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नर्मदा संरक्षण की अनोखी पहल ,आटे के दीपक से बदल रही महिलाओं की किस्मत

भोपाल । मध्यप्रदेश के खंडवा जिले के ओंकारेश्वर क्षेत्र में महिलाओं के एक स्वयं सहायता समूह ने पर्यावरण संरक्षण और आत्मनिर्भरता की दिशा में एक प्रेरणादायक पहल की है। इस समूह ने आटे से बने दीपक का व्यवसाय शुरू कर न केवल नर्मदा नदी को प्रदूषण से बचाने का संकल्प लिया बल्कि ग्रामीण महिलाओं के लिए रोजगार के नए अवसर भी पैदा किए हैं। यह पहल आज पूरे क्षेत्र में महिला सशक्तिकरण और पर्यावरण संरक्षण की मिसाल बन चुकी है। ग्राम मोरटक्का निवासी श्रीमती विजया जोशी ने मां नर्मदा आजीविका स्वयं सहायता समूह का गठन कर इस नवाचार की शुरुआत की। उनका उद्देश्य केवल आर्थिक लाभ कमाना नहीं था बल्कि नर्मदा नदी को प्रदूषण मुक्त रखना भी था। उन्होंने देखा कि परंपरागत रूप से प्लास्टिक के दोने और अन्य सामग्री में दीपदान किया जाता है जिससे नदी में प्रदूषण बढ़ता है और जलीय जीवों को नुकसान पहुंचता है। इसी चिंता के चलते उन्होंने एक नया और पर्यावरण अनुकूल विकल्प तैयार करने की दिशा में कदम बढ़ाया। समूह की महिलाओं ने मिलकर आटे के दीपक बनाने का कार्य शुरू किया। यह दीपक पूरी तरह प्राकृतिक सामग्री से तैयार किए जाते हैं और उपयोग के बाद पानी में घुल जाते हैं जिससे पर्यावरण को किसी प्रकार का नुकसान नहीं होता। इस पहल ने न केवल धार्मिक परंपराओं को सुरक्षित रखा है बल्कि पर्यावरण संरक्षण की दिशा में भी महत्वपूर्ण योगदान दिया है। इस कार्य को आगे बढ़ाने के लिए महिलाओं ने स्वयं सहायता समूह के माध्यम से लगभग डेढ़ लाख रुपये का ऋण लेकर दीपक निर्माण की मशीन भी खरीदी। इससे उत्पादन क्षमता में वृद्धि हुई और महिलाओं को नियमित रोजगार मिलने लगा। धीरे धीरे यह कार्य उनके लिए स्थायी आय का स्रोत बन गया और उनकी आर्थिक स्थिति में सुधार होने लगा। सरकार और ग्रामीण आजीविका मिशन के सहयोग से इन महिलाओं को बाजार भी उपलब्ध कराया गया जिससे उनके उत्पादों की बिक्री बढ़ी और उन्हें नई पहचान मिली। आज यह समूह न केवल स्थानीय स्तर पर बल्कि आसपास के क्षेत्रों में भी अपने पर्यावरण अनुकूल दीपकों के लिए जाना जाता है। यह पहल इस बात का उदाहरण है कि यदि सही मार्गदर्शन और अवसर मिले तो ग्रामीण महिलाएं भी बड़े बदलाव की वाहक बन सकती हैं। एक ओर जहां यह परियोजना नर्मदा नदी को स्वच्छ रखने में मदद कर रही है वहीं दूसरी ओर यह महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने में भी अहम भूमिका निभा रही है। ओंकारेश्वर की यह कहानी दर्शाती है कि छोटे प्रयास भी बड़े बदलाव ला सकते हैं। आटे के दीपक का यह नवाचार आज पर्यावरण संरक्षण और महिला सशक्तिकरण दोनों के लिए प्रेरणा बन गया है।

BSE Limited की निवेशकों को चेतावनी, सीईओ सुंदररामन राममूर्ति के नाम पर फर्जी डीपफेक वीडियो से रहें सावधान

नई दिल्ली ।  शेयर बाजार में निवेश करने वालों के लिए एक बड़ी चेतावनी सामने आई है। देश के प्रमुख स्टॉक एक्सचेंज BSE Limited ने निवेशकों को एक खतरनाक फर्जीवाड़े से सावधान रहने को कहा है। दरअसल, कंपनी के मैनेजिंग डायरेक्टर और सीईओ Sundararaman Ramamurthy के नाम और चेहरे का इस्तेमाल कर एक डीपफेक वीडियो वायरल किया जा रहा है, जिसमें उन्हें शेयर बाजार में निवेश की सलाह देते हुए दिखाया गया है। डीपफेक वीडियो से गुमराह करने की कोशिशबीएसई ने साफ शब्दों में कहा है कि यह वीडियो पूरी तरह नकली है और इसे आधुनिक डीपफेक तकनीक की मदद से तैयार किया गया है। वीडियो में निवेशकों को झूठे वादों के जरिए लुभाया जा रहा है, जैसे कम समय में भारी मुनाफा कमाने का दावा। यह तरीका लोगों के भरोसे का फायदा उठाकर उन्हें जाल में फंसाने की कोशिश है। व्हाट्सएप-टेलीग्राम ग्रुप के जरिए ठगीफर्जी वीडियो में लोगों को कुछ खास शेयरों में निवेश करने और व्हाट्सएप या टेलीग्राम ग्रुप जॉइन करने के लिए उकसाया जा रहा है। इन ग्रुप्स में ‘एक्सक्लूसिव टिप्स’ देने का लालच दिया जाता है, जो पूरी तरह भ्रामक और धोखाधड़ी का हिस्सा होता है। बीएसई ने स्पष्ट किया कि उसका कोई भी अधिकारी इस तरह की सलाह नहीं देता। चार महीने में चौथी घटना, बढ़ता खतराएक्सचेंज के मुताबिक, पिछले चार महीनों में यह चौथी बार है जब इस तरह का मामला सामने आया है। इससे साफ है कि ठग लगातार नई तकनीकों का इस्तेमाल कर निवेशकों को निशाना बना रहे हैं। डीपफेक जैसे टूल्स ने इस खतरे को और गंभीर बना दिया है। बीएसई की अपील: सतर्क रहें, शेयर न करेंबीएसई ने निवेशकों से अपील की है कि वे ऐसे किसी भी वीडियो, मैसेज या लिंक पर भरोसा न करें और उन्हें आगे शेयर करने से भी बचें। किसी भी निवेश से पहले जानकारी की पुष्टि केवल आधिकारिक प्लेटफॉर्म से ही करें। सेबी के साथ जागरूकता अभियानएक्सचेंज ने बताया कि वह Securities and Exchange Board of India (सेबी) के निर्देशों के तहत लगातार जागरूकता अभियान चला रहा है। इसका मकसद लोगों को फर्जी स्कीम, गलत निवेश सलाह और ‘फिनफ्लुएंसर’ जैसे नए खतरों से बचाना है। सख्त कार्रवाई की तैयारीबीएसई ने कहा कि इस तरह के फर्जी कंटेंट को हटाने के लिए तेजी से कदम उठाए जा रहे हैं और इसमें शामिल लोगों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई भी की जाएगी। निवेशकों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है और किसी भी तरह की धोखाधड़ी को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

Nirmala Sitharaman ने जताया ‘मिथोस AI’ से अभूतपूर्व खतरा, बैंकों को सतर्क रहने की सलाह

नई दिल्ली ।  तेजी से बदलती तकनीक के दौर में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) अब सिर्फ अवसर ही नहीं, बल्कि बड़े जोखिम भी लेकर आ रहा है। इसी कड़ी में केंद्रीय वित्त मंत्री Nirmala Sitharaman ने ‘मिथोस एआई’ को लेकर गंभीर चिंता जताई है। उन्होंने कहा कि यह नया एआई मॉडल बैंकिंग सेक्टर के लिए “अभूतपूर्व खतरा” बन सकता है, इसलिए सभी बैंकों को सतर्क रहने और अपनी सुरक्षा प्रणाली को मजबूत करने की जरूरत है। एआई का बढ़ता प्रभाव और खतरेवित्त मंत्री ने मीडिया से बातचीत में बताया कि अमेरिकी कंपनी Anthropic द्वारा विकसित ‘मिथोस एआई’ अपनी उन्नत क्षमताओं के कारण दुनियाभर में चर्चा में है। हालांकि इसकी ताकत जितनी बड़ी है, उससे जुड़े जोखिम भी उतने ही गंभीर हैं। उन्होंने कहा कि इस तरह के एआई मॉडल साइबर फ्रॉड, डेटा चोरी और वित्तीय धोखाधड़ी जैसे मामलों को और जटिल बना सकते हैं। सरकार की नजर, वैश्विक स्तर पर सहयोगसीतारमण ने स्पष्ट किया कि भारत इस मामले को हल्के में नहीं ले रहा है। इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) अन्य देशों और अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं के साथ मिलकर इस तकनीक के जोखिमों का आकलन कर रहा है। सरकार का उद्देश्य है कि समय रहते जरूरी कदम उठाए जाएं, ताकि बैंकिंग सिस्टम सुरक्षित बना रहे। बैंकों को चेतावनी: अपडेट करें सुरक्षा ढांचाउन्होंने कहा कि भारतीय बैंक फिलहाल मजबूत स्थिति में हैं, लेकिन तेजी से बदलती तकनीक के कारण मौजूदा नियम और सुरक्षा व्यवस्था को अपडेट करना बेहद जरूरी हो गया है। बैंकों को आपसी सहयोग बढ़ाने और नई चुनौतियों से मिलकर निपटने की सलाह दी गई है। इस दिशा में भारतीय बैंक संघ (IBA) को समन्वय की जिम्मेदारी दी गई है। मजबूत अर्थव्यवस्था दे रही सहाराइससे पहले भी वित्त मंत्री ने भारत की आर्थिक मजबूती पर भरोसा जताया था। उन्होंने कहा कि देश के पास पर्याप्त विदेशी मुद्रा भंडार है और आर्थिक स्थिति स्थिर है, जिससे Reserve Bank of India को नीतिगत फैसले लेने की पर्याप्त स्वतंत्रता मिलती है। नीतिगत फैसलों के लिए पर्याप्त गुंजाइश6 अप्रैल को National Institute of Public Finance and Policy (NIPFP) के कार्यक्रम में सीतारमण ने कहा था कि भारत के पास सरकारी पूंजीगत खर्च (कैपेक्स) जारी रखने, जरूरत पड़ने पर ब्याज दरों में कटौती करने और संकटग्रस्त सेक्टर को सहायता देने की पर्याप्त क्षमता है। उन्होंने इसे पिछले एक दशक के वित्तीय अनुशासन का परिणाम बताया। आगे की राहविशेषज्ञों का मानना है कि एआई के इस नए दौर में बैंकों को तकनीकी रूप से और ज्यादा सशक्त होना होगा। साइबर सुरक्षा, डेटा प्रोटेक्शन और एआई मॉनिटरिंग सिस्टम को मजबूत करना अब समय की मांग बन गया है।

IPS को धमकी मामले में सियासत गरमाई जीतू पटवारी ने पुलिस की चुप्पी पर साधा निशाना

भोपाल । भोपाल में बीजेपी विधायक प्रीतम सिंह लोधी द्वारा एक आईपीएस अधिकारी को कथित धमकी दिए जाने के मामले ने अब सियासी तूल पकड़ लिया है। इस घटना को लेकर कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी ने मध्यप्रदेश पुलिस की भूमिका और कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। उन्होंने पुलिस तंत्र को एक खुला पत्र लिखते हुए न केवल मौजूदा व्यवस्था पर टिप्पणी की है बल्कि कानून व्यवस्था और पुलिस की निष्पक्षता को लेकर भी तीखी चिंता जताई है। अपने पत्र में जीतू पटवारी ने लिखा कि यह घटना केवल किसी एक व्यक्ति की भाषा या व्यवहार का मामला नहीं है, बल्कि यह उस खतरनाक माहौल का संकेत है जिसमें सत्ता का अहंकार कानून और संविधान पर भारी पड़ता दिखाई दे रहा है। उन्होंने कहा कि बार-बार ऐसे मामले सामने आते हैं जहां सत्ताधारी दल से जुड़े लोग पुलिस अधिकारियों पर दबाव बनाने या उन्हें अपमानित करने की कोशिश करते हैं, लेकिन इन घटनाओं के बाद पुलिस की प्रतिक्रिया अक्सर सीमित और संयमित रह जाती है। पटवारी ने पुलिस अधिकारियों से सवाल करते हुए पूछा कि आखिर कौन सी परिस्थितियां हैं जिनके कारण देश के सबसे प्रशिक्षित और अनुशासित अधिकारी भी रक्षात्मक स्थिति में नजर आते हैं। उन्होंने यह भी कहा कि जब अन्याय के खिलाफ सख्त रुख अपनाने की जरूरत होती है तब पुलिस की आवाज कमजोर क्यों पड़ जाती है और आम नागरिकों के मामलों में वही तंत्र इतना कठोर कैसे हो जाता है। अपने पत्र में उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि यदि पुलिस निष्पक्ष होकर और संविधान के दायरे में काम करे तो किसी भी नेता या प्रभावशाली व्यक्ति की हिम्मत नहीं होगी कि वह कानून पर दबाव डाल सके। लेकिन जब पुलिस को दबाव में काम करना पड़ता है तो उसकी स्वतंत्रता और कार्यक्षमता दोनों प्रभावित होती हैं। जीतू पटवारी ने IPS एसोसिएशन के पत्र का भी उल्लेख किया और कहा कि उसमें आक्रोश कम और विवशता अधिक नजर आती है। उनके अनुसार यह स्थिति केवल पुलिस के लिए नहीं बल्कि पूरे लोकतंत्र के लिए चिंता का विषय है क्योंकि यदि कानून लागू करने वाली संस्था ही कमजोर दिखाई देगी तो आम जनता का भरोसा व्यवस्था पर कैसे कायम रहेगा। हालांकि उन्होंने अपने पत्र में यह भी स्पष्ट किया कि यह आलोचना पुलिस बल के खिलाफ नहीं है। उन्होंने कहा कि देश के लाखों पुलिसकर्मी दिन रात अपनी जान जोखिम में डालकर सेवा करते हैं और उनके साहस और मेहनत का पूरा देश सम्मान करता है। उनका संदेश उन परिस्थितियों के खिलाफ है जो पुलिस को उसकी मूल भूमिका से दूर कर रही हैं। पटवारी ने कहा कि पुलिस को अपने भीतर के साहस को याद रखना चाहिए और संविधान को अपना सबसे बड़ा संरक्षक मानना चाहिए न कि किसी व्यक्ति या सत्ता को। उन्होंने यह भी कहा कि यदि कानून की रक्षा करने वाले ही चुप हो जाएंगे तो समाज में अन्याय को बढ़ावा मिलेगा और कानून का शासन कमजोर पड़ जाएगा। यह पूरा मामला अब राजनीतिक बहस का केंद्र बन गया है जहां एक तरफ कांग्रेस पुलिस की स्वतंत्रता और निष्पक्षता पर सवाल उठा रही है वहीं दूसरी ओर सत्ता पक्ष इसे राजनीतिक बयानबाजी बता रहा है। फिलहाल इस पत्र ने मध्यप्रदेश की राजनीति और प्रशासनिक हलकों में नई चर्चा जरूर छेड़ दी है।

Mansukh Mandaviya बोले-2036 ओलंपिक होस्ट करने के लिए देश कर रहा पूरा प्रयास

नई दिल्ली । केंद्रीय युवा मामले और खेल मंत्री Mansukh Mandaviya ने साफ संकेत दिए हैं कि भारत अब वैश्विक खेल आयोजनों में बड़ी भूमिका निभाने के लिए तैयार है। उन्होंने कहा कि देश का अगला बड़ा लक्ष्य Olympic Games 2036 की मेजबानी हासिल करना है और इसके लिए हर जरूरी प्रयास किए जा रहे हैं। कॉमनवेल्थ गेम्स 2030 से मिलेगी मजबूतीमांडविया ने बताया कि भारत को Commonwealth Games 2030 की मेजबानी मिल चुकी है। यह आयोजन गुजरात के Ahmedabad में होगा, जिसकी तैयारियां शुरू हो चुकी हैं। कॉमनवेल्थ गेम्स के सफल आयोजन से भारत की दावेदारी और मजबूत होगी और ओलंपिक 2036 की मेजबानी का रास्ता आसान हो सकता है। IOC की शर्तें पूरी करने पर फोकसभारत ने 2036 ओलंपिक के लिए बोली लगा दी है और अब ध्यान International Olympic Committee की सभी आवश्यकताओं को पूरा करने पर है। सरकार बुनियादी ढांचे, खेल सुविधाओं और प्रबंधन प्रणाली को अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप तैयार कर रही है। स्पोर्ट्स इकोसिस्टम हो रहा मजबूतखेल मंत्री ने कहा कि देश में खेलों का इकोसिस्टम तेजी से मजबूत हो रहा है। Fit India Movement और Khelo India जैसी योजनाओं से युवाओं को खेलों में भागीदारी के अधिक अवसर मिल रहे हैं। साथ ही, स्पोर्ट्स गवर्नेंस को बेहतर बनाने के लिए नए कानूनों पर भी काम किया जा रहा है। 2010 के बाद फिर बड़ा मौकाभारत में आखिरी बार Commonwealth Games 2010 का आयोजन दिल्ली में हुआ था। अब 20 साल बाद अहमदाबाद में फिर से यह बड़ा आयोजन होने जा रहा है, जो देश की खेल क्षमता और संगठन कौशल को दुनिया के सामने पेश करेगा। अगले 10 साल में टॉप-10 स्पोर्ट्स देशों में शामिल होने का लक्ष्यमांडविया ने भरोसा जताया कि आने वाले दशक में भारत दुनिया के शीर्ष 10 खेल देशों में शामिल हो सकता है। इसके लिए खिलाड़ियों को बेहतर ट्रेनिंग, सुविधाएं और अंतरराष्ट्रीय एक्सपोजर देने पर जोर दिया जा रहा है। अहमदाबाद बन सकता है ओलंपिक हबसरकार की योजना है कि कॉमनवेल्थ गेम्स की तरह ही ओलंपिक 2036 का आयोजन भी अहमदाबाद में कराया जाए। इसके लिए शहर को वैश्विक स्तर की खेल नगरी के रूप में विकसित किया जा रहा है।

चेन्नई ने दर्ज की सबसे बड़ी जीत, रनों के अंतर से बनाया नया कीर्तिमान..

नई दिल्ली। क्रिकेट के ऐतिहासिक मैदान वानखेड़े स्टेडियम में खेले गए सीजन के 33वें मुकाबले में चेन्नई ने मेजबान मुंबई को खेल के हर विभाग में पूरी तरह से पछाड़ दिया। टॉस हारकर पहले बल्लेबाजी करने उतरी चेन्नई की टीम ने निर्धारित 20 ओवरों में 6 विकेट के नुकसान पर 207 रनों का विशाल स्कोर खड़ा किया। चेन्नई की इस पारी के सूत्रधार सलामी बल्लेबाज संजू सैमसन रहे, जिन्होंने मात्र 54 गेंदों में नाबाद 101 रनों की शतकीय पारी खेलकर विपक्षी गेंदबाजों की धज्जियां उड़ा दीं। इस शतक के साथ सैमसन ने टी20 प्रारूप में रोहित शर्मा के 8 शतकों के रिकॉर्ड की बराबरी कर ली है और अब वे इस सूची में संयुक्त रूप से दूसरे स्थान पर पहुंच गए हैं। 208 रनों के विशाल लक्ष्य का पीछा करने उतरी मुंबई की शुरुआत बेहद निराशाजनक रही। टीम ने महज 11 रनों के स्कोर पर अपने 3 महत्वपूर्ण विकेट गंवा दिए थे। सलामी जोड़ी और शुरुआती बल्लेबाज खाता खोलने में भी संघर्ष करते नजर आए। मध्यक्रम में सूर्यकुमार यादव (35) और तिलक वर्मा (37) ने 70 रनों की साझेदारी कर पारी को संभालने की कोशिश जरूर की, लेकिन स्पिन गेंदबाजों के घातक जाल के सामने मध्यक्रम ताश के पत्तों की तरह ढह गया। कप्तान और अनुभवी विदेशी खिलाड़ी भी बिना खाता खोले पवेलियन लौट गए। पूरी टीम 19 ओवर में महज 104 रनों पर सिमट गई। गेंदबाजी में चेन्नई की ओर से अकील होसेन सबसे सफल रहे, जिन्होंने 4 विकेट चटकाकर मुंबई की बल्लेबाजी की कमर तोड़ दी। वहीं नूर अहमद ने भी दो महत्वपूर्ण सफलताएं हासिल कीं। यह मैच चेन्नई के लिए भावनात्मक रूप से भी खास था, क्योंकि पूरी टीम ने अपने एक साथी खिलाड़ी की दिवंगत माता को श्रद्धांजलि देने के लिए काली पट्टी बांधकर मैदान संभाला था। उस तेज गेंदबाज ने भी व्यक्तिगत दुख के बावजूद टीम के लिए शानदार खेल दिखाया और एक विकेट हासिल किया। इस जीत के साथ ही चेन्नई ने मुंबई के खिलाफ सर्वाधिक जीत दर्ज करने वाली टीम बनने का गौरव भी प्राप्त कर लिया है। प्रशंसकों को इस मैच में कुछ दिग्गज खिलाड़ियों की वापसी की उम्मीद थी, लेकिन चोट और फिटनेस संबंधी कारणों से वे मैदान पर नहीं उतर सके। इस करारी हार ने मुंबई के लिए मौजूदा सीजन की राह को और अधिक चुनौतीपूर्ण बना दिया है, जबकि चेन्नई ने इस धमाकेदार प्रदर्शन से अंक तालिका में अपनी स्थिति काफी मजबूत कर ली है। वानखेड़े की पिच पर स्पिनरों का बोलबाला रहा, जहाँ मेहमान टीम के फिरकी गेंदबाजों ने बल्लेबाजों को क्रीज पर टिकने का कोई मौका नहीं दिया।

मासूम की मौत पर सनसनी: Rewa में शरीर पर चोट के निशान, परिवार ने जताई हत्या की आशंका

नई दिल्ली । मध्य प्रदेश के Rewa जिले से एक दिल दहला देने वाला मामला सामने आया है, जहां 7 साल की बच्ची की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई। परिजनों ने सौतेली मां पर बेरहमी से पिटाई कर हत्या करने का आरोप लगाया है। घटना के बाद इलाके में सनसनी फैल गई है, वहीं पुलिस मामले की जांच में जुटी हुई है। भाई का आरोप रात में पीटा, फिर बिगड़ी हालतमृतक बच्ची रागिनी साकेत के भाई पुष्पराज साकेत ने आरोप लगाया कि घटना वाली रात करीब 12 बजे उनकी सौतेली मां ने रागिनी को बुरी तरह पीटा। इसके बाद उसकी तबीयत बिगड़ गई, उसे तेज बुखार आया और कुछ ही समय में उसकी मौत हो गई।भाई का कहना है कि पिटाई इतनी ज्यादा थी कि बहन की हालत संभल नहीं पाई। दादी का दावा शरीर पर थे चोट के कई निशानबच्ची की दादी गोमती साकेत ने भी गंभीर आरोप लगाए हैं। उनका कहना है कि रागिनी के पूरे शरीर पर चोट के निशान थे और उसे पानी तक नहीं दिया गया। उन्होंने आरोप लगाया कि बच्ची दर्द से तड़पती रही, लेकिन समय पर इलाज नहीं मिल सका। 80 किमी दूर गांव में हुई घटनायह घटना रीवा मुख्यालय से करीब 80 किलोमीटर दूर त्योंथर विधानसभा क्षेत्र के आमिर कोनी गांव की है। बताया जा रहा है कि बच्ची के पिता मनोज साकेत जब शाम को घर लौटे, तो रागिनी की हालत बेहद खराब थी। वे उसे तुरंत एक निजी डॉक्टर के पास लेकर गए, जहां उसे मृत घोषित कर दिया गया। दूसरी शादी के बाद बढ़ी थीं मारपीट की घटनाएंपरिजनों का कहना है कि पिता की दूसरी शादी के बाद से ही बच्चों के साथ मारपीट की घटनाएं बढ़ गई थीं। भाई-बहनों ने भी आरोप लगाया कि सौतेली मां अक्सर उन्हें प्रताड़ित करती थी और घटना वाले दिन भी रागिनी को बुरी तरह पीटा गया था। तीन डॉक्टरों की टीम ने किया पोस्टमार्टममामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र भेजा, जहां तीन डॉक्टरों की टीम से पोस्टमार्टम कराया गया है। फिलहाल सभी को पोस्टमार्टम रिपोर्ट का इंतजार है, जिसके बाद ही मौत के असली कारणों का खुलासा हो सकेगा। पुलिस की भूमिका पर भी उठे सवालइस मामले में पुलिस की कार्यप्रणाली पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं। जब थाना प्रभारी Balkesh Dwivedi से जानकारी ली गई, तो उन्हें बच्ची और परिजनों के नाम तक स्पष्ट नहीं थे। इससे जांच की गंभीरता पर सवाल उठने लगे हैं।हालांकि पुलिस का कहना है कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद ही आगे की कार्रवाई की जाएगी।सार:

जगन्नाथपुर मंदिर में हिंसक वारदात के बाद प्रशासन पर सवाल, हाई सिक्योरिटी जोन में अपराध ने खड़े किए नए प्रश्न

नई दिल्ली। रांची के जगन्नाथपुर थाना क्षेत्र स्थित जगन्नाथपुर मंदिर परिसर में गुरुवार देर रात हुई एक आपराधिक घटना ने पूरे शहर में चिंता का माहौल पैदा कर दिया है। मंदिर में तैनात सुरक्षा गार्ड की अज्ञात अपराधियों द्वारा हत्या कर दी गई, जिसके बाद क्षेत्र में दहशत फैल गई। घटना की जानकारी मिलते ही पुलिस के वरिष्ठ अधिकारी मौके पर पहुंचे और स्थिति का निरीक्षण किया। प्रारंभिक जांच में यह मामला केवल हत्या तक सीमित नहीं लग रहा है, बल्कि इसमें लूट की संभावना भी सामने आ रही है क्योंकि दान पेटी से नकदी गायब होने की आशंका जताई गई है। मृतक गार्ड की पहचान बिरसा मुंडा के रूप में हुई है, जो लंबे समय से मंदिर की सुरक्षा व्यवस्था में कार्यरत थे। पुलिस का अनुमान है कि अपराधी संभवतः दान पेटी से धन निकालने के इरादे से मंदिर परिसर में घुसे थे और जब गार्ड ने उन्हें रोकने का प्रयास किया, तो उन्होंने हमला कर दिया, जिससे उनकी मौत हो गई। घटना के बाद पूरे मंदिर परिसर को घेराबंदी में लेकर जांच शुरू कर दी गई है। पुलिस ने इस मामले में कई स्तरों पर जांच शुरू की है और घटनास्थल से साक्ष्य एकत्र किए जा रहे हैं। मंदिर परिसर में लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज को खंगाला जा रहा है, जिसमें एक संदिग्ध व्यक्ति की गतिविधियां सामने आने की बात कही जा रही है। पुलिस इसी सुराग के आधार पर आगे की जांच कर रही है। साथ ही फॉरेंसिक टीम और डॉग स्क्वॉड को भी जांच में शामिल किया गया है ताकि तकनीकी और वैज्ञानिक साक्ष्यों के आधार पर आरोपियों तक पहुंचा जा सके। इस घटना ने स्थानीय स्तर पर सुरक्षा व्यवस्था को लेकर कई सवाल खड़े कर दिए हैं। मंदिर जैसे संवेदनशील स्थान पर इस तरह की वारदात होना प्रशासनिक व्यवस्था पर गंभीर प्रश्न उठाता है। यह इलाका पहले से ही सुरक्षा की दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जाता है, ऐसे में इस घटना ने लोगों में असुरक्षा की भावना बढ़ा दी है। घटना के बाद विभिन्न स्तरों पर प्रतिक्रिया सामने आ रही है। स्थानीय लोगों के साथ-साथ सामाजिक और राजनीतिक स्तर पर भी इस मामले को लेकर चिंता व्यक्त की जा रही है। कई लोगों का कहना है कि इस तरह की घटनाएं यह संकेत देती हैं कि सुरक्षा व्यवस्था को और अधिक मजबूत करने की आवश्यकता है, खासकर उन स्थानों पर जहां बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं की आवाजाही रहती है। पुलिस प्रशासन ने आश्वासन दिया है कि मामले की गंभीरता को देखते हुए जांच तेजी से आगे बढ़ाई जा रही है और दोषियों को जल्द गिरफ्तार किया जाएगा। अधिकारियों का कहना है कि हर पहलू को ध्यान में रखते हुए जांच की जा रही है ताकि घटना की सच्चाई सामने आ सके। फिलहाल क्षेत्र में सुरक्षा व्यवस्था बढ़ा दी गई है और निगरानी को और सख्त किया गया है।

भोपाल से बड़ा संदेश ,देने की तैयारी में CM मोहन यादव, रात 9 बजे लाइव संबोधन से बढ़ी हलचल

भोपाल । भोपाल में आज रात प्रदेश की राजनीतिक और प्रशासनिक हलचल एक बार फिर बढ़ने वाली है क्योंकि मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव रात 9 बजे सोशल मीडिया पर लाइव आकर प्रदेशवासियों को संबोधित करेंगे। मुख्यमंत्री ने स्वयं अपने आधिकारिक सोशल मीडिया अकाउंट एक्स पर इस बात की जानकारी साझा की है जिसके बाद से ही लोगों के बीच उत्सुकता और अटकलों का दौर तेज हो गया है। मुख्यमंत्री ने अपने पोस्ट में लिखा है कि वे एक महत्वपूर्ण विषय को लेकर प्रदेश की जनता से सीधा संवाद करेंगे। हालांकि उन्होंने यह स्पष्ट नहीं किया है कि यह विषय क्या होगा लेकिन इसे लेकर राजनीतिक हलकों में चर्चाओं का बाजार गर्म हो गया है। माना जा रहा है कि यह संबोधन किसी बड़ी योजना घोषणा नीति बदलाव या जनकल्याण से जुड़े अहम फैसले से जुड़ा हो सकता है। इस लाइव कार्यक्रम को केवल औपचारिक संबोधन नहीं माना जा रहा है बल्कि इसे मध्यप्रदेश के विकास और आने वाले समय की दिशा तय करने वाला संवाद बताया जा रहा है। मुख्यमंत्री का यह कदम उनकी संवादात्मक और पारदर्शी कार्यशैली को भी दर्शाता है जिसमें वे सीधे जनता से जुड़कर उनकी राय और सुझावों को महत्व देते हैं। पिछले कुछ समय से मुख्यमंत्री मोहन यादव लगातार सोशल मीडिया के माध्यम से जनता से संवाद करते रहे हैं और विभिन्न योजनाओं की जानकारी भी इसी माध्यम से साझा करते आए हैं। उनकी यह शैली सरकार और जनता के बीच विश्वास और संवाद को मजबूत करने में अहम भूमिका निभा रही है। राजनीतिक और प्रशासनिक विशेषज्ञों का मानना है कि यह लाइव संबोधन किसी नई विकास योजना या बड़े प्रशासनिक निर्णय से जुड़ा हो सकता है। इसके अलावा यह भी संभावना जताई जा रही है कि इसमें किसानों युवाओं या रोजगार से जुड़े किसी बड़े फैसले की घोषणा हो सकती है। हालांकि आधिकारिक जानकारी सामने नहीं आई है जिससे लोगों की उत्सुकता और बढ़ गई है। प्रदेशभर में लोग इस लाइव संबोधन का इंतजार कर रहे हैं और सोशल मीडिया पर भी इसे लेकर चर्चाएं तेज हैं। कई लोग इसे संभावित बड़े राजनीतिक या प्रशासनिक बदलाव से जोड़कर देख रहे हैं जबकि कुछ इसे सरकार की जनसंपर्क रणनीति का हिस्सा मान रहे हैं। कुल मिलाकर मुख्यमंत्री का यह संबोधन आज रात प्रदेश की नजरों का केंद्र रहने वाला है। अब यह देखना दिलचस्प होगा कि वे जनता के सामने क्या बड़ा संदेश रखते हैं और क्या कोई नई घोषणा प्रदेश के विकास की दिशा को और गति देती है या नहीं।

इस मंदिर में छिपी है महाभारत काल की सबसे भावुक प्रेम और बलिदान की अनकही दास्तां

नई दिल्ली। भारत रहस्यों और विविध परंपराओं की भूमि है, जहाँ हर मंदिर और उत्सव के पीछे कोई न कोई गहरी पौराणिक गाथा छिपी होती है। तमिलनाडु के कूवगम क्षेत्र में स्थापित एक विशेष मंदिर, जिसे अरावन मंदिर के नाम से जाना जाता है, एक ऐसी ही अनोखी और भावुक परंपरा का गवाह है। यह मंदिर विशेष रूप से एक विशिष्ट समाज के लिए पवित्र माना जाता है, क्योंकि यहाँ पूजे जाने वाले देवता अरावन, महाभारत के महान योद्धा अर्जुन के पुत्र थे। हर साल यहाँ एक भव्य उत्सव आयोजित किया जाता है, जिसमें शामिल होने के लिए दूर-दराज के क्षेत्रों से हजारों की संख्या में लोग जुटते हैं। इस उत्सव की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि यहाँ पहले विवाह का उल्लास मनाया जाता है और अगले ही पल चारों ओर वियोग का मातम छा जाता है। इस अनूठी परंपरा के पीछे महाभारत काल की एक मार्मिक कथा जुड़ी है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, कुरुक्षेत्र के युद्ध में पांडवों की विजय सुनिश्चित करने के लिए एक कठिन परीक्षा की घड़ी आई थी, जहाँ धर्म की रक्षा के लिए एक महान योद्धा की बलि आवश्यक थी। अर्जुन के पुत्र अरावन स्वेच्छा से अपना बलिदान देने के लिए आगे आए, लेकिन उनकी एक अंतिम शर्त थी कि वे अविवाहित रहकर मृत्यु को प्राप्त नहीं होना चाहते। संकट यह था कि जो व्यक्ति अगले दिन ही वीरगति को प्राप्त होने वाला हो, उससे अपनी पुत्री का विवाह करने के लिए कोई तैयार नहीं था। ऐसी स्थिति में भगवान विष्णु ने स्वयं ‘मोहिनी’ का रूप धारण किया और अरावन से विवाह रचाया। विवाह की अगली सुबह अरावन ने अपना बलिदान दे दिया और मोहिनी रूपी भगवान ने एक विधवा की तरह उनकी मृत्यु पर विलाप किया। यही कारण है कि आज भी एक विशेष समुदाय के लोग खुद को मोहिनी का रूप मानते हैं और अरावन देवता को अपना आराध्य स्वीकार करते हैं। उत्सव के दौरान, मंदिर में विवाह का प्रतीक माने जाने वाले सूत्र बांधे जाते हैं, जो अरावन देवता के साथ उनके मिलन का प्रतीक होता है। उस रात पूरा परिसर उत्सव और खुशियों से सराबोर रहता है। लेकिन जैसे ही अगली सुबह होती है और अरावन की प्रतिमा के बलिदान की प्रक्रिया पूरी की जाती है, वैसे ही खुशियां मातम में बदल जाती हैं। लोग अपनी चूड़ियां तोड़ देते हैं, सुहाग के प्रतीक हटा देते हैं और सफेद वस्त्र धारण कर अपने देवता की मृत्यु का शोक मनाते हैं। करीब 18 दिनों तक चलने वाले इस पारंपरिक उत्सव में केवल धार्मिक अनुष्ठान ही नहीं होते, बल्कि कला, सौंदर्य और गायन जैसी कई प्रतियोगिताओं का भी आयोजन किया जाता है, जो इस समुदाय की प्रतिभा को प्रदर्शित करती हैं। यह मंदिर और यहाँ की परंपरा इस बात का जीवंत उदाहरण है कि आस्था और बलिदान की कहानियाँ किस तरह सदियों बाद भी समाज के एक विशिष्ट वर्ग की पहचान का आधार बनी हुई हैं। अरावन का बलिदान न केवल इतिहास की एक घटना थी, बल्कि इसने एक ऐसे देवता को जन्म दिया जो आज भी लाखों लोगों के सुख और दुख का एकमात्र सहारा हैं।