बंगाल में नई सरकार का शपथ ग्रहण 9 मई को…. कौन होगा CM? अमित शाह खुद जाएंगे कोलकाता

कोलकाता। पश्चिम बंगाल (West Bengal.) में भाजपा (BJP) की शानदार जीत के बाद अब नई सरकार के गठन की तैयारी तेज हो गई है। शपथ ग्रहण नौ मई को कोलकाता (Kolkata.) के ब्रिगेड परेड ग्राउंड (Brigade Parade Ground) में सुबह दस बजे होने की संभावना है। सूत्रों का कहना है कि कार्यक्रम की तैयारियां शुरू हो गई हैं। मुख्यमंत्री के नाम पर मुहर लगते ही तैयारियों को अंतिम रूप दिया जाएगा। सूत्रों की मानें तो आठ मई को भाजपा विधायकों की बैठक होगी। इस सबमें सबसे अहम बात है पर्यवेक्षक के तौर पर केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह (Amit Shah) का बंगाल जाना। अमित शाह (Amit Shah) के भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष बनने के बाद शायद यह पहला मौका होगा कि जब वह किसी राज्य के नतीजे सामने आने के बाद बतौर पर्यवेक्षक उस राज्य का दौरा करेंगे। भाजपा के इतिहास पर नजर डालें तो यह कोई सामान्य घटना नहीं है। ऐसे में कयासों का दौर शुरू हो चुका है। कौन बनेगा बंगाल का मुख्यमंत्री?भाजपा ने असम और बंगाल में शानदार जीत दर्ज की है। असम में मुख्यमंत्री की कुर्सी के लिए वर्तमान मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा (Chief Minister Himanta Biswa Sarma) का नाम तय माना जा रहा है। पूरे देश की निगाहें बंगाल पर टिकी हुई हैं। राज्य में सरकार बनाने की कवायद के बीच केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह गुरुवार को पश्चिम बंगाल दौरे पर जा सकते हैं। भाजपा सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार शपथ ग्रहण से पहले गृह मंत्री का दौरा कई मायनों में अहम है। पर्यवेक्षक के रूप में गृह मंत्री दौरे के दौरान कई अहम फैसले कर सकते हैं। इसमें मुख्यमंत्री के साथ कैबिनेट मंत्रियों के नाम पर रणनीति बनेगी। बैठक में पश्चिम बंगाल में पार्टी के कई वरिष्ठ नेता शामिल हो सकते हैं। बंगाल के भाजपा के पहले मुख्यमंत्री बनने की रेस में शुभेंदु अधिकारी का नाम सबसे आगे चल रहा है। वह ममता बनर्जी के कार्यकाल में नेता प्रतिपक्ष की भूमिका निभा चुके हैं। इसके अलावा, उन्हें पार्टी ने दो दो सीटों से उतारा था। उन्होंने नंदीग्राम और भवानीपुर दोनों ही सीटों पर टीएमसी को मात दी है। पिछली बार उन्होंने नंदीग्राम में ममता बनर्जी को हराया था। इस चुनाव में उन्होंने भवानीपुर में भी ममता को ही मात दी है। इससे उनका कद भाजपा में और बड़ा हो गया है। हालांकि अमित शाह के पर्यवेक्षक बनाए जाने के बाद से यह चर्चा जरूर होने लगी है कि अगर सबकुछ सामान्य तरीके से होना होता तो गृह मंत्री खुद बतौर पर्यवेक्षक बंगाल का दौरा नहीं करते। शुभेंदु नहीं तो कौन बनेगा बंगाल का CM?भारतीय जनता पार्टी ने राज्यों में मुख्यमंत्री चुनने में हमेशा से चौंकाने वाले फैसले लिए हैं। राजस्थान, छत्तीसगढ़, मध्य प्रदेश और दिल्ली इसका ताजा उदाहरण हैं। तमाम कयासों पर विराम लगाते हुए भाजपा ने ऐसे नाम को आगे बढ़ाया जिसकी किसी ने कल्पना भी नहीं की थी। अब अमित शाह के दौरे के बाद से सवाल उठ रहा है कि बंगाल में भी भाजपा ऐसा ही कुछ तो नहीं करने जा रही है। हालांकि, बाकी राज्यों की तुलना में बंगाल की स्थिति काफी अलग है। यहां भाजपा को ऐसे नेतृत्व की जरूरत होगी जो पार्टी के भविष्य के हित में हो।
भोजशाला मामले में अब जैन समाज की एंट्री…. मांगी पूजा की इजाजत… ASI पर लगाया ये आरोप

इंदौर। मध्य प्रदेश (Madhya Pradesh) में धार (Dhar ) की ऐतिहासिक भोजशाला (Historic Bhojshala) को लेकर मध्य प्रदेश हाईकोर्ट (Madhya Pradesh High Court) की इंदौर खंडपीठ (Indore Bench) में चल रही सुनवाई अब नए मोड़ पर पहुंच गई है। अब इस बहुचर्चित विवाद में जैन समाज की एंट्री ने कानूनी और धार्मिक बहस को और तेज कर दिया है। जैन समाज की ओर से दायर जनहित याचिका में दावा किया गया है कि भोजशाला मूल रूप से जैन धरोहर रही है, जहां प्राचीन काल में जैन गुरुकुल और मंदिर संचालित होते थे। सुनवाई के दौरान कोर्ट ने जैन समाज की जनहित याचिका को मुख्य याचिका के साथ टैग कर लिया। इसके बाद अब भोजशाला विवाद में जैन पक्ष की कानूनी मौजूदगी भी मजबूत से दर्ज हो गई है। इस मामले में बुधवार को इंदौर हाईकोर्ट में हुई सुनवाई के दौरान जैन समाज की ओर से सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ अधिवक्ता दिनेश प्रसाद राजभर ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए पक्ष रखा। राजभर ने ऐतिहासिक दस्तावेजों और प्राचीन संदर्भों का हवाला देते हुए कोर्ट को बताया कि राजा भोज ने यह भूमि जैन आचार्य मानतुंग को दान में दी थी। मानतुंग वही आचार्य हैं जिन्होंने जैन धर्म के प्रसिद्ध धार्मिक सूत्र ‘भक्तामर स्तोत्र’ की रचना की थी। उन्होंने दावा किया कि भोजशाला परिसर में कभी जैन मंदिर और गुरुकुल हुआ करता था, साथ ही उन्होंने भारतीय संविधान के धर्मनिरपेक्ष स्वरूप पर जोर देते हुए कहा, ‘देश के संविधान के तहत जैन धर्म के अनुयायियों को भोजशाला परिसर में पूजा का अधिकार है।’ भोजशाला की संरचना में जैन वास्तुकला का स्पष्ट उल्लेखराजभर ने तर्क दिया कि धार के राजा भोज हिंदू और जैन, दोनों धर्मों के विद्वानों के संरक्षक थे। उनके अनुसार भोजशाला में संचालित शिक्षण केंद्र में जैन विद्वान भी मौजूद थे। राजभर ने ऐतिहासिक लेखों और पुरातात्विक सामग्री के हवाले से दावा किया कि भोजशाला की संरचना के कुछ हिस्सों में जैन वास्तुकला का स्पष्ट प्रभाव दिखाई देता है। कुछ-कुछ देलवाड़ा के जैन मंदिरों जैसी है स्थापत्य कलाउन्होंने शिमला की ‘गवर्नमेंट सेंट्रल प्रेस’ द्वारा 1882 में प्रकाशित रिपोर्ट और अन्य प्रकाशनों का जिक्र भी किया जिसमें विवादित परिसर की मस्जिद के कुछ हिस्सों को जैन समुदाय से जुड़ी इमारतों के अवशेषों से निर्मित बताया गया था और इसके कुछ गुंबदों तथा खंभों की तुलना माउंट आबू स्थित प्रसिद्ध देलवाड़ा जैन मंदिरों से की गई थी। ‘लंदन में रखी मूर्ति जैन यक्षिणी अम्बिका देवी की’राजभर ने कुछ चित्रों और संग्रहालय के विवरणों का हवाला देते हुए कहा कि लंदन के ब्रिटिश म्यूजियम में रखी जिस मूर्ति को हिंदू समुदाय वाग्देवी (देवी सरस्वती) की प्रतिमा बता रहा है, वह असल में जैन यक्षिणी अम्बिका की मूर्ति है। उन्होंने तर्क दिया कि इस मूर्ति में जैन तीर्थंकरों के प्रतीक चिन्ह हैं और यह विशिष्ट खूबी इसे देवी सरस्वती की हिंदू शैली की प्रतिमाओं से अलग करती है। राजभर बोले- सरकार का रवैया संदेह पैदा कर रहाराजभर ने यह भी कहा कि एएसआई ने भोजशाला के वैज्ञानिक सर्वेक्षण की रिपोर्ट में इस स्मारक से जैन समुदाय के ऐतिहासिक संबंधों को नजरअंदाज कर दिया। उन्होंने कहा कि ऐसा लगता है कि सरकार विवादित स्मारक को लेकर एक वर्ग के दावों का सीधे तौर पर समर्थन कर रही है और उसका यह रवैया संदेह उत्पन्न करता है। ASI पर लगाया जैन सबूतों को अनदेखा करने का आरोपउधर जैन समाज की तरफ से अधिवक्ता प्रिया जैन ने मीडिया से बातचीत करते हुए इस मामले की जानकारी दी और दावा किया कि ASI (भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण) की हालिया सर्वे रिपोर्ट में भोजशाला में मिले जैन सबूतों को अनदेखा किया गया। प्रिया के अनुसार ASI की खुदाई व सर्वे में भोजशाला से जैन तीर्थंकरों और यक्ष-यक्षणियों की कई खंडित मूर्तियां मिली हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि एएसआई ने अपनी रिपोर्ट में इन अवशेषों को स्पष्ट रूप से जैन धर्म से जुड़ा नहीं बताया। जैन तीर्थकरों और यक्ष-यक्षणियों की खंडित मूर्तियां मिलींप्रिया जैन के मुताबिक सर्वे के दौरान सात फणों वाली ‘सप्त फणी कैनोपी’ संरचना भी सामने आई है, जो जैन प्रतीकों से मेल खाती है। उन्होंने कहा कि जैन समाज की यह लड़ाई किसी धर्म के विरोध में नहीं, बल्कि ऐतिहासिक सच्चाई और संवैधानिक अधिकारों की मांग को लेकर है। जैन समाज ने यह भी दावा किया कि लंदन में संरक्षित वाग्देवी प्रतिमा और उससे जुड़े शिलालेख भोजशाला के जैन इतिहास की पुष्टि करते हैं। इन्हीं तथ्यों के आधार पर समाज ने भोजशाला परिसर में पूजा-अर्चना के समान अधिकार की मांग हाईकोर्ट से की है। हिंदू समाज जिसे देवी सरस्वती की मूर्ति बताता है, वह असल में जैन धर्म की यक्षिणी अम्बिका देवी की मूर्ति है। फोटो में लंदन म्यूजियम में रखी मूर्ति व उसके साथ लिखा उसका परिचय दिख रहा है। खुर्शीद ने लंदन में रखी मूर्ति को लेकर भी किया था अलग दावाइससे पहले कुछ दिनों पहले हुई मामले की सुनवाई के दौरान मुस्लिम पक्ष की ओर से पेश हुए वरिष्ठ अधिवक्ता सलमान खुर्शीद ने कहा था कि धार में स्थित भोजशाला पर पहला हमला मुस्लिमों ने नहीं, बल्कि गुजरात के सोलंकी शासकों ने किया था, साथ ही उन्होंने यह भी कहा था कि लंदन के म्यूजियम में रखी जिस प्रतिमा को हिंदू समाज वाग्देवी की बता रहा है वह असल में जैन समुदाय की देवी अम्बिका की मूर्ति है। अपने दावे के समर्थन में खुर्शीद ने लेखक रामसेवक गर्ग की लिखी पुस्तक और 2003 में लिखे गए ब्रिटिश म्यूजियम के पत्र का हवाला भी दिया था। उन्होंने कोर्ट को बताया था कि ‘धार को पहले गुजरात के सोलंकी शासकों ने तहस-नहस किया था, जबकि मुस्लिम शासकों ने उजड़े ढांचे को फिर से व्यवस्थित किया था।’ इसके साथ ही खुर्शीद ने साल 2003 में ब्रिटिश उच्चायोग की ओर से मध्यप्रदेश के तत्कालीन मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह को भेजे पत्र का हवाला दिया था और यह दावा भी किया कि लंदन के ब्रिटिश म्यूजियम में रखी जिस मूर्ति को हिंदू पक्ष के याचिकाकर्ता भोजशाला की वाग्देवी (देवी सरस्वती) की प्रतिमा बता रहे हैं, वह असल में जैन समुदाय की देवी अम्बिका की मूर्ति है। बता दें कि भोजशाला को हिंदू समुदाय वाग्देवी (देवी सरस्वती) का मंदिर मानता है, जबकि मुस्लिम पक्ष इस स्मारक को कमाल मौला मस्जिद बताता है।
अंतरिक्ष में धरती से 30% बड़े ‘सुपर-अर्थ’ की सतह का पहली बार अध्ययन, जेम्स वेब टेलीस्कोप ने खोले रहस्य

वॉशिंगटन। अंतरिक्ष विज्ञान में एक ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल करते हुए वैज्ञानिकों ने पहली बार किसी दूरस्थ चट्टानी ग्रह की सतह का विस्तृत अध्ययन किया है। यह शोध जेम्स वेब स्पेस टेलीस्कोप की मदद से किया गया है, जिसमें एलएचएस 3844 बी नामक एक सुपर-अर्थ ग्रह के बारे में अहम जानकारियां सामने आई हैं। वैज्ञानिकों का मानना है कि यह ग्रह हमारे सौरमंडल के बुध ग्रह जैसा बेहद गर्म, अंधकारमय और पूरी तरह निर्जीव हो सकता है। इस अध्ययन के निष्कर्ष प्रतिष्ठित जर्नल ‘नेचर एस्ट्रोनॉमी’ में प्रकाशित हुए हैं। धरती से 48.5 प्रकाश-वर्ष दूर मौजूद है यह ग्रहएलएचएस 3844 बी पृथ्वी से लगभग 48.5 प्रकाश-वर्ष दूर स्थित है और आकार में हमारे ग्रह से करीब 30% बड़ा है। इसे सुपर-अर्थ श्रेणी में रखा गया है। सुपर-अर्थ वे ग्रह होते हैं जो पृथ्वी से बड़े तो होते हैं, लेकिन गैसीय दानव ग्रहों जितने विशाल नहीं होते। बेहद तेज कक्षा में घूमता है ग्रहयह ग्रह अपने तारे के बेहद करीब है और केवल 11 घंटे में अपने तारे का एक चक्कर पूरा कर लेता है। इस तेज परिक्रमा के कारण इसकी सतह पर अत्यधिक तापमान और कठोर परिस्थितियां बनी रहती हैं। वातावरण का कोई संकेत नहींशोध में यह पाया गया है कि ग्रह पर किसी भी प्रकार का वातावरण मौजूद नहीं है। न तो वहां गैसीय परत है जो तापमान को नियंत्रित कर सके और न ही सतह को विकिरण से बचा सके। इसका मतलब यह है कि ग्रह सीधे अंतरिक्षीय विकिरण और उल्कापिंडों के प्रभाव में रहता है। बेसाल्ट जैसी चट्टानी सतह के संकेतवैज्ञानिकों के अनुसार इस ग्रह की सतह पृथ्वी जैसी नहीं है। प्रारंभिक विश्लेषण से संकेत मिले हैं कि इसकी सतह बेसाल्ट चट्टानों से बनी हो सकती है, जो ज्वालामुखीय लावा के ठंडा होने से बनती हैं। एमआईआरआई उपकरण ने निभाई अहम भूमिकाइस अध्ययन में जेम्स वेब टेलीस्कोप पर लगे मिड-इंफ्रारेड इंस्ट्रूमेंट (MIRI) ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। इस उपकरण ने ग्रह से आने वाली इन्फ्रारेड रोशनी का विश्लेषण किया और सतह के तापीय गुणों का अध्ययन संभव बनाया। वैज्ञानिक सीधे ग्रह की तस्वीर लेने में सफल नहीं हो सके, लेकिन ग्रह और उसके तारे से आने वाले प्रकाश में सूक्ष्म बदलावों का विश्लेषण कर स्पेक्ट्रम तैयार किया गया, जिससे उसकी सतह की संरचना का अनुमान लगाया गया। भविष्य की खोजों के लिए बड़ी उम्मीदविशेषज्ञों का मानना है कि यह खोज भविष्य में अन्य चट्टानी ग्रहों की सतह और भूगर्भीय इतिहास को समझने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। इससे यह संभावना बढ़ती है कि आने वाले समय में दूरस्थ ग्रहों पर जीवन की संभावनाओं की भी गहराई से जांच की जा सकेगी।
पंजाब में हाई अलर्ट…. ऑपरेशन सिंदूर की सालगिरह से पहले सैन्य ठिकानों पर ब्लास्ट के बाद बढ़ाई सुरक्षा

नई दिल्ली। ऑपरेशन सिंदूर (Operation Sindoor) की सालगिरह से ठीक पहले पंजाब (Punjab) में दो सैन्य ठिकानों के बाहर हुए धमाकों के बाद पंजाब (Punjab) में हाई अलर्ट (High alert) जारी किया गया है। पूरे पंजाब में सुरक्षा बढ़ा दी गई है, आर्मी बेस, पैरामिलिट्री कैंप और दूसरे जरूरी आधारभूत संरचना के आसपास पेट्रोलिंग बढ़ा दी गई है और चेकपॉइंट बनाए गए हैं। बॉर्डर पर भी बीएसएफ ने चौकसी बढ़ा दी है। मंगलवार शाम को जालंधर के बॉर्डर सिक्योरिटी फोर्स (बीएसएफ) के पंजाब फ्रंटियर हेडक्वार्टर के पास और इसी रात अमृतसर में आर्मी के खासा कैंप के पास धमाके हुए थे। अब एनआईए, पंजाब पुलिस और केंद्रीय खुफिया एजेंसियों के साथ मिलकर यह पता लगा रही है कि क्या धमाके के तार आपस में जुड़े हुए थे? धमाकों के समय ने जांच में एक और पहलू जोड़ दिया है और वह है ऑपरेशन सिंदूर की सालगिरह। हालांकि, अधिकारियों ने कोई सीधा कनेक्शन नहीं निकाला है, लेकिन उन्होंने कहा कि इस इत्तेफाक को बड़े सुरक्षा मूल्यांकन में शामिल किया जा रहा है क्योंकि बॉर्डर स्टेट पंजाब पहले भी कई आतंकी हमले झेल चुका है। ऑपरेशन सिंदूर में भी पाकिस्तान ने पंजाब के सरहदी जिलों पठानकोट, अमृतसर, फिरोजपुर, जालंधर के आदमपुर एयरबेस को निशाना बनाने की कोशिश की थी, जिसे भारतीय सुरक्षा बलों ने नाकाम कर दिया था। सेना ने बोर्डर से सटे इलाकों में सर्च ऑपरेशन चलायाखुफिया एजेंसियों से इनपुट मिलने के बाद पठानकोट, गुरदासपुर, अमृतसर, तरनतारन, फिरोजपुर और फाजिल्का में सतर्कता बढ़ाई गई है। फिरोजपुर कैंट रेलवे स्टेशन और विभिन्न बॉर्डर चौकियों पर पुलिस नाके लगाकर तलाशी अभियान तेज किया गया है। सुरक्षा के लिहाज से अति संवेदनशील एवं सीमावर्ती जिला पठानकोट में पुलिस ने सुरक्षा प्रबंध कड़े कर दिए हैं। पठानकोट के साथ लगते जम्मू-कश्मीर व हिमाचल के इंटर स्टेट नाकों पर पुलिस ने सुरक्षा को पुख्ता करने के लिए फोर्स बढ़ा दी है। पठानकोट की बड़ी सीमा पाकिस्तान के साथ सटी है। बुधवार को पठानकोट पुलिस और सेना की ओर से भारत-पाक सीमा से सटे इलाकों में सर्च ऑपरेशन चलाया गया। जम्मू और हिमाचल प्रदेश को जोड़ने वाले सभी एंट्री पॉइंट्स पर पुलिस की पैनी नजर है। हर आने-जाने वाले वाहन की बारीकी से तलाशी ली जा रही है। संदिग्धों से पूछताछ की जा रही है और बिना पहचान पत्र के किसी को भी सीमा पार करने की अनुमति नहीं दी जा रही है। एसएसपी पठानकोट दलजिंदर सिंह ढिल्लो के दिशा निर्देशों के अनुसार पूरे जिले में सुरक्षा कड़ी कर दी गई है। कल रात से ही पठानकोट के साथ लगते जम्मू व हिमाचल से आने वाली हर गाड़ी को चेक किया जा रहा है। चंडीगढ़ में पंजाब पुलिस के मुख्यालय पर हाई सिक्योरिटीपंजाब में दोहरे ब्लास्ट के बाद राजधानी चंडीगढ़ में सुरक्षा कड़ी कर दी गई है। सेक्टर-9 स्थित पंजाब पुलिस मुख्यालय के मुख्य गेट के बाहर अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किया गया है और आने-जाने वाले हर व्यक्ति की सख्ती से जांच की जा रही है। पुलिस अधिकारियों के मुताबिक सुरक्षा व्यवस्था में तत्काल बदलाव एहतियात के तौर पर किया गया है, क्योंकि यह इलाका पहले से ही संवेदनशील श्रेणी में आता है। मुख्यालय के पास ही चंडीगढ़ पुलिस का दफ्तर और पंजाब के राज्यपाल व चंडीगढ़ प्रशासक गुलाब चंद कटारिया का कार्यालय होने की वजह से सुरक्षा एजेंसियां कोई जोखिम नहीं लेना चाहतीं। पंजाब पुलिस मुख्यालय के मुख्य गेट के पीछे लोहे के बड़े बड़े गेट लगाए गए हैं ताकि बाहर से कोई विस्फोटक परिसर में न फैंका जा सके। आईएसआई, खालिस्तानी और गैंगस्टरों के गठजोड़ से बढ़ी चिंताएंपंजाब में एक बार फिर सुरक्षा हालात को लेकर गंभीर चिंता सामने आ रही है। पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी आईएसआई, खालिस्तानी आतंकी नेटवर्क और गैंगस्टर-आतंकी गठजोड़ के सक्रिय होने के संकेत मिल रहे हैं। हाल के घटनाक्रम और सुरक्षा एजेंसियों की कार्रवाई से साफ है कि राज्य को अस्थिर करने की कोशिशें सुनियोजित तरीके से की जा रही हैं। अंतरराष्ट्रीय सीमा से ड्रोन के जरिए हथियारों और विस्फोटकों की तस्करी बड़ी चुनौती बन चुकी है। अमृतसर और फिरोजपुर सेक्टर में कई बार पाकिस्तान से ड्रोन के माध्यम से हथियार गिराए जाने के मामले सामने आए हैं। जांच में पता चला है कि इन गतिविधियों के पीछे पाकिस्तान में बैठे हैंडलर्स और विदेशों में सक्रिय खालिस्तानी आतंकी शामिल हैं। इनमें रंजीत नीटा और लखबीर लंडा जैसे नाम प्रमुख हैं। हालांकि पंजाब पुलिस और केंद्रीय एजेंसियों की सतर्कता से कई साजिशें नाकाम हुई हैं। इसके बावजूद सीमा पार से मिल रहे समर्थन और स्थानीय नेटवर्क के कारण चुनौती बनी हुई है।
शुभेंदु अधिकारी को नजरअंदाज करना BJP के लिए मुश्किल, बंगाल में मुख्यमंत्री चयन पर बढ़ा सस्पेंस

नई दिल्ली। पश्चिम बंगाल में पहली बार सरकार बनाने की स्थिति में पहुंची भारतीय जनता पार्टी के भीतर मुख्यमंत्री चेहरे को लेकर सियासी गतिविधियां तेज हो गई हैं। इस बीच पार्टी नेतृत्व में नाम को लेकर गंभीर विचार-विमर्श चल रहा है और जल्द ही अंतिम फैसला होने की संभावना है। सूत्रों के अनुसार, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के गुरुवार को कोलकाता पहुंचने की संभावना है, जबकि शुक्रवार शाम भाजपा विधायक दल की अहम बैठक प्रस्तावित है, जिसमें राज्य के नए मुख्यमंत्री के नाम पर अंतिम मुहर लग सकती है। इसी बीच शुभेंदु अधिकारी के निजी सहायक चंद्रनाथ रथ की गोली मारकर हत्या की घटना ने राज्य की राजनीति में तनाव और बढ़ा दिया है। सीएम पद की रेस में कई चेहरेमुख्यमंत्री पद के लिए कई नामों पर चर्चा चल रही है। राजनीतिक हलकों में यह भी माना जा रहा है कि ममता बनर्जी के विकल्प के तौर पर किसी महिला चेहरे को आगे लाने पर विचार हो सकता है, जिसमें अग्निमित्रा पॉल और रूपा गांगुली के नाम शामिल हैं। इसके अलावा संगठनात्मक अनुभव के आधार पर प्रदेश अध्यक्ष शमिक भट्टाचार्य और पूर्व अध्यक्ष दिलीप घोष के नाम भी चर्चा में हैं। हालांकि इन सभी के बीच सबसे ज्यादा चर्चा और कार्यकर्ताओं का झुकाव शुभेंदु अधिकारी की ओर देखा जा रहा है। शुभेंदु अधिकारी क्यों हैं सबसे मजबूत दावेदार?शुभेंदु अधिकारी को भाजपा की चुनावी सफलता का अहम चेहरा माना जा रहा है। 2021 में नंदीग्राम में और बाद में भवानीपुर जैसे हाई-प्रोफाइल मुकाबलों में उन्होंने सत्ताधारी टीएमसी नेतृत्व को कड़ी चुनौती दी। पूर्व में तृणमूल कांग्रेस के रणनीतिकार रह चुके शुभेंदु को राज्य की राजनीति की गहरी समझ रखने वाला नेता माना जाता है। 2020 में भाजपा में शामिल होने के बाद उन्होंने संगठन को जमीन पर मजबूत करने में बड़ी भूमिका निभाई। कार्यकर्ताओं की पहली पसंदपार्टी के अंदरूनी सूत्रों के मुताबिक, जमीनी कार्यकर्ता शुभेंदु अधिकारी को ही मुख्यमंत्री के रूप में देखना चाहते हैं। उनका मानना है कि उन्होंने लगातार टीएमसी के खिलाफ संघर्ष किया और राज्य में भाजपा को मजबूत पहचान दिलाई। नजरअंदाज करने के संभावित खतरेराजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यदि भाजपा नेतृत्व शुभेंदु अधिकारी को मुख्यमंत्री नहीं बनाता है तो इसका असर संगठन पर पड़ सकता है। इससे उन कार्यकर्ताओं का मनोबल गिर सकता है जिन्होंने चुनाव में कड़ी मेहनत की है। साथ ही, शुभेंदु का प्रशासनिक अनुभव, क्योंकि वे पहले राज्य सरकार में मंत्री रह चुके हैं, नए शासन संचालन में बेहद अहम माना जा रहा है। क्या भाजपा करेगी सरप्राइज फैसला?भाजपा का इतिहास रहा है कि वह कई बार अप्रत्याशित फैसले लेकर सभी को चौंकाती है। ऐसे में शमिक भट्टाचार्य या अग्निमित्रा पॉल जैसे नामों को भी अंतिम क्षण में आगे किया जा सकता है। फिलहाल राजनीतिक गलियारों में सबसे बड़ा सवाल यही है क्या भाजपा शुभेंदु अधिकारी पर भरोसा जताएगी या फिर कोई नया चेहरा सामने लाकर सबको चौंका देगी?
भारतीय राजनीति के 5 सबसे चौंकाने वाले गठबंधन, जब सत्ता के लिए धुर विरोधियों ने मिलाया हाथ

नई दिल्ली। भारतीय राजनीति में स्थायी दोस्ती या स्थायी दुश्मनी जैसी कोई चीज नहीं मानी जाती। यहां समीकरण बदलते देर नहीं लगती और अक्सर वही नेता, जो कल तक एक-दूसरे पर तीखे हमले कर रहे होते हैं, आज सत्ता की जरूरत में साथ खड़े नजर आते हैं। विचारधाराएं पीछे छूट जाती हैं और कुर्सी सबसे आगे आ जाती है। देश के राजनीतिक इतिहास में ऐसे कई उदाहरण हैं जिन्होंने जनता को हैरान कर दिया। 1. आम आदमी पार्टी और कांग्रेस: 49 दिन का अनोखा साथदिल्ली की राजनीति में साल 2013 के बाद एक अप्रत्याशित मोड़ आया। अरविंद केजरीवाल के नेतृत्व वाली आम आदमी पार्टी ने भ्रष्टाचार के मुद्दे पर कांग्रेस को सबसे बड़ा विरोधी बनाया था। लेकिन विधानसभा चुनाव में बहुमत से दूर रहने के बाद कांग्रेस के 8 विधायकों के बाहरी समर्थन से केजरीवाल पहली बार मुख्यमंत्री बने। यह गठबंधन ज्यादा दिन नहीं चला और महज 49 दिनों में सरकार गिर गई। 2. भाजपा और पीडीपी: जम्मू-कश्मीर का अप्रत्याशित मेलजम्मू-कश्मीर में 2015 से 2018 तक का समय भी राजनीतिक दृष्टि से बेहद चौंकाने वाला रहा, जब महबूबा मुफ्ती की पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी ने भारतीय जनता पार्टी के साथ मिलकर सरकार बनाई। वैचारिक रूप से दोनों दलों के बीच गहरा अंतर था, लेकिन सत्ता की मजबूरी में यह गठबंधन बना। 2018 में मतभेद बढ़ने पर यह सरकार गिर गई। 3. नीतीश-लालू की जोड़ी: बिहार की सियासी करवटेंबिहार की राजनीति में नीतीश कुमार और लालू प्रसाद यादव की साझेदारी और टकराव दोनों ही बार-बार देखने को मिले हैं। एक समय नीतीश ने लालू की राजनीति का विरोध कर अलग राह बनाई, लेकिन 2015 में दोनों ने साथ मिलकर सरकार बनाई। बाद में फिर गठबंधन टूटा और नीतीश ने कई बार राजनीतिक पाला बदला, जिससे यह राज्य गठबंधन राजनीति का सबसे बड़ा उदाहरण बन गया। 4. महाराष्ट्र में शिवसेना, कांग्रेस और एनसीपी का साथमहाराष्ट्र की राजनीति में 2019 के बाद बड़ा उलटफेर हुआ, जब शिवसेना ने वैचारिक रूप से विपरीत मानी जाने वाली कांग्रेस और एनसीपी के साथ मिलकर महा विकास अघाड़ी सरकार बनाई। दशकों तक बीजेपी के साथ रही शिवसेना का यह कदम राजनीति में बड़ा यू-टर्न माना गया। 5. उत्तर प्रदेश में सपा-बसपा गठबंधन2019 के लोकसभा चुनाव में अखिलेश यादव की समाजवादी पार्टी और मायावती की बहुजन समाज पार्टी ने लंबे समय की दुश्मनी भुलाकर गठबंधन किया। दोनों दलों का उद्देश्य भाजपा को रोकना था, हालांकि यह गठबंधन चुनावी सफलता में बड़ा असर नहीं डाल सका, लेकिन राजनीतिक रूप से बेहद चर्चा में रहा।
तमिलनाडु पुलिस ने विजय को दी गई CM जैसी सिक्योरिटी रातोंरात ली वापस… जानें इसकी वजह?

चेन्नई। तमिलनाडु पुलिस (Tamil Nadu Police) ने बुधवार (6 मई, 2026) रात को तमिझगा वेत्री कड़गम (Tamizhaga Vetri Kazhagam-TVK) के अध्यक्ष सी. जोसेफ विजय (C.Joseph Vijay) को दी गई कड़ी सुरक्षा और उनका काफिला वापस ले लिया है। आधिकारिक सूत्रों के मुताबिक, विजय को तमिलनाडु के मुख्यमंत्री के बराबर दी जा रही ‘जेड-प्लस’ स्तर की सुरक्षा प्रोटोकॉल को घटाकर अब न्यूनतम कर दिया गया है। क्यों बढ़ाई गई थी सुरक्षा?दरअसल, 4 मई को मतगणना के दौरान ही TVK की भारी जीत के शुरुआती संकेत मिलने लगे थे। इसके कुछ घंटों बाद ही पुलिस ने विजय के आवास और पार्टी कार्यालय पर सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी थी। पुलिस अधिकारियों का कहना था कि यह सुरक्षा TVK नेता के आवास पर पहुंचने वाले पार्टी कार्यकर्ताओं और प्रशंसकों की भारी भीड़ को नियंत्रित करने के लिए बढ़ाई गई थी। हालांकि, उनके रूट बंदोबस्त और अन्य सुरक्षा उपायों को देखकर यह साफ था कि उनकी सुरक्षा बढ़ाकर सीधे मुख्यमंत्री के स्तर की कर दी गई है। सुरक्षा व्यवस्था में कौन-कौन था तैनात?एक की रिपोर्ट के मुताबिक, विजय की सुरक्षा की निगरानी के लिए पुलिस उपमहानिरीक्षक (DIG) रैंक के एक वरिष्ठ अधिकारी को तैनात किया गया था। इसके साथ ही, राज्य पुलिस के सिक्योरिटी ब्रांच सीआईडी (CID) के एक दर्जन से अधिक सशस्त्र कमांडो ने सुरक्षा का जिम्मा संभाला था। सूत्रों के मुताबिक, सुरक्षा को पुख्ता करने के लिए एक ‘एक्सेस कंट्रोल सिस्टम’ भी लगाया गया था। इसके अलावा, पुलिस अधीक्षक (SP) रैंक के दो अन्य अधिकारियों को सीधे खुफिया विभाग के महानिरीक्षक (IG) को रिपोर्ट करने का निर्देश दिया गया था। इन अधिकारियों को अगले आदेश तक चुनाव से जुड़े जरूरी कामों के लिए विशेष ड्यूटी पर रखा गया था। अचानक क्यों वापस ली गई ‘Z-Plus’ सिक्योरिटी?एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने स्पष्ट किया कि यह सुरक्षा व्यवस्था TVK के वरिष्ठ नेताओं के अनुरोध के बाद ही वापस ली गई है। नाम न छापने की शर्त पर अधिकारी ने बताया, “वे (पार्टी नेता) नहीं चाहते थे कि विजय को ऐसा काफिला या वीआईपी सुरक्षा प्रोटोकॉल दिया जाए।” इसके बाद विशेष ड्यूटी पर लगाए गए तीनों बड़े अधिकारियों को भी वापस बुला लिया गया है और उन्हें उनकी पुरानी पोस्टिंग पर भेज दिया गया है। ‘Y’ श्रेणी की सुरक्षा रहेगी बरकरारराज्य पुलिस की विशेष सुरक्षा हटने के बाद भी विजय की सुरक्षा में कोई बड़ी चूक नहीं होगी, क्योंकि उनके पास केंद्र सरकार द्वारा दी गई ‘Y’ श्रेणी की सुरक्षा बरकरार रहेगी। जब भी वह कहीं सफर करते हैं या ठहरते हैं, तो केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (CRPF) के सशस्त्र गार्ड उन्हें सुरक्षा प्रदान करते हैं। इसके अलावा, अभिनेता से राजनेता बने विजय की सुरक्षा के लिए पार्टी द्वारा रखे गए निजी गार्ड भी तैनात रहते हैं। यात्रा और सार्वजनिक सभाओं के दौरान स्थानीय पुलिस भी जरूरत के हिसाब से जवानों की तैनाती करती है। सरकार बनने पर अभी भी संशयइससे पहले विजय ने बुधवार को तमिलनाडु के राज्यपाल राजेंद्र विश्वनाथ अर्लेकर से मुलाकात की और राज्य में सरकार बनाने का दावा पेश किया। कांग्रेस ने एक बड़े राजनीतिक बदलाव और नए गठजोड़ के तहत अभिनेता से राजनेता बने विजय की पार्टी को समर्थन देने की घोषणा की और चुनाव पूर्व सहयोगी द्रविड़ मुनेत्र कषगम (द्रमुक) से संबंध तोड़ लिए। द्रमुक और अन्नाद्रमुक के दशकों पुराने द्विध्रुवीय वर्चस्व को तोड़ते हुए टीवीके के सबसे बड़ी पार्टी के रूप में उभरने के दो दिन बाद राज्यपाल कार्यालय से निमंत्रण मिलने पर टीवीके प्रमुख ने लोक भवन में अर्लेकर से मुलाकात की और उन्हें समर्थन देने वाले कांग्रेस विधायकों की सूची सौंपी। हालांकि, लोक भवन के सूत्रों ने संकेत दिया कि विजय को सरकार बनाने के लिए आमंत्रित करने और शपथ ग्रहण समारोह आयोजित करने के संबंध में अभी तक कोई औपचारिक निर्णय नहीं लिया गया है, जिससे संकेत मिलता है कि राज्यपाल अर्लेकर विजय के पास समर्थन होने के दावे से पूरी तरह संतुष्ट नहीं थे। टीवीके ने 234 सदस्यीय विधानसभा में से 108 सीटें जीतीं, को सरकार बनाने के लिए आवश्यक बहुमत के आंकड़े से 10 कम है। कांग्रेस की पांच सीटों के साथ, विजय द्वारा जीती गई दो सीटों में से एक को छोड़कर, कुल संख्या 112 हो जाती है। पेरम्बूर और त्रिची पूर्व से चुनाव लड़ रहे टीवीके प्रमुख को एक सीट से इस्तीफा देना होगा। इससे बहुमत का आंकड़ा घटकर 117 हो जाएगा और टीवीके की सीटों की संख्या 107 रह जाएगी। एक नए राजनीतिक गठजोड़ में, कांग्रेस ने यहां अपनी विधायक दल की बैठक के बाद विजय की टीवीके को समर्थन देने की घोषणा की। साथ ही उसने द्रमुक से अलग होने की भी घोषणा की।
बंगाल में शुभेंदु अधिकारी के निज सहायक की हत्या…. भड़की BJP, अभिषेक बनर्जी पर लगाया आरोप

कोलकाता। पश्चिम बंगाल (West Bengal) में विधायक शुभेंदु अधिकारी (MLA Shubhendu Adhikari.) के निजी सहायक की हत्या का आरोप भारतीय जनता पार्टी (Bharatiya Janata Party leaders) नेताओं ने अभिषेक बनर्जी (Abhishek Banerjee) पर लगाया है। अभिषेक, राज्य की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी (Chief Minister Mamata Banerjee) के भतीजे हैं। भाजपा ने कहा है कि इस घटना का जवाब दिया जाएगा। साथ ही पुलिस से कहा है कि हत्या के जिम्मेदारों को कहीं से भी खोज कर लाया जाए। भाजपा के प्रदेश उपाध्यक्ष आनंद बनर्जी ने कहा, ‘हम लोग ये गुंडागर्दी बिल्कुल बर्दाश्त नहीं करेंगे। 2021 के चुनाव के बाद हमारे 300 कार्यकर्ताओं को टीएमसी के इन गुंडों ने कत्ल कर दिया, लेकिन हम राष्ट्रीय पार्टी हैं और हमारा अनुशासन है। ये सब हम बर्दाश्त नहीं करेंगे। हमने हमने अपने कार्यकर्ताओं को निर्देश दिया है कि टीएमसी वाला जो भड़का रहा है, उसमें मत जाइए। लेकिन आप उन्हें कब तक रोक कर रख सकते हैं? मैं कार्यकर्ताओं को धन्यवाद दे रहा हूं।’ उन्होंने कहा, ‘यह एक नियोजित हत्या थी। हमने पुलिस और प्रशासन को कहा है कि अगर पाताल में भी घुसा है, तो भी निकालिए। पश्चिम बंगाल में ये गुंडागर्दी नहीं चलने वाला है।’ अभिषेक बनर्जी पर लगाए आरोपभाजपा नेता अर्जुन सिंह ने कहा, ‘अभिषेक बनर्जी ने यह हत्या कराई है। वह एक मैसेज देना चाहते हैं कि हम सरकार में भले न हों, लेकिन तुम्हारे ऊपर भारी हैं। लेकिन वह मूर्ख है और हम लोगों के ऊपर भारी नहीं है। इसका जवाब मिलेगा।’ एक स्थानीय समाचार चैनल से बातचीत में, भाजपा नेता और नवनिर्वाचित विधायक कौस्तव बागची ने कहा, ‘यह एक सुनियोजित हमला था। हमलावरों ने रथ की कार का काफी देर तक पीछा किया और फिर उन पर गोलियों की बौछार कर दी। यह ममता बनर्जी और अभिषेक बनर्जी की साजिश है। जब तक अपराधियों की पहचान नहीं हो जाती, हम चैन से नहीं बैठेंगे। तब तक हम शव का अंतिम संस्कार नहीं करेंगे।’ भाजपा के नव निर्वाचित विधायक तरुणज्योति तिवारी ने कहा, ‘हम शांति का संदेश देते रहे हैं लेकिन तृणमूल कांग्रेस ने बहुत बड़ी गलती की है।’ ममता बनर्जी की हार का नतीजाभाजपा विधायक अग्निमित्रा पॉल ने कहा, ‘यह शायद भवानीपुर में ममता बनर्जी की हार का नतीजा है… CCTV फुटेज की अभी जांच की जा रही है… चंद्र एक भरोसेमंद इंसान थे, वे नेता प्रतिपक्ष के दफ़्तर के सारे कामकाज देखते थे, हमारे विधायकों के लिए भाई जैसे थे, और कई तरह के दूसरे काम भी संभालते थे… जिस इंसान का BJP से कोई लेना-देना ही नहीं था, उसकी हत्या क्यों की गई? जनता में भारी गुस्सा है… हमने तो शांति चाही थी, लेकिन अब परिवार ज़रूर जवाब मांगेगा… अभी कुछ देर पहले ही, हमारे एक बूथ कार्यकर्ता पर चाकू से हमला किया गया और वह अभी अस्पताल में भर्ती है…।’ एक्शन में पुलिसपश्चिम बंगाल के DGP सिद्ध नाथ गुप्ता ने कहा, ‘हमने इस मामले की जांच शुरू कर दी है। हमने अपराध में इस्तेमाल हुई 4 पहिया गाड़ी को जब्त कर लिया है, लेकिन ऐसी खबरें आ रही हैं कि गाड़ी की नंबर प्लेट नकली है और उसके साथ छेड़छाड़ की गई है। हमें घटनास्थल से जिंदा कारतूस और चले हुए कारतूस मिले हैं। चश्मदीदों और सबूतों की जांच की जा रही है और आगे की जांच जारी है।’ यह घटना उत्तरी 24 परगना जिले में मध्यमग्राम क्षेत्र के दोहरिया में हुई, जहां शुभेंदु अधिकारी के सहायक चंद्रनाथ रथ पर हमला किया गया। बाइक पर सवार लोगों ने उन्हें करीब से गोली मार दी। इसके बाद हमलावर फरार हो गए। मामले में अभी कोई गिरफ्तारी नहीं हुई है।
गर्मी से राहत का आसान उपाय: फ्रिज में पीला फोम रखने के फायदे जानकर रह जाएंगे हैरान

नई दिल्ली। अक्सर लोग मानते हैं कि फ्रिज में रखा खाना सिर्फ तापमान की वजह से खराब होता है, लेकिन असल वजह कई बार एक्स्ट्रा नमी (Moisture) होती है। फ्रिज के वेजिटेबल ड्रॉअर में जब जरूरत से ज्यादा ह्यूमिडिटी जमा हो जाती है, तो वह सब्जियों और फलों की गुणवत्ता पर सीधा असर डालती है। हरी पत्तेदार सब्जियां चिपचिपी होने लगती हैं, स्ट्रॉबेरी जैसी नाजुक चीजें जल्दी गल जाती हैं और खीरा-गाजर अपनी कुरकुराहट खो देते हैं। यही वजह है कि कई बार फ्रिज होने के बावजूद खाना जल्दी खराब हो जाता है। सूखा स्पंज कैसे करता है जादू जैसा काम?इस वायरल किचन हैक की असली ताकत इसके बेहद साधारण होने में है। सूखा स्पंज अपनी बनावट की वजह से नमी को तेजी से सोख लेता है। जब इसे फ्रिज के वेजिटेबल ड्रॉअर में रखा जाता है, तो यह आसपास की अतिरिक्त ह्यूमिडिटी को अपने अंदर खींच लेता है। इससे फ्रिज के अंदर का वातावरण संतुलित हो जाता है और फल-सब्जियां ज्यादा समय तक ताजा बनी रहती हैं। यह किसी केमिकल या महंगे उपकरण के बिना काम करने वाला एक प्राकृतिक तरीका है। किन चीजों को मिलता है सबसे ज्यादा फायदा?यह ट्रिक खासकर उन चीजों के लिए बेहद उपयोगी मानी जाती है जो नमी से जल्दी खराब होती हैं, जैसे- पालक और अन्य हरी सब्जियांसलाद पत्तियां (लेट्यूस आदि)स्ट्रॉबेरी और ब्लूबेरी जैसी बेरीजखीरा, गाजर और शिमला मिर्चइन सभी चीजों की लाइफ स्पैन बढ़ जाती है और वे लंबे समय तक ताजी बनी रहती हैं। स्पंज रखने का सही तरीका क्या है?स्पंज को हमेशा फ्रिज के वेजिटेबल ड्रॉअर के किनारों या कोनों में रखना चाहिए। इसे सीधे खाने के ऊपर नहीं रखना चाहिए। जरूरत पड़ने पर एक से ज्यादा स्पंज भी इस्तेमाल किए जा सकते हैं, खासकर तब जब फ्रिज में नमी ज्यादा बनती हो। सबसे जरूरी बात यह है कि स्पंज पूरी तरह सूखा होना चाहिए ताकि वह प्रभावी तरीके से नमी सोख सके। साफ-सफाई है सबसे जरूरी नियमस्पंज नमी सोखता है, इसलिए समय-समय पर उसकी सफाई जरूरी है। अगर उसे लंबे समय तक बिना साफ किए रखा जाए, तो उसमें बैक्टीरिया पनप सकते हैं। बेहतर है कि हर कुछ दिनों में उसे धोकर अच्छे से सुखाया जाए। बदबू आने पर उसे बदल देना ही सही विकल्प है। क्यों हो रहा है यह किचन हैक वायरल?आज के समय में लोग ऐसे आसान और सस्ते उपाय ढूंढ रहे हैं जो सच में काम करें। यह स्पंज ट्रिक बिना किसी खर्च के खाने की बर्बादी कम करने और फ्रिज को साफ रखने में मदद करती है। यही कारण है कि यह सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रही है। छोटा बदलाव, बड़ा फायदाअगर आप भी चाहते हैं कि आपकी सब्जियां और फल ज्यादा समय तक ताजा रहें, तो फ्रिज के वेजिटेबल ड्रॉअर में सूखा स्पंज रखना एक आसान और असरदार तरीका साबित हो सकता है। यह छोटा सा कदम आपकी रसोई को ज्यादा स्मार्ट और वेस्ट-फ्री बनाने में मदद कर सकता है।
टी20 क्रिकेट में अभिषेक शर्मा का करिश्मा, छक्कों की झड़ी लगाकर बनाया तिहरा शतक

नई दिल्ली। Sunrisers Hyderabad ने बुधवार को खेले गए इस मुकाबले में पहले बल्लेबाजी करते हुए शानदार प्रदर्शन किया। टीम ने 20 ओवर में 4 विकेट खोकर 235 रन का विशाल स्कोर खड़ा किया। ओपनिंग से ही टीम ने आक्रामक रुख अपनाया। ट्रैविस हेड और अभिषेक शर्मा की जोड़ी ने तेज शुरुआत दी और पावरप्ले में ही पंजाब के गेंदबाजों पर दबाव बना दिया। Abhishek Sharma ने सिर्फ 13 गेंदों पर 35 रन की तूफानी पारी खेली। उनकी इस पारी में 4 छक्के और 2 चौके शामिल रहे। उन्होंने 269.23 की स्ट्राइक रेट से गेंदबाजों की धज्जियां उड़ा दीं। अभिषेक शर्मा का धमाका और ऐतिहासिक उपलब्धिअभिषेक शर्मा ने अपनी पारी की शुरुआत ही आक्रामक अंदाज में की। उन्होंने अर्शदीप सिंह की गेंद पर पहला छक्का लगाया और इसके बाद मार्को जानसेन को लगातार दो छक्के जड़े। चौथा छक्का उन्होंने लॉकी फर्ग्यूसन की गेंद पर जड़ा। हालांकि इसी ओवर में वे बड़ा शॉट खेलने की कोशिश में आउट हो गए और कप्तान श्रेयस अय्यर को आसान कैच थमा बैठे। इसके बावजूद उनकी पारी ने मैच का रुख पूरी तरह SRH की ओर मोड़ दिया। इस पारी के साथ अभिषेक शर्मा ने T20 क्रिकेट में भारत में अपने 300 छक्कों का ऐतिहासिक आंकड़ा पार किया और यह उपलब्धि हासिल करने वाले चुनिंदा बल्लेबाजों की सूची में शामिल हो गए। इससे पहले यह उपलब्धि Rohit Sharma, Virat Kohli, क्रिस गेल, सूर्यकुमार यादव और संजू सैमसन जैसे दिग्गज हासिल कर चुके हैं। ट्रैविस हेड और SRH की मजबूत साझेदारीट्रैविस हेड ने भी आक्रामक बल्लेबाजी करते हुए 19 गेंदों पर 38 रन बनाए। उन्होंने 3 चौके और 3 छक्के लगाए, लेकिन युजवेंद्र चहल ने उन्हें पवेलियन भेजकर पंजाब को थोड़ी राहत दी। अभिषेक और हेड ने पहले विकेट के लिए मात्र 3.3 ओवर में 54 रन जोड़कर तेज शुरुआत दी, जिसने पूरे मैच की दिशा तय कर दी। PBKS की कोशिश नाकाम, 202 रन पर सिमटी पारीPunjab Kings की टीम लक्ष्य का पीछा करते हुए 20 ओवर में 7 विकेट खोकर 202 रन ही बना सकी। शुरुआत से ही दबाव में दिखी पंजाब की टीम बड़े लक्ष्य का पीछा करने में असफल रही। हालांकि कुछ बल्लेबाजों ने कोशिश जरूर की, लेकिन SRH के गेंदबाजों ने नियमित अंतराल पर विकेट लेकर वापसी की कोई भी संभावना नहीं बनने दी। निष्कर्ष: SRH का दमदार प्रदर्शन जारीइस जीत के साथ सनराइजर्स हैदराबाद ने एक बार फिर साबित कर दिया कि उनकी बल्लेबाजी लाइनअप किसी भी गेंदबाजी आक्रमण को ध्वस्त करने की क्षमता रखती है। अभिषेक शर्मा की विस्फोटक पारी और टीम का सामूहिक प्रदर्शन इस जीत की सबसे बड़ी ताकत रहा।