विश्व उच्च रक्तचाप दिवस (World Hypertension Day): क्यों मनाया जाता है, इतिहास, महत्व और पूरी जानकारी

हर साल 17 मई को विश्व उच्च रक्तचाप दिवस (World Hypertension Day) मनाया जाता है। इस दिन का उद्देश्य लोगों को उच्च रक्तचाप यानी ब्लड प्रेशर (BP) के बारे में जागरूक करना है, क्योंकि यह एक “साइलेंट किलर” बीमारी है जो बिना लक्षण दिखाए दिल, किडनी और दिमाग को गंभीर नुकसान पहुंचा सकती है। विश्व उच्च रक्तचाप दिवस क्यों मनाया जाता है?इस दिन को मनाने का मुख्य उद्देश्य लोगों को यह समझाना है कि: उच्च रक्तचाप एक गंभीर लेकिन नियंत्रित की जा सकने वाली बीमारी है समय पर जांच और इलाज से हार्ट अटैक और स्ट्रोक का खतरा कम किया जा सकता है लोग अपनी जीवनशैली में सुधार करें जैसे सही खान-पान, व्यायाम और तनाव कम करना नियमित रूप से ब्लड प्रेशर की जांच कराना जरूरी है उच्च रक्तचाप क्या है?जब किसी व्यक्ति की धमनियों (arteries) में खून का दबाव सामान्य से अधिक हो जाता है, तो उसे हाई ब्लड प्रेशर या हाइपरटेंशन कहा जाता है।सामान्य BP: लगभग 120/80 mmHgहाई BP: 140/90 mmHg या उससे अधिकयह बीमारी धीरे-धीरे शरीर को नुकसान पहुंचाती है और अक्सर लोगों को पता भी नहीं चलता। विश्व उच्च रक्तचाप दिवस की शुरुआत कब और किसने की?इस दिवस की शुरुआत World Hypertension League (WHL) ने की थीपहली बार इसे 2005 में मनाया गया थाबाद में इसे वैश्विक स्तर पर मान्यता मिलीइसका उद्देश्य दुनिया भर में हाई BP के प्रति जागरूकता फैलाना था इस दिन का महत्व क्या है?विश्व उच्च रक्तचाप दिवस का महत्व बहुत बड़ा है क्योंकि: दुनिया में हर 3 में से 1 व्यक्ति उच्च रक्तचाप से प्रभावित है यह हार्ट अटैक और स्ट्रोक का प्रमुख कारण है कई लोग इसकी जांच ही नहीं कराते समय पर पहचान से जीवन बचाया जा सकता है इस दिन अस्पतालों, स्वास्थ्य संगठनों और सरकारों द्वारा जागरूकता अभियान चलाए जाते हैं। उच्च रक्तचाप के कारणज्यादा नमक का सेवन तनाव और चिंता मोटापा शारीरिक गतिविधि की कमी धूम्रपान और शराब अनियमित जीवनशैली लक्षण (Symptoms)अक्सर कोई स्पष्ट लक्षण नहीं होते, लेकिन कुछ मामलों में: सिरदर्द चक्कर आना सांस फूलना छाती में दर्द नजर धुंधली होना बचाव और नियंत्रण कैसे करें?नमक कम खाएं रोजाना व्यायाम करें (कम से कम 30 मिनट) वजन नियंत्रित रखें तनाव कम करें (योग/ध्यान) धूम्रपान और शराब से बचें नियमित BP जांच कराएंविश्व उच्च रक्तचाप दिवस हमें यह याद दिलाता है कि हाई ब्लड प्रेशर एक गंभीर लेकिन नियंत्रित की जा सकने वाली बीमारी है। सही जानकारी, समय पर जांच और स्वस्थ जीवनशैली अपनाकर हम इस “साइलेंट किलर” से बच सकते हैं और एक स्वस्थ जीवन जी सकते हैं। -विश्व उच्च रक्तचाप दिवस
बार-बार थकान महसूस हो रही है? गर्मी में शरीर दे रहा है ये चेतावनी संकेत

नई दिल्ली । भीषण गर्मी के बीच कई लोग लगातार थकान, कमजोरी और सांस फूलने जैसी समस्याओं से परेशान हो रहे हैं। अक्सर इसे मौसम का असर मानकर नजरअंदाज कर दिया जाता है, लेकिन डॉक्टरों के मुताबिक यह केवल गर्मी की वजह नहीं, बल्कि शरीर में छिपी किसी गंभीर समस्या का संकेत भी हो सकता है। डिहाइड्रेशन बन रहा सबसे बड़ा कारणगर्मियों में पसीने के जरिए शरीर से पानी और जरूरी इलेक्ट्रोलाइट्स तेजी से बाहर निकल जाते हैं। अगर समय पर पानी न पिया जाए तो डिहाइड्रेशन हो सकता है, जिससे सिरदर्द, चक्कर आना, कमजोरी और लगातार थकान महसूस होने लगती है। विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि प्यास लगने का इंतजार न करें, बल्कि थोड़ी-थोड़ी देर में पानी, नारियल पानी या नींबू पानी लेते रहें। खून की कमी यानी एनीमिया भी वजहलगातार थकान और कमजोरी का एक बड़ा कारण शरीर में आयरन की कमी यानी एनीमिया भी हो सकता है। खासकर महिलाओं में यह समस्या ज्यादा देखी जाती है। इसमें ऑक्सीजन शरीर तक सही तरीके से नहीं पहुंच पाती, जिससे जल्दी थकान, चक्कर आना, चेहरे पर पीलापन और हाथ-पैर ठंडे रहने जैसी दिक्कतें हो सकती हैं। डायबिटीज और थायरॉयड का संकेत भी संभडॉक्टरों के अनुसार अगर थकान के साथ ज्यादा प्यास लगना, बार-बार पेशाब आना या अचानक वजन कम होना जैसे लक्षण दिखें, तो यह डायबिटीज का संकेत हो सकता है। वहीं थायरॉयड की समस्या में शरीर सुस्त रहता है और व्यक्ति हर समय थका हुआ महसूस करता है। नींद और तनाव भी बढ़ा रहे समस्यालगातार मोबाइल का इस्तेमाल, देर रात तक जागना और 6–7 घंटे से कम नींद लेना भी शरीर की ऊर्जा को कम करता है। इसके साथ तनाव और मानसिक दबाव शरीर को अंदर से कमजोर बना देते हैं, जिससे थकान और बढ़ जाती है। गलत खानपान भी बड़ी वजहगर्मियों में जंक फूड, ज्यादा तला-भुना खाना और मीठे ड्रिंक्स शरीर को अस्थायी राहत तो देते हैं, लेकिन पोषण नहीं देते। इसके बजाय हल्का, ताजा और पौष्टिक आहार जैसे फल, दही, सलाद और घर का खाना ज्यादा फायदेमंद होता है। कब हो जाएं सतर्क?अगर कई दिनों तक लगातार थकान बनी रहे, रोजमर्रा के काम करना मुश्किल लगे या कमजोरी बढ़ती जाए, तो इसे हल्के में न लें और डॉक्टर से जांच जरूर करवाएं। समय पर जांच और सही जीवनशैली अपनाकर कई गंभीर बीमारियों से बचा जा सकता है।
कैंसर ट्रीटमेंट में नई उम्मीद? भारत में लॉन्च हुई एडवांस थेरेपी

नई दिल्ली। भारत में कैंसर उपचार के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण कदम के तहत नई इम्यूनोथेरेपी दवा लॉन्च की गई है, जिसे आम तौर पर “Cancer Shot” कहा जा रहा है। यह दवा खासतौर पर Non-Small Cell Lung Cancer के मरीजों के लिए विकसित की गई है, जो देश में फेफड़ों के कैंसर के सबसे आम प्रकारों में से एक है। क्या है यह नई इम्यूनोथेरेपी?यह दवा इम्यून सिस्टम को मजबूत करके कैंसर कोशिकाओं से लड़ने में मदद करती है। इसका मुख्य टारगेट PD-L1 प्रोटीन होता है, जो कैंसर सेल्स को शरीर की इम्यून सिस्टम से बचने में मदद करता है। नई दवा (एटेजोलिज़ुमैब आधारित इम्यूनोथेरेपी) इस प्रोटीन को ब्लॉक करके शरीर की T-Cells को दोबारा सक्रिय करती है, जिससे वे कैंसर कोशिकाओं को पहचानकर नष्ट कर सकें। 7 मिनट में इलाज कैसे संभव हुआपहले यह दवा IV (इंट्रावेनस) इन्फ्यूजन के जरिए दी जाती थी, जिसमें कई घंटे लगते थे और मरीज को अस्पताल में लंबे समय तक रहना पड़ता था। अब नई Subcutaneous (SC) इंजेक्शन तकनीक से:दवा सिर्फ 7 मिनट में दी जा सकती हैजांघ या त्वचा के नीचे इंजेक्शन लगाया जाता हैअस्पताल में समय काफी कम लगता हैएक साथ अधिक मरीजों का इलाज संभव हो पाता हैकिन मरीजों को मिलेगा फायदा? डॉक्टरों के अनुसार यह इलाज सभी के लिए नहीं है। यह सिर्फ उन्हीं मरीजों को दिया जाता है जिनके कैंसर सेल्स में PD-L1 प्रोटीन का स्तर अधिक होता है। औसतन NSCLC मरीजों में लगभग 50% लोग इस थेरेपी के लिए उपयुक्त पाए जाते हैं। कीमत कितनी है?भारत में इस नई इम्यूनोथेरेपी की कीमत काफी अधिक है:एक डोज की कीमत: लगभग ₹3.7 लाखआमतौर पर जरूरी डोज: 6हालांकि, कंपनियों द्वारा पेशेंट असिस्टेंस प्रोग्राम और सरकारी हेल्थ स्कीम्स के तहत लागत को कुछ हद तक कम करने की सुविधा दी जा रही है। क्या है खास फायदा?इलाज का समय कई घंटों से घटकर 7 मिनट हो गयाअस्पताल पर दबाव कममरीजों को कम असुविधाइलाज की प्रक्रिया ज्यादा आसान और तेजवैश्विक अध्ययन बताते हैं कि अधिकतर मरीज पारंपरिक IV इन्फ्यूजन की बजाय इस नई SC तकनीक को अधिक पसंद करते हैं। “Cancer Shot” इम्यूनोथेरेपी कैंसर इलाज में तकनीकी बदलाव का एक बड़ा उदाहरण है। हालांकि इसकी कीमत अभी भी काफी अधिक है, लेकिन यह फेफड़ों के कैंसर के मरीजों के लिए तेज और सुविधाजनक इलाज का विकल्प बनकर सामने आई है।
Ravivar Ke Upay: सूर्यदेव की कृपा पाने के आसान और असरदार उपाय

नई दिल्ली। हिंदू धर्म में रविवार का दिन Surya Dev को समर्पित माना जाता है। मान्यता है कि इस दिन किए गए कुछ विशेष उपाय जीवन में सकारात्मक ऊर्जा बढ़ाते हैं और दरिद्रता दूर करने में सहायक होते हैं। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, सूर्य देव शक्ति, आत्मविश्वास और सम्मान के कारक माने जाते हैं। इसलिए रविवार की सुबह कुछ सरल उपाय करके उनका आशीर्वाद प्राप्त किया जा सकता है। रविवार के 5 चमत्कारी उपाय- 1. सूर्य नमस्कार करेंसुबह उठकर सूर्य नमस्कार करने से शरीर स्वस्थ रहता है और सूर्य देव की कृपा मिलती है। इसे ऊर्जा और आत्मविश्वास बढ़ाने वाला उपाय माना जाता है। 2. सूर्य को अर्घ्य देंतांबे के लोटे में जल भरकर उसमें रोली, लाल फूल और चावल मिलाकर सूर्य को अर्घ्य देना शुभ माना जाता है। साथ ही इस मंत्र का जाप करें:ॐ सूर्याय नमःॐ आदित्याय नमःॐ वासुदेवाय नमः 3. दान करेंरविवार के दिन गुड़, चावल, तांबा या लाल वस्त्र का दान करने से जीवन में सकारात्मक परिणाम मिलते हैं और आर्थिक बाधाएं कम होती हैं। 4. लाल रंग का उपयोग करेंइस दिन लाल वस्त्र पहनना शुभ माना जाता है। इससे आत्मबल बढ़ता है और सूर्य देव की कृपा प्राप्त होती है। 5. दीपक जलाएंघर के मुख्य द्वार पर दीपक जलाने से नकारात्मक ऊर्जा दूर होती है और घर में सुख-समृद्धि का वास होता है। रविवार के ये सरल उपाय न केवल धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण माने जाते हैं, बल्कि इन्हें आत्मविश्वास और सकारात्मक ऊर्जा बढ़ाने का प्रतीक भी माना जाता है।
PCOS का नाम बदला: अब PMOS कहलाएगा, AIIMS डॉक्टर ने बताया कारण

नई दिल्ली। महिलाओं में तेजी से बढ़ रही हार्मोनल और मेटाबॉलिक समस्या Polycystic Ovary Syndrome को लेकर मेडिकल जगत में बड़ा बदलाव किया गया है। अब इस स्थिति को “PMOS” नाम से भी जाना जाएगा। विशेषज्ञों के अनुसार यह बदलाव इसलिए जरूरी था क्योंकि पुराना नाम केवल ओवरी (अंडाशय) तक सीमित संकेत देता था, जबकि यह बीमारी पूरे शरीर को प्रभावित करती है। AIIMS के डॉक्टरों और अंतरराष्ट्रीय एक्सपर्ट्स का कहना है कि PCOS नाम कई बार भ्रम पैदा करता था। कई महिलाओं में अल्ट्रासाउंड में “सिस्ट” दिखाई नहीं देते थे, फिर भी उन्हें यह समस्या होती थी। ऐसे में सही पहचान और इलाज में देरी हो जाती थी। PCOS/PMOS क्या है?इस स्थिति में महिलाओं के शरीर में एंड्रोजन हार्मोन का स्तर बढ़ जाता है। इसके कारण कई लक्षण दिखाई देते हैं जैसे:अनियमित पीरियड्सचेहरे पर बाल बढ़नामुंहासे और त्वचा संबंधी समस्यातेजी से वजन बढ़नागर्भधारण में परेशानीडॉक्टरों के अनुसार अल्ट्रासाउंड में जो “सिस्ट” दिखते हैं, वे असल में सिस्ट नहीं होते बल्कि अधूरे विकसित फॉलिकल्स होते हैं। नाम बदलने की जरूरत क्यों पड़ी?विशेषज्ञों के मुताबिक “PCOS” शब्द बीमारी की पूरी गंभीरता को नहीं दर्शाता था। यह केवल ओवरी से जुड़ी समस्या जैसा लगता था, जबकि यह एक हार्मोनल, मेटाबॉलिक और मानसिक स्वास्थ्य से जुड़ी स्थिति है।नए नाम “PMOS” का उद्देश्य यह समझाना है कि यह बीमारी सिर्फ प्रजनन अंगों तक सीमित नहीं है, बल्कि पूरे शरीर को प्रभावित करती है। शरीर पर असइस समस्या के कारण महिलाओं में कई गंभीर जोखिम बढ़ सकते हैं:टाइप-2 डायबिटीजमोटापा और फैटी लीवरहाई ब्लड प्रेशरदिल की बीमारियों का खतराबांझपन और गर्भधारण में कठिनाईडिप्रेशन और एंग्जायटीडॉक्टरों की राय विशेषज्ञों का कहना है कि नाम बदलने से इलाज की प्रक्रिया तुरंत नहीं बदलेगी, लेकिन इससे मरीजों को बीमारी को बेहतर समझने में मदद मिलेगी। अब डॉक्टर सिर्फ पीरियड्स ही नहीं, बल्कि ब्लड शुगर, कोलेस्ट्रॉल और मेटाबॉलिक हेल्थ पर भी अधिक ध्यान देंगे। PCOS का नया नाम PMOS मेडिकल समझ को और व्यापक बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। इसका उद्देश्य बीमारी को केवल “ओवरी की समस्या” नहीं बल्कि एक पूरे शरीर को प्रभावित करने वाली स्थिति के रूप में पहचान देना है।
भारी बारिश के बीच चारधाम यात्रा? ये जरूरी सावधानियां रखें ध्यान में

नई दिल्ली । उत्तराखंड में चल रही बारिश और ओलावृष्टि के बीच चार धाम यात्रा पर जाने वाले श्रद्धालुओं के लिए प्रशासन ने विशेष सतर्कता बरतने की सलाह दी है। केदारनाथ, बद्रीनाथ, गंगोत्री और यमुनोत्री की यह पवित्र यात्रा जितनी आस्था से जुड़ी है, उतनी ही कठिन और जोखिमभरी भी हो सकती है खासकर खराब मौसम में। मौसम की जानकारी सबसे जरूरीविशेषज्ञों के अनुसार यात्रा शुरू करने से पहले मौसम का अपडेट लगातार देखते रहना चाहिए। पहाड़ी क्षेत्रों में मौसम कभी भी अचानक बदल सकता है धूप के बाद तेज बारिश, ओलावृष्टि या धुंध जैसी स्थिति बन सकती है। यदि किसी क्षेत्र में रेड या ऑरेंज अलर्ट जारी हो तो वहां यात्रा टालना ही सुरक्षित विकल्प है। यात्रा की योजना में रखें लचीलापनचार धाम यात्रा के दौरान समय का बहुत सख्त शेड्यूल न रखें। बारिश और भूस्खलन के कारण रास्ते कई घंटों या कभी-कभी पूरे दिन के लिए बंद हो सकते हैं। इसलिए अतिरिक्त 1–2 दिन का समय रखना और होटल बुकिंग में लचीलापन रखना समझदारी मानी जाती है। सुबह की यात्रा सबसे सुरक्षितमौसम विशेषज्ञों के मुताबिक पहाड़ों में सुबह का समय यात्रा के लिए सबसे बेहतर होता है। शाम होते-होते धुंध और बारिश बढ़ने लगती है, जिससे विजिबिलिटी कम हो जाती है और हादसों का खतरा बढ़ जाता है। इसलिए कोशिश करें कि लंबा सफर सुबह जल्दी शुरू कर शाम से पहले पूरा कर लिया जाए। जरूरी सामान साथ रखेंयात्रा के दौरान हल्का लेकिन जरूरी सामान रखना बेहद जरूरी है। इसमें रेनकोट, वाटरप्रूफ जैकेट, अतिरिक्त मोजे और मजबूत ग्रिप वाले ट्रैकिंग शूज शामिल होने चाहिए। खासकर केदारनाथ और यमुनोत्री जैसे ट्रैक बारिश में बेहद फिसलन भरे हो जाते हैं। स्वास्थ्य का रखें विशेष ध्यानबुजुर्गों, बच्चों और पहले से बीमार लोगों के लिए यह यात्रा और भी चुनौतीपूर्ण हो सकती है। ठंड, ऊंचाई और बारिश की वजह से सांस लेने में दिक्कत, थकान और बुखार जैसी समस्याएं हो सकती हैं। अस्थमा, हार्ट या ब्लड प्रेशर के मरीजों को यात्रा से पहले डॉक्टर की सलाह जरूर लेनी चाहिए। सावधानी ही सुरक्षा हैविशेषज्ञ मानते हैं कि चार धाम यात्रा को सफल बनाने के लिए तैयारी और सतर्कता सबसे जरूरी है। सही योजना, मौसम की जानकारी और जरूरी सावधानियों के साथ यह यात्रा न सिर्फ सुरक्षित बल्कि यादगार भी बन सकती है।
मिलावटी हल्दी से बचें: ये आसान ट्रिक बताएगी शुद्धता का सच

नई दिल्ली । भारतीय रसोई में हल्दी सिर्फ एक मसाला नहीं, बल्कि सेहत और औषधीय गुणों का अहम हिस्सा मानी जाती है। लेकिन आजकल बाजार में मिलावट वाली हल्दी की समस्या बढ़ती जा रही है, जो लंबे समय में शरीर के लिए नुकसानदायक साबित हो सकती है। ऐसे में हल्दी की शुद्धता जांचना बेहद जरूरी हो जाता है। विशेषज्ञों के मुताबिक कई बार हल्दी में चमकदार पीला रंग देने के लिए मेटानिल येलो, लेड क्रोमेट जैसे केमिकल्स मिलाए जाते हैं। इसके अलावा चॉक पाउडर या घटिया क्वालिटी के कच्चे पदार्थों की मिलावट भी की जाती है, जिससे इसकी शुद्धता पर असर पड़ता है। पानी से करें आसान टेस्टघर पर हल्दी की शुद्धता जांचने का सबसे आसान तरीका है वॉटर टेस्ट। इसके लिए एक गिलास गुनगुने पानी में एक चम्मच हल्दी डालकर कुछ देर छोड़ दें। अगर हल्दी नीचे बैठ जाए और पानी हल्का पीला रहे, तो हल्दी को शुद्ध माना जाता है। लेकिन अगर पानी ज्यादा गहरा पीला हो जाए या हल्दी पूरी तरह घुलने लगे, तो यह मिलावट का संकेत हो सकता है। हथेली से भी पता चलेगा सचएक और आसान तरीका है हथेली टेस्ट। एक चुटकी हल्दी हथेली पर रखकर उसे अंगूठे से 10–20 सेकंड तक रगड़ें। असली हल्दी हल्का पीला दाग छोड़ती है, जबकि मिलावटी हल्दी का रंग अक्सर अलग या फीका होता है। मिलावटी हल्दी के नुकसानविशेषज्ञों के अनुसार मिलावटी हल्दी के सेवन से पेट दर्द, अपच, मतली और फूड पॉइजनिंग जैसी समस्याएं हो सकती हैं। कुछ मामलों में लंबे समय तक इसका सेवन लिवर और पाचन तंत्र पर भी असर डाल सकता है। खरीदते समय रखें ये सावधानीहल्दी खरीदते समय हमेशा भरोसेमंद ब्रांड चुनें और ज्यादा चमकदार पीले रंग पर भरोसा न करें। समय-समय पर घर में इसकी जांच करना भी सुरक्षित माना जाता है। विशेषज्ञों का कहना है कि रोजाना इस्तेमाल होने वाले मसालों की शुद्धता पर ध्यान देना जरूरी है, क्योंकि छोटी-सी मिलावट भी लंबे समय में बड़ी स्वास्थ्य समस्या का कारण बन सकती है।
बढ़ती परेशानियों के बीच खाने पर असर, हर निवाले से पहले सोचने को मजबूर लोग

नई दिल्ली । आजकल कई लोग ऐसी परेशानी से जूझ रहे हैं, जिसमें खाना खाते ही तुरंत वॉशरूम जाने की जरूरत महसूस होने लगती है। बाहर खाना हो, ऑफिस में लंच करना हो या किसी फंक्शन में बैठना—हर बार मन में यही डर बना रहता है कि कहीं अचानक टॉयलेट न जाना पड़ जाए। डॉक्टरों के मुताबिक यह समस्या मामूली लग सकती है, लेकिन लंबे समय तक बनी रहे तो बड़ी बीमारी का संकेत भी हो सकती है। विशेषज्ञ बताते हैं कि इस स्थिति को मेडिकल भाषा में गैस्ट्रोकोलिक रिफ्लेक्स (Gastrocolic Reflex) कहा जाता है। यह शरीर की एक प्राकृतिक प्रक्रिया है, जिसमें खाना पेट में पहुंचते ही आंतें सक्रिय हो जाती हैं। हालांकि अगर यह प्रतिक्रिया जरूरत से ज्यादा होने लगे और हर बार दस्त, पेट दर्द या गैस की समस्या पैदा करे, तो इसे नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। डॉक्टरों के अनुसार, कई बार पेट ठीक से साफ न होने, खराब खानपान, ज्यादा मसालेदार भोजन, तनाव या कमजोर पाचन तंत्र के कारण यह समस्या बढ़ जाती है। खाना खाते ही पेट में मरोड़, गैस और टॉयलेट जाने की तीव्र इच्छा होने लगती है। लंबे समय तक ऐसा होना आंतों में संक्रमण या पाचन संबंधी बीमारी की तरफ इशारा कर सकता है। विशेषज्ञ यह भी मानते हैं कि अगर यह समस्या लगातार बनी रहे, तो लिवर और आंतों की जांच करवाना जरूरी हो जाता है। समय रहते इलाज न कराने पर शरीर में पोषक तत्वों की कमी, कमजोरी और गंभीर पाचन समस्याएं हो सकती हैं। इस परेशानी से जुड़ी कुछ प्रमुख बीमारियां भी सामने आती हैं। इनमें इरिटेबल बॉवेल सिंड्रोम (IBS) प्रमुख है, जिसमें खाना खाते ही पेट दर्द और गैस बनने लगती है। वहीं कुछ लोगों को दूध या डेयरी उत्पादों से एलर्जी होती है, जिसे लैक्टोज इंटॉलरेंस कहा जाता है। ऐसे लोगों को दूध पीते ही दस्त या पेट खराब होने लगता है। इसके अलावा सीलिएक डिजीज में गेहूं या ग्लूटेन से बनी चीजें खाने पर आंतें प्रभावित होती हैं और बार-बार दस्त की समस्या हो सकती है। डॉक्टरों की सलाह है कि अगर खाना खाते ही बार-बार टॉयलेट जाना पड़ रहा है, पेट में लगातार दर्द रहता है, वजन कम हो रहा है या कमजोरी महसूस हो रही है, तो तुरंत विशेषज्ञ से जांच करवानी चाहिए। खानपान में सुधार, पर्याप्त पानी, फाइबर युक्त भोजन और तनाव कम करके इस समस्या को काफी हद तक नियंत्रित किया जा सकता है।
प्रेग्नेंसी डायबिटीज को हल्के में न लें, बाद में बढ़ सकता है गंभीर बीमारियों का रिस्क

नई दिल्ली । गर्भावस्था के दौरान होने वाली जेस्टेशनल डायबिटीज को अक्सर महिलाएं अस्थायी समस्या मानकर भूल जाती हैं, लेकिन विशेषज्ञों के मुताबिक इसका असर डिलीवरी के बाद भी लंबे समय तक शरीर पर बना रह सकता है। डॉक्टरों का कहना है कि प्रेग्नेंसी के बाद ब्लड शुगर भले ही सामान्य हो जाए, लेकिन शरीर में हुए हार्मोनल और मेटाबॉलिक बदलाव भविष्य में थायरॉयड, हार्ट डिजीज और टाइप-2 डायबिटीज जैसी गंभीर बीमारियों का खतरा बढ़ा सकते हैं। विशेषज्ञों के अनुसार, मां बनने के बाद ज्यादातर महिलाओं का पूरा ध्यान बच्चे की देखभाल में चला जाता है। ऐसे में लगातार थकान, वजन बढ़ना, बाल झड़ना, कमजोरी, मूड स्विंग्स, डिप्रेशन या ठंड ज्यादा लगने जैसे लक्षणों को सामान्य मानकर नजरअंदाज कर दिया जाता है। जबकि यही संकेत थायरॉयड डिसफंक्शन की ओर इशारा कर सकते हैं। डॉक्टरों का कहना है कि जेस्टेशनल डायबिटीज के दौरान शरीर में इंसुलिन रेजिस्टेंस बढ़ जाता है, जिसका असर थायरॉयड ग्लैंड पर भी पड़ सकता है। थायरॉयड शरीर के मेटाबॉलिज्म, हार्ट रेट, बॉडी टेम्परेचर और एनर्जी लेवल को नियंत्रित करता है। ऐसे में इसमें गड़बड़ी होने पर शरीर धीरे-धीरे कई समस्याओं की चपेट में आने लगता है। विशेषज्ञ बताते हैं कि थायरॉयड की परेशानी अचानक नहीं दिखती, बल्कि इसके लक्षण धीरे-धीरे सामने आते हैं। बिना वजह वजन बढ़ना, ड्राई स्किन, ध्यान लगाने में परेशानी, एंग्जायटी, पीरियड्स अनियमित होना और लगातार कमजोरी इसके शुरुआती संकेत हो सकते हैं। कई महिलाएं इन्हें पोस्ट-प्रेग्नेंसी बदलाव समझकर अनदेखा कर देती हैं, जिससे समस्या गंभीर हो सकती है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों की सलाह है कि जिन महिलाओं को प्रेग्नेंसी के दौरान डायबिटीज हुई हो, उन्हें डिलीवरी के बाद भी नियमित हेल्थ चेकअप करवाते रहना चाहिए। खासतौर पर अगर परिवार में डायबिटीज या थायरॉयड की हिस्ट्री हो तो अतिरिक्त सावधानी जरूरी है। डॉक्टरों का मानना है कि संतुलित खानपान, नियमित व्यायाम, पर्याप्त नींद और समय-समय पर ब्लड शुगर व थायरॉयड टेस्ट करवाकर भविष्य में होने वाली गंभीर बीमारियों के खतरे को काफी हद तक कम किया जा सकता है। क्योंकि मां की सेहत सिर्फ गर्भावस्था तक सीमित नहीं होती, बल्कि उसका असर लंबे समय तक पूरे शरीर पर दिखाई देता है।
Aaj Ka Rashifal 17 मई 2026: सभी राशियों के लिए कैसा रहेगा दिन?

नई दिल्ली। वैदिक ज्योतिष के अनुसार 17 मई 2026 का दिन ग्रह-नक्षत्रों की स्थिति के आधार पर कई राशियों के लिए महत्वपूर्ण रहने वाला है। इस दिन कुछ लोगों को करियर और आर्थिक मामलों में लाभ मिलेगा, जबकि कुछ को धैर्य और सावधानी से आगे बढ़ने की सलाह दी गई है। मेष राशि मेष राशि के जातकों के लिए दिन सामान्य रूप से सकारात्मक रहेगा। पुराने रुके हुए कार्य पूरे हो सकते हैं और कार्यस्थल पर मेहनत का अच्छा परिणाम मिलेगा। घर का माहौल शांत और सहयोगी रहेगा। आर्थिक स्थिति में धीरे-धीरे सुधार देखने को मिलेगा। वृषभ राशि वृषभ राशि वालों के खर्चों में वृद्धि हो सकती है। घरेलू जरूरतों पर अधिक धन खर्च होने की संभावना है। हालांकि नौकरी और व्यापार में अधिकारियों का सहयोग मिलेगा और लाभ के योग भी बन रहे हैं। मिथुन राशि मिथुन राशि के लिए दिन राहत देने वाला रहेगा। पुराने अटके हुए कार्य पूरे हो सकते हैं। परिवार का सहयोग मिलेगा और नौकरी-व्यापार में प्रगति के संकेत हैं। थोड़ी थकान महसूस हो सकती है। कर्क राशि कर्क राशि के जातकों के लिए दिन अनुकूल रहेगा। कार्यस्थल पर नई जिम्मेदारियां मिल सकती हैं। पारिवारिक जीवन में खुशहाली रहेगी और मानसिक तनाव कम होगा। सिंह राशि सिंह राशि वालों को जल्दबाजी से बचना होगा। कार्यभार अधिक रह सकता है और आर्थिक मामलों में सतर्क रहने की जरूरत है। पारिवारिक रिश्तों में संयम रखना जरूरी होगा। कन्या राशि कन्या राशि के लिए दिन शुभ संकेत दे रहा है। मेहनत का पूरा फल मिलेगा और आर्थिक स्थिति मजबूत होगी। नौकरी और व्यापार में नए अवसर मिल सकते हैं। तुला राशि तुला राशि वालों के लिए दिन प्रगति लेकर आएगा। रुके हुए कार्य पूरे हो सकते हैं। करियर में आगे बढ़ने के अवसर मिलेंगे और पारिवारिक सहयोग बना रहेगा। वृश्चिक राशि वृश्चिक राशि के जातकों को धैर्य रखने की सलाह दी गई है। कार्यों में देरी हो सकती है और आर्थिक मामलों में सोच-समझकर निर्णय लेना होगा। धनु राशि धनु राशि वालों के लिए दिन अच्छा रहेगा। रुका हुआ धन वापस मिल सकता है और नौकरी-व्यापार में लाभ के संकेत हैं। मानसिक तनाव कम होगा। मकर राशि मकर राशि के लिए दिन सामान्य रहेगा। कार्यों में व्यस्तता रहेगी लेकिन धीरे-धीरे परिणाम मिलेंगे। खर्चों पर नियंत्रण जरूरी होगा। कुंभ राशि कुंभ राशि के लिए समय बेहतर हो रहा है। मेहनत का फल मिलेगा और आर्थिक स्थिति मजबूत होगी। परिवार में खुशी का माहौल रहेगा। मीन राशि मीन राशि वालों को धैर्य रखने की जरूरत है। कार्यों में देरी हो सकती है और नौकरी में दबाव महसूस हो सकता है। खर्चों और रिश्तों में सावधानी बरतें।