घूरकर देखने के विवाद में हत्या: ग्वालियर में फायरिंग कर पड़ोसी को मारा, 2 आरोपी गिरफ्तार

नई दिल्ली। ग्वालियर के मुरार थाना क्षेत्र के बड़ागांव खुरैरी में एक मामूली से दिखने वाले विवाद ने हिंसक रूप ले लिया और अंततः हत्या तक पहुंच गया। घूरकर देखने जैसी बात को लेकर शुरू हुआ विवाद इतना बढ़ गया कि एक व्यक्ति की गोली मारकर हत्या कर दी गई। इस मामले में पुलिस ने तेजी से कार्रवाई करते हुए दो आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है, जबकि अन्य फरार आरोपियों की तलाश में लगातार दबिश दी जा रही है। गिरफ्तार आरोपियों की पहचान अनार सिंह और राजपाल के रूप में हुई है। दोनों से पूछताछ जारी है। घटना के बाद आरोपी अपने घरों पर ताले लगाकर फरार हो गए थे, जिसके चलते पुलिस ने उनके घरों के बाहर सुरक्षा गार्ड भी तैनात कर दिए हैं। एएसपी अनु बेनीवाल ने बताया कि मामले में अन्य आरोपियों की पहचान हो चुकी है और उनकी गिरफ्तारी के प्रयास तेज कर दिए गए हैं। पुलिस जांच में सामने आया है कि विवाद की शुरुआत घूरकर देखने की बात से हुई थी। इसके बाद दोनों पक्षों में कहासुनी बढ़ी और देखते ही देखते मामला पथराव में बदल गया। इस दौरान एक पक्ष के राजपाल के सिर में पत्थर लगने से उसे गंभीर चोट आई और उसे 12 टांके लगाने पड़े। इसी घटना ने विवाद को और उग्र बना दिया। इसके बाद आरोपी पक्ष ने हिंसक प्रतिक्रिया देते हुए फायरिंग शुरू कर दी। आरोप है कि मकान की छत पर चढ़कर कई राउंड गोलियां चलाई गईं। इसी दौरान रमेश पाल को गोली लग गई, जिससे उसकी मौके पर ही मौत हो गई। घटना के बाद पूरे इलाके में अफरा-तफरी मच गई और लोग दहशत में आ गए। घटना में मृतक रमेश पाल की पत्नी और बेटा भी घायल हुए हैं। उन्हें छर्रे लगने से चोट आई है, जबकि दूसरे बेटे को लाठी से चोट पहुंचाई गई। परिवार के लोगों का कहना है कि यह विवाद लंबे समय से चला आ रहा था, लेकिन किसी को उम्मीद नहीं थी कि मामला इतना गंभीर रूप ले लेगा। पुलिस के अनुसार, मृतक रमेश पाल का पड़ोसियों अनार सिंह, सुखवीर, रामू और राजपाल से पुराना विवाद था। मंगलवार रात वह अपनी बहन के यहां भात देने के लिए जा रहा था, तभी रास्ते में अनार सिंह से उसकी मुलाकात हुई और कहासुनी शुरू हो गई। कुछ ही देर में विवाद ने हिंसक रूप ले लिया। फायरिंग के बाद आरोपी मौके से फरार हो गए। पुलिस ने तत्काल कार्रवाई करते हुए इलाके की घेराबंदी की और दो आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया। बाकी आरोपियों की तलाश में क्राइम ब्रांच और मुरार थाना पुलिस लगातार दबिश दे रही है। इस घटना ने पूरे क्षेत्र में तनाव का माहौल पैदा कर दिया है। पुलिस ने एहतियात के तौर पर आरोपियों के घरों के आसपास सुरक्षा बढ़ा दी है ताकि किसी भी अप्रिय स्थिति से बचा जा सके। फिलहाल पुलिस इस मामले की हर एंगल से जांच कर रही है और जल्द ही अन्य आरोपियों की गिरफ्तारी की उम्मीद जताई जा रही है। यह घटना एक बार फिर यह सवाल खड़ा करती है कि मामूली विवाद किस तरह जानलेवा रूप ले सकता है।
शुक्रवार के आसान उपाय: मां लक्ष्मी की कृपा से खुल सकते हैं धन-समृद्धि के द्वार

नई दिल्ली। हिंदू धर्म में शुक्रवार का दिन अत्यंत शुभ और महत्वपूर्ण माना जाता है, क्योंकि यह दिन धन, वैभव और समृद्धि की देवी मां लक्ष्मी को समर्पित होता है। शास्त्रों के अनुसार, इस दिन श्रद्धा और विधि-विधान से पूजा करने के साथ कुछ विशेष उपाय करने से मां लक्ष्मी की कृपा प्राप्त होती है और जीवन में आर्थिक प्रगति के रास्ते खुल सकते हैं। साथ ही, ज्योतिष के अनुसार शुक्रवार का संबंध शुक्र ग्रह से भी है, जो भोग-विलास, प्रेम, सौभाग्य और धन का कारक माना जाता है। यदि किसी व्यक्ति की कुंडली में शुक्र ग्रह कमजोर हो या आर्थिक समस्याएं बनी रहती हों, तो शुक्रवार के दिन कुछ सरल उपाय अपनाकर इन स्थितियों में सुधार किया जा सकता है। माना जाता है कि इन उपायों से न केवल धन लाभ के योग बनते हैं, बल्कि जीवन में सकारात्मकता और मानसिक शांति भी बढ़ती है। शुक्रवार के दिन सबसे सरल और प्रभावी उपायों में मां लक्ष्मी के सामने एक रुपये का सिक्का रखना शामिल है। पूजा के दौरान श्रद्धा के साथ मां लक्ष्मी की आराधना करें और आरती के बाद क्षमा प्रार्थना करें। अगले दिन इस सिक्के को लाल कपड़े में बांधकर अपने पास रखने से आर्थिक स्थिरता और सौभाग्य में वृद्धि मानी जाती है। इसके अलावा शुक्रवार के दिन नीम के पेड़ में जल अर्पित करना भी शुभ माना जाता है। धार्मिक मान्यता है कि नीम का संबंध मां दुर्गा से होता है और इसे जल चढ़ाने से ग्रह दोषों में कमी आती है तथा घर में सुख-समृद्धि का संचार होता है। मां लक्ष्मी की कृपा पाने के लिए शुक्रवार को उनकी विधिवत पूजा करना बेहद फलदायी माना गया है। इस दिन लक्ष्मी मंत्र या लक्ष्मी चालीसा का पाठ करने से धन-संबंधी समस्याओं में राहत मिल सकती है और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है। शास्त्रों में यह भी कहा गया है कि मां लक्ष्मी को कमल का फूल अत्यंत प्रिय है। इसलिए शुक्रवार के दिन सफेद या गुलाबी कमल का फूल श्रद्धा से अर्पित करने पर देवी प्रसन्न होती हैं और सुख-समृद्धि का आशीर्वाद देती हैं। एक और सरल उपाय के अनुसार, शुक्रवार को काली चींटियों को चीनी खिलाना शुभ माना जाता है। इससे कार्यों में सफलता मिलने और रुके हुए कामों के पूरे होने की संभावनाएं बढ़ती हैं। इसके साथ ही सफेद वस्तुओं का दान करना भी अत्यंत लाभकारी माना गया है। चीनी, दूध, दही और आटे जैसी वस्तुओं का दान करने से घर में सकारात्मकता बढ़ती है और आर्थिक स्थिति मजबूत होती है। स्वास्थ्य और समृद्धि के लिए शुक्रवार के दिन मां लक्ष्मी के मंदिर में शंख अर्पित करना भी शुभ माना जाता है। इससे न केवल शारीरिक ऊर्जा में वृद्धि होती है, बल्कि मानसिक शांति भी प्राप्त होती है। शुक्रवार के दिन विशेष मंत्र का जाप भी अत्यंत फलदायी माना गया है। श्रद्धा के साथ “ॐ हिमकुन्दमृणालाभं दैत्यानां परमं गुरुम् सर्वशास्त्रप्रवक्तारं भार्गवं प्रणमाम्यहम्” मंत्र का जाप करने से शुक्र ग्रह मजबूत होता है और जीवन में सुख-समृद्धि के अवसर बढ़ते हैं। कुल मिलाकर, शुक्रवार के ये आसान उपाय न केवल धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण हैं, बल्कि मानसिक और आर्थिक संतुलन बनाए रखने में भी सहायक माने जाते हैं।
परिषद मीटिंग हॉल न बनने पर विवाद, भोपाल में कैम्पस निर्माण को लेकर मंथन तेज

नई दिल्ली। भोपाल में नगर निगम की नई प्रशासनिक बिल्डिंग के लोकार्पण के साथ ही एक बड़ी चूक सामने आई है। करीब ₹73 करोड़ की लागत से तैयार इस भव्य भवन में परिषद का मीटिंग हॉल ही नहीं बनाया गया, जिसे अब गंभीर डिजाइन भूल माना जा रहा है। इस कमी के सामने आने के बाद अब प्रशासन परिसर के भीतर ही मीटिंग हॉल बनाने पर मंथन कर रहा है। इस मुद्दे ने तब तूल पकड़ा जब लोकार्पण कार्यक्रम के दौरान महापौर मालती राय ने मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव से 5 एकड़ जमीन की मांग रखी। हालांकि, चर्चा के बाद संकेत मिले कि अलग जमीन लेने की बजाय मौजूदा परिसर में ही नया परिषद हॉल तैयार किया जाएगा। सूत्रों के अनुसार, यह हॉल बिल्डिंग के सामने स्थित पार्किंग क्षेत्र में विकसित किया जा सकता है, ताकि भविष्य में परिषद की बैठकें यहीं आयोजित की जा सकें। गौरतलब है कि इस नई बिल्डिंग की लागत पहले ₹43 करोड़ बताई गई थी, लेकिन लोकार्पण के समय यह आंकड़ा बढ़कर ₹73 करोड़ तक पहुंच गया। इसमें सिविल वर्क के अलावा इंटीरियर, तकनीकी और अन्य सुविधाओं पर खर्च शामिल है। यह भवन प्रदेश का पहला ऐसा नगरीय निकाय मुख्यालय बताया जा रहा है जो ग्रीन बिल्डिंग कॉन्सेप्ट और जियोथर्मल तकनीक से लैस है। ‘अटल भवन’ नाम से पहचानी जाने वाली इस आठ मंजिला इमारत में आधुनिक सुविधाओं का पूरा ध्यान रखा गया है। पार्किंग क्षेत्र में लगे सोलर पैनलों से लगभग 300 किलोवाट बिजली उत्पादन की क्षमता है। इसके साथ ही, भोपाल निगम द्वारा नीमच जिले में विकसित 10.5 मेगावॉट सोलर प्रोजेक्ट का भी लोकार्पण किया गया। भवन के विभिन्न फ्लोर को विभागवार विभाजित किया गया है। ग्राउंड फ्लोर पर जनसंपर्क, टैक्स काउंटर और विवाह पंजीकरण जैसी सेवाएं उपलब्ध हैं, साथ ही बच्चों के लिए गेम जोन और मेडिकल इमरजेंसी रूम भी बनाया गया है। पहली से चौथी मंजिल तक महापौर कार्यालय, एमआईसी सदस्य, जलकार्य, राजस्व और अन्य विभाग हैं। पांचवीं से सातवीं मंजिल तक स्मार्ट सिटी, आईटी, स्वास्थ्य और योजना से जुड़े विभागों को रखा गया है, जबकि आठवीं मंजिल पर कमिश्नर कार्यालय और स्मार्ट सिटी मुख्यालय स्थित है। पूरे भवन में ‘सिंगल विंडो सिस्टम’ लागू किया गया है, जिससे नागरिकों को एक ही स्थान पर सभी विभागीय सेवाएं मिल सकें। पहले निगम के विभिन्न विभाग शहर के अलग-अलग हिस्सों में संचालित होते थे, लेकिन अब सभी सेवाएं एक ही परिसर में उपलब्ध होंगी। हालांकि, इस आधुनिक भवन को लेकर कई तकनीकी और डिजाइन खामियां भी सामने आई हैं। सबसे बड़ी चूक परिषद मीटिंग हॉल का न होना माना जा रहा है, जिसे अब प्रशासनिक स्तर पर गंभीरता से लिया जा रहा है। इसके लावा सोलर पैनलों की दिशा और ऊर्जा उत्पादन क्षमता को लेकर भी विशेषज्ञों ने कुछ सवाल उठाए हैं। बिल्डिंग की डिजाइनिंग तीन अलग-अलग कमिश्नरों के कार्यकाल में पूरी हुई, जिसके चलते परियोजना में कई बदलाव और संशोधन हुए। अब यह भवन न केवल प्रशासनिक केंद्र के रूप में कार्य करेगा, बल्कि शहर की आधुनिक शहरी संरचना का प्रतीक भी माना जा रहा है। फिलहाल सभी की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि परिषद मीटिंग हॉल का समाधान किस रूप में किया जाता है और यह भव्य लेकिन विवादों में घिरी इमारत आने वाले समय में कितना प्रभावी साबित होती है।
शुक्रवार की शाम ये एक काम बदल सकता है किस्मत, मां लक्ष्मी की कृपा से दूर होगी आर्थिक तंगी

नई दिल्ली। हिंदू धर्म और ज्योतिष शास्त्र में शुक्रवार का दिन धन की देवी मां लक्ष्मी को समर्पित माना गया है। मान्यता है कि इस दिन विशेष रूप से शाम के समय किए गए कुछ सरल उपाय जीवन में सकारात्मक बदलाव ला सकते हैं। यदि कोई व्यक्ति लंबे समय से आर्थिक तंगी, पैसों की कमी या लगातार हो रहे खर्चों से परेशान है, तो शुक्रवार की शाम का यह उपाय बेहद प्रभावी माना जाता है। ज्योतिषाचार्यों के अनुसार, मां लक्ष्मी वहां निवास करती हैं जहां स्वच्छता, श्रद्धा और सकारात्मक ऊर्जा होती है। इसलिए सबसे पहला और महत्वपूर्ण कदम घर को साफ-सुथरा रखना है। गंदगी और अव्यवस्था वाले स्थान पर मां लक्ष्मी का वास नहीं माना जाता, जिससे आर्थिक रुकावटें बनी रह सकती हैं। शुक्रवार की शाम मां लक्ष्मी की विधिवत पूजा करना भी अत्यंत शुभ माना जाता है। इस दिन घर के मंदिर में दीपक जलाकर मां लक्ष्मी और भगवान गणेश की संयुक्त पूजा करने से विशेष फल मिलता है। पूजा के दौरान मां लक्ष्मी को लाल पुष्प और खीर का भोग अर्पित करना अत्यंत शुभ माना गया है। इसके बाद श्रद्धा भाव से आरती करने पर सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है और आर्थिक स्थिति में सुधार की संभावनाएं बढ़ती हैं। एक खास उपाय के अनुसार, मां लक्ष्मी को खीर का भोग लगाने के बाद उसे सात कन्याओं में प्रसाद के रूप में बांटना बहुत शुभ माना जाता है। इससे पुण्य फल प्राप्त होता है और जीवन में समृद्धि आने की मान्यता है। इसके अलावा शुक्रवार के दिन दान-पुण्य का भी विशेष महत्व बताया गया है। इस दिन दूध, चावल, चीनी, दही और सफेद तिल जैसी सफेद वस्तुओं का दान करना बेहद लाभकारी माना जाता है। जरूरतमंद लोगों को भोजन या वस्तुएं दान करने से भी मां लक्ष्मी प्रसन्न होती हैं। ज्योतिष मान्यताओं के अनुसार, शुक्रवार को घर की उत्तर दिशा या पूजा स्थल में श्रीयंत्र की स्थापना करना भी बहुत शुभ होता है। इसे स्थापित करने के बाद नियमित पूजा और मां लक्ष्मी की आरती करने से धन, सफलता और भौतिक सुखों की प्राप्ति के योग बनते हैं। कुल मिलाकर, शुक्रवार की शाम श्रद्धा और विश्वास के साथ किए गए ये सरल उपाय न केवल धार्मिक रूप से महत्वपूर्ण हैं, बल्कि मानसिक शांति और सकारात्मक सोच को भी बढ़ावा देते हैं, जिससे जीवन में आर्थिक सुधार की संभावना मानी जाती है।
DAVV छात्रों के लिए बड़ी सौगात, तक्षशिला कैंपस में मिलेगा हाई-टेक लेक्चर थिएटर

नई दिल्ली। इंदौर स्थित देवी अहिल्या विश्वविद्यालय (DAVV) के तक्षशिला परिसर में जल्द ही एक आधुनिक G+4 लेक्चर थिएटर का निर्माण किया जाएगा। इस परियोजना का उद्देश्य विश्वविद्यालय में बढ़ती छात्र संख्या और नए शैक्षणिक पाठ्यक्रमों के कारण उत्पन्न हो रही क्लासरूम की कमी को दूर करना है। यह भवन आधुनिक सुविधाओं से लैस होगा और इसे तैयार होने में लगभग दो साल का समय लगने की संभावना है। विश्वविद्यालय प्रशासन के अनुसार, इस नए लेक्चर थिएटर में बड़े लेक्चर हॉल, सेमिनार रूम और स्टूडेंट एक्टिविटी स्पेस शामिल होंगे। इसके साथ ही यहां आधुनिक डिजिटल उपकरणों की व्यवस्था भी की जाएगी, ताकि शिक्षण प्रक्रिया को और अधिक प्रभावी और तकनीकी रूप से सशक्त बनाया जा सके। कुलगुरु प्रोफेसर राकेश सिंघई ने बताया कि विश्वविद्यालय में लगातार नए कोर्स शुरू किए जा रहे हैं और छात्रों की संख्या भी तेजी से बढ़ रही है। ऐसे में मौजूदा क्लासरूम क्षमता भविष्य की जरूरतों को पूरा करने में सक्षम नहीं है। इसी को ध्यान में रखते हुए तक्षशिला कैंपस में यह नई बिल्डिंग तैयार करने का निर्णय लिया गया है। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय का उद्देश्य केवल शैक्षणिक विस्तार ही नहीं, बल्कि आर्थिक रूप से भी संस्थान को मजबूत बनाना है। यह नया भवन एजुकेशन डिपार्टमेंट के उस हिस्से में बनाया जाएगा, जहां पहले EMRC संचालित होता था। भवन की संरचना G+4 होगी और इसकी शुरुआती लागत लगभग 2 से 3 करोड़ रुपये अनुमानित की गई है। हालांकि, जैसे-जैसे फ्लोर और सुविधाओं का विस्तार होगा, लागत में वृद्धि संभव है। इस परियोजना को हाल ही में विश्वविद्यालय की कार्यपरिषद बैठक में मंजूरी दी गई थी, जिसमें 590 करोड़ रुपये का बजट भी पास किया गया था। इसी बजट में इस लेक्चर थिएटर के निर्माण को हरी झंडी दी गई है। विश्वविद्यालय प्रशासन का मानना है कि यह कदम न केवल शैक्षणिक ढांचे को मजबूत करेगा, बल्कि नए कोर्स और सीटों की वृद्धि से विश्वविद्यालय की आय में भी सुधार होगा। पिछले कुछ समय में DAVV ने कई विभागों में सीटों की संख्या बढ़ाई है और नए शैक्षणिक कार्यक्रम भी शुरू किए हैं। इससे विश्वविद्यालय में छात्रों की संख्या में लगातार वृद्धि हो रही है। इसी बढ़ती मांग को देखते हुए आधुनिक शैक्षणिक ढांचे की आवश्यकता महसूस की जा रही थी। तक्षशिला कैंपस में बनने वाला यह लेक्चर थिएटर छात्रों के लिए एक बड़ा बदलाव साबित हो सकता है। यहां मिलने वाली आधुनिक सुविधाएं न केवल पढ़ाई को आसान बनाएंगी, बल्कि रिसर्च और प्रेजेंटेशन आधारित शिक्षा को भी बढ़ावा देंगी। कुल मिलाकर, यह परियोजना DAVV के शैक्षणिक विकास की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है, जो आने वाले वर्षों में विश्वविद्यालय को आधुनिक और प्रतिस्पर्धी संस्थानों की श्रेणी में और मजबूती से स्थापित करेगी।
राजा रघुवंशी केस: न्यायिक कार्रवाई तेज, चार आरोपियों को नहीं मिली राहत

नई दिल्ली। इंदौर के चर्चित राजा रघुवंशी हत्याकांड में कानूनी कार्रवाई तेज हो गई है और मामले में आरोपियों की मुश्किलें लगातार बढ़ती जा रही हैं। शिलांग सेशन कोर्ट ने इस केस के मुख्य आरोपी राज कुशवाह समेत चार आरोपियों की जमानत याचिकाएं खारिज कर दी हैं। अदालत ने मामले की गंभीरता को देखते हुए सभी याचिकाओं को अस्वीकार किया, हालांकि विस्तृत आदेश की कॉपी अभी उपलब्ध नहीं हुई है। राज कुशवाह के साथ-साथ आरोपी विशाल, आनंद और आकाश की जमानत याचिकाएं भी कोर्ट ने नामंजूर कर दीं। इस फैसले के बाद सभी आरोपियों को फिलहाल राहत नहीं मिली है और उन्हें न्यायिक प्रक्रिया का सामना करना होगा। अदालत का यह रुख मामले की गंभीरता और जांच की दिशा को और स्पष्ट करता है। इधर, मामले की एक अन्य आरोपी सोनम रघुवंशी को मिली जमानत अब कानूनी विवाद का विषय बन गई है। मेघालय सरकार ने इस जमानत के खिलाफ हाईकोर्ट में याचिका दाखिल कर दी है और उसे रद्द करने की मांग की है। सरकार का तर्क है कि जांच और ट्रायल की प्रक्रिया को देखते हुए आरोपी को जमानत देना उचित नहीं है और इससे केस की निष्पक्षता प्रभावित हो सकती है। इस याचिका पर 12 मई को सुनवाई निर्धारित की गई है। राज्य सरकार की ओर से यह भी स्पष्ट किया गया है कि जांच एजेंसियों ने पूरी गंभीरता और निष्पक्षता के साथ काम किया है। मेघालय के उपमुख्यमंत्री प्रेस्टन तिनसोंग ने कहा कि पुलिस और एसआईटी ने अपने स्तर पर सर्वोत्तम प्रयास किए हैं और जांच में किसी प्रकार की कमी नहीं है। उन्होंने यह भी कहा कि जमानत संबंधी फैसले न्यायिक प्रक्रिया का हिस्सा हैं, लेकिन इससे जांच की गुणवत्ता पर सवाल नहीं उठाए जा सकते। इस बीच, मामले में नए खुलासों और आरोप-प्रत्यारोपों ने स्थिति को और जटिल बना दिया है। जांच के दौरान यह भी सामने आया है कि आरोपी एक-दूसरे पर हत्या की साजिश रचने का आरोप लगा रहे हैं। इससे केस की दिशा लगातार बदलती नजर आ रही है। गौरतलब है कि राजा रघुवंशी हत्याकांड ने इंदौर से लेकर मेघालय तक काफी सुर्खियां बटोरी थीं। हनीमून ट्रिप के दौरान हुई इस कथित हत्या ने पूरे देश को झकझोर दिया था। पुलिस जांच में कई परतें खुलने के बाद यह मामला और भी पेचीदा होता गया। फिलहाल सभी की नजरें अब हाईकोर्ट में होने वाली सुनवाई पर टिकी हैं, जहां यह तय होगा कि सोनम रघुवंशी को मिली जमानत बरकरार रहती है या नहीं। वहीं अन्य आरोपियों की जमानत खारिज होने से जांच एजेंसियों को मामले में अपनी स्थिति मजबूत करने का अवसर मिला है। यह केस अब केवल एक आपराधिक मामला नहीं, बल्कि न्यायिक प्रक्रिया और जांच की पारदर्शिता की एक बड़ी परीक्षा बन गया है, जिस पर पूरे देश की नजर बनी हुई है।
ISIS कनेक्शन वाले परिवारों की ऑस्ट्रेलिया वापसी से हड़कंप, सीरिया कैंप से लौटे 13 लोग; सुरक्षा एजेंसियां अलर्ट

नई दिल्ली। ऑस्ट्रेलिया में उस वक्त सुरक्षा एजेंसियां सतर्क हो गई जब इस्लामिक स्टेट से कथित संबंध रखने वाली महिलाओं और बच्चों को लेकर दो फ्लाइट्स देश पहुंचीं। ये लोग कई वर्षों तक सीरिया के रेगिस्तानी कैंपों में रह रहे थे। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक एक विमान मेलबर्न पहुंचा, जिसमें तीन महिलाएं और आठ बच्चे सवार थे। वहीं दूसरी फ्लाइट सिडनी उतरी, जिसमें एक महिला और उसका बेटा मौजूद था। ऑस्ट्रेलियाई सरकार ने पुष्टि की है कि कुल 13 लोगों को वापस लाया गया है। महिलाओं पर हो सकती है जांचपुलिस अधिकारियों के अनुसार महिलाओं के खिलाफ संभावित आपराधिक जांच की जा सकती है। जांच इस बात को लेकर होगी कि उन्होंने आईएसआईएस के कथित खिलाफत काल के दौरान सीरिया और इराक में क्या भूमिका थी।हालांकि अभी तक किसी गिरफ्तारी की आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है। रिपोर्ट्स के मुताबिक दोनों फ्लाइट्स दोहा से रवाना हुई थीं। सुरक्षा बनाम मानवाधिकार की बहस तेजइस वापसी के बाद ऑस्ट्रेलिया में राजनीतिक और सुरक्षा बहस तेज हो गई है। मानवाधिकार संगठनों का कहना है कि महिलाओं और बच्चों को सुरक्षित पुनर्वास और सामाजिक सहायता मिलनी चाहिए। वहीं सुरक्षा एजेंसियों का मानना है कि संभावित कट्टरपंथ और सुरक्षा जोखिमों को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। इसी वजह से लौटने वाले सभी लोगों पर कड़ी निगरानी रखी जा रही है।विशेषज्ञों के मुताबिक पश्चिम एशिया में ISIS के कमजोर पड़ने के बाद कई देश अपने नागरिकों को वापस लाने की नीति पर काम कर रहे हैं, लेकिन इसके साथ सुरक्षा चुनौतियां भी लगातार बनी हुई हैं।
‘ऑपरेशन सिंदूर’ की वर्षगांठ पर देशभक्ति का संगम, इंदिरा गांधी कला केंद्र में काव्य-संग्रह का भव्य लोकार्पण

नई दिल्ली। ‘नई दिल्ली में ‘ऑपरेशन सिंदूर’ की पहली वर्षगांठ के अवसर पर एक भव्य साहित्यिक आयोजन का आयोजन किया गया, जिसने साहित्य और देशभक्ति के संगम को एक नई ऊंचाई दी। इंदिरा गांधी राष्ट्रीय कला केंद्र के समवेत हॉल में आयोजित इस कार्यक्रम में प्रसिद्ध लेखक डॉ. हरीश चंद्र बर्णवाल द्वारा संपादित और प्रभात प्रकाशन द्वारा प्रकाशित पुस्तक ‘ऑपरेशन सिंदूर: 100 सर्वश्रेष्ठ कविताएं’ का औपचारिक लोकार्पण किया गया। इस अवसर पर इंदिरा गांधी राष्ट्रीय कला केंद्र के अध्यक्ष रामबहादुर राय मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे और उन्होंने पुस्तक का विमोचन किया। कार्यक्रम की अध्यक्षता भी उन्होंने ही की। अपने संबोधन में उन्होंने डॉ. बर्णवाल के रचनात्मक योगदान की सराहना करते हुए कहा कि ऐसे प्रयास साहित्य को नई दिशा देते हैं। उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि अंतरराष्ट्रीय रक्षा विशेषज्ञों के अनुसार ‘ऑपरेशन सिंदूर’ अभी समाप्त नहीं हुआ है और भविष्य में इसकी प्रासंगिकता बनी रह सकती है। कार्यक्रम में विशिष्ट अतिथि के रूप में पूर्व सेना अधिकारी कर्नल प्रदीप खरे, वरिष्ठ पत्रकार एवं एंकर सईद अंसारी, हास्य-व्यंग्य कवि सुदीप भोला तथा उत्तर प्रदेश के राज्य सूचना आयुक्त वीरेंद्र वत्स उपस्थित रहे। सभी अतिथियों ने इस काव्य-संग्रह को देशभक्ति और सैन्य शौर्य का सशक्त साहित्यिक दस्तावेज बताया। कर्नल प्रदीप खरे ने भारतीय सेना के पराक्रम का उल्लेख करते हुए कहा कि सेना ने बेहद कम समय में दुश्मन के कई ठिकानों को ध्वस्त कर अपनी रणनीतिक क्षमता का परिचय दिया। उन्होंने इस पुस्तक को उस शौर्य गाथा का काव्यात्मक दस्तावेज बताया, जिसे आने वाली पीढ़ियां भी पढ़ेंगी।सईद अंसारी ने प्रभात प्रकाशन की राष्ट्रभावना से जुड़ी प्रकाशन परंपरा की सराहना की और कहा कि यह पुस्तक केवल कविताओं का संग्रह नहीं, बल्कि देशभक्ति की भावनाओं का जीवंत दस्तावेज है। उन्होंने यह भी कहा कि डॉ. बर्णवाल ने कई प्रतिभाशाली कवियों को मंच देकर साहित्यिक न्याय का कार्य किया है। पुस्तक के संपादक डॉ. हरीश चंद्र बर्णवाल ने बताया कि ‘एच.बी. पोएट्री’ द्वारा आयोजित काव्य प्रतियोगिता में देशभर के 361 कवियों ने भाग लिया था। इनमें से चयनित 100 कविताओं को इस संग्रह में शामिल किया गया है। उन्होंने कहा कि इस प्रयास का उद्देश्य राष्ट्रभावना से जुड़ी रचनाओं को एक मंच देना और उन्हें व्यापक पाठक वर्ग तक पहुंचाना है। कार्यक्रम के दौरान अनेक कवियों ने अपनी ओजस्वी कविताओं का पाठ किया, जिससे पूरा सभागार देशभक्ति के भावों से गूंज उठा। आयोजन की एक महत्वपूर्ण विशेषता यह रही कि देशभर के 80 से अधिक कवियों को उनके योगदान के लिए प्रशस्ति पत्र प्रदान कर सम्मानित किया गया।इस साहित्यिक आयोजन ने न केवल कवियों को एक साझा मंच प्रदान किया, बल्कि देशभक्ति, साहित्य और कला के संगम को भी सशक्त रूप में प्रस्तुत किया। पूरा कार्यक्रम भावनात्मक, प्रेरणादायक और राष्ट्रभाव से परिपूर्ण वातावरण में संपन्न हुआ।
सपने में दिखें ये 5 रहस्यमयी संकेत, किसी से शेयर करना पड़ सकता है भारी

नई दिल्ली। सपनों की दुनिया हमेशा से लोगों के लिए रहस्य और उत्सुकता का विषय रही है। कई लोग सपनों को केवल मन की कल्पना मानते हैं, तो कई इन्हें भविष्य के संकेत और जीवन में होने वाली घटनाओं का संदेश समझते हैं। भारतीय परंपरा और Swapna Shastra में कुछ सपनों को बेहद शुभ और प्रभावशाली माना गया है। मान्यता है कि ऐसे सपनों को हर किसी से साझा नहीं करना चाहिए, क्योंकि ऐसा करने से उनका सकारात्मक प्रभाव कम हो सकता है। 1. भगवान या मंदिर के दर्शन वाले सपनेअगर सपने में देवी-देवताओं, मंदिर, पूजा या किसी धार्मिक स्थान के दर्शन हों, तो इसे अत्यंत शुभ संकेत माना जाता है। माना जाता है कि ऐसे सपने आध्यात्मिक उन्नति, मनोकामना पूर्ण होने या जीवन में सकारात्मक बदलाव का संकेत देते हैं। स्वप्न शास्त्र के अनुसार इन सपनों को गुप्त रखना शुभ फलदायी माना गया है। 2. धन लाभ से जुड़े सपनेसपने में सोना, चांदी, पैसा, खजाना या अचानक धन प्राप्त होना आर्थिक उन्नति और लाभ का संकेत माना जाता है। कई मान्यताओं के अनुसार यह आने वाले समय में तरक्की, व्यवसाय में फायदा या आर्थिक स्थिति मजबूत होने की ओर इशारा करता है। कहा जाता है कि ऐसे सपनों को ज्यादा लोगों को बताने से उनका शुभ प्रभाव कमजोर पड़ सकता है। 3. शादी या मांगलिक कार्य देखने के सपनेयदि कोई व्यक्ति सपने में अपनी शादी, उत्सव, संगीत या कोई मांगलिक कार्यक्रम देखता है, तो इसे जीवन में बड़े बदलाव या नई शुरुआत का संकेत माना जाता है। यह करियर, रिश्तों या पारिवारिक जीवन में सकारात्मक परिवर्तन की ओर इशारा कर सकता है। स्वप्न शास्त्र में सलाह दी गई है कि ऐसे सपनों को सीमित लोगों तक ही रखा जाए। 4. सपने में सांप दिखाई देनासपने में सांप दिखना अक्सर लोगों को डराता है, लेकिन स्वप्न शास्त्र में इसे हमेशा अशुभ नहीं माना गया। कई मान्यताओं में सांप को शक्ति, रहस्य, धन और परिवर्तन का प्रतीक माना गया है। खासतौर पर शांत सांप दिखाई देना शुभ संकेत माना जाता है। कहा जाता है कि ऐसे सपनों को सार्वजनिक रूप से साझा नहीं करना चाहिए। 5. पूर्वज या दिवंगत रिश्तेदारों का दिखनाअगर सपने में पूर्वज, माता-पिता या दिवंगत रिश्तेदार दिखाई दें, तो इसे विशेष संकेत माना जाता है। मान्यता है कि ऐसे सपने किसी संदेश, आशीर्वाद या चेतावनी का प्रतीक हो सकते हैं। स्वप्न शास्त्र के अनुसार इन सपनों को हर किसी को बताने से बचना चाहिए और इन्हें गंभीरता से समझना चाहिए। हालांकि, विशेषज्ञ यह भी मानते हैं कि सपनों को पूरी तरह भविष्यवाणी मानना सही नहीं है। कई बार सपने व्यक्ति की मानसिक स्थिति, भावनाओं और दैनिक जीवन की घटनाओं से भी जुड़े होते हैं। फिर भी भारतीय परंपरा में स्वप्न शास्त्र का विशेष महत्व माना गया है और लोग आज भी इन संकेतों को आस्था और विश्वास से जोड़कर देखते हैं।
गर्मी में कैसे बनाए रखें स्किन का नेचुरल ग्लो? अपनाएं ये आसान और असरदार टिप्स

नई दिल्ली। गर्मी का मौसम शुरू होते ही सबसे ज्यादा असर हमारी त्वचा पर दिखाई देने लगता है। तेज धूप, पसीना, धूल और गर्म हवाएं स्किन को डल, ड्राई और ऑयली बना देती हैं। कई लोगों को टैनिंग, पिंपल्स और रैशेज जैसी समस्याओं का सामना भी करना पड़ता है। ऐसे में जरूरी हो जाता है कि हम अपने स्किन केयर रूटीन में कुछ खास बदलाव करें, ताकि त्वचा हेल्दी और ग्लोइंग बनी रहे। सही देखभाल और कुछ आसान टिप्स अपनाकर गर्मियों में भी चेहरे की प्राकृतिक चमक बरकरार रखी जा सकती है। गर्मी के मौसम में स्किन को अंदर से हाइड्रेट रखना सबसे जरूरी माना जाता है। शरीर में पानी की कमी होने पर त्वचा बेजान और रूखी दिखाई देने लगती है। इसलिए दिनभर में कम से कम 8 से 10 गिलास पानी जरूर पीना चाहिए। पानी शरीर से टॉक्सिन्स बाहर निकालने में मदद करता है, जिससे स्किन साफ और चमकदार बनी रहती है। इसके अलावा नारियल पानी, नींबू पानी और फ्रेश जूस भी शरीर को हाइड्रेट रखने में मददगार होते हैं। धूप में बाहर निकलने से पहले सनस्क्रीन लगाना बेहद जरूरी है। सूरज की तेज यूवी किरणें स्किन को नुकसान पहुंचाकर टैनिंग और समय से पहले एजिंग की समस्या बढ़ा सकती हैं। इसलिए SPF युक्त सनस्क्रीन का इस्तेमाल करना चाहिए। रोजाना सनस्क्रीन लगाने से त्वचा सुरक्षित रहती है और उसका नेचुरल ग्लो बना रहता है। गर्मियों में हैवी क्रीम की जगह लाइटवेट और ऑयल-फ्री मॉइस्चराइजर का इस्तेमाल करना बेहतर माना जाता है। इससे स्किन चिपचिपी नहीं होती और चेहरे पर फ्रेशनेस बनी रहती है। मॉइस्चराइजर स्किन को हाइड्रेट रखने के साथ उसे मुलायम और हेल्दी बनाए रखने में भी मदद करता है। स्किन को हेल्दी बनाए रखने के लिए खान-पान का ध्यान रखना भी बेहद जरूरी है। गर्मियों में तरबूज, खीरा, पपीता और संतरा जैसे सीजनल फलों का सेवन फायदेमंद होता है। इनमें मौजूद विटामिन और एंटीऑक्सिडेंट्स त्वचा को अंदर से पोषण देते हैं और चेहरे की चमक बढ़ाते हैं। हेल्दी डाइट का असर सीधे स्किन पर दिखाई देता है। गर्मी में त्वचा जल्दी ऑयली हो जाती है, जिससे पिंपल्स और एक्ने की समस्या बढ़ सकती है। इसलिए दिन में दो से तीन बार माइल्ड फेसवॉश से चेहरा साफ करना चाहिए। इससे चेहरे पर जमा धूल, पसीना और अतिरिक्त ऑयल हट जाता है और स्किन फ्रेश महसूस करती है। इसके अलावा घरेलू और नेचुरल फेस पैक भी गर्मियों में काफी फायदेमंद साबित होते हैं। बेसन, दही, एलोवेरा, गुलाबजल और नींबू जैसी चीजों से बने फेस पैक त्वचा को ठंडक देने के साथ नेचुरल ग्लो भी बढ़ाते हैं। हफ्ते में एक या दो बार फेस पैक लगाने से चेहरे पर निखार आता है और स्किन हेल्दी बनी रहती है। अगर आप भी गर्मियों में अपनी स्किन को चमकदार और फ्रेश बनाए रखना चाहते हैं, तो इन आसान टिप्स को अपनी डेली रूटीन का हिस्सा जरूर बनाएं।