Charak Bhawan hospital: उज्जैन के चरक भवन अस्पताल में ब्लैकआउट; एक घंटे अंधेरे में इलाज, मरीजों में हड़कंप

Charak Bhawan hospital: नई दिल्ली । मध्य प्रदेश के उज्जैन स्थित संभागीय चरक भवन अस्पताल में सोमवार शाम उस समय अव्यवस्था फैल गई जब अचानक करीब एक घंटे तक बिजली सप्लाई ठप हो गई। शाम लगभग 6:45 बजे हुई इस घटना के बाद पूरा अस्पताल परिसर अंधेरे में डूब गया और मरीजों को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ा। बिजली गुल होने की स्थिति करीब 7:45 बजे तक बनी रही, जिससे अस्पताल की स्वास्थ्य सेवाएं प्रभावित रहीं। जनरेटर बैकअप फेल, टॉर्च की रोशनी में इलाज अस्पताल में बिजली जाने के बावजूद जनरेटर बैकअप समय पर चालू नहीं हो सका। इसके चलते कई वार्डों में डॉक्टरों और स्टाफ को मोबाइल टॉर्च की रोशनी में ही इलाज करना पड़ा। वार्डों, गलियारों और इमरजेंसी यूनिट में अंधेरा होने के कारण मरीजों की स्थिति और भी कठिन हो गई। गर्मी और उमस के बीच मरीज बेहाल नजर आए। इमरजेंसी वार्ड में सबसे ज्यादा अस सबसे गंभीर स्थिति इमरजेंसी वार्ड में देखने को मिली, जहां बिजली लंबे समय तक बहाल नहीं हो पाई। गंभीर मरीजों को भी अंधेरे में इलाज मिलने से परिजन काफी परेशान दिखाई दिए। परिजनों ने बताया कि इस दौरान अस्पताल में कोई जिम्मेदार अधिकारी मौके पर मौजूद नहीं था, जिससे व्यवस्था पूरी तरह से प्रभावित रही। परिजनों ने उठाए सवाल, व्यवस्था पर नाराजग मरीजों के परिजनों ने अस्पताल प्रशासन पर लापरवाही के गंभीर आरोप लगाए हैं। उनका कहना है कि इतनी बड़ी सरकारी स्वास्थ्य सुविधा में भी बुनियादी बिजली व्यवस्था का ठप होना बेहद चिंताजनक है। लोगों ने यह भी कहा कि जनरेटर जैसी बैकअप सुविधा होते हुए भी उसका समय पर शुरू न होना प्रशासनिक विफलता को दर्शाता है। पहले भी उठ चुके हैं सवाल चरक भवन अस्पताल में इससे पहले भी ऑक्सीजन प्लांट और अन्य स्वास्थ्य सुविधाओं को लेकर सवाल उठते रहे हैं। बार-बार सुधार के दावों के बावजूद जमीनी स्तर पर स्थिति में कोई खास बदलाव नहीं दिख रहा है। इस ताजा घटना ने एक बार फिर अस्पताल प्रबंधन की तैयारियों और व्यवस्थाओं पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। अधिकारी से संपर्क नहीं हो सका इस मामले में सिविल सर्जन डॉ. संगीता पलसानिया से संपर्क करने का प्रयास किया गया, लेकिन उन्होंने फोन रिसीव नहीं किया। चरक भवन अस्पताल में हुआ यह ब्लैकआउट न केवल तकनीकी खामी को उजागर करता है, बल्कि स्वास्थ्य सेवाओं की तैयारियों पर भी बड़ा सवाल खड़ा करता है। मरीजों की सुरक्षा और सुविधा को लेकर प्रशासन को गंभीर कदम उठाने की जरूरत है।
MP BJP LEADER CONTROVERSY: सादगी की अपील बनाम वीआईपी कल्चर, 200 वाहनों के काफिले ने रोका शहर का रास्ता

MP BJP LEADER CONTROVERSY: नई दिल्ली । मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में मंगलवार को उस समय ट्रैफिक व्यवस्था चरमरा गई जब पाठ्यपुस्तक निगम के नवनियुक्त अध्यक्ष सौभाग्य सिंह ठाकुर उज्जैन से करीब 200 से अधिक वाहनों के काफिले के साथ पदभार ग्रहण करने पहुंचे। इस काफिले के कारण हाईवे से लेकर भोपाल शहर के कई हिस्सों में लंबा जाम लग गया। काफिले के चलते बोर्ड ऑफिस, डीबी मॉल क्षेत्र और अरेरा हिल्स तक यातायात बुरी तरह प्रभावित रहा। भीषण गर्मी में जाम में फंसे लोग, खासकर बच्चे और बुजुर्ग, काफी परेशान नजर आए। भाजपा कार्यालय में हुआ औपचारिक स्वाग भोपाल पहुंचने के बाद सौभाग्य सिंह ठाकुर ने प्रदेश भाजपा कार्यालय में पार्टी नेताओं से मुलाकात की। इस दौरान उन्होंने प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल और प्रदेश महामंत्री राहुल कोठारी के साथ पंडित दीनदयाल उपाध्याय और श्यामा प्रसाद मुखर्जी की प्रतिमाओं पर माल्यार्पण किया। पूरे कार्यक्रम के दौरान समर्थकों की भारी भीड़ मौजूद रही और काफिले की तस्वीरें सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो गईं। पीएम मोदी की अपील और जमीनी हकीकत प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हाल ही में देश में वैश्विक परिस्थितियों को देखते हुए नागरिकों से संयम और सादगी अपनाने की अपील की थी। उन्होंने कहा था कि- अनावश्यक सोने की खरीदारी टाली जाए गैर-जरूरी विदेश यात्राएं स्थगित की जाएं सार्वजनिक परिवहन और कारपूलिंग को बढ़ावा दिया जाए ऊर्जा और संसाधनों का संयमित उपयोग किया जाए ट्रैफिक व्यवस्था हुई प्रभावित काफिले के कारण कई प्रमुख मार्गों पर घंटों जाम की स्थिति बनी रही। वाहनों की लंबी कतारों से आम जनता को भारी परेशानी का सामना करना पड़ा। पुलिस को यातायात नियंत्रित करने में अतिरिक्त मेहनत करनी पड़ी। भोपाल में हुआ यह घटनाक्रम एक बार फिर चर्चा का विषय बन गया है कि जहां एक ओर शीर्ष नेतृत्व सादगी और संयम की बात कर रहा है, वहीं जमीनी स्तर पर भव्यता और शक्ति प्रदर्शन के दृश्य सामने आ रहे हैं।
उज्जैन में अधिवक्ता चुनाव की वोटिंग शुरू: 2367 वकील करेंगे मतदान, 4 उम्मीदवार मैदान में

नई दिल्ली । मध्यप्रदेश राज्य अधिवक्ता परिषद के चुनाव के लिए उज्जैन कोर्ट परिसर में मंगलवार सुबह 10 बजे से मतदान प्रक्रिया शुरू हो गई। यह मतदान शाम 5 बजे तक जारी रहेगा। इस चुनाव में करीब 2367 अधिवक्ता अपने मताधिकार का उपयोग कर रहे हैं। सुबह से ही मतदान केंद्र पर अधिवक्ताओं की भीड़ देखने को मिली, जहां गर्मी को ध्यान में रखते हुए बड़ी संख्या में लोग सुबह के समय ही मतदान करने पहुंच गए। तीन हॉल में मतदान की व्यवस्था, महिला अधिवक्ताओं की भी भागीदारीमतदान प्रक्रिया को सुचारू रूप से संपन्न कराने के लिए कोर्ट परिसर में तीन अलग-अलग हॉल बनाए गए हैं। व्यवस्थाओं के बीच मतदान शांतिपूर्ण ढंग से चल रहा है। इस चुनाव में महिला अधिवक्ताओं की भी सक्रिय भागीदारी देखने को मिली, जो बड़ी संख्या में मतदान करने पहुंचीं। परिसर के बाहर प्रत्याशियों द्वारा मतदाताओं से संपर्क और अपील भी की जा रही है। चार उम्मीदवारों के बीच मुकाबलाउज्जैन में इस चुनावी मुकाबले में चार प्रमुख प्रत्याशी मैदान में हैं-संदीप मेहताआशीष उपाध्यायअतुल रैनासुरेंद्र चतुर्वेदीये सभी उम्मीदवार अधिवक्ताओं से समर्थन जुटाने में लगे हुए हैं और चुनावी माहौल को सक्रिय बनाए हुए हैं। शांतिपूर्ण मतदान के लिए कड़ी व्यवस्थाबार एसोसिएशन अध्यक्ष ओम सारवान ने बताया कि मतदान प्रक्रिया को शांतिपूर्ण और पारदर्शी तरीके से संपन्न कराने के लिए विशेष व्यवस्था की गई है। मुख्य चुनाव अधिकारी विशेष सत्र न्यायाधीश एपीएस चौहान और अन्य न्यायिक अधिकारियों की निगरानी में मतदान प्रक्रिया जारी है। 25 सदस्यों के चयन के लिए हो रहा मतदानयह चुनाव प्रदेश स्तर पर आयोजित किया जा रहा है, जिसमें अधिवक्ता परिषद के कुल 25 सदस्यों का चयन किया जाएगा। मतदान के बाद मतगणना आगामी चरण में जबलपुर में की जाएगी। उज्जैन में अधिवक्ता परिषद चुनाव को लेकर शांतिपूर्ण और उत्साहपूर्ण माहौल देखने को मिल रहा है। अधिवक्ताओं की बड़ी भागीदारी इस चुनाव की अहमियत को दर्शाती है।
तेल संकट की आहट से हड़कंप: ईंधन महंगा होने के संकेत, विदेशी मुद्रा बचाने को लेकर बड़े कदमों पर विचार

नई दिल्ली । वैश्विक स्तर पर बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव, विशेषकर ईरान से जुड़े संघर्ष ने अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा बाजार में अस्थिरता पैदा कर दी है। इसका सीधा असर भारत जैसे देशों पर दिखाई देने लगा है, जो अपनी तेल जरूरतों के लिए बड़े पैमाने पर आयात पर निर्भर हैं। कच्चे तेल की कीमतों में तेजी और आपूर्ति श्रृंखला पर दबाव के कारण भारत में पेट्रोल और डीजल के दाम बढ़ने की आशंका मजबूत होती जा रही है, जिससे आम जनता की चिंता भी बढ़ गई है। देश की आर्थिक स्थिति को देखते हुए नीति-निर्माता लगातार इस बात पर मंथन कर रहे हैं कि विदेशी मुद्रा भंडार पर बढ़ते दबाव को कैसे कम किया जाए। बढ़ते आयात बिल और अंतरराष्ट्रीय बाजार में डॉलर की मजबूती ने भारतीय रुपये पर दबाव बढ़ा दिया है। इसी वजह से सरकार ऐसे कदमों पर विचार कर रही है, जिनसे विदेशी मुद्रा की बचत की जा सके और अर्थव्यवस्था को स्थिर रखा जा सके। आर्थिक विशेषज्ञों के अनुसार, यदि वैश्विक परिस्थितियां इसी तरह बनी रहती हैं तो घरेलू बाजार में ईंधन कीमतों में संशोधन करना पड़ सकता है। हालांकि यह फैसला आसान नहीं होगा क्योंकि इसका सीधा असर महंगाई और आम लोगों की जेब पर पड़ेगा। सरकार इस समय एक संतुलित रणनीति अपनाने की कोशिश कर रही है, जिसमें विकास और आर्थिक स्थिरता दोनों को बनाए रखा जा सके। इसके साथ ही यह भी चर्चा में है कि सोना और इलेक्ट्रॉनिक वस्तुओं जैसे गैर-जरूरी आयात पर कुछ नियंत्रण लगाए जा सकते हैं। इसका उद्देश्य विदेशी मुद्रा के बहिर्वाह को कम करना और देश के वित्तीय संतुलन को बनाए रखना है। पिछले कुछ समय में आयात बढ़ने और ऊर्जा कीमतों में उछाल के कारण चालू खाता घाटा भी दबाव में रहा है, जिससे नीति-निर्माताओं की चिंता और बढ़ गई है। भारतीय मुद्रा बाजार में भी इस तनाव का असर साफ देखा जा रहा है, जहां रुपये में कमजोरी दर्ज की गई है। हालांकि केंद्रीय बैंक स्थिति को स्थिर करने के लिए लगातार बाजार में हस्तक्षेप कर रहा है और विदेशी मुद्रा प्रवाह को नियंत्रित करने के उपायों पर काम कर रहा है। बैंकिंग और व्यापारिक नियमों में भी कुछ सख्ती की संभावना जताई जा रही है ताकि डॉलर की अनावश्यक निकासी को रोका जा सके। इस पूरे आर्थिक परिदृश्य के बीच सरकार नागरिकों से भी सतर्क और जिम्मेदार व्यवहार की अपील कर रही है। लोगों से अपेक्षा की जा रही है कि वे अनावश्यक खर्चों में कटौती करें और विदेशी वस्तुओं पर निर्भरता कम करें। विशेषकर सोने और आयातित वस्तुओं की खरीद को लेकर संयम रखने की बात कही जा रही है, ताकि देश की आर्थिक स्थिरता को मजबूती मिल सके। कुल मिलाकर, वैश्विक संकट और तेल बाजार में उथल-पुथल ने भारत के सामने एक नई आर्थिक चुनौती खड़ी कर दी है। आने वाले समय में सरकार द्वारा लिए जाने वाले निर्णय यह तय करेंगे कि देश इस दबाव से कितनी तेजी और संतुलन के साथ बाहर निकल पाता है और आम जनता पर इसका कितना प्रभाव पड़ता है।
युद्ध, महंगाई और सोने की तेजी के बीच बड़ा सवाल-क्या अभी खरीदारी करना सही फैसला है?

नई दिल्ली । बाजार में इन दिनों सोने की चमक पहले से कहीं ज्यादा तेज दिखाई दे रही है, लेकिन इसके पीछे एक ऐसी कहानी छिपी है जो केवल निवेश तक सीमित नहीं है। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बढ़ते तनाव ने आर्थिक दुनिया को अस्थिर कर दिया है और इसी अस्थिरता ने सोने को एक बार फिर सबसे सुरक्षित विकल्प बना दिया है। लोग तेजी से अपनी पूंजी को सोने में बदलने की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन इसी बीच सरकार का संदेश आया है जिसने इस पूरे रुझान को एक नई दिशा दे दी है। कहानी केवल कीमतों के बढ़ने की नहीं है, बल्कि इसके पीछे छिपे उस दबाव की है जो देश की अर्थव्यवस्था पर धीरे-धीरे असर डाल रहा है। जब वैश्विक बाजारों में अनिश्चितता बढ़ती है, तो निवेशक सुरक्षित विकल्पों की ओर भागते हैं और सोना हमेशा से इस सूची में सबसे ऊपर रहा है। लेकिन इस बार स्थिति थोड़ी अलग है क्योंकि मांग इतनी तेज है कि इसका असर सीधे देश के आयात और मुद्रा संतुलन पर पड़ने लगा है। सरकार की चिंता इस बात को लेकर है कि जब सोने की खरीदारी बढ़ती है, तो देश को ज्यादा विदेशी मुद्रा खर्च करनी पड़ती है। इसका असर रुपये की मजबूती पर पड़ता है और धीरे-धीरे पूरी अर्थव्यवस्था पर दबाव बनता है। इसी वजह से नीति-निर्माता यह चाहते हैं कि निवेशक केवल भावनाओं में आकर खरीदारी न करें, बल्कि स्थिति को समझकर निर्णय लें। इसके साथ ही वैश्विक ऊर्जा संकट भी इस कहानी का एक बड़ा हिस्सा है। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव ने पहले ही भारत जैसे देशों के लिए चुनौतियां बढ़ा दी हैं। अगर संसाधनों का बड़ा हिस्सा सोने के आयात में चला जाता है, तो जरूरी क्षेत्रों में संतुलन बनाए रखना मुश्किल हो सकता है। यही कारण है कि सरकार इस समय आर्थिक प्राथमिकताओं को बेहद सावधानी से संभाल रही है। एक और महत्वपूर्ण पहलू रुपये की स्थिरता से जुड़ा है। जब वैश्विक दबाव बढ़ता है, तो डॉलर मजबूत होता है और अगर देश में सोने की मांग अचानक बढ़ जाती है, तो यह स्थिति और जटिल हो सकती है। कमजोर मुद्रा का सीधा असर आम लोगों की जिंदगी पर पड़ता है क्योंकि आयातित वस्तुएं महंगी हो जाती हैं और महंगाई का दबाव बढ़ता है। इसी पूरे परिदृश्य के बीच सरकार ने यह संकेत दिया है कि निवेशकों को सोच-समझकर आगे बढ़ना चाहिए। फिजिकल गोल्ड की बजाय ऐसे विकल्पों पर ध्यान देने की सलाह दी जा रही है जो न केवल सुरक्षित हों बल्कि देश की अर्थव्यवस्था पर अतिरिक्त बोझ भी न डालें। डिजिटल माध्यमों और अन्य वित्तीय साधनों को अधिक स्थिर और संतुलित विकल्प के रूप में देखा जा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि मौजूदा सोने की कीमतें असामान्य परिस्थितियों का परिणाम हैं और जैसे ही वैश्विक तनाव में कमी आएगी, बाजार में संतुलन वापस आ सकता है। ऐसे में ऊंचे स्तर पर की गई जल्दबाजी की खरीदारी भविष्य में नुकसान का कारण बन सकती है। कुल मिलाकर यह पूरा घटनाक्रम केवल सोने की कीमतों की कहानी नहीं है, बल्कि एक बड़े आर्थिक संतुलन की कहानी है जिसमें हर निर्णय का असर देश की वित्तीय स्थिरता पर पड़ सकता है।
मिराज 2000: भारत की परमाणु ताकत का अहम स्तंभ, ईरान-यूक्रेन संघर्षों में भी साबित हुआ ‘गेम चेंजर’ फाइटर जेट

नई दिल्ली। मिराज 2000 एक फ्रांसीसी मूल का 4th जनरेशन मल्टीरोल फाइटर जेट है, जिसे डसॉल्ट एविएशन ने विकसित किया था और यह कई देशों की वायु सेनाओं में लंबे समय से सेवा दे रहा है। भारत ने इस विमान को 1980 के दशक के अंत में शामिल किया था और यह आज भी भारतीय वायुसेना के सबसे भरोसेमंद लड़ाकू विमानों में से एक माना जाता है। भारतीय वायुसेना में मिराज 2000 का मुख्य रोल एयर डिफेंस, सटीक हमला और रणनीतिक मिशन हैं। भारत के न्यूक्लियर ट्रायड में वायु-आधारित विकल्प के तौर पर इसे एक समय पर महत्वपूर्ण प्लेटफॉर्म माना गया, क्योंकि यह परमाणु हथियार ले जाने और उन्हें गिराने की क्षमता रखता है। हालांकि भारत की आधिकारिक न्यूक्लियर नीति “No First Use” पर आधारित है, यानी भारत पहले परमाणु हमला नहीं करता, बल्कि केवल जवाबी कार्रवाई की रणनीति रखता है। मिराज 2000 की सबसे बड़ी ताकत इसकी सटीकता, तेज गति और कठिन परिस्थितियों में भी मिशन पूरा करने की क्षमता है। भारत ने कारगिल युद्ध (1999) में इसी विमान का प्रभावी इस्तेमाल किया था, जहां इसने ऊंचाई वाले क्षेत्रों में सटीक बमबारी कर महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। हाल के वर्षों में मिराज 2000 को कई अपग्रेड्स दिए गए हैं, जिससे इसकी एवियोनिक्स, रडार और हथियार प्रणाली और आधुनिक हो गई है। हालांकि अब भारत धीरे-धीरे राफेल जैसे नए लड़ाकू विमानों को शामिल कर रहा है, जो भविष्य में कुछ रणनीतिक भूमिकाएं संभाल रहे हैं। दुनिया के अन्य देशों में भी मिराज 2000 का उपयोग किया जाता है। यूक्रेन ने इसे रूसी ड्रोन और क्रूज मिसाइलों को रोकने में काफी प्रभावी पाया है, खासकर एयर डिफेंस इंटरसेप्शन मिशनों में। वहीं UAE जैसे देशों ने भी इस विमान को लंबे समय तक अपने बेड़े में शामिल रखा है और इसे स्ट्राइक मिशनों में उपयोग किया है। जहां तक ईरान या किसी अन्य हालिया संघर्ष में मिराज के इस्तेमाल के दावों का सवाल है, उनकी स्वतंत्र और आधिकारिक पुष्टि उपलब्ध नहीं है, इसलिए उन्हें पुख्ता तथ्य के रूप में नहीं माना जा सकता। कुल मिलाकर मिराज 2000 आज भी एक मजबूत और भरोसेमंद लड़ाकू विमान माना जाता है, जिसने भारत सहित कई देशों की वायु शक्ति को लंबे समय तक मजबूती दी है और अब यह धीरे-धीरे नई पीढ़ी के फाइटर जेट्स के साथ अपनी भूमिका साझा कर रहा है।
गुवाहाटी में शक्ति प्रदर्शन: हिमंता बिस्वा सरमा ने दूसरी बार ली मुख्यमंत्री पद की शपथ, नई सरकार की शुरुआत

नई दिल्ली । असम की राजनीति में आज एक ऐसा क्षण देखने को मिला जिसने राज्य के प्रशासनिक और राजनीतिक इतिहास में एक नया अध्याय जोड़ दिया। हिमंता बिस्वा सरमा ने लगातार दूसरी बार मुख्यमंत्री पद की शपथ लेकर सत्ता की कमान फिर से संभाल ली। गुवाहाटी में आयोजित इस भव्य और ऐतिहासिक समारोह में पूरे राज्य की नजरें टिकी रहीं, जहां राजनीतिक शक्ति और जनसमर्थन का बड़ा प्रदर्शन देखने को मिला। सुबह से ही राजधानी गुवाहाटी में उत्सव जैसा माहौल था। शहर को विशेष रूप से सजाया गया था और हर तरफ समर्थकों की भीड़ उमड़ रही थी। निर्धारित समय पर शपथ ग्रहण समारोह शुरू हुआ, जिसमें हिमंता बिस्वा सरमा ने पद और गोपनीयता की शपथ ली। जैसे ही उन्होंने दूसरी बार मुख्यमंत्री पद की जिम्मेदारी संभाली, पूरे परिसर में उत्साह और जोश का माहौल बन गया। इस अवसर की सबसे बड़ी खासियत देश के शीर्ष नेतृत्व की मौजूदगी रही। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सहित कई वरिष्ठ नेता इस कार्यक्रम में शामिल हुए, जिससे यह आयोजन केवल राज्य स्तर का नहीं बल्कि राष्ट्रीय महत्व का बन गया। कई राज्यों के प्रमुख नेता भी इस समारोह के साक्षी बने, जिससे यह स्पष्ट हुआ कि असम की राजनीति अब राष्ट्रीय स्तर पर एक मजबूत पहचान बना चुकी है। शपथ ग्रहण समारोह को बेहद भव्य तरीके से आयोजित किया गया था। सुरक्षा के व्यापक इंतजाम किए गए थे और पूरे शहर में प्रशासन की सतर्कता स्पष्ट दिखाई दे रही थी। भीड़ को नियंत्रित करने के लिए विशेष व्यवस्था की गई थी और हर गतिविधि पर नजर रखी जा रही थी। भारी संख्या में पहुंचे लोगों ने इस आयोजन को एक जन उत्सव का रूप दे दिया। मुख्यमंत्री बनने के बाद हिमंता बिस्वा सरमा ने अपनी प्राथमिकताओं को लेकर स्पष्ट संदेश दिया। उन्होंने कहा कि सरकार का पहला लक्ष्य जनता से किए गए वादों को तेजी से पूरा करना होगा। इसके लिए नई कैबिनेट की पहली बैठक में अगले 100 दिनों की कार्ययोजना तैयार की जाएगी। विकास, रोजगार, बुनियादी ढांचे और प्रशासनिक सुधार को प्राथमिकता देने की बात सामने आई है। राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि यह जीत केवल एक चुनावी सफलता नहीं, बल्कि नेतृत्व पर जनता के भरोसे की पुनः पुष्टि है। लगातार दूसरी बार सत्ता में वापसी यह संकेत देती है कि राज्य की जनता ने स्थिरता और विकास की नीति को स्वीकार किया है। हिमंता बिस्वा सरमा के नेतृत्व को मजबूत प्रशासनिक पकड़ और निर्णायक फैसलों के लिए जाना जाता है, जो इस वापसी का प्रमुख आधार माना जा रहा है। यह शपथ ग्रहण केवल सत्ता परिवर्तन का प्रतीक नहीं था, बल्कि यह असम की राजनीति में एक नए आत्मविश्वास और नई दिशा की शुरुआत भी माना जा रहा है। आने वाले समय में सरकार की नीतियां और फैसले यह तय करेंगे कि यह दूसरा कार्यकाल राज्य के विकास में कितना प्रभावी साबित होता है।
उमरिया में अवैध रेत खनन पर बवाल, वनकर्मियों को ट्रैक्टर से कुचलने का प्रयास

नई दिल्ली। मध्य प्रदेश के उमरिया जिले के चंदिया वन परिक्षेत्र में अवैध रेत खनन रोकने पहुंची वन विभाग की टीम पर खनन माफिया ने जानलेवा हमला कर दिया। मामला सलैया गांव के जंगल क्षेत्र का है, जहां सोमवार शाम यह खतरनाक घटना हुई। वन विभाग की उड़नदस्ता टीम को पनिया नाला क्षेत्र में अवैध रेत उत्खनन की सूचना मिली थी। सूचना के आधार पर जैसे ही टीम मौके पर पहुंची, वहां से अवैध रेत से भरे दो ट्रैक्टर-ट्रॉली निकलते दिखाई दिए।वनकर्मियों को कुचलने की कोशिश, ट्रैक्टर लेकर फरार हुए आरोपीवनकर्मियों ने जब ट्रैक्टरों को रोकने का प्रयास किया तो चालकों ने रफ्तार बढ़ा दी। आरोप है कि रेत माफिया ने वनकर्मियों की ओर ट्रैक्टर मोड़कर उन्हें कुचलने की कोशिश की। इस दौरान मौके पर अफरा-तफरी मच गई। वनकर्मी किसी तरह अपनी जान बचाने में सफल रहे, लेकिन आरोपी मौके से फरार हो गए। हालांकि, वन विभाग की टीम ने एक ट्रैक्टर-ट्रॉली को जब्त कर लिया है। पहले भी हुई है मारपीट की घटनाएंचंदिया परिक्षेत्र अधिकारी नीलेश द्विवेदी ने बताया कि फरार आरोपियों की पहचान की जा रही है और उनके खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी। वनरक्षक रमाशंकर ने बताया कि यह गिरोह पहले भी वनकर्मियों पर हमला कर चुका है। कुछ समय पहले भी इसी क्षेत्र में वनरक्षक के साथ मारपीट कर जब्त ट्रैक्टर छुड़ा लिया गया था। वन विभाग में आक्रोश, बढ़ाई गई सख्तीघटना के बाद वन विभाग के कर्मचारियों में आक्रोश है। विभाग ने कहा है कि अवैध रेत खनन और माफियाओं की बढ़ती गुंडागर्दी को अब बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। पूरे क्षेत्र में निगरानी और गश्त बढ़ा दी गई है। पहले भी सामने आ चुके हैं ऐसे हमलेयह पहला मामला नहीं है जब रेत माफिया ने प्रशासनिक टीमों पर हमला किया हो। इससे पहले भी प्रदेश के अलग-अलग जिलों में वनकर्मियों और अधिकारियों पर हमले हो चुके हैं- वनरक्षक से मारपीट, सिर में गंभीर चोट (उमरिया)ट्रैक्टर जब्ती के दौरान वनकर्मियों पर हमला (टीकमगढ़)लाठी-डंडों से वनकर्मियों की पिटाई (सिंगरौली)SDM की गाड़ी पर ट्रैक्टर चढ़ाने की कोशिश (भिंड) उमरिया की यह घटना एक बार फिर दिखाती है कि अवैध रेत खनन पर रोक लगाना कितना चुनौतीपूर्ण हो गया है। वन विभाग की सख्ती के बावजूद माफियाओं के हौसले लगातार बढ़ते जा रहे हैं।
उड़ान से पहले विमान में आग, चेन्नई एयरपोर्ट पर मची अफरा-तफरी, टला बड़ा हादसा

नई दिल्ली । चेन्नई एयरपोर्ट की सामान्य सी सुबह अचानक एक तनावपूर्ण और खतरनाक स्थिति में बदल गई, जब एक यात्री विमान के विंग में उड़ान से ठीक पहले आग लग गई। विमान में लगभग 280 यात्री सवार थे और सभी अपनी यात्रा के लिए तैयार थे, लेकिन कुछ ही पलों में स्थिति ने ऐसा मोड़ लिया कि पूरी व्यवस्था सतर्क हो गई। जैसे ही विमान रनवे के पास अंतिम तैयारी में था, तकनीकी टीम ने विमान के एक विंग से धुआं निकलते देखा। पहले तो यह सामान्य तकनीकी संकेत समझा गया, लेकिन कुछ ही सेकंड में लपटें दिखाई देने लगीं। स्थिति गंभीर होते ही पायलट ने तुरंत नियंत्रण कक्ष को सूचना दी और विमान को रोक दिया गया। इसके बाद एयरपोर्ट पर मौजूद आपातकालीन सुरक्षा तंत्र तुरंत सक्रिय हुआ। फायर ब्रिगेड की टीम तेजी से मौके पर पहुंची और बिना देर किए आग पर काबू पाने की कोशिश शुरू कर दी गई। कुछ ही समय में आग को पूरी तरह बुझा दिया गया, जिससे एक बड़ा हादसा टल गया। यदि थोड़ी भी देर होती, तो यह घटना गंभीर विमान दुर्घटना में बदल सकती थी। विमान में बैठे यात्रियों के बीच इस दौरान घबराहट फैल गई थी। कई लोग अचानक हुए इस घटनाक्रम से सहम गए, लेकिन क्रू मेंबर्स ने स्थिति को संभालते हुए सभी को शांत रखा और सुरक्षित तरीके से विमान से बाहर निकालने की प्रक्रिया शुरू की। सभी यात्रियों को बिना किसी चोट के सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया, जिससे बड़ी राहत की स्थिति बनी। घटना के बाद पूरे एयरपोर्ट क्षेत्र में कुछ समय के लिए संचालन प्रभावित हुआ और संबंधित हिस्से को सुरक्षा कारणों से अस्थायी रूप से बंद कर दिया गया। तकनीकी टीम ने विमान की जांच शुरू कर दी है ताकि आग लगने के वास्तविक कारणों का पता लगाया जा सके। शुरुआती अनुमान के अनुसार, यह समस्या किसी तकनीकी खराबी या सिस्टम में अचानक आई गड़बड़ी के कारण हो सकती है, लेकिन इसकी पुष्टि जांच के बाद ही होगी। इस घटना ने एक बार फिर विमानन सुरक्षा प्रणाली की तत्परता और महत्व को सामने रखा है। विशेषज्ञों का मानना है कि आधुनिक विमानों में सुरक्षा व्यवस्था काफी उन्नत होती है, लेकिन नियमित जांच और समय पर प्रतिक्रिया ही ऐसी घटनाओं को बड़े हादसे में बदलने से रोकती है। यात्रियों के लिए यह अनुभव डरावना जरूर था, लेकिन सभी सुरक्षित बच गए, जो सबसे बड़ी राहत की बात है। एयरपोर्ट प्रशासन ने भी त्वरित कार्रवाई की सराहना की है और भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए अतिरिक्त सावधानी बरतने की बात कही है।
बांग्लादेश में बढ़ा सैन्य संपर्क: पाकिस्तान वायुसेना की ढाका में एंट्री, JF-17 डील और रणनीतिक चर्चा की अटकलें तेज

नई दिल्ली। पाकिस्तान एयरफोर्स के एयर वाइस मार्शल औरंगजेब अहमद के नेतृत्व में एक प्रतिनिधिमंडल के बांग्लादेश दौरे को लेकर रिपोर्ट्स सामने आई हैं। बताया जा रहा है कि यह टीम ढाका में बांग्लादेश वायुसेना के साथ “एयर स्टाफ टॉक्स” (Air Staff Talks) में हिस्सा ले रही है। इस तरह की बातचीत का उद्देश्य आमतौर पर दोनों देशों की वायु सेनाओं के बीच सहयोग, प्रशिक्षण, तकनीकी आदान-प्रदान और रक्षा संबंधों को मजबूत करना होता है। रिपोर्ट्स के अनुसार यह बैठक 10 मई के आसपास शुरू हुई और इसमें पाकिस्तान वायुसेना के वरिष्ठ अधिकारी शामिल हैं। चर्चा का एक बड़ा हिस्सा प्रशिक्षण, तकनीकी सहयोग और सैन्य समन्वय से जुड़ा बताया जा रहा है। कुछ रिपोर्ट्स में यह भी दावा किया गया है कि भविष्य में बांग्लादेशी पायलटों और तकनीशियनों के लिए पाकिस्तान में ट्रेनिंग कार्यक्रम पर विचार हो सकता है। इसी बीच मीडिया रिपोर्ट्स में JF-17 थंडर लड़ाकू विमान को लेकर संभावित चर्चा का भी उल्लेख किया जा रहा है। JF-17 एक हल्का मल्टीरोल फाइटर जेट है, जिसे चीन और पाकिस्तान ने मिलकर विकसित किया है। हालांकि बांग्लादेश द्वारा इस विमान की खरीद या किसी सौदे को लेकर अभी तक कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है, इसलिए इसे केवल संभावित चर्चा के रूप में ही देखा जा सकता है। इसके अलावा कुछ रिपोर्ट्स में बांग्लादेश में एयरफोर्स के कुछ अधिकारियों की गिरफ्तारी और सुरक्षा जांच का भी जिक्र किया गया है, लेकिन इन मामलों को लेकर भी विस्तृत और स्वतंत्र आधिकारिक पुष्टि सीमित है। साथ ही यह भी कहा जा रहा है कि पाकिस्तान वायुसेना के अधिकारी बांग्लादेश में कुछ एयरबेस और इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स का भी निरीक्षण कर सकते हैं, जिनमें रनवे विस्तार और एयर डिफेंस सिस्टम से जुड़े काम शामिल हैं। लेकिन इन सभी गतिविधियों को लेकर दोनों देशों की ओर से विस्तृत आधिकारिक बयान सार्वजनिक रूप से बहुत सीमित है। कुल मिलाकर, पाकिस्तान और बांग्लादेश के बीच सैन्य स्तर पर संपर्क और बातचीत बढ़ने की दिशा जरूर दिखाई दे रही है, लेकिन JF-17 सौदा, भारतीय सीमा के पास सैन्य रणनीति या किसी बड़े भू-राजनीतिक बदलाव जैसे दावे फिलहाल पूरी तरह पुष्टि किए बिना स्पष्ट रूप से नहीं कहे जा सकते।