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SRK को बताया शानदार, आमिर बोले-तीनों खान का साथ आना मुमकिन

नई दिल्ली हिंदी सिनेमा के इतिहास में अगर तीन सबसे बड़े सुपरस्टार्स का नाम लिया जाए तो Shah Rukh Khan, Salman Khan और Aamir Khan का नाम सबसे ऊपर आता है। पिछले तीन दशकों से ये तीनों खान इंडस्ट्री पर राज कर रहे हैं और हर पीढ़ी के दर्शकों के दिलों में खास जगह बनाए हुए हैं। हालांकि, आज तक इन तीनों को एक साथ किसी फिल्म में नहीं देखा गया, जो फैंस के लिए हमेशा एक अधूरी ख्वाहिश रही है। अब इस अधूरी ख्वाहिश को पूरा करने के संकेत खुद आमिर खान ने दिए हैं, जिससे फैंस के बीच उत्साह और बढ़ गया है। शाहरुख की एक्टिंग के कायल हुए आमिरहाल ही में एक इंटरव्यू के दौरान Aamir Khan ने Shah Rukh Khan की जमकर तारीफ की। उन्होंने कहा कि शाहरुख एक शानदार अभिनेता हैं, जिनका अपना अलग चार्म है और जो दर्शकों के साथ गहराई से जुड़ने की क्षमता रखते हैं। आमिर ने यह भी कहा कि शाहरुख सिर्फ एक स्टार नहीं बल्कि बेहतरीन आर्टिस्ट हैं, जो हर किरदार में जान डाल देते हैं। आमिर के इस बयान से दोनों सितारों के बीच आपसी सम्मान और दोस्ती साफ झलकती है। अच्छी स्क्रिप्ट बनी सबसे बड़ी शर्तइंटरव्यू में आमिर खान ने यह भी खुलासा किया कि उन्होंने और शाहरुख खान ने साथ काम करने को लेकर बातचीत की है। हालांकि, दोनों ही किसी भी प्रोजेक्ट को लेकर बेहद चयनात्मक हैं और एक दमदार स्क्रिप्ट की तलाश में हैं। आमिर ने कहा कि जैसे ही उन्हें एक मजबूत कहानी मिलेगी, वे शाहरुख के साथ काम करने के लिए तैयार हैं। उन्होंने यह भी याद दिलाया कि शाहरुख और सलमान पहले साथ काम कर चुके हैं, वहीं आमिर और सलमान भी स्क्रीन शेयर कर चुके हैं, लेकिन आमिर और शाहरुख अब तक किसी फिल्म में साथ नजर नहीं आए। क्या सच होगा तीनों खान का सपना?सबसे दिलचस्प बात यह रही कि आमिर खान ने तीनों खान को एक साथ स्क्रीन पर लाने के विचार पर भी खुलकर बात की। उन्होंने बताया कि करीब एक साल पहले जब Shah Rukh Khan और Salman Khan उनके साथ बैठे थे, तब तीनों ने इस संभावना पर चर्चा की थी। आमिर का मानना है कि दर्शकों के लिए यह एक बेहद खास और यादगार अनुभव होगा। हालांकि, फिल्म का स्केल कितना बड़ा होगा, यह अलग मुद्दा है, लेकिन तीनों का साथ आना ही अपने आप में एक बड़ी घटना होगी। अगर यह सपना साकार होता है तो यह बॉलीवुड इतिहास की सबसे बड़ी फिल्मों में से एक साबित हो सकती है। वर्क फ्रंट पर आमिर खानवर्क फ्रंट की बात करें तो Aamir Khan इन दिनों अपने प्रोडक्शन में बन रही फिल्म ‘एक दिन’ को लेकर चर्चा में हैं। इस फिल्म में उनके बेटे जुनैद खान के साथ साउथ की चर्चित अभिनेत्री Sai Pallavi नजर आएंगी। खास बात यह है कि यह साई पल्लवी की पहली हिंदी फिल्म होगी, जिससे फिल्म को लेकर दर्शकों में खासा उत्साह है। फिल्म 1 मई को रिलीज होने वाली है और इसकी एडवांस बुकिंग पहले ही शुरू हो चुकी है।

कोल एलन पर राष्ट्रपति ट्रंप की हत्या की कोशिश का आरोप, केस दर्ज, जांच में और खुलासों के संकेत

वॉशिंगटन । वॉशिंगटन डीसी में आयोजित संवाददाता डिनर के दौरान राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की हत्या की कोशिश के मामले में 31 वर्षीय कोल थॉमस एलन के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया गया है। अमेरिकी न्याय विभाग के मुताबिक, उस पर राष्ट्रपति की हत्या का प्रयास, आपराधिक इरादे से हथियार रखने और फायरिंग जैसे गंभीर आरोप लगाए गए हैं। यह वारदात शनिवार शाम वाशिंगटन हिल्टन होटल में हुई, जहां राष्ट्रपति ट्रंप, उनकी पत्नी मेलानिया ट्रंप, उपराष्ट्रपति जेडी वेंस और कई वरिष्ठ अधिकारी मौजूद थे। आरोपी एलन सुरक्षा जांच को चकमा देकर अंदर घुस गया। उसके पास एक लंबी बंदूक थी और मेटल डिटेक्टर पार करते ही उसने गोलीबारी शुरू कर दी। इस दौरान सीक्रेट सर्विस के एक अधिकारी के सीने में गोली लगी, लेकिन बुलेटप्रूफ जैकेट की वजह से उनकी जान बच गई। सुरक्षाकर्मियों ने तुरंत प्रतिक्रिया देते हुए हमलावर को पकड़ लिया। जांच में सामने आए तथ्यप्रारंभिक जांच से पता चला है कि एलन पूरी योजना के साथ इस हमले को अंजाम देने पहुंचा था। वह 21 से 24 अप्रैल के बीच लॉस एंजिल्स से शिकागो होते हुए ट्रेन के जरिए वाशिंगटन पहुंचा। घटना वाले दिन ही उसने होटल में कमरा बुक किया था। उसके पास से एक शॉटगन, पिस्टल और तीन चाकू बरामद किए गए हैं। अधिकारियों का मानना है कि उसका निशाना सिर्फ राष्ट्रपति ही नहीं, बल्कि अन्य वरिष्ठ सरकारी अधिकारी भी थे। राष्ट्रपति की प्रतिक्रियाघटना के बाद राष्ट्रपति ट्रंप ने हमलावर को कट्टरपंथी और मानसिक रूप से अस्वस्थ बताया। उन्होंने कहा कि आरोपी के एक घोषणापत्र से संकेत मिलता है कि उसके विचारों में हाल के समय में बड़ा बदलाव आया था। ट्रंप ने सुरक्षाकर्मियों की तत्परता और बहादुरी की सराहना की और बताया कि खतरे के तुरंत बाद उन्हें सुरक्षित स्थान पर पहुंचा दिया गया। कार्यवाहक अटॉर्नी जनरल टॉड ब्लैंच ने कहा कि सुरक्षा एजेंसियां ऐसी परिस्थितियों से निपटने के लिए पूरी तरह तैयार रहती हैं। उन्होंने समाज में बढ़ती हिंसक भाषा और मीडिया के कुछ हिस्सों को भी इसके लिए जिम्मेदार ठहराया। एफबीआई इस मामले की गहन जांच कर रही है। आरोपी एलन फिलहाल हिरासत में है और उसकी अगली पेशी गुरुवार को निर्धारित है।

MP में 100 साल पहले विलुप्त हो चुके जंगली भैंसों की वापसी…. CM आज सूखपार में करेंगे रिलीज

बालाघाट। मध्य प्रदेश ( Madhya Pradesh) के वन्यजीव इतिहास (Wildlife History) में 28 अप्रैल का दिन सुनहरे अक्षरों में दर्ज होने जा रहा है. ‘टाइगर’ और ‘चीता’ स्टेट के बाद अब मध्यप्रदेश ( Madhya Pradesh) अपनी धरती पर ‘जंगली भैंसों’ को दोबारा बसाने जा रहा है. मुख्यमंत्री मोहन यादव (Chief Minister Mohan Yadav) बालाघाट के सूपखार क्षेत्र में 4 जंगली भैंसों को उनके नए प्राकृतिक आवास में छोड़कर इस अभियान का आगाज करेंगे. तकरीबन 100 साल पहले मध्यप्रदेश से विलुप्त हो चुकी इस प्रजाति को वापस लाने के लिए असम सरकार के साथ एक खास समझौता हुआ है. इसके तहत पहले चरण में असम के काजीरंगा नेशनल पार्क से 4 भैंसों (3 मादा, 1 नर) का दल कान्हा पहुंच रहा है. ‘फाउंडर पॉपुलेशन’ के रूप में कुल 50 जंगली भैंसों को लाने का लक्ष्य है, जिनमें से इस सीजन में 8 भैंसें लाई जाएंगी. काजीरंगा और कान्हा के विशेषज्ञ डॉक्टरों और अधिकारियों की टीम इस पूरे ‘ट्रांसलोकेशन’ की निगरानी कर रही है। MP-असम के बीच वाइल्ड लाइफ एक्सचेंजमुख्यमंत्री मोहन यादव और असम के सीएम हिमंता विश्व सरमा के बीच हुए समझौते के तहत दोनों राज्यों के बीच वन्यजीवों का आदान-प्रदान होगा। कान्हा ही क्यों बना पहली पसंद?भारतीय वन्यजीव संस्थान (WII), देहरादून के अध्ययन के अनुसार, कान्हा टाइगर रिजर्व का सूपखार और टोपला क्षेत्र जंगली भैंसों के लिए देश में सबसे उपयुक्त स्थान है. यहां के बड़े घास के मैदान (Grasslands) और प्रचुर जल स्रोत इस प्रजाति के फलने-फूलने के लिए अनुकूल हैं. विलुप्ति की कगार से वापसीमध्यप्रदेश में आखिरी बार 1979 में सूपखार क्षेत्र में एक जंगली भैंसा देखा गया था. शिकार और आवास की कमी के कारण यह प्रजाति यहां खत्म हो गई थी. वर्तमान में इनकी मुख्य आबादी केवल असम में है. इस पहल से न केवल एक दुर्लभ प्रजाति बचेगी, बल्कि कान्हा का इकोसिस्टम भी सशक्त होगा.

एक मई को बुद्ध पूर्णिमा पर अस्त होंगे बुध…. 27 दिनों तक इन राशियों पर पड़ेगा बुरा असर….

नई दिल्ली। एक मई को बुद्ध पूर्णिमा (Buddha Purnima) का पर्व मनाया जाएगा. संयोगवश इसी दिन बुध (Budh Asta 2026) मेष राशि (Aries) में अस्त हो रहे हैं, जिससे बुध की स्थिति अगले 27 दिनों तक बहुत ही कमजोर हो जाएगी. ज्योतिष के अनुसार जब बुध ग्रह अस्त होते हैं, तो इसका असर खासतौर पर हमारी सोचने-समझने की क्षमता और बातचीत के तरीके पर पड़ता है. मई में बुध के अस्त होने से कुछ राशियों के लोगों को ज्यादा सावधानी बरतने की जरूरत होगी. इस दौरान जल्दबाजी में लिए गए फैसले परेशानी बढ़ा सकते हैं. आइए जानते हैं किन राशियों को संभलकर रहने की सलाह दी जा रही है। वृषभ राशि: इस समय आपके खर्चों में अचानक बढ़ोतरी हो सकती है, जिससे बजट बिगड़ सकता है. पैसों के मामले में सतर्क रहें. बड़े निवेश या जोखिम लेने से बचें. छोटी-छोटी लापरवाही भी आर्थिक दबाव बढ़ा सकती है। मिथुन राशि: आपकी योजनाएं इस दौरान पूरी तरह सफल नहीं हो पाएंगी. सेहत में उतार-चढ़ाव आ सकता है. कामकाज में भी अड़चनें आ सकती हैं. आत्मविश्वास ठीक है, लेकिन ओवरकॉन्फिडेंस से बचें, वरना गलत फैसले नुकसान दे सकते हैं. कन्या राशि: रिश्तों के मामले में सावधानी जरूरी है. छोटी-छोटी बातों पर गलतफहमी बढ़ सकती है. मन में नकारात्मक सोच हावी हो सकती है, इसलिए बातचीत के जरिए चीजों को संभालने की कोशिश करें। वृश्चिक राशि: कार्यक्षेत्र में दबाव बढ़ सकता है. तनाव के कारण आपका ध्यान भटक सकता है. काम प्रभावित हो सकता है. सहकर्मियों के साथ बहस या टकराव से बचना आपके लिए बेहतर रहेगा। मीन राशि: इस दौरान मन थोड़ा उलझा हुआ रह सकता है. किसी भी फैसले को लेने से पहले अच्छे से सोच-विचार करें. जल्दबाजी में लिया गया निर्णय बाद में परेशानी दे सकता है, इसलिए धैर्य रखना जरूरी है।

दक्षिण सूडान: उड़ान भरने के कुछ ही देर बाद क्रैश हुआ विमान…. 14 यात्रियों की मौत

जुबा। दक्षिण सूडान (South Sudan) में यात्री विमान दुर्घटनाग्रस्त (Airplane Crash) हो गया, जिसमें सवार सभी 14 लोगों की मौत हो गई। देश के नागरिक उड्डयन प्राधिकरण (SSCAA) ने इस हादसे की पुष्टि की है। अधिकारियों ने जांच के लिए एक टीम दुर्घटनास्थल पर भेजी है। रिपोर्ट के अनुसार, विमान के दुर्घटनाग्रस्त होने का कारण खराब मौसम माना जा रहा है। SSCAA ने अपने बयान में यह जानकारी दी। विमान स्थानीय समयानुसार सुबह 7:15 बजे जुबा इंटरनेशनल एयरपोर्ट (Juba International Airport) से उड़ा था और राजधानी से करीब 20 किलोमीटर दूर दुर्घटना का शिकार हो गया। दक्षिण सूडान के सिविल एविएशन अथॉरिटी ने बयान जारी कर बताया कि दुर्घटना में कोई भी बचा नहीं। दुर्घटना स्थल पर पहुंची यूएन बचाव टीम के एक सदस्य ने बताया कि शव इतने जल गए थे कि उन्हें पहचानना असंभव हो गया था। इस दुर्घटना में 12 दक्षिण सूडानी और 2 केन्याई नागरिक शामिल थे। दक्षिण सूडान पहले से ही अस्थिरता, संघर्ष और गरीबी की मार झेल रहा है, जहां परिवहन बुनियादी ढांचा बेहद कमजोर है। यहां अक्सर विमान अधिक वजन होने या मौसम की वजह से दुर्घटनाओं का शिकार होते हैं। यह घटना देश की उड़ान सुरक्षा पर सवाल खड़े करती है। विशेषज्ञों का कहना है कि बेहतर रखरखाव, प्रशिक्षण और मौसम संबंधी चेतावनियों की कमी से ऐसी घटनाएं बार-बार हो रही हैं। पिछले कुछ वर्षों में दक्षिण सूडान में कई बड़ी विमान दुर्घटनाएं हो चुकी हैं। जनवरी 2025 में उत्तरी सूडान में एक क्रैश में 20 लोग मारे गए थे। 2021 में विश्व खाद्य कार्यक्रम के ईंधन ले जा रहे कार्गो प्लेन दुर्घटना में 5 लोगों की जान गई। 2015 में जुबा में एक एंटोनोव विमान दुर्घटना में 36 लोग मारे गए थे, जबकि 2017 में एक और घटना में विमान रनवे से फिसल गया था, लेकिन चमत्कारिक रूप से सभी 37 यात्री बच गए। इस बार की दुर्घटना ने एक बार फिर देश की एयर सेफ्टी व्यवस्था पर गंभीर सवाल उठाए हैं।

MP: उज्जैन के इस गांव में दुल्हे ने पेश की मिसाल…. 50 लाख का दहेज लौटाया

उज्जैन। मध्य प्रदेश (Madhya Pradesh) के उज्जैन जिले (Ujjain district) में बड़नगर तहसील (Badnagar tehsil) के ग्राम बंगरेड (Bangred village) में आयोजित एक तिलक समारोह ने दहेज प्रथा के खिलाफ एक संदेश दिया है. कई बार देखने को मिलता है कि दहेज के लालच में शादी टूट जाती है. लेकिन बंगरेड में एक परिवार ने दहेज न लेकर समाज के सामने मिसाल पेश की है. परिवार ने करीब 50 लाख रुपए का दहेज लौटा दिया, जिसकी पूरे क्षेत्र में सराहना हो रही है। दूल्हे पक्ष ने दहेज लेने से किया इनकारक्षत्रिय महासभा के जिलाध्यक्ष जितेंद्र सिंह राजावत के पुत्र आदर्श दीप राजावत का विवाह इंदौर जिले के देपालपुर तहसील अंतर्गत तामलपुर निवासी किसान महेन्द्र सिंह पंवार की पुत्री बिंदिया कुमारी से आगामी नवंबर 2026 में तय हुआ है. जिसकी सगाई (तिलक) के दौरान दूल्हे पक्ष ने दहेज लेने से मना कर दिया। 50 लाख का दहेज वधु पक्ष को किया वापसरविवार को बड़नगर तहसील के बंगरेड स्थित रिसोर्ट में तिलक समारोह कार्यक्रम हुआ. कार्यक्रम के दौरान जब वधु पक्ष द्वारा पारंपरिक रूप से 25 लाख रुपए नकद और 15 तोला सोना (कुल करीब 50 लाख रुपए) देने की प्रक्रिया शुरू की गई, तभी दूल्हे आदर्श दीप राजावत और उनके पिता जितेंद्र सिंह राजावत ने दहेज लेने से साफ इनकार कर दिया. लोगों ने बताया दहेज प्रथा के खिलाफ प्रेरणादायक पहलदूल्हे पक्ष ने बताया कि वे किसी भी प्रकार का दहेज स्वीकार नहीं करेंगे और केवल प्रतीकात्मक रूप में एक सोने की अंगूठी ही लेंगे. इसके बाद पूरे सम्मान के साथ नकद राशि और सोने के आभूषण वधु पक्ष को लौटा दिए गए. लोगों ने इसे दहेज प्रथा के खिलाफ एक बड़ी और प्रेरणादायक पहल बताया। जितेंद्र सिंह राजावत ने कहा, “समाज में दहेज जैसी कुरीतियां अब भी पूरी तरह खत्म नहीं हुई हैं, लेकिन यदि लोग आगे आकर पहल करें, तो बदलाव संभव है. कई गरीब परिवार बेटियों की शादी में दहेज के कारण परेशान होते हैं. इसलिए इस पहल से समाज में सकारात्मक सुधार की उम्मीद है। दूल्हे को चाहिए सुंदर दुल्हन और ससुर को बहु बिटियाउज्जैन में आधा करोड़ का दहेज लेने से मना करने वाले ससुर जीतेंद्र राजावत ने कहा कि “उन्हे एक बहु और उसके साथ आने वाले धन दौलत की जरुरत नहीं है. ईश्वर ने उन्हे बहुत कुछ दिया है. उन्हे तो घर में एक बिटिया चाहिए तो पुत्रवधु के रुप में मिल रही है.” तिलक समारोह के बाद रिंग सेरेमनी में वर पक्ष ने बहु पक्ष की ओर से सिर्फ एक गोल्ड रिंग स्वीकारा. यह शादी नवंबर महीने में होनी है और इससे पहले ससुर की ओर से सिर्फ मजबूत रिश्ते की डिमांड की गई है जिससे दो परिवार एक साथ जुड़ जाएं।

दिग्गज एक्टर भरत कपूर का निधन…. 80 साल की उम्र में ली अंतिम सांस

नई दिल्ली। फिल्म इंडस्ट्री (Film Industry) से बुरी खबर सामने आ रही है। बॉलीवुड के दिग्गज एक्टर भरत कपूर (Bharat Kapoor) अब इस दुनिया में नहीं रहे। 80 साल की उम्र में भरत कपूर (Bharat Kapoor) ने अंतिम सांस ली। उनके निधन (Passed Away) की खबर से फिल्म इंडस्ट्री और उनके चाहने वालों के बीच गहरा दुख और शोक की लहर दौड़ गई है। अशोक पंडित ने जताया शोकभरत कपूर ने निधन पर निर्माता अशोक पंडित शोक व्यक्त किया है। अशोक पंडित ने अपनी इंस्टाग्राम स्टोरी पर दिग्गज एक्टर की तस्वीर शेयर करते हुए उनके निधन की खबर की पुष्टि की है। उन्होंने लिखा, “दिग्गज थिएटर और फिल्म अभिनेता भरत कपूर जी के निधन के बारे में जानकर दुख हुआ। मेरे करियर के शुरुआती दिनों में उनके साथ काम करने की बहुत अच्छी यादें हैं। एक महान इंसान। ओम शांति।” तीन दिनों से बीमार थे एक्टरभरत कपूर का निधन मुंबई के Sion Hospital में दोपहर करीब 3:30 बजे हुआ। उनका अंतिम संस्कार शाम 6:30 बजे परिवार के सदस्यों और करीबी दोस्तों की मौजूदगी में किया गया। एक्टर और उनके करीबी दोस्त अवतार गिल ने India Today को बताया, “मैं अभी-अभी श्मशान घाट से लौटा हूं, जहां शाम 6:30 बजे अंतिम संस्कार हुआ। उनका निधन आज दोपहर करीब 3 बजे अस्पताल में हुआ। पिछले तीन दिनों से उनकी तबीयत ठीक नहीं थी। पिछले कुछ दिनों से उनके शरीर के कई अंगों ने काम करना बंद कर दिया था।” चार दशकों तक पर्दे पर किया राजभरत कपूर ने 1972 में फिल्म इंडस्ट्री में करियर की शुरुआत की और लगभग चार दशक तक पर्दे पर छाए रहे। भरत सपोर्टिंग रोल और खलनायक की भूमिकाओं के लिए जाने जाते थे। वह 1970, 80 और 90 के दशक में हिंदी सिनेमा में एक जाना-पहचाना चेहरा बन गए। उन्होंने नूरी (1979), राम बलराम (1980), लव स्टोरी (1981), बाजार (1982), गुलामी (1985), आखिरी रास्ता (1986), सत्यमेव जयते (1987), स्वर्ग (1990), खुदा गवाह (1992), और रंग (1993) सहित कई उल्लेखनीय फिल्मों में अभिनय किया। इन फिल्मों में दिखाया जलवाभरत कपूर ने इसके अलावा ‘बरसात’ (1995), ‘साजन चले ससुराल’ (1996), और ‘मीनाक्षी: ए टेल ऑफ थ्री सिटीज’ (2004) जैसी फिल्मों में नजर आए, जिनमें उन्होंने हर दौर के हिसाब से खुद को ढालने की अपनी काबिलियत दिखाई। फिल्मों के अलावा, भरत कपूर ने ‘कैंपस’, ‘परंपरा’, ‘राहत’, ‘सांस’, ‘अमानत’, ‘तारा’, ‘चुनौती’ और ‘कहानी चंद्रकांता की’ जैसे टीवी शो के जरिए टेलीविजन पर भी अपनी एक अलग पहचान बनाई। उनकी बहुमुखी प्रतिभा ने उन्हें अलग-अलग माध्यमों के बीच आसानी से काम करने का मौका दिया।

भूजल में यूरेनियम की खतरनाक मौजूदगी ने बढ़ाई चिंता, 18 राज्यों के 151 जिले प्रभावित

नई दिल्ली। देश के कई राज्यों के भूजल (Groundwater) में यूरेनियम (Uranium) की खतरनाक मौजूदगी (Dangerous presence) सामने आई है। कई क्षेत्रों में पीने के पानी में भी यूरेनियम (Uranium) की मात्रा विश्व स्वास्थ्य संगठन (World Health Organization) के तय सुरक्षित मानकों से कई गुना अधिक है। कुल 14,377 नमूनों की जांच में यूरेनियम की सांद्रता 0 से 2,876 माइक्रोग्राम प्रति लीटर तक दर्ज की गई, जो डब्ल्यूएचओ की 30 माइक्रोग्राम प्रति लीटर सीमा से 96 गुना तक अधिक है। 18 राज्यों के 151 जिले आंशिक रूप से इस समस्या से प्रभावित पाए गए हैं, जबकि पंजाब सबसे अधिक प्रभावित राज्य के रूप में सामने आया है। यह जानकारी सेंट्रल ग्राउंड वाटर बोर्ड की पहली राष्ट्रीय स्तर की निगरानी में सामने आई है। सेंट्रल ग्राउंड वाटर बोर्ड के अनुसार देश में पहली बार वर्ष 2019-20 में भूजल में यूरेनियम की राष्ट्रीय स्तर पर निगरानी की गई। इसके तहत 14,377 भूजल नमूनों की जांच की गई, जिन्हें नियमित रूप से मॉनिटर किया जा रहा है। रिपोर्ट में यह स्पष्ट हुआ कि कई क्षेत्रों में भूजल में यूरेनियम की सांद्रता सामान्य स्तर से काफी अधिक है, जिससे पेयजल सुरक्षा को लेकर गंभीर चिंता पैदा हुई है। विश्व स्वास्थ्य संगठन ने पीने के पानी में यूरेनियम की अधिकतम स्वीकार्य सीमा 30 माइक्रोग्राम प्रति लीटर निर्धारित की है। इसे पार्ट्स प्रति बिलियन यानी पीपीबी भी कहा जाता है। इसके विपरीत भारतीय मानक ब्यूरो ने अभी तक यूरेनियम के लिए कोई अलग मानक तय नहीं किया है। एईआरबी की 60 पीपीबी सीमा पर भी पंजाब शीर्ष परपरमाणु ऊर्जा नियामक बोर्ड की 60 माइक्रोग्राम प्रति लीटर सीमा के आधार पर भी पंजाब सबसे अधिक प्रभावित राज्य रहा, जहां 6 फीसदी कुओं में यूरेनियम की मात्रा 60 पीपीबी से अधिक पाई गई। दिल्ली में यह आंकड़ा 5 और हरियाणा में 4.4 फीसदी दर्ज किया गया। तेलंगाना में 2.6, आंध्र प्रदेश में 2, राजस्थान में 1.2 , छत्तीसगढ़ में 1.1, तमिलनाडु में 0.9, कर्नाटक में 0.7 , मध्य प्रदेश में 0.6 उत्तर प्रदेश में 0.4 तथा झारखंड में 0.25 फीसदी कुओं में यूरेनियम की सांद्रता एईआरबी द्वारा तय मानकों से अधिक मिली। स्वास्थ्य पर बढ़ी चिंताविशेषज्ञों के अनुसार लंबे समय तक यूरेनियम युक्त पानी के सेवन से सबसे अधिक असर किडनी पर पड़ता है, क्योंकि यूरेनियम एक रासायनिक रूप से विषैला तत्व भी है। इससे गुर्दों की कार्यक्षमता प्रभावित हो सकती है, हड्डियों पर असर पड़ सकता है और लंबे समय में कैंसर जैसी आशंकाएं भी बढ़ सकती हैं, हालांकि वैज्ञानिकों के अनुसार सामान्यतः इसका रासायनिक विषाक्त प्रभाव विकिरण प्रभाव से अधिक गंभीर माना जाता है। बच्चों, गर्भवती महिलाओं और भूजल पर निर्भर ग्रामीण आबादी के लिए यह खतरा और अधिक संवेदनशील माना जाता है। खासतौर पर ग्रामीण और भूजल पर निर्भर आबादी के लिए यह स्थिति अधिक चिंता का विषय है।

गर्मी में शरीर को ठंडक देने वाला देसी ड्रिंक: झटपट गुलकंद ठंडाई बनाना सीखें

नई दिल्ली। गर्मी का मौसम अपने साथ तेज धूप, लू और शरीर में थकान जैसी कई समस्याएं लेकर आता है। इस समय शरीर को ऐसे पेय की जरूरत होती है जो न सिर्फ ठंडक दे बल्कि ऊर्जा भी प्रदान करे। पारंपरिक भारतीय रसोई में ऐसे कई प्राकृतिक विकल्प मौजूद हैं, जिनमें गुलकंद ठंडाई एक बेहद लोकप्रिय और प्रभावी पेय माना जाता है। यह ड्रिंक गर्मी में शरीर को तुरंत राहत देने के साथ-साथ अंदरूनी ताजगी भी बनाए रखती है। गुलकंद ठंडाई की सबसे बड़ी खासियत यह है कि इसे बहुत कम समय में घर पर आसानी से तैयार किया जा सकता है। इसमें उपयोग होने वाली सामग्री पूरी तरह प्राकृतिक होती है, जो शरीर को नुकसान पहुंचाए बिना ठंडक और पोषण प्रदान करती है। गुलकंद, दूध और ड्राई फ्रूट्स का संयोजन इसे एक संपूर्ण हेल्दी ड्रिंक बनाता है, जो गर्मियों में शरीर को संतुलित रखने में मदद करता है। इस पेय को बनाने के लिए सबसे पहले कुछ मुख्य सामग्री जैसे बादाम, काजू, सौंफ, खसखस और इलायची को थोड़ी देर के लिए पानी में भिगोया जाता है ताकि वे नरम हो जाएं और आसानी से पीसे जा सकें। इसके बाद इन्हें मिक्सर में डालकर एक स्मूद पेस्ट तैयार किया जाता है, जो ठंडाई का बेस तैयार करता है। यह पेस्ट न केवल स्वाद बढ़ाता है बल्कि शरीर को आवश्यक पोषक तत्व भी देता है। इसके बाद ठंडा दूध लिया जाता है और उसमें गुलकंद मिलाया जाता है। गुलकंद अपने ठंडक देने वाले गुणों के कारण शरीर के तापमान को नियंत्रित रखने में मदद करता है और गर्मी के असर को कम करता है। दूध में गुलकंद अच्छी तरह मिलाने के बाद तैयार ड्राई फ्रूट्स पेस्ट इसमें डाला जाता है। इस मिश्रण को अच्छे से मिलाने पर एक गाढ़ी और स्वादिष्ट ठंडाई तैयार हो जाती है। स्वाद और खुशबू को और बेहतर बनाने के लिए इसमें गुलाब जल और थोड़ी चीनी भी मिलाई जाती है। इसके बाद इसे गिलास में डालकर ऊपर से बर्फ के टुकड़े और कटे हुए ड्राई फ्रूट्स डालकर परोसा जाता है। यह ठंडाई पीने में जितनी स्वादिष्ट होती है, उतनी ही शरीर को ठंडक और राहत देने वाली भी होती है। गुलकंद ठंडाई केवल स्वाद के लिए ही नहीं बल्कि स्वास्थ्य के लिए भी बहुत लाभकारी मानी जाती है। यह शरीर को डिहाइड्रेशन से बचाने में मदद करती है, लू के प्रभाव को कम करती है और पाचन तंत्र को भी बेहतर बनाती है। गर्मी में होने वाली थकान और कमजोरी को दूर करने में यह एक प्राकृतिक ऊर्जा स्रोत की तरह काम करती है। नियमित रूप से सीमित मात्रा में इसका सेवन शरीर को तरोताजा और ऊर्जावान बनाए रखने में मदद कर सकता है। यह बच्चों से लेकर बड़ों तक सभी के लिए एक सुरक्षित और लाभकारी पेय विकल्प है, जिसे गर्मियों के मौसम में जरूर अपनाया जा सकता है।

बंगाल में हिंदुत्व को लेकर सियासी संग्राम शुरू, ‘जय महाकाली’ बनाम ‘जय श्रीराम’ का गूंज रहा नारा

कोलकाता। पश्चिम बंगाल की राजनीति इस समय पहचान और वर्चस्व की लड़ाई में बदलती नजर आ रही है। ऊपर से चुनावी शोर और आरोप-प्रत्यारोप भले ही हावी हों, लेकिन भीतर ही भीतर हिंदुत्व की लहर एक अहम भूमिका निभाती दिख रही है। यह ऐसा कारक बन चुका है, जो स्थापित राजनीतिक समीकरणों को चुनौती दे रहा है और सत्ता के समीकरण बदलने की क्षमता रखता है। राज्य की राजनीति अब पारंपरिक मुद्दों से आगे बढ़कर धार्मिक और सांस्कृतिक प्रतीकों के इर्द-गिर्द सिमटती जा रही है। यह मुकाबला एक तरह से शक्ति उपासना और ‘जय श्रीराम’ के नारों के बीच खिंचती रेखा जैसा बन गया है, जहां हर रैली और बयान का अलग राजनीतिक अर्थ निकाला जा रहा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मंदिर दौरों को केवल धार्मिक कार्यक्रम नहीं, बल्कि एक व्यापक सांस्कृतिक संदेश के रूप में देखा जा रहा है। दक्षिणेश्वर, बेलूर मठ, मतुआ धाम और कालीघाट जैसे प्रमुख स्थलों पर उनकी मौजूदगी ने राजनीतिक माहौल को नया आयाम दिया है। इसके चलते राज्य में ‘जय महाकाली’ के साथ ‘जय श्रीराम’ का नारा भी तेजी से राजनीतिक पहचान का हिस्सा बनता जा रहा है। भाजपा का मानना है कि पहले चरण के मतदान में मतदाताओं की सक्रियता बदलाव के संकेत दे रही है। पार्टी रणनीतिकार इसे मौन मतदाता की प्रतिक्रिया के रूप में देख रहे हैं, जो भविष्य के परिणामों को प्रभावित कर सकती है। चुनावी रणनीति के स्तर पर केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने खुद मैदान में उतरकर कमान संभाली है। कोलकाता में लगातार सक्रिय रहते हुए वे उन क्षेत्रों पर फोकस कर रहे हैं, जहां पहले भाजपा की पकड़ कमजोर मानी जाती थी। उनके साथ संगठनात्मक स्तर पर सुनील बंसल बूथ प्रबंधन को मजबूत करने में जुटे हैं, जिससे पार्टी जमीनी स्तर पर अपनी स्थिति बेहतर करने की कोशिश कर रही है। जिन सीटों पर मुकाबला होना है, वे तृणमूल कांग्रेस का गढ़ मानी जाती हैं। पिछले चुनाव में भाजपा यहां सीमित सफलता हासिल कर सकी थी, लेकिन इस बार पार्टी को माहौल अपने पक्ष में बदलता नजर आ रहा है। सुरक्षा और चुनाव के बाद भी केंद्रीय बलों की मौजूदगी को लेकर दिए गए संदेश को भाजपा समर्थकों के लिए भरोसे के रूप में देखा जा रहा है। दूसरी ओर, मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने इस चुनौती का जवाब अपनी अलग रणनीति से देने का प्रयास किया है। उन्होंने बंगाली अस्मिता और धार्मिक समावेश को केंद्र में रखते हुए प्रचार तेज किया है। मंदिरों में जाकर वे यह संदेश दे रही हैं कि राज्य की सांस्कृतिक पहचान को बाहरी नजरिये से नहीं समझा जा सकता। इस रणनीति में अभिषेक बनर्जी की भूमिका भी अहम मानी जा रही है। वे युवाओं को जोड़ने के लिए नए तरीके अपना रहे हैं और भाजपा के खिलाफ आक्रामक अभियान चला रहे हैं। तृणमूल के अन्य नेता भी जमीनी स्तर पर सक्रिय होकर चुनावी विमर्श को धार्मिक मुद्दों से हटाकर विकास, अधिकार और केंद्र-राज्य संबंधों की ओर मोड़ने की कोशिश कर रहे हैं। कुल मिलाकर, पश्चिम बंगाल में यह चुनाव अब केवल राजनीतिक नहीं, बल्कि प्रतीकों, पहचान और विचारधाराओं की टकराहट का रूप ले चुका है, जहां हर पक्ष अपनी पकड़ मजबूत करने के लिए पूरी ताकत झोंक रहा है।