WEST BENGAL ELECTION: भवानीपुर में काउंटिंग पर हंगामा, ममता और अधिकारी आमने-सामने

HIGHLIGHTS: भवानीपुर में काउंटिंग के दौरान बड़ा विवाद ममता बनर्जी और सुवेंदु अधिकारी पहुंचे सेंटर डेढ़ घंटे तक रुकी रही मतगणना मोबाइल फोन एंट्री से बढ़ा मामला TMC ने लगाए गड़बड़ी के आरोप WEST BENGAL ELECTION: कोलकाता। पश्चिम बंगाल के भवानीपुर विधानसभा क्षेत्र में मतगणना के दौरान बड़ा विवाद खड़ा हो गया। 12वें राउंड के बाद अचानक परिणाम अपडेट न होने से सियासी हलचल तेज हो गई। इसी बीच मुख्यमंत्रीममता बनर्जी खुद काउंटिंग सेंटर सखावत मेमोरियल स्कूल पहुंच गईं और स्थिति का जायजा लिया। इस घटनाक्रम ने चुनावी माहौल को और गर्मा दिया। नारद जयंती पर ‘सांस्कृतिक पुनर्जागरण और मीडिया’ का संदेश, डॉ. मयंक चतुर्वेदी ने रखा राष्ट्रीय दृष्टिकोण काउंटिंग सेंटर पर आमने-सामने विवाद बढ़ते ही भाजपा नेता सुवेंदु अधिकारी भी काउंटिंग सेंटर पहुंच गए। दोनों बड़े नेताओं की मौजूदगी से माहौल और तनावपूर्ण हो गया। इस दौरान दोनों पक्षों के समर्थकों में भी हलचल देखने को मिली, जिससे स्थिति संवेदनशील बनी रही। GWALIOR CM MOHAN YADAV: ग्वालियर एयरपोर्ट पर CM यादव बोले- बंगाल में राष्ट्रवाद और लोकतंत्र की जित हुई डेढ़ घंटे तक रुकी रही गिनती मतगणना प्रक्रिया करीब डेढ़ घंटे तक रुकी रही, जिससे कई सवाल खड़े हो गए। चुनाव आयोग की वेबसाइट के अनुसार अब तक 13 राउंड की गिनती पूरी हो चुकी है और ममता बनर्जी करीब 5349 वोटों से आगे चल रही हैं। गिनती रुकने को लेकर विपक्ष और सत्तापक्ष दोनों ने एक-दूसरे पर आरोप लगाए। खंडवा में बीजेपी कार्यकर्ताओं का जोरदार जश्न, पीएम मोदी की तस्वीरों के साथ बांटी गई झालमुड़ी, गूंजा शहर मोबाइल एंट्री से बढ़ा विवाद चुनाव आयोग के एक अधिकारी के मुताबिक गिनती में रुकावट उस समय आई, जब एक व्यक्ति मोबाइल फोन लेकर काउंटिंग सेंटर में प्रवेश कर गया। नियमों के उल्लंघन के कारण प्रक्रिया को अस्थायी रूप से रोका गया और डिवाइस जब्त करने के बाद गिनती फिर से शुरू की गई। डिजिटल ठगी का नया जाल! बुजुर्ग सबसे ज्यादा निशाने पर, ये 5 उपाय बचाएंगे आपकी मेहनत की कमाई TMC के आरोपों से गरमाई सियासत TMC उम्मीदवार गौतम देब ने चुनाव आयोग पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि काउंटिंग में गड़बड़ी की कोशिश की गई। उन्होंने दावा किया कि कुछ पोस्टल बैलेट बॉक्स बिना सील और कवर के मिले। इस पूरे घटनाक्रम के बाद भवानीपुर सीट राज्य की सबसे चर्चित सीट बन गई है।
नारद जयंती पर ‘सांस्कृतिक पुनर्जागरण और मीडिया’ का संदेश, डॉ. मयंक चतुर्वेदी ने रखा राष्ट्रीय दृष्टिकोण

करैरा । मध्य प्रदेश में शिवपुरी जिले के करैरा स्थित श्री रामराजा गार्डन में नारद जयंती के अवसर पर आयोजित भव्य समारोह में राष्ट्रीय स्तर की वैचारिक दिशा देखने को मिली। युगल किशोर शर्मा (जिला ब्यूरो प्रमुख हिन्दुस्थान समाचार न्यूज एजेंसी)के संयोजन में हुए इस आयोजन में मुख्य अतिथि के रूप में भोपाल से पधारे प्रसिद्ध लेखक व विचारक डॉ. मयंक चतुर्वेदी (क्षेत्रीय संपादक हिन्दुस्थान समाचार न्यूज़ एजेंसी) ने अपने संबोधन से कार्यक्रम को राष्ट्रीय परिप्रेक्ष्य प्रदान किया। कार्यक्रम का शुभारंभ नारद जी की प्रतिमा के समक्ष दीप प्रज्ज्वलन के साथ हुआ। मंच पर विशिष्ट अतिथि ब्रह्मेन्द्र गुप्ता (उपयुक्त विकास), विकाश खण्ड शिक्षा अधिकारी मुकेश शर्मा, धैर्यवर्धन शर्मा (प्रवक्ता, भाजपा मध्यप्रदेश) सहित अन्य गणमान्य मौजूद रहे, अध्यक्षता समाजसेवी सुरेश बंधु ने की। सांस्कृतिक पुनर्जागरण पर राष्ट्रीय दृष्टिअपने उद्बोधन में डॉ. मयंक चतुर्वेदी ने ‘सांस्कृतिक पुनर्जागरण और मीडिया’ विषय पर विस्तार से विचार रखते हुए कहा कि भारत की संस्कृति केवल परंपरा नहीं, बल्कि ज्ञान और विज्ञान का जीवंत स्रोत है। उन्होंने जोर देकर कहा कि भारत कभी निष्क्रिय नहीं रहा, बल्कि उसने सदैव विश्व कल्याण की दिशा में मार्गदर्शन किया है। उन्होंने आदि शंकराचार्य का उदाहरण देते हुए कहा कि अल्पायु में ही उन्होंने भारत को वैचारिक रूप से एकजुट कर चार धामों की स्थापना कर सांस्कृतिक पुनर्जागरण का मार्ग प्रशस्त किया। डॉ. चतुर्वेदी ने यह भी रेखांकित किया कि भारत ने सदियों तक बाहरी आक्रमणों का सामना करते हुए अपनी सांस्कृतिक चेतना को जीवित रखा, जो आज भी समाज की मूल शक्ति है। विशिष्ट अतिथि ब्रह्मेन्द्र गुप्ता ने देवर्षि नारद को समाज जागरण का प्रतीक बताते हुए कहा कि संवाद और सूचना का सही उपयोग समाज को दिशा देता है। मीडिया की भूमिका को रेखांकित करते हुए कहा कि वर्तमान समय में समाज की अपेक्षाएँ पत्रकारिता और न्याय व्यवस्था से जुड़ी हैं। मीडिया ही वह सेतु है जो समाज की समस्याओं और वास्तविकताओं को शासन तक पहुँचाता है, इसलिए उसकी जिम्मेदारी और भी बढ़ जाती है। वहीं धैर्यवर्धन शर्मा ने चाणक्य और चन्द्रगुप्त मौर्य के उदाहरणों के माध्यम से राष्ट्र निर्माण में विचार और नेतृत्व की भूमिका को समझाया। इस अवसर पर समाज में उत्कृष्ट कार्य करने वाले समाजसेवियों और संस्थाओं को सम्मानित किया गया,जिसमें मुख्य रूप से गौ सेवा,शिक्षा और साहित्य, खेल, रोजगार और समाज सेवा के क्षेत्र में सेवा प्रदान करने वाले लोगों का सम्मान किया गया। जिसे डॉ. चतुर्वेदी ने एक अनुकरणीय पहल बताया। उन्होंने कहा कि ऐसे आयोजन समाज में सकारात्मक ऊर्जा का संचार करते हैं और नई पीढ़ी को प्रेरित करते हैं। कार्यक्रम का संचालन प्रसिद्ध कवि प्रमोद भारती ने किया, जबकि अंत में सुनील भार्गव ने वंदेमातरम गीत के साथ समारोह का समापन कराया।
बंगाल में सत्ता बदलने की आहट! BJP 186 सीटों पर आगे, भवानीपुर में ममता vs सुवेंदु की सीधी टक्कर

नई दिल्ली। पश्चिम बंगाल की सियासत में बड़ा उलटफेर होता दिख रहा है। 293 सीटों पर जारी मतगणना के रुझानों में Bharatiya Janata Party (BJP) ने स्पष्ट बढ़त बना ली है और सत्ता परिवर्तन की तस्वीर साफ नजर आने लगी है। ताजा आंकड़ों के मुताबिक BJP 186 सीटों पर आगे चल रही है और अब तक 14 सीटों पर जीत दर्ज कर चुकी है, जबकि All India Trinamool Congress (TMC) 82 सीटों पर आगे है और 5 सीटें जीत चुकी है। बहुमत का आंकड़ा 148 है, जिसे BJP रुझानों में पार करती दिख रही है। सबसे ज्यादा नजरें भवानीपुर सीट पर टिकी हैं, जहां Mamata Banerjee और Suvendu Adhikari के बीच सीधी टक्कर देखने को मिल रही है। यहां ममता बनर्जी करीब 7 हजार वोटों से आगे चल रही हैं। दोनों नेता काउंटिंग सेंटर पहुंच चुके हैं, जहां भारी सुरक्षा बल तैनात है और ड्रोन से निगरानी की जा रही है। मतगणना के दौरान कुछ जगहों से तनाव की खबरें भी सामने आई हैं। Cooch Behar में TMC नेता के साथ कथित मारपीट का मामला सामने आया है, जबकि Kolkata में पार्टी के अस्थायी कार्यालय में तोड़फोड़ की खबर है। भवानीपुर के सखावत स्कूल मेमोरियल काउंटिंग सेंटर में करीब 45 मिनट तक गिनती रुकी रही, हालांकि बाद में प्रक्रिया फिर शुरू कर दी गई। सुरक्षा के चलते उम्मीदवारों को मोबाइल फोन बाहर जमा कराकर अंदर जाने दिया गया। इस बीच पानीहाटी सीट से चर्चित आरजीकर केस से जुड़ी पीड़िता की मां रत्ना देबनाथ करीब 20 हजार वोटों से आगे चल रही हैं, जो चुनाव का एक बड़ा मानवीय और भावनात्मक पहलू भी बन गया है। कुल मिलाकर, रुझान साफ संकेत दे रहे हैं कि बंगाल में लंबे समय बाद सत्ता परिवर्तन हो सकता है, जिससे राज्य की राजनीति में बड़ा बदलाव देखने को मिलेगा।
GWALIOR CM MOHAN YADAV: ग्वालियर एयरपोर्ट पर CM यादव बोले- बंगाल में राष्ट्रवाद और लोकतंत्र की जित हुई

HIGHLIGHTS: CM मोहन यादव का चुनावी रुझानों पर बड़ा बयान बंगाल में TMC और राहुल गांधी पर साधा निशाना चुनावी माहौल को बताया “राष्ट्रवाद की जीत” दुग्ध उत्पादन बढ़ाने और पशुपालन पर घोषणाएं ग्वालियर दौरे में कई कार्यक्रमों में शामिल हुए GWALIOR CM MOHAN YADAV: ग्वालियर। पांच राज्यों के चुनावी रुझानों के बीच मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने ग्वालियर एयरपोर्ट पर बड़ा बयान दिया। उन्होंने कहा कि देश में जो रुझान सामने आ रहे हैं, वह राष्ट्रवाद और लोकतंत्र की जीत है। साथ ही उन्होंने इसे त्योहार जैसा माहौल बताते हुए कहा कि बंगाल की जनता ने अहंकार को नकारकर विकास और मजबूत नेतृत्व को चुना है। खंडवा में बीजेपी कार्यकर्ताओं का जोरदार जश्न, पीएम मोदी की तस्वीरों के साथ बांटी गई झालमुड़ी, गूंजा शहर बंगाल पर TMC पर हमला मोहन यादव ने पश्चिम बंगाल के संदर्भ में तृणमूल कांग्रेस पर निशाना साधते हुए कहा कि राज्य में घुसपैठियों और देशविरोधी ताकतों के साथ खड़े रहने के कारण जनता ने TMC पर भरोसा नहीं जताया। वहीं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में BJP पर जनता ने विश्वास जताया है। डिजिटल ठगी का नया जाल! बुजुर्ग सबसे ज्यादा निशाने पर, ये 5 उपाय बचाएंगे आपकी मेहनत की कमाई राहुल गांधी पर भी साधा निशाना मुख्यमंत्री ने कांग्रेस नेता राहुल गाँधी पर भी तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि उनकी भाषा लोकतंत्र के पवित्र माहौल को प्रभावित करती है और इससे अराजकता को बढ़ावा मिलता है। यह बयान सियासी बहस को और तेज करने वाला माना जा रहा है। तेल की राजनीति में नया तूफान! UAE के फैसले पर ईरान का हमला, OPEC में बढ़ी दरार दुग्ध उत्पादन और विकास की घोषणाएं ग्वालियर में आयोजित राज्य स्तरीय दुग्ध उत्पादक सम्मेलन में मोहन यादव ने मध्य प्रदेश को दुग्ध उत्पादन में देश में नंबर वन बनाने का लक्ष्य रखा। उन्होंने गोशालाओं में प्रति गाय 40 रुपये खर्च करने, पशु आहार निर्माण इकाइयों और वेलनेस सेंटर खोलने की घोषणा की। साथ ही डबरा में नए पशु चिकित्सालय की भी घोषणा की गई। TAMILNADU ELECTION 2026: CM एमके स्टालिन को उनके पुराने साथी वी.एस. बाबू ने दी पटखनी कार्यक्रमों की श्रृंखला और दौरा मुख्यमंत्री ने ग्वालियर में ऋषि गालव विश्वविद्यालय का भूमिपूजन किया और अन्य स्थानीय कार्यक्रमों में भाग लिया। इसके बाद उन्होंने आरोग्यधाम सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल के निर्माण कार्य का निरीक्षण किया। तय कार्यक्रम के अनुसार वे विभिन्न आयोजनों में शामिल होकर शाम को भोपाल के लिए रवाना हो गए।
खंडवा में बीजेपी कार्यकर्ताओं का जोरदार जश्न, पीएम मोदी की तस्वीरों के साथ बांटी गई झालमुड़ी, गूंजा शहर

मध्य प्रदेश के खंडवा में चुनावी रुझानों के बीच भारतीय जनता पार्टी के पक्ष में बढ़त के संकेत सामने आते ही राजनीतिक माहौल पूरी तरह बदल गया। सुबह से ही पार्टी कार्यालय के बाहर कार्यकर्ताओं की हलचल तेज थी और जैसे-जैसे नतीजों के रुझान स्पष्ट होते गए, वैसे-वैसे उत्साह भी बढ़ता गया। पूरे क्षेत्र में एक अलग ही ऊर्जा और जोश देखने को मिला, जहां कार्यकर्ता लगातार अपडेट पर नजर बनाए हुए थे। जैसे ही विभिन्न क्षेत्रों से पार्टी की बढ़त के संकेत मजबूत हुए, खंडवा में माहौल उत्सव में बदल गया। कार्यकर्ताओं ने अपनी खुशी का इजहार अनोखे अंदाज में किया और एक-दूसरे को बधाइयां देना शुरू कर दिया। इस दौरान प्रधानमंत्री की तस्वीरों को सामने रखकर कार्यकर्ताओं ने सम्मान और खुशी व्यक्त की। साथ ही झालमुड़ी बांटकर जीत की खुशी को साझा किया गया, जिससे माहौल और भी जीवंत हो गया। इस जश्न के दौरान आतिशबाजी ने पूरे आसमान को रोशन कर दिया और हर तरफ रंगीन रोशनी का नजारा देखने को मिला। पार्टी के झंडे लहराते हुए कार्यकर्ताओं ने लगातार नारेबाजी की और अपने उत्साह को खुलकर व्यक्त किया। सड़कें और पार्टी कार्यालय के आसपास का क्षेत्र कुछ समय के लिए पूरी तरह से उत्सव स्थल में बदल गया, जहां हर कोई इस खुशी के पल को जी रहा था। इस मौके पर बड़ी संख्या में स्थानीय नेता, पदाधिकारी और कार्यकर्ता मौजूद रहे। सभी ने एक-दूसरे को बधाई दी और इस बढ़त को जनता के विश्वास का परिणाम बताया। नेताओं का कहना था कि यह रुझान इस बात का संकेत है कि लोगों ने विकास और नेतृत्व पर भरोसा जताया है और यही कारण है कि पार्टी को यह समर्थन मिल रहा है। कार्यकर्ताओं ने इसे सिर्फ एक राजनीतिक सफलता नहीं, बल्कि जनता के विश्वास की जीत के रूप में देखा। उनका मानना था कि यह परिणाम उनके काम और जनता के बीच बने भरोसे का नतीजा है। जश्न के दौरान माहौल इतना उत्साहित था कि हर कोई इस पल को यादगार बनाने में जुटा हुआ था। खंडवा में यह उत्सव देर तक चलता रहा और लोग एक-दूसरे को बधाइयां देते रहे। चुनावी रुझानों ने जहां राजनीतिक हलचल को बढ़ाया, वहीं खंडवा में इसने एक बड़े सामूहिक जश्न का रूप ले लिया, जो लंबे समय तक लोगों के बीच चर्चा का विषय बना रहेगा।
डिजिटल ठगी का नया जाल! बुजुर्ग सबसे ज्यादा निशाने पर, ये 5 उपाय बचाएंगे आपकी मेहनत की कमाई

नई दिल्ली। देश में साइबर ठगी का खतरा तेजी से बढ़ रहा है और सबसे ज्यादा निशाने पर बुजुर्ग आ रहे हैं। हाल ही में Bilaspur में एक रिटायर्ड महिला प्रोफेसर को ठगों ने 7 दिन तक ‘डिजिटल अरेस्ट’ में रखकर 1.4 करोड़ रुपये ठग लिए। यह कोई अकेला मामला नहीं है—देश में ऐसे मामलों में 60% से ज्यादा पीड़ित वरिष्ठ नागरिक हैं। अब ठग सिर्फ OTP या बिजली बिल के बहाने तक सीमित नहीं हैं, बल्कि खुद को Central Bureau of Investigation (CBI), पुलिस या TRAI अधिकारी बताकर “टेरर फंडिंग”, “ड्रग्स पार्सल” या “मनी लॉन्ड्रिंग” जैसे गंभीर आरोपों का डर दिखाते हैं और लोगों को मानसिक दबाव में फंसा लेते हैं। इसी खतरे को देखते हुए नई तकनीक भी सामने आई है। ‘अभय’ नाम का AI चैटबॉट संदिग्ध नोटिस और कॉल को तुरंत वेरिफाई कर सकता है। अब CBI के असली नोटिस पर QR कोड भी दिया जाएगा, जिसे स्कैन करके उसकी सच्चाई जांची जा सकेगी। लेकिन सबसे जरूरी है सतर्कता। अगर आप या आपके घर के बुजुर्ग सुरक्षित रहना चाहते हैं, तो ये 5 उपाय बेहद काम के हैं पहला, मोबाइल में DND (Do Not Disturb) सर्विस एक्टिव करें, जिससे फर्जी कॉल्स काफी हद तक बंद हो जाती हैं। दूसरा, फोन में स्पैम कॉल और मैसेज फिल्टर ऑन रखें और अनजान नंबरों से आने वाली कॉल्स को रिसीव करने से बचें। तीसरा, WhatsApp में ऑटो डाउनलोड बंद रखें ताकि संदिग्ध फाइल अपने आप डाउनलोड न हो सके। चौथा, बैंकिंग और UPI ऐप्स में फिंगरप्रिंट या फेस लॉक जरूर लगाएं, ताकि कोई भी आसानी से आपके पैसे तक पहुंच न सके। पांचवां, अगर जरा भी शक हो कि आप ठगी का शिकार हो सकते हैं, तो तुरंत साइबर हेल्पलाइन 1930 या 112 पर कॉल करें और शिकायत दर्ज कराएं। याद रखें ठग हमेशा डर और जल्दबाजी का फायदा उठाते हैं। इसलिए किसी भी कॉल या मैसेज पर तुरंत भरोसा न करें, पहले परिवार या एक्सपर्ट से सलाह जरूर लें। यही सावधानी आपको बड़े नुकसान से बचा सकती है।
ऋषि गालव विश्वविद्यालय के भूमिपूजन के साथ CM डॉ. मोहन यादव ने फूंका ज्ञान क्रांति का शंखनाद, मध्य प्रदेश बनेगा देश का एजुकेशन हब!

मध्य प्रदेश की ऐतिहासिक और सांस्कृतिक नगरी ग्वालियर अब ज्ञान और कौशल के नए वैश्विक केंद्र के रूप में अपनी पहचान स्थापित करने के लिए पूरी तरह तैयार है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने ग्वालियर की इस पावन धरा पर ‘ऋषि गालव विश्वविद्यालय’ का विधि-विधान से भूमिपूजन कर प्रदेश के शिक्षा जगत में एक नए अध्याय की शुरुआत की है। इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने ग्वालियर की वीरता, विद्वता और कला की त्रिवेणी का स्मरण करते हुए कहा कि एक विश्वविद्यालय केवल डिग्री प्रदान करने वाला केंद्र नहीं होता, बल्कि वह राष्ट्र निर्माण की आधारशिला होता है। ऋषि गालव के नाम पर स्थापित होने वाला यह संस्थान हमारी भावी पीढ़ियों को आधुनिक तकनीक के साथ-साथ हमारी प्राचीन सांस्कृतिक विरासत और संस्कारों से भी जोड़ेगा, ताकि वे राष्ट्र निर्माण के अग्रदूत बन सकें। मुख्यमंत्री ने मध्य भारत शिक्षा समिति के संस्थापक सदाशिव गणेश गोखले के महान योगदान की सराहना करते हुए कहा कि पराधीनता के कठिन समय में वर्ष 1941 में जो दीया एक छोटे से स्कूल के रूप में जलाया गया था, वह आज चार महाविद्यालयों, पांच विद्यालयों और एक खेल अकादमी के रूप में एक विशाल वटवृक्ष बन चुका है। वर्तमान में पाँच हजार से अधिक विद्यार्थियों को शिक्षित कर रही यह संस्था अब विश्वविद्यालय के रूप में भारतीय ज्ञान परंपरा और आधुनिक विज्ञान के संगम का केंद्र बनेगी। इसका मुख्य उद्देश्य ऐसे नागरिकों का निर्माण करना है जो न केवल तकनीकी रूप से दक्ष हों, बल्कि चरित्रवान, नवाचारी और समाज के प्रति पूर्णतः उत्तरदायी भी हों। सरकार और समाज के सामूहिक प्रयासों का यह अनूठा उदाहरण प्रदेश के शैक्षणिक ढांचे को नई ऊंचाइयां प्रदान करेगा। शिक्षा प्रणाली में बदलाव की बात करते हुए मुख्यमंत्री ने नई शिक्षा नीति के महत्व को रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि शिक्षा जीवन की सबसे बड़ी पूंजी है और इसी को आधार मानकर प्रदेश में कई क्रांतिकारी नवाचार किए गए हैं। अब दीक्षांत समारोहों में औपनिवेशिक काल के काले कोट के स्थान पर भारतीय वेशभूषा और साफे की परंपरा को प्राथमिकता दी जा रही है। साथ ही, विश्वविद्यालयों के कुलपतियों को ‘कुलगुरु’ का गौरवपूर्ण संबोधन दिया गया है, जो हमारी गुरु-शिष्य परंपरा के प्रति सम्मान को दर्शाता है। उन्होंने भगवान श्रीकृष्ण और सुदामा की मित्रता का उदाहरण देते हुए स्पष्ट किया कि शिक्षा में अमीर-गरीब का भेद समाप्त होना चाहिए और सांदीपनि विद्यालयों के माध्यम से चरित्र निर्माण पर विशेष जोर दिया जा रहा है। मध्य प्रदेश सरकार उच्च शिक्षा के लोकतंत्रीकरण के लिए निरंतर कार्यरत है, जिसके तहत प्रदेश के सभी 55 जिलों में ‘पीएम कॉलेज ऑफ एक्सीलेंस’ की स्थापना की जा रही है। मुख्यमंत्री ने बताया कि सरकार ने गुमनाम नायकों और महान क्रांतिकारियों के सम्मान में तात्या टोपे विश्वविद्यालय, क्रांतिसूर्य टंट्या भील विश्वविद्यालय और रानी अवंतीबाई लोधी विश्वविद्यालय जैसे संस्थानों की स्थापना की है, ताकि युवा पीढ़ी अपने गौरवशाली इतिहास से प्रेरित हो सके। उन्होंने विश्वास जताया कि ग्वालियर का यह नया विश्वविद्यालय अगले वर्ष गुरु पूर्णिमा तक अपना कार्य प्रारंभ कर देगा और ग्वालियर न केवल मध्य भारत, बल्कि पूरे देश में शिक्षा के एक प्रमुख केंद्र (एजुकेशन हब) के रूप में नई चमक बिखेरेगा। यह संस्थान राष्ट्रवाद की भावना से ओतप्रोत होकर छात्रों के भीतर योग्यता और दक्षता का नया संचार करेगा।
तेल की राजनीति में नया तूफान! UAE के फैसले पर ईरान का हमला, OPEC में बढ़ी दरार

नई दिल्ली। मिडिल ईस्ट की तेल राजनीति में तनाव खुलकर सामने आ गया है। Iran ने United Arab Emirates (UAE) के OPEC से बाहर निकलने के फैसले पर कड़ी आपत्ति जताई है और इसे “नकारात्मक और बदले की भावना से लिया गया कदम” बताया है। ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता Esmail Baghaei ने साफ कहा कि इस तरह का फैसला संगठन की एकजुटता को कमजोर करता है। उन्होंने यह भी दोहराया कि ईरान OPEC के भीतर अपनी जिम्मेदारियों को निभाता रहेगा और वैश्विक तेल संतुलन बनाए रखने में सक्रिय भूमिका जारी रखेगा। तनाव यहीं नहीं रुका। ईरान ने UAE पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि हालिया क्षेत्रीय संघर्ष के दौरान उसने अमेरिका और इजराइल का साथ देकर “गलत रवैया” अपनाया, जिससे भरोसे पर असर पड़ा है। वहीं दूसरी तरफ UAE ने इन आरोपों को खारिज करते हुए अपना पक्ष रखा। Sultan Al Jaber ने कहा कि OPEC और OPEC+ से अलग होने का फैसला किसी देश के खिलाफ नहीं है, बल्कि यह पूरी तरह रणनीतिक और आर्थिक हितों को ध्यान में रखकर लिया गया कदम है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह टकराव सिर्फ OPEC तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके पीछे मिडिल ईस्ट की बदलती राजनीतिक समीकरण और वैश्विक ऊर्जा बाजार की प्रतिस्पर्धा भी अहम वजह हैं। कुल मिलाकर, UAE के इस कदम और ईरान की कड़ी प्रतिक्रिया ने साफ कर दिया है कि आने वाले समय में तेल बाजार के साथ-साथ क्षेत्रीय राजनीति में भी बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है।
TAMILNADU ELECTION 2026: CM एमके स्टालिन को उनके पुराने साथी वी.एस. बाबू ने दी पटखनी

HIGHLIGHTS: कोलाथुर सीट से CM स्टालिन को हार TVK उम्मीदवार वी.एस. बाबू ने दी मात स्टालिन लगातार 3 बार यहां से जीत चुके थे बाबू पहले DMK में रह चुके हैं तमिलनाडु में बड़ा सियासी उलटफेर TAMILNADU ELECTION 2026: कोलकाता। तमिलनाडु विधानसभा चुनाव में बड़ा उलटफेर देखने को मिला है। बता दें कि मुख्यमंत्री एमके स्टालिन को कोलाथुर सीट से हार का सामना करना पड़ा है। यह सीट लंबे समय से उनका गढ़ मानी जाती थी, जहां से वे 2011, 2016 और 2021 में लगातार चुनाव जीतते आए थे। लेकिन इस बार के नतीजों ने सियासी समीकरण पूरी तरह बदल दिए हैं। बंगाल फतह के बाद बीजेपी का अगला टारगेट पंजाब! जीत के जोश में बड़ा सियासी ऐलान पुराने साथी वीएस बाबू ने दी मात वीएस बाबू जो कभी DMK से जुड़े रहे थे, ने स्टालिन को कड़ी टक्कर देते हुए हराया। वह Vijay की पार्टी TVK के उम्मीदवार के तौर पर मैदान में थे। यह मुकाबला इसलिए भी खास रहा क्योंकि दोनों नेताओं का पुराना राजनीतिक रिश्ता रहा है। पश्चिम बंगाल की सियासत में बड़ा बदलाव, प्रतीकों की लड़ाई में भाजपा की बढ़त.. पार्टी बदलकर बदली किस्मत वीएस बाबू पहले DMK में सक्रिय थे और 2011 में स्टालिन के चुनाव प्रबंधन में भी भूमिका निभा चुके थे। बाद में उन्होंने पार्टी छोड़ AIADMK जॉइन की और फिर 7 फरवरी 2026 को TVK में शामिल हो गए। उनकी यह रणनीति इस चुनाव में कारगर साबित हुई और उन्होंने बड़ी जीत दर्ज की। बंगाल के रुझानों में भाजपा की बढ़त पर भोपाल में जश्न, शिवराज सिंह ने बांटी ‘झालमुड़ी’, बोले- मोदी है तो मुमकिन है स्टालिन का सियासी सफर एमके स्टालिन तमिलनाडु की राजनीति के बड़े नेताओं में गिने जाते हैं। वह पूर्व मुख्यमंत्री एम् करूणानिधि के बेटे हैं और 2018 में उनके निधन के बाद DMK की कमान संभाली थी। कोलाथुर सीट उनके राजनीतिक करियर की मजबूत पहचान रही, लेकिन इस बार यह किला ढह गया।
महिला क्रिकेट में मध्यप्रदेश का गौरव बढ़ा, अनुष्का शर्मा को भारत ए टीम की कप्तानी, इंग्लैंड दौरे पर बड़ी जिम्मेदारी

मध्यप्रदेश: के ग्वालियर की रहने वाली युवा क्रिकेटर अनुष्का शर्मा ने एक बार फिर अपने शानदार प्रदर्शन और नेतृत्व क्षमता के दम पर बड़ा मुकाम हासिल किया है। उन्हें भारत ए महिला T-20 टीम का कप्तान नियुक्त किया गया है। यह जिम्मेदारी उनके करियर के लिए बेहद अहम मानी जा रही है, क्योंकि अब वह इंग्लैंड दौरे पर टीम की कमान संभालेंगी और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी नेतृत्व क्षमता का प्रदर्शन करेंगी। अनुष्का शर्मा की कप्तानी में भारत ए महिला टीम इंग्लैंड ए के खिलाफ तीन मैचों की T-20 सीरीज खेलेगी। यह सीरीज युवा खिलाड़ियों के लिए खुद को साबित करने का सुनहरा अवसर मानी जा रही है, जहां हर खिलाड़ी पर प्रदर्शन का दबाव और अवसर दोनों रहेगा। इस दौरे का पहला मुकाबला 20 जून को नॉर्थम्पटन में खेला जाएगा, दूसरा मैच 23 जून को उसी मैदान पर होगा, जबकि तीसरा और अंतिम मुकाबला 25 जून को चेल्सफोर्ड में आयोजित किया जाएगा। यह श्रृंखला खिलाड़ियों की तकनीक, मानसिक मजबूती और मैच परिस्थितियों को संभालने की क्षमता की सख्त परीक्षा मानी जा रही है। अनुष्का शर्मा का क्रिकेट सफर लगातार मेहनत और प्रदर्शन से भरा रहा है। उन्होंने घरेलू क्रिकेट में मध्यप्रदेश सीनियर महिला टीम के लिए खेलते हुए उपकप्तान की जिम्मेदारी भी निभाई है। उनके नेतृत्व में टीम ने कई महत्वपूर्ण मुकाबलों में बेहतर प्रदर्शन किया है। इसके अलावा वह अंडर-19 चैलेंजर ट्रॉफी में इंडिया बी टीम की कप्तानी भी कर चुकी हैं, जहां उनके रणनीतिक फैसलों की काफी सराहना हुई थी। मध्यप्रदेश अंडर-19 टीम को राष्ट्रीय उपविजेता बनाने में भी उनका अहम योगदान रहा है। उनकी प्रतिभा सिर्फ घरेलू क्रिकेट तक सीमित नहीं रही है, बल्कि उन्होंने महिला प्रीमियर लीग में भी अपनी मौजूदगी दर्ज कराई है। वहां उन्होंने गुजरात जायंट्स जैसी टीम का हिस्सा बनकर उच्च स्तर का अनुभव हासिल किया। इसके साथ ही बुंदेलखंड बुल्स की कप्तानी करते हुए उन्होंने टीम को मजबूती दी और कई मैचों में निर्णायक भूमिका निभाई। उनके लगातार प्रदर्शन ने उन्हें एक भरोसेमंद और आक्रामक सोच वाली खिलाड़ी के रूप में स्थापित किया है। अनुष्का को उनके बेहतरीन खेल और नेतृत्व के लिए कई सम्मान भी मिल चुके हैं। उनके नाम चंद्रा नायडू अवॉर्ड जैसी प्रतिष्ठित उपलब्धियां दर्ज हैं। हाल ही में सीनियर वनडे ट्रॉफी में उनके प्रदर्शन ने मध्यप्रदेश को खिताब दिलाने में बड़ी भूमिका निभाई और उन्हें ‘प्लेयर ऑफ द टूर्नामेंट’ जैसे सम्मान से नवाजा गया। क्रिकेट विशेषज्ञों का मानना है कि इंग्लैंड जैसे मजबूत क्रिकेटिंग देश में कप्तानी करना किसी भी युवा खिलाड़ी के लिए बड़ी चुनौती होती है। ऐसे में अनुष्का शर्मा के पास खुद को साबित करने का बेहतरीन मौका है। उनकी कप्तानी में भारत ए टीम का प्रदर्शन आने वाले समय में उनके करियर की दिशा तय कर सकता है। अब सभी की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि वह इस जिम्मेदारी को किस तरह निभाती हैं और टीम को कितनी मजबूती से आगे ले जाती हैं।