अशोक खरात केस में ED की सख्ती, NCP नेता रूपाली चाकणकर से ट्रस्ट कनेक्शन पर गहन पूछताछ

नई दिल्ली । मनी लॉन्ड्रिंग और कथित वित्तीय अनियमितताओं से जुड़े एक मामले में प्रवर्तन निदेशालय ने NCP नेता रूपाली चाकणकर से लंबी पूछताछ की। यह पूछताछ लगभग आठ घंटे तक चली, जिसमें जांच एजेंसी ने मुख्य रूप से अशोक खरात से जुड़े एक ट्रस्ट और उससे संबंधित वित्तीय गतिविधियों पर विस्तृत सवाल किए। मामला सामने आने के बाद राजनीतिक और सामाजिक हलकों में चर्चा तेज हो गई है, क्योंकि इसमें कई लोगों के नाम और बड़े पैमाने पर वित्तीय लेनदेन के आरोप जुड़े हुए हैं। सूत्रों के अनुसार, पूछताछ के दौरान जांच एजेंसी ने नाशिक जिले में स्थित एक संस्थान ट्रस्ट की कार्यप्रणाली, उसमें उनकी भूमिका और वित्तीय निर्णयों में उनकी भागीदारी को लेकर सवाल किए। एजेंसी यह समझने की कोशिश कर रही है कि ट्रस्ट के संचालन में किस स्तर पर कौन-कौन शामिल था और धन के प्रवाह की दिशा क्या रही। इस दौरान ट्रस्ट को मिले दान और उसके उपयोग से जुड़े पहलुओं पर भी विस्तार से पूछताछ की गई। रूपाली चाकणकर से यह भी पूछा गया कि उनका ट्रस्ट से जुड़ाव किस परिस्थिति में हुआ और क्या उनकी कोई वित्तीय या प्रशासनिक जिम्मेदारी थी। पूछताछ में यह भी जानने का प्रयास किया गया कि क्या ट्रस्ट से जुड़े किसी भी प्रकार के निर्णयों में उनकी प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष भूमिका रही है। जांच एजेंसी ने कुछ संदिग्ध लेनदेन और बैंकिंग गतिविधियों को लेकर भी सवाल उठाए और उनके स्पष्टीकरण दर्ज किए। सूत्रों के मुताबिक, पूछताछ के दौरान चाकणकर ने कई आरोपों से इनकार किया और कहा कि उनका ट्रस्ट के वित्तीय संचालन में कोई प्रत्यक्ष हस्तक्षेप नहीं था। उन्होंने यह भी दावा किया कि उन्हें कई वित्तीय गतिविधियों की जानकारी नहीं थी और उनका संबंध केवल नाममात्र का था। इसके साथ ही उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि जिन लेनदेन को लेकर सवाल उठाए जा रहे हैं, उनमें उनकी कोई भूमिका नहीं रही है। जांच एजेंसी ने उनके परिवार से जुड़े कुछ वित्तीय मामलों और व्यापारिक गतिविधियों की भी जानकारी मांगी। विशेष रूप से रियल एस्टेट और बैंकिंग से जुड़े कुछ लेनदेन पर ध्यान केंद्रित किया गया है। इसके अलावा परिजनों से जुड़े खातों और वित्तीय प्रवाह की भी जांच की जा रही है, ताकि पूरे नेटवर्क की स्पष्ट तस्वीर सामने आ सके। पूछताछ के बाद रूपाली चाकणकर ने कहा कि वह जांच में पूरा सहयोग कर रही हैं और भविष्य में भी करती रहेंगी। उन्होंने यह भी कहा कि उनके खिलाफ लगाए जा रहे कई आरोप तथ्यों पर आधारित नहीं हैं और उन्हें गलत तरीके से प्रस्तुत किया जा रहा है। उन्होंने अपने सार्वजनिक जीवन और संस्थागत भूमिका को लेकर उठ रहे सवालों को भी निराधार बताया। इस पूरे मामले में जांच एजेंसी अब प्राप्त बयानों और दस्तावेजों का विश्लेषण कर रही है। अधिकारियों के अनुसार, जरूरत पड़ने पर आगे भी पूछताछ की जा सकती है। मामले की जांच अभी प्रारंभिक चरण में है और आने वाले समय में इससे जुड़े कई और पहलुओं की जांच होने की संभावना है।
ईंधन हुआ और महंगा: भोपाल-इंदौर में पेट्रोल 109 रुपए पार, MP में नई दरें लागू

नई दिल्ली । अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में तेजी के बाद मध्य प्रदेश में पेट्रोल और डीजल के दाम करीब ₹3 प्रति लीटर बढ़ा दिए गए हैं। नई दरें आज सुबह 6 बजे से लागू हो गई हैं, जिससे आम उपभोक्ताओं पर खर्च का बोझ बढ़ गया है। मध्य प्रदेश में आम जनता को एक बार फिर महंगाई का झटका लगा है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में तेजी के बाद प्रदेश में पेट्रोल और डीजल के दाम करीब ₹3 प्रति लीटर बढ़ा दिए गए हैं। नई दरें आज सुबह 6 बजे से लागू हो गई हैं, जिससे परिवहन और रोजमर्रा की लागत पर सीधा असर देखने को मिल रहा है। राजधानी भोपाल में पेट्रोल का दाम बढ़कर ₹109.71 प्रति लीटर और डीजल ₹94.88 प्रति लीटर हो गया है। वहीं इंदौर में पेट्रोल ₹109.86 प्रति लीटर और डीजल ₹95.06 प्रति लीटर तक पहुंच गया है। इसी तरह उज्जैन, जबलपुर और ग्वालियर जैसे शहरों में भी ईंधन के दाम बढ़े हैं। सबसे महंगा पेट्रोल मंडला और पांढुर्णा में दर्ज किया गया है, जहां कीमत ₹111.29 प्रति लीटर तक पहुंच गई है। इसके अलावा कई जिलों में भी पेट्रोल ₹111 के आसपास बिक रहा है, जबकि डीजल की कीमतें भी लगातार बढ़ रही हैं। तेल कीमतों में यह उछाल वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल (क्रूड ऑयल) की कीमतों में बढ़ोतरी के कारण बताया जा रहा है। रिपोर्ट्स के मुताबिक अंतरराष्ट्रीय बाजार में क्रूड ऑयल 70 डॉलर से बढ़कर 100 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गया है। इसी दबाव के कारण तेल कंपनियों ने घरेलू स्तर पर कीमतों में संशोधन किया है। विशेषज्ञों का कहना है कि यह बढ़ोतरी शुरुआती है और अगर अंतरराष्ट्रीय बाजार में स्थिति नहीं सुधरी तो आने वाले समय में और इजाफा हो सकता है। हालांकि सरकार और तेल कंपनियां समय-समय पर टैक्स और सब्सिडी के जरिए कीमतों को नियंत्रित करने की कोशिश करती रही हैं। देश में पेट्रोल-डीजल की कीमतें लंबे समय से स्थिर थीं, लेकिन वैश्विक घटनाओं के चलते अब इसमें बदलाव देखने को मिल रहा है। इससे ट्रांसपोर्ट, खाद्य सामग्री और रोजमर्रा की चीजों की कीमतों पर भी असर पड़ने की संभावना जताई जा रही है। प्रधानमंत्री की हालिया अपील में भी पेट्रोलियम उत्पादों के संयमित उपयोग की बात कही गई थी, ताकि आयात पर निर्भरता कम हो और विदेशी मुद्रा की बचत की जा सके। कुल मिलाकर ईंधन की बढ़ती कीमतें आम लोगों के बजट पर अतिरिक्त दबाव डाल सकती हैं और आने वाले दिनों में महंगाई की रफ्तार और तेज होने की आशंका जताई जा रही है।
एरिक श्मिट के बयान से उठा बड़ा विवाद, चिलकुर बालाजी मंदिर और H-1B वीज़ा सिस्टम पर तेज हुई बहस

नई दिल्ली । अमेरिकी राजनीति और इमिग्रेशन नीति को लेकर एक बार फिर अंतरराष्ट्रीय बहस तेज हो गई है, जब अमेरिकी सीनेटर एरिक श्मिट ने H-1B वीज़ा सिस्टम और भारत के एक प्रसिद्ध धार्मिक स्थल चिलकुर बालाजी मंदिर को लेकर टिप्पणी की। इस बयान के बाद सोशल मीडिया से लेकर राजनीतिक और प्रवासी समुदायों तक व्यापक प्रतिक्रिया देखने को मिल रही है। विवाद की शुरुआत तब हुई जब उन्होंने अमेरिका की वीज़ा नीति और रोजगार प्रणाली पर सवाल उठाते हुए विदेशी वर्कर्स की भूमिका पर टिप्पणी की और इसी संदर्भ में चिलकुर बालाजी मंदिर का उल्लेख किया, जिसे लोग आमतौर पर वीज़ा मंदिर के नाम से भी जानते हैं। उनके बयान में यह संकेत दिया गया कि अमेरिका में मौजूद H-1B, L-1, F-1 और OPT जैसे वीज़ा प्रोग्राम्स का प्रभाव स्थानीय रोजगार बाजार पर पड़ता है और इससे अमेरिकी मध्यम वर्ग पर दबाव बढ़ता है। उन्होंने यह भी दावा किया कि विदेशी कर्मचारियों की बढ़ती संख्या और तकनीकी कंपनियों की भर्ती नीतियों के कारण स्थानीय युवाओं के लिए अवसर सीमित हो रहे हैं। इसी तर्क को आगे बढ़ाते हुए उन्होंने चिलकुर बालाजी मंदिर का संदर्भ दिया, जहां बड़ी संख्या में लोग विदेश यात्रा और विशेषकर अमेरिकी वीज़ा प्राप्त करने की इच्छा के साथ प्रार्थना करने आते हैं। इस संदर्भ को जोड़ने के कारण उनकी टिप्पणी को धार्मिक भावनाओं और सांस्कृतिक संवेदनशीलता से जोड़कर देखा जा रहा है। इस पूरे मामले ने एक व्यापक बहस को जन्म दे दिया है, जिसमें एक ओर इमिग्रेशन नीति और वैश्विक रोजगार व्यवस्था पर चर्चा हो रही है, तो दूसरी ओर धार्मिक स्थलों और सांस्कृतिक मान्यताओं के उपयोग पर सवाल उठाए जा रहे हैं। कई लोगों का मानना है कि धार्मिक स्थलों को राजनीतिक या नीतिगत बहसों से जोड़ना उचित नहीं है, जबकि कुछ इसे केवल एक उदाहरण के रूप में देख रहे हैं, जिसका उद्देश्य नीति की जटिलताओं को समझाना था। H-1B वीज़ा प्रणाली लंबे समय से अमेरिका में चर्चा का विषय रही है, क्योंकि यह विशेष रूप से तकनीकी और पेशेवर क्षेत्रों में विदेशी कुशल श्रमिकों को अवसर प्रदान करती है। इसके समर्थक इसे वैश्विक प्रतिभा को आकर्षित करने वाला एक महत्वपूर्ण माध्यम मानते हैं, जबकि आलोचक इसे स्थानीय रोजगार पर प्रभाव डालने वाला सिस्टम बताते हैं। इस मुद्दे पर समय-समय पर राजनीतिक मतभेद भी सामने आते रहे हैं, और एरिक श्मिट का यह बयान उसी बहस को एक बार फिर केंद्र में ले आया है। भारत में भी इस बयान को लेकर विभिन्न प्रतिक्रियाएं देखने को मिली हैं, विशेषकर उन लोगों के बीच जो अमेरिका में कार्यरत हैं या वीज़ा प्रक्रिया से जुड़े हैं। चिलकुर बालाजी मंदिर को लेकर की गई टिप्पणी को लेकर भी मिश्रित प्रतिक्रिया सामने आई है, जहां एक वर्ग इसे आस्था से जुड़ा विषय मानते हुए असहमति जता रहा है, वहीं दूसरा वर्ग इसे एक सामाजिक परिघटना के रूप में देख रहा है। इस पूरे विवाद ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि वैश्विक नीतियों, रोजगार व्यवस्था और सांस्कृतिक प्रतीकों के बीच संतुलन कैसे बनाया जाए, ताकि किसी भी पक्ष की भावनाएं आहत न हों और नीति पर आधारित बहस भी निष्पक्ष रूप से आगे बढ़ सके।
मनमानी बिजली समझौतों पर लगेगी रोक, सरकार ने तय किए नए नियम

नई दिल्ली। मध्य प्रदेश सरकार ने बिजली क्षेत्र में बड़ा नीति परिवर्तन करते हुए यह निर्णय लिया है कि अब किसी भी नए बिजली खरीद समझौते (Power Purchase Agreement – PPA) या बिजली आपूर्ति समझौते (PSA) को कैबिनेट की मंजूरी के बिना लागू नहीं किया जाएगा। यह फैसला राज्य की ऊर्जा खरीद प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी और नियंत्रित बनाने के उद्देश्य से लिया गया है। राज्य में वर्ष 2003 के बाद बिजली संकट से उबरने के लिए बड़ी संख्या में बिजली उत्पादन कंपनियों के साथ समझौते किए गए थे। इन समझौतों के कारण जहां बिजली आपूर्ति व्यवस्था मजबूत हुई, वहीं कई मामलों में इन अनुबंधों को लेकर विवाद और वित्तीय बोझ की स्थिति भी बनी। वर्तमान में प्रदेश में लगभग 1795 बिजली खरीद समझौते (PPA) पहले से मौजूद हैं, जिनकी कुल क्षमता करीब 26,012 मेगावाट बताई जाती है। इन समझौतों के कारण मध्य प्रदेश को अब ऊर्जा सरप्लस राज्य के रूप में देखा जा रहा है। सरकार का मानना है कि दीर्घकालिक बिजली समझौते बड़े वित्तीय दायित्व होते हैं, जो लंबे समय तक राज्य की अर्थव्यवस्था को प्रभावित करते हैं। इसलिए अब यह जरूरी समझा गया है कि ऐसे सभी नए समझौतों पर शीर्ष स्तर यानी कैबिनेट की मंजूरी ली जाए। इसके पीछे एक कारण यह भी है कि ऊर्जा क्षेत्र में सौर, पवन, बायोमास, न्यूक्लियर और बैटरी स्टोरेज जैसी नई तकनीकें तेजी से उभर रही हैं, जिनसे जुड़े अनुबंधों में विशेषज्ञ और वित्तीय मूल्यांकन की आवश्यकता बढ़ गई है। अब तक यह निर्णय पॉवर मैनेजमेंट कंपनी के बोर्ड स्तर पर लिया जाता था, लेकिन नई व्यवस्था के तहत पहले ऊर्जा मंत्री की मंजूरी और फिर मुख्यमंत्री की अध्यक्षता वाली कैबिनेट से अंतिम स्वीकृति जरूरी होगी। सरकार का दावा है कि यह कदम भविष्य में ऊर्जा खरीद को अधिक संतुलित, पारदर्शी और राज्य हित में बनाएगा।
27 यूरोपीय देशों के प्रतिनिधियों से मिले राहुल गांधी, व्यापार से लेकर सुरक्षा तक कई मुद्दों पर मंथन

नई दिल्ली । भारत की राजनीतिक और कूटनीतिक चर्चाओं के बीच गुरुवार को एक महत्वपूर्ण घटनाक्रम सामने आया, जब कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने यूरोपीय देशों के 27 प्रतिनिधियों के साथ एक उच्च स्तरीय बैठक की। यह मुलाकात यूरोपीय एंबेसी परिसर में आयोजित की गई, जहां भारत और यूरोप के बीच संबंधों को और मजबूत करने, बदलते वैश्विक परिदृश्य में साझेदारी की संभावनाओं और विभिन्न अंतरराष्ट्रीय मुद्दों पर विस्तार से विचार-विमर्श हुआ। सूत्रों के अनुसार यह बैठक केवल औपचारिक संवाद तक सीमित नहीं रही, बल्कि इसमें रणनीतिक, आर्थिक और कूटनीतिक पहलुओं पर गहराई से चर्चा की गई। बैठक में इस बात पर जोर दिया गया कि भारत और यूरोपीय संघ के देशों के बीच सहयोग को किस प्रकार नई दिशा दी जा सकती है, खासकर ऐसे समय में जब वैश्विक राजनीति तेजी से बदल रही है और देशों के बीच आर्थिक व सुरक्षा चुनौतियां बढ़ रही हैं। इस महत्वपूर्ण बैठक में राहुल गांधी के साथ कांग्रेस के विदेश मामलों के विभाग के चेयरपर्सन सलमान खुर्शीद भी मौजूद रहे। चर्चा के दौरान दोनों पक्षों ने लोकतांत्रिक मूल्यों, अंतरराष्ट्रीय स्थिरता और बहुपक्षीय सहयोग जैसे विषयों पर विचार साझा किए। सूत्रों का कहना है कि बातचीत में यह भी रेखांकित किया गया कि भारत और यूरोप के बीच संबंध केवल व्यापार तक सीमित नहीं हैं, बल्कि दोनों क्षेत्रों के बीच ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और वैचारिक जुड़ाव भी गहरा है। बैठक में प्रमुख रूप से व्यापार, हरित ऊर्जा, तकनीकी सहयोग, सुरक्षा ढांचे और वैश्विक स्थिरता जैसे विषयों पर विस्तृत बातचीत हुई। इन मुद्दों को आज की वैश्विक अर्थव्यवस्था और राजनीतिक व्यवस्था के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण माना जा रहा है। दोनों पक्षों ने इस बात पर सहमति जताई कि आने वाले समय में आपसी सहयोग को और मजबूत करने की जरूरत है, ताकि वैश्विक चुनौतियों का मिलकर समाधान निकाला जा सके। राहुल गांधी ने बातचीत के दौरान भारत और यूरोप के बीच लंबे समय से चले आ रहे लोकतांत्रिक मूल्यों और सांस्कृतिक संबंधों का उल्लेख किया। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि दोनों क्षेत्रों के बीच संवाद और सहयोग केवल आर्थिक लाभ तक सीमित नहीं होना चाहिए, बल्कि यह साझा मूल्यों और वैश्विक जिम्मेदारियों पर भी आधारित होना चाहिए। राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार इस मुलाकात को कूटनीतिक दृष्टि से काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। हाल के वर्षों में भारत और यूरोपीय देशों के बीच रणनीतिक साझेदारी लगातार मजबूत हुई है, चाहे वह व्यापारिक समझौते हों या वैश्विक सुरक्षा से जुड़े मुद्दे। ऐसे में इस प्रकार की उच्च स्तरीय बैठकें दोनों पक्षों के बीच संवाद को और अधिक प्रभावी बनाने का माध्यम मानी जा रही हैं। इस बैठक ने यह भी संकेत दिया कि भारत और यूरोप के बीच भविष्य में सहयोग के नए रास्ते खुल सकते हैं। विशेष रूप से तकनीकी विकास, ऊर्जा परिवर्तन और वैश्विक सुरक्षा जैसे क्षेत्रों में साझेदारी और गहरी होने की संभावना जताई जा रही है। कुल मिलाकर यह बैठक भारत-यूरोप संबंधों को नई दिशा देने की दृष्टि से एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है, जिसमें दोनों पक्षों ने संवाद और सहयोग को आगे बढ़ाने की प्रतिबद्धता दोहराई।
सुरक्षा के कड़े इंतजाम: भोपाल की प्रमुख मस्जिदों पर पुलिस की विशेष निगरानी

नई दिल्ली । भोपाल में आज जुमे की नमाज को लेकर पुलिस प्रशासन पूरी तरह अलर्ट मोड पर है। शहर के संवेदनशील और अति संवेदनशील इलाकों में सुबह से ही अतिरिक्त पुलिस बल की तैनाती कर दी गई है। प्रमुख मस्जिदों के बाहर सुरक्षा बढ़ा दी गई है और पुलिस लगातार निगरानी रख रही है ताकि किसी भी तरह की अप्रिय स्थिति से बचा जा सके। यह कदम हाल ही में सामने आए कुछ घटनाक्रमों और बढ़े हुए तनाव को देखते हुए उठाया गया है। प्रशासन के अनुसार, कानून-व्यवस्था बनाए रखना सर्वोच्च प्राथमिकता है। पुलिस ने साफ किया है कि किसी भी प्रकार की अफवाह या भड़काऊ गतिविधि पर सख्त कार्रवाई की जाएगी। शहर के विभिन्न समुदायों के धार्मिक नेताओं ने भी शांति बनाए रखने की अपील की है। शहर काजी ने लोगों से संयम रखने और किसी के बहकावे में न आने की बात कही है, जबकि पुलिस कमिश्नर ने भी नागरिकों से शहर में अमन-चैन बनाए रखने का आग्रह किया है। प्रमुख मस्जिदों जैसे ताजुल मसाजिद, मोती मस्जिद, जामा मस्जिद, पीरगेट और पुराने भोपाल की अन्य मस्जिदों के आसपास सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई है। पुलिस ने बैरिकेडिंग भी की है और भीड़ नियंत्रण के लिए अतिरिक्त बल लगाया गया है। नमाज का समय दोपहर के आसपास निर्धारित है, जिसके दौरान पुलिस विशेष रूप से सतर्क रहेगी। प्रशासन का कहना है कि स्थिति पूरी तरह नियंत्रण में है और शहर में शांति बनाए रखने के लिए सभी जरूरी कदम उठाए जा रहे हैं।
पीएम मोदी UAE दौरे पर रवाना, ऊर्जा और व्यापार समझौतों पर रहेगा फोकस

नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अपने छह दिवसीय विदेश दौरे की शुरुआत करते हुए संयुक्त अरब अमीरात (UAE) पहुंच रहे हैं। इस दौरे को भारत और UAE के बीच रणनीतिक साझेदारी को और मजबूत करने की दिशा में बेहद अहम माना जा रहा है। पीएम मोदी यहां राष्ट्रपति मोहम्मद बिन जायद अल नाहयान से मुलाकात करेंगे और दोनों देशों के बीच ऊर्जा, व्यापार, निवेश और क्षेत्रीय मुद्दों पर विस्तृत चर्चा होगी। विदेश मंत्रालय के अनुसार, इस मुलाकात में भारत-UAE व्यापक रणनीतिक साझेदारी को आगे बढ़ाने पर जोर रहेगा। खास तौर पर ऊर्जा सुरक्षा इस दौरे का प्रमुख एजेंडा है, जिसमें LPG, LNG सप्लाई और स्ट्रैटेजिक पेट्रोलियम रिजर्व से जुड़े समझौतों पर बात होने की संभावना है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, दोनों देशों के बीच ऊर्जा क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने के लिए कुछ अहम डील्स पर सहमति बन सकती है। द हिंदू की रिपोर्ट के अनुसार, भारत और UAE के बीच LPG और स्ट्रैटेजिक पेट्रोलियम रिजर्व को लेकर दो महत्वपूर्ण समझौते होने की संभावना जताई जा रही है। इसके अलावा, तेल और गैस आपूर्ति को दीर्घकालिक आधार पर सुरक्षित करने पर भी चर्चा हो सकती है। UAE की ऊर्जा नीति भी इस समय बदलाव के दौर में है। हाल ही में UAE ने OPEC से अलग होने की घोषणा की है और 2027 तक अपना कच्चा तेल उत्पादन बढ़ाकर 50 लाख बैरल प्रतिदिन करने का लक्ष्य रखा है। ऐसे में भारत और UAE के बीच ऊर्जा सहयोग और भी मजबूत होने की उम्मीद है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह स्थिति भारत के लिए दीर्घकालिक ऊर्जा सुरक्षा के लिहाज से फायदेमंद साबित हो सकती है। पूर्व भारतीय राजदूत संजय सुधीर ने ANI से बातचीत में कहा कि पश्चिम एशिया में जारी तनाव के बीच पीएम मोदी का यह दौरा बेहद महत्वपूर्ण है और यह भारत की कूटनीतिक सक्रियता का मजबूत संकेत भी है। उनका कहना है कि यह यात्रा दोनों देशों के रिश्तों को नई ऊंचाई दे सकती है। विदेश मंत्रालय ने भी स्पष्ट किया है कि इस यात्रा का उद्देश्य केवल ऊर्जा सहयोग तक सीमित नहीं है, बल्कि व्यापार, निवेश और तकनीकी सहयोग को भी नई गति देना है। भारत और UAE के बीच पहले से ही व्यापक रणनीतिक साझेदारी मौजूद है, जिसे इस दौरे से और आगे बढ़ाने की योजना है। भारत और UAE के बीच व्यापारिक संबंध भी लगातार मजबूत हो रहे हैं। UAE भारत का तीसरा सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार है और दोनों देशों के बीच कुल व्यापार 6 लाख करोड़ रुपये से अधिक का है। भारत से UAE को पेट्रोलियम प्रोडक्ट, जेम्स एंड ज्वेलरी, मेटल, टेक्सटाइल, इंजीनियरिंग मशीनरी, फूड आइटम और केमिकल्स जैसे उत्पादों का निर्यात किया जाता है। साल 2022-23 में भारत ने UAE से लगभग 4 लाख करोड़ रुपये का आयात किया था, जिससे यह स्पष्ट होता है कि दोनों देशों के बीच व्यापार संतुलन अभी भी आयात की ओर झुका हुआ है। हालांकि, लगातार बढ़ते सहयोग और नए समझौतों से इस अंतर को कम करने की कोशिश की जा रही है। UAE के राष्ट्रपति अल नाहयान इससे पहले जनवरी में भारत के 105 मिनट के दौरे पर आए थे, जहां पीएम मोदी ने प्रोटोकॉल तोड़कर उनका एयरपोर्ट पर स्वागत किया था। उस दौरान दोनों देशों के बीच ट्रेड और डिफेंस समेत नौ अहम समझौते हुए थे। कुल मिलाकर, पीएम मोदी का यह UAE दौरा भारत की ऊर्जा सुरक्षा, व्यापारिक विस्तार और रणनीतिक साझेदारी को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है, जिससे आने वाले समय में दोनों देशों के संबंध और अधिक गहरे होने की उम्मीद है।
वोटर लिस्ट की नई जंग: SIR के तीसरे चरण में 16 राज्य और 3 केंद्रशासित प्रदेश होंगे शामिल

नई दिल्ली ।देश की चुनावी व्यवस्था में एक बार फिर बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है क्योंकि चुनाव आयोग ने स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन यानी SIR के तीसरे चरण की आधिकारिक घोषणा कर दी है। यह प्रक्रिया केवल वोटर लिस्ट का सामान्य अपडेट नहीं बल्कि एक व्यापक सत्यापन अभियान है, जिसका उद्देश्य देश की मतदाता सूची को अधिक सटीक, पारदर्शी और त्रुटिरहित बनाना है। तीसरे चरण में 16 राज्य और 3 केंद्रशासित प्रदेश शामिल किए गए हैं, जहां कुल 36 करोड़ से अधिक मतदाताओं का विस्तृत वेरिफिकेशन किया जाएगा। SIR प्रक्रिया को चुनाव आयोग ने इसलिए लागू किया है ताकि मतदाता सूची में मौजूद उन नामों को हटाया जा सके जो अब वास्तविक रूप से पात्र नहीं हैं। इसमें मृत व्यक्तियों के नाम, स्थानांतरित हो चुके मतदाता, दोहराए गए रिकॉर्ड और गलत प्रविष्टियां शामिल हैं। इसके साथ ही यह सुनिश्चित किया जाता है कि जिन नागरिकों की उम्र 18 वर्ष हो चुकी है या जो पहले किसी कारणवश सूची में शामिल नहीं हो पाए थे, उन्हें भी मतदान का अवसर मिल सके। आयोग का मानना है कि किसी भी लोकतंत्र की मजबूती उसकी मतदाता सूची की शुद्धता पर निर्भर करती है। अब तक के दो चरणों में इस अभियान का व्यापक असर देखा गया है। पहले चरण की शुरुआत बिहार से हुई थी, जिसे एक तरह का पायलट प्रोजेक्ट माना गया। इसके बाद दूसरे चरण में 12 राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों को शामिल किया गया, जहां करोड़ों नामों की समीक्षा की गई और बड़ी संख्या में नाम सूची से हटाए भी गए। इन प्रक्रियाओं ने यह स्पष्ट कर दिया कि SIR केवल औपचारिकता नहीं बल्कि एक गहन और सख्त सत्यापन अभियान है, जिसका प्रभाव सीधे तौर पर देश की चुनावी संरचना पर पड़ता है। तीसरे चरण को अब तक का सबसे बड़ा और व्यापक चरण माना जा रहा है क्योंकि इसमें देश की बड़ी आबादी शामिल होगी। इस चरण में उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र, कर्नाटक, तेलंगाना, पंजाब, हरियाणा, ओडिशा, झारखंड, आंध्र प्रदेश, दिल्ली सहित कई महत्वपूर्ण राज्य और केंद्रशासित प्रदेश शामिल हैं। इस चरण के दौरान लाखों बूथ लेवल अधिकारी घर-घर जाकर मतदाताओं की जानकारी की जांच करेंगे और दस्तावेजों का मिलान करेंगे। राजनीतिक दलों के प्रतिनिधि भी इस प्रक्रिया में सहयोग करेंगे ताकि पारदर्शिता बनी रहे। इस पूरे अभियान में तकनीकी और प्रशासनिक दोनों स्तरों पर बड़ी तैयारी की गई है। लाखों की संख्या में बूथ लेवल अधिकारी और राजनीतिक दलों द्वारा नियुक्त एजेंट इस प्रक्रिया को सफल बनाने में जुटे रहेंगे। इसके तहत हर नागरिक की पहचान, निवास स्थान और पात्रता की जांच की जाएगी, जिससे किसी भी तरह की गड़बड़ी या दोहराव को रोका जा सके। SIR प्रक्रिया को लेकर देश के अलग-अलग हिस्सों में पहले ही कई तरह की राजनीतिक और सामाजिक चर्चाएं देखने को मिली हैं। कुछ जगहों पर इसे मतदाता सूची सुधार का जरूरी कदम बताया गया है, तो वहीं कुछ आलोचक इसे जटिल और विवादास्पद प्रक्रिया भी मानते हैं। खासकर उन क्षेत्रों में जहां बड़ी संख्या में नामों में बदलाव हुआ है, वहां इस प्रक्रिया पर लगातार निगरानी और बहस जारी है। तीसरे चरण के पूरा होने के बाद देश के लगभग पूरे चुनावी ढांचे की मतदाता सूची को नए सिरे से अपडेट कर दिया जाएगा। केवल कुछ ही क्षेत्र इस प्रक्रिया से बाहर रहेंगे, जहां प्रशासनिक या तकनीकी कारणों से बाद में इसे लागू किया जाएगा। इस बड़े अभियान के बाद भारत की चुनावी व्यवस्था को और अधिक सटीक और मजबूत बनाने की दिशा में यह एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
पीएम की अपील पर सवाल: 9 BJP नेताओं ने निकाले काफिले, एक पर कार्रवाई से उठा विवाद

नई दिल्ली । प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा देश में ईंधन के संयमित उपयोग और पब्लिक ट्रांसपोर्ट अपनाने की अपील के बाद मध्य प्रदेश में सियासी हलचल तेज हो गई है। पीएम ने हाल ही में देशवासियों से कार पूलिंग, मेट्रो और सार्वजनिक परिवहन के अधिक उपयोग की बात कही थी, ताकि वैश्विक परिस्थितियों में संसाधनों की बचत की जा सके। हालांकि, इस अपील के बाद भी राज्य में कई नेताओं के बड़े-बड़े काफिले निकलते नजर आए हैं। रिपोर्ट के अनुसार, प्रदेश के अलग-अलग जिलों से ऐसे कई मामले सामने आए हैं जहां दर्जनों से लेकर सैकड़ों वाहनों के काफिले के साथ नेताओं ने शक्ति प्रदर्शन किया। कुछ मामलों में पार्टी स्तर पर कार्रवाई भी हुई है। भिंड में किसान मोर्चा के जिला अध्यक्ष को पद से हटा दिया गया, क्योंकि वे लगभग 100 वाहनों के काफिले और बग्घी के साथ कार्यक्रम में पहुंचे थे। वहीं, पाठ्यपुस्तक निगम के अध्यक्ष पर भी कार्रवाई करते हुए उनका अधिकार सीमित कर दिया गया, जब उन्होंने उज्जैन से भोपाल तक करीब 700 वाहनों का काफिला निकाला, जिससे लंबा ट्रैफिक जाम लग गया। लेकिन कई अन्य मामलों में अब तक कोई बड़ी कार्रवाई नहीं की गई है। कुछ विधायकों और मोर्चा पदाधिकारियों पर भी इसी तरह के काफिलों के आरोप लगे हैं, जहां 200 से अधिक गाड़ियों के साथ रैलियां निकाली गईं। इनमें मंदिर दर्शन, स्वागत कार्यक्रम और पार्टी आयोजनों के दौरान शक्ति प्रदर्शन के दृश्य सामने आए हैं। वहीं दूसरी ओर कुछ उदाहरण ऐसे भी सामने आए हैं जो अलग संदेश देते हैं, जैसे एक मंत्री द्वारा बस से यात्रा कर आम लोगों के बीच पहुंचना और ईंधन बचत की अपील को समर्थन देना। इस पूरे मामले ने राजनीतिक बहस को जन्म दे दिया है। विपक्ष का आरोप है कि जहां एक तरफ जनता से संयम की अपील की जा रही है, वहीं दूसरी तरफ वीआईपी संस्कृति में कोई बदलाव नहीं दिख रहा। सोशल मीडिया पर भी यह मुद्दा तेजी से वायरल हो रहा है और लोग नेताओं के इस दोहरे रवैये पर सवाल उठा रहे हैं। अब देखना होगा कि सरकार और पार्टी संगठन इस पर आगे क्या सख्त कदम उठाते हैं, या यह विवाद सिर्फ नोटिस और बयानबाजी तक सीमित रह जाता है।
ना बड़े स्टार, ना भारी बजट, सिर्फ दमदार कहानी ने बॉक्स ऑफिस पर रचा इतिहास

नई दिल्ली। बॉलीवुड और साउथ इंडस्ट्री में अक्सर माना जाता है कि बड़ी फिल्में सिर्फ बड़े स्टार्स और भारी बजट से चलती हैं, लेकिन कई ऐसी फिल्में भी रही हैं जिन्होंने इस धारणा को पूरी तरह तोड़ दिया है। इन फिल्मों ने साबित किया कि अगर कहानी मजबूत हो तो कम बजट में भी रिकॉर्ड तोड़े जा सकते हैं। कंताराऋषभ शेट्टी द्वारा निर्देशित और अभिनीत फिल्म कंतारा (2022) इसका सबसे बड़ा उदाहरण है। लगभग 16 करोड़ के बजट में बनी इस फिल्म ने दुनिया भर में करीब 411 करोड़ रुपये की कमाई की। फिल्म की कहानी, लोक संस्कृति और दमदार प्रस्तुति ने इसे ब्लॉकबस्टर बना दिया। 777 चार्लीयह फिल्म एक इंसान और एक कुत्ते की भावनात्मक कहानी पर आधारित थी। धीरे-धीरे यह फिल्म दर्शकों के दिलों में उतर गई और इसे बेहद सराहा गया। कम बजट में बनी इस फिल्म ने भी शानदार प्रदर्शन किया। द केरल स्टोरीअदा शर्मा स्टारर द केरल स्टोरी ने 15 करोड़ के बजट में करीब 303 करोड़ रुपये का कलेक्शन किया। विवादों के बावजूद फिल्म बॉक्स ऑफिस पर बड़ी हिट साबित हुई। 12वीं फेलविक्रांत मैसी की यह फिल्म सच्ची कहानी पर आधारित थी। लगभग 20 करोड़ के बजट में बनी इस फिल्म ने 70 करोड़ से ज्यादा की कमाई की और दर्शकों और क्रिटिक्स दोनों का दिल जीत लिया। सीता राममदुलकर सलमान और मृणाल ठाकुर स्टारर यह रोमांटिक ड्रामा फिल्म भी कम बजट में बनी लेकिन अपनी कहानी और इमोशन की वजह से दर्शकों को खूब पसंद आई। हनुमानतेजा सज्जा स्टारर हनुमान (2024) ने भी बॉक्स ऑफिस पर शानदार प्रदर्शन किया। लगभग 30 करोड़ के बजट में बनी इस फिल्म ने 220 करोड़ से ज्यादा की कमाई की और सुपरहीरो जॉनर में बड़ी पहचान बनाई। महावतार नरसिम्हायह एनिमेटेड फिल्म भारत की सबसे ज्यादा कमाई करने वाली एनिमेटेड फिल्मों में शामिल हो गई। लगभग 15 करोड़ के बजट में बनी इस फिल्म ने 300 करोड़ से ज्यादा का बिजनेस किया। इन सभी फिल्मों ने यह साबित कर दिया है कि आज के समय में दर्शक सिर्फ स्टार पावर नहीं, बल्कि मजबूत कहानी और कंटेंट को ज्यादा महत्व देते हैं। यही वजह है कि कम बजट की ये फिल्में भी बड़े-बड़े प्रोजेक्ट्स को टक्कर देने में सफल रहीं।