Dome Vs Turret Vs Bullet CCTV Camera: घर के किस हिस्से में कौन सा कैमरा लगाना चाहिए, खरीदने से पहले जानें सही जानकारी!

नई दिल्ली। अगर आप अपने घर की सुरक्षा के लिए CCTV कैमरा लगाने की योजना बना रहे हैं, तो सिर्फ कैमरा खरीद लेना काफी नहीं है। घर के हर हिस्से के लिए अलग प्रकार का कैमरा ज्यादा बेहतर काम करता है। सही कैमरा सही जगह लगाने से सुरक्षा कई गुना बढ़ जाती है। घर के अंदर के लिए Dome Camera सबसे बेहतरडोम CCTV कैमरा इनडोर सुरक्षा के लिए सबसे ज्यादा इस्तेमाल किया जाता है। इसका गोल और कॉम्पैक्ट डिज़ाइन इसे छत या दीवार में आसानी से फिट कर देता है, जिससे यह ज्यादा दिखाई भी नहीं देता। यह कैमरा कमरों, हॉल, गलियारों और ढके हुए गैरेज जैसे स्थानों के लिए उपयुक्त माना जाता है। इसका वाइड एंगल कवरेज पूरे कमरे को कवर करने में मदद करता है। आंगन और एंट्री पॉइंट के लिए Turret Camera सही विकल्पटरेट कैमरा, जिसे आईबॉल कैमरा भी कहा जाता है, आधुनिक घरों में काफी लोकप्रिय हो रहा है। यह खासतौर पर घर के आंगन, मुख्य गेट, ड्राइववे और साइड एंट्री जैसे क्षेत्रों के लिए उपयोग किया जाता है। इसकी सबसे बड़ी खासियत यह है कि यह साफ विज़न और बेहतर नाइट विज़न देता है, साथ ही रिफ्लेक्शन की समस्या भी कम होती है। लंबी दूरी की निगरानी के लिए Bullet Camera बेस्टबुलेट कैमरा लंबी दूरी की निगरानी के लिए डिजाइन किया गया है। इसका उपयोग आमतौर पर बड़े यार्ड, खुले मैदान, फार्म हाउस और सड़क की ओर फेसिंग एरिया में किया जाता है। इसका लंबा आकार और मजबूत डिजाइन दूर तक निगरानी करने में मदद करता है और बाहरी सुरक्षा के लिए यह एक प्रभावी विकल्प माना जाता है। घर की सुरक्षा को मजबूत बनाने के लिए कैमरे का सही चयन जरूरी है।घर के अंदर: Dome Camera आंगन और गेट: Turret Camera बड़े खुले एरिया: Bullet Camera सही जगह सही कैमरा लगाने से आपके घर की सुरक्षा व्यवस्था और भी मजबूत हो जाती है।
WiFi vs LiFi: इंटरनेट की दुनिया में नई क्रांति! जानिए WiFi और LiFi में क्या है बड़ा फर्क

नई दिल्ली। आज के डिजिटल दौर में इंटरनेट हमारी जिंदगी का अहम हिस्सा बन चुका है। घर, ऑफिस, स्कूल या मनोरंजन हर जगह तेज इंटरनेट की जरूरत पड़ती है। अब तक ज्यादातर लोग WiFi का इस्तेमाल करते आए हैं, लेकिन अब LiFi नाम की नई टेक्नोलॉजी तेजी से चर्चा में है। दोनों तकनीकें वायरलेस इंटरनेट देती हैं, लेकिन इनके काम करने का तरीका पूरी तरह अलग है। WiFi रेडियो वेव्स यानी रेडियो सिग्नल के जरिए डेटा ट्रांसफर करता है। यही वजह है कि इसका नेटवर्क दीवारों के पार भी पहुंच जाता है और पूरे घर या ऑफिस में इंटरनेट आसानी से इस्तेमाल किया जा सकता है। दूसरी तरफ LiFi यानी Light Fidelity इंटरनेट पहुंचाने के लिए LED लाइट का इस्तेमाल करता है। इसमें बल्ब बेहद तेजी से ऑन-ऑफ होकर डेटा ट्रांसफर करता है, जिसे इंसानी आंखें पहचान नहीं पातीं। LiFi को इंटरनेट की अगली पीढ़ी की तकनीक माना जा रहा है क्योंकि इसकी स्पीड WiFi से कई गुना ज्यादा हो सकती है। साथ ही यह ज्यादा सुरक्षित भी माना जाता है, क्योंकि इसका सिग्नल कमरे की रोशनी तक सीमित रहता है और बाहर आसानी से नहीं पहुंचता। हालांकि इसकी सबसे बड़ी चुनौती यही है कि जहां रोशनी नहीं पहुंचेगी, वहां इंटरनेट भी काम नहीं करेगा। WiFi जहां घरों, दुकानों और ऑफिसों के लिए सबसे बेहतर विकल्प माना जाता है, वहीं LiFi का इस्तेमाल अस्पतालों, रिसर्च सेंटर और एयरक्राफ्ट जैसी जगहों पर ज्यादा फायदेमंद हो सकता है, जहां रेडियो सिग्नल से दिक्कतें पैदा हो सकती हैं। फिलहाल LiFi नई तकनीक है और इसका इस्तेमाल सीमित है, लेकिन आने वाले समय में WiFi और LiFi मिलकर इंटरनेट की दुनिया को और ज्यादा तेज, सुरक्षित और स्मार्ट बना सकते हैं।
PM मोदी की अपील के बाद बड़ा बदलाव, गैस चूल्हे की जगह इंडक्शन स्टोव को बढ़ावा देने की तैयारी

नई दिल्ली। पीएम मोदी की तेल और गैस बचाने की अपील के बाद केंद्र सरकार अब रसोई में बड़ा बदलाव लाने की तैयारी में है। सरकार की योजना देशभर में LPG की निर्भरता कम करने के लिए इंडक्शन कुकटॉप को बड़े स्तर पर बढ़ावा देने की है। इसके लिए एनर्जी एफिशिएंसी सर्विसेज लिमिटेड (EESL) ने नेशनल एफिशिएंट कुकिंग प्रोग्राम के तहत लाखों इंडक्शन स्टोव उपलब्ध कराने की रणनीति तैयार की है। रिपोर्ट्स के मुताबिक EESL ने पहले चरण में करीब 2 लाख इंडक्शन कुकटॉप के लिए टेंडर जारी किया है, जो पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर देखा जा रहा है। आगे चलकर सरकार की योजना इसे बड़े स्तर पर बढ़ाने की है, जिसमें 60 से 80 लाख यूनिट तक इंडक्शन स्टोव खरीद और वितरण का लक्ष्य रखा जा सकता है। इसका मकसद बिजली आधारित खाना पकाने को बढ़ावा देकर एलपीजी की खपत पर दबाव कम करना है। सरकार पहले भी LED बल्ब योजना के जरिए बड़े पैमाने पर ऊर्जा बचत अभियान चला चुकी है, जिससे कीमतें कम हुई थीं और इस्तेमाल बढ़ा था। अब उसी मॉडल को इंडक्शन कुकटॉप पर लागू करने की तैयारी है ताकि घरेलू कुकिंग सिस्टम धीरे-धीरे हाईटेक और इलेक्ट्रिक आधारित बन सके। हालांकि इस बदलाव की बड़ी वजह अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा बाजार में उतार-चढ़ाव और आयातित एलपीजी व कच्चे तेल पर बढ़ता दबाव भी माना जा रहा है। फिलहाल सरकार का फोकस ऊर्जा बचत, लागत में कमी और घरेलू स्तर पर इलेक्ट्रिक कुकिंग को मजबूत बनाने पर है। टैग:इंडक्शन चूल्हा,PM मोदी,सरकारी योजना,EESL,एलपीजी,ऊर्जा बचत,LED योजना,भारत सरकार,हाईटेक किचन,इलेक्ट्रिक कुकिंग
मॉस्को पर यूक्रेन का सबसे बड़ा ड्रोन हमला, 500+ ड्रोन से रूस दहला, तीन की मौत, एयर डिफेंस ने 556 ड्रोन गिराने का दावा

नई दिल्ली। रूस-यूक्रेन युद्ध में तनाव एक बार फिर चरम पर पहुंच गया है। यूक्रेन ने रूस की राजधानी मॉस्को और आसपास के इलाकों पर एक साथ 500 से ज्यादा ड्रोन से बड़ा और संगठित हमला किया, जिसे अब तक का सबसे बड़ा ड्रोन अटैक माना जा रहा है। रूस के रक्षा मंत्रालय ने दावा किया है कि उसकी एयर डिफेंस सिस्टम ने रातभर में कुल 556 यूक्रेनी ड्रोन को इंटरसेप्ट और नष्ट किया। वहीं मॉस्को के मेयर सर्गेई सोबयानिन के मुताबिक, शहर और आसपास के क्षेत्रों में 120 से ज्यादा ड्रोन को मार गिराया गया। इस हमले में मॉस्को के पास खिमकी और मितिशची इलाकों में ड्रोन गिरने से कम से कम 3 लोगों की मौत हो गई, जबकि 12 से ज्यादा लोग घायल हुए हैं। एक महिला की मौत घर पर ड्रोन गिरने से हुई, जबकि दो लोगों की जान निर्माणाधीन इमारत पर मलबा गिरने से गई। हमले के दौरान कई रिहायशी इमारतें क्षतिग्रस्त हुईं, कुछ जगहों पर आग लगने की घटनाएं भी सामने आईं। रूस के सबसे व्यस्त शेरेमेत्येवो एयरपोर्ट के पास भी ड्रोन के टुकड़े गिरे, हालांकि किसी बड़े नुकसान की पुष्टि नहीं हुई है। रूसी मीडिया TASS के अनुसार, यह हमला पिछले एक साल में मॉस्को पर सबसे बड़ा ड्रोन हमला माना जा रहा है। कई जगहों से आग और धुएं की तस्वीरें सामने आई हैं, जिससे राजधानी में दहशत का माहौल बन गया। उधर, यूक्रेनी वायुसेना ने दावा किया कि रूस ने भी जवाबी कार्रवाई में 287 ड्रोन दागे, जिनमें से अधिकांश को मार गिराया गया। इस हमले में यूक्रेन के Dnipropetrovsk और Zaporizhzhia क्षेत्रों में 9 लोग घायल हुए हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि यह हमला रूस की राजधानी तक युद्ध के दायरे के और गहराने का संकेत है और आने वाले दिनों में तनाव और बढ़ सकता है।
मोदी की नीदरलैंड यात्रा में ऐतिहासिक समझौता: 1000 साल पुराने चोल तमिल दस्तावेज भारत लौटेंगे, टाटा-ASML डील से सेमीकंडक्टर सहयोग को बढ़ावा

नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की नीदरलैंड यात्रा के दौरान भारत के इतिहास और तकनीकी क्षेत्र दोनों के लिए बड़े समझौते हुए। इस यात्रा में 11वीं सदी के चोल काल के तमिल ताम्र पट्टिकाओं को भारत वापस लाने पर सहमति बनी, वहीं टाटा इलेक्ट्रॉनिक्स और डच कंपनी ASML के बीच सेमीकंडक्टर क्षेत्र में महत्वपूर्ण साझेदारी भी हुई। 1000 साल पुराने चोल दस्तावेज भारत लौटेंगेभारत और नीदरलैंड के बीच हुए समझौते के तहत 11वीं सदी की चोल ताम्र पट्टिकाएं जल्द भारत लाई जाएंगी। यह संग्रह 21 बड़ी और 3 छोटी तांबे की प्लेटों का है, जिन पर अधिकतर लेख तमिल भाषा में लिखे गए हैं। प्रधानमंत्री मोदी ने बताया कि इन ऐतिहासिक दस्तावेजों में चोल साम्राज्य के महान शासक राजा राजेंद्र चोल प्रथम और उनके पिता राजा राजराजा चोल प्रथम से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारियाँ दर्ज हैं। ये पट्टिकाएं 19वीं सदी में यूरोपीय व्यापार और शोध के दौरान भारत से बाहर ले जाई गई थीं। टाटा इलेक्ट्रॉनिक्स और ASML के बीच बड़ा समझौतानीदरलैंड के द हेग में आयोजित कार्यक्रम के दौरान टाटा इलेक्ट्रॉनिक्स और डच कंपनी ASML के बीच सेमीकंडक्टर और चिप तकनीक के क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने का समझौता हुआ। ASML दुनिया की अग्रणी चिप मशीन निर्माता कंपनी है, जबकि टाटा इलेक्ट्रॉनिक्स भारत में सेमीकंडक्टर निर्माण में तेजी से निवेश कर रही है। यह डील भारत को चिप निर्माण क्षेत्र में मजबूत स्थिति दिलाने की दिशा में अहम मानी जा रही है। नीदरलैंड के राजा-रानी से मुलाकातपीएम मोदी ने नीदरलैंड के राजा विलेम-अलेक्जेंडर और रानी मैक्सिमा से शाही महल ‘पैलेस हाउस टेन बॉश’ में मुलाकात की। इस दौरान दोनों देशों के बीच शिक्षा, तकनीक, डिजिटल नवाचार, ग्रीन एनर्जी और वाटर मैनेजमेंट जैसे क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर चर्चा हुई। नीदरलैंड के राजा-रानी ने प्रधानमंत्री मोदी के सम्मान में रात्रिभोज का भी आयोजन किया। मोदी ने 2019 की उनकी भारत यात्रा को याद करते हुए दोनों देशों के संबंधों को और मजबूत बताया। भारत में निवेश का सुनहरा मौका: पीएम मोदीCEO राउंड टेबल बैठक में प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि भारत में निवेश और कारोबार का यह सबसे उपयुक्त समय है। उन्होंने बताया कि टैक्स और लेबर सुधारों के कारण भारत में मैन्युफैक्चरिंग अब अधिक आसान और सस्ती हो गई है। उन्होंने यह भी कहा कि भारत अब इलेक्ट्रॉनिक्स का बड़ा निर्यातक बन चुका है और ग्रीन हाइड्रोजन, टेक्नोलॉजी और इनोवेशन जैसे क्षेत्रों में तेजी से आगे बढ़ रहा है। 300 से अधिक डच कंपनियां भारत में सक्रियप्रधानमंत्री ने बताया कि पहले से ही 300 से अधिक डच कंपनियां भारत में काम कर रही हैं। भारत-यूरोपीय संघ फ्री ट्रेड एग्रीमेंट से दोनों देशों के बीच व्यापार और निवेश के नए अवसर खुलेंगे। स्वीडन के लिए रवाना हुए पीएम मोदीनीदरलैंड दौरे के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अब स्वीडन के गोथेनबर्ग शहर के लिए रवाना हो गए हैं, जहां वे 17 और 18 मई को द्विपक्षीय वार्ता और सहयोग को लेकर चर्चा करेंगे।मोदी की नीदरलैंड यात्रा न केवल भारत की ऐतिहासिक धरोहर को वापस लाने में सफल रही, बल्कि सेमीकंडक्टर और तकनीकी सहयोग के नए रास्ते भी खोल गई। यह दौरा भारत-नीदरलैंड संबंधों को एक नई ऊंचाई पर ले जाने वाला माना जा रहा है।
सुबह के नाश्ते की आसान और हेल्दी शुरुआत: झटपट बनने वाला वेजिटेबल उपमा, स्वाद और सेहत का परफेक्ट मेल

नई दिल्ली । लंबी यात्रा का नाम सुनते ही जहां कुछ लोगों के चेहरे पर उत्साह आ जाता है, वहीं कई लोगों के लिए सफर एक बड़ी परेशानी बन जाता है। कार, बस या पहाड़ी रास्तों पर सफर करते समय उल्टी, चक्कर, घबराहट और जी मिचलाने जैसी समस्याएं कई यात्रियों को परेशान करती हैं। इस स्थिति को सामान्य भाषा में मोशन सिकनेस कहा जाता है। यह समस्या न केवल यात्रा का आनंद खराब कर देती है, बल्कि कई बार लोगों को सफर करने से भी डर लगने लगता है। हालांकि, कुछ आसान घरेलू उपायों को अपनाकर इस परेशानी को काफी हद तक कम किया जा सकता है। मोशन सिकनेस आमतौर पर तब होती है जब आंखों और दिमाग के बीच तालमेल बिगड़ जाता है। चलते वाहन में शरीर एक तरह की गति महसूस करता है, जबकि दिमाग उसे अलग तरीके से समझता है। इसी कारण घबराहट, चक्कर और उल्टी जैसी दिक्कतें शुरू हो जाती हैं। लेकिन यदि सफर से पहले और दौरान कुछ छोटी-छोटी बातों का ध्यान रखा जाए, तो यात्रा काफी आरामदायक बन सकती है। अदरक को इस समस्या का सबसे प्रभावी घरेलू उपाय माना जाता है। इसमें मौजूद प्राकृतिक गुण पेट को शांत रखने में मदद करते हैं और जी मिचलाने की समस्या को कम करते हैं। सफर पर निकलने से पहले अदरक वाली चाय पीना या अदरक का छोटा टुकड़ा चबाना फायदेमंद साबित हो सकता है। कई लोग अदरक की टॉफी या कैंडी का इस्तेमाल भी करते हैं, जिससे यात्रा के दौरान राहत मिलती है। नींबू और काला नमक भी सफर के दौरान काफी लाभकारी माने जाते हैं। नींबू की खुशबू और उसका स्वाद पेट को आराम देता है। यात्रा के दौरान यदि जी मिचलाने लगे तो नींबू के टुकड़े पर थोड़ा काला नमक लगाकर चूसने से तुरंत राहत महसूस हो सकती है। यह तरीका खासतौर पर पहाड़ी रास्तों में बेहद कारगर माना जाता है। विशेषज्ञ यह भी सलाह देते हैं कि खाली पेट सफर करने से बचना चाहिए। कई लोग यह सोचकर बिना कुछ खाए यात्रा पर निकल जाते हैं कि इससे उल्टी नहीं होगी, लेकिन वास्तव में खाली पेट होने से परेशानी और बढ़ सकती है। सफर से पहले हल्का और आसानी से पचने वाला भोजन करना बेहतर माना जाता है। तला-भुना और अधिक मसालेदार भोजन से दूरी बनाना भी जरूरी है। सही सीट का चुनाव भी मोशन सिकनेस को कम करने में अहम भूमिका निभाता है। कार या बस में आगे की सीट पर बैठने से शरीर को कम झटके महसूस होते हैं। साथ ही बाहर के दृश्यों को देखने से दिमाग और आंखों के बीच बेहतर तालमेल बना रहता है, जिससे चक्कर और घबराहट कम होती है। सफर के दौरान लगातार मोबाइल देखने या किताब पढ़ने से बचना चाहिए, क्योंकि इससे परेशानी बढ़ सकती है। ताजी हवा लेना भी बेहद जरूरी है। बंद खिड़कियां, तेज गंध और घुटन भरा माहौल कई बार उल्टी की समस्या को बढ़ा देते हैं। ऐसे में वाहन की खिड़की थोड़ा खुला रखना या बीच-बीच में ताजी हवा लेना राहत पहुंचा सकता है। अगर किसी व्यक्ति को हर यात्रा में गंभीर मोशन सिकनेस की समस्या होती है, तो डॉक्टर की सलाह लेना जरूरी हो सकता है। कुछ मामलों में दवाओं की जरूरत भी पड़ सकती है। सही सावधानी और घरेलू उपायों के जरिए सफर को आरामदायक और आनंददायक बनाया जा सकता है।
जालंधर ब्लास्ट की जांच में नया मोड़, दूर से मोबाइल सिग्नल से ट्रिगर किया गया IED हमला

नई दिल्ली । जालंधर में बीएसएफ मुख्यालय के बाहर हुए धमाके की जांच जैसे-जैसे आगे बढ़ रही है, वैसे-वैसे इस मामले में अंतरराष्ट्रीय आतंकी नेटवर्क से जुड़े नए और गंभीर खुलासे सामने आ रहे हैं। शुरुआती जांच में यह संकेत मिला है कि इस विस्फोट के पीछे पाकिस्तान में बैठे एक आतंकी हैंडलर का हाथ हो सकता है, जिसने मोबाइल सिम आधारित आधुनिक तकनीक के जरिए इस घटना को अंजाम देने की योजना बनाई। इस पूरे मामले ने सुरक्षा एजेंसियों की चिंता को और बढ़ा दिया है, क्योंकि यह हमला पारंपरिक तरीकों से हटकर अत्याधुनिक रिमोट ट्रिगरिंग सिस्टम के इस्तेमाल की ओर इशारा करता है। जांच रिपोर्ट के अनुसार, विस्फोटक उपकरण को पहले से ही घटनास्थल के पास प्लांट किया गया था और उसमें एक सिम कार्ड को विशेष डिवाइस के साथ जोड़ा गया था। इसके बाद यह सिम नंबर पाकिस्तान में बैठे हैंडलर को भेजा गया, जिसने कॉल या मैसेज के जरिए डिवाइस को सक्रिय किया। जैसे ही उस सिग्नल को सिस्टम ने रिसीव किया, एक इलेक्ट्रॉनिक रिले सर्किट सक्रिय हुआ और डेटोनेटर के जरिए विस्फोट हो गया। इस पूरी प्रक्रिया में किसी व्यक्ति की मौके पर मौजूदगी या किसी तार से कनेक्शन की आवश्यकता नहीं होती, जिससे इस तकनीक को बेहद खतरनाक माना जा रहा है। सुरक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि यह तकनीक आतंकवाद के नए डिजिटल स्वरूप को दर्शाती है, जिसमें साधारण मोबाइल नेटवर्क का उपयोग विस्फोटक को नियंत्रित करने के लिए किया जाता है। इसमें जीएसएम मॉड्यूल, सिम कार्ड और इलेक्ट्रॉनिक सर्किट का उपयोग कर हजारों किलोमीटर दूर बैठे व्यक्ति द्वारा भी विस्फोट को ट्रिगर किया जा सकता है। यह तरीका न केवल आसान है बल्कि इसे ट्रेस करना भी पारंपरिक तरीकों की तुलना में अधिक चुनौतीपूर्ण होता है। इस घटना के बाद सुरक्षा एजेंसियों ने पूरे क्षेत्र में सतर्कता बढ़ा दी है और आसपास के इलाकों में लगे सीसीटीवी फुटेज, मोबाइल नेटवर्क डेटा और कॉल रिकॉर्ड्स की गहन जांच की जा रही है। जांच एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि विस्फोटक सामग्री को मौके तक कैसे पहुंचाया गया और इसमें किन स्थानीय सहयोगियों की भूमिका रही। विशेषज्ञों का यह भी कहना है कि इस तरह की घटनाएं सीमा पार से संचालित होने वाले आतंकी नेटवर्क की बदलती रणनीति को दर्शाती हैं, जहां अब तकनीक का इस्तेमाल हथियार के रूप में किया जा रहा है। यह हमला न केवल सुरक्षा व्यवस्था के लिए एक चेतावनी है, बल्कि यह भी संकेत देता है कि आने वाले समय में आतंकवाद तकनीकी रूप से और अधिक उन्नत रूप ले सकता है। फिलहाल जांच एजेंसियां इस पूरे नेटवर्क की कड़ियों को जोड़ने में लगी हैं और यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि इस हमले के पीछे और कौन-कौन लोग शामिल हो सकते हैं।
अहमदाबाद में विकास की नई उड़ान: अमित शाह बोले- गुजरात को AI, सेमीकंडक्टर और सर्विस सेक्टर में बनाएंगे अग्रणी राज्य

नई दिल्ली । अहमदाबाद में विकास और तकनीक की दिशा में एक और बड़ा कदम उठाते हुए केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री ने दो महत्वपूर्ण परियोजनाओं का लोकार्पण किया, जिनमें ‘मिलियन माइंड्स टेक पार्क’ और ‘गणेश रियल एस्टेट मैनेजमेंट इंस्टीट्यूट’ शामिल हैं। इस अवसर पर उन्होंने स्पष्ट किया कि गुजरात अब केवल औद्योगिक उत्पादन का केंद्र नहीं रहेगा, बल्कि आने वाले वर्षों में यह राज्य तकनीक, सेवा क्षेत्र और नवाचार की वैश्विक पहचान बनने की ओर अग्रसर है। उनके अनुसार राज्य की विकास यात्रा अब एक नए चरण में प्रवेश कर रही है, जहां डिजिटल अर्थव्यवस्था, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, रोबोटिक्स और सेमीकंडक्टर जैसे क्षेत्रों में तेजी से विस्तार होगा। लोकार्पण कार्यक्रम में उन्होंने कहा कि गुजरात ने हमेशा देश के आर्थिक विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है और अब यही राज्य तकनीकी क्रांति का नेतृत्व भी करेगा। ‘मिलियन माइंड्स टेक पार्क’ को उन्होंने भविष्य की जरूरतों को ध्यान में रखकर तैयार की गई एक ऐसी परियोजना बताया, जो हजारों युवाओं को उच्च कौशल आधारित रोजगार उपलब्ध कराएगी। इस टेक पार्क में आधुनिक तकनीकी कंपनियों, अनुसंधान केंद्रों और स्टार्टअप्स के लिए एक मजबूत इकोसिस्टम विकसित किया जाएगा, जिससे नवाचार और रोजगार दोनों को बढ़ावा मिलेगा। इसके साथ ही ‘गणेश रियल एस्टेट मैनेजमेंट इंस्टीट्यूट’ को शहरी विकास और आधुनिक रियल एस्टेट प्रबंधन के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण पहल बताया गया। यह संस्थान आधुनिक शहरी नियोजन, तकनीक आधारित शिक्षा और वैश्विक मानकों के अनुरूप प्रशिक्षण देकर कुशल मानव संसाधन तैयार करेगा। इससे न केवल रियल एस्टेट सेक्टर में पारदर्शिता और पेशेवरता बढ़ेगी, बल्कि शहरी विकास योजनाओं को भी नई दिशा मिलेगी। कार्यक्रम के दौरान यह भी बताया गया कि अहमदाबाद-गिफ्ट सिटी-गांधीनगर कॉरिडोर में विकसित हो रही यह टेक सिटी हजारों करोड़ रुपये के निवेश और लाखों रोजगार के अवसर पैदा करने की क्षमता रखती है। इस परियोजना के तहत ग्रेड-ए ऑफिस स्पेस, आवासीय सुविधाएं और आधुनिक इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार किया जा रहा है, जो भारत को वैश्विक टेक्नोलॉजी और वित्तीय सेवाओं के नक्शे पर और मजबूत स्थिति में लाएगा। अमित शाह ने यह भी कहा कि गुजरात पहले से ही मैन्युफैक्चरिंग, पोर्ट डेवलपमेंट, ग्रीन एनर्जी और फार्मा सेक्टर में अग्रणी रहा है, और अब यह राज्य आईटी और नॉलेज-आधारित अर्थव्यवस्था की ओर तेजी से बढ़ रहा है। उन्होंने विश्वास जताया कि आने वाले वर्षों में गुजरात देश का प्रमुख टेक्नोलॉजी और सर्विस सेक्टर हब बनकर उभरेगा। कार्यक्रम में यह भी उल्लेख किया गया कि राज्य में विकसित हो रही सेमीकंडक्टर इकोसिस्टम और गिफ्ट सिटी जैसे प्रोजेक्ट्स भारत को वैश्विक निवेश का आकर्षण केंद्र बना रहे हैं। इस दौरान यह संदेश भी सामने आया कि ‘विकसित भारत 2047’ के लक्ष्य को हासिल करने में गुजरात की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण होगी और यह राज्य देश की विकास यात्रा का प्रमुख इंजन साबित होगा।
कभी अंटार्कटिका का हिस्सा था भारत! लाखों साल पुरानी चट्टानों ने खोला पृथ्वी के इतिहास का बड़ा राज

नई दिल्ली। वैज्ञानिकों ने एक नई रिसर्च में बड़ा खुलासा किया है कि आज का भारत कभी अंटार्कटिका से जुड़ा हुआ था। लाखों नहीं बल्कि करोड़ों साल पहले दोनों भूभाग एक विशाल पर्वत श्रृंखला और साझा भूवैज्ञानिक संरचना का हिस्सा थे। अब आंध्र प्रदेश की प्राचीन चट्टानों और पूर्वी अंटार्कटिका की चट्टानों के अध्ययन से इस रहस्य पर नई रोशनी पड़ी है। रिसर्च के मुताबिक आंध्र प्रदेश के विजयनगरम और सालूर इलाके में मिली चट्टानों की संरचना, उम्र और रासायनिक गुण पूर्वी अंटार्कटिका की चट्टानों से काफी मिलते-जुलते पाए गए हैं। वैज्ञानिकों का कहना है कि ये दोनों क्षेत्र कभी “रेनर-ईस्टर्न घाट ओरोजेन” नाम की एक ही भूवैज्ञानिक प्रणाली का हिस्सा थे। यह अध्ययन भारत, ऑस्ट्रेलिया और दक्षिण कोरिया के वैज्ञानिकों की संयुक्त टीम ने किया है। रिसर्च में खास तौर पर ग्रैनुलाइट नाम की मेटामॉर्फिक चट्टानों का अध्ययन किया गया, जो पृथ्वी के भीतर अत्यधिक गर्मी और दबाव में बनती हैं और अरबों साल पुराने भूवैज्ञानिक बदलावों की जानकारी अपने अंदर सुरक्षित रखती हैं। वैज्ञानिकों ने जिरकॉन, गार्नेट और मोनाजाइट जैसे खनिजों का आधुनिक तकनीक से परीक्षण किया। इनमें जिरकॉन को सबसे अहम माना गया क्योंकि यह अत्यधिक तापमान और दबाव में भी सुरक्षित रहता है। वैज्ञानिकों ने जिरकॉन के भीतर मौजूद रेडियोधर्मी तत्वों के अध्ययन से करोड़ों साल पुराने भूवैज्ञानिक घटनाक्रमों का पता लगाया। रिसर्च में सामने आया कि भारत और अंटार्कटिका दोनों क्षेत्रों में भूवैज्ञानिक विकास के तीन बड़े चरण एक जैसे रहे। पहला चरण करीब 1000 से 990 मिलियन वर्ष पहले हुआ, जब विशाल महाद्वीपीय टकराव से बड़ी पर्वत श्रृंखलाएं बनीं। दूसरा चरण 950 से 890 मिलियन वर्ष पहले का था, जिसमें चट्टानों में गहरे संरचनात्मक बदलाव आए। तीसरा चरण 570 से 540 मिलियन वर्ष पहले हुआ, जब खनिजों से भरपूर तरल पदार्थ चट्टानों की दरारों से गुजरे और खास रासायनिक निशान छोड़ गए। वैज्ञानिकों के अनुसार, बाद में सुपरकॉन्टिनेंट Gondwana टूटने लगा और करीब 130 से 150 मिलियन वर्ष पहले भारत और अंटार्कटिका अलग हो गए। भारतीय प्लेट उत्तर दिशा में एशिया की ओर बढ़ गई, जबकि अंटार्कटिका दक्षिण की ओर खिसक गया। आज दोनों भूभाग हजारों किलोमीटर दूर हैं, लेकिन करोड़ों साल पुरानी चट्टानें अब भी उनके साझा इतिहास की कहानी बयां कर रही हैं।
FBI डायरेक्टर काश पटेल पर लग्जरी ट्रिप का आरोप, गर्लफ्रेंड संग कंसर्ट के लिए इस्तेमाल किया सरकारी जेट!

नई दिल्ली। अमेरिका की प्रमुख जांच एजेंसी Federal Bureau of Investigation के डायरेक्टर काश पटेल एक बार फिर विवादों में घिर गए हैं। उन पर आरोप लगा है कि उन्होंने सरकारी संसाधनों का इस्तेमाल अपनी गर्लफ्रेंड को लग्जरी ट्रीटमेंट देने के लिए किया। रिपोर्ट्स के मुताबिक काश पटेल ने अपनी निजी यात्रा के दौरान FBI के जेट विमान का इस्तेमाल किया और हजारों डॉलर के आलीशान सुइट में म्यूजिक कंसर्ट का आनंद लिया। रिपोर्ट के अनुसार, 10 मई 2025 को काश पटेल अपनी 27 वर्षीय गर्लफ्रेंड एलेक्सिस विलकिंस के साथ FBI के गल्फस्ट्रीम V जेट से वॉशिंगटन से फिलाडेल्फिया पहुंचे थे। वहां दोनों ने मशहूर कंट्री सिंगर्स George Strait और Chris Stapleton का लाइव म्यूजिक कंसर्ट देखा। बताया जा रहा है कि इस कार्यक्रम के लिए दोनों ने करीब 35 हजार से 50 हजार डॉलर कीमत वाले प्राइवेट लग्जरी सुइट का इस्तेमाल किया। इतना ही नहीं, FBI फ्लाइट क्रू और सुरक्षा कर्मियों को देर रात तक ड्यूटी पर इंतजार करना पड़ा, जिसके लिए उन्हें ओवरटाइम भुगतान भी किया गया। मामले ने तब और तूल पकड़ लिया जब यह सवाल उठने लगे कि क्या सरकारी संसाधनों का निजी इस्तेमाल नियमों के खिलाफ था। हालांकि काश पटेल ने इन आरोपों पर सार्वजनिक रूप से कोई प्रतिक्रिया नहीं दी है। यह पहला मौका नहीं है जब काश पटेल विवादों में आए हों। इससे पहले भी उनकी यात्राओं और आधिकारिक कार्यक्रमों में निजी लोगों की मौजूदगी को लेकर सवाल उठ चुके हैं। हाल ही में पर्ल हार्बर मेमोरियल के पास वीआईपी टूर को लेकर भी उनकी आलोचना हुई थी। हालांकि FBI के प्रवक्ता बेन विलियमसन ने इन आरोपों का बचाव करते हुए कहा कि यात्रा को गलत तरीके से पेश किया जा रहा है और यह एक आधिकारिक दौरा था। बावजूद इसके, अमेरिकी मीडिया और राजनीतिक गलियारों में इस पूरे मामले को लेकर बहस तेज हो गई है।