रीवा सड़क हादसा: खड़े ट्रक से टकराकर दो युवकों की मौके पर मौत

रीवा। मध्य प्रदेश के रीवा जिले में शुक्रवार देर रात एक दर्दनाक सड़क हादसा हो गया, जिसमें दो युवकों की मौके पर ही मौत हो गई। यह हादसा उस समय हुआ जब रीवा से बैकुंठपुर जा रही एक तेज रफ्तार बाइक सगरा के पास सड़क किनारे खड़े ट्रक से जा टकराई। टक्कर इतनी जबरदस्त थी कि बाइक पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो गई और दोनों युवकों ने मौके पर ही दम तोड़ दिया। मृतकों की पहचान, गांव में पसरा मातमहादसे में जान गंवाने वाले युवकों की पहचान पंकज साकेत (निवासी बैकुंठपुर) और आकाश साकेत (निवासी जुइला, रायपुर कर्चुलियान) के रूप में हुई है। जानकारी के अनुसार, दोनों युवक किसी जरूरी काम से बैकुंठपुर जा रहे थे, तभी यह हादसा हो गया। घटना की खबर मिलते ही परिजनों में कोहराम मच गया और पूरे गांव में शोक का माहौल फैल गया। पुलिस ने शुरू की जांच, वाहन जब्तघटना की सूचना मिलते ही स्थानीय लोग मौके पर पहुंचे और पुलिस को जानकारी दी। पुलिस ने मौके पर पहुंचकर शवों को कब्जे में लिया और पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया। साथ ही दुर्घटनाग्रस्त बाइक और ट्रक को भी जब्त कर लिया गया है। पुलिस मामले की जांच कर रही है। तेज रफ्तार और अंधेरे पर शक, जांच जारीप्रारंभिक जांच में आशंका जताई जा रही है कि हादसा तेज रफ्तार या सड़क पर पर्याप्त रोशनी न होने के कारण हुआ होगा। हालांकि पुलिस का कहना है कि वास्तविक कारण जांच के बाद ही स्पष्ट होगा। सड़क सुरक्षा पर फिर उठे सवालनीय लोगों ने इस हादसे के बाद सड़क किनारे खड़े भारी वाहनों पर कार्रवाई और हाईवे पर सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने की मांग की है। उनका कहना है कि ऐसे हादसे लगातार हो रहे हैं, लेकिन सुधार के प्रयास नाकाफी हैं। रीवा का यह हादसा एक बार फिर सड़क सुरक्षा की लापरवाही और तेज रफ्तार के खतरों को उजागर करता है। दो युवकों की असमय मौत ने पूरे इलाके को गमगीन कर दिया है।
अजगरहा में बिजली समस्या को लेकर बवाल, सड़क जाम से यातायात प्रभावित

रीवा। मध्य प्रदेश के रीवा शहर के अजगरहा इलाके में शुक्रवार देर रात बिजली की लगातार समस्या को लेकर लोगों का गुस्सा फूट पड़ा। कम वोल्टेज और बार-बार बिजली कटौती से परेशान रहवासियों ने मुख्य सड़क पर जाम लगाकर विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया, जिससे कुछ समय के लिए यातायात पूरी तरह बाधित हो गया। लंबे समय से जारी समस्या, शिकायतों के बावजूद समाधान नहींप्रदर्शन कर रहे लोगों का कहना है कि इलाके में लंबे समय से बिजली आपूर्ति की समस्या बनी हुई है। बार-बार बिजली गुल होने और कम वोल्टेज की वजह से घरेलू जीवन प्रभावित हो रहा है। स्थानीय लोगों ने आरोप लगाया कि कई बार शिकायत करने के बावजूद जिम्मेदार विभाग ने कोई ठोस कदम नहीं उठाया। मौके पर पहुंची पुलिस, प्रदर्शनकारियों से हुई तीखी बहससूचना मिलने के बाद विश्वविद्यालय थाना पुलिस मौके पर पहुंची और जाम हटवाने की कोशिश की। इस दौरान पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच तीखी बहस भी देखने को मिली। काफी देर तक चले तनाव के बाद पुलिस ने सख्ती दिखाते हुए सड़क खाली करवाई और यातायात बहाल कराया। स्थानीय लोगों का आरोप: समस्याओं पर नहीं होती सुनवाईप्रदर्शन के दौरान स्थानीय लोगों ने प्रशासन पर अनदेखी का आरोप लगाया। एक महिला ने कहा कि जब आम लोग अपनी समस्या लेकर सड़क पर आते हैं तो पुलिस तुरंत सख्ती दिखाती है, लेकिन असली समस्या पर कोई ध्यान नहीं देता। स्थानीय निवासियों की नाराजगी बढ़ीस्थानीय निवासी रमेश कुशवाहा ने बताया कि कई दिनों से बिजली बार-बार जा रही है, जिससे बच्चे और बुजुर्ग परेशान हैं। वहीं सीमा पटेल ने कहा कि मजबूरी में सड़क पर उतरना पड़ा क्योंकि समस्या का कोई स्थायी समाधान नहीं किया जा रहा। आगे आंदोलन की चेतावनीप्रदर्शन समाप्त होने के बाद भी इलाके में नाराजगी बनी हुई है। लोगों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द बिजली व्यवस्था में सुधार नहीं हुआ तो वे फिर से आंदोलन करने को मजबूर होंगे। रीवा के अजगरहा में हुआ यह विरोध प्रदर्शन बिजली व्यवस्था की खामियों को उजागर करता है। स्थानीय लोगों की नाराजगी यह संकेत देती है कि अगर जल्द सुधार नहीं हुआ तो हालात और गंभीर हो सकते हैं।
महाकाल की भस्म आरती में अद्भुत नजारा, शनिवार को उमड़ा श्रद्धालुओं का सैलाब

उज्जैन। विश्व प्रसिद्ध श्री महाकालेश्वर मंदिर में शनिवार तड़के भस्म आरती के दौरान अलौकिक और दिव्य वातावरण देखने को मिला। सुबह चार बजे मंदिर के पट खुलते ही पंडे-पुजारियों ने गर्भगृह में विराजित सभी देवी-देवताओं का विधिवत पूजन किया और धार्मिक अनुष्ठानों की शुरुआत हुई। पंचामृत अभिषेक और वैदिक विधि से पूजनइसके बाद भगवान महाकाल का जलाभिषेक किया गया और दूध, दही, घी, शक्कर तथा फलों के रस से बने पंचामृत से विशेष अभिषेक संपन्न हुआ। प्रथम घंटाल बजाकर “हरि ओम” के उच्चारण के साथ आरती की शुरुआत हुई, जिससे पूरा मंदिर परिसर भक्तिमय हो उठा। रजत मुकुट और दिव्य श्रृंगार से सजा बाबा महाकाल का स्वरूभगवान महाकाल को रजत ॐ, बिल्वपत्र मुकुट, रुद्राक्ष माला, मुण्डमाल और सुगंधित पुष्पों से भव्य रूप से श्रृंगारित किया गया। मस्तक पर त्रिपुण्ड, त्रिशूल, डमरू और शेषनाग स्वरूप रजत मुकुट ने बाबा के स्वरूप को अत्यंत दिव्य बना दिया। श्रृंगार के बाद बाबा का अलौकिक रूप भक्तों को मंत्रमुग्ध करता रहा और पूरा वातावरण आध्यात्मिक ऊर्जा से भर गया। चिता भस्म अर्पण से संपन्न हुई भस्म आरतीआरती के अंतिम चरण में भगवान महाकाल को चिता भस्म अर्पित की गई। महा निर्वाणी अखाड़े की ओर से यह भस्म अर्पित की गई। मान्यता है कि भस्म अर्पण के बाद भगवान महाकाल निराकार से साकार रूप में भक्तों को दर्शन देते हैं। इसके साथ ही कपूर आरती के बाद भस्म आरती विधिवत संपन्न हुई। श्रद्धालुओं की भारी भीड़, गूंजे जयकारेभस्म आरती के दौरान बड़ी संख्या में श्रद्धालु मंदिर में मौजूद रहे और बाबा महाकाल के दर्शन कर आशीर्वाद प्राप्त किया। पूरे परिसर में “जय श्री महाकाल” के जयघोष गूंजते रहे, जिससे वातावरण पूरी तरह भक्तिमय बन गया। उज्जैन की यह भस्म आरती केवल एक धार्मिक अनुष्ठान नहीं बल्कि आस्था, परंपरा और दिव्यता का अद्भुत संगम है। पंचामृत अभिषेक से लेकर चिता भस्म तक की यह प्रक्रिया भक्तों को आध्यात्मिक ऊर्जा और विश्वास से भर देती है।
उज्जैन में टीम इंडिया की जीत का जश्न, नंदी के कान में मांगी मनोकामना

उज्जैन। विश्व प्रसिद्ध श्री महाकालेश्वर मंदिर में शनिवार सुबह आस्था और खेल का अनोखा संगम देखने को मिला, जब भारतीय महिला क्रिकेट टीम ने बाबा महाकाल के दरबार में हाजिरी लगाई। टीम की कप्तान हरमनप्रीत कौर और कोच सहित पूरी टीम तड़के करीब 3 बजे मंदिर पहुंची और भस्म आरती में शामिल होकर भगवान महाकाल का आशीर्वाद लिया। भस्म आरती में दो घंटे तक डूबी रही टीम, श्रद्धा और भावनाओं का दृश्यमहाकालेश्वर मंदिर में आयोजित भस्म आरती के दौरान खिलाड़ी पूरी तरह भक्ति भाव में नजर आईं। करीब दो घंटे तक टीम आरती में शामिल रही और मंत्रोच्चार के बीच भगवान महाकाल के दर्शन किए। इस दौरान मंदिर परिसर में आध्यात्मिक वातावरण बना रहा। नंदी हॉल में विशेष पूजा, नंदी के कान में कही मनोकामनाआरती के बाद कप्तान हरमनप्रीत कौर, कोच और अन्य खिलाड़ियों ने नंदी हॉल में पहुंचकर पूजन-अभिषेक किया। परंपरा के अनुसार खिलाड़ियों ने नंदी महाराज के कान में अपनी मनोकामना भी कही और इसके बाद चांदी द्वार से भगवान महाकाल को जल अर्पित कर आशीर्वाद प्राप्त किया। टीम का भव्य स्वागत, मंदिर समिति ने किया सम्मानमंदिर में मौजूद श्री महाकालेश्वर मंदिर प्रबंध समिति ने भारतीय महिला क्रिकेट टीम का स्वागत और सम्मान किया। इस दौरान टीम के कई प्रमुख खिलाड़ी और सपोर्ट स्टाफ भी मौजूद रहे, जिन्होंने धार्मिक अनुष्ठान में भाग लिया। आस्था और खेल का संगम बना महाकाल धामइस अवसर पर महाकाल मंदिर में आस्था और खेल का अद्भुत संगम देखने को मिला। खिलाड़ियों की मौजूदगी ने मंदिर परिसर को और अधिक विशेष बना दिया, जहां भक्ति और श्रद्धा का वातावरण पूरे समय बना रहा। महाकालेश्वर धाम में भारतीय महिला क्रिकेट टीम की यह उपस्थिति न केवल धार्मिक आस्था का प्रतीक रही, बल्कि यह भी दिखाती है कि खेल जगत के दिग्गज भी आध्यात्मिक ऊर्जा से प्रेरणा लेते हैं। बाबा महाकाल के दरबार में यह क्षण हमेशा यादगार बन गया।
त्रिवेणी शनि मंदिर में श्रद्धालुओं का सैलाब, सुबह से शिप्रा स्नान जारी

उज्जैन। मध्य प्रदेश के धार्मिक नगरी उज्जैन में शनिवार को आस्था का अद्भुत दृश्य देखने को मिला, जब 13 साल बाद शनि जयंती और शनिचरी अमावस्या का विशेष महासंयोग बना। इस अवसर पर त्रिवेणी स्थित प्राचीन शनि मंदिर में सुबह से ही श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ पड़ी। देशभर से आए भक्तों ने शिप्रा नदी में स्नान कर शनिदेव के दर्शन किए और तेल, काले तिल, नारियल तथा काले वस्त्र अर्पित कर पूजा-अर्चना की।शिप्रा स्नान के लिए विशेष इंतजाम, फव्वारों से स्नान कर रहे श्रद्धालुश्रद्धालुओं की भारी भीड़ को देखते हुए प्रशासन ने शिप्रा नदी के त्रिवेणी घाट पर विशेष व्यवस्था की है। नदी में जल स्तर कम होने के कारण नर्मदा जल से फव्वारे लगाए गए हैं, जिससे श्रद्धालु स्नान कर सकें।सुबह से ही भक्त स्नान कर शुद्धि प्राप्त कर मंदिर पहुंच रहे हैं और शनिदेव के दर्शन कर रहे हैं। सुरक्षा व्यवस्था के लिए पुलिस, होमगार्ड और SDRF की टीमें तैनात की गई हैं।मंदिर में विशेष अनुष्ठान, 24 घंटे तेल अभिषेक जारीत्रिवेणी शनि मंदिर में सुबह तड़के ही पंचामृत अभिषेक और विशेष पूजा के साथ दिन की शुरुआत हुई। मंदिर को फूलों और विद्युत सज्जा से भव्य रूप दिया गया है। महंत राकेश बैरागी के अनुसार गर्भगृह में आम श्रद्धालुओं की एंट्री बंद रखी गई है, जबकि शनि प्रतिमा पर 24 घंटे तक तिल के तेल का अभिषेक जारी रहेगा।श्रद्धालुओं की आस्था, दान और परंपराओं का पालनश्रद्धालु शिप्रा स्नान के बाद पुराने वस्त्र और जूते-चप्पल मंदिर परिसर में दान कर रहे हैं। भक्त अपने साथ लाए काले तिल, नारियल और तेल शनिदेव को अर्पित कर रहे हैं। मान्यता है कि इस दिन पूजा करने से शनि दोष, साढ़ेसाती और ढैय्या के प्रभाव से मुक्ति मिलती है और जीवन में सकारात्मकता आती है।धार्मिक अनुष्ठानों और उपायों का महत्वपंडितों के अनुसार शनि जयंती के दिन पीपल वृक्ष पर जल अर्पण, काले तिल चढ़ाना और तेल का दीपक जलाना विशेष फलदायी माना जाता है। शनि स्तोत्र, हनुमान चालीसा और सुंदरकांड का पाठ भी शनि दोष शांति के लिए लाभकारी बताया गया है। इसके साथ ही जरूरतमंदों को अन्न, वस्त्र और दान देना अत्यंत शुभ माना जाता है।उज्जैन में बना यह दुर्लभ संयोग न केवल धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण रहा, बल्कि आस्था और परंपरा के अद्भुत संगम का प्रतीक भी बन गया। त्रिवेणी शनि मंदिर में उमड़ी भीड़ ने एक बार फिर साबित किया कि शनिदेव के प्रति श्रद्धा जनमानस में गहराई से स्थापित है।
हाईकोर्ट का बड़ा आदेश: जबलपुर में अवैध शिकार और खनन पर जताई चिंता

जबलपुर। मध्य प्रदेश के जबलपुर में नर्मदा नदी और उसके आसपास के क्षेत्रों में हो रहे अवैध रेत खनन और राज्य मछली महाशीर के अवैध शिकार को लेकर मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ने सख्त रुख अपनाया है। कोर्ट ने इन गतिविधियों पर तत्काल रोक लगाने के निर्देश देते हुए संबंधित अधिकारियों से जवाब तलब किया है। चीफ जस्टिस संजीव सचदेवा और जस्टिस विनय सराफ की डिवीजन बेंच ने इस मामले में मछुआरा कल्याण एवं मत्स्य विकास विभाग, कलेक्टर, एसपी, ईओडब्ल्यू और जिला खनिज अधिकारी सहित कई विभागों को नोटिस जारी किए हैं। जनहित याचिका से सामने आया गंभीर मामलायह मामला जबलपुर निवासी अभिषेक कुमार सिंह द्वारा दायर जनहित याचिका के बाद सामने आया। याचिकाकर्ता का आरोप है कि नर्मदा नदी के खिरहनी घाट क्षेत्र में बड़े पैमाने पर अवैध रेत खनन और महाशीर मछली का शिकार लगातार जारी है। अधिवक्ता अंशुमान सिंह ने कोर्ट में दलील दी कि महाशीर को वर्ष 2011 में मध्यप्रदेश की राज्य मछली का दर्जा दिया गया था, लेकिन इसके संरक्षण के लिए जमीनी स्तर पर पर्याप्त कदम नहीं उठाए गए हैं। ब्रीडिंग सीजन में भी जारी शिकार, विलुप्ति का खतरायाचिका में कहा गया है कि विशेष रूप से प्रजनन काल के दौरान महाशीर मछली का शिकार पूरी तरह प्रतिबंधित होना चाहिए, लेकिन इसके बावजूद अवैध मत्स्याखेट जारी है। इसके कारण यह दुर्लभ प्रजाति धीरे-धीरे विलुप्ति की ओर बढ़ रही है। इसके साथ ही नर्मदा नदी में चल रहे अवैध रेत खनन को भी पर्यावरण और जलजीवों के लिए बड़ा खतरा बताया गया है। रेत खनन और धमकी के आरोप भी पहुंचे कोर्टयाचिकाकर्ता ने अदालत को बताया कि खिरहनी घाट पर पहले भी प्रशासन ने अवैध रेत भंडारण और मशीनें जब्त की थीं, लेकिन उसके बाद भी अवैध गतिविधियां नहीं रुकीं। आरोप है कि जब्त रेत को लेकर उपसरपंच को धमकाया गया और बाद में वह सामग्री चोरी कर ली गई। शिकायत दर्ज होने के बावजूद पुलिस और खनन विभाग की कार्रवाई को लेकर सवाल उठाए गए हैं। जैव विविधता संरक्षण पर बड़ा सवालहाईकोर्ट ने इस मामले को गंभीर मानते हुए कहा है कि नर्मदा नदी की जैव विविधता और पर्यावरण की सुरक्षा बेहद जरूरी है। महाशीर जैसी दुर्लभ प्रजाति का संरक्षण न केवल पर्यावरण बल्कि पारिस्थितिक संतुलन के लिए भी अहम है। जबलपुर हाईकोर्ट का यह फैसला नर्मदा नदी और उसकी जैव विविधता के संरक्षण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। अब देखना होगा कि प्रशासन इस पर कितनी गंभीरता से कार्रवाई करता है और अवैध गतिविधियों पर कितनी प्रभावी रोक लगती है।
जबलपुर में धर्मांतरण का आरोप, स्कूल पर नौकरी से निकालने का मामला

जबलपुर। मध्य प्रदेश के जबलपुर शहर में सेंट एलायसिस स्कूल को लेकर बड़ा विवाद सामने आया है। यहां काम कर रही महिला सफाई कर्मचारियों ने गंभीर आरोप लगाते हुए कहा है कि उन पर ईसाई धर्म अपनाने का दबाव बनाया गया और इनकार करने पर नौकरी से निकाल दिया गया। मामला सामने आने के बाद शहर में तनाव का माहौल बन गया है और पुलिस ने जांच शुरू कर दी है। नौकरी के बदले धर्म परिवर्तन का आरोप, महिलाओं ने लगाए गंभीर आरोपपीड़ित महिला कर्मचारियों का कहना है कि स्कूल प्रशासन की ओर से उन पर चर्च जाने और ईसाई धर्म अपनाने का दबाव बनाया गया। आरोप है कि कहा गया “अगर यहां काम करना है तो धर्म बदलना होगा, वरना नौकरी छोड़नी पड़ेगी। महिलाओं ने बताया कि दबाव मानने से इनकार करने पर उन्हें काम से हटा दिया गया। इसके बाद पीड़ित महिलाएं पुलिस के पास पहुंचीं और कार्रवाई की मांग की। 2024 से काम कर रही थीं महिलाएं, फादर बदलने के बाद बढ़ा दबावशिकायतकर्ता दीपा पटेल के अनुसार वह वर्ष 2024 से स्कूल में सफाई कर्मचारी के रूप में काम कर रही थीं और पहले स्थिति सामान्य थी। उनके अनुसार पहले फादर वाल्टर के समय कोई समस्या नहीं थी, लेकिन नए फादर सोमी जैकब के आने के बाद दबाव बढ़ गया। दीपा का आरोप है कि उन्हें और अन्य महिला कर्मचारियों को चर्च जाने के लिए कहा गया, और मना करने पर नौकरी से निकाल दिया गया। 12 साल की नौकरी, फिर अचानक निकाला गया: एक और आरोपएक अन्य कर्मचारी ने आरोप लगाया कि उसने स्कूल में 12 साल तक काम किया, लेकिन छोटी छुट्टी लेने के बाद उसे वापस काम पर नहीं आने दिया गया। आरोप है कि उनसे भी धर्म परिवर्तन की बात कही गई और विरोध करने पर नौकरी समाप्त कर दी गई। हिंदू संगठनों का विरोध, कार्रवाई की मांगमामले को लेकर हिंदू धर्म सेना समेत कई संगठनों ने विरोध जताया है। संगठन के नेताओं का कहना है कि शहर में कुछ स्कूलों में नौकरी के नाम पर धर्म परिवर्तन का दबाव बनाया जा रहा है। संगठन ने चेतावनी दी है कि यदि दोषियों पर कार्रवाई नहीं हुई तो बड़ा प्रदर्शन किया जाएगा। पुलिस जांच शुरू, स्कूल प्रशासन से नहीं मिला जवाबमामले की शिकायत पुलिस और एएसपी तक पहुंच चुकी है। एएसपी सूर्यकांत शर्मा ने बताया कि शिकायत में लगाए गए आरोपों की जांच विजय नगर थाना प्रभारी को सौंपी गई है। पुलिस का कहना है कि जांच के बाद ही आगे की कार्रवाई तय होगी। स्कूल प्रशासन की ओर से फादर सोमी जैकब का पक्ष जानने की कोशिश की गई, लेकिन कोई प्रतिक्रिया नहीं मिली। जबलपुर का यह मामला अब सामाजिक और कानूनी बहस का विषय बन गया है। जहां एक ओर पीड़ित कर्मचारी न्याय की मांग कर रही हैं, वहीं दूसरी ओर जांच के बाद ही सच्चाई सामने आने की बात कही जा रही है। फिलहाल मामला पुलिस जांच के दायरे में है।
जबलपुर में डिजिटल न्याय पर मंथन, CJI और कानून मंत्री समेत कई दिग्गज पहुंचे

जबलपुर। मध्य प्रदेश का जबलपुर शुक्रवार को देश की न्याय व्यवस्था के डिजिटल भविष्य का केंद्र बन गया, जहां ‘फ्रेगमेंटेशन टू फ्यूजन: एम्पॉवरिंग जस्टिस वाया यूनाइटेड डिजिटल प्लेटफॉर्म इंटीग्रेशन’ विषय पर उच्चस्तरीय सेमिनार आयोजित किया गया। इस कार्यक्रम में देश की न्यायपालिका, सरकार और कानून व्यवस्था से जुड़े शीर्ष प्रतिनिधियों की मौजूदगी ने इसे बेहद अहम बना दिया। कार्यक्रम में भारत के प्रधान न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत, मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव और केंद्रीय कानून मंत्री अर्जुन राम मेघवाल शामिल हुए। इसके साथ ही सुप्रीम कोर्ट के कई वरिष्ठ जजों और मध्य प्रदेश हाईकोर्ट के न्यायाधीशों ने भी भाग लिया। सुप्रीम कोर्ट के 9 जजों की मौजूदगी, हाईकोर्ट के न्यायाधीश भी शामिलसेमिनार में सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस पीएस नरसिम्हा, सतीश चंद्र शर्मा, पीबी वराले, एन. कोटेश्वर सिंह, आर. महादेवन, मनमोहन और आलोक आराधे सहित कई न्यायाधीश उपस्थित रहे। मध्य प्रदेश हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस संजीव सचदेवा सहित सभी न्यायाधीशों ने भी कार्यक्रम में हिस्सा लिया। यह उपस्थिति इस बात का संकेत है कि देश की न्याय व्यवस्था में तकनीक आधारित बदलाव को लेकर गंभीर चर्चा चल रही है। डिजिटल न्याय प्रणाली पर केंद्रित रहा सेमिनारइस सेमिनार का मुख्य उद्देश्य न्यायपालिका में तकनीक के उपयोग को बढ़ाना और सभी न्यायिक प्रक्रियाओं को एकीकृत डिजिटल प्लेटफॉर्म पर लाना रहा। इसमें ई-कोर्ट सिस्टम, डेटा इंटीग्रेशन, केस मैनेजमेंट और यूनिफाइड डिजिटल जस्टिस प्लेटफॉर्म जैसे विषयों पर विस्तार से चर्चा की गई। विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह की पहल न्याय प्रणाली को तेज, पारदर्शी और अधिक प्रभावी बनाने में मदद करेगी। सुरक्षा के कड़े इंतजाम, सीमित काफिला चर्चा मेंकार्यक्रम को देखते हुए जबलपुर में सुरक्षा के व्यापक इंतजाम किए गए। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव का काफिला भी सादगीपूर्ण रहा, जिसमें केवल छह वाहन शामिल थे। प्रशासन ने पूरे आयोजन को व्यवस्थित और सुरक्षित तरीके से संपन्न कराने के लिए विशेष तैयारी की थी। भविष्य की न्याय व्यवस्था की दिशा तय करने की कोशिशयह सेमिनार केवल एक औपचारिक कार्यक्रम नहीं बल्कि भारत की न्याय प्रणाली के भविष्य को डिजिटल रूप देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। विशेषज्ञों के अनुसार, इससे देश में न्यायिक प्रक्रियाओं की गति और पारदर्शिता दोनों में सुधार संभव है। जबलपुर का यह आयोजन न्यायपालिका और तकनीक के संगम का प्रतीक बनकर उभरा है। शीर्ष न्यायाधीशों और सरकार की एक साथ मौजूदगी ने यह संकेत दिया है कि आने वाले समय में भारत की न्याय व्यवस्था पूरी तरह डिजिटल रूपांतरण की ओर बढ़ सकती है।
ग्वालियर में जमीन विवाद पर फायरिंग, युवक को गोली मारकर बदमाश फरार

ग्वालियर। मध्य प्रदेश के ग्वालियर शहर में शनिवार को उस समय हड़कंप मच गया जब थाटीपुर थाना क्षेत्र के पीएमटी चौराहे पर एक युवक को बदमाशों ने घेरकर बेरहमी से पीट दिया और फिर उस पर गोलियां चला दीं। इस सनसनीखेज वारदात से पूरे इलाके में अफरा-तफरी मच गई और लोग दहशत में आ गए। घायल युवक की पहचान रामवीर गुर्जर के रूप में हुई है, जिसे स्थानीय लोगों की मदद से तुरंत अस्पताल पहुंचाया गया, जहां उसकी हालत गंभीर बनी हुई है। बाइक सवार बदमाशों ने पहले पीटा, फिर की फायरिंगप्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, रामवीर पीएमटी चौराहे के पास सड़क किनारे खड़ा था, तभी आधा दर्जन से अधिक बाइक सवार बदमाश वहां पहुंचे। उन्होंने पहले उसे घेरकर लाठी-डंडों से बेरहमी से पीटा और फिर अचानक फायरिंग शुरू कर दी। गोलियों के छर्रे लगने से युवक गंभीर रूप से घायल हो गया, जबकि मारपीट में उसके सिर में भी गहरी चोट आई है। घटना के बाद हमलावर मौके से फरार हो गए। जमीन विवाद से जुड़ा है मामला, पुरानी रंजिश की आशंकाप्रारंभिक जांच में सामने आया है कि यह हमला जमीन विवाद से जुड़ा हो सकता है। बताया जा रहा है कि रामवीर गुर्जर का अपने पड़ोसी पिंटू उर्फ उदय गुर्जर से प्लॉट को लेकर पुराना विवाद चल रहा था। करीब दो सप्ताह पहले भी दोनों पक्षों के बीच कहासुनी और तनाव की स्थिति बनी थी। पुलिस को शक है कि पुरानी रंजिश के चलते इस वारदात को अंजाम दिया गया। CCTV फुटेज से खुल सकते हैं राजघटना के बाद पुलिस ने मौके पर पहुंचकर जांच शुरू कर दी है। आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगाली जा रही है, जिसमें हमले की पूरी घटना कैद हुई है। फुटेज में साफ दिख रहा है कि कुछ लोग दौड़ते हुए आते हैं और सड़क किनारे खड़े युवक पर हमला कर देते हैं। इसके बाद मारपीट और फायरिंग की पुष्टि होती है। पुलिस की कार्रवाई, आरोपियों की तलाश तेजथाटीपुर थाना पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि आरोपियों की पहचान की जा रही है और उन्हें जल्द गिरफ्तार कर लिया जाएगा। घायल युवक का इलाज जारी है और डॉक्टर उसकी स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं। ग्वालियर में दिनदहाड़े हुई यह वारदात एक बार फिर शहर की कानून-व्यवस्था पर सवाल खड़े करती है। जमीन विवाद ने हिंसक रूप लेकर आम लोगों में दहशत फैला दी है। अब देखना होगा कि पुलिस कितनी जल्दी आरोपियों तक पहुंचती है।
वट सावित्री व्रत और अमावस्या का संयोग, ग्वालियर में शनि मंदिरों में विशेष पूजा

ग्वालियर। मध्य प्रदेश के ग्वालियर शहर में शनिवार को शनि जयंती के अवसर पर धार्मिक उत्साह चरम पर रहा। न्याय और कर्मफल के देवता भगवान शनिदेव की जयंती इस बार अमावस्या और वट सावित्री व्रत के दुर्लभ संयोग के साथ मनाई जा रही है, जिससे इसका धार्मिक महत्व और अधिक बढ़ गया है। सुबह से ही शहर के सभी प्रमुख शनि मंदिरों में श्रद्धालुओं की लंबी कतारें देखने को मिलीं। भक्तों ने काले तिल, सरसों का तेल और फूल चढ़ाकर शनिदेव से अपने परिवार में सुख-शांति और लंबी आयु की कामना की। नवग्रह मंदिर बना आस्था का केंद्रग्वालियर के बहोड़ापुर स्थित प्राचीन नवग्रह मंदिर में विशेष भीड़ देखने को मिली। यह लगभग 150 साल पुराना मंदिर शहर के सबसे प्राचीन धार्मिक स्थलों में से एक माना जाता है। मंदिर परिसर में श्रद्धालु शनि देव सहित सभी नवग्रहों की पूजा कर रहे हैं। मान्यता है कि यहां सच्चे मन से की गई प्रार्थना से शनि दोष, साढ़ेसाती और ढैय्या के प्रभाव में राहत मिलती है। श्रद्धालुओं का कहना है कि हर शनिवार यहां आने से मनोकामनाएं पूरी होती हैं और जीवन के कष्ट दूर होते हैं। तेल, और दान का विशेष महत्वशनि जयंती पर भक्तों ने विशेष रूप से सरसों का तेल और काले तिल अर्पित किए। ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार इस दिन दान-पुण्य का विशेष महत्व होता है। कंबल, अन्न, तिल और दक्षिणा का दान करने से जीवन में सकारात्मक परिणाम मिलने की मान्यता है। ज्योतिषाचार्य रोहित उपाध्याय के अनुसार शनिदेव को न्याय का देवता माना जाता है, जो व्यक्ति के कर्मों के अनुसार फल देते हैं। इस दिन पूजा और मंत्रोच्चारण से शनि दोष में राहत मिलती है और जीवन में बाधाएं कम होती हैं। वट सावित्री व्रत में महिलाओं की आस्थाइस अवसर पर महिलाओं ने वट सावित्री व्रत भी रखा, जो पति की लंबी आयु और सुखी दांपत्य जीवन के लिए किया जाता है। महिलाएं वट वृक्ष की पूजा कर देवी सावित्री और यमराज का स्मरण कर निर्जला व्रत रखती हैं। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार यह व्रत अत्यंत कठिन माना जाता है क्योंकि इसमें पूरे दिन जल और अन्न का त्याग किया जाता है। धार्मिक संयोग ने बढ़ाया महत्वशनि जयंती, अमावस्या और वट सावित्री व्रत का एक साथ पड़ना इस दिन को अत्यंत विशेष बना रहा है। इस दुर्लभ संयोग को लेकर श्रद्धालुओं में विशेष उत्साह देखा गया और मंदिरों में सुबह से ही पूजा-अर्चना का दौर जारी रहा। ग्वालियर में शनि जयंती का यह अवसर सिर्फ एक धार्मिक पर्व नहीं, बल्कि आस्था, परंपरा और विश्वास का संगम बन गया। मंदिरों में उमड़ी भीड़ ने एक बार फिर साबित किया कि शनिदेव के प्रति श्रद्धा लोगों के जीवन में गहराई से जुड़ी हुई है।