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पेट्रोल-डीजल की कीमतों में आज भी कोई बदलाव नहीं…. 5 रुपये तक की बढ़ोतरी के आसार

नई दिल्ली। आज एक बार फिर से पेट्रोल और डीजल की कीमतों (Petrol Diesel Price) में ऑयल मार्केटिंग कंपनियों (Oil Marketing Companies) ने कोई बढ़ोतरी नहीं की है। 2022 से ही सरकारी तेल कंपनियों ने कीमतों को स्थिर रखा है। लेकिन मौजूदा परिस्थितियों की वजह से आने वाले दिनों में कीमतों में इजाफा हो सकता है। सरकार से जुड़े सूत्रों के अनुसार पेट्रोल और डीजल के रेट (Petrol Diesel Price) को 4 से 5 रुपये प्रति लीटर तक बढ़ाया जा सकता है। इस पर आने वाले कुछ दिनों में फैसला हो जाएगा। 1 अप्रैल को इंडियन ऑयल ने बढ़ाया था प्रीमियम पेट्रोल का रेटइंडियन ऑयल ने 1 अप्रैल को प्रीमियम पेट्रोल का रेट 11 रुपये प्रति लीटर तक बढ़ा दिया था। जिसके बाद प्रीमियम पेट्रोल का रेट 149 रुपये से बढ़कर 160 रुपये के स्तर पर पहुंच गया। वहीं, प्रीमियम डीजल का रेट 91.49 रुपये से बढ़कर 92.99 रुपये प्रति लीटर के स्तर पर पहुंच गया है।आपके शहर में पेट्रोल का क्या है रेट? (Petrol Price in Your City)नई दिल्ली – 94.72 रुपयेमुंबई – 104.21 रुपयेकोलकाता – 103.94 रुपयेचेन्नई – 100.75 रुपयेअहमदाबाद – 94.49 रुपयेबेंगलुरू – 102.92 रुपयेहैदराबाद – 107.46 रुपयेजयपुर – 104.72 रुपयेलखनऊ – 94.69 रुपयेपुणे – 104.04 रुपयेचंडीगढ़ – 94.30 रुपयेइंदौर – 106.48 रुपयेपटना – 105.58 रुपयेसूरत – 95 रुपयेनासिक – 95.50 रुपये डीजल का रेट (Diesel Price in Your city)नई दिल्ली – 87.62 रुपयेमुंबई – 92.15 रुपयेकोलकाता – 90.76 रुपयेचेन्नई – 92.34 रुपयेअहमदाबाद – 90.17 रुपयेबेंगलुरू – 95.70 रुपयेजयपुर – 90.21 रुपयेपुणे – 90.57 रुपयेचंडीगढ़ – 82.45 रुपयेइंदौर – 91.88 रुपयेपटना – 93.80 रुपयेसूरत – 89 रुपयेनासिक – 89.50 रुपये प्राइवेट कंपनियों ने किया है पेट्रोल और डीजल के रेट में इजाफा1 अप्रैल को ही शेल इंडिया ने पेट्रोल और डीजल की कीमतों में इजाफा किया था। तब कंपनी ने 7.41 रुपये प्रति लीटर पेट्रोल और 25.01 रुपये प्रति लीटर डीजल का इजाफा किया था। इससे पहले मार्च के महीने में नायरा एनर्जी ने पेट्रोल का रेट 5 रुपये और डीजल का रेट 3 रुपये प्रति लीटर बढ़ाया था। इन कंपनियों ने भी इसके बाद कीमतों में कोई बढ़ोतरी नहीं की थी। मौजूदा परिस्थितियों में कच्चे तेल का रेट सातवें आसमान पर है। यह लगातार 100 डॉलर प्रति बैरल के ऊपर ट्रेड कर रहा है। जिसकी वजह से कंपनियों को भारी नुकसान का सामना करना पड़ रहा है।

MP: जबलपुर के बरगी डैम क्रूज हादसे में बचे सबसे छोटे बच्चे का परिजनों ने सादगी से मनाया पहला जन्मदिन

जबलपुर। मध्यप्रदेश (Madhya Pradesh) में जबलपुर शहर (Jabalpur city) के बरगी बांध (Bargi Dam) में हुए क्रूज नाव हादसे के दो दिन बाद शनिवार शाम को दो शव मिलने के साथ मृतकों की संख्या बढ़कर 11 हो गई, जबकि दो बच्चों समेत 3 पर्यटक अब भी लापता बताए जा रहे हैं, जिनकी तलाश लगातार जारी है। इसी बीच इस हादसे से जुड़ी एक और भावुक कहानी (Emotional Story) सामने आई है। इस घटना में मौत को मात देकर बच जाने वाला सबसे छोटा बच्चा शनिवार को एक साल का हो गया। इस दौरान हादसे की वजह से बच्चे के परिजनों ने उसका पहला जन्मदिन धूमधाम से मनाने की बजाय बेहद सादगी से प्रार्थना करते हुए मनाया। दरअसल यह बच्चा उसी क्रूज बोट में सवार था, जो कि गुरुवार शाम को बरगी डैम में चली तेज हवाओं के बाद डूब गई थी। नाव पलटने के दौरान उसके पिता एडवोकेट रोशन आनन्द वर्मा ने साहस दिखाते हुए उसे बचा लिया था। बोट के डूबते ही रोशन वर्मा तुरंत पानी में कूद पड़े और उन्होंने करीब 30 मिनट तक बच्चे को पानी के ऊपर थामे रखा। यह घटना एक चमत्कार से कम नहीं मानी जा रही है। हादसे के बाद सेलिब्रेशन नहीं किया, प्रार्थनाओं में गुजरा दिनपरिजनों ने मीडिया को बताया कि हादसे से पहले बच्चे के जन्मदिन को लेकर परिवार से बहुत से जश्न की योजनाएं बना रखी थीं, लेकिन हादसे के बाद पूरा माहौल बदल गया। दूसरों के दुख में शामिल होते हुए परिवार ने इस दिन को शांत तरीके से मनाने का फैसला किया। जिसके चलते बच्चे के बर्थडे को बेहद सादगी से प्रार्थनाओं के बीच मनाया गया। इस दौरान बच्चे के परिवार ने उसे सकुशल बचाने के लिए भगवान का धन्यवाद किया। साथ ही हादसे में जान गंवाने वाले लोगों को श्रद्धांजलि भी दी। उनके लिए बच्चे के जन्मदिन का यह दिन खुशी से ज्यादा भावनाओं और यादों से भरा रहा। शनिवार को मिले दो बच्चों के शव, मृतक संख्या 11 हुईउधर बरगी डैम में हुए इस हादसे के करीब 48 घंटों बाद शनिवार शाम गोताखोरों ने 10वां एवं 11वां शव भी पानी से बाहर निकाला। ये दोनों ही शव बच्चों के हैं और इनकी पहचान कोतवाली क्षेत्र निवासी विराज सोनी (4 वर्ष) और वेस्टलेंड खमरिया निवासी श्रीतमिल पिता कामराज (उम्र- 5 वर्ष) के रूप में हुई है। हादसे में विराज की मां नीतू सोनी की भी एक दिन पहले मौत हो चुकी थी। मां-बेटे की मौत से पूरे क्षेत्र में शोक का माहौल है। मौसम बिगड़ने पर रोकना पड़ा रेस्क्यू अभियानप्राप्त जानकारी के अनुसार अन्य लापता लोगों की तलाश के लिए शनिवार सुबह से सेना, NDRF और SDRF की टीमें संयुक्त रूप से सर्च ऑपरेशन चला रही हैं। गोताखोर बोट के माध्यम से डैम के गहरे हिस्सों में तलाश कर रहे हैं, हालांकि दोपहर बाद अचानक मौसम खराब होने से रेस्क्यू अभियान प्रभावित हो गया। तेज आंधी और हवाओं के कारण डैम में एकबार फिर ऊंची लहरें उठने लगीं, जिससे सुरक्षा कारणों से कई बार सर्चिंग रोकना पड़ी। मौके पर पुलिस और प्रशासन की टीमें लगातार मौजूद हैं। एसडीओपी अंजुल अयंक मिश्रा ने बताया कि खराब मौसम के बावजूद लापता लोगों की तलाश पूरी गंभीरता से जारी है और सर्चिंग का दायरा लगातार बढ़ाया जा रहा है। बता दें कि गुरुवार शाम करीब 5 बजे एमपी टूरिज्म का पर्यटकों से भरा क्रूज बरगी डैम में अचानक पलटकर डूब गया था। क्रूज में करीब 47 पर्यटक सवार थे, जबकि टिकट केवल 29 लोगों की ही कटी थी। हादसा किनारे से लगभग 300 मीटर दूर हुआ था। उस समय तेज आंधी चल रही थी और हवा की रफ्तार करीब 74 किलोमीटर प्रति घंटा बताई गई है। हादसे के बाद से पूरे प्रदेश में शोक और आक्रोश का माहौल बना हुआ है।

इस साल भारत में चुनौतीपूर्ण रहेगा मानसून…. WMO की चेतावनी- औसत से कम होगी बारिश

नई दिल्ली। दक्षिण एशिया (South Asia), विशेषकर भारत (India) के लिए 2026 का मानसून (Monsoon) चुनौतीपूर्ण रहने के संकेत दे रहा है। विश्व मौसम विज्ञान संगठन (डब्ल्यूएमओ) (World Meteorological Organization -WMO). के अनुसार जून से सितंबर के बीच मानसूनी वर्षा (Monsoon Rain) औसत से कम रह सकती है, जबकि दिन और रात दोनों समय तापमान सामान्य से अधिक रहने का अनुमान है। भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी) ने भी 13 अप्रैल 2026 को जारी अपने पहले दीर्घावधि पूर्वानुमान में मानसून के सामान्य से कमजोर रहने की आशंका जताई है। ऐसे में कम बारिश और बढ़ती गर्मी का संयुक्त प्रभाव कृषि, जल संसाधनों और आम जीवन पर व्यापक दबाव डाल सकता है। मानसून की कमी का सबसे अधिक असर मध्य भारत के कृषि प्रधान क्षेत्रों में दिख सकता है, जहां वर्षा सामान्य से कम रहने की आशंका है। कई राज्यों में सामान्य से ज्यादा बारिश की संभावनाहालांकि उत्तर-पश्चिम, उत्तर-पूर्व और दक्षिण भारत के कुछ हिस्सों में सामान्य या सामान्य से अधिक बारिश संभव है, लेकिन पूरे क्षेत्र में वर्षा का वितरण असमान रहने की संभावना है। दक्षिण एशिया में कुल सालाना वर्षा का लगभग 75 से 90 प्रतिशत हिस्सा जून से सितंबर के बीच होता है। ऐसे में इस अवधि में कमी का सीधा असर खेती, जल उपलब्धता और ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर पड़ेगा। मानसून को लेकर अनिश्चितता ने किसानों की चिंता बढ़ा दी है। भारत, बांग्लादेश, नेपाल, भूटान और पाकिस्तान में बुवाई की तैयारी कर रहे किसानों के लिए शुरुआती संकेत अनुकूल नहीं हैं। सूखे की आशंका के साथ बाढ़ का भी जोखिमडब्ल्यूएमओ के अनुसार 2026 में मानसून का स्वरूप असंतुलित रह सकता है, जिसमें एक ओर लंबे सूखे दौर की संभावना है तो दूसरी ओर कम समय में अत्यधिक वर्षा की घटनाएं बढ़ सकती हैं। ऐसी स्थिति बाढ़ का खतरा भी बढ़ा सकती है। डब्ल्यूएमओ के अनुसार दक्षिण एशिया में अधिकतम और न्यूनतम दोनों तापमान सामान्य से ऊपर रहने की संभावना है। इसका अर्थ है कि दिन के साथ-साथ रात में भी गर्मी से राहत नहीं मिलेगी। लगातार उच्च तापमान लू की घटनाओं को बढ़ा सकता है, जिससे बुजुर्गों, बच्चों और कमजोर वर्गों के लिए स्वास्थ्य जोखिम बढ़ेंगे। इसके साथ ही कूलिंग की मांग बढ़ने से बिजली व्यवस्था पर भी अतिरिक्त दबाव पड़ सकता है। अल नीनो रहेगा प्रभावीडब्ल्यूएमओ के अनुसार 2026 के मानसून पर अल नीनो का प्रभाव पड़ सकता है। अल नीनो एक ऐसी जलवायु प्रक्रिया है जिसमें प्रशांत महासागर के पूर्वी हिस्से का पानी सामान्य से अधिक गर्म हो जाता है, जिससे वैश्विक स्तर पर हवाओं और मौसम के पैटर्न में बदलाव आता है। इसका प्रभाव भारतीय मानसून को कमजोर करने के रूप में देखा जाता है। वैज्ञानिकों के अनुसार फिलहाल स्प्रिंग प्रेडिक्टेबिलिटी बैरियर का प्रभाव भी बना हुआ है। यह मार्च से मई के बीच का वह दौर होता है जब समुद्र और वायुमंडल में तेजी से बदलाव होते हैं, जिससे लंबी अवधि के मौसम पूर्वानुमान पूरी तरह सटीक नहीं रह पाते।

सुपर टैंकर सर्वशक्ति ने US नाकेबंदी के बीच पार किया होर्मुज…45 हजार टन LPG लेकर आ रहा भारत

नई दिल्ली। देशभर में एलपीजी गैस सिलेंडर (LPG gas cylinder) की दिक्कत के बीच एक बड़ी राहत की खबर है। कम से कम 45 हजार टन एलपीजी लेकर भारत (India) का एक सुपर टैंकर ‘सर्वशक्ति’ (Super Tanker ‘Sarvashakti’) होर्मुज को पार कर गया है जो कि जल्द ही भारत पहुंच सकता है। आपको बता दें कि अमेरिका की नाकेबंदी और ईरान की सख्ती के बीच यह बड़ी सफलता है कि भारत से जुड़ा टैंकर इस रास्ते को पार करके आगे बढ़ गया है। जानकारी के मुताबिक कड़ी सुरक्षा के साथ यह टैंकर भारत के पोर्ट पर पहुंचेगा। इसका चालक दल भी भारतीय ही है। ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के मुताबिक यह कार्गो शिप भारतीय कंपनियों को गैस उपलब्ध करवाने वाला है। हालांकि इस मामले में IOC ने कोई जवाब नहीं दिया है। इससे पहले देश गरिमा नाम का टैंकर तेल लेकर मुंबई पोर्ट पर पहुंचा था। बता दें कि इस्लामाबाद में वार्ता फेल होने के बाद अमेरिका ने होर्मुज के आसपास नाकेबंदी कर दी थी। इसके बाद सैकड़ों जहाज होर्मुज के आसपास ही रुके हुए हैं। अमेरिका ने कंपनियों को चेतायाईरान से तनाव के बीच अमेरिका ने जहाजरानी कंपनियों से कहा है कि वे अगर होर्मुज से गुजरने के लिए ईरान को किसी तरह का शुल्क देंगी तो उन्हे प्रतिबंधों का सामना करना पड़ जाएगा। होर्मुज जलडमरूमध्य पर नियंत्रण को लेकर अमेरिका और ईरान के मध्य जारी टकराव के बीच अमेरिकी विदेशी संपत्ति नियंत्रण कार्यालय (ओएफएसी) द्वारा शुक्रवार को दी गई चेतावनी ने दबाव और बढ़ा दिया है। आम तौर पर शांति के समय दुनिया के तेल और प्राकृतिक गैस के व्यापार का लगभग पांचवां हिस्सा होर्मुज जलडमरूमध्य से होकर गुजरता है। ईरान ने बना दिया टोलबूथईरान ने 28 फरवरी को अमेरिका और इजराइल द्वारा युद्ध शुरू किए जाने के बाद जहाजों पर हमले की धमकियां देकर और हमले करते हुए जलडमरूमध्य को सामान्य आवाजाही के लिए लगभग बंद कर दिया। बाद में, उसने कुछ जहाजों को अपनी तटरेखा के करीब वैकल्पिक मार्गों से मोड़कर सुरक्षित मार्ग प्रदान करना शुरू किया, और कई बार इस सेवा के लिए शुल्क भी वसूला। अमेरिका की प्रतिबंध चेतावनी का मुख्य केंद्र संबंधित टोलबूथ जैसी व्यवस्था है। ओएएफसी के अनुसार, भुगतान की मांगों में केवल नकद ही नहीं, बल्कि ‘डिजिटल परिसंपत्तियां, समायोजन, अनौपचारिक अदला-बदली, या अन्य प्रकार के वस्तु-आधारित भुगतान’ भी शामिल हो सकते हैं, जिनमें परमार्थ दान और ईरानी दूतावासों में किए जाने वाले भुगतान भी शामिल हैं। अमेरिका ने 13 अप्रैल को ईरान द्वारा जलडमरूमध्य बंद किए जाने के जवाब में अपनी ओर से एक नौसैनिक नाकाबंदी लागू की, जिससे किसी भी ईरानी तेल टैंकर को बाहर जाने से रोका गया और ईरान को उसकी कमजोर अर्थव्यवस्था को संभालने के लिए आवश्यक तेल राजस्व से वंचित कर दिया गया। अमेरिकी मध्य कमान ने कहा कि नाकाबंदी शुरू होने के बाद से 45 वाणिज्यिक जहाजों को वापस जाने को कहा गया है।

प्राकृतिक चमक के लिए हेयर केयर टिप्स: गर्मी में बालों की सही सफाई और देखभाल

नई दिल्ली। गर्मियों में तेज धूप, बढ़ता तापमान और लगातार पसीना सिर की त्वचा (स्कैल्प) पर सीधा असर डालते हैं। धूल और प्रदूषण मिलकर बालों को चिपचिपा बना देते हैं। कई लोगों को इस मौसम में डैंड्रफ, खुजली और हेयर फॉल जैसी समस्याएं भी बढ़ जाती हैं। ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यही होता है कि बाल कितनी बार धोने चाहिए ताकि वे साफ भी रहें और नुकसान भी न हो। हफ्ते में कितनी बार करें बालों की सफाई?विशेषज्ञों के अनुसार बाल धोने की कोई एक तय संख्या नहीं होती, यह पूरी तरह आपके बालों के टाइप पर निर्भर करता है। ऑयली बाल (तैलीय):ऐसे बालों में सीबम ज्यादा बनता है, इसलिए हफ्ते में लगभग 2 से 3 बार शैम्पू करना सही माना जाता है। सूखे बाल (ड्राई):इनमें नमी जल्दी खत्म हो जाती है, इसलिए हफ्ते में 1 से 2 बार बाल धोना पर्याप्त होता है। घुंघराले बाल (कर्ली हेयर):इनमें प्राकृतिक तेल पूरे बालों में फैलने में समय लगता है, इसलिए इन्हें कम धोना बेहतर होता है। हर दिन शैम्पू करना सही है या नहीं?कई लोग गर्मी में रोज बाल धोते हैं, लेकिन यह आदत हर किसी के लिए सही नहीं होती। रोज शैम्पू करने से स्कैल्प का प्राकृतिक तेल कम हो सकता है, जिससे बाल रूखे, कमजोर और बेजान हो सकते हैं। इसलिए जरूरत के अनुसार ही बाल धोना बेहतर है। बाल धोने का सही तरीका क्या है?सिर्फ बाल धोना ही काफी नहीं, सही तरीका अपनाना भी जरूरी है: बहुत गर्म पानी से बाल न धोएं, यह बालों की नमी छीन लेता हैहल्का गुनगुना पानी सबसे बेहतर होता हैशैम्पू सीधे बालों पर न लगाकर पहले हाथ में झाग बनाएंस्कैल्प की धीरे-धीरे मसाज करें, जोर से रगड़ने से बचेंबालों को अच्छे से धोकर शैम्पू पूरी तरह निकालेंकंडीशनर और अतिरिक्त देखभाल क्यों जरूरी है? शैम्पू के बाद कंडीशनर लगाने से बाल मुलायम रहते हैं और टूटने से बचते हैं। यह बालों की बाहरी परत को स्मूद बनाता है, जिससे बालों में प्राकृतिक चमक आती है। इसके अलावा गर्मियों में बालों को धूप और धूल से बचाने के लिए स्कार्फ या कैप का इस्तेमाल भी फायदेमंद होता है। गर्मियों में बालों की देखभाल संतुलन पर निर्भर करती है ना बहुत ज्यादा धोना और ना बहुत कम। सही शैम्पू रूटीन और हल्की देखभाल से बाल स्वस्थ, मजबूत और प्राकृतिक रूप से चमकदार बने रह सकते हैं।

महंगे ब्यूटी प्रोडक्ट्स को कहें अलविदा! घर का गुलाब जल देगा नेचुरल ग्लो और फ्रेशनेस

नई दिल्ली। आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में प्रदूषण, तनाव और गलत खानपान का सीधा असर हमारी त्वचा पर दिखाई देने लगा है। चेहरे पर दाग-धब्बे, मुंहासे और डलनेस जैसी समस्याएं आम हो चुकी हैं। ऐसे में लोग महंगे ब्यूटी प्रोडक्ट्स का सहारा लेते हैं, लेकिन कई बार उनसे भी मनचाहा रिजल्ट नहीं मिलता। इसी बीच एक बेहद आसान, प्राकृतिक और असरदार उपाय सामने आता है गुलाब जल। गुलाब जल को सदियों से स्किन केयर का सबसे सुरक्षित और प्रभावी उपाय माना जाता है। यह न सिर्फ त्वचा को ठंडक देता है, बल्कि उसे गहराई से साफ करके नैचुरल ग्लो भी प्रदान करता है। सबसे खास बात यह है कि इसे घर पर बहुत ही आसानी से बनाया जा सकता है। घर पर गुलाब जल बनाने के लिए ताजे गुलाब के फूलों की पंखुड़ियों को अच्छे से धोकर एक बर्तन में पानी के साथ धीमी आंच पर उबाला जाता है। जब पंखुड़ियों का रंग हल्का पड़ने लगे और पानी में गुलाब की खुशबू आ जाए, तो इसे ठंडा करके छान लिया जाता है। यही शुद्ध गुलाब जल होता है जिसे एक साफ बोतल में स्टोर किया जा सकता है। इस प्राकृतिक टोनर का रोजाना उपयोग करने से त्वचा की गहराई से सफाई होती है। यह खुले पोर्स को टाइट करने में मदद करता है और चेहरे की अतिरिक्त ऑयलिंग को नियंत्रित करता है। साथ ही, यह दाग-धब्बों को हल्का करने में भी कारगर साबित होता है। जिन लोगों की त्वचा संवेदनशील होती है, उनके लिए गुलाब जल किसी वरदान से कम नहीं है क्योंकि यह बिना किसी साइड इफेक्ट के काम करता है। गुलाब जल को कॉटन की मदद से चेहरे पर लगाया जा सकता है या फिर फेस पैक में मिलाकर भी इस्तेमाल किया जा सकता है। इसे नियमित रूप से उपयोग करने पर त्वचा में एक अलग ही निखार आने लगता है, जिसे देखकर लोग अक्सर इसका राज पूछते हैं। ब्यूटी एक्सपर्ट्स भी मानते हैं कि नेचुरल स्किन केयर प्रोडक्ट्स में गुलाब जल सबसे भरोसेमंद विकल्प है। यह न सिर्फ त्वचा को सुंदर बनाता है, बल्कि उसे लंबे समय तक स्वस्थ भी रखता है। अगर आप भी चेहरे के दाग-धब्बों और डल स्किन से परेशान हैं, तो महंगे प्रोडक्ट्स छोड़कर इस देसी नुस्खे को अपनाकर देख सकते हैं। कुछ ही दिनों में फर्क साफ नजर आने लगेगा और चेहरा पहले से ज्यादा फ्रेश और ग्लोइंग दिखेगा।

पोषण का खजाना काला नमक चावल: जिंक, प्रोटीन और फाइबर से भरपूर, सेहत को देता है कई फायदे

नई दिल्ली। आज के समय में बदलती जीवनशैली और बढ़ती स्वास्थ्य जागरूकता के बीच लोग अपने खानपान में ऐसे विकल्प तलाश रहे हैं, जो स्वाद के साथ-साथ सेहत का भी पूरा ध्यान रखें। इसी दिशा में काला नमक चावल तेजी से लोकप्रिय हो रहा है, जिसे पोषण से भरपूर और स्वास्थ्य के लिए लाभकारी माना जाता है। यह चावल न केवल अपनी विशेष सुगंध के लिए जाना जाता है, बल्कि इसमें मौजूद पोषक तत्व इसे सामान्य सफेद चावल से कहीं बेहतर विकल्प बनाते हैं। काला नमक चावल को कई जगहों पर विशेष नामों से भी जाना जाता है और इसकी पहचान एक पारंपरिक और पौष्टिक खाद्य पदार्थ के रूप में रही है। इसकी प्राकृतिक खुशबू और स्वाद इसे खाने में अलग अनुभव देते हैं। इसे दाल, सब्जी या सलाद के साथ आसानी से शामिल किया जा सकता है, जबकि इसकी खिचड़ी भी स्वास्थ्य के लिए फायदेमंद मानी जाती है। पोषण की दृष्टि से देखें तो काला नमक चावल में आयरन, जिंक, प्रोटीन और फाइबर जैसे महत्वपूर्ण तत्व प्रचुर मात्रा में पाए जाते हैं। यही कारण है कि इसे संतुलित आहार का एक अहम हिस्सा माना जा रहा है। खासतौर पर डायबिटीज से पीड़ित लोगों के लिए यह चावल एक अच्छा विकल्प माना जाता है, क्योंकि इसका ग्लाइसेमिक इंडेक्स कम होता है। इससे ब्लड शुगर लेवल अचानक नहीं बढ़ता और शरीर में संतुलन बना रहता है। वजन प्रबंधन के लिहाज से भी यह चावल उपयोगी साबित होता है। इसमें मौजूद फाइबर लंबे समय तक पेट भरा रखने में मदद करता है, जिससे बार-बार भूख लगने की समस्या कम होती है। जो लोग वजन कम करने की कोशिश कर रहे हैं, उनके लिए यह आहार का एक बेहतर विकल्प हो सकता है। इसके अलावा, काला नमक चावल पाचन तंत्र को मजबूत बनाने में भी सहायक है। नियमित सेवन से कब्ज जैसी समस्याओं में राहत मिलती है और पाचन प्रक्रिया बेहतर होती है। यह गुण इसे रोजमर्रा के भोजन में शामिल करने के लिए उपयुक्त बनाता है। हृदय स्वास्थ्य के लिए भी यह चावल लाभकारी माना जाता है। इसमें मौजूद आयरन और जिंक शरीर में खून की कमी को दूर करने में मदद करते हैं और रक्त संचार को बेहतर बनाते हैं। इससे हृदय संबंधी समस्याओं का जोखिम कम हो सकता है। बच्चों और महिलाओं के लिए भी काला नमक चावल काफी फायदेमंद है। आयरन की मौजूदगी एनीमिया जैसी समस्याओं से बचाव में मदद करती है, जबकि जिंक शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता को मजबूत बनाता है। साथ ही, प्रोटीन शरीर की मांसपेशियों के विकास में सहायक होता है।

डायबिटीज के मरीजों के लिए सुरक्षा कवच बन सकती है रसोई की हल्दी..

नई दिल्ली। भारतीय रसोई का अभिन्न हिस्सा मानी जाने वाली हल्दी अब केवल स्वाद और रंग तक सीमित नहीं रह गई है, बल्कि आधुनिक विज्ञान भी इसकी औषधीय क्षमताओं को लेकर उत्साहित नजर आ रहा है। हाल ही में सामने आए एक वैज्ञानिक अध्ययन ने हल्दी के मुख्य सक्रिय तत्व, करक्यूमिन को लेकर नई संभावनाओं के द्वार खोल दिए हैं। विशेष रूप से उन लोगों के लिए जो टाइप 1 डायबिटीज जैसी गंभीर स्थिति से जूझ रहे हैं, यह शोध एक आशा की किरण बनकर उभरा है। करक्यूमिन, जो हल्दी को उसका विशिष्ट पीला रंग प्रदान करता है, अपनी सूजनरोधी और एंटीऑक्सीडेंट गुणों के लिए पहले से ही प्रसिद्ध रहा है, लेकिन अब इसके हृदय संबंधी लाभों ने शोधकर्ताओं का ध्यान अपनी ओर खींचा है। डायबिटीज की स्थिति में शरीर के भीतर बढ़ी हुई शुगर का स्तर धीरे-धीरे रक्त वाहिकाओं और धमनियों को नुकसान पहुँचाने लगता है, जिससे मरीजों में दिल की बीमारियों का जोखिम सामान्य लोगों की तुलना में कहीं अधिक बढ़ जाता है। टाइप 1 डायबिटीज के मरीजों में इंसुलिन लेने के बावजूद कई बार नसों की मजबूती और लचीलापन कम होने लगता है। इसी समस्या का समाधान खोजने के लिए वैज्ञानिकों ने एक विशेष अध्ययन किया, जिसके प्रारंभिक नतीजे बेहद सकारात्मक रहे हैं। इस शोध के दौरान यह देखा गया कि करक्यूमिन का नियमित और नियंत्रित सेवन रक्त वाहिकाओं के स्वास्थ्य में सुधार कर सकता है और उन्हें डायबिटीज के दुष्प्रभावों से बचा सकता है। प्रयोगशाला में किए गए इस अध्ययन के दौरान शोधकर्ताओं ने ‘हीट शॉक प्रोटीन 70’ नामक एक विशेष प्रोटीन की भूमिका का भी विश्लेषण किया। यह प्रोटीन कोशिकाओं को बाहरी तनाव और नुकसान से बचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। अध्ययन में पाया गया कि करक्यूमिन के प्रभाव से इस प्रोटीन का संतुलन बेहतर होता है, जिससे शरीर की कोशिकाएं तनाव को झेलने में अधिक सक्षम हो जाती हैं। इसके साथ ही, दिल से शरीर के अन्य अंगों तक शुद्ध खून ले जाने वाली मुख्य धमनी, जिसे महाधमनी कहा जाता है, उसकी स्थिति में भी करक्यूमिन के सेवन के बाद सुधार दर्ज किया गया। यह संकेत देता है कि हल्दी का यह तत्व न केवल नसों को सुरक्षा देता है बल्कि हृदय प्रणाली की कार्यक्षमता को भी बनाए रखने में सहायक हो सकता है। हालांकि, इन नतीजों के बावजूद विशेषज्ञों ने सावधानी बरतने की सलाह दी है। यह महत्वपूर्ण है कि वर्तमान शोध अभी शुरुआती चरणों में है और इसके अधिकांश प्रयोग जानवरों पर किए गए हैं। मानव शरीर पर इसके सटीक प्रभाव और आवश्यक मात्रा को निर्धारित करने के लिए अभी और बड़े स्तर पर नैदानिक परीक्षणों की आवश्यकता है। केवल भोजन में हल्दी की मात्रा बढ़ा देने या बाजार में मिलने वाले सप्लीमेंट का उपयोग करने से समान लाभ मिलेगा, यह कहना अभी जल्दबाजी होगी। भविष्य में होने वाले शोध ही यह तय करेंगे कि करक्यूमिन को डायबिटीज के उपचार में एक सहयोगी विकल्प के रूप में कैसे शामिल किया जा सकता है। फिलहाल, विशेषज्ञों का मानना है कि एक अनुशासित जीवनशैली और डॉक्टर की सलाह के साथ संतुलित खानपान ही स्वास्थ्य की सबसे बड़ी कुंजी है।

आज का राशिफल 3 मई 2026: किस्मत का खेल बदलेगा आज, जानें मेष से मीन तक किसका दिन चमकेगा

नई दिल्ली। 3 मई 2026 का दिन ग्रह-नक्षत्रों की चाल के हिसाब से कई राशियों के लिए बदलाव और अवसर लेकर आया है। रविवार का दिन सूर्य देव को समर्पित होता है और मान्यता है कि आज उनकी पूजा करने से मान-सम्मान और सफलता में वृद्धि होती है। ऐसे में आज का राशिफल कई लोगों के लिए नई उम्मीदें और कुछ के लिए सावधानी का संकेत दे रहा है। मेष राशि के जातकों के लिए आज का दिन सकारात्मक संकेत लेकर आया है। लंबे समय से अटके काम पूरे हो सकते हैं और परिवार का सहयोग भी मिलेगा। ऑफिस में दबाव जरूर रहेगा, लेकिन आप अपनी समझदारी से सब संभाल लेंगे। वहीं वृषभ राशि वालों को थोड़ा सुस्त महसूस हो सकता है। काम में मन कम लगेगा और छोटे-छोटे खर्च परेशान कर सकते हैं, इसलिए बजट पर ध्यान देना जरूरी है। मिथुन राशि के लिए आज संवाद ही सफलता की कुंजी बनेगा। कोई कॉल या मैसेज बड़ा फायदा दे सकता है, लेकिन जल्दबाजी में निर्णय लेने से बचना होगा। कर्क राशि वालों के लिए घर-परिवार की जिम्मेदारियां बढ़ सकती हैं और भावनाओं पर नियंत्रण रखना जरूरी रहेगा। सिंह राशि के जातक आज ऊर्जा से भरपूर रहेंगे। नए काम की शुरुआत के लिए दिन अनुकूल है, लेकिन दिखावे में खर्च करने से बचना चाहिए। वहीं कन्या राशि के लिए दिन स्थिर और सकारात्मक रहेगा। ऑफिस में आपकी बात सुनी जाएगी और सीनियर्स का सपोर्ट मिलेगा। तुला राशि के लिए आर्थिक मामलों में राहत मिलने के संकेत हैं। रुका हुआ पैसा मिल सकता है, हालांकि सेहत पर ध्यान देना जरूरी रहेगा। वृश्चिक राशि वालों के लिए भाग्य का साथ मिलेगा और अटके काम आगे बढ़ेंगे। यात्रा के भी योग बन सकते हैं। धनु राशि के जातकों के लिए दिन संतुलित रहेगा। लोग आपकी बातों को महत्व देंगे और पुराने विवाद सुलझ सकते हैं। वहीं मकर राशि वालों को मानसिक उलझन का सामना करना पड़ सकता है। खर्च बढ़ने के संकेत हैं, इसलिए फोकस बनाए रखना जरूरी होगा। कुंभ राशि के लिए आज का दिन लाभदायक साबित हो सकता है। आर्थिक अवसर मिलेंगे और दोस्तों का सहयोग भी मिलेगा। छोटी यात्रा के योग भी बन सकते हैं। वहीं मीन राशि के जातकों को आज थोड़ा सतर्क रहने की जरूरत है। जल्दबाजी में लिए गए फैसले नुकसान दे सकते हैं, इसलिए धैर्य और सावधानी बनाए रखें। कुल मिलाकर, 3 मई का दिन कई राशियों के लिए अवसरों से भरा है, लेकिन सही निर्णय और संयम ही सफलता की कुंजी साबित होगा।

आग से जंग लड़ने वाले नायक: अंतरराष्ट्रीय अग्निशमन दिवस पर विशेष

-विशेष लेखजब कहीं आग लगती है, अफरा-तफरी मच जाती है, लोग अपनी जान बचाने के लिए इधर-उधर भागते हैंऐसे वक्त में कुछ लोग होते हैं, जो भागते नहीं… आग की ओर बढ़ते हैं।ये हैं हमारे अग्निशमन कर्मी वे नायक, जो अपनी जान की परवाह किए बिना दूसरों की जिंदगी बचाने के लिए हर पल तैयार रहते हैं।इन्हीं साहसी योद्धाओं को सम्मान देने के लिए हर साल 4 मई को अंतरराष्ट्रीय अग्निशमन दिवस मनाया जाता है। सिर्फ नौकरी नहीं, एक मिशनअग्निशमन सेवा को केवल एक नौकरी कहना उनके साहस के साथ न्याय नहीं होगा। यह एक ऐसा मिशन है, जिसमें हर दिन जोखिम है, हर कॉल अनिश्चितता से भरी होती है और हर कदम पर जीवन-मृत्यु का सामना करना पड़ता है।जब किसी इमारत में आग लगती है, गैस सिलेंडर फटने का खतरा होता है या कोई हादसा होता है, तब अग्निशमन कर्मी बिना देर किए मौके पर पहुंचते हैं।धुएं, लपटों और गिरती दीवारों के बीच वे न केवल आग पर काबू पाते हैं, बल्कि फंसे लोगों को सुरक्षित बाहर निकालते हैं। हर पल खतरे के साये मेंअग्निशमन कर्मियों का काम जितना बहादुरी भरा है, उतना ही खतरनाक भी।जहरीला धुआंअचानक होने वाले विस्फोटकमजोर हो चुकी इमारतेंऔर सीमित संसाधनइन सबके बीच वे बिना रुके अपना कर्तव्य निभाते हैं।कई बार तो हालात इतने गंभीर होते हैं कि उन्हें अपनी जान भी गंवानी पड़ती है।फिर भी, हर अग्निशमन कर्मी अगली कॉल के लिए उतनी ही तत्परता से तैयार रहता है। क्यों मनाया जाता है यह दिन?अंतरराष्ट्रीय अग्निशमन दिवस केवल एक औपचारिकता नहीं, बल्कि उन वीरों के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करने का अवसर है, जो हर दिन दूसरों के लिए जोखिम उठाते हैं।यह दिन हमें याद दिलाता है कि, आपात स्थिति में हमारी सुरक्षा के पीछे कौन खड़ा हैऔर हमें उनकी भूमिका को कितना सम्मान देना चाहिए बदलते शहर, बढ़ती चुनौतियाँआज के समय में तेजी से बढ़ते शहरीकरण, ऊंची इमारतों और औद्योगिक विकास ने आग से जुड़ी घटनाओं को और जटिल बना दिया हैहाई-राइज बिल्डिंग्स में आगफैक्ट्रियों में रासायनिक हादसेशॉर्ट सर्किट से लगने वाली आगइन सबने अग्निशमन सेवाओं के सामने नई चुनौतियाँ खड़ी कर दी हैं।ऐसे में आधुनिक तकनीक, बेहतर प्रशिक्षण और पर्याप्त संसाधनों की आवश्यकता पहले से कहीं अधिक बढ़ गई है। सिर्फ अग्निशमन कर्मी ही क्यों? हमारी भी जिम्मेदारीअक्सर हम यह भूल जाते हैं कि आग की कई घटनाएं हमारी छोटी-छोटी लापरवाहियों के कारण होती हैं।बिजली के उपकरणों का गलत इस्तेमालगैस सिलेंडर की अनदेखीसुरक्षा मानकों की अनदेखीअगर हम थोड़ी सावधानी बरतें, तो कई हादसों को रोका जा सकता है। अनदेखे नायक, अनमोल योगदानअग्निशमन कर्मियों का योगदान अक्सर सुर्खियों में नहीं आता, लेकिन जब भी संकट आता है, वही सबसे पहले सामने होते हैं।वे न केवल आग बुझाते हैं, बल्कि उम्मीद भी जगाते हैंयह भरोसा दिलाते हैं कि मुश्किल वक्त में कोई है, जो आपकी मदद के लिए अपनी जान तक दांव पर लगा सकता है।अंतरराष्ट्रीय अग्निशमन दिवस हमें यह सोचने पर मजबूर करता है कि क्या हम इन नायकों को वह सम्मान और सुविधाएं दे पा रहे हैं, जिसके वे हकदार हैं?आज जरूरत हैबेहतर उपकरणों कीमजबूत सुरक्षा व्यवस्थाओं कीऔर समाज के सहयोग की क्योंकि जब अग्निशमन कर्मी सुरक्षित होंगे, तभी वे हमें सुरक्षित रख पाएंगे।अग्निशमन कर्मी वे असली नायक हैं जो दूसरों की जान बचाने के लिए हर पल खतरे का सामना करते हैं।अंतरराष्ट्रीय अग्निशमन दिवस हमें उनके साहस को सलाम करने और उनकी सुरक्षा व संसाधनों पर ध्यान देने की याद दिलाता है।