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देवास फैक्ट्री विस्फोट: साथियों ने कहा- बिलिंग रूम में आखिरी बार दिखे थे दोनों मजदूर

नई दिल्ली । मध्य प्रदेश के देवास जिले में टोंककलां स्थित पटाखा फैक्ट्री में हुए भीषण विस्फोट के बाद हालात लगातार गंभीर होते जा रहे हैं। हादसे में अब तक 5 मजदूरों की मौत हो चुकी है, वहीं अब दो और मजदूरों के लापता होने की खबर सामने आने से परिजनों और साथी मजदूरों की चिंता बढ़ गई है। घायल मजदूरों का कहना है कि ब्लास्ट के बाद से उनके साथी राजू और बाबुल का कोई पता नहीं चल पाया है। दोनों बिहार के अरहरिया जिले के रहने वाले बताए जा रहे हैं और कुछ महीने पहले ही रोज़गार की तलाश में देवास आए थे। देवास जिला अस्पताल में भर्ती घायल मजदूर शशि कुमार ने बताया कि हादसे से पहले उनकी दोनों साथियों से खाना खाते समय बातचीत हुई थी। इसके बाद वे आखिरी बार फैक्ट्री के बिलिंग रूम के पास दिखाई दिए। धमाके के बाद से दोनों न तो अस्पतालों में मिले और न ही किसी से संपर्क हो पाया। साथी मजदूरों को आशंका है कि कहीं दोनों भी हादसे का शिकार तो नहीं हो गए। मजदूर लगातार प्रशासन से घटना स्थल पर जाकर तलाश करने की मांग कर रहे हैं। उनका कहना है कि उन्होंने अस्पतालों, आसपास के इलाकों और रिश्तेदारों से संपर्क कर लिया, लेकिन दोनों का कोई सुराग नहीं मिला। इस दर्दनाक हादसे में अब तक जिन मजदूरों की मौत हुई है, उनमें बिहार के सुमित, धीरज, अमर और गुड्डू शामिल हैं, जबकि उत्तर प्रदेश के लखनऊ निवासी सनी की भी जान गई है। मृतकों के शव देर रात परिजनों को सौंप दिए गए। वहीं हादसे में घायल कई मजदूरों का इलाज अलग-अलग अस्पतालों में चल रहा है। देवास जिला अस्पताल में 11 लोग भर्ती हैं, जबकि गंभीर घायलों को निजी अस्पतालों में रेफर किया गया है। प्रशासन ने मामले की गंभीरता को देखते हुए जांच के लिए विशेष टीम गठित की है। शुरुआती जांच में सामने आया है कि फैक्ट्री पूरी तरह तैयार होने से पहले ही वहां पटाखा निर्माण शुरू कर दिया गया था। श्रम विभाग की रिपोर्ट में यह भी आशंका जताई गई है कि मैग्नीशियम पाउडर के पानी के संपर्क में आने या स्टैटिक चार्ज बनने से विस्फोट हुआ होगा। रिपोर्ट में सुरक्षा नियमों की भारी अनदेखी, फैक्ट्री एक्ट के तहत जरूरी लाइसेंस का अभाव, अग्निशमन व्यवस्था में कमी और इमरजेंसी प्लान न होने जैसी गंभीर लापरवाहियां सामने आई हैं। इन मामलों में फैक्ट्री प्रबंधन पर कड़ी कानूनी कार्रवाई की तैयारी की जा रही है।

शाजापुर में गोदाम से 12 इलेक्ट्रिक पोल चोरी, ठेकेदार ने दर्ज कराई शिकायत

नई दिल्ली । मध्य प्रदेश के शाजापुर जिले के लालघाटी क्षेत्र में चोरी की एक अजीबोगरीब घटना सामने आई है, जहां एक इलेक्ट्रिकल कॉन्ट्रैक्टर के गोदाम से 12 लोहे के इलेक्ट्रिक पोल गायब हो गए। पीड़ित हेमकांत शर्मा, जो ग्वालियर के निवासी हैं और वर्तमान में शाजापुर में कार्यरत हैं, ने बताया कि उन्होंने ये सिल्वर रंग के लोहे के पोल निर्माणाधीन प्रोजेक्ट के लिए गोदाम में सुरक्षित रखे थे। गुरुवार रात करीब 8 बजे तक सभी पोल मौजूद थे, लेकिन अगले दिन शुक्रवार सुबह 9:30 बजे जब वे गोदाम पहुंचे तो पूरा सामान गायब मिला। घटना के बाद आसपास के क्षेत्र में तलाश की गई, लेकिन कहीं कोई सुराग नहीं मिला। इसके बाद उन्होंने तत्काल पुलिस में शिकायत दर्ज कराई। कॉन्ट्रेक्टर ने आशंका जताई है कि यह चोरी किसी योजनाबद्ध तरीके से की गई है, क्योंकि पोल भारी और निर्माण कार्य से जुड़े महत्वपूर्ण सामान थे। उन्होंने यह भी बताया कि संबंधित बिल और दस्तावेज इंजीनियर से लेकर जल्द पुलिस को उपलब्ध कराए जाएंगे। पुलिस ने शिकायत के आधार पर अज्ञात चोरों के खिलाफ मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है और आसपास के सीसीटीवी फुटेज तथा संदिग्ध गतिविधियों की जांच की जा रही है।

साहसी सिनेमा की नई पहचान बनी ‘आखिरी सवाल’, तीखे सवालों से झकझोर देने वाली दमदार राजनीतिक ड्रामा फिल्म

नई दिल्ली । भारतीय सिनेमा में कभी-कभी कुछ ऐसी फिल्में सामने आती हैं जो केवल मनोरंजन का माध्यम नहीं रहतीं, बल्कि समाज, इतिहास और राजनीति पर गहरे सवाल खड़े कर देती हैं। ऐसी ही एक फिल्म है ‘आखिरी सवाल’, जिसे एक साहसी राजनीतिक ड्रामा के रूप में देखा जा रहा है। यह फिल्म अपने तीखे विषयों, बेबाक प्रस्तुति और भावनात्मक गहराई के कारण दर्शकों के बीच चर्चा का केंद्र बन गई है। निर्देशक अभिजीत मोहन वरंग और निर्माता निखिल नंदा की यह फिल्म उस श्रेणी में रखी जा रही है, जो सुरक्षित रास्तों से हटकर सिनेमा को एक नई दिशा देने की कोशिश करती है। फिल्म उन विषयों को छूती है, जिन्हें अक्सर संवेदनशील या विवादित मानकर बड़े पर्दे पर सीमित रूप में ही दिखाया जाता है। इसमें ऐतिहासिक घटनाओं, सामाजिक धारणाओं और राजनीतिक विचारधाराओं से जुड़े कई गंभीर सवालों को सामने रखा गया है, जो दर्शकों को सहज नहीं रहने देते बल्कि सोचने पर मजबूर करते हैं। फिल्म की कहानी उन मुद्दों के इर्द-गिर्द घूमती है जिन पर लंबे समय से समाज में बहस होती रही है। इसमें इतिहास की कुछ प्रमुख घटनाओं और उनसे जुड़े विभिन्न दृष्टिकोणों को भी जगह दी गई है। कहानी का उद्देश्य किसी एक निष्कर्ष को थोपना नहीं, बल्कि दर्शकों को उन सवालों से रूबरू कराना है जिनके जवाब अक्सर अधूरे या विवादित रहे हैं। यही वजह है कि फिल्म को एक साहसी प्रयास के रूप में देखा जा रहा है। अभिनय की बात करें तो संजय दत्त ने इस फिल्म में अपने करियर का एक अलग और गंभीर रूप प्रस्तुत किया है। उनका किरदार संयमित, भावनात्मक और भीतर से टूटे हुए व्यक्ति का है, जो अपने अतीत और सच्चाई के बीच उलझा हुआ नजर आता है। उनकी आंखों और संवादों में एक गहरी गंभीरता दिखाई देती है, जो फिल्म को मजबूती प्रदान करती है। इसके साथ ही नमाशी चक्रवर्ती ने भी अपने अभिनय से सभी को प्रभावित किया है। उनकी स्क्रीन उपस्थिति और भावनात्मक अभिव्यक्ति कहानी में एक नई ऊर्जा जोड़ती है। कई दृश्यों में उनका प्रदर्शन दर्शकों पर गहरा प्रभाव छोड़ता है और यह संकेत देता है कि वह एक उभरते हुए मजबूत कलाकार के रूप में अपनी पहचान बना सकते हैं। फिल्म का एक और महत्वपूर्ण पहलू इसके संवाद और डिबेट वाले दृश्य हैं, जो बेहद तीव्र और वास्तविक महसूस होते हैं। न्यूजरूम और सार्वजनिक बहसों को जिस तरह से फिल्म में प्रस्तुत किया गया है, वह दर्शकों को सीधे कहानी से जोड़ देता है। ये दृश्य केवल स्क्रिप्ट का हिस्सा नहीं लगते, बल्कि वास्तविक समाज में चल रही विचारधाराओं की टकराहट को भी दर्शाते हैं। दृश्यात्मक रूप से भी फिल्म मजबूत पकड़ बनाए रखती है। हर फ्रेम में तनाव और उद्देश्य स्पष्ट दिखाई देता है। कहानी भले ही जटिल और बहुस्तरीय विषयों पर आधारित हो, लेकिन इसका नैरेटिव दर्शकों को लगातार बांधे रखता है। फिल्म का सबसे बड़ा गुण यह है कि यह उपदेश देने के बजाय सवाल पूछती है और दर्शकों को अपने निष्कर्ष खुद निकालने के लिए प्रेरित करती है। सहायक कलाकारों का प्रदर्शन भी फिल्म को और प्रभावशाली बनाता है, जिससे कहानी की भावनात्मक गहराई और बढ़ जाती है। पूरी फिल्म एक ऐसे संवाद की तरह महसूस होती है, जो समाज को आईना दिखाने का प्रयास करती है।

स्मार्टफोन की सेफ्टी के लिए जरूरी टिप्स: ये 5 चीजें फोन के साथ रखी तो हो सकता है भारी नुकसान

नई दिल्ली। आज के समय में स्मार्टफोन हमारी रोजमर्रा की जिंदगी का सबसे अहम हिस्सा बन चुका है, लेकिन छोटी-छोटी लापरवाहियां इसके लिए बड़ा नुकसान साबित हो सकती हैं। अक्सर लोग अनजाने में फोन के साथ ऐसी चीजें रख लेते हैं जो इसकी स्क्रीन, बैटरी और इंटरनल पार्ट्स को खराब कर सकती हैं। सबसे पहले, चाबियां और सिक्के जैसे धातु के सामान फोन के साथ रखने से स्क्रीन और कैमरा लेंस पर गहरी खरोंच आ सकती है, जिससे फोन की लुक और परफॉर्मेंस दोनों प्रभावित होते हैं। वहीं, मजबूत मैग्नेट वाले डिवाइस या चुंबक फोन के सेंसर्स और कंपास जैसी तकनीक को नुकसान पहुंचा सकते हैं। इसके अलावा, पावर बैंक के साथ फोन को एक ही टाइट जगह पर चार्ज करते समय रखने से ओवरहीटिंग का खतरा बढ़ जाता है, जिससे बैटरी कमजोर हो सकती है या गंभीर मामलों में फटने का रिस्क भी बन सकता है। क्रेडिट और डेबिट कार्ड को फोन के कवर में रखना भी सुरक्षित नहीं माना जाता, क्योंकि फोन के मैग्नेटिक फील्ड से कार्ड की स्ट्रिप या चिप खराब हो सकती है। वहीं पानी की बोतल या किसी भी तरल पदार्थ के पास फोन रखने से रिसाव होने पर शॉर्ट-सर्किट का खतरा रहता है। विशेषज्ञों का कहना है कि स्मार्टफोन को हमेशा अलग और सुरक्षित जगह पर रखना चाहिए और अच्छे क्वालिटी के केस व स्क्रीन प्रोटेक्टर का इस्तेमाल करना चाहिए, ताकि यह लंबे समय तक सुरक्षित रहे।

गर्मी का प्रचंड वार: शाजापुर में तापमान 45 डिग्री के करीब, लोगों की मुश्किलें बढ़ीं

नई दिल्ली । मध्य प्रदेश के शाजापुर जिले में इन दिनों भीषण गर्मी और लू का प्रकोप लगातार बढ़ता जा रहा है। पिछले एक सप्ताह से पड़ रही तेज धूप और गर्म हवाओं ने आम जनजीवन को पूरी तरह प्रभावित कर दिया है। शुक्रवार को हालात और गंभीर हो गए, जब सुबह से ही तेज धूप के साथ लू चलने लगी। दोपहर होते-होते शहर के प्रमुख बाजार नई सड़क और चौक बाजार जहां आमतौर पर भीड़ रहती है, वहां पूरी तरह सन्नाटा पसर गया। लोग गर्मी से बचने के लिए घरों में दुबके रहे, जिससे सड़कों पर आवाजाही बेहद कम हो गई। तेज गर्मी से राहत पाने के लिए कई दुकानदारों ने अपनी दुकानों के बाहर हरी नेट और अस्थायी शेड लगाए हैं, ताकि थोड़ी ठंडक बनी रहे। वहीं, तेज लू के कारण सबसे ज्यादा परेशानी दोपहिया वाहन चालकों को हो रही है, जो धूप में सफर करने को मजबूर हैं। लोग अब हेलमेट के साथ-साथ टोपी, गमछा और चश्मे का सहारा ले रहे हैं। स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने नागरिकों को चेतावनी दी है कि दोपहर 12 बजे से 3 बजे के बीच बाहर निकलने से बचें। साथ ही पर्याप्त पानी पीने, हल्का भोजन करने और शरीर को हाइड्रेट रखने की सलाह दी गई है, ताकि लू से होने वाली बीमारियों से बचा जा सके। ,शुक्रवार को जिले में अधिकतम तापमान 44 से 45 डिग्री सेल्सियस के बीच दर्ज होने की संभावना है, जबकि न्यूनतम तापमान करीब 27 डिग्री सेल्सियस रह सकता है। मौसम विभाग ने यह भी संकेत दिया है कि अगले दो दिनों तक राहत की कोई संभावना नहीं है और तापमान 45 से 46 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच सकता है। भीषण गर्मी के चलते प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग ने लोगों से सतर्क रहने और अनावश्यक रूप से घर से बाहर न निकलने की अपील की है।

कान्स को अलविदा कहती आलिया भट्ट का रॉयल फाइनल अवतार, तीन दिन के स्टाइल ने जीता दिल

नई दिल्ली । कान फिल्म फेस्टिवल 2026 इस बार बॉलीवुड अभिनेत्री आलिया भट्ट के ग्लैमरस और एलीगेंट फैशन मोमेंट्स के लिए खास चर्चा में रहा। तीन दिनों तक लगातार अलग-अलग स्टाइल में रेड कार्पेट पर नजर आने के बाद आलिया ने अपने आखिरी दिन एक ऐसा लुक पेश किया जिसने पूरे फेस्टिवल का ध्यान अपनी ओर खींच लिया। उनका यह फाइनल अवतार न सिर्फ फैशन की दुनिया में चर्चा का विषय बना, बल्कि सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो गया। फेस्टिवल के अंतिम दिन आलिया भट्ट मैरून रंग के ऑफ-शोल्डर कॉर्सेट गाउन में नजर आईं। यह आउटफिट उनकी पर्सनालिटी को एक रॉयल और ग्रेसफुल टच दे रहा था। इस डिजाइन में भारतीय टेक्सटाइल की झलक के साथ वेस्टर्न विक्टोरियन स्टाइल का बेहतरीन मिश्रण देखने को मिला। इस खास ड्रेस को एक अनुभवी डिजाइन टीम की मदद से तैयार किया गया था, जिसमें हर डिटेल पर बारीकी से काम किया गया था ताकि यह लुक रेड कार्पेट पर अलग पहचान बना सके। इस आखिरी दिन आलिया ने अपने स्टाइल में सादगी को सबसे ज्यादा प्राथमिकता दी। उन्होंने भारी मेकअप या ज्यादा एक्सेसरीज की बजाय हल्का और नैचुरल मेकअप चुना। उनके बालों को हाई बन स्टाइल में बांधा गया था, जिससे उनका पूरा लुक और भी एलीगेंट और क्लासी नजर आया। फैशन एक्सपर्ट्स के अनुसार यह लुक उनकी पूरी कान्स जर्नी का सबसे परफेक्ट और बैलेंस्ड अवतार माना जा सकता है, जिसमें ग्लैमर और ग्रेस दोनों का सुंदर संतुलन देखने को मिला। कान्स के दौरान आलिया भट्ट ने तीन दिनों में अलग-अलग फैशन स्टेटमेंट पेश किए, जिसने उन्हें लगातार सुर्खियों में बनाए रखा। पहले दिन उनका स्टील ब्लू गाउन एक फेयरी टेल जैसी झलक दे रहा था, जिसमें वे किसी ड्रीम वर्ल्ड की कैरेक्टर जैसी नजर आईं। दूसरे दिन रेड ऑफ-शोल्डर ड्रेस में उनका अंदाज और भी बोल्ड और रॉयल दिखाई दिया, जिसने रेड कार्पेट पर अलग ही आकर्षण पैदा किया। तीसरे दिन कोरल शेड आउटफिट में उन्होंने इंडो-वेस्टर्न स्टाइल का ऐसा मेल दिखाया, जिसने उनकी फैशन वर्सेटिलिटी को और मजबूत किया। इन तीन दिनों के दौरान आलिया की कई तस्वीरें सामने आईं, जिनमें उनका ग्लैमरस अवतार तो था ही, लेकिन साथ ही कुछ ऐसे पल भी कैद हुए जिनमें वे काफी रिलैक्स और सामान्य मूड में नजर आईं। ये अनफिल्टर्ड और बैकस्टेज मोमेंट्स फैंस के लिए उतने ही खास रहे जितने उनके रेड कार्पेट लुक्स। इन तस्वीरों ने उनकी पर्सनालिटी का एक और साइड दिखाया, जो आमतौर पर कैमरों के सामने कम ही देखने को मिलता है। अपने आखिरी पोस्ट में आलिया भट्ट ने इस पूरी जर्नी को एक यादगार अनुभव बताया। उन्होंने संकेत दिया कि यह इस साल का उनका अंतिम लुक है और उन्होंने इन तीन दिनों को बेहद खास और भावनात्मक बताया। उनकी पोस्ट में फेस्टिवल के लिए आभार और भविष्य में फिर से इस मंच पर लौटने की उम्मीद भी साफ झलक रही थी।

कमजोर पासवर्ड पर साइबर अटैक का खतरा बढ़ा: AI के सामने सेकंडों में टूट रहे आसान पासवर्ड, 23 करोड़ लीक डाटा से बड़ा खुलासा

नई दिल्ली। साइबर सुरक्षा को लेकर Kaspersky की ताज़ा रिपोर्ट ने गंभीर चिंता बढ़ा दी है। रिपोर्ट के अनुसार 2023 से 2026 के बीच करीब 23.10 करोड़ यूनिक पासवर्ड लीक हुए हैं, जिनके विश्लेषण में यह सामने आया कि बड़ी संख्या में यूजर्स अब भी कमजोर और आसानी से अनुमान लगाए जा सकने वाले पासवर्ड का इस्तेमाल कर रहे हैं। रिपोर्ट में कहा गया है कि करीब 68% मॉडर्न पासवर्ड ऐसे हैं जिन्हें आज के ब्रूट-फोर्स और AI आधारित हैकिंग टूल्स की मदद से एक दिन के भीतर क्रैक किया जा सकता है। सिर्फ इतना ही नहीं, गलत पैटर्न और सरल कॉम्बिनेशन वाले 12 से 15 कैरेक्टर लंबे पासवर्ड भी सुरक्षा की गारंटी नहीं दे पा रहे हैं और कुछ मामलों में इन्हें एक मिनट से भी कम समय में तोड़ा जा सकता है। विश्लेषण में यह भी पाया गया कि लोग अक्सर पासवर्ड में आसान नंबर सीक्वेंस जैसे “123456”, कीबोर्ड पैटर्न जैसे क्वर्टी या सामान्य शब्दों का इस्तेमाल करते हैं, जिससे हैकर्स के लिए काम और आसान हो जाता है। इसके अलावा ट्रेंडिंग और भावनात्मक शब्दों का इस्तेमाल भी पासवर्ड को कमजोर बना रहा है, जिससे डेटा चोरी का खतरा और बढ़ जाता है। साइबर एक्सपर्ट्स का मानना है कि सिर्फ लंबा पासवर्ड बनाना पर्याप्त नहीं है, बल्कि मजबूत और यूनिक पासवर्ड के साथ मल्टी-फैक्टर ऑथेंटिकेशन (MFA) और पासवर्ड मैनेजर का इस्तेमाल करना आज की सबसे जरूरी डिजिटल सुरक्षा रणनीति बन चुका है।

धुरंधर 2 OTT रिलीज: थिएटर से लंबा और अनकट वर्जन जल्द आएगा डिजिटल प्लेटफॉर्म पर, फैंस में बढ़ा क्रेज

नई दिल्ली । ‘धुरंधर 2’ ने सिनेमाघरों में जबरदस्त सफलता हासिल करने के बाद अब डिजिटल दुनिया में कदम रखने की तैयारी कर ली है। इस फिल्म को लेकर दर्शकों में पहले से ही काफी उत्साह बना हुआ है और अब इसकी OTT रिलीज को लेकर चर्चा और तेज हो गई है। खास बात यह है कि इस बार फिल्म का डिजिटल वर्जन थिएटर में दिखाए गए संस्करण से अलग और ज्यादा विस्तृत होने वाला है, जिसमें कई नए दृश्य और अतिरिक्त कंटेंट शामिल किए जाएंगे। थिएटर में रिलीज के दौरान जो फिल्म दर्शकों ने देखी थी, अब उसका एक ज्यादा लंबा और अनकट संस्करण OTT प्लेटफॉर्म पर पेश किया जाएगा। इस डिजिटल वर्जन में कहानी को और विस्तार दिया गया है और कुछ ऐसे दृश्य भी जोड़े गए हैं जिन्हें पहले संस्करण में शामिल नहीं किया गया था। इसके साथ ही फिल्म के कई हिस्सों को ज्यादा गहराई और तीव्रता के साथ दिखाया गया है, जिससे पूरी कहानी और प्रभावशाली महसूस होती है। फिल्म की कहानी वही रहेगी, लेकिन उसे दिखाने का तरीका और प्रस्तुति का विस्तार OTT वर्जन में ज्यादा मजबूत दिखाई देगा। इसमें कुछ ऐसे सीक्वेंस भी शामिल किए गए हैं जो किरदारों के इमोशंस और कहानी की पृष्ठभूमि को बेहतर तरीके से समझाने में मदद करते हैं। इस बदलाव से फिल्म का अनुभव दर्शकों के लिए और भी रोमांचक और प्रभावी बन गया है। डिजिटल रिलीज को लेकर यह भी बताया जा रहा है कि इसे अलग-अलग बाजारों के हिसाब से अलग प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध कराया जाएगा। अंतरराष्ट्रीय दर्शकों के लिए एक प्रमुख स्ट्रीमिंग प्लेटफॉर्म पर फिल्म स्ट्रीम होगी, जबकि भारतीय दर्शकों के लिए इसे देश में उपलब्ध एक अन्य डिजिटल प्लेटफॉर्म पर रिलीज किया जाएगा। इस रणनीति का उद्देश्य फिल्म को ज्यादा से ज्यादा दर्शकों तक पहुंचाना है। OTT वर्जन की लंबाई थिएटर रिलीज से थोड़ी अधिक रखी गई है, जिससे दर्शकों को अतिरिक्त कंटेंट देखने का मौका मिलेगा। इसमें कुछ एक्सटेंडेड एक्शन सीन्स और अनसेंसर्ड डायलॉग भी शामिल हैं, जो फिल्म के मूड को और अधिक तीव्र और प्रभावशाली बनाते हैं। इसी वजह से फैंस इस डिजिटल रिलीज का बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं। हालांकि भारत में इसकी रिलीज डेट को लेकर अभी आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है, लेकिन उम्मीद है कि जल्द ही इसकी तारीख सामने आ जाएगी। फिलहाल इतना तय है कि ‘धुरंधर 2’ का OTT वर्जन दर्शकों को वही कहानी एक नए और ज्यादा गहरे अनुभव के साथ देखने का मौका देगा।

बंधक बनाकर पिटाई और फिरौती का आरोप, परिवार से मांगे 61 हजार रुपये

नई दिल्ली । मध्य प्रदेश के राजगढ़ जिले में भाजपा के पूर्व जिला अध्यक्ष दीपक शर्मा के साथ अपहरण, मारपीट और लूट की सनसनीखेज वारदात सामने आई है। पीड़ित का आरोप है कि 10 मई को भोपाल से लौटते समय उन्हें एक सुनियोजित साजिश के तहत रोका गया और हथियारों के दम पर जंगल में ले जाया गया, जहां उनके साथ घंटों तक बेरहमी से मारपीट की गई। दीपक शर्मा के मुताबिक, रास्ते में एक परिचित महिला ने उनकी कार रुकवाई, जिसके बाद 7–8 बदमाशों ने उन्हें घेर लिया। आरोप है कि बदमाश उन्हें जबरन जंगल की ओर ले गए और वहां मोबाइल, नकदी, घड़ी, अंगूठी और अन्य सामान छीन लिया। पीड़ित ने बताया कि आरोपियों ने उनसे 20 लाख रुपये की मांग की। जब उन्होंने असमर्थता जताई तो बदमाशों ने उन्हें धमकाकर पत्नी, बेटी और परिचितों से पैसे मंगवाए। डर के माहौल में परिजनों ने करीब 61 हजार रुपये ऑनलाइन ट्रांसफर कर दिए। इतना ही नहीं, आरोप है कि बदमाशों ने उनसे चेक पर हस्ताक्षर भी करवाए और लगातार जान से मारने की धमकी दी। पीड़ित का दावा है कि इस दौरान उनके कपड़े फाड़े गए और अश्लील वीडियो बनाकर उसे वायरल करने की धमकी भी दी गई। घटना के बाद किसी तरह आरोपियों के चंगुल से बचकर दीपक शर्मा राजगढ़ पहुंचे और अगले दिन थाने में शिकायत दर्ज कराई। पुलिस ने मामले को गंभीरता से लेते हुए जीरो पर एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू कर दी है और केस को ब्यावरा थाने ट्रांसफर किया गया है। पुलिस का कहना है कि पूरे मामले की हर एंगल से जांच की जा रही है और आरोपियों की पहचान व गिरफ्तारी के प्रयास जारी हैं।

भोजशाला विवाद पर बड़ा फैसला: हाईकोर्ट ने सुनाया आदेश, क्षेत्र में बढ़ी हलचल

नई दिल्ली । मध्य प्रदेश के धार जिले में स्थित ऐतिहासिक भोजशाला परिसर को लेकर लंबे समय से चल रहे विवाद में आज हाई कोर्ट ने अहम फैसला सुनाया है। अदालत ने अपने आदेश में भोजशाला को मंदिर स्वरूप स्थल माना है और हिंदू पक्ष की याचिका को आंशिक रूप से स्वीकार कर लिया है। कोर्ट का अहम फैसलाहाई कोर्ट ने अपने निर्णय में कहा कि उपलब्ध ऐतिहासिक तथ्यों और एएसआई (ASI) रिपोर्ट के आधार पर यह स्पष्ट होता है कि यह स्थल परमार वंश के राजा भोज से जुड़ा संस्कृत शिक्षा केंद्र और देवी वाग्देवी (सरस्वती) से संबंधित मंदिर रहा है। कोर्ट ने यह भी कहा कि इस स्थान पर हिंदू पूजा-अर्चना की निरंतरता ऐतिहासिक रूप से बनी रही है।  फैसले की प्रमुख बातेंभोजशाला परिसर को मंदिर स्वरूप माना गयाहिंदू पक्ष को पूजा-अर्चना का अधिकार दिया गयाASI को परिसर का प्रशासनिक नियंत्रण जारी रखने का निर्देशकेंद्र सरकार और ASI को प्रबंधन और धार्मिक स्वरूप से जुड़े निर्णय लेने होंगेविवादित स्थल 1958 अधिनियम के तहत संरक्षित स्मारक बना रहेगा  ASI रिपोर्ट का हवालकोर्ट ने अपने फैसले की विस्तृत रिपोर्ट को अहम माना, जिसमें कहा गया था कि: परिसर में मिले 106 स्तंभ और 82 संरचनात्मक अवशेष प्राचीन मंदिर के प्रतीक हैंकई स्तंभों पर देवी-देवताओं की मूर्तियां और आकृतियां पाई गईंपरमार कालीन शिलालेख और अवशेष मिले हैंस्थल का मूल स्वरूप हिंदू मंदिर होने के संकेत देता है विवाद की पृष्ठभूमयह विवाद वर्षों से हिंदू और मुस्लिम पक्ष के बीच चला आ रहा था। हिंदू पक्ष का दावा था कि यह मां सरस्वती का प्राचीन मंदिर है, जबकि मुस्लिम पक्ष इसे कमाल मौला मस्जिद मानता था। वसंत पंचमी पर पूजा और नमाज को लेकर यहां अक्सर तनाव की स्थिति बनी रहती थी। सुरक्षा व्यवस्थाफैसले से पहले प्रशासन ने धारा 163 लागू कर दी थी और भीड़ जुटाने पर रोक लगाई गई थी। सोशल मीडिया पर निगरानी और सुरक्षा व्यवस्था को भी कड़ा किया गया था। हाई कोर्ट के इस फैसले के बाद भोजशाला विवाद में एक नया मोड़ आ गया है। हालांकि, प्रशासनिक और कानूनी प्रक्रिया के तहत आगे के निर्देश अभी केंद्र और ASI के फैसलों पर निर्भर करेंगे।