बांग्लादेश में बड़ा फैसला: चिन्मय दास को जमानत नहीं, वकील हत्या केस में ट्रायल जारी

नई दिल्ली। बांग्लादेश से जुड़ा एक बड़ा कानूनी मामला एक बार फिर सुर्खियों में है, जहां हाईकोर्ट ने हिंदू साधु चिन्मय कृष्ण दास की जमानत याचिका को खारिज कर दिया है। अदालत ने साफ कहा कि चटग्राम में चल रहे 2024 के वकील हत्या मामले का ट्रायल अभी शुरुआती और अहम चरण में है, जिसमें गवाहों के बयान दर्ज किए जा रहे हैं, इसलिए इस समय जमानत देना उचित नहीं होगा। यह मामला चटग्राम के वकील सैफुल इस्लाम अलिफ की हत्या से जुड़ा हुआ है, जिसमें कुल 39 लोगों पर आरोप तय किए गए हैं। रिपोर्ट्स के अनुसार इनमें से कुछ आरोपी हिरासत में हैं, जबकि कई अब भी फरार बताए जा रहे हैं। इसी केस के चलते चिन्मय कृष्ण दास न्यायिक हिरासत में हैं और उन पर देशद्रोह सहित अन्य गंभीर आरोप भी पहले लगाए गए थे। अदालत की दो सदस्यीय बेंच ने यह भी कहा कि जब ट्रायल सक्रिय रूप से आगे बढ़ रहा हो और सबूतों व गवाहों की सुनवाई जारी हो, तो जमानत पर विचार करना प्रक्रिया को प्रभावित कर सकता है। इसलिए मामले की गंभीरता को देखते हुए याचिका अस्वीकार की गई है। इससे पहले भी चिन्मय कृष्ण दास को एक अन्य मामले में जमानत मिली थी, लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने उस पर रोक लगा दी थी। उनकी गिरफ्तारी और उनके संगठन से जुड़े आंदोलनों को लेकर बांग्लादेश में राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर काफी बहस हुई थी, साथ ही भारत ने भी इस मामले पर चिंता जताई थी। कुल मिलाकर यह मामला अब केवल एक कानूनी ट्रायल नहीं रहा, बल्कि बांग्लादेश में अल्पसंख्यक मुद्दों और राजनीतिक तनाव से भी जुड़ता दिख रहा है, जिस पर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी नजर बनी हुई है।
किम जोंग-उन पर हमला हुआ तो तुरंत न्यूक्लियर पलटवार की चेतावनी, उत्तर कोरिया का सख्त रुख बढ़ा

नई दिल्ली। उत्तर कोरिया को लेकर हाल ही में अंतरराष्ट्रीय मीडिया में एक रिपोर्ट सामने आई है जिसमें दावा किया गया है कि देश ने अपनी परमाणु नीति में एक बेहद सख्त और नया प्रावधान जोड़ा है। रिपोर्ट्स के मुताबिक अगर उत्तर कोरिया के सर्वोच्च नेता किम जोंग-उन की हत्या होती है या किसी बाहरी हमले में देश की शीर्ष नेतृत्व व्यवस्था प्रभावित होती है, तो उत्तर कोरिया को तत्काल परमाणु जवाबी कार्रवाई करने का अधिकार दिया जा सकता है। इन दावों के अनुसार यह बदलाव उत्तर कोरिया की उस पुरानी रणनीति को और मजबूत करता है जिसमें नेतृत्व और शासन को सीधे देश की “राष्ट्रीय सुरक्षा और अस्तित्व” से जोड़ा जाता है। कहा जा रहा है कि हाल के वर्षों में दुनिया में कुछ देशों के खिलाफ हुए तेज और लक्षित सैन्य अभियानों ने उत्तर कोरिया की सुरक्षा एजेंसियों को सतर्क कर दिया है, खासकर ऐसे हमलों को लेकर जो किसी देश की टॉप लीडरशिप को निशाना बनाते हैं। विशेषज्ञों के हवाले से यह भी कहा गया है कि उत्तर कोरिया लंबे समय से अपनी सुरक्षा व्यवस्था को बेहद गुप्त और मजबूत बनाए हुए है, लेकिन आधुनिक निगरानी तकनीक और सैटेलाइट सिस्टम की बढ़ती क्षमता ने उसके रणनीतिक चिंता स्तर को और बढ़ा दिया है। इसी कारण वह अपनी परमाणु नीति को और अधिक आक्रामक और “तुरंत जवाबी कार्रवाई” की दिशा में ढाल रहा है। हालांकि यह भी ध्यान रखना जरूरी है कि ये जानकारी विभिन्न अंतरराष्ट्रीय रिपोर्ट्स और विश्लेषणों पर आधारित है और किसी स्वतंत्र आधिकारिक दस्तावेज़ से इसकी पूरी तरह पुष्टि नहीं हुई है। इसलिए इसे एक रणनीतिक और राजनीतिक संकेत के रूप में देखा जा रहा है, न कि पूरी तरह से घोषित और औपचारिक कानून के रूप में। कुल मिलाकर यह घटनाक्रम यह दिखाता है कि उत्तर कोरिया अपनी सुरक्षा और नेतृत्व को लेकर पहले से कहीं ज्यादा संवेदनशील और सख्त रुख अपना रहा है, और वह किसी भी संभावित खतरे को अपने अस्तित्व से जोड़कर देख रहा है।
कम बजट में SUV खरीदने का सपना होगा पूरा, Kia Syros पर मिल रहा शानदार डिस्काउंट और प्रीमियम फीचर्स का फायदा

नई दिल्ली । एक व्यक्ति लंबे समय से अपनी जरूरतों और बजट के अनुसार एक नई SUV खरीदने की योजना बना रहा था। उसका लक्ष्य था कि उसे एक ऐसा वाहन मिले जो दिखने में स्टाइलिश हो, फीचर्स में आधुनिक हो और कीमत के मामले में भी उसकी पहुंच में हो। लेकिन बाजार में उपलब्ध कई विकल्पों को देखने के बाद भी वह किसी एक मॉडल पर निर्णय नहीं ले पा रहा था। कुछ समय बाद उसे एक ऐसी SUV के बारे में जानकारी मिली जो खास तौर पर बजट और फीचर्स के संतुलन के लिए जानी जाती है। यह SUV उन लोगों के लिए बेहतर विकल्प मानी जा रही है जो कम कीमत में प्रीमियम अनुभव चाहते हैं। इसकी शुरुआती कीमत लगभग 8.40 लाख रुपये के आसपास है, जिससे यह 10 लाख रुपये के बजट में आने वाले खरीदारों के लिए काफी उपयुक्त बन जाती है। दिलचस्प बात यह है कि इस समय इस SUV पर एक विशेष ऑफर भी दिया जा रहा है, जिसने इसे और भी आकर्षक बना दिया है। इस ऑफर के तहत ग्राहकों को कुल मिलाकर लगभग 50,000 रुपये तक का लाभ मिल सकता है। इसमें अलग-अलग प्रकार की छूट शामिल है, जिससे खरीदारी का कुल खर्च कम हो जाता है और ग्राहकों को अतिरिक्त बचत का फायदा मिलता है। यह SUV कई वेरिएंट में उपलब्ध है, जिससे ग्राहक अपनी जरूरत और बजट के अनुसार सही मॉडल चुन सकते हैं। बेस वेरिएंट उन लोगों के लिए बेहतर विकल्प है जो सीमित बजट में एक भरोसेमंद SUV चाहते हैं, जबकि उच्च वेरिएंट में अधिक फीचर्स और प्रीमियम सुविधाएं मिलती हैं। इस वाहन में पेट्रोल और डीजल दोनों प्रकार के इंजन विकल्प दिए गए हैं। पेट्रोल इंजन बेहतर ड्राइविंग अनुभव और स्मूद परफॉर्मेंस प्रदान करता है, जबकि डीजल इंजन अधिक टॉर्क और लंबी दूरी के लिए बेहतर माइलेज देने में सक्षम है। इसके साथ ही इसमें अलग-अलग ट्रांसमिशन विकल्प भी मौजूद हैं, जिससे ड्राइविंग और भी आसान और आरामदायक बन जाती है। फीचर्स के मामले में यह SUV आधुनिक तकनीक से लैस है। इसमें बड़ा डिजिटल डिस्प्ले, पैनोरमिक सनरूफ, वेंटिलेटेड सीट्स और कई स्मार्ट कनेक्टेड फीचर्स शामिल हैं। इसके अलावा इसका डिजाइन भी काफी आकर्षक और प्रीमियम फील देता है, जो इसे अपने सेगमेंट में एक अलग पहचान दिलाता है।
कोहेफिजा में दर्दनाक घटना: पहले छात्रा ने दी जान, फिर मकान मालिक की मौत से इलाके में हड़कंप

भोपाल। मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल का पॉश इलाका कोहेफिजा इस समय दोहरी आत्महत्या की घटनाओं से स्तब्ध है। तीन महीने पहले गांधी मेडिकल कॉलेज (GMC) की एक होनहार छात्रा की मौत से उपजा विवाद थमा भी नहीं था कि अब उसी मकान के मालिक ने मौत को गले लगा लिया है। शनिवार देर रात हुई इस घटना ने पुलिस प्रशासन और जांच प्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। मृतक की पहचान विजय राठौर के रूप में हुई है। बताया जा रहा है कि विजय उसी मकान के मालिक थे, जहाँ एमबीबीएस प्रथम वर्ष की छात्रा रोशनी किराए पर रहती थी। फरवरी माह में रोशनी का शव उसके बाथरूम में मिला था, जिसके बाद से ही विजय और उनका परिवार लगातार जांच के दायरे में और मानसिक तनाव में था। आरोपों के घेरे में जांच और छात्रा के परिजनविजय राठौर की आत्महत्या के बाद उनकी पत्नी करुणा राठौर ने व्यवस्था और छात्रा के परिजनों पर बेहद संगीन आरोप लगाए हैं। करुणा का कहना है कि उनके पति अपराधी नहीं थे, लेकिन छात्रा की मौत के बाद से उन्हें एक अपराधी की तरह प्रताड़ित किया जा रहा था। उन्होंने आरोप लगाया कि रोशनी के परिजन लगातार घर आकर उन्हें धमकाते थे और झूठे केस में फंसाने का दबाव बना रहे थे। पत्नी का यह भी दर्द छलका कि पुलिस की कार्यप्रणाली ने विजय को मानसिक रूप से तोड़ दिया था। करुणा के अनुसार, पुलिस बार-बार बयान दर्ज करने के नाम पर विजय को थाने बुलाती थी और वहां घंटों बिना किसी ठोस वजह के बैठाकर रखा जाता था। सामाजिक लोक-लाज और लगातार पूछताछ के डर ने विजय को गहरे अवसाद (Depression) में धकेल दिया, जिसका परिणाम शनिवार की रात इस आत्मघाती कदम के रूप में सामने आया। क्या था रोशनी सुसाइड केस?मामले की जड़ें फरवरी 2026 की उस घटना में हैं, जब 19 वर्षीय छात्रा रोशनी ने अपने कमरे में खुदकुशी कर ली थी। उस वक्त मेडिकल कॉलेज के छात्रों और रोशनी के परिवार ने इसे हत्या करार देते हुए कोहेफिजा थाने का घेराव किया था। हालांकि, बाद में पुलिस को रोशनी के मोबाइल से एक ‘डिजिटल सुसाइड नोट’ मिला था, जिसमें उसने नीट और एमबीबीएस की पढ़ाई के अत्यधिक तनाव का जिक्र किया था। पुलिस ने मामले की गहराई से जांच के लिए एसआईटी (SIT) का गठन भी किया था, लेकिन अब तक कोई आपराधिक संलिप्तता साबित नहीं हुई थी। पुलिसिया कार्रवाई और वर्तमान स्थितिमकान मालिक की आत्महत्या के बाद कोहेफिजा पुलिस एक बार फिर रक्षात्मक मुद्रा में है। थाना प्रभारी केजी शुक्ला ने बताया कि विजय राठौर की मौत के मामले में मर्ग कायम कर लिया गया है। पुलिस फिलहाल उनकी बेटी के बेंगलुरु से आने का इंतजार कर रही है, जिसके बाद पोस्टमार्टम की प्रक्रिया पूरी की जाएगी। पुलिस का कहना है कि वे इस बात की जांच कर रहे हैं कि क्या वाकई विजय पर किसी तरह का बाहरी दबाव था या उन्होंने किसी अन्य निजी कारण से यह कदम उठाया। यह घटनाक्रम न केवल एक परिवार की तबाही की कहानी है, बल्कि यह भी दर्शाती है कि किसी मामले की लंबी खिंचती जांच और सामाजिक दबाव किस तरह एक निर्दोष व्यक्ति के मानसिक स्वास्थ्य पर घातक प्रहार कर सकते हैं। अब देखना यह होगा कि एसआईटी इन दोनों मौतों के अंतर्संबंधों की गुत्थी कैसे सुलझाती है।
गरीब और प्रतिभाशाली छात्रों के लिए सुनहरा मौका, बिना फीस SSC, JEE और यूपी पुलिस की मुफ्त कोचिंग से बदलेगा भविष्य

नई दिल्ली । एक छोटे शहर का एक छात्र लंबे समय से अपने सपनों को साकार करने की कोशिश कर रहा था। वह SSC और अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करना चाहता था, लेकिन आर्थिक स्थिति उसके रास्ते में सबसे बड़ी बाधा बन रही थी। कोचिंग की ऊंची फीस उसके परिवार के लिए संभव नहीं थी, जिससे उसका आत्मविश्वास धीरे-धीरे कम होने लगा था। इसी दौरान उसे एक ऐसी पहल के बारे में जानकारी मिली जिसने उसकी सोच बदल दी। उसे पता चला कि अब उसे अपने सपनों को छोड़ने की जरूरत नहीं है, क्योंकि प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए एक ऐसी व्यवस्था शुरू की गई है जहां पढ़ाई पूरी तरह मुफ्त है। इस योजना के तहत SSC, NDA, NEET, JEE और यूपी पुलिस जैसी परीक्षाओं की तैयारी विशेषज्ञ शिक्षकों के मार्गदर्शन में कराई जा रही है। यह सुविधा उन सभी युवाओं के लिए है जो मेहनत तो करना चाहते हैं लेकिन संसाधनों की कमी के कारण पीछे रह जाते हैं। यहां किसी भी तरह की आय या वर्ग की सीमा नहीं रखी गई है, जिससे हर प्रतिभाशाली छात्र को समान अवसर मिल सके। इस पहल का उद्देश्य केवल पढ़ाई कराना नहीं, बल्कि युवाओं को सही दिशा देना और उनके सपनों को वास्तविकता में बदलना है। इस व्यवस्था में शिक्षकों का चयन भी एक पारदर्शी प्रक्रिया के माध्यम से किया जाता है। विषय विशेषज्ञों को एक चयन प्रक्रिया से गुजरना होता है, जिसके बाद ही उन्हें छात्रों को पढ़ाने की जिम्मेदारी दी जाती है। इससे यह सुनिश्चित किया जाता है कि छात्रों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा मिले और वे प्रतियोगी परीक्षाओं में बेहतर प्रदर्शन कर सकें। समय के साथ इस योजना के परिणाम भी सामने आने लगे हैं। यहां से पढ़ाई करने वाले कई छात्र पहले ही विभिन्न सरकारी पदों पर चयनित हो चुके हैं। यह सफलता इस बात का प्रमाण है कि सही मार्गदर्शन और उचित अवसर मिलने पर कोई भी छात्र अपने लक्ष्य को हासिल कर सकता है। कक्षाओं का संचालन निर्धारित समय पर किया जाता है और इसके लिए अलग-अलग शिक्षण केंद्र बनाए गए हैं, जहां छात्र नियमित रूप से पढ़ाई कर सकते हैं। साथ ही, आवेदन प्रक्रिया को भी सरल रखा गया है ताकि अधिक से अधिक युवा इसका लाभ उठा सकें। छात्र अपने आवश्यक दस्तावेजों के साथ आसानी से आवेदन कर सकते हैं और इस सुविधा का हिस्सा बन सकते हैं। इस पहल ने उन युवाओं के लिए नई उम्मीद जगाई है जो अब तक संसाधनों की कमी के कारण अपने सपनों से समझौता करने को मजबूर थे। अब उनके पास एक ऐसा मंच है जहां वे बिना किसी आर्थिक दबाव के अपनी तैयारी कर सकते हैं और अपने भविष्य को बेहतर बना सकते हैं। यह केवल एक कोचिंग व्यवस्था नहीं, बल्कि उन हजारों युवाओं के लिए अवसर है जो मेहनत करने के लिए तैयार हैं, बस उन्हें सही दिशा की जरूरत है।
त्रिविध ताप: जीवन के तीन बड़े दुख और उनसे मुक्ति का आध्यात्मिक मार्ग

नई दिल्ली। मानव जीवन में सुख और दुख दोनों का अनुभव स्वाभाविक रूप से होता है, लेकिन शास्त्रों में बताया गया है कि मनुष्य को लगातार तीन प्रकार के दुखों का सामना करना पड़ता है, जिन्हें त्रिविध ताप कहा जाता है। ये हैं आध्यात्मिक, आधिभौतिक और आधिदैविक दुःख। इनका प्रभाव व्यक्ति के शरीर, मन, बाहरी संसार और भाग्य तक पर पड़ता है। आध्यात्मिक दुःख क्या है?आध्यात्मिक दुःख वे होते हैं जो व्यक्ति के अपने शरीर और मन से उत्पन्न होते हैं। इसमें बीमारी, बुढ़ापा, मानसिक तनाव, चिंता, क्रोध, लोभ और इच्छाओं की असंतुष्टि शामिल हैं। यह दुःख भीतर से उत्पन्न होकर व्यक्ति की शांति को भंग करता है। आधिभौतिक दुःख क्या है?आधिभौतिक दुःख बाहरी जीवों और भौतिक संसार से प्राप्त होता है। जैसे—चोरी, हिंसा, पशुओं का आक्रमण, या अन्य लोगों से होने वाला नुकसान। यह वह कष्ट है जो समाज और बाहरी परिस्थितियों के कारण व्यक्ति को झेलना पड़ता है। आधिदैविक दुःख क्या है?आधिदैविक दुःख उन कष्टों को कहा जाता है जो प्राकृतिक शक्तियों या भाग्य से उत्पन्न होते हैं। जैसेबाढ़, सूखा, भूकंप, बिजली गिरना, या अचानक आने वाली आपदाएं। यह ऐसे कष्ट होते हैं जिन्हें मनुष्य सीधे नियंत्रित नहीं कर सकता। त्रिविध ताप से मुक्ति का मार्गधर्मग्रंथों के अनुसार इन तीनों दुखों से स्थायी मुक्ति केवल ज्ञान, भक्ति, सत्संग और ईश्वर की शरण में जाने से संभव है। जब मनुष्य आत्मज्ञान प्राप्त करता है और निष्काम कर्म के मार्ग पर चलता है, तो वह बाहरी परिस्थितियों से प्रभावित हुए बिना भीतर से शांत रहने लगता है। आध्यात्मिक परंपराओं में यह माना गया है कि सच्चा सुख बाहरी वस्तुओं में नहीं, बल्कि आत्मिक शांति में है। जब व्यक्ति अपने भीतर ईश्वर के प्रति समर्पण और सही जीवन दृष्टि विकसित करता है, तब त्रिविध ताप का प्रभाव धीरे-धीरे समाप्त होने लगता है। त्रिविध ताप जीवन का हिस्सा हैं, लेकिन इनसे घबराने के बजाय इनके वास्तविक स्वरूप को समझना आवश्यक है। ज्ञान और भक्ति का मार्ग अपनाकर मनुष्य न केवल इन दुखों से मुक्त हो सकता है, बल्कि जीवन में स्थायी शांति और संतुलन भी प्राप्त कर सकता है।
मदर्स डे का इतिहास, शुरुआत और महत्व: माँ के निस्वार्थ प्रेम का वैश्विक उत्सव
मदर्स डे (Mother’s Day) एक ऐसा वैश्विक पर्व है जिसे माँ के निस्वार्थ प्रेम, त्याग और समर्पण के सम्मान में मनाया जाता है। यह दिन हर साल अलग-अलग देशों में मई के दूसरे रविवार को मनाया जाता है, और इसका उद्देश्य मातृत्व के महत्व को समाज में पहचान दिलाना है। इसकी शुरुआत कब और किसने की?आधुनिक मदर्स डे की शुरुआत 1908 में अमेरिका में अन्ना जार्विस (Anna Jarvis) ने की थी। उन्होंने अपनी माँ एन रीव्स जार्विस के सम्मान में इस दिन को मनाने की पहल की थी, जिन्होंने समाज सेवा और महिलाओं के अधिकारों के लिए काम किया था। अन्ना जार्विस ने पहली बार वेस्ट वर्जीनिया के एक चर्च में अपनी माँ की याद में एक छोटा कार्यक्रम आयोजित किया था। धीरे-धीरे यह विचार पूरे अमेरिका में फैल गया और 1914 में अमेरिकी राष्ट्रपति वुडरो विल्सन ने इसे आधिकारिक रूप से राष्ट्रीय अवकाश घोषित कर दिया। मदर्स डे क्यों मनाया जाता है?मदर्स डे मनाने का मुख्य उद्देश्य माँ के योगदान को सम्मान देना और उनके प्रति आभार व्यक्त करना है। माँ वह पहली व्यक्ति होती है जो हमें जीवन देती है, हमारा पालन-पोषण करती है और हर कठिन समय में हमारे साथ खड़ी रहती है। यह दिन हमें यह याद दिलाता है कि माँ का प्रेम निस्वार्थ होता है और उसका स्थान जीवन में सबसे ऊंचा होता है। समाज में यह संदेश भी दिया जाता है कि माँ का सम्मान केवल एक दिन नहीं, बल्कि हर दिन किया जाना चाहिए। आज के समय में इसका महत्वआज मदर्स डे पूरी दुनिया में मनाया जाता है। स्कूलों, कॉलेजों और परिवारों में इस दिन विशेष कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं। लोग अपनी माँ को उपहार देते हैं, उनके साथ समय बिताते हैं और उनके प्रति प्रेम और सम्मान व्यक्त करते हैं। कुल मिलाकर मदर्स डे केवल एक उत्सव नहीं, बल्कि एक भावना है जो हमें माँ के त्याग, प्रेम और जीवन में उनके महत्व को समझने का अवसर देती है। यह दिन हमें सिखाता है कि माँ का आशीर्वाद ही जीवन की सबसे बड़ी शक्ति है। -मदर्स डे
मदर्स डे: ममता, त्याग और निःस्वार्थ प्रेम का विशेष उत्सव

मदर्स डे (Mother’s Day) हर साल दुनिया भर में माताओं के प्रति सम्मान, प्रेम और आभार व्यक्त करने के लिए मनाया जाता है। यह दिन सिर्फ एक उत्सव नहीं, बल्कि उस अनमोल रिश्ते को समर्पित होता है जो जीवन की पहली सीख, पहला सहारा और सबसे बड़ा सुरक्षा कवच होता है माँ। माँ को जीवन की पहली गुरु कहा जाता है, क्योंकि वही हमें चलना, बोलना, समझना और सही-गलत की पहचान करना सिखाती है। उसकी ममता बिना किसी स्वार्थ के होती है, जो हर परिस्थिति में अपने बच्चों के साथ खड़ी रहती है। चाहे कितनी भी मुश्किलें क्यों न हों, माँ का प्यार कभी कम नहीं होता। मदर्स डे मनाने की शुरुआत आधुनिक समय में एक सामाजिक पहल के रूप में हुई, जिसका उद्देश्य मातृत्व के महत्व को वैश्विक स्तर पर पहचान दिलाना था। धीरे-धीरे यह दिन दुनिया के कई देशों में मनाया जाने लगा और आज यह एक अंतरराष्ट्रीय उत्सव बन चुका है। इस दिन लोग अपनी माताओं को उपहार देते हैं, उनके साथ समय बिताते हैं और उनके प्रति अपना आभार व्यक्त करते हैं। कई स्कूल, कॉलेज और सामाजिक संस्थाएं भी इस अवसर पर विशेष कार्यक्रम आयोजित करती हैं, जिसमें माँ के योगदान को सम्मानित किया जाता है। माँ का रिश्ता शब्दों से परे होता है। वह हर दर्द को छुपाकर भी मुस्कुराना सिखाती है और अपने बच्चों के भविष्य के लिए अपने सपनों का त्याग कर देती है। इसलिए मदर्स डे हमें यह याद दिलाता है कि माँ का सम्मान केवल एक दिन नहीं, बल्कि हर दिन किया जाना चाहिए। कुल मिलाकर मदर्स डे हमें यह संदेश देता है कि जीवन में चाहे कितनी भी सफलता मिल जाए, माँ का स्थान हमेशा सबसे ऊपर रहता है। उसकी ममता ही जीवन की सबसे बड़ी ताकत और सबसे खूबसूरत आशीर्वाद है। -10 मई मदर्स डे विशेष
छोटी-छोटी वित्तीय गलतियां कैसे बिगाड़ सकती हैं आपकी आर्थिक सेहत, जानें सही निवेश और बचत की जरूरी रणनीति

नई दिल्ली । एक सामान्य नौकरीपेशा व्यक्ति हर महीने अपनी कमाई से संतुष्ट महसूस करता था। उसकी आमदनी समय के साथ बढ़ रही थी और उसे लगता था कि वह आर्थिक रूप से सुरक्षित दिशा में आगे बढ़ रहा है। लेकिन धीरे-धीरे उसने महसूस किया कि बचत उतनी तेजी से नहीं बढ़ रही जितनी उम्मीद थी। खर्च लगातार बढ़ रहे थे और महीने के अंत में बचत लगभग वही रहती थी या कभी-कभी कम भी हो जाती थी। शुरुआत में उसने इसे सामान्य माना, लेकिन समय के साथ स्थिति बदलने लगी। महंगाई ने धीरे-धीरे उसके रोजमर्रा के खर्चों को प्रभावित करना शुरू कर दिया। किराना, यात्रा, इलाज और अन्य आवश्यक चीजों की कीमतें बढ़ती रहीं, लेकिन उसकी बचत उसी गति से नहीं बढ़ पाई। उसे समझ नहीं आ रहा था कि कमाई बढ़ने के बावजूद आर्थिक दबाव क्यों महसूस हो रहा है। कुछ समय बाद उसने ध्यान दिया कि उसका अधिकांश पैसा बैंक खाते में ही पड़ा रहता था। उसे यह तरीका सुरक्षित लगता था, इसलिए वह निवेश करने से बचता था। लेकिन इसी आदत ने उसकी असली समस्या पैदा की थी। पैसा सुरक्षित तो था, लेकिन उसकी वृद्धि नहीं हो रही थी। धीरे-धीरे उसकी क्रय शक्ति कम होती जा रही थी, जिसका असर उसके भविष्य की योजनाओं पर पड़ने लगा। फिर उसने एक और आदत पर गौर किया। जब भी बाजार में किसी तरह की गिरावट या अनिश्चितता की खबर आती, तो वह घबरा जाता और अपने छोटे निवेश भी निकाल लेता। बाद में उसे समझ आया कि यह भावनात्मक निर्णय था, जिसने उसे लंबे समय में नुकसान पहुंचाया। निवेश में स्थिरता और धैर्य की कमी ने उसकी आर्थिक वृद्धि को बाधित कर दिया था। समय के साथ एक और बदलाव सामने आया। जैसे-जैसे उसकी आय बढ़ी, वैसे-वैसे उसके खर्च भी बढ़ने लगे। वह पहले से अधिक आरामदायक जीवन जीने लगा, लेकिन अनजाने में उसकी बचत की क्षमता कम होती गई। उसे लगा कि वह बेहतर जीवन जी रहा है, लेकिन असल में उसकी वित्तीय नींव कमजोर हो रही थी। धीरे-धीरे उसे एहसास हुआ कि सिर्फ कमाई बढ़ाना पर्याप्त नहीं है। असली चुनौती पैसे को सही तरीके से संभालने में है। बिना योजना के खर्च, भावनात्मक निवेश निर्णय और केवल बचत पर निर्भर रहना उसकी सबसे बड़ी गलतियां थीं। उसने अपनी आदतें बदलनी शुरू कीं। खर्चों पर नियंत्रण लाया, निवेश को लंबे समय के नजरिए से समझा और छोटी अवधि के लाभ के बजाय स्थिर वृद्धि पर ध्यान दिया। धीरे-धीरे उसकी आर्थिक स्थिति मजबूत होने लगी और उसे समझ आया कि वित्तीय सफलता किसी एक बड़े फैसले से नहीं, बल्कि छोटी-छोटी सही आदतों से बनती है।
दीप दासगुप्ता का बड़ा बयान: राशिद खान ने फिर पकड़ी अपनी क्लासिक फॉर्म, बल्लेबाज़ों पर बरपाया कहर
नई दिल्ली । क्रिकेट फैंस ने एक बार फिर उस राशिद खान को देखा, जो अपनी घातक स्पिन गेंदबाजी के लिए दुनिया भर में मशहूर हैं। गुजरात टाइटंस (GT) और राजस्थान रॉयल्स (RR) के बीच खेले गए मुकाबले में राशिद ने 4 ओवर में 33 रन देकर 4 महत्वपूर्ण विकेट झटके और अपनी टीम को 77 रनों की बड़ी जीत दिलाने में अहम भूमिका निभाई। इस शानदार प्रदर्शन के बाद भारत के पूर्व विकेटकीपर-बल्लेबाज दीप दासगुप्ता ने राशिद खान की जमकर तारीफ की। उन्होंने कहा कि राशिद इस मैच में पूरी तरह अपनी पुरानी लय में नजर आए और उनकी गेंदबाजी का फोकस लगातार स्टंप्स पर था। “हर गेंद स्टंप्स पर लग रही थी” दीप दासगुप्ताएक क्रिकेट चर्चा के दौरान दीप दासगुप्ता ने कहा कि जब राशिद अपने बेस्ट फॉर्म में होते हैं, तो उनकी गेंदें लगातार बल्लेबाज को परेशानी में डालती हैं। इस मैच में भी उन्होंने वही पुरानी धार दिखाई। उन्होंने खास तौर पर शुभम दुबे के विकेट का जिक्र करते हुए कहा कि राशिद ने बेहतरीन लाइन और लेंथ के साथ मिडिल स्टंप को लगातार टारगेट किया। दासगुप्ता के अनुसार, राशिद की सबसे बड़ी ताकत यही है कि वह लगातार स्टंप्स पर हमला करते हैं, जिससे बल्लेबाज के पास गलती की गुंजाइश बहुत कम रह जाती है। घातक गेंदबाजी से RR की पारी ध्वस्तराशिद खान ने इस मैच में शानदार गेंदबाजी करते हुए ध्रुव जुरेल, रवींद्र जडेजा, फरेरा और शुभम दुबे को पवेलियन भेजा। खास बात यह रही कि उनके तीन विकेट क्लीन बोल्ड और एक विकेट एलबीडब्ल्यू के रूप में आया, जो उनकी सटीकता को दर्शाता है। राजस्थान रॉयल्स की टीम 230 रनों के बड़े लक्ष्य का पीछा करते हुए सिर्फ 152 रन पर सिमट गई, और पूरी टीम ऑलआउट हो गई। GT की शानदार जीत और टॉप-2 में एंट्रीगुजरात टाइटंस के लिए कप्तान शुभमन गिल ने 44 गेंदों में 84 रनों की बेहतरीन पारी खेली, जबकि साई सुदर्शन ने 55 रनों का योगदान दिया। टीम ने इस जीत के साथ अपना सातवां मुकाबला जीतकर अंक तालिका में दूसरा स्थान हासिल कर लिया। राशिद खान का यह प्रदर्शन न सिर्फ गुजरात टाइटंस के लिए अहम साबित हुआ, बल्कि यह भी संकेत देता है कि वह एक बार फिर अपनी घातक फॉर्म में लौट आए हैं। दीप दासगुप्ता की टिप्पणी भी यही बताती है कि जब राशिद लय में होते हैं, तो उन्हें खेलना किसी भी बल्लेबाज के लिए आसान नहीं होता।