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झाबुआ में बनेगा DAVV का मेडिकल कॉलेज, इंजीनियरिंग कॉलेज में अस्थायी संचालन की तैयारी

नई दिल्ली। इंदौर स्थित देवी अहिल्या विश्वविद्यालय अब आदिवासी बहुल झाबुआ जिले में अपना मेडिकल कॉलेज स्थापित करने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है। विश्वविद्यालय को इसके लिए राज्य सरकार द्वारा भूमि आवंटित कर दी गई है, जिससे परियोजना को औपचारिक रूप से मंजूरी मिल चुकी है। इंजीनियरिंग कॉलेज में अस्थायी संचालन की योजनाकुलगुरु प्रोफेसर राकेश सिंघई के अनुसार, जब तक मेडिकल कॉलेज का नया भवन तैयार नहीं होता, तब तक अस्थायी रूप से इंजीनियरिंग कॉलेज परिसर में ही मेडिकल शिक्षा शुरू करने का प्रस्ताव है। इसके लिए विश्वविद्यालय ने अनुमति के लिए आवेदन किया है और राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग (NMC) से मंजूरी का इंतजार किया जा रहा है।  झाबुआ जिला अस्पताल बनेगा टीचिंग हॉस्पिटलयोजना के तहत झाबुआ जिला अस्पताल को मेडिकल कॉलेज के टीचिंग हॉस्पिटल के रूप में विकसित किया जाएगा। अधिकारियों के अनुसार अस्पताल में लगभग 250 बेड पहले से उपलब्ध हैं, और इसे 300 बेड क्षमता तक बढ़ाया जाएगा, जो 100 मेडिकल सीटों के लिए आवश्यक मानक है। परियोजना की लागत और विकास योजनामेडिकल कॉलेज की आधारभूत संरचना तैयार करने में शुरुआती तौर पर करीब 350 से 400 करोड़ रुपये की लागत आने का अनुमान है। हालांकि अस्पताल पहले से उपलब्ध होने के कारण लागत अपेक्षाकृत नियंत्रित रहेगी। शासन की मंजूरी पर टिकी आगे की प्रक्रियाविश्वविद्यालय ने उम्मीद जताई है कि इस महीने के भीतर अनुमति से जुड़ा निर्णय आ सकता है। यदि मंजूरी मिलती है तो झाबुआ में मेडिकल शिक्षा की शुरुआत अस्थायी ढांचे से ही कर दी जाएगी।  आदिवासी क्षेत्र के लिए बड़ा बदलावझाबुआ जैसे आदिवासी क्षेत्र में मेडिकल कॉलेज की स्थापना से न सिर्फ चिकित्सा शिक्षा का विस्तार होगा, बल्कि स्थानीय स्वास्थ्य सेवाओं में भी बड़ा सुधार आने की उम्मीद है। शिक्षा और स्वास्थ्य दोनों में नई शुरुआतदेवी अहिल्या विश्वविद्यालय की यह पहल मध्यप्रदेश के आदिवासी क्षेत्रों में उच्च चिकित्सा शिक्षा और बेहतर स्वास्थ्य सेवाओं की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।

मध्यप्रदेश में बड़ा प्रशासनिक फेरबदल: 62 IPS अफसरों के तबादले, 19 जिलों के SP बदले गए

नई दिल्ली। मध्यप्रदेश में कानून-व्यवस्था को मजबूत करने के उद्देश्य से राज्य सरकार ने बड़ा प्रशासनिक कदम उठाते हुए 62 IPS अधिकारियों के तबादले कर दिए हैं। यह सूची देर रात गृह विभाग द्वारा जारी की गई, जिसमें ADG, DIG, SP और DCP स्तर तक के अधिकारियों को नई जिम्मेदारियां सौंपी गई हैं। यह फैसला मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव और डीजीपी कैलाश मकवाणा के बीच हुई उच्च स्तरीय चर्चा के बाद लिया गया।  सिंगरौली और सिवनी में कार्रवाई के बाद बदलावहाल ही में हुए बैंक डकैती कांड के बाद सिंगरौली के तत्कालीन SP मनीष खत्री को हटा दिया गया है और उन्हें AIG PHQ भोपाल भेजा गया है। वहीं सिवनी में सामने आए हवाला कांड के बाद SP सुनील कुमार मेहता को हटाकर इंदौर में DCP की जिम्मेदारी दी गई है। 19 जिलों में बदले गए SPइस बड़े फेरबदल में प्रदेश के 19 जिलों जैसे भिंड, शिवपुरी, रीवा, सागर, धार, मुरैना, छतरपुर, खंडवा, नीमच, पांढुर्णा, आगर मालवा, अनूपपुर, मऊगंज, डिंडौरी, मंदसौर, दतिया, सीहोर, सिंगरौली और दमोह में नए पुलिस अधीक्षक नियुक्त किए गए हैं।  DIG और SP स्तर पर बड़ा रोटेशनकई वरिष्ठ अधिकारियों को DIG पद पर पदोन्नति दी गई है। रीवा, धार, झाबुआ और ग्वालियर सहित कई जिलों में तैनात अधिकारियों को अब राज्य मुख्यालय या अन्य रेंज में जिम्मेदारी दी गई है। इस बदलाव में पुलिस अधीक्षक स्तर के कई अधिकारी सीधे DIG या वरिष्ठ पदों पर पहुंचे हैं, जिससे पुलिस संरचना में बड़ा बदलाव देखने को मिला है। क्यों किया गया इतना बड़ा फेरबदल?सूत्रों के अनुसार, यह कदम कानून-व्यवस्था को और मजबूत करने, लंबित मामलों में तेजी लाने और प्रशासनिक जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए उठाया गया है। हाल के दिनों में कुछ जिलों में हुई आपराधिक घटनाओं को भी इस बदलाव का प्रमुख कारण माना जा रहा है। कुछ पद अभी खाली, जल्द आ सकती है नई सूचीबुरहानपुर और सागर जैसे कुछ जिलों में अभी SP और IG स्तर के पद खाली हैं। माना जा रहा है कि जल्द ही एक और तबादला सूची जारी हो सकती है जिसमें इन पदों को भी भरा जाएगा।  पुलिस व्यवस्था में नई सर्जरीमध्यप्रदेश सरकार का यह बड़ा कदम प्रशासनिक सख्ती और सुधार की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है। 62 IPS अधिकारियों के तबादले से राज्य की पुलिस व्यवस्था में एक नया संतुलन और नई रणनीति देखने को मिल सकती है।

मध्यप्रदेश में दिव्यांगजनों के लिए ऐतिहासिक कदम: पहली बार बनेगी राज्य स्तरीय समग्र नीति

नई दिल्ली। मध्यप्रदेश सरकार ने राज्य के लगभग 10 लाख दिव्यांगजनों के लिए पहली बार एक व्यापक और समग्र नीति बनाने का निर्णय लिया है। इस नीति का उद्देश्य सभी विभागों जैसे सामाजिक न्याय, महिला एवं बाल विकास, शिक्षा और अन्य के काम को एक ही ढांचे में लाना है, ताकि लाभार्थियों को योजनाओं का समान और प्रभावी लाभ मिल सके। इस नीति के लागू होने के बाद दिव्यांगजनों के लिए अलग-अलग विभागों की योजनाओं में एकरूपता आएगी और सभी सेवाएं एक ही प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध होंगी।  180 दिन में तैयार होगा ड्राफ्टसरकार ने इस नीति का प्रारंभिक मसौदा 180 दिनों के भीतर तैयार करने का लक्ष्य रखा है। इसके लिए जिम्मेदारी दिव्यांगजन सशक्तिकरण विभाग के आयुक्त को सौंपी गई है। आयुक्त डॉ. अजय खेमरिया के अनुसार, यह प्रदेश में पहली बार होगा जब दिव्यांगजनों के लिए कोई समग्र नीति तैयार की जाएगी। अभी तक विभिन्न विभाग अलग-अलग योजनाएं चला रहे थे, जिससे लाभ में असमानता की स्थिति बनी हुई थी। सभी हितधारकों से होगा संवादनीति को प्रभावी और वास्तविक जरूरतों के अनुरूप बनाने के लिए सरकार व्यापक स्तर पर संवाद करेगी। इसमें विशेषज्ञों, सामाजिक संगठनों, विश्वविद्यालयों के शोधकर्ताओं और दिव्यांगजनों से सीधे सुझाव लिए जाएंगे। इसके अलावा ग्रामीण क्षेत्रों, शहरी इलाकों और आदिवासी अंचलों विशेषकर अलीराजपुर, झाबुआ और बड़वानी जैसे जिलों में जाकर जमीनी स्थिति का अध्ययन किया जाएगा।  विभागों के बीच समन्वय होगा मजबूतअभी तक दिव्यांगजनों के लिए सामाजिक न्याय, शिक्षा, एमएसएमई और एनआरएलएम जैसे विभाग अलग-अलग योजनाएं चला रहे हैं। नई नीति के बाद इन सभी विभागों का काम एकीकृत ढांचे में होगा, जिससे योजनाओं का बेहतर क्रियान्वयन संभव होगा।  नई पहल: अध्ययन और वैश्विक मॉडल का उपयोगनीति निर्माण के दौरान तेलंगाना और त्रिपुरा जैसे राज्यों की व्यवस्थाओं का अध्ययन किया जाएगा। साथ ही अंतरराष्ट्रीय मॉडल और विशेषज्ञों की राय को भी शामिल किया जाएगा। सरकार का उद्देश्य है कि यह नीति सिर्फ कागजी न होकर जमीनी स्तर पर बदलाव लाने वाली साबित हो। आवास और पुनर्वास पर विशेष फोकसप्रस्तावित नीति में 18 वर्ष से अधिक आयु के मानसिक रूप से दिव्यांग व्यक्तियों के लिए संभाग स्तर पर 100 बिस्तरों वाले विशेष आश्रय गृह बनाने का सुझाव भी शामिल है। इससे पुनर्वास और देखभाल की व्यवस्था मजबूत होगी।  डेटा और भविष्य की जरूरतेंप्रदेश में 2011 की जनगणना और UDID के अनुसार करीब 10 लाख दिव्यांगजन दर्ज हैं। आगामी जनगणना में यह संख्या बढ़ सकती है क्योंकि अब 21 प्रकार की दिव्यांगताओं को शामिल किया जाएगा, जिससे योजनाओं की जरूरत और अधिक व्यापक हो जाएगी। समान अवसरों की ओर बड़ा कदमयह नीति मध्यप्रदेश में दिव्यांगजनों के जीवन में समान अवसर, बेहतर सुविधाएं और समावेशी विकास की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है। यदि यह सही ढंग से लागू होती है, तो यह देश के लिए एक मॉडल पॉलिसी भी बन सकती है।

MP के सांसदों को दक्षिण में झटका: तमिलनाडु-केरल में BJP को हार का सामना

नई दिल्ली। पांच राज्यों के चुनाव में जहां बीजेपी को कई जगहों पर सफलता मिली, वहीं मध्य प्रदेश के लिए दक्षिण भारत से निराशाजनक खबर सामने आई है। एमपी कोटे से राज्यसभा सांसद एल. मुरुगन और जॉर्ज कुरियन को क्रमशः तमिलनाडु और केरल में हार का सामना करना पड़ा। केरल में जॉर्ज कुरियन तीसरे नंबर परकेरल की कांजीरापल्ली सीट से चुनाव लड़ रहे जॉर्ज कुरियन मुख्य मुकाबले से बाहर नजर आए। उन्हें करीब 26,984 वोट मिले और वे तीसरे स्थान पर रहे। इस सीट पर सीधा मुकाबला एलडीएफ और यूडीएफ के बीच रहा। कांग्रेस के उम्मीदवार रोनी के. बेबी ने 56,646 वोट हासिल कर जीत दर्ज की, जबकि दूसरे स्थान पर डॉ. एन. जयराज रहे। करीब 29 हजार वोटों के बड़े अंतर से हार ने यह साफ कर दिया कि भाजपा इस सीट पर प्रभाव नहीं बना पाई। तमिलनाडु में मुरुगन को कड़ी टक्कर, पर जीत नहींतमिलनाडु की अविनाशी (SC) सीट पर एल. मुरुगन ने जोरदार मुकाबला किया, लेकिन जीत हासिल नहीं कर सके। उन्हें करीब 68,836 वोट मिले और वे दूसरे स्थान पर रहे। इस सीट पर बड़ा उलटफेर करते हुए तमिलगा वेत्री कड़गम के उम्मीदवार कमाली एस. ने 84,209 वोटों के साथ जीत दर्ज की। वहीं द्रविड़ मुनेत्र कड़गम के उम्मीदवार तीसरे स्थान पर रहे। यह मुकाबला इसलिए भी खास रहा क्योंकि इसमें विजय की पार्टी का प्रभाव साफ तौर पर देखने को मिला।  क्षेत्रीय राजनीति का असर भारीतमिलनाडु में द्रविड़ मुनेत्र कड़गम गठबंधन और क्षेत्रीय पहचान की राजनीति का असर साफ नजर आया। वहीं केरल में परंपरागत रूप से मजबूत एलडीएफ और यूडीएफ के बीच भाजपा अपनी जगह नहीं बना सकी। कौन हैं ये दोनों नेता?एल. मुरुगन केंद्र सरकार में सूचना एवं प्रसारण राज्य मंत्री हैं और तमिलनाडु बीजेपी के पूर्व अध्यक्ष रह चुके हैं। वे दलित चेहरे के रूप में पार्टी के अहम नेता माने जाते हैं। वहीं जॉर्ज कुरियन केंद्रीय अल्पसंख्यक कल्याण और मत्स्य पालन राज्य मंत्री हैं और केरल में भाजपा के पुराने चेहरों में शामिल हैं। उन्हें ईसाई समुदाय और पार्टी के बीच सेतु माना जाता है।  दक्षिण में चुनौती बरकरारतमिलनाडु और केरल के नतीजे यह संकेत देते हैं कि दक्षिण भारत में भाजपा को अभी भी मजबूत पकड़ बनाने के लिए लंबा रास्ता तय करना है। क्षेत्रीय दलों और स्थानीय मुद्दों के सामने राष्ट्रीय चेहरों की रणनीति पूरी तरह सफल नहीं हो सकी।

“महादेव सबसे शक्तिशाली किरदार”-तरुण खन्ना ने तोड़ी टाइपकास्ट की धारणा

नई दिल्ली। टीवी इंडस्ट्री में तरुण खन्ना को ‘महादेव’ के रूप में खास पहचान मिली है। उन्होंने अब तक 400 से ज्यादा बार भगवान भगवान शिव का किरदार निभाया है। ‘कर्म फल दाता शनि’, ‘राधा कृष्ण’, ‘जय कन्हैया लाल की’, ‘देवी आदि पराशक्ति’ और ‘परम अवतार श्री कृष्ण’ जैसे कई लोकप्रिय पौराणिक शोज में उनकी मौजूदगी ने दर्शकों के दिलों में खास जगह बनाई है।  टाइपकास्ट या सोच-समझकर लिया फैसला?लगातार एक ही तरह के किरदार निभाने पर अक्सर कलाकारों को ‘टाइपकास्ट’ कहा जाता है, लेकिन तरुण खन्ना इस धारणा से अलग सोच रखते हैं। उनका कहना है कि वह जानबूझकर इस भूमिका को चुनते हैं क्योंकि यह बेहद प्रभावशाली और शक्तिशाली किरदार है। उनके अनुसार, “एक अभिनेता के लिए किरदार की ताकत समझना जरूरी है और महादेव से ज्यादा शक्तिशाली रोल मिलना मुश्किल है। इसलिए यह मेरा सोचा-समझा निर्णय है।”  किरदार ने बदली जिंदगीतरुण खन्ना मानते हैं कि भगवान शिव का किरदार निभाने से उनके व्यक्तित्व में बड़ा बदलाव आया है। इस भूमिका ने उन्हें अधिक धैर्यवान बनाया और उनके भीतर की विनम्रता को फिर से जागृत किया।  टीवी से फिल्मों और थिएटर तक का सफरतरुण खन्ना ने सिर्फ टीवी ही नहीं, बल्कि फिल्मों और थिएटर में भी महादेव का किरदार निभाया है। तेलुगु फिल्म ‘अखंडा 2’ और नाटक ‘हमारे राम’ में भी उन्होंने इसी रूप में दर्शकों को प्रभावित किया। सिर्फ VFX नहीं, भावनाएं जरूरीपौराणिक शोज पर अपनी राय रखते हुए तरुण खन्ना ने कहा कि केवल VFX और भव्य कॉस्ट्यूम से शो सफल नहीं होता। उनका मानना है कि अगर कहानी में भावनाओं की गहराई नहीं होगी, तो दर्शकों से जुड़ाव नहीं बन पाएगा। उन्होंने साफ कहा, “महादेव सिर्फ एक लुक नहीं, बल्कि एक दिव्य अनुभूति है, जिसे निभाने के लिए सच्ची श्रद्धा और समर्पण चाहिए।”  किरदार नहीं, आस्था का प्रतीकतरुण खन्ना के लिए ‘महादेव’ का किरदार सिर्फ एक रोल नहीं, बल्कि आस्था और समर्पण का प्रतीक है। यही वजह है कि वह इसे बार-बार निभाने के बावजूद इसे अपनी ताकत मानते हैं, कमजोरी नहीं।

थलपति से ‘जन नायक’ तक: तमिलनाडु की राजनीति में छाए विजय

नई दिल्ली। तमिल सिनेमा के सुपरस्टार विजय अब राजनीति में भी ‘जन नायक’ बनकर उभर रहे हैं। 2026 के तमिलनाडु विधानसभा चुनाव में उनकी पार्टी तमिलगा वेत्री कझगम (TVK) ने शानदार प्रदर्शन करते हुए सभी का ध्यान अपनी ओर खींच लिया है। खास बात यह रही कि सत्तारूढ़ द्रविड़ मुनेत्र कड़गम को कड़ी टक्कर मिली। विजय ने खुद पेरंबुर और तिरुचिरापल्ली सीटों से जीत हासिल कर यह साबित कर दिया कि उनकी लोकप्रियता सिर्फ फिल्मों तक सीमित नहीं है। राजनीति में आने का फैसला: कब और क्यों?विजय ने 2 फरवरी 2024 को अपनी राजनीतिक पार्टी की घोषणा की थी। कोविड-19 के बाद से ही वे सामाजिक और राजनीतिक मुद्दों में सक्रिय हो गए थे। सही समय देखकर उन्होंने राजनीति में कदम रखा और 2026 चुनाव लड़ने का फैसला किया। इसी के साथ उन्होंने फिल्म इंडस्ट्री से दूरी बनाने का ऐलान भी कर दिया।  घोषणापत्र में बड़े वादे: जनता को सीधे साधने की कोशिशअप्रैल 2026 में जारी घोषणापत्र में विजय ने कई बड़े और लोकलुभावन वादे किए। इनमें हर परिवार की महिला मुखिया को 2,500 रुपये मासिक सहायता, साल में 6 मुफ्त गैस सिलेंडर, गरीब बेटियों की शादी के लिए 8 ग्राम सोना और सिल्क साड़ी देने का वादा शामिल है। इसके अलावा बेरोजगार युवाओं के लिए स्नातकों को 4,000 रुपये और डिप्लोमा धारकों को 2,500 रुपये का भत्ता देने की बात कही गई। छोटे किसानों के कर्ज माफ करने, बिना गारंटी लोन और 200 यूनिट मुफ्त बिजली जैसे वादों ने जनता को आकर्षित किया।  फिल्मी करियर: बाल कलाकार से सुपरस्टार तक का सफरविजय ने अपने फिल्मी करियर की शुरुआत 1984 में बाल कलाकार के रूप में की थी। उनके पिता एस. ए. चंद्रशेखर द्वारा निर्देशित फिल्म से उन्होंने शुरुआत की। 1992 में ‘नालैया थीरपु’ से लीड एक्टर बने और 1996 की फिल्म ‘पूवे उनाक्कागा’ ने उन्हें रोमांटिक हीरो के रूप में स्थापित कर दिया।इसके बाद उन्होंने कई सुपरहिट फिल्में दीं और ‘थलपति’ के नाम से लोकप्रिय हो गए। उनकी आखिरी फिल्म ‘जन नायकन’ भी जल्द रिलीज होने वाली है।  निजी जीवन में उतार-चढ़ावराजनीतिक सफर के बीच विजय का निजी जीवन भी सुर्खियों में रहा। उनकी पत्नी संगीता सोर्नालिंगम के साथ रिश्तों में खटास और तलाक की खबरों ने लोगों को चौंका दिया। 1999 में शादी करने वाले इस कपल के दो बच्चे हैं। संपत्ति और लाइफस्टाइलचुनावी हलफनामे के अनुसार विजय के पास करीब 404.58 करोड़ रुपये की संपत्ति है। उनके पास 10 मकान और कई लग्जरी गाड़ियां हैं, जो उनके सफल करियर को दर्शाती हैं। थलपति’ अब जनता के नेतासिनेमा में सुपरस्टार बनने के बाद अब विजय राजनीति में भी मजबूत पकड़ बनाते नजर आ रहे हैं। उनका यह सफर बताता है कि लोकप्रियता और जनसमर्थन के दम पर वे तमिलनाडु की राजनीति में लंबी पारी खेल सकते हैं।

मंगलवार व्रत में भूलकर भी न करें ये गलतियां, वरना नहीं मिलेगा पूरा फल

नई दिल्ली। हिंदू धर्म में मंगलवार का दिन बेहद पवित्र माना गया है और यह दिन हनुमान जी को समर्पित होता है। मान्यता है कि इस दिन विधि-विधान से पूजा और व्रत करने पर बजरंगबली प्रसन्न होते हैं और भक्तों के सभी संकट दूर कर देते हैं। लेकिन कई बार छोटी-छोटी गलतियां व्रत के पूरे फल को नष्ट कर सकती हैं। ऐसे में जरूरी है कि मंगलवार व्रत करते समय कुछ खास सावधानियों का ध्यान रखा जाए। मंगलवार व्रत की शुरुआत ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नान करने से होती है। इसके बाद लाल वस्त्र पहनकर पूजा स्थल को गंगाजल से शुद्ध किया जाता है। हनुमान जी की प्रतिमा स्थापित कर घी का दीपक जलाया जाता है और उन्हें सिंदूर, चमेली का तेल, लाल फूल और पान के पत्तों की माला अर्पित की जाती है। भोग के रूप में बेसन के लड्डू या बूंदी चढ़ाना शुभ माना जाता है। पूजा के दौरान ‘राम’ नाम का जाप करना अत्यंत आवश्यक है, क्योंकि हनुमान जी Lord Rama के परम भक्त हैं। इन सावधानियों का रखें खास ध्यानमंगलवार व्रत के दौरान साधारण नमक का सेवन नहीं करना चाहिए। इसके साथ ही प्याज, लहसुन, मांस और मदिरा से पूरी तरह दूरी बनाए रखना जरूरी है। व्रत के समय मन और शरीर दोनों की पवित्रता बनाए रखना बेहद महत्वपूर्ण होता है, इसलिए ब्रह्मचर्य का पालन करना चाहिए। व्रत रखने वाले भक्तों को पूरे दिन निराहार रहना चाहिए। हालांकि यदि यह संभव न हो, तो शाम की पूजा के बाद गेहूं और गुड़ से बना भोजन किया जा सकता है, लेकिन उसमें नमक का प्रयोग नहीं होना चाहिए। इसके अलावा क्रोध, झगड़ा, अपशब्द और नकारात्मक विचारों से दूर रहना चाहिए। माना जाता है कि इस दिन मन की शुद्धता ही पूजा का सबसे बड़ा आधार होती है। दान-पुण्य का भी इस दिन विशेष महत्व होता है। जरूरतमंदों को अन्न और वस्त्र दान करने से व्रत का फल कई गुना बढ़ जाता है और जीवन में सुख-समृद्धि आती है। क्यों जरूरी है नियमों का पालन?धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, व्रत केवल भोजन त्यागने का नाम नहीं है, बल्कि यह अनुशासन, संयम और श्रद्धा का प्रतीक है। अगर नियमों का सही तरीके से पालन किया जाए, तो व्यक्ति को मानसिक शांति, आत्मविश्वास और सकारात्मक ऊर्जा प्राप्त होती है। इसलिए अगर आप मंगलवार का व्रत रखते हैं, तो इन सावधानियों को जरूर अपनाएं। तभी Lord Hanuman की कृपा से आपके जीवन के सभी कष्ट दूर हो सकते हैं।

LPG Supply Update: ऑनलाइन बुकिंग 99% तक पहुंची, देशभर में गैस सप्लाई पूरी तरह सामान्य

नई दिल्ली। वैश्विक स्तर पर जारी तनाव और खासकर पश्चिम एशिया संकट के बावजूद भारत में घरेलू एलपीजी की सप्लाई पूरी तरह सामान्य बनी हुई है। पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि देश के किसी भी हिस्से में गैस की कमी नहीं है और उपभोक्ताओं को घबराने की जरूरत नहीं है। रविवार को घरेलू गैस की ऑनलाइन बुकिंग 99 प्रतिशत तक पहुंच गई, जो डिजिटल सिस्टम की बढ़ती स्वीकार्यता को दर्शाता है। खास बात यह है कि किसी भी डिस्ट्रीब्यूटरशिप पर गैस खत्म होने यानी ‘ड्राई-आउट’ की स्थिति सामने नहीं आई। डिजिटल सिस्टम से पारदर्शिता, कालाबाजारी पर लगामसरकार के अनुसार, अब एलपीजी डिलीवरी में ऑथेंटिकेशन कोड का इस्तेमाल तेजी से बढ़ा है। करीब 94 प्रतिशत डिलीवरी उपभोक्ताओं के रजिस्टर्ड मोबाइल नंबर पर भेजे गए कोड के जरिए हो रही है। इससे गैस की कालाबाजारी और गलत वितरण (डायवर्जन) पर काफी हद तक रोक लगी है।  छोटे सिलेंडर की बढ़ी मांग, लाखों में बिक्री1 अप्रैल से अब तक 5 किलोग्राम वाले छोटे एलपीजी सिलेंडरों की 23.58 लाख से ज्यादा बिक्री हो चुकी है। ये सिलेंडर खासकर प्रवासी मजदूरों और अस्थायी उपयोग के लिए काफी लोकप्रिय हो रहे हैं।  PNG कनेक्शन और नए उपभोक्ताओं में तेजीसरकार ने पाइप्ड नेचुरल गैस (PNG) को बढ़ावा देते हुए अब तक करीब 6.12 लाख कनेक्शनों में सप्लाई शुरू कर दी है, जबकि 2.67 लाख नए कनेक्शनों के लिए इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार है। मार्च से अब तक 6.79 लाख नए उपभोक्ताओं ने गैस कनेक्शन के लिए रजिस्ट्रेशन कराया है। पेट्रोल-डीजल की कीमतें स्थिर, स्टॉक भरपूरअंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव के बावजूद देश में पेट्रोल और डीजल के दाम स्थिर बने हुए हैं। इंडियन ऑयल, बीपीसीएल और एचपीसीएल के पेट्रोल पंपों पर ईंधन का पर्याप्त स्टॉक उपलब्ध है।  कालाबाजारी पर सख्ती: छापेमारी और कार्रवाई जारीएलपीजी की जमाखोरी और कालाबाजारी को रोकने के लिए देशभर में सख्त कदम उठाए जा रहे हैं। रविवार को 1,570 से अधिक छापेमारी की गई, जिसमें 349 डिस्ट्रीब्यूटरशिप पर जुर्माना लगाया गया और 74 को निलंबित कर दिया गया।  सरकार की अपील: अफवाहों से बचें, घबराकर खरीदारी न करेंसरकार ने नागरिकों से अपील की है कि वे पेट्रोल, डीजल और एलपीजी की घबराहट में खरीदारी न करें। किसी भी तरह की अफवाह पर ध्यान न दें और केवल आधिकारिक स्रोतों पर ही भरोसा करें। उपभोक्ताओं को सलाह दी गई है कि वे गैस बुकिंग के लिए डिजिटल प्लेटफॉर्म का ही इस्तेमाल करें।

IPL 2026: वानखेड़े में हिटमैन का धमाका, मुंबई की दमदार वापसी-लखनऊ को 6 विकेट से हराया

नई दिल्ली। आईपीएल 2026 के 47वें मुकाबले में मुंबई इंडियंस ने शानदार प्रदर्शन करते हुए लखनऊ सुपर जायंट्स को 6 विकेट से हराकर टूर्नामेंट में अपनी स्थिति मजबूत करने की कोशिश की। वानखेड़े स्टेडियम में खेले गए इस मुकाबले में दर्शकों को चौकों-छक्कों की बारिश देखने को मिली। पहले बल्लेबाजी करते हुए लखनऊ ने 20 ओवर में 5 विकेट खोकर 228 रनों का विशाल स्कोर खड़ा किया। टीम की शुरुआत जोश इंग्लिस और मिचेल मार्श ने तेज अंदाज में की। हालांकि इंग्लिस जल्दी आउट हो गए, लेकिन मार्श ने पारी को संभाला। इसके बाद निकोलस पूरन ने विस्फोटक बल्लेबाजी करते हुए महज 21 गेंदों में 63 रन ठोक दिए, जिसमें 8 छक्के शामिल थे। मार्श (44 रन) के साथ उनकी साझेदारी ने टीम को मजबूत स्थिति में पहुंचाया। अंत में एडेन मार्करम (नाबाद 31) और हिम्मत सिंह (नाबाद 40) ने टीम को 228 तक पहुंचाया।  रोहित-रिकेल्टन की जोड़ी ने पलटा मैच229 रनों के बड़े लक्ष्य का पीछा करने उतरी मुंबई इंडियंस की शुरुआत धमाकेदार रही। लंबे समय बाद वापसी कर रहे रोहित शर्मा ने आक्रामक अंदाज दिखाया और रयान रिकेल्टन के साथ पहले विकेट के लिए 143 रन की बड़ी साझेदारी की। रिकेल्टन ने 32 गेंदों में 83 रन की तूफानी पारी खेली, जिसमें 8 छक्के और 6 चौके शामिल थे। वहीं रोहित शर्मा ने कप्तानी पारी खेलते हुए 44 गेंदों में 84 रन बनाए और टीम को जीत की राह पर बनाए रखा। मिडिल ऑर्डर ने निभाई जिम्मेदारीरिकेल्टन और रोहित के आउट होने के बाद तिलक वर्मा और सूर्यकुमार यादव ने छोटी लेकिन अहम पारियां खेलीं। अंत में नमन धीर (नाबाद 23) और विल जैक्स (नाबाद 10) ने संयम दिखाते हुए टीम को 18.4 ओवर में जीत दिला दी। लखनऊ की ओर से मणिमारन सिद्धार्थ ने 2 विकेट लिए, जबकि मोहम्मद शमी और मोहसिन खान को 1-1 सफलता मिली। पॉइंट्स टेबल पर असरइस जीत के साथ मुंबई इंडियंस ने प्लेऑफ की उम्मीदों को जिंदा रखा है, जबकि लखनऊ सुपर जायंट्स की मुश्किलें और बढ़ गई हैं और टीम निचले पायदान पर बनी हुई है।

बूढ़ा मंगल 2026: हनुमान जी की भक्ति में रचा जाएगा आस्था का महापर्व

नई दिल्ली। प्रथम बूढ़ा मंगल 2026 इस बार श्रद्धा और भक्ति के एक बड़े पर्व के रूप में मनाया जाएगा, जिसमें उत्तर भारत के कई प्रमुख शहरों में आस्था का विशेष माहौल देखने को मिलेगा। जेठ माह के मंगलवारों को मनाया जाने वाला यह पर्व विशेष रूप से हनुमान जी की आराधना के लिए जाना जाता है, जहां भक्त संकट मोचन की पूजा-अर्चना कर अपने जीवन में सुख, शांति और समृद्धि की कामना करते हैं। यह परंपरा लंबे समय से चली आ रही है और आज भी उतनी ही आस्था के साथ निभाई जाती है। इस दिन हनुमान मंदिरों में सुबह से ही श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ने लगती है। भक्त हनुमान चालीसा, सुंदरकांड और भजन-कीर्तन के माध्यम से अपनी भक्ति प्रकट करते हैं। कई स्थानों पर हनुमान जी को चोला चढ़ाने की परंपरा भी निभाई जाती है, जिसे अत्यंत शुभ माना जाता है। मंदिरों में पूरा वातावरण भक्ति और ऊर्जा से भर जाता है, जिससे एक अलग ही आध्यात्मिक अनुभूति का माहौल बनता है। बूढ़ा मंगल के अवसर पर केवल पूजा-पाठ ही नहीं बल्कि सेवा कार्यों का भी विशेष महत्व होता है। जगह-जगह भंडारों का आयोजन किया जाता है, जहां श्रद्धालुओं को प्रसाद के रूप में भोजन कराया जाता है। इसके साथ ही ठंडाई, लस्सी और पानी की प्याऊ जैसी व्यवस्थाएं भी की जाती हैं, जिससे राहगीरों और भक्तों को सुविधा मिल सके। यह परंपरा सेवा और समर्पण की भावना को और मजबूत करती है। यह पर्व मुख्य रूप से उत्तर प्रदेश के कई जिलों में बड़े स्तर पर मनाया जाता है, जहां इसे धार्मिक और सामाजिक दोनों दृष्टिकोण से अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है। शहरों और कस्बों में इस दिन विशेष तैयारियां की जाती हैं और पूरे क्षेत्र में उत्सव जैसा वातावरण बन जाता है। बूढ़ा मंगल को लेकर एक दिलचस्प बात यह भी है कि अलग-अलग क्षेत्रों में इसे अलग नामों और परंपराओं के साथ मनाया जाता है, लेकिन इसकी मूल भावना एक ही रहती है—हनुमान जी के प्रति अटूट श्रद्धा और सेवा भाव। कहीं इसे बड़ा मंगल कहा जाता है तो कहीं बूढ़ा मंगल के रूप में जाना जाता है, लेकिन उद्देश्य हमेशा भक्ति और कल्याण की भावना ही रहता है। यह पर्व न केवल धार्मिक आस्था को मजबूत करता है, बल्कि समाज में सेवा और सहयोग की भावना को भी बढ़ाता है। हनुमान जी की भक्ति के साथ जब लोग मिलकर सेवा कार्यों में भाग लेते हैं, तो यह त्योहार एक सामूहिक उत्सव का रूप ले लेता है। प्रथम बूढ़ा मंगल इसी परंपरा को आगे बढ़ाते हुए श्रद्धा, सेवा और समर्पण का संदेश देता है, जो समाज में सकारात्मक ऊर्जा का संचार करता है।