गर्मियों में चिड़चिड़ापन और गुस्सा क्यों बढ़ता है? इन उपायों से पाएं मन की शांति

नई दिल्ली। गर्मी का मौसम शुरू होते ही सिर्फ तापमान ही नहीं बढ़ता, बल्कि इसका असर हमारे शरीर और मन पर भी साफ दिखाई देने लगता है। तेज धूप और गर्म हवाओं के कारण शरीर में पित्त दोष बढ़ जाता है, जिससे चिड़चिड़ापन, गुस्सा, बेचैनी और मानसिक अस्थिरता जैसी समस्याएं बढ़ने लगती हैं। आयुर्वेद के अनुसार जब शरीर का आंतरिक ताप असंतुलित हो जाता है, तो व्यक्ति छोटी-छोटी बातों पर भी जल्दी प्रतिक्रिया देने लगता है और मानसिक शांति भंग हो जाती है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस मौसम में शरीर को ठंडक और संतुलन देने वाली दिनचर्या अपनाना बेहद जरूरी है, जिससे मन और तन दोनों स्वस्थ रह सकें। पित्त बढ़ने से क्यों आता है गुस्सा?आयुर्वेद में पित्त को अग्नि तत्व माना गया है, जो शरीर के पाचन, ऊर्जा और तापमान को नियंत्रित करता है। गर्मियों में बाहरी तापमान बढ़ने से यह पित्त और अधिक सक्रिय हो जाता है, जिससे शरीर में गर्मी बढ़ती है। इसका सीधा असर मन पर पड़ता है और व्यक्ति जल्दी गुस्से में आ जाता है। इसके अलावा सिर में भारीपन, जलन, अनिद्रा और तनाव भी इसी असंतुलन के लक्षण हैं। ऐसे में शरीर को ठंडक देने वाले उपाय अपनाना आवश्यक हो जाता है। हर्बल टी से मिलेगा मानसिक सुकूनगर्मियों में चाय और कॉफी का अत्यधिक सेवन शरीर में गर्मी बढ़ा सकता है, इसलिए विशेषज्ञ इसकी जगह हर्बल टी लेने की सलाह देते हैं। तुलसी, गुलाब की पंखुड़ियां, कैमोमाइल और पैशनफ्लावर जैसी जड़ी-बूटियों से बनी हर्बल टी तनाव को कम करने में मदद करती है। इसे दिन में एक या दो बार लेने से हार्मोन संतुलित रहते हैं और मानसिक शांति बनी रहती है। यह शरीर को प्राकृतिक रूप से ठंडक भी प्रदान करती है। मानसिक तनाव का प्राकृतिक उपचारआयुर्वेद में नस्य क्रिया को बेहद प्रभावी माना गया है। इसमें रात के समय नाक में शुद्ध घी की कुछ बूंदें डाली जाती हैं। यह प्रक्रिया मस्तिष्क को ठंडक देती है और तंत्रिका तंत्र को शांत करती है। इससे मानसिक तनाव, चिड़चिड़ापन और अनिद्रा जैसी समस्याओं में राहत मिलती है। नियमित रूप से करने पर यह पित्त दोष को संतुलित करने में सहायक होती है। चंदन का लेप: शरीर को देता है ठंडकचंदन की तासीर स्वभाव से ही ठंडी होती है। इसे माथे पर लगाने से शरीर का तापमान नियंत्रित रहता है और मानसिक अशांति कम होती है। गर्मियों में इसका प्रयोग विशेष रूप से लाभकारी माना जाता है। यह सिर में होने वाली जलन और तनाव को भी दूर करता है। तेल मालिश से मिलेगा आरामनारियल तेल या भृंगराज तेल से सिर और पैरों के तलवों की मालिश करना भी बेहद फायदेमंद होता है। इससे शरीर की थकान दूर होती है और रक्त संचार बेहतर होता है। विशेषकर तलवों की मालिश करने से तुरंत शीतलता का अनुभव होता है और गहरी नींद आने में मदद मिलती है। दिनचर्या में बदलाव जरूरीगर्मियों में हल्का और सुपाच्य भोजन करना चाहिए। अधिक मसालेदार और तले-भुने भोजन से बचना चाहिए। पर्याप्त पानी पीना, समय पर आराम करना और धूप में कम निकलना भी जरूरी है। दिन में थोड़ी देर आराम करने से शरीर की ऊर्जा संतुलित रहती है और मानसिक तनाव कम होता है। गर्मियों में बढ़ता गुस्सा और चिड़चिड़ापन केवल स्वभाव नहीं बल्कि शरीर के पित्त असंतुलन का संकेत है। यदि सही समय पर हर्बल उपाय, आयुर्वेदिक दिनचर्या और ठंडक देने वाले उपाय अपनाए जाएं, तो मन और शरीर दोनों को संतुलित रखा जा सकता है।
सुरक्षा एजेंसियों को भ्रमित कर रहे आतंकी, 57 के 200 से ज्यादा नाम, गृह मंत्रालय ने सूची की जारी

नई दिल्ली । पाकिस्तान से जुड़े कई खतरनाक आतंकियों ने सुरक्षा और जांच एजेंसियों को भ्रमित करने के लिए अपनी पहचान बदलने का तरीका अपना लिया है। इन आतंकियों के एक-दो नहीं, बल्कि कई-कई नाम दर्ज हैं, जिससे उनकी पहचान करना मुश्किल हो जाता है। केंद्रीय गृह मंत्रालय द्वारा गैर-कानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम (यूएपीए) के तहत तैयार सूची में 57 आतंकियों के करीब 200 अलग-अलग नाम शामिल किए गए हैं। अलग-अलग नामों से छिपा रहे असली पहचानगृह मंत्रालय की सूची में शामिल आतंकियों ने पहचान छिपाने के लिए कई नाम अपनाए हैं। मुंबई हमलों का आरोपी और भारत का मोस्ट वांटेड आतंकी दाऊद इब्राहिम सबसे आगे है, जिसके 22 नाम दर्ज हैं। वहीं लश्कर-ए-ताइबा के प्रमुख हाफिज सईद के 9 और जैश-ए-मोहम्मद से जुड़े मोहीउद्दीन औरंगजेब आलमगीर के 11 नाम बताए गए हैं। मसूद अजहर समेत कई बड़े नाम शामिलसूची में मौलाना मसूद अजहर का नाम प्रमुख रूप से दर्ज है, जिसे कई अन्य नामों से भी जाना जाता है। इसी तरह रियाज इस्माइल शाहबंदर, इब्राहिम मेनन और सैयद मोहम्मद युसूफ शाह जैसे आतंकियों ने भी अलग-अलग नाम रखे हुए हैं। कुछ आतंकियों के नामों की संख्या 5 से 9 तक है, जिससे उनकी गतिविधियों को ट्रैक करना और कठिन हो जाता है। दाऊद इब्राहिम के नामों की लंबी सूचीदाऊद इब्राहिम के सबसे अधिक 22 नाम सामने आए हैं। इनमें दाऊद इब्राहिम कासकर, दाऊद हसन शेख कासकर, दाऊद भाई, इकबाल सेठ, बड़ा पटेल सहित कई अन्य नाम शामिल हैं। इतने ज्यादा नामों का इस्तेमाल कर वह लंबे समय से एजेंसियों को चकमा देता रहा है। लश्कर और जैश के आतंकियों ने भी बदली पहचानलश्कर-ए-ताइबा प्रमुख हाफिज सईद ने भी अपनी पहचान छिपाने के लिए 9 अलग-अलग नाम अपनाए हैं। वहीं जकी उर रहमान लख्वी और जैश-ए-मोहम्मद के सदस्य मोहीउद्दीन औरंगजेब आलमगीर ने भी कई उपनाम रखे हुए हैं। एजेंसियों के रिकॉर्ड के अनुसार, ये आतंकी अलग-अलग नामों के जरिए अपनी गतिविधियों को अंजाम देते रहे हैं।
MP: खंडवा सांसद के छोटे भाई ने किया सुसाइड… कुएं में कूदकर दी जान, खेत में मिली चप्पल

बुरहानपुर। मध्य प्रदेश (Madhya Pradesh) के खंडवा-बुरहानपुर संसदीय क्षेत्र (Khandwa-Burhanpur parliamentary constituency) से सांसद ज्ञानेश्वर पाटिल (MP Dnyaneshwar Patil) के छोटे भाई विश्वनाथ उर्फ बाडू पाटिल (58) ने आत्महत्या कर ली. यह घटना बुरहानपुर जिले (Burhanpur district) के गृह ग्राम बोहरडा में सामने आई, जहां उन्होंने अपने ही खेत के कुएं में कूदकर जान दे दी. बताया गया कि बुधवार तड़के वे चुपचाप घर से निकले थे और फिर वापस नहीं लौटे. सूचना मिलते ही प्रशासन और पुलिस में हड़कंप मच गया. जिले के डीएम और एसपी दल-बल के साथ मौके पर पहुंचे. इसके बाद गोताखोरों की मदद से कुएं में तलाश शुरू की गई. करीब तीन घंटे की कड़ी मशक्कत के बाद विश्वनाथ पाटिल का शव कुएं से बाहर निकाला गया। पुलिस ने पंचनामा बनाकर शव को पोस्टमार्टम के लिए जिला अस्पताल भेज दिया. प्रारंभिक जांच में आत्महत्या की आशंका जताई जा रही है, हालांकि घटना का वास्तविक कारण अभी तक सामने नहीं आ सका है. घटना के बाद क्षेत्र में शोक की लहरइस दुखद घटना के बाद पूरे क्षेत्र और पाटिल परिवार के समर्थकों में शोक की लहर दौड़ गई है. जानकारी के अनुसार, दिवंगत विश्वनाथ पाटिल का अंतिम संस्कार उनके पैतृक गांव बोहरडा में किया जाएगा. सांसद ज्ञानेश्वर पाटिल उस समय दिल्ली में थे. घटना की जानकारी मिलते ही वे तुरंत दिल्ली से बुरहानपुर के लिए रवाना हो गए. उधर, सांसद के गृह ग्राम बोहरडा स्थित निवास पर बड़ी संख्या में समर्थक और रिश्तेदार पहुंचने लगे. नेपानगर विधायक मंजू दादू सहित भाजपा और कांग्रेस के कई नेता भी सांसद निवास पहुंचे और शोक संवेदना व्यक्त की. स्थिति को देखते हुए पुलिस बल भी तैनात किया गया। पुलिस जांच जारीबुरहानपुर एसपी देवेंद्र पाटीदार ने बताया कि पुलिस को पहले विश्वनाथ पाटिल के लापता होने की सूचना मिली थी. सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और जांच शुरू की गई. जांच के दौरान खेत के पास उनकी चप्पल मिली, जिसके बाद कुएं में तलाश की गई और शव बरामद किया गया. पुलिस ने मर्ग कायम कर लिया है और मृत्यु के कारणों की जांच जारी है। पुलिस का कहना है कि प्रथम दृष्टया मामला आत्महत्या का प्रतीत हो रहा है, लेकिन सभी पहलुओं की जांच की जा रही है. घटना के बाद पूरे इलाके में गमगीन माहौल बना हुआ है।
MP: सतना में भीषण हादसा…. बेकाबू ट्रक डिवाइडर तोड़ नहर में गिरा, 3 लोगों की मौत

सतना। एमपी (MP) में सतना जिले (Satna district) के नेशनल हाईवे-39 (National Highway-39) पर बुधवार की सुबह एक भयावह मंजर देखने को मिला है। सतना से रीवा की ओर जा रहा सरिया लदा एक तेज रफ्तार ट्रक नेमुआ मोड़ के पास बेकाबू होकर डिवाइडर लांघते हुए सीधे गहरी नहर में जा गिरा। इस भीषण हादसे में ट्रक के केबिन के परखच्चे उड़ गए और उसमें सवार चालक, क्लीनर व मजदूर की मौके पर ही सांसें थम गईं। मलबे और भारी सरियों के बीच फंसे शवों को निकालने के लिए प्रशासन को करीब 4 घंटे तक कड़ा संघर्ष करना पड़ा। कटर मशीन से काटकर निकाली लाशहादसा इतना भीषण था कि ट्रक का अगला हिस्सा पूरी तरह पिचक गया था। सूचना पर रामपुर बघेलान थाना प्रभारी संदीप चतुर्वेदी जब पुलिस बल के साथ पहुंचे, तो ट्रक के भीतर शव लोहे के जाल में फंसे हुए थे। पुलिस ने पहले बड़ी क्रेन के जरिए ट्रक को सीधा कराया, लेकिन एक शव ऐसी जगह फंसा था जिसे सामान्य रूप से निकालना नामुमकिन था। इसके बाद मौके पर गैस कटर मशीन बुलाई गई और ट्रक की बॉडी को काटकर शव बाहर निकाले गए। मैहर जिले के है दो मृतकहादसे का शिकार हुए तीन लोगों में से दो की पहचान मैहर जिले के निवासियों के रूप में हुई है। मृतकों की शिनाख्त पडरी निवासी दिलीप केवट (पिता राजेश केवट) और रामगढ़ निवासी विष्णु केवट (पिता माखनलाल केवट) के रूप में की गई है। तीसरे मृतक की शिनाख्त फिलहाल नहीं हो सकी है, पुलिस उसके परिजनों का पता लगाने का प्रयास कर रही है। 5 घंटे तक थमा रहा हाईवे का सफरसुबह करीब 8 बजे हुए इस हादसे के बाद हाईवे पर अफरा-तफरी का माहौल बन गया। मौके पर सैकड़ों ग्रामीणों की भीड़ जमा हो गई, जिससे सतना-रीवा मार्ग पर लंबा जाम लग गया। हालात का जायजा लेने एडिशनल एसपी और तहसीलदार सुजीत नागेश भी पहुंचे। पुलिस ने एम्बुलेंस के जरिए शवों को मरचुरी भिजवाया और क्षतिग्रस्त ट्रक को हटवाने के बाद करीब 5 घंटे बाद यातायात बहाल कराया। जांच के घेरे में हादसे की वजहपुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। अंदेशा जताया जा रहा है कि या तो ट्रक की स्टेयरिंग फेल हुई या फिर अलसुबह चालक को झपकी आने के कारण यह भीषण हादसा हुआ। ट्रक में लदे भारी भरकम लोहे के सरियों ने केबिन पर दबाव बनाया, जिससे बचाव का कोई मौका नहीं मिला है।
भीषण गर्मी से वैश्विक कृषि सिस्टम तबाही की कगार पर… 100 करोड़ लोगों की आजीविका पर संकट

रोम। भीषण गर्मी (Extreme Heat) वैश्विक कृषि प्रणालियों (Global Agricultural Systems) को तबाही की कगार पर धकेल रही हैं। इससे वैश्विक खाद्य तंत्र बिगड़ने लगा है। इसके चलते दुनियाभर में 100 करोड़ से अधिक लोगों की आजीविका और उनके स्वास्थ्य पर सीधा खतरा मंडरा रहा है। संयुक्त राष्ट्र खाद्य एवं कृषि संगठन (एफएओ) और विश्व मौसम विज्ञान संगठन (डब्ल्यूएमओ) की एक रिपोर्ट में कहा गया है कि अत्यधिक गर्मी अब केवल मौसम ही नहीं, बल्कि खेती, मछली पालन और वानिकी के लिए एक अस्तित्वगत खतरा बन गई है। एफएओ के जलवायु परिवर्तन कार्यालय के प्रमुख कावेह जाहेदी ने कहा, भीषण गर्मी यह तय कर रही है कि किसान और मछुआरे क्या उगा सकते हैं और कब काम कर सकते हैं। समुद्री पारिस्थितिकी तंत्र भी खतरे मेंगर्मी का असर केवल जमीन तक सीमित नहीं है। रिपोर्ट के अनुसार, 2024 में दुनिया के 91 फीसदी महासागरों ने कम से कम एक समुद्री लू का सामना किया। इससे पानी में ऑक्सीजन का स्तर कम हो रहा है, जिससे मछलियों का अस्तित्व खतरे में है और समुद्री खाद्य प्रणालियां चरमरा रही हैं। प्रारंभिक चेतावनी प्रणालियों की आवश्यकताकृषि से संबंधित रिपोर्ट में बताया गया कि किसानों को मौसम का सटीक डेटा समय पर मिलना चाहिए ताकि वे बुवाई और कटाई के समय में बदलाव कर सकें। अगर तापमान 1.5 डिग्री के बजाय 3 डिग्री सेल्सियस तक बढ़ता है, तो भीषण गर्मी की तीव्रता और आवृत्ति चार गुना तक बढ़ सकती है। चार प्रमुख फसलों पर पड़ता है असरवैश्विक औसत तापमान में प्रत्येक एक डिग्री की वृद्धि से चार प्रमुख फसलों मक्का, चावल, सोयाबीन और गेहूं की पैदावार में लगभग 6% की कमी आती है। आंकड़ों के मुताबिक, साल 2025 अब तक के तीन सबसे गर्म वर्षों में से एक रहा है। जब तापमान 30 डिग्री की सीमा को पार कर जाता है, तो प्रमुख फसलों की पैदावार में तेजी से गिरावट आने लगती है।
गुरुवार पूजा विधि: सही तरीके से करें आराधना, विष्णु की कृपा से पूरी अपेक्षित मनोकामनाएं

नई दिल्ली। गुरुवार का दिन हिंदू धर्म में अत्यंत शुभ माना जाता है क्योंकि यह दिन भगवान विष्णु और देवगुरु बृहस्पति को समर्पित होता है। मान्यता है कि इस दिन विधि-विधान से पूजा करने और व्रत रखने से जीवन में सुख-समृद्धि आती है, कुंडली में गुरु ग्रह मजबूत होता है और विवाह संबंधी बाधाएं दूर होती हैं। गुरुवार पूजा की सही विधिगुरुवार के दिन सुबह ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नान करें और स्वच्छ वस्त्र धारण करें। स्नान के पानी में हल्दी मिलाना शुभ माना जाता है, जिससे सकारात्मक ऊर्जा प्राप्त होती है।इसके बाद पूजा का संकल्प लें और पूजा स्थल को गंगाजल से शुद्ध करें। एक चौकी पर पीला कपड़ा बिछाकर भगवान विष्णु की प्रतिमा या तस्वीर स्थापित करें।भगवान विष्णु को जल अर्पित करें और हल्दी या केसर से तिलक लगाएं। घी का दीपक जलाकर पीले फूल और पीले अक्षत (हल्दी से रंगे चावल) अर्पित करें। भोग और पूजा सामग्रीभगवान विष्णु को चने की दाल, गुड़, केला और पीली मिठाई का भोग लगाना अत्यंत शुभ माना जाता है। यह भोग समृद्धि और सौभाग्य का प्रतीक है। गुरुवार व्रत कथा और मंत्र जापपूजा के दौरान गुरुवार व्रत कथा का पाठ अवश्य करें। इसके बाद भगवान विष्णु की आरती करें और मंत्रों का जाप करें। प्रमुख मंत्र ॐ नमो भगवते वासुदेवाय ॐ विष्णवे नमः ॐ नारायणाय विद्महे वासुदेवाय धीमहि तन्नो विष्णु प्रचोदयात् ॐ बृं बृहस्पतये नमः इन मंत्रों के जाप से मानसिक शांति और ग्रह दोषों में कमी आती है। गुरुवार को क्या करें और क्या नहींगुरुवार के दिन कुछ नियमों का पालन करना जरूरी माना गया है: करें–केले के पेड़ की पूजा करेंपीले वस्त्र, हल्दी और चने की दाल का दान करेंव्रत रखें और सकारात्मक विचार रखें न करेंबाल और नाखून न काटेंकपड़े न धोएंघर में पोछा लगाने से बचेंव्रत के दौरान नमक का सेवन न करें गुरुवार के दिन श्रद्धा और नियमपूर्वक भगवान विष्णु की पूजा करने से जीवन में स्थिरता, सुख-समृद्धि और शुभ फल प्राप्त होते हैं। यह व्रत विशेष रूप से विवाह में बाधा, आर्थिक समस्या और ग्रह दोष दूर करने में सहायक माना जाता है।
Summer Skincare Tips: रूखी त्वचा से छुटकारा पाने के लिए अपनाएं ये आसान और असरदार नुस्खे

नई दिल्ली। गर्मियां आते ही कई तरह की स्किन संबंधी समस्याएं शुरू हो जाती हैं। जहां एक तरफ धूल-मिट्टी और पसीने के कारण कई लोगों की त्वचा ऑयली और चिपचिपी हो जाती है। वहीं कुछ लोग ऐसे भी हैं, जिन्हें गर्मियों में भी ड्राई स्किन से परेशान होना पड़ता है। दरअसल, त्वचा में नमी की कमी के कारण स्किन रूखी हो जाती है। इसकी वजह से चेहरा बेजान और डल नजर आने लगता है। ऐसे में लोग ऑयल बेस्ड क्रीम और मॉइश्चराइजर यूज करना शुरू कर देते हैं। लेकिन इनसे त्वचा पर दाने और रैशेज की समस्या हो सकती है। गर्मी में रूखी त्वचा की देखभाल करना बहुत जरूरी है। ऐसे में आप चाहें तो गर्मी में स्किन की ड्राईनेस दूर करने के लिए कुछ प्राकृतिक चीजों का इस्तेमाल कर सकते हैं। इससे आपकी त्वचा में नमी बनी रहेगी। साथ ही, त्वचा काफी सॉफ्ट और ग्लोइंग भी बनेगी। तो आइए, जानते हैं गर्मियों में रूखी त्वचा पर क्या लगाना चाहिए? एलोवेरा जेल गर्मियों में ड्राई स्किन से छुटकारा पाने के लिए आप एलोवेरा जेल का इस्तेमाल कर सकते हैं। इसमें मॉइश्चराइजिंग गुण होता है, जो त्वचा को अंदर से नमी प्रदान करता है। इसके अलावा, इसमें एंटी-बैक्टीरियल और एंटी-इंफ्लेमेटरी गुण भी पाए जाते हैं। यह पिंपल्स, रैशेज, खुजली और जलन की समस्या को दूर करने में काफी प्रभावी होता है। इसके लिए आप ताजे एलोवेरा जेल को चेहरे पर लगाकर मसाज करें। 10-15 मिनट बाद पानी से चेहरा धो लें। इसके रेगुलर इस्तेमाल से आपकी स्किन मुलायम और चमकदार बनेगी। शहदशहद एंटी-ऑक्सीडेंट और एंटी-इंफ्लेमेटरी गुणों से भरपूर होता है। यह त्वचा की गहराई से सफाई करने के साथ ही स्किन को मॉइश्चराइज भी करता है। इसमें एंटी-बैक्टीरियल गुण पाए जाते हैं, जो पिंपल्स, रैशेज और त्वचा के संक्रमण से छुटकारा दिलाने में मदद करते हैं। इसके लिए आप एक से दो चम्मच शहद लेकर चेहरे पर लगाएं। हल्के हाथों से सर्कुलर मोशन में 10 मिनट तक मसाज करें। उसके बाद पानी से चेहरा धो लें। इसके नियमित इस्तेमाल से स्किन की ड्राइनेस से छुटकारा मिलेगा। चंदनचंदन को त्वचा के लिए बहुत फायदेमंद माना जाता है। यह न सिर्फ स्किन को ठंडक पहुंचाता है, बल्कि मुलायम भी बनाता है। इसमें एंटीऑक्सीडेंट्स मौजूद होते हैं, जो त्वचा को ड्राई होने से बचाने में मदद करते हैं। चेहर पर चंदन पाउडर लगाने से दाग-धब्बे दूर होते हैं और त्वचा में निखार आता है। इसके लिए आप 2 चम्मच चंदन पाउडर लें। इसमें 2 चम्मच दूध डालकर अच्छी तरह मिक्स कर लें। इस पेस्ट को अपने पूरे चेहरे पर लगाएं। 10-15 मिनट बाद पानी से धो लें। आप हफ्ते में 2 से 3 बार इसका प्रयोग कर सकते हैं। दहीगर्मियों में ड्राई स्किन से राहत पाने के लिए आप चेहरे पर दही लगा सकते हैं। इसमें एंटी-बैक्टीरियल और एंटी-इंफ्लेमेटरी गुण पाए जाते हैं, जो त्वचा में नमी को बरकरार रखने में मदद करते हैं। दही का इस्तेमाल करने से चेहरे का कालापन दूर होता है और त्वचा का निखार भी बढ़ता है। इसके लिए आप 2 चम्मच गाढ़ा दही लेकर अपने चेहरे पर लगाएं। इससे कम से कम 5 मिनट तक मसाज करें। उसके बाद पानी से चेहरा धो लें। बेहतर रिजल्ट के लिए सप्ताह में 2-3 बार इसका इस्तेमाल करें।
कड़वाहट में छुपा सेहत का राज: बीमारियों का काल है नीम, लिवर के लिए बनता है सुरक्षा कवच

नई दिल्ली। नीम को आयुर्वेद में “कड़वा जरूर, लेकिन गुणों से भरपूर” पौधा माना गया है, जो खासकर लिवर की सेहत के लिए बेहद फायदेमंद बताया जाता है। आज की अनियमित जीवनशैली, तला-भुना खाना, तनाव और कम शारीरिक गतिविधि के कारण लिवर पर लगातार दबाव बढ़ रहा है, ऐसे में नीम को एक प्राकृतिक सहायक उपाय के रूप में देखा जाता है। आयुर्वेद के अनुसार नीम की पत्तियों में डिटॉक्स करने वाले गुण होते हैं, जो शरीर से विषैले तत्वों को बाहर निकालने में मदद करते हैं। रोज सुबह खाली पेट 5 से 7 नीम की पत्तियां चबाना या उनका हल्का रस लेना लिवर को साफ रखने में सहायक माना जाता है। इससे पाचन तंत्र बेहतर होता है और शरीर में हल्कापन महसूस होता है। नीम सिर्फ लिवर ही नहीं, बल्कि पूरे शरीर के लिए उपयोगी माना जाता है। इसमें मौजूद एंटीऑक्सीडेंट और एंटी-इंफ्लेमेटरी गुण शरीर में सूजन कम करने और इम्युनिटी बढ़ाने में मदद करते हैं। यह खराब कोलेस्ट्रॉल को नियंत्रित करने में भी सहायक बताया जाता है, जिससे हृदय संबंधी समस्याओं का खतरा कम हो सकता है। त्वचा के लिए भी नीम काफी उपयोगी माना जाता है। मुंहासे, दाग-धब्बे और त्वचा संक्रमण जैसी समस्याओं में नीम की पत्तियों का पेस्ट या नीम के पानी से चेहरा धोना लाभकारी हो सकता है। इसके जीवाणुरोधी गुण त्वचा को साफ और स्वस्थ रखने में मदद करते हैं। नीम को कई रूपों में दिनचर्या में शामिल किया जा सकता है, जैसे पत्तियों का काढ़ा, नीम के फूलों का शर्बत या हल्का उबालकर सेवन। यह शरीर को प्राकृतिक रूप से डिटॉक्स करने में मदद करता है और लंबे समय तक स्वास्थ्य को बनाए रखने में सहायक माना जाता है। विशेषज्ञों का मानना है कि नीम जैसी प्राकृतिक जड़ी-बूटियां लिवर को मजबूत करने में सहायक हो सकती हैं, लेकिन किसी भी औषधीय पौधे का नियमित सेवन शुरू करने से पहले आयुर्वेदिक चिकित्सक की सलाह लेना जरूरी है।
Sai Baba Puja: गुरुवार को क्यों माना जाता है सबसे शुभ दिन, जानिए Sai Baba of Shirdi की पूजा विधि

नई दिल्ली। शिरडी के साईं बाबा भारत के सबसे पूजनीय संतों में से एक माने जाते हैं, जिन्होंने जीवनभर “सबका मालिक एक” का संदेश देकर प्रेम, करुणा और एकता का प्रचार किया। उनकी शिक्षाएं आज भी करोड़ों श्रद्धालुओं के जीवन का आधार हैं। साईं बाबा की पूजा के लिए गुरुवार का दिन विशेष रूप से शुभ माना जाता है, क्योंकि यह दिन आध्यात्मिक गुरु बृहस्पति देव से जुड़ा है, जिन्हें ज्ञान, धर्म और सकारात्मक ऊर्जा का प्रतीक माना जाता है। गुरुवार को साईं बाबा की पूजा क्यों होती है विशेषगुरुवार का संबंध देवताओं के गुरु बृहस्पति से माना जाता है, जो ज्ञान, विवेक और आध्यात्मिक शक्ति के कारक ग्रह हैं। साईं बाबा को भी एक आध्यात्मिक गुरु के रूप में देखा जाता है, जिन्होंने समाज को सत्य, सेवा और प्रेम का मार्ग दिखाया। इसलिए गुरुवार को साईं बाबा की पूजा करने से जीवन में सकारात्मक ऊर्जा, मानसिक शांति और आध्यात्मिक उन्नति प्राप्त होती है। शिरडी में गुरुवार का विशेष महत्वमहाराष्ट्र के शिरडी में हर गुरुवार को साईं बाबा की विशेष पूजा-अर्चना की जाती है। इस दिन भव्य पालकी यात्रा भी निकाली जाती है, जो द्वारकामाई से साईं समाधि मंदिर तक जाती है। इस शोभायात्रा में हजारों भक्त शामिल होते हैं, भजन-कीर्तन करते हैं और फूलों से सजी पालकी में बाबा की मूर्ति का स्वागत करते हैं। यह आयोजन साईं भक्ति और श्रद्धा का सबसे बड़ा प्रतीक माना जाता है। घर पर कैसे करें साईं बाबा की पूजागुरुवार के दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और स्वच्छ या हल्के पीले रंग के वस्त्र धारण करें। पूजा स्थल को साफ कर साईं बाबा की मूर्ति या तस्वीर स्थापित करें।इसके बाद दीपक जलाएं और बाबा को फूल अर्पित करें। पीले या सफेद फूल सबसे शुभ माने जाते हैं। भोग के रूप में सात्विक भोजन जैसे खिचड़ी, खीर, हलवा, फल या बेसन के लड्डू अर्पित किए जा सकते हैं।पूजा के दौरान श्रद्धा के साथ “ॐ साईं राम” मंत्र का जाप करें और साईं चालीसा का पाठ करें। इससे मन शांत होता है और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है। साईं बाबा की शिक्षाएं और उनका महत्वसाईं बाबा ने हमेशा सभी धर्मों को समान माना और लोगों को जाति-धर्म से ऊपर उठकर मानवता की सेवा करने का संदेश दिया। उनका प्रसिद्ध संदेश “सबका मालिक एक” आज भी एकता और भाईचारे का प्रतीक है। यही कारण है कि देश-दुनिया में उनके लाखों मंदिर स्थापित हैं और भक्तों की आस्था दिन-ब-दिन बढ़ती जा रही है। गुरुवार के दिन साईं बाबा की पूजा करने से आध्यात्मिक शांति, सकारात्मक सोच और जीवन में स्थिरता प्राप्त होती है। यह दिन गुरु तत्व से जुड़ा होने के कारण विशेष फलदायी माना जाता है, जिससे भक्तों की आस्था और विश्वास और भी मजबूत होता है।
गर्मियों में राहत का देसी उपाय: शिकंजी से पाचन बेहतर और शरीर रहेगा एनर्जी से भरपूर

नई दिल्ली। गर्मियों की तपती धूप में शरीर को ठंडक और एनर्जी देने के लिए देसी पेय शिकंजी को सबसे आसान और असरदार उपाय माना जाता है। तापमान बढ़ने के साथ जब पानी की कमी, थकान और पाचन संबंधी दिक्कतें बढ़ने लगती हैं, तब शिकंजी एक प्राकृतिक राहत देने वाला पेय साबित होती है। नींबू, पानी, काला नमक, जीरा पाउडर और हल्की चीनी या गुड़ से बनने वाली शिकंजी न सिर्फ स्वाद में ताजगी देती है, बल्कि शरीर को हाइड्रेट भी रखती है। कई लोग इसमें पुदीना और अदरक मिलाकर इसके फायदे और बढ़ा देते हैं। उत्तर भारत में तो गर्मियों के दिनों में सड़क किनारे मिट्टी के बर्तनों में रखी ठंडी शिकंजी आम दृश्य होती है, जो लोगों को तुरंत राहत देती है। घर पर इसे बनाना भी बेहद आसान है। एक जग ठंडे पानी में नींबू का रस मिलाएं, फिर स्वादानुसार काला नमक, भुना जीरा पाउडर और थोड़ी चीनी डालें। चाहें तो पुदीना पत्ते और अदरक का रस मिलाकर इसे और पौष्टिक बनाया जा सकता है। बिना चीनी के भी यह उतनी ही फायदेमंद रहती है। शिकंजी के नियमित सेवन से कई स्वास्थ्य लाभ मिलते हैं। नींबू में मौजूद विटामिन C रोग प्रतिरोधक क्षमता को मजबूत करता है, जबकि जीरा और अदरक पाचन तंत्र को बेहतर बनाते हैं और गैस-एसिडिटी जैसी समस्याओं से राहत दिलाते हैं। यह शरीर से विषैले तत्व बाहर निकालने में भी मदद करती है, जिससे त्वचा साफ और स्वस्थ रहती है। गर्मी में शरीर के तापमान को संतुलित रखने और डिहाइड्रेशन से बचाने में शिकंजी बेहद कारगर है। यह तुरंत एनर्जी देती है और थकान को कम करती है। साथ ही मेटाबॉलिज्म को तेज कर वजन नियंत्रण में भी सहायक मानी जाती है। आयुर्वेदाचार्यों के अनुसार, घर की बनी ताजी शिकंजी बाजार के पैक्ड ड्रिंक्स की तुलना में कहीं ज्यादा सुरक्षित और फायदेमंद है। इसलिए गर्मी के मौसम में इसे रोजाना की दिनचर्या में शामिल करना सेहत के लिए लाभकारी हो सकता है।