242 पन्नों के फैसले का होगा कानूनी परीक्षण, मुस्लिम पक्ष ने जताई अपील की बात

इंदौर/धार। मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की इंदौर बेंच द्वारा भोजशाला मामले में दिए गए ऐतिहासिक फैसले के बाद अब यह कानूनी विवाद एक नए चरण में प्रवेश करता नजर आ रहा है। फैसले के खिलाफ मुस्लिम पक्ष ने सुप्रीम कोर्ट जाने की तैयारी शुरू कर दी है। पक्षकारों का कहना है कि वे 242 पन्नों के विस्तृत फैसले का गहन अध्ययन करने के बाद इसे सर्वोच्च न्यायालय में चुनौती देंगे। हाईकोर्ट ने अपने निर्णय में हिंदू फ्रंट फॉर जस्टिस की याचिका को स्वीकार करते हुए भोजशाला परिसर में हिंदू पक्ष को पूजा का विशेष अधिकार प्रदान किया है। साथ ही, वर्ष 2003 में दिए गए उस आदेश को भी निरस्त कर दिया गया है, जिसमें मुस्लिम पक्ष को सीमित समय के लिए नमाज की अनुमति दी गई थी। कोर्ट ने भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) की रिपोर्ट को इस फैसले का प्रमुख आधार माना है। ASI की रिपोर्ट को मामले में निर्णायक माना गया है, जिसमें 98 दिनों के सर्वे और लगभग 2100 पन्नों की जांच रिपोर्ट शामिल है। रिपोर्ट के अनुसार, भोजशाला परिसर ऐतिहासिक रूप से मां वाग्देवी और संस्कृत शिक्षा का प्रमुख केंद्र रहा है। कोर्ट ने इन्हीं तथ्यों के आधार पर परिसर को हिंदू धार्मिक स्वरूप से जुड़ा माना है। हिंदू पक्ष के वरिष्ठ अधिवक्ता विष्णु शंकर जैन ने फैसले को ऐतिहासिक बताते हुए कहा कि अदालत ने स्पष्ट रूप से माना है कि भोजशाला का स्वरूप मंदिर जैसा है। उन्होंने यह भी कहा कि यह मामला अयोध्या राम जन्मभूमि विवाद से अलग प्रकृति का है, क्योंकि यह रिट याचिका के रूप में सुना गया था। मुस्लिम पक्ष की ओर से कहा गया है कि वे इस निर्णय को स्वीकार नहीं करते और सुप्रीम कोर्ट में इसे चुनौती देंगे। उनका कहना है कि पूरे फैसले का कानूनी और तथ्यात्मक विश्लेषण करने के बाद ही अगला कदम तय किया जाएगा। इस बीच, हिंदू पक्ष ने इस फैसले को अपनी बड़ी जीत बताते हुए इसे ऐतिहासिक न्याय करार दिया है। वहीं, क्षेत्र में फिलहाल स्थिति शांत बनी हुई है, लेकिन कानूनी लड़ाई के अगले चरण को लेकर दोनों पक्षों में सक्रियता बढ़ गई है।
बांग्लादेश बनाम पाकिस्तान टेस्ट में बड़ा हादसा: हसन अली गंभीर रूप से चोटिल

नई दिल्ली। बांग्लादेश और पाकिस्तान के बीच सिलहट इंटरनेशनल क्रिकेट स्टेडियम में खेले जा रहे दूसरे टेस्ट मैच के पहले दिन एक बड़ा हादसा देखने को मिला, जब पाकिस्तान के तेज गेंदबाज हसन अली गेंदबाजी करते समय गंभीर रूप से चोटिल हो गए। यह घटना बांग्लादेश की पारी के आठवें ओवर के दौरान हुई, जब हसन अली अपनी ही गेंद को रोकने के प्रयास में संतुलन खो बैठे और बुरी तरह मैदान पर गिर पड़े। गिरने के दौरान उनका सिर जमीन से जोर से टकराया, जिसके बाद वे दर्द से कराहते नजर आए। मैदान पर मौजूद खिलाड़ियों और अंपायरों ने तुरंत मेडिकल टीम को बुलाया। फिजियो ने शुरुआती जांच के बाद उनकी स्थिति गंभीर देखते हुए उन्हें स्ट्रेचर पर बाहर ले जाने का फैसला किया, जिससे मैदान पर कुछ समय के लिए चिंता का माहौल बन गया। हालांकि राहत की बात यह रही कि कुछ देर बाद हसन अली की स्थिति में सुधार हुआ और वे वापस मैदान पर लौटे। इसके बाद उन्होंने गेंदबाजी भी की, जिससे टीम और प्रशंसकों ने राहत की सांस ली। इस मैच में पाकिस्तान के कप्तान शान मसूद ने टॉस जीतकर पहले बल्लेबाजी करने का फैसला किया था। बांग्लादेश की शुरुआत शानदार नहीं रही और शुरुआती झटके लगते ही टीम दबाव में आ गई। वहीं पाकिस्तान ने प्लेइंग इलेवन में तीन बड़े बदलाव किए, जिसमें बाबर आजम की वापसी भी शामिल रही। पाकिस्तान की टीम में अजान अवैस, शान मसूद, बाबर आजम, सऊद शकील और मोहम्मद रिजवान जैसे खिलाड़ी शामिल रहे, जबकि बांग्लादेश की ओर से नजमुल हुसैन शान्तो और लिटन दास जैसे अनुभवी खिलाड़ी मैदान में उतरे। पहले टेस्ट में बांग्लादेश ने पाकिस्तान को 104 रनों से हराकर इतिहास रचा था, जिससे यह सीरीज और भी रोमांचक हो गई है। इस ताजा हादसे ने मैच के पहले दिन को चर्चा में ला दिया, हालांकि हसन अली की वापसी ने टीम को राहत दी।
आर्थिक संकट के बीच पाकिस्तान पर IMF की सख्ती, बढ़ेगा राजस्व लक्ष्य

नई दिल्ली/इस्लामाबाद। पाकिस्तान की आर्थिक स्थिति पर अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) की सख्ती एक बार फिर बढ़ गई है। आईएमएफ ने अगले वित्तीय वर्ष के लिए पाकिस्तान के पेट्रोलियम लेवी टारगेट को बढ़ाकर लगभग 1.73 लाख करोड़ रुपये तय कर दिया है, जो मौजूदा लक्ष्य से करीब 25,900 करोड़ रुपये अधिक है। इस फैसले के बाद पाकिस्तान में पहले से जारी महंगाई संकट के और गहराने की आशंका जताई जा रही है। आईएमएफ की स्टाफ-लेवल रिपोर्ट के अनुसार, पाकिस्तान सरकार को अपने राजस्व लक्ष्यों को पूरा करने के लिए अब अतिरिक्त 86 हजार करोड़ रुपये के बराबर संसाधन जुटाने होंगे। इसके लिए केंद्र और प्रांतीय सरकारों पर भी अतिरिक्त जिम्मेदारी डाली गई है। केंद्र सरकार को नए टैक्स उपायों और प्रवर्तन सुधारों के जरिए लगभग आधा लक्ष्य हासिल करना होगा, जबकि प्रांतीय सरकारें सेवाओं पर सेल्स टैक्स और कृषि आयकर के माध्यम से राजस्व बढ़ाने की कोशिश करेंगी। रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि पाकिस्तान का कुल बजट आकार 17 लाख करोड़ रुपये से अधिक रहने का अनुमान है, जो पिछले वर्ष की तुलना में लगभग 9 प्रतिशत अधिक है। वहीं, देश का रक्षा बजट भी बढ़कर लगभग 2.66 लाख करोड़ रुपये तक पहुंचने की संभावना है। आईएमएफ ने पाकिस्तान के फेडरल बोर्ड ऑफ रेवेन्यू (FBR) के लिए भी लक्ष्य और कड़े कर दिए हैं। अब उसे 15 लाख करोड़ रुपये से अधिक का राजस्व जुटाना होगा। लगातार दो वर्षों से लक्ष्य पूरा न कर पाने के कारण इस बार निगरानी व्यवस्था को और सख्त कर दिया गया है। सबसे अहम बदलाव यह है कि अब केवल इंडिकेटिव टारगेट नहीं बल्कि क्वांटिटेटिव परफॉर्मेंस क्राइटेरिया लागू किया गया है। इसका मतलब यह है कि लक्ष्य पूरा न होने पर पाकिस्तान को आईएमएफ बोर्ड से विशेष छूट लेनी होगी, जिससे उसकी वित्तीय स्वतंत्रता और सीमित हो जाएगी। विशेषज्ञों का मानना है कि आईएमएफ की ये सख्त शर्तें पाकिस्तान की आर्थिक चुनौतियों को और बढ़ा सकती हैं। पहले से ही महंगाई, कर्ज और कमजोर राजस्व व्यवस्था से जूझ रहे देश पर यह फैसला आम जनता के लिए अतिरिक्त बोझ साबित हो सकता है।
पेट्रोल महंगा, डीजल-एटीएफ सस्ता? टैक्स स्ट्रक्चर में हुआ बदलाव

नई दिल्ली। केंद्र सरकार ने पेट्रोलियम उत्पादों के निर्यात से जुड़े टैक्स ढांचे में अहम बदलाव करते हुए पेट्रोल पर विशेष अतिरिक्त उत्पाद शुल्क (SAED) बढ़ा दिया है, जबकि डीजल और एविएशन टर्बाइन फ्यूल (ATF) पर राहत दी गई है। सरकार के इस फैसले को वैश्विक तेल बाजार में बढ़ती अस्थिरता और पश्चिम एशिया में जारी भू-राजनीतिक तनाव के बीच एक रणनीतिक कदम माना जा रहा है। वित्त मंत्रालय द्वारा जारी अधिसूचना के अनुसार, पेट्रोल के निर्यात पर अब 3 रुपये प्रति लीटर का अतिरिक्त शुल्क लगाया जाएगा। वहीं डीजल पर निर्यात शुल्क घटाकर 16.5 रुपये प्रति लीटर कर दिया गया है। इसके साथ ही पेट्रोल और डीजल दोनों पर लागू सड़क और इंफ्रास्ट्रक्चर सेस को शून्य कर दिया गया है। सरकार ने स्पष्ट किया है कि इस संशोधन से घरेलू ईंधन की कीमतों पर कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा और यह बदलाव केवल निर्यात से जुड़े ढांचे पर लागू होगा। नए आदेश को शनिवार से प्रभावी कर दिया गया है। गौरतलब है कि पश्चिम एशिया संकट के बाद पहली बार पेट्रोल निर्यात पर शुल्क लगाया गया है, जबकि डीजल और एटीएफ पर लगातार बदलावों के बाद अब दरों में कटौती की गई है। डीजल पर पहले 21.5 रुपये प्रति लीटर, फिर 55.5 रुपये प्रति लीटर तक वृद्धि और बाद में 23 रुपये प्रति लीटर तक कमी की गई थी, जिसे अब घटाकर 16.5 रुपये प्रति लीटर कर दिया गया है। इसी तरह एविएशन टर्बाइन फ्यूल (ATF) पर भी कई बार संशोधन किया गया। पहले यह शुल्क 29.5 रुपये प्रति लीटर था, जिसे बढ़ाकर 42 रुपये और फिर 33 रुपये किया गया था। अब इसे घटाकर 16 रुपये प्रति लीटर कर दिया गया है। विशेषज्ञों के अनुसार, विंडफॉल टैक्स ढांचे के तहत यह बदलाव वैश्विक बाजार में अस्थिरता के बीच घरेलू आपूर्ति सुनिश्चित करने और निर्यात प्रवाह को नियंत्रित करने के उद्देश्य से किया गया है। सरकार ने यह कदम ऐसे समय उठाया है जब अंतरराष्ट्रीय तेल बाजार में कीमतों में लगातार उतार-चढ़ाव देखा जा रहा है। पश्चिम एशिया तनाव और अमेरिका-ईरान के बीच जारी कूटनीतिक गतिरोध के कारण वैश्विक ऊर्जा बाजार में अनिश्चितता बनी हुई है। ऐसे में भारत का यह टैक्स संशोधन नीति संतुलन बनाए रखने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
शेयर बाजार में गिरावट: सेंसेक्स-निफ्टी 2% से ज्यादा टूटे, निवेशकों में चिंता

नई दिल्ली। वैश्विक आर्थिक अनिश्चितताओं और कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल ने भारतीय शेयर बाजार को इस सप्ताह गहरे दबाव में डाल दिया। पश्चिम एशिया में जारी भू-राजनीतिक तनाव के बीच निवेशकों की धारणा कमजोर रही, जिसका असर सीधे तौर पर प्रमुख बेंचमार्क सूचकांकों सेंसेक्स और निफ्टी पर देखने को मिला। दोनों सूचकांक सप्ताह के अंत में 2 प्रतिशत से ज्यादा की गिरावट के साथ बंद हुए। एनएसई निफ्टी-50 इस सप्ताह 2.2 प्रतिशत यानी 532 अंक टूटकर 23,643.5 के स्तर पर आ गया, जबकि बीएसई सेंसेक्स 2.7 प्रतिशत यानी 2,000 से अधिक अंकों की गिरावट के साथ 75,238 पर बंद हुआ। बाजार में यह गिरावट केवल बड़े इंडेक्स तक सीमित नहीं रही, बल्कि व्यापक बाजार भी इसकी चपेट में आ गया। मिडकैप इंडेक्स में 2 प्रतिशत से ज्यादा और स्मॉलकैप इंडेक्स में करीब 4 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई, जिससे निवेशकों की संपत्ति पर और अधिक दबाव बना। सेक्टोरल प्रदर्शन की बात करें तो रियल्टी और आईटी सेक्टर सबसे ज्यादा प्रभावित रहे। बीएसई रियल्टी इंडेक्स में लगभग 8 प्रतिशत की तेज गिरावट दर्ज हुई, जबकि आईटी इंडेक्स 5.7 प्रतिशत टूट गया। ऑटो, कैपिटल गुड्स, कंज्यूमर ड्यूरेबल, बैंकिंग और पीएसयू सेक्टर में भी लगातार बिकवाली का दबाव देखने को मिला। हालांकि, कुछ रक्षात्मक सेक्टर जैसे मेटल और हेल्थकेयर ने थोड़ी मजबूती दिखाई और मामूली बढ़त दर्ज की। सेंसेक्स के प्रमुख शेयरों में टाइटन सबसे बड़ा नुकसान झेलने वाला स्टॉक रहा, जिसमें 7.6 प्रतिशत की गिरावट आई। इसके अलावा रिलायंस इंडस्ट्रीज, टेक महिंद्रा और महिंद्रा एंड महिंद्रा जैसे बड़े शेयरों में भी कमजोरी देखी गई, जिससे बाजार पर दबाव और बढ़ गया। विश्लेषकों के अनुसार, वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल की कीमतें 105 से 110 डॉलर प्रति बैरल के बीच बनी हुई हैं, जो महंगाई और आर्थिक स्थिरता के लिए चिंता का विषय है। इसके साथ ही अमेरिकी डॉलर की मजबूती और वैश्विक बॉन्ड यील्ड में बढ़ोतरी ने उभरते बाजारों से विदेशी निवेश को बाहर खींचा है, जिससे एफआईआई की लगातार बिकवाली देखने को मिल रही है। हालांकि, इस नकारात्मक माहौल के बीच घरेलू निवेशकों की भागीदारी बाजार के लिए एक सहारा बनी रही। एसआईपी के जरिए लगातार आने वाले निवेश ने बाजार को कुछ हद तक स्थिर बनाए रखने में मदद की। अप्रैल में एसआईपी निवेश 31,115 करोड़ रुपये तक पहुंच गया, जिसने विदेशी बिकवाली के असर को आंशिक रूप से संतुलित किया। कुल मिलाकर, वैश्विक तनाव, तेल कीमतों में उछाल और आर्थिक अनिश्चितताओं के चलते भारतीय शेयर बाजार में दबाव बना हुआ है, और आने वाले समय में निवेशकों की नजर अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियों और कच्चे तेल के रुझानों पर टिकी रहेगी।
भोजशाला में हनुमान चालीसा पाठ, हाईकोर्ट फैसले के बाद बढ़ी श्रद्धा

धार मध्य प्रदेश। धार स्थित ऐतिहासिक भोजशाला-कमाल मौला परिसर को लेकर मध्य प्रदेश हाईकोर्ट के इंदौर बेंच के फैसले के बाद शनिवार सुबह परिसर में धार्मिक गतिविधियों का माहौल देखने को मिला। कोर्ट के निर्णय के बाद बड़ी संख्या में श्रद्धालु और विभिन्न संगठनों के पदाधिकारी भोजशाला पहुंचे और पूजा-अर्चना की। श्रद्धालुओं ने परिसर में स्थित मां वाग्देवी स्थल और यज्ञ कुंड के पास पहुंचकर विधिवत दर्शन किए और हनुमान चालीसा का पाठ किया। पूरे क्षेत्र में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी रही और प्रशासन की निगरानी में कार्यक्रम शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हुआ। हाईकोर्ट के फैसले का प्रभाव, पूजा के अधिकार को लेकर चर्चाहाईकोर्ट के आदेश में भोजशाला परिसर को ऐतिहासिक रूप से राजा भोज कालीन वाग्देवी मंदिर से संबंधित माना गया है। फैसले के बाद हिंदू पक्ष को पूजा-अर्चना का अधिकार मिलने के बाद परिसर में गतिविधियां बढ़ गई हैं।हिंदू पक्ष के वकील के अनुसार, कोर्ट ने वर्ष 2003 के ASI आदेश को आंशिक रूप से निरस्त किया है, जिसमें मुस्लिम समुदाय को तय समय पर नमाज की अनुमति दी गई थी। साथ ही यह भी स्पष्ट किया गया है कि परिसर संरक्षित स्मारक रहेगा और इसकी निगरानी भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) के अधीन ही होगी। श्रद्धालुओं में उत्साह, वर्षों बाद पूजा का अवसर मिलने का दावापूजा-अर्चना के बाद श्रद्धालुओं ने कहा कि उन्हें वर्षों बाद बिना किसी रोक-टोक के दर्शन और पूजा करने का अवसर मिला है। श्रद्धालुओं का कहना है कि भोजशाला परिसर उनके लिए आस्था का केंद्र है और यह स्थान प्राचीन मंदिर का स्वरूप रखता है। भोज उत्सव समिति के पदाधिकारियों ने भी परिसर में पहुंचकर पुष्प अर्पित किए और धार्मिक अनुष्ठान में भाग लिया। कानूनी प्रक्रिया अभी जारी, सुप्रीम कोर्ट जाने की संभावनामामले में आगे कानूनी कार्रवाई की संभावना भी बनी हुई है। मुस्लिम पक्ष के सुप्रीम कोर्ट जाने की संभावना को देखते हुए हिंदू पक्ष ने पहले से ही कैविएट याचिकाएं दायर कर दी हैं, ताकि मामले में सुनवाई के दौरान उनका पक्ष भी सुना जा सके। भोजशाला मामला एक बार फिर धार्मिक आस्था और ऐतिहासिक दावों के बीच चर्चा का केंद्र बन गया है। फिलहाल हाईकोर्ट के फैसले के बाद परिसर में पूजा-अर्चना शुरू हो गई है, लेकिन कानूनी प्रक्रिया अभी पूरी तरह समाप्त नहीं हुई है।
बांग्लादेश में अमेरिका-चीन टकराव तेज, रणनीतिक डील से बदले इंडो-पैसिफिक के समीकरण

नई दिल्ली। बांग्लादेश अब वैश्विक महाशक्तियों अमेरिका और चीन के बीच एक बड़े रणनीतिक टकराव का केंद्र बनता जा रहा है। हाल ही में अमेरिका और बांग्लादेश के बीच हुए व्यापार और सुरक्षा सहयोग समझौतों ने इस क्षेत्र में चीन की बढ़ती मौजूदगी को चुनौती दी है। इसके चलते इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में शक्ति संतुलन तेजी से बदलता दिखाई दे रहा है। जानकारी के अनुसार, अमेरिका ने बांग्लादेश के साथ एक पारस्परिक व्यापार समझौते (ART) पर आगे बढ़ते हुए उसके बंदरगाहों और ढांचे तक पहुंच हासिल की है। इसके बदले में बांग्लादेशी टेक्सटाइल उत्पादों पर अमेरिकी टैरिफ में राहत देने की बात कही गई है। यह समझौता अमेरिकी कंपनियों के लिए बांग्लादेश के ऊर्जा, डिजिटल और इंफ्रास्ट्रक्चर सेक्टर में प्रवेश को भी आसान बनाता है। इसके साथ ही सुरक्षा सहयोग से जुड़े दो महत्वपूर्ण प्रस्ताव—GSOMIA और ACSA—पर भी चर्चा बढ़ी है। इन समझौतों के तहत दोनों देशों की सेनाओं के बीच खुफिया जानकारी साझा करने और अमेरिकी सैन्य जहाजों व विमानों को बांग्लादेश के बंदरगाहों और एयरबेस का उपयोग करने की अनुमति मिल सकती है। रिपोर्ट्स के अनुसार, कुछ एयरबेस पर अमेरिकी रडार सिस्टम की मौजूदगी भी दर्ज की गई है, जिससे क्षेत्रीय निगरानी क्षमता बढ़ी है। यह घटनाक्रम चीन की “स्ट्रिंग ऑफ पर्ल्स” रणनीति के लिए चुनौती माना जा रहा है, जिसके तहत चीन म्यांमार, पाकिस्तान और श्रीलंका जैसे देशों में बंदरगाहों और रणनीतिक ढांचे का विकास कर रहा है ताकि अपने समुद्री व्यापार मार्ग सुरक्षित रख सके। बांग्लादेश, विशेषकर चटगांव और मातारबारी जैसे बंदरगाह, इस रणनीति में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते रहे हैं। विशेषज्ञों के अनुसार, अगर बांग्लादेश में अमेरिकी प्रभाव बढ़ता है तो यह चीन के “चीन-म्यांमार आर्थिक गलियारे (CMEC)” और क्षेत्रीय सप्लाई चेन पर असर डाल सकता है। वहीं अमेरिका इस क्षेत्र में अपनी उपस्थिति मजबूत कर चीन के प्रभाव को संतुलित करने की कोशिश कर रहा है। इसी बीच बांग्लादेश की विदेश नीति भी संतुलन की कोशिश में दिखाई दे रही है, जहां एक ओर वह अमेरिका के साथ सहयोग बढ़ा रहा है, वहीं दूसरी ओर चीन के साथ व्यापारिक संबंध भी मजबूत बनाए हुए है। दोनों देशों के बीच अरबों डॉलर का व्यापार और सैन्य सहयोग इसे और जटिल बनाता है। कुल मिलाकर, बांग्लादेश अब केवल एक उभरती अर्थव्यवस्था नहीं बल्कि इंडो-पैसिफिक की एक महत्वपूर्ण जियोपॉलिटिकल धुरी बन चुका है, जहां अमेरिका और चीन के बीच रणनीतिक प्रतिस्पर्धा आने वाले समय में और तेज होने की संभावना है।
पटाखा फैक्ट्री हादसा: सिस्टम पर उठे सवाल, अधूरी यूनिट को कैसे मिला लाइसेंस?

देवास । देवास जिले की पटाखा फैक्ट्री में हुए विस्फोट ने एक बार फिर औद्योगिक सुरक्षा व्यवस्था की पोल खोल दी है। इस दर्दनाक हादसे में 5 मजदूरों की मौत हो चुकी है, जबकि 20 से अधिक लोग घायल हैं। कई मजदूर 90 से 99 प्रतिशत तक झुलस चुके हैं और अस्पतालों में जिंदगी और मौत के बीच संघर्ष कर रहे हैं। यह हादसा केवल एक फैक्ट्री ब्लास्ट नहीं, बल्कि एक बड़े सिस्टम की चुप्पी, लापरवाही और निगरानी तंत्र की विफलता का प्रतीक बन गया है। लाइसेंस और नियमों के उल्लंघन पर सवालजानकारी के अनुसार फैक्ट्री को सीमित मात्रा में बारूद रखने और उपयोग करने का लाइसेंस दिया गया था, लेकिन मौके पर कथित रूप से नियमों से अधिक मात्रा में विस्फोटक सामग्री पाई गई। सबसे बड़ा सवाल यह है कि यदि इतनी बड़ी मात्रा में बारूद जमा किया जा रहा था, तो क्या संबंधित विभागों को इसकी जानकारी नहीं थी? या फिर जानकारी होने के बावजूद कार्रवाई नहीं की गई? 6 विभागों की जिम्मेदारी पर उठे सवालइस मामले में प्रशासनिक तंत्र के कई विभाग सीधे सवालों के घेरे में हैं- राजस्व विभाग: फैक्ट्री की जमीन, सुरक्षा मानक और अनुमति की जांचपुलिस विभाग: सुरक्षा और कानून-व्यवस्था की निगरानीश्रम विभाग: मजदूरों की सुरक्षा और कार्य परिस्थितियों की जांचबिजली विभाग: तकनीकी सुरक्षा और वायरिंग की जांचप्रदूषण नियंत्रण बोर्ड: पर्यावरण और रासायनिक जोखिम की निगरानीPWD/स्थानीय प्रशासन: भवन संरचना और आपातकालीन निकासी व्यवस्थाइन सभी विभागों की संयुक्त जिम्मेदारी के बावजूद किसी स्तर पर प्रभावी निरीक्षण न होने के आरोप लग रहे हैं। राजनीतिक संरक्षण का आरोप भी चर्चा मेंस्थानीय स्तर पर फैक्ट्री संचालक और राजनीतिक हस्तियों के बीच संबंधों को लेकर भी चर्चा तेज है। सोशल मीडिया और स्थानीय सूत्रों के अनुसार, प्रभावशाली संपर्कों के कारण लंबे समय तक कार्रवाई नहीं हुई। हालांकि इस दावे की आधिकारिक पुष्टि अभी नहीं हुई है। निरीक्षण व्यवस्था पर गंभीर सवालफैक्ट्री मात्र कुछ महीने पहले ही शुरू हुई थी, लेकिन इतने कम समय में बड़े पैमाने पर विस्फोटक सामग्री का संग्रह कैसे हुआ यह जांच का मुख्य विषय है। सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या किसी भी विभाग ने पिछले महीनों में मौके पर जाकर वास्तविक स्थिति की जांच की थी या केवल कागजों पर ही रिपोर्ट तैयार होती रही? हादसे के बाद शुरू हुई कार्रवाईघटना के बाद प्रशासन ने जांच टीम गठित कर दी है और फैक्ट्री संचालक के खिलाफ कार्रवाई की प्रक्रिया शुरू की गई है। मृतकों के परिजनों को मुआवजे की घोषणा भी की गई है, लेकिन सवाल यह है कि क्या केवल मुआवजा ही पर्याप्त है? सिर्फ हादसा नहीं, सिस्टम पर सवालदेवास का यह विस्फोट अब केवल एक औद्योगिक दुर्घटना नहीं रहा, बल्कि यह प्रशासनिक निगरानी तंत्र की गंभीर विफलता का उदाहरण बन गया है। सवाल यह है कि क्या इस बार भी जांच केवल छोटे स्तर तक सीमित रहेगी, या जिम्मेदार अधिकारियों और पूरे सिस्टम की जवाबदेही तय होगी?
1500 किमी दूर से आए मजदूरों की हालत गंभीर, देवास हादसे में बढ़ा मौत का खतरा

देवास । देवास जिले के टोंककलां क्षेत्र में पटाखा फैक्ट्री में हुए भीषण विस्फोट ने पूरे इलाके को दहला दिया है। इस हादसे में जहां पांच मजदूरों की मौत हो चुकी है, वहीं करीब 25 लोग घायल हुए हैं। इनमें तीन मजदूरों की हालत बेहद चिंताजनक है, जो 99 प्रतिशत तक झुलस चुके हैं और जिंदगी-मौत की जंग लड़ रहे हैं। घायलों का इलाज देवास के अमलतास हॉस्पिटल की बर्न यूनिट में किया जा रहा है, जहां डॉक्टर लगातार उनकी स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं। डॉक्टरों ने बताया- शरीर के कई अंग फेल होने का खतरअस्पताल के विशेषज्ञों के अनुसार इतने गंभीर बर्न केस में शरीर की स्थिति तेजी से बिगड़ती है। डॉक्टरों ने बताया कि 99% तक जलने की स्थिति में मरीज के फेफड़े सबसे पहले प्रभावित होते हैं, जिससे सांस लेने में गंभीर दिक्कत होती है। डॉक्टरों के अनुसार विस्फोट में उठे धुएं और गर्म हवा के कारण लंग इंजरी की संभावना बढ़ जाती है। इससे शरीर में ऑक्सीजन की कमी, खून की संरचना में बदलाव और “हेमोलिसिस” जैसी गंभीर स्थिति पैदा हो सकती है, जिसमें रक्त कोशिकाएं नष्ट होने लगती हैं और खून पानी जैसा हो जाता है। इसके चलते किडनी फेलियर, लिवर डैमेज और शॉक में जाने का खतरा कई गुना बढ़ जाता है। डॉक्टरों का कहना है कि यह ऐसी स्थिति है जिसमें मरीज की जान बचाना बेहद चुनौतीपूर्ण हो जाता है। त्वचा के साथ सांस नली भी प्रभावितविशेषज्ञों ने बताया कि ऐसे मामलों में केवल त्वचा ही नहीं, बल्कि श्वसन तंत्र भी गंभीर रूप से प्रभावित होता है। मरीजों को सांस लेने में भारी कठिनाई होती है और उन्हें लगातार ऑक्सीजन सपोर्ट पर रखा जाता है। शरीर में पानी की कमी, नसों की कार्यक्षमता में गिरावट और संक्रमण का खतरा भी तेजी से बढ़ता है। मरीजों को हाइपोथर्मिया और हीट स्ट्रोक से बचाने के लिए विशेष सावधानी बरती जा रही है। बिहार से आए थे मजदूर, परिवारों में मातमघायल मजदूरों में कई लोग बिहार से करीब 1500 किलोमीटर दूर काम करने आए थे। हादसे के बाद उनके परिवारों में चिंता और सदमे का माहौल है। कुछ मजदूरों की हालत इतनी गंभीर है कि डॉक्टरों ने उनके जीवित बचने की संभावना को बेहद कम बताया है। घटना की जांच जारीजिला प्रशासन ने हादसे की जांच के लिए विशेष टीम गठित की है, जिसमें बिजली विभाग, प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड और औद्योगिक सुरक्षा विभाग के अधिकारी शामिल हैं। टीम फैक्ट्री में सुरक्षा मानकों, विस्फोट के कारणों और नियमों के उल्लंघन की जांच कर रही है। लापता मजदूरों की तलाश भी जारीघायलों के बयान के अनुसार दो मजदूर हादसे के बाद से लापता हैं। प्रशासन उनकी तलाश में जुटा हुआ है। वहीं, कई मजदूरों को प्राथमिक उपचार के बाद उनके गृह राज्य भेजा गया है। देवास का यह हादसा एक बार फिर औद्योगिक सुरक्षा और नियमों की अनदेखी पर गंभीर सवाल खड़े करता है। 99% तक झुलसे मजदूरों की जिंदगी के लिए डॉक्टरों की जंग जारी है, लेकिन उनकी स्थिति बेहद नाजुक बनी हुई है।
शाजापुर में बिजली कटौती का अलर्ट, कल 3 घंटे बाधित रहेगी सप्लाई

शाजापुर । शाजापुर शहर के निवासियों को रविवार, 17 मई 2026 को तीन घंटे की बिजली कटौती का सामना करना पड़ेगा। विद्युत विभाग ने जानकारी दी है कि सुबह 7 बजे से 10 बजे तक लालघाटी उपकेंद्र से जुड़े कई इलाकों में बिजली आपूर्ति पूरी तरह बाधित रहेगी। यह कटौती आवश्यक तकनीकी रखरखाव और लाइन सुधार कार्य के चलते की जा रही है। विभाग के अनुसार, 33 केवी धनलक्ष्मी लाइन और न्यू कलेक्टर फीडर पर 11 केवी कंडक्टर बदलने एवं सुधार कार्य किया जाएगा। इस दौरान सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए 11 केवी जेल फीडर और 11 केवी इमरजेंसी फीडर को भी अस्थायी रूप से बंद रखा जाएगा। इन प्रमुख इलाकों में रहेगा असरबिजली कटौती के दौरान शहर के कई महत्वपूर्ण क्षेत्र प्रभावित रहेंगे। इनमें हाउसिंग बोर्ड कॉलोनी, सीसीटीवी कंट्रोल रूम, जिला जेल, डाइट कॉलेज, कलेक्ट्रेट सर्कल ऑफिस, मजिस्ट्रेट निवास, बापू की कुटिया, स्टेडियम, राजराजेश्वरी मंदिर, विजय नगर, ज्योति नगर, बस स्टैंड और ट्रॉमा सेंटर सहित आसपास के क्षेत्र शामिल हैं। इन इलाकों में सुबह के समय सामान्य जनजीवन, कार्यालय कार्य और घरेलू गतिविधियां प्रभावित हो सकती हैं। विशेषकर सरकारी कार्यालयों और अस्पताल क्षेत्र में पहले से तैयारी करने की सलाह दी गई है। विद्युत विभाग की अपील: पहले से कर लें जरूरी कामविद्युत विभाग ने उपभोक्ताओं से सहयोग की अपील करते हुए कहा है कि लोग बिजली कटौती के समय को ध्यान में रखते हुए अपने आवश्यक कार्य पहले ही निपटा लें। विभाग ने यह भी स्पष्ट किया है कि यदि मेंटेनेंस कार्य समय से पहले पूरा हो जाता है, तो बिजली आपूर्ति निर्धारित समय से पहले भी बहाल की जा सकती है। स्थानीय प्रशासन ने भी नागरिकों से अपील की है कि वे धैर्य बनाए रखें और इस तकनीकी कार्य में सहयोग करें, ताकि भविष्य में बेहतर और निर्बाध बिजली आपूर्ति सुनिश्चित की जा सके। तकनीकी सुधार से भविष्य में मिलेगी राहतविद्युत विभाग का कहना है कि यह मेंटेनेंस कार्य आने वाले दिनों में ट्रिपिंग, वोल्टेज उतार-चढ़ाव और लाइन फॉल्ट जैसी समस्याओं को कम करेगा। इससे शाजापुर शहर को अधिक स्थिर और मजबूत बिजली आपूर्ति प्रणाली का लाभ मिलेगा।