्र को नई तकनीकी मजबूती मिलेगी। आतंकवाद विरोधी सहयोग को लेकर भी एक संयुक्त कार्य समूह के गठन पर सहमति बनी है। यह समूह राष्ट्रीय सुरक्षा को मजबूत करने, खुफिया जानकारी साझा करने और क्षमता निर्माण को बढ़ावा देने में अहम भूमिका निभाएगा। इससे दोनों देशों के बीच सुरक्षा सहयोग और अधिक प्रभावी होगा। खाद्य सुरक्षा के क्षेत्र में भी बड़ा समझौता हुआ है, जिसके तहत भारत के एफएसएसएआई और ऑस्ट्रिया के संबंधित संस्थान एजीईएस के बीच सहयोग स्थापित किया गया है। इस समझौते का उद्देश्य खाद्य मानकों में सुधार, वैज्ञानिक आदान प्रदान, जोखिम मूल्यांकन और सर्वोत्तम प्रथाओं को साझा करना है। इससे कृषि और खाद्य उत्पादों के व्यापार को भी बढ़ावा मिलेगा। कुल मिलाकर यह बैठक भारत और ऑस्ट्रिया के बीच रणनीतिक, आर्थिक और सांस्कृतिक संबंधों को नई ऊंचाई पर ले जाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।

आईपीएल 2026: मुंबई इंडियंस में शामिल हुए युवा ऑलराउंडर कृष भगत, जानिए कौन हैं

नई दिल्ली : इंडियन प्रीमियर लीग 2026 के बीच मुंबई इंडियंस ने अपनी टीम में बदलाव करते हुए युवा ऑलराउंडर कृष भगत को शामिल किया है। यह निर्णय टीम के स्पिनर अथर्व अंकोलेकर के चोटिल होकर पूरे सीजन से बाहर होने के बाद लिया गया। इसके बाद टीम मैनेजमेंट ने संतुलन बनाए रखने के लिए एक युवा खिलाड़ी को स्क्वॉड में जगह दी। कृष भगत एक दाएं हाथ के ऑलराउंडर हैं, जो मुख्य रूप से तेज गेंदबाजी करते हैं और निचले क्रम में उपयोगी बल्लेबाजी करने की क्षमता रखते हैं। उनकी भूमिका एक ऐसे खिलाड़ी की मानी जा रही है जो टीम को अतिरिक्त गेंदबाजी विकल्प देने के साथ-साथ जरूरत पड़ने पर रन भी बना सके। घरेलू क्रिकेट में कृष भगत ने पिछले कुछ वर्षों में अपने प्रदर्शन से पहचान बनाई है। उन्होंने प्रथम श्रेणी क्रिकेट में डेब्यू करते हुए शुरुआती मैचों में गेंद और बल्ले दोनों से योगदान दिया। अपनी गेंदबाजी में उन्होंने नियंत्रण और विविधता दिखाई, जबकि बल्लेबाजी में भी निचले क्रम पर उपयोगी पारियां खेलीं। इसके बाद उन्होंने लिस्ट ए क्रिकेट में भी अवसर हासिल किया, जहां उन्होंने एक मैच में दबाव की स्थिति में अर्धशतक लगाकर अपनी क्षमता का परिचय दिया। इसके साथ ही गेंदबाजी में भी उन्होंने विकेट लेकर टीम के लिए संतुलन बनाए रखने में योगदान दिया। कृष भगत पिछले कुछ समय से मुंबई इंडियंस के प्रशिक्षण शिविर से जुड़े रहे हैं और लगातार ट्रायल में हिस्सा लेते रहे हैं। माना जाता है कि उनके अनुशासन, फिटनेस और लगातार प्रदर्शन ने चयनकर्ताओं को प्रभावित किया, जिसके बाद उन्हें मुख्य टीम में शामिल किया गया। मुंबई इंडियंस इस सीजन में अब तक मिश्रित प्रदर्शन कर रही है। टीम को कुछ मुकाबलों में जीत मिली है, लेकिन लगातार स्थिरता की कमी रही है। ऐसे में युवा खिलाड़ियों को मौका देकर टीम भविष्य के लिए नई संभावनाएं तैयार कर रही है। कृष भगत का चयन इस बात का संकेत है कि टीम प्रबंधन युवा प्रतिभाओं को आगे लाने और उन्हें बड़े मंच पर अनुभव देने की रणनीति पर काम कर रहा है, जिससे टीम को दीर्घकालिक लाभ मिल सके।

आर्थिक संकट से जूझता पाकिस्तान सऊदी अरब ने दी बड़ी राहत, विदेशी कर्ज पर फिर बढ़ा फोकस

नई दिल्ली । पाकिस्तान एक बार फिर गंभीर आर्थिक संकट और विदेशी कर्ज के दबाव में फंसता नजर आ रहा है। इस बीच प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ के विदेश दौरे के दौरान सऊदी अरब ने पाकिस्तान को 2 अरब डॉलर की आर्थिक सहायता देकर बड़ी राहत दी है। यह मदद ऐसे समय में आई है जब पाकिस्तान पर संयुक्त अरब अमीरात का भारी कर्ज चुकाने का दबाव बढ़ गया था। रिपोर्ट्स के अनुसार पाकिस्तान को इस महीने के अंत तक यूएई को करीब 3 अरब डॉलर का कर्ज वापस करना है, जिसके कारण उसकी आर्थिक स्थिति और अधिक कमजोर हो गई है। इसी दबाव को कम करने के लिए पाकिस्तान ने सऊदी अरब सहित अन्य मित्र देशों से सहायता की गुहार लगाई थी। पाकिस्तान के केंद्रीय बैंक स्टेट बैंक ऑफ पाकिस्तान ने पुष्टि की है कि उसे सऊदी अरब से 2 अरब डॉलर की राशि प्राप्त हुई है। बताया जा रहा है कि यह राशि 15 अप्रैल 2026 की वैल्यू डेट पर जमा की गई है, जो पाकिस्तान के विदेशी मुद्रा भंडार को अस्थायी मजबूती देती है। इसके अलावा सऊदी अरब ने पाकिस्तान को अतिरिक्त 3 अरब डॉलर जमा देने का भी आश्वासन दिया है और अपनी मौजूदा 5 अरब डॉलर की वित्तीय सुविधा को तीन साल के लिए बढ़ाने का फैसला किया है। इससे पाकिस्तान को अल्पकालिक आर्थिक दबाव से कुछ राहत मिल सकती है। हालांकि विशेषज्ञों का मानना है कि यह राहत स्थायी समाधान नहीं है क्योंकि पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था पहले से ही उच्च महंगाई, सीमित विदेशी मुद्रा भंडार और बढ़ते बाहरी कर्ज के बोझ से जूझ रही है। मार्च के अंत तक पाकिस्तान के विदेशी मुद्रा भंडार लगभग 16.4 अरब डॉलर बताए गए हैं, जो मुश्किल से तीन महीने के आयात को कवर कर सकते हैं। इससे पहले पाकिस्तान संयुक्त अरब अमीरात के साथ 3.5 अरब डॉलर की वित्तीय सुविधा को आगे बढ़ाने में भी असफल रहा था, जिसे पिछले कई वर्षों में पहली बड़ी नाकामी माना जा रहा है। इसी कारण देश की शॉर्ट टर्म फंडिंग जरूरतों को लेकर चिंता और बढ़ गई है। आर्थिक विशेषज्ञों के अनुसार अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कच्चे तेल की कीमतों में उतार चढ़ाव और वैश्विक वित्तीय बाजार की सख्ती ने पाकिस्तान की मुश्किलें और बढ़ा दी हैं। वहीं आईएमएफ समर्थित सुधार कार्यक्रमों के तहत पाकिस्तान को लगातार वित्तीय अनुशासन बनाए रखने का दबाव भी झेलना पड़ रहा है। फिलहाल पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था बाहरी फंडिंग पर काफी हद तक निर्भर दिखाई दे रही है और ऐसे में मित्र देशों से मिलने वाली मदद ही उसकी अल्पकालिक स्थिरता का आधार बनी हुई है।

CBSE 12th Result 2026: जल्द जारी होंगे नतीजे, ऐसे चेक करें मार्कशीट

नई दिल्ली। Central Board of Secondary Education (CBSE) जल्द ही 12वीं कक्षा का रिजल्ट (CBSE 12th Result 2026) जारी करने वाला है। लाखों छात्र-छात्राएं अपने नतीजों का बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं। रिपोर्ट्स के मुताबिक, CBSE 12वीं का रिजल्ट अप्रैल के आखिर से मई के मध्य के बीच जारी किया जा सकता है, हालांकि बोर्ड की तरफ से अभी तक कोई आधिकारिक तारीख घोषित नहीं की गई है। इस साल CBSE 12वीं की परीक्षाएं 17 फरवरी से 10 अप्रैल 2026 तक आयोजित की गई थीं, जिसमें करीब 17 लाख से ज्यादा छात्रों ने हिस्सा लिया। परीक्षा खत्म होने के बाद अब रिजल्ट तैयार करने की प्रक्रिया चल रही है और जल्द ही इसे आधिकारिक वेबसाइट पर जारी किया जाएगा। इन वेबसाइट्स पर जारी होगा CBSE 12th Result 2026छात्र अपना रिजल्ट CBSE की आधिकारिक वेबसाइट्स जैसे results.cbse.nic.in, cbse.gov.in और cbseresults.nic.in पर जाकर चेक कर सकेंगे। इसके अलावा DigiLocker और UMANG ऐप के जरिए भी मार्कशीट डाउनलोड की जा सकती है। वेबसाइट पर ज्यादा ट्रैफिक होने की स्थिति में ये वैकल्पिक प्लेटफॉर्म काफी मददगार साबित होंगे। कैसे चेक करें CBSE 12वीं रिजल्ट 2026रिजल्ट देखने के लिए छात्रों को सबसे पहले CBSE की आधिकारिक वेबसाइट पर जाना होगा। इसके बाद “Class 12 Result 2026” के लिंक पर क्लिक करना होगा। फिर अपना रोल नंबर, स्कूल नंबर और एडमिट कार्ड आईडी दर्ज करनी होगी। सबमिट करते ही रिजल्ट आपकी स्क्रीन पर आ जाएगा, जिसे भविष्य के लिए डाउनलोड कर प्रिंट भी लिया जा सकता है। पास होने के लिए जरूरी है इतने नंबरCBSE 12वीं परीक्षा में पास होने के लिए छात्रों को हर विषय में कम से कम 33 प्रतिशत अंक लाना जरूरी है। यह नियम थ्योरी और प्रैक्टिकल दोनों पर लागू होता है। अगर छात्र किसी एक में भी फेल होता है तो उसे उस विषय में असफल माना जाएगा।

तेल की कीमतों में उछाल से हवाई यात्रा पर संकट चीन की एयरलाइंस ने उड़ानें रोकीं

नई दिल्ली । पश्चिम एशिया में जारी तनाव और होर्मुज संकट का सीधा असर अब वैश्विक हवाई यात्रा पर दिखाई देने लगा है। तेल की कीमतों में लगातार हो रही बढ़ोतरी के कारण एयरलाइंस की परिचालन लागत बढ़ गई है जिससे कई अंतरराष्ट्रीय उड़ानें प्रभावित हो रही हैं। इसी क्रम में चीन की कई प्रमुख एयरलाइन कंपनियों ने अपने अंतरराष्ट्रीय रूट्स पर उड़ानों को रद्द करना शुरू कर दिया है जिससे यात्रियों में असमंजस और परेशानी का माहौल है। रिपोर्ट्स के अनुसार चीनी एयरलाइनों द्वारा अचानक की गई फ्लाइट कैंसिलेशन से दक्षिण पूर्व एशिया और ऑस्ट्रेलिया जैसे क्षेत्रों की यात्रा करने वाले यात्री सबसे अधिक प्रभावित हुए हैं। कई यात्रियों ने बताया कि उन्हें आखिरी समय पर टेक्स्ट संदेश के जरिए उड़ान रद्द होने की सूचना दी गई जिससे उनकी यात्रा योजनाएं पूरी तरह बिगड़ गईं। ऑस्ट्रेलिया के मेलबर्न में छुट्टियां मना रही एक यात्री ली हुओयू ने बताया कि उनकी वापसी की फ्लाइट जो सिचुआन एयरलाइंस द्वारा संचालित थी अप्रैल के अंत में अचानक रद्द कर दी गई। उन्होंने कहा कि उनकी योजना अगले दिन काम पर लौटने की थी लेकिन अब उन्हें अनिश्चितता का सामना करना पड़ रहा है। इसी तरह हेबेई प्रांत की एक छात्रा ऊना हान ने बताया कि बीजिंग से थाईलैंड जाने वाली उनकी फ्लाइट रद्द कर दी गई जिससे उनकी पहली अंतरराष्ट्रीय यात्रा की योजना प्रभावित हुई। विशेषज्ञों के अनुसार होर्मुज संकट के चलते अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कच्चे तेल की कीमतों में उछाल आया है जिसका सीधा असर एविएशन फ्यूल पर पड़ता है। ईंधन लागत बढ़ने के कारण एयरलाइंस अपने रूट्स और फ्लाइट शेड्यूल में कटौती करने को मजबूर हो रही हैं। यही कारण है कि कई कंपनियां घाटे से बचने के लिए उड़ानों को रद्द या पुनर्निर्धारित कर रही हैं। मीडिया रिपोर्ट्स में यह भी सामने आया है कि चीन का सबसे व्यस्त ट्रैवल सीजन माने जाने वाला गोल्डन वीक भी इस फैसले से प्रभावित हो सकता है। इस दौरान लाखों यात्री अंतरराष्ट्रीय यात्रा करते हैं लेकिन फ्लाइट कैंसिलेशन से उनकी योजनाएं बाधित हो रही हैं। हालांकि अब तक किसी भी चीनी एयरलाइन ने इस मुद्दे पर विस्तृत सार्वजनिक बयान जारी नहीं किया है लेकिन कुछ कंपनियों ने नीति समायोजन और परिचालन कारणों का हवाला देते हुए उड़ानें रद्द करने की पुष्टि की है। फिलहाल वैश्विक स्तर पर बढ़ती तेल कीमतों और क्षेत्रीय तनाव के कारण हवाई यात्रा उद्योग पर दबाव लगातार बढ़ रहा है और आने वाले दिनों में स्थिति और चुनौतीपूर्ण हो सकती है।

भारतीय रेलवे में तकनीकी सुधारों से सुरक्षा और दक्षता के नए मानक स्थापित: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी

नई दिल्ली:प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा है कि भारतीय रेलवे लगातार सुधार और आधुनिक तकनीक के माध्यम से अपने संचालन को अधिक सुरक्षित और प्रभावी बना रहा है। उन्होंने बताया कि पिछले एक दशक में रेलवे प्रणाली में व्यापक बदलाव किए गए हैं, जिनका सीधा असर सुरक्षा, संचालन और यात्री सुविधा पर दिखाई दे रहा है। प्रधानमंत्री ने इस संदर्भ में रेलवे क्षेत्र में हुए सुधारों और नीतिगत बदलावों पर प्रकाश डाला, जिनके तहत तकनीक आधारित प्रणालियों को अपनाया गया है। इन प्रयासों का उद्देश्य रेलवे संचालन को अधिक सुरक्षित बनाना और यात्रियों के लिए यात्रा अनुभव को बेहतर करना रहा है। सरकारी स्तर पर बताया गया कि भारतीय रेलवे देश के करोड़ों यात्रियों के लिए जीवनरेखा की तरह है। प्रतिदिन बड़ी संख्या में लोग रेल यात्रा करते हैं, जिनमें छात्र, नौकरीपेशा लोग, प्रवासी मजदूर और सुरक्षा बलों के सदस्य शामिल हैं। ऐसे में रेलवे की सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करना अत्यंत आवश्यक माना गया है। पिछले वर्षों में रेलवे सुरक्षा को लेकर ‘सेफ्टी फर्स्ट’ की नीति पर विशेष ध्यान दिया गया है। इसके तहत तकनीकी निगरानी, बेहतर रखरखाव व्यवस्था और आधुनिक सिग्नलिंग प्रणाली को बढ़ावा दिया गया है। इस बदलाव का उद्देश्य मानवीय त्रुटियों को कम करना और दुर्घटनाओं की संभावना को घटाना रहा है। आंकड़ों के अनुसार, पिछले एक दशक में रेल दुर्घटनाओं में उल्लेखनीय कमी दर्ज की गई है। पहले की तुलना में अब दुर्घटनाओं की संख्या में भारी गिरावट आई है, जिससे यह संकेत मिलता है कि सुरक्षा व्यवस्था पहले से अधिक मजबूत हुई है। इसी अवधि में दुर्घटनाओं से होने वाली जनहानि में भी कमी आई है। इसके अलावा प्रति किलोमीटर दुर्घटना दर में भी सुधार देखा गया है, जो यह दर्शाता है कि रेलवे का समग्र संचालन पहले की तुलना में अधिक सुरक्षित और व्यवस्थित हुआ है। यह सुधार तब और महत्वपूर्ण हो जाता है जब रेल संचालन और यात्रियों की संख्या लगातार बढ़ रही है। केंद्रीय रेल मंत्री की ओर से भी इस बात पर जोर दिया गया कि रेलवे केवल परिवहन का साधन नहीं, बल्कि देश की अर्थव्यवस्था और सामाजिक जीवन का महत्वपूर्ण हिस्सा है। इसलिए इसमें लगातार निवेश और आधुनिकीकरण की प्रक्रिया जारी है, ताकि यह प्रणाली भविष्य की जरूरतों के अनुरूप और अधिक सक्षम बन सके। इस पूरे परिवर्तन को भारतीय रेलवे के आधुनिकीकरण और तकनीकी उन्नयन की दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि के रूप में देखा जा रहा है, जो आने वाले समय में और अधिक सुरक्षित और आधुनिक परिवहन व्यवस्था की ओर संकेत करता है।

Krushna Abhishek से दूरी पर खुलकर बोलीं Sunita Ahuja, Kashmera Shah से भी की मुलाकात

नई दिल्ली। गोविंदा (Govinda) की पत्नी सुनीता आहूजा (Sunita Ahuja) और गोविंदा के भांजे कृष्णा अभिषेक (Krushna Abhishek) के रिश्ते ठीक नहीं चल रहे थे। कई सालों से दोनों परिवार में खटास बनी हुई थी। लेकिन अब उनकी दूरियां मिट गई है। सुनीता ने हाल ही में कृष्णा और कश्मीरा के साथ मीडिया के सामने पोज दिए और साथ में हंसी-मजाक करती भी नजर आईं। तीनों का एक वीडियो सामने आया, जिसमें तीनों को एक साथ देखा जा रहा है। मामी सुनीता आहूजा ने कहा खत्म हुआ वनवाससामने आ रहे हैं वीडियो में सुनीता आहूजा काफी कुछ कहती हुईं नजर आ रही हैं। दरअसल, सुनीता हाल ही में ‘लाफ्टर शेफ 3’ (The Laughter Chefs 3) के एक एपिसोड में बतौर गेस्ट पहुंचीं। इस शो में कृष्णा अभिषेक और कश्मीरा शाह भी बतौर कंटेस्टेंट नजर आ रहे हैं। शो के दौरान सुनीता, अपने भांजे-बहू से भी मिलीं। जैसे ही सुनीता, कश्मीरा से मिलीं उन्हें गले लगा लिया, जिससे पता चलता है कि सुनीता और उनके भांजे कृष्णा के बीच के शिकवे-गिले अब दूर हो चुके हैं। वीडियो में सुनीता को कृष्णा और कश्मीरा के साथ हंसी-मजाक करते भी देखा जा सकता है। वह हंसते हुए कहती हैं- ’14 साल के बाद आज वनवास खत्म हुआ है।’ इस पर कश्मीरा मजाकिया अंदाज में कहती हैं- ‘किसी और का शुरू होगा। 10 साल से चल रही है रिश्तो में कड़वाहटबता दें, करीब 10 साल से गोविंदा और उनके परिवार की कृष्णा और कश्मीरा से बातचीत बंद थी। ये विवाद पब्लिक से भी छुपा नहीं रह सका था। कृष्णा अभिषेक और कश्मीरा ने कई बार मीडिया के सामने इस बात का खुलासा किया है। सुनीता आहूजा ने भी कई बार मीडिया के सामने काफी कुछ कहा है। इस कारण हुआ था विवादरिपोर्ट्स के अनुसार, इस पूरे विवाद की शुरुआत कश्मीरा शाह के एक ट्वीट से हुई थी, जिसमें उन्होंने ‘पैसे के लिए नाचने वाले’ लोगों का जिक्र किया था। कश्मीरा के इस ट्वीट को सुनीता आहूजा ने गोविंदा पर तंज माना और धीरे-धीरे दोनों परिवारों में विवाद बढ़ता चला गया और बात यहां तक पहुंच गई कि सुनीता ने पब्लिक के सामने ये तक कह दिया था कि वह कृष्णा अभिषेक का चेहरा तक नहीं देखना चाहतीं। आपको बता दे की गोविंद पहले ही कपिल शर्मा शो में आ चुके हैं गोविंदा और अभिषेक के भी सब कुछ ठीक है।लेकिन, अब गोविंदा के बाद सुनीता ने भी कृष्णा को गले लगाकर सारी दूरियां मिटा दीं हैं। आरती सिंह क आया रिएक्शनइस रीयूनियन पर गोविंदा की भाजी आरती सिंह का भी एक वीडियो वायरल हो रहा है आपको बता दें की इंस्टा बॉलीवुड से बात करते हुए उन्होंने कहा है कि, मैं काफी इमोशनल हो गई मैंने वीडियो कॉल पर उनसे बात की यह बहुत अच्छी बात है कि सब लोग मिल गए हैं।

लोकसभा सीटों में बड़ा बदलाव संभव, परिसीमन से राज्यों का समीकरण बदलेगा

नई दिल्ली। देश में एक बार फिर बड़े राजनीतिक बदलाव की तैयारी शुरू हो गई है। केंद्र सरकार द्वारा परिसीमन से जुड़े विधेयक पेश किए जाने के बाद साफ संकेत मिल रहे हैं कि आने वाले समय में लोकसभा सीटों का पूरा गणित बदल सकता है। परिसीमन आयोग के गठन के बाद सीटों का नया बंटवारा होगा, जिससे राज्यों की राजनीतिक ताकत में बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है। क्या है परिसीमन और क्यों जरूरी है?परिसीमन का मतलब चुनावी क्षेत्रों यानी लोकसभा और विधानसभा सीटों की संख्या और सीमाएं तय करना होता है। यह प्रक्रिया जनसंख्या के आधार पर की जाती है, ताकि हर क्षेत्र को बराबर प्रतिनिधित्व मिल सके। भारत में आखिरी बार परिसीमन 2002 से 2008 के बीच हुआ था। इसके बाद से सीटों की संख्या स्थिर बनी हुई है, लेकिन अब बढ़ती आबादी को देखते हुए इसे फिर से लागू करने की तैयारी है। कितनी बढ़ सकती हैं लोकसभा सीटें?वर्तमान में देश में 543 लोकसभा सीटें हैं, जिन्हें बढ़ाकर करीब 800 से 850 तक किया जा सकता है। अगर ऐसा होता है तो संसद का आकार काफी बड़ा हो जाएगा और राज्यों को उनकी जनसंख्या के अनुसार ज्यादा प्रतिनिधित्व मिलेगा। हालांकि सरकार ने अभी राज्यवार अंतिम आंकड़े जारी नहीं किए हैं, लेकिन जनसंख्या के आधार पर संभावित अनुमान सामने आए हैं। अनुमान के मुताबिक उत्तर प्रदेश में सीटें 80 से बढ़कर 135 से 140 तक हो सकती हैं, जबकि बिहार में 40 से बढ़कर 65 से 75 सीटें होने की संभावना है। इसी तरह महाराष्ट्र में सीटें 48 से बढ़कर 70 से 80 तक जा सकती हैं और पश्चिम बंगाल में 42 से बढ़कर 60 से 65 सीटें होने का अनुमान है। इसके अलावा मध्य प्रदेश में 29 से बढ़कर 40 से 45, राजस्थान में 25 से बढ़कर 35 से 40, तमिलनाडु में 39 से बढ़कर 50 से 55 और कर्नाटक में 28 से बढ़कर 40 से 45 सीटें हो सकती हैं। गुजरात में सीटें 26 से बढ़कर 35 से 40, आंध्र प्रदेश में 25 से बढ़कर 30 से 35 और तेलंगाना में 17 से बढ़कर 20 से 25 तक पहुंच सकती हैं। वहीं केरल में सीटों में मामूली बढ़ोतरी होकर 20 से 22 तक हो सकती है। ओडिशा में 21 से बढ़कर 25 से 30, झारखंड और असम में 14 से बढ़कर 18 से 22 सीटें हो सकती हैं। पंजाब में 13 से बढ़कर 15 से 18, हरियाणा में 10 से बढ़कर 12 से 15 और दिल्ली में 7 से बढ़कर 9 से 11 सीटें होने का अनुमान है। इन संभावित आंकड़ों से साफ है कि जिन राज्यों की आबादी ज्यादा है, वहां सीटों में सबसे ज्यादा इजाफा होगा। खासकर उत्तर प्रदेश और बिहार जैसे राज्यों की राजनीतिक ताकत काफी बढ़ सकती है, जिससे संसद में हिंदी बेल्ट का प्रभाव और मजबूत होगा। वहीं दक्षिण भारत के राज्यों में अपेक्षाकृत कम बढ़ोतरी होने की संभावना है, जिससे राजनीतिक संतुलन को लेकर बहस तेज हो सकती है। महिलाओं को मिलेगा बड़ा मौकाइस पूरे बदलाव के साथ महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण देने की दिशा में भी काम हो रहा है। फिलहाल लोकसभा में महिलाओं की भागीदारी करीब 13 से 14 प्रतिशत है, लेकिन नए प्रावधान लागू होने के बाद यह आंकड़ा काफी बढ़ सकता है। अनुमान है कि आने वाले समय में महिला सांसदों की संख्या 250 से 280 तक पहुंच सकती है, जो भारतीय राजनीति में एक बड़ा बदलाव साबित होगा। परिसीमन और महिला आरक्षण से जुड़े इन विधेयकों पर राजनीति भी तेज हो गई है। जहां विपक्षी दलों ने कुछ मुद्दों पर सवाल उठाए हैं, वहीं सरकार ने सभी दलों से इस पर सहयोग करने की अपील की है। हालांकि अभी यह पूरी प्रक्रिया शुरुआती चरण में है। अंतिम फैसला तब होगा जब परिसीमन आयोग का गठन होगा, नई जनगणना के आंकड़े लागू होंगे और संसद से मंजूरी मिलेगी। , परिसीमन आयोग का गठन देश की राजनीति में एक बड़ा टर्निंग पॉइंट साबित हो सकता है। आने वाले समय में न सिर्फ लोकसभा सीटों की संख्या बढ़ेगी, बल्कि राज्यों के बीच शक्ति संतुलन भी पूरी तरह बदल सकता है।